Ajay v. State of Uttar Pradesh

Delhi High Court · 15 Feb 2023
B. R. Gavai; Divkar Namthe
Criminal Appeal Nos. 598-600 of 2013; Criminal Appeal No. 337 of 2014; Criminal Appeal Nos. 745-748 of 2015
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the convictions and life sentences of accused for multiple murders and attempt to murder, affirming the reliability of the injured eyewitness and dismissing appeals challenging the trial and sentence modifications.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दाण्डि क अपीलीय क्षेत्राति कार संख्या 598-600 वर्ष' 2013
अजय उर्फ
' अज्जू इत्यादिद ... अपीलार्थी5गण
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य ... प्रत्यर्थी5

े सार्थी
दाण्डि क अपील संख्या 337 वर्ष' 2014
और सार्थी में
दाण्डि क अपील संख्या 745-748 वर्ष' 2015
दिन ण' य
न्यायमूर्ति दिवक्रम नार्थी
ये आपराति क अपील संख्यायें 598-600/2013 आरोपी क्रमशः अजय
उर्फ
' अज्जू, ब्रज पाल और रदिव द्वारा दायर की गई हैं।जैसा दिक दोनों पक्षों क
े दिवद्वान
अति वक्ता ने ब ाया, अजय उर्फ
' अज्जू की ब से मृत्यु हो गई है। दनुसार
दाण्डि क अपील संख्या 598/2013 समाप्त हो गई है। अभिभयुक्त मुक
े श द्वारा
दाण्डि क अपील संख्या 337/2014 दायर की गई है।
JUDGMENT

2. उपरोक्त अपीलें उच्च न्यायालय क े दिनण'य और आदेश 22.02.2012 दिदनांदिक की सत्य ा पर सवाल उठा ी हैं, जिजसक े ह दिवचारण न्यायालय द्वारा भार ीय उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" दं संदिह ा की ारा 302/149 और अन्य संबद्ध अपरा ों, आईपीसी1 और शस्त्र अति दिनयम, 1959 दोनों क े ह दोर्षजिसतिद्ध दज' की गई र्थीी, की पुदिj की गई है। हालांदिक, दिवचारण न्यायालय द्वारा सुनाई गई मौ की सज़ा को सभी आरोदिपयों क े लिलए आजीवन कारावास में बदल दिदया गया है। शेर्ष सजा बरकरार रखी गई है।

3. उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा आपराति क अपील संख्या 745-748/2015 को सभी चार प्रत्यर्थिर्थीयों की सजा बढ़ाने और उन्हें मौ की सजा देने क े लिलए उच्च न्यायालय क े उपयु'क्त सामान्य दिनण'य क े दिवरूद्ध दायर की गई है।

4. अभिभयोजन का संतिक्षप्त कर्थीन यह है दिक दिदनांक 25.08.2007 को प्रा ः लगभग 4.30 बजे ब्रज पाल सिंसह (अभिभयुक्तों में से एक ) ने मुरादनगर, जिजला गाजिजयाबाद क े पुलिलस स्टेशन में भिशकाय दज' कराई दिक प्रा ः लगभग 3.00 बजे उसने अपने भाई दिवजय पाल सिंसह की बेटी रण्डिश्म की चीखने-तिचल्लाने की आवाज सुनी इसक े बाद वह अन्य ग्रामीणों क े सार्थी पड़ोस में अपने भाई क े घर पहुंचे ो देखा दिक उनक े भाई दिवजय पाल सिंसह, उनकी पत्नी श्रीम ी राजेश अपनी चारपाई पर जमीन पर पड़े हुए र्थीे और उनकी गद'न ेज ार वाले हभिर्थीयार से कटी हुई र्थीी, जब वह ऊपरी मंजिजल पर गया ो उसने देखा दिक दिवजय पाल सिंसह का बेटा दिनशां और दिवजय पाल सिंसह का दामाद मंगल सिंसह भी अपनी चारपाई पर मृ पड़े र्थीे और उनकी गद'न भी कटी हुई र्थीी। दिवजय पाल सिंसह की बेटी श्रीम ी पिंपकी भी घायल अवस्र्थीा में जमीन पर पड़ी र्थीी। उसे अस्प ाल ले जाया गया और वहाँ भ 5 कराया गया, जबदिक चार मृ व्यदिक्तयों क े शव उस स्र्थीान पर पड़े र्थीे जहाँ अपरा दिकया गया र्थीा। मामला दज' होने क े बाद जांच शुरू की गई।

5. जाँच अति कारी ने मृ क दिवजय पाल सिंसह की दो बेदिटयों, रण्डिश्म और श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) क े बयान दज' दिकए। श्रीम ी पिंपकी और रण्डिश्म क े अनुसार 1 आईपीसी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" घटनाओं का एक बहु ही चौंकाने वाला क्रम सामने आया। श्रीम ी पिंपकी क े अनुसार, उनक े दिप ा की अपने भाई ब्रज पाल और दूसरे भाई इंद्र पाल क े बेटे क े सार्थी दुश्मनी र्थीी; इसक े अलावा, शराब पीने को लेकर उनक े पड़ोसी मुक े श क े सार्थी दुश्मनी र्थीी। उसने आगे कहा दिक वह जमीन पर अपने मा ा-दिप ा क े सार्थी सो रही र्थीी।उनकी बहन रण्डिश्म, बहनोई मंगल सिंसह, भाई दिनशां घर की ऊपरी मंजिजल पर सो रहे र्थीे। लगभग 3.00 बजे, क ु छ शोर होने क े कारण उसकी नींद खुल गई और उसने क े वल यह देखा दिक उसका पड़ोसी मुक े श पुत्र टुंगल सिंसह, ब्रज पाल सिंसह, रदिव, अजय उर्फ ' अज्जू उसक े मा ा-दिप ा पर लवार और गं ासे से हमला कर रहे र्थीे......... मुक े श ने उस पर लवार से हमला दिकया।उसने खुद को बचाने की कोभिशश की लेदिकन दिर्फर वह नीचे दिगर गई और चुपचाप लेटी रही। उसने यह भी ब ाया दिक मुक े श कह रहा र्थीा दिक 'अबरार ने यह सुदिनति‚ दिकया है दिक कोई भी जिजन्दा न बचने पाये। उन सभी को मार ाला और दिर्फर वह ऊपर चला गया। वह र और सदमे की ण्डिस्र्थीति में अपनी माँ क े पास लेटी रही।वे यह सोचकर चले गए दिक वह भी मर चुकी है। वे दिकसी प्रमोद का नाम भी ले रहे र्थीे। अबरार और प्रमोद दोनों नूरपुर गाँव क े हैं, जो दिक मुक े श का ससुराल है। वे दिनयदिम रूप से मुक े श क े पास आ े र्थीे और उसने उन्हें पहले भी देखा र्थीा। जब ये हमलावर हमला करने क े बाद चले गए, ो उसकी बहन रण्डिश्म ऊपर से नीचे आई और देखा दिक उसक े मा ा-दिप ा, भाई और पति की हत्या कर दी गई है। दोनों बहनें तिचल्ला े हुए बाहर दिनकलीं और क ु छ देर बाद ब्रजपाल और मुक े श अन्य लोगों क े सार्थी आए और उन्होंने पूछा दिक क्या हुआ र्थीा। वे अंदर आए और घटना की पूरी जगह देखी और श्रीम ी पिंपकी से पूछा दिक क्या उन्होंने हमलावरों को पहचान लिलया है। र क े कारण रण्डिश्म और श्रीम ी पिंपकी दोनों ने दिकसी को भी देखने से इनकार कर दिदया। इसक े बाद मुक े श ने अजय उर्फ ' अज्जू की गाड़ी मँगवाई और वे उन्हें अस्प ाल ले आए। वे रास् े में उससे यह भी पूछ रहे र्थीे दिक क्या उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उसने दिकसी को पहचाना है, जिजससे उसने इनकार कर दिदया र्थीा। उसने दिववेचना अति कारी से यह भी अनुरो दिकया दिक उन दोनों ने सही घटनाक्रम ब ाया है लेदिकन क ृ पया वहाँ स्वयं को रख कर देखें क्योंदिक उसकी और उसकी बहन की जान को भी ख रा है। पूरे कर्थीानक को सुनाने क े बाद श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) बेहोश हो गई ं । मृ क की दूसरी बेटी रण्डिश्म ने भी दिववेचना अति कारी को इसी रह का बयान दिदया है, हालांदिक दिवचारण क े दौरान उससे पूछ ाछ नहीं की गई र्थीी। उक्त बयान दज' करने क े बाद, दिववेचना अति कारी ने सभी औपचारिरक ाएं पूरी की और शवों को पोस्टमाट'म क े लिलए भेज दिदया और वरिरष्ठ अति कारिरयों को सूतिच दिकया, नक्शा नजरी ैयार की और मौक े से आवश्यक बरामदगी की।

6. श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) को सव दय अस्प ाल, गाजिजयाबाद क े ॉ. राजीव शमा' (पी ब्लू2) द्वारा ैयार की गई चोट की रिरपोट' क े अनुसार दिनम्नलिललिख चोटें आई ं, जिजन्होंने उसी दिदन सुबह 5.25 पर उनकी जांच की र्थीीः "चोटें (i) छोटी और अनादिमका उंगली (दादिहनी) जड़ से अलग कटी हुई। (ii) दादिहने हार्थी की हर्थीेली पर लाल रंग का 8 सेमी. x 2 सेमी. का र्फटा हुआ घाव। हर्थीेली से 2 सेमी बाहर। (iii) दादिहने अग्र-बाहु क े सामने की ओर 6 सेमी. x 2 सेमी. का लाल रंग का र्फटा हुआ घाव, कलाई क े जोड़ क े 5 सेमी. ऊपर अत्यति क मात्रा में रक्तस्राव। (iv) चेहरे क े बायें कोने से 5 सेमी.x 3 सेमी क र्फटा हुआ घाव। (v) गद'न की ऊपरी क्रीज क े ठीक ऊपर गद'न पर 5 सेमी.x 1 सेमी का र्फटा हुआ घाव । उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (vi) ज'नी और मध्यमा ऊ ँ गली क े पीछे की रर्फ क्रमशः 2 सेमी. x 1 सेमी. और 2 सेमी. x 0.[5] सेमीं का र्फटा हुआ घाव। (vii) बायें कान पर लाल रंग का और खून बह ा हुआ 3 सेमी. x 1 सेमी. का र्फटा हुआ घाव।" उसी दिदन गद'न और जबड़े का एक्सरे भी दिकया गया और उससे संबंति रिरपोट' रेति योलॉजिजस्ट ॉ. राजेश्वर यादव (पी ब्ल्यू 3) द्वारा प्रस् ु की गई।

7. उसी दिदन दोपहर में ॉ. क े.एन.ति वारी (पी ब्लू4) द्वारा पोस्टमॉट'म दिकया गया और चार मृ कों पर दिनम्नलिललिख मृत्युपूव' चोटें दज' की गई ं: "श्रीम ी राजेश मृत्युपूव' चोटें (प्रदश' क 3) (1) गद'न क े दिनचले दिहस्से पर आगे की रर्फ और दादिहनी रर्फ 8 सेमी. x 4 सेमी., 3 सेमी. गहरी हड्डी में, सुपरैण्डिक्टनल नॉच क े ऊपर कटा हुआ घाव और घाव में रक्त वादिहकाओं और श्वासनली सदिह गद'न क े नरम ऊ क कटा हुआ। (2) बायें रर्फ गद'न क े दिनचले दिहस्से में 8 सेंटीमीटर कान क े नीचे 7 सेमी. x 3 सेमी. का घाव मांसपेभिशयों में गहरा, नरम ऊ क और मांसपेभिशयां कटी हुई। पोस्टमॉट'म घाव दादिहने हार्थी क े पृष्ठीय भाग पर ीन सार्फ कटे हुए घाव मौजूद हैं जिजसकी साइज 8 सेमी. x 5 सेमी., 7 सेमी. x 4 सेमी., 3 सेमी.x 2 सेमी., 2.[3] सेमी. अलग-अलग हैं। दिवजय पाल उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" मृत्युपूव' चोटें (प्रदश' क-4) (1) गद'न क े ऊपरी भाग में आगे की रर्फ 10 सेमी. x 3 सेमी. क े आकार का 8 सेमी का हतिड्डयों क कटा हुआ गहरा घाव, कान क े लोब्युल लैरिरयक्स (lobule laryux) क े नीचे, घाव में क ं दिठका (hyoid)) की नरम ऊ क और रक्त वादिहकाओं का कटा हुआ घाव। घाव का पोस्टमॉट'म घाव का पोस्टमॉट'म (1) दादिहने हार्थी क े पृष्ठ भाग पर 7 सेमी x 3 सेमी का सार्फ कटा हुआ (2) दादिहने हार्थी क े पृष्ठ भाग पर 7 सेमी x 3 सेमी का रगड़न और मुँह क े बायें कोने पर 1 सेमी x 1 का सार्फ कटा हुआ घाव। मंगल मृत्युपूव' चोटें (प्रदश' क-5) (1) गद'न क े ऊपरी भाग पर 25 सेमी. x 9 सेमी. का और दिनचले जबड़े पर आगे की रर्फ दादिहनी ओर कटा हुआ घाव, वर्टिटब्री घाव रीढ़ (Vertebrae), मेण्डिन् बल (Mand)ible), गद'न की मांसपेभिशयों क े नम' ऊ क, लैरिरक्स (Larix), क ं दिठका (hyoid)) क है और घाव में रक्त वादिहकाएं कटी हुई। (2) घाव क े ऊपरी भाग में कान क े लोब्यूल (lobule) और ति रछा, चेहरे क े दादिहनी ओर ति रछा कटा हुआ घाव, ऊपर क े होंठ से कान क 11 सेमी. x 1 सेमी. क का मांसपेशी क गहरा घाव। दिनशां मृत्युपूव' चोटें (प्रदश' क-6 ) उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (1) गद'न क े दादिहनी ओर कान क े नीचे 6 सेमी. मांसपेभिशयों क गहरा 9 से. मी. x 2 सेमी. का ति रछा कटा हुआ घाव। (2) गद'न क े दादिहनी ओर से मध्यरेखा क 10 सेमी x 8 सेमी का चोट संख्या 1 क े नीचे कटा हुआ घाव, मांसपेभिशयां, लैरिंरक्स (Larynx) (र्थीायराइ उपाण्डिस्र्थी और क ं दिठका) वादिहकाएं कटी हुई।

8. दिवजय पाल सिंसह की दो बेदिटयों, श्रीम ी पिंपकी और रण्डिश्म क े बयान दज' करने क े बाद, दिववेचना अति कारी उपदिनरीक्षक राम बाबू सक्सेना (पी ब्ल्यू 9) ने यह भी नोट दिकया दिक मृ क दिनशां का मोबाइल नंबर 9336780542 भी ट्रेस नहीं हो रहा है। बाद में दिववेचना अति कारी ने मुक े श और ब्रज पाल सिंसह को दिगरफ् ार कर लिलया। मुक े श ने अपने इकबालिलया बयान क े बाद अपने घर से खून से सने कपड़े, खुकरी की बरामदगी भी कराई, जिजसे कब्जे में लिलया गया, सील कर दी गई और र्फद' ैयार की गई।सह-अभिभयुक्त अबरार की मोटर साइदिकल भी बरामद की गई और उसे कब्जे में ले लिलया गया। ब्रजपाल सिंसह ने अपना इकबालिलया बयान देने क े बाद अपने घर से खून से सना एक गं ासा भी बरामद कराया जिजसे कब्जे में ले लिलया गया और सील करक े र्फद' ैयार की गई। दिदनांक 28.08.2007 को, सह-अभिभयुक्त रदिव को दिगरफ् ार दिकया गया और उसक े इकबालिलया बयान और उसकी दिनशानदेही पर उसकी माँ की बहन क े घर से एक खून से सनी टीशट' और एक मोबाइल र्फोन एलजी रिरलायंस नंबर 9336780542 भी बरामद दिकया गया। उसी को कब्जे में लेकर सील दिकया गया और र्फद' ैयार की गई। अजय उर्फ ' अज्जू को दिदनांक 4.11.2007 को दिगरफ् ार दिकया गया र्थीा और उसक े इकबालिलया बयान दज' करने पर, और उसक े दिनशानदेही पर उसक े गाँव से एक नहर क े पास भिछपा हुआ एक चाक ू बरामद दिकया गया र्थीा, उक्त चाक ू को कब्जे में ले लिलया गया और एक र्फद' बरामदगी ैयार की गई र्थीी। बरामद वस् ुओं को दिवति दिवज्ञान प्रयोगशाला, आगरा में र्फोरेंजिसक जांच क े लिलए भेजा गया र्थीा। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

9. जाँच पूरी करने क े बाद, चारों अभिभयुक्तों ब्रज पाल सिंसह, मुक े श, रदिव और अजय उर्फ ' अज्जू क े दिवरूद्ध आरोप पत्र दायर दिकया गया र्थीा। मुक े श और अजय उर्फ ' अज्जू क े लिखलार्फ शस्त्र अति दिनयम की ारा 4/25 क े ह दो अलग-अलग मामले दज' दिकए गए। इन दोनों प्रार्थीदिमकी में आरोप पत्र भी प्रस् ु दिकया गया र्थीा। सभी मामलों को एक सार्थी जोड़ा गया और दिवचारण न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाया गया।

10. अभिभयोजन पक्ष ने 13 गवाहों का परीक्षण दिकया। उन सभी ने अभिभयोजन पक्ष की कहानी का समर्थी'न दिकया। सभी सुसंग सामग्री और दस् ावेजों को सादिब दिकया गया और प्रदश' अंदिक दिकया गया।

11. चारों अभिभयुक्तों ने द प्रदिक्रया संदिह ा 2 की ारा 313 क े ह अपने बयान दिदए जिजसमें उन्होंने अपनी संलिलप्त ा से इनकार दिकया और आरोप लगाया दिक उन्हें झूठा र्फ ं साया गया र्थीा; उन्होंने यह भी कहा दिक उनकी दिनशानदेही पर बरामदगी नहीं की गयी र्थीी; गवाह दुश्मनीवश साक्ष्य दे रहे र्थीे; बचाव में अभिभयुक्तों ने दो गवाहों का परीक्षण दिकया। सव दय अस्प ाल क े एक आवासीय तिचदिकत्सक ॉ. इस्लामूद्दीन का परीक्षण ी ब्लू 1 क े रूप में, श्रीम ी पिंपकी क े अस् पाल में भ 5 होने क े संबं में तिचदिकत्सकीय कागजा प्रदश' ख-1 से ख-38 को सादिब करने क े लिलए दिकया गया।अभिभयुक्त अजय उर्फ ' अज्जू की मां, मूल चंद की पत्नी, श्रीम ी बेरव ी का ी ब्लू 2 क े रूप में परीक्षण दिकया गया।उसने कहा दिक उसक े बेटे को मुक े श और ब्रज पाल क े सार्थी दिगरफ् ार दिकया गया र्थीा, उसक े बाद उसे रिरहा कर दिदया गया और 20 दिदनों क े बाद उसे दिर्फर से दिगरफ् ार कर लिलया गया।

2. सीआरपीसी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

12. दिवचारण न्यायालय अभिभलेख पर मौजूद सारवान साक्ष्य की गहन जांच और मूल्यांकन करने क े बाद, 24.09.2009 क े दिनण'य क े माध्यम से, इस दिनष्कर्ष' पर पहुंचा दिक चार मृ कों की हत्या और श्रीम ी पिंपकी (पी ब्ल्यू 1) की हत्या क े प्रयास में, जो उनक े करीबी रिरश् ेदार र्थीे, चार अभिभयुक्तों की दोर्षजिसद्धी को अभिभयोजन पक्ष ने सर्फल ापूव'क सादिब दिकया र्थीा और दनुसार उन्हें आईपीसी की ारा 302/149 और ारा 307 र्थीा आईपीसी और शस्त्र अति दिनयम, 1959 क े ह अन्य संबद्ध अपरा ों क े ह उन्हें मौ की सजा और आजीवन कारावास र्थीा सादिब दिवभिभन्न अपरा ों क े लिलए अन्य कम सजाएं सुनाई गई ंर्थीीं।

13. अभिभयुक्तों द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलें की गयीं, जिजनकी सुनवाई दिवचारण न्यायालय द्वारा भेजे गए मृत्यु संदभ' क े सार्थी की गयी र्थीी। उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलक ा' ब्रज पाल, अजय उर्फ ' अज्जू और रदिव ने अलग- अलग अति वक्ताओं को दिनयुक्त दिकया र्थीा, जबदिक अपीलक ा' मुक े श को दिवति क सहाय ा से न्याय-दिमत्र प्रदान दिकया गया र्थीा।उच्च दिवचारण न्यायालय ने संबंति दलीलों और अभिभलेख पर मौजूद सामग्री पर दिवचार करने क े बाद, सभी अपरा ों क े लिलए दिवचारण न्यायालय द्वारा दज' की गई दोर्षजिसतिद्ध की पुदिj की। हालाँदिक सजा क े प्रश्न पर, इस मुद्दे पर कानून पर चचा' करने और दिवभिभन्न अन्य प्रासंदिगक कारकों को ध्यान में रखने क े बाद, मौ की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिदया गया।

14. इससे व्यभिर्थी होकर व 'मान अपीलार्थी5गण इस न्यायालय क े समक्ष आए हैं।

15. हमने पक्षकारों क े दिवद्वान अति वक्ता को दिवस् ार से सुना है और न क े वल पक्षकारों क े दिवद्वान अति वक्ता द्वारा प्रदान दिकए गए अभिभलेख का, बण्डिल्क दिवचारण न्यायालय क े मूल अभिभलेख का भी परिरशीलन दिकया है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

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16. अपीलार्थिर्थीयों की ओर से दिदए गए क§ को संक्षेप में इस प्रकार अभिभलिललिख दिकया गया हैः (i) यह एक ऐसा मामला है जिजसमें एकल चश्मदीद गवाह श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) है, उसकी गवाही मृ क से संबंति एक गवाह और अपीलार्थिर्थीयों क े सार्थी दुश्मनी रखने वाले एक गवाह की भी र्थीी और इसलिलए वह एक दिवश्वसनीय गवाह नहीं होगी और उस पर भरोसा नहीं दिकया जाना चादिहए र्थीा; (ii) एकल चश्मदीद, पी ब्लू1 की गवाही की पुदिj करने क े लिलए कोई अन्य सबू नहीं है; (iii) पहली बार में श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) ने हमलावरों क े नामों का खुलासा ग्रामीणों और परिरवार क े अन्य सदस्यों क े सामने नहीं दिकया है जो उसक े चीखने और तिचल्लाने पर इक्ट्ठा हुए र्थीे और न ही उसने उस समय हमलावरों क े नामों का खुलासा दिकया र्थीा जब उसे अस्प ाल में भ 5 कराया गया र्थीा, इसलिलए यह बाद में सोच-समझकर बनाया गया मामला है। (iv) यह दिदखाने क े लिलए सबू हैं दिक सुबह एक क ु त्तों क े दस् े को बुलाया गया र्थीा, जैसे दिक यह अज्ञा हमलावरों का मामला र्थीा और चश्मदीद श्रीम ी पिंपकी ने वास् व में दिकसी को नहीं देखा र्थीा और यदिद उसने दिकसी को देखा भी हो ो वह उन्हें पहचान नहीं पाई। यदिद हमलावरों क े नाम ज्ञा हो े ो एक कु त्तों क े दस् े को कार'वाई में नहीं लगाया जा ा; इस रह यह भी सु ार (सोच समझकर बनाए गए) का सुझाव दे ा है; (v) इस बा का कोई स्पjीकरण नहीं है दिक सुश्री रण्डिश्म और मृ क दिवजय पाल सिंसह क े दिप ा होराम, आरोपी ब्रज पाल और रदिव क े दादा का परीक्षण क्यों नहीं दिकया गया, भले ही वे घटना स्र्थील पर र्थीे; और उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (vi) श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) का बयान मजिजस्ट्रेट क े समक्ष दं प्रदिक्रया संदिह ा की ारा 164 क े ह दज' नहीं दिकया गया र्थीा जो संदेह पैदा कर ा है। (vii) अपीलक ा' रदिव की ओर से दिवद्वान अति वक्ता ने एक अति रिरक्त क ' दिदया दिक श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) ने सीआरपीसी की ारा 161 क े ह अपना बयान दे े समय दिववेचक क े सामने उनका नाम नहीं लिलया। उनक े अनुसार, सुनवाई क े दौरान पहली बार रदिव का नाम सु ार(संशो न) करक े लिलया गया है। उनक े मुवदिªल को झूंठा र्फ ं साया गया है। (viii) अपीलार्थी5 मुक े श की ओर से उपण्डिस्र्थी दिवद्वान न्यायदिमत्र ने गवाहों की गवाही में दिवभिभन्न दिवसंगति यों का उल्लेख दिकया है।

17. दूसरी ओर, प्रत्यर्थी5 राज्य की ओर से उपण्डिस्र्थी दिवद्वान अति वक्ता ने कहा दिक दिवचारण न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा दज' दिकए गए दिनष्कर्ष' अभिभलेख पर साक्ष्य की गहन जांच और मूल्यांकन पर आ ारिर हैं और इसमें दिकसी भी हस् क्षेप की आवश्यक ा नहीं है। राज्य क े दिवद्वान अति वक्ता ने आगे कहा दिक अपीलक ा', जो मृ क क े करीबी रिरश् ेदार और पड़ोसी हैं, ने संपलित्त हाजिसल करने क े लिलए एक ही परिरवार क े चार सदस्यों की बेरहमी से हत्या करक े अपनी दुश्मनी का बदला ले लिलया और घायल गवाह श्रीम ी पिंपकी की हत्या करने का भी प्रयास दिकया गया र्थीा, जिजस पर हमला दिकया गया र्थीा और उसकी गद'न पर प्रहार दिकया गया र्थीा और खुद को बचाने क े प्रयास में उसने अपने ऊपरी हार्थी की क ु छ उंगलिलयां खो दीं। उनक े प्रति कोई नरमी दिदखाने की आवश्यक ा नहीं है।उच्च न्यायालय ने मौ की सजा को आजीवन कारावास में बदलने में गल ी की। दनुसार उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिदया जाए और दिवचारण न्यायालय द्वारा दी गई मौ की सजा को बहाल दिकया जाए। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

18. दी गई दलीलों पर उसी क्रम में दिवचार दिकया जा रहा है। पी ब्लू 1 एक घायल गवाह है। उसकी चोटों को चुनौ ी नहीं दी गई है।ऐसा कोई कारण नहीं है दिक पी ब्लू 1 क्यों झूठा र्फ ं साएगी और वास् दिवक हमलावरों को मुक्त होने देगी। उसकी गवाही क े परिरशीलन से प ा चल ा है दिक उसने अभिभयोजन पक्ष की कहानी का पूरी रह से समर्थी'न दिकया है जैसा दिक उसने सीआरपीसी की ारा 161 क े ह अपने बयान में ब ाया है। जिजरह क े दौरान भी, उससे ऐसा क ु छ नहीं दिमला है जो दिकसी भी रह से उसकी गवाही को कमजोर या नj कर सक े । वह एक पूरी रह से दिवश्वसनीय गवाह र्थीी और उसने स्वाभादिवक रूप से चीजों को ब ाया है।

19. मृ क दिवजय पाल सिंसह की दो बेदिटयों ने हमलावरों को अपने परिरवार क े सदस्यों की हत्या कर े हुए और उनमें से एक श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) को घायल कर े हुए देखा है, करीबी रिरश् ेदार होने क े ना े ठीक ही और बुतिद्धमानी से उनकी उपण्डिस्र्थीति में क ु छ भी नहीं बोला और उन्हें अं ेरे में रहने दिदया दिक उसने वास् व में उन्हें अपरा कर े देखा र्थीा। पहली बार, जब दिववेचक उसका बयान दज' करने क े लिलए अस्प ाल गए, ो वे ुरं घटनाओं क े सही क्रम क े सार्थी सामने आए जैसा दिक वे हुई ंर्थीीं। अपीलार्थी5 उपरोक्त दलील से क ु छ भी प्राप्त नहीं कर सक े हैं।

20. क ु त्तों क े दस् े को काम में लगाना भी पूरी रह से उतिच र्थीा क्योंदिक उस समय क जब क ु त्तों क े दस् े को सुबह काम में लगाया गया र्थीा, ब क हमलावरों क े नामों का खुलासा नहीं दिकया गया र्थीा। प्रार्थीदिमकी क े अनुसार क ु त्तों क े दस् े को काम में लगाया गया र्थीा क्योंदिक हमलावरों क े नाम ज्ञा नहीं र्थीे।यह अभिभयोजन पक्ष का ही मामला है दिक जिजस समय प्रार्थीदिमकी दज' की गई र्थीी और जिजस समय श्रीम ी पिंपकी (पी ब्ल्यू1) को अस्प ाल में भ 5 कराया गया र्थीा, उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" हमलावरों क े नाम जानबूझकर और उतिच कारणों से प्रकट नहीं दिकए गए र्थीे। मृ क दिवजय पाल सिंसह की बेदिटयों को अपने जीवन की रक्षा करने की आवश्यक ा र्थीी अन्यर्थीा उन्हें भी मार दिदया जा ा।

21. सुश्री रण्डिश्म और दिवजय पाल सिंसह क े दिप ा होराम क े गैर-परीक्षण का भी कोई ाण्डित्वक संबं नहीं है। आरोप सादिब करने क े लिलए जिज ना आवश्यक हो उ ना सबू पेश करना अभिभयोजन पक्ष का दिववेकाति कार है। गवाहों की संख्या नहीं बण्डिल्क गवाहों की गुणवत्ता मायने रख ी है। श्रीम ी पिंपकी (पी ब्लू1) घायल गवाह र्थीीं जिजन्हें गंभीर और जानलेवा चोटें आई र्थीीं। हम इस क ' से भी प्रभादिव नहीं हैं।

22. सीआरपीसी की ारा 164 क े ह बयान क े गैर-परीक्षण की अ ीनस्र्थी न्यायालयों द्वारा प्राप्त दिनष्कर्ष§ से कोई प्रासंदिगक ा या संबं नहीं है। यह दिववेचक का काम र्थीा दिक वह सीआरपीसी की ारा 164 क े ह बयान दज' करवाए।यदिद वह अपने दिववेक में इसे आवश्यक नहीं समझ ा, ो इसका पी ब्ल्यू 1 की गवाही और दिवचारण क े दौरान दिदए गए अन्य सारवान साक्ष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सक ा।

23. सीआरपीसी की ारा 161 क े ह श्रीम ी पिंपकी क े बयान में उनका नाम नहीं लिलए जाने क े संबं में, जहां क रदिव क े दिवद्वान अति वक्ता क े प्रयास का संबं है, हमारा दिवचार है दिक यह थ्यात्मक रूप से गल है। इस न्यायालय ने श्रीम ी पिंपकी क े बयान का परिरशीलन दिकया है और पाया है दिक उसने हमले क े दौरान और अन्यर्थीा भी, दो स्र्थीानों पर रदिव का नाम लिलया है।

24. अपीलक ा' मुक े श क े दिवद्वान न्यायदिमत्र ने साक्ष्य में कई दिवसंगति यों और असंग ा को दर्थिश करने की कोभिशश की है।हमें दिवस् ृ रूप से जाने की उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आवश्यक ा नहीं है क्योंदिक वे मामूली हैं और अ ीनस्र्थी न्यायालयों द्वारा दज' दिकए गए दिनष्कर्ष§ पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ ा है।

25. ऊपर अभिभलिललिख सभी कारणों से, हम अपीलार्थिर्थीयों की दोर्षजिसतिद्ध की पुदिj करने वाले उच्च न्यायालय क े आदेश में कोई त्रुदिट नहीं पा े हैं। दनुसार, दाण्डि क अपील संख्या 598-600/2013 और दाण्डि क अपील संख्या 337/2014 खारिरज दिकए जाने योग्य हैं और दनुसार खारिरज दिकए जा े हैं। जहां क सजा बढ़ाने क े लिलए राज्य द्वारा दायर अपीलों का संबं है, हम पा े हैं दिक उच्च न्यायालय ने मौ की सजा को आजीवन कारावास में बदलने क े लिलए ठोस कारण दिदए हैं। दनुसार दाण्डि क अपील संख्या 745-748/2015 भी खारिरज हो जा ी है। अपीलार्थी5 दिहरास में हैं और वे अपनी सजा भुग ेंगे।

26. लंदिब प्रार्थी'ना-पत्र, यदिद कोई हों, को दिनस् ारिर दिकया जा ा है। ………………………………….. [न्यायमूर्ति बी. आर. गवई] ………………………………….. [न्यायमूर्ति दिवक्रम नार्थी] नई दिदल्ली 15 र्फरवरी 2023 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवादिद दिनण'य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु दिनब\ति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनण'य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा र्थीा दिनष्पादन और दिक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"