Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं 8819 वर्ष 2022
(एसएलपी (सी) संख्या 11447/2018 से उद्भू )
रमेश चंद्र शमा एवं अन्य ... अपीलार्थी1 (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... प्रति वादी (गण)
सह
सिसविवल अपील सं. 8820 वर्ष 2022
(एसएलपी (सी) संख्या 21323 वर्ष 2018 से उद्भू )
अनूप सिंसह (मृ ) द्वारा विवति क प्रति विनति एवं अन्य ..अपीलार्थी1 (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... प्रति वादी (गण)
सह
सिसविवल अपील सं. 8821 वर्ष 2022
(एसएलपी (सी) संख्या 2256/2019 से उत्पन्न) mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... प्रति वादी (गण)
विनणय
न्यायमूर्ति क
ृ ष्ण मुरारी
JUDGMENT
1. ये अपीलें इलाहाबाद उच्च न्यायालय (ए श्मिKमनपश्चा ‘उच्च न्यायालय’ क े रूप में संदर्भिभ ) की पूण पीठ द्वारा विदनांक 30.03.2018 को पारिर विनणय एवं आदेश क े खिVलार्फ विकया गया हैं। पूण पीठ क े खिलए संदभ विनम्नखिलखिV परिरश्मिZर्थीति यों में विकया गयाः- 1.[1] रिरट यातिचका सं. 61449 वर्ष 2009, श्रीम ी मा ुरी श्रीवाZ वा बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य[1], अन्य संबंति यातिचकाओं क े सार्थी क ु छ ऐसे भू- ारकों द्वारा दायर की गई र्थीी सिजनकी भूविम नोएडा क े विनदेशक मंडल क े विदनांक 07.01.1998 क े विनणय को चुनौ ी दे े हुए नोएडा द्वारा अति ग्रविह की गई र्थीी और सार्थी ही राज्य सरकार द्वारा विदनांक 02.03.2009 को उक्त प्रZ ाव को दी गई मंजूरी को भी चुनौ ी दी गई र्थीी सिजसमें “पुK ैनी” और “गैर-पुK ैनी” भू- ारकों क े बीच वग1करण करक े भुग ान क े मामले में विवभेद विकया गया र्थीा। वे 'पुK ैनी' भूविम ारक, सिजनकी भूविम का अति ग्रहण विकया गया र्थीा, को 3 रुपये प्रति वग गज की दर से अति रिरक्त मुआवजा विदया गया। 1 (2016) 6 SCC OnLine AII 2832 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सार्थी ही पहले विदए गए मुआवजे पर पुनवास बोनस क े रूप में 15 प्रति श क े सार्थी- सार्थी अति ग्रविह भूविम क े 10 प्रति श क्षेत्र को भी शाविमल विकया गया है, जबविक सिजन्हें 'गैर-पुK ैनी' घोविर्ष विकया गया र्थीा, उन्हें इस अति रिरक्त लाभ से वंतिच कर विदया गया। उच्च न्यायालय की एक Vण्ड पीठ ने विदनांक 10.05.2016 क े विनणय एवं आदेश क े माध्यम से इस वग1करण को उतिच ब ा े हुए रिरट यातिचका को Vारिरज कर विदया क्योंविक इसका उद्देKय क े सार्थी सी ा संबं है अर्थीा मूल विनवासिसयों क े पुनवास क े सार्थी सिजनक े भूविम अति ग्रहण क े कारण भूविमहीन होने की आशंका है।
2. रिरट यातिचकाओं का एक अन्य समूह व मान अपीलार्थी1गण द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राति करण (ए श्मिKमनपश्चा ग्रे. नोएडा क े रूप में संदर्भिभ ) द्वारा मुआवजे क े भुग ान में ‘पुK ैनी’ और ‘गैर-पुK ैनी’ भू- ारक क े बीच विकए गए इसी रह क े वग1करण को चुनौ ी दे े हुए दायर की गयी हैं।
3. रिरट यातिचकाओं पर विवचार कर े समय, एक अन्य Vण्ड पीठ ने श्रीम ी मा ुरी (उपरोक्त) क े वाद में व्यक्त विवचारों से असहमति व्यक्त की और विदनांक 07.07.2017 क े आदेश द्वारा वाद को एक बड़ी पीठ द्वारा अभिभविन ारिर विकए जाने क े खिलए विनर्दिदष्ट विकया।
4. संदभ क े अनुसरण में गविठ पूण न्यायपीठ ने न्यायविनणयन क े खिलए विनम्नखिलखिV प्रश्न ैयार विकएः- (i) क्या श्रीम ी मा ुरी श्रीवाZ वा (2016) 6 एडीजे 1 क े वाद में इस न्यायालय की Vण्ड पीठ द्वारा प्रति पाविद सव च्च न्यायालय द्वारा विवति विनम्नखिलखिV क े वाद में उच्च म न्यायालय द्वारा नागपुर सु ार ट्रZट एवं mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अन्य बनाम विवट्ठल राव एवं अन्य[2] अति कभिर्थी विवति और भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 क े प्राव ानों क े प्रति क ू ल है? (ii) क्या उत्तर प्रदेश भूविम अति ग्रहण (मुआवजे का विन ारण एवं करार द्वारा पंचाट की घोर्षणा) विनयमावली, 1997 क े ह विकया गया 'पुK ैनी' और 'गैर-पुK ैनी' विकसानों क े बीच विकया गया विवभेद, प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े सार्थी युविक्तयुक्त रूप से संबद्ध वग1करण है?
5. विदनांक 30.03.2018 क े आक्षेविप विनणय एवं आदेश क े अनुसार, पूण पीठ ने प्रश्न संख्या 1 का उत्तर नकारात्मक और प्रश्न संख्या 2 का उत्तर सकारात्मक रूप में विदया और श्रीम ी मा ुरी श्रीवाZ वा (पूव क्त) क े वाद में Vण्ड पीठ द्वारा खिलए गए दृविष्टकोण की पुविष्ट की। ैयार विकए गए प्रश्नों क े उत्तरों क े परिरणामZवरूप,पूण पीठ ने विनणय विदया विक व मान अपीलार्थी1 द्वारा दायर रिरट यातिचकाओं में क ु छ भी अभिभविन ारिर विकए जाने क े खिलए शेर्ष नहीं है और उन्हें Vारिरज कर विदया।
6. इससे पहले विक हम वाद क े थ्यात्मक पहलुओं पर जाएं, हमें यह समीचीन लग ा है विक पहले आक्षेविप वग1करण में उपयोग विकए गए शब्दों 'पुK ैनी' और 'गैर पुK ैनी' की व्युत्पखित्त का प ा लगाया जाए, क्योंविक कानून क े दायरे क े भी र अपनाई जाने वाली भार्षा अपने आप में बहु अति क शविक्तशाली बन जा ी है, सिजसे सही ऐति हासिसक संदभ में समझा जाना चाविहए।
7. 'पुK ैनी' र्फारसी शब्द है और इसकी उत्पखित्त 'पुK ' शब्द से हुई है, सिजसका अर्थी है 'पीछे'। इस शब्द का उपयोग ऐति हासिसक रूप से पूवजों क े संदभ में विकया गया है। विकसी भी संपखित्त, कहानी या किंकवदं ी, सिजसकी जड़ें विकसी विवशेर्ष वंश से जुड़ी हुई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हैं, उसक े महत्व को दशाने क े खिलए 'पुK ैनी' शब्द का उपयोग विकया जा ा है। जैसा विक Zपष्ट है, चूंविक उदू भार्षा में 'गैर' शब्द का अर्थी 'क े अलावा, अन्य' है, इसखिलए 'गैर- पुK ैनी 'का अर्थी है वह जो 'पुK ैनी' नहीं है।
8. र्थीाविप, जो बा हमें सबसे अति क विदलचZप लग ी है वह यह है विक एक अव ारणा क े रूप में, विवशेर्ष रूप से आ ुविनक विनजी संपखित्त क े Zवाविमत्व क े समय से पहले, वंश परंपरा समावेभिश ा क े खिलए एक उपकरण बनी रही, न विक बविहष्करण क े खिलए। ऐसे संदभ में प्राति करण द्वारा मुआवजे से बाहर करने क े खिलए “पुK ैनी” शब्द का उपयोग ऐति हासिसक रूप से गल व्याख्या हो सक ी है। हालांविक यह वाद क े गुणावगुण क े खिलए परिरणामी नहीं है, हमारी राय में यह एक सार्थीक अवलोकन है, क्योंविक कानून को शब्दों क े अर्थी को वै बनाने की शविक्त है और सिजस संदभ में एक शब्द का उपयोग विकया जा ा है, उसे बदल सक ा है और बदले में इति हास बदल सक ा है। पृष्ठभूविम क े थ्य
9. 1970 क े दशक क े आरंभ से ही भार में ेजी से उदारीकरण आया और इसक े सार्थी ही व्यापक आर्भिर्थीक विवकास की आस बं ी। भार ीय शहरों को पूंजी और व्यापार क े बड़े वैतिश्वक क ें द्रों क े रूप में विवकसिस करने क े उद्देKय से भार ीय अर्थीव्यवZर्थीा में भारी मात्रा में न लगाया गया र्थीा। इसी क्रम में विदल्ली ने एक वैतिश्वक शहर बनने की यात्रा शुरू की। पूंजी का यह प्रवाह शहर में बड़े पैमाने पर रोजगार क े अवसर लाया, और देश भर क े लोग विदल्ली में प्रवास क े खिलए आने लगे। प्रवासिसयों क े इस रह क े प्रवाह को रोकने और अपने जीवन को बेह र बनाने की उम्मीद क े सार्थी शहर में आने वाले सभी लोगों क े खिलए सम्मानजनक जीवन सुविनतिश्च करने क े खिलए, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भार सरकार ने राज ानी क े आसपास आवासीय और औद्योविगक क्षेत्रों को विवकसिस करने की योजना बनाई। इसक े खिलए, गुड़गांव को हरिरयाणा की सीमा क े पार विवकसिस विकया गया, और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौ मबुद्ध नगर सिजले में न्यू ओVला इंडश्मिZट्रयल डेवलपमेंट अर्थीॉरिरटी (नोएडा) विवकसिस विकया गया। इस अवति में, पूंजी क े प्रवाह और प्रवासन दोनों क े मामले में शहर ने बड़े पैमाने पर विवकास का आनंद खिलया। यह वृतिद्ध इ नी अभू पूव र्थीी विक यह अति कारिरयों द्वारा परिरकश्मि”प योजना अनुमानों से भी अति क र्थीी। इस रह क े विवकास को समायोसिज करने क े उपाय क े रूप में, उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश औद्योविगक क्षेत्र विवकास अति विनयम, 1976 की ारा 3 क े ह अपनी शविक्तयों का उपयोग कर े हुए, विदनांक 28.01.1991 की अति सूचना द्वारा, गौ म बुद्ध नगर क े 124 गांवों सविह 38000 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा टाउनभिशप का विनमाण विकया।
10. अपने विनयोसिज विवकास क े खिलए, प्रत्यर्थी1- ग्रे. नोएडा ने भूविम अति ग्रहण अति विनयम (ए श्मिKमनपश्चा '1894 का अति विनयम' क े रूप में संदर्भिभ ) क े प्राव ानों क े ह अपने क्षेत्रीय परिरचालन क्षेत्र क े भी र भूविम का अति ग्रहण शुरू कर विदया। इसी संबं में ग्रे. नोएडा क े अति कार क्षेत्र में आने वाले विवभिभन्न गांवों में योजना विवकास क े खिलए क ु ल 580.1734 हेक्टेयर भूविम क े अति ग्रहण क े खिलए विदनांक 03.10.2005 और 05.01.2006 की अति सूचनाएं 1894 क े अति विनयम की ारा 4 (1) और ारा 6 (1) क े ह जारी की गई र्थीीं। उक्त अति सूचनाओं को, सिजनमें व मान अपीलार्थी1गण की भूविम भी शाविमल र्थीी, रिरट यातिचका समूह में उच्च न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी गई र्थीी सिजसमें अति ग्रहण को मुख्य ः 1894 क े अति विनयम की ारा 17 (1) सपविठ ारा 17 (4) क े ह मनमाने ढंग से अत्यावKयक ा Vंड का उपयोग करने क े आ ार पर चुनौ ी दी गई र्थीी। उक्त रिरट यातिचका समूह को उच्च न्यायालय की पूण पीठ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा गजराज बनाम उ.प्र. राज्य[3] क े शीर्षक वाद में अभिभविन ारिर विकया गया। उच्च न्यायालय ने विनष्कर्ष विनकाला विक अत्यावKयक ा Vंड को गल रीक े से लागू विकया गया र्थीा, लेविकन इस कारण से अति ग्रहण का बचाव विकया विक उक्त भूविम पर पहले से ही कार्फी विवकास हो चुका है और भूविम की प्रक ृ ति पूरी रह से बदल गई है। पूण पीठ ने भूZवाविमयों को मुआवजा देने क े खिलए पहले से भुग ान की गई मुआवजे की राभिश पर 64.70% की दर से भूZवाविमयों को अति रिरक्त मुआवजा देने का विनद—श विदया और रू. 2500/- वग मीटर की सीमा की श क े सार्थी उनकी अति ग्रही भूविम क े 10 प्रति श क विवकसिस आबादी भूविम का आवंटन करने का भी विनद—श विदया। पूण पीठ ने अति रिरक्त मुआवजे क े भुग ान या भूविम आवंटन क े खिलए 'पुK ैनी' और 'गैर-पुK ैनी' विकसानों क े बीच कभी कोई विवभेद नहीं विकया। पूण न्यायपीठ ने रा ेKयाम (मृ ) द्वारा विवति क प्रति विनति एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य 4, ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास प्राति करण बनाम देवेंद्र क ु मार एवं अन्य[5] क े मामलों में विदए गए विनणयों का अवलंब ले े हुए आगे ारिर विकया विक क े वल इसखिलए विक विकसानों को एक समझौ े क े ह मुआवजा विमला चुका र्थीा, यह नहीं कहा जा सक ा विक उन्होंने इसे चुनौ ी देने क े अति कार को छोड़ विदया है। गजराज (पूव क्त) क े मामले में पूण पीठ क े विनणय की इस न्यायालय द्वारा साविवत्री देवी बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य[6] वाले मामले में पुविष्ट की गई।
11. व मान अपीलार्थी1गण ने अति विनयम की ारा 4 और 6 सपविठ ारा 17 क े ह जारी अति सूचना को चुनौ ी दे े हुए रिरट यातिचका सं. 62056 वर्ष 2011 को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA चुनौ ी दी। उक्त रिरट यातिचका गजराज (उपरोक्त) क े मामले में पूण पीठ द्वारा विदए गए विनद—शों क े संदभ में विनZ ारिर की गई।
12. इस Z र पर यह भी उल्लेV करना प्रासंविगक है विक भूविम अति ग्रहण की कायवाही शुरू होने और 1894 क े अति विनयम की ारा 4 और 6 क े ह अति सूचना जारी होने से पहले ही प्रति वादी-ग्रेटर नोएडा ने अपनी 26 वीं बोड बैठक में विदनांक 28.10.1997 को भूविम क े अति ग्रहण क े खिलए मुआवजे क े भुग ान क े प्रयोजनों क े खिलए भू- ारकों को 'पुK ैनी' अर्थीा ्, वे भू- ारक सिजन्होंने प्राति करण की Zर्थीापना की ारीV अर्थीा ् 28.01.1991 से पहले भूविम Vरीदी र्थीी या उसक े बाद विवभाजन या पारिरवारिरक समझौ े से भूविम प्राप्त की र्थीी और 'गैर-पुK ैनी' अर्थीा वे व्यविक्त सिजन्होंने इसकी Zर्थीापना क े बाद भूविम Vरीदी र्थीी, क े रूप में वग1क ृ करने का विनणय खिलया। इस प्रकार, मुआवजे क े भुग ान क े खिलए भूZवाविमयों क े दो वग बनाए गए र्थीे और सिजन्हें 'पुK ैनी' भूZवाविमयों क े रूप में वग1क ृ विकया गया र्थीा, उनक े पुनवास क े नाम पर अति क मुआवजा देने का विनणय खिलया गया र्थीा।
13. इसक े बाद, 15.07.2006 को, ग्रेटर नोएडा और अपीलार्थी1गण एवं अन्य भू- ारकों क े बीच भूविम अति ग्रहण विनयमावली, 1997 (ए श्मिKमनपश्चा ' विनयमावली 1997' क े रूप में संदर्भिभ ) क े विनयम 4 (2) क े ह एक समझौ ा विकया गया और ग्रेटर नोएडा द्वारा अपनी 26 वीं बैठक में पारिर प्रZ ाव क े अनुसार 'पुK ैनी' भू- ारकों को प्रति वग 322 रुपये प्रति वग गज की दर से और 'गैर-पुK ैनी' भू- ारकों को, सिजनमें व मान अपीलार्थी1गण भी शाविमल हैं, कम राभिश 280 रुपये प्रति वग गज की दर से मुआवजे का भुग ान विकया गया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. भू- ारकों ने बढ़ी राभिश पर मुआवजे क े खिलए विवरो जारी रVा इसक े परिरणामZवरूप बोनस/अनुग्रह राभिश क े रूप में मुआवजे की बढ़ी हुई दर की मांग पर विवचार करने क े खिलए एक सविमति का गठन विकया गया। सविमति ने 8 गांवों में श्मिZर्थी भूविम क े पै ृक क ृ र्षकों को अनुग्रह राभिश क े रूप में 310 रुपये प्रति वग मीटर की दर से अनुग्रह राभिश क े भुग ान की सिसर्फारिरश करने क े बाद अपनी रिरपोट प्रZ ु की।
15. सविमति की विदनांक 25.10.2008 की रिरपोट संदभ क े खिलए यहां पुनः प्रZ ु की जा रही हैः- संलग्नक पी-4 25-10-2008 उत्तर प्रदेश सरकार क े 4.09.2008 विदनांविक आदेश संख्या 4/4/1/2008-सीएक्स (1) लVनऊ क े अनुसार घोड़ी बछेड़ा और अन्य गांवों की भूविम क े संबं में बोनस /अनुग्रह/मुआवजा वृतिद्ध की मांग पर विवचार करने क े संबं में गविठ सविमति की सिसर्फारिरश। उत्तर प्रदेश सरकार क े 4.09.2008 विदनांविक आदेश संख्या 4/4/1/2008-सीएक्स (1) लVनऊ क े अनुसार घोड़ी बछेड़ा और अन्य गांवों की भूविम क े संबं में इस प्रकार की मांगों और बढ़ी हुई दर पर बोनस/अनुग्रह/मुआवजा वृतिद्ध पर विवचार करने क े संबं में विनम्नखिलखिV सविमति का गठन विकया गया हैः-
1. श्री ठाक ु र जयबीर सिंसह, माननीय मंत्री, ग्रामीण अभिभयांवित्रकी सेवा, क ृ विर्ष विवदेश व्यापार और क ृ विर्ष विनया अध्यक्ष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा-सदZय
3. सिजला मसिजZट्रेट, गौ म बुद्ध नगर -सदZय समन्वयक, क ृ विर्ष क े प्रति विनति यों, संगठनों/क ृ र्षकों द्वारा प्रZ ु ज्ञापन क े साक्ष्य में उपलब् कराए गए अभिभलेVों की जांच की गई और उनका अवलोकन विकया। ग्राम सविमति /उनक े प्रति विनति यों की सविमति की बैठक आयोसिज कर े समय उपरोक्त मामले क े संबं में भी विवचार विकया गया र्थीा, सिजसका विववरण नीचे विदया गया हैः- 1 पृष्ठभूविम-यह विनणय ग्रेटर नोएडा प्राति करण बोड की विदनांक 28.10.1997 की 26 वीं बैठक में खिलया गया र्थीा विक मुआवजे की दर का आकलन प्रत्येक विवत्तीय वर्ष क े खिलए प्राति करण द्वारा विकए गए समझौ े क े आ ार पर विकया जाना चाविहए और वे विकसान, जो समझौ े/सहमति को विनष्पाविद करने क े खिलए सहम हैं, वे अनुबं /सहमति विवविनयमन क े ह मुआवजा प्राप्त कर सक े हैं और वे विकसान, जो विन ारिर दर से सहम नहीं हैं, उन्हें भूविम अति ग्रहण अति विनयम 1994 की ारा 23 क े प्राव ानों क े ह विवद्व सिजला मसिजZट्रेट द्वारा विन ारिर दर पर मुआवजा देय होगा। उपयुक्त अनुक्रम क े आ ार पर वर्ष 1997-98 क े खिलए मुआवजे की दर 110 रुपये प्रति वग की दर से विन ारिर की गई र्थीी और भविवष्य में इसे प्रत्येक विवत्त वर्ष में लाग मुद्राZर्फीति सूचकांक क े अनुसार बढ़ाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार क े आदेश संख्या 902/778 3-0 7-1 43 एन/04 द्वारा आयुक्त, मेरठ तिडवीजन, मेरठ की अध्यक्ष ा में एक उच्च Z रीय सविमति का गठन विकया। सविमति ने 800-850 रूपये प्रति वग mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मीटर की दर से मुआवजा देने की सिसर्फारिरश की र्थीी। इस क्रम में, ग्रेटर नोएडा प्राति करण बोड की 5 जनवरी, 2008 को हुई बैठक में 850 रूपये प्रति वग मीटर की दर 1.04.2007 से लागू करने का विनणय करने का विनणय खिलया गया। यहां क विक इस प्रकार क े ज्ञापन क े विववरण सरकार क े विदनांक 31.12.2007 क े आदेश द्वारा मेरठ तिडवीजन क े आयुक्त की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति की विदनांक 4.01.2008 की सिसर्फारिरश में भी विदए गए हैं, सिजससे यह Zपष्ट है विक उस समय भी उपरोक्त गांवों क े ग्रामीण मुआवजे में वृतिद्ध की मांग कर रहे र्थीे। ग्रामीणों क े क ु छ ज्ञापन प्राति करण क े अनुसार उनक े पत्र सं. 931/भू-अभिभलेV/एल. पी./2008 विदनांविक 7.03.2008/903/भू-अभिभलेV/एल. पी./2008 विदनांविक 10.03.2008, भूविम अभिभलेV /1 ए/2008 विदनांविक 13.03.20081038/भू-अभिभलेV/एल. ए./2008 विदनांविक 29.04.2008,1055/भू-अभिभलेV/एल.ए/2008 विदनांविक 5.05.2008/1069/भू-अभिभलेV/ LA/2008 विदनांविक 9.05.2008, 1113, 1115/भू-अभिभलेV/L A/2008 विदनांविक 06.06.08 संलग्न कर े हुए उतिच विदशाविनद—शों/विनद—शों क े खिलए सरकार को अग्रेविर्ष विकए गए र्थीे। इसक े बाद 10 मई, 2008 क े आदेश द्वारा गौ मबुद्ध नगर क े सिजला मसिजZट्रेट, मुख्य कायकारी अति कारी, उप मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा की एक सविमति गविठ की गई और 21 जुलाई, 2008 की अपनी रिरपोट में अन्य गांवों सविह गांव घोड़ी बछेड़ा क े विवत्त वर्ष 2006-2007 में अति ग्रही भूविम क े खिलए विकसानों को 175mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 200 वग मीटर की अति रिरक्त राभिश देने पर विवचार करने की सिसर्फारिरश की गई। प्राति करण बोड की विदनांक 11.08.2008 की 72 वीं बैठक में सविमति की सिसर्फारिरशों का अवलोकन कर े समय ऐसे विनद—श विदए गए र्थीे विक इसक े विवत्तीय स्रो और इसक े प्रबं न की श्मिZर्थीति की गणना कर े समय वाद को उत्तर प्रदेश सरकार क े आदेश संख्या 4/4/1/2008-सी. एक्स. (1) लVनऊ विदनांक 4.09.2008 क े द्वारा सरकार क े पास भेजा जाए। उपरोक्त सविमति का गठन ग्राम घोड़ी बछेड़ा क े संबं में बोनस/अनुग्रह/मुआवजे की वृतिद्ध आविद की मांगों पर विवचार करने क े संबं में सिसर्फारिरश करने क े खिलए विकया गया र्थीा।
2. सविमति की बैठक ें -सविमति की पहली बैठक 15.09.2008 को उत्तर प्रदेश सदन, नई विदल्ली क े सम्मेलन कक्ष में आयोसिज की गई र्थीी, सिजसमें सविमति क े अध्यक्ष क े अलावा विनम्नखिलखिV अति कारिरयों ने भाग खिलया है -
1. श्री पंकज अग्रवाल, मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा
2. श्री श्रवण क ु मार शमा, सिजला अति कारी, गौ म बुद्ध नगर उपरोक्त क े अलावा, ग्रेटर नोएडा प्राति करण क े विनम्नखिलखिV अति कारी उपयुक्त बैठक में उपश्मिZर्थी र्थीेः
1. श्री शैलेन्द्र चौ री, उप मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा
2. श्री भिशभिशर, विवशेर्ष कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा बैठक में सविमति क े गठन, काय क्षेत्र, संचालन और प्रविक्रया क े संबं में विवचार और परामश विकया गया र्थीा, यह विनणय खिलया गया र्थीा विक अति ग्रहण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA से प्रभाविव विकसानों और उनक े प्रति विनति यों क े सार्थी एक बैठक आयोसिज कर े समय, उनक े विवचारों और मांगों को उनसे प्रति वेदन प्राप्त करक े जाना जा सक ा है और इस संबं में उनसे चचा की जा सक ी है। उपरोक्त क्रम में, सविमति की बैठक क्रमशः 22.09.2008 और 11.10.2008 को ग्रेटर नोएडा प्राति करण क े सम्मेलन कक्ष में आयोसिज की गई र्थीी, सिजसमें गांव क े विकसानों और उनक े प्रति विनति यों से ज्ञापन प्राप्त कर े हुए, इस मामले पर चचा की गई और विवZ ार से परामश विकया गया र्थीा, सिजसमें मुख्य रूप से विनम्नखिलखिV लोगों ने भाग खिलया - 1.रमेश सिंसह रावल 2.योगेंद्र सिंसह रावल 3.सूबेदार रामचंद्र
4. ओमप्रकाश,
5. माही सिंसह भाटी,
6. लोक े श भाटी,
7. महा सिंसह भाटी,
8. प्र ाप सिंसह भाटी,
9. प्र ाप सिंसह सरपंच
10. प्रेम मुखिVया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
11. इंदर सिंसह (अति वक्ता)
12. अजी सिंसह नगर
13. श्री कमल भाटी
14. मांगे राम भार ी
15. भूले सिंसह,
16. राक े श
17. ब्रह्म सिंसह,
18. आत्मेंदर
19. महाराज सिंसह
20. मेहंदी हसन,
21. उमेश
22. विवक्रम सिंसह
23. स बीर प्र ान
24. नरेश उपाध्याय
25. अजी मुखिVया
26. रामपाल हवलदार
27. नेमवीर, प्र ान, गरबा आविद। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. क ृ र्षकों द्वारा प्रZ ु मांग और ज्ञापन का आ ार-सविमति को अपनी बैठक में गांवों से मांगों क े संबं में विवZ ृ ज्ञापन और विववरणों क े समर्थीन में रिरकॉड प्राप्त हुए। गांव घोड़ी बछेड़ा की 2006-2007 में अति ग्रही भूविम क े क ृ र्षक और अन्य गांवों ने सामूविहक रूप से सविमति क े समक्ष आवKयक रिरकॉड सविह विवZ ृ और थ्यात्मक ज्ञापन प्रZ ु विकए हैं और यहां क विक अपनी मांग क े समर्थीन में विकसानों द्वारा मौखिVक रूप से आ ार भी उठाए गए र्थीे, सिजनमें मुख्य आ ार शाविमल हैं, जो इस प्रकार हैंः-
1. प्रश्नग गांवों क े विकसानों ने 2.04.2006 को मू”य संव न ज्ञापन विदया है, सिजसमें ग्रेटर नोएडा विवकास प्राति करण ने 10 विदनों क े बाद 5.01.2007 को खिलखिV आश्वासन पत्र विदया विक ट्रोविनका सिसटी आविद की दरों क े आ ार पर, र्फरवरी 2007 क े अंति म सप्ताह क मुआवजा बढ़ाने क े संबं में विनणय खिलया जाएगा। बयानों क े समर्थीन में लोकसभा क े सम्माविन सदZय अशोक प्र ान और श्री नवाब सिंसह नागर को संबोति उप मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा क े विदनांक 5.01.2007 क े पत्र की प्रति संलग्न है।
2. उन्होंने मेरठ तिडवीजन क े आयुक्त की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति की बैठक में मुआवजा बढ़ाने क े संबं में अपनी मांग का भी Vुलासा विकया र्थीा, लेविकन विवत्त वर्ष 2006-2007 में अति ग्रविह भूविम क े विकसानों को कोई लाभ नहीं विदया गया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. ग्रामीणों ने ग्रेटर नोएडा क े अध्यक्ष और मुख्य कायकारी अति कारी क े विदनांक 10.06.2008 क े आदेश द्वारा विवद्वान सिजला मसिजZट्रेट की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति क े समक्ष विवZ ृ आ ार का Vुलासा कर े हुए अपनी मांग प्रZ ु की है, लेविकन विर्फर भी, सविमति ने, इस पर गहन विवचार विकए विबना, प्रति वग 175-200 रुपये प्रति वग मीटर की दर से वृतिद्ध करने की सिसर्फारिरश की है। जो व्यवहारिरक नहीं है और यह प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां क े खिVलार्फ है और यह वृतिद्ध अपयाप्त है।
4. विवश्लेर्षण-गोंडा बछेड़ा गांव की 580.1730 हेक्टेयर भूविम क े अति ग्रहण क े प्रZ ाव में भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 6/17 क े ह 5.01.2006 को अति सूचना जारी की गई र्थीी और अति रिरक्त कलेक्टर (एलए) द्वारा 14.05.2006 को अति ग्रही भूविम का कब्जा ग्रेटर नोएडा प्राति करण को सौंप विदया गया र्थीा। 28.06.2006 को मेरठ क े संभागीय आयुक्त द्वारा 385 रुपये प्रति वग मीटर की दर से मुआवजे का मू”य मंजूर करने क े बाद मुआवजे की राभिश पै ृक क ृ र्षकों को 334.78 रुपये प्रति वग मीटर की दर से विव रिर की गई। विवत्त वर्ष 2006-2007 में गोंडा, बछेड़ा और अन्य गांवों सविह ग्रेटर नोएडा क े सुविनयोसिज विवकास क े खिलए विनम्नखिलखिV गांवों की भूविम का अति ग्रहण विकया गया और उपरोक्त भूविम का कब्जा 01.04.2006 क े बाद खिलया गया र्थीा और उपरोक्त भूविम क े विकसान मुआवजे में वृतिद्ध की मांग कर रहे हैं। क्रम सं. गाँव का नाम अति ग्रही क्षेत्र (हेक्टेयर में) प्राति करण को कब्जा सौंपने की ति भिर्थी
1. सूरजपुर 69330 01.06.2006 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2 अजयपुर 37308 01.06.2006
3. गरबरा 595830 01.06.2006
4. गोंदी बसेरा बसेरा 580.1730 14.06.2006
5. शनि 299.5660 30.10.2006
6. डाढ़ा 215.6010 27.10.2006
7. मथुरापुर 122.2699 27.10.2006
8. डाबरा 111.8868 31.01.2007 इन गाँवों क े क ृ विर्ष संगठनों, कर्षकों ने सरकार क े 31 विदसंबर, 2007 क े आदेश क े ह मेरठ क े संभागीय आयुक्त की अध्यक्ष ा में सविमति क े गठन क े समय और उससे पहले भी मुआवजे में वृतिद्ध की मांग क े खिलए कई ज्ञापन विदए हैं। त्कालीन उप मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा द्वारा हZ ाक्षरिर 5 जनवरी, 2007 क े सहमति पत्र की प्रति और इस मामले में ग्रामीणों द्वारा सांसद श्री अशोक प्र ान और त्कालीन एमएलए श्री नवाब सिंसह नागर क े सार्थी 5 जनवरी, 2007 को प्रZ ु ज्ञापन पर विवचार और परामश भी क ृ र्षकों को प्रदान विकया गया। सिजसमें यह उल्लेV विकया गया है विक अति ग्रही भूविम क े मुआवजे को बढ़ाने क े संबं में यह विनणय खिलया गया है विक गासिजयाबाद विवकास प्राति करण द्वारा अति ग्रही भूविम और आवास विवकास बोड क े ट्रोविनका सिसटी की भूविम क े मुआवजे की दरों को क े आ ार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर र्फरवरी क े अंति म सप्ताह क मुआवजे को बढ़ाने क े संबं में विनणय खिलया जाएगा। यह Zपष्ट है विक क ृ र्षक र्फरवरी 2007 में भी मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे र्थीे, सिजस पर प्राति करण क े सक्षम Z र पर आश्वासन विदया गया र्थीा। विवद्वान सिजला मसिजZट्रेट की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति द्वारा 31 जुलाई, 2008 को अपनी रिरपोट में क ृ र्षकों द्वारा उठाए गए उपरोक्त समग्र किंबदुओं पर विवZ ार से थ्यों का Vुलासा विकया है। सविमति ने गौ म बुद्ध नगर क े विवद्वान सिजला मसिजZट्रेट की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति की विदनांक 21.07.2008 की सिसर्फारिरश का अध्ययन विकया है। इसकी विदनांक 21.07.2008 की रिरपोट में यह विनष्कर्ष विनकाला गया है विक कानून क े अनुसार मुआवजे की दर में कोई बदलाव करना संभव नहीं है, क्योंविक संबंति विकसानों द्वारा भूविम अति ग्रहण क े बाद समझौ े क े विनयम क े ह मुआवजा प्राप्त करने क े बाद मुआवजा प्राप्त करना संभव नहीं है, लेविकन सविमति ने 21.07.2008 विदनांविक अपनी रिरपोट में अनुग्रह राभिश क े मद में विवZ ृ परिरश्मिZर्थीति यों में क ु छ राभिश देने की सिसर्फारिरश की है।
5. सिसर्फारिरश - विवशेर्ष कायकारी अति कारी (एलए), ग्रेटर नोएडा द्वारा प्रदान की गई जानकारी क े अनुसार, उत्तर प्रदेश भूविम अति ग्रहण (मुआवजे का विन ारण और करार द्वारा पंचाट की घोर्षणा) विनयमावली, 1997 क े प्राव ानों क े ह, 29.09.2001 क े सरकारी आदेश क े अनुसार, अन्य गांवों सविह, घोड़ी बछेड़ा गांव क े विवत्त वर्ष 2006-2007 में अति ग्रही भूविम क े अति कांश क ृ र्षकों को मुआवजा प्राप्त हुआ है। इसखिलए इस विनयम क े ह घोविर्ष विकए जाने वाले पंचाट/मुआवजा दरों में कोई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वृतिद्ध/परिरव न करना संभव नहीं होगा। दनुसार, यह क े वल इन गांवों क े विकसानों को राह क े रूप में दी जाने वाली अनुग्रह राभिश क े रूप में अति रिरक्त राभिश देने क े खिलए विवविनयोसिज विकया जाएगा। विवद्वान सिजला मसिजZट्रेट की अध्यक्ष ा में गविठ सविमति की विदनांक 21.07.2008 की रिरपोट में 175-200 रुपये प्रति वग मीटर की दर से अति रिरक्त राभिश देने की सिसर्फारिरश की गई है। लेविकन, सविमति की राय में, उपरोक्त राभिश में आंभिशक वृतिद्ध करने का औतिचत्य है। इसखिलए, उपयुक्त विवZ ृ थ्यात्मक विवश्लेर्षण, क ृ र्षकों क े सार्थी परामश, विवचार-विवमश और प्राति करण क े Z र पर विदए गए आश्वासन को ध्यान में रV े हुए, इस सविमति ने यह सिसर्फारिरश की है विक वह पैरा संख्या 4 में वर्भिण 8 गांवों की प्रश्नग भूविम क े पै ृक विकसानों को अनुग्रह राभिश क े रूप में 310 रुपये प्रति वग मीटर की दर से राभिश का भुग ान करे, जो विवत्त वर्ष 2006-2007 में प्राप्त हुई र्थीी और इसक े बाद सविमति को आवKयक कायवाही क े खिलए ग्रेटर नोएडा प्राति करण बोड क े समक्ष सिसर्फारिरश प्रZ ु करने की सिसर्फारिरश की जा ी है। हZ ाक्षर/- श्रवण क ु मार शमा, सिजला मसिजZट्रेट गौ म बुद्ध नगर हZ ाक्षर/- (पंकज अग्रवाल) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा हZ ाक्षर/- (ठाक ु र जयवीर सिंसह) माननीय मंत्री ग्रामीण इंजीविनयरिंरग सेवा क ृ विर्ष विवदेश व्यापार एवं क ृ विर्ष विनया, उत्तर प्रदेश
16. उपयुक्त रिरपोट क े आ ार पर, ग्रेटर नोएडा की 74 वीं बोड बैठक में क े वल 8 गांवों क े 'पुK ैनी' विकसानों को 310 रुपये प्रति वग मीटर की दर से अति रिरक्त मुआवजा/अनुग्रह राभिश क े भुग ान का विनणय खिलया गया र्थीा।
17. ग्रेटर नोएडा प्राति करण की विदनांक 03.11.2008 की 74 वीं बोड बैठक क े कायवृत्त को यहां पुनः प्रZ ु विकया जा रहा हैः- संलग्नक पी-5 क्रम सं. 1-प्राति करण की 74 वीं बोड बैठक क े कायवृत्त की मंजूरी क े खिलए- प्राति करण की 74 वीं बोड बैठक 03.11.2008 को आयोसिज की गई र्थीी। अद्धसरकारी पत्र संख्या यूएमसी /74 वीं बोड बैठक /2008/265 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदनांविक 3.11.2008 क े माध्यम से इस बैठक का कायवृत्त (संलग्नक) प्राति करण क े सदZयों को भेजा गया है। उपयुक्त बैठक क े कायवृत्त को प्राति करण बोड की मंजूरी क े खिलए यहां प्रZ ु विकया जा रहा है। क्रम सं. 9- विवत्त वर्ष 2006-2007 में ग्रेटर नोएडा द्वारा अति ग्रही घोड़ी बछेड़ा और अन्य गाँवों की भूविम क े क ृ र्षकों को बोनस /अनुग्रह/मुआवजा वृतिद्ध की मांग क े संबं में विनम्नखिलखिV गावों की भूविम क े क ृ र्षकों ने, सिजनकी भूविम ग्रेटर नोएडा द्वारा विवत्तीय वर्ष 2006-2007 में अति ग्रही की गई र्थीी, मुआवजा वृतिद्ध की मांग कर े हुए बहु सारे ज्ञापन प्रZ ु विकए हैं - क्रम सं. गाँव का नाम अति ग्रही क्षेत्र (हेक्टेयर में) प्राति करण को कब्जा सौंपने की ति भिर्थी
1. सूरजपुर 69330 01.06.2006 2 अजयपुर 37308 01.06.2006
3. गरबरा 595830 01.06.2006
4. गोंदी बसेरा बसेरा 580.1730 14.06.2006
5. शनि 299.5660 30.10.2006
6. डाढ़ा 215.6010 27.10.2006
7. मथुरापुर 122.2699 27.10.2006
8. डाबरा 111.8868 31.01.2007 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जो समय-समय पर उतिच विनद—शों और माग दशन क े खिलए सरकार को प्रZ ु विकए गए हैं। अध्यक्ष ग्रेटर नोएडा क े 10.06.2008 विदनांविक आदेश द्वारा क ृ र्षकों की मुआवजे की माँग की जाँच करने एवं प्रबं न क े खिलए सिजला मसिजZट्रेट, गौ म बुद्ध नगर, अपर मुख्य कायकारी अति कारी, उप मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा की सविमति गविठ की गई र्थीी, और उपरोक्त सविमति ने अपनी रिरपोट विदनांविक 21.07.2008 में उन विकसानों को 175-200 रुपये प्रति वग मीटर की दर से अति रिरक्त राभिश देने पर विवचार करने की सिसर्फारिरश की है सिजनकी भूविम का अति ग्रहण अन्य गांवों सविह गांव घोड़ी बछेड़ा में विवत्तीय वर्ष 2006,2007 में की गई र्थीी। सविमति की सिसर्फारिरशों का उपयोग कर े हुए 11.08.2008 को आयोसिज बोड की 72 वीं बैठक में यह विनद—श विदया गया र्थीा विक विवत्तीय स्रो ों और इसक े प्रबं न की श्मिZर्थीति की गणना कर े समय, उत्तर प्रदेश सरकार क े आदेश संख्या 4/4/1/2008-सीएक्स (1) लVनऊ विदनांक 4.09.2008 क े अनुसार, मामला सरकार को संदर्भिभ विकया जा सक ा है। सविमति का गठन ग्राम घोड़ी बछेड़ा की भूविम क े संबं में बोनस/अनुग्रह/मुआवजा वृतिद्ध क े संबं में विकसानों की मांगों पर विवचार करने क े खिलए विकया गया र्थीा।
1. श्री ठाक ु र जयवीर सिंसह माननीय मंत्री, ग्रामीण इंजीविनयरिंरग सेवा, क ृ विर्ष विवदेश व्यापार एवं क ृ विर्ष विनया -अध्यक्ष
2. मुख्य कायकारी अति कारी, ग्रेटर नोएडा सदZय
3. सिजला मसिजZट्रेट, गौ म बुद्ध नगर-सदZय समन्वयक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सविमति ने 25 अक्त ू बर, 2008 को अपनी सिसर्फारिरशें प्रZ ु कर दी हैं, सिजसमें यह सिसर्फारिरश की गई है विक उस भूविम क े पै ृक क ृ र्षकों को 310 वग मीटर की दर से अनुग्रह राभिश का भुग ान विकया जाए, सिजसका ग्राम घोड़ी बछेड़ा क े संबं में कब्जा ग्रेटर नोएडा द्वारा 1 अप्रैल, 2006 (विवत्तीय वर्ष 2006-2007) को ग्रेटर नोएडा द्वारा प्राप्त विकया गया र्थीा और सविमति की सिसर्फारिरशों को ग्रेटर नोएडा प्राति करण बोड क े समक्ष आवKयक कायवाही क े खिलए प्रZ ु करने की सिसर्फारिरश की गई है। सविमति की विदनांक 25.10.2008 की रिरपोट संलग्न है और यह कायसूची का एक विहZसा है। क ु ल विमलाकर मुआवजे की राभिश 5522134695.00 रुपये (पांच अरब बावन करोड़ इक्कीस लाV चौं ीस हजार छः सौ पंचानवे रुपये) की गणना 385 रुपये प्रति वग मीटर की दर से की गई। जो विवत्तीय वर्ष 2006- 2007 में अति ग्रही उपरोक्त गांवों की 1434.3207 भूविम क े खिलए उस समय लगाई गई र्थीी। सिजसे पहले ही विवद्वान अपर सिजला मसिजZट्रेट (एल. ए.) को भेजा जा चुका है और भूविम अति ग्रहण अति कारी से प्राप्त 23.06.2008 विदनांविक पत्र संख्या 527/8-वीक े बीएचएल क े अनुसार, 5,27,56,68,568 रुपये (पांच अरब सत्ताईस करोड़, छप्पन लाV अड़सठ हजार पांच सौ अड़सठ रुपये) जो 95.54 प्रति श है, पहले ही संबंति विकसानों क े बीच विव रिर विकया जा चुका है। अपर कलेक्टर (एल. ए.) क े पत्र संख्या 833/8-ए. डी. ओ. (एल. ए.)/08 विदनांविक 21.10.2008 द्वारा प्राप्त सूचना क े अनुसार उपरोक्त गांवों की प्रश्नग अति ग्रही भूविम में से 1392.9586 हेक्टेयर क्षेत्र पै ृक भूविम है। इसखिलए, पै ृक क ृ र्षकों को बढ़ी हुई दरों पर भुग ान करने क े मामले में, अर्थीा ्, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सविमति द्वारा अनुशंसिस 310 रुपये प्रति वग मीटर की दर से भुग ान करने पर, उनका विवत्तीय भार 4318171660 रुपये (चार अरब इक्कीस करोड़ इक्यासी लाV इकहत्तर हजार छह सौ साठ रुपये) होगा। सविमति की रिरपोट प्राति करण बोड क े विवचार क े खिलए प्रZ ु की जा ी है।"
18. विदनांक 15.01.2009 क े आदेश क े माध्यम से, राज्य सरकार ने 'पुK ैनी' भूविम ारकों को बढ़ी हुई मुआवजा/अनुग्रह/बोनस क े भुग ान क े खिलए अपनी मंजूरी दी।
19. सुविव ा क े खिलए, दोनों श्रेभिणयों क े भू-Zवाविमयों को विदए गए मुआवजे का विववरण नीचे प्रZ ु विकया जा रहा हैः- ारीVें पुK ैनी भूZवाविमयों क े खिलए मुआवजे की दर गैर-पुK ैनी भूZवाविमयों क े खिलए मुआवजे की दर मुआवजे 28.10.1997 (ग्रे. नोएडा) मुआवजे क े खिलए 2 श्रेभिणयां बनाना और जुलाई-सिस ंबर, 2006 (भू- Zवाविमयों और ग्रे. नोएडा क े बीच समझौ ा) रू. 322/- प्रति वग गज, जैसा विक पक्षों क े बीच सहमति हुई है। रू. 280 रुपये प्रति वग गज, जैसा विक पक्षों क े बीच सहमति हुई है रू.42/- प्रति वग गज mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 15.01.2009 (भुग ान क े खिलए सतिचव का पत्र) रू. 259.27 प्रति वग गज का अति रिरक्त भुग ान। पुK ैनी विकसानों क े खिलए अनुग्रह भुग ान क े रूप में। गैर-पुK ैनी भूविम माखिलकों क े खिलए कोई अनुग्रह राभिश का भुग ान नहीं रू. 301.27 प्रति वग गज 21.10.2011 (गजराज उच्च न्यायालय का विनणय) और 02.11.2011 (ग्रे. नोएडा ने पुK ैनी भूविम माखिलकों को अति रिरक्त मुआवजे क े रूप में भुग ान की गई राभिश को अनुग्रह राभिश माना। रू. 957.36 प्रति वग गज रू. 461.16 प्रति वग गज रु. 496.20 प्रति वग गज अपीलार्थी1 द्वारा विदए गए क
20. अपीलार्थी1गण क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा विकःmn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA i. भूविम अति ग्रहण अति विनयम की ारा 23 भूविम अति ग्रहण अति विनयम क े ह मुआवजे क े विन ारण में पुK ैनी और गैर-पुK ैनी भूविम माखिलकों क े बीच विवभेद की अनुमति नहीं दे ी है। i. इस न्यायालय द्वारा नागपुर सु ार ट्रZट वाद (पूव क्त) में अति कभिर्थी विवति क े आलोक में, भूविम क े क्रय की ारीV और ग्रे. नोएडा की Zर्थीापना की ारीV क े आ ार पर भू-Zवाविमयों क े उपरोक्त दो वग¨ क े बीच कोई विवभेद नहीं विकया जा सक ा है। विवद्वान अति वक्ता ने क विदया विक सभी भू Zवामी एक ही पायदान पर होने चाविहए। ii. भूविम माखिलकों क े दोनों वग¨ की भूविम एक ही प्रविक्रया क े ह, एक ही सावजविनक उद्देKय क े खिलए अति ग्रविह की गई है और उसका बाजार मू”य एक ही है, और इसखिलए, विकसी भी पक्ष को प्रदान की गई मुआवजे की दर में कोई भी अं र अत्यति क भेदभावपूण है और यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। iii. इसक े अलावा, यह भी क विदया गया है विक क े वल समझौ े पर हZ ाक्षर करक े, इसमें अपीलार्थी1गण क े बारे में यह नहीं कहा जा सक ा है विक उन्होंने मुआवजे की अपील करने क े अपने अति कार को छोड़ विदया है, विवशेर्ष रूप से इस थ्य क े बाद विक पुK ैनी भूविम माखिलकों को दी गई अनुग्रह राभिश का भुग ान समझौ े पर हZ ाक्षर होने क े बाद विकया गया र्थीा। iv. यह भी क विदया गया है विक मुआवजे क े रूप में अनुग्रह राभिश का भुग ान भूविम अति ग्रहण अति विनयम में मौजूद नहीं है, और भूविम अति ग्रहण अति विनयम की ारा 23 क े भी र भुग ान क े कारणों में से क े वल एक क े रूप में इसकी व्याख्या की जा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सक ी है, और ऐसे परिरदृKय में, सभी पक्षों को सावभौविमक रूप से भुग ान विकया जाना चाविहए। प्रति वादीगण द्वारा विदए गए क
21. प्रति वादीगण क े खिलए विवद्वान अति वक्ता ने कहा विकः i. उत्तर प्रदेश भूविम अति ग्रहण विनयमावली भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 क े ह बनाई गई हैं। ये विनयम एक समझौ े क े माध्यम से अति ग्रहणक ा और अति ग्रही ी क े बीच मुआवजे की विवति विन ारिर कर े हैं। अपीलार्थी1गण ने, एक समझौ े क े माध्यम से, Zवेच्छा से उन्हें विदए जा रहे मुआवजे को Zवीकार विकया। इसक े अलावा, मुआवजा Zवीकार कर े समय, इसमें अपीलार्थी1गण ने एक शपर्थी पत्र भी प्रZ ु विकया सिजसमें कहा गया है विक मुआवजा पर सहमति है और पक्षकारों द्वारा Zवीकार विकया गया है। क े वल ीन साल बाद ही अपीलार्थी1गण ने समझौ े में प्रवेश करने और Zपष्ट रूप से मुआवजे की राभिश पर सहम होने क े बाद, मुआवजे को चुनौ ी देने क े खिलए एक रिरट दायर करने का र्फ ै सला विकया। ii.अपीलार्थी1गण ने विवति क े अनुसार एक समझौ ा विकया और उन्हें विदए गए मुआवजे को Zवीकार विकया र्थीा। ऐसे परिरदृKय में, विकसी अन्य पक्ष क े खिलए मुआवजे में बाद में वृतिद्ध क े आ ार पर समझौ े को विर्फर से Vोलने क े खिलए अपीलार्थी1गण क े पास कोई कानूनी उपाय नहीं है। अदाल का दरवाजा VटVटाकर समझौ े को विर्फर से Vोलने का कोई उपाय नहीं है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA iii. भूविम माखिलकों क े दो वग¨ क े बीच अं र उनक े विनवास क े आ ार पर विकया गया है। दोनों श्रेभिणयों को विदया गया मूल मुआवजा समान हैं और पुनवास बोनस क े रूप में पुK ैनी भूविम माखिलकों को क े वल अति रिरक्त 15 प्रति श अति रिरक्त राभिश दी गयी है, जो गैर-पुK ैनी भूविम माखिलकों क े खिलए आवKयक नहीं है क्योंविक वे संबंति भूविम में नहीं रह े हैं और वे उस भूविम क े पुत्र नहीं हैं। iv. जहां क पुK ैनी भू-Zवाविमयों को दी जाने वाली अनुग्रह राभिश का संबं है, यह क े वल उस भूविम क े पुत्रों और भूविम में क े वल विनवेशकों क े बीच वग1करण क े आ ार पर एक अति रिरक्त मुआवजा है। यह भुग ान उतिच वग1करण पर आ ारिर है और यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं कर ा है। मुद्दे
22. उच्च न्यायालय में पूव क्त मुकदमों क े पश्चा ्, इन अपीलों में न्यायविनणयन क े खिलए विनम्नखिलखिV ीन प्रश्न उठ े हैंःi. क्या अपीलार्थी1गण ने समझौ े पर हZ ाक्षर करक े संशोति मुआवजे की मांग करने क े अपने अति कार का त्याग कर विदया है? ii. क्या पुK ैनी भू-Zवाविमयों और गैर-पुK ैनी भू-Zवाविमयों को भिभन्न दरों पर मुआवजे का भुग ान करने क े खिलए भूविम अति ग्रहण अति विनयम और उत्तर प्रदेश भूविम अति ग्रहण विनयमावली, 1997 क े ह विकया गया वग1करण संविव ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने कारण रद्द विकए जाने योग्य है? iii. क्या उच्च न्यायालय की पूण न्यायपीठ द्वारा पुK ैनी भू -Zवाविमयों और गैर- पुK ैनी भू-Zवाविमयों क े बीच विकया गया वग1करण नागपुर सु ार न्यास एवं अन्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बनाम विवठ्ठल राव एवं अन्य (1973) 1 एस. सी. सी. 500 क े वाद में इस माननीय न्यायालय द्वारा अति कभिर्थी विवति का उल्लंघन है?
23. हमने अपीलार्थी1गण क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री प्रदीप कां,ग्रेटर नोएडा की ओर से वरिरष्ठ अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु मार और उत्तर प्रदेश/ए.ए.जी की ओर से वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु मार रायजादा को विवZ ार से सुना।
24. सबसे पहले, हम यह Zपष्ट करना चाह े हैं विक व मान अपीलों में, हम क े वल ग्रे. नोएडा की कारवाई की वै ा से संबंति हैं, जो भूZवाविमयों क े उसी वग में से सिजनकी भूविम उसी उद्देKय क े खिलए उसी अति सूचना द्वारा अति ग्रविह की गई र्थीी, 'पुK ैनी' भूZवाविमयों का एक क ृ वित्रम वग बनाकर भूZवाविमयों को बढ़ी हुई क्षति पूर्ति का भुग ान विकया है। इस अति ग्रहण की वै ा को कोई चुनौ ी नहीं दी जा सक ी है, क्योंविक इस न्यायालय ने अंति म रूप से इसका विनपटारा कर विदया है। विवश्लेर्षण क्या अपीलार्थी1 भूविम अति ग्रहण विनयमों क े ह समझौ े क े अनुसार मुआवजे से बं े हुए हैं और उन्होंने बढ़े हुए मुआवजे की मांग करने क े अपने अति कार को Vो विदया है? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
25. ग्रेटर नोएडा की ओर से यह जोर देकर कहा गया है विक व मान अपीलार्थी1गण ने भूविम अति ग्रहण अति विनयम की ारा 18 क े ह उपलब् उपचार का लाभ नहीं खिलया और उच्च न्यायालय का दरवाजा VटVटाया और एक प्रविक्रयात्मक आवKयक ा को दरविकनार कर विदया। 1894 क े अति विनयम की ारा 18 इस प्रकार हैः- - न्यायालय को संदभ (1) कोई भी विह बद्ध व्यविक्त, सिजसने पंचाट Zवीकार नहीं विकया है, सिजला ीश को खिलखिV आवेदन द्वारा यह अपेक्षा कर सक ा है विक मामला न्यायालय क े अव ारण क े खिलए कलक्टर द्वारा विनर्दिदष्ट विकया जाए, चाहे उसकी आपखित्त भूविम क े मापन, प्रति कर की राभिश, वे व्यविक्त सिजन्हें वह देय है, या विह बद्ध व्यविक्तयों क े बीच प्रति कर क े विवभाजन से संबंति हो। (2) आवेदन में उन आ ारों का उल्लेV विकया जाएगा सिजनक े आ ार पर पंचाट पर आपखित्त उठाई गई हैः परन् ु ऐसा प्रत्येक आवेदन विकया जाएगा, (क) यविद उसे बनाने वाला व्यविक्त या उसका प्रति विनति उस समय सिजला ीश क े समक्ष उपश्मिZर्थी र्थीा जब उसने अपना अति विनणय विदया र्थीा, ो सिजला ीश क े अति विनणय की ारीV से छह सप्ताह क े भी र (V) अन्य मामलों में, ारा 12, उप ारा (2) क े अ ीन सिजला ीश से सूचना प्राप्त होने क े छह सप्ताह क े भी र या सिजला ीश क े पंचाट की ारीV से छह मास क े भी र, इनमें से जो भी अवति पहले समाप्त हो।"
26. ध्यान देने योग्य पहली और सबसे महत्वपूण बा यह है विक उच्च न्यायालय में अपीलार्थी1गण द्वारा दायर रिरट यातिचका में चुनौ ी की प्रक ृ ति अनुच्छेद 14 क े उल्लंघन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर आ ारिर र्थीी, जो संविव ान में प्रति ष्ठाविप एक मौखिलक अति कार है। विकसी अति विनयम क े ह विकसी वैकश्मि”पक उपचार की मौजूदगी क े बावजूद ऐसी चुनौ ी संवै ाविनक न्यायालयों की अति कार क्षेत्र पर रोक नहीं लगा सक ी है।
27. प्रति वादी प्राति करण ने क विदया विक चूंविक करार क े खिलए सहमति दी गई र्थीी, इसखिलए न्यायालय में कोई चुनौ ी विटक नहीं सक ी र्थीी. वाद क े थ्यों क े संदभ में इस क को क े वल अZवीकार करने क े खिलए उठाया गया है। न्यायविनणयन में शाविमल मुद्दा अपीलार्थी1गण द्वारा विकए गए समझौ े क े संबं में नहीं है। इसी रह क े समझौ े ऐसे भू- ारकों द्वारा भी प्राति करण क े सार्थी विकए गए र्थीे, सिजन्हें भूविम क े विनवास/कब्जे की अवति क े आ ार पर विवभेद करक े समझौ े क े बाद अति रिरक्त मुआवजा विदया गया है, सिजसे 'पुK ैनी' और 'गैर-पुK ैनी' भू- ारकों का एक क ृ वित्रम वग1करण बनाकर अति ग्रही विकया गया र्थीा।
28. इसक े अति रिरक्त, चूंविक करार क े समय 'पुK ैनी' और 'गैर-पुK ैनी' का क ृ वित्रम वग1करण करक े अति रिरक्त प्रति कर का मुद्दा अश्मिZ त्व में नहीं र्थीा, इसखिलए इसे चुनौ ी देने का कोई अवसर नहीं र्थीा।
29. इसक े अलावा, विवशेर्ष रूप से अनुग्रह राभिश क े अनुदान क े संदभ में, यह ध्यान देने योग्य है विक एक अलग अति सूचना क े माध्यम से पुK ैनी भूZवाविमयों को विदए गए कभिर्थी भुग ान का मू”यांकन विकया गया र्थीा और दोनों द्वारा समझौ े पर हZ ाक्षर विकए जाने क े बाद विदया गया र्थीा। उन परिरश्मिZर्थीति यों क े ह अपीलार्थी1 अनुच्छेद 14 क े उल्लंघन क े आ ार पर अनुग्रह भुग ान क े संबं में समझौ े को चुनौ ी नहीं दे सक े र्थीे, जबविक समझौ े क े समय ऐसा कोई उल्लंघन नहीं हुआ र्थीा। विकसी भी व्यविक्त से यह उम्मीद नहीं की जा सक ी विक वह भविवष्य में अपने अति कारों क े उल्लंघन की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भविवष्यवाणी करे और पहले से ही अपील दायर कर दे। इस न्यायालय को फ्रांसिसस बेकन क े शब्दों की याद आ ी है, सिजन्होंने 17 वीं श ाब्दी में विवति क विनतिश्च ा और न्याय क े बीच संबं क े बारे में खिलVा र्थीाः “ क्योंविक यविद बाजा अविनतिश्च ध्वविन देगा, ो कौन लड़ाई क े खिलये अपने आप को ैयार करेगा? ो अगर कानून एक अविनतिश्च आवाज देगा, ो इसका पालन करने क े खिलए कौन ैयार होगा? अ ः उसे आघा करने से पहले चे ावनी देनी चाविहए … लहू बहाने का अति कार न हो; और न ही सिसवाय विकसी ज्ञा और विनतिश्च कानून क े अनुसार, विकसी मामले में विकसी भी अदाल में सजा सुनाई जाए और न ही विकसी व्यविक्त को अपने जीवन से वंतिच विकया जाना चाविहए, सिजसे पहले यह नहीं प ा र्थीा विक वह इसे जोखिVम में डाल रहा है।' (कोविकलेट, फ्रांसिसस बेकन पृष्ठ 244 और 248 में उद्धृ, एर्फॉरिरज्म 8 और एर्फॉरिरज्म 39 से?ए ट्रीटाइज आन युविनवसल जश्मिZटस)।"
30. उपरोक्त वर्भिण कारणों क े आ ार पर, हमारी यह सुविवचारिर राय है विक अपीलार्थी1गण ने, समझौ े पर हZ ाक्षर करने क े कारण, संशोति मुआवजा मांगने क े अपने अति कार को Vो नहीं विदया है, क्योंविक, वाद हे ुक उनक े द्वारा समझौ े पर हZ ाक्षर करने क े कार्फी बाद उत्पन्न हुआ। मुद्दा संख्या 1 का उत्तर दनुसार नकारात्मक और अपीलार्थी1गण क े पक्ष में विदया जा ा है। क्या विवभिभन्न दरों पर मुआवजे क े भुग ान क े खिलए पुK ैनी भूZवाविमयों और गैर-पुK ैनी भूZवाविमयों क े बीच कायपाखिलका द्वारा विकए गए वग1करण को संविव ान क े अनुच्छेद 14 क े उल्लंघन क े रूप में रद्द विकया जा सक ा है? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
31. उच्च न्यायालय ने 'पुK ैनी' और 'गैर-पुK ैनी' भू-Zवाविमयों क े बीच वग1करण को बरकरार रV े हुए कहा विक समान रूप से श्मिZर्थी पक्षकारों क े सार्थी कोई भेदभाव नहीं विकया जा रहा है और श्रीम ी मा ुरी श्रीवाZ वा (पूव क्त) क े वाद में न्यायपीठ द्वारा विदए गए विनणय में सही विवति प्रति पाविद की गई है। इस प्रकार, पूण पीठ ने वग1करण को बरकरार रVा और उक्त वग1करण को दी गई चुनौ ी को Vारिरज कर विदया। आक्षेविप विनणय क े प्रासंविगक पैराग्रार्फ यहां पुनः प्रZ ु विकए गए हैंः- "वाद क े गुण-दोर्ष पर आने से पहले, यह कहना उतिच होगा विक सावजविनक उद्देKय क े खिलए विनजी संपखित्त का अति ग्रहण करने क े खिलए राज्य की संप्रभु शविक्त "जन सा ारण की सुरक्षा सव च्च विवति है" पर आ ारिर है सिजसका अर्थी है विक जन ा का क”याण सव परिर कानून है और सिसद्धां “सावजविनक आवKयक ा व्यविक्तग आवKयक ा से अति क महत्वपूण है" का अर्थी है विक सावजविनक आवKयक ा विनजी से अति क है। “सव परिर आति पत्य” (सबई भूविम गोकिंवद की ) का अर्थी है “राज्य भूविम का सव च्च माखिलक है।" भार क े संविव ान में इन बा ों को शाविमल विकया गया है। विनजी संपखित्त का अति ग्रहण संविव ान क े अनुच्छेद 245 और 246 क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए कानून बनाकर विकया जा सक ा है। “संघ क े प्रयोजनों क े खिलए संपखित्त का अजन और अध्यपेक्षा” सूची -I की प्रविवविष्ट संख्या 33 क े रूप में उसिल्लखिV विकया गया र्थीा और “संघ क े प्रयोजनों को छोड़कर संपखित्त का अजन और अध्यपेक्षा ” संविव ान की सा वीं अनुसूची की सूची-II की प्रविवविष्ट संख्या 36 क े रूप में उसिल्लखिV विकया गया र्थीा। संविव ान (सा वां संशो न) अति विनयम, 1956 की ारा 26 द्वारा सूची-I की प्रविवविष्ट संख्या 33 और सूची-II की प्रविवविष्ट संख्या 36 को हटा विदया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गया र्थीा और संविव ान की सा वीं अनुसूची की सूची-III की प्रविवविष्ट संख्या 42 को संपखित्त क े अति ग्रहण और अध्यपेक्षा क े रूप में संशोति विकया गया र्थीा। विनजी पक्षों का अति ग्रहण संविव ान क े अनुच्छेद 298 क े ह कायकारी शविक्त का उपयोग करक े विकया जा सक ा है। भार सरकार और राज्य सरकारें विव ायी या कायकारी शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए विनजी संपखित्त का अति ग्रहण कर सक ी हैं। वग1करण और उसकी कसंग ा से संबंति मुद्दे पर विवचार क े दौरान, हमें यह भी ध्यान रVना चाविहए विक शासन एक सरल चीज नहीं है। यह उन समZयाओं का सामना कर ी है और उन पर विवचार कर ी है जो विवभिभन्न प्रकार क े संबं ों में व्यविक्तयों से आ ी हैं। वग1करण उन संबं ों की मान्य ा है, और इसे विववेक और विनणय का एक व्यापक अक्षांश बनाया जाना चाविहए। उपरोक्त संवै ाविनक उपबं ों और अति विनयम, 1894 क े आशय, विवशेर्ष रूप से अति विनयम, 1894 की ारा 23 और 24 क े उपबं ों को ध्यान में रV े हुए मामले क े सभी पहलुओं पर विवचार करने क े बाद, हमारी यह राय है विक पुK ैनी और गैर -पुK ैनी विकसानों क े बीच विकया गया विवभेद बुतिद्धमत्तापूण अं र क े सार्थी कसंग है और विकसी भी रह से समान रूप से श्मिZर्थी व्यविक्त क े बीच कोई भेदभाव पैदा नहीं कर ा है। श्रीम ी मा ुरी श्रीवाZ वा (पूव क्त) क े वाद में अति कभिर्थी विवति में इन सभी प्राव ानों का पयाप्त ध्यान रVा गया है और यह विनष्कर्ष विनकाला गया है विक पुK ैनी और गैर पुK ैनी विकसान दो अलग-अलग वग हैं और विवभिभन्न दरों पर अति रिरक्त मुआवजा देने का प्रZ ाव विब”क ु ल भी भेदभावपूण नहीं है।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
32. आक्षेविप वग1करण की वै ा का आकलन करने क े खिलए, हमें इसे अनुच्छेद 14 क े माध्यम से रVना चाविहए और यह देVना चाविहए विक क्या यह अपने नामकरण पर Vरा उ र ा है। यह विवति का एक सुZर्थीाविप सिसद्धां, विक अनुच्छेद 14 क े अनुसार राज्य, विवति क े समक्ष समान ा और विवति क े समान संरक्षण से इनकार नहीं कर सक ा है। उतिच वग1करण परीक्षण
33. अनुच्छेद 14 की कसौटी पर Vरा उ रने क े खिलए विकसी भी वग1करण को समझ में आने वाले अं र पर आ ारिर होना चाविहए और कानून द्वारा प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े सार्थी इसका कसंग संबं होना चाविहए। इस Z र पर, यह ध्यान रVना महत्वपूण है विक प्राप्त विकया जाने वाला उद्देKय भी विवति सम्म होना चाविहए, और यविद कानून का उद्देKय ही विवभेदकारी पाया जा ा है, ो इस रह क े भेदभाव को समाप्त विकया जाना चाविहए। यह अनेक विनणयों में ारिर विकया गया है।
34. वग1करण युविक्तयुक्त ा परीक्षण को पहली बार भार ीय न्यायशास्त्र में पतिश्चम बंगाल राज्य बनाम अनवर अली सरकार[7] क े वाद में आरंभ विकया गया र्थीा। उसमें उठाया गया मुद्दा बंगाल विवशेर्ष न्यायालय अति विनयम क े विवरुद्ध र्थीा सिजसे कति पय अपरा ों क े शीघ्र विवचारण क े प्रयोजन क े खिलए अति विनयविम विकया गया र्थीा। इस अति विनयम को राज्य सरकार को मनमानी शविक्तयां देने वाले अति विनयम क े आ ार पर अनुच्छेद 14 की कसौटी पर चुनौ ी दी गई र्थीी। न्यायालय ने राज्य की अपील को Vारिरज कर े हुए ारिर विकया विक - 7 (1952) AIR 75 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “यह सुZर्थीाविप माना जाना चाविहए विक अनुच्छेद 14 में अं र्दिनविह सिसद्धां यह नहीं है विक विवति क े समान विनयम भार ीय क्षेत्र क े भी र सभी व्यविक्तयों पर लागू होने चाविहए या यह विक परिरश्मिZर्थीति यों क े अं र क े बावजूद उन्हें समान उपचार उपलब् कराए जाने चाविहए [चरनजी लाल चौ री बनाम भार संघ, 1950 एससीआर 869:1950 एस. सी. 833)। इसका अर्थी क े वल यह है विक सभी समान श्मिZर्थी व्यविक्तयों क े सार्थी प्रदत्त विवशेर्षाति कारों और दातियत्वों (ओ”ड तिडयरबॉन तिडZट्रीब्यूकिंटग क ं पनी बनाम सीग्राम तिडश्मिZटलस कॉप., 81 एल एड 109:299 यू एस 183 (1936):1936 एससीसी ऑनलाइन यूएस एससी 145) दोनों मामलों में समान रूप से व्यवहार विकया जाएगा। समान श्मिZर्थीति में सभी पर समान कानूनों को लागू करना होगा और एक व्यविक्त और दूसरे व्यविक्त क े बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाविहए यविद विव ान की विवर्षयवZ ु क े संबं में उनकी श्मिZर्थीति कार्फी हद क समान है। इससे वग1करण का सवाल उठ ा है। चूंविक समान संरक्षण विनयम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, यविद कानून एक विनतिश्च वग क े सभी क े सार्थी समान रूप से व्यवहार कर ा है, ो विव ानमंडल को व्यविक्तयों को वग1क ृ करने और उन लोगों को कानून क े एक ही विनयम क े ह रVने का विनZसंदेह अति कार है सिजनकी श्मिZर्थीति यां कार्फी हद क समान हैं, जबविक भिभन्न व्यविक्तयों पर भिभन्न विनयम लागू हो सक े हैं। यह कहा जा ा है विक समान संरक्षण Vंड क े ह पूरी समZया वग1करण या रेVाओं को Vींचने की है। [डाउलिंलग: संवै ाविनक विवति पर मामले, चौर्थीा संZकरण 1139)] वग1करण करने में विव ातियका से विनतिश्च रूप से “अमू समरूप ा” प्रदान करने की अपेक्षा नहीं की जा सक ी। यह समाज की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जरूर ों और आवKयक ाओं क े अनुसार वग¨ को बना सक ा है और अलग कर सक ा है, जैसा अनुभव से लगे। यह "बुराई की तिडग्री" को भी पहचान सक ा है [श्मिZकनर बनाम ओकलाहोमा, 86 एल एड 1655: 316 यू. एस. 535, पृ.540 (1942):1942 एससीसी ऑनलाइन यूएस एससी 125)] लेविकन वग1करण कभी भी मनमाना, क ृ वित्रम या अZपष्ट नहीं होना चाविहए। यह हमेशा उस चीज क े वाZ विवक और ठोस विवभेद पर आ ारिर होना चाविहए सिजसक े संबं में वग1करण विकया गया है और विबना विकसी उतिच आ ार क े विकए गए वग1करण को अवै माना जाना चाविहए। [सदन रेलवे क ं. बनाम ग्रीन, 54 एल एड 536:216 यू. एस. 400, पृ.412 (1910):1910 एससीसी ऑनलाइन यूएस एससी 59)] इन प्रZर्थीापनाओं का हमारे सामने Vंडन नहीं विकया गया है और यह भी प्रति वादी की ओर से विववाविद नहीं है विक उप ारणा हमेशा विकसी अति विनयमन की संवै ाविनक ा क े पक्ष में हो और उस पर हमला करने वाले पर यह विदVाने का भार हो ा है विक संवै ाविनक सिसद्धां ों का उल्लंघन हुआ है। मैं विवद्वान महान्यायवादी की इस दलील से विब”क ु ल भी प्रभाविव नहीं हूं विक प्रति वादी को संविव ान क े अनुच्छेद 14 क े संरक्षण का उपयोग करने में सक्षम बनाने क े खिलए यह विदVाया जाना चाविहए विक सिजस कानून की भिशकाय की गई है वह ‘शत्रु ापूण’ विव ान का एक विहZसा है। ‘भेदभावपूण’ और ‘शत्रु ापूण’ पदों का उपयोग अमेरिरकी न्याया ीशों द्वारा समान संरक्षण Vंड पर चचा क े संबं में अक्सर एक सार्थी और लगभग समानार्थी1 अभिभव्यविक्तयों क े रूप में विकया जा ा है। यविद कोई विव ान विवभेदकारी है और एक व्यविक्त या व्यविक्तयों क े वग क े सार्थी समान रूप से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA श्मिZर्थी अन्य व्यविक्तयों की ुलना में भेदभाव कर ा है और पहले वाले को उन विवशेर्षाति कारों से वंतिच कर ा है जो बाद वाले को प्राप्त हो े हैं, ो इसे इस अर्थी में प्रति क ू ल माना जाना चाविहए विक यह उस व्यविक्त या वग क े विह ों को क्षति कारक रूप से प्रभाविव कर ा है। विनःसंदेह, यविद विकसी व्यविक्त क े विह विकसी विवशेर्ष विव ान से प्रभाविव नहीं हो े हैं, ो उसे भिशकाय करने का कोई अति कार नहीं हो सक ा है। लेविकन यविद यह साविब हो जा ा है विक भिशकाय करने वाले व्यविक्त क े सार्थी कानून क े परिरणामZवरूप भेदभाव विकया गया है और समान पद पर आसीन अन्य लोगों क े सार्थी समान विवशेर्षाति कारों से वंतिच विकया गया है, ो मैं नहीं समझ ा विक यह उसक े खिलए आवKयक है विक वह अपने मूल अति कार क े आ ार पर राह का दावा करने से पहले यह दावा करे और साविब करे विक कानून बना े समय विव ातियका ने विकसी विवशेर्ष व्यविक्त या वग क े खिVलार्फ शत्रु ापूण या विवरो ी इरादे से काम विकया। इसी कारण से मैं विवद्वान महान्यायवादी से सहम नहीं हो सक ा विक इस रह क े मामलों में, हमें यह प ा लगाना चाविहए विक कानून बनाने में विव ातियका का प्रमुV इरादा क्या र्थीा और अनुच्छेद 14 क े संचालन को बाहर रVा जाएगा यविद यह साविब हो जा ा है विक विव ातियका का भेदभाव करने का कोई इरादा नहीं र्थीा, हालांविक भेदभाव अति विनयम का आवKयक परिरणाम र्थीा। जब विवति क े विक्रयान्वयन में पदाति कारी क े विवरुद्ध भेदभाव का आरोप हो ब आशय का प्रश्न आशय का प्रश्न यह विन ारिर करने में सारवान हो सक ा है विक क्या पदाति कारी ने दुभावना से काय विकया या नहीं। [संडे लेक आयरन क ं. बनाम वेकर्फी”ड, 62 एल एड 1154:247 यू एस 350 (1918):1918 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एस. सी. सी. ऑन-लाइन यूएस एससी. 148)] किंक ु आशय का प्रश्न ब नहीं उठ सक ा जब विवभेद Zवयं विवति की अभिभव्यक्त श ¨ पर उद्भू हो ा है।"
35. रूZ म कवासजी क ू पर (बैंकों का राष्ट्रीयकरण) बनाम भार संघ[8] क े प्रकरण में आर.सी. क ू पर, जो सेंट्रल बैंक ऑर्फ इश्मिण्ड़या क े विनदेशक र्थीे, ने बैंकिंकग क ं पनी (उपक्रमों का अति ग्रहण और हZ ां रण) अध्यादेश, 1969 क े प्राव ानों को चुनौ ी दे े हुए भार ीय संघ क े खिVलार्फ एक यातिचका दायर की र्थीी। न्याायलय ने इस वाद में र्फ ै सला सुना े हुए कहा विक वह क े वल कनीकी आ ार पर नागरिरकों क े मूल अति कार क े उल्लंघन की अनदेVी नहीं कर सक ी। न्यायालय ने आगे कहा विक न्यायालय आक्षेविप अति विनयम क े उद्देKयों की जांच नहीं करेगा बश्मि”क वे आक्षेविप अति विनयम क े प्रभाव की जांच करेगा।न्यायालय ने इस अति विनयम को अनुच्छेद 14 का Zपष्ट उल्लंघन पाया क्योंविक क े वल 14 बैंकों को भविवष्य में बैंकिंकग व्यवसाय करने से रोक विदया गया र्थीा जबविक विवदेशी बैंकों सविह अन्य बैंकों को भार में बैंकिंकग काय जारी रVने की अनुमति दी गई र्थीी। उक्त प्रकरण में विनम्नानुसार अवलोकन विकया गया हैः- "संविव ान क े अनुच्छेद 14 क े ह राज्य को यह सिजम्मेदारी दी गई है विक वह भार क े राज्य क्षेत्र क े भी र विकसी भी व्यविक्त को कानून क े समक्ष समान ा या कानूनों क े समान संरक्षण से वंतिच न करे। यह अनुच्छेद वग विव ान की मनाही कर ा है, लेविकन कानून बनाने में उतिच वग1करण नहीं कर ा है। विकसी अति विनयम क े ह Zवीकाय वग1करण की कसौटी दो संचयी श ¨ में विनविह हैः (1) अति विनयम क े अ ीन वग1करण को एक ऐसे बो गम्य अं र पर Zर्थीाविप विकया जाना चाविहए जो समूह से छ ू ट गए व्यविक्तयों, संव्यवहारों या चीजों को एक सार्थी वग1क ृ कर ा है। वग1करण क े आ ार और अति विनयम क े उद्देKय क े बीच ार म्य ा होनी चाविहए। आवKयक ा क े बारे में विव ायी नीति विव ायी विनणय का विवर्षय है 8 (1970) 1 एससीसी 248 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और न्यायालय इसक े औतिचत्य की जांच नहीं करेगा। यह जरूरी नहीं है विक कानून सभी क े खिलए हो और यह य करना विव ातियका का काम है विक विकन श्रेभिणयों को अपनाया जाएगा। डालविमया क े प्रकरण में (राम क ृ ष्ण डालविमया बनाम एस. आर. ेन्दोलकर, 1959 एस. सी. आर. 279) यह कहा गया र्थीा विक वग1करण क े दो परीक्षण है। प्रर्थीम- एक ऐसा बो गम्य विवभेद होना चाविहए जो एक समूहग व्यविक्तयों या वZ ुओं को उस समूह से अपवर्जिज व्यविक्तयों और वZ ुओं को पृर्थीक कर ा है । विद्व ीय- विवभेद का विव ान क े द्वारा प्राप्त विकये जाने वाले उद्देKय क े सार्थी कसंग संबं होना चाविहए।
36. हाल ही में, नव ेज सिंसह जौहर और अन्य बनाम सतिचव, विवति न्याय मंत्रालय क े माध्यम से भार संघ[9] क े प्रकरण में इस न्यायालय की संविव ान पीठ ने भा.द.सं. की ारा 377 को विनरZ करने संबं ी प्रशन पर विवचार कर े हुए युविक्तयुक्त वग1करण की जाँच करने कहा है चूंविक यह संविव ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर ा है। जो इस प्रकार हैः- "हमें सबसे पहले संविव ान क े अनुच्छेद 14 क े ह भार ीय दंड संविह ा की ारा 377 की वै ा की जांच करनी चाविहए। अनुच्छेद 14 कह ी है विक सभी क े सार्थी समान व्यवहार विकया जाना चाविहए। दूसरे शब्दों में इसका अर्थी है सभी क े सार्थी समान व्यवहार। यद्यविप विव ातियका को विकसी विवशेर्ष वग क े खिलए लागू कानून बनाने का पूण अति कार है, जैसा विक उस प्रकरण में है सिजसमें ारा 377 उन नागरिरकों पर लागू हो ी है जो शारीरिरक संबं बना े हैं, विर्फर भी इस वग1करण मेंं, सिजसमें भार ीय दंड संविह ा की ारा 377 शाविमल है, को इस आशय की दोहरी श ¨ को पूरा करना होगा विक वग1करण एक बो गम्य अं र पर आ ारिर होना चाविहए और उक्त अं र का भार ीय दंड संविह ा की ारा 377 क े प्राव ान द्वारा प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े सार्थी कसंग संबं होना चाविहए। ारा 377 ने नागरिरकों क े एक समूह को हाभिशये पर डाल विदया है। यह उनकी पहचान को बाह कर रहा है। सहमति से यौन संबं में बनाने वाले वयZकों पर कानून क े 9 (2018) 10 एससीसी 1 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति बं लगाकर इसने राज्य प्राति कारिरयों को सामासिजक रूविढयों और भेदभाव को प्रोत्साविह करने का अति कार दे विदया है। समलैंविगकों, समलैंविगकों, उभयलिंलगी और ट्रांसजेंडरों ने विनजी पहचान क े चल े कष्ट भोगा है। यविद भयादोहन न हो, नेटवक और तिडसिजटल युग में यौन उन्मुVीकरण शोर्षण का लक्ष्य बन गया है। ारा 377 का प्रभाव अपरा की सजा से कहीं अति क है। यह एक ऐसी पहचान क े खिलए विवनाशकारी रहा है जो एक सम्माविन अश्मिZ त्व क े खिलए महत्वपूण है।
37. इस प्रकरण में, उच्च न्यायालय की पूण पीठ द्वारा यह विनणय विदया गया है विक पुK ैनी और गैर-पुK ैनी भू-Zवाविमयों क े बीच वग1करण एक वग क े भू-Zवाविमयों पर आ ारिर है जो र ी पुत्र हैं, जबविक अन्य वग क े वल भू-Zवाविमयों क े रूप में है, जो सी े भूविम से जुड़े नहीं हैं। इसक े अति रिरक्त, इस वग1करण का उद्देKय, जैसा विक उच्च न्यायालय की पूण न्यायपीठ द्वारा कहा गया है, मूल विनवासिसयों, अर्थीा, र ी पुत्र का पुनवास करना है जो अपनी जमीन क े अति ग्रहण क े कारण भूविमहीन जाएंगे।
38. जबविक प्रर्थीमदृष्टया, वग1करण और उपयुक्त वग1करण क े माध्यम से प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय उतिच प्र ी हो े हैं, र्थीाविप, चीजे सिज नी आसान हो ी है विकन् ु उसका विववरण उन ा ही जविटल हो ा है। ग्रेटर नोयडा प्राति करण और उच्च न्यायालय की पूण पीठ द्वारा विदए गए औतिचत्य में यह माना गया है विक क े वल पुK ैनी भूZवामी ही Zर्थीायी रूप से विवर्षय भूविम में रह े हैं या विवर्षय भूविम क े वल पुK ैनी भूZवाविमयों क े खिलए आय का प्रार्थीविमक स्रो है, और इस ारणा को प्राति करण द्वारा प्रZ ु विकए गए विकसी भी अनुभवजन्य डेटा का समर्थीन नहीं विकया गया है।
39. जबविक ग्रेटर नोएडा द्वारा विकया गया वग1करण उतिच प्रति कर देने क े उद्देKय पर आ ारिर है, र्थीाविप, वग1करण का ऐसा प्रशंसनीय उद्देKय ऐसे वग1करण क े प्रभावों से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भंग हो जाएगा, सिजससे उद्देKय और उसक े प्रभाव क े बीच विवसंगति पैदा होगी। कई गैर-पुK ैनी भू-Zवाविमयों, सिजनक े विनवास का मुख्य क्षेत्र या उनकी आय का मुख्य स्रो भी विवर्षय भूविम है, को बड़े भेदभाव और अन्याय का सामना करना पड़ेगा, यविद वह मुआवजा उन्हें नहीं विदया जा ा है जो पुK ैनी भू-Zवाविमयों को विदया गया है।
40. इसक े अति रिरक्त, यह भी उल्लेV विकया जाना चाविहए विक इस Z र पर न्यायालय प्रत्यर्थी1 प्राति कारी क े दावों को सत्याविप करने क े खिलए थ्य की Vोज विमशन में नहीं लग सक ा है। इस रह क े वग1करण को सही ठहराने क े खिलए, प्रत्यर्थी1 प्राति कारी को अपने दावे क े समर्थीन में साक्ष्य प्रZ ु करना चाविहए र्थीा। विबना विकसी साक्ष्य क े क े वल बयानों को हम उक्त वग1करण क े औतिचत्य क े रूप में Zवीकार नहीं कर सक े हैं, सिजसका वग1करण क े हारने वाले पक्ष पर कमजोर प्रभाव पड़ सक ा है।
41. अनुच्छेद 14 की कविठन कसौटी पर Vरा उ रने क े खिलए, आक्षेविप वग1करण को न क े वल उपयुक्त परीक्षण से गुजरना होगा बश्मि”क वेन्सबरी सिसद्धां पर और विवZ ारशः आनुपाति क परीक्षण में भी सर्फल होना पड़ेगा । वेन्सबरी सिसद्धां
42. एसोसिसएटेड प्रोकिंवभिशयल विपक्चर हाउसेज खिलविमटेड बनाम भार संघ10 क े प्रकरण में उच्च म न्यायालय ने यह म व्यक्त विकया है। किंकग्स पीठ तिडवीजन क े समक्ष यह प्रश्न र्थीा विक विकन परिरश्मिZर्थीति यों में न्यायालय प्रशासविनक व्यवZर्थीा बनाने क े मामलों में हZ क्षेप कर सक ा है। इस पर विवचार कर े हुए, न्यायालय ने कहा विकया विक प्रशासविनक विवविनश्चयों में हZ क्षेप क े वल भी अनुज्ञेय है जब (i) आदेश विवति क े प्रति क ू ल है (ii) या प्रासंविगक कारकों पर विवचार नहीं विकया गया है, या (iii) अप्रासंविगक कारकों पर विवचार विकया गया र्थीा या (iv) या विनणय ऐसा र्थीा विक समान 10 [1948] 1 क े.बी. 223 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरश्मिZर्थीति यों में कोई अन्य प्राति कारी इस विनष्कर्ष पर नहीं पहुंचा सक ा र्थीा। इस विनणय का प्रासंविगक प्रZ र विनम्नानुसार हैः- परिरणामZवरूप, इस अपील को Vारिरज कर विदया जाना चाविहए। मैं Vुद को दोहराना नहीं चाह ा, लेविकन मैं एक बार विर्फर लागू सिसद्धां को संक्षेप में प्रZ ु करू ं गा। न्यायालय यह देVने की दृविष्ट से Zर्थीानीय प्राति कारी की कारवाई की जांच करने का हकदार है विक क्या उन्होंने ऐसे मामलों को विवचार विकया है, सिजन पर उन्हें विवचार नहीं करना चाविहए या इसक े विवपरी उन्होंने उन मामलों पर विवचार करने से इनकार कर विदया है, सिजन पर उन्हें विवचार करना चाविहए। एक बार जब इस प्रश्न का उत्तर Zर्थीानीय प्राति कारी क े पक्ष में दे विदया जा ा है, ब भी यह कहना संभव है विक यद्यविप Zर्थीानीय प्राति कारी ने उन मामलों क े चार कोनों क े भी र रVा है सिजन पर उन्हें विवचार करना चाविहए, विर्फर भी वे इस विनष्कर्ष पर पहुंचे हैं विक कोई भी युविक्तयुक्त प्राति कारी उस पर कभी नहीं पहुंच सक ा र्थीा। ऐसे प्रकरण में, मुझे राय है विक अदाल हZ क्षेप कर सक ी है। प्रत्येक वाद में हZ क्षेप करने क े खिलए न्यायालय की शविक्त अपीलीय प्राति कारी क े रूप में Zर्थीानीय प्राति कारी क े विनणय को रद्द करने क े खिलए नहीं है, बश्मि”क एक न्यातियक प्राति कारी क े रूप में है, और क े वल यह देVने क े खिलए विक क्या Zर्थीानीय प्राति कारी ने संसद द्वारा प्रदत्त शविक्त से अति क शविक्त का प्रयोग करक े कायवाही कर े हुए विवति उल्लंघन विकया गया। यह अपील वाद व्यय क े सार्थी Vारिरज कर दी जानी चाविहए।"
43. वेन्सबरी सिसद्धां को सवप्रर्थीम भार ीय न्यायशास्त्र में ओम क ु मार और अन्य बनाम भार का संघ क े प्रकरण11 शाविमल विकया गया र्थीा। जहां पुनः उच्च म न्यायालय क े समक्ष यह प्रश्न उठाया गया र्थीा विक न्यायायलय कब कायकारी विवति बनाने क े मामलों में अपनी न्यातियक पुनर्दिवलोकन की शविक्त का प्रयोग कर सक ा है। इस न्यायालय ने, वेन्सबरी क े प्रकरण में प्रति पाविद उसी सिसद्धां ों को दोहराया। उक्त विनणय क े प्रासंविगक अंश विनम्नानुसार हैः- 11(2001) 2 एससीसी 386 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 1948 में, वेन्सबरी वाद [(1948) 1 क े बी 223:(1947) 2 ऑल ईआर 680 (सीए) में लाड ग्रीन ने कहा गया है विक जब कोई अति विनयम विकसी प्रशासक को विनणय लेने का विववेकाति कार दे ा है ो न्यातियक पुनर्दिवलोकन का दायरा सीविम हो जाएगा। उन्होंने कहा विक हZ क्षेप ब क Zवीकाय नहीं है जब क विक विनम्नखिलखिV श ¨ में से एक या अन्य की पूर्ति नहीं हो जा ी है, अर्थीा यह आदेश कानून क े विवपरी है, या प्रासंविगक कारकों पर विवचार नहीं विकया गया है, या अप्रासंविगक कारकों को महत्वपूण माना गया है या विनणय ऐसा है जो कोई भी उतिच व्यविक्त नहीं ले सक ा है। प्रशासविनक कारवाई की वै ा का आँकलन करने क े खिलए विब्रटेन और भार में इन सिसद्धां ों का अनवर रूप से पालन विकया गया र्थीा। "
44. ग्रेटर नोयडा द्वारा विकया गया वग1करण भूविम अति ग्रहण अति विनयम या उत्तर प्रदेश भूविम अति ग्रहण विनयमों में अपना आ ार नहीं पा ा है और इसखिलए यह कानून क े विवपरी है। उक्त वग1करण प्रासंविगक विबन्दुओं पर विवचार नहीं विकये जाने से प्रभाविव है। प्राति करण ने विकसी भी अनुभवजन्य डेटा को ध्यान में रVे विबना, या गैर-पुK ैनी भूZवाविमयों क े भूविमहीन होने या आय क े प्रार्थीविमक स्रो क े विबना होने की विकसी भी संभावना की गणना क े विबना, विववाविद वग1करण विकया। चूंविक इन सुसंग कारकों पर विवचार नहीं विकया गया है इसखिलए गैर-पुZ ैनी भू-Zवाविमयों क े प्रति गम्भीर अन्याय हो सक ा है।
45. इसक े अति रिरक्त, ग्रेटर नोयडा ने अश्मिन् म ति भिर्थी क े आ ार पर भूविम माखिलकों को मनमाने ढंग से पुK ैनी और गैर-पुK ैनी क े रूप में वग1क ृ करक े एक अप्रासंविगक कारक पर विवचार विकया है। अश्मिन् म ति भिर्थी अपने आप में इस बा का संक े नहीं है विक भूविम का Zवामी कौन हैं? चूंविक वग1करण कर े समय इन ीन कारकों का अनुपालन नहीं विकया गया है इसखिलए न्यायालय को ऐसे वग1करण को रद्द कर देना चाविहए।
46. जबविक वेन्सबरी सिसद्धां को विनवचन क े मागदशक सिसद्धां क े रूप में उपयोग विकया गया है, भार ीय न्यायालय ने अब यह देVने क े खिलए अत्यति क कठोर परीक्षण, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अर्थीा ्, आनुपाति क ा परीक्षण को अपनाया है विक क्या कोई प्रशासविनक कारवाई अनुच्छेद 14 की कठोर ा से गुजर सक ी है। आनुपाति क परीक्षण
47. ओम क ु मार (पूव क्त) क े वाद में, इस न्यायालय ने अभिभविन ारिर विकया विक प्रशासविनक उपाय वांभिछ परिरणाम प्राविप्त क े खिलए आवKयक से अति क कठोर नहीं होना चाविहए। यह भार ीय न्यायशास्त्र में आनुपाति क ा परीक्षण का पहला औपचारिरक परिरचय र्थीा, हालांविक न्यायालय ने इंविग विकया विक इस विनणय से पहले भी भार ीय न्यायालयों द्वारा आनुपाति क ा परीक्षण का उपयोग विकया गया है। उक्त रिरपोट क े प्रासंविगक पैराग्रार्फ इस प्रकार हैंः- “27. यह सिसद्धां उन्नीसवीं श ाब्दी में प्रभिशया में उत्पन्न हुआ और ब से जमनी, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में अपनाया गया है। लक्ज़मबग की यूरोविपयन कोट ऑर्फ जश्मिZटस और Zट्रासबग की यूरोविपयन कोट ऑर्फ ह्यूमन राइट्स ने प्रशासविनक कारवाई की वै ा को परV े हुए इस सिसद्धां को लागू विकया। लेविकन उससे भी बहु पहले, भार ीय उच्च म न्यायालय ने 1950 से विव ायी कारवाई में आनुपाति क ा क े सिसद्धां को लागू विकया है, जैसा विक नीचे विवZ ार से ब ाया गया है।
28. "आनुपाति क ा" "से हमारा यह प्रश्न अभिभप्रे है विक क्या, मूल अति कार क े प्रयोग को विवविनयविम कर े समय, यर्थीा श्मिZर्थीति, विव ान क े उद्देKय या प्रशासविनक आदेश क े प्रयोजन को प्राप्त करने क े खिलए विव ानमंडल या प्रशासक द्वारा उपायों का समुतिच या न्यून म प्रति बं ात्मक चयन विकया गया है। इस सिसद्धां क े ह, न्यायालय यह देVेगा विक विव ातियका और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रशासविनक प्राति कारी उस उद्देKय को ध्यान में रV े हुए, सिजसे वे पूरा करना चाह े र्थीे, व्यविक्तयों क े अति कारों, Zव ंत्र ाओं या विह ों पर कानून या प्रशासविनक आदेश क े प्रति क ू ल प्रभावों क े बीच उतिच सं ुलन बनाए रVें। र्थीाविप, विव ातियका और प्रशासविनक प्राति कारी को विववेकाति कार का क्षेत्र या विवक”पों की एक श्रृंVला दी जा ी है किंक ु यह विक विकया गया चयन अति कारों का अत्यति क अति क्रमण कर ा है या नहीं, यह न्यायालय द्वारा विन ारिर विकया जाना है। आनुपाति क ा का यही अर्थी है।
29. आनुपाति क ा क े उपयुक्त सिसद्धां को यूरोपीय न्यायालय द्वारा मानव अति कारों और मौखिलक Zव ंत्र ा क े संरक्षण क े खिलए यूरोपीय कन्वेंशन, 1950 क े अ ीन गारंटीक ृ अति कारों क े संरक्षण क े खिलए लागू विकया गया है और विवशेर्ष रूप से, इस पर विवचार करने क े खिलए विक क्या लगाए गए प्रति बं ऐसे प्रति बं र्थीे जो उक्त कन्वेंशन क े अनुच्छेद 8 से 11 [हमारे अनुच्छेद 19 (1) क े अनुरूप] क े भी र 'आवKयक' र्थीे और यह प ा लगाने क े खिलए विक क्या मौखिलक Zव ंत्र ा पर लगाए गए प्रति बं आवKयक ा से अति क र्थीे। (हैंडीसाइड बनाम यूक े [(1976) 1 ईएचआर 737] कन्वेंशन क े अनुच्छेद 2 और 5 में जीवन और Zव ंत्र ा से संबंति हमारे संविव ान क े अनुच्छेद 21 क े समान प्राव ान हैं। यूरोपीय न्यायालय ने कन्वेंशन क े अनुच्छेद 14 क े ह (हमारे संविव ान क े अनुच्छेद 14 क े अनुरूप) भेदभाव क े प्रश्नों पर भी आनुपाति क ा क े सिसद्धां को लागू विकया है। (जे. श्वाज द्वारा खिलखिV यूरोपीय प्रशासविनक व्यवZर्थीा 1992, पृष्ठ 677-866 देVें)।
30. वर्ष 1950 से ही हमारे संविव ान क े भाग III में मूल अति कार पर एक अध्याय क े कारण, भार ीय न्यायालय उस विवकलांग ा से पीविड़ नहीं र्थीे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिजसका अनुभव अंग्रेजी न्यायालयों द्वारा आनुपाति क ा क े सिसद्धां पर विव ान को असंवै ाविनक घोविर्ष करने या अति कारों क े चाटर क े बनाने में महसूस कर ी र्थीी। वर्ष 1950 से ही आनुपाति क ा का सिसद्धां भार में विव ायी (और प्रशासविनक) कारवाई पर सख् ी से लागू विकया जा रहा है। भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 19 (1) में वर्भिण मौखिलक Zव ंत्र ा का उल्लंघन करने वाले विव ान की वै ा क े बारे में विवचार कर े समय-जैसे भार्षण और अभिभव्यविक्त की Zव ंत्र ा, शांति पूवक एकत्र होने की Zव ंत्र ा, संघ और समूह बनाने की Zव ंत्र ा, भार क े विकसी भी क्षेत्र में Zव ंत्र रूप से आने-जाने की Zव ंत्र ा, भार क े विकसी भी विहZसे में रहने और बसने की Zव ंत्र ा-इस न्यायालय को यह विवचार करने का अवसर विमला है विक क्या विव ान द्वारा लगाए गए प्रति बं श्मिZर्थीति क े अनुरूप नहीं र्थीे और वे न्यून म प्रति बं ात्मक र्थीे। यह विदVाने क े खिलए विक प्रति बं उतिच र्थीा, सबू का बोझ राज्य पर पड़ा। अनुच्छेद 19 (2) से (6) क े ह इन Zव ंत्र ाओं पर क े वल विव ान द्वारा उतिच प्रति बं लगाए जा सक े हैं और न्यायालयों को प्रति बं ों की आनुपाति क ा पर विवचार करने का अवसर विमला है। इस न्यायालय क े अनेक विनणयों में इस बा पर विवचार विकया गया विक विकस हद क उतिच प्रति बं लगाए जा सक े हैं। चिंच ामनराव बनाम मध्य प्रदेश राज्य [1950 एससीसी 695:एयर 1951 एस सी 118:1950 एस. सी. आर. 759)] क े मामले में न्यायमूर्ति महाजन ( त्समय) ने यह म व्यक्त विकया विक “युविक्तयुक्त विनब½ ” जो राज्य मूल अति कारों पर लगा सक ा है उससे मनमाना या कठोर प्रक ृ ति का नहीं होना चाविहए जो जन ा क े विह में आवKयक हो। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 31."युविक्तयुक्त" का ात्पय बुतिद्धमत्तापूण और सुविवचारिर र्थीा, अर्थीा ्, एक ऐसे माग का चयन जो क सुझा ा हो। ऐसा विव ान जो अति कार पर मनमाने ढंग से या कठोर हमला करे उसे कसंग ा की गुणवत्ता को विनयंवित्र करने वाला नहीं कहा जा सक ा है जब क विक वह अनुच्छेद 19 (2) से (6) क े अ ीन गारंटीक ृ अति कारों और अनुज्ञेय विनयंत्रण क े बीच उतिच सं ुलन न बनाए। वरना, इस गुण की कमी समझी जानी चाविहए। प ंजखिल शास्त्री, मुख्य न्याया ीश, ने मद्रास राज्य बनाम वीजी रो [(1952) 1 एससीसी 410:एआई आर 1952 एससी 196:1952 एससीआर 597:1952 विक्रविम. एल. जे. 966] वाले मामले में यह म व्यक्त विकया विक न्यायालय को कभिर्थी अति कार सिजसका उल्लंघन विकया गया है, की प्रक ृ ति, अति रोविप प्रति बं ों का अं र्दिनविह उद्देKय, उस बुराई की सीमा और ात्काखिलक ा सिजसे उपचारिर विकया जाना है, अति रोपण का असं ुलन, उस समय की प्रचखिल श्मिZर्थीति यों को अवKय ध्यान में रVना चाविहए। विव ान क े सापेक्ष आनुपाति क ा क े इस सिसद्धां का उल्लेV न्यायमूर्ति जीवन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश राज्य बनाम मैकडावेल & क ं. [(1996) 3 एस. सी. सी. 709] क े मामले में हाल ही में विकया। विपछले पचास वर्ष¨ में उच्च न्यायालय और उच्च म न्यायालय में इस Z र की जांच एक सामान्य विवशेर्ष ा रही है। हजारों की संख्या में अभिभविन ारिर मामले हैं।
32. जहां क अनुच्छेद 14 का संबं है, भार क े न्यायालयों ने जांच की विक क्या वग1करण बो गम्य विवभाजक पर आ ारिर र्थीा और क्या विवभाजक का विव ान क े उद्देKय क े सार्थी युविक्तयुक्त संबं र्थीा। Zपष्ट रूप से, जब न्यायालयों ने इस प्रश्न पर विवचार विकया विक क्या वग1करण बो गम्य अं र mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर आ ारिर र्थीा, ो न्यायालय विवभेदों की वै ा और विवभेदों की पयाप्त ा की जांच कर रहे र्थीे। यह और क ु छ नहीं बश्मि”क आनुपाति क ा का सिसद्धां है। ऐसे भी मामले हैं जहां विव ान या विनयम अनुतिच होने क े अर्थी में मनमाने होने क े कारण रद्द कर विदए गए हैं [एयर इंतिडया बनाम नेरगेश मीजा [(1981) 4 एससीसी 335]:1981 एससीसी. (एल एंड एस.) 599] (एससीसी पृष्ठ 372-373)। किंक ु क े वल "मनमानेपन" क े आ ार पर विव ान को विनरZ करने क े इस पश्चात्व 1 पहलू पर आंध्र प्रदेश राज्य बनाम मैकडॉवेल एंड क ं पनी [(1996) 3 एससीसी 709] क े मामले में संदेह विकया गया है।
33. आZट्रेखिलया और कनाडा में, कानूनों की विवति मान्य ा का परीक्षण करने क े खिलए आनुपाति क ा का सिसद्धां लागू विकया गया है [देVें कनखिलर्फ बनाम राष्ट्रमंडल [(1994) 58 ऑZट एलजे 791] ऑZट एलजे (827,839) (799,810,821)]। आर. वी.ओक्स [(1986) 26 डीएलआर (चौर्थीा) 200] तिडक्सन क े मामले में, कनाडा क े उच्च म न्यायालय क े मुख्य न्याया ीश ने यह म व्यक्त विकया है विक आनुपाति क ा परीक्षण क े ीन महत्वपूण घटक हैं।पहला, अपनाए गए उपायों को इस उद्देKय को प्राप्त करने क े खिलए साव ानीपूवक तिडजाइन विकया जाना चाविहए। उन्हें मनमाना, अनुतिच या कहीन नहीं होना चाविहए। संक्षेप में, उन्हें ार्दिकक रूप से उद्देKय से जोड़ा जाना चाविहए। दूसरे, सा नों को न क े वल प्रर्थीम अर्थी में उद्देKय से ार्दिकक रूप से जुड़ा होना चाविहए, बश्मि”क प्रश्नग Zव ंत्र ा क े अति कार को यर्थीासंभव कम से कम नुकसान पहुंचाना चाविहए। ीसरा, उपायों क े प्रभावों और उद्देKय क े बीच आनुपाति क ा होनी चाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आनुपाति क ा क े संदभ में, देVें रॉस बनाम ब्रंसविवक Zक ू ल तिडशुट नं. 15 [(1996) 1 एससीआर 825] (एससीआर पृष्ठ 872 पर)। अंग्रेजी न्यायालयों क े पास इस सिसद्धां को विव ान में लागू करने का कोई अवसर नहीं र्थीा। पीविड़ पक्षों को एक घोर्षणा क े खिलए Zट्रासबग में यूरोपीय अदाल में जाना पड़ा। "34. संयुक्त राज्य अमेरिरका में, सिसटी ऑर्फ बोरने बनाम फ्लोरेस [(1997) 521 यूएस 507] में आनुपाति क ा क े सिसद्धां को विव ातियका द्वारा यह कह े हुए लागू विकया गया है विक" "नुकसान को रोका या उपचारिर विकया जाना चाविहए और उसक े खिलए अपनाए गए उपायों क े बीच एकरूप ा और आनुपाति क ा होनी चाविहए।"
35. इस प्रकार, यह सिसद्धां विक मौखिलक Zव ंत्र ा पर विनबन् नों से संबंति विव ान का परीक्षण आनुपाति क ा क े आ ार पर विकया जा सक ा है, भार में कभी संदेह नहीं विकया गया है इसको अदाल ों द्वारा विव ान की वै ा का प्रार्थीविमक पुनर्दिवचार कह े हैं सिजससे मौखिलक Zव ंत्र ाओं का हनन हुआ हो। "45."मानवाति कार अति विनयम, 1998 क े अनुच्छेद 3 (1) क े ह आंग्ल न्यायालय अब विव ायी कारवाई को अनुसूची में विनर्दिदष्ट अति कारों और Zव ंत्र ाओं क े सार्थी असंग घोविर्ष कर सक ा है। इसक े बाद मंत्री इस असंगति को दूर करने क े खिलए आवKयक संशो न करने क े खिलए इसे संसद में पेश करेंगे। ऐसा कर े समय, आंग्ल न्यायालय अब विव ायी और प्रशासविनक कारवाई की सख् जांच या आनुपाति क ा लागू कर सक ा है। इस सिसद्धां को अब आंग्ल विवति क े क ें द्र क े रूप में देVा जा ा है (देVेंः हान— विहल क े लाड लेZटर द्वारा रतिच मानव अति कार विवति और व्यवहार, क्यू. सी. और डेविवड पविनक क्यू. सी., 1999, का प्रZ र 3.16 )। मानवाति कारों का प्रयोग कर े हुए वडनेसबरी की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कहीन ा की सीमा को सिज ना कम विकया जाएगा, अति विनयम, 1998 क े अनुच्छेद 13 क े सार्थी एक प्रभावी उपचार क े रूप में न्यातियक पुनर्दिवलोकन करना उ ना ही आसान हो जाएगा।
48. आनुपाति क ा की यह कसौटी भार ीय न्यायालयों द्वारा वर्ष¨ से विवकसिस की गई है और अब यह पांच सूत्री कसौटी का रूप ले चुकी है। क े. एस. पुट्टाZवामी और अन्य बनाम भार संघ और अन्य12 क े मामले में और हाल ही में गुजरा मजदूर सभा और अन्य बनाम गुजरा राज्य13 क े मामले में विदए गए विनणय में कहा गया है।
49. एस. पुट्टाZवामी (उपरोक्त) क े मामले में, इस न्यायालय की नौ न्याया ीशों की न्यायपीठ ने इस प्रश्न का विवविनश्चय कर े हुए विक क्या भार का संविव ान प्रत्येक व्यविक्त को विनज ा क े मूल अति कार की गारंटी दे ा है, राज्य उपायों क े परिरणामZवरूप अति कारों क े अति लंघन क े संबं में 'आनुपाति क ा और वै ा क े सिसद्धां ' की व्याख्या की। यह माना गया विक राज्य की मनमानी कारवाई से सुरक्षा क े खिलए आनुपाति क ा आवKयक है क्योंविक यह सुविनतिश्च कर ा है विक अति कार पर अति क्रमण की प्रक ृ ति और गुणवत्ता कानून क े उद्देKय क े अनुपा में है। जबविक एक पूव क्त सिसद्धां को चार सूत्री परीक्षण में संक्षेप में प्रZ ु कर े हुए न्यायपीठ ने यह अभिभविन ारिर विकयाः "... कारवाई को कानून द्वारा मंजूरी दी जानी चाविहए; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रZ ाविव कारवाई एक लोक ांवित्रक समाज में एक वै उद्देKय क े खिलए आवKयक होनी चाविहए; इस रह क े हZ क्षेप की सीमा इस रह क े हZ क्षेप की आवKयक ा क े अनुपा में होनी चाविहए; इस रह क े हZ क्षेप क े दुरुपयोग क े खिVलार्फ प्रविक्रयात्मक गारंटी होनी चाविहए।"
50. गुजरा मजदूर सभा (उपरोक्त) क े वाद में, क ें द्र सरकार ने कोविवड-19 क े दौरान राष्ट्रीय आपा काल क े आ ार पर अकु शल श्रविमकों क े वे न को प्रभाविव करने वाली एक अति सूचना जारी की र्थीी। इस अति सूचना को अनुच्छेद 14 क े उल्लंघन, विवशेर्ष रूप से आनुपाति क ा क े सिसद्धां क े उल्लंघन क े आ ार पर चुनौ ी दी गई र्थीी। न्यायालय ने कहा विक विकया विक राज्य की कारवाई सिजनसे मूल अति कारों का अति क्रमण हो सक ा है उसकी वै ा का विन ारण करने क े खिलए उसे विनम्नखिलखिV श Ã य करनी चाविहए, अर्थीा ् (i) मूल अति कार में हZ क्षेप करने का कोई राजकीय उद्देKय होना चाविहए, (ii) उक्त अति कार उल्लंघन आदेश वाला उपाय हZ क्षेप करने वाले और राज्य क े लक्ष्य क े बीच एक कसंग संबं पर आ ारिर होना चाविहए, (iii) यह उपाय आवKयक रूप से राज्य क े उद्देKय को प्राप्त करने वाले होना चाविहए, (iv) वै उद्देKय की रक्षा क े खिलए प्रति बं आवKयक होना चाविहए, और (v) राज्य को ऐसे अति कारों का अति क्रमण करने वाले हZ क्षेप क े दुरुपयोग की संभावना क े खिलए पयाप्त सुरक्षा प्रदान करनी चाविहए। आनुपाति क ा की इन श ¨ क े आ ार पर, इस न्यायालय ने अति सूचना को रद्द कर विदया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
51. यद्यविप पांचवें भाग, जैसा विक गुजरा मजदूर सभा (उपरोक्त) में उल्लेV विकया है, पुट्टाZवामी क े मामले में त्कालीन न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने Zपष्ट रूप से उल्लेV नहीं विकया गया है, हमारे विवचार से गुजरा मजदूर सभा क े वाद में (पूव क्त) परीक्षण को पूरा करने क े खिलए सही रूप से पढ़ा गया है। राज्य की कारवाई, सिजसका दुरुपयोग विकया जा सक ा है, इस प्रकार मूल अति कार क े Zव ंत्र प्रयोग क े खिVलार्फ एक V रे क े रूप में काय कर ी है सिजसको संवेदनशील सं ुलन काय में आवKयक रूप से शाविमल विकया जाना चाविहए, और न्यायपाखिलका से इस रह की राज्य द्वारा की गई कारवाई की संवै ाविनक ा को विन ारिर करने क े खिलए कहा जा ा है- चाहे वह विव ायी, कायकारी, प्रशासविनक या अन्यर्थीा हो। र्फ ै सले क े इस विनणय का सुसंग प्रZ र का उल्लेV यहां विकया गया हैः "आनुपाति क ा क े सिसद्धां को इस न्यायालय द्वारा कई मामलों में मान्य ा दी गई है, सिजसमें से क े. एस. पुट्टाZवामी बनाम भार संघ मामले में सा न्याया ीशों की पीठ का र्फ ै सला महत्वपूण है। आनुपाति क ा क े सिसद्धां में राज्य की कारवाई की वै ा को विन ारिर करने क े खिलए विनम्नखिलखिV श्मिZर्थीति यों क े विवश्लेर्षण की परिरक”पना की गई है जो मौखिलक अति कारों पर प्रभाव डाल सक ी हैः (i) मूल अति कार में हZ क्षेप करने वाला कानून विकसी वै राज्य क े लक्ष्य क े अनुसरण में होना चाविहए। (ii) मूल अति कार और Zव ंत्र ाओं क े प्रयोग में बा ा डालने या सीविम करने वाले अति कारों क े उल्लंघन क े उपायों का औतिचत्य उन उपायों, वाZ व में श्मिZर्थीति और लतिक्ष उद्देKय क े बीच एक कसंग संबं क े अश्मिZ त्व पर आ ारिर होना चाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii) उद्देKय को प्राप्त करने क े खिलए उपाय आवKयक होने चाविहए और लक्ष्य को पूरा करने क े खिलए आवKयक सीमा से अति क अति कारों का उल्लंघन नहीं होना चाविहए। (iv) विनबन् नों से न क े वल वै प्रयोजनों की पूर्ति होनी चाविहए बश्मि”क उनको उसका संरक्षण भी करना चाविहए। (v) राज्य को इस रह क े हZ क्षेप क े दुरुपयोग क े खिVलार्फ पयाप्त सुरक्षा प्रदान करनी चाविहए। प्रत्यर्थी1 क े विवद्वान अति वक्ता की ओर से प्रZ ु क¨ में हम बल पाने में में असमर्थी हैं। आक्षेविप अति सूचनाएं राज्य में सभी कारVानों की ऊपरी लाग को कम करने क े अलावा, उनक े विवविनर्दिम उत्पादों की प्रक ृ ति को ध्यान में रVे विबना, विकसी उद्देKय की पूर्ति नहीं कर ी हैं। महामारी क े दौरान उतिच संभावना क े भाग जी 30 क े दायरे में श्रविमकों को त्काखिलक आवKयक ा क े दौरान उनक े मू”यवान श्रम की आपूर्ति क े खिलए उतिच मुआवजा देने क े खिलए, यविद जीवन रक्षक दवाओं, व्यविक्तग सुरक्षा उपकरणों या सैविनटाइजर जैसे तिचविकत्सा उपकरणों का उत्पादन करने वाले कारVानों को ारा 65 (2) क े माध्यम से छ ू ट दी जाएगी, यह समझ से परे होगा । हालांविक, सभी कारVानों को छ ू ट की एक व्यापक अति सूचना, चाहे वे विवविनर्दिम उत्पाद हों, कामगारों को ओवरटाइम से वंतिच कर े हुए, पहले से ही समाज क े एक कमजोर वग को गुलामी की जंजीरों में बां ने क े खिलए महामारी का लाभ उठाने क े इरादे का संक े दे ी है।"
52. हमने पहले ही युविक्तयुक्त वग1करण परीक्षण की चचा कर कहा है विक हZ क्षेप करने वाले कानून, अर्थीा ् आक्षेविप अति सूचना, जो वग1करण का सृजन कर ी है उनका उद्देKय क े सार्थी ार्दिकक संबं नहीं है सिजसको प्राप्त विकया जाना है और इस प्रकार, आनुपाति क ा परीक्षण की प्रर्थीम दो विबन्दुओं का उल्लंघन कर ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
53. पुनः हम आनुपाति क ा परीक्षण क े ीसरे और चौर्थीे भाग पर आ े हैं, अर्थीा, क्या प्राति करण द्वारा सृसिज वग1करण उन भू-Zवाविमयों को मुआवजा देने क े राज्य क े उद्देKय को अविनवाय रूप से प्राप्त करना चाह ा र्थीा जो उस भूविम क े प्रत्यक्ष विनवासी हैं अर्थीवा वह भूविम का उनक े आय क े प्रार्थीविमक स्रो क े रूप में मौजूद है और क्या ऐसा उपाय प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े आनुपाति क र्थीा। इसक े खिलए, अति विनयम की ारा 23 का उल्लेV करना प्रासंविगक है, जो उन मामलों का उपबं कर ी है सिजसका मुआवजा विन ारिर कर े समय विवचार विकया जाना चाविहए। उक्त ारा इस प्रकार हैः- -
23. मुआवजा विन ारिर करने में विवचार विकए जाने वाले विबन्दु- (1) इस अति विनयम क े ह अति ग्रही भूविम क े खिलए अति विनण[1] की जाने वाली मुआवजे की राभिश का विन ारण कर े समय, न्यायालय विनम्नखिलखिV बा ों पर विवचार करेगा। पहला, [ ारा 4, उप ारा (1) क े अ ीन अति सूचना] क े प्रकाशन की ारीV को भूविम का बाजार मू”य. दूसरा, विकसी Vड़ी र्फसल को लेने क े कारण विह बद्ध व्यविक्त हुयी क्षति, जो कलेक्टर द्वारा कब्जा लेने क े समय भूविम पर मौजूद हो। ीसरा, विह बद्ध व्यविक्त द्वारा अपनी अन्य भूविम से ऐसी भूविम की ामील करने क े कारण, विकसी अन्य रीति से अपनी अन्य संपखित्त, चल या अचल संपखित्त या अपनी आय को क्षति पहुंचाने वाले अजन क े कारण, भूविम का कब्जा लेने क े समय विह बद्ध व्यविक्त द्वारा की गई क्षति (यविद कोई हो) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पांचवां, कलेक्टर द्वारा भूविम क े अजन क े परिरणामZवरूप, विह बद्ध व्यविक्त को अपना विनवास या कारबार का Zर्थीान, ऐसे परिरव न क े आनुर्षंविगक युविक्तयुक्त व्यय, यविद कोई हो, बदलने क े खिलए विववश विकया जा ा है, और छठा, ारा 6 क े अ ीन घोर्षणा क े प्रकाशन क े समय और कलेक्टर द्वारा भूविम का कब्जा लेने क े समय क े बीच भूविम क े लाभों को कम करने क े परिरणामZवरूप सद्भावपूवक हुआ नुकसान (यविद कोई हो)।"
54. ारा 23 क े क े वल अवलोकन से प ा चल ा है विक ग्रेटर नोयडा प्राति करण द्वारा कभिर्थी वग1करण क े आ ार पहले से ही अति विनयम की ारा 23 आच्छाविद हैं। कभिर्थी ारा का पांचवां किंबदु प्रभाविव भूZवाविमयों क े पुनवास क े खिलए मुआवजे की आवKयक ा को पूरी रह से आच्छाविद कर ा है। ारा में पहले से मौजूद प्राव ान की उपश्मिZर्थीति में, ग्रेटर नोयडा प्राति करण द्वारा बनाया गया वग1करण, उक्त ारा क े आगे बढ़ने क े खिलए न विक इसक े विवरो करने क े खिलए होना चाविहए।
55. जैसा विक ऊपर चचा की गई है, यविद इस वग1करण को अश्मिZ त्व में बने रहने विदया जा ा है, ो कई गैर-पुK ैनी भूविम माखिलक सिजन्हें पुनवास की भी आवKयक ा पड़ सक ी है, मुआवजे क े विबना Vुद को पुनZर्थीाविप नहीं कर सक े हैं। इस त्रुविट को यविद बने रहने विदया जा ा है ो इससे न क े वल अति विनयम क े उद्देKय को अमान्य हो जाएगा, बश्मि”क आनुपाति क ा परीक्षण क े ीसरे और चौर्थीे सिसद्धां का भी उल्लंघन होगा, और इसखिलए यह रद्द विकये जाने योग्य है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
56. इसक े अलावा, यह भी ध्यान रVना महत्वपूण है विक इस वग1करण को भले ही अश्मिZ त्व में रहने की अनुमति दी जाए, विर्फर भी इसक े संभाविव दुरुपयोग क े प्रति कोई सुरक्षा नहीं है। जैसा विक ऊपर उल्लेV विकया गया है, अपने वग1करण क े माध्यम से उक्त अति सूचना विवनाशकारी संकट उत्पन्न कर ी है, और अति सूचना इस रह क े संभाविव दुरुपयोग को दूर करने क े खिलए क ु छ भी नहीं कर ी है। उक्त वग1करण क े खिलए कोई विदशा-विनद—श मौजूद नहीं हैं और न ही कोई प्रति बं लगाया गया है। यविद इस रह क े वग1करण की परीक्षण नहीं विकया जा ा है, ो यह गल प्रर्थीा बन जाएगी जो भविवष्य में विवनाशकारी सिसद्ध होगा। मौखिलक विदशाविनद—शों की यह कमी आनुपाति क ा परीक्षण क े पांचवें भाग का भी उल्लंघन कर ी है।
57. विन ारिर सिसद्धां ों से उत्पन्न उपरोक्त चचाओं क े आ ार पर, मुद्दा संख्या-2 का उत्तर सकारात्मक और अपीलार्थी1ओं क े पक्ष में विदया गया है, और आक्षेविप वग1करण रद्द विकये जाने योग्य है क्योंविक यह भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर ा है। क्या उच्च न्यायालय की पूण न्यायपीठ द्वारा पुK ैनी भू -Zवाविमयों और गैर- पुK ैनी भू-Zवाविमयों क े बीच विकया गया वग1करण नागपुर सु ार न्यास और अन्य बनाम विवठ्ठल राव और अन्य (1973) 1 एस. सी. सी. 500 क े वाद में इस माननीय न्यायालय द्वारा अति कभिर्थी विवति का उल्लंघन है?
58. नागपुर सु ार न्यास (पूव क्त) क े वाद में इस माननीय न्यायालय आयोग को इस प्रश्न पर विवचार करने का काम सौंपा र्थीा विक क्या नागपुर सु ार ट्रZट mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति विनयम, 1936 क े क ु छ प्राव ान अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर े हैं। यहां उक्त अति विनयम क े आक्षेविप उपबं ों में विवविह दरों से कम दरों पर भूविम क े अति ग्रहण की अनुमति प्रदान की गई र्थीी। हमारे मामले में जो बा सुसंग है वह यह है विक न्यायालय ने इस मामले को विनपटा े हुए कहा विक प्राति कारी भूविम क े अति ग्रहण क े समय भू-Zवामी क े प्रकारों क े बीच भेद नहीं कर सक ी है क्योंविक भूविम का अति ग्रहण लोकविह क े खिलए हो ा है न विक इसखिलए विक विकस प्रकार क े भूZवामी क े खिलए भूविम का अति ग्रहण विकया जा रहा है। इस विनणय का सुसंग प्रZ र इस प्रकार हैंः- "अब यह सुविनतिश्च हो गया है विक राज्य विव ान क े प्रयोजन क े खिलए उतिच वग1करण कर सक ा है। यह य हो चुका है विक वग1करण को युविक्तयुक्त होने क े खिलए दो परीक्षणों को पूरा करना चाविहएः वग1करण बो गम्य विवभेद पर आ ारिर होना चाविहए और विवभेद का विववादग्रZ विव ातियका द्वारा प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े सार्थी कसंग संबं होना चाविहए। इस संबं में यह ध्यान में रVा जाना चाविहए विक उद्देKय को Zवयं विवति सम्म होना चाविहए। उदाहरण क े खिलए, Zवयं उद्देKय विवभेदकारी नहीं हो सक ा है, अन्यर्थीा, यविद उद्देKय अ”पसंख्यक क े विकसी वग क े प्रति विवभेदकारी है ो इस आ ार पर विवभेद को न्यायोतिच नहीं ठहराया जा सक ा है विक यह एक युविक्तयुक्त वग1करण है क्योंविक यह प्राप्त विकए जाने वाले उद्देKय क े सार्थी कसंग संबं रV ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यविद विव ायन का उद्देKय सावजविनक उद्देKयों क े खिलए अविनवाय रूप से भूविम अति ग्रहण करना है ो मुआवजा विन ारिर करने क े उद्देKय क े खिलए उतिच वग1करण क्या हो सक ा है? यह विववाविद नहीं होगा विक अति ग्रही भूविम क े खिलए मुआवजे क े विवभिभन्न सिसद्धां ों को इस आ ार पर य नहीं विकया जा सक ा है विक भू-Zवामी बूढ़ा या युवा, ZवZर्थी या बीमार, लंबा या छोटा है, या क्या भू-Zवामी ने संपखित्त विवरास में प्राप्त की है या अपने मेहन से इसे बनाया है, या भू-Zवामी राजनीति ज्ञ या अति वक्ता है। इस रह का वग1करण Zर्थीायी क्यों नहीं है?विकसी सावजविनक प्रयोजन क े खिलए अविनवाय रूप से अति ग्रहण विकए जाने वाले उद्देKय को समान रूप से प्राप्त विकया जा ा है चाहे वह भूविम विकसी एक प्रकार क े Zवामी की हो या विकसी अन्य प्रकार की।"
59. हमारी राय में, उपरोक्त विनणय क े पढ़ने मात्र से यह Zपष्ट हो जा ा है विक Vास मुआवजा देने क े उद्देKय से ग्रेटर नोयडा प्राति करण द्वारा विकया गया वग1करण विवति में गल है, और यह ठीक इसी रह का वग1करण है सिजसे प्रति बंति विकया गया है। जब भूविम क े अति ग्रहण का उद्देKय व्यापक रूप से जनविह क े खिलए हो ा है, ो इस उद्देKय क े खिलए कभिर्थी भू-Zवामी की प्रक ृ ति महत्वहीन है। यविद भू-Zवामी की प्रक ृ ति क े आ ार पर इस रह क े वग1करण की अनुमति दी जा ी है, ो उसी आ ार पर, भविवष्य क े वग1करण की संभावना हो सक ी है जहां समाज क े अति कार रVने वाले सदZयों को अति क मुआवजा विमल सक ा है, और हाभिशए पर पड़े लोगों को कम मुआवजा विमल सक ा है। इस न्यायालय ने उपरोक्त र्फ ै सले में यही भविवष्यवाणी की र्थीी और इस रह क े मनमाने वग1करण को रोकने क े खिलए कानून में श्मिZर्थीति Zपष्ट की र्थीी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
60. भूविम अति ग्रहण अति विनयम भू-Zवामी क े वग¨ क े बीच अं र नहीं कर ा है और भूविम Zवामी क े सभी वग¨ को समान रूप से मुआवजा प्रदान कर ा है। उपरोक्त उसिल्लखिV क क े आ ार पर पुK ैनी भू-Zवामी और गैर-पुK ैनी भू- Zवामी क े बीच विकया गया वग1करण नागपुर न्यास वाद (उपरोक्त) क े मामले में प्रति पाविद विवति और भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर ा है। विनष्कर्ष
61. उपरोक्त उसिल्लखिV क क े आलोक में, हमारी यह राय है विक दोनों कायकारी कायवाविहयों द्वारा विकया गया वग1करण कानून क े खिलहाज से गल है और यह अपाZ विकये जाने योग्य है। भूविम अति ग्रहण अति विनयम में इस रह क े वग1करण क े आ ार पर विकसी भी प्रकार अलग से मुआवजे देने की परिरक”पना नहीं की गई है, और इसखिलए, इस न्यायालय को अति विनयम की ारा 23 की सीमाओं क े अ ीन रह े हुए कायकारी कायवाही द्वारा प्रदान विकए जाने वाले मुआवजे का अनुमान लगाना चाविहए।
62. भूविम अजन अति विनयम की ारा 23 में अति विनयम क े अ ीन भूविम अजन क े मामलों में प्रति कर मंजूर करने क े खिलए आ ारों की बा कर ा है। इस अति विनयम क े अनुरूप दोनों कायकारी कारवाविहयों को क े वल पढ़ने से प ा चलेगा विक पुनवास क े खिलए मुआवजा देने की आवKयक ा कानून में मान्य है और मूल कानून द्वारा समर्भिर्थी है। ब, शरार क े वल ऐसे काय¨ द्वारा विकए गए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मनमाने वग1करण क ही सीविम है। ऐसे वाद में, हमारी राय है विक चूंविक शरार क े वल वग1करण क े अ ीन की गई है, इसखिलए इसे भंग विकया जा सक ा है, और पुनवास क े उद्देKय क े खिलए मुआवजा देने क े खिलए विन ारिर कायकारी कारवाई का शेर्ष विहZसा कानून में मान्य रहेगा।
63. एक बार वग1करण को हटा विदया जाए और कायकारी कारवाई को मूल अति विनयम क े अनुरूप पढ़ा जाए, ो हम देVेंगे विक अति विनयम, और व मान कायकारी कारवाई भी मुआवजे क े मामले में भेदभाव नहीं कर ी है और अनुग्रह भुग ान और बढ़ी हुई मूल नराभिश संबंति क्षेत्र क े सभी भू-Zवाविमयों को विदया जाना चाविहए, जैसा विक कायकारी कायवाविहयों द्वारा प्रति पाविद विकया गया है ।
64. इस Z र पर, हम यह ब ाना चाह े हैं विक भले ही उक्त वग1करण का उद्देKय नेक रहा हो, र्थीाविप, क े वल अनुमान क े आ ार पर ऐसा वग1करण बरकरार नहीं रVा जा सक ा है। यविद व्यविक्तयों क े वग क े बीच अं र करने क े खिलए कोई दावा विकया जा रहा है, ो ऐसे दावे को आनुभविवक डेटा द्वारा समर्भिर्थी होना चाविहए। चूंविक यह न्यायालय थ्यान्वेर्षी न्यायालय नहीं है और यह विवति का न्यायालय है, विवति को अलग-र्थीलग करक े नहीं समझा जाना चाविहए, बश्मि”क इसे उस संदभ में समझा जाना चाविहए सिजस संदभ में यह विवद्यमान है, क्योंविक विवति संविवति यों क े भी र आने वाली विकसी वZ ु क े रूप में विवद्यमान नहीं रह ी है, बश्मि”क उन लोगों क े सार्थी रह ी है और विवकसिस हो ी है सिजन्हें वह शासन कर ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
65. इसक े अति रिरक्त, प्रशासविनक कारवाई क े मामलों में, भले ही वग1करण का अति सूचना क े उद्देKय से कसंग संबं हो र्थीाविप वग1करण को मूल अति विनयम द्वारा भी वै ा प्रदान की जानी चाविहए। यविद मूल अति विनयम वग1करण करने की अनुमति नहीं दे ा है और भले ही अति सूचना वग1करण की ुलना में अनुच्छेद 14 की कसौविटयों को पास करने में योग्य है ब भी इसे रद्द कर विदया जाएगा यविद मूल अति विनयम इसकी अनुमति नहीं दे ा है।
66. जैसा विक ऊपर चचा की गई है, ग्रेटर नोएडा की Zर्थीापना एक नेक उद्देKय क े खिलए की गई र्थीी, अर्थीा ् देश क े हर कोने से बेह र जीवन की लाश में आने वाले सभी लोगों को शहर में समायोसिज करना। हालांविक, ऐसा कर े समय, जैसा विक व मान वाद में देVा जा सक ा है, क ु छ विनवासिसयों क े सार्थी भेदभाव विकया गया सिजनकी भूविम उक्त उद्देKय की पूर्ति क े खिलए अति ग्रहण क े अ ीन र्थीी । ऐसी परिरश्मिZर्थीति में, यह इस न्यायालय का क व्य बन जा ा है विक वह न्याय प्रदान करे और भेदभाव क े कारण होने वाले नुकसान संशोति करे।
67. उपयुक्त चचाओं को दृविष्टग, उच्च न्यायालय की पूण पीठ द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय पोर्षणीय नहीं है और इसे अपाZ विकया जा ा है। परिरणामZवरूप, उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलार्थी1 द्वारा दायर रिरट यातिचका पर अनुमति प्रदान की जा ी है और अपीलार्थी1 उक्त रिरट यातिचका में दावाकृ अनु ोर्षों को प्राप्त करने का अति कारी घोविर्ष विकया जा ा है।
68. दनुसार, इन अपीलों पर अनुमति प्रदान की जा ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
69. इन थ्यों और परिरश्मिZर्थीति यों में, हम वाद व्यय क े संबं में कोई आदेश नहीं पारिर कर रहे हैं।................................… (न्यायमूर्ति क ृ ष्ण मुरारी)................................… (न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट) नई विदल्ली 20 र्फरवरी, 2023 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA