Shyam Kumar Gupta and Others v. Shubham Jain

High Court of Allahabad · 02 Feb 2023
Vidnesh Maheshwari; Bela M. Vitrevedi
Civil Appeal No. 765/2023 @ Special Leave Petition (Civil) No. 2542/2023
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal and set aside the ex parte decree in a tenancy eviction suit, holding that mandatory deposit of decretal amount is essential but subsequent bona fide compliance entitles the party to contest the suit on merits.

Full Text
Translation output
प्रति वे़द्य
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 765/2023
(विवशेष अनुमति याति+का (सी) संख्या - 2542/2023)
श्याम क
ु मार गुप्ता और अन्य अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
शुभम जैन प्रति वादी (गण)
विन ण9 य
माननीय न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
अनुमति अनुदत्त की गई।
JUDGMENT

2. बकाया विकराए की वसूली और बेदखली क े लिलए सिसविवल वाद संख्या - 1/2015 में मृ प्रति वादी क े विवति क प्रति विनति यों द्वारा यह अपील, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा याति+का संख्या - 3536/2022 में पारिर आदेश विदनांक 21.09.2022 क े लिखलाफ विनदUशिश है, सिजसमें उच्च न्यायालय ने अपर सिजला एवं सत्र न्याया ीश विद्व ीय (पॉक्सो अति विनयम), रायबरेली की अदाल द्वारा पारिर आदेश विदनांक 01.09.2022 क े द्वारा आवेदन को सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 ('सीपीसी') क े आदेश IX विनयम 13 क े ह एकपक्षीय विनण9य क े ह अपास् कर े हुए हस् क्षेप करने से इंकार कर विदया है एवं विदनांक 03.09.2016/16.03.2016 को तिडZी जारी की।

3. अनावश्यक विववरण और संक्षेप में, मामले क े प्रासंविगक पृष्ठभूविम पहलू यह हैं विक इसमें प्रति वादी ने, मालिलक और मालिलकाना अति कार ारक क े रूप में अपनी क्षम ा का दावा कर े हुए, लघु मुकदमा न्यायालय में व 9मान अपीलक ा9ओं क े विदवंग विप ा क े लिखलाफ पूव क्त मुकदमा दायर विकया, सिजसमें कहा गया विक प्रति मुकदमाी 2000/- रुपये प्रति माह क े मासिसक विकराए पर मुकदमा दुकान में विकरायेदार र्थीा और फरवरी, 2015 से मई, 2015 क विकराए 8,000/- रुपये और नोविgस क े बावजूद 15% नगरपालिलका कर का भुग ान करने में विवफल रहा र्थीा।

4. ऐसा प्र ी हो ा है विक उक्त सिसविवल मुकदमा में, विव+ारण न्यायालय ने प्रति वादी को सम्मन की ामील को पया9प्त माना और प्रति वादी की ओर से उपसंजा न होने क े कारण एकपक्षीय रूप से काय9वाही की और साक्ष्य लेने क े बाद, 09.03.2016 को, लाग क े सार्थी मुकदमा की तिडZी की, 8,000/- रुपये की राशिश में विकराए की अवशिशष्ट राशिश की वसूली और प्रति वादी को मुकदमा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd दुकान से बेदखल करने क े लिलए जबविक वादी को भी प्रति वादी से 2000/- रू. क्षति पूर्ति प्राप्त करने का हकदार बनाया, जब क विक वादी को खाली दुकान का कब्जा प्रदान नहीं विकया जा ा।विदनांक 09.03.2016 क े फ ै सले का प्रभावी विहस्सा इस प्रकार हैः वादी क े मुकदमा में प्रति वादी से 8,000/- रुपये विकराया वसूल करने क े लिलए और विव+ारा ीन दुकान की बेदखली क े लिलए एकपक्षीय तिडZी पारिर विकया जा ा है और प्रति वादी को आदेश विदया जा ा है विक वह अशिभयोक्ता की दुकान काे खाली करक े कब्जा सौंप दे जो इस समय नगरपालिलका, परगना, हसील और सिजला रायबरेली क े अति कार क्षेत्र में बेलीगंज फाgक क े पास नगर पालिलका हाउस नं. 62/3, वाड[9] नं. 24, मलिलकमाऊ रोड में स्थिस्र्थी है, सिजसकी +ार सीमाएं उत्तर में हैंः मलिलकमाऊ रोड, दतिक्षण में: अशिभयोक्ता का शेष भवन, पूव[9] में: अशिभयोक्ता का घर, पतिsम में: हरिरओम का घर स्थिस्र्थी है, का कब्जा दो महीने क े भी र सौंप दे।वादी उपरोक्त दुकान क े उपयोग क े लिलए मुआवजे क े रूप में और विनष्पादन विवभागों में न्यायालय शुल्क का भुग ान करने क े बाद उक्त दुकान क े वास् विवक खाली कब्जे और कब्जे को सौंपने क 2,000/- प्रति माह रुपये प्राप्त करने का हकदार होगा।

5. इसक े पsा, प्रति वादी, अपीलक ा9ओं क े पूव9व 3, ने 20.08.2016 को परिरसीमा अति विनयम, 1963 की ारा 5 क े ह एक आवेदन क े सार्थी सीपीसी क े आदेश 9 विनयम 13 क े ह एक आवेदन विदया। उन्होंने प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 ('1887 का अति विनयम') की ारा 17 क े ह एक आवेदन भी विदया, सिजसमें लाग की राशिश सविह 11,212/- रुपये की तिडZी राशिश जमा करने की अनुमति मांगी गई र्थीी। अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी, प्रति वादी द्वारा इस प्रकार पेश विकए गए आवेदन क े लिखलाफ वादी- प्रत्यर्थी3 द्वारा एक आपलित्त की गई र्थीी, विक प्रश्नग तिडZी क े ह, वह न क े वल बकाया विकराए और लाग क े अवशिशष्ट क े लिलए बस्थिल्क 2,000/- प्रति माह की दर से नुकसान क े लिलए भी हकदार र्थीा जब क विक कब्जा प्रति वादी क े पास जारी रहा और नुकसान की विदशा में आवश्यक नराशिश जमा नहीं विकया गया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd र्थीा, एकपक्षीय तिडZी को अलग करने क े लिलए आवेदन रखरखाव योग्य नहीं र्थीा। यह देखा गया है विक पूव क्त आवेदन विव+ारा ीन ा रहने क े दौरान, प्रति वादी, अपीलार्थिर्थीयों क े विप ा की 26.09.2017 को मृत्यु हो गई और मृ आवेदक क े स्र्थीान पर उनक े प्रति स्र्थीापन क े लिलए व 9मान अपीलार्थिर्थीयों द्वारा 12.03.2018 को एक आवेदन प्रस् ु विकया गया र्थीा।

6. विव+ारण विव+ारण न्यायालय ने पक्षकारों की संबंति प्रस् ुति यों पर ध्यान विदया और अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी विनम्नलिललिख विgप्पणी कर े हुए वादी-प्रत्यर्थी3 की आपलित्तयों को बरकरार रखा:- “आवेदक मा ा प्रसाद ने व 9मान प्रकीण[9] मुकदमा की फाइल में एक आवेदन 7g[2] जमा मुकदमाक े 8,000/- रुपये की तिडZी राशिश और मुकदमा की लाग रु. 3212/- क े आ ार क ु ल राशिश जमा करने क े आदेश क े लिलए आवेदन विकया र्थीा, सिजस पर न्यायालय द्वारा एक आदेश पारिर विकया गया र्थीा विक आवेदक उस राशिश को जमा कर सक ा है सिजस पर जोलिखम है।इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा 11,212.00 रुपये की राशिश जमा की गई है, जबविक लघु दावा वाद संख्या - 01/2015 और इसक े अनुसरण में 25-03-2016 को पारिर तिडZी क े अवलोकन से स्पष्ट है, फरवरी, 2016 से मई, 2016 (क ु ल +ार महीने) क े लिलए 2,000 रुपये प्रति माह की दर से देय विकराया देने क े लिलए एक आदेश पारिर विकया गया है, जो क ु ल 8,000 रुपये है और 9% की दर से 15% नगरपालिलका कर का भुग ान विकया जाना है। इसक े अलावा, तिडZी में यह भी उल्लेख विकया गया है विक जब क प्रति वादी प्रश्नग दुकान का कब्जा और कब्जा वादी को खाली करक े नहीं दे ा है, ब क प्रति वादी द्वारा अशिभयोक्ता को 2000/- रुपये प्रति माह क े विहसाब से उपयोग का मुआवजा और प्रति अशिभयोक्ता द्वारा वादी को मामले का ख+9 विदया जाए। पूव क्त विनण9य और तिडZी क े एकीक ृ अवलोकन से यह स्पष्ट है विक आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा विनण9य और तिडZी का अनुपालन नहीं विकया गया है.उसक े द्वारा न ो नगरपालिलका कर और न ही उस पर प्राप्त ब्याज और न ही ारा 13 क े ह आवेदन दालिखल करने की ारीख क उपयोग क े लिलए मुआवजे का भुग ान विकया गया है।क े वल फरवरी महीने से मई, 2015 क का देय विकराया 2,000 रुपये प्रति माह की दर से और मामले की लाग रु. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 3212/- क ु ल राशिश रु. 11,212/- उसक े द्वारा जमा की गई है, शेष राशिश जो आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा पूव क्त तिडZी और विनण9य क े अनुपालन में विवरो ी पक्ष को देय र्थीी, इस संबं में न ो आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा कोई राशिश जमा की गई है और न ही इसक े अनुपालन क े बारे में कोई उपZम प्रस् ु करने क े संबं में न्यायालय से कोई अनुमति मांगी गई है.अ ः यह स्पष्ट है विक प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17, जो आवेदक पर अविनवाय[9] दातियत्व अति रोविप कर ी है विक आवेदक एकपक्षीय तिडZी और विनण9य क े अ ीन देय कु ल राशिश का भुग ान करने क े पsा ् सी. पी. सी. क े आदेश 9 क े विनयम 13 क े अ ीन आवेदन प्रस् ु करेगा और एक एक शब्द एवं पूव क्त विवति क उपबं का पूण[9] अनुपालन आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा नहीं विकया गया है और न ही उसक े द्वारा इस संबं में कोई उपZम/गारंgी न्यायालय में प्रस् ु की गई है विक वह पूव क्त विनण9य और तिडZी का अनुपालन करने क े लिलए ैयार है।ऐसी स्थिस्र्थीति में, न्यायालय की यह राय है विक प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17 का अनुपालन न करने क े कारण त्काल प्रकीण[9] सिसविवल वाद खारिरज विकया जा सक ा है और विवरो ी ारा द्वारा दालिखल प्रारंशिभक आपलित्त आवेदन 36g[2] को अनुमति प्रदान विकये जाने योग्य है।"

7. विदनांक 01.09.2022 क े पूव क्त आदेश से व्यशिर्थी होने क े कारण, अपीलार्थिर्थीयों ने अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी -सार्थी, भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 227 क े ह एक याति+का दायर करक े उच्च न्यायालय का दरवाजा खgखgाया, इस दलील क े सार्थी विक प्रति वादी को उक्त सिसविवल मुकदमा में ामील नहीं विकया गया र्थीा, और मुकदमाी-प्रति वादी ने थ्यों को छ ु पाने क े सार्थी तिडZी प्राप्त की। इसक े अलावा, यह प्रस् ु विकया गया विक अपीलार्थिर्थीयों क े विप ा ने एकपक्षीय तिडZी क े बारे में जानने क े ुरं बाद आवेदन प्रस् ु विकया र्थीा, और 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं का अनुपालन विकया र्थीा.यह भी प्रस् ु विकया गया विक विव+ारण न्यायालय इस बा की जां+ करने में विवफल रही र्थीी विक क्या वादी -प्रति वादी ने प्रश्नग दुकान खरीदने क े बाद प्रति वादी को उसक े स्वाविमत्व क े बारे में सूति+ विकया र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

8. र्थीाविप, उच्च न्यायालय ने 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं का अनुपालन न करने और क े दारनार्थी बनाम मोहन लाल क े शरवानी 2002 All CJ 145 [= (2002) 2 SCC 16], क े मामले में इस न्यायालय क े विनण9य क े संदभ[9] में विव+ारण न्यायालय से सहमति व्यक्त की।प्रति वादी द्वारा अपेतिक्ष अनुपालन क े अभाव में, प्रश्नग तिडZी क े ह देय और देय राशिश जमा करने की याति+का को अविनवाय[9] रूप से खारिरज करने क े लिलए काय9वाही की गई।उच्च न्यायालय ने अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी विनम्नलिललिख म व्यक्त विकया और अशिभविन ा9रिर विकयाः- - पक्षकारों क े लिलए विवद्व अति वक्ता को सुनने और अशिभलेखों का अवलोकन करने क े बाद, यह प ा +ल ा है विक प्रति वादी द्वारा दायर एससीसी वाद पर विदनांविक 09.03.2016 आदेश क े ह एकपक्षीय विनण9य लिलया गया र्थीा, सिजसक े लिखलाफ सीपीसी क े आदेश IX विनयम १३ क े ह एक आवेदन याति+कामुकदमा् ाओं द्वारा दायर विकया गया र्थीा।बेशक, याति+यों ने अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों का अनुपालन नहीं विकया, सिजसमें यह प्राव ान है विक आवेदक, आवेदन प्रस् ु कर े समय, तिडZी क े ह या विनण9य क े अनुसरण में अपने द्वारा देय राशिश को न्यायालय में जमा करेगा, या तिडZी क े पालन या विनण9य क े अनुपालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति देगा, जो न्यायालय, इस संबं में विकए गए विपछले आवेदन पर, विनदUश दे। "विदनांक 01.09.2022 क े आक्षेविप आदेश क े अवलोकन से यह संक े विमलेगा विक विन+ली न्यायालय ने विवशेष रूप से यह दज[9] करक े अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े उल्लंघन पर विव+ार विकया है विक याति+काक ा9 राशिश जमा करने में विवफल रहे हैं जैसा विक विदनांक 09.03.2016 क े आदेश क े अनुसरण में देय र्थीा।" सव च्च न्यायालय ने क े दार नार्थी (ऊपर) क े मामले में विनण9य में दी गई विgप्पशिणयों क े अनुसार अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों को अविनवाय[9] माना है, जो सुविव ा क े लिलए नी+े उद्धृ विकया गया हैः- - "उपरोक्त मामले में एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े आवेदन क े सार्थी न्यायालय में तिडZी क े ह आवेदक द्वारा देय राशिश जमा नहीं की गई र्थीी। आवेदक ने तिडZी क े पालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति प्रस् ु करने क े लिलए न्यायालय से अनुमति मांगने और उक्त राशिश को जमा करने से vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd छ ू g देने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया, जैसा विक न्यायालय ने विनदUश विदया है इसलिलए तिडZी को रद्द करने का आवेदन अक्षम र्थीा। इसे मनोरंजन और अनुमति नहीं दी जा सक ी र्थीी।" " दनुसार, क े दार नार्थी (उपरोक्त) क े मामले में सव च्च न्यायालय द्वारा विन ा9रिर कानून और अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों क े विन+ले न्यायालय द्वारा विदए गए विवशिशष्ट विनष्कष’ पर विव+ार कर े हुए, इस न्यायालय को आक्षेविप आदेशों में कोई अवै ा या दुब9ल ा नहीं विमली है. दनुसार, याति+का खारिरज की जा ी है।"

9. उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार पारिर आदेश से व्यशिर्थी होने क े कारण, अपीलार्थिर्थीयों ने इस न्यायालय का दरवाजा खgखgाया है।कल, अर्थीा9, प्रारंशिभक +रण में इस अपील की ओर ले जाने वाली याति+का पर विव+ार कर े हुए, और मामले क े सभी थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रखने क े बाद, जब इस न्यायालय ने अब क क े बकाया विकराए/मध्यव 3 लाभ की राशिश क े बारे में अपीलक ा9ओं क े विवद्व अति वक्ता से पूछ ाछ की, ो यह प्रस् ु विकया गया विक अपीलार्थी3 इस प्रकार देय राशिश को ुरं जमा करने क े लिलए ैयार और इच्छ ु क र्थीे और, अनुरो पर, मामले को एक विदन क े लिलए स्र्थीविग कर विदया गया र्थीा।

10. यह ब ाया गया है विक आज, इस विव+ारण न्यायालय क े विदनांक 01.02.2023 क े आदेश क े अनुपालन में अपीलार्थिर्थीयों द्वारा विव+ारण न्यायालय में 1,90,000/- रुपये (एक लाख नब्बे हजार रुपये) की राशिश जमा की गई है, सिजसे प्रश्नग तिडZी क े ह आगे देय राशिश कहा जा ा है, जो जून, 2015 से अप्रैल, 2023 क 2,000/- रुपये प्रति माह की दर से विकराया/मध्यव 3 लाभ है।आज बैंक में जमा क े पृष्ठांकन क े सार्थी विव+ारण न्यायालय में प्रस् ु विनविवदा का एक फोgोस्gेg भी हमारे समक्ष रखा गया है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

11. अपीलार्थिर्थीयों द्वारा उठाए गए कदमों को ध्यान में रख े हुए और परिरस्थिस्र्थीति यों की समग्र ा में, अनुमति दे े समय, हमने अं ः इस स् र पर ही पक्षकारों क े अति वक्ता को सुना है।

12. अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्व अति वक्ता ने अविनवाय[9] रूप से प्रस् ु विकया है विक विन+ली अदाल और उच्च न्यायालय ने मामले को बहु कठोर रूप से लिलया है और यह विव+ार करने में विवफल रहे हैं विक प्रश्नग तिडZी क े ह सी े देय राशिश, विकराए की बकाया 8,000/- रुपये की राशिश और लाग की ओर 3,212/- रुपये की एक और राशिश वास् व में प्रति वादी द्वारा जमा की गई र्थीी और दी गई परिरस्थिस्र्थीति यों में, एकपक्षीय तिडZी को अलग करने क े लिलए आवेदन को क े वल बाद की दुकान क े आगे उपयोग और कब्जे की विदशा में राशिश जमा करने क े अभाव में खारिरज नहीं विकया जा सक ा र्थीा।यह भी प्रस् ु विकया गया है विक यह 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े जानबूझकर ब+ाव का मामला नहीं र्थीा और विकसी भी मामले में, अपीलक ा9, अब अप्रैल, 2023 क े महीने क विकराए/मध्यव 3 लाभ की ओर राशिश जमा करने क े बाद, योग्य ा क े आ ार पर मुकदमा लड़ने क े लिलए एक अवसर क े हकदार हैं। इसक े विवपरी, प्रति वादी क े लिलए उपस्थिस्र्थी अति वक्ता ने आक्षेविप आदेशों का विवति व समर्थी9न विकया है और क 9 विदया है विक एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े लिलए आवेदन दालिखल करने क े समय 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े विवशिशष्ट अनुपालन क े अभाव में, उच्च न्यायालय द्वारा विवति व पुविष्ट विकए गए विव+ारण न्यायालय द्वारा लिलए गए म को अन्यायपूण[9] नहीं कहा जा सक ा है।

13. विवरो ी दलीलों पर गंभीर ा से विव+ार करने और अशिभलेखों की जां+ करने क े बाद, हमारा स्पष्ट विव+ार है विक आक्षेविप आदेशों को अनुमोविद नहीं विकया जा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सक ा है और अपीलक ा9 योग्य ा क े आ ार पर मुकदमा का विवरो करने का एक अवसर पाने क े हकदार हैं।

14. प्रान् ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17, सिजस पर विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा अवलंब लिलया गया है, विक एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने की प्रार्थी9ना को अस्वीकार कर े हुए, विनम्नानुसार हैः- "17. सिसविवल प्रविZया संविह ा का लागू होना- (1) सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 ( 5/1908) में विवविह प्रविZया, जहां क उस संविह ा द्वारा या इस अति विनयम द्वारा अन्यर्थीा उपबंति है, विकसी लघु वाद न्यायालय द्वारा उसक े द्वारा संज्ञेय सभी वादों में और ऐसे वादों से उद्भू सभी काय9वाविहयों में अपनाई जाने वाली प्रविZया होगीः परन् ु यह विक एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् करने क े आदेश क े लिलए या विनण9य क े पुनर्विवलोकन क े लिलए आवेदक, अपना आवेदन प्रस् ु कर े समय, तिडZी क े अ ीन या विनण9य क े अनुसरण में अपने द्वारा देय रकम न्यायालय में जमा करेगा या तिडZी क े पालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति देगा या विनण9य का अनुपालन करेगा जो न्यायालय इस विनविमत्त उसक े द्वारा विकए गए पूव[9] आवेदन पर विनदेशिश करे।(2) जहां कोई व्यविक्त उप ारा (1) क े परन् ुक क े अ ीन प्रति भू क े रूप में दायी हो गया है, वहां प्रति भूति सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 (1908 का 5) की ारा 145 द्वारा उपबंति रीति से वसूल की जा सक े गी।

14. 1 सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 क े विनयम 13 को भी त्काल संदभ[9] क े लिलए इस प्रकार उद्धृ विकया जा सक ा हैः - “ 13. प्रति वाविदयों क े विवरुद्ध एकपक्षीय तिडZी को अपास् करना।विकसी ऐसे मामले में, सिजसमें प्रति वादी क े विवरुद्ध एकपक्षीय रूप से कोई तिडZी पारिर की जा ी है, वह उसे अपास् करने क े आदेश क े लिलए उस न्यायालय को आवेदन कर सक ा है, सिजसक े द्वारा तिडZी पारिर की गई र्थीी और यविद वह उस न्यायालय को सं ुष्ट कर ा है विक सम्मन देना की विवति व ामील नहीं की गई र्थीी, या यह विक जब मुकदमा की सुनवाई क े लिलए बुलाया गया र्थीा, ो उसे उपस्थिस्र्थी होने से विकसी पया9प्त कारण से रोका गया र्थीा, ो न्यायालय ख+U, न्यायालय में भुग ान या अन्यर्थीा क े संबं में ऐसी श ’ पर, जो वह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ठीक समझे, अपने विवरुद्ध तिडZी को अपास् करने का आदेश देगा और मुकदमा की काय9वाही क े लिलए एक ति शिर्थी विनय करेगा। परन् ु जहां तिडZी ऐसी प्रक ृ ति की है विक उसे क े वल ऐसे प्रति वादी क े विवरुद्ध अपास् नहीं विकया जा सक ा है वहां उसे सभी या विकसी अन्य प्रति वादी क े विवरुद्ध भी अपास् विकया जा सक ा हैः परन् ुक यह है विक और कोई न्यायालय क े वल इस आ ार पर एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् नहीं करेगा विक सम्मन की ामील में कोई अविनयविम ा हुई है, यविद उसका समा ान हो जा ा है विक प्रति वादी क े पास सुनवाई की ारीख की सू+ना र्थीी और उसक े पास वादी क े दावे का उत्तर देने क े लिलए उपस्थिस्र्थी होने का पया9प्त समय र्थीा। स्पविष्टकरणः-- जहां इस विनयम क े ह एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी क े लिखलाफ अपील की गई है और अपील का विनस् ारण इस आ ार क े अलावा विकसी अन्य आ ार पर विकया गया है विक अपीलक ा9 ने अपील वापस ले ली है, वहां इस विनयम क े ह एकपक्षीय तिडZी को रद्द करने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया जाएगा।"

15. यह उति+ रूप से देखा जा सक ा है विक मुकदमा क े संबं में, सिजस पर 1887 का अति विनयम लागू हो ा है, एक एकपक्षीयीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् करने क े आदेश की मांग आदेश वाले आवेदक से तिडZी/विनण9य क े अ ीन देय राशिश जमा आदेश की अपेक्षा की जा ी है या तिडZी क े सम्यक पालन या विनण9य क े अनुपालन क े लिलए प्रति भूति प्रस् ु करनी हो ी है।सिसविवल प्रविZया संविह ा क े विनयम 13 क े अ ीन भी, एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् आदेश क े लिलए आदेश कर े समय, न्यायालय प्रति वादी को ख+U, न्यायालय में संदाय या अन्यर्थीा क े विनबं नों क े लिलए रख सक ा है।हालांविक, इन आवश्यक ाओं को व्यावहारिरक दृविष्टकोण से देखने की आवश्यक ा है और इसे इस रह से लागू नहीं विकया जा सक ा है विक प्रत्येक गल ी क े लिलए प्रति वादी को दंतिड विकया जाए, भले ही प्रश्नग तिडZी में देय राशिश स्पष्ट रूप से विन ा9रिर न की गई हो। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

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15. 1 - व 9मान मामले क े प्रयोजन क े लिलए, संदेय राशिश क े संबं में, बकाया विकराए की क ु ल राशिश 8,000/- रुपए की राशिश तिडZी में विन ा9रिर की गई र्थीी और लाग की ओर 3212/- रुपए की एक और राशिश को विन ा9रिर विकया गया र्थीा।विनःसंदेह, जब क अपेतिक्ष विव+ारण न्यायालय फीस क े भुग ान क े बाद मुकदमा दुकान का वास् विवक खाली कब्जा वादी को नहीं विमल ा ब क वादी को मुकदमा क े दौरान विकराया/मध्यव 3 लाभ क े रूप में प्रति माह 2,000 रुपये प्राप्त करने का हकदार ठहराया गया र्थीा लेविकन, विव+ारण न्यायालय ने तिडZी की ारीख क भी प्रति वादी द्वारा देय राशिश की विवशिशष्ट रूप से गणना नहीं की र्थीी। प्रस् ु परिरस्थिस्र्थीति यों में, जब प्रति वादी, अपीलार्थिर्थीयों क े पूव9व 3, ने प्रश्नग तिडZी को देखने क े बाद ुरं न्यायालय का रुख विकया और उसक े ह सी े विन ा9रिर राशिश अर्थीा9 ्, बकाया विकराए की 8,000/- रुपये की राशिश और लाग की ओर 3,212/- रुपये, क ु ल विमलाकर 11,212/- रुपये, जमा विकए, ो एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े आदेश की मांग कर े हुए, यह ऐसा मामला नहीं र्थीा जहां प्रति वादी ने जमा करने की आवश्यक ाओं को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया र्थीा.इसक े अलावा, प्रश्नग तिडZी क े वल न संबं ी तिडZी नहीं र्थीी बस्थिल्क बेदखली क े लिलए भी र्थीी।मुकदमा की विवषय -वस् ु और समग्र परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, एक व्यावहारिरक दृविष्टकोण लेने की आवश्यक ा र्थीी और यविद कोई और जमा या प्रति भूति प्रस् ु करना आवश्यक समझा गया हो ा, ो इस संबं में उति+ आदेश पारिर विकया जा सक ा र्थीा। इसे अलग रीक े से प्रस् ु कर े हुए, अति विनयम 1887 की ारा 17 क े संदभ[9] में, जो सीपीसी क े आदेश IX विनयम 13 क े सार्थी पविठ है, न्यायालय यविद आवश्यक हो ा ो जमा करने क े लिलए समय बढ़ा सक ा र्थीा, या तिडZी क े पालन क े लिलए प्रति भूति की श ’ पर प्रति वादी को रख सक ा र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

15. 2 र्थीाविप, इसमें इसक े ऊपर जो देखा गया है और उद्धृ विकया गया है, उसक े लिलए यह स्पष्ट है विक विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं को ऐसे कठोर और बस्थिल्क अव्यावहारिरक रूप से देखा है विक सम्यक प्रति वादी क े पsा ् मुकदमा क े गुणागुण विनण9य की मांग करने क े प्रति मुकदमाी क े वास् विवक प्रयास को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया गया है।हमारे विव+ार में, थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों क े व 9मान प्रारूप में, प्रति वादी की एकपक्षीय तिडZी को रद्द करने की प्रार्थी9ना को प्रश्नग तिडZी क े संदभ[9] में आगे जमा करने से इनकार नहीं विकया जा सक ा र्थीा। 15.[3] - उच्च न्यायालय ने अपीलार्थिर्थीयों द्वारा दायर याति+का को खारिरज कर े हुए और विव+ारण न्यायालय क े विव+ारों का समर्थी9न कर े हुए, क े दारनार्थी उपरोक्त क े मामले में इस न्यायालय क े विनण9य पर भरोसा करने क े लिलए आगे बढ़े हैं, विक 1887 क े अति विनयम की ारा 17 क े प्राव ानों को अविनवाय[9] माना गया है।हमारे विव+ार में, कशिर्थी विनण9य का संदभ[9] व 9मान मामले में अप्रासंविगक बना हुआ है.भले ही 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं को अविनवाय[9] माना गया हो, व 9मान मामला ऐसा नहीं र्थीा जहां प्रति वादी ने उन अपेक्षाओं को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया हो।क े दारनार्थी (उपरोक्त) में, उच्च न्यायालय द्वारा पुनः प्रस् ु विकए गए माग[9] में, यह स्पष्ट रूप से देखा गया विक आवेदक ने कोई राशिश जमा नहीं विकया र्थीा और जमा करने क े लिलए या प्रति भूति देने क े लिलए न्यायालय की अनुमति मांगने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया र्थीा।ऐसे थ्यों की पृष्ठभूविम में, 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े क ु ल गैर अनुपालन को विदखा े हुए, इस न्यायालय ने तिडZी को रद्द करने क े लिलए आवेदन को अक्षम रूप में अशिभविन ा9रिर विकया। व 9मान मामले क े थ्यों पर क े दारनार्थी (उपरोक्त) क े फ ै सले को लागू करना मुस्थिश्कल है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

16. उपयु9क्त क े अति रिरक्त, जहां हम पा े हैं विक विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने मामले का बहु कनीकी और अव्यावहारिरक दृविष्टकोण अपनाया र्थीा, एक और मजबू कारण है सिजसक े लिलए हम इस मामले में एकपक्षीय पारिर तिडZी को अपास् करने क े लिलए प्रार्थी9ना स्वीकार करने क े इच्छ ु क हैं।नोविgस क े अनुसार, इस न्यायालय क े प्रश्नों क े उत्तर में, अपीलार्थिर्थीयों ने ुरं सदभावयुक्त कदम उठाए हैं और वह राशिश जमा की है जो अप्रैल, 2023 क विकराए/मध्यव 3 लाभ से संबंति हो सक ी है।इस सद्भावयुक्त और त्वरिर कदम क े लिलए (यद्यविप इस न्यायालय में पहुं+ने क े बाद उठाया गया ), हमारे विव+ार में, वे गुण-दोष क े आ ार पर मुकदमा का प्रति वाद करने क े अवसर क े हकदार हैं, विवशेष रूप से जब मामला एक दुकान से संबंति है जहां अपीलक ा9 का पूव9व 3 विकरायेदार क े रूप में जारी रहा र्थीा और मुकदमाी-प्रत्यर्थी3 विकराये क े भुग ान में +ूक क े आ ार पर बेदखली क े लिलए तिडZी की मांग कर रहा है।

17. दनुसार और उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, यह अपील सफल हो ी है और इस रीक े से स्वीक ृ की जा ी है विक 01.09.2022 और 21.09.2022 को आक्षेविप आदेशों को अपास् कर े हुए, सीपीसी क े आदेश IX विनयम 13 क े ह अपीलक ा9ओं द्वारा दायर आवेदन की अनुमति दी जा ी है और इस प्रकार, 09.03.2016/16.03.2016 को एकपक्षीय विनण9य और तिडZी को अपास् विकया जा ा है।परिरणामस्वरूप, कशिर्थी मुकदमा अपने गुण-दोष पर विव+ार करने क े लिलए बहाल माना जाएगा।

18. मुकदमा में काय9वाविहयों क े प्रयोजन क े लिलए, बी +ुक े समय को देख े हुए, विनतिs रूप से विव+ारण न्यायालय से यह अपेतिक्ष होगा विक वह अनावश्यक विवलंब पर अंक ु श लगा े हुए उसे युविक्तयुक्त प्रार्थीविमक ा प्रदान करे और शीघ्र ा से आगे बढ़े।इसक े अलावा, न्याय क े विह में, यह भी उति+ माना जा ा है और vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd इसलिलए यह प्राव ान विकया गया है विक अपीलक ा9ओं को 28 फरवरी, 2023 को या उससे पहले अपने लिललिख बयान प्रस् ु करने की आवश्यक ा होगी और उसक े बाद, विव+ारण न्यायालय अशिभयान क े सार्थी आगे बढ़ेगा, जैसा विक ऊपर संक े विदया गया है।

19. जहां क अपीलार्थिर्थीयों द्वारा जमा की गई राशिश का संबं है, हम प्रत्यर्थी3- वादी क े उपर छोड़ े है विक वह इसे वापस लेने क े लिलए आवेदन करने क े लिलए खुला छोड़ े हैं, यविद इस रह की सलाह दी जा ी है और यविद ऐसा कोई अनुरो वादी द्वारा विकया जा ा है, ो उस पर विवति क े अनुसार विव+ारण न्यायालय द्वारा उति+ विव+ार विकया जा सक ा है।

20. पक्षकार अपने संबंति काउंसेलों क े माध्यम से 28.02.2023 को विव+ारण न्यायालय क े समक्ष उपस्थिस्र्थी होने क े लिलए नोविgस पर खड़े होंगे।

21. लंविब आवेदनों को भी विनस् ारिर विकया जा ा है। ……………………….. (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी) ……………………….. (न्यायमूर्ति बेला एम. वित्रवेदी) नई विदल्ली vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 02 फरवरी, 2023 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd