Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 765/2023
(विवशेष अनुमति याति+का (सी) संख्या - 2542/2023)
श्याम क
ु मार गुप्ता और अन्य अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
शुभम जैन प्रति वादी (गण)
विन ण9 य
माननीय न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
अनुमति अनुदत्त की गई।
JUDGMENT
2. बकाया विकराए की वसूली और बेदखली क े लिलए सिसविवल वाद संख्या - 1/2015 में मृ प्रति वादी क े विवति क प्रति विनति यों द्वारा यह अपील, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा याति+का संख्या - 3536/2022 में पारिर आदेश विदनांक 21.09.2022 क े लिखलाफ विनदUशिश है, सिजसमें उच्च न्यायालय ने अपर सिजला एवं सत्र न्याया ीश विद्व ीय (पॉक्सो अति विनयम), रायबरेली की अदाल द्वारा पारिर आदेश विदनांक 01.09.2022 क े द्वारा आवेदन को सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 ('सीपीसी') क े आदेश IX विनयम 13 क े ह एकपक्षीय विनण9य क े ह अपास् कर े हुए हस् क्षेप करने से इंकार कर विदया है एवं विदनांक 03.09.2016/16.03.2016 को तिडZी जारी की।
3. अनावश्यक विववरण और संक्षेप में, मामले क े प्रासंविगक पृष्ठभूविम पहलू यह हैं विक इसमें प्रति वादी ने, मालिलक और मालिलकाना अति कार ारक क े रूप में अपनी क्षम ा का दावा कर े हुए, लघु मुकदमा न्यायालय में व 9मान अपीलक ा9ओं क े विदवंग विप ा क े लिखलाफ पूव क्त मुकदमा दायर विकया, सिजसमें कहा गया विक प्रति मुकदमाी 2000/- रुपये प्रति माह क े मासिसक विकराए पर मुकदमा दुकान में विकरायेदार र्थीा और फरवरी, 2015 से मई, 2015 क विकराए 8,000/- रुपये और नोविgस क े बावजूद 15% नगरपालिलका कर का भुग ान करने में विवफल रहा र्थीा।
4. ऐसा प्र ी हो ा है विक उक्त सिसविवल मुकदमा में, विव+ारण न्यायालय ने प्रति वादी को सम्मन की ामील को पया9प्त माना और प्रति वादी की ओर से उपसंजा न होने क े कारण एकपक्षीय रूप से काय9वाही की और साक्ष्य लेने क े बाद, 09.03.2016 को, लाग क े सार्थी मुकदमा की तिडZी की, 8,000/- रुपये की राशिश में विकराए की अवशिशष्ट राशिश की वसूली और प्रति वादी को मुकदमा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd दुकान से बेदखल करने क े लिलए जबविक वादी को भी प्रति वादी से 2000/- रू. क्षति पूर्ति प्राप्त करने का हकदार बनाया, जब क विक वादी को खाली दुकान का कब्जा प्रदान नहीं विकया जा ा।विदनांक 09.03.2016 क े फ ै सले का प्रभावी विहस्सा इस प्रकार हैः वादी क े मुकदमा में प्रति वादी से 8,000/- रुपये विकराया वसूल करने क े लिलए और विव+ारा ीन दुकान की बेदखली क े लिलए एकपक्षीय तिडZी पारिर विकया जा ा है और प्रति वादी को आदेश विदया जा ा है विक वह अशिभयोक्ता की दुकान काे खाली करक े कब्जा सौंप दे जो इस समय नगरपालिलका, परगना, हसील और सिजला रायबरेली क े अति कार क्षेत्र में बेलीगंज फाgक क े पास नगर पालिलका हाउस नं. 62/3, वाड[9] नं. 24, मलिलकमाऊ रोड में स्थिस्र्थी है, सिजसकी +ार सीमाएं उत्तर में हैंः मलिलकमाऊ रोड, दतिक्षण में: अशिभयोक्ता का शेष भवन, पूव[9] में: अशिभयोक्ता का घर, पतिsम में: हरिरओम का घर स्थिस्र्थी है, का कब्जा दो महीने क े भी र सौंप दे।वादी उपरोक्त दुकान क े उपयोग क े लिलए मुआवजे क े रूप में और विनष्पादन विवभागों में न्यायालय शुल्क का भुग ान करने क े बाद उक्त दुकान क े वास् विवक खाली कब्जे और कब्जे को सौंपने क 2,000/- प्रति माह रुपये प्राप्त करने का हकदार होगा।
5. इसक े पsा, प्रति वादी, अपीलक ा9ओं क े पूव9व 3, ने 20.08.2016 को परिरसीमा अति विनयम, 1963 की ारा 5 क े ह एक आवेदन क े सार्थी सीपीसी क े आदेश 9 विनयम 13 क े ह एक आवेदन विदया। उन्होंने प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 ('1887 का अति विनयम') की ारा 17 क े ह एक आवेदन भी विदया, सिजसमें लाग की राशिश सविह 11,212/- रुपये की तिडZी राशिश जमा करने की अनुमति मांगी गई र्थीी। अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी, प्रति वादी द्वारा इस प्रकार पेश विकए गए आवेदन क े लिखलाफ वादी- प्रत्यर्थी3 द्वारा एक आपलित्त की गई र्थीी, विक प्रश्नग तिडZी क े ह, वह न क े वल बकाया विकराए और लाग क े अवशिशष्ट क े लिलए बस्थिल्क 2,000/- प्रति माह की दर से नुकसान क े लिलए भी हकदार र्थीा जब क विक कब्जा प्रति वादी क े पास जारी रहा और नुकसान की विदशा में आवश्यक नराशिश जमा नहीं विकया गया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd र्थीा, एकपक्षीय तिडZी को अलग करने क े लिलए आवेदन रखरखाव योग्य नहीं र्थीा। यह देखा गया है विक पूव क्त आवेदन विव+ारा ीन ा रहने क े दौरान, प्रति वादी, अपीलार्थिर्थीयों क े विप ा की 26.09.2017 को मृत्यु हो गई और मृ आवेदक क े स्र्थीान पर उनक े प्रति स्र्थीापन क े लिलए व 9मान अपीलार्थिर्थीयों द्वारा 12.03.2018 को एक आवेदन प्रस् ु विकया गया र्थीा।
6. विव+ारण विव+ारण न्यायालय ने पक्षकारों की संबंति प्रस् ुति यों पर ध्यान विदया और अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी विनम्नलिललिख विgप्पणी कर े हुए वादी-प्रत्यर्थी3 की आपलित्तयों को बरकरार रखा:- “आवेदक मा ा प्रसाद ने व 9मान प्रकीण[9] मुकदमा की फाइल में एक आवेदन 7g[2] जमा मुकदमाक े 8,000/- रुपये की तिडZी राशिश और मुकदमा की लाग रु. 3212/- क े आ ार क ु ल राशिश जमा करने क े आदेश क े लिलए आवेदन विकया र्थीा, सिजस पर न्यायालय द्वारा एक आदेश पारिर विकया गया र्थीा विक आवेदक उस राशिश को जमा कर सक ा है सिजस पर जोलिखम है।इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा 11,212.00 रुपये की राशिश जमा की गई है, जबविक लघु दावा वाद संख्या - 01/2015 और इसक े अनुसरण में 25-03-2016 को पारिर तिडZी क े अवलोकन से स्पष्ट है, फरवरी, 2016 से मई, 2016 (क ु ल +ार महीने) क े लिलए 2,000 रुपये प्रति माह की दर से देय विकराया देने क े लिलए एक आदेश पारिर विकया गया है, जो क ु ल 8,000 रुपये है और 9% की दर से 15% नगरपालिलका कर का भुग ान विकया जाना है। इसक े अलावा, तिडZी में यह भी उल्लेख विकया गया है विक जब क प्रति वादी प्रश्नग दुकान का कब्जा और कब्जा वादी को खाली करक े नहीं दे ा है, ब क प्रति वादी द्वारा अशिभयोक्ता को 2000/- रुपये प्रति माह क े विहसाब से उपयोग का मुआवजा और प्रति अशिभयोक्ता द्वारा वादी को मामले का ख+9 विदया जाए। पूव क्त विनण9य और तिडZी क े एकीक ृ अवलोकन से यह स्पष्ट है विक आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा विनण9य और तिडZी का अनुपालन नहीं विकया गया है.उसक े द्वारा न ो नगरपालिलका कर और न ही उस पर प्राप्त ब्याज और न ही ारा 13 क े ह आवेदन दालिखल करने की ारीख क उपयोग क े लिलए मुआवजे का भुग ान विकया गया है।क े वल फरवरी महीने से मई, 2015 क का देय विकराया 2,000 रुपये प्रति माह की दर से और मामले की लाग रु. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 3212/- क ु ल राशिश रु. 11,212/- उसक े द्वारा जमा की गई है, शेष राशिश जो आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा पूव क्त तिडZी और विनण9य क े अनुपालन में विवरो ी पक्ष को देय र्थीी, इस संबं में न ो आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा कोई राशिश जमा की गई है और न ही इसक े अनुपालन क े बारे में कोई उपZम प्रस् ु करने क े संबं में न्यायालय से कोई अनुमति मांगी गई है.अ ः यह स्पष्ट है विक प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17, जो आवेदक पर अविनवाय[9] दातियत्व अति रोविप कर ी है विक आवेदक एकपक्षीय तिडZी और विनण9य क े अ ीन देय कु ल राशिश का भुग ान करने क े पsा ् सी. पी. सी. क े आदेश 9 क े विनयम 13 क े अ ीन आवेदन प्रस् ु करेगा और एक एक शब्द एवं पूव क्त विवति क उपबं का पूण[9] अनुपालन आवेदक मा ा प्रसाद द्वारा नहीं विकया गया है और न ही उसक े द्वारा इस संबं में कोई उपZम/गारंgी न्यायालय में प्रस् ु की गई है विक वह पूव क्त विनण9य और तिडZी का अनुपालन करने क े लिलए ैयार है।ऐसी स्थिस्र्थीति में, न्यायालय की यह राय है विक प्रां ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17 का अनुपालन न करने क े कारण त्काल प्रकीण[9] सिसविवल वाद खारिरज विकया जा सक ा है और विवरो ी ारा द्वारा दालिखल प्रारंशिभक आपलित्त आवेदन 36g[2] को अनुमति प्रदान विकये जाने योग्य है।"
7. विदनांक 01.09.2022 क े पूव क्त आदेश से व्यशिर्थी होने क े कारण, अपीलार्थिर्थीयों ने अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी -सार्थी, भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 227 क े ह एक याति+का दायर करक े उच्च न्यायालय का दरवाजा खgखgाया, इस दलील क े सार्थी विक प्रति वादी को उक्त सिसविवल मुकदमा में ामील नहीं विकया गया र्थीा, और मुकदमाी-प्रति वादी ने थ्यों को छ ु पाने क े सार्थी तिडZी प्राप्त की। इसक े अलावा, यह प्रस् ु विकया गया विक अपीलार्थिर्थीयों क े विप ा ने एकपक्षीय तिडZी क े बारे में जानने क े ुरं बाद आवेदन प्रस् ु विकया र्थीा, और 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं का अनुपालन विकया र्थीा.यह भी प्रस् ु विकया गया विक विव+ारण न्यायालय इस बा की जां+ करने में विवफल रही र्थीी विक क्या वादी -प्रति वादी ने प्रश्नग दुकान खरीदने क े बाद प्रति वादी को उसक े स्वाविमत्व क े बारे में सूति+ विकया र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
8. र्थीाविप, उच्च न्यायालय ने 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं का अनुपालन न करने और क े दारनार्थी बनाम मोहन लाल क े शरवानी 2002 All CJ 145 [= (2002) 2 SCC 16], क े मामले में इस न्यायालय क े विनण9य क े संदभ[9] में विव+ारण न्यायालय से सहमति व्यक्त की।प्रति वादी द्वारा अपेतिक्ष अनुपालन क े अभाव में, प्रश्नग तिडZी क े ह देय और देय राशिश जमा करने की याति+का को अविनवाय[9] रूप से खारिरज करने क े लिलए काय9वाही की गई।उच्च न्यायालय ने अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी विनम्नलिललिख म व्यक्त विकया और अशिभविन ा9रिर विकयाः- - पक्षकारों क े लिलए विवद्व अति वक्ता को सुनने और अशिभलेखों का अवलोकन करने क े बाद, यह प ा +ल ा है विक प्रति वादी द्वारा दायर एससीसी वाद पर विदनांविक 09.03.2016 आदेश क े ह एकपक्षीय विनण9य लिलया गया र्थीा, सिजसक े लिखलाफ सीपीसी क े आदेश IX विनयम १३ क े ह एक आवेदन याति+कामुकदमा् ाओं द्वारा दायर विकया गया र्थीा।बेशक, याति+यों ने अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों का अनुपालन नहीं विकया, सिजसमें यह प्राव ान है विक आवेदक, आवेदन प्रस् ु कर े समय, तिडZी क े ह या विनण9य क े अनुसरण में अपने द्वारा देय राशिश को न्यायालय में जमा करेगा, या तिडZी क े पालन या विनण9य क े अनुपालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति देगा, जो न्यायालय, इस संबं में विकए गए विपछले आवेदन पर, विनदUश दे। "विदनांक 01.09.2022 क े आक्षेविप आदेश क े अवलोकन से यह संक े विमलेगा विक विन+ली न्यायालय ने विवशेष रूप से यह दज[9] करक े अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े उल्लंघन पर विव+ार विकया है विक याति+काक ा9 राशिश जमा करने में विवफल रहे हैं जैसा विक विदनांक 09.03.2016 क े आदेश क े अनुसरण में देय र्थीा।" सव च्च न्यायालय ने क े दार नार्थी (ऊपर) क े मामले में विनण9य में दी गई विgप्पशिणयों क े अनुसार अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों को अविनवाय[9] माना है, जो सुविव ा क े लिलए नी+े उद्धृ विकया गया हैः- - "उपरोक्त मामले में एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े आवेदन क े सार्थी न्यायालय में तिडZी क े ह आवेदक द्वारा देय राशिश जमा नहीं की गई र्थीी। आवेदक ने तिडZी क े पालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति प्रस् ु करने क े लिलए न्यायालय से अनुमति मांगने और उक्त राशिश को जमा करने से vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd छ ू g देने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया, जैसा विक न्यायालय ने विनदUश विदया है इसलिलए तिडZी को रद्द करने का आवेदन अक्षम र्थीा। इसे मनोरंजन और अनुमति नहीं दी जा सक ी र्थीी।" " दनुसार, क े दार नार्थी (उपरोक्त) क े मामले में सव च्च न्यायालय द्वारा विन ा9रिर कानून और अति विनयम, 1887 की ारा 17 क े प्राव ानों क े विन+ले न्यायालय द्वारा विदए गए विवशिशष्ट विनष्कष’ पर विव+ार कर े हुए, इस न्यायालय को आक्षेविप आदेशों में कोई अवै ा या दुब9ल ा नहीं विमली है. दनुसार, याति+का खारिरज की जा ी है।"
9. उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार पारिर आदेश से व्यशिर्थी होने क े कारण, अपीलार्थिर्थीयों ने इस न्यायालय का दरवाजा खgखgाया है।कल, अर्थीा9, प्रारंशिभक +रण में इस अपील की ओर ले जाने वाली याति+का पर विव+ार कर े हुए, और मामले क े सभी थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रखने क े बाद, जब इस न्यायालय ने अब क क े बकाया विकराए/मध्यव 3 लाभ की राशिश क े बारे में अपीलक ा9ओं क े विवद्व अति वक्ता से पूछ ाछ की, ो यह प्रस् ु विकया गया विक अपीलार्थी3 इस प्रकार देय राशिश को ुरं जमा करने क े लिलए ैयार और इच्छ ु क र्थीे और, अनुरो पर, मामले को एक विदन क े लिलए स्र्थीविग कर विदया गया र्थीा।
10. यह ब ाया गया है विक आज, इस विव+ारण न्यायालय क े विदनांक 01.02.2023 क े आदेश क े अनुपालन में अपीलार्थिर्थीयों द्वारा विव+ारण न्यायालय में 1,90,000/- रुपये (एक लाख नब्बे हजार रुपये) की राशिश जमा की गई है, सिजसे प्रश्नग तिडZी क े ह आगे देय राशिश कहा जा ा है, जो जून, 2015 से अप्रैल, 2023 क 2,000/- रुपये प्रति माह की दर से विकराया/मध्यव 3 लाभ है।आज बैंक में जमा क े पृष्ठांकन क े सार्थी विव+ारण न्यायालय में प्रस् ु विनविवदा का एक फोgोस्gेg भी हमारे समक्ष रखा गया है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
11. अपीलार्थिर्थीयों द्वारा उठाए गए कदमों को ध्यान में रख े हुए और परिरस्थिस्र्थीति यों की समग्र ा में, अनुमति दे े समय, हमने अं ः इस स् र पर ही पक्षकारों क े अति वक्ता को सुना है।
12. अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्व अति वक्ता ने अविनवाय[9] रूप से प्रस् ु विकया है विक विन+ली अदाल और उच्च न्यायालय ने मामले को बहु कठोर रूप से लिलया है और यह विव+ार करने में विवफल रहे हैं विक प्रश्नग तिडZी क े ह सी े देय राशिश, विकराए की बकाया 8,000/- रुपये की राशिश और लाग की ओर 3,212/- रुपये की एक और राशिश वास् व में प्रति वादी द्वारा जमा की गई र्थीी और दी गई परिरस्थिस्र्थीति यों में, एकपक्षीय तिडZी को अलग करने क े लिलए आवेदन को क े वल बाद की दुकान क े आगे उपयोग और कब्जे की विदशा में राशिश जमा करने क े अभाव में खारिरज नहीं विकया जा सक ा र्थीा।यह भी प्रस् ु विकया गया है विक यह 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े जानबूझकर ब+ाव का मामला नहीं र्थीा और विकसी भी मामले में, अपीलक ा9, अब अप्रैल, 2023 क े महीने क विकराए/मध्यव 3 लाभ की ओर राशिश जमा करने क े बाद, योग्य ा क े आ ार पर मुकदमा लड़ने क े लिलए एक अवसर क े हकदार हैं। इसक े विवपरी, प्रति वादी क े लिलए उपस्थिस्र्थी अति वक्ता ने आक्षेविप आदेशों का विवति व समर्थी9न विकया है और क 9 विदया है विक एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े लिलए आवेदन दालिखल करने क े समय 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े विवशिशष्ट अनुपालन क े अभाव में, उच्च न्यायालय द्वारा विवति व पुविष्ट विकए गए विव+ारण न्यायालय द्वारा लिलए गए म को अन्यायपूण[9] नहीं कहा जा सक ा है।
13. विवरो ी दलीलों पर गंभीर ा से विव+ार करने और अशिभलेखों की जां+ करने क े बाद, हमारा स्पष्ट विव+ार है विक आक्षेविप आदेशों को अनुमोविद नहीं विकया जा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सक ा है और अपीलक ा9 योग्य ा क े आ ार पर मुकदमा का विवरो करने का एक अवसर पाने क े हकदार हैं।
14. प्रान् ीय लघु वाद न्यायालय अति विनयम, 1887 की ारा 17, सिजस पर विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा अवलंब लिलया गया है, विक एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने की प्रार्थी9ना को अस्वीकार कर े हुए, विनम्नानुसार हैः- "17. सिसविवल प्रविZया संविह ा का लागू होना- (1) सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 ( 5/1908) में विवविह प्रविZया, जहां क उस संविह ा द्वारा या इस अति विनयम द्वारा अन्यर्थीा उपबंति है, विकसी लघु वाद न्यायालय द्वारा उसक े द्वारा संज्ञेय सभी वादों में और ऐसे वादों से उद्भू सभी काय9वाविहयों में अपनाई जाने वाली प्रविZया होगीः परन् ु यह विक एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् करने क े आदेश क े लिलए या विनण9य क े पुनर्विवलोकन क े लिलए आवेदक, अपना आवेदन प्रस् ु कर े समय, तिडZी क े अ ीन या विनण9य क े अनुसरण में अपने द्वारा देय रकम न्यायालय में जमा करेगा या तिडZी क े पालन क े लिलए ऐसी प्रति भूति देगा या विनण9य का अनुपालन करेगा जो न्यायालय इस विनविमत्त उसक े द्वारा विकए गए पूव[9] आवेदन पर विनदेशिश करे।(2) जहां कोई व्यविक्त उप ारा (1) क े परन् ुक क े अ ीन प्रति भू क े रूप में दायी हो गया है, वहां प्रति भूति सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 (1908 का 5) की ारा 145 द्वारा उपबंति रीति से वसूल की जा सक े गी।
14. 1 सिसविवल प्रविZया संविह ा, 1908 क े विनयम 13 को भी त्काल संदभ[9] क े लिलए इस प्रकार उद्धृ विकया जा सक ा हैः - “ 13. प्रति वाविदयों क े विवरुद्ध एकपक्षीय तिडZी को अपास् करना।विकसी ऐसे मामले में, सिजसमें प्रति वादी क े विवरुद्ध एकपक्षीय रूप से कोई तिडZी पारिर की जा ी है, वह उसे अपास् करने क े आदेश क े लिलए उस न्यायालय को आवेदन कर सक ा है, सिजसक े द्वारा तिडZी पारिर की गई र्थीी और यविद वह उस न्यायालय को सं ुष्ट कर ा है विक सम्मन देना की विवति व ामील नहीं की गई र्थीी, या यह विक जब मुकदमा की सुनवाई क े लिलए बुलाया गया र्थीा, ो उसे उपस्थिस्र्थी होने से विकसी पया9प्त कारण से रोका गया र्थीा, ो न्यायालय ख+U, न्यायालय में भुग ान या अन्यर्थीा क े संबं में ऐसी श ’ पर, जो वह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ठीक समझे, अपने विवरुद्ध तिडZी को अपास् करने का आदेश देगा और मुकदमा की काय9वाही क े लिलए एक ति शिर्थी विनय करेगा। परन् ु जहां तिडZी ऐसी प्रक ृ ति की है विक उसे क े वल ऐसे प्रति वादी क े विवरुद्ध अपास् नहीं विकया जा सक ा है वहां उसे सभी या विकसी अन्य प्रति वादी क े विवरुद्ध भी अपास् विकया जा सक ा हैः परन् ुक यह है विक और कोई न्यायालय क े वल इस आ ार पर एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् नहीं करेगा विक सम्मन की ामील में कोई अविनयविम ा हुई है, यविद उसका समा ान हो जा ा है विक प्रति वादी क े पास सुनवाई की ारीख की सू+ना र्थीी और उसक े पास वादी क े दावे का उत्तर देने क े लिलए उपस्थिस्र्थी होने का पया9प्त समय र्थीा। स्पविष्टकरणः-- जहां इस विनयम क े ह एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी क े लिखलाफ अपील की गई है और अपील का विनस् ारण इस आ ार क े अलावा विकसी अन्य आ ार पर विकया गया है विक अपीलक ा9 ने अपील वापस ले ली है, वहां इस विनयम क े ह एकपक्षीय तिडZी को रद्द करने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया जाएगा।"
15. यह उति+ रूप से देखा जा सक ा है विक मुकदमा क े संबं में, सिजस पर 1887 का अति विनयम लागू हो ा है, एक एकपक्षीयीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् करने क े आदेश की मांग आदेश वाले आवेदक से तिडZी/विनण9य क े अ ीन देय राशिश जमा आदेश की अपेक्षा की जा ी है या तिडZी क े सम्यक पालन या विनण9य क े अनुपालन क े लिलए प्रति भूति प्रस् ु करनी हो ी है।सिसविवल प्रविZया संविह ा क े विनयम 13 क े अ ीन भी, एकपक्षीय रूप से पारिर तिडZी को अपास् आदेश क े लिलए आदेश कर े समय, न्यायालय प्रति वादी को ख+U, न्यायालय में संदाय या अन्यर्थीा क े विनबं नों क े लिलए रख सक ा है।हालांविक, इन आवश्यक ाओं को व्यावहारिरक दृविष्टकोण से देखने की आवश्यक ा है और इसे इस रह से लागू नहीं विकया जा सक ा है विक प्रत्येक गल ी क े लिलए प्रति वादी को दंतिड विकया जाए, भले ही प्रश्नग तिडZी में देय राशिश स्पष्ट रूप से विन ा9रिर न की गई हो। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
15. 1 - व 9मान मामले क े प्रयोजन क े लिलए, संदेय राशिश क े संबं में, बकाया विकराए की क ु ल राशिश 8,000/- रुपए की राशिश तिडZी में विन ा9रिर की गई र्थीी और लाग की ओर 3212/- रुपए की एक और राशिश को विन ा9रिर विकया गया र्थीा।विनःसंदेह, जब क अपेतिक्ष विव+ारण न्यायालय फीस क े भुग ान क े बाद मुकदमा दुकान का वास् विवक खाली कब्जा वादी को नहीं विमल ा ब क वादी को मुकदमा क े दौरान विकराया/मध्यव 3 लाभ क े रूप में प्रति माह 2,000 रुपये प्राप्त करने का हकदार ठहराया गया र्थीा लेविकन, विव+ारण न्यायालय ने तिडZी की ारीख क भी प्रति वादी द्वारा देय राशिश की विवशिशष्ट रूप से गणना नहीं की र्थीी। प्रस् ु परिरस्थिस्र्थीति यों में, जब प्रति वादी, अपीलार्थिर्थीयों क े पूव9व 3, ने प्रश्नग तिडZी को देखने क े बाद ुरं न्यायालय का रुख विकया और उसक े ह सी े विन ा9रिर राशिश अर्थीा9 ्, बकाया विकराए की 8,000/- रुपये की राशिश और लाग की ओर 3,212/- रुपये, क ु ल विमलाकर 11,212/- रुपये, जमा विकए, ो एकपक्षीय तिडZी को अपास् करने क े आदेश की मांग कर े हुए, यह ऐसा मामला नहीं र्थीा जहां प्रति वादी ने जमा करने की आवश्यक ाओं को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया र्थीा.इसक े अलावा, प्रश्नग तिडZी क े वल न संबं ी तिडZी नहीं र्थीी बस्थिल्क बेदखली क े लिलए भी र्थीी।मुकदमा की विवषय -वस् ु और समग्र परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, एक व्यावहारिरक दृविष्टकोण लेने की आवश्यक ा र्थीी और यविद कोई और जमा या प्रति भूति प्रस् ु करना आवश्यक समझा गया हो ा, ो इस संबं में उति+ आदेश पारिर विकया जा सक ा र्थीा। इसे अलग रीक े से प्रस् ु कर े हुए, अति विनयम 1887 की ारा 17 क े संदभ[9] में, जो सीपीसी क े आदेश IX विनयम 13 क े सार्थी पविठ है, न्यायालय यविद आवश्यक हो ा ो जमा करने क े लिलए समय बढ़ा सक ा र्थीा, या तिडZी क े पालन क े लिलए प्रति भूति की श ’ पर प्रति वादी को रख सक ा र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
15. 2 र्थीाविप, इसमें इसक े ऊपर जो देखा गया है और उद्धृ विकया गया है, उसक े लिलए यह स्पष्ट है विक विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं को ऐसे कठोर और बस्थिल्क अव्यावहारिरक रूप से देखा है विक सम्यक प्रति वादी क े पsा ् मुकदमा क े गुणागुण विनण9य की मांग करने क े प्रति मुकदमाी क े वास् विवक प्रयास को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया गया है।हमारे विव+ार में, थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों क े व 9मान प्रारूप में, प्रति वादी की एकपक्षीय तिडZी को रद्द करने की प्रार्थी9ना को प्रश्नग तिडZी क े संदभ[9] में आगे जमा करने से इनकार नहीं विकया जा सक ा र्थीा। 15.[3] - उच्च न्यायालय ने अपीलार्थिर्थीयों द्वारा दायर याति+का को खारिरज कर े हुए और विव+ारण न्यायालय क े विव+ारों का समर्थी9न कर े हुए, क े दारनार्थी उपरोक्त क े मामले में इस न्यायालय क े विनण9य पर भरोसा करने क े लिलए आगे बढ़े हैं, विक 1887 क े अति विनयम की ारा 17 क े प्राव ानों को अविनवाय[9] माना गया है।हमारे विव+ार में, कशिर्थी विनण9य का संदभ[9] व 9मान मामले में अप्रासंविगक बना हुआ है.भले ही 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की अपेक्षाओं को अविनवाय[9] माना गया हो, व 9मान मामला ऐसा नहीं र्थीा जहां प्रति वादी ने उन अपेक्षाओं को पूरी रह से नजरअंदाज कर विदया हो।क े दारनार्थी (उपरोक्त) में, उच्च न्यायालय द्वारा पुनः प्रस् ु विकए गए माग[9] में, यह स्पष्ट रूप से देखा गया विक आवेदक ने कोई राशिश जमा नहीं विकया र्थीा और जमा करने क े लिलए या प्रति भूति देने क े लिलए न्यायालय की अनुमति मांगने क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया र्थीा।ऐसे थ्यों की पृष्ठभूविम में, 1887 क े अति विनयम की ारा 17 की आवश्यक ाओं क े क ु ल गैर अनुपालन को विदखा े हुए, इस न्यायालय ने तिडZी को रद्द करने क े लिलए आवेदन को अक्षम रूप में अशिभविन ा9रिर विकया। व 9मान मामले क े थ्यों पर क े दारनार्थी (उपरोक्त) क े फ ै सले को लागू करना मुस्थिश्कल है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
16. उपयु9क्त क े अति रिरक्त, जहां हम पा े हैं विक विव+ारण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने मामले का बहु कनीकी और अव्यावहारिरक दृविष्टकोण अपनाया र्थीा, एक और मजबू कारण है सिजसक े लिलए हम इस मामले में एकपक्षीय पारिर तिडZी को अपास् करने क े लिलए प्रार्थी9ना स्वीकार करने क े इच्छ ु क हैं।नोविgस क े अनुसार, इस न्यायालय क े प्रश्नों क े उत्तर में, अपीलार्थिर्थीयों ने ुरं सदभावयुक्त कदम उठाए हैं और वह राशिश जमा की है जो अप्रैल, 2023 क विकराए/मध्यव 3 लाभ से संबंति हो सक ी है।इस सद्भावयुक्त और त्वरिर कदम क े लिलए (यद्यविप इस न्यायालय में पहुं+ने क े बाद उठाया गया ), हमारे विव+ार में, वे गुण-दोष क े आ ार पर मुकदमा का प्रति वाद करने क े अवसर क े हकदार हैं, विवशेष रूप से जब मामला एक दुकान से संबंति है जहां अपीलक ा9 का पूव9व 3 विकरायेदार क े रूप में जारी रहा र्थीा और मुकदमाी-प्रत्यर्थी3 विकराये क े भुग ान में +ूक क े आ ार पर बेदखली क े लिलए तिडZी की मांग कर रहा है।
17. दनुसार और उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, यह अपील सफल हो ी है और इस रीक े से स्वीक ृ की जा ी है विक 01.09.2022 और 21.09.2022 को आक्षेविप आदेशों को अपास् कर े हुए, सीपीसी क े आदेश IX विनयम 13 क े ह अपीलक ा9ओं द्वारा दायर आवेदन की अनुमति दी जा ी है और इस प्रकार, 09.03.2016/16.03.2016 को एकपक्षीय विनण9य और तिडZी को अपास् विकया जा ा है।परिरणामस्वरूप, कशिर्थी मुकदमा अपने गुण-दोष पर विव+ार करने क े लिलए बहाल माना जाएगा।
18. मुकदमा में काय9वाविहयों क े प्रयोजन क े लिलए, बी +ुक े समय को देख े हुए, विनतिs रूप से विव+ारण न्यायालय से यह अपेतिक्ष होगा विक वह अनावश्यक विवलंब पर अंक ु श लगा े हुए उसे युविक्तयुक्त प्रार्थीविमक ा प्रदान करे और शीघ्र ा से आगे बढ़े।इसक े अलावा, न्याय क े विह में, यह भी उति+ माना जा ा है और vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd इसलिलए यह प्राव ान विकया गया है विक अपीलक ा9ओं को 28 फरवरी, 2023 को या उससे पहले अपने लिललिख बयान प्रस् ु करने की आवश्यक ा होगी और उसक े बाद, विव+ारण न्यायालय अशिभयान क े सार्थी आगे बढ़ेगा, जैसा विक ऊपर संक े विदया गया है।
19. जहां क अपीलार्थिर्थीयों द्वारा जमा की गई राशिश का संबं है, हम प्रत्यर्थी3- वादी क े उपर छोड़ े है विक वह इसे वापस लेने क े लिलए आवेदन करने क े लिलए खुला छोड़ े हैं, यविद इस रह की सलाह दी जा ी है और यविद ऐसा कोई अनुरो वादी द्वारा विकया जा ा है, ो उस पर विवति क े अनुसार विव+ारण न्यायालय द्वारा उति+ विव+ार विकया जा सक ा है।
20. पक्षकार अपने संबंति काउंसेलों क े माध्यम से 28.02.2023 को विव+ारण न्यायालय क े समक्ष उपस्थिस्र्थी होने क े लिलए नोविgस पर खड़े होंगे।
21. लंविब आवेदनों को भी विनस् ारिर विकया जा ा है। ……………………….. (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी) ……………………….. (न्यायमूर्ति बेला एम. वित्रवेदी) नई विदल्ली vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 02 फरवरी, 2023 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd