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भारतीय सव�च्च न्यायालय
�स�वल अपील अ�धका�रता
�स�वल अपील सं. 733/2023
(@�व.अ.या.(�स) 2478/2023)
(@डायर� सं. 6958/2018)
उ�र� �दल्ल� नगर �नगम ....अपीलाथ�(गण)
बनाम
राम चंदर �संह व अन्य ....प्रत्यथ�(गण)
�नणर्य
न्या., वी.एम.आर.शाह
JUDGMENT
1. �दल्ल� उच्च न्यायालय द्वारा �रट या�चका(�स) संख्या 9333/2014 म� �दनांक 30.05.2016 को पा�रत आ�े�पत �नणर्य और आदेश से व्य�थत और असंतुष्ट महसूस करते हुए, िजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने उक्त �रट या�चका को अनुम�त द� है और घोषणा क� है �क भू�म अ�धग्रहण, पुनवार्स और पुनस्थार्पन अ�ध�नयम, 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद 'अ�ध�नयम, 2013' कहा गया है) क� धारा 24 (2) क े तहत भू�म क े संबंध म� भू�म अ�धग्रहण क� कायर्वाह� को व्यपगत माना गया है।
2. वतर्मान मामले म�, चौकर� मुबारकबाद गांव क� भू�म अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 4, �दनांक 13.11.1959 क े तहत अ�धसूचना द्वारा अ�धग्र�हत क� गई थी। अ�ध�नणर्य �दनांक 20.02.1964 को पा�रत �कया गया।एक बोडे सुपुत्र मुन्ना �संह और कालू राम सुपुत्र हेतू दजर् मा�लक थे। अपीलकतार् क े अनुसार, �वषय भू�म का वास्त�वक खाल� भौ�तक कब्जा ले �लया गया और अ�धग्रहण संस्था को स�प �दया गया| �रट या�चका दा�खल होने तक न तो �रट या�चकाकतार्ओं और न ह� दजर् मा�लक� ने अ�ध�नयम, 1894 क े तहत अ�धग्रहण क� कायर्वाह� को चुनौती द� थी। 2.[1] �क इसम� �नजी प्रत्यथ�गण ने-मूल �रट या�चकाकतार्ओं ने वतर्मान �रट या�चका क े माध्यम से उच्च न्यायालय से यह घोषणा करने क े �लए संपक र् �कया �क प्रश्नगत भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24 (2) क े तहत व्यपगत माना गया है। मूल या�चकाकतार्ओं ने दावा �कया था �क 3000 वगर् गज जमीन पर उनका मा�लकाना हक है अथार्त बोडे क े �हस्से से 6 बीघा। यह मूल �रट या�चकाकतार्ओं क� ओर से मामला था �क न तो मुआवजा �दया गया है और/अथवा उन्ह� भुगतान �कया गया है और न ह� कब्जा �लया गया है और इस�लए, प्राथर्ना क े अनुसार घोषणा करने का हकदार है. 2.[2] �दल्ल� राष्ट्र�य राजधानी �ेत्र क� सरकार ने उच्च न्यायालय क े सम� अपने प्र�त-शपथ पत्र म� �नम्न�ल�खत कथन कहा हैः- “7. यह प्रस्तुत �कया जाता है �क चौकर� मुबारकबाद गांव क� भू�म को भू�म अ�धग्रहण अ�ध�नयम, 1894, �दनांक 13.11.1959 क� धारा 4 क े तहत अ�धसूचना द्वारा अ�धसू�चत �कया गया था, िजसक े बाद अ�ध�नयम क� धारा 6 क े तहत अ�धसूचना �दनांक 26.12.1962 को जार� क� गई थी।अ�ध�नणर्य भी �दनांक 20.02.1964 क े अ�ध�नणर्य संख्या 1686 द्वारा पा�रत �कया गया और �कसी भी या�चकाकतार् और/अथवा दजर् मा�लक/ने इसे चुनौती नह�ं द� और अ�धग्रहण क� कायर्वाह� को स्वीकार कर �लयाl अ�धग्रहण क� कायर्वाह� क े अनुसरण म�, उ�र देने वाले प्रत्यथ� ने �व�धवत खसरा संख्या 165 (12-19) म� आने वाल� �वषय भू�म का वास्त�वक �रक्त भौ�तक कब्जा ले �लया है, िजसे 165 �मनट (6- 10) और 165 �मनट (6-09) क े रूप म� दो भाग� म� �वभािजत �कया गया है और अ�ध�नणर्य क े अनुसार स्वा�मत्व बोडे क े पुत्र मुन्ना �संह का (6-10) क े �लए है और (6-09) क े �लए, अ�भ�ल�खत स्वामी को कालू राम पुत्र हेतु क े रूप म� �दखाया गया हैl यहां यह उल्लेख करना प्रासं�गक है �क या�चकाकतार् 3000 वगर् गज क� भू�म क े �लए राहत का दावा कर रहे ह�, अथातर् बोडे क े �हस्से से 6 बीघा अथातर् (6-10 बीघा): यह प्रस्तुत �कया जाता है �क पूव�क्त अ�ध�नणर्य क े अनुसरण म� �रट �र.या.(सी) 9333/2014 म�, उ�र देने वाले प्रत्यथ� ने 1.5.1964 को खसरा संख्या 165 (12-19) म� आने वाल� �वषय भू�म का �व�धवत रूप से �रक्त भौ�तक कब्जा ले �लया है और अ�धग्रहण संस्था को स�प �दया हैl यह आगे प्रस्तुत �कया जाता है �क मुआवजे को संदभर् न्यायालय म� चेक संख्या 389384 �दनांक 3.9.1965 क े द्वारा जमा �कया गया था, तथा�प इसे एलडी. एडीजे क े न्यायलय द्वारा वापस कर �दया गया था और उसक े बाद चेक संख्या 394710 �दनांक 10.3.1967 क े माध्यम से राजकोष म� जमा �कया गया था” 2.[3] उपरोक्त क े बावजूद, उच्च न्यायालय ने, आ�े�पत �नणर्य और आदेश द्वारा, �रट या�चका को स्वीकार कर �लया है और घो�षत �कया है �क प्रश्नगत भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण व्यपगत हो गया है क्य��क �नधार्�रत मुआवजा मूल मा�लक�-बोडे �संह अथवा उनक े अ�भस्वीकृ त उ�रा�धकार�-पन्ना लाल को कभी भी भुगतान नह�ं �कया गया था और इसक े बजाय इसे वषर् 1967 म� �कसी समय राजकोष म� जमा कर �दया गया था। �क उसक े बाद, इस न्यायालय क े पुणे नगर �नगम और एक अन्य बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक� और अन्य, (2014) 3 एससीसी 183 क े मामले क े �नणर्य पर भरोसा करते हुए उच्च न्यायालय ने �रट या�चका स्वीकार कर ल� है और घोषणा क� है �क प्रश्नगत भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24 (2) क े तहत व्यपगत माना जाता है।
3. उच्च न्यायालय क े सम� दायर प्र�त-शपथ पत्र से यह देखा जा सकता है �क अपीलकतार् और राष्ट्र�य राजधानी �ेत्र �दल्ल� सरकार क� ओर से यह �व�शष्ट मामला था �क भू�म का कब्जा �व�धवत रूप से 01.05.1964 को �लया गया था और अ�धग्रहण संस्था को स�प �दया गया था। अपीलकतार् क� ओर से यह भी मामला था �क मुआवजा चेक संख्या 389384 �दनांक 03.09.1965 द्वारा संदभर् न्यायालय क े पास जमा �कया गया था, तथा�प, इसे एलडी. एडीजे क े न्यायालय द्वारा वापस कर �दया गया और उसक े बाद 10.03.1967 को राजकोष म� जमा कर �दया गया | 3.[1] उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आ�े�पत �नणर्य और आदेश से यह प्रतीत होता है �क उच्च न्यायालय ने अपीलकतार् क� ओर से मामले को स्वीकार नह�ं �कया है �क प्रश्नगत भू�म का वास्त�वक �रक्त भौ�तक कब्जा क े वल इस आधार पर �लया गया था �क भू�म �रक्त है और वास्तव म� �रक्त भाग �गरवी रखे गए ह� और �कसने चारद�वार� का �नमार्ण �कया है, इसे वतर्मान कायर्वा�हय� म� नह�ं बताया जा सकता। तथा�प, यह ध्यान देने क� आवश्यकता है �क मूल �रट या�चकाकतार्ओं क� और से ऐसा कभी नह�ं हुआ क� उन्ह�ने चारद�वार� �नमार्ण �कया हो । इसक े �वरूद्ध, राष्ट्र�य राजधानी �ेत्र �दल्ल� सरकार क� ओर से यह �व�शष्ट मामला था �क प्रश्नगत भू�म का कब्जा वषर् 1964 म� ले �लया गया था और अ�धग्रहण संस्था को स�प �दया गया था। यह �रकॉडर् पर आया है �क क ु छ �हस्से म�, एक �नमार्ण था और शेष चारद�वार� से �घरा होने क े �लए �रक्त था।इस प्रकार, अपीलकतार् क� ओर से मामले पर अ�वश्वास करने का कोई कारण नह�ं है �क वास्तव म� प्रश्नगत भू�म का भौ�तक कब्जा 01.05.1964 को नह�ं �लया गया था. 3.[2] अन्यथा, मुआवजे क� रा�श शुरू म� संदभर् न्यायालय म� जमा क� गई थी और उसक े बाद वषर् 1967 म� राजकोष म� जमा क� गई थी।ऐसा क ु छ भी �रकॉडर् म� नह�ं है �क �कसी भी समय, या तो दजर् मा�लक� अथवा उनक े उ�रा�धका�रय� ने मुआवजे का भुगतान ना करने क े संबंध म� कोई �शकायत क� थी। 3.[3] इस न्यायालय क े पुणे नगर �नगम (उपयुर्क्त) क े मामले पर उच्च न्यायालय द्वारा आ�े�पत �नणर्य को पा�रत करते समय भरोसा �कया गया तथा आदेश को सं�वधान पीठ द्वारा इस न्यायालय क े इंदौर �वकास प्रा�धकरण बनाम मनोहरलाल तथा अन्य. (2020) 8 एसएससी 129 वाले मामले क े �नणर्य म� उलट �दया गया l अनुच्छेद 365 और 366 म�, इस न्यायालय क� स�वंधान पीठ ने �नम्नानुसार �टप्पणी क� हैl "365. प�रणामतः, पुणे नगर �नगम [ पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] म� �दया गए �नणर्य को एतद् द्वारा रद्द कर �दया जाता है और अन्य सभी �नणर्य, िजनम� पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एसएससी 183 ] का अनुसरण �कया गया है, उन्ह� भी रद्द �कया जाता है ।श्री बालाजी नगर आवासीय संगठन [श्री बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम त�मलनाडु राज्य., (2015) 3 एससीसी 353 वाले मामले म� यह नह�ं कहा जा सकता �क यह अच्छा कानून है, को उलट �दया गया है और उसे अनुसरण करने वाले अन्य �नणर्य� को भी पलट �दया गया है। इंदौर �वकास प्रा�धकरण बनाम शैलेन्द्र [(2018) 3 एससीसी 412] वाले मामले म�, धारा 24 (2) क े परंतुक क े संबंध म� पहलू और क्या 'या तो' को ‘’न तो’’ अथवा ‘’और’’ क े रूप म� पढ़ा जाना चा�हए, �वचार क े �लए नह�ं रखा गया था।इस�लए, वह �नणर्य भी वतर्मान �नणर्य म� चचार् क े आलोक म� मान्य नह�ं हो सकता है।
366. उपयुर्क्त चचार् को ध्यान म� रखते हुए, हम प्रश्न� का �नम्न�ल�खत उ�र देते ह�:-
366.1. धारा 24(1)(क) क े प्रावधान� क े अंतगर्त य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1- 2014 को अ�ध�नणर्य नह�ं �कया जाता है तो कायर्वाह� म� कोई व्यपगमन नह�ं होगा। मुआवजे का �नधार्रण 2013 क े प्रावधान� क े तहत �कया जाना होगा।
366.2. य�द अ�ध�नणर्य न्यायालय क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह� जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस्त नह�ं �कया गया हो।
366.3. धारा 24(2) म� कब्जे और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रूप म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर् 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्रहण क� कारर्वाई का व्यपगमन उस िस्थ�त म� समझा जाता है, जब उक्त अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर् या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्रयता क े कारण भू�म का कब्जा नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द� म�, य�द कब्जा ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगमन नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्जा नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगमन नह�ं होता है। 366.[4] 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख्य भाग म� "भुगतान" शब्द म� न्यायालय म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावधान है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्रहण क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े प्रावधान� क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्रहण अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यता पूर� नह�ं क� गई है, तो उक्त अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्याज �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायालय म�) क े प�रणामस्वरूप भू�म अ�धग्रहण क� कायर्वाह� का व्यपगमन नह�ं होता है। पांच वषर् या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ�त म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्रहण क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय�" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।
366.5. य�द �कसी व्यिक्त को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावधान क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतंत्र नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायालय म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्रहण का व्यपगमन हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यता धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रदान करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय� ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�ने अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्रहण क� प्र�क्रया का व्यपगमन हो गया था।
366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तुक को धारा 24(2) क े भाग क े रूप म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।
366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता�वत है, कब्जा लेने का तर�का पंचनामा/�ापन प्रस्तुत करने क े द्वारा है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्जा लेने पर अ�ध�नणर्य पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकरण का प्रावधान नह�ं है, क्य��क एक बार कब्जा लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।
366.8. कायर्वा�हय� क े समझे गए व्यपगमन को प्रस्ता�वत करने वाले धारा 24(2) क े प्रावधान उस िस्थ�त म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धकार� क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�बत एक कायर्वाह� म� प्रा �धकार�गण अपनी �निष्क्रयता क े कारण 2013 क े लागू होने से पूवर् पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्जा लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायालय द्वारा पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत्व क� अव�ध को पांच वषर् क� गणना म� न जोड़ा जाए।
366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्रहण क� पूणर् हो चुक� कायर्वाह� क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन्म नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार्त 1-1-2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह� क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद्ध दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर् हो चुक� कायर्वाह� को �फर से शुरू करती है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्रहण को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेजर� म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है।”
4. इंदौर �वकास प्रा�धकरण (उपयुर्क्त) क े मामले म� इस न्यायालय द्वारा अ�धक�थत कानून को इस मामले क े तथ्य� पर लागू करते हुए, उच्च न्यायालय ने यह घो�षत करने म� बहुत गंभीर गलती क� है �क प्रश्नगत भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण, जो इस प्रकार वषर् 1959 म� अ�धग्र�हत �कया गया था, को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24 (2) क े तहत व्यपगत माना जाता है।इन प�रिस्थ�तय� म�, उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आ�े�पत �नणर्य और आदेश अर�णीय है।
5. उपरोक्त को ध्यान म� रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण� से, वतर्मान अपील सफल होती है। उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आ�े�पत �नणर्य और आदेश को अमान्य और �नरस्त �कया जाता है। प्रश्नगत भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण का कोई व्यपगत नह�ं माना जाएगा। य�द मूल या�चकाकतार्ओं को मुआवजे क े संबंध म� कोई �शकायत है और/अथवा य�द दजर् मा�लक� और/अथवा उ�रा�धका�रय� को मुआवजे का भुगतान नह�ं �कया जाता है, तो वे दावा कर सकते ह�, िजस पर कानून क े अनुसार और योग्यता क े आधार पर �वचार �कया जा सकता है। तदनुसार वतर्मान अपील क� अनुम�त है। तथा�प, मामले क े तथ्य� और प�रिस्थ�तय� म�, लागत क े बारे म� कोई आदेश नह�ं होगा। लं�बत आवेदन�, य�द कोई हो, का भी �नपटारा कर �दया जाता है।.............................न्या. [ एम. आर. शाह ].............................न्या. [ सी. ट�. र�वक ु मार ] नई �दल्ल�; 09 फरवर�, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अस्वीकरण: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ क े सी�मत प्रयोग हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया जाएगा| समस्त कायार्लयी एवं व्यावहा�रक प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरूप ह� अ�भप्रमा�णत माना जाएगा और कायार्न्वयन तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।