Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी अपील संख्या 3639/2022
(@एसएलपी (दीवानी) संख्या 1595/2022)
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ... अपीलक ा/ (गण)
बनाम
श्रीम ी प्रिप्रयंका ... प्रत्यर्थी7 (गण)
प्रिनण/य
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. प्रिवशेष अपील संख्या 343/2021 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेप्रिप प्रिनण/य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य़ ने व /मान अपील दायर की है, जिJसक े ह उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने कथिर्थी अपील को खारिरJ कर प्रिदया र्थीा और अपीलक ा/ गण- उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य को मृ कम/चारी (उसक े पति ) की मृत्यु पर मूल रिरट mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2023 INSC 109 यातिचकाक ा/ को ग्रेच्युटी का भुग ान करने का प्रिनदVश दे े हुए प्रिवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर प्रिनण/य और आदेश की पुप्रिष्ट की र्थीी।
2. संक्षेप में व /मान अपील क े लिलए प्रमुख थ्य इस प्रकार हैंः - 2.[1] यह प्रिक मूल रिरट यातिचकाक ा/ क े पति, मृ क कम/चारी डॉ. प्रिवनोद क ु मार, लेक्चरर क े रूप में काय/ कर रहे र्थीे। वे प्रिदनांक 02.07.2001 को सेवा में आए और सेवा क े दौरान 11.08.2009 को उनकी मृत्यु हो गई। मूल रिरट यातिचकाक ा/- मृ क कम/चारी की पत्नी ने अपने पति (?) क े कारण ग्रेच्युटी क े भुग ान क े लिलए आवेदन प्रिकया, लेप्रिकन उसे इस आ ार पर अस्वीकार कर प्रिदया गया प्रिक यातिचकाक ा/ क े पति ने, सेवा में रह े हुए, 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृलित्त का प्रिवकल्प नहीं चुना र्थीा। इसलिलए मूल रिरट यातिचकाक ा/ ने उच्च न्यायालय क े समक्ष 2021 की रिरट अपील संख्या 2211 क े रूप में रिरट अपील दायर की। 2.[2] प्रिवद्वान एकल न्याया ीश ने उच्च न्यायालय क े पूव/ प्रिवप्रिनश्चयों पर अवलम्ब ले े हुए और उनका अनुसरण कर े र्थीा यह देख े हुए प्रिक यप्रिद मृ क कम/चारी Jीप्रिव हो ा और उसने 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृलित्त का प्रिवकल्प चुना हो ा, ो वह 2026 में सेवाप्रिनवृत्त हो Jा ा और इससे पहले प्रिक वह 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृलित्त का प्रिवकल्प चुन सक े, उसकी मृत्यु हो गई, इसलिलए प्रिवद्वान एकल न्याया ीश ने रिरट यातिचका को अनुमति प्रदान की और अपीलक ा/ओं को ग्रेच्युटी क े लिलए आवेदन दालिखल करने की ारीख Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj से Jब क राथिश वास् व में प्रिव रिर नहीं की Jा ी ब क ब्याJ दर 8% प्रति वष/ की दर क े सार्थी उसक े पति को देय राथिश की गणना करने का प्रिनदVश प्रिदया, इस थ्य को नJरअंदाJ कर े हुए प्रिक मूल रिरट यातिचकाक ा/ क े पति ने 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृलित्त का प्रिवकल्प नहीं चुना र्थीा। 2.[3] प्रिवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर प्रिनण/य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, अपीलार्थिर्थीयों ने उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष रिरट अपील दायर की। आक्षेप्रिप प्रिनण/य और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने उक्त अपील को खारिरJ कर प्रिदया है, इसलिलए व /मान अपील दायर की गई है।
3. अपीलार्थिर्थीयों की ओर से पेश प्रिवद्वान अति वक्ता श्री संJय कु मार त्यागी ने प्रबल रूप से कहा है प्रिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय ने अपीलार्थिर्थीयों को मृ क कम/चारी की मृत्यु पर मूल रिरट यातिचकाक ा/ को ग्रेच्युटी का भुग ान करने का प्रिनदVश देने में ास्थित्वक गल ी की है। 3.[1] यह कहा गया है प्रिक उच्च न्यायालय ने इस थ्य को ठीक से नहीं समझा है प्रिक मृ क कम/चारी प्रिवकल्प का चयन करने में प्रिवफल रहा है और इसलिलए मृ क कम/चारी क े वारिरस होने क े ना े प्रत्यर्थी7 को मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी का लाभ मंJूर नहीं प्रिकया Jा सक ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj 3.[2] आगे यह कहा गया है प्रिक प्रिवद्यमान शासकीय आदेशों क े अनुसार, मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी का लाभ उठाने क े लिलए 58 वष/ (अब 60 वष/) की आयु में सेवाप्रिनवृत्त होने क े प्रिवकल्प का प्रयोग एक आज्ञापक प्रप्रिsया र्थीी। यह कहा गया है प्रिक इसलिलए मृ क कम/चारी द्वारा प्रयोग प्रिकए गए प्रिकसी प्रिवकल्प क े अभाव में, उच्च न्यायालय ने अपीलक ा/ओं को मृ क कम/चारी की मृत्यु पर प्रत्यर्थी7 को मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रिनदVश देने में ास्थित्वक गल ी की है।
4. व /मान अपील का प्रिवरो कर े हुए, मृ क कम/चारी क े वारिरसों की ओर से पेश प्रिवद्वान अति वक्ता ने Jोरदार रूप से कहा है प्रिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, मृ क कम/चारी की मृत्यु पर प्रत्यर्थी7 को मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी का लाभ देने में उच्च न्यायालय द्वारा कोई त्रुप्रिट नहीं की गई है। 4.[1] यह कहा गया है प्रिक मृ क को 2.7.2001 को लेक्चरर क े रूप में प्रिनयुक्त प्रिकया गया र्थीा और 11.8.2009 को सेवा क े दौरान उसकी मृत्यु हो गई र्थीी। यह कहा गया है प्रिक इससे पहले प्रिक मृ क प्रिवकल्प का उपयोग कर पा ा, दुभा/ग्य से उसकी मृत्यु हो गई। यह कहा गया है प्रिक प्रिदनांक 16.09.2009 क े शासकीय आदेश क े अनुसार, मृ क 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृत्त होने का प्रिवकल्प उपयोग करने का हकदार र्थीा Jो 01.07.2010 क उपलब् र्थीा, हालांप्रिक इससे पहले प्रिक वह प्रिवकल्प का उपयोग कर पा ा, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj दुभा/ग्यवश उसकी मृत्यु हो गई। यह कहा गया है प्रिक इसलिलए मामले क े प्रिवथिशष्ट थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में र्थीा पूव क्त थ्यों को ध्यान में रख े हुए, उच्च न्यायालय द्वारा अपीलार्थिर्थीयों को मृ क-प्रत्यर्थी7 क े वारिरसों को मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रिनदVश देने में कोई त्रुप्रिट नहीं की गई है। यह कहा गया है प्रिक मामले क े प्रिवथिशष्ट थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय क े प्रिवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा ग्रेच्युटी की उदार योJना की मंJूरी में, जिJसकी खण्ड पीठ द्वारा पुप्रिष्ट की गई है, हस् क्षेप नहीं प्रिकया Jा सक ा है।
5. हमने संबंति पक्षों क े प्रिवद्वान अति वक्ताओं को प्रिवस् ार से सुना है। शुरुआ में, यह ध्यान देने योग्य है प्रिक मृ क की Jन्म ति थिर्थी 1.7.1951 र्थीी। उन्हें 2.7.2001 को लेक्चरर क े रूप में प्रिनयुक्त प्रिकया गया।उन्होंने 30 Jून 2011 को अपनी आयु 60 वष/ पूरी कर ली हो ी। प्रिदनांक 16.09.2009 क े शासकीय आदेश क े अनुसार, उन्होंने 1 Jुलाई 2010 को या उससे पहले 60 वष/ की आयु में सेवाप्रिनवृत्त होने क े अपने प्रिवकल्प का उपयोग प्रिकया हो ा, इससे पहले की वह प्रिवकल्प का उपयोग कर पा ा, दुभा/ग्यवश वह मर गया। वास् व में ो शासकीय आदेश से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई र्थीी। उनकी मृत्यु 11.08.2009 को हुई र्थीी Jबप्रिक शासकीय आदेश प्रिदनांक 16.9.2009 का है। इसलिलए, उनक े पास प्रिकसी भी प्रिवकल्प Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj का उपयोग करने का कोई मौका नहीं र्थीा। इसलिलए इस अपील में कोई दम नहीं है। उच्च न्यायालय ने ठीक ही पाया है प्रिक प्रत्यर्थी7 16.9.2009 प्रिदनांप्रिक शासकीय आदेश क े लाभ का हकदार होगा और मृ क कम/चारी क े वारिरस होने क े ना े मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी क े लाभ का हकदार होगा। इस स् र पर, यह ध्यान देने की आवश्यक ा है प्रिक अपीलक ा/ओं की ओर से यह मामला नहीं है प्रिक यप्रिद मृ कम/चारी ने प्रिवकल्प का उपयोग प्रिकया हो ा, ो भी वह योJना क े ह मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी क े लाभ का हकदार नहीं हो ा। मृत्यु-सह-सेवाप्रिनवृलित्त ग्रेच्युटी परोपकारी योJना है और इसका प्रिवस् ार मृ क कम/चारी क े वारिरस/आथिश्र होने क े ना े प्रत्यर्थी7 को प्रिकया Jा ा है, यह प्रिवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा कहा गया, जिJसकी खण्ड पीठ द्वारा पुप्रिष्ट की गई है।मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, इस न्यायालय क े हस् क्षेप की कोई आवश्यक ा नहीं है।
6. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और ऊपर ब ाए गए कारणों से, व /मान अपील प्रिवफल हो Jा ी है और खारिरJ प्रिकए Jाने योग्य है और दनुसार खारिरJ की Jा ी है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj हम सव च्च न्यायालय क े समक्ष इस रह क े मामले दायर करने की राज्य की प्रर्थीा की निंनदा कर े हैं। इस प्रकार, आJ से चार सप्ताह की अवति क े भी र अपीलक ा/ द्वारा प्रत्यर्थी7 को देय 50,000/- रुपये की लाग क े सार्थी अपील खारिरJ की Jा ी है। …………………………... [न्यायमूर्ति एम आर शाह] …………………………... [ न्यायमूर्ति बी.ए. नागरत्न] नई प्रिदल्ली; 09 फरवरी 2023. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj