Full Text
भारत क
े सव ायालय म
िसिवल अपीलीय ायपािलका
िसिवल अपील आवेदन सं ा.5393 ऑफ 2010
मेसस गोदरेज सारा ली िलिम. अपीलकता(गण)
बनाम
आबकारी एवं कराधान अिधकारी-सह-मू ांकन ािधकरण और अ
ितवादी(गण)
िनणय
DIPANKAR DATTA, J.
यह अपील, िवशेष अनुमित ारा, पंजाब और ह रयाणा उ ायालय
ारा चंडीगढ़ म पा रत 12 अ ू बर, 2009 क
े एक आदेश को चुनौती देती है
(इसक
े बाद 'उ ायालय', सं ेप म) िजसम अपीलकता ारा ुत
िसिवल रट यािचका सं ा.9191 ऑफ 2009 को खा रज कर िदया गया था
और इसे ह रयाणा मू विधत कर अिधिनयम, 2003 (इसक
े बाद 'वैट
अिधिनयम', सं ेप म) की धारा 33 क
े तहत अपील क
े उपचार क
े िलए
खा रज कर िदया गया था।
JUDGMENT
2. इस अपील पर िनणय क े िलए दो सवाल सामने आते ह। पहला, ा उ ायालय को वैट अिधिनयम की धारा 33 क े तहत अपीलकता को अपील क े वैक क उपाय की उपल ता क े आधार पर ह ेप को अ ीकार करने म उिचत ठहराया गया था, िजसे उसने आगे नहीं बढ़ाया था। यिद पहले का उ र नकारा क होता है, तो हम यह िनणय लेने की आव कता होगी िक उ ायालय को गुण-दोष क े आधार पर सुनवाई क े िलए रट यािचका भेजी जाए या उ ायालय क े सम आ ेिपत आदेशों की शु ता या अ था की जांच की जाए।
3. इस अपील म चुनौती क े तहत आदेश क े अवलोकन पर ऐसा तीत होता है िक अपीलकता ने वैट अिधिनयम की धारा 34 ारा द तः सं ान पुनरी ण श का योग करते ए कायवाही को िफर से खोलने क े िलए उप आबकारी और कराधान आयु (एसटी)-सह-पुनरी ण ािधकरण, क ु े (इसक े बाद 'पुनरी ण ािधकरण', सं ेप म) क े अिधकार े पर सवाल उठाया था, और अंितम आदेश पा रत िकया था यह पाते ए िक आकलन वष 2003-04 और 2004-05 क े िलए दो मू ांकन आदेश, दोनों िदनांक 28 फरवरी, 2007 को ईटीओ-सह-िनधारण ािधकरण, क ु े (इसक े बाद 'िनधारण ािधकरण', सं ेप म) ारा पा रत जैसा िक उसम दशाया गया है, अवैधता और अनौिच से पीिड़त है अथात िक िनधारण ािधकारी ने म र िनरोधक (अपीलकता ारा िनिमत उ ाद) पर 10% क े बजाय 4% की दर से कर लगाने म गलती की। ितवादीगण क े अिधव ा ारा उठाई गई आपि को ान म रखते ए िक वैट अिधिनयम की धारा 33 ारा दान की गई अपील क े उपचार को समा िकए िबना "इस यािचका पर िवचार करने की अनुमित नहीं होगी" और इस ायालय क े िनणय पर िवचार करने पर (1975) 2 एस. सी. सी. 436 (टीटागढ़ पेपर िम बनाम उड़ीसा रा िवद् युत बोड और अ ) म रपोट की गई, िजसक े आधार पर उनकी ओर से यह तक िदया गया िक जहां िकसी िवशेष अिधिनयम क े तहत कोई अिधकार या तं ता उ होती है, तो उस अिधिनयम क े तहत उपल उपचार का लाभ उठाया जाना चािहए, उ ायालय की राय थी िक यह कोई धारणा नहीं हो सकती है िक अपीलीय ािधकरण रट यािचका म मांगी गई राहत देने म स म नहीं होगा; इसिलए, रट यािचका खा रज कर दी गई और अपीलािथयों को अपीलीय उपचार क े िलए भेज िदया गया।
4. ों का उ र देने से पहले, हम संिवधान क े अनु ेद 226 ारा द रट श यों क े योग पर क ु छ श कहने का आ ह महसूस करते ह, ोंिक उ ायालयों ारा पा रत क ु छ आदेशों म रट यािचकाओं को क े वल इसिलए "बनाए रखने यो नहीं" माना गया है ोंिक संबंिधत कानूनों ारा दान िकए गए वैक क उपाय को रट अिधकार े का आ ान करने क े इ ुक प ों ारा नहीं अपनाया गया है।अनु ेद 226 क े तहत िवशेषािधकार रट जारी करने की श पूण क ृ ित की है। इस तरह की श क े योग पर िकसी भी सीमा का पता संिवधान म ही लगाया जाना चािहए।इस संबंध म अनु ेद 329 और संिवधान म इसी तरह क े अ अनु ेदों क े आदेशों का लाभ द संदभ िदया जा सकता है।अनु ेद 226, संदभ म, रट जारी करने की श क े योग पर कोई सीमा या ितबंध नहीं लगाता है।हालांिक यह सच है िक उसी कानून क े तहत एक उपाय की उपल ता क े बावजूद रट श यों का योग, िजसे लागू िकया गया है और िजसने रट यािचका म आ ेिपत कारवाई को ज िदया है, िनयिमत तरीक े से नहीं िकया जाना चािहए, िफर भी, क े वल यह त िक उ ायालय क े सम यािचकाकता ने, िकसी िदए गए मामले म, अपने िलए उपल वैक क उपाय का अनुसरण नहीं िकया है/इसे यांि क प से इसकी बखा गी क े िलए एक आधार क े प म नहीं माना जा सकता है।यह यंिस है िक उ ायालयों ( ेक िवशेष मामले क े त ों को ान म रखते ए) को एक िववेकािधकार है िक वे एक रट यािचका पर िवचार कर या नहीं।अनु ेद 226 क े तहत श क े योग पर -लगाए गए ितबंधों म से एक जो ाियक उदाहरणों क े मा म से िवकिसत आ है, वह यह है िक उ ायालयों को आम तौर पर एक रट यािचका पर िवचार नहीं करना चािहए, जहां एक भावी और भावशाली वैक क उपाय उपल है। साथ ही, यह याद रखना चािहए िक अपील या संशोधन क े एक वैक क उपाय की उपल ता, िजसे अनु े द 226 क े तहत उ ायालय क े अिधकार े का आ ान करने वाले प ने आगे नहीं बढ़ाया है, उ ायालय क े अिधकार े को नहीं हटाएगा और एक रट यािचका को "बनाए रखने यो नहीं" बनाएगा।िनणयों की एक लंबी पं म, इस ायालय ने यह कर िदया है िक एक वैक क उपचार की उपल ता एक रट यािचका की "रखरखाव" क े िलए एक पूण बाधा क े प म काम नहीं करती है और यह िक िनयम, िजसम एक प को एक क़ानून ारा दान िकए गए वैक क उपचार को आगे बढ़ाने की आव कता होती है, कानून क े िनयम क े बजाय नीित, सुिवधा और िववेक का िनयम है।हालांिक ारंिभक, यह दोहराया जाना चािहए िक एक रट यािचका की "मनोरंजन" और "रखरखाव" अलग-अलग अवधारणाएं ह।दोनों क े बीच क े अ े लेिकन वा िवक अंतर को नजरअंदाज नहीं िकया जाना चािहए।"िवचारणीयता" क े बारे म आपि मामले की जड़ तक जाती है और यिद ऐसी आपि सारवान पाई जाती है, तो अदालत िनणय क े िलए फ ू ल ा करने म भी असमथ हो जाएं गी।दू सरी ओर, "मनोरंजन" का पूरी तरह से उ ायालयों क े िववेकािधकार क े दायरे म है, रट उपचार िववेकाधीन है। रखरखाव यो होने क े बावजूद एक रट यािचका पर उ ायालय ारा कई कारणों से िवचार नहीं िकया जा सकता है या एक ठोस कानूनी िबंदु थािपत करने क े बावजूद यािचकाकता को राहत देने से भी इनकार िकया जा सकता है, यिद दावा की गई राहत देने से सावजिनक िहत आगे नहीं बढ़ेगा। इसिलए, उ ायालय ारा एक रट यािचका को इस आधार पर खा रज करना िक यािचकाकता ने वैक क उपाय का लाभ नहीं उठाया है, हालांिक, यह जांच िकए िबना िक ा इस तरह क े आमोद क े िलए एक असाधारण मामला बनाया गया है, उिचत नहीं होगा।
5. संिवधान की शु आत क े क ु छ समय बाद, इस ायालय की एक संिवधान पीठ ने 1958 एस.सी.आर 595 (उ र देश रा बनाम मोह द.नूह) म अपने फ ै सले म रपोट की को इस कार मनाने का अवसर िमलाः "10. अगले थान पर यह ान म रखा जाना चािहए िक सिटओरारी क े संबंध म कोई िनयम नहीं है, जैसा िक मडमस क े साथ है, िक यह क े वल वहीं होगा जहां कोई अ समान प से भावी उपचार नहीं है।यह अ ी तरह से थािपत है िक, बशत आव क आधार मौजूद हों, माणप िनिहत होगा, हालांिक अपील का अिधकार क़ानून ारा दान िकया गया है, (है बरीज़ लॉज़ ऑफ़ इं ड, थड एडन., वॉ ूम 11, पृ. 130 और वहां उद् धृत मामले)। इस त पर िक पीिड़त प क े पास एक और और पया उपाय है, उ ायालय ारा इस िन ष पर प ंचने क े िलए िवचार िकया जा सकता है िक ा उसे अपने िववेकािधकार का उपयोग करते ए, अपने अधीन थ िनचली अदालतों की कायवाही और िनणयों को र करने क े िलए माणप का एक रट जारी करना चािहए और आम तौर पर उ ायालय तब तक ह ेप करने से इनकार कर देगा जब तक िक पीिड़त प अपने अ वैधािनक उपायों, यिद कोई हो, को समा नहीं कर देता।लेिकन यह िनयम िजसक े िलए कानूनी उपायों को समा करने की आव कता होती है रट िदए जाने से पहले कानूनी िनयम क े बजाय नीित, सुिवधा और िववेकािधकार का िनयम है और ऐसे कई उदाहरण ह जहां इस त क े बावजूद िक पीिड़त प क े पास अ पया कानूनी उपाय थे, माणप की रट जारी की गई है।* * * "
6. िपछली शता ी क े अंत म, इस ायालय ने (1998) 8 एस.सी.सी 1 ( लपूल कॉप रेशन बनाम टेड मा क े पंजीयक, मुंबई और अ ) म रपोट िकए गए अपने िनणय क े पैरा ाफ 15 म ऐसे अपवाद बनाए िजनक े अ पर एक रट कोट एक रट यािचका पर िवचार करने म उिचत होगा, भले ही प ने क़ानून ारा दान िकए गए वैक क उपाय का लाभ नहीं उठाया हो। वही नीचे पढ़ा गया हैः (i) जहां रट यािचका िकसी भी मौिलक अिधकार को लागू करने की मांग करती है; (ii) जहां ाक ृ ितक ाय क े िस ांतों का उ ंघन होता है; (iii) जहां आदेश या कायवािहयां पूरी तरह से अिधकार े से बाहर ह; या (iv) जहाँ िकसी अिधिनयम क े अिधकारों को चुनौती दी जाती है।
7. ब त पहले नहीं, इस ायालय ने अपने फ ै सले म 2021 एस. सी. सी. ऑनलाइन एस. सी. 884 (रा कर क े सहायक आयु बनाम मेसस कमिशयल ील िलिमटेड) ने पैरा ाफ 11 म समान िस ांतों को दोहराया है।
8. इसक े अलावा, हम उपयोगी प से (1977) 2 एस.सी.सी 724 (उ र देश रा और अ बनाम इंिडयन ह्यूम पाइप क ं पनी िलिमटेड) और (2000) 10 एस. सी. सी. 482 (भारत संघ बनाम ह रयाणा रा म रपोट िकए गए इस ायालय क े फ ै सलों का भी उ ेख कर सकते ह। ) पूव िनणय क े एक पठन पर जो िदखाई देता है वह यह है िक ा कोई व ु िब ी कर क़ानून म िवि क े भीतर आती है, कानून का एक शु सवाल उठाती है और यिद त ों की जांच अनाव क है, तो उ ायालय अपने िववेक से एक रट यािचका पर िवचार कर सकता है, भले ही वैक क उपाय का लाभ नहीं उठाया गया था; और, जब तक िववेक का योग अनुिचत या िवक ृ त नहीं िदखाया जाता है, तब तक यह ायालय ह ेप नहीं करेगा।बाद क े िनणय म, इस ायालय ने अपीलकता ारा उठाए गए मु े को मूल प से कानूनी पाया, िजसक े िलए उ ायालय ारा िनणय की आव कता होती है, अपीलकता को पदानु म म वैधािनक अपीलों क े मा म से रखे िबना।उ िनणयों से जो पता चलता है वह यह है िक जहां िववाद िवशु प से कानूनी है और इसम त क े िववािदत शािमल नहीं ह, ब क े वल कानून क े शािमल ह, तो इसका िनणय उ ायालय ारा िकया जाना चािहए, बजाय इसक े िक एक वैक क उपाय उपल होने क े आधार पर रट यािचका को खा रज कर िदया जाए।
9. अब, इस अपील क े त ों की ओर लौटते ए, हम पाते ह िक अपीलकता ने उ ायालय क े सम दावा िकया था िक मौजूदा त ों और प र थितयों को देखते ए पुनरी ण ािधकरण ारा तः सं ाना क पुनरी ण श का योग नहीं िकया जा सकता था, िजससे क े वल यह िन ष िनकलता है िक मू ांकन आदेश कानूनी प से सही थे और रट यािचका म आ ेिपत अंितम आदेश एक अिधकार े हण करने पर पा रत िकए गए थे जो पुनरी ण ािधकरण क े पास नहीं था।जुमाने म, आ ेिपत आदेश पूरी तरह से अिधकार े क े िबना पा रत िकए गए थे।चूंिक अपीलकता ारा रट यािचका म एक अिधका रता का मु ा उठाया गया था, िजसम तः सं ान श का योग करने क े िलए पुनरी ण ािधकरण की मता पर सवाल उठाया गया था, ोंिक यह िवशु प से कानून का सवाल है, हमारा िवचार है िक रट यािचका म उठाई गई यािचका गुण-दोष क े आधार पर िवचार क े यो थी और अपीलकता की रट यािचका को सीमा से बाहर नहीं फका जाना चािहए था।
10. टीटागढ़ पेपर िम (ऊपर) म िनणय पर उ ायालय ारा रखी गई िनभरता, हमारे िवचार म, पूरी तरह से गलत थी। ितवादी िवद् युत बोड ने एक समझौते क े संदभ म अपीलकता क ं पनी पर कोयला अिधभार लगाया था। इस तरह क े समझौते म खंड 23 म एक म थता समझौता शािमल था।म थता म अपने उपचार का अनुसरण करने क े बजाय, अपीलकता क ं पनी ने असफल प से रट अिधकार े का आ ान िकया।इस ायालय से संपक िकया गया था, िजसक े बाद यह अिभिनधा रत िकया गया था िक उठाए गए मु ों को ान म रखते ए, ऐसा कोई कारण नहीं है िक अपीलकता क ं पनी को समझौते क े खंड 23 को गंभीरता से ीकार करते ए म थता म अपने उपचार का अनुसरण नहीं करना चािहए, और इसक े बजाय उन ों को िनधा रत करने क े िलए संिवधान क े अनु े द 226 क े तहत उ ायालय की असाधारण अिधका रता का आ ान करना चािहए जो वा व म म थता समझौते की िवषय व ु ह।अपीलकता ारा उ ायालय क े सम समाधान क े िलए ुत िकए गए मु े क े संबंध म यह िनणय िकसी भी ासंिगकता का नहीं हो सकता था, िवशेष प से जब िववाद म थता क े िलए संदिभत नहीं थे।
11. हमारे पास यह िव ास करने क े कारण ह िक ितवादीगण ारा उठाई गई आपि की क ृ ित पर िवचार करते ए, जैसा िक उ ायालय ारा आ ेिपत आदेश म दज िकया गया है, िक उ ायालय ने गलती से टीटागढ़ पेपर िम (उपरो ) का उ ेख िकया था, जबिक (1983) 2 एस. सी. सी. 433 (टीटाघुर पेपर िम क ं पनी िलिमटेड बनाम उड़ीसा रा ) म उसी प ारा पसंद की गई अपील पर इस ायालय क े एक अलग िनणय पर भरोसा करने का इरादा था। रट यािचका को खा रज करने क े आ ेिपत आदेश को बरकरार रखते ए, जहां िब ी कर अिधकारी ारा पा रत एक आदेश को चुनौती दी गई थी, टीटाघुर पेपर िम क ं पनी िलिमटेड (उपरो ) म इस अदालत ने माना िक चुनौती िब ी कर अिधकारी क े सम कायवाही की िनयिमतता तक सीिमत है और ऐसा कोई सुझाव नहीं है िक संबंिधत अिधकारी को मू ांकन करने का कोई अिधकार े नहीं है, मोह द.नूह (ऊपर) क े िनणय म प से अलग िकया जा सकता था ोंिक उस मामले म अिधकार े की पूण कमी थी। इस ायालय ने यह भी अिभिनधा रत िकया िक सुसंगत अिधिनयम की योजना क े तहत, अिधका रयों का एक पदानु म था िजसक े सम यािचकाकता िशकायत िकए गए गलत काय क े खलाफ पया िनवारण ा कर सकते ह और चूंिक संबंिधत अिधकारी का मू ांकन करने का अिधकार म नहीं था, इसिलए इसक े तहत कायवाही शु करक े सहारा िलया जाना चािहए।जैसा िक ऊपर उ ेख िकया गया है, रट यािचका म पुनरी ण ािधकरण क े अिधकार े पर सवाल उठाए जाने क े बाद, चुनौती क े गुण-दोष की जांच िकए िबना रट यािचका को खा रज करने वाले उ ायालय क े िववािदत आदेश को तब भी कायम नहीं रखा जा सकता है जब तक िक उ ायालय को इस तरह क े आदेश का समथन करने क े िलए टीटाघुर पेपर िम क ं पनी िलिमटेड (उपरो ) पर भरोसा करना पड़े।
12. उ ायालय ने रट यािचका को खा रज करते ए कानून की एक ुिट की िजसक े िलए चुनौती क े तहत आदेश अ थर है।उसी क े अनुसार, खारीज िकया जाता है।
13. दू सरे पर िनणय लेने क े िलए आगे बढ़ते ए, रमांड का आदेश देना हमारे िलए एक उपल िवक है।हालाँिक, रट यािचका म आ ेिपत आदेश िदए जाने क े बाद से समय बीतने (लगभग चौदह साल की आजीवन अविध) को ान म रखते ए, हम महसूस करते ह िक मामले को उ ायालय म भेजना ाय क े सव म िहत म नहीं होगा।चूँिक इस अपील पर िनणय सुरि त रखने से पहले हमने प कारों को उस अिधका रता क े मु े क े गुण-दोष पर सुना था िजसे अपीलकता ने उ ायालय क े सम उठाया था, इसिलए यह संशोधन ािधकरण क े अिधकार े पर िनणय लेने का समय है।
14. अपीलकता िविभ पों म घरेलू कीटनाशक उ ादों क े िनमाण, िवपणन और िब ी क े वसाय म लगा आ है, जैसे िक लोकि य ांड नाम "गुड नाइट" क े तहत म र कॉइल, चटाई, रिफल, एरोसोल, बैट्स और चै और अ बातों क े साथ-साथ क ु े म अपने िब ी कायालय से "िहट", और वैट अिधिनयम क े तहत एक "िनधा रती" है।
15. वैट अिधिनयम की धारा 7 क े संदभ म, कर यो व ुओं को अनुसूची ए, बी और सी क े तहत वग क ृ त िकया गया है। अनुसूची सी (मूल प से अिधिनयिमत) से यह पाया गया है िक कीटनाशक, खरपतवार और कीटनाशकों को िवि 1 म शािमल िकया गया था और 4 ितशत की दर से कर यो था।
16. अपीलकता ारा अ उपभो ा व ुओं क े अलावा कीटनाशकों और कीटनाशकों क े िनमाण और िब ी से अपने सकल कारोबार की घोषणा करते ए मू ांकन वष 2003-04 और 2004-05 क े िलए िववरणी दा खल की गई थी।इस तरह क े रटन िविधवत प से ीकार िकए गए थे।तथािप, 30 जून, 2005 की अिधसूचना ारा शु की गई अनुसूची सी की िवि 67 म एक संशोधन को देखते ए, िनधारण ािधकरण ारा नोिटस जारी िकए गए थे िक 4 ितशत क े बजाय 10 ितशत की दर से कर देयता ों नहीं लगाई जानी चािहए।अपीलकता क े ितिनिध को सुनने क े बाद, िनधारण ािधकरण ारा आकलन वष 2003-04 और 2004-05 क े िलए मशः 28 फरवरी, 2007 और 28 माच, 2008 क े आदेश पा रत िकए गए, िजसम माल क े वग करण और कर की दर को ीकार िकया गया, जैसा िक अपीलकता ारा अपने िववरणी म कहा गया है, अथात 4 ितशत।
17. त ात, पुनरी ण ािधकरण ने अपीलकता क े घरेलू कीटनाशक उ ादों को म र िवकषक क े प म वग क ृ त करने और 4 ितशत क े बजाय 10 ितशत की उ दर पर कर यो मू ांकन क े संशोधन क े िलए मू ांकन वष क े िलए अपीलकता क े मू ांकन रकॉड मांगे। ारंभ म, मू ांकन वष 2003-04 और 2004-05 क े िलए िकए गए आकलनों को संशोिधत करने की मांग करने वाले कारण दशाएँ नोिटस जारी िकए गए थे, और इस तरह की कवायद क े बाद दोनों िदनांक 2 माच, 2009 को समान प से अंितम आदेश जारी िकए गए थे।
18. अपीलकता ारा उ ायालय क े सम अपनी रट यािचका म क ु छ अिधसूचनाओं की वैधता सिहत कई कानूनी सवाल उठाए गए थे।इस सवाल क े अलावा िक ा म र भगाने वाले कीटनाशक, कीटनाशक, खरपतवारनाशक आिद क े प म वग क ृ त िकए जा सकने वाले सामान ह, एक अ सवाल जो अपीलकता ने उठाना चाहा था, वह यह था िक ा वग करण/कर की दरों की अनुसूची म संशोधन को लागू िकया जा सकता है।तथािप, हमारे सम अपीलकता ारा उठाया गया एकमा सीिमत यह था िक ा पुनरी ण ािधकरण क े आदेश, दोनों िदनांक 2 माच, 2009, िजसम मू ांकन वष 2003-04 और 2004-05 से संबंिधत िनधारण ािधकरण क े 28 फरवरी, 2007 और 28 माच, 2008 क े आदेशों को संशोिधत करने की मांग की गई थी, कानून ारा द अिधकार े का उपयोग करते ए जारी िकए गए ह।
19. समझ की सुिवधा क े िलए, इस र पर नीचे िदए गए मू ांकन वष 2004-05 क े संबंध म पा रत पुनरी ण आदेश से साम ी भाग को पुनः ुत करना सुिवधाजनक होगाः "आई, XXXXXX, उप.आबकारी और कराधान आयु -सह-संशोधन ािधकरण, क ु े ने मू ांकन वष 2004-05 क े िलए टी.आई.एन XXXXX रखने वाली मेसस गोदरेज सारा ली िलिमटेड, िपपली क े मू ांकन रकॉड की मांग की। ी XXXXX, ई.टी.ओ-सह-िनधारण ािधकरण क ु े ने यह मू ांकन आदेश 28.3.2008 को पा रत िकया।मू ांकन अिभलेख की जांच करने पर, थम या मेरा िवचार था िक उ मू ांकन आदेश िन िल खत अवैधताओं और अनुिचतताओं (एस. आई. सी., अनुिचतताओं) से थाः आकलन ािधकरण ने म र िनवारक पर 10 ितशत क े बजाय 4 ितशत की दर से कर लगाने म गलती की तदनुसार, 2.3.2009 क े िलए एक कारण बताएँ नोिटस जारी िकया गया था।2.3.2009 को, ी अजय गोयल, फम क े अिधव ा इस यािचका पर थगन क े िलए आवेदन क े साथ पेश ए िक माच, 2009 का महीना बंद होने क े कारण डीलर मामले का फ ै सला लेने म असमथ है। थगन क े िलए आवेदन को अ ीकार कर िदया जाता है ोंिक िव े ता को कोई लेखा पु का ुत नहीं करनी होती है या िकसी भी द ावेज को तैयार नहीं करना होता है जो मामले म क े वल कानूनी िबंदु शािमल है।िव े ता ने म र भगाने वाली दवा बेची है और 4 ितशत की दर से कर जमा िकया है।मेसस सोिनक इले ोक े म और एक अ बनाम एस.टी.ओ और अ (1998) 12-पी.एच. टी-215 (एस. सी.) क े मामले म भारत क े माननीय सव ायालय ने िनणय िदया िक जेट मैट म र िवकषक कीटनाशक नहीं है।इसिलए, ये व ुएं सामा व ुएं ह और कर की सामा कर दर क े िलए उ रदायी ह। इसिलए, डीलर को यह बताने क े िलए एक नोिटस जारी िकया गया था िक म र भगाने वाली दवाओं की िब ी पर कर की सामा दर पर कर ों नहीं लगाया जाना चािहए।फम क े वकील ने इस मु े पर कोई तक नहीं िदया है।मैसस सोिनक इले ोक े म और एक अ बनाम एस.टी.ओ और अ (1998) 12- पी.एच. टी-215 (एस.सी) क े मामले म माननीय सव ायालय क े िनणय को देखते ए, यह िनिववाद प से है िक म र िनवारक चटाई गैर-अनुसूिचत व ु होने क े कारण कर की सामा दर पर कर यो ह। िवि 67 म संशोधन क े साथ 1.7.2005 की अिधसूचना क े मा म से म को भी दू र कर िदया गया था। उपरो त ों को ान म रखते ए, यह है िक आकलन करते समय ािधकरण ने म र भगाने वाली दवाओं पर 4 ितशत की दर से कर लगाने म गलती की है।अतः 28.3.2008 िदनांिकत मू ांकन आदेश को अिधिनयम की धारा 34 क े तहत संशोिधत िकया गया है जो इस कार हैः टी.टी.ओ @10 %. 5,28,89,282 52, 88, 928 (म र भगाने वाले) कर का पहले से ही ए.ए ारा मूल आदेश 21,15,571 देय 31,73,357 जारी मांग नोिटस चालान 31, 73,357 क े िलए डीलर को आदेश की एक ित क े साथ मू ांकन िकया गया है।"
20. मू ांकन वष 2004-05 से संबंिधत वैट अिधिनयम की धारा 15 क े तहत मू ांकन ािधकरण क े 28 माच, 2008 क े मू ांकन आदेश, िजसे पुनरी ण ािधकरण ारा संशोिधत करने की मांग की गई थी, ने (1998) 6 एस. सी. सी. 397 (सोिनक इले ोक े िमक बनाम एसटीओ) म रपोट िकए गए इस ायालय क े िनणय को ान म रखा था। अपीलकता ने उसम एक म र िनवारक 'जेट मैट' को बेच िदया था, इस ायालय ने फ ै सला सुनाया था िक उस पर 10 ितशत की दर से कर लगाया जा सकता है।इस तरह क े िनणय पर िवचार करते ए, अपीलकता को एक नोिटस जारी िकया गया था िजसम बताया गया था िक 'गोदरेज मत' की िब ी पर 10 ितशत की दर से कर ों नहीं लगाया जाना चािहए। नोिटस पर रखने पर, मू ांकन ािधकरण क े सम अपीलकता की ओर से यह तक िदया गया िक वैट अिधिनयम की धारा 57 क े तहत गिठत ह रयाणा कर ायािधकरण (इसक े बाद ' ायािधकरण', सं ेप म) को 21 नवंबर, 2001 क े अपने आदेश ारा 22 माच, 2000 क े पहले क े आदेश की समी ा क े िलए िवभाग ारा दायर यािचका को खा रज करने का अवसर िमला था। मू ांकन ािधकरण ने 28 माच, 2008 क े अपने आदेश म समी ा यािचका पर पा रत ायािधकरण क े 21 नवंबर, 2001 क े आदेश क े ासंिगक िह े को इस कार िनकालाः पीठ ने कहा, "एकमा सीिमत सवाल यह है िक ा मेसस सोिनक इले ोक े म और अ क े उपरो मामले म िदए गए माननीय सव ायालय क े फ ै सले का अनुपात वतमान मामले म लागू होता है?माननीय उ तम ायालय का यह िनणय वतमान मामले क े त ों से प से अलग है ोंिक उ िनणय िवशेष प र थितयों म िदया गया था यिद म र िवकषक से संबंिधत एक िवि 129 िविश थी और इसिलए ायालय ने अिभिनधा रत िकया िक िनणय िवि 129 क े तहत शािमल िकया जाएगा।हालाँिक, ह रयाणा सामा िब ी कर अिधिनयम म ऐसी कोई िवि नहीं है और इसिलए मु ा यह होगा िक ा म र िनवारक कीटनाशक आिद से संबंिधत िवि क े भीतर आएगा या नहीं?माननीय म ास उ ायालय, टांसले ा घरेलू उ ाद ा.िल. क े मामले म ायािधकरण िलिमटेड, और अ बनाम वािण क कर अिधकारी, पो र असेसमट सकल म ास और अ ने प से कहा है िक 4 ितशत एलेि न वाले म र िवकषक एक कीटनाशक थे और माननीय म ास उ ायालय क े फ ै सले पर भरोसा करते ए, ायािधकरण ने मैसस बलसारा हाइजीन ोड ्स िलिमटेड. क ुं डली (सोनीपत) बनाम ह रयाणा रा क े मामले म यह भी माना है िक म र िवकषक एक कीटनाशक है और इसिलए कर की रयायती दर क े िलए उ रदायी है। माननीय ायािधकरण ारा आ ेिपत आदेश म भी यही ि कोण अपनाया गया है और मुझे इस आदेश म कोई कमजोरी नहीं िमलती है। यह िववािदत नहीं है िक जेट मैट्स म 'एलेि न' होता है जो एक कीटनाशक है।इसिलए, इन प र थितयों म, वतमान समी ा यािचका खा रज कर दी जाती है।" ायािधकरण क े िनणय से बंधे होने क े कारण, िनधारण ािधकरण ने एक राय बनाई और यह िन ष िनकाला िक उनक े पास 4 ितशत क े बजाय 10 ितशत की दर से कर लगाने क े ाव वाले उनक े ारा जारी िकए गए नोिटस को खाली करने क े अलावा कोई अ िवक नहीं था और ऐसा करने क े िलए आगे बढ़े।
21. अपील क े समथन म पेश होते ए, िव ान अिधव ा, ी वी. ल ीक ु मारन ने तक िदया िक मू ांकन ािधकरण ने 28 माच, 2008 क े आदेश को ायािधकरण क े िनणय को ान म रखते ए पा रत िकया, िजसने बदले म सोिनक इले ोक े म (उपरो ) म िनणय को अलग िकया, और इस तरह क े िनणय को अंितमता ा होने क े बाद, पुनरी ण ािधकरण तः सं ान लेते ए िववािदत कारण िदखाने क े नोिटस क े साथ-साथ वैट अिधिनयम की धारा 34 क े तहत अंितम पुनरी ण आदेश जारी करने का अिधकार े हण नहीं कर सकता था, िजसम कहा गया था िक म र िनवारक चटाई अनुसूिचत व ु नहीं है, कर की सामा दर पर कर यो ह। उनक े अनुसार, पुनरी ण ािधकरण ायािधकरण क े आदेश से उतना ही बंधा आ था िजतना िक मू ांकन ािधकरण शािमल मु ों की समानता को ान म रखते ए और ऐसे ािधकरण क े िलए ायािधकरण ारा िकए गए ि कोण से अलग ि कोण लेने क े िलए खुला नहीं था।
22. 1992 म एस.यू.पी.पी. (1) एस.सी.सी. 443 (भारत संघ और अ बनाम कमला ी िव िनगम िलिमटेड) म रपोट िकए गए इस ायालय क े फ ै सले की ओर ी ल ीक ु मारन ने हमारा ान आकिषत िकया, इस ाव क े समथन म िक उनक े सम अध- ाियक मु ों क े िनपटारे म, राज अिधकारी अपीलीय अिधका रयों क े िनणयों से बा ह और ाियक अनुशासन क े िस ांत क े िलए आव क है िक अधीन थ अिधका रयों ारा उ अपीलीय अिधका रयों क े आदेशों का िबना िकसी रोक-टोक क े पालन िकया जाए।
23. ी ल ीक ु मारन ने, तदनुसार, ाथना की िक पुनरी ण आदेशों को दरिकनार िकए जाने पर, िनधारण ािधकरण क े आदेशों को बहाल िकया जाए।
24. इसक े िवपरीत, ितवादीगण की ओर से पेश िव ान अिधव ा ी आलोक सांगवान ने तक िदया िक पुनरी ण ािधकरण ने वैट अिधिनयम की धारा 34 क े तहत तः सं ान श यों का योग करने म अपने अिधकार े को पार नहीं िकया है।अनुसूची सी म संशोधन और सोिनक इले ोक े म (सु ा) म िनणय क े बारे म ासंिगक समय पर जारी अिधसूचनाओं का हवाला देकर, उ ोंने पुनरी ण ािधकरण ारा िकए गए िनधारण क े गुणों पर बहस करने की मांग की और वह अपने िन ष म क ै से सही थी िक अपीलकता ारा िनिमत म र िनरोधकों पर सोिनक इले ोक े म (सु ा) म िनणय क े संदभ म 10% की दर से कर लगाया जाना था, न िक 4% जैसा िक मू ांकन ािधकारी ारा संशोधन क े तहत आदेशों म मू ांकन िकया गया था। उ ोंने यह भी ुत िकया िक पुनरी ण ािधकरण क े आदेश ह ेप क े यो नहीं ह, और अपील को खा रज कर िदया जाना चािहए।
25. सुनवाई म, हमने यह कर िदया िक इस मु े की जांच तब तक नहीं की जाएगी जब तक िक ायालय को ी सांगवान ारा यह ीकार करने क े िलए राजी नहीं िकया जाता िक पुनरी ण ािधकरण क े पास िववािदत कारण िदखाएं नोिटस जारी करने का अिधकार, मता और अिधकार े है और रट यािचका म आ ेिपत प रणामी अंितम पुनरी ण आदेश पा रत करने क े िलए अपीलाथ क े कर दािय को 4 ितशत क े बजाय 10 ितशत की दर से बढ़ाया गया है।
26. चूंिक वैट अिधिनयम की धारा 34 पुनरी ण ािधकरण ारा योग की गई श का ोत तीत होती है, हम पहले इसकी साम ी पर ान दगे ोंिक यह 21 आ ेिपत आदेशों की तारीख, यानी 2 माच, 2009 को लागू ई थी। 20 माच, 2009 से भावी इसक े संशोधन से पहले, धारा 34 को िन ानुसार पढ़ा गया थाः “धारा 34. संशोधन.:-- (1) आयु, अपने यं क े ाव पर, िकसी भी कायवाही या उसम िकए गए िकसी आदेश की वैधता या औिच क े बारे म खुद को संतु करने क े उ े ों क े िलए िकसी भी कर ािधकरण क े सम लंिबत या उसक े ारा िनपटाए गए िकसी भी मामले का रकॉड बुला सकता है, जो रा क े िहतों क े िलए ितक ू ल है और संबंिधत यों को सुनवाई का उिचत अवसर देने क े बाद, उसक े संबंध म ऐसा आदेश पा रत कर सकता है, जो वह उिचत समझेः बशत िक िकसी कर ािधकरण ारा पा रत िकसी भी आदेश को िकसी ऐसे मु े पर संशोिधत नहीं िकया जाएगा, जो अपील पर या ऐसे आदेश से िकसी अ कायवाही म िकसी अपीलीय ािधकरण या उ ायालय या उ तम ायालय, जैसा भी मामला हो, क े सम लंिबत है या उसक े ारा िनपटाया गया हैः बशत िक िनधा रती को ऐसे आदेश की ित की आपूित की तारीख से तीन साल की अविध समा होने क े बाद िकसी भी आदेश को संशोिधत नहीं िकया जाएगा, िसवाय इसक े िक जहां कानून म पूव ापी प रवतन क े प रणाम प या इसी तरह क े मामले म ायािधकरण क े िनणय क े आधार पर या उ ायालय या सव ायालय ारा घोिषत कानून क े आधार पर आदेश को संशोिधत िकया जाता है। (2) रा सरकार, राजप म अिधसूचना ारा, उप-उ ाद शु और कराधान आयु क े पद से कम क े िकसी भी अिधकारी को, अिधसूचना म िनिद िकए गए ऐसे अपवादों, शत और ितबंधों क े अधीन रहते ए, उप-धारा (1) क े तहत आयु की श यों का योग करने क े िलए दान कर सकती है और जहां एक अिधकारी िजसे ऐसी श दान की गई है, वह इस धारा क े तहत एक आदेश पा रत करता है, तो ऐसा आदेश आयु ारा उप-धारा (1) क े तहत पा रत िकया गया माना जाएगा।
27. वतमान िनणय क े िलए ासंिगक सीमा तक, संशोधन की तः सं ान श का योग पुनरी ण ािधकरण ारा िकसी भी कायवाही म िकए गए िकसी भी आदेश की वैधता या औिच क े बारे म खुद को संतु करने क े उ े ों क े िलए िकया जा सकता है जो रा क े िहतों क े िलए ितक ू ल है। हालांिक, पहले परंतुक म इस तरह की तः सं ान श क े योग पर ितबंध लगा िदया गया था, यिद िकसी मु े का िनपटारा, अ बातों क े साथ-साथ, िकसी अपीलीय ािधकरण ारा िकया गया था।इस कार, धारा 34 क े तहत श क े योग क े िलए अप रवतनीय शत यह है िक पुनरी ण ािधकरण को इस बात का संतोष है िक िकसी कर ािधकरण ारा रा क े िहतों क े िलए ितक ू ल िकसी भी कायवाही म आदेश िदया गया है, िजसकी वैधता या औिच उसे थम या कमजोर तीत होती है।िफर भी, ऐसी श का योग नहीं िकया जा सकता है यिद इसम शािमल मु ा पहले से लंिबत है या िकसी अपीलीय ािधकरण ारा सुलझा िलया गया है।यह िववािदत नहीं हो सकता है िक ायािधकरण को वैट अिधिनयम की धारा 2 (बी) म प रभािषत 'अपीलीय ािधकरण' क े अथ क े भीतर समझा जाता है।
28. ये धारा 34 की परेखाएँ ह, जैसा िक तब थी, यह देखने की आव कता है िक प र रण ािधकरण इस तरह क े ावधान से श ा करने और इसका योग करने म िकतना उिचत था।
29. आ ेिपत पुनरी ण आदेशों क े एक मा अवलोकन से पता चलता है िक सोिनक इले ोक े म (ऊपर) म िनणय ने इस संतुि क े िलए आधार बनाया िक मू ांकन क े आदेशों को संशोिधत िकया जाना चािहए। सोिनक इले ोक े म (उपरो ) म िनणय गुजरात िब ी कर अिधिनयम, 1969 (इसक े बाद 'िब ी कर अिधिनयम', सं ेप म) पर िवचार करने पर िदया गया था। िनणय क े िलए जो संि उ आ, वह यह था िक ा अपीलकता ारा उसम ुत 'जेट मैट' िब ी कर अिधिनयम की धारा 49 क े तहत जारी की गई अनुसूची II भाग ए की िवि 129 क े भीतर आएगा। िवि, ासंिगक समय पर, इस कार पिढ़एः एसएल. सं व ुओं का िववरण िब ी कर की दर खरीद कर की दर 129 म र िनवारक पये म बारह पैसे म बारह पैसे
30. म र िवकषक से संबंिधत िविश िवि, अथात िवि 129 को ान म रखते ए, इस ायालय ने उसम अपीलकता क े इस तक को खा रज कर िदया िक 'जेट मैट' िवि 129 क े दायरे म नहीं आएगा ोंिक इसका एक घटक कीटनाशक है।यह भी अिभिनधा रत िकया गया िक उसम अपीलकता ारा िनिमत उ ाद, अथात 'जेट मैट', िजसे ावसाियक प से 'म र िवकषक मैट' क े प म जाना जाता था, एक म र िवकषक है, इस त क े बावजूद िक यह न क े वल म रों को पीछे हटाता है, ब म रों को मारने म भी स म है। िनणय म िदए गए कारणों क े िलए, यह माना गया िक 'जेट मैट' एक कीटनाशक नहीं है जो िब ी कर अिधिनयम की िवि 98 क े तहत आंिशक छ ू ट का हकदार होगा।
31. इसिलए, यह है िक म र िवकषक से संबंिधत िविश िवि क े कारण, इस ायालय ने 'जेट मैट' को िवि 129 क े तहत शािमल िकया।
32. जैसा िक ायािधकरण ने 21 नवंबर, 2001 क े अपने आदेश म पाया िक वैट अिधिनयम म ऐसी कोई िवि नहीं थी। इसी बात को ान म रखते ए और म ास उ ायालय क े एक िनणय और अ िनणयों पर िवचार करते ए, ायािधकरण ने यह िनणय िदया था िक 4 ितशत 'एलेि न' वाले म र िवकषक एक कीटनाशक थे और इसिलए, कर की रयायती दर क े िलए उ रदायी थे।
33. वतमान अपील पर िनणय लेते समय, हम मु प से 21 नवंबर, 2001 क े ायािधकरण क े अ ितरो आदेश क े बावजूद पुनरी ण ािधकरण ारा अिधकार े हण करने क े मु े से संबंिधत ह, न िक ायािधकरण या पुनरी ण ािधकरण ारा िदए गए िनणय क े गुण-दोष से। ितवादीगण क े चेहरे पर जो बात टकटकी लगाती है, वह यह है िक िनधारण ािधकरण क े आदेश म उद् धृत ायािधकरण क े उपरो िनणय को अंितम प िमल गया है। एक बार जब मु ा अंततः समा हो जाता है, तो िनणय रा, एक फोिटयोरी, संशोधन ािधकरण को बा करता है। ायािधकरण का िनणय संशोधन ािधकरण को ीकाय नहीं हो सकता है, लेिकन यह ऐसे ािधकरण को यह समझने क े िलए कोई आधार दान नहीं कर सकता है िक वह या तो उससे बा नहीं है या इसका पालन करने की आव कता नहीं है।ऐसे मामले म पहला परंतुक सि य हो जाता है और यह पुनरी ण ािधकरण ारा श यों क े योग क े िलए एक बाधा क े प म काम करेगा।
34. हमारे िवचार म, यिद ायािधकरण क े िनणय को दरिकनार कर िदया गया होता या िकसी स म ायालय ारा इसक े संचालन पर रोक लगा दी गई होती तो पुनरी ण ािधकरण क े आदेश को संशोिधत करने क े िलए तः सं ान श का योग करना उिचत हो सकता था।जब तक यह िववािदत नहीं है िक तब तक मौजूद उ ादों/कर देयता क े वग करण क े ढांचे को ान म रखते ए ायािधकरण का िनणय चालू रहता है और जब तक आ ेिपत पुनरी ण आदेश िदए गए थे, तब तक ऐसा ढांचा भी चालू रहता है, पुनरी ण ािधकरण क े पास िबना िकसी आर ण क े ायािधकरण क े फ ै सले का पालन करने क े अलावा कोई अ िवक नहीं बचा था। जब तक उ अिधका रयों ारा िलए गए िनणयों का पालन करने का अनुशासन बनाए नहीं रखा जाता है, तब तक कर कानूनों क े शासन म पूरी तरह से अराजकता होगी और साथ ही कर िनधारकों को अनुिचत प से परेशान िकया जाएगा।हम कमला ी िव िनगम िलिमटेड (ऊपर) म िवचार से सहमत ह।
35. सुनवाई क े बीच, हमने ी सांगवान से पूछा था िक ा िकसी अ स म ायािधकरण या उ ायालय का कोई िनणय ायािधकरण ारा 21 नवंबर, 2001 क े अपने आदेश म िलए गए िनणय से अलग है, िजस पर िनधारण ािधकरण ारा िवचार िकया गया था।साफ तौर पर, उ ोंने नकारा क जवाब िदया।यिद क े वल ी सांगवान ऐसे िकसी िनणय की ओर हमारा ान आकिषत कर सकते थे, जो हम ीकाय था, तो ायािधकरण ारा तय िकए गए मु े को इस आधार पर िफर से खोला जा सकता था िक यह एक बहस यो मु ा है और संशोधन ािधकरण ारा पा रत अंितम आदेशों म ह ेप का सहारा नहीं िलया गया होगा, िजससे अपीलकता को वैट अिधिनयम क े तहत अपीलीय उपाय करने क े िलए छोड़ िदया गया होगा।
36. ी ल ीक ु मारन क े इस तक म भी सार है िक धारा 34 की शत पर पुनरी ण की तः सं ान श का योग क े वल तभी िकया जा सकता था जब संशोिधत िकए जाने क े आदेश िकसी अवैधता या अनुिचतता से हों।
37. िकसी िनणय पर अवैधता से पीिड़त होने क े प म सवाल उठाया जा सकता है यिद उसका िनमाता उस कानून को समझने म िवफल रहता है जो उसकी िनणय लेने की श को सही ढंग से िनयंि त करता है या यिद वह िकसी ऐसे कानून को लागू करने म िवफल रहता है जो प कारों को बा करता है। दू सरी ओर, धारा 34 क े उ े को ान म रखते ए, ऐसी कायवािहयों म पा रत िकसी भी कायवाही या आदेश क े औिच की कमी क े आधार पर िकसी िनणय पर आपि जताने क े िलए, यह अिनवाय प से एक ि या क अनुिचतता से संबंिधत होना चािहए।अिभयु क े िलए यह िदखाना अिनवाय है िक िनणय िनमाता अपनी श क े योग क े मामले म लागू मानक ि याओं का पालन करने म िवफल रहा है।इसक े अित र, नैितक अनुिचतता क े आधार पर िकसी आदेश पर महािभयोग चलाने क े िलए, यह िदखाना होगा िक लागू कानून क े साथ त ों का भार अ िधक प से कारवाई क े एक पा म की ओर इशारा करता है, लेिकन िनणय आ यजनक प से दू सरे रा े पर चला गया है, िजससे पुनरी ण उिचत बनाते ए िनणय िनमाता की गितिविध क े े म दु वहार या कदाचार क े संदेह का कारण बनता है।
38. िनधारण ािधकरण या उसक े ारा पा रत आदेशों क े सम कायवाही म अवैधता या ( ि या क/नैितक) अनुिचतता को उिचत ठहराने क े िलए अिभलेख पर क ु छ भी नहीं है।जैसा िक ऊपर उ ेख िकया गया है, िनधारण ािधकरण ायािधकरण क े आदेश से बा था और कोई अ िवक नहीं होने क े कारण इसका पालन करने क े िलए चुना गया था। ायािधकरण का ऐसा िनणय पुनरी ण ािधकरण क े िलए भी बा कारी था।ऐसी प र थितयों म, िनधारण ािधकरण क े आदेशों को अवैधता और अनुिचतता से पीिड़त क े प म ांड करना हम न क े वल अ ायपूण तीत होता है, ब ाियक अनुशासन क े िस ांत का उ ंघन करने क े अलावा एक अध- ाियक ािधकरण ारा तः सं ाना क पुनरी ण श क े योग को िविनयिमत करने वाले िस ांत की पूरी तरह से समझ की कमी को भी दशाता है, जबिक एक व र ायािधकरण/ ायालय ारा पा रत आदेशों का सामना करना पड़ता है।हमारा िवचार है िक यह मू ांकन ािधकरण क े आदेश नहीं ह, ब संशोधन ािधकरण ारा पा रत आदेश ह, जो पेटट अवैधता से पीिड़त ह।
39. पूवगामी कारणों से, हमारे पास मू ांकन वष 2003-04 और 2004-05 क े िलए 2 माच, 2009 क े िववािदत अंितम पुनरी ण आदेशों को अमा करने क े अलावा कोई अ िवक नहीं है। इसे तदनुसार आदेश िदया जाता है।
40. 18 जनवरी, 2010 क े अंत रम आदेश को पूण बना िदया गया है।
41. अपील की अनुमित है।हालांिक, पािटयों को अपना खच खुद वहन करने क े िलए छोड़ िदया जाता है। …………………………. J (S. RAVINDRA BHAT) ।………………………………………J. (DIPANKAR DATTA) नई िद ी; 1 फरवरी, 2023 अ ीकरणः थानीय भाषा म अनुवािदत िनणय वादी क े सीिमत उपयोग क े िलए है तािक वह अपनी भाषा म इसे समझ सक े और िकसी अ उ े क े िलए इसका उपयोग नहीं िकया जा सकता है ।सभी वहा रक और आिधका रक उ े ों क े िलए िनणय का अं ेजी सं रण ामािणक होगा और िन ादन और काया यन क े उ े क े िलए उपयु रहेगा ।