Full Text
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 345-350/2012
अिनल िमंडा और अ य ...अपीलाथ (गण)
बनाम
आयकर आयु … यथ
िनणय
या.,एम.आर.शाह
JUDGMENT
1. 2009 क े आई. ट. ए. सं या 582 और अ य संब अपील म नई द ली म द ली उ च यायालय ारा पा रत ववा दत सामा य िनणय और दनांक 14.09.2010 क े आदेश से यिथत और असंतु महसूस करते हुए, जसक े ारा उ च यायालय क खंड पीठ ने राज व ारा पसंद क गई उ अपील को वीकार कर िलया है और आयकर अपीलीय यायािधकरण, नई द ली (सं ेप म, 'आई. ट. ए. ट.') ारा पा रत आदेश को खा रज कर दया है, जसम कहा गया है क संबंिधत कर िनधारक क े मामले म पा रत मू यांकन आदेश समय से ितबंिधत थे य क मू यांकन उस मह ने क े अंत से दो साल क े भीतर पूरा 2023 INSC 287 नह ं हुआ था जसम आयकर अिधिनयम, 1961 ( जसे इसक े बाद 'अिधिनयम' क े प म संदिभत कया गया है) क धारा 132 क े तहत तलाशी क े िलए अंितम ािधकरण जार कया गया था।
2. सु वधा क े िलए, आईट ए सं. 582/2009 म उ च यायालय ारा पा रत ववा दत िनणय और आदेश से उ प न त य का वणन कया गया है, जो सं ेप म इस कार ह: 2.[1] क क े नरा बक, कमला नगर क े बक लॉकर म तलाशी लेने क े िलए अिधिनयम क धारा 132(1) क े तहत ािधकरण क े दो वारंट 13.03.2001 और 26.03.2001 पर जार कए गए थे। जन वारंट को 13.03.2001 पर िन पा दत कया गया था, उ ह विभ न ितिथय पर िन पा दत कया गया था, जो इस कार ह:
1. 13.03.2001 पहला ािधकरण/खोज वारंट जार कया गया
2. 19.03.2001, 20.03.2001, 26.03.2001, 27.03.2001, 28.03.2001 & 11.04.2001 पहले तलाशी वारंट क े संबंध म पंचनामा तैयार/िन पा दत और तलाशी पूर क गई 2.[2] दनांक 13.03.2001 क े तलाशी वारंट क े िन पादन क े दौरान, आयकर अिधका रय को एक बक म िनधा रती से संबंिधत लॉकर क े बारे म जानकार िमली। इसिलए 26.03.2001 पर, उ लॉकर क खोज क े िलए दूसरा ािधकरण जार कया गया था और इसे 26.03.2001 पर ह िन पा दत कया गया था। इसिलए, पहला ािधकरण 13.03.2001 पर आया जो िनधा रती क े कायालय और आवास पर तलाशी क े िलए था और यह क ु छ समय तक जार रहा और क े वल 11.04.2001 पर समा हुआ और दूसरा खोज ािधकरण दनांक 26.03.2001 उसी तार ख को िन पा दत कया गया और पंचनामा 26.03.2001 पर तैयार कया गया। 2.[3] इसक े बाद, लाक असेसमट दा खल करने क े िलए धारा 158 ईसा पूव क े तहत नो टस जार कया गया। िनधा रती ने अपना ववरणी दा खल कया और अ ैल, 2003 म मू यांकन आदेश पा रत करक े मू यांकन पूरा कया गया। अ य िनधा रती क े मामले म भी इसी तरह क े मू यांकन आदेश पा रत कए गए थे। यथ - िनधारती ने अ य बात क े साथ-साथ मू यांकन आदेश को इस आधार पर चुनौती देते हुए अपील दायर क क िनधारण समयब था। िनधा रती क े अनुसार, अिधिनयम क धारा 158खङ क े तहत िनधा रत दो वष क सीमा, जसक गणना दूसरे ािधकरण क े संबंध म पंचनामा क े िन पा दत होने पर यानी 26.03.2001 पर क जानी थी, चूं क उस पंचनामे को 26.03.2001 पर तैयार कया गया था, इसिलए अिधिनयम क धारा 158खङ (ख) क े तहत िनधा रत दो साल क अविध माच, 2003 तक समा हो गई और मू यांकन आदेश अ ैल, 2003 म पा रत कया गया, जो िनधा रती क े अनुसार इस कार समय क पाबंद थी। दूसर ओर, वभाग क दलील थी क चूं क अंितम पंचनामा दनांक 13.03.2001 से संबंिधत खोज ािधकरण ारा से 11.04.2001 पर िन पा दत कया गया था, इसिलए उस तार ख से दो साल क सीमा क गणना क जानी थी और इसिलए मू यांकन िनधा रत सीमा क े भीतर पा रत कया गया था। 2.[4] सीआईट (अ) ने अपील को खा रज कर दया। हालाँ क, आईट एट ने अपील क अनुमित द और कहा क संबंिधत मू यांकन आदेश को प रसीमा ारा ितबंिधत कया गया था य क अंितम ािधकरण क े संबंध म पंचनामा 26.03.2001 पर तैयार कया गया था। आईट एट ारा इस आधार पर मू यांकन आदेश को दर कनार करते हुए पा रत आदेश क े खलाफ क वे दो साल क अविध से अिधक थे, राज व ने उ च यायालय क े सम वतमान अपील को ाथिमकता द । ववा दत सामा य िनणय और आदेश ारा, उ च यायालय क ख ड पीठ ने उ अपील को वीकार कर िलया है और आईट एट ारा पा रत आदेश को यह मानते हुए दर कनार कर दया है क अंितम पंचनामा हालां क दनांक 13.03.2001 क े खोज ािधकरण से संबंिधत था, जसे 11.04.2001 पर िन पा दत कया गया था, इसिलए दो साल क सीमा क गणना 11.04.2001 से क जानी थी। उ च यायालय ारा पा रत ववा दत सामा य िनणय और आदेश वतमान अपील का वषय है।
3. अपीलकताओं क ओर से व ान अिधव ा डॉ. राक े श गु ा पेश हुए और राज व क ओर से व ान एएसजी ी बलबीर िसंह पेश हुए। 3.[1] संबंिधत िनधा रती क ओर से उप थत व ान वक ल ने जोरदार प से तुत कया है क मामले क े त य और प र थितय म, उ च यायालय ने यह अिभिनधा रत करने म गलती क है क संबंिधत मू यांकन आदेश दो साल क अविध क े भीतर थे और इसिलए प रसीमा ारा व जत नह ं थे। 3.[2] यह तुत कया जाता है क वतमान मामले म अंितम ािधकरण 26.03.2001 पर था और इसिलए अिधिनयम क खंड 158खङक े प ीकरण 2 क े अनुसार अंितम ािधकरण सीमा का ारंिभक बंदु होगा। यह तुत कया जाता है क इसिलए भले ह दनां कत 13.03.2001 पहला ािधकरण बाद क तार ख यानी 11.04.2001 पर िन पा दत कया गया था, इसका कोई प रणाम नह ं होगा और सीमा अविध क गणना क े उ े य से, पहला ािधकरण अ ासंिगक है और यह " ािधकरण का अंितम" है जसे यान म रखा जाना चा हए। यह तुत कया जाता है क वतमान मामले म, अंितम ािधकरण दनां कत 26.03.2001 है जसे उसी तार ख को िन पा दत कया गया था और इसिलए दो साल क अविध को उस तार ख से िगना जाना है। 3.[3] संबंिधत िनधा रती क ओर से उप थत व ान वक ल ने अपनी तुित क े समथन म सी. रमैयाह रे ड बनाम सहायक आयकर आयु, (2011) 244 सीट आर 126 (कण.) (पैरा 47) क े मामले म कनाटक उ च यायालय क े िनणय का अवलंब कया।
4. राज व क ओर से पेश हुए व ान एएसजी ी बलबीर िसंह ने जोरदार ढंग से कहा है क अिधिनयम क धारा 158खङ क े प ीकरण 2 क े अनुसार, जब यह तलाशी का मामला है, तो प रसीमा क अविध को उस तार ख से िगना जाना है जस दन अंितम पंचनामा तैयार कया गया था। यह तुत कया जाता है क वतमान मामले म, तलाशी क े ख म होने पर अंितम पंचनामा 11.04.2001 पर तैयार कया गया था और इसिलए दो साल क सीमा अविध 11.04.2001 से शु होगी। यह तुत कया जाता है क य द िनधा रती क ओर से िनवेदन वीकार कया जाता है, तो उस मामले म, धारा 158खङ का प ीकरण 2 तु छ और िनरथक हो जाएगा। 4.[1] राज व क ओर से उप थत व ान एएसजी ारा आगे यह तुत कया जाता है क पंचनामा क े अंितम भाग को सीमा क े ारंिभक बंदु क े प म शािमल करने क से धारा 158बीई का प ीकरण 2 वशेष प से जोड़ा गया है। यह तुत कया जाता है क धारा 158खग/158खङ क े तहत लाक असेसमट को पूरा करने का समय अंितम पंचनामे क खोज का िन कष है जो ासंिगक होगा न क विभ न ािधकरण को जार करने क तार ख। यह तुत कया जाता है क कसी मामले म जहां ािधकरण क सं या जार क जाती है और विभ न ािधकरण क े आधार पर अलग-अलग ितिथय पर जाँच क े दौरान ासंिगक साम ी एक क जाती है, अंततः मू यांकन कायवाह खोज क े दौरान एक क गई संपूण साम ी क े आधार पर और तैयार कए गए पंचनामे क े आधार पर होगी। यह तुत कया जाता है क इसिलए जस तार ख को अंितम पंचनामा तैयार कया गया था, वह लाक असेसमट क े उ े य से ासंिगक तार ख है। अपने िनवेदन क े समथन म, ी बलबीर िसंह, व ान ए. एस. जी. ने वीएलएस फाइनस िलिमटेड और एक अ य बनाम आयकर आयु और अ य, (2016) 12 एससीसी 32 (पैरा ाफ 26 से 28) क े मामले म इस अदालत क े फ ै सले पर बहुत अिधक भरोसा कया है।
5. संबंिधत प क े व ान अिधव ा को सुनने क े बाद, इस यायालय क े वचार क े िलए जो छोटा सवाल पूछा जाता है, वह यह है क या धारा 158खग/158खङ क े तहत लॉक असेसमट क े िलए दो साल क सीमा क अविध अंितम बार तैयार कए गए पंचनामे क तार ख से शु होगी या अंितम ािधकरण क तार ख से?
6. उपरो मु े पर वचार करते समय, धारा 158 खङ, जो लॉक असेसमट शु करने क े िलए समय सीमा का ावधान करती है, को संदिभत करने क आव यकता है, जो िन नानुसार हैः "धारा 158खङ लॉक असेसमट को पूरा करने क े िलए समय सीमा (1) धारा 158-ईसा पूव क े तहत आदेश पा रत कया जाएगा- (क) उस मह ने क े अंत से एक वष क े भीतर जसम धारा 132 क े िलए या धारा 132-क क े तहत मांग क े िलए अंितम ािधकरण, जैसा भी मामला हो, उन मामल म िन पा दत कया गया था जहां तलाशी शु क गई है या लेखा पु तक या अ य द तावेज या कोई संप 30 जून, 1995 क े बाद ले कन 1 जनवर, 1997 से पहले अिध हत क गई है; (ख) उस मह ने क े अंत से दो साल क े भीतर जसम धारा 132 क े िलए या धारा 132-क क े तहत मांग क े िलए अंितम ािधकरण, जैसा भी मामला हो, उन मामल म िन पा दत कया गया था जहां तलाशी शु क गई है या लेखा पु तक या अ य द तावेज या कोई संप 1 जनवर, 1997 को या उसक े बाद अिध हत क गई है। (2) धारा 158-खङ म िन द अ य य क े मामले म लाक असेमट को पूरा करने क े िलए सीमा क अविध होगी- (क) उस मह ने क े अंत से एक वष जसम इस अ याय क े तहत तलाशी शु करने या लेखा ब हय या अ य द तावेज या 30 जून, 1995 क े बाद ले कन 1 जनवर, 1997 से पहले अिध हत कसी संप क े संबंध म ऐसे अ य य को नो टस दया गया था; और (ख) उस मह ने क े अंत से दो वष जसम इस अ याय क े तहत ऐसे अ य य को तलाशी शु करने या लेखा पु तक या अ य द तावेज या कसी भी संप क मांग क े संबंध म नो टस जार कया गया था, 1 जनवर, 1997 को या उसक े बाद। [ प ीकरण 1.- इस खंड क े योजन क े िलए सीमा क अविध क गणना करते हुए, (i) वह अविध जसक े दौरान कसी यायालय क े आदेश या िनषेधा ा ारा िनधारण कायवाह पर रोक लगाई जाती है; या (ii) उस दन से शु होने वाली अविध जस दन िनधारण अिधकार िनधा रती को धारा 142 क उप-धारा (2-क) क े तहत अपने खात का लेखापर ण कराने का िनदश देता है और उस दन समा होता है जस दन िनधा रती को उस उप-धारा क े तहत ऐसे लेखापर ा क रपोट तुत करने क आव यकता होती है; या (iii) कायवाह क े पूरे या कसी भी ह से को फर से खोलने या धारा 129 क े परंतुक क े तहत िनधा रती को फर से सुनवाई का अवसर देने म लगा समय; या (iv) ऐसे मामले म जहां धारा 245-ग क े तहत िनपटान आयोग क े सम कया गया आवेदन उसक े ारा खा रज कर दया जाता है या उसक े ारा आगे बढ़ाने क अनुमित नह ं द जाती है, उस तार ख से शु होने वाली अविध जस पर ऐसा आवेदन कया जाता है और उस तार ख से समा होती है जस पर उस धारा क उप-धारा (2) क े तहत [ धान आयु या आयु ] ारा धारा 245-घ क उप-धारा (1) क े तहत आदेश ा कया जाता है, को बाहर रखा जाएगाः बशत क जहां उपयु अविध क े अपवजन क े तुरंत बाद, धारा 158-ईसा पूव क े खंड (ग) क े तहत आदेश देने क े िलए िनधारण अिधकार को उपल ध उप-धारा (1) या उप-धारा (2) म िन द सीमा क अविध साठ दन से कम है, वहां ऐसी शेष अविध को साठ दन तक बढ़ाया जाएगा और उपरो सीमा क अविध को तदनुसार बढ़ाया गया माना जाएगा।] [ प ीकरण 2 - शंकाओं को दूर करने क े िलए, एत ारा यह घो षत कया जाता है क उप-धारा (1) म िन द ािधकरण को िन पा दत कया गया माना जाएगा। (क) तलाशी क े मामले म, कसी ऐसे य क े संबंध म अंितम पंचनामे म दज तलाशी क े समापन पर, जसक े मामले म ािधकरण का वारंट जार कया गया है; (ख) धारा 132-क क े अधीन माँग क े मामले म, अिधकृ त अिधकार ारा खात -ब हय या अ य द तावेज या प रसंप य क वा त वक ाि पर।
7. वतमान मामले म, पहला ािधकरण 13.03.2001 पर जार कया गया था जो अंततः और अंत म समा हुआ और/या 11.04.2001 पर पंचनामा म पूण हुआ। हालाँ क, बीच म एक लॉकर क े संबंध म एक अ य ािधकरण दनांक 26.03.2001 पर लागू कया गया था और इसे 26.03.2001 पर ह िन पा दत कया गया था और इसक े िलए पंचनामा भी 26.03.2001 पर ह तैयार कया गया था। हालाँ क, दनांक 13.03.2001 क े ािधकरण क े संबंध म तैयार कया गया पंचनामा अंत म 11.04.2001 पर तैयार कया गया था। जैसा क वीएलएस फाइनस िलिमटेड (उपरो ) क े मामले म इस यायालय ारा पाया व अिभिनधा रत कया गया है, ासंिगक ितिथ वह ितिथ होगी जस पर पंचनामा तैयार कया जाता है, न क वह ितिथ जस पर ािधकरण जार कया जाता है। इस बात पर कोई ववाद नह ं हो सकता क लाक मू यांकन क कायवाह तलाशी क े दौरान एक क गई पूर साम ी क े आधार पर और संबंिधत पंचनाम क े आधार पर शु क जाती है। इसिलए, अंितम बार तैयार कए गए पंचनामे क तार ख को ासंिगक तार ख कहा जा सकता है और लॉक असेसमट कायवाह को पूरा करने क े िलए दो साल क सीमा का ारंिभक बंदु कहा जा सकता है।
8. य द संबंिधत िनधा रती क ओर से यह िनवेदन क अंितम ािधकरण क तार ख पर दो साल क सीमा क े ारंिभक बंदु क े उ े य से वचार कया जाना है, उस मामले म, धारा 158बीई क े प ीकरण 2 का पूरा अिभ ाय और उ े य वफल हो जाएगा। य द उ िनवेदन वीकार कर िलया जाता है, तो उस मामले म, जस पर वचार करने क आव यकता है, वह यह है क अंितम पंचनामे क े बाद तलाशी क े दौरान एक क गई साम ी का या होगा। यह ववा दत नह ं कया जा सकता है क कई खोज हो सकती ह। इस कार, उ च यायालय ारा यह वचार क अंितम बार तैयार क गई पंचनामे क ितिथ दो साल क सीमा क अविध पर वचार करने क े िलए ासंिगक ितिथ होगी, न क ािधकरण क अंितम ितिथ, हम उ च यायालय ारा िलए गए कोण से पूर तरह सहमत ह।
9. उपरो और ऊपर बताए गए कारण को यान म रखते हुए, ये सभी अपील वफल हो जाती ह और वे खा रज कए जाने यो य ह और तदनुसार खा रज कर दए जाते ह। हालां क, मामले क े त य और प र थितय म, लागत क े बारे म कोई आदेश नह ं होगा।................................... या. [एम. आर. शाह].................................... या. नई द ली; [सी. ट. र वक ु मार] 24 माच, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िन णय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।