Yashpal Singh v. Uttar Pradesh State

Supreme Court of India · 28 Mar 2023
M. R. Shah; C. B. Ranit Kumar
Criminal Appeal No 812 of 2023 @ SLP (Criminal) No 3435 of 2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the High Court's bail orders for accused involved in serious offences including murder, emphasizing the need for concrete reasons before granting bail in heinous crimes.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 812/2023
(एसएलपी (आपराति क) सं. 3435/2023 @ डायरी
संख्या 36715/2022 से उत्पन्न)
यशपाल सिंसह ... अपीलक ा3
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और एक अन्य ... प्रत्यर्थी;गण
सह
आपराति क अपील संख्या 816/2023
(एसएलपी (आपराति क) सं. 3484/2023 @ डायरी
संख्या 40312/2022 से उत्पन्न)
आपराति क अपील संख्या 813/2023
(एसएलपी (आपराति क) संख्या 3436/2023 @डायरी
संख्या 37584/2022 से उत्पन्न) mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
निनण3य
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT

1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आपराति क प्रकीण[3] जमान आवेदन संख्या 3082/2012, 201/2022 और 3078/2022 में पारिर निदनांक 4.3.2022, 19.01.2022 और 09.02.2022 क े उन आक्षेनिप आदेशों से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, मूल सूचनादा ा/परिरवादी ने व 3मान अपीलें दायर की हैं, जिजनक े द्वारा उच्च न्यायालय ने संबंति मूल आवेदकों- अथिभयुक्तों, अर्थीा3 ् नरेंद्र पुत्र मेह ाब, क ृ ष्णपाल पुत्र रकम सिंसह और हरेंद्र पुत्र मेह ाब को मुकदमा अपरा संख्या 95/2021 अन् ग[3] ारा 147, 148, 149, 324, 427, 441, 323, 506, 447, 307, 302 और 34 आईपीसी क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए एफआईआर क े संबं में जमान पर रिरहा करने का निनदZश निदया र्थीा।

2. मूल सूचनादा ा/परिरवादी की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता ने जोरदार रीक े से कहा है निक मामले क े थ्यों और परिरस्थि`र्थीति यों में, उच्च न्यायालय ने प्रति वानिदयों-अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा करने में ास्थित्वक रूप से त्रुनिb कारिर की है और वह भी ऐसे मामले में जहां कथिर्थी अपरा आईपीसी की ारा 302 आनिद क े ह अपरा ों क े लिलए हैं। 2.[1] परिरवादी की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता द्वारा जोरदार ढंग से कहा है निक उच्च न्यायालय ने इस थ्य का उतिच रूप से मूल्यांकन नहीं निकया है निक अथिभयुक्त नरेंद्र ने सीआरपीसी की ारा 82 क े ह प्रनिgया जारी होने क े बाद ही आत्मसमप3ण निकया र्थीा।यह कहा गया है निक अथिभयुक्त नरेंद्र और हरेंद्र दोनों ही फरार चल रहे र्थीे और निदनांक 10.10.2021 क े आदेश द्वारा सीआरपीसी की ारा 82 क े ह उद्घोषणा जारी की गई र्थीी और उसक े बाद ही उन्होंने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आत्मसमप3ण निकया। यह कहा गया है निक यद्यनिप पूव क्त थ्य उच्च न्यायालय को दर्शिश निकए गए र्थीे, उच्च न्यायालय ने उस पर निवचार नहीं निकया है और उसे पूरी रह से नजरअंदाज कर निदया है। 2.[2] परिरवादी की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता द्वारा आगे यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय यह भी निवचार करने में निवफल रहा है निक अथिभयुक्त नरेन्द्र और उसक े भाई हरेन्द्र की निनशानदेही पर देशी निप` ौल की बरामदगी की गई है। 2.[3] यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने इस थ्य का समुतिच रूप से मूल्यांकन नहीं निकया है निक सभी अथिभयुक्तों, अर्थीा3 ् नरेन्द्र, क ृ ष्णपाल और हरेन्द्र क े नाम का उल्लेख निवनिनर्दिदष्ट रूप से प्रार्थीनिमकी में और दंड प्रनिgया संनिह ा की ारा 161 क े अ ीन अथिभलिललिख परिरवादी क े बयान में भी निकया गया है।यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने इस थ्य को उतिच रूप से नहीं समझा है निक सभी अथिभयुक्त निवति निवरूद्ध जमाव का निह`सा र्थीे र्थीा नरेंद्र और हरेंद्र दोनों मेह ाब क े पुत्र हैं जिजनक े सार्थी संपलित्त का निववाद र्थीा और उनक े भाई निवकास ने गोली मारी जिजसक े परिरणाम`वरूप परिरवादी क े भाई सोमपाल की मौ हो गई। यह कहा गया है निक अथिभयुक्त क ृ ष्णपाल भी निवति निवरूद्ध जमाव का निह`सा र्थीा और खे में खड़ी फसलों को नष्ट करने क े लिलए उसक े b्रैक्bर का उपयोग निकया गया र्थीा और इसका उल्लेख प्रार्थीनिमकी क े सार्थी-सार्थी परिरवादी क े बयान में भी निकया गया र्थीा। 2.[4] आगे यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने निकए गए अपरा ों की प्रक ृ ति, प्रबल ा और गंभीर ा का उतिच रूप से मूल्यांकन नहीं निकया है, जो जमान की मंजूरी पर निवचार कर े समय सुसंग हो ा है। 2.[5] उपरोक्त क 3 दे े हुए और यशपाल सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (आपराति क अपील संख्या 1509/2022, जिजसका निनण3य 15.09.2022 को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निदया गया) क े मामले में इस न्यायालय क े निनण3य पर अवलम्ब ले े हुए, जिजसक े द्वारा उसी अपरा क े मामले में, व 3मान मामले में अथिभयुक्त नरेन्द्र और हरेन्द्र क े निप ा अथिभयुक्त मेह ाब क े पक्ष में जमान को इस न्यायालय द्वारा रद्द कर निदया गया र्थीा, यह प्रार्थी3ना की गयी है निक उच्च न्यायालय द्वारा अथिभयुक्त को जमान पर रिरहा करने क े आक्षेनिप आदेशों को अथिभखंतिड और अपा` निकया जाए।

3. व 3मान अपीलों का अथिभयुक्त की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता द्वारा जोरदार निवरो निकया गया है।यह कहा गया है निक इन सभी मामलों में संबंति अथिभयुक्त gमशः माच[3] 2022/जनवरी 2022/फरवरी 2022 से जमान पर हैं और उसक े बाद उन पर `व ंत्र ा क े दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं है और इसलिलए उन्हें जमान पर रिरहा करने क े उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेशों में अब इस न्यायालय द्वारा ह` क्षेप नहीं निकया जा सक ा है। 3.[1] आगे यह कहा गया है निक अन्यर्थीा भी निवचारण आरंभ हो गया है और इसलिलए जमान पर अथिभयुक्त को छोड़ने क े उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप आदेशों में इस न्यायालय द्वारा ह` क्षेप नहीं निकया जा सक ा है। 3.[2] इसक े अलावा यह कहा गया है निक चूंनिक अथिभयुक्त क े निप ा मेह ाब क े सार्थी भूनिम निववाद र्थीा, इसलिलए मेह ाब क े परिरवार क े सद`यों को इस मामले में झूठा फ ं साया गया है। 3.[3] उपरोक्त क 3 दे े हुए, यह प्रार्थी3ना की गयी है निक व 3मान अपीलों को खारिरज कर निदया जाए।

4. हमने संबंति पक्षों क े निवद्वान अति वक्ता को निव` ार से सुना है। हमने प्रार्थीनिमकी में लगाए गए आरोपों को देखा है। यह ध्यान देना आवश्यक है निक अथिभयुक्त क े निप ा मेह ाब और परिरवादी पक्ष क े बीच भूनिम निववाद Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उद्देश्य/आशय है।प्रार्थीनिमकी में आरोप लगाया गया है निक निपछली रा उन्होंने खड़ी फसल को b्रैक्bर से क ु चल निदया और अथिभयुक्तों ने कब्जा लेने की कोथिशश की।इसक े बाद जब सूचनादा ा और अन्य लोग मौक े पर इकट्ठे हुए, ो प्रार्थीनिमकी में नामजद अथिभयुक्तों ने उन पर हमला निकया और उक्त घbना में सूचनादा ा क े भाई की मृत्यु हो गई और अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।संबंति अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा कर े समय उच्च न्यायालय द्वारा पूव क्त पहलू पर निबल्क ु ल भी निवचार नहीं निकया गया है। इस प्रकार, उच्च न्यायालय द्वारा संबंति अथिभयुक्तों को जमान पर छोड़ े समय कोई कारण नहीं निदया गया है। जब अथिभयुक्त व्यनिक्त भार ीय दंड संनिह ा की ारा 147, 148, 307, 302 और अन्य अपरा ों क े अ ीन निवचारण का सामना कर रहे हैं, जिजन्हें बहु गंभीर अपरा कहा जा सक ा है, ो उच्च न्यायालय को संबंति अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा कर े समय ठोस कारण देने चानिहए र्थीे।अथिभयुक्तों और राज्य की ओर से निदए गए क• का वण3न करने क े अलावा, उच्च न्यायालय द्वारा संबंति अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा कर े समय और कोई `व ंत्र कारण नहीं निदया गया है।यह ध्यान देने योग्य है निक आक्षेनिप आदेशों में से एक में, उच्च न्यायालय ने जेलों में अत्यति क भीड़ क े कारण का उल्लेख निकया है।हालांनिक, इस रह क े गंभीर अपरा ों क े लिलए, पूव क्त पर, आरोपी को जमान पर रिरहा करने पर निवचार नहीं निकया जा सक ा है। ीनों अथिभयुक्त निवति निवरूद्ध जमाव क े सद`य र्थीे और एक बार जब वे निवति निवरूद्ध जमाव क े सद`य पाए जा े हैं, ो `व ंत्र प्रत्यक्ष काय[3] आरोनिपयों को जमान पर रिरहा करने का आ ार नहीं हो सक ा है।

5. व 3मान मामलों में, घायल-सूचनादा ा-परिरवादी ने प्रार्थीनिमकी में निवशेष रूप से अथिभयुक्त व्यनिक्तयों को नामजद निकया है। यहां क निक दण्ड़ प्रनिgया संनिह ा की ारा 161 क े ह दज[3] निकए गए अपने बयान में भी, सूचनादा ा ने प्रार्थीनिमकी में जो कहा है, उस पर कायम रहा है। इन परिरस्थि`र्थीति यों में, जब आरोपों की प्रक ृ ति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और अपरा ों की कठोर ा और गंभीर ा पर उच्च न्यायालय द्वारा निबल्क ु ल भी निवचार नहीं निकया गया है और संबंति अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा कर े समय, उच्च न्यायालय द्वारा कोई ठोस कारण नहीं निदया गया है, ो प्रति वादी- अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा करने का निनदZश दे े हुए उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण3य और आदेश बरकरार रखने योग्य नहीं हैं र्थीा इन्हें रद्द और अपा` निकया जाना चानिहए।

6. अब जहां क अथिभयुक्तों की ओर से निदए गए इस क 3 का संबं है निक उन्हें माच[3] 2022/जनवरी 2022/फरवरी 2022 क े महीनों में जमान पर रिरहा निकया गया है और उसक े बाद उन पर `व ंत्र ा क े दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं है और इसलिलए जमान निनर` नहीं की जा सक ी है, इसे `वीकार नहीं निकया जा सक ा है। अथिभयुक्तों को जमान पर रिरहा कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप आदेशों पर निवचार करने की आवश्यक ा है, जिजसे ऊपर, कायम रहने योग्य नहीं माना गया है।

7. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और पूव क्त कारणों से, ये सभी अपीलें सफल हो ी हैं। भार ीय दंड संनिह ा की ारा 147, 148, 149, 324, 427, 441, 323, 506, 447, 307, 302 और 34 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए निदनांक 30.06.2021 क े मुकदमा अपरा संख्या 95/2021 क े संबं में प्रति वादी-अथिभयुक्तों नरेंद्र पुत्र मेह ाब, क ृ ष्णपाल पुत्र रकम सिंसह और हरेंद्र पुत्र मेह ाब को जमान पर रिरहा करने वाले 04.03.2022, 19.01.2022 और 09.02.2022 क े आक्षेनिप निनण3य और आदेश को ए द्द्वारा निनर` और अपा` निकया जा ा है। अब संबंति अथिभयुक्तों नरेन्द्र पुत्र मेह ाब, क ृ ष्णपाल पुत्र रकम सिंसह और हरेन्द्र पुत्र मेह ाब को संबंति जेल अति कारिरयों क े समक्ष त्काल आत्मसमप3ण करना होगा, अन्यर्थीा उन्हें त्काल निहरास में ले लिलया जाएगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

8. दनुसार, व 3मान अपीलों को अनुमति प्रदान की जा ी है।..................................… [न्यायमूर्ति एम. आर. शाह]..................................… [न्यायमूर्ति सी.bी. रनिवक ु मार] नई निदल्ली; 28 माच[3] 2023. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA