Munshi Singh v. State of Uttar Pradesh

Supreme Court of India · 23 May 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bindal
Appeal No. 911 of 2023 @ Special Leave Petition No. 4639 of 2018
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The court allowed the appeal of Munshi Singh, setting aside his conviction for dowry death due to insufficient specific evidence linking him to cruelty or harassment causing the deceased's death.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 911/2023
@ विवशेष अनुमति याति)का संख्या 4639/2018
मुंशी ... अपीलक ा.
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य ... प्रति वादी
विनर्ण.य
न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल,
JUDGMENT

1. व.मान अपील ीन दोषसिसद्ध व्यवि>यों कमलेश सिंसह, विवश्वराज सिंसह और मुंशी सिंसह द्वारा दायर की गई थी। विदनांक 17.05.2018 क े आदेश द्वारा, अपीलाथL संख्या 1 और 2 की अपील को खारिरज कर विदया गया था और क े वल अपीलक ा. संख्या 3, मुंशी को नोविOस जारी की गयी थी। वह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मृ का क े पति का भाई है। अन्य दो अपीलाथL मृ का क े पति और भाई(?) हैं।

2. मुनेश्वर सिंसह क े पुत्र )ंदेर सिंसह (पी डब्लू 1) क े परिरवाद पर, एक प्राथविमकी (मुकदमा अपरा ) संख्या 30/1993 दज. की गई सिजसमें कहा गया था विक उसकी बहन जानकी देवी (मृ का) की शादी कमलेश सिंसह क े साथ लगभग )ार साल पहले हुई थी। अपनी क्षम ा क े अनुसार पया.प्त दहेज विदया गया था। शादी क े ुरं बाद, पति क े परिरवार ने एक भैंस और विवक्की(गाड़ी) की मांग शुरू कर दी और उस पर दबाव डाला। यहां क विक उसे पीOा भी गया। उसकी मृ क बहन ने इस बारे में उससे कई बार बा की थी। जब उसने पति और उसक े सास-ससुर से इस बारे में बा की, ो उसे अपशब्द कहे गये और उनक े घर से बाहर विनकाल विदया गया। उन्होंने मकी दी विक वे उसकी बहन को जान से मार देगें।

3. विदनांक 27.02.1993 को, विवश्वराज सिंसह (मृ का क े जेठ/देवर) ने उसक े भाई शिशवराज सिंसह (पीडब्लू 2) से कहा विक यविद माँग पूरी नहीं की जा ी है ो यह उनक े लिलए अच्छा नहीं होगा। अपनी बहन की मृत्यु क े बारे में जानकारी होने पर, 28.02.1993 को पुलिलस को एक परिरवाद विकया गया विक दहेज की माँग पूरी नहीं होने क े कारर्ण उसकी हत्या कर दी गई थी।आरोप पत्र दालिखल विकया गया। विव)ारर्ण क े बाद, पति कमलेश सिंसह, मृ का क े जेठ/देवर विवश्वराज सिंसह और व.मान अपीलक ा. को भार ीय दंड संविह ा 1860 (संक्षेप में "आईपीसी") की ारा 304-ख व 498-क और दहेज प्रति षे अति विनय, 1961 की ारा 4 क े अं ग. आरोपों का दोषी ठहराया गया। उन्हें भार ीय दंड संविह ा की ारा 304-ख क े अं ग. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 10 साल का कठोर कारावास, ारा 498-क क े अं ग. 2 साल और दहेज प्रति षे अति विनयम, 1961 की ारा 4 क े अं ग. 2 साल क े कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद क े समक्ष दायर अपील में, विव)ारर्ण न्यायालय क े विनर्ण.य और आदेश को बरकरार रखा गया और अपील ख़ारिरज कर दी गई।

4. अपीलक ा. संख्या 3 मुंशी क े विवद्वान अति व>ा ने कहा विक उसक े लिखलाफ कोई मामला नहीं बन ा था क्योंविक दहेज की माँग क े लिलए मृ का की कशिथ या ना क े संबं में उसक े पक्षकार होने क े बारे में कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है। परिरवाद में लगाए गए आरोप या पेश विकए गए साक्ष्य काफी सामान्य प्रक ृ ति क े हैं। अपीलक ा. को क े वल उप ारर्णा क े आ ार पर भार ीय साक्ष्य अति विनयम, 1872 (संक्षेप में "साक्ष्य अति विनयम") की ारा 113-ख की सहाय ा से दोषी ठहराया गया था। हालांविक, यह अनुमान व.मान मामले में इस कारर्ण से उपलब् नहीं होगा विक परिरवादी की बहन की मृत्यु से ठीक पहले दहेज की मांग क े संबं में क्र ू र ा या उत्पीड़न का कोई सबू नहीं है। अपीलक ा. को मृ का क े पति का भाई होने क े ना े, न ो भैंस और न ही विवक्की क ु छ भी विमलने वाला नहीं था। यहां क विक भार ीय दंड संविह ा की ारा 304-ख में भी यह प्राव ान है विक पति या विकसी रिरश् ेदार द्वारा कोई क्र ू र ा या उत्पीड़न मृत्यु से ठीक पहले विकया जाना )ाविहए। वास् व में, मृ का की मौ जहर खाने से हुई, सिजसक े लिलए अपीलक ा. का विवशिशष्ट रूप से कोई लेना-देना नहीं है।

5. दूसरी ओर, राज्य क े विवद्वान अति व>ा ने कहा विक यह शादी क े क े वल )ार वष. बाद दहेज मृत्यु का मामला है। एक युवा लड़की की इसलिलए हत्या Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर दी गई क्योंविक वह लाल)ी ससुराल वालों की मांगों को पूरा नहीं कर पा रही थी। परिरवाद और अशिभयोजन पक्ष द्वारा प्रस् ु विकए गए साक्ष्य में विवविनर्दिदष्ट आरोप हैं।मृ का क े पति और एक जेठ /देवर की अपील इस अदाल द्वारा पहले ही ख़ारिरज कर दी गई है और व.मान अपील का विनस् ारर्ण भी उसी रह से होना )ाविहए क्योंविक उसकी भूविमका भी समान है।

6. पक्षकारों क े विवद्वान अति व>ा को सुना और सुसंग विनर्दिदष्ट अशिभलेख का परिरशीलन विकया। फोरेंसिसक रिरपोO. में मौ का कारर्ण जहर ब ाया गया है।मृ का क े भाई द्वारा दज. कराई गई प्राथविमकी में आरोप लगाया गया है विक उसकी बहन की शादी कमलेश सिंसह क े साथ घOना से लगभग )ार साल पहले हुई थी। वे दहेज से खुश नहीं थे था भैंस और विवक्की की बार- बार माँग कर रहे थे। )ूंविक यह पूरा नहीं विकया गया, इसलिलए मृ का को परेशान विकया जा रहा था। यहां क विक उन्होनें परिरवादी क े साथ भी दुव्य.वहार विकया था जब वह इस मुद्दा को हल करने क े लिलए गया था। उन्हें जान से मारने की मकी भी दी गई थी।

7. यह विनर्दिववाद है विक अपरा का कोई )श्मदीद गवाह नहीं है। अशिभयोजन पक्ष का पूरा मामला अशिभयोजन पक्ष क े परिरस्थिस्थति जन्य साक्ष्य पर आ ारिर है। अशिभयोजन पक्ष द्वारा क ु ल )ार गवाहों का परीक्षर्ण विकया गया है।)ंदेर सिंसह (पी डब्लू-1) ने कहा था विक घOना से एक विदन पहले भी जब उसक े भाई शिशवराज सिंसह (पी डब्लू-2) परिरक्रमा मेला, देवगर्ण देखने गए थे, जहां वह अशिभयु> विवश्वराज सिंसह से विमले थे, जो मृ का का दूसरा जेठ/देवर था, ो उसने दोबारा दहेज की माँग की थी। अपने पूरे बयान में, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इन सामान्य आरोपों क े अलावा विक मृ का(?) की बहन को भैंस और एक विवक्की की उनकी माँग को पूरा नहीं करने क े लिलए परेशान विकया जा रहा था, अपीलक ा. का विवशेष रूप से से नाम नहीं लिलया गया है ।अशिभलेख से विनष्कष. रूप में, यहां यह जोड़ा गया है विक विवश्वराज सिंसह की दोषसिसतिद्ध को बरकरार रखा गया है। हालांविक परिरवादी )ंदेर सिंसह (पीडब्लू1) द्वारा अपीलक ा. मुंशी की दोविष ा को साविब करने क े लिलए कु छ भी ऐसा विवशिशष्ट नहीं कहा गया है जैसा विक साक्ष्य अति विनयम की ारा 113-ख सपविठ आईपीसी की ारा 304-ख में विनविह है। अपनी प्रति -परीक्षा में, उसने कहा विक उसने अपनी बहन को उसकी मृत्यु से 4/5 महीने पहले देखा था। इसका म लब ये हुआ विक वह अपनी बहन की बेOी क े जन्म क े समय भी बहन की ससुराल नहीं गया था, जो घOना क े समय करीब दो महीने की थी। इसी रह, परिरवादी क े भाई शिशवराज सिंसह क े बयान में, आरोप काफी सामान्य प्रक ृ ति क े हैं, साथ ही घOना से ठीक पहले अपीलक ा. क े लिखलाफ कोई विवशेष आरोप नहीं है, जो विक साक्ष्य की ारा 304-ख आईपीसी और 113-ख क े ह उप ारर्णा करने क े लिलए अविनवाय. है।

8. उपरो> वर्णिर्ण कारर्णों से, हमारे विव)ार में, अशिभयोजन पक्ष द्वारा अशिभलेख पर प्रस् ु साक्ष्य, उप ारर्णा करक े अपीलक ा. मुंशी की दोषसिसतिद्ध को बरकरार रखने क े लिलए पया.प्त नहीं है, जो विक मृ का का जेठ/देवर है।

9. दनुसार, अपील को अनुमति दी जा ी है और अपीलक ा. मुंशी की दोषसिसतिद्ध और दंडादेश क े संबं में उच्च न्यायालय और विव)ारर्ण न्यायालय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा पारिर विनर्ण.यों और आदेशों को अपास् विकया जा ा है। उसक े द्वारा प्रस् ु विकए गए जमान बं पत्र रद्द विकए जा े हैं।.........………………………... [न्यायमूर्ति अभय एस ओका].........………………………... [न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल] नई विदल्ली; 23 मा). 2023. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA