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भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या - 738/2023
(@एसएलपी (आप०) संख्या 9665/2017)
मीनू प्रकाश भांटू ... अपीलक ा3
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... प्रति वादी गण
निनण3य
न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल
JUDGMENT
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर निदनांनिक 12 अक्टूबर, 2017 क े आदेश को इस न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी जा रही है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उपयु3क्त आदेश क े माध्यम से, सत्र न्याया ीश, अलीगढ़ द्वारा आपराति क पुनरीक्षण संख्या 306/2017 में 4 जुलाई, 2017 को पारिर आदेशों को रद्द करने क े लिलए दण्ड प्रनिVया संनिह ा, 1973 (संक्षेप में सीआरपीसी) की ारा 482 क े ह अपीलक ा3 द्वारा दायर आपराति क प्रकीण[3] आवेदन और अति रिरक्त मुख्य न्यातियक मजिजस्ट्रेट, अलीगढ़ द्वारा निदनांनिक 29 अगस्,2017 को पारिर आदेश को आक्षेनिप आदेश द्वारा निनस् ारिर निकया गया था।
2. निववाद्यक को निवस् ृ जाँच करने पर, मामला क े थ्यों का एक संतिक्षप्त निववरण प्रासंनिगक होगाः प्रति वादी संख्या 2/शिशकाय क ा3 ने उत्तर प्रदेश क े अलीगढ़ जिजले क े गोंडा पुलिलस स्टेशन में निदनांनिक 20 जून, 2014 को मामला अपरा संख्या 170/2014 क े ह प्राथनिमकी दज[3] करवाया। यह इस आरोप क े साथ था निक उसक े खा े से 55,20,000/- रुपये (पचपन लाख बीस हजार रुपये) की हेराफ े री की गई थी। प्राथनिमकी की थ्यों क े अध्ययन से प ा चल ा है निक इसमें निकसी को भी आरोपी नानिम नहीं निकया गया था। उनक े द्वारा क े वल यह कहा गया था निक उनक े खा े से कु छ vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनाति क ृ निनकासी हुई। उनक े द्वारा कभी भी एक नयी चेकबुक जारी करने का अनुराे नहीं निकया गया था लेनिकन निफर भी उनको एक नयी चेकबुक जारी की गयी थी। चेकबुक को शिशकाय क ा3 को पंजीकृ डाक क े द्वारा भेजा गया लेनिकन उनक क पहुचांया नही गया। क ु छ अनाति क ृ व्यनिक्त द्वारा इसे प्राप्त निकया गया। शिशकाय क ा3 को पहले सभी लेन-देन क े लिलए बैंक से एसएमएस निमल ा था, लेनिकन अचानक यह बंद हो गया। उन्हें इस ोख ड़ी क े बारे में ब प ा चला जब उन्होंने 19 जून, 2014 को अपनी पास बुक में प्रनिवनिkयां कराई। निववेचना क े बाद, जगपाल सिंसह पुत्र घासीराम, लिलनिपक (सहायक) एस.बी.आई. शाखा, जिजला अलीगढ़ एवं अजी क ु मार शमा3 पुत्र भूपेन्द्र शमा3, एस.बी.आई. शाखा गोण्डा क े निवरुद्ध आरोप पत्र दालिखल निकया गया। परीक्षण क े दौरान, अपीलक ा3 ने अपना बयान दज[3] कराया। पुलिलस को दज[3] शिशकाय में उनक े द्वारा लिलए गए स्टैडं को दोहराया, जिजसक े आ ार पर प्राथनिमकी दज[3] कराई की गई थी।उन्होंने कहा निक यह ोख ड़ी बैंक एवं डाकघर क े कम3चारिरयों की निमलीभग से में गई है। उन्होंने अपनी जिजरह में स्वीकार निकया निक उनक े बैंक खा े से निनकाली गई 55,20,000/- (पचास लाख बीस हजार रुपये) की राशिश बैंक द्वारा उन्हें लौटा दी गई है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. शिशकाय क ा3 द्वारा निदए गए कथन क े आ ार पर, जो पुलिलस को दज[3] शिशकाय क े अनुरूप था, अशिभयोग पक्ष द्वारा व 3मान अपीलक ा3, अकाउंटेंट एस. डी. शमा3 और बैंक प्रबं क एम. एल. वमा3, भार ीय स्टेट बैंक और त्कालीन डाक र क े त्कालीन पोस्ट मास्टर, गोंडा को उपस्थिस्थ होने क े लिलए दंड प्रनिVया संनिह ा की ारा 319 क े अं ग[3] एक आवेदन दायर निकया गया था। अति रिरक्त मुख्य न्यातियक मजिजस्ट्रेट क े आदेश निदनांनिक 6 मई, 2017 द्वारा इसे यह कह े हुए खारिरज कर निदया निक आरोपी को समन करने वाले प्रस् ु साक्ष्यों में पया3प्त दस् ावेज उपलब् नहीं थे। इस आदेश को अशिभयोग पक्ष ने पुनरीक्षण दालिखल करक े चुनौ ी दी थी। निवद्व सत्र न्याया ीश ने निदनांनिक 4 जुलाई, 2017 क े आदेश द्वारा पुनरीक्षण यातिचका को अनुमति दी और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद मामले को नए जिसरे से निनस् ारण क े लिलए निवचारण न्यायालय को भेजा। इसक े पश्चा, 29 अगस्, 2017 क े आदेश क े द्वारा, निवद्व अपर मुख्य न्यातियक मजिजस्ट्रेट ने अपील को अनुमति प्रदान की एवं व 3मान अपीलक ा3 एकाउन्टेंट एस.डी. शमा3 एव बैंक मनेजर एम.एल.वमा3 एवं गोंडा पोस्ट आनिफस क े पोस्ट मास्टर को सम्मन करने क े लिलए निनदwशिश निकया। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. पूव क्त आदेश में, कोई कारण नहीं निदया गया था, जिसवाय यह ब ा े हुए निक सत्र न्याया ीश द्वारा अपने आदेश में ब ाए गए कारणों से, जिजसक े द्वारा मामले को नए जिसरे से निवचार करने क े लिलए वापस भेज निदया गया था, क े आवेदन को अनुमति दी जा ी है और व 3मान अपीलक ा3, एकाउन्टेंट एस.डी.शमा3, बैंक गोंडा पोस्ट ऑनिफस क े त्कालीन पोस्ट मास्टर मैनेजर एमएल वमा3 और त्कालीन पोस्ट मास्टर को लब करने का निनदwश निदया था। अपीलक ा3 पूव क्त आदेश से पीनिड़ होकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंचा। हाईकोट[3] ने सीआरपीसी की ारा 482 क े अं ग[3] दायर आपराति क प्रकीण[3] आवेदन को क े वल सामान्य निटप्पशिणयों क े साथ और मामलें क े थ्यों पर ध्यान निदये निबना आक्षेनिप आदेश क े द्वारा खारिरज कर निदया। आक्षेनिप आदेश में क े वल यह उल्लेख निमला निक आदेश में ऐसी कोई अवै ा या अनौतिचत्य नहीं निमला जो उच्च न्यायालय को हस् क्षेप करने क े लिलए राजी कर सक े । यह आदेश न्यातियक निववेक को लागू न करने को दशा3 ा है। इस आदेश को इस न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी जा रही है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
5. अपीलक ा3 क े निवद्व अति वक्ता ने प्रस् ु निकया निक अपीलक ा3 भार ीय स्टेट बैंक, गोंडा शाखा, जिजला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में क े वल एक निमशि| क्लक 3 क े रूप में काम कर रहा था। यनिद शिशकाय क ा3 क े खा े से कोई ोखा ड़ी से निनकासी की गई थी, ो अपीलक ा3 को इसक े लिलए जिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है। अपीलक ा3 क े लिखलाफ एकमात्र आरोप यह है निक एक बार उसने शिशकाय क ा3 क े खा े क े लेनदेन क े निववरण का बिंप्रटआउट निदया था वह उसक े अनुसार पढ़ने योग्य नहीं था या क ु छ गल छप गया था। अपीलक ा3 को उसक े काय[3] क े अनुसार व्यवहार करने क े लिलए उक्त अपरा में जिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है। उच्च न्यायालय इन दलीलों का मूल्याक ं न करने में निवफल रहा और उसने मामले क े थ्यों पर चचा3 निकए निबना क े वल एक सामान्य आदेश पारिर निकया। अपर मुख्य न्यातियक मजिजस्ट्रेट द्वार पारिर निकया गया आदेश पूण[3] रूप से अनाख्यापक था। उन्होंने क े वल सत्र न्याया ीश 5 द्वारा पारिर आदेश का सन्दर्भिभ निकया जिजसमें अति रिरक्त मुख्य न्यातियक मजिजस्ट्रेट द्वारा निदनांक 6 मई, 2017 को पारिर पहले क े आदेश को चुनौ ी दी गई थी। सत्र न्याया ीश ने कु छ निटप्पशिणयों क े साथ पुनरीक्षण यातिचका को स्वीकार कर लिलया था और नया आदेश vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पारिर करने क े लिलए मामले को निवचारण न्यायालय को वापस भेज निदया था और निवचारण न्यायालय द्वारा मामले क े गुण-दोष क े आ ार पर निवचार निकए जाने की आवश्यक थी।
6. क„ क े समथ3न में, हरदीप सिंसह और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य, (2014) 3 एससीसी 92 क े मामलें में संवै ानिनक पीठ क े निनण3य पर भरोसा निकया गया था।
7. दूसरी ओर, प्रति वादी क े निवद्वान अति वक्ता ने प्रस् ु निकया निक यह एक ऐसा मामला है जिजसमें 55,20,000/- रुपये (55 लाख बीस हजार रुपये क े वल) की ोखा ड़ी करक े निनकासी की गई थी। अपीलक ा3 की भूनिमका स्पk रूप से स्थानिप है। जब शिशकाय क ा3 को अपने खा े से चेकबुक जारी करने क े बारे में में एक संदेश निमला, ो उन्होंने ुरं बैक से सम्पक 3 निकया क्योंनिक उन्होंने कभी भी चेकबुक जारी करने का अनुरो नहीं निकया था।हालांनिक, बैक क े द्वारा कोई सं ोषजनक जवाब नहीं निमला।जब शिशकाय क ा3 ने बैंक में अपने खा े क े लेनेदेन क े निववरण की एक प्रति क े लिलए अनुरो निकया, ो जो खा े से लेनेदेन का निववरण उनको निदया गया वह या ो अपठनीय था या ो vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसको गल बिंप्रट निकया गया था और जिजसक े परिरणामस्वरूप शिशकाय क ा3 यह प ा नहीं लगा सका निक उसक े खा े से क्या लेनदेन निकया गया था। अपीलक ा3 खा े की प्रति यों की आपूर्ति क े लिलए जवाबदार व्यनिक्त होने क े ना े, वह ोखा ड़ी करने में भी समान रूप से जिजम्मेदार है।
8. पक्षकारों क े निवद्वान अति वक्ता को सुना और अशिभलेख पर उपस्थिस्थ सम्बस्थिन् दस् ावेजों का अवलोकन निकया।
9. हरदीप सिंसह और अन्य क े मामलें में दंड प्रनिVया संनिह ा की ारा 319 क े अं ग[3] दायर आवेदन में जिजन मानदंडों क े आ ार पर उपरोक्त आरोपी को बुलाया गया है, वे इस प्रकार हैंः “105.दंड प्रनिVया संनिह ा की ारा 319 क े अ ीन शनिक्त एक निववेका ीन और असा ारण शनिक्त है। इसका प्रयोग बहु कम और क े वल उन्हीं मामलों में निकया जाना चानिहए जहां परिरस्थिस्थति यों क े अनुसार वारंट आवश्यक हो।इसका प्रयोग नहीं निकया जाना चानिहए क्योंनिक मजिजस्ट्रेट या सत्र न्याया ीश की राय है निक कोई अन्य व्यनिक्त भी उस अपरा को करने का अपरा ी हो सक ा है।क े वल वहां जहां न्यायालय में समक्ष प्रस् ु निकए गए साक्ष्य से निकसी व्यनिक्त में निवरुद्ध मजबू और ठोस साक्ष्य हो ो ऐसी शनिक्त का प्रयोग निकया जाना vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA चानिहए न निक अनौपचारिरक और बे र ीब रीकों से उक्त शनिक्तयों का उपयोग करना चानिहए।
106. इस प्रकार हम यह अशिभनिन ा3रिर कर े हैं निक यद्यनिप न्यायालय क े समक्ष प्रस् ु निकये गये साक्ष्य से क े वल प्रथम दृkया मामला जिसद्ध निकया जाना है जिजसका परीक्षण क े दौरान निकया जाना आवश्यक नहीं है बिंक ु इसक े लिलए बहु मजबू साक्ष्य की आवश्यक ा है जिजससे द्वारा उसकी संलिलप्त ा की संभावना है।परीक्षण जिजसे लागू निकया जाना है वह आराेप य कर े समय प्रयोग निकये जाने प्रथमदृkया मामला से कही अति क है लेनिकन सं ुkी की सीमा से कम है यनिद साक्ष्य अपया3प्त है ो यह दोषजिसद्घी की आेर ले जायेगा।इस रह की सं ुनिk की अनुपस्थिस्थति में में न्यायालय को सीआरपीसी की ारा 319 क े ह शनिक्तयों का इस् ेमाल करने से बचना चानिहए। (प्रभाव वर्ति ) 10 सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और एक अन्य (2022) 6 एस. सी. सी. 389 में यह कहा गया गया हैः “9. संवै ानिनक पीठ ने आगाह निकया है निक संनिह ा की ारा 319 क े ह शनिक्त एक निववेका ीन और असा ारण शनिक्त है जिजसका संयम से प्रयोग निकया जाना चानिहए और क े वल उन मामलों में जहां मामले की परिरस्थिस्थति यां की माँग हो और उपरोक्त नोनिटस क े रूप में महत्वपूण[3] परीक्षण निकया जाना है लागू वह है जो आरोप य करने क े समय प्रयोग vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निकए गए प्रथम दृkया मामले से अति क है, लेनिकन सं ुkी की सीमा से कम है यनिद साक्ष्य अपया3प्त है ो यह दोषजिसद्घी की आेर ले जायेगा।
11. यनिद व 3मान मामलें की जांच की पूव क्त निनण3यों में अति कशिथ मापदंडों पर की जा ी है ो हमारी राय में, इस स् र पर वारटं क े लिखलाफ क े वल इसलिलए कोई मामला नहीं बनाया जा ा है निक उसने एक बार आरोपी को लेखा कथन एक प्रति की आपूर्ति की थी वह या ो मंद थी या गल रीक े से मुनिद्र थी। इन दस् ावेजों क े आ ार पर, यह राय नहीं बनाई जा सक ी है निक वह उस आरोपी क े साथ निमला हुआ था जो कशिथ रूप से शिशकाय क ा3 क े खा े से ोखा ड़ी से निनकासी में शानिमल था। वह न ो निनकासी को स्वीक ृ करने क े लिलए एवं न ही शिशकाय क ा3 क े खा े को देखरेख करने क े लिलए अति क ृ है।
12. उपर ब ाये गये कारणों क े आ ार व 3मान अपील को अनुमति है। उच्च न्यायालय क े द्वारा निदनांनिक 12 अक्टूबर, 2017 क े पारिर आक्षेनिप आदेश को अपास् निकया जा ा है एवं व 3मान अपीलक ा3 को एक अन्य आरोपी क े रूप सम्मन करने वालें अशिभयोजन पक्ष क े द्वारा दायर निकये गये आवेदन को खारिरज निकया जा ा है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ………………………………. [न्यायमूर्ति अभय एस. ओका] ………………………………. [न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल] नई निदल्ली 16 माच[3], 2023 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA