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भारत का सर्वोच्च न्यायालय
आपरात्रिक अपीलीय क्षेिात्रिकार
आपरात्रिक अपील संख्या 108/2012
गुना महतो ... अपीलार्थी
बनाम
झारखंड राज्य ... उत्तरदाता
त्रनर्णय
संजय करोल, न्याया.
JUDGMENT
1. यह आपराधिक अपील अपीलकर्ाा गुना महर्ो द्वारा दायर की गई है। धिद्वान धिचारण न्यायालय, डाल्टनगंज द्वारा भारर्ीय दंड संधहर्ा, 1860 कीिारा 302 के र्हर् के सत्र धिचारणिाद सं.50/1989, राज्य बनाम गुनामहर्ो में धदनांक 10.05.2001 के धनणाय के द्वारा उसे अपनी पत्नी श्रीमर्ी देिमधर्या देिी की हत्या का उसे दोषी ठहराया गया है। धिचारण न्यायालय ने अपीलकर्ाा को भारर्ीय दंड संधहर्ा की िारा 302 के र्हर् आजीिन कारािास और भारर्ीय दंड संधहर्ा की िारा 201 के र्हर् दंडनीय अपराि के धलए दो साल के कठोर कारािास की सजा सुनाई है। 2023 INSC 240
2. अपील करने पर झारखंड उच्च न्यायालय ने आपराधिक अपील संख्या 214/2001, गुना महर्ो बनाम झारखण्ड राज्य में आक्षेधपर् धनणाय धदनांक 23.07.2004 के द्वारा धिद्वान धिचारण न्यायालय द्वारा दोषधसधि और सजा के संबंि में धदए गए आदेशों की पुधि कर दी। उच्च न्यायालय ने यह देखर्ेहुए भी ऐसा धकया धक अधभयोजन पक्ष द्वारा अनुसंिानअधिकारी कापरीक्षण नहीं करायागया था।उच्च न्यायालय नेबनौिीमहर्ो (अधभयोजन साक्षी सं. -2), समोिी यादि (अधभयोजन साक्षी सं. -9) और नंदीश यादि (अधभयोजन साक्षी सं. -10) के साक्ष्य पर पूरा-पूरा भरोसा धकया।
3. इस पर अपीलकर्ाा गुना महर्ो द्वारा यह अपील दायर की गई है।
4. अधभयोजन का पक्ष यह है धक अधभयुक्त ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी और उसके बाद इस अपराि से संबंधिर्सबूर्ों कोधिलोधपर् करने के इरादे से उसके शि कोगांि के कुएं में फेंक धदया। बाद में, अधभयुक्त ने झूठी कहानी गढ़कर पुधलस से संपका धकया, और अपनी पत्नी के 'लापर्ा' होने की सूचनादी।
5. धदनांक 13.08.1988 को मृर्का का शि गांि के कुएं में पाया गया। धफर यह मामला पुधलस के संज्ञान में लाया गया और थाना काण्ड सं. 35/1988 (प्रदशा-पी -3) मधनका थाना, झारखंड में दजा धकया गया। र्दनुसार, अनुसंिान धकया गया और धिचारण के धलए अदालर् के समक्ष चालान पेश धकया गया। अधभयोजन पक्ष ने दस गिाहों का परीक्षण कराया, धजनमें से मुरारी राम (अधभयोजन साक्षी सं.-1), धमठू प्रसाद साहू (अधभयोजन साक्षी सं.-4), मुसाधफर यादि (अधभयोजन साक्षी सं.-5), मुन्नी धमस्त्री (अधभयोजन साक्षी सं.-6), धचर्रंजन पांडेय (अधभयोजन साक्षी सं.-8) और सुखरू महर्ो (अधभयोजन साक्षी सं.-7) के साक्ष्य महज औपचाररक प्रकृधर् के हैं। उनकी गिाधहयों पर अलग-अलग अथिा एक साथ धिचार करने भी पर हम पार्े हैं धक ये अधभयुक्त के अपराि की ओर कुछ भी संकेर्नहीं करर्े।
6. इससे पहले धक हम इस मामले के गुण-दोष पर धिचार करें, हम अभी उन र्थ्यों का उल्लेख करना उधचर्समझर्े हैंजो धििाधदर्नहीं हैं: (क)मृर्काकी पहचान, (ख) मृर्का का शि गांि के कुएं से बरामद धकया जाना, (ग) डॉ नरेंद्र कुमार धमसर (अधभयोजन साक्षी सं. -3) द्वारा र्ैयार की गई अंत्यपरीक्षण ररपोटा, धजसमें मौर् का कारण मृर्का की गदान पर चोट,रक्तस्राि र्था सदमा बर्ाया गया है।
7. आपराधिक न्यायशास्त्र का स्थाधपर् धसिांर् है धक पररधस्थधर्जन्य साक्ष्य के इदा-धगदा घूमने िालेमामले में, अधभयोजन पक्ष कोअधभयुक्त के अपराि को संदेहसेपरे साधबर् करना होर्ा है और धजन पररधस्थधर्यों पर भरोसा धकया जाये, िेकेिलएक ही बार् की ओर संकेर् करें, और िह है- अधभयुक्त का अपराि और कुछ भी नहीं। इस न्यायालय ने कई बार उन आिश्यक शर्ों का धनदेश धकया है, धजनका पररधस्थधर्जन्य साक्ष्य के आिार पर धकसी अधभयुक्त की दोषधसधि से पहले पूरा ध्यान रखा जाना चाधहए। शरद त्रबरिीचंदसारदा बनाम महाराष्ट्रराज्य, (1984) 4 एससीसी 116 के ऐधर्हाधसक मामले में इसे धनम्नानुसार धनिााररर् धकया गया है: "153. इस धनणाय का बारीकी से धिश्लेषण करने पर पर्ा चलर्ाहै धक धकसी अधभयुक्त के धखलाफ मामले को पूरी र्रह से धसि करने के धलए धनम्नधलधखर् शर्ों को पूरा धकया जाना चाधहए: (1) धजन पररधस्थधर्यों के आिारपर दोष काधनष्कषाधनकाला जाना है, उन्हें पूरी र्रह से धसि धकया जाना चाधहए। यहां ध्यान देने योग्य है धक इस न्यायालय ने इंधगर् धकया है धक संबंधिर् पररधस्थधर्यों को "धसि धकया जाना चाधहए" न धक "धसि धकया जा सकर्ा है"। इसमें केिल व्याकरण का अंर्र नहीं है बधल्क "धसि धकया जाना चाधहए" और "धसि धकया जा सकर्ा है" के बीच कानूनी अंर्र भी है, जैसा धक इस न्यायालय ने धशिाजी सहाबराि बोबडे बनाम भारर् सरकार के मामलेमें अधभधनिााररर् धकया था। महाराष्र राज्य [(1973) 2 एससीसी 793: 1973 एससीसी (धि.) 1033: 1973 धि. एलजे 1783] जहां धटप्पणी की गई: [एससीसी पैरा 19, पृ. 807: एससीसी (धि.) पृ. 1047] "धनश्चय ही यह प्राथधमक धसिांर् है धक अदालर् द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले अधभयुक्त को दोषी 'होना ही चाधहए' केिल इर्ना पयााप्त नहीं है धक दोषी 'हो सकर्ा है'। 'होना ही चाधहए' और 'हो सकर्ा है' के बीच समझ का बहुर् फका है। इससेअस्पि अनुमानों औरधनधश्चर्धनष्कषों काअंर्रभी स्पि होर्ा है। (2) इस प्रकार स्थाधपर् र्थ्य केिल अधभयुक्त के अपराि की पररकल्पना के अनुरूप होने चाधहए, अथाार्् अधभयुक्त दोषी है, इसके अधर्ररक्त अन्य पररकल्पना के आिार पर र्थ्यों की व्याख्या नहीं होनी चाधहए। (3) पररधस्थधर्यों की प्रकृधर् और प्रिृधि धनणाायक होनी चाधहए, (4) िे दोष धसि करने की पररकल्पना को छोडकर हर संभि पररकल्पना को खाररज करर्ी हों, और (5) सबूर्ों की पूरी श्रृंखला होनी चाधहए र्ाधक अधभयुक्त की बेगुनाही के धलए कोई उधचर् आिारन बचेऔरयह प्रदधशार् होना चाधहए धक सभी मानिीय संभािनाओंके आिार पर यह काम अधभयुक्तों ने ही धकया है।
8. इस मामले में, जैसा धक हमने पहले उल्लेख धकया है, अनुसंिान अधिकारी का परीक्षण नहीं कराया गया। हम पार्े हैंधक अधभयुक्त द्वारा साक्ष्य को धिलोधपर् करने के र्थ्य से संबंधिर्कोई साक्ष्य, चश्मदीद या दस्र्ािेजी प्रमाण नहीं है धक उसने अपनी ही पत्नी की हत्या के संबंि में खुद पर मुकदमा चलाने से रोकने के धलए पुधलस को सूचना दी।
9. जब हम मृर्का के धपर्ा बनौिी महर्ो (अधभयोजन साक्षी सं. -2) के साक्ष्य का अिलोकन करर्े हैं र्ो पार्े हैं धक उन्होंने अपराि के संबंि में अधभयुक्त के धखलाफ कुछभीनहीं कहाहै। उन्होंने कहा हैधक शिके बरामद होने सेदोधदनपहले,अधभयुक्त के धपर्ा नेउन्हें बर्ाया थाधक मृर्का धकसीके साथ भागगई है। लेधकनधकसके साथ? िे नहीं बर्ार्े। िे स्िीकारकरर्े हैं धक मृर्का और अधभयुक्त एक साथ रह रहे थे और जब उन्हें पर्ा चला धक उनकी बेटी घर नहीं लौटी है, र्ो उसने पुधलस में ररपोटा दजा कराई।
10. ग्राम मारन में ही रहने िाले मृर्काके चाचासमोिी यादि (अधभयोजन साक्षी सं. -9) ने केिल यह बर्ाया है धक (उसी गांि के ) राम बृजेश यादि ने उन्हें सूधचर् धकया धक उनकी बहू (मृर्का) गांि (मारन) में रहने िालेधकसी व्यधक्त के साथ भाग गई है। उन्हें इस बार् पर संदेह हुआ औरइसधलए िे मृर्का के ससुराल जान्हो गांि गये। िहां उन्हें पर्ा चला धक धपछली संध्या से ही मृर्का को धकसी ने नहीं देखा है। मृर्का का शि र्भी खोजा जा सका, धजस धदन गांि के कुएं से उसका शि बरामद हुआ। उन्होंने अपना संदेहइस प्रकार व्यक्त धकया है, "... अधभयुक्त ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी औरउसके बाद उसे कुएंमें फेंक धदया था। यही एकमात्र बयान है जो उन्होंने अधभयुक्त के धखलाफ धदया था। लेधकन उनकी इस जानकारी का स्रोर् क्या है, िे नहीं बर्ार्े। धकसी भी घटना में इस र्रह के साक्ष्य केिल सुनी-सुनाई बार्ों पर आिाररर् होर्े हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं और ये अपुि भी होर्े है। हालांधक, यह भी महत्िपूणा है धक िे स्िीकार करर्े हैं धक अधभयुक्त ने पहले ही पुधलस को मामले की सूचना दी थी और अपीलकर्ााके धखलाफ मृर्का के साथ दुव्यािहारकाकोई मामला भीदजा नहीं धकया गया था।
11. हमारी समझ से, अधभयोजन साक्षी सं. -2 के ममेरे भाई के बेटे नंदीश यादि (अधभयोजन साक्षी सं.-10) द्वारा दीगई गिाही काभी अधभयोजन पक्षके मामले को पुि करने या धसि करनेमें कोई योगदान नहीं है। उन्होंने केिलइर्नाकहा है धक, "हमें अधभयुक्त की भूधमका पर संदेहथा" क्योंधक िहअकसर उसेपीटर्ा था। आगे कहा है धक ये बार्ें उन्हें ग्रामीणों ने बर्ाई ंथीं। हम पार्े हैं धक यह बयान सुनी-सुनाई बार्ों पर आिाररर् र्ो है ही, कधथर् िूरर्ा के समय, स्थान और र्रीके के संबंि में अधनधश्चर् और अस्पि है। इसी र्रह के आरोपों के आिार पर उन्हें संदेह हुआ धक अधभयुक्त ने मृर्का की हत्या की है। गौरर्लब है धक ये र्थ्य साक्षी के प्रधर्परीक्षण के दौरान अदालर् में पहली बार पेश धकए गए हैं और जैसा धक हमने अधभयोजन साक्षी सं.-9 के साक्ष्य में पाया है धक दुव्यािहार की कोई धशकायर् कभी धकसी से नहीं की गई। इसधलए, अधभयोजन पक्ष का मामला प्रमाधणर् नहीं होर्ा।
12. धिचारण न्यायालय ने अपने फैसलेमें अधभयुक्त को दोषी ठहरार्े समय, अधभयोजन साक्षी सं. -9 के बयान और अनुसंिान अधिकारी के कधथर् बयान पर बहुर् अधिक भरोसा धकया, धजसे यूडी प्रदशा कहा जार्ा है, धजसे प्रदशा- 3/1 के रूप में धचधिर् धकया गया है। उक्त धनणाय में संबंधिर् मंर्व्य इस प्रकार हैं: 'अंत्यपरीक्षण प्रधर्िेदन से पर्ा चलर्ा है धक मृर्का की मौर् डूबने से नहीं हुई थी। अधभयोजन साक्षी सं.-9 और आई.ओ.के साक्ष्य से ऐसा प्रर्ीर् होर्ा है धक जब मृर्का लापर्ा हो गई,र्ो अगलेधदन ग्रामीणों ने झगर के माध्यम सेउक्तकुएंमें उसके मृर्शरीर कीखोज करनेकी कोधशश की, लेधकन नहीं धमला और अगले धदन शि उसी कुएं में पाया गया। इसधलए, इन र्थ्यों से संकेर् धमलर्ा है धक मृर्का ने आत्महत्या नहीं की थी,बधल्क उसकीहत्या की गई थी और उसके मृर् शरीर को कुएं में फेंक धदया गया था और अधभयुक्त का फदाबयान धक मृर्का की मौर् आत्महत्या करने के कारणहुई है,अधिसंभाव्यप्रर्ीर्नहीं होर्ा है।
13. इसी प्रकार, उच्च न्यायालय ने भी अधभयुक्त के अपराि के र्थ्य पर पहुंचने में मुख्य रूप से यूडी पर अपने धनष्कषों को आिार बनाया। अदालर् ने धिचार धकया धक: 'धचधकत्सकीय साक्ष्य बर्ार्े हैं धक अंत्यपरीक्षण से 48-96 घंटेपहलेमौर् हो चुकीथी।मृर्का के शरीर काअंत्यपरीक्षण 14 अगस्र्, 1988 को अपराि लगभग 3 बजे धकया गया था। धचधकत्सकीयसाक्ष्यके अनुसार, यधद गणना कीजाए र्ो मृर्का की मृत्यु 12 अगस्र्, 1988 (लगभग 3 बजे) और 10 अगस्र्,1988 (लगभग[3] बजे) के बीच हुई। यही कारण है धक आई.ओ.को संदेहथाधक अंत्यपरीक्षण सेकम सेकम दो धदन पहले मृर्का की हत्या कर दी गई थी। शि धमलने की र्ारीख से कम से कम एक धदन पहले, उसकी हत्या कर दी गई और उसके शि को कुएं में फेंक धदया गया।
14. यह इस पृष्ठभूधम में है धक अनुसंिान अधिकारी का परीक्षण नहीं कराया जाना महत्िपूणा हो जार्ा है। ऐसा नहीं है धक अनुसंिान अधिकारी उपलब्ि नहीं थे अथिा धजस जांच के र्थ्य और र्रीके का बयान उनके सहयोगी ने धदया, िह उस भी अनुसंिानमेंशाधमल था।अनुसंिानअधिकारीकापरीक्षण नहीं कराएजाने के कारण, मौजूदा पररधस्थधर्यों में अधभयोजन पक्ष कामामला अगर झूठा नहीं, र्ो संदेहास्पद र्ो हो ही जार्ा है। उनका परीक्षण कराए धबना आईपीसी की िारा 201 के र्हर् अपराि धसि नहीं धकया जा सकर्ा।
15. धनचली अदालर्ों ने अधभयुक्त के अपराि संबंिी पूिाानुमान िाली िारणा पर इस आिार कायािाही की धक उसे अंधर्म बार मृर्का के साथ देखा गया था और झूठी ररपोटा दजा की गई। यह भी ध्यान में नहीं रखा गया धक मृर्का के धपर्ा के बयान के अनुसार, अधभयुक्त के धपर्ा ने खुद उसे उसकी लापर्ा बेटी के बारे में सूधचर् धकया था, िह भी घटना से कम से कम दो धदन पहले। संदेह और शक धकसी अधभयुक्त के अपराि का आिार नहीं हो सकर्े। अधभयुक्त को अपराि से जोडने िाली पररधस्थधर्यां साधबर् भी नहीं होर्ी हैं, संदेह से परे र्ो धबलकुल भी नहीं।
16. यहां इस बार् पर जोर धदया जा सकर्ाहै धक 'संदेह' चाहे धकर्ना भी गंभीर क्यों न हो, िह केिल अधभयोजन पक्ष द्वारा मामले को संदेह से परे धसि करने के धलए गढ़ी गई कहानी का केिल एक संधदग्ि घटक ही होर्ा है। [र्वेंकटेश बनाम कनाणटक राज्य, 2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 765; शिुघ्न बबन मेश्राम बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2021) 1 एससीसी 596; पप्पू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2022) 10 एससीसी 321]। उपरोक्त बार्ों को छोडकर, कोई चश्मदीद, पररधस्थधर्जन्य या अन्य कोई सबूर्नहीं है जो अधभयुक्त के अपराि को धसि कर सके।अधभयुक्त को अपराि से जोडने िाला कोई र्थ्य नहीं पाया गया है, जो अधभयोजन पक्ष द्वारा संदेह से परे साधबर् करने में सक्षम धसि हो रहा हो।
17. यह हमारा धनिााररर् कर्ाव्य है धक हम न्याय की हत्या हर कीमर् पर रोकना सुधनधश्चर् करें औरयधद कोई संदेहहो, र्ोउसकालाभ अधभयुक्तकोअिश्यधदया जाए। [हनुमंत गोत्रर्वंद नरगुंडकर बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1952) 2 एससीसी 71]।
18. सामान्य सुनिाई में यह न्यायालय धनचले दोनों न्यायालयों द्वारा र्य धकए गए एक ही धनष्कषा में हस्र्क्षेप नहीं करर्ा है। ऐसा कुछ अपिाद स्िरूप मामलों में धकया जार्ा है, जहां हम पार्े हैं धक धनष्कषा बेर्ुके हैं और धजससे न्याय का उपहास होर्ा है। हमारा कर्ाव्य है धक हम न्याय की हत्या न होने दें। [रामफु पाल रेड्डी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य, (1970) 3 एससीसी 474, बालक राम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (1975) 3 एससीसी 219, भोत्रगनभाई त्रहरजीभाई बनाम गुजरात राज्य, (1983) 3 एससीसी 217]।
19. इस प्रकार, हमारे धिचारमें धनचली अदालर्ोंने सबूर्ोंकी गलर्और अिूरे धिश्लेषण के आिार पर दोषधसधि का आदेश पाररर् करने में गंभीर गलर्ी की है, धजससे अधभयुक्त को गंभीर क्षधर् हुई है और न्याय का उपहास भी हुआ है।
20. उपरोक्त के मद्देनजर, हमें लगर्ा है धक अपर सत्र न्यायािीश-5, पलामू, डाल्टनगंज द्वारा सत्र धिचारण िाद सं. 50/1989 में धदनांक 10.05.2001 को पाररर् दोषधसधि और सजा का आदेश र्था झारखंड उच्च न्यायालय, रांची द्वारा आपराधिक अपील सं 214/2001 (गुना महर्ो बनाम झारखण्ड राज्य) में धदनांक 23-07-2004 के आदेश द्वारा की गई उसकी पुधि में हस्र्क्षेप की आिश्यकर्ाहै।
21. हम दोनों धनचले न्यायालयों द्वारा पाररर् आदेशों को अपास्र् करर्े हैं। चूंधक अपीलकर्ाा पहले से ही जमानर् पर है, इसधलए उसे जमानर्-बंि पत्र के दाधयत्िों से उन्मोधचर् धकया जार्ा है।
22. अपील में की गई प्राथाना स्िीकार की जार्ी है।.................. न्याया. (बी.आर. गर्वई).................... न्याया. (संजय करोल) धदनांक: 16 माचा, 2023 स्थान: नई धदल्ली अस्र्वीकरर्: धहन्दी भाषा मेंअनूधदर् धनणाय काउपयोग इर्नाही हैधक िादीइसेअपनी भाषा मेंसमझ सके।इसकाउपयोग धकसीअन्य उद्देश्य के धलए नहीं धकया जा सकर्ा। सभीव्यािहाररक औरआधिकाररक कायों मेंर्थाधनष्पादन औरकायाान्ियनके धलए उक्त धनणाय का अंग्रेजी संस्करणही मान्य होगा।