Full Text
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 3828/2017
मो हंदर िसंह (मृत) एल. आर. एस.
और एक अ य ारा ....अपीलाथ (गण)
बनाम
नारायण िसंह और अ य .... यथ (गण)
िनणय
या.,र तोगी
JUDGMENT
1. त काल अपील द ली उ च यायालय क ख ड पीठ ारा 22 नवंबर, 2012 को पा रत िनणय और आदेश क े खलाफ िनदिशत क जाती है जसम कहा गया है क एक बार जब द ली नगर िनगम अिधिनयम, 1957(इसक े बाद "अिधिनयम 1954" क े प म संदिभत कया जा रहा है) क धारा 507 (ए) क े तहत अिधसूचना जार करक े एक ामीण े का शहर करण हो जाता है, तो यह द ली भूिम सुधार अिधिनयम, 1954 (इसक े बाद "अिधिनयम 1954" क े प म संदिभत कया जा रहा है) क े ावधान क े तहत आगे शािसत नह ं होता है, यह प करते हुए क सभी कानूनी यािचकाएं उिचत मंच क े सम प कार क े िलए उपल ध रहगी तो कायवा हय को अिधिनयम, 1954 क े तहत उिचत मंच क े सम प कार ारा अपने दाव / ववाद को वाद ववाद करने हेतु नह ं पाया गया है।
2. रकॉड से जो त य कट होते ह वे यह है क मामन िसंह जो द ली क े गांव समयपुर म खसरा नं. 6/19/2 एम म 4 बीघा 18 ब वास मापी गई भूिम का अिभिल खत भूिमधर था, उसने किथत तौर पर 9 माच, 1970 क े पंजीकृ त ब वलेख क े मा यम से एक भाई राम को जमीन बेच द । ितवाद नारायण िसंह और सोम द ने 4 मई, 1989 को एक पंजीकृ त ब वलेख ारा ी मामन िसंह से मशः 2 बीघा 18 ब वास और 2 बीघा ज़मीन खर द । बाद म, उ ह ने अिधिनयम, 1954 क े तहत दा खल ख़ा रज क े िलए आवेदन कया और 31 मई, 1989 को उनक े नाम पर दा खल ख़ा रज कर दया गया।
3. अपीलािथय ारा यह अनुरोध कया गया है क 4 मई, 1989 क े पंजीकृ त ब वलेख को मामन िसंह ारा ितवाद ओं क े प म िन पा दत कए जाने से पहले और 31 मई, 1989 को उनक े नाम को दा खल ख़ा रज कए जाने से पहले, अपीलािथय ने ववा दत भूिम पर क जा कर िलया था। अपीलकताओं ने बाद म 31 मई, 1989 क े उस दा खल ख़ा रज आदेश को चुनौती द जो अिधिनयम 1954 क धारा 64 क े तहत दायर अपील म ितक ू ल क जे का दावा करने हेतु ितवाद क े प म खोला गया था। मुकदमेबाजी क े क ु छ चरण क े प ात, व आयु ने 10 फरवर, 1995 क े आदेश ारा ितवाद ओं क े प म पा रत दा खल ख़ा रज क े आदेश को अपा त कर दया, जसम कहा गया था क ह तांतरण अिधिनयम, 1954 क धारा 33 का उ लंघन हुआ था और आगे ववा दत भूिम को गाँव सभा क े अिधकृ त करने का आदेश दया गया है।
4. यह उ लेख करना सुसंगत है क 10 फरवर, 1995 क े व ीय आयु क े आदेश, जसम यह कहा गया था क " ववाद त भूिम को गाँव सभा क े अिधकृ त करने का आदेश दया गया है" को अपीलकताओं ारा कभी भी चुनौती नह ं द गई थी जब क ितवाद ने द ली उ च यायालय क े व ान एकल यायाधीश क े सम 10 फरवर, 1995 क े आदेश को 1995 क रट यािचका (िस वल) सं. 670 क े मा यम से चुनौती द थी जसे 14 जुलाई, 2008 क े िनणय ारा खा रज कर दया गया था और यह 2008 क े एल. पी. ए. सं. 591 म ितवाद क े जवाब म चुनौती का वषय बन गया है.
5. उ च यायालय क ख ड पीठ इस िन कष पर पहुंची क अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े अंतगत 23 अ ैल, 1982 क अिधसूचना को श क े योग म कािशत कया गया है जो प प से वचाराधीन ववा दत भूिम का शहर करण करता है और अिधिनयम, 1957 क े दायरे म आता है, यह अब ामीण े नह ं रह गया है इस कार, अिधिनयम, 1954 क े तहत सभी कायवा हयां उिचत मंच क े सम प कार ारा अपने दाव / ववाद को वाद ववाद करने हेतु इस प ीकरण क े साथ प रहाय छोड़ द जाती ह क सभी कानूनी यािचकाएं उिचत मंच क े सम प कार क े िलए उपल ध होगी जसे 22 नवंबर, 2012 क े ववा दत फ ै सले क े तहत िशकायत क े िनवारण क े िलए अपनाया जा सकता है, जो हमारे सम अपील म चुनौती का वषय है।
6. इस संदभ म, यह देखा जा सकता है क ितवाद नारायण िसंह और सोम द ने अ थायी यादेश देने हेतु िस वल या सं हता, 1908 क े आदेश िनयम 1 और 2 क े तहत एक आवेदन क े साथ अिनवाय िनषेधा ा हेतु एक िस वल वाद दायर कया था। अ थायी अिधकार े क े तर पर मामला ितवाद क े कहने पर दज एक वशेष इजाजत यािचका म इस यायालय म गया जसे राज व अिधका रय को चार मह ने म मामले का फ ै सला करने क े िनदश क े साथ 23 जनवर, 1992 क े आदेश ारा खा रज कर दया गया था। त प ात, 2 िसतंबर, 1992 क े आदेश ारा, यह अदालत संबंिधत एस. एच. ओ. को िनदश देती है क वह अपीलाथ को क जा स प द, और यायालय क े आदेश क े अनुसार यह गत ववा दत भूिम अपीलाथ क े क जे म ह।
7. अपीलािथय क े व ान व र अिधव ा, ी राक े श वेद क े तुत करने का मु य बंदु यह है क इस यायालय ारा 2 िसतंबर, 1992 को अपीलािथय को ववा दत भूिम का क जा स पने हेतु पा रत आदेश क े अलावा, एस. ड. एम. ारा वतमान अपीलािथय को 18 जनवर, 1984 को धारा 81 क े अंतगत जार कए गए नो टस से इसका समथन कया जा सकता है, जो इंिगत करता है क ववा दत भूिम अपीलािथय क े क जे म ह।
8. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क एक बार जब मामन िसंह ने 9 माच, 1970 को भाई राम क े प म पंजीकृ त ब वलेख ारा भूिम बेच द थी और उसका क जा उसे स प दया था, तो उ ह (मामन िसंह) लगातार ब वलेख को िन पा दत करने का कोई अिधकार, वािम व और हत नह ं था और वह ितवाद ओं को ववा दत भूिम का क जा नह ं स प सकते थे। इसक े अित र, अपीलािथय को स पे गए क जे को बरकरार रखा गया है।
9. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम 1957 क े सम कोण को लेने क े बाद, अिधिनयम 1957 क धारा 507 (क) क े अंतगत अिधसूचना जार कर शहर करण क घोषणा क े बाद भी, यह अिधिनयम 1954 क े ावधान क े तहत द प क े अिधकार को समा नह ं करेगा। अिधिनयम, 1957 क े अंतगत कोई ावधान नह ं है जो अिधिनयम क खंड 507 (ए) क े अंतगत शहर करण क अिधसूचना जार करने का सुझाव दे सकता है जसमे अिधिनयम 1954 क े ावधान वतः समा हो जाते है। इसक े अलावा, अिधिनयम 1954 क धारा 150 (3) वशेष प से उन प रणाम हेतु ावधान करती है जब अिधिनयम, 1957 क धारा 507 क े आधार पर पूर गाँव सभा ामीण े नह ं रहेगी। गाँव सभा क े वघटन और धारा 150 (3) क े उपखंड (ई) का प रणाम वशेष प से कहता है क इस अिधिनयम, 1954 क े ावधान लागू ह गे।
10. व ान अिधव ा तुत करते ह क अिधिनयम, 1954 एक ऐसा कानून है जो धारा 1 (2) क े आधार पर भूिम सुधार से संबंिधत एक वशेष अिधिनयम है जो पूरे द ली क शािसत देश तक फ ै ला हुआ है। अिधिनयम, 1957 क े अंतगत आने वाला े इससे बाहर नह ं है। यह धारा 5 क े दायरे म अविध धारक और भूिमधर क े अिधकार का िनमाण करता है और ऐसे अिधकार क े विभ न तर क से ा कया जा सकता है।अ याय क े तहत, धारा सी भूिम क े उपयोगकता से संबंिधत है और धारा ड भूिमधर ारा भूिम क े ह तांतरण से संबंिधत है और धारा ई ह तांतरण से संबंिधत है और धारा एफ वभाजन से संबंिधत है। इस कार, अिधिनयम, 1954 भूिमधर और अ य अविध धारक क े अिधकार से संबंिधत एक वशेष सं हता है।
11. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क जहाँ तक अिधिनयम, 1957 का संबंध है, यह वह अिधिनयम है जो द ली नगर िनगम से संबंिधत है। अिधिनयम, 1957 म ऐसा क ु छ भी नह ं है जो यह सुझाव देता हो क यह े क े शहर करण को अिधसूिचत करने क े बाद क शािसत देश द ली म भूिमधर क े कायकाल को विनयिमत करने का इरादा रखता है। चूँ क अिधिनयम, 1957 का उ े य काय म क े संचालन को िनयं त करना नह ं है, इसिलए धारा 502 ारा यह वशेष प से दान कया गया है क लागू अ य कानून क अवहेलना नह ं क जानी चा हए।
12. वा तव म, व ान अिधव ा तुत करते ह क अिधिनयम, 1954 े खंड 507 (ए) क े अंतगत शहर करण क े बाद भी काम करना जार रखता है और आगे तुत करता है क ववा दत िनणय म उ च यायालय क ख ड पीठ ारा वापसी िन कष कानूनी प से टकाऊ नह ं है और इसे यायालय ारा ह त ेप कया जाना चा हए।अपनी तुित क े समथन म, व ान अिधव ा ने ओम काश अ वाल और अ य बनाम बतरा बेहरा और अ य क े मामले म इस यायालय क े फ ै सले पर भरोसा कया है।
13. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क उ च यायालय क ख ड पीठ ने उमेद िसंह बनाम द ली सरकार क े रा.रा. े और अ य मामले म उ च यायालय क ख ड पीठ ारा अिभ य पछले मतो पर यान नह ं दया है। और यह क उ च यायालय क पूववत खंडपीठ ने भी अिधिनयम, 1957 और अिधिनयम, 1954 क प ित पर वचार कया और अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े अंतगत अिधसूचना जार होने पर, इस िन कष पर पहुंचे क यह अिधिनयम, 1954 क े अंतगत मौजूद प क े अिधकार को समा नह ं कर सकता है और, द गई प र थितय म, इस यायालय ारा िनणय म ह त ेप समा हो जाना क आव यकता है।
14. इसक े वपर त, ितवाद क े व ान व र अिधव ा ी वकास िसंह ने तुत कया क ितवाद नारायण िसंह और सोमद ने भूिमधर मामन िसंह से 4 मई, 1989 को एक पंजीकृ त ब वलेख ारा मशः 2 बीघा 18 ब वास और 2 बीघा जमीन खर द । जहाँ तक ववा दत संप पर अिधकार, वािम व और हत का संबंध है, यह ितवाद ओं क े प म िन हत है। 4 मई, 1989 क े पंजीकृ त ब वलेख पर भाई राम ने कभी सवाल नह ं उठाया है, इसको अपीलकताओं ारा लगाये गए आरोप क े बाद वाले ब लेनदेन से असंतु य कहा जा सकता है। यहां तक क अपीलकताओं ारा ितक ू ल क जे का दावा कया गये अिधकार भी एक कमजोर अिधकार है और कानूनी प से टकाऊ नह ं है। इस संबंध म, द वानी मुकदमा जो उनक े कहने पर दा खल कया गया है, यावहा रक प से इसक े सफल होने क संभावना नह ं है य क वतमान यािचका लं बत है तथा प अपीलकताओं को वचाराधीन ववा दत संप पर कोई अिधकार, वािम व और हत नह ं है।
15. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम, 1957 क योजना को देखते हुए, सामंज य करते हुए, दोन अलग-अलग े म शािसत होते ह और एक बार जब अिधसूचना धारा 507 (ए) क े तहत कािशत हो जाती है, जसम भूिम को शहर कृ त घो षत कया जाता है, जो इस मामले म ववा दत नह ं है, य क भूिम ामीण े क े प म मौजूद नह ं है तो े तहत लं बत दा खल-ख़ा रज कायवाह बंद हो जाती है और, इस कार, उ च यायालय क ख ड पीठ ारा िन कष पर पहुंचने म कोई ु ट नह ं क गई है तो अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े तहत अिधसूचना क े काशन क े प ात सभी दा खल-ख़ा रज कायवाह समा हो जाती है।
16. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क यह द ली उ च यायालय का सुसंगत कोण है और ववा दत िनणय क े अित र, अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े तहत अिधसूचना जार करने क े ज र और भाव को उ च यायालय ारा ीमती इंदु खुराना बनाम ाम सभा और अ य मामले म पहले ह जांच क गई थी। जसका िनणय 26 माच, 2010 को िलया गया था और अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम, 1957 क योजना क जांच समा हो जाने क े बाद यह िनणय िलया गया था क एक बार जब अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े अंतगत अिधसूचना जार करक े ामीण े को शहर कृ त घो षत कर दया जाता है, तो अिधिनयम, 1954 क े ावधान लागू नह ं होते ह।
17. व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क दो अलग-अलग पीठ ारा उ च यायालय क खंडपीठ ारा मामले क जांच कए जाने क े बाद, द ली उ च यायालय ारा बाद क े िनणय म इसका लगातार पालन कया जा रहा है और जब तक यह यायालय इस िन कष पर नह ं पहुंचता है क अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम, 1957 म बताई गई या या पूर तरह से अनुिचत और अ थर है, सामा यतः इस यायालय ारा ह त ेप नह ं कया जा सकता है।
18. व ान ् अिधव ा आगे तुत करते ह क 4 मई, 1989 क े पंजीकृ त ब वलेख क े अनुसार, गत ववा दत भूिम म अिधकार, वािम व और हत रखने क े बावजूद, जहां तक वतमान ितवा दय का संबंध है, और द गई प र थितय म 31 मई, 1989 को एक तर पर उनका नाम दा खल-ख़ा रज कया जा रहा है, ता क अपीलकताओं क े पास ववा दत भूिम पर क जा रखने का कोई कानूनी अिधकार न हो, हालां क ितवाद क े कहने पर मुकदमा दा खल कया गया है और जो बताता है क यह यायालय याय क े हत म मुकदमे क बहुलता से बचने हेतु ितवाद क े प म क जा लौटने क े िलए वचार कर सकता है।
19. हमने प कार क े व ान अिधव ा को सुना है और उनक सहायता से रकॉड म उपल ध साम ी का अ ययन कया है।
20. त यगत मै स जो रकॉड म आया है, दोन प क े बीच ववा दत नह ं है। वचार हेतु उठाए गए विध का यह है क एक बार जब अिधिनयम 1957 क े तहत अिधसूचना जार करक े ामीण े का शहर करण हो जाता है, तो उसक े बाद अिधिनयम, 1954 क े ावधान पर या भाव पड़ेगा।
21. हम अपने वचार हेतु उठाए गए क जांच करने क े िलए अिधिनयम क े सुसंगत ावधान पर गौर करना चाहगे।
22. इस अिधिनयम, 1954 को बना बचौिलय क े कसान मािलक का एक समान िनकाय बनाने, द ली म लागू करायेदार कानून क े एक करण और उससे जुड़े अ य मामल हेतु ावधान करने क े उ े य से अिधिनयिमत कया गया था।
23. अिधिनयम, 1954 क खंड 1 (2) का व तार पूरे क शािसत देश द ली तक है, ले कन यह अिधिनयम, 1954 क खंड 1 (2) (ए) म अिधसूिचत े पर लागू नह ं होगा अथात ऐसा े जो नवंबर, 1956 क े थम दन से पहले सुसंगत अिधिनयम क े तहत कसी नगर पािलका या अिधसूिचत े म शािमल कया गया हो या कया जा सकता है।
24. अिधिनयम, 1954 क े भाव और दायरे को समझने से पहले अिधिनयम क े ासंिगक ावधान पर यान देना उिचत हो सकता है जो इस कार ह: "1. इस अिधिनयम को द ली भूिम सुधार अिधिनयम, 1954 कहा जा सकता है। (2) यह पूरे क शािसत देश द ली तक फ ै ला हुआ है, ले कन यहां लागू नह ं होगा। (क) वे े जो नवंबर, 1956 क े थम दन से पहले नगर पािलका या पंजाब नगर पािलका अिधिनयम, 1911 क े ावधान क े तहत अिधसूिचत े, या छावनी (कटोनमट) अिधिनयम, 1924 क े ावधान क े तहत छावनी (कटोनमट) म शािमल है या कए जा सकते ह।
3. प रभाषाएँ - इस अिधिनयम म, जब तक क संदभ से अ यथा अपे त न हो... (1) से (4)..... "(5) " द ली नगर" का अथ उन े से ह जो द ली नगर िनगम क थापना से ठ क पहले द ली नगर पािलका, िस वल टेशन अिधसूिचत े, प मी द ली नगर पािलका और कला अिधसूिचत े क सीमाओं म शािमल थे;" (6) से (12).... (13) धारा 23 और 24 को छोड़कर, "भूिम" का अथ कृ ष, बागवानी या म य पालन और मुग पालन स हत पशुपालन और उससे संबंिधत उ े य क े िलए धा रत या अिधकृ त क गई भूिम से है और इसम शािमल ह- (क) उससे जुड़ इमारत, (ख) गाँव क आबाद, (ग) बगीचा हेतु भूिम, (घ) गाँव क े चरागाह क े िलए भूिम या पानी से ढक भूिम और िसंघारा उगाने और अ य उ पादन या नद क े तल क भूिम, और आक मक या कभी-कभार खेती क े िलए उपयोग क जाने वाली भूिम। ले कन शािमल नह ं है द ली शहर से सटे े क े इलाक म इमारत ारा क जा क गई भूिम, जसे मु य आयु आिधका रक राजप म एक अिधसूचना ारा अिध हण क े प म घो षत कर सकता है;
150. (1) एवं (2) (3) य द द ली नगर िनगम अिधिनयम, 1957 म प रभा षत पूरे गांव सभा े को उस अिधिनयम क धारा 507 क े अंतगत एक अिधसूचना क े आधार पर ामीण े म शािमल करना बंद कर दया जाता है, तो उस े क े िलए ग ठत गाँव सभा समा हो जाएगी और इस तरह क े वघटन पर,- (क) गाँव सभा ारा उपयोग कए गए, आनंद िलए गए या उसक े अधीन कये गए कसी भी कार क े सभी अिधकार क े साथ, ऐसे वघटन से ठ क पहले गाँव सभा म िन हत सभी चल और अचल संप यां और गाँव सभा े िनिध म रखे गए धन स हत उसम कसी भी कृ ित और कार क े सभी हत, क सरकार म िन हत होगे; (ख) ऐसे वघटन से ठ क पहले गाँव सभा ारा, उसक े साथ या उसक े िलए कए जाने वाले सभी कत य, दािय व और देय देनदा रय, कए गए सभी अनुबंध और कए जाने वाले सभी मामल और चीज को क सरकार क े साथ या उसक े िलए कया गया, या कये जाने वाले देय माना जाएगा; (ग) ऐसे वघटन से ठ क पहले गाँव सभा को देय सभी दर, कर, शु क, कराया और अ य शु क क सरकार को देय माने जाएंगे; (घ) गाँव सभा ारा या उसक े व सभी वाद, अिभयोजन और अ य कानूनी कायवाह था पत क गई है या जो था पत होगी, उसे भारत संघ ारा या उसक े व जार या था पत कया जा सकता है। (ड़) इस अिधिनयम क े ावधान ऐसे गाँव सभा े म भूिम क े संबंध म लागू ह गे, जो क य सरकार क े खंड (ए) म िन हत भूिम नह ं ह, इस संशोधन क े अधीन रहते हुए क गाँव सभा और गाँव पंचायत क े संदभ को क य सरकार क े संदभ क े प म समझा जाएगा; (च) धारा 1 क उपधारा (2) क े खंड(ख) म कसी बात क े होते हुए भी, धारा 84, 85, 86क और 87 क े ावधान और य य क े िन कासन से संबंिधत इस अिधिनयम का कोई अ य ावधान धारा (क) क े अंतगत क य सरकार म िन हत भूिम क े संबंध म इस संशोधन क े अधीन लागू होगा क गाँव सभा और गांव पंचायत क े संदभ को क य सरकार क े संदभ क े प म माना जाएगा। (4) य द गाँव सभा े का क े वल एक भाग ामीण े म शािमल हो जाना समा हो जाता है तो उस े क े िलए ग ठत गाँव सभा क े ािधकार जैसा क ऊपर कहा गया है उस भाग क े संबंध म समा हो जाएगी और ऐसे समाि पर, उपधारा (3) क े धारा (ए) से (एफ) क े ावधान उस ह से पर ऐसे लागू ह गे जैसे क गाँव सभा का गठन क े वल उस ह से क े िलए कया गया था और भंग कर दया गया था, उसे आक मक और प रणामी आदेश क े अधीन रहते हुए जो मु य आयु करना आव यक समझे। (5) य द कसी गाँव सभा े का आकार कम हो जाता है तो उसक े प रणाम व प उसक े कसी भाग को उपरो ामीण े म शािमल करना समा कर दया जायेगा और मु य आयु क राय है क गांव सभा े का आकार एक अलग गाँव सभा क े अिधकार े म आने हेतु पया प से बड़ा नह ं है, तो वह आिधका रक राजप म अिधसूचना ारा घोषणा कर सकता है क ऐसा गाँव सभा े, अिधसूचना म िन द ितिथ से, एक अलग गाँव सभा े नह ं रहेगा और उसक े िलए ग ठत गाँव सभा भंग हो जाएगी और वह िनदश दे सकती है क उ े को एक या अिधक आस-पास क े गाँव सभा े म शािमल कया जाएगा, और उसक े बाद द ली पंचायत राज अिधिनयम, 1954 (1955 क े द ली अिधिनयम 3) क धारा 3 क े ावधान ह गे, जहां तक लागू हो सक े ।"
25. ऊपर उ ल खत सुसंगत ावधान का संयु अ ययन प प से इंिगत करता है क अिधिनयम, 1954 म ऐसे े को शािमल नह ं कया जाएगा जैसा क पहली बार म प रभा षत कया गया है जसे नवंबर, 1956 क े पहले दन या उससे पहले नगर पािलका म शािमल कया जा सकता है। धारा 3 (13) क े तहत प रभा षत 'भूिम' म ावधान है क धारा 23 और 24 को छोड़कर, कृ ष, बागवानी या पशुपालन से जुड़े उ े य हेतु धा रत या अिधकृ त क गई भूिम जसम म य पालन और मुग पालन शािमल है और इसम अ य े णयां भी शािमल ह जो भूिम का ह सा है, ले कन साथ ह, इसम द ली शहर से सटे े या बे ट म भवन ारा अिधकृ त क गई भूिम शािमल नह ं है।
26. ' द ली शहर' को अिधिनयम क धारा 3 (5) क े अंतगत प रभा षत कया गया है जो प प से प रभा षत करता है क वे े जो द ली नगर िनगम क थापना से ठ क पहले द ली नगर पािलका क सीमा म शािमल थे। द ली शहर से सटे भवन ारा क जा क गई भूिम का पूर तरह से ब ह कार कया गया है जो द ली नगर िनगम क थापना से पहले आती है और अिधिनयम, 1954 क े अ याय क े तहत कायकाल धारक क े तहत प क े अिधकार को तय करने क े उ े य हेतु भूिम नह ं है।
27. साथ ह, अिधिनयम क धारा 150 (3), (4) और (5) इंिगत करती है क य द अिधिनयम क धारा 507 क े तहत अिधसूचना क े आधार पर अिधिनयम, 1957 म प रभा षत ामीण े म गांव सभा े को शािमल करना समा कर दया जाता है, तो गाँव सभा वघ टत हो जाएगी या य द गाँव सभा े का एक ह सा ामीण े म शािमल होना समा हो जाता है, जैसा क पूववत कहा गया है तो उस े हेतु गाँव सभा का अिधकार े उस ह से क े संबंध म समा हो जाता है और उस ह से क े िलए वघ टत हो जाता है या उस हद तक, उपयु क े अनुसार एक भाग क े ामीण े म शािमल न होने क े प रणाम व प गांव सभा का आकार कम हो जाता है।
28. आइए हम वतमान उ े य हेतु अिधिनयम, 1957 क े सुसंगत ावधान पर वचार कर जो इस कार ह:- "2 (52)" " ामीण े " का अथ द ली क े उन े से ह जो िनगम क थापना से ठ क पहले पंजाब जला बोड अिधिनयम, 1883 (1883 का पंजाब अिधिनयम 20) क े तहत था पत द ली जला बोड क थानीय सीमाओं क े भीतर थत ह, ले कन इसम उनका ऐसा ह सा शािमल नह ं होगा जो धारा 507 क े तहत एक अिधसूचना क े आधार पर यहां प रभा षत ामीण े म शािमल होने बंद हो सकते है 2 (61) "शहर े " का अथ द ली क े उन े से ह जो ामीण े नह ं ह;
502. अ य कानून क अवहेलना नह ं क जानी चा हए-इस अिधिनयम म दए गए ावधान को छोड़कर, इस अिधिनयम म शािमल कसी भी चीज को िनगम या कसी नगरपािलका ािधकरण या कसी नगरपािलका अिधकार या अ य नगर पािलका कमचार ारा उस समय लागु कसी भी कानून क अवहेलना को अिधकृ त करने क े प म नह ं माना जाएगा।
507. ामीण े क े बारे म वशेष ावधान- इस अिधिनयम क े पूवगामी ावधान म क ु छ भी िन हत होने क े बावजूद, - (क) सरकार क े पूव अनुमोदन से राजप म अिधसूचना ारा एक िनगम यह घोषणा कर सकता है क ामीण े का कोई भी ह सा उसम शािमल नह ं कया जाएगा और ऐसी अिधसूचना क े न होने पर वह ह सा शहर े म शािमल कया जाएगा और इसका ह सा बनेगा। (ख) सरकार क े पूव अनुमोदन से, राजप म अिधसूचना ारा एक िनगम यह कर सकता है,- (i) ामीण े या उसक े कसी ह से को इस अिधिनयम क े ऐसे ावधान से छ ू ट दे सकता है जो वह उिचत समझे। (ii) ामीण े म या उसक े कसी भाग म उन दर से कम दर पर उगाह कर, दर, शु क और अ य शु क लगाता है जन पर शहर े म ऐसे कर, दर, शु क और अ य शु क लगाए जाते ह या ऐसे े या ह से को ऐसे कसी कर, दर, शु क या अ य शु क से छ ू ट देता है।" (ग) एक िनगम गाँव सभा को भुगतान करेगा- (i) गाँव सभा े म जब भी वह कर लगाया जाता है, तो यवसाय, यापार, िनयु और रोजगार पर कर क आय क े बराबर रािश का भुगतान करेगा, और (ii) उस े म भूिम और भवन पर संप कर क आय क े ऐसे ह से क े बराबर रािश जो िनगम ारा ऐसी आय से संचय क लागत म कटौती करने क े बाद, समय-समय पर िनधा रत क जाए।
29. अिधिनयम, 1957 को मु य प से द ली नगर िनगम क े शासन क े िलए एक समान िनकाय रखने हेतु अिधिनयिमत कया गया है, ता क विभ न िनकाय, थानीय ािधकरण को समे कत कया जा सक े, नगरपािलका मामल क देखभाल क जा सक े और बेहतर शासन हेतु क करण कया जा सक े और विभ न ािधकरण क े साथ-साथ जनता ारा सामना क जा रह सम याओं को दूर कया जा सक े ।
30. धारा 2 (52) उन ' ामीण े ' को प रभा षत करती है जो दशाते है क द ली का वह े जो िनगम क थापना से ठ क पहले द ली जला बोड क थानीय सीमाओं क े भीतर आता है, उसे ामीण े माना जाएगा, ले कन इसम उसका ऐसा ह सा शािमल नह ं होगा जसे धारा 507 क े अंतगत अिधसूचना क े आधार पर शहर कृ त घो षत कया जाता है और इसे ' ामीण े ' श द क े तहत शािमल नह ं कया जाता है और धारा 2 (61) 'शहर े ' को द ली क े उन े क े प म प रभा षत करती है जो ामीण े नह ं ह।
31. इसे और सरल बनाने हेतु, एक बार जब स म ािधकार ारा धारा 507 (ए) क े अंतगत श का योग करते हुए अिधसूचना जार क जाती है, जो ामीण े क े संबंध म एक वशेष ावधान है, तो उसे ामीण े को अिधसूचना जार होने पर उसम शािमल नह ं कया जाएगा और उसक े बाद अिधसूचना क े संदभ म शहर े म शािमल कया जाएगा और इसका ह सा बनेगा। धारा 507 का उपखंड (बी) और (सी) अिधिनयम, 1957 क े सीमा और दायरे म आने वाले ऐसे े हेतु छ ू ट देने या कर लगाने क कृ ित से संबंिधत है।
32. साथ ह, धारा 502, जस पर अपीलािथय क े व ान अिधव ा ने अिधक जोर दया है, क े वल यह बताती है क इस अिधिनयम (अिधिनयम 1957) का यह अथ नह ं लगाया जाएगा क वह उस समय लागू कसी भी कानून क अवहेलना करता है और इस कारण से अिधिनयम, 1954 क े सीमा और दायरे क कसी भी तरह से अिधिनयम, 1957 क े ावधान ारा अवहेलना नह ं क जानी चा हए।
33. इस तर पर, य द हम द ली वकास अिधिनयम, 1957 (इसक े बाद इसे "ड. ड. ए. अिधिनयम" क े प म संदिभत कया जा रहा है) पर गौर कर, तो यह कह ं भी भूिम क कृ ित म अंतर नह ं करता है, चाहे वह ामीण हो या शहर, जैसा भी मामला हो। ड. ड. ए. अिधिनयम, 1957 को वीकृ त योजना क े अनुसार और उसक े अधीन थ मामल हेतु द ली क े वकास क े उ े य से अिधिनयिमत कया गया है। य द हम ड. ड. ए. अिधिनयम क धारा 2 (ई) क े अंतगत प रभा षत ' वकास' श द पर वचार करते ह, तो यह प प से सूिचत करता है क जस े को आिधका रक राजप म कािशत होने क े बाद धारा 12 क े अंतगत वकास े घो षत कया गया है, उसे अिधिनयम क े दायरे म एक वकास े माना जाएगा और यह भूिम क े िनपटान क े उ े य हेतु अपने आप म एक पूण सं हता है । धारा 2 (1) म 'भूिम' श द भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क े संदभ म है।
34. अिधिनयम, 1957 क सुसंगत धाराओं को िन निल खत म पुनः तुत कया गया है;- "2 (ङ)" " वकास े " का अिभ ाय उन े से है जो धारा 12 क उपधारा (1) क े अंतगत वकास े घो षत कसी भी े क े अंतगत आते है;" 2 (1) "भूिम" पद का अथ वह होगा जो भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 3 म दया गया है।
12. वकास े क घोषणा और उन े और अ य े म भूिम का वकास- (1) इस अिधिनयम क े ारंभ क े तुरंत बाद, क य सरकार, आिधका रक राजप म अिधसूचना ारा, इस अिधिनयम क े योजन हेतु द ली क े कसी भी े को वकास े घो षत कर सकती हैः बशत क ऐसी कोई घोषणा तब तक नह ं क जाएगी जब तक क ऐसी घोषणा का ताव क य सरकार ारा ािधकरण और द ली नगर िनगम को संदिभत ाि क तार ख से तीस दन क े भीतर या उसक े भीतर अपना मत तुत करने हेतु नह ं भेजा गया हो जैसे क क य सरकार ने अनुमित द है और इस तरह से िन द या अनुमित क अविध समा हो गई है। (2) इस अिधिनयम म यथा उपबंिधत क े अित र, ािधकरण कसी भी े म भूिम का कोई वकास नह ं करेगा या उ ह समा कर देगा जो वकास े नह ं है। (3) इस अिधिनयम क े ारंभ क े बाद कसी भी य या िनकाय (सरकार क े वभाग स हत) ारा कसी भी े म भूिम का कोई वकास नह ं कया जाएगा, जब तक क – () जहां उस े क े वकास े है, इस अिधिनयम क े ावधान क े अनुसार ािधकरण से इस तरह क े वकास हेतु िल खत अनुमित ा क गई है; () वह े जहां वकास े क े अित र कोई अ य े है, वहां वकास हेतु अनुमोदन या वीकृ ित संबंिधत थानीय ािधकरण या इस संबंध म सश या ािधकृ त कसी अिधकार या ािधकरण से िल खत प म ा क गई है, जो ऐसे ािधकरण को िनयं त करने वाली कानून ारा या उसक े तहत बनाए गए ावधान क े अनुसार या द ली (भवन संचालन िनयं ण) अिधिनयम, 1955 (1955 का 53) क े अंतगत कये गए वकास क े िलए अनुमित देने से संबंिधत ावधान क े अनुसार और उसक े अिधिनयम क े ारंभ होने से ठ क पहले लागू जब तक ऐसे ावधान बनाये जाते है। बशत क संबंिधत थानीय ािधकरण [धारा 53क क े ावधान क े अधीन रहते हुए] ऐसे े म अपने आवेदन म उन विनयम का संशोधन कर सकता है। (4) कसी भी े म कसी भी योजना क े संचालन म आने क े बाद उस े म कोई वकास नह ं कया जाएगा या समा कर दया जाएगा जब तक ऐसे वकास भी ऐसी योजनाओं क े अनुसार न हो। (5) उपधारा (3) और (4) म क ु छ भी िन हत होने क े बावजूद, इस अिधिनयम क े ारंभ से पहले सरकार क े कसी भी वभाग या कसी थानीय ािधकरण ारा शु क गई कसी भी भूिम का वकास उस वभाग या थानीय ािधकरण ारा उन उप-धाराओं क आव यकताओं का पालन कए बना पूरा कया जा सकता है।"
35. जहां तक ड. ड. ए. अिधिनयम का संबंध है, यह क े वल अिधिनयम क धारा 7 क े अंतगत अिधसूिचत वीकृ त मा टर लान और े ीय वकास योजना क े अनुसार द ली क े वकास क े उ े य हेतु है और इसक े अधीन थ मामल चाहे वह ामीण े हो या शहर कृ त जो अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम 1957 क े ावधान म शािमल विभ न उ े य हेतु हो।
36. अिधिनयम, 1954 और अिधिनयम 1957 क े ावधान म सामंज य था पत हो जाने क े बाद, हमारा वचार है क एक बार अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े अंतगत श का योग करते हुए अिधसूचना कािशत हो जाने क े बाद, अिधिनयम, 1954 क े ावधान लागू नह ं होते ह। उसक अगली कड़ म, े अंतगत लं बत कायवा हयां अवैध हो जाती ह और अपना कानूनी मह व खो देती ह।
37. हम ीमती इंदु खुराना (पूव) मामले म उ च यायालय क ख ड पीठ ारा य कए गए वचार को मंजूर देते ह जसका बाद म उ च यायालय क ख ड पीठ ारा दनांक 22 नवंबर, 2012 को दए गए फ ै सले म पालन कया गया था।
38. जहां तक ओम काश अ वाल और अ य (पूव) मामले म इस यायालय क े फ ै सले का संबंध है, जस पर अपीलकताओं क े व ान अिधव ा ने िनभरता रखी है, पहली बार म, सुसंगत कानून क े तहत ऐसी कोई अिधसूचना नह ं थी, जसम अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े तहत त काल मामले म कािशत भूिम को शहर कृ त घो षत कया गया था और व ान अिधव ा ारा उठाई गई असहमित ओ डशा भूिम सुधार अिधिनयम, 1960 क े सीमा और दायरे क े संदभ म थी और सवाल यह था क या सुधार अिधिनयम का उस भूिम से कोई संबंध है जो ओ डशा भूिम सुधार अिधिनयम, 1960 क े ावधान क े अंतगत शहर क े मा टर लान का एक ह सा है। उस संदभ म, इस यायालय ारा यह ट पणी क गई थी क सुधार अिधिनयम क े ावधान कृ ष या अ य उ े य क े संबंध म कस हद तक लागू ह गे। यह यायालय बहुत सचेत था क ओ डशा भूिम सुधार अिधिनयम, 1960 क धारा 73(सी) क सीमा और दायरे म शहर करण हेतु आर त मामले म कोई अिधसूचना कािशत नह ं क गई थी, जो हमारे वचार म, अपीलािथय क े िलए कोई सहायता नह ं हो सकती है।
39. जहां तक द ली उ च यायालय क ख ड पीठ क े पहले फ ै सले क े संदभ म क गई तुित का संबंध है, जसे उमेद िसंह (पूव) क े मामले म ववा दत फ ै सले क े तहत ख ड पीठ ारा गौर नह ं कया गया है, सै ांितक प से, हम उमेद िसंह (पूव) मामले म उ च यायालय ारा य कए गए वचार से सहमत नह ं ह, साथ ह, हम यह यान देना चाहगे क यह मामला 8 िसतंबर, 1993 को जार समेकन अिधसूचना क े संदभ म था और समेकन और वखंडन रोकथाम अिधिनयम, 1948 का भाव या होगा, उस संदभ म, उ च यायालय ने े सीमा और दायरे क जांच क ।
40. िन कष िनकालने से पहले, हम यह देखना चाहगे क ितवाद ओं ने 4 मई, 1989 को एक पंजीकृ त ब वलेख ारा मामन िसंह ( अिभिल खत भूिमधर ) से ववा दत भूिम खर द थी और उसी समय 31 मई 1989 को दा खल ख़ा रज भी उनक े नाम पर खोल दया गया, बाद म, उ ह ववाद त ववा दत संप पर क जा करने क े िलए वष 1990 म एक द वानी मुकदमा दायर करने क े िलए मजबूर होना पड़ा।
41. रकॉड से यह पता चलता है क क ु छ दौर क मुकदमेबाजी क े बाद, व ीय आयु ने 10 फरवर, 1995 क े आदेश ारा दा खल ख़ा रज क े आदेश को दर कनार कर दया, बाद म यह मामला द ली उ च यायालय क ख ड पीठ क े पास गया और 22 नवंबर, 2012 क े िनणय ारा यह अिभिनधा रत कया गया क एक बार जब ामीण े अिधिनयम, 1957 क धारा 507 (ए) क े तहत अिधसूचना जार करक े शहर कृ त हो जाता है, तो यह अिधिनयम, 1954 क े ावधान ारा शािसत नह ं होता है।
42. जस बात ने इस यायालय को आ त कया वह यह है क 22 नवंबर, 2012 क े उ च यायालय क ख ड पीठ क े फ ै सले को बरकरार रखने क े बाद भी, यह ितवाद को ववा दत संप पर क जा करने हेतु आगे बढ़ने क े िलए एक नया जीवन देता है, इस त य क े बावजूद क 4 मई, 1989 क े पंजीकृ त ब वलेख को मामन िसंह (भूिमधर) ारा उनक े प म िन पा दत कया गया था, ले कन वे अभी भी क जे से वंिचत ह और ितवाद म अपीलािथय का ितप यह है क ितक ू ल क जे क े मा यम से ववा दत भूिम उनक े क जे म ह। साथ ह, यह यायालय यह भी दज कर सकता है क मामन िसंह (भूिमधर) ारा ितवाद ओं क े प म िन पा दत कया गया 4 मई, 1989 को पंजीकृ त ब वलेख कभी भी चुनौती का वषय नह ं था और अदालत म ऐसी कोई कायवाह लं बत नह ं है।
43. इस समय, यह हम याद दलाता है क पछले 32 वष से लं बत ववा दत भूिम पर क जा करने क े िलए ितवाद क े कहने पर दायर द वानी मुकदमे ने अभी तक अपनी या ा शु नह ं क है और इसे ऐसे य क े िलए मुकदमा म अ याय का मज़ाक कहा जाता है जो वािम व धारक होकर भी िन ववाद प से अभी भी संप का आनंद लेने म असमथ है।
44. दए गए त य और प र थितय म, सं वधान क े अनु छेद 142 क े अंतगत हमार श का योग और प क े साथ पूण याय करते हुए, हम अपीलकता को िनदश देते ह क वे इस आदेश क े पा रत होने क तार ख से दो मह ने क अविध क े भीतर ह ववा दत भूिम को सभी बाधाओं से मु करक े इसका भौितक क जा ितवाद को स प द। य द अपीलकता िनधा रत समय क े भीतर क जा स पने म वफल रहते ह, तो ितवाद को संबंिधत े ीय याियक दंडािधकार को आवेदन करने का अिधकार होगा और थानीय शासन क सहायता से आव यक आदेश ा करने क े बाद वे ववा दत भूिम पर क जा करने हेतु आगे करवाई कर सकते ह। 4 मई, 1989 को पंजीकृ त ब वलेख क े संदभ म, जसे मामन िसंह (भूिमधर) ारा संबंिधत ितवाद ओं क े नाम पर िन पा दत कया गया है को यह कहने क ज रत नह ं है क इसका क जा ितवाद ओं को स पना होगा। ।
45. उपरो शत म लं बत द वानी मुकदमा का िनपटान कया गया है।
46. हम त काल अपील म कोई सार नह ं पाते ह। उपरो ट प णय क े साथ इसे खा रज कर दया जाता है। कोई लागत नह ं।
47. लं बत आवेदन, य द कोई हो, का िनपटान कया जाएगा।.................. या., (अजय र तोगी).................... या., (सी.ट. र वक ु मार)................... या., (बेला एम. वेद ) नई द ली 14 माच, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।