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भारि क
े सवोच्च न्यायालय में
दीवानी अपील अपीलीय क्षेत्राधिकार
दीवानी अपील अपील संख्या 5071 / /2022
इंदौर ववकास प्राधिकरण ... अपीलकिाा
बनाम
बुरहानी गृह तनमााण सहकारी संस्था मयााददि
स्नेह नगर और अन्य ... प्रतिवादी
क
े साथ
दीवानी अपील सं. 5099/2022
दीवानी अपील सं 5074/2022
दीवानी अपील सं 5075/2022
दीवानी अपील सं 5076/2022
दीवानी अपील सं 5078/2022
दीवानी अपील सं 5079/2022
दीवानी अपील सं 5081/2022
दीवानी अपील सं 5080/2022
दीवानी अपील सं 5082/2022
दीवानी अपील सं 5084/2022
दीवानी अपील सं 5085/2022
दीवानी अपील सं 5087/2022
दीवानी अपील सं 5088/2022
दीवानी अपील सं 5090/2022
दीवानी अपील सं 5091/2022
दीवानी अपील सं 5093/2022
दीवानी अपील सं 5092/2022
दीवानी अपील सं 5094/2022
दीवानी अपील सं 5095/2022
दीवानी अपील सं 5096/2022
दीवानी अपील सं 5097/2022
दीवानी अपील सं 5098/2022
दीवानी अपील सं 5101/2022
दीवानी अपील सं 5103/2022
दीवानी अपील सं 5104/2022
दीवानी अपील सं 5105/2022
दीवानी अपील सं 5106/2022
दीवानी अपील सं 5077/2022
दीवानी अपील सं 5083/2022
दीवानी अपील सं 5086/2022
दीवानी अपील सं 5089/2022
दीवानी अपील सं 5100/2022
दीवानी अपील सं 5102/2022
निर्णय
एम. आर. शाह, जे.
JUDGMENT
1. ववलम्ब क्षमा ककया गया ।प्रतिस्थापन की अनुमति है। उपशमन को रद्द ककया जािा है वाद शीर्ा में िदनुसार संशोिन जाए । 1A. 2008 की ररट अपील संख्या 873 एवं अन्य सम्बद्ि ररट अपीलों में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पाररि आक्षेवपि सामान्य तनणाय एवं आदेश ददनांक 28.08.2014 से व्यधथि एवं असंिुष्ट महसूस करिे हुए, जजसक े द्वारा उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने खाररज कर ददया है उक्ि अपीलों में ववद्वान एकल न्यायािीश द्वारा पाररि सामान्य तनणाय और आदेश ददनांक 10.12.1998 की पुजष्ट करिे हुए, ववद्वान एकल न्यायािीश ने मध्य प्रदेश नगर िथा ग्राम तनवेश अधितनयम, 1973 की िारा 50 क े िहि योजना संख्या 97 को अंतिम रूप देने क े खखलाफ संबंधिि ररटो और मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम ननवेश अनिननयम, 1973 की िारा 50 क े तहत योजना संख्या 97 को अंनतम रूप देने क े खिलाफ (इसक े बाद 'अनिननयाम' क े रूप में संदनभित) और बाद में मध्य प्रदेश राज्य द्वारा की गई िारा 4 और 6 क े तहत भूनम अनिग्रहण की कायिवाही भूनम अनिग्रहण अनिननयम, 1894 (इसक े बाद 'अनिननयम, 1894' क े रूप में संदनभित), को मंजूरी दी है । इंदौर ववकास प्राधिकरण ने विामान अपीलों को vf/kekU;rk दी है।
2. संक्षेप में विामान अपीलों से जुडे िथ्य इस प्रकार हैं:- इंदौर ववकास प्राधिकरण (इसक े बाद 'आईडीए' क े रूप में संदर्भाि) ने 13.03.1981 को अधितनयम की िारा 50 (1) क े िहि एक izLrko पाररि ककया, जजसमें योजना संख्या 97 - अन्य संबंधिि भूर्म उपयोगों क े र्लए एक आवासीय योजना बनाने क े अपने इरादे की घोर्णा की।सुवविा क े र्लए, योजना संख्या 97 को चार भागों में ववभाजजि ककया गया था, अथााि् भाग I, II, III और IV । उक्ि योजना क े इरादे की घोर्णा 10.07.1981 को सावाजतनक सूचना क े रूप में आगे प्रकार्शि की गई थी। राज्य सरकार ने अपने आदेश ददनांक 24.12.1983 द्वारा समस्ि कलेक्टरों एवं संभागीय आयुक्िों को क्रमशः राजस्व ववभाग, मध्यप्रदेश शासन क े पदेन उप सधचव एवं उक्ि सरकार क े पदेन सधचव क े रूप में अनिननयम, 1894 की िारा 4,5,[6] और 17 क े तहत मामले क े ननपटान क े नलए काया करने का अधिकार ददया । ववर्भन्न औपचाररकिाओं को पूरा करने क े बाद, आईडीए ने अधितनयम की िारा 50(7) क े िहि आवश्यकिानुसार 08.06.1984 को योजना संख्या 97 प्रकार्शि की और योजना को उक्ि तिधथ को राजपत्र में भी प्रकार्शि ककया गया था। 2.[1] आईडीए क े अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य ने भारि क े संवविान क े अनुच्छेद 166 (2) और (3) क े िहि प्रदत्त शजक्ियों का प्रयोग करिे हुए और मध्य प्रदेश सरकार क े राज्यपाल, द्वारा बनाए गए व्यवसाय क े तनयमों क े अनुसार राज्यपाल ने अपनी शजक्ियों का प्रत्यायोजन जजला जजलािीश को मध्य प्रदेश सरकार क े राजस्व ववभाग क े अवर सधचव क े रूप में काया करने क े र्लए ककया । राज्य सरकार ने अपने आदेश ददनांक 6.03.1987 द्वारा उप जजलािीश को अपने-अपने क्षेत्रों में भूर्म अधिग्रहण क े र्लए जजलािीश क े कायों का तनवाहन करने की शजक्ि प्रदान की। आईडीए क े अनुसार, अधितनयम की िारा 56 क े अनुसार, आईडीए ने योजना संख्या 97 क े र्लए भूस्वार्मयों से उनकी भूर्म की खरीद क े र्लए आपसी बािचीि शुरू की। चूंकक आपसी वािाा ववफल रही, इसर्लए आईडीए ने अपने पत्र ददनांक 4.06.1987 द्वारा जजलािीश को भूर्म े र्लए भेजा गया । 2.[2] योजना संख्या 97 क े र्लए भूर्म क े संबंि में अधितनयम, 1894 की िारा 4 क े िहि अधिसूचना आधिकाररक राजपत्र में प्रकार्शि की गई थी और अधिसूचना 14.08.1987 को दो दैतनक दहंदी समाचार पत्रों में भी प्रकार्शि की गई थी।इसक े अलावा, प्रकाशन अलग-अलग तिधथयों पर और अंतिम रूप से 09.10.1987 को धचपकाया गया था। 2.[3] उप जजलािीश एवं भू-अजान अधिकारी ने अधितनयम, 1894 की िारा 5ए क े अन्िगाि अपनी ररपोटा जजलािीश क े समक्ष अनुमोदनाथा प्रस्िुि की िथा अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े अन्िगाि अधिसूचना भी जजलािीश क े हस्िाक्षर हेिु प्रस्िुि की। इसे जजलािीश द्वारा ववधिवि अनुमोददि ककया गया था। 2.[4] उप जजलािीश ने अधितनयम, 1894 की िारा 5ए क े िहि गांव िेजपुर गडबडी और गांव वपपर्लयाराव क े संबंि में भी अपनी ररपोटा दाखिल की और अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि अधिसूचना जारी करने क े र्लए जजलािीश का अनुमोदन आदेश भी दाखिल ककया। अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि घोर्णा शासकीय राजपत्र में 7.10.1988 को प्रकार्शि हुई थी और उक्ि घोर्णा को दैतनक समाचार पत्रों में भी अलग-अलग िारीखों में और अंि में 16.12.1988 को प्रकार्शि ककया गया था। ित्पश्चाि् जजलािीश ने अधितनयम, 1894 की िारा 5ए क े अन्िगाि आपवत्तयों को अस्वीकार करने एवं अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े अन्िगाि अधिसूचना जारी करने की स्वीकृ ति प्रदान करने की संस्िुति क े साथ अपना प्रतिवेदन आयुक्ि को प्रस्िुि ककया, जजसे आयुक्ि ने अपने पत्र ददनांक 6.12.1988 द्वारा अनुमोददि कर ददया। 2.[5] अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि घोर्णा क े प्रकाशन क े बाद और जजलािीश क े समक्ष भूर्म अधिग्रहण की कायावाही क े लंबबि रहने क े दौरान, क ु छ भूस्वार्मयों, जजनकी भूर्म योजना संख्या 97 क े र्लए अधिग्रदहि की गई थी, ने उच्च न्यायालय क े समक्ष ररट दायर की और अपनी भूर्म क े बेदखली क े खखलाफ अंिररम आदेश प्राप्ि ककया।अवाडा की घोर्णा क े बाद क ु छ ररट एं दायर की गईं। जिलाधीश इन्दौर ने ददनाांक 6.03.1991 को अधधग्रदित भूमि क े सांबांध िें अवाडा ददया कक मूल ररट किााओं ने अधितनयम, 1894 की िारा 4 और 6 क े िहि अधिसूचनाओं को चुनौिी देिे हुए उच्च न्यायालय क े ववद्वान एकल न्यायािीश क े समक्ष एक ववववि दायर की और प्राथाना की कक संपूणा अधिग्रहण कायावाही को रद्द कर ददया जाए। मूल ररट किााओं ने यह भी प्राथाना की कक आईडीए द्वारा िैयार की गई योजना संख्या 97 को रद्द कर ददया जाए और उनकी भूर्म को हटाकर उससे मुक्ि करने का आदेश ददया जाए। यह कक वर्ा 1997 में योजना क्रमांक 97 से क ु छ भूर्म मुक्ि की गई थी। आईडीए ने ररट ओं क े लंनबत रहने क े दौरान औनित्य बताते हुए योजना संख्या 97 से भूनम जारी करने क े संबंि में एक स्पष्टीकरण दायर नकया ।उपयुाक्ि ररलीज को चुनौिी देने वाली योजना संख्या 97 को तनम्नर्लखखि आिारों पर जारी करने की मांग की गईः (i) अधितनयम की िारा 50(7) क े िहि अपीलकिाा द्वारा बनाई गई योजना को िीन साल क े भीिर लागू नहीं ककया गया था और इसर्लए अधितनयम की िारा 54 क े आिार पर यह व्यपगि हो गई। (ii) िारा 6 क े िहि जारी की गई अधिसूचना ववधि क े अनुसार नहीं थी क्योंकक िारा 5-ए क े िहि आमंबत्रि आपवत्तयों का तनणाय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं ककया गया था। शत्रुिापूणा भेदभाव की एक दलील भी थी क्योंकक भूर्म क े नवनभन्न नहस्ों को अंिािुंि िरीक े से अधिग्रहण से मुक्ि कर ददया गया था। 2.[6] ववद्वान एकल न्यायािीश ने एक समान तनणाय और आदेश ददनांक 10.12.1998 द्वारा संबंधिि ररटो को अनुमति दी और आईडीए द्वारा बनाई गई योजना क े साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई भूर्म अधिग्रहण की कायावाही को मुख्य रूप से िीन आिारों पर रद्द कर ददया, अथााि्: - (i) एल.ए. अधितनयम की िारा 5-ए क े िहि आमंबत्रि आपवत्तयों को सक्षम प्राधिकारी, यानी राज्य सरकार द्वारा िय नहीं ककया गया था। (ii) अपीलकिाा और मध्य प्रदेश राज्य द्वारा उत्तरदािाओं क े खखलाफ शत्रुिापूणा भेदभाव ककया गया था क्योंकक कई अन्य व्यजक्ियों और उसी योजना का दहस्सा बनने वाली सर्मतियों क े स्वार्मत्व वाली भूर्म क े ववर्भन्न नहस्ों को अपीलकिाा द्वारा जमानत क े रूप में उत्तरदािाओं क े भारि क े अनुच्छेद 14 क े िहि मौर्लक अधिकारों का उल्लंघन करिे हुए जारी ककया गया था। (iii) अधितनयम की िारा 54 को ध्यान में रखिे हुए, योजना समाप्ि हो गई क्योंकक अधितनयम की िारा 54 क े िहि इसक े प्रकाशन की िारीख से िीन साल क े भीिर इसे लागू नहीं ककया गया था। 2.[7] ववद्वान एकल न्यायािीश द्वारा पाररि समान तनणाय और आदेश से व्यधथि और असंिुष्ट महसूस करिे हुए, संपूणा अधिग्रहण की कायावाही को रद्द करने और अपास्ि करने क े साथ-साथ योजना संख्या 97 को इस आिार पर रद्द करने और अपास्ि करने क े र्लए अधितनयम की िारा 54 क े मद्देनजर व्यपगि हो गई थी,आईडीए ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ क े समक्ष ररट अपीलों को प्राथर्मकिा दी। आक्षेवपि उभयतनष्ठ तनणाय एवं आदेश में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उक्ि अपीलों को खाररज कर ददया है, जजससे विामान अपीलें उत्पन्न हुई हैं।
3. श्री बलबीर र्संह, भारि क े ववद्वान अतिररक्ि सॉर्लर्सटर जनरल, श्री संजय कपूर, ववद्वान अधिवक्िा की सहायिा से, आईडीए की ओर से उपजस्थि होकर, जोरदार ढंग से प्रस्िुि ककया है कक मामले क े िथ्यों और पररजस्थतियों में, ववद्वान एकल न्यायािीश क े साथ-साथ डडवीजन बेंच उच्च न्यायालय ने अधितनयम क े िहि बनाई गई पूरी अधिग्रहण कायावाही क े साथ-साथ योजना संख्या 97 को रद्द करने और अपास्ि करने में वास्िववक रूप से त्रुदट की है। 3.[1] ववद्वान अतिररक्ि सॉर्लर्सटर जनरल द्वारा यह भी प्रस्िुि ककया गया है कक ववद्वान एकल न्यायािीश ने योजना संख्या 97 को अवैि और अमान्य घोवर्ि करने वाली ररट ओं को अनुमति दी और अधितनयम, 1894 क े िहि मुख्य रूप से िीन आिारों पर अधिग्रहण की पूरी कायावाही को रद्द कर ददया: - (i) यह कक राज्य सरकार द्वारा अधितनयम, 1894 की िारा 5-ए क े संबंि में जजलािीश को शजक्ियों का कोई प्रत्यायोजन नहीं था; (ii) यह कक आईडीए अधितनयम की िारा 54 क े िहि पररकजल्पि अंतिम प्रकाशन की िारीख से िीन साल की अवधि क े भीिर योजना को लागू करने क े र्लए पयााप्ि कदम उठाने में ववफल रहा; और यह कक राज्य सरकार द्वारा अधितनयम, 1894 की िारा 5-ए क े संबंि में जजलािीश को शजक्ियों का कोई प्रत्यायोजन नहीं था; (iii) प्राधिकरण द्वारा अधिग्रदहि की जाने वाली क ु ल भूर्म में से जमीन का वह बडा और ववशाल दहस्सा मुक्ि कर ददया गया है। 3.[2] जहााँ तक नवद्वान एकल न्यायािीश द्वारा दजि नकए गए ननष्कर्ि क े अनुसार, जैसा नक िंडपीठ द्वारा पुनष्ट की गई है, नक अनिननयम, 1894 क े िंड 5-ए क े संबंि में नजलािीश को शखियों का कोई प्रनतनननिमंडल नहीं था, अनतररि सॉनलनसटर जनरल ने प्रस्तुत नकया है अंतगित: (i) यह कक अधितनयम, 1894 की िारा 5-ए में उपयुक्ि प्राधिकारी द्वारा भूस्वार्मयों से आपवत्तयों को आमंबत्रि करने और उनकी सुनवाई करने और कफर उसकी ररपोटा िैयार करने का प्राविान है। यह प्रस्तुत नकया जाता है नक जहााँ िक उपयुक्ि सरकार द्वारा ररपोटा पर तनणाय का संबंि है, यह अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि र्लया जािा है।िारा 5-ए क े वल यह घोर्णा करिी है कक ररपोटा पर उपयुक्ि सरकार का तनणाय अंतिम होगा।इस प्रकार, िारा 5-ए को शजक्ि क े ककसी और प्रत्यायोजन की आवश्यकिा नहीं है। ररपोटा पर तनणाय अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि र्लया जाना आवश्यक है। (ii) इसक े अलावा, यह प्रस्िुि ककया गया है कक राज्य सरकार ने अपने पत्र ददनांक 22.03.1985 क े िहि राजस्व ववभाग क े उप सधचव क े रूप में काया जजला जजलािीश को और राजस्व ववभाग क े सधचव क े रूप में अधितनयम, 1894 की िारा 4, 5, 6 और 17 क े िहि दी गई शजक्ियों का प्रयोग करक े भूर्म अधिग्रहण से संबंधिि मामलों का न्यायतनणायन करने क े र्लए संभाग क े आयुक्ि को अपनी शजक्ि सौंपी है। अधितनयम, 1894 की िारा 4 से 6 को पढ़ने से पिा चलिा है कक इन िाराओं क े िहि जजला जजलािीश और आयुक्ि को दी गई शजक्ियां पररणामी हैं और उन्हें अलग नहीं ककया जा सकिा क्योंकक एक िारा दूसरे की ओर ले जािी है,जो अंििः अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि घोर्णा क े पाररि होने में समाप्ि होिा है। (iii) इसक े अलावा, अधितनयम, 1894 की िारा 6 क े िहि एक घोर्णा क े वल िारा 5-ए क े िहि प्रस्िुि ररपोटा पर उधचि सरकार द्वारा ववचार ककए जाने क े बाद ही पाररि की जा सकिी है। सम्मानपूवाक यह िक ा ददया जािा है कक,भले ही ददनांक 22.03.1985 क े आदेश में ववशेर् रूप से िारा 5-ए का उल्लेख नहीं है, वही उक्ि आदेश में तनदहि है। (iv) अधितनयम की िारा 5-ए क े िहि आपवत्तयों पर जजलािीश द्वारा ववचार ककया जाना आवश्यक है। अधितनयम, 1894 की िारा 3(सी) जजलािीश को तनम्नानुसार पररभावर्ि करिी है: "3(सी) अर्भव्यजक्ि जजलािीश का मिलब एक जजले क े जजलािीश से है, और इसमें एक उपायुक्ि और उपयुक्ि सरकार द्वारा ववशेर् रूप से तनयुक्ि अधिकारी इस अधितनयम क े िहि एक जजलािीश क े कायों को करने क े र्लए शार्मल हैं। 3.[3] यह िक ा ददया गया है कक विामान मामले में, एक जजलािीश क े कायों को करने क े र्लए उपयुक्ि सरकार द्वारा ववशेर् रूप से तनयुक्ि ककए जाने क े अलावा, जजस प्राधिकरण ने आपवत्तयों पर िारा 5-ए क े िहि ववचार ककया है, वह एक जजले का जजलािीश है। जजलािीश की पररभार्ा एक समावेशी है और इसका अथा है जजले का जजलािीश और इसमें उपायुक्ि भी शार्मल हैं।इसक े अलावा राज्य सरकार ने अपने पररपत्र ददनांक 06.03.1987 द्वारा डडप्टी जजलािीश को उनक े क्षेत्रों में भूर्म े र्लए जजलािीश क े कायों का प्रयोग करने की शजक्ि प्रदान की। 3.[4] यह आगे िक ा ददया गया है कक भारि क े अनुच्छेद 166 में प्राविान है कक ककसी राज्य की सरकार की सभी कायावादहयां राज्यपाल क े नाम पर की जाएगी और राज्यपाल क े नाम पर ददए गए आदेश और अन्य दस्िावेज तनष्पाददि ककए जाएंगे। इस िरह से प्रमाखणि ककया जा सकिा है जैसा कक राज्यपाल द्वारा बनाए जाने वाले तनयमों में तनददाष्ट ककया जा सकिा है, और ननदेश पर एक आदेश की वैिता जो इस तरह से प्रमानणत है, उसे इस आिार पर प्रश्नगत नह ीं किया जाएगा नक वह राज्यपाल द्वारा बनाया या ननष्पानदत कोई आदेश या किखत नहीं है । 3.[5] यह प्रस्िुि ककया जािा है कक इसर्लए ववद्वान एकल न्यायािीश क े साथ-साथ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस आिार पर संपूणा अधिग्रहण की कायावाही को रद्द करने और अपास्ि करने में वास्िववक रूप से त्रुदट की है नक राज्य सरकार द्वारा अनिननयम, 1894 की िारा 5-ए क े संबंि में नजलािीश को शखियों का कोई प्रत्यायोजन नहींथा। यह आगे प्रस्िुि ककया गया है कक ववद्वान एकल न्यायािीश ने भी ववशेर् रूप से देखा और माना कक िकनीकी अतनयर्मििा को छोडकर,अवॉडा को अमान्य घोवर्ि नहीं ककया जा सकिा है। 3.[6] अनिननयम की िारा 54 क े अनुसार प्रकाशन की तारीि से तीन साल क े भीतर योजना को लागू करने क े नलए पयािप्त कदम उठाने में आईडीए नवफल होने क े आिार पर योजना संख्या 97 को रद्द करने और अलग करने क े संबंि में, यह ननवेदन नकया जाता है नक अनिननयम की िारा 5 प्रदान करता है नक "यनद नगर एवं देश नवकास प्रानिकरण िारा 50 क े तहत अंनतम योजना की अनिसूिना क े डीई से तीन वर्ि की अवनि क े भीतर नगर नवकास योजना क े कायािन्वयन को शुरू करने में नवफल रहता है, तो यह तीन की उि अवनि की समाखप्त पर व्यपगत हो जाएगा।" 3.[7] यह प्रस्िुि ककया जािा है कक विामान मामले में िीन साल क े भीिर पयााप्ि कदम उठाए गए थे यह कक िीन साल की समाजप्ि से पहले जब वािाा ववफल हो गई, िो राज्य सरकार ने िुरंि अधितनयम, 1894 की िारा 4 क े िहि अधिसूचना जारी कर दी। 3.[8] यह आगे प्रस्िुि ककया गया है कक विामान मामले में िारा 50(1) क े िहि एक नगर ववकास योजना िैयार करने क े इरादे की घोर्णा 13.03.1981 को जारी की गई थी; िारा 50(2) क े िहि उक्ि घोर्णा का प्रकाशन 10.07.1981 को ककया गया था; अंतिम ववकास योजना 08.06.1984 को अधितनयम की िारा 50(7) क े िहि आधिकाररक राजपत्र में प्रकार्शि हुई थी; राज्य सरकार से ददनांक 4.06.1987 को अथााि अंतिम प्रकाशन क े िीन वर्ों क े भीिर भूर्म का अधिग्रहण करने का अनुरोि ककया गया था। यह प्रस्िुि ककया जािा है कक इन िीन वर्ों क े भीिर उठाए गए पयााप्ि कदम इस प्रकार हैं: vf/kfu;e dh /kkjk 56 ds rgr~;kfpdkdrkZ izkf/kdj.k vkSj HkwfeLokfe;ksa ds chp vkilh ckrphr 23.10.1984 अन्तिम स्व ि ृ त योजना तैयार िर सींयुक्त कनदेशि नगर एवीं ग्राम आयोजना एवीं आयुक्त नगर कनगम िो आम जनता िो उपिब्ध िराने हेतु प्रेकित ि गय । 01.03.1986 प्राधिकरण क े पटवारी को राजस्व अर्भलेख प्रस्िुि करने का तनदेश ददया 24.11.1986 किाा प्राधिकरण ने जजलािीश से भूर्म अधिग्रहण का प्रस्िाव िैयार करने क े र्लए पटवारी को भेजने का अनुरोि ककया 06.09.1986 मध्य प्रदेश राज्य us सभी संबंनितों को सक ुि लर जार िर भूनम अनिग्रहण से संबंनित मामलों में जो भ आवश्यि हो उसिा पािन िरते हुए आगे बढ़ने क े नलए िहा 16.12.1986;kfpdkdrkZ izkf/kdj.k us नगर और ग्रामीण ननयोजन नवभाग ls izLrkfor iz’uxr Hkwfe vf/kxzg.k dh vukifRr izek.ki= dh ekax dh 31.01.1987 24.02.1987 Vkmu,oa dUVªh Iykfuax foHkkx dks vukifRr izek.ki= nsus ds fy;s स्मरण पत्र Hksts x;s 15.04.1987 Vkmu,oa dUVªh Iykfuax foHkkx ls vukifRr izek.ki= izkIr fd;s 04.06.1987 pwafd okrkZ foQy jgh];kfpdkdrkZ usa jkT; ljdkj ls Hkwfe vf/kxzg.k dk fuosnu fd;k 24.07.1987,y-,-,DV dh /kkjk 5 ds varxZr vf/klwpuk tkjh dh xbZ 3.[9] यह प्रस्िुि ककया जािा है कक ऊपर तनिााररि समय-सीमा क े मद्देनजर, ववद्वान एकल न्यायािीश ने अधितनयम की िारा 54 क े िहि योजना क े गैर-कायाान्वयन क े आिार पर योजना को व्यपगि घोवर्ि करने में पूरी िरह से चूक की है।यह अनुरोि ककया जािा है कक िारा 54 में आने वाले शब्द "कायाान्वयन शुरू करें" का अथा योजना क े कायाान्वयन का पूरा होना नहीं है। यह अनुरोि ककया जािा है कक िारा 54 की एकमात्र उधचि व्याख्या यह होगी कक योजना क े कायाान्वयन क े र्लए प्राधिकरण द्वारा क ु छ कदम उठाए जाने चादहए और योजना को लागू करने का इरादा होना चादहए। अपने उपरोक्ि कथन क े समथान में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय क े संजय ग ंधी गृह निर् णर् सहक री संस्थ र्य णदित बि र् र्.प्र. र ज्य और अन्य, एआईआर 1991 एर्पी 72 ds तनणाय पर नवश्वास व्यि ककया जािा है । यह तनवेदन ककया जािा है कक उक्ि तनणाय क े ववरुद्ि एक ववशेर् अनुमति इस न्यायालय द्वारा खाररज कर दी गई है। यह प्रस्िुि ककया जािा है कक उपरोक्ि तनणाय में, यह तनम्नानुसार वखणाि ककया गया था: "िारा 54 लागू नहीं होिी है जब योजना को लागू करने क े र्लए िीन साल क े भीिर पयााप्ि कदम उठाए गए हैं। न्यायालय ने अधितनयम की िारा 56, 57 और 58 पर भी ववचार ककया था और यह ववचार ककया था कक 'लागू करने में ववफल' शब्द का अथा योजना क े र्लए कोई ठोस कदम उठाने में ववफलिा और यदद ऐसा कोई कदम िीन साल क े भीिर नहीं उठाया जािा है िो योजना समाप्ि हो जाएगी..." यह प्रस्िुि ककया जािा है कक इसर्लए ववद्वान एकल न्यायािीश क े साथ-साथ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अधितनयम की िारा 54 क े िहि योजना क े गैर-कायाान्वयन क े आिार पर योजना को व्यपगि घोवर्ि करने में िाजत्वक रूप से त्रुदट की है।
3.10 उपरोक्ि पक्षपाि क े बबना, यह आगे प्रस्िुि ककया गया है कक अधितनयम की िारा 54 अपनी शिों में स्पष्ट है कक यदद ववकास प्राधिकरण अधिसूचना क े अनुसारयोजना क े कायाान्वयन को िीन साल की अवधि क े भीिर शुरू करने में ववफल रहा (जजसका अथा है कक पयााप्ि कदम उठाना), िो योजना समाप्ि हो जाएगी लेककन अधिग्रहण नहीं होगा। यह माना जािा है कक एक बार भूर्म अधिग्रदहि कर लेने क े बाद यह सरकार में तनदहि हो जािी है और एक बार सरकार में तनदहि हो जाने क े बाद इसे वापस स्थानांिररि नहीं ककया जा सकिा है और यह सरकार की संपवत्त बन जािी है।
3. 11 विद्िान एकल न्यायाधीश द्िारा शत्रुतापूर्ण भेदभाि और पूरे को रद्द करने और अलग करने पर दिण ककए गए ननष्कर्ण क े सांबांध िें अधधग्रिर् की कायणिािी इस आधार पर कक क ु ल भूमि िें से भूमि का एक बडा और बडा दिस्सा िारी कर ददया गया िै और इसमलए शेर् भूमि क े सांबांध िें अधधग्रिर् िारी रखना भेदभािपूर्ण और भारत क े सांविधान क े अनुच्छेद 14 का उल्लांघन िै, यि प्रस्तुत ककया िाता िै कक विद्िान एकल न्यायाधीश क े साथ-साथ खांडपीठ ने उन आधारों की उधित रूप से सरािना निीां की िै जिन पर भूमि िारी की गई थी। कक विद्िान एकल न्यायाधीश क े साथ-साथ खांडपीठ ने इस तथ्य की उधित रूप से सरािना निीां करने िें भौनतक रूप से गलती की िै कक भूमि की ररिाई आिश्यकता पर ननभणर करेगी। यि प्रस्तुत ककया िाता िै कक यि स्थावपत कानून िै कक ििाां आिासीय, िाणर्जययक, या औद्योधगक क्षेत्र की स्थापना क े मलए भूमि का अधधग्रिर् ककया िाता िै और भूमि की ररिाई क े मलए आिेदन से पता िलता िै कक भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य क े मलए ककया गया िै, तो सरकार भूमि को िारी कर सकती िै।, यदद इसका अजस्तत्ि ककसी भी तरि से अधधग्रिर् की अधधसूिना क े अनुसार विकास िें बाधा निीां बनता िै। रािस्थान रायय औद्योधगक विकास और ननिेश ननगि बनाि सुभार् मसांधी कोऑपरेदिि िाउमसांग सोसाइिी, ियपुर, (2013) 5 SCC 427; भारत सांघ बनाि बल राि मसांि, 1992 सिथणन (2) एससीसी 136; सूबे मसांि बनाि िररयार्ा रायय, (2001) 7 एससीसी 545; िगदीश िांद बनाि िररयार्ा रायय, (2005) 10 एससीसी 162; और धिण पाल बनाि िररयार्ा रायय, (2009) 2 एससीसी 397.
3.12 इसक े बाद यह िक ा ददया गया कक विामान मामले में, आवासीय, पाक ा और औद्योधगक उद्देश्यों क े र्लए भूर्म का अधिग्रहण ककया गया था।इस िरह भूर्म को मुक्ि कर ने से योजना की अखंडिा पर कोई प्रतिक ू ल प्रभाव नहीं पडा है। क ु छ भूर्म मुक्ि करने का अंतिम पररणाम यह हुआ कक योजना का क ु ल क्षेत्र उस क्षेत्र िक कम हो गया है लेककन योजना की अखंडिा समान बनी हुई है।
3.13 यह प्रस्िुि ककया जािा है कक विामान मामले में आईडीए ने योजना संख्या 97 से जारी भूर्म क े संबंि में कारण देिे हुए एक स्पष्टीकरण दायर ककया। हालांकक ववद्वान एकल न्यायािीश उन कारणों की सराहना करने में ववफल रहे।
3.14 यह भी अनुरोि ककया गया है कक अधिग्रदहि की जाने वाली प्रस्िाववि क ु छ भूर्म को मुक्ि करने क े तनम्नर्लखखि कारण थे: a. आवास को-ऑपरेदटव सर्मतियों पक्ष में 111.156 हेक्टेयर भूर्म मुक्ि गई-जैसा कक ऊपर कहा गया है कक इस मुक्ि करने से योजना क े कायाान्वयन पर कोई प्रभाव नहीं पडेगा क्योंकक, उक्ि आवास सर्मतियों और योजना का उद्देश्य एक ही था । आगे यह इंधगि जा सकिा है कक प्राधिकरण / राज्य सरकार ने क े वल उन्हीं सोसायदटयों की भूर्म आवंदटि की थी जजन्होंने या िो कॉलोनी ववकर्सि की थी या कॉलोनी का ववकास शुरू ककया था या भूर्म का टाइटल प्राप्ि ककया था या अंतिम योजना क े प्रकाशन से पहले शहरी भूर्म (सीर्लंग और ववतनयमन) अधितनयम, 1976 की िारा 20 क े िहि छ ू ट प्राप्ि की थी अधितनयम की िारा 50 (7) क े िहि यह प्रस्िुि जा सकिा है कक प्रतिवादी ने इनमें से ककसी भी शिा को पूरा नहीं ककया है, इसर्लए यह नहीं कहा जा सकिा है कक वे इसी िरह अन्य आवास सर्मतियों क े साथ जस्थि हैं. आर-1/बुरहानी नगर सोसाइटी क े मामले में, माना जािा है कक शहरी भूर्म (सीर्लंग और ववतनयमन) अधितनयम, 1976 की िारा 20 क े िहि बुरहानी नगर को 30.09.1988 को छ ू ट प्रदान की गई थी, यानी, अधितनयम की िारा 50 (7) क े िहि योजना की अंतिम घोर्णा क े काफी बाद और अधितनयम की िारा 4 क े िहि अधिसूचना क े बाद भी यह भी उल्लेख करना उधचि है कक उक्ि बुरहानी नगर सोसाइटी ने ददनांक 03.10.1988 को अथााि अधितनयम की िारा 4 क े िहि अधिसूचना क े बाद पंजीकृ ि बबक्री ववलेख द्वारा भूर्म खरीदी थी। b. 104.[5] 24 हेक्टेयर भूर्म योजना से मुक्ि की गई - जैसा कक ऊपर कहा गया है, उक्ि भूर्म का भूर्म उपयोग या िो कृ वर् या क्षेत्रीय पाक ा क े र्लए था। c. 46.116 हेक्टेयर क्षेत्र की भूर्म का ववमोचन - उपरोक्ि भूर्म को भू-अजान अधिकारी द्वारा अधितनयम की िारा 5-ए क े िहि आपवत्तयों पर ववचार करिे हुए क ु छ कारणों जैसे मौजूदा घरों, िार्माक स्थानों, ववर्भन्न भूर्म उपयोग आदद क े कारण जारी ककया गया था।,
3.15 श्री बलबीर र्संह, ववद्वान एएसजी द्वारा यह आगे प्रस्िुि ककया गया है कक विामान मामले में क ु छ भूर्मयो का अधिग्रहण ककया गया है और वास्िव में पाक ा क े र्लए उपयोग ककया गया है।
3.16 उपरोक्ि तनवेदन करिे हुए, यह प्राथाना की जािी है कक विामान अपीलों की अनुमति दी जाए और खंडपीठ द्वारा पाररि समान तनणाय और आदेश को ररट अपीलों को खाररज कर ददया जाए और ववद्वान एकल न्यायािीश द्वारा पाररि सामान्य तनणाय और आदेश, संपूणा अधिग्रहण कायावाही को रद्द कर ददया जाए और अपास्ि कर ददया जाए। अधितनयम की िारा 54 क े िहि भूर्म अधिग्रहण अधितनयम क े साथ-साथ योजना संख्या 97 को रद्द और अपास्ि कर ददया जाना चादहए और अपास्ि रखा जाना चादहए।यह तनवेदन ककया जािा है कक यदद उच्च न्यायालय द्वारा पाररि आक्षेवपि तनणाय और आदेश में हस्िक्षेप नहीं ककया जािा है, िो यह योजना क े िहि क्षेत्र क े ववकास को प्रभाववि करेगा, जो जनदहि क े ववरुद्ि हो सकिा है।
4. श्री बसव प्रभु ने इन सभी अपीलों का पुरजोर ववरोि ककया है एस पादटल, श्री सुभार् संवत्सर, श्री एन.क े. मोदी, ववद्वान वररष्ठ अधिवक्िा, श्री पुनीि जैन और श्री मयंक क्षीरसागर, ववद्वान अधिवक्िा संबंधिि मूल ररट किााओं की ओर से उपजस्थि हुए। 4.[1] श्री पुनीि जैन, दीवानी अपील सं 5099//2022 एसएलपी 34880/2014, दीवानी अपील सं 5101//2022 एसएलपी 34907/2014, दीवानी अपील सं 5103//2022 एसएलपी 34879/2014 और दीवानी अपील सं 5077//2022 @एसएलपी 34855/2014 में संबंधिि प्रतिवादी की ओर से पेश हुए ववद्वान अधिवक्िा ने जोरदार िरीक े से प्रस्िुि ककया है कक सवाल क े िथ्य और पररजस्थतियााँ में न िो एकल न्यायािीश और न ही हाईकोटा की खण्ड पीठ ने योजना रद्द करने करने और अपास्ि करने में कोई गलिी की है। 4.[2] मूल ररट किााओं की ओर से उपजस्थि ववद्वान अधिवक्िा श्री पुनीि जैन द्वारा यह प्रस्िुि ककया जािा है कक हाईकोटा क े एकल न्यायािीश साथ ही खण्ड पीठ ने अन्य बािों क े साथ ही तनम्नर्लखखि आिारों पर योजना और अधिग्रहण को रद्द कर ददया हैः- (i) यह योजना मध्य प्रदेश नगर िथाग्राम तनवेश अधिनयम की िारा 54 को ध्यान में रखिे हुए समाप्ि हो गई है। (ii) यह कक दो योजनाओं 97(2) और 97(4) का दहस्सा बनने वाली भूर्म का एक बडा दहस्सा मुक्ि ककया गया था और उसक े बाद इस योजना को जारी रखा गया था और अन्य भूस्वार्मयों (यानी, यहां उत्तरदािाओं) की भूर्म का अधिग्रहण शत्रुिापूणा भेदभाव का कृ त्य है आदटाकल 14 का उल्लंघन है। (iii) यह कक खंड 5 ए क े अंिगाि राज्य सरकार की शजक्ि आयुक्ि को नहीं सौंपी गई थी और इसर्लए खंड 5 ए क े अंिगाि भूर्म क े अधिग्रहण का फ ै सला एक उधचि अधिकार द्वारा नहीं ककया जािा है. इसर्लए अधिग्रहण को दूवर्ि ककया जािा है. 4.[3] यह प्रतिवाद ककया गया है कक विामान मामले में िारा 50 (7) अंिगाि अंतिम योजना क े प्रकाशन की िारीख 08.06.1984 है। इस योजना को लगभग िीन वर्ों िक लागू करने क े र्लए आईडीए द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया, र्सवाय इसक े कक आपसी अनुमति से भूर्म का अधिग्रहण करने क े र्लए मूल भूर्म मार्लकों क े साथ िथाकधथि बािचीि की गई।भूर्म अधिग्रहण अधितनयम (एलए अधितनयम) की िारा 4 क े अंिगाि अधिसूचना 24.07.1987 को जारी की गई थी और एलए अधितनयम की िारा 6 क े अंिगाि घोर्णा 03.10.1988 को की गई थी। यह प्रस्िुि जािा है कक अवाडा 06.03.1991 को एलए अधितनयम की िारा 11 क े अंिगाि अवाडा ककया गया था. इसर्लए, जब अंतिम योजना संख्या 97 को 08.06.1984 को प्रकार्शि ककया गया था, िो आईडीए से तिधथ से िीन वर्ा की अवधि क े भीिर योजना को लागू करने की उम्मीद की गई थी। 4.[4] यह आगे प्रतिवाद ककया गया है कक अधितनयम की िारा 54 में आने वाले “कायाान्वयन” शब्द को बारीकी से समझा जाना चादहए और इसर्लए इसका अथा पूणा और सम्पूणा कायाान्वयन होना चादहए। यह प्रस्िुि ककया जािा है कक ककसी भी मामले में “कायाान्वयन” शब्द को “पयााप्ि कायाान्वयन” क े रूप में समझा जाना चादहए। 4.[5] यह प्रस्िुि ककया जािा है कक विामान मामले में, ववद्वान एकल न्यायािीश ने बारीक दृजष्टकोण को स्वीकार नहीं ककया और "पयााप्ि कायाान्वयन" र्सद्िांि पर आईडीए क े कायों का परीक्षण करने क े र्लए आगे बढ़े। यह प्रस्िुि ककया गया है कक उच्च न्यायालय ने पाया है कक समय सीमा से चार ददन पहले भूर्म अधिग्रहण क े र्लए अनुरोि भेजना "पयााप्ि कायाान्वयन " को संिुष्ट नहीं करिा है। 4.[6] इसक े बाद यह तनवेदन ककया जािा है कक िारा 54 में आने वाले शब्द "कायाान्वयन" की व्याख्या अधितनयम क े अन्य प्राविानों क े साथ कधथि िारा क े उद्देश्य को ध्यान में रखिे हुए की जानी चादहए। 4.[7] आगे योजना क े गैर-कायाान्वयन पर िारा 54 क े संबंि में तनम्नानुसार िक ा ददया गया है: - (a)िारा 54 को िारा 53 में प्रदान ककए गए प्रतिबंि क े र्लए समय सीमा क े रूप में समझा जाना चादहए।यह प्रस्िुि ककया गया है कक, िारा 53 भूर्म मार्लकों पर प्रतिबंि लगािी है, जजनकी भूर्म को इस भूर्म क े ववकास क े र्लए नगर ववकास योजना का दहस्सा बनने क े र्लए अधिसूधचि ककया गया है। यह कक इस िरह का प्रतिबंि असीर्मि अवधि क े र्लए नहीं हो सकिा है और इसर्लए िारा 54 िीन साल की अधिकिम अवधि देिी है, जहां िक इस िरह क े प्रतिबंि जारी रह सकिे हैं। (b)जबकक िारा 53 क े िहि प्रतिबंि मौजूद हैं, भूर्म क े "अधिग्रहण" क े र्लए समझौिे या भूर्म अधिग्रहण अधितनयम, 1894 क े िहि पयााप्ि कदम उठाए जाने की आवश्यकिा है। (c)अधितनयम की िारा 56 िथा ित्कालीन म.प्र नगर िथा ग्राम तनवेश तनयम, 1975. क े तनयम 19 क े अन्िगाि अजान की ववधि का प्राविान ककया गया है, अधिग्रहण की प्रकक्रया में उठाए जाने वाले कदमों को तनिााररि करिा है। िारा 56 अधिग्रहण क े दो िरीक े प्रदान करिी है: - (i) समझौिे से अधिग्रहण क े र्लए आगे बढ़ें, और (ii) समझौिे से अधिग्रहण करने में ववफल रहने पर, भूर्म अधिग्रहण अधितनयम क े िहि े र्लए आगे बढ़ें। 1975 क े तनयम 19, सहपदठि िारा 56 तनम्नानुसार प्राविान करिे हैं: - “19. भूर्म का अजान - (1) अधितनयम की िारा 56 क े अिीन भूर्म अजान क े प्रयोजनाथा भूर्म नगर एवं ग्राम ववकास प्राधिकरण में तनम्नर्लखखि तनयम एवं शिों क े अध्यिीन होगी:- (i) िारा 50 क े िहि नगर ववकास योजना क े प्रकाशन की तिधथ से िीन वर्ा क े भीिर, टाउन एंड क ं ट्री ववकास प्रानिकरण योजना क े र्लए आवश्यक भूर्म का अधिग्रहण करने की कायावाही करेगा। (ii) जहां इस िरह का अधिग्रहण समझौिे से होिा है, भूर्म ऐसे समझौिे क े माध्यम से प्राप्ि तनयमों और शिों पर टाउन एंड क ं ट्री डेवलपमेंट प्रानिकरण में तनदहि होगी। (iii) समझौिे क े ववफल होने पर नगर एवं ग्राम ववकास प्राधिकरण राज्य सरकार से भूर्म अधिग्रहण अधितनयम, 1894 (1894 का 1) क े प्राविानों क े िहि उस अधितनयम क े िहि ददए गए मुआवजे क े भुगिान पर ऐसी भूर्म का अधिग्रहण करने का अनुरोि करेगा। (iv) घोर्णा भूर्म अधिग्रहण अधितनयम, 1894 (1894 का 1) की िारा 6 क े िहि प्रकार्शि की जाएगी (v) ऐसी घोर्णा क े उपरान्ि जजलािीश उक्ि अधितनयम क े अन्िगाि भूर्म क े अजान हेिु आदेश लेने की कायावाही करेगा एवं अधितनयम क े प्राविान जहााँ िक हो सक े उक्ि भूर्म क े अजान पर इस संशोिन क े साथ लागू होंगे कक बाजार मूल्य उक्ि भूर्म का तनिाारण कारक होगा।” तनयम 19(1)(i) में एक सामान्य वववरण शार्मल है जो प्राधिकरण को योजना क े कायाान्वयन क े र्लए आवश्यक भूर्म को "अधिग्रहण करने क े र्लए आगे बढ़ने" में सक्षम बनािा है। यह, दो िरीकों से ककया जा सकिा है - (1) 19(1)(ii) क े िहि समझौिे द्वारा अधिग्रहण, और समझौिे द्वारा अधिग्रहण करने में ववफल होने पर, (2) अतनवाया अधिग्रहण द्वारा, जजसक े र्लए आवश्यक कदम 19(1) क े िहि प्रदान ककए गए हैं। (iii)(iv) और (v). इस प्रकार, अतनवाया अधिग्रहण क े र्लए होना चादहए: - (1)अतनवाया अधिग्रहण क े र्लए टाउन एंड क ं ट्री ववकास प्रानिकरण द्वारा एक अनुरोि, (2)भूर्म अधिग्रहण अधितनयम की िारा 6 क े िहि एक घोर्णा, और (3) भूनम अनिग्रहण अनिननयम, 1894 की िारा 7 क े तहत भूनम अनिग्रहण क े आदेश क े नलए नजलािीश द्वारा उपयुि सरकार को एक अनुरोि 4.[7] यह प्रस्िुि ककया जािा है कक इस प्रकार, जबकक िारा 53 क े िहि प्रतिबंि मौजूद हैं, प्राधिकरण से योजना को "कायााजन्वि" करने की उम्मीद है।अवधि क े दौरान, प्राधिकरण को इस िरीक े से काया करना चादहए और उस चरण िक पहुंचना चादहए जहां जस्थति "अपररविानीय" या काफी हद िक अपररविानीय हो जािी है, जहां िक भूर्म स्वामी का संबंि है, अथााि, (i) भूर्म स्वामी की भूर्म या िो समझौिे द्वारा "अधिग्रहीि" की जािी है, जजस जस्थति में उसे अपनी भूर्म क े र्लए सहमि मुआवजा र्मलेगा; या (ii) भूर्म अधिग्रहण अधितनयम, 1894 क े िहि भूर्म क े अतनवाया अधिग्रहण क े र्लए पयााप्ि कदम उठाए गए हैं िाकक जस्थति उक्ि अधितनयम की िारा 7 क े िहि आदेश क े चरण िक पहुंच जाए; या (iii)िारा 11 क े िहि एक अवाडा पाररि करना या िारा 16 क े िहि कब्जे का अधिग्रहण जजसक े पररणामस्वरूप पूणा तनदहििा िारा 54 क े प्रयोजनों क े र्लए "कायाान्वयन" की आवश्यकिा नहीं है, िारा 56 और तनयम 19 क े संयोजन क े साथ पढ़ा जािा है। 4.[8] यह आगे प्रस्िुि ककया गया है कक िारा 55 क े अनुसार, नगर ववकास योजना क े र्लए भूर्म अधिग्रहण अधितनयम क े िहि सावाजतनक प्रयोजन क े र्लए आवश्यक भूर्म होगी। यह कक एक बार िारा 6 क े िहि एक घोर्णा एलए अधितनयम की िारा 6(3) क े िहि जारी की जािी है, िो घोर्णा तनणाायक सबूि बन जािी है कक भूर्म सावाजतनक उद्देश्य क े र्लए आवश्यक है। यह प्रस्िुि ककया जािा है कक िारा 55 क े िहि वैिातनक अविारणा भी िीन साल की अवधि क े र्लए जारी रहिी है, यदद िारा 54 क े िहि योजना समाप्ि हो जािी है, िो िारा 55 क े िहि वैिातनक अविारणा भी समाप्ि हो जािी है। इसनलए, अवनि समाप्त होने से पहले, िारा 6(3) क े तहत एक घोर्णा पर अनिकार हो जाता है और उसक े बाद िारा 55 क े तहत एक वैिाननक अविारणा की आवश्यकता नहीं रह जाती है। 4.[9] यह माना जािा है कक ऐसे मामले में जहां िारा 50(7) क े िहि अंतिम योजना की िारीख से 3 साल की समाजप्ि क े बाद, िारा 4 क े िहि एक अधिसूचना जारी की जािी है, िारा 55 क े िहि वैिातनक अविारणा समाप्ि हो जाएग और एि व्यपगत योजना ि े किए अकिग्रहण साववजकनि उद्देश्य ि े किए नह ीं होगा। यह प्रस्तुत किया जाता है कि "साववजकनि उद्देश्य" ि े किए भूकम िा अकिग्रहण ि एि अकनवायव शतव अनुपन्तथित है कजसिा िोई अकिग्रहण मान्य नह ीं होगा। ४.१० आगे िेख है कि समझौते द्वारा अकिग्रहण ि े किए िदम उठाने िो, त न विव ि अवकि ि े भ तर योजना िो िागू िरने ि े किए िदम उठाने ि े रूप में नह ीं िहा जा सिता है। जैसा कि कवद्वान एिि न्यायाि श द्वारा उकित ह अविोिन किया गया है, यह मानते हुए भ कि आईड ए भूकम माकििोीं ि े साि कनज बाति त ि े माध्यम से भूकम अकिग्रहण िरने िा प्रयास िर रहा िा, आईड ए ि े इस प्रयास से अकिकनयम ि े तहत योजना िो िागू िरने में िोई बािा नह ीं आएग । यह कि जैसा कि कवद्वान एिि न्यायाि श द्वारा उकित रूप से िहा गया है, दोनोीं िदम आईड ए द्वारा साि साि ह उठाए जा सिते िे। इसकिए कवद्वान एिि न्यायाि श व उच्च न्यायािय ि खण्डप ठ ने सह कनणवय कदया है कि कविाराि न योजना अकिनयम ि िारा ५४ िो ध्यान में रखते हुए समाप्त हो गई ि, क्ोींकि यह योजना त न साि ि अवकि ि े भ तर िागू नह ीं ि गई ि । ४.११ भूकम अकिग्रहण अकिकनयम, 1894 ि िारा 5 ए और 6 ि े प्रयोजनोीं ि े किए "समुकित सरिार" ि े रूप में िायव िरने ि े किए कजिाि श ि क्षमता ि े सींबींि में, यह िेख है कि वतवमान मामिे में िारा 4 ि े तहत अकिसूिना जार होने ि े पश्चात्, आपकियाीं िारा 5ए ि े अींतगवत आमींकित ि गई ि ीं, कजसे उप कजिाि श और भूकम अकिग्रहण अकििार द्वारा सींिकित किया गया िा, कजन्ोींने कजिाि श ि े समक्ष अपना प्रकतवेदन प्रस्तुत किया । कजिाि श ने अकिकनयम ि िारा 5ए ि े तहत आपकियोीं ि े कनस्तारण ि िायववाह ि । उसि े बाद कजिाि श ने अकिकनयम ि िारा 6 ि े तहत घोिणा पि जार िरने ि िारववाई ि । आगे िेख है कि वतवमान वाद में मानन य मींि ने, भूकम अकिग्रहण अकिकनयम 1894 ि िारा 5 ए ि े अींतगवत, अपन शन्तक्तयाीं कजिाि श िो प्रत्यायोकजत नह ीं ि, कजन्ें अकिकनयम ि िारा 4, 5, 6 और 17 ि े अींतगवत िायव िरने ि े किए सशक्त किया गया िा। ४.१२ यह प्रकतवाद किया गया है कि िारा 5 ि ि े अींतगवत कनणवय िरने ि शन्तक्त, समुकित सरिार' ि शन्तक्त है, जो िारा 3 (ईई) िो ध्यान में रखते हुए वतवमान वाद ि े तथ्ोीं में राज्य सरिार से अकभप्रेत होग । यह कि, वतवमान वाद में, िारा 5 ए ि े अींतगवत 'उपयुक्त सरिार' ि शन्तक्तयाीं, कदनाींि 22.03.1985 ि े आदेश ि े द्वारा किस भ प्राकििार िो नह ीं सौींप गई हैं। ४.१३ आगे िेख है कि िारा 6 ि े अींतगवत शन्तक्तयोीं िा प्रयोग ऐस सरिार ि े सकिव या उसि े आदेशोीं िो प्रमाकणत िरने ि े किए कवकिवत प्राकिि ृ त किस अकििार ि े हस्ताक्षर ि े अींतगवत किया जाना है। यह कि उक्त शन्तक्तयाीं, शासन ि े आदेश कदनाींि 22.03.1985 द्वारा, सींभाग य आयुक्त िो प्रदि ि गई हैं। िारा 6 ि े अींतगवत घोिणाएीं कजिाि श द्वारा और उनि े हस्ताक्षर से, उप सकिव ि े रूप में जार ि गई हैं। इसकिए उच्च न्यायािय अपने कनष्किव में पूर तरह से न्यायसींगत है कि कजिाि श, कजसने िारा 5 ए ि े अींतगवत राज्य सरिार ि शन्तक्तयोीं िा प्रयोग किया िा, ि े पास उक्त शन्तक्तयाीं नह ीं ि ीं। ४.१४ आगे यह िेख है कि अन्यिा भ, जैसा कि उच्च न्यायािय द्वारा उकित रूप से अविोकित और अकभकनिावररत किया गया है, राज्य सरिार और आईड ए ि ओर से प्रकति ू ि कवभेदन िा। वतवमान वाद में, खींड 50 (7) ि े अींतगवत, योजना ि अींकतम अकिसूिना ि े समय योजनाओीं ि े किए किन्तन्त और सींिग्न ि गई 531.428 हेक्टेयर भूकम में से, 261.796 हेक्टेयर भूकम आईड ए / मध्यप्रदेश राज्य द्वारा पहिे ह मुक्त ि जा िुि है। एि बार भूकम िा वृहद भाग मुक्त हो जाने ि े पश्चात, योजनाओीं िो, मौकिि रूप से पररिन्तित रूप में िागू नह ीं किया जा सिता। िूींकि योजना और अकिग्रहण अकिसूिना िो रद्द िर कदया गया है, इसकिए प्रकतवाद ने अकिकनयम ि िारा १८ ि े अींतगवत एि रेफ े रेंस दायर िरि े मुआवजे में वृन्ति ि े उपाय िा िाभ नह ीं उठाया। यह कि मामिे में, यह न्यायािय योजना और अकिग्रहण िो बरिरार रखता है, प्रकतवाकदयोीं िो, यकद ऐस सिाह द जात है, तो एिएओ द्वारा कनिावररत मुआवजे में वृन्ति ि े किए रेफ े रेंस दायर िरने ि स्वतींिता द जा सित है। ४.१५ आगे प्रस्तुत किया गया है कि अन्यिा भ आईड ए द्वारा दायर ि गई अप िें 2019 ि े सींशोिन अकिकनयम द्वारा अकिकनयम ि िारा 50 में सींशोिन ि े मद्देनजर कनष्फि हो गई हैं । यह कि अकिकनयम ि सींशोकित िारा 50(1)(ब ) ि े अनुसार, जहाीं एि नगर कविास योजना िो अकिकनयम ि े कनरस्त प्राविानोीं ि े तहत अकिसूकित किया गया है, िेकिन कविास या तो शुरू नह ीं हुआ है या किस भ िारण से शुरू नह ीं किया गया है, वह व्यपगत होगा। यह प्रस्तुत किया जाता है कि वतवमान वाद में जहाीं ति अन्य योजनाओ िा सींबींि है, सींशोकित िारा 50 (i) (ब ) िो ध्यान में रखते हुए इन्ें व्यपगत घोकित किया गया है। यह प्रस्तुत किया जाता है कि िूींकि प्रश्नगत योजना िो हाईिोर्व द्वारा विव 1988 में रद्द िर कदया गया िा, कजसि े आदेश ि विव 2014 में खण्डप ठ द्वारा पुकि ि गई ि, इसकिए इस योजना पर िारववाई नह ीं ि जा सि । वतवमान वाद में न तो प्राकििार द्वारा भूकम िा िब्जा किया गया है (जैसा कि उच्च न्यायािय द्वारा थिगन आदेश िे) और न ह योजनाओीं ि े किए क्षकतपूकतव जमा ि गय है। िेख है कि स्व ि ृ त रूप से 531.428 हेक्टेयर में से अनुमोकदत योजना अकभन्यास में से 261.796 हेक्टेयर भूकम िो मुक्त ि जा िुि है और भूकम माकििोीं ि े साि आपस बाति त से किस भ भूकम िा अकिग्रहण नह ीं किया गया है। इसकिए वाद ि े तथ् और पररन्तथिकतयोीं में कवद्वान एिि न्यायाि श, साि ह हाईिोर्व ि खण्डप ठ ने इस योजना िो उकित रूप से रद्द िर कदया है, इसे अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत व्यपगत माना है और एिए एक्ट ि े अींतगवत अकिग्रहण ि िायववाह िो उकित रूप से रद्द िर कदया है। ४. १६ मूि ररर् याकििाितावओीं ि ओर से पेश होने वािे अन्य कवद्वान वररष्ठ अकिवक्ता / अकिवक्ता ने वस्तुतः वह प्रस्तुकतयाीं द हैं जो श्र पुन त जैन द्वारा द गई हैं और इसकिए, उन्ें दोहराया नह ीं गया है। मूि ररर् याकििाितावओीं ि ओर से पेश होने वािे सभ कवद्वान अकिवक्ताओीं ने योजना ि समान्तप्त पर हाईिोर्व द्वारा पाररत कनणवय और आदेश िा समिवन किया है और साि ह अकिग्रहण ि िायववाह िो रद्द और अपास्त किया है। ५. हमने सींबींकित पक्षोीं ि े कवद्वान अकिवक्ताओीं िो कवस्तार पूववि सुना है। उच्च न्यायािय ने, अप िान्ट इींदौर कविास प्राकििरण द्वारा मध्य प्रदेश नगर तिा ग्राम कनवेश अकिकनयम १९७३ ि िारा ५० ि े द्वारा प्रदि शन्तक्तयोीं ि े प्रयोग में कनकमवत योजना सींख्या ९७ िो और साि ह भूकम अकिग्रहण अकिकनयम 1894 ि े अींतगवत योजना सींख्या ९७ से सम्बन्ध पूर अकिग्रहण िायववाह िो, आक्षेकपत सामूकहि कनणवय व आदेश ि े द्वारा रद्द िर कदया है। कवद्वत एिि न्यायाि श द्वारा पाररत कनणवय और आदेश से, कजसि खण्डप ठ द्वारा पुकि ि गई है, ऐसा प्रत त होता है कि हाईिोर्व ने योजना और अकिग्रहण ि िायववाह िो, परस्पर, कनम्नकिन्तखत आिारोीं पर रद्द िर कदया है: (i) यह कि योजना मध्य प्रदेश नगर तिा ग्राम कनवेश अकिकनयम ि िारा ५४ ि े पररप्रेक्ष्य में व्यपगत हो गई है। (ii) यह कि दो योजनाओीं ९७ (2) और ९७ (4) िा भाग बनने वाि भूकम िा, एि पयावप्त भाग कनमुवक्त िर कदया गया िा और कफर योजना िो कनरींतर रखा गया और अन्य भू- स्वाकमयोीं ि भूकम िा िुकनींदा रूप से अकिग्रहण (अिावत इस में प्रकतवाद ) िरना शिुता पूणव भेदभाव िा िायव है जो अनुच्छे द 14 िा उल्लींघन है; एवीं (iii) िारा 5-ए ि े अींतगवत राज्य सरिार ि शन्तक्त आयुक्त िो प्रत्यायोकजत नह ीं ि गई ि और इस तरह िारा 5-ए ि े अींतगवत भूकम ि े अकिग्रहण िा कनणवय एि उकित प्राकििार द्वारा नह ीं किया जाता है। अतः अकिग्रहण दू कित होजाताहै। ६. जहाीं ति हाईिोर्व द्वारा अकभकिन्तखत कनष्किव िा सींबींि है कि योजना सीं.९७ अकिकनयम ि िारा ५४ िो ध्यान में रखते हुए रद्द हो गई है और यह कविार िरने ि े किए कि क्ा हाईिोर्व द्वारा सींपूणव योजना िो, इस आिार पर रद्द िरने में न्याय सींगत है, कि यह अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत व्यपगत हो गई है, अकिकनयम ि े उपयुक्त प्राविानोीं िो कनकदवि किया जाना आवश्यि है, जो कनम्नानुसार हैं: "५०. नगर कविास योजनाओीं ि तैयार (1) नगर एवीं ग्राम कविास प्राकििार किस भ समय नगर कविास योजना तैयार िरने ि े अपने आशय ि घोिणा िर सिता है। (2) योजना कनमावण ि े आशय ि ऐस घोिणा ि तार ख से त स कदन ि े भ तर नगर और ग्राम कविास अकििार इस घोिणा िो राजपि में और ऐस अन्य र कत में जो कवकहत ि जाए, प्रिाकशत िरेगा। (3) उपिारा (2) अींतगवत घोिणा ि े प्रिाशन ि तार ख से दो विव ि े अन्दर नगर और ग्राम कविास अकििार प्रारूप में एि नगर कविास योजना तैयार िरेगा और उसे, उक्त प्रारूप कविास योजना ि े सींबींि में, किस व्यन्तक्त से आपकियाीं और सुझाव आमींकित िरने वाि सूिना ि े साि, ऐस तार ख से पूवव, जो उसमें कवकनकदवि ि जाए, ऐस तार ख जो ऐस सूिना ि े प्रिाशन ि तार ख से त स कदन से पूवव न हो, कवकहत प्ररूप और र कत में प्रिाकशत िरेगा। (४) नगर और ग्राम कविास अकििार उपिारा (3) ि े अींतगवत सूिना में कवकनकदवि अवकि ि े भ तर प्राप्त सभ आपकियोीं और सुझावोीं पर कविार िरेगा और कजसि े ििते प्रभाकवत ऐसे व्यन्तक्तयोीं िो, जो सुने जाने ि े इच्छु ि हैं, या उपिारा (5) अींतगवत गकठत सकमकत ि ररपोर्व पर कविार ि े पश्चात्, मसौदा प्रारूप िो प्रिाकशत रूप में मींजूर देना िरेगा या उसमें ऐसे उपाींतरण िरेगा जो वह ति व सींगत समझे। (५) जहाीं नगर कविास योजना भूखींडोीं ि े पुनगवठन से सींबींकित है, वहाीं नगर एवीं ग्राम कविास अकििार, यद्यकप उपिारा (4) में उपबींकित, मुख्य िायविार अकििार और दो अन्य सदस्ोीं से कमििर एि सकमकत िा गठन िरेगा, कजसमें एि सदस् मध्य प्रदेश आवास मींडि िा प्रकतकनकि होगा और दू सरा िोि कनमावण कवभाग िा अकििार होगा, जो उपिारा (3) अींतगवत प्राप्त आपकियोीं और सुझावोीं ि सुनवाई ि े प्रयोजन ि े किए मुख्य अकभयींता, िोि कनमावण कवभाग द्वारा नाकमत िायविार अकभयींता ि पींन्तक्त से अन्यून होगा। (6) उपिारा (5) अींतगवत गकठत सकमकत आपकियोीं और सुझावोीं पर सुनवाई िरेग और ऐसे व्यन्तक्तयोीं िो सुनवाई देग जो सुनवाई ि े इच्छु ि हैं और अपन ररपोर्व ऐसे समय ि े भ तर, जो वह प्रस्तावोीं ि े साि कनयत िरे, नगर और ग्राम कविास अकििार िो प्रस्तुत िरेग । (i) िोि प्रयोनजनािव आवींकर्त या आरकक्षत क्षेिोीं िो पररभाकित और स माींकित िरना (ii) पुनगवकठत भूखींडोीं िा स माींिन (iii) मूि और पुनगवकठत भूखींडोीं ि े मूल्य िा मूल्याींिन; (iv) यह अविाररत िरना कि क्ा जनता ि े किए आरकक्षत क्षेि, योजना ि े क्षेि ि े भ तर ि े कनवाकसयोीं ि े किए पूणव या भागतः िाभप्रद हैं; (v) भूखींड ि े पुनगवठन और जन उद्देश्य ि े किए, अींशोीं ि े आरक्षण ि े िारण योजना ि े िाभाकिवयोीं िो मुआवजा या योगदान िा अनुमान िगाना और उसे कवभाकजत िरना। (vi) प्रत्येि पुनगवकठत भूखींड ि े मूल्य में वृन्ति िा आििन और भूखींड िारि पर िगाए जाने योग्य कविास योगदान िा आििन िरना: ध्यातव्य है कि योगदान, उपाकजवत मूल्य वृन्ति आिे से अकिि न हो। (vii) किस पुनगवकठत भूखींड ि े मूल्य में क्षय िा आििन और इसि े किए देय प्रकतपूकतव िा आििन िरना. (७) उपिारा (४) ि े अींतगवत नगर कविास योजना, पररवतवनोीं सकहत / रकहत, ि े अनुमोकदत हो जाने ि े तुरींत पश्चात्, नगर और ग्राम कविास प्राकििार, अींकतम नगर कविास योजना िो, राजपि में और ऐस अन्य र कत में जो कवकहत ि जाए, प्रिाकशत िरेगा और तार ख कवकनकदवि िरेगा कजससे वह प्रवृि होग । XXX XXX XXX ५४. योजना िा िािात त हो जाना – यकद नगर एवीं ग्राम कविास प्राकििार, नगर कविास कनयोजन िा िायावन्वयन दो विव ि अवकि ि े भ तर या िारा 50 ि े अींतगवत अींकतम योजना ि अकिसूिना ि तार ख से पाींि विव ि अवकि ि े भ तर, आरम्भ िरने में असफि रहता है, तो यह दो विव या पाींि विव ि िकित अवकि ि समान्तप्त पर, जैसा भ मामिा हो, व्यपगत होग: XXX XXX XXX परिु, यकद प्राकििार और पक्षिारोीं ि े ब ि िोई कववाद, यकद िोई हो, जो ऐस योजना से व्यकित है, सक्षम अकििार क्षेि वािे किस न्यायािय या अकििरण ि े समक्ष, प्रकतफि हेतु, िाया जाता है, तो वह अवकि, कजसि े दौरान उक्त कववाद ऐसे न्यायािय या अकििरण ि े समक्ष िींकबत है, योजना ि े व्यपगत कनिावरण हेतु सम्मकित नह ीं ि जाएग ।] ५६. नगर और ग्राम ण कविास प्राकििरण ि े किए भूकम िा अकिग्रहण। नगर और ग्राम कविास प्राकििार िारा 50 ि े अींतगवत अींकतम नगर कविास योजना ि े प्रिाशन ि तार ख ि े बाद किस भ समय, िेकिन उससे त न साि ि े भ तर, योजना ि े िायावन्वयन ि े किए आवश्यि भूकम िा अकिग्रहण िरने ि े किए आगे बढ़ सिता है और, इस तरह ि े अकिग्रहण में कवफि रहने पर, राज्य सरिार, नगर और ग्राम कविास प्राकििार ि े अनुरोि पर, भूकम अकिग्रहण अकिकनयम 1894 (1894 िा नींबर 1) ि े प्राविानोीं ि े अींतगवत और उस समझौते ि े अींतगवत अकिकनणीत मुआवजे ि े भुगतान पर और राज्य सरिार द्वारा व्यय किए गए किस भ अन्य प्रभार ि े अींतगवत, ऐस भूकम िा अकिग्रहण िरने ि े किए आगे बढ़ सित है। भूकम उक्त कनयम व शतों ि े अि न नगर और ग्राम कविास प्राकििार में कवकहत होग । अतः, अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अनुसार, यकद नगर एवीं ग्राम कविास प्राकििार, अकिकनयम ि िारा ५४ में तय अवकि ि े भ तर, नगर कविास योजना ि े कियान्वन िो आरम्भ िरने में असफि होता है, तो योजना व्यपगत हो जाएग । इसकिए शब्द ‘िायावन्वयन शुरू िरना’ अकनवायव और महत्वपूणव शब्द हैं, कजन पर कविार िरने और व्याख्या िरने ि आवश्यिता है। ७. कविास अकििार ि ओर से मामिा यह है कि त न विों ि े भ तर अिावत् 8.6.1984, योजना सींख्या९७ ि े िायावन्वयन ि े किए कनम्नकिन्तखत िदम उठाए गए िे, जो कनम्नानुसार हैं: तिति तििरण
13. 03. 1981 िारा 50 (1) ि े अनुसार नगर कविास योजना तैयार िरने ि े कविार ि उद् घोिणा
10. 07. 1981 िारा 50(2) ि े तहत घोिणा िा प्रिाशन 08.06.1984 िारा 50 (7) ि े तहत िायाविय न राजपि में अींकतम कविास योजना िा प्रिाशन अकिकनयम ि िारा ५६ ि े अींतगवत याकििा िताव अकििार और भू- स्वाकमयोीं ि े ब ि आपस बाति त 23.10.1984 अींकतम स्व ि ृ त योजना तैयार ि गई और इसे आम जनता ि े किए उपिब्ध िराने हेतु नगर एवीं ग्राम ण कनयोजन ि े सींयुक्त कनदेशि और नगरपाकििाआयुक्त िो भेजा गया 01.03.1986 राजस्व अकभिेख प्राप्त िरने िा कनदेकशत याकििािताव अकििार ि े पर्वार 24.11.1986 याकििािताव अकििार ने ििेक्टर से भूकम अकिग्रहण ि े प्रस्ताव िो तैयार िरने ि े किए पर्वार िो भेजने िा अनुरोि किया 06.09.1986 मध्यप्रदेश राज्य ने सभ सींबींकित िोगोीं िो अग्रसर होने ि े किए पररपि जार किया, कजसिा भूकम अकिग्रहण से सींबींकित मामिोीं में पािन किया जाना आवश्यि है 16.12.1986 याकििािताव अकििार ने प्रश्नगत भूकम ि े प्रस्ताकवत अकिग्रहण ि े नगर एवीं ग्राम ण कनयोजन कवभाग से अनापकि प्रमाण पि मााँगा 31.01.1987 & 24.02.1987 अनापकि प्रमाण पि देने ि े किए नगर एवीं ग्राम ण कनयोजन कवभाग िो भेजे गए स्मरण-पि 15.04.1987 नगर एवीं ग्राम ण कनयोजन कवभाग द्वारा प्राप्त अनापकि प्रमाण पि 04.06.1987 िूींकि बाति त कवफि रह, इसकिए याकििािताव द्वारा राज्य सरिार से भूकम अकिग्रहण िरने िा अनुरोि किया गया।
24. 07. 1987 भू अकिग्रहण अकिकनयम ि िारा ४ ि े अींतगवत जार अकिसूिना इस स्तर पर, यह ध्यान देने ि आवश्यिता है कि अकिकनयम ि िारा५६ ि े अनुसार, कविास अकििार, िारा 50 ि े अींतगवत, अींकतम नगर कविास योजना ि े प्रिाशन ि तार ख ि े बाद किस भ समय, िेकिन उसि े त न साि ि े पूवव, योजना ि े िायावन्वयन हेतु आवश्यि भूकम ि े िरार द्वारा अकिग्रहण हेतु अग्रसर हो सिता है और इस तरह ि े अकिग्रहण में कवफि रहने पर, राज्य सरिार, कविास अकििार ि े अनुरोि पर, अकिकनयम 1894 ि े अींतगवत ऐस भूकम िा अकिग्रहण िरने ि े किए अग्रसर हो सित है । इस प्रिार, अकिकनयम ि िारा५६ ि े अींतगवत, त न विव ि े भ तर, कविास अकििार िो िरार द्वारा योजना ि े किए आवश्यि भूकम िा अकिग्रहण िरना अपेकक्षत िा और उसि े बाद ह एवीं इस तरह ि े अकिग्रहण में कवफि रहने पर, राज्य सरिार कविास अकििार ि े अनुरोि पर ऐस भूकम िा अकिग्रहण िरने ि े किए आगे बढ़ सित है। ८. कविास अकििार ि ओर से मामिा यह है कि वतवमान मामिे में िूींकि बाति त कवफि हो गई और कविास अकििार समझौते द्वारा भूकम िा अकिग्रहण िरने में कवफि रहे, इसकिए कविास अकििार ने 4 जून, 1987 िो राज्य सरिार से भूकम िा अकिग्रहण िरने िा अनुरोि किया, कजसिा अनुरोि योजना िो अींकतम रूप देने ि तार ख से त न विव ि अवकि ि े भ तर किया गया िा। इसकिए कविास प्राकििार ि ओर से मामिा यह है कि योजना अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत समाप्त नह ीं होग । कविास प्राकििार ि ओर से वाद यह है कि 8.06.1984 और 4.06.1987 ि े ब ि उठाए गए कवकभन्न िदमोीं िो योजना ि े िायावन्वयन िो आगे बढ़ाने या शुरू िरने ि े रूप में िहा जा सिता है। हािााँकि दू सर ओर एवीं हाईिोर्व ि े अनुसार योजना िा वास्तकवि िायावन्वयन आवश्यि है और त न विों ि े भ तर इस योजना िो िागू िरने ि े प्रकत िोई सींतोिजनि िदम नह ींउठाए गए िे। यह कि त न विव पूरे होने से िार कदन पहिे अनुरोि िरना पयावप्त नह ीं होगा और इसकिए अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत योजना व्यपगत हो गई है। जैसा कि उपरोक्त उल्लेन्तखत किया गया है, अकिकनयम ि िारा ५४ में प्रयुक्त शब्द है "िायावन्वयन शुरू िरने में कवफि"। इसिा मतिब यह नह ीं है कि अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत तय समय ि े भ तर योजना िा िायावन्वयन किया जाना िाकहए। योजना ि े ‘िायावन्वयन’ और ‘िायावन्वयन शुरू िरना’ शब्दोीं ि े ब ि स्पि कवभेद है। ९. संजय गमंधी गृह तिर्माण सहकमरी संस्िम बिमर् र्ध्यप्रदेश रमज्य और अन्य 1990 SCC ऑिलमइि एर्पी 115: एआईआर 1991 एर्पी 72 में प्रिाकशत वाद में मध्यप्रदेश हाईिोर्व द्वारा एि सदृश सवाि पर कविार किया गया। अकिकनयम ि िारा ५४ में प्रयुक्त ‘योजना िा िायावन्वयन’ और ‘िायावन्वयन’ शब्दोीं ि व्याख्या िरते हुए यह पाया गया कि अकिकनयम ि िारा ५४ में प्रयुक्त ‘िायावन्वयन’ शब्द िा यह अिव नह ीं िगाया जा सिता कि अकििार द्वारा योजना ि े िायावन्वयन ि कदशा में सींतोिजनि िदम उठाए जाने ि े बाद भ यह योजना त न विव ि अवकि ि े बाद समाप्त हो जाएग क्ोींकि उस अवकि ि े भ तर इसे पूरा नह ीं किया गया है। ऐसा अविोिन और िारण िरते हुए, ि ीं कडिा १६ से २० में, यह कनम्नानुसार पाया गया िा कि: "१६. इसि े आगे, याकििाितावओीं ि े कवद्वान अकिवक्ता द्वारा यह प्रकतवाद किया गया है कि अकिनयम ि िारा ५४ में कनकहत प्राविानोीं ि े अनुसार यह योजना समाप्त हो गई है क्ोींकि इींदौर कविास प्राकििरण, अकिनयम ि िारा 50 ि े अींतगवत योजना ि े प्रिाशन ि तार ख से त न साि ि अवकि ि े भ तर योजना िो िागू िरने में कवफि रहा है। सभ याकििाितावओीं ि े कवद्वान अकिवक्ता(ओीं) ने इस तथ् पर बहुत जोर कदया है कि 'िायावन्वयन' शब्द िा स्पि रूप से अिव होगा पररपूणवता, प्रदशवन, पूरा िरना, पूणव िरना, कियान्वयन और इस प्रिार वेबस्टर शब्दिोश, िेम्बसव शब्दिोश, ऑक्सफोडव शब्दिोश या किस अन्य शब्दिोश में, शब्दिोश ि े अिों से 'िायावन्वयन' शब्द िा ि े वि एि ह अिव हो सिता है कि योजना िो त न साि ि कनिावररत अवकि ि े भ तर पूरा या हर तरह से पूरा किया जाना है और यकद इींदौर कविास प्राकििरण उस अवकि ि े भ तर योजना िो िागू िरने में असफि है तो िारा ५४ ि े वैिाकनि प्राविान िो ध्यान में रखते हुए योजना व्यपगत हो जाएग ।
17. दू सर ओर, यह ति व कदया गया है कि 'िायावन्वयन' शब्द िा अिव अकिकनयम ि े सींदभव में ह िगाया जाना िाकहए। योजना ि े कनमावण और योजना ि े सींबींि में अकिकनयम ि पूर योजना कविारत किया जाना िाकहए, इससे पहिे कि यह माना जाए कि िायावन्वयन िा अिव ि े वि पूरा होना है।
18. पक्षिारोीं ि े सींबींकित तिों ि अच्छ तरह से कववेिना िरने ि े किए, आइए योजना ि तैयार और िायावन्वयन ि े सींबींि में अकिकनयम में अींतकववि कवकभन्न उपबींिोीं िो पढ़ते हैं । िारा 50 में नगर कविास योजना तैयार िरने िा प्राविान है और इस योजना िो तैयार िरने ि े किए कवकभन्न िरण कदए गए है और अकिकनयम ि िारा 50 ि उपिारा (7) में यह प्राविान है कि जैसे ह उप-िारा(4) ि े अींतगवत नगर कविास योजना िो सींशोिन ि े साि या उसि े कबना स्व ि ृ कत द जाएग, नगर और ग्राम ण कविास प्राकििार राजपि में और अन्य तर ि े से, जो भ कनिावररत किया जाए, अींकतम नगर कविास योजना प्रिाकशत िरेगा और यह कनिावररत िरेगा कि यह किस तार ख से प्रारम्भ होग । योजना ि े अींकतम प्रिाशन ि े बाद िारा 51 में सींशोिन ि शन्तक्त प्रदान ि गई है, कजसमें नगर और ग्राम ण कनयोजन ि े कनदेशि िो किस भ प क़ित व्यन्तक्त द्वारा दायर आवेदन पर स्वप्रेरणा से योजना ि े अकभिेख ि जाींि िरने और योजना िो सींशोकित िरने ि े किए ऐसा िोई भ आदेश पाररत िरने ि शन्तक्त द गई है, जो वह अकभिेख िा अविोिन िरने ि े बाद उपयुक्त समझे और उस समय ि े दौरान वह योजना ि े िायावन्वयन िो कनिींकबत िर सिता है। कनदेशि ि इस शन्तक्त िा प्रयोग वह अींकतम योजना ि े प्रिाशन ि तार ख से दो विव ि े भ तर िर सिता है। तब कफर अकिकनयम ि िारा 52 ि े अींतगवत, राज्य सरिार िो, किस योजना िो पररवकतवत िरने, योजना िो रद्द िरने या नई योजना बनाने ि े सींबींि में कनदेश देने ि शन्तक्त प्राप्त है। कफर अकिकनयम ि िारा ५४ किस योजना ि े व्यपगत होने िा उपबींि िरत है, यकद उसे त न विव ि अवकि ि े भ तर िायावन्तन्वत नह ीं किया जाता है। अकिकनयम ि िारा५६ में यह उपबींि है कि िारा 50 ि े अींतगवत अींकतम योजना ि े प्रिाशन ि तार ख ि े पश्चात्, प्राकििार योजना ि े िायावन्वयन हेतु त न विव ि अवकि ि े भ तर समझौते द्वारा आवश्यि भूकम ि े अकिग्रहण ि िायववाह िर सिता है और यकद समझौते द्वारा भूकम िा अजवन िरने में असफि रहता है तो भूकम ि े अजवन ि े किए प्राकििार से अनुरोि किया जा सिता है। तब िारा 57, कविास ि े किए प्रदाय िरत है जो स्पि रूप से िहता है कि जब भूकम अकिकनयम ि िारा५६ अींतगवत नगर कविास योजनाओ ि े अनुसार प्राकििार में कनकहत है तो प्राकििार भूकम ि े कविास ि े किए आवश्यि िदम उठाएगा । कफर भ राज्य सरिार या कनदेशि ि े पास यह सुकनकश्चत िरने कि पयववेक्ष शन्तक्त होत है कि कविास योजना ि े अनुसार हो और वह प्राकििार िो कदशा कनदेश जार िर सि ें, जो प्राकििार पर बींिन य है। इस प्रिार 'िायावन्वयन' शब्द ि व्याख्या िरने से पहिे अकिनयम में किए गए पूवोक्त प्राविानोीं िो कविाररत किया जाना िाकहए। अकिकनयम ि िारा 50 (7) ि े अींतगवत किस योजना ि े प्रिाकशत होने ि े पश्चात्, कनदेशि ि े पास दो साि ि अवकि ि े भ तर अींकतम योजना िो सींशोकित िरने िा अकििार है और कफर अकिकनयम ि िारा५६ ि े तहत प्राकििरण िो 3 साि ि अवकि ि े भ तर अकिग्रहण ि े किए बाति त शुरू िरने ि शन्तक्त द गई है, कजसमे असफि होने पर भूकम अकिग्रहण ि िायववाह शुरू ि जा सित है और िारा 57 भूकम अकिग्रहण ि े बाद कविास िायव शुरू िरने और प्राकििरण में कनकहत होने ि बात िरत है। इस प्रिार 'िायावन्वयन' शब्द िा यह अिव नह ीं िगाया जा सिता है कि योजना िो त न विव ि अवकि ि े भ तर पूणव होना िाकहए या कियान्तन्वत किया जाना िाकहए। अकिकनयम ि िारा ५४ िो अकिकनयम ि िारा५६ व 57 ि े साि पढ़ने से अप्रकतरोध्य कनष्किव यह है कि कविान मींडि िा आशय यह िा कि यकद िोई योजना अपने अींकतम प्रिाशन ि े पश्चात् त न विव ि अवकि ति कनन्तिय प़ि रहत है तो वह व्यपगत हो जाएग । कििु यकद योजना ि े िायावन्वयन ि कदशा में अकििाररयोीं द्वारा िदम उठाए गए हैं, तो 'िायावन्वयन' शब्द िा अिव यह नह ीं िगाया जाएगा कि त न साि ि अवकि योजना ि े पूरा होने ि े किए प्रस्ताकवत अवकि है। १९. इस वाद में, यह योजना ररींग रोड तैयार िरने और ररींग रोड ि े आस पास कवकभन्न सुकविाओीं और नागररि सुकविाओीं िो कविकसत िरने ि े किए है। एि बहुत ब़िे कनमावण और कविास ि े किये एि योजना तैयार ि जा सित है कजसे पूरा िरने में दस साि भ िग सिते हैं। अगर हम 'कियान्वयन' शब्द ि सींि ु कित अिव में व्याख्या िरें तो िोई भ कविास प्राकििार किस भ ब़ि योजना िो अपने हाि में नह ीं िे सिता है क्ोींकि यह हो सिता है कि उस योजना िो त न साि में पूरा िरना सींभव न हो। इसकिए अकिनयम ि े कवकभन्न प्राविानोीं िो ध्यान में रखते हुए ि े वि ति व सींगत व्याख्या यह हो सित है कि यकद कविास प्राकििार योजना ि े िायावन्वयन ि कदशा में िदम उठाता है और त न विव ि अवकि ि े किए अिमवण्य नह ीं रहता है, तो योजना व्यपगत नह ीं होग, िेकिन यकद योजना ि े प्रिाशन ि े बाद प्राकििार ि ओर से योजना ि े िायावन्वयन ि कदशा में ि ु छ नह ीं किया जाता है तो वह योजना व्यपगत हो जाएग । २०. इस अदाित ि खण्डप ठ ने िक्ष्म िींद बनाम इींदौर कविास प्राकििरण इींदौर (1980 िा एम. प. सीं. 390 कजसिा कवकनश्चय 14-12-81 िो हुआ) ि े मामिे में, कजसमें समान ति व कदया गया िा कि त न विव ि समान्तप्त ि े पश्चात् यकद योजना िायावन्तन्वत नह ीं ि जात है तो यह व्यपगत हो जात है, यह अकभकनिावररत किया है कि िारा ५४ तब िागू नह ीं होत, जब योजना िो िायावन्तन्वत िरने ि े किए त न विव ि े भ तर सारभूत िदम उठाए गए हैं। अदाित ने अकिकनयम ि िारा 56, 57 और 58 िो भ कविारण में रखा िा और यह दृकििोण अपनाया िा कि 'िायावन्वयन में कवफि' शब्दोीं िा अिव योजना ि े िायावन्वयन हेतु िोई सींतोिजनि िदम उठाने में कवफिता होगा और यकद त न विों ि े भ तर ऐसा िोई िदम नह ीं उठाया जाता है तो योजना व्यपगत हो जाएग । यकद त न विों ि े भ तर सींतोिजनि िदम उठाए गए हैं, हािाींकि उस दौरान योजना िो पूर तरह से िागू नह ीं किया गया है, तो यह योजना समाप्त नह ीं होग और इस योजना ि े अींतगवत भूकम अकिग्रहण ि प्रकिया इसि े िायावन्वयन ि कदशा में एि उल्लेखन य िदम है। हम इस अदाित ि खण्डप ठ द्वारा किए गए पूवोक्त दृकििोण ि े साि सम्मानजनि रूप से सहमत हैं और कनिावररत िरते हैं कि अकिकनयम ि िारा ५४ में आने वािे 'िायावन्वयन' शब्द िा यह अिव नह ीं िगाया जा सिता है कि भिे ह अकििार द्वारा योजना ि े िायावन्वयन ि कदशा में िोई सींतोिजनि िदम उठाया गया हो, कफर भ उस अवकि ि े भ तर इसे पूरा न िरने ि े िारण त न साि ि समान्तप्त ि े बाद योजना समाप्त हो जाएग । हम उपयुवक्त वाद में मध्यप्रदेश द्वारा किए गए दृकििोण से पूर तरह सहमत हैं। १०. इस प्रिम पर, एम. प. नगर तिा ग्राम कनवेश कनयम, 1975 ि िारा १९ सहपकठत अकिकनयम ि िारा५६ िा उल्लेख किया जानाआवश्यि है। अकिकनयम ि िारा ५६ सहपकठत कनयम १९ ि े अनुसार और अकिकनयम ि िारा ५६ ि े अींतगवत भूकम अकिग्रहण ि े प्रयोजनोीं हेतु, िारा 50 ि े अींतगवत अींकतम नगर कविास योजना ि े प्रिाशन ि तार ख से त न विव ि े भ तर, नगर और ग्राम ण कविास प्राकििार योजना ि े िायावन्वयन हेतु आवश्यि भूकम ि े अकिग्रहण हेतुअग्रसर होगा। उपयोग किए गए शब्द"अकिग्रहण ि े किए अग्रसर" हैं, न कि"वास्तकवि अकिग्रहण" । इस प्रिार कविान मींडि ि मींशा बहुत स्पि और द्वींदरकहत प्रत त होत है। इसकिए जब अकिकनयम में ि ु छ िायो िो कनिावररत समय ि े भ तर िरने हेतु प्राविान है, तो अकििार िो ऐसा समय कदया जाना िाकहए, कवशेि रूप से, पूरे क्षेि ि े किए और जनता उद्देश्य ि े किए बनाई गई योजना पर कविार िरते समय। वतवमान वाद में, योजना सींख्या ९७ तैयार ि गई है और आवास य, उद्यान और औद्योकगि उद्देश्योीं ि े किए भूकम िा अकिग्रहण किया गया है। िोई अन्यअिवआवास य, भाग और औद्योकगि उद्देश्योीं ि े किए योजना तैयार िरने ि े उद्देश्य िो कवफि िर सिता है। ११. उपरोक्त िो ध्यान में रखते हुए और जब त न विों ि े भ तर योजना ि े किए कवकभन्न िदम उठाए गए िे, कजसमें बाति त ि े माध्यम से भूकम िा अकिग्रहण िरने ि े किए िदम शाकमि िे और कफर भ बाति त ि े माध्यम से भूकम अकिग्रहण िायव में कवफि रहने पर, भूकम अकिग्रहण अकिकनयम ि े अींतगवत भूकम अकिग्रहण हेतु राज्य सरिार से सींपि व िरने, हाईिोर्व ने यह घोिणा िरने में गित में है कि यह योजना अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत समाप्त हो गई है। हाईिोर्व ने अकिनयम ि िारा ५४ ि व्याख्या िरते समय और / या उस पर कविार िरते समय बहुत सींि णव अिव ग्रहण किया है। १२. जहााँ ति िारा ४ व ६ सकहत, सम्पूणव अकिग्रहण प्रकियाओीं ि कववाकदत भूकमयोीं ि े सम्बन्ध में भू अकिग्रहण अकिकनयम ि े अींतगवत जार अकिसूिना, इस आिार पर कि कजिाि श िो िारा ५ ए ि े अींतगवत शन्तक्त प्रत्यायोकजत नह ीं ि गय, ि े रद्द व कनरस्त िरण िा प्रश्न है, यह ध्यान रखना आवश्यि है कि वतवमान वाद में, राज्य शासन ने, अपने पि कदनाींि २२.३.१९८५ द्वारा, अपन शन्तक्तयाीं कजिाि श िो, राजस्व कवभाग ि े उप सकिव एवीं सींभागायुक्त ि े रूप में, राजस्व कवभाग ि े सकिव ि े रूप में िायव िरने हेतु व िारा ४, ५, ६ व १७ में प्रदि शन्तक्तयोीं िो प्रयोग िर भू अकिग्रहण सम्बन्ध मामिोीं िो कनपर्ाने हेतु, प्रदत ि ि । ि े वि इसकिए कि उक्त आदेश में िारा ५ ए िा उल्लेख नह ीं किया गया है, अकिकनयम 1894 ि िारा 4 और 6 ि े अींतगवत अकिसूिनाओींऔर कवशेि रूप से खींड ५ ए ि े अींतगवत प्रकतवेदन / आपकियोीं पर कविार िरने ि े बाद जार ि गई घोिणा सकहत पूर अकिग्रहण प्रकिया िो गैरिानून घोकित नह ीं किया जा सिता है। १२.१ आगे, अकिकनयम १८९४ ि िारा ६ ि े अींतगवत, एि उदघोिणा तभ जार ि जा सित है जब िारा ५ ए ि े तहत प्रस्तुत ि गई प्रकतवेदन पर उपयुक्त सरिार द्वारा कविार किया गया हो। अकिकनयम ि िारा ५ ए ि े अींतगवत, आपकियाीं ििेक्टर द्वारा कविार किए जाने ि आवश्यिता है, ििेक्टर अिावत कजिे ि े कजिाि श सकहत, उपायुक्त और भूकम अकिग्रहण अकिकनयम ि े अींतगवत उकित सरिार द्वारा ििेक्टर ि े िायो िो िरने हेतु कवशेि रूप से कनयुक्त िोई अकििार । यहाीं ति कि राज्य सरिार ने कदनाींि 6.3.1987 ि े अपने पररपि ि े माध्यम से उपकजिाि शोीं िो अपने सींबींकित क्षेिोीं में भूकम ि े अकिग्रहण ि े किए कजिाि श ि शन्तक्तयोीं िो प्रयोग िरने ि शन्तक्त प्रदि ि । १२.२ आदशािगर गृह तिर्माण सहकमरी संस्िमि र्यमातदि भोपमल तिरुद्ध र्ध्यप्रदेश रमज्य और अन्य, 2004 (1) एर्. पी. एल. जे. 539:2003 एस सी सी ऑिलमइि एर्. पी. 329, पैरा 24 से 26 में ररपोर्व किए गए एि सदृश सवाि पर मध्यप्रदेश हाईिोर्व द्वारा कविार किया गया और कनम्नानुसार कनष्ककिवत व अकभकनिावररत किया गया: "२४. कवद्वान अकिवक्ता द्वारा यह िहा गया कि यह अकिसूिना (आर-6) िानून में अनुकित है और अकिकनयम ि िारा 4, 5-ए और 6 ि े प्राविानोीं पर आिाररत है, इसे स्व िार नह ीं किया जा सिता है । गजानम बनाम मध्यप्रदेश राज्य, एआईआर 2000 एमप 2 ि े वाद में, इस अदाित ि खण्डप ठ ने समान दि ि िा खींडन किया कि इस तरह ि सींतुकि ििेक्टर / आयुक्त द्वारा ि गई ि, न कि राज्य सरिार द्वारा, इस आिार पर अकिग्रहण िो िुनौत नह ीं द जा सित कि 'उपयुक्त सरिार' द्वारा सींतुकि नह ीं ि गई ि । सरिार िा िायव राज्यपाि ि े नाम में किया जाना वाींकछत है, यह सींभव या व्यवहारपरि नह ीं है कि ऐसे सभ िायव उनि े द्वारा या मींकिपररिद द्वारा कनपर्ाए गए होीं। गजानन (पूवोक्त) में, यह अकभकनिावररत किया गया है:- "३३. मध्यप्रदेश राज्य में, राज्यपाि ने िायव ि े कनयम और िायव ि े आवींर्न ि े कनयम बनाए िे और इसि े तहत कनदेश भ जार किए िे। BAR ि े कनयम 4 ि े अींतगवत, उसने राजस्व कवभाग िो एि मींि ि े अींतगवत रखा िा। उसने भूकम अकिग्रहण िायव िो आगे राजस्व कवभाग िो आवींकर्त िर कदया िा। राजस्व मींि िो िायव कनयमोीं ि े कनयम 13 पूरि अनुदेशोीं ि े कनयम 2-ए ि े अींतगवत कवभाग ि े सकिव िो किस भ िायव ि े कनपर्ान ि े किए प्रत्यायोजन हेतु अकिि ृ त किया गया िा। इस तरह, सरिार ने िायव आवींर्न कनयमोीं ि प्रकवकि ४९ ि े सींदभव में घोिणा ि ि कि सामान्य प्रशासन कवभाग पदेन अकििार योीं िो नाकमत िरने िा अकििार होगा और इसि े तहत सरिार ि ओर से भूकम अकिग्रहण मामिोीं में कनणवय िेने ि े किए राजस्व आयुक्तोीं और ििेक्टरोीं िो पदेन सकिवोीं / उप सकिवोीं ि े रूप में अकिसूकित किया गया िा। यह दशावता है कि भूकम अकिग्रहण ि े कविय से कनपर्ने ि शन्तक्त राजस्व कवभाग ि े सकिव / उप सकिव या किस अन्य व्यन्तक्त ति कवस्ताररत ि, कजसे इस उद्देश्य ि े किए पदेन घोकित / कनयुक्त / नाकमत किया गया िा और एि बार ऐसे कनयुक्त पदेन सकिव (राजस्व आयुक्त) िो पूरि अनुदेशोीं ि े कनयम 2-ए ि े अींतगवत प्रभार मींि द्वारा भूकम अकिग्रहण मामिोीं िो कनपर्ाने ि े किए िहा गया िा, उसने ऐसे मामिोीं िो कनपर्ाने ि े किए क्षेि अकििार ग्रहण िर किया और उनि े सभ िायव और कनणवय सरिार ि े हो गए। २५. ऐसेअकििार ि े प्रत्यायोजन ि े प्रश्न िा उिर गजानन (पूवोक्त) में कनम्नानुसार कदया गया है: “३३ि. पदेन सकिव (राजस्व आयुक्त) िो सशक्त िरने ि े किए मींि िा आदेश अमान्य िा क्ोींकि यह शासि य आदेश नह ीं िा और यह कि उसि े द्वारा ऐस शन्तक्त प्रत्यायोकजत नह ीं ि जा सित ि, यह सुझाव देने ि े किए श्र असुदान िा ए. आई.आर. 1957 मद्रास 48 पर भरोसा पूणवतः गित है। यह सि है कि किस मींि िा कनदेश या आदेश शासि य आदेश िा स्वरूप तब ति ग्रहण नह ीं िरता है जब ति कि उसे िायव ि े कनयमोीं ि े अनुरूप औपिाररि रूप नह ीं कदया जाता है, िेकिन वतवमान वाद में राजस्व आयुक्त में अपेकक्षत शन्तक्त कनकहत िरने ि े किए ऐसे किस शासि य आदेश िो पाररत िरने ि आवश्यिता नह ीं ि । यह िहना भ भ्रामि है कि मींि ऐस अकििार प्रत्यायोकजत नह ीं सिते क्ोींकि ि े वि राज्यपाि ह ऐसा िर सिते हैं। एि बार जब राज्यपाि ने स्वयीं मींि िो यह अकििार कदया िा कि वह सकिव िो कनयमोीं ि े अींतगवत िायव ि किस भ िायव ि े किए िह सिता है, तो यह स्वयीं राज्यपाि द्वारा शन्तक्त ि े प्रत्यायोजन ि े समान िा। हम इस बात से भ प्रभाकवत नह ीं हैं कि ऐस शन्तक्त ि े वि एि सकिव िो द जा सित है, जो शायद कवभाग िा सकिव हो। यह एि ऐस न्तथिकत ि उपेक्षा िरता है जहाीं एि कवभाग में एि से अकिि सकिव हो सिते हैं और मींि उनमें से किस िो भ शन्तक्त प्रत्यायोकजत िर सिते हैं। २६. दृिाींत वाद में, कजिाि श ने उपयुक्त सरिार ि शन्तक्त िा प्रयोग किया है और उप कजिाि श ने आपकियोीं िो अग्रेकित किया है और कजिाि श िो ररपोर्व प्रस्तुत ि है और कजिाि श ने िारा 6 ि े अींतगवत शन्तक्त िा प्रयोग किया है, मुझे इसमें िोई अनौकित्य नह ीं कमिा है।" १२.३ दृिाींत वाद में भ, जब कजिाि श ने उपयुक्त सरिार ि शन्तक्त िा प्रयोग किया है और अकिकनयम ि िारा 5 ि अींतगवत आपकियोीं सम्बन्ध प्रकतवेदन पर कविारोपराींत, अकिकनयम ि िारा 6 ि े अींतगवत घोिणा जार ि है, उच्च न्यायािय ने पूवोक्त आिार पर सींपूणव अजवन िायववाकहयोीं िो अकभखींकडत िरनेऔर रद्द िरने ि गींभ र िुकर् ि है। १३. जहाीं ति त सरे आिार िा सींबींि है, कजस पर योजना और सींपूणव अकिग्रहण िायववाकहयोीं िो अपास्त किया है, अिावत्, जहााँ ति कविास प्राकििरण द्वारा अकिग्रकहत ि जाने वाि ि ु ि भूकम ि े कवशाि और ब़िे कहस्से िा सींबींि है, कजसे मुक्त किया जा िुिा है, यह ध्यान देने ि आवश्यिता है कि अकिग्रकहत ि गई ि ु ि भूकम में से 68.11 प्रकतशत भूकम िा कविास किया गया है और न्यायाियोीं द्वारा पाररत अींतररम आदेशोीं ि े िारण 31.89 प्रकतशत िा कविास नह ीं किया गया है। अन्यिा भ, यह ध्यान कदया जाना आवश्यि है कि इस योजना अींतगवत आने वाि ि ु ि भूकम 332.616 हेक्टेयर (अवाडव द्वारा प्राप्त 277.853 हेक्टेयर भूकम और प्राकििरण ि े स्वाकमत्व वाि 44.763 हेक्टेयर भूकम) में से 54.660 हेक्टेयर क्षेि ति भूकम कवकभन्न प्रयोजनोीं ि े किए मुक्त गई है और अन्यिा भ बि हुई भूकम 267.956 हेक्टेयर क्षेि ति होग, कजसमें से वतवमान अप ि में शाकमि भूकम 85.430 हेक्टेयर क्षेि ति होग । कविास प्राकििार ि े अनुसार, योजना ि े अींतगवत 111.156 हेक्टेयर भूकम िो, आवास सहिार सकमकतयोीं ि े पक्ष में मुक्त किया गया िा, क्ोींकि आवास य सकमकतयोीं और योजना िा उद्देश्य एि ह िा। कविास प्राकििार ि े अनुसार प्राकििार / राज्य सरिार ने ि े वि उन् ीं सकमकतयोीं ि भूकम मुक्त ि ि, कजन्ोींने अकिकनयम ि िारा ५० (७) अींतगवत, अींकतम योजना ि े प्रिाशन ि े पूवव िॉिोन कविकसत िर ि या कविास शुरू किया िा या भूकम िा हि हाकसि किया िा या अबवन िेंड (स किींग एीं ड रेगुिेशन) एक्ट १९७६ ि िारा 20 ि े अींतगवत छ ू र् प्राप्त ि ि । कविास प्राकििार ि े अनुसार, इस योजना ि े अींतगवत 104.524 हेक्टेयर भूकम, कजसे इस योजना से मुक्त रखा गया िा, िा उपयोग या तो ि ृ कि या क्षेि य पाि व िा। ि ु छ िारणोीं जैसे मौजूदा मिान, िाकमवि थिि, कवकभन्न भूकम प्रयोजन आकद ि े िारण, ४६.११६ हेक्टेयर क्षेिफि ि भूकम मुक्त िरना, अकिकनयम ि िारा ५ ए ि े अींतगवत आपकियोीं ि े प्रत्युिर में िा। १३.१ इस प्रिार, उपरोक्त से, यह नह ीं िहा जा सिता है कि भूकम मुक्त िरना मनमाना िा और / या उन व्यन्तक्तयोीं ि े किए अनुकित पक्ष ि े उद्देश्य से िा, कजनि भूकम जार ि गई है। जैसा कि सह रूप से प्रस्तुत किया गया है कि आवास य पाि व और औद्योकगि उद्देश्योीं ि े किए ऐस भूकम िा अन्यिा अकिग्रहण किया जाना िा, जो कि प्राकििार अनुसार वैि िारणोीं या वैि आिारोीं ि े किए, भूकम िो मुक्त िरना, पूवावग्रकहत या योजना ि अखींडता पर प्रभाव नह ीं है। ि ु छ भूकम मुक्त िरने िा अींकतम पररणाम यह होता है कि योजना िा ि ु ि क्षेि उस स मा ति िम होता है िेकिन योजना ि अखींडता समान रहत है। इस स्तर पर, यह ध्यातव्य है कि ि ु छ भूकम िा उपयोग प्राकििार द्वारा पहिे से ह एि उद्यान ि े किए किया गया है कजसिा उपयोग थिान य िोगोीं ि े िाभ हेतु किया जाता है । पररन्तथिकतयोीं में, तृत य आिार कजस पर उच्च न्यायािय द्वारा योजना और पूणव अकिग्रहण िायववाह िो रद्द िर कदया गया है, अपने आिार पर अविन्तम्बत नह ीं होता है और यह कनष्किव अरक्षण य है। १४. उपरोक्त िो ध्यान में रखते हुए और उपरोक्त िारणोीं से, वतवमान अप िें स्व िार ि जात है और ररर् अप िोीं िो व एिि न्यायाि श ि े अकिकनयम ि िारा ५४ ि े अींतगवत योजना ि ९७ िो व्यपगत घोकित िरने वािे सामूकहि कनणवय एवीं आदेश िो रद्द िरने वािे तिा प्रश्नगत भूकमयोीं से सींबींि भू अकिग्रहण ि सींपूणव िायववाकहयाीं रद्द और अपास्त िरने वािे उच्च न्यायािय द्वारा पाररत, आक्षेकपत सामूकहि कनणवय एवीं आदेश, अरक्षण य हैं और इन्ें रद्द व अपास्त किया जाना िाकहए और तदनुसार रद्द और अपास्त किया जाता है। हािााँकि वाद ि े तथ् और पररन्तथिकतयााँ में व्यय ि े बारे में िोई आदेश नह ीं होगा।................न्यायाि श [एम. आर. शाह]........न्यायाि श [ब. व. नागरत्न] नई कदल्ल 0३ मािव, २0२३.