The State of Uttar Pradesh v. J. R. Oxygen Limited

Supreme Court of India · 01 Mar 2023
S. Ravindra Bhat; D. Pankaj
Civil Appeal No. 8502 of 2009
tax appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court upheld the excise valuation based on the highest price fixed at a comparable unit, affirming that 'wholesale cash price' means the trade price in bulk sales, thereby dismissing the appellant's challenge to the valuation method.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 8502/2009
क य आयोग क
े आयु , इलाहाबाद …अपीलाथ (गण)
बनाम
मेसस जे. आर. ऑगिन स िलिमटेड. … ितवाद (गण)
िनणय
एस. रवीं भाट, या.
JUDGMENT

1. राज व ने यह अपील सीमा शु क और सेवा कर अपीलीय यायािधकरण (सीईएसट एट ), धान पीठ, नई द ली दनांक 27.07.2009 क े आदेश से यिथत होकर दायर क है। सीईएसट एट ने िस.अ सं 4975/2002 म इस अदालत ारा ित ेषण आदेश पर अपना आदेश दनांक 12.11.2007 को दया था।

2. यथ -िनधा रती जै वक रसायन का उ पादन करता है जसक े िलए वह अ य व तुओ क े साथ उ प न होने वाली वकृ त प र स (इसक े बाद ‘एसड एस’)को अपनी क ानगंज, उ र देश थत इकाई से ा करता है l एस. ड. एस. क े िनमाण क े िलए आव यक क चे माल म से एक काकवी है। िनधा रती को िन निल खत अविध क े िलए तीन कारण बताओ नो टस जार कए गए थेः-. सं. कारण बताओ नो टस सं. न दनाक ं अविध विभ न शु क

1. सी.सं. व आई(एमपी) डमांड (12)एड जे - 116/98/3149 द. 26.3.99-एससीएन सं. 12/कोमार. -एयूड - -99/26.3.99 94 अ ैल से फरवर.,99.14,5949,158.65

2. सी.सं.20 सीई /सोमाया /एसबीजेड/99 550 द. 31.8.99 माच, 99 से जुलाई, 99. 25,12,528/-

3. सी.सं.20-सीइ /सोमाया /एसबीजेड /61 द. 18.1.2000 अग त, 99 से दस बर, 99.4,99,417/-

3. यथ -िनधा रती ने तक दया क क य उ पाद शु क िनयम, 1994 क े िनयम 6(पी)(ii) क े संदभ म उिचत मू यांकन पर, एसड एस का मू य क ानगंज म इसक े आंत रक उ पादन क े आधार पर िनधा रत कया जा सकता है। तथा प, मूल प म आदेश, अ यथा अिभिनधा रत करता है,जो कारण बताओ नो टसो म रखी गई मांग क पु करता है l चूं क पहले कारण बताओ नो टस म एक व ता रत अविध शािमल थी, इसिलए जुमाना भी लगाया गया था। इससे यिथत होकर, िनधा रती ने सीईएसट एट से संपक कया, जसने अपने दनांक 20.02.2002 क े आदेश ारा अपील क अनुमित देते हुए कहा क आयु ारा अपनाई गई विध गलत थी। आयु ने एसड एस का मू य िनधा रत करने क े उ े य से, एक विश ितिथ पर सराय जले, गोरखपुर म एक अ य इकाई म या एसड एस क े उ पाद क उ चतम दर िनधा रत क थी।

4. राज व क अपील को इस यायालय ारा अनुमित द गई थी, जसने मामले को नए िसरे से वचार क े िलए भेज दया, अ य बातो क े अलावा, यह देखते हुए क क े वल उ चतम दर क अ वीकृ ित अपया थी और यायालय को मू याक ं न अिधकार क े याियक ववेक क े आधार पर िनणय लेना था क या कए गए िनधारण म अ य बात क े साथ साथ कोई तकसंगतता थी और मू यांकन क उिचत प ित या थी ।

5. ित ेषण आयो जत होने क े बाद दूसरे दौर म सीईएसट एट अ य बात क े साथ-साथ, अिभलेख पर सा य पर वचार करने क े बाद इस कार हैः "माल क सामा य क मत वह क मत है जस पर सामान को थोक यापार क े दौरान 'सामा य प से' बेचा जाता है, यह थोक यापार क े दौरान एक कार का ितिनिध मू य है। यह एक वशेष अविध क े दौरान माल का एक कार का ितिनिध मू य है। ए.क े. रॉय व अ य बनाम वो टास िलिमटेड (उपयु ) क े मामले म माननीय सव च यायालय ने अ नुछेद '19' म िनणय म कहा क उस क मत का िनधारण करते समय जो कर लगाए जाने वाले माल क े वा त वक मू य का ितिनिध व करती है, क मत हर मामले म संतुिलत होनी चा हए। इसिलए, िनयम 6 (ख)(i) को लागू करक े आब उपभोग क े िलए मंजूर दे द गई, व तुओं क क मत का िनधारण करते समय, उसी िनधा रती या अ य िनधा रितयो क तुलनीय व तुओं क क मत क े आधार पर, सबसे संतुिलत क मत को अपनाया जाना चा हए, न क उ चतम क मत को यो क यह सामा य क मत का गुण खो देगाl”

6. राज व क े व ान अिधव ा ने तुत कया क सीईएसट एट ने आयु क े इस ढ़ संक प को वीकार नह ं कया क माल का मू य िनयम 6(ख )(i) क े तहत ठ क से िनधा रत कया गया था। उ ह ने तुत कया क उस ावधान म उ ल खत विभ न घटक को देखते हुए, राज व भौितक वशेषताओं और माल क े िनकटतम पता लगाने यो य मू य जैसे कारक क े आधार पर मू य तय करने क े िलए बा य था। इन प र थितय को देखते हुए, गोरखपुर क सराय ड टलर म कसी वशेष दन (जब यह अपनी उ चतम क मत पर थी) माल क े मू य पर खुद को आधा रत करने क े िलए आयु ारा योग कया गया ववेकािधकार वैध और कानूनी था।

7. प कार क े अिभलेख और तुितय पर वचार करने क े बाद, इस यायालय क राय है क आ े पत आदेश को गलत नह ं ठहराया जा सकता है। इस यायालय ने अपने फ ै सले म ‘ए.क े. रॉय बनाम वो टास िलिमटेड’ को इस कार अिभिनधा रत कया l "21. अगला सवाल हैः 'थोक नकद मू य' श द का वा तव म या अथ है? वै यूम ऑयल क ं पनी बनाम काउंिसल म भारत क े रा य सिचव म, यह अिभिनधा रत कया गया था क इस श द का अथ है थोक खर द पर खुदरा यापा रय ारा भुगतान क गई क मत। वचार का सार यह है क खर द थोक खर द होनी चा हए न क खुदरा खर द । दूसरे श द म, ब थोक होनी चा हए न क खुदरा, ता क ा क मत को थोक नकद मू य कहा जा सक े । आदेश उस मामले म वी काउंिसल क े सम अपीलकताओं ने बॉ बे म एक वशेष उ पादन और ांड क े ीस क बहुत बड़ मा ा का आयात कया। उ ह ने इसे सीधे कई ाहक को बेच दया, कभी भी ड लर को नह ं। चाहे बड़ या छोट मा ा म खर दा गया हो, उनक े ारा ली गई क मत समान थी, िसवाय इसक े क य द कोई उपभो ा उनसे एक वष क े िलए अपनी सभी आव यकताओं को खर दने का अनुबंध करता है, तो वह वष म खर द गई मा ा क े अनुसार 2-1/2 से 15 ितशत तक क छ ू ट का हकदार था। ब बई म इसी तरह का और गुणव ा का कोई अ य ीस नह ं बेचा गया था। इस सवाल पर क या अपीलकता समु सीमा शु क अिधिनयम, 1878 क धारा 30 क धारा (अ ) अथवा धारा (ख ) क े आधार पर सीमा शु क का भुगतान करने क े िलए बा य था, वी काउंिसल ने कहा क चूं क ब ाहक को य थी, इसिलए माल का वा त वक मू य धारा 30 क धारा (अ) क े तहत िनधा रत नह ं कया जा सकता है और धारा 30 क वह धारा (ख) लागू थी । उनक े यायाधीश ने कहा क उस क मत को िनधा रत करने म जो 'कर' लगाए जाने वाले माल क े वा त वक मू य का ितिनिध व करती है, क मत हर मामले म संतुिलत होनी चा हए और वशेष प से माल क े संबंध म कए गए कसी भी आयात क े बाद क े शु क क े िलए कसी भी लो डंग से मु होनी चा हए।" क मत माल क क मत होनी चा हए जैसे वे दोन आयात क े ‘समय’ और ‘ थान’ पर है । यह एक 'नकद मू य' होना चा हए, जसका अथ है कसी खर दार को ऋण अथवा अ य लाभ क े िलए कसी भी वृ से मु मू य; यह एक िनवल क मत होनी चा हए, जसका अथ है क यह एक ' यून यापार छ ू ट' है।’’ उनक े यायधीश ने, इसिलए, अिभिनधा रत कया क 'थोक मू य' श द का उपयोग खंड म 'खुदरा मू य' क े वपर त कया गया था, और यह क न क े वल इस तरह क े श द का एक अ छ तरह से मा यता ा अथ है, ब क य क ' यापार छ ू ट' श द क े साथ उनका जुड़ाव इंिगत करता है क यापार क े िलए ब वे ह जो वचार म ह, और यह भी क क े वल इस श द क े साथ उस अथ को जोड़ने से आयात क े बाद क े खच का ितिनिध व करने वाले लो डंग से मु 'थोक मू य' है, जसे यवसाय क े मामले म हमेशा उपभो ा से िलया जाना चा हए, और ज ह समा कर दया जाता है।"

8. जैसा क वो टास िलिमटेड (उपयु ) म प है ने पछले ािधका रय का हवाला दया था जैसे 'वै यूम ऑयल क ं पनी बनाम भारत क े रा य सिचव' और ‘यूिनयन ऑफ इं डया बनाम द ली लॉथ एंड जनरल िम स ।

9. इस यायालय ारा ितपा दत प िस ांत को यान म रखते हुए, जो यह है क व तुओं क े मू य का िनधारण करते समय सबसे संतुिलत मू य को यान म रखा जाना चा हए, सीईएसट एट कोण और िन कष, क राय म इस यायालय को दोष नह ं दया जा सकता है। तदनुसार सीईएसट एट क े आ े पत आदेश क पु क जाती है।

10. इसिलए, यािचका खा रज क जाती है। लागत क े बारे म कोई आदेश नह ं होगा। लं बत आवेदन(ओ ), य द कोई ह, का िनपटारा कर दया जाएगा। ……………………………… या. [एस.रवीं भाट] …………………………… या. [द पांकर द ] नई द ली; 1 माच, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।