Vivek Rathi v. Uttar Pradesh State & Ors.

Supreme Court of India · 01 Mar 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bindal
Appeal No. 644/2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that the power to summon an additional accused under Section 319 CrPC must be exercised only on strong prima facie evidence and set aside the High Court's order remanding the case for fresh investigation, restoring the trial court's rejection of the application.

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Translation output
(प्रति वेद्य)
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या - 644/2023
विवकास राठी ... अपीलार्थी)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ...प्रत्यर्थी)
विनर्ण4य
न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल,
JUDGMENT

1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 16.05.2017 क े आदेश को इस न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी गई है। उपरोक्त आदेश क े द्वारा, प्रत्यर्थी) संख्या 2 क े द्वारा आदेश विदनांविक 15.03.2017 को चुनौ ी दे े हुए आपराति क पुन4विवचार यातिचका दायर की गइ[4] जिजसे भार ीय दण्ड संविह ा की ारा 319 क े ह व 4मान अपीलार्थी) को सम्मन विकया गया र्थीा जिजसको खारिरज कर विदया गया।

2. उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश क े माध्यम से विदनांविक 15.03.2017 आदेश को रद्द कर विदया और मामले को नए जिसरे से जांच क े लिलए विनचली अदाल में वापस भेज विदया।

3. अपीलक ा4 क े विवद्वान अति वक्ता ने प्रस् ु विकया विक अपीलक ा4 ने वर्ष[4] 2003 में उपकरर्णों क े विनमा4र्ण का अपना व्यवसाय स्र्थीाविप विकया। प्रत्यर्थी) नं. 2 अपने vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भाई बच्चू प्रसाद की हत्या क े बारे में एक शिशकाय दज[4] की। उसमें यह उल्लेख विकया गया र्थीा विक वह अपीलार्थी) की फम[4] में काम कर ा र्थीा। उपरोक्त शिशकाय क े आ ार पर, प्रार्थीविमकी सं. 480/2013 अज्ञा व्यविक्तयों क े लिखलाफ दज[4] विकया गया र्थीा। शिशकाय क े लगभग दो महीने बाद, मृ क की पत्नी ने अपीलक ा4 क े लिखलाफ झूठे आरोप लगा े हुए पुलिलस अ ीक्षक, गाजिजयाबाद को शिशकाय की। अपीलक ा4 को जाँच अति कारी द्वारा नोविbस विदए गए र्थीे। माँगी गई पूरी जानकारी उनक े द्वारा प्रस् ु की गई र्थीी। जाँच क े दौरान, पुलिलस को कशिर्थी हत्या का एक चश्मदीद गवाह राजेश क ु मार विमला, जिजसका बयान दंड प्रविdया संविह ा की ारा 164 क े ह दज[4] विकया गया। अपीलक ा4 क े लिखलाफ शिशकाय कर े समय शिशकाय क ा4 ने उपरोक्त थ्य को शिfपा विदया र्थीा।....जाँच पूरा होने क े बाद, पुलिलस ने दो अशिभयुक्त व्यविक्तयों पन्नेलाल उफ 4 पन्ना लाल और ओमबीर सिंसह क े लिखलाफ आरोप पत्र दायर विकया। अपीलक ा4 अशिभयोजन पक्ष क े गवाह क े रूप में सूचीबद्ध र्थीा। मुकदमे क े दौरान विवशिभन्न गवाहों क े बयान दज[4] विकए गए। यहां क विक अपीलक ा4 से भी पी. डब्ल्यू. 6 क े रूप में पूf ाf की गई र्थीी। विकसी भी गवाह ने अपीलक ा4 क े लिखलाफ क ु f नहीं कहा। अपीलक ा4 (पीडब्लू) का बयान दज[4] होने क े बाद, शिशकाय क ा4 ने सी.आर.पी.सी की ारा 319 क े ह एक आवेदन दायर विकया विक क े वल पीडब्लू1, पीडब्लू2 और पीडब्लू3 द्वारा क ु f अस्पष्ट मौलिखक आरोपों क े आ ार पर अपीलक ा4 को अशिभयुक्त क े रूप में सम्मन विकया जाये। दलीलें सुनने क े बाद, विवचारर्ण न्यायालय ने विदनांक 15.03.2017 क े आदेश क े माध्यम से उपरोक्त आवेदन को खारिरज कर विदया। यह उपरोक्त आदेश है, जिजसे इस न्यायालय क े समक्ष व 4मान अपील में चुनौ ी दी गई है।

4. अपीलक ा4 क े लिलए विवद्वान अति वक्ता का क 4 यह है विक मामले को नए जिसरे से जांच क े लिलए वापस भेजने में उच्च न्यायालय का दृविष्टकोर्ण सही नहीं र्थीा क्योंविक विवशिभन्न गवाहों क े बयानों क े रूप में उपलब् सामग्री यह प ा लगाने क े लिलए पया4प्त vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd र्थीी जिजससे ममाले का अवलोकन विकया जा सक ा है विक क्या अपीलक ा4 क े लिखलाफ Cr.P.C की ारा 319 क े ह समन भेजने क े लिलए कोई मामला बन ा है। यह क े वल संदेह नहीं है जिजसक े आ ार पर एक अन्य आरोपी को लब विकया जा सक ा है। क े वल वहाँ जहाँ न्यायालय क े समक्ष प्रस् ु साक्ष्य से विकसी व्यविक्त क े लिखलाफ मजबू और ठोस साक्ष्य उपलब् हो, जिजससे उसे दोर्षजिसतिद्ध हो सक ी है, ब ऐसी शविक्त का प्रयोग विकया जा सक ा है। इसका प्रयोग आकस्मिस्मक और लापरवाही रीक े से नहीं विकया जा सक ा र्थीा।

5. इसकी अनुपस्मिस्र्थीति में, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को दरविकनार विकया जाना चाविहए और आवेदन को खारिरज कर े हुए विनचली अदाल द्वारा पारिर आदेश को बरकरार रखा जाना चाविहए। अपने कz क े समर्थी4न में, हरदीप सिंसह और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य (2014) 3 एससीसी 92, मो. शफी बनाम. मो. रफीक (2007) 14 एससीसी 544; सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2022) 6 एससीसी 389; क ै लाश बनाम. राजस्र्थीान राज्य और अन्य (2008) 14 एससीसी 51 में इस अदाल क े विनर्ण4यों पर अवलम्ब लिलया गया र्थीा।

6. उन्होंने आगे कहा विक जिजस स् र पर शिशकाय क ा4 द्वारा अपीलक ा4 को एक अन्य आरोपी क े रूप में बुलाने क े लिलए आवेदन दायर विकया गया र्थीा, मुकदमा समाप्त होने वाला र्थीा क्योंविक पूरे साक्ष्य का ने ृत्व विवचारर्ण न्यायालय क े विदनांक 06.10.2017 क े फ ै सले क े अनुसार विकया गया र्थीा, जिजन अशिभयुक्तों क े लिखलाफ आरोप पत्र दायर विकया गया र्थीा, उन्हें भी बरी कर विदया गया र्थीा।अशिभयोजन पक्ष द्वारा विनचली विवचारर्ण न्यायालय क े समक्ष पेश विकए गए अस्पष्ट साक्ष्य क े आ ार पर अपीलक ा4 को लब करने की मांग की गई र्थीी। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

7. दूसरी रफ, राज्य क े विवद्वान अति वक्ता और शिशकाय क ा4 ने प्रस् ु विकया विक अपीलक ा4 को अति रिरक्त अशिभयुक्त क े लिलए उसक े लिखलाफ एक स्पष्ट मामला बनाया गया र्थीा। विनचली विवचारर्ण न्यायालय अपने अति कार क्षेत्र का प्रयोग करने में विवफल रही र्थीी। इसमें कोई संदेह नहीं है विक उच्च न्यायालय इसे ठीक कर सक ा र्थीा लेविकन मामले को वापस भेज विदया गया। पहले से दज[4] सामग्री को ध्यान में रखा जा सक ा र्थीा। यविद ऐसा हो ा, ो अपीलक ा4 को अन्य अशिभयुक्तों क े सार्थी मुकदमे का सामना करना पड़ ा या यहां क विक अलग से भी मुकदमा चलाया जा सक ा र्थीा। हालाँविक, यह थ्य यह र्थीा विक जिजन अशिभयुक्त व्यविक्तयों क े लिखलाफ आरोप पत्र दायर विकया गया र्थीा, उन्हें विदनांक 06.10.2017 क े फ ै सले क े माध्यम से बरी कर विदया गया र्थीा, विववाविद नहीं है।

8. पक्षों की ओर से उपस्मिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता को सुना और पेपर बुक का अध्ययन विकया।

9. Cr.P.C की ारा 319 क े ह अति कार क्षेत्र क े प्रयोग क े संदभ[4] में कानून क े जिसद्धां, अच्fी रह से व्यवस्मिस्र्थी हैं।

10. हरविदप सिंसह और अन्य क े मामले (उपरोक्त) में संविव ान पीठ ने विनम्नलिललिख राय दीः “105. दंड प्रविdया संविह ा की ारा 319 क े अ ीन शविक्त एक विववेका ीन और असा ारर्ण शविक्त है। इसका प्रयोग संयविम ढंग से और क े वल उन्हीं मामलों में विकया जाना चाविहए जहां मामले की परिरस्मिस्र्थीति यां इसकी गारंbी दे ी हैं। इसका प्रयोग नहीं विकया जाना चाविहए क्योंविक मजिजस्b्रेb या सत्र न्याया ीश की राय है विक कोई अन्य व्यविक्त भी उस अपरा को करने का अपरा ी हो सक ा है।क े वल वहां जहां न्यायालय में समक्ष प्रस् ु विकए गए साक्ष्य से विकसी व्यविक्त क े विवरुद्ध मजबू और ठोस साक्ष्य हो ो ऐसी शविक्त का प्रयोग विकया जाना चाविहए न विक अनौपचारिरक और बे र ीब रीकों से उक्त शविक्तयों का उपयोग करना चाविहए। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

106. इस प्रकार हम मान े हैं विक हालांविक न्यायालय क े समक्ष रखे गए साक्ष्य से क े वल एक प्रर्थीमदृष्टया मामला स्र्थीाविप विकया जाना है, आवश्यक रूप से प्रति परीक्षा क े आ ार पर परीक्षर्ण नहीं विकया गया है, इसक े लिलए बहु मजबू सबू की आवश्यक ा है विक उसकी संलिलप्त ा की लगभग संभावना है। परीक्षर्ण जिजसे लागू विकया जाना है वह आराेप य कर े समय प्रयोग विकये जाने प्रर्थीमदृष्टया मामला से कही अति क है लेविकन सं ुष्टी की सीमा से कम है यविद साक्ष्य अपया4प्त है ो यह दोर्षजिसद्घी की रफ ले जायेगा। इस रह की सं ुविष्ट की अनुपस्मिस्र्थीति में में, न्यायालय को दंड प्रविdया संविह ा की ारा 319 क े ह शविक्त का प्रयोग करने से बचना चाविहए। (प्रभाव वर्ति )

11. सागर क े मामले (उपरोक्त) में, यह विनम्नानुसार कहा गया हैः “9. संविव ान पीठ ने चे ावनी दी है विक संविह ा की ारा 319 क े ह शविक्त एक विववेका ीन और असा ारर्ण शविक्त है जिजसका प्रयोग संयविम रूप से और क े वल उन मामलों में विकया जाना चाविहए जहां मामले की परिरस्मिस्र्थीति यां इ नी जरूरी हों और ऊपर विदए गए नोविbस क े अनुसार महत्वपूर्ण[4] परीक्षर्ण करना हो। लागू वह है जो आरोप य करने क े समय विकए गए प्रर्थीम दृष्टया मामले से अति क है, लेविकन इस हद क सं ुविष्ट की कमी है विक सबू, अगर अप्रमाशिर्ण हो जा े हैं, ो दोर्षजिसतिद्ध हो जाएगी…।"

12. यविद अशिभयोजन पक्ष द्वारा पहले से ही प्रस् ु साक्ष्य को इस न्यायालय की संविव ान पीठ द्वारा हाड)प सिंसह और अन्य मामलों में विन ा4रिर कानून की कसौbी पर माना जा ा है। उपरोक्त मामला, संदेह से परे नहीं जा ा है। इस घbना का कोई प्रत्यक्षदश) गवाह नहीं है। पीडब्लू2 (मृ क क े भाई) द्वारा जो क ु f भी कहा गया है वह यह है विक मृ क जो प्रबं क क े रूप में अपीलक ा4 क े सार्थी काम कर रहा र्थीा, हालांविक शिशकाय क ा4 द्वारा भागीदार होने का दावा विकया गया र्थीा, विक अपीलक ा4 और मृ क क े बीच पैसे क े संबं में क ु f विववाद र्थीा। राजेश शमा4 जिजनका बयान पुलिलस ने Cr.P.C की ारा 164 क े ह दज[4] विकया र्थीा। पी. डब्ल्यू. 5 क े रूप में न्यायालय में पेश होने क े दौरान भी वे वहां से पीfे हb गए। उन्होंने कहा विक पुलिलस ने इसे विकसी झूठे मामले में फ ं साने की मकी क े ह दज[4] विकया है उन्होंने अपीलक ा4 की ओर कोई उंगली भी नहीं उठाई। बस्मिल्क वह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd हत्या क े बाद मृ क क े घर जाने वाले पहले व्यविक्त र्थीे और अपीलक ा4 को वहां पहुंचने क े लिलए सूतिच विकया। वह मृ क क े परिरवार क े सार्थी अंशकालिलक रसोइये क े रूप में काम कर रहा र्थीा। अशिभलेख पर लाई गई विकसी भी सामग्री क े विबना, मृ क की विव वा ने क े वल यह कहा विक उसे यकीन है विक अपीलक ा4 ने उसक े पति की हत्या की र्थीी क्योंविक कोई अन्य दुश्मन नहीं र्थीा।मृ क क े भाइयों में से एक, जो पीडब्ल्यू 1 क े रूप में उपस्मिस्र्थी हुआ, जो मौक े पर मौजूद नहीं र्थीा, ने अपीलक ा4 क े लिखलाफ एक भी शब्द नहीं बोला।

13. यविद इस न्यायालय द्वारा Cr.P.C की ारा 319 क े ह शविक्त का प्रयोग कर े हुए एक अति रिरक्त आरोपी को बुलाने क े लिलए विन ा4रिर कानून क े आलोक में जांच की जा ी है ो उपरोक्त सामग्री अपरा में अपीलक ा4 की संलिलप्त ा स्र्थीाविप करने पया4प्त नहीं र्थीी।

14. अशिभयुक्त अशिभयुक्त क े लिखलाफ भी अशिभलेख पर प्रस् ु सामग्री क े पूरे साक्ष्य और परीक्षर्ण क े समापन क े बाद, विनचली विवचारर्ण न्यायालय ने उन्हें विदनांक 15.03.2017 क े फ ै सले क े माध्यम से बरी कर विदया र्थीा।इससे प ा चल ा है विक अशिभलेखों पर उपस्मिस्र्थी सामग्री उस अशिभयुक्त को दोर्षी ठहराने क े लिलए भी पया4प्त नहीं र्थीी जिजसक े लिखलाफ आरोप पत्र दायर विकया गया र्थीा।

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15. पक्षकारों की ओर से उपस्मिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता द्वारा उठाई गई दलीलों में से एक यह र्थीी विक व 4मान मामले में, उच्च न्यायालय ने पक्षकारों द्वारा साक्ष्य क े रूप में रिरकॉड[4] पर रखी गई सामग्री का परीशीलन करने क े बजाय यह प ा लगाने क े लिलए विक क्या अपीलक ा4 को अति रिरक्त अशिभयुक्त क े लिलए कोई मामला बनाया गया र्थीा, मामले को नए जिसरे से विवचार क े लिलए विनचली विवचारर्ण न्यायालय को वापस भेज विदया।ऐसे मामले में रिरमांड का परिरर्णाम क े वल मुकदमेबाजी को लंबा करने में होगा।उच्च न्यायालय ने क े वल यह दज[4] विकया विक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आवेदन को अस्वीकार करने क े लिलए विनचली विवचारर्ण न्यायालय द्वारा विदए गए कारर्ण पया4प्त नहीं र्थीे।देरी से बचने क े लिलए, यह शविक्त का उतिच प्रयोग हो ा यविद उच्च न्यायालय सामग्री पर विवचार कर ा और यह राय दे ा विक क्या अति रिरक्त अशिभयुक्तों को बुलाने क े लिलए कोई मामला बनाया गया र्थीा।इस प्रकार पारिर आदेश में विनचली विवचारर्ण न्यायालय द्वारा जो भी कारर्ण दज[4] विकए गए हैं, हो सक ा है विक उन्हें उच्च न्यायालय की सं ुविष्ट क े अनुसार सही शब्दो का चयन नही विकया गया हो, लेविकन पुनरीक्षर्ण शविक्त का प्रयोग कर े हुए उस त्रुविb को ठीक विकया जा सक ा र्थीा।

16. ऊपर ब ाए गए कारर्णों क े द्वारा व 4मान अपील को अनुमति है।उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को दरविकनार कर विदया जा ा है और शिशकाय क ा4 द्वारा अपीलक ा4 को अति रिरक्त अशिभयुक्त क े लिलए दायर आवेदन को अपास् विकया जा ा है। ……………………….. न्यायमूर्ति अभय एस. ओका ……………………….. न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल नई विदल्ली; 01 माच[4], 2023. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd