Captain Pramod Kumar Bajaj v. Union of India & Ors.

Supreme Court of India · 03 Mar 2023
A. A. Bopanna; V. Ramasubramanian
Civil Appeal No 6161 of 2022
AIR 1967 SC 483
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the illegal retirement of a government officer under Rule 56(J) as a valid administrative action distinct from punitive disciplinary proceedings.

Full Text
Translation output
सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 1
प्रति ेद्य
भार ीय च्च न्यायालय क
े मक्ष
सि वि ल अपीलीय क्षेत्राति"कार
सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022

ै प्टन प्रमोद क
ु मार बजाज ......................अपीलक ा-
बनाम
भार ंघ और अन्य ...................... प्रत्यर्थी2गण
विन ण- य
माननीय न्यायमूर्ति वि7मा को7ली
JUDGMENT

1. अपीलक ा- 31 मई, 2022 को उच्च न्यायालय इला7ाबाद, लखनऊ खंडपीठ द्वारा पारिर विनण-य े व्यथिर्थी 7ै, सिज में क ें द्रीय प्रशा विनक न्यायाति"करण[1], क े प्र"ान पीठ द्वारा पारिर 9 विद ंबर, 2020 क े आदेश को बरकरार रखा गया र्थीा, सिज मे उनक े द्वारा दी चुनौ ी को माप्त कर विदया गया ए ं क ें द्रीय प्रत्यक्ष कर बोड-, राजस् वि भाग, वि त्त मंत्रालय, भार रकार द्वारा पारिर 27 सि ंबर, 1 ंक्षेप में 'न्यायाति"करण' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 2 2019 क े भार क े राष्ट्रपति क े आदेश क े 7 मूल अति"कार क े अनुच्छेद 56(J)J))2 की शवि[यों का प्रयोग कर े 7ुए उन्7ें अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े विनण-य की ूचना दी गई र्थीी। मामले क े थ्य

2. -मान मामले का एक उ ार-चढ़ा भरा इति 7ा र7ा 7ै सिज में अपीलक ा- और प्रत्यर्थी2 क े बीच कई दौर की मुकदमेबाजी 7ुई 7ै। इ मामले का अ लोकन करने क े लिलए, 7म -मान अपील पर विनण-य लेने क े लिलए प्रा ंविगक क ु छ थ्यों का ंक्षेप में उल्लेख कर क े 7ैं। अपीलक ा- भार ीय ेना में एक स्र्थीायी कमीशन अति"कारी र्थीा, सिज े र्ष- 1980 में विनयु[ विकया गया र्थीा। ेना क े एक ऑपरेशन क े दौरान े शारीरिरक रूप े वि कलांग 7ो गये सिज क े कारण उन्7ें ेना में े ा े मु[ कर विदया गया। र्ष- 1989 में, अपीलक ा- ने सि वि ल े ा परीक्षा उत्तीण- की। उन्7ें एक अति"कारी क े रूप में विनयु[ विकया गया र्थीा और भार ीय राजस् े ा में 1990 बैच क े 7 आ ंविट विकया गया र्थीा। अपनी े ा क े दौरान, अपीलक ा- को उच्च पदों पर पदोन्न विकया गया और 12 जन री, 2012 को उ े आयकर वि भाग में आयु[ क े पद पर पदोन्न विकया गया। 7 जुलाई, 2014 को, अपीलक ा- को भार क े त्कालीन मुख्य न्याया"ीश द्वारा नाविम च्च न्यायालय क े -मान न्याया"ीश की अध्यक्ष ा ाली चयन विमति द्वारा आयकर अपीलीय न्यायाति"करण[3] क े दस्य क े रूप में विनयुवि[ क े लिलए चुना गया और ूचीबद्ध विकया गया। 15 जुलाई, 2015 को, प्रति ाविदयों ने दस्य (J)लेखाकार), ITAT क े रूप में विनयुवि[ क े लिलए उनकी क - ा आयोग की मंजूरी क े ार्थी 2 ंक्षेप में '56(J)J))' 3 ंक्षेप में 'ITAT' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 3 अपीलक ा- का नाम मंवित्रमंडल की विनयुवि[ विमति 4 4 को भेज विदया। र्ष- 2016 में, अपीलक ा- को ए ी ी द्वारा भार रकार क े ंयु[ तिच क े रूप में विनयुवि[ क े लिलए ूचीबद्ध विकया गया र्थीा। र्ष- 2017 क े बाद े अपीलक ा- और प्रत्यर्थिर्थी क े बीच मुकदमों की एक गार्थीा शुरू 7ुई, सिज क े परिरणामस् रूप, ITAT क े दस्य क े रूप में उनकी विनयुवि[ परिरपक् न7ीं 7ुई।

3. उनक े ामने प7ली बा"ा खुविrया वि भाग[5] की एक प्रति क ू ल रिरपोट- र्थीी। अपीलक ा- इ े रा7 क े लिलए न्यायाति"करण प7ुंचा। 10 rर री, 2017 को विदए गए अपने r ै ले क े माध्यम े न्यायाति"करण ने अपीलक ा- द्वारा दायर मूल आ ेदन का विनस् ारण कर विदया, सिज में प्रत्यर्थिर्थीयों को आईबी रिरपोट- को विrर े चयन विमति को ौंपने क े लिलए विनदtश जारी विकया, ाविक 7 इ वि र्षय पर ए ं उनकी विनयुवि[ पर अंति म वि चार कर क े । न्यायाति"करण द्वारा विदए गए उ[ विनण-य को उच्च न्यायालय क े मक्ष एक रिरट यातिचका में प्रत्यर्थी2 द्वारा चुनौ ी दी गई र्थीी, सिज े 30 मई, 2017 को खारिरज कर विदया गया र्थीा, ार्थी 7ी चयन विमति द्वारा मयबद्घ रीक े े अपीलक ा- की उम्मीद ारी पर पुनर्वि चार की पूरी प्रविxया को आगे बढ़ाने क े विनदtश जारी विकए गए र्थीे। उच्च न्यायालय द्वारा 30 मई, 2017 को पारिर आदेश क े लिखलाr प्रत्यर्थी2-भार ंघ द्वारा अपील क े लिलए वि शेर्ष अनुमति क े लिलए यातिचका भी इ न्यायालय द्वारा 15 न ंबर, 2017 को खारिरज कर दी गई र्थीी.

4. 29 न ंबर, 2017 को, अपीलक ा- क े काया-लय में एक क - ा विनरीक्षण विकया गया र्थीा। उ[ क - ा विनरीक्षण क े आ"ार पर, प्रत्यर्थी2 31 जन री, 2018 को उ े कारण ब ाओ नोविट जारी विकया। इ े द विदन प7ले, 21 जन री, 4 ंक्षेप में 'ITAT' 5 ंक्षेप में 'IB' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 4 2018 को, अपीलक ा- क े पक्ष में प7ले दी गई क - ा मंजूरी, प्रत्यर्थी2 द्वारा रोक ली गई र्थीी। न्यायाति"करण क े मक्ष अलग-अलग मूल आ ेदन दालिखल करक े अपीलक ा- द्वारा उपरो[ दोनों आदेशों को चुनौ ी विदया गया र्थीा। प्रारंभ में, न्यायाति"करण द्वारा एक अं रिरम आदेश पारिर विकया गया र्थीा, सिज में क7ा गया र्थीा विक प्रत्यर्थी2 द्वारा जारी कारण ब ाओ नोविट क े द्वारा दस्य, आईटीएटी क े पद पर विनयुवि[ क े लिलए अपीलक ा- क े वि चार में बा"ा न7ीं डालेगा। 4 मई, 2018 को, न्यायाति"करण द्वारा एक और अं रिरम आदेश पारिर विकया गया र्थीा, सिज में क7ा गया र्थीा विक अपीलक ा- की क - ा मंजूरी को रोकना उ[ वि र्षतिय पद पर विनयुवि[ क े लिलए उ क े रास् े में न7ीं आएगा। इ बीच, 11 अप्रैल, 2018 को अपीलक ा- को ‘ 7म ूची’ में रखा गया, जो वि भाग द्वारा ैयार की गई ंविदग्" त्यविनष्ठा क े राजपवित्र अति"कारिरयों की एक ूची 7ै। प्रा ंविगक रूप े, 06.08.2018 को रिरट यातिचका (J) ी) ंख्या 22179-22187/2018 में उच्च न्यायालय द्वारा अपीलक ा- क े पक्ष में दी गई और वि ति" पुविष्ट की गई विक न्यायाति"करण द्वारा दी गई अं रिरम रा7 क े लिखलाr प्रत्यर्थी2 द्वारा दायर अपील क े लिलए वि शेर्ष अनुमति क े लिलए दू री यातिचका को इ न्यायाति"करण ने विदनांक 29.03.2019 को खारिरज कर विदया।

5. ंविदग्" ूची में अपना नाम रखने क े प्रत्यर्थी2 द्वारा की गई पू [ कार- ाई े व्यथिर्थी, अपीलक ा- ने ी री बार न्यायाति"करण का दर ाजा खटखटाया और उ[ काय- ा7ी में, उ क े पक्ष में एक अं रिरम आदेश विदया गया। अं में, न्यायाति"करण ने 6 माच-, 2019 को ामा r ै ले क े माध्यम े अपीलक ा- द्वारा दायर दो मूल आ ेदनों (J)ओ. ए. ंख्या 137/2018 और ओ. ए. ंख्या 279/2018) को मंजूरी दे दी, सिज में उ का नाम ‘ 7म ूची’ में शाविमल करने और परिरणामी काय- ा7ी को रद्द कर विदया गया और ार्थी 7ी उ े क - ा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 5 मंजूरी देने े इनकार करने क े लिलए प्रत्यर्थी2 द्वारा लिलए गए विनण-य को भी रद्द कर विदया गया। न्यायाति"करण ने प्रति ाविदयों को दस्य, ITAT क े पद पर चयन/विनयुवि[ क े लिलए अपीलक ा- का नाम उतिच प्राति"कारी को अग्रेविर्ष करने का भी विनदtश विदया। 7ालांविक, प्रति ाविदयों ने उ[ आदेश का पालन न7ीं विकया और उच्च न्यायालय क े मक्ष एक रिरट यातिचका दायर की। बेशक, उच्च न्यायालय द्वारा न्यायाति"करण क े 06 माच-, 2019 को पारिर r ै ले क े ंचालन पर रोक लगाने ाला कोई अं रिरम आदेश पारिर न7ीं विकया गया र्थीा।

6. उच्च न्यायालय द्वारा उ क े पक्ष में पारिर 30 मई, 2017 क े आदेश का अनुपालन न 7ोने े दुखी 7ोकर, अपीलक ा- ने उच्च न्यायालय क े मक्ष अ मानना यातिचका दायर की। उच्च न्यायालय ने 13 अगस्, 2019 क े आदेश क े माध्यम े क े न्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोड-6 क े त्कालीन अध्यक्ष को अ मानना यातिचका में शाविमल करने की अनुमति दी और उन्7ें कारण ब ाओ नोविट जारी विकया विक उन्7ें 30 मई, 2017 विदनांविक क े आदेश की जानबूझकर अ ज्ञा करने क े लिलए क्यों न दंतिड विकया जाए।

7. 30 मई, 2017 और 6 माच-, 2019 क े आदेशों का अनुपालन न करने क े लिलए अपीलक ा- द्वारा प्रत्यर्थी2 क े लिखलाr दायर दो अ मानना यातिचकाओं पर न्यायाति"करण द्वारा इ ी र[7] क े नोविट जारी विकए गए र्थीे। इ बीच, प्रत्यर्थी2 17 जून, 2019 को एक आरोपपत्र जारी करक े अपीलक ा- क े लिखलाr अनुशा नात्मक कार- ाई शुरू की। जुलाई 2019 में, ंघ लोक े ा आयोग[7] द्वारा अपीलक ा- को प्र"ान आयु[ क े पद पर पदोन्न करने पर वि चार करने क े 6 ंक्षेप में ' ीबीडीटी' 7 ंक्षेप में 'यूपीए ी' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 6 लिलए एक वि भागीय पदोन्नति विमति 8 7 बुलाई गई र्थीी, लेविकन उ क े द्वारा लिलए गए विनण-य को लंविब अनुशा नात्मक काय- ा7ी क े कारण ील क र में रखा गया र्थीा। अपीलक ा- ने उ आरोप ज्ञापन क े लिखलाr उच्च न्यायालय में एक रिरट यातिचका दायर की र्थीी, सिज में उच्च न्यायालय ने उ क े पक्ष में स्र्थीगन आदेश विदया र्थीा। जबविक कथिर्थी काय- ा7ी अभी भी लंविब र्थीी, प्रत्यर्थी2 27 सि ंबर, 2019 को अपीलक ा- को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने की प्रविxया शुरू की, जो जन री 2020 में उ की े ाविन ृलित्त की ारीख े लगभग ीन म7ीने कम र्थीा। प्र"ान आयु[ क े पद पर पदोन्नति की ूची 11 न ंबर, 2019 को घोविर्ष की गई र्थीी, सिज ारीख क अपीलक ा- की गणना न7ीं की गई र्थीी।

8. य7ां इ बा पर गौर विकया जा क ा 7ै विक इ विनष्कर्ष- पर प7ुंचने क े लिलए विक ीबीडीटी में ग्रुप-ए अति"कारिरयों में े कौन मय े प7ले े ाविन ृत्त 7ोने का 7कदार 7ै, वि भाग क े भी र एक ंत्र आं रिरक विमति द्वारा विकए जाने ाले मूल्यांकन क े ार्थी शुरू 7ो ा 7ै जो अति"कारिरयों क े नामों की प7चान कर ा 7ै और सि rारिरश कर ा 7ै और इ े मीक्षा विमति क े मक्ष रख ा 7ै। अगला चरण मीक्षा विमति क े मक्ष 7ै सिज में ीबीडीटी क े अध्यक्ष और राजस् तिच दस्य क े रूप में शाविमल 7ैं। यविद आं रिरक विमति द्वारा अग्रेविर्ष रिरकॉड- और विटप्पथिणयों े उ[ विमति ं ुष्ट 7ो ी 7ै विक मू7 -ए अति"कारी की मय े प7ले े ाविन ृलित्त जनवि7 में ांछनीय 7ै, ो मीक्षा विमति इ ंबं" में विनयु[ प्राति"करण को एक सि rारिरश कर ी 7ै। इ क े बाद विनयुवि[ प्राति"कारी को मीक्षा विमति की सि rारिरशों की जांच करना आ श्यक 7ो ी 7ै और यविद 7 ं ुष्ट 7ो जा ा 7ै ो ंबंति" अति"कारी की मय पू - े ाविन ृलित्त का आदेश पारिर 7ो ा 7ै। एक बार क्षम प्राति"कारी द्वारा FR 56(j) क े 7 मय पू - े ाविन ृलित्त का 8 ंक्षेप में 'डीपी ी' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 7 आदेश पारिर आदेशने क े बाद, व्यथिर्थी अति"कारी प्रति विनति"त् विमति को एक ज्ञापन प्रस् ु करने का 7कदार 7ै। रिरकॉड- क े अनु ार, अपीलक ा- ने प्रति विनति"त् विमति को एक ज्ञापन प्रस् ु विकया र्थीा, सिज े 2 जन री 2020 को अस् ीकार कर विदया गया र्थीा।

9. अपीलक ा- ने 27 सि ंबर, 2019 को अपीलक ा- क े लिखलाr जारी अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े अंति म आदेश और उ क े बाद 2 जन री, 2020 को प्रति विनति"त् विमति द्वारा अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश में 7स् क्षेप करने े इनकार करने ाले आदेश को न्यायाति"करण क े मक्ष चुनौ ी दी। उ[ यातिचका को 9 विद ंबर, 2020 क े r ै ले क े 7 खारिरज कर विदया गया र्थीा और उच्च न्यायालय ने 31 मई, 2022 क े r ै ले द्वारा इ े बरकरार रखा र्थीा। ी री चुनौ ी

10. अपीलक ा- द्वारा आक्षेविप विनण-य को ी री चुनौ ी दी गई 7ै। प7ला, आं रिरक विमति क े दस्य क े रूप में अपर म7ाविनदेशक (J) क - ा) की विxय भागीदारी क े कारण उनक े प्रति पैदा 7ुए गंभीर पू ा-ग्र[7] क े आ"ार पर, जब उन्7ें अपीलक ा- क े लिखलाr पक्षपा र्थीा और मीक्षा विमति की बैठक में ीबीडीटी क े त्कालीन अध्यक्ष की भागीदारी र्थीी, जो उन्7ें मय े प7ले े ाविन ृत्त करने क े लिलए आं रिरक विमति की सि rारिरशों की जांच करने क े लिलए आयोसिज की गई र्थीी, जब उन्7ें प ा 7ोना चावि7ए र्थीा विक उन्7ें 13 अगस्, 2019 को न्यायाति"करण द्वारा जारी ीन अ मानना नोविट ों (J)एक अ मानना यातिचका ंख्या 2681/2017) और अपीलक ा- की आईटीएटी दस्य क े रूप में विनयुवि[ क े लिलए आ श्यक क - ा मंजूरी को आगे बढ़ाने में वि rल र7ने क े लिलए न्यायाति"करण द्वारा जारी दो नोविट [ ी ीपी ंख्या 15/2019 और ी ीपी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 8 ंख्या 25/2019] का ामना करना पड़ र7ा र्थीा। दू रा, य[7] क - विदया गया 7ै विक उनकी मय पू - े ाविन ृलित्त का आक्षेविप आदेश दंडात्मक प्रक ृ ति का 7ै और य[7] क े ल उन्7ें ITAT क े दस्य क े रूप में विनयु[ 7ोने क े अ र े ंतिच करने क े लिलए पारिर विकया गया 7ै, इ पद क े लिलए उनका चयन उच्च म न्यायालय क े एक न्याया"ीश की अध्यक्ष ा ाली चयन विमति द्वारा विकया गया र्थीा और र्ष- 2014 में उनका नाम अलिखल भार ीय रैंकिंकग में xम ंख्या 1 पर रखा गया र्थीा। े इ चयन को र्ष- 2018 में बाद में गविठ एक चयन विमति द्वारा दो7राया गया र्थीा, लेविकन प्रत्यर्थी2 द्वारा उत्पन्न लगा ार बा"ाओं क े कारण 7 rलीभू न7ीं 7ो पाया, सिजन्7ोंने विबना विक ी ै" कारण क े अपनी क - ा मंजूरी को रोक विदया और बाद में उ का नाम ' 7म ूची' में डाल विदया, सिज क े बाद आ"ार7ीन आरोपों पर उ क े लिखलाr एक अनुशा नात्मक जांच शुरू की गई, सिज े उ क े ार्विकक विनष्कर्ष- क न7ीं ले जाया गया, क्योंविक 7 सि ंबर, 2019 में मय े प7ले े ाविन ृत्त 7ो गया र्थीा।अं में, य[7] आग्र[7] विकया गया विक उच्च न्यायालय ने इ थ्य को पूरी र[7] े नजरअंदाज कर विदया 7ै विक विपछले 30 र्ष‹ में अपीलक ा- की भी ार्विर्षक प्रदश-न मूल्यांकन रिरपोटŒ 9 9 विनद र्ष र्थीीं। ास् में, र्ष- 2012 में आयकर आयु[ क े पद पर पदोन्न 7ोने क े बाद, अपीलक ा- को 'उत्क ृ ष्ट' क े रूप में श्रेणीबद्ध विकया गया र्थीा और उ की अखंड ा का मूल्यांकन ' ंदे7 े परे' क े रूप में विकया गया र्थीा। भार ंघ क े लिलए अति" [ा द्वारा की गई दलीलें

11. अपीलक ा- द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन कर े 7ुए और आक्षेविप विनण-य का बचा कर े 7ुए, श्री ंजय जैन, अपर ॉलिलसि टर जनरल10 10, जो प्रत्यर्थी2 9 ंतिक्षप्त में 'APAR' 10 ंतिक्षप्त में 'ASG' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 9 की ओर े उपस्थिस्र्थी 7ुए र्थीे, ने आग्र[7] विकया विक आक्षेविप विनण-य एक ुवि चारिर विनण-य 7ै और 7स् क्षेप क े योग्य न7ीं 7ै विक अपीलक ा- क े मामले में अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश उ क े पूरे े ा रिरकॉड- पर भार वि चार करने क े बाद पारिर विकया गया र्थीा विक एr आर 56 (J)जे) क े 7 एक आदेश पारिर करने क े लिलए प्रत्यर्थी2 द्वारा ामग्री पर भरो ा विकया गया र्थीा, अपीलक ा- द्वारा दायर मूल आ ेदन को विबना मेरिरट क े रूप में खारिरज करने े प7ले न्यायाति"करण द्वारा ा "ानीपू -क वि चार विकया गया और य[7] विक ंस्र्थीाग दुभा- ना क े आरोप और अपीलक ा- द्वारा लगाए गए आरोप गल ाविब 7ुए 7ैं।एए जी ने क - विदया विक वि भागीय जांच क े वि परी, एrआर 56 (J)जे) क े 7 जांच का दायरा काrी ीविम 7ै और न्यायविनण-यन का मानक प्रर्थीमदृष्टया जनवि7 को ध्यान में रख 7ुए े ा में बने र7ने क े लिलए एक अति"कारी की उपयु[ ा क े बारे में एक व्यवि[परक राय 7ै।अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त 7ोने ाले कम-चारी को कोई कलंक न7ीं लगाया जा क ा 7ै, क्योंविक अविन ाय- े ाविन ृलित्त बखा-स् गी या 7टाए जाने क े बराबर न7ीं 7ै।अपीलक ा- अभी भी भी े ाविन ृलित्त लाभों का 7कदार 7ै और अन्य विनयुवि[यों क े लिलए भी वि चार विकए जाने का 7कदार 7ै।य[7] क7ा गया र्थीा विक े लिखलाr बड़ी दंड काय- ावि7यों क े लिलए एक आरोप पत्र लंविब र्थीा, सिज े उ ने न्यायाति"करण क े मक्ष अ rल रूप े चुनौ ी दी र्थीी।अविन ाय- े आदेश में 7स् क्षेप क े ीविम दायरे पर इ न्यायालय क े कई विनण-यों का 7 ाला दे े 7ुए, य[7] भार ंघ की ओर े प्रस् ु विकया गया र्थीा विक अदाल ों को आम ौर पर ंबंति" अति"कारी क े लिखलाr आरोपों क े गुण-दोर्ष क े आ"ार पर विनष्कर्ष- ाप करने े बचना चावि7ए।एक बार अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश नेक इरादे े और विबना विक ी बा7री उद्देश्य क े पारिर 7ो जाने क े बाद, 7स् क्षेप का कोई औतिचत्य न7ीं 7ै। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 10 अविन ाय- े ाविन ृलित्त े ंबंति" वि श्लेर्षण और मामले क े कानून

12. 7मने पक्षकारों क े वि द्वान अति" [ा द्वारा प्रस् ु की गई दलीलों, अथिभलेखों और दोनों पक्षों द्वारा उद्धृ विनण-यों पर वि चार विकया 7ै।

13. मूल अति"कार 56 (J)जे) का उपबं" इ प्रकार 7ैः एrआर 56 (J)जे): यविद उपयु[ प्राति"करण की राय 7ै विक ऐ ा करना जनवि7 में 7ै, ो उ े विक ी भी रकारी कम-चारी को कम े कम ीन म7ीने प7ले लिललिख रूप में नोविट देकर या ीन म7ीने क े े न और भत्तों काे उ[ नोविट क े ए ज मे देकर उ े े ाविन ृत्त करने का आत्यंति क अति"कार 7ोगाः (J)ii) यविद 7 ग्रुप 'ए' या ग्रुप 'बी' े ा में 7ै या मूल, अ"--स्र्थीायी या अस्र्थीायी क्षम ा में 7ै और उ ने 50 र्ष- की आयु प्राप्त करने क े बाद 35 र्ष- की आयु प्राप्त करने े प7ले रकारी े ा में प्र ेश विकया 7ै। (J)iii) विक ी अन्य मामले में, 55 र्ष- की आयु प्राप्त करने क े पश्चा ्

14. जै ा विक उपरो[ प्रा "ान क े अ लोकन े स्पष्ट 7ै, य[7] दो त् ों को अपने दायरे में ले ा 7ै-प7ला एक कम-चारी को े ाविन ृत्त करने का रकार का आत्यंति क अति"कार 7ै और दू रा ऐ ा करने क े लिलए जनवि7 की श - को पूरा करने की आ श्यक ा 7ै।य[7] प्रा "ान विन -मान कम-चारी को कम े कम ीन म7ीने की पू - ूचना का भी प्रा "ान कर ा 7ै और य[7] अति"देश दे ा 7ै विक विक ी रकारी कम-चारी क े 55 र्ष- की आयु पूरी करने क े बाद 7ी उ े े ाविन ृत्त करने क े लिलए उ[ प्रा "ान लागू विकया जा क ा 7ै। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 11

15. 7म इ थ्य े अ ग 7ैं विक े ा े अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश क े ंबं" में न्यातियक मीक्षा का दायरा काrी ीविम 7ै।अविन ाय- े ाविन ृलित्त े ंबंति" कानून कई मामलों में चचा- का वि र्षय र7ा 7ै ज7ां कु छ विनतिश्च कानूनी सि द्धां विन"ा-रिर विकए गए 7ैं जो य7ां नीचे स्पष्ट विकए जा र7े 7ैं।

62,284 characters total

16. इ न्यायालय ने इला7ाबाद बैंक अति"कारी ंगठन और अन्य बनाम इला7ाबाद बैंक और अन्य11 ाले मामले में रकारी कम-चारी की अविन ाय- े उद्देश्य को विनम्नलिललिख शब्दों में स्पष्ट विकयाः “5. विक ी रकारी कम-चारी को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने की शवि[ ंवि "ान क े अनुच्छेद 310 में शाविमल आनंद क े सि द्धां क े प7लुओं में े एक 7ै।अविन ाय- े ाविन ृलित्त का उद्देश्य े ा में दक्ष ा और प7ल को बनाए रखने क े लिलए डीड ुड को माप्त आदेशना और उन लोगों की े ाओं को माप्त आदेशना 7ै सिजनकी ईमानदारी ंविदग्" 7ै ाविक प्रशा न में शुद्ध ा को बनाए रखा जा क े । ामान्य ौर पर, े ा विनयमों में रकारी कम-चारी क े े ा क े क ु छ र्ष‹ को पूरा करने या विन"ा-रिर आयु प्राप्त करने पर उ की अविन ाय- े ाविन ृलित्त का प्रा "ान 7ै।उ क े े ा रिरकॉड- की उ स् र पर मीक्षा की जा ी 7ै और य[7] विनण-य लिलया जा ा 7ै विक क्या उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त विकया जाना चावि7ए या े ा में आगे जारी रखा जाना चावि7ए।कोई आरोप या आरोप न7ीं लगाया गया 7ै, सिज क े लिलए रकारी कम-चारी े स्पष्टीकरण की आ श्यक ा 7ो। ज7ां कदाचार और अक्षम ा ऐ े कारक 7ैं जो उ खा े में प्र ेश कर े 7ैं ज7ां आदेश बखा-स् गी या 7टाए जाने या े ाविन ृलित्त का 11 1996(4) SCC 504 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 12 7ै, 7ां अं र य[7] 7ै विक े ाविन ृलित्त क े मामले में े क े ल पृष्ठभूविम और जांच प्रस् ु कर े 7ैं, और जांच करने का कोई आदेश न7ीं 7ै-क े ल अति"कारिरयों की ं ुविष्ट क े लिलए 7ै सिजन्7ें बखा-स् गी या 7टाए जाने क े मामले में कार- ाई करनी 7ै, े 7ी आ"ार बना े 7ैं सिज पर इ न्यायालय द्वारा श्याम लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और बॉम्बे राज्य बनाम ौभाग्यचंद एम दोर्षी में इंविग विकया गया 7ै। इ प्रकार, अपने स् भा े 7ी विक ी रकारी कम-चारी को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने की शवि[ कदाचार क े लिलए बखा-स् गी आविद 7ै। एक रकारी कम-चारी जो अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त 7ो जा ा 7ै, उ े े ा क े दौरान अर्जिज लाभ का कोई वि7स् ा न7ीं गं ाना पड़ ा 7ै।इ प्रकार, अविन ाय- े ाविन ृलित्त पदच्युति और 7टाए जाने दोनों े थिभन्न 7ै क्योंविक इ में कोई दंडात्मक परिरणाम शाविमल न7ीं 7ैं।" “…………………..

17. क े -लॉ की उपयु-[ चचा- े य[7] स्पष्ट 7ो ा 7ै विक यविद अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश े रकारी कम-चारी पर इ अर्थी- में कलंक लग ा 7ै विक इ में उ क े आचरण या चरिरत्र पर आक्षेप लगाने ाला कर्थीन 7ै, ो न्यायालय उ आदेश को दंड का आदेश मानेगा, जो ंवि "ान क े अनुच्छेद 311 (J)2) क े उपबं"ों को आकर्विर्ष कर ा 7ै।इ का कारण य[7] 7ै विक आरोप या आरोप क े आदेश पारिर करने की श - क े रूप में न्यायालय इ े य[7] विनष्कर्ष- विनकालेगी विक रकार का ास् वि क इरादा रकारी कम-चारी को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 13 उ आरोप या आरोप क े आ"ार पर दंतिड करना र्थीा न विक अविन ाय- े ाविन ृलित्त की शवि[ का इस् ेमाल करना र्थीा।लेविकन क े ल इ विनयम क े ंदभ- को, भले 7ी इ में अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े लिलए आ"ार का उल्लेख विकया गया 7ो, अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश को दंड क े आदेश क े रूप में लेने क े लिलए पया-प्त न7ीं माना जा क ा 7ै।ऐ े मामले में, आदेश को विनयम क े ंदभ- में पारिर विकया गया क7ा जा क ा 7ै और, इ लिलए, एक अलग आशय का अनुमान न7ीं लगाया जा क ा 7ै।इ ी प्रकार, यविद आदेश में कर्थीन क े ल उ क े काय- क े मूल्यांकन क े प्रति विनदtश आदेश ा 7ै और उ ी मय रकारी े क क े आचरण या चरिरत्र पर आक्षेप न7ीं का ा 7ै, ो य[7] मानना उतिच न7ीं 7ोगा विक अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश ास् में दंड का आदेश 7ै।आदेश में विदया गया बयान कलंविक 7ै या न7ीं, इ का विनण-य इ परीक्षण को अपनाआदेश विकया जाएगा विक एक क - ंग व्यवि[ इ े क ै े पढ़ेगा या मझेगा। [प्रभा र्ति" ]

17. भार ंघ बनाम कन-ल जे. एन. सि न्7ा और अन्य12 12 ाले मामले में य[7] म व्य[ विकया गया 7ै विकः मौलिलक विनयम 56 (J)जे) क े 7 य[7] आ श्यक न7ीं 7ै विक ंबंति" रकारी कम-चारी को उ की अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े लिखलाr कारण ब ाने का अ र विदया जाए।इ में क7ा गया 7ै विक उपयु[ प्राति"कारी को विक ी रकारी कम-चारी को े ाविन ृत्त करने का आत्यंति क अति"कार 7ै, यविद उ की राय 7ै विक ऐ ा करना जनवि7 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 14 में 7ै।यविद 7 प्राति"कारी द्भा पूण- रूप े ऐ ी राय बना ा 7ै ो उ राय की त्य ा को न्यायालयों क े मक्ष चुनौ ी न7ीं दी जा क ी 7ै, 7ालांविक य[7] व्यथिर्थी पक्षकार क े लिलए य[7] दलील देने क े लिलए स् ंत्र 7ै विक अपेतिक्ष राय का गठन न7ीं विकया गया 7ै या विनण-य ंपाति¡-क आ"ारों पर आ"ारिर 7ै या य[7] विक य[7] एक मनमाना विनण-य 7ै।"

18. इ ी र[7] इ न्यायालय द्वारा स् ामी रन क् ेना बनाम उत्तर प्रदेश राज्य13 में अपना म व्य[ विकया। “3. अपीलक ा- द्वारा, जो व्यवि[ग रूप े उपस्थिस्र्थी 7ोकर इ अपील में कई क - उठाए गए 7ैं। 7मारे विनण-य में, उनमें े एक अपील का विनस् ारण करने क े लिलए पया-प्त 7ै। 7मारे पा जो क - 7ै 7 य[7] 7ै विक अथिभलेख पर ामग्री क े अ लोकन पर और अपीलक ा- की व्यवि[ग rाइल और चरिरत्र ूची की प्रवि विष्टयों को ध्यान में रख े 7ुए, इ विनष्कर्ष- पर प7ुंचना क - ंग रूप े ंभ न7ीं 7ै विक अपीलक ा- की अविन ाय- े ाविन ृलित्त मांगी गई र्थीी। य[7] विनष्कर्ष- दू रों क े बीच अविन ाय- रूप े वि शेर्ष परिरस्थिस्र्थीति यों े विनकल ा 7ै विक अपीलक ा- को क ु छ म7ीने प7ले 7ी दू री दक्ष ा ीमा को पार करने की अनुमति दी गई र्थीी। ामान्य ः न्यायालय इ किंबदु पर ंबंति" प्राति"कारी क े विनण-य में 7स् क्षेप न7ीं कर ा 7ै विक क्या विक ी रकारी कम-चारी को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करना जनवि7 में 7ै और 7म उ विनष्कर्ष- पर प7ुंचने क े लिलए और भी अति"क अविनच्छ ु क 7ो े जब अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आक्षेविप vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 15 आदेश स् यं उच्च न्यायालय की सि rारिरश पर विकया गया र्थीा। लेविकन 7मारे ामने मौजूद ामग्री पर 7म इ प्रत्यक्ष वि रो"ाभा का मा"ान करने में अ मर्थी- 7ैं विक 7ालांविक दू री योग्य ा अ रो" को पार करने क े उद्देश्य क े लिलए अपीलक ा- को स्पष्ट योग्य ा और ईमानदारी क े ार्थी काम करने ाला माना गया र्थीा, लेविकन उ क े क ु छ म7ीनों क े बाद 7ी 7 इ ना अयोग्य पाया गया विक 7 अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े योग्य पाया गया।अपीलक ा- े ंबंति" अथिभलेखों में बीच में प्रवि विष्टयों की जांच करने और उ ंदभ- में मूल्यांकन करने की आ श्यक ा 7ै। य[7] विदखाने क े लिलए कोई बू न7ीं 7ै विक अचानक अपीलार्थी2 क े काय- या अखंड ा की गुण त्ता में इ ना विगरा ट आई विक 7 अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त 7ोने का 7कदार र्थीा।इन भी कारणों े 7मारी राय 7ै विक अविन ाय- े आदेश को रद्द कर विदया जाना चावि7ए।अपीलक ा- को आक्षेविप आदेश की ारीख को े ा में जारी माना जाएगा।

19. बलदे राज चड्ढा बनाम भार ंघ14 ाले मामले में इ थ्य पर बल दे े 7ुए विक मूल विनयम 56 (J)ञ) क े अ"ीन शवि[यों का प्रयोग द्भा पूण- 7ोना चावि7ए और लोकवि7 को बढ़ा ा देना चावि7ए, इ न्यायालय ने य[7] म व्य[ विकयाः “25. मौलिलक विनयम 56 (J)जे) का पूरा उद्देश्य ंवि "ान क े अनुच्छेद 311 क े 7 दंडात्मक अति रेक क े विबना बेकार लोगों को बा7र विनकालना 7ै।लेविकन ‘जनवि7 ’ की आड़ में यविद मय पू - े ाविन ृलित्त का आदेश देने क े लिलए अ ीविम वि ेकाति"कार को प्रति ग्राह्रा माना जा ा 7ै ो य[7] जनवि7 क े लिलए ब े बड़ा ख रा 7ोगा और इ े क - 7ीन ा, मनमानी और छद्म बखा-स् गी क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 16 लिलए वि rल 7ोना चावि7ए।शवि[ का प्रयोग द्भा पूण- और जनवि7 को बढ़ा ा देने ाला 7ोना चावि7ए।"26. 14 र्ष‹ क लगा ार े ा में र7ने ाले एक अति"कारी को दक्ष ा ीमा को पार करने और स्क े ल में अति"क म े न क प7ुंचने और अविन ाय- े ाविन ृलित्त े ठीक प7ले कम े कम पांच र्ष‹ क विबना विक ी प्रति क ू ल प्रवि विष्ट क े ार्थी अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त न7ीं विकया जा क ा 7ै माना की काrी मय प7ले, उ का प्रदश-न खराब र्थीा, 7ालांविक उ क े रिरष्ठ अति"कारिरयों ने उ े विबना विक ी वि7चक क े दक्ष ा ीमा को पार करने की अनुमति दी र्थीी।" "" "."

20. राम एकबल शमा- बनाम विब7ार राज्य और अन्य15 ाले मामले में य[7] म व्य[ विकया गया र्थीा विक य[7] प ा लगाने क े लिलए विक क्या अविन ाय- े ाविन ृलित्त का कोई आदेश रकारी कम-चारी क े विक ी दुराचार पर आ"ारिर 7ै या उ[ आदेश को विबना विक ी ति रछी या बा7री उद्देश्य क े द्भा पू -क बनाया गया 7ै ए ं ारी ूचना ब ायी जा क ी 7ै। उ[ विनण-य में की गई प्रा ंविगक विटप्पथिणयां इ प्रकार 7ैंः “32. उपयु-[ विनण-यों पर वि चार करने पर अब जो वि ति"क स्थिस्र्थीति ामने आ ी 7ै 7 य[7] 7ै विक भले 7ी अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश रकारी कम-चारी, सिज े अविन ाय- रूप े े ा े े ाविन ृत्त 7ोने का विनदtश विदया गया 7ै, क े वि रुद्ध कोई आरोप लगाए विबना ादे भार्षा में लिलखा जाना चावि7ए, यविद चुनौ ी दी जा ी 7ै, ो न्यायालय उतिच मामलों में य[7] प ा लगाने क े लिलए पदा- उठा क ा 7ै विक क्या आदेश ंबंति" रकारी कम-चारी क े विक ी कदाचार पर आ"ारिर 7ै या आदेश द्भा पूण- रूप े विकया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 17 गया 7ै और विक ी ति रछे या बा7री उद्देश्यों पर आ"ारिर न7ीं 7ै। इ र[7] क े मामले में आदेश का रूप अदाल को आदेश क े आ"ार पर जांच करने े न7ीं रोक क ा 7ै यविद ंबंति" आदेश को ंबंति" रकारी कम-चारी द्वारा चुनौ ी दी जा ी 7ै जै ा विक इ न्यायालय द्वारा 'अनूप जाय ाल मामले' में अ "ारिर विकया गया 7ै। य[7] स्थिस्र्थीति 7ोने क े कारण प्रत्यर्थी2-राज्य -मान मामले में अपीलक ा- की अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश का बचा क े ल इ दलील पर न7ीं कर क ा 7ै विक आदेश विब7ार े ा ंवि7 ा क े विनयम 74 (J)बी) (J)ii) क े प्रा "ानों क े अनु ार विदया गया 7ै जो प्रर्थीमदृष्टया कोई आरोप न7ीं लगा ा 7ै या अपीलक ा- क े े ा मयकाल पर कोई कलंक भी न7ीं लगा ा 7ै.लेविकन प्रत्यर्थी2 राज्य द्वारा विकए गए स्पष्ट और वि थिशष्ट प्रकर्थीनों क े मद्देनजर विक उ[ विनयम क े 7 अपीलक ा- को े ा े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े लिलए आक्षेविप आदेश विदया गया 7ै क्योंविक अपीलक ा- को गंभीर वि त्तीय अविनयविम ाएं करने कर े 7ुए पाया गया र्थीा सिज े वि त्तीय नुक ान 7ुआ ब ा दें विक आक्षेविप आदेश को जा क े ौर पर विदया गया क7ा जा क ा 7ै।इ र[7] का आदेश भार क े ंवि "ान क े अनुच्छेद 311 का उल्लंघन करने क े ार्थी- ार्थी मनमाना भी 7ै क्योंविक य[7] प्राक ृ ति क न्याय क े सि द्धां ों का उल्लंघन कर ा 7ै और इ े नेक नीय े न7ीं बनाया गया 7ै।[प्रभा र्ति" ]

21. उड़ी ा राज्य और अन्य बनाम रामचंद्र दा 16 ाले मामले में इ न्यायालय ने विनम्नलिललिख म व्य[ विकयाः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 18 य[7] दो7राना अना श्यक 7ै विक स्र्थीाविप कानूनी स्थिस्र्थीति य[7] 7ै विक रकार श[ 7ै और प्रशा न की दक्ष ा में ु"ार करने या ंविदग्" त्यविनष्ठा ाले लोगों को 7टाने क े उद्देश्य े जनवि7 में एक रकारी कम-चारी को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने की 7कदार 7ोगी या जो भ्रष्ट 7ैं, लेविकन े ा में अनुशा न की भा ना पैदा करने क े लिलए विनयमों क े अनु ार अनुशा नात्मक कार- ाई करने क े लिलए पया-प्त बू उपलब्" न7ीं र्थीे।लेविकन रकार को विक ी रकारी कम-चारी को अविन ाय- रूप े े ा े े ाविन ृत्त करने का विनण-य लेने े प7ले न ीन म रिरपोट‹ वि7 रकारी कम-चारी क े पूरे रिरकॉड- पर वि चार करना 7ो ा 7ै।

22. गुजरा राज्य और एक अन्य बनाम ूय-कां चुनीलाल शा717 ाले मामले में, ज7ां राज्य रकार ने गुजरा उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े उ विनण-य को चुनौ ी दी र्थीी, सिज में य[7] अथिभविन"ा-रिर विकया गया र्थीा विक प्रत्यर्थी2 क े वि रुद्ध पारिर अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश बुरा र्थीा, क्योंविक उ की गोपनीय रिरपोट- में कोई प्रति क ू ल प्रवि विष्ट न7ीं र्थीी और उ की ईमानदारी विक ी भी स् र पर ंविदग्" न7ीं र्थीी, इ न्यायालय ने इ प्रकार अथिभविन"ा-रिर विकयाः

28. मीक्षा विमति क े मक्ष कोई ामग्री न7ीं र्थीी, क्योंविक चरिरत्र नामा ली की प्रवि विष्टयों में कोई प्रति क ू ल विटप्पणी न7ीं र्थीी, विक ी भी मय त्यविनष्ठा पर ंदे7 न7ीं विकया गया र्थीा, 7ायक खाद्य विनयंत्रक (J)कक्षा II) क े पद पर प्रत्यर्थी2 की पदोन्नति क े बाद चरिरत्र नामा ली उपलब्" न7ीं र्थीी, य[7] विनष्कर्ष- न7ीं विनकाल क ा र्थीा विक प्रत्यर्थी2 ंविदग्" त्यविनष्ठा ाला व्यवि[ र्थीा और न 7ी कोई

Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 19 अन्य व्यवि[ इ विनष्कर्ष- पर आ क ा र्थीा विक प्रत्यर्थी2 अविन ाय- रूप े े ा े े ाविन ृत्त 7ोने क े लिलए उपयु[ व्यवि[ र्थीा।आदेश, मामले की परिरस्थिस्र्थीति यों में, ा -जविनक वि7 क े बजाय, उ े त्काल 7टाने क े दंडात्मक उद्देश्य क े लिलए पारिर विकया गया र्थीा।"" "."

23. गुजरा राज्य बनाम उमेदभाई एम. पटेल18 ाले मामले में इ न्यायालय ने विनम्नलिललिख व्यापक सि द्धां ों को रेखांविक विकया 7ै सिजनका अविन ाय- े ाविन ृलित्त े ंबंति" मामलों में पालन विकया जाना चावि7एः “11. अविन ाय- े ाविन ृलित्त े ंबंति" कानून अब एक विनतिश्च सि द्धां में बदल गया 7ै, सिज े इ प्रकार ंक्षेप में प्रस् ु विकया जा क ा 7ैः(J)i). जब कभी विक ी लोक े क की े ाएं ामान्य प्रशा न क े लिलए उपयोगी न7ीं र[7] जा ी 7ैं, ो जनवि7 क े लिलए अति"कारी को अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त विकया जा क ा 7ै। (J)ii) ा"ारण या अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश को ंवि "ान क े अनुच्छेद 311 क े अ"ीन आने ाले दंड क े रूप में न7ीं माना जाना चावि7ए। (J)iii) बे7 र प्रशा न क े लिलए मृ लकड़ी को काटना आ श्यक 7ै, लेविकन अति"कारी क े पूरे े ा रिरकॉड- को ध्यान में रख े 7ुए अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश पारिर विकया जा क ा 7ै। (J)iv) गोपनीय रिरकॉड- में की गई विक ी भी प्रति क ू ल प्रवि विष्ट को ध्यान में रखा जाएगा और इ र[7] का ध्यान दें पारिर आदेशने vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 20 में उतिच म7त् विदया जाएगा।(J)v) गोपनीय रिरकॉड- में अ ूतिच प्रवि विष्टयों को भी ध्यान में रखा जा क ा 7ै। (J)vi) अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश को वि भागीय जांच े बचने क े लिलए शॉट-कट क े रूप में पारिर न7ीं विकया जाएगा, जब ऐ ा पाठ्यxम अति"क ांछनीय 7ो। (J)vii) यविद गोपनीय रिरकॉड- में प्रति क ू ल प्रवि विष्टयों क े बा जूद अति"कारी को पदोन्नति दी गई र्थीी, ो य[7] अति"कारी क े पक्ष में एक थ्य 7ै।(J)viii) अविन ाय- े ाविन ृलित्त को दंडात्मक उपाय क े रूप में अति"रोविप न7ीं विकया जाएगा।

24. नंद क ु मार मा- बनाम झारखंड राज्य और अन्य19 ाले मामले में इ न्यायालय ने एक बार विrर अति"कारिरयों द्वारा अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश पारिर करने क े लिलए एक न्यायालय द्वारा ै" ामग्री की उपस्थिस्र्थीति ुविनतिश्च करने की अनुमति पर प्रकाश डाला 7ै और इ प्रकार म व्य[ विकया 7ैः "34. य[7] भी अच्छी र[7] े स्र्थीाविप 7ै विक अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े लिलए राय का विनमा-ण ंबंति" प्राति"कारी की व्यवि[परक ं ुविष्ट पर आ"ारिर 7ै, लेविकन ऐ ी ं ुविष्ट एक ै" ामग्री पर आ"ारिर 7ोनी चावि7ए।न्यायालयों क े लिलए य[7] ुविनतिश्च करना अनुज्ञेय 7ै विक कोई ै" ामग्री मौजूद 7ै या अन्यर्थीा, सिज पर प्रशा विनक प्राति"कारी का व्यवि[परक ं ुविष्ट आ"ारिर 7ै। -मान मामले में, 7म जो देख े 7ैं 7 य[7] 7ै विक उच्च न्यायालय ने, य[7] अथिभविन"ा-रिर कर े 7ुए विक अपीलक ा- का ट्रैक रिरकॉड- और े ा रिरकॉड- vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 21 अ ं ोर्षजनक र्थीा, ए ीआर की उन ामविग्रयों क े उद्धरण बना े मय क ु छ र्ष‹ क े लिलए े ा रिरकॉड- को चुकिंनदा रूप े ध्यान में रखा 7ै। सिज में क ु छ वि ंगति प्र ी 7ो ी 7ै … [प्रभा र्ति" ] "25. विनशा विप्रया भाविटया बनाम भार ंघ20 20 ाले मामले में 7ाल 7ी में इ प्रश्न का ामना विकया गया विक क्या अनु ं"ान और वि श्लेर्षण खंड (J)भ 2 ं ग- और े ा) विनयम, 1975 क े विनयम 135 क े अ"ीन की गई कार- ाई" "अविन ाय- े रूप में पेनाल्टी या बखा-स् गी" "की प्रक ृ ति की 7ै सिज े विक भार क े ंवि "ान क े अनुच्छेद 311 को लागू विकया जा क े, इ न्यायालय ने य[7] अथिभविन"ा-रिर विकया 7ै विक" "इ परीक्षण क े लिलए ास् वि क परीक्षा य[7] देखना 7ै विक क्या अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश अनुपयु[ ा की चिंच ा क े कारण 7ुआ 7ै या कदाचार क े लिलए दंड क े रूप में 7ुआ 7ै।" य[7] वि भेद करने क े लिलए, बम्बई राज्य बनाम ौभागचंद एम. दोशी21 ाले मामले क े विनण-य पर भरो ा विकया गया 7ै, ज7ां विनम्नलिललिख शब्दों में बखा-स् गी क े आदेश और अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश क े बीच अं र विकया गया र्थीाः 9...विनयमों क े 7, बखा-स् गी का आदेश एक रकारी कम-चारी पर दी जाने ाली जा 7ै, जब य[7] पाया जा ा 7ै विक 7 कदाचार या अक्षम ा या इ र[7] का दोर्षी 7ै, और य[7] चरिरत्र में दंडनीय 7ै, क्योंविक इ में नुक ान शाविमल 7ै पेंशन जो विनयमों क े 7 प7ले े की गई े ा क े ंबं" में अर्जिज 7ो ी 7ै। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 22 7टाए जाने का आदेश भी पदच्यु विकए जाने क े आदेश क े मान 7ी 7ो ा 7ै और उ क े परिरणाम भी मान 7ो े 7ैं, दोनों क े बीच अं र क े ल इ ना 7ै विक पदच्यु विकया गया े क पुनर्विनयुवि[ क े लिलए अपरिर7ाय- न7ीं 7ै, सिज े पदच्यु विकया गया 7ै। े ाविन ृलित्त का आदेश बखा-स् गी क े आदेश और पुनर्विनयुवि[ क े आदेश दोनों े अलग 7ो ा 7ै, क्योंविक य[7] विनयमों द्वारा विन"ा-रिर दंड का एक रूप न7ीं 7ै और इ में कोई दंडात्मक परिरणाम शाविमल न7ीं 7ै, क्योंविक े ाविन ृत्त व्यवि[ अपने खा े में जमा े ा की अ ति" क े अनुपा में पेंशन का 7कदार 7ै। [प्रभा र्ति" ] जांच और मामले का वि श्लेर्षण

26. अब 7म उपरो[ चचा- विकए गए मामलें में कानूनों क े आलोक में मामले क े थ्यों की जांच करने क े लिलए आगे बढ़ क े 7ैं ाविक य[7] प ा लगाया जा क े विक अपीलक ा- क े ंबं" में प्रति ाविदयों द्वारा पारिर अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आदेश ै" दस् ा ेजो पर आ"ारिर र्थीा या न7ीं और जनवि7 में र्थीा। ब े प7ले, 7म अपीलक ा- की व्यवि[ग rाइल और चरिरत्र ूची की जांच करने का प्रस् ा कर े 7ैं। अथिभलेख पर रखी गई ामग्री क े अनु ार, अपीलक ा- क े एपीएआर े प ा चल ा 7ै विक विपछले कई र्ष‹ े, उ की ईमानदारी का विनयविम रूप े ंदे7 े परे क े रूप में मूल्यांकन विकया जा र7ा र्थीा और य[7] 31 जुलाई, 2019 क बना र7ा, जब 1 अप्रैल, 2018 े 31 माच-, 2019 क की अ ति" क े लिलए उ क े काय- प्रदश-न का मूल्यांकन विकया गया और इ े 7ी पाया गया। "विपछले एक दशक े अपने एपीएआर में, उ की मय पू - े ाविन ृलित्त क े आदेश े ठीक प7ले की अ ति" क, प्रत्यर्थी2 लगा ार अपीलक ा- को "उत्क ृ ष्ट" "क े रूप में vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 23 श्रेणीबद्ध कर र7े र्थीे। ज7ां क उ क े काय- विनष्पादन का ंबं" र्थीा, उ क े रिरष्ठ अति"कारिरयों द्वारा अपीलक ा- क े एपीएआर में कोई प्रति क ू ल प्रवि विष्ट न7ीं की गई र्थीी। इ अ ति" क े दौरान उनक े आचरण या चरिरत्र पर कोई ंदे7 न7ीं विकया गया र्थीा। े ा रिरकॉड- क े अनु ार, उनकी दक्ष ा और अखंड ा अपने पूरे करिरयर क े दौरान विनर्वि ाद र7ी। उपरो[ े विनकाला गया विनष्कर्ष- य[7] 7ै विक अपीलार्थी2 का े ा रिरकॉड- त्रुविट7ीन 7ोने क े कारण एक ऐ ा कारक न7ीं 7ो क ा र्थीा जो प्रत्यर्थी2 क े लिलए उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े लिखलाr गया 7ो।

27. प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा अपनाए गए इ रुख क े बाद विक अपीलक ा- क े लिखलाr कई थिशकाय ें प्राप्त 7ुई र्थीीं, सिज ने उ की ईमानदारी पर ंदे7 पैदा कर विदया र्थीा, य[7] उल्लेखनीय 7ै विक प्रत्यर्थी2 अपीलक ा- क े लिखलाr नौ थिशकाय ों का उल्लेख विकया 7ै, सिजनक े बारे में क7ा गया 7ै विक े क - ा विनदेशालय में लंविब 7ैं, सिजन्7ें न्यायाति"करण द्वारा 6 माच-, 2019 को विदए गए अपने r ै ले क े पैरा 30 में ारणीबद्ध प्रारूप में ंक्षेप में प्रस् ु विकया गया 7ै।प्रत्यर्थी2 द्वारा ूचीबद्ध थिशकाय ों क े उ[ ारणीबद्ध कर्थीन क े ार्थी- ार्थी, उ[ थिशकाय ों में े प्रत्येक क े लिलए अपीलक ा- क े ज ाब का वि रण ारणी में र्थिण विकया गया7ै।उ[ ैयार ंन्दभ- क े लिलए, थ्यों की दो ालिलकाएं नीचें र्थिण 7ैःxमांक ंख्या. अति"कारी का नाम स्थिस्र्थीति 1 श्री पी. क े. बजाज अपर ीआईटी, रेंज श्री ओ. पी. जांगरे श्री पी. क े. बजाज पर अ"ीनस्र्थी अति"कारी श्री जांगरे द्वारा उत्पीड़न और काय- में बा"ा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 24 6 (J)2), मुंबई डालने क े आरोप जांच क े अ"ीन 2 श्री पी. क े. बजाज, ीआईटी ई, लखनऊ

05. 2018 को बंद विकया गया 3 श्री पी. क े. बजाज, ी आई टी ई, लखनऊ ड्राइकिं ग प्रथिशक्षण और ैज्ञाविनक अनु ं"ान लखनऊ द्वारा जन री 2016 में की गई थिशकाय जांच क े अ"ीन 4 श्री पी. क े. बजाज, ीआईटी ई, लखनऊ श्री "रम ीर कविपल आईएrए े ाविन ृत्त, विदनांक 17.10.2017 जांच क े दौरान विदनांक 13.11.17 को जारी आईडी ने विदनांक 18.11.17 को उत्तर विदया 5 श्री पी. क े. बजाज, ीआईटी ई, लखनऊ श्री बालेश सिं 7, पीएमओपीजी/ई 2 017/0597 795 विदनांक 17.11.2017 क े द्वारा

12. 2017 को जारी आईडी 6 श्री पी क े बजाज, ीआईटी (J)छ ू ट), लखनऊ श्री अशोक मा-, लखनऊ विदनांक 08/04/16 को जारी आईडी अनुस्मारक विदनांक 11.05.16. आईडी ने न ो ज ाब विदया और न 7ी पुनः ारीख प्राप्त की। विदनांक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 25 19.07.2016 को बंद 7 श्री पी. क े. बजाज, ीआईटी ई, लखनऊ श्री जग पांडे, 28/42, सि वि ल लाइं, बरेली, उत्तर प्रदेश विदनांक 29.06.2016 विदनांक 03.08.2016 को जारी आईडी अनुस्मारक विदनांक 09.09.2016 को प्राप्त पत्र अब क ाप न7ीं विदया गया 7ै। य[7] 07.10.2016 को बंद 7ुआ। 8 श्री प्रमोद बजाज, ीआईटी (J)छ ू ट), लखनऊ श्री आशीर्ष रस् ोगी, ए 70, गां"ी नगर, किंप्र रोड, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश विदनांक 25.02.2016 को आईडी जारी की गयी। अनुस्मारक विदनांक 11.05.16। आईडी ने न ो ाप प्राप्त विकया और न 7ी ज ाब विदया। य[7] 29.08.16 को बंद 7ुआ। 9 ी. ए. पी. टी. पी. क े. बजाज अपर ीआइटी श्रीम ी रेणु बजाज डब्ल्यू/ओ क ै प्टन पी क े बजाज ीआईटी, अजमेर को न्यायालयी मामले में जानकारी प्रदान करने क े लिलए विदनांक 28.01.2015 का पत्र। विदनांक 20.01.2016 की स्थिस्र्थीति रिरपोट- और विदनांक 28.09.2016 की अनुस्मारक क े लिलए प्र"ान ी ीआईटी, जयपुर को एक पत्र भेजा गया। अपीलक ा- की प्रति विxया xमांक अति"कारी स्थिस्र्थीति 5. यातिचकाक ा-27. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 26 ंख्या - का नाम क े अनु ार थ्य 1 श्री पी. क े. बजाज अपर ीआईटी, श्री ओ. पी. जांगरें इ ंबं" में विपछले 13 र्ष‹ में यातिचकाक ा- े कोई स्पष्टीकरण न7ीं मांगा गया 7ै। श्री ए. क े. जांगरे को ए ीबी/ ीबीआई ने 12.12.15 को विगरफ् ार विकया र्थीा और 7 विनलस्थिम्ब 7ै। (J)अनुलग्नक ंख्या ए 1)। 2 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)ई), लखनऊ खाली / विदनांक 03.05.2018 को बंद कोई वि रण न7ीं विदया गया 7ै 3 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)ई), लखनऊ ड्राइकिं ग प्रथिशक्षण और ैज्ञाविनक अनु ं"ान लखनऊ द्वारा जन री जाँच क े अ"ीन विदनांक 03.02.2016 को विनरीक्षण क े लिलए ली गई rाइल इ विटप्पणी क े ार्थी 17 म7ीनों क े बाद 09.08.2017 को लौटी विक अब इ vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 27 2016 में की गई थिशकाय रिरकॉड- की आ श्यक ा न7ीं 7ै और मामले को एडीजी (J) ीआईजी) (J)न्यूजीलैंड) द्वारा 10.02.2016 को बंद कर विदया गया 7ै। ए 2) (J)ii) वि द्व ीजेएम लखनऊ द्वारा थिशकाय क ा- क े लिखलाr जारी गैर जमान ी ारंट ए 3) 4 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)ई), लखनऊ श्री "रम ीर कविपल आईएrए े ाविन ृत्त, विदनांक 17.10.20 जांच क े 7 विदनांक 13.11.2017 को जारी आईडी ने विदनांक 18.11.2017 को ज ाब विदया। श्रीम ी नैना कविपल क े ुर, आईआरए विदल्ली में म7ाविनदेशक (J) ी) काया-लय में प7ले ैना । (J)ii) दो अ रों (J)अनुलग्नक ंख्या ए 4 क े रूप में आदेश की प्रति ) क े बा जूद पैन भी प्रदान न7ीं विकए जाने क े कारण ंलग्नक अस् ीकार आदेश vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 28 विदया गया 5 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)ई), लखनऊ श्री बालेश सिं 7, पीएमओपीज ीी/ई 20 17/0597 795 विदनांक 17.11.20 17 द्वारा े विदनांक 27/12/17 को जारी आईडी प्रत्यर्थी2 द्वारा कोई वि रण उपलब्" न7ीं कराया गया 7ै। अभी क कोई ाल न7ीं पूछा गया 7ै। 6 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)छ ू ट), लखनऊ श्री अशोक मा-, लखनऊ विदनांक 08/04/16 को जारी स्मरण पत्र विदनांक 11.05.16 क न ो उत्तर विदया गया और न 7ी विदनांक 19.7.16 क विबना वि रिर विकए ाप प्राप्त विकया गया। rज2/छद्म अनाम थिशकाय । विनरीक्षण क े दौरान 29.11.2017 को ली गई rाइलों को अभी भी कनेक्ट विकया गया 7ै। 7 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)छ ू ट), लखनऊ श्री जग पांडे, 28/42, सि वि ल लाइं, बरेली, उत्तर विदनांक 03.08.16 को जारी विकया गया आईडी रिरमाइंडर विदनांक 09.09.16 को जारी विकया गया। थिशकाय अभी भी विदनांक 29311.2017 को विनरीक्षण क े दौरान ली गई rाइलों े जुड़ी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 29 प्रदेश विदनांक 29.06.20 आईडी पत्र विक ी वि रण क े प्राप्त 7ुआ। सिज े विदनांक 07.10.16 को बन्द कर विदया गया। 16. 7ुई 7ै। 8 श्री पी क े बजाज ीआईटी (J)छ ू ट), लखनऊ श्री आशीर्ष रस् ोगी, ए 70, गां"ी नगर, किंप्र रोड, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश विदनांक 25.02.2016 को जारी की गई आईडी – 11.05.2016 की याद विदला ी 7ै। आईडी ने न ो ाप प्राप्त विकया और न 7ी ज ाब विदया। थिशकाय अभी भी 29.11.2017 को विनरीक्षण क े दौरान ली गई rाइलों े जुड़ी 7ुई 7ै। विदनांक /29.08.16 को बन्द कर विदया गया। 9 श्री पी. क े. बजाज अति रिर[ ीआईटी श्रीम ी रेणु बजाज पत्नी क ै प्टन पी क े बजाज ीआईटी, अजमेर को न्यायालयी मामले में जानकारी प्रदान करने क े लिलए विदनांक 28.01.2015 का डीजीआईटी (J) ी) द्वारा अब क कोई प्रश्न न7ीं उठाया गया 7ै, लेविकन माननीय ए ी/एच ी क े आदेशों की प्रति यां vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 30 पत्र। विदनांक 20.1.2016 को स्थिस्र्थीति रिरपोट- क े लिलए प्र"ान ी ीआईटी जयपुर को एक पत्र और विदनांक 28.09.2016 को अनुस्मारक भेजा गया। 05. 2008 को लाक 7ो गया। डीजीआईटी (J) ी) को 21.03.2018 को (J)पुराने ै ावि7क वि ाद) ौंपी गई, लेविकन विrर भी डीजीआईटी (J) ी) द्वारा लंविब रखी गयी (J) ंलग्नक ंख्या ए 5 क े रूप में प्रति )।

28. जै ा विक उपरो[ े देखा जा क ा 7ै, उपयु-[ नौ थिशकाय ों में े, वि भाग द्वारा र्ष- 2016-17 में xम ंख्या 2,6,[7] और 8 में उसिल्ललिख चार थिशकाय ें प7ले 7ी बंद कर दी गई र्थीीं। xम ंख्या - 1 पर ूचीबद्ध थिशकाय क े ंबं" में, वि भाग क े एक अन्य अति"कारी द्वारा अपीलक ा- क े लिखलाr उत्पीड़न और काय- में 7स् क्षेप े ंबंति" आरोप लगाया गया 7ै। न्यायाति"करण ने अपीलक ा- की दलील पर गौर विकया 7ै, सिज का खंडन न7ीं विकया गया 7ै विक क े न्द्रीय अन् ेर्षण ब्यूरो22 क े भ्रष्टाचार विनरो"क वि भाग ने बाद में उ[ अति"कारी को भ्रष्टाचार क े आरोप में विगरफ् ार विकया र्थीा। अपीलक ा- ने विटप्पणी कॉलम में य[7] भी क7ा 7ै विक कथिर्थी थिशकाय पर उ े कभी भी कोई स्पष्टीकरण न7ीं मांगा गया र्थीा, सिज की स्थिस्र्थीति को जांच क े 7 विदखाया गया 7ै। xम ंख्या 3 और 4 की थिशकाय ों क े ंबं" में, प्रत्यर्थी2 क7ा 7ै विक उनकी जांच की जा र7ी 7ै। ज ाब में, अपीलक ा- ने 22 ंक्षेप में ' ीबीआई' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 31 क7ा 7ै विक र्ष- 2016 की xम ंख्या 3 में थिशकाय 10 rर री, 2016 को एडीजी (J) क - ा) (J)एनजेड) द्वारा बंद कर दी गई र्थीी और वि भाग क े भी र एक अति"कारी क े रिरश् ेदार द्वारा की गई थिशकाय xमांक ंख्या 4 में खारिरज कर दी गई र्थीी क्योंविक थिशकाय क ा- ने दो अ र विदए जाने क े बा जूद अपना पैन नंबर न7ीं विदया र्थीा। इन दा ों का कोई खंडन न7ीं 7ै।xम ंख्या 4 की थिशकाय पर आ े 7ुए, प्रत्यर्थी2 द्वारा गविठ मीक्षा विमति ने कथिर्थी थिशकाय की स्थिस्र्थीति को 22 जन री, 2019 को बंद 7ोने क े रूप में दज- विकया 7ै.य[7] न्यायाति"करण द्वारा 9 विद ंबर, 2020 को पारिर r ै ले क े पैरा 26 क े अ लोकन े स्पष्ट 7ै।अब xम ंख्या 9 पर थिशकाय बची 7ुई 7ै, जो अपीलक ा- की पू - पत्नी द्वारा अपीलक ा- क े लिखलाr विद्ववि ा7, नैति क अ"म ा आविद का आरोप लगा े 7ुए की गई र्थीी। विटप्पथिणयों क े कॉलम में, प्रत्यर्थी2 क े द्वारा क7ा गया 7ै विक वि भाग द्वारा पक्षकारों क े बीच कथिर्थी न्यायालयी काय- ा7ी क े ंबं" में आ श्यक जानकारी मांगी गई र्थीी। अपीलक ा- ने स्पष्ट विकया 7ै विक ंबंति" न्यायालय द्वारा पक्षकारों को लाक की तिडxी दी गई र्थीी और उ[ आदेश की एक प्रति 21 माच-, 2018 को प्राविप्त क े लिलए वि भाग को दी गई र्थीी।

29. ज7ां क अपीलक ा- क े ै ावि7क वि ाद का ंबं" 7ै, अथिभलेख पर रखी गई ामग्री े प ा चल ा 7ै विक उ क े और विदल्ली उच्च न्यायालय मध्यस्र्थी ा और ुल[7] क ें द्र द्वारा विनयु[ वि द्व मध्यस्र्थी द्वारा विदनांक 18 जून, 2016 को दज- मझाै े क े द्वारा उ की अलग र[7] र7ी पत्नी क े बीच एक मझौ े क े आ"ार पर शांति प्राप्त 7ुई र्थीी। एम ए टी. एपीपी (J)एr. ी.) ंख्या. 148/2014, 34/2016 ए ं 36/2016 में विदल्ली उच्च न्यायालय विदल्ली क े खण्ड पीठ क े द्वारा आदेश विदनांविक 14.07.2016 क े द्वारा उ[ मझौ ा करार को अथिभलेख वि ति" रूप े दज- विकया गया।दोनों पक्षों ने इ बा पर 7मति व्य[ की र्थीी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 32 विक े ंबंति" परिर ार न्यायालय में यातिचका दायर करक े अपनी शादी को भंग करने क े लिलए ंयु[ कदम उठाएंगे। मझौ े क े विनयमों और श ‹ में े एक य[7] र्थीा विक अपीलक ा- अपनी पत्नी क े लिलए एक आ ा ीय फ्ल ै ट की व्य स्र्थीा करेगा, सिज े उ क े भाई ने उ क े रखरखा, गुजारा भत्ता, स्त्री"न क े भी दा ों क े लिलए एकमुश् विनपटान क े रूप में उ क े नाम पर खरीदने क े लिलए 7मति व्य[ की र्थीी। इ श - का बाद में अनुपालन विकया गया र्थीा और 3 अक्टूबर, 2016 क े फ्ल ै ट क े विबxी दस् ा ेज े उत्पन्न 7ुआ 7ै, सिज े य[7] थ्य प्रकट 7ो ा 7ै विक अपीलक ा- क े भाई द्वारा ₹ 6,00,000/- (J)छ[7] लाख रुपये) की राथिश का भुग ान वि x े ा को फ्ल ै ट क े मूल्य क े रूप में विकया गया र्थीा।

30. एक बार जब पक्षकार विक ी मझौ े पर प7ुंच गए र्थीे और ंबंति" न्यायालय द्वारा पारस्परिरक 7मति े वि ा7 वि च्छेद की तिडxी पारिर कर दी गई र्थीी, ो अपीलार्थी2 की पत्नी द्वारा लगाए गए विद्ववि ा7 आविद क े आरोप म7त् खो दे े 7ैं क्योंविक इ मामले को इ प7लू पर न्यायालय द्वारा ाप विकए जाने ाले विक ी विनष्कर्ष- क े लिलए कभी भी वि चारण क े लिलए न7ीं लिलया गया र्थीा। उपयु-[ पृष्ठभूविम में, प्रत्यर्थी2 क े लिलए अपनी े ा क े दौरान अपीलक ा- क े लिखलाr प्राप्त थिशकाय ों की एक श्रृंखला काे उठाने का कोई औतिचत्य प्र ी न7ीं 7ो ा 7ै, सिज ने उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े लिखलाr भार उठाया र्थीा, और अति"क, जब ये थिशकाय ें प्रत्यर्थी2 की जानकारी में र्थीीं और विrर भी, उनका े ा रिरकॉड- पूरे मय विनद र्ष र7ा।ऐ ा क ु छ भी रिरकॉड- पर न7ीं रखा गया 7ै जो े काम क े आचरण में अचानक विगरा ट विदखा ा 7ै ाविक उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त कर विदया गया 7ो। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 33

31. अब 7म उ पृष्ठभूविम की जांच करने क े लिलए आगे बढ़ क े 7ैं सिज में अपीलक ा- को शुरू में क - ा मंजूरी दी गई र्थीी और बाद में प्रत्यर्थी2 द्वारा रोक विदया गया र्थीा। इ में कोई वि ाद न7ीं 7ै विक र्ष- 2013 में अपीलक ा- ने आईटीएटी क े दस्य क े पद क े लिलए आ ेदन विकया र्थीा और र्ष- 2014 में चयन विमति ने उ े 48 चयविन उम्मीद ारों की ूची में शीर्ष- पर रखा र्थीा। वि भाग द्वारा अगस्, 2013 में और एक बार विrर 15 जुलाई, 2015 को जारी क क े आ"ार पर, प्रत्यर्थी2 द्वारा ए ी ी को वि र्षय पद पर विनयुवि[ क े लिलए अपीलक ा- की सि rारिरश की गई र्थीी।

32. 7ालांविक, क ु छ मय बाद, प्रत्यर्थी2 द्वारा अपीलक ा- क े लिखलाr एक प्रति क ू ल आईबी रिरपोट-इ आ"ार पर दी गई क - ा मंजूरी को रोक विदया गया र्थीा। य7ां य[7] उल्लेख करना उतिच न7ीं 7ै विक उपयु-[ प्रति क ू ल आईबी रिरपोट- भी उ ी ै ावि7क वि ाद क े दौरान अपीलार्थी2 की पत्नी े प्राप्त थिशकाय े उत्पन्न 7ुई र्थीी सिज का प7ले 7ी न्यायालय में ौ7ाद-पूण- ढंग े मा"ान 7ो चुका र्थीा। "कथिर्थी मझौ े का थ्य प्रत्यर्थी2 की जानकारी में र्थीा, सिजन्7ोंने ओ. एम., विदनांक 15 जुलाई, 2015, में क7ा र्थीा विक" "श्री बजाज क े लिखलाr ै ावि7क वि ाद े उत्पन्न 7ोने ाले विद्ववि ा7 क े कथिर्थी काय- सि द्घ न7ीं 7ुए 7ैं." अपनी क - ा रिरपोट- को रोक लेने े व्यथिर्थी अपीलक ा- ने ओ.ए. ंख्या 95/2016 क े माध्यम े रा7 क े लिलए न्यायाति"करण का दर ाजा खटखटाया र्थीा। 10 rर री, 2017 क े अं रिरम आदेश क े माध्यम े, न्यायाति"करण ने प्रत्यर्थी2 को विनदtश विदया विक े एक म7ीने क े भी र चयन विमति क े मक्ष अपीलक ा- क े ंबं" में प्रति क ू ल आईबी रिरपोट- विrर े प्रस् ु करें, ाविक उ[ विमति इ मामले में अपना वि चार रख क े ।जै ा विक प7ले उल्लेख विकया गया 7ै, न्यायाति"करण द्वारा पारिर विदनांविक 10 rर री, 2017 क े पू [ आदेश को उच्च न्यायाति"करण द्वारा 30 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 34 मई, 2017 को बरकरार रखा गया र्थीा और इ न्यायाति"करण द्वारा विदनांविक 15 न ंबर, 2017 क े आदेश द्वारा पुविष्ट की गई र्थीी।

33. उपयु-[ न्यातियक आदेश विदनांविक ों े वि चलिल 7ुए विबना, प्रत्यर्थी2 ने अपीलार्थी2 की क - ा मंजूरी को रोकना जारी रखा, इ बार य[7] दा ा कर े 7ुए विक 20 अप्रैल, 2018 को उ क े लिखलाr एक विनरीक्षण रिरपोट- में क ु छ प्रति क ू ल विनष्कर्ष- र्थीे, जो 29 और 30 न ंबर, 2017 को आयोसिज अपीलक ा- क े काया-लय क े विनरीक्षण क े आ"ार पर ैयार विकए गए र्थीे, जो इ न्यायाति"करण द्वारा 10 rर री, 2017 को पारिर आदेश विदनांविक को बरकरार रखने क े क ु छ विदनों क े भी र विकया गया र्थीा, सिज में प्रत्यर्थिर्थीयों े चयन विमति क े मक्ष अपनी प्रति क ू ल आईबी रिरपोट- पेश करने क े लिलए क7ा गया र्थीा, ाविक इ मामले में एक दृविष्टकोण लिलया जा क े ।य[7] वि डंबना 7ै विक 20 अप्रैल, 2018 की विनरीक्षण रिरपोट- में प्रत्यर्थी2 द्वारा देखी गई अविनयविम ाओं, सिजनक े कारण े अपीलक ा- की क - ा अनुमति को रोक र7े र्थीे, क े बारे में 10 विदन प7ले उनकी जानकारी र्थीी और विrर भी उन्7ोंने उ े क - ा क्लीयरें दे े 7ुए 11 अप्रैल, 2018 को एक पत्र जारी विकया र्थीा।

34. य[7] उल्लेखनीय 7ै विक अपीलक ा- ने ओ.ए. ंख्या 77/2018 में 29 और 30 न ंबर, 2017 को विकए गए विनरीक्षणों क े आ"ार पर प्रत्यर्थी2 द्वारा उ क े लिखलाr शुरू की गई काय- ा7ी को चुनौ ी दी र्थीी। उ[ काय- ा7ी में, न्यायाति"करण ने 2 rर री, 2018 को य[7] विनदtश दे े 7ुए एक अं रिरम आदेश पारिर विकया र्थीा विक उ[ काय- ा7ी अपीलक ा- की पदोन्नति, विनयुवि[ और प्रति विनयुवि[ की ंभा नाओं क े रास् े में आड़े न7ीं आएगी। उपयु-[ विनदtशों क े बा जूद, प्रत्यर्थी2 20 अप्रैल, 2018 को न क े ल अपीलक ा- को क vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 35 देने े इनकार कर विदया, बस्थिल्क े एक कदम आगे बढ़े और उ का नाम ‘ 7म ूची’ यानी ंविदग्" अति"कारिरयों की ूची में डाल विदया।प्रत्यर्थी2 क े इ काय- पर अपीलक ा- द्वारा न्यायाति"करण क े मक्ष ओ. ए. ंख्या 279/2018 में भी 7मला विकया गया र्थीा।आलिखरकार, दोनों शीर्ष-क मूल आ ेदनों का न्यायाति"करण द्वारा ामूवि7क रूप े अपीलक ा- क े पक्ष में 6 माच-, 201 क े एक वि स् ृ r ै ले द्वारा r ै ला विकया गया, सिज पर विक ी भी रिरष्ठ न्यायालय द्वारा रोक न7ीं लगाई गई 7ै।

35. आयकर आयु[ (J)छ ू ट) क े रूप में अपनी न्यातियक/अ"--न्यातियक क्षम ा में उ क े द्वारा पारिर क ु छ आदेशों क े ंबं" में स्पष्टीकरण मांग े 7ुए 29 और 30 न ंबर, 2017 को उ क े काया-लय क े पू [ 35.विनरीक्षण क े आ"ार पर प्रत्यर्थी2 द्वारा 30 जन री, 2018 को जारी एक अलग ज्ञापन े व्यथिर्थी, अपीलक ा- को ओ. ए. ंख्या 332/ 2018 दालिखल करनी पड़ी, सिज का विनण-य न्यायाति"करण द्वारा उ क े पक्ष में 28 मई, 2019 को विदया गया र्थीा। अपने r ै ले में, न्यायाति"करण ने उच्च न्यायालय द्वारा रिरट यातिचका ंख्या 13390/2018 (J)ए बी) में पारिर विदनांविक 15 मई, 2018 क े आदेश का 7ारा लिलया, सिज में य[7] घोर्षणा की गई र्थीी विक वि भाग द्वारा विकया गया विनरीक्षण अति"कार क्षेत्र े बा7र र्थीा और उ[ विनरीक्षण क े आ"ार पर अपीलक ा- की क - ा मंजूरी को रोकने का कोई औतिचत्य न7ीं 7ै। य[7] देख े 7ुए विक अपीलक ा- े स्पष्टीकरण मांगने ाले प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा 30 जन री 2018 को जारी विकया गया मेमो वि भाग द्वारा विकए गए विनरीक्षण पर आ"ारिर र्थीा, न्यायाति"करण ने अपीलक ा- क े पक्ष में उ क े द्वारा लौटाए गए विनष्कर्ष‹ की कड़ी को दो7राया। ामान्य विनण-य विदनांक 6 माच- 2019 [ओ.ए. ंख्या 137/2018 और ओ.ए. ंख्या 279/2018] और प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा जारी मेमो विदनांक 30 जन री 2018 को विनरस् करने की काय- ा7ी की। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 36 य[7] भी विनण-य लिलया गया विक 26 अगस्, 2018 को आयोसिज चयन विमति की बैठक में की गई सि rारिरशों क े ंदभ- में य[7] आदेश अपीलक ा- का नाम आईटीएटी क े दस्य क े रूप में अग्रेविर्ष करने पर प्रति क ू ल प्रभा न7ीं डालेगा।

36. अति"करण और उच्च न्यायालय द्वारा अपीलक ा- क े पक्ष में पारिर आदेशों की श्रृंखला क े अनु ार, प्रत्यर्थी2 ने अपीलार्थी2 की क - ा मंजूरी को रोक विदया, सिज े अपीलक ा- को पारिर आदेशों का अनुपालन न करने क े लिलए ंबंति" अति"कारिरयों क े लिखलाr अ मानना यातिचका दायर करने क े लिलए मजबूर 7ोना पड़ा। उच्च न्यायालय और न्यायाति"करण दोनों ने आदेशों की जानबूझकर अ ज्ञा करने क े लिलए नोविट जारी विकए।उच्च न्यायालय क े मक्ष काय- ा7ी में, एक रr, प्रत्यर्थी2 इ आ"ार पर स्र्थीगन की मांग की विक अपीलक ा- का नाम ए ी ी क े आईटीएटी क े दस्य क े रूप में उ की विनयुवि[ क े लिलए आगे बढ़ाने क े लिलए 31 मई, 2019 क कदम उठाए जा र7े र्थीे, सिज ारीख को उन्7ें अनुपालन करने का एक अंति म अ र विदया गया र्थीा और उनक े अनुरो" पर, मामले को 9 जुलाई, 2019 क स्र्थीविग कर विदया गया र्थीा और दू री रr, प्रत्यर्थी2 17 जून, 2019 को एक चाज- ज्ञापन क े ार्थी अपीलक ा- को र्थीप्पड़ मारा और 1 जुलाई, 2019 को उन्7ें विनलंविब कर विदया।

37. इ थ्य को ध्यान में रख े 7ुए विक प्रति ाविदयों ने अपीलक ा- क े लिखलाr शुरू की गई अनुशा नात्मक काय- ा7ी को उ क े ार्विकक विनष्कर्ष- क न7ीं प7ुँचाया और इ क े बजाय उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने का आदेश जारी विकया, य[7] न्यायालय उ[ आरोप में लगाए गए आरोपों में ल्लीन करना मीचीन न7ीं मझ ा ज्ञापन; विrर भी, 7मने र री ौर पर चाज- मेमोरेंडम को देखा 7ै सिज में ीन आरोपों का उल्लेख 7ै - एक आरोप 7ै विक अपीलक ा- उ क े और vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 37 उ की अलग र[7] र7ी पत्नी क े बीच ै ावि7क वि ाद क े ंबं" में एक फ्ल ै ट खरीदने क े लिलए वि भाग े अनुमति लेने में वि rल र7ा और दू रा आरोप 7ै उनकी परिरत्य[ा पत्नी द्वारा उन पर लगाए गए विद्ववि ा7 क े आरोप क े ंबं" में 7ै। 7मने प7ले 7ी उल्लेख विकया 7ै विक ै ावि7क वि ाद क े दौरान, पक्षकार एक मझौ े पर प7ुंच गए र्थीे और 7 फ्ल ै ट जो पत्नी को37. विदए जाने क े लिलए 7म र्थीा, अपीलक ा- द्वारा न7ीं, बस्थिल्क उ क े भाई द्वारा खरीदा गया र्थीा, जो थ्य अथिभलेख पर रखे गए दस् ा ेजों े पया-प्त रूप े ाविब 7ो ा 7ै। दोनों पक्षों क े बीच ै ावि7क वि ाद आप ी 7मति क े आ"ार पर विदए गए लाक क े तिडxी पर बंद 7ो गया र्थीा।य[7] विक प्रत्यर्थी2 भी कथिर्थी थ्य े अ ग र्थीे, य[7] 15 जुलाई, 2015, विदनांविक ओ. एम. क े थ्यों े स्पष्ट 7ै, जो अन्य बा ों क े ार्थी ार्थी ार्थी- ार्थी य[7] रिरकॉड- कर ी 7ै विक पत्नी द्वारा लगाए गए कथिर्थी आरोप स्र्थीाविप न7ीं विकए गए र्थीे। ी रा न्यायालय अपीलक ा- क े स् ीक ृ छ ु ट्टी क े विबना अदाल ी ुन ाई में उपस्थिस्र्थी 7ोने े ंबंति" र्थीा।7ालांविक, 17 जुलाई, 2019 को े लिखलाr शुरू की गई अनुशा नात्मक काय- ा7ी को 27 सि ंबर, 2019 को उ क े लिखलाr ीन म7ीने े भी कम मय में अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े आदेश पर प्रत्यर्थी2 द्वारा बन्द कर विदया गया र्थीा।

38. अपीलक ा- ने इ दलील पर प्रत्यर्थी2 क े लिखलाr ंस्र्थीाग पू ा-ग्र[7] और द्वेर्ष क े आरोप लगाए 7ैं विक ीबीडीटी क े अध्यक्ष, जो मीक्षा विमति क े दस्य र्थीे, े े ा वि ाद े ंबंति" ीन अ मानना काय- ावि7यों का ामना कर र7े र्थीे, सिज में उच्च न्यायाति"करण क े ार्थी - ार्थी न्यायाति"करण द्वारा भी नोविट जारी विकए गए र्थीे।इ में कोई ंदे7 न7ीं 7ै विक कानून का शा न एक ुशासि माज की बुविनयाद 7ै और शा न प्रणाली में पू ा-ग्र[7] या दुभा- ना की मौजूदगी वि विनयविम ामासिजक व्य स्र्थीा क े मूल्यों की बुविनयाद पर प्र7ार करेगी। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 38 शवि[ क े दुभा- नापूण- प्रयोग े ंबंति" कानून कई r ै लों का वि र्षय र7ा 7ै [ न्दभ-ः ए. प्र ाप सिं 7 बनाम पंजाब राज्य23, जयचंद लाल ेविठया बनाम पतिश्चम बंगाल राज्य24, गलीज जे. डी. श्री ास् बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य25, गलीज एंड एक् प्रे न्यूजपेप - प्राइ ेट लिलविमटेड और अन्य बनाम भार ंघ और अन्य26 ] बार-बार य[7] क7ा गया 7ै विक शवि[ का कोई भी प्रयोग जो कानून द्वारा विन"ा-रिर मापदंडों े अति"क 7ै या बा7री या अप्रा ंविगक कारकों क े कारण प्रेरिर 7ै या दुभा- नापूण- इरादे े प्रेरिर 7ै या इ का ामना करना पड़ र7ा 7ै, इ लिलए स्पष्ट रूप े मनमाना 7ै विक य[7] न्यातियक जांच का ामना न7ीं कर क ा 7ै, उ े विनरस् विकया जाना चावि7ए। -मान मामले में, 7ालांविक अपीलार्थी2 ने प्रत्यर्थी2 क े लिखलाr, वि शेर्ष रूप े त्कालीन ीबीडीटी अध्यक्ष क े लिखलाr ंस्र्थीाग पू ा-ग्र[7] और पू ा-ग्र[7] क े आरोप लगाए 7ैं, जो मीक्षा विमति क े एक दस्य र्थीे, लेविकन उ[ अति"कारी अपीलक ा- द्वारा न्यायाति"करण या उच्च न्यायाति"करण क े मक्ष एक पक्ष क े रूप में शाविमल न7ीं 7ुए र्थीे, सिज क े लिलए उन्7ें एक ज ाबी शपर्थी पत्र दायर करक े अपना रुख स्पष्ट करने का अ र विमला र्थीा। इ लिलए, इन आरोपों को इ न्यायालय द्वारा न7ीं देखा जा क ा 7ै।

39. ंस्र्थीाग पू ा-ग्र[7] और द्वेर्ष क े पू [ आरोपों को, अथिभलेख पर रखी गई ामग्री का अ लोकन करने क े बाद, 7म अपीलक ा- द्वारा लिलए गए अन्य आ"ारों में योग्य ा पा े 7ैं।य[7] देखा गया 7ै विक यद्यविप एr आर 56 (J)J)) य[7] आत्यंति क अति"कार दे ा 7ै विक प्रत्यर्थिर्थीयों को जनवि7 में एक रकारी े क को े ाविन ृत्त

24 AIR 1967 SC 48339. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 39 करने का पूण- अति"कार 7ै और ऐ ा आदेश अपीलक ा- क े पचा र्ष- की आयु प्राप्त आदेशने क े बाद विक ी भी मय उ क े लिखलाr पारिर विकया जा क ा र्थीा, प्रत्यर्थी2 अपने काय-काल क े अं क ऐ ा कोई विनण-य न7ीं लिलया। इ मामले में अविन ाय- े ाविन ृलित्त का आक्षेविप आदेश 27 सि ंबर, 2019 को पारिर विकया गया र्थीा, जबविक अपीलक ा- को जन री, 2020 में ामान्य xम में े ाविन ृत्त 7ोना र्थीा।प्रत्यर्थी2 क े दृविष्टकोण में एक स्पष्ट वि रो"ाभा विदखाई दे ा 7ै, सिजन्7ोंने जुलाई, 2019 क अपीलक ा- को 'आउटस्टैंचिंडग' क े रूप में ग्रेड देना जारी रखा र्थीा और उ की क -ब्यविनष्ठा का मूल्यांकन 'आउटस्टैचिंडग' क े रूप में विकया र्थीा। लेविकन उ े ीन म7ीने े भी कम मय में, प्रत्यर्थी2 इ विनष्कर्ष- पर प7ुंचने क े लिलए कछ ु आ बन गए र्थीे विक उन्7ें अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त विकया जाना चावि7ए। यविद अपीलक ा- 50 र्ष- की आयु प्राप्त करने क े बाद एक दशक े क ु छ कम मय क े लिलए े ा में बने र7ने क े योग्य र्थीा और 31 जुलाई, 2019 को 1-10 क े पैमाने पर 9 का ग्रेड विदया गया र्थीा, ो य[7] न7ीं विदखाया गया 7ै विक उ क े बाद क्या 7ुआ र्थीा, सिज क े कारण प्रत्यर्थी2 एrआर 56 (J)जे) का 7ारा लिलया और अपनी े ाविन ृलित्त क े लिलए क े ल ीन म7ीने की े ा क े ार्थी उ े अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े लिलए जनवि7 सि द्धां को लागू विकया।ऐ े मामले में, य[7] न्यायालय ास् वि क मस्या को 7ल करना चा7 ा 7ै ए ं एै ा करने पर, 7मारा य[7] दृढ़ म 7ै विक मामले क े विदए गए थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में अविन ाय- े आदेश को बनाए न7ीं रखा जा क ा 7ै.कथिर्थी आदेश दंडात्मक प्रक ृ ति का 7ै और अपीलक ा- क े लिखलाr लंविब अनुशा नात्मक काय- ा7ी को जल्द माप्त करने और उ े त्काल 7टाने क े लिलए पारिर विकया गया र्थीा।प्रत्यर्थी2 द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश पारिर न7ीं 7ो ा 7ै क्योंविक य[7] जन ा क े वि7 की े ा करने क े अं र्विनवि7 परीक्षण को ं ुष्ट करने में वि rल र[7] ा 7ै। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सि वि ल अपील ंख्या - 6161/2022 40

40. उपयु-[ चचा- को ध्यान में रख े 7ुए, 31 मई, 2022 को विदए गए आक्षेविप आदेश को पलटना और 27 सि ंबर, 2019 को प्रत्यर्थी2 द्वारा पारिर अविन ाय- रूप े े ाविन ृत्त करने क े आदेश को रद्द ए ं अपास् विकया जा ा 7ै। परिरणाम ः, अपीलक ा- पर अति"रोविप अविन ाय- े ाविन ृलित्त क े कथिर्थी आदेश े उत्पन्न 7ोने ाले प्रति क ू ल परिरणाम, यविद कोई 7ों, को भी अपास् विकया जा ा 7ै। अपील को अनुमति दी जा ी 7ै और पक्षकारों को अपने स् यं क े खचt 7न करने क े लिलए छोड़ े 7ुए अपील को पू [ श ‹ पर विनस् ारण विकया जा ा 7ै। …………………………….. न्यायमूर्ति ए. ए. बोपन्ना …………………………….. न्यायमूर्ति वि7मा को7ली नई विदल्ली 03 माच-, 2023 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd