Full Text
भारत क
े उचतम यायालय म
आपराधक अपीलय ेाधकार
2009 क आपराधक अपील सं"या 987
र#व ढंगरा ….. अपीलकतागण
बनाम
हरयाणा रा*य ….. +,तवादगण
क
े साथ
2009 क आपराधक अपील सं"या 989-990
2009 क आपराधक अपील सं"या 986
2009 क आपराधक अपील सं"या 988
और
आपराधक अपील सं"या 2023 का 645
(@ #वशेष अनुम,त याचका (आपराधक सं"या 2012 क सं"या 5296)
,नणय
नागार3ना, यायाधीश
2012 क वशेष अनुम त याचका (आपराधक) संया 5296 म अनुम त द गई ।
अ य सभी मामल$ म अनुम त पहले ह मंजूर क जा चुक है।
JUDGMENT
2. उपि+थत अपील उन पांच अ-भयु.त$ /वारा दायर क गई ह0 िजनक दोष-स2य$ क पुि3ट पंजाब और ह7रयाणा उ9च यायालय क े:दनांक 13.02.2008 क े आ;ेपत नण<य /वारा भारतीय दंड सं:हता, 1860 (सं;ेप म 'आईपीसी') क धारा 148,149 और 364ए क े तहत क गई है। आपराधक अपील /एसएलपी संया आरोपय$ क े नाम छ ू ट क े साथ गुजर:हरासत क अवध 2009 क आपराधक अपील संया 987 रमन गो+वामी (मृत, अ-भयु.त संया 3) जेल:हरासत AमाणपB:दनांक 31.01.2023 क े अनुसार 6 साल, 8 महने और 10:दन (मृतक)। अपील समाCत हो जाती है। 2009 क आपराधक अपील संया 987 रव ढंगरा (आरोपी संया 4) 7 वष<, 10 माह और 13:दन (31.01.2023 क े जेल अ-भर;ा Aमाण पB क े अनुसार 13.05.2009 से जमानत पर) आपराधक अपील संया 2009 क 986 और 2009 क 988 लEमी नारायण (आरोपी संया 5) अ-भर;ा AमाणपB A+तुत नहं Fकया गया आपराधक अपील संया 989- 990/2009 बलजीत पाहवा (आरोपी संया 2) 7 वष<, 8 माह और 2:दन े जेल े अनुसार 13.05.2009 से जमानत पर) 2012 क एसएलपी (आपराधक) संया 5296 परवेज खान (आरोपी संया 1) 3 साल, 7 महने और 2:दन े जेल े अनुसार 28.07.2012 से जमानत पर) रमन गो+वामी /वारा दायर 2009 क आपराधक अपील संया 987 को उनक मृHयु क े कारण:दनांक 08.04.2019 क े आदेश /वारा समाCत कर:दया गया है। तदनुसार, क े वल रव ढंगरा क े संबंध म आपराधक अपील संया 987/2009 पर वचार Fकया जाता है। इन सभी मामल$ क एक साथ सुनवाई क गई और इस सामा य नण<य से इनका न+तारण Fकया जा रहा है।
3. सं;ेप म, -शकायतकता< डॉ. एच. क े. सोबती (पीडKLयू-20) क े अनुरोध पर थानेसर शहर क े पु-लस थाने म दज< एफआईआर संया 64 क े अनुसार, अपीलकता<ओं ने डॉ. एच. क े. सोबती और Oीमती इंP सोबती (पीडKLयू-5) क े पुB हष< (पीडKLयू-21), जो 14 साल का था, का उस समय अपहरण कर -लया था जब वह +क ू ल जा रहा था। +टेशन हाउस अधकार ने इस:टCपणी क े साथ Aाथ-मक दज< क थी Fक भारतीय दंड सं:हता क धारा 364/34 क े तहत मामला तQय$ से बनता Aतीत होता है। पीडKलू-21 क े बयान क े अनुसार, उसे सह- आरोपी रव ढंगरा ने अपने +क ू टर पर पीछे बैठने क े -लए धमकाया और मना करने पर उसे जबरन कार म डाल:दया गया। सुर;ा क े -लए चLलाने पर उसे धमक द गई Fक अगर वह रोएगा तो उसे चाक ू और प+तौल से मार:दया जाएगा। उ ह$ने उसे यह भी बताया Fक उसक े संप न पता 50 लाख Tपये क Fफरौती भी दे सकते ह0। जांच म पता चला Fक पीडKLयू-21 को मकान संया 772, से.टर-13, क ु T;ेB म रखा गया था। Oीमती कांता गोयल (पीडKLयू-2) जो मकान नंबर 1653/13 क नवासी थीं, जो उ.त +क ू ल क े पास था और 9 वीं क;ा क े एक अ य छाB, मनीष (पीडKLयू-4) ने उ ह बताया Fक सुबह 8:15 बजे दो लड़क$, िजनक े चेहरे ढंक े हुए थे, ने हष< को Vबना नंबर Cलेट वाल और रंगीन शीशे वाल माT त कार म Vबठा:दया था। बाद म, उसी:दन, Fफरौती क मांग करने वाले कॉल AाCत हुए, िजस पर कार<वाई करते हुए, पीडKलू-20 मांगी गयी Fफरौती क े साथ संबंधत +थान पर पहुंच गया। जब वह अपीलाथ<य$ /वारा Fफरौती AाCत करने और उसक े ब9चे को छोड़ने का इंतजार कर रहा था, पी डKLयू-21 हष< सोबती को 16.2.2000 को सुबह 04:00 बजे से 04:30 बजे क े बीच 7रहा Fकया गया और पी डKLयू-11 सूरज भान राठW क े घर क े छोड़:दया गया। उ ह$ने उसक मां को फोन Fकया, जो उ ह सुबह लगभग 5:30 बजे अपने घर ले गY।
4. यह Fक Fफरौती क मांग और पूछताछ पीडKलू-20 को 09.03.2000, 12.03.2000, 13.03.2000 और 14.03.2000 को पB$ और टेलफोन संदेश$ क े माZयम से क गई थी। Fफरौती क े संबंध म एक अ य संदेश 15.03.2000 को दोपहर 2:30 बजे टेलफोन क े माZयम से AाCत हुआ। उसने अपीलकता<ओं को सूचत Fकया Fक वह 15 लाख Tपये क [यव+था नहं कर सका, उसने 12 लाख Tपये क [यव+था क थी। इन संदेश$ म AाCत नद\श$ पर कार<वाई करते हुए पीडKलू-20 पु-लस को सूचत करने क े बाद, पैस$ क थैल क े साथ, रात 8:15 बजे ]ेन म सवार हुआ। जब ]ेन अंबाला म Tक तो वह उतर गया। वह क ु T;ेB वापस चला गया जहाँ से उसे पैसे क थैल क े साथ अपना घर छोड़ने और करनाल आने क े -लए कहा गया। पीडKलू-20 -सवल _ेस म दो उप- नर;क$ क े साथ अपनी कार म गया। एक पुल क े पास एक बैग म नकद क `डलवर पर, यह पता चला Fक एक इंजी नय7रंग छाB रव दूहन (पीडKलू-19) क े नाम से पंजीकृ त एक मोबाइल फोन से कॉल Fकए गए थे। उसने खुलासा Fकया Fक उसक े दो+त$, अपीलकता<ओं ने उसका फोन उधार -लया था। 17.03.2000 को, रव ढंगरा, बलजीत पाहवा, परवेज खान और रमन गो+वामी नाम क े चार आरोपी [यि.तय$ क े:ठकाने क े बारे म गुCत सूचना -मलने पर, आरोपी लEमी नारायण को छोड़कर िज ह 03 अAैल, 2000 को गरaतार Fकया गया था, पु-लस /वारा गरaतार Fकया गया था। मुय या यक मिज+]ेट, क ु T;ेB ने 06.06.2000 को इस मामले को सुनवाई क े -लए सB यायालय को सbप:दया।
5. अ त7र.त सB यायाधीश, फा+ट ]ैक कोट<, क ु T;ेB, (']ायल कोट<', सुवधा क े -लए) ने भारतीय दंड सं:हताक धारा 364, 364ए, 342, 506 सहप:ठत धारा 148 क े तहत अपराध करने क े आरोपी अपीलकता<ओं पर मुकदमा चलाया। अ-भयोजन प; ने दंड AFcया सं:हता, 1973 क धारा 164 क े तहत अपीलकता<ओं क े बयान$ स:हत 27 गवाह और 72 द+तावेजी Aदश< A+तुत Fकए (इसक े बाद 'सीआरपीसी', सं;ेप म) और 5 मामले क संपिHतयां। अपीलकता<ओं क ओर से 13 द+तावेजी Aदश< A+तुत Fकए गए। वचारण अदालत ने दंड AFcया सं:हता क धारा 313 क े तहत अपीलकता<ओं - अ-भयु.त$ क े बयान दज< Fकए।
6. अपीलकता<ओं ने कहा Fक उ ह झूठा फ ं साया गया था और पकड़े जाने क े बाद उ ह अवैध कारावास म रखा गया था। उ ह$ने यह भी तक <:दया Fक उनक त+वीर$ को +थानीय मी`डया क े माZयम से [यापक eप से Aचा7रत Fकए जाने और अ-भयोजन प; क े गवाह$ क े साथ सामना करने क े बाद उ ह अदालत म पेश Fकया गया था। इसक े अलावा, यह A+तुत Fकया गया था Fक 18.03.2000 को अदालत क े सम; पेश Fकए जाने से पहले उ ह Aता`ड़त Fकया गया था। उ ह$ने यह भी कहा Fक उ ह 20.03.2000 को जांच अधकार /वारा तैयार Fकए गए बयान$ पर ह+ता;र करने क े -लए मजबूर Fकया गया था।
7. वचारण यायालय ने पूवf.त कथन$ और अ-भलेख पर अ य साEय पर वचार Fकया और यह अ-भ नधा<7रत Fकया Fक अपीलाथ<य$ ने एक वधवT[2] सभा का गठन Fकया और एक सामा य उgेhय क े अनुसरण म, उसक े पता को 15 लाख Tपए क Fफरौती रा-श का भुगतान करने क े -लए मजबूर करने क े -लए पी डKलू-21 का अपहरण Fकया। वचारण यायालय ने यह भी न3कष< नकाला Fक अपीलकता<ओं ने पीडKLयू-21 क े कारावास और Fफरौती का भुगतान करने क े -लए पीडKLयू-20 को मजबूर करने क े -लए उसे मौत धमक देकर, लाभ उठाने क को-शश क। वचारण यायालय को पीडKलू-21 क े कथन पर अवhवास करने का कोई कारण नहं -मला। इस Aकार, अपीलकता<ओं को भारतीय दंड सं:हता क धारा 149 क े साथ प:ठत धारा 148 और 364ए क े तहत दंडनीय अपराध$ क े -लए दोषी ठहराया गया था। अपीलकता<ओं ने इस आधार पर सजा म नरमी क Aाथ<ना क Fक उनक े बूढ़े माता-पता ह0 और उनक देखभाल करने वाला कोई और नहं है। वचारण यायालय ने मुकदमे का न3कष< नकाला और 29.05.2003 को अपना फ ै सला सुनाया। वचारण अदालत ने आरोपी-अपीलकता<ओं को भारतीय दंड सं:हता क धारा 148 क े तहत तीन साल क े सOम कारावास और आईपीसी क धारा 149 क े साथ प:ठत धारा 364ए क े तहत आजीवन कठोर कारावास और AHयेक को 2000 Tपये का जुमा<ना देने क सजा सुनाई। वचारण अदालत ने आगे यह भी +प3ट Fकया Fक वचाराधीन:हरासत क अवध को set off (समायोिजत) कर:दया जाएगा और दोन$ सजाएं साथ-साथ चलगी।
8. अपीलकता<ओं ने पंजाब और ह7रयाणा उ9च यायालय क े सम; दोष-स[2] और दंडादेश क े आदेश क े jखलाफ अपील क। उ9च यायालय ने इस Ahन पर वचार Fकया Fक.या भारतीय दंड सं:हता क धारा 364ए क े तहत Fफरौती क े -लए अपहरण क े अपराध म अपीलकता<ओं क पहचान करने और उ ह उससे जोड़ने क े -लए वhवसनीय साEय मौजूद ह0। उ9च यायालय ने पीडKलू-21 क े बयान को महHवपूण< करार:दया और उसी पर भरोसा करते हुए कहा Fक भारतीय दंड सं:हता क धारा 364ए क े सभी अवयव$ को संतु3ट Fकया गया था। उ9च यायालय ने इस दलल को खा7रज कर:दया Fक अ-भयोजन प; क े मामले म तािHवक वसंग त थी और यह माना Fक अ-भयोजन प; क े गवाह$ क े बयान$ क सHयता पर संदेह करने का कोई कारण नहं था। पीडKलू-21 क े संबंध म, उ9च यायालय ने:टCपणी क Fक वह एक बाल गवाह था, लेFकन उसने लंबी और खोजी A तपर;ा का सामना Fकया और उसक े सं+करण म कोई वरोधाभास नहं है। इसने पीडKलू-20 क े Tख म वरोधाभास$ क े बारे म तक < को यह कहते हुए खा7रज कर:दया Fक जांच म वसंग त अपने आप म एक वhवसनीय गवाह क गवाह को अ+वीकार करने का आधार नहं हो सकता है। इसक े अलावा, उ9च यायालय ने न3कष< नकाला Fक पीडKलू-20 और पीडKलू-21 क गवाह क े आधार पर, "अपराध क े साथ अ-भयु.त का संबंध उचत संदेह से परे +थापत होता है। ”
9. उ9च यायालय ने भारतीय दंड सं:हता क धारा 363 या 365 क े अधीन या भारतीय दंड सं:हता क धारा 506 क े अधीन Fकसी अपराध क े -लए, िजसम सात वष< से अधक क े लंबे समय तक नरोध क े आधार पर आजीवन कारावास क े यूनतम दंडादेश का उपबंध नहं है, दोष-स[2] को उपांत7रत करने क े अपीलाथ<य$ क े अ-भवाक को अ+वीकार कर:दया। उ9च यायालय क े फ ै सले और सजा से [यथत होकर, अ-भयु.त$ ने अपनी-अपनी वशेष अनुम त याचकाएं दायर करक े इस यायालय का दरवाजा खटखटाया है, िजसम अनुम त द गई है और अब इसे आपराधक अपील माना जाता है। 11.05.2009 को, इस यायालय ने नोट Fकया Fक अपीलकता<ओं ने सात साल जेल क सजा काट ल थी और उ ह आवhयक शतk पर वचारण यायालय क संतुि3ट पर जमानत द जा सकती थी। इसने वशेष अनुम त याचकाओं म अपील करने क अनुम त भी द और मामल$ को +वीकार Fकया।
10. इस यायालय क े सम; अपीलकता<-आरोपी ने A+तुत Fकया है Fक इस तQय क े बारे म गंभीर संदेह है Fक अपीलकता< वह [यि.त ह0 िज ह$ने हष< सोबती, पी डKलू-21 का अपहरण Fकया था, लेFकन नीचे क े यायालय$ ने पी डKलू-21 क े साEय पर वhवास करने क े कारण पाए ह0। इस Aकार, जांच क े बारे म सवाल उठाते हुए बर करने क े -लए:दए गए तकk को +वीकार Fकए Vबना, अपीलकता<ओं ने आlह Fकया है Fक उनक क़ ै द क लंबी अवध का या यक नो:टस -लया जाए और भारतीय दंड सं:हता क धारा 364ए क े तहत उनक क ै द और दोष-स[2] को भारतीय दंड सं:हता क धारा 363 क े तहत दोष-स[2] म संशोधत Fकया जाए। सवf9च यायालय वधक सेवा स-म त /वारा नयु.त अपीलकता<ओं क ओर से उपि+थत व/वान अधव.ता Oी गौरव अlवाल ने एस. क े. अहमद बनाम तेलंगाना रा*य, (2021) 9 एस. सी. सी. 59 (एस. क े. अहमद) पर भरोसा Fकया, यह तक < देने क े -लए Fक इस मामले म भारतीय दंड सं:हता क धारा 364ए क े आवhयक तHव साVबत नहं हुए ह0। उनक े तक < का सार यह था Fक सB यायालय और उ9च यायालय ने इस तQय क अवहेलना क है Fक 15 अAैल, 2002 को यायालय क े सम; पीडKलू-21 का बयान 15 फरवर, 2000 को पु-लस को:दए गए बयान से काफ बेहतर था। इस-लए, उ ह$ने कहा Fक मौत या चोट पहुंचाने का कोई खतरा साVबत नहं हुआ है। उ ह$ने यह भी A+तुत Fकया Fक मृHयु या चोट क े कारण क े आधार पर Fफरौती क कोई मांग साVबत नहं क जा सक.य$Fक यह पु-लस से नकल थी। उ ह$ने A+तुत Fकया Fक पीडKलू-12 पलट गया और पीडKलू-13 क े वल एक सांयोगक गवाह था. इस-लए, आ;ेपत नण<य$ म ह+त;ेप Fकया जा सकता है और अपीलकता<ओं को द गई सजा को संशोधत करक े राहत द जा सकती है, भले ह अपीलकता<ओं को बर करना संभव न हो। दूसर ओर, Oी राक े श मु/गल, A तवाद राnय क े -लए व/वान एएजी ने उ9च यायालय क े फ ै सले का समथ<न Fकया और तक <:दया Fक इन अपील$ म कोई योoयता नहं है और इसे खा7रज Fकया जा सकता है। उ ह$ने A+तुत Fकया Fक उ9च यायालय अपने तकk और यहां अपीलकता<ओं /वारा दायर अपील$ को खा7रज करने म यायसंगत था।
11. 7रकॉड< म मौजूद तQय$ और प;कार$ क े A त/वं/वी नवेदन$ को देखते हुए, हम इस अपील म वचार Fकए जाने वाले Vबंदु को इस बात तक सी-मत करना उचत समझते ह0 Fक.या इस मामले म तQय, भारतीय दंड सं:हता क धारा 364ए क े तहत अपराध को आकष<त करते ह0 और य:द उHतर नकाराHमक म है, तो.या भारतीय दंड सं:हता क धारा 363 क े तहत सजा क े -लए दोष-स[2] को संशोधत करना यायोचत और उचत होगा। इस मामले को प7रAेEय म रखने क े -लए धारा 361क े साथ प:ठत धारा 363, 364, 364 ए क े उपबंध$ क तुलना क जानी चा:हए। उ.त Aावधान इस Aकार ह0: धारा 361: #वधपूण संरकता से अपहरण। जो कोई Fकसी अAाCतवय को, य:द वह नर हो, तो सोलह वष< से कम आयु वाले को, या य:द वह नार हो तो, अqारह वष< से कम आयु वाल को या Fकसी वकृ तचHत [यि.त को, ऐसे अAाCतवय या वकृ तचHत [यि.त क े वधपूण< संर;कता म से ऐसे संर;क क सsम त क े Vबना ले जाता है या बहका ले जाता है, वह ऐसे अAाCतवय या ऐसे [यि.त का वधपूण< संर;कता म से [यपहरण करता है, यह कहा जाता है। +प3टकरण.-इस धारा म “वधपूण< संर;क” शKद$ क े अ तग<त ऐसा [यि.त आता है िजस पर ऐसे अAाCतवय या अ य [यि.त क देख-रेख या अ-भर;ा का भार वधपूव<क य+त Fकया गया है। अपवाद. इस धारा का व+तार Fकसी ऐसे [यि.त क े काय< पर नहं है, िजसे सtावपूव<क यह वhवास है Fक वह Fकसी अधम<ज -शशु का पता है, या िजसे सtावपूव<क यह वhवास है Fक वह ऐसे -शशु क वधपूण< अ-भर;ा का हकदार है, जब तक Fक ऐसा काय< दुराचा7रक या वधवT[2] Aयोजन क े -लए न Fकया जाए। x x x धारा 363: 7यपहरण क े 8लए द9ड जो कोई भारत म से या वधपूण< संर;कता म से Fकसी [यि.त का [यपहरण करेगा, वह दोन$ म से Fकसी भां त क े कारावास से, िजसक अवध सात वष< तक क हो सक े गी, दिuडत Fकया जाएगा और जुमा<ने से भी दuडनीय होगा। धारा 364. ह3या करने क े 8लए 7यपहरण या अपहरण।जो कोई इस-लए Fकसी [यि.त का [यपहरण या अपहरण करेगा Fक ऐसे [यि.त क हHया क जाए या उसको ऐसे [यय नत Fकया जाए Fक वह अपनी हHया होने क े खतरे म पड़ जाए, वह आजीवन कारावास से या क:ठन कारावास से, िजसक अवध दस वष< तक क हो सक े गी, दिuडत Fकया जाएगा और जुमा<ने से भी दuडनीय होगा। धारा 364ए। मुि<त धन (=फरौती) इ3याAद क े 8लए 7यपहरण-जो कोई Fकसी [यि.त का [यपहरण या अपहरण करता है अथवा ऐसे [यपहरण या अपहरण क े पhचात् Fकसी [यि.त का नरोध करता है, और ऐसे [यि.त क मृHयु या उपह त का7रत करने क धमक देता है, अथवा अपने आचरण /वारा ऐसी युि.तयु.त आशंका उHप न करता है Fक ऐसे [यि.त क हHया या उपह त का7रत क जा सकती है अथवा ऐसे [यि.त को उपह त या मृHयु, सरकार को या Fकसी वदेशी राnय अथवा अ तरा<3]य अ तशा<सकय संगठन अथवा Fकसी अ य [यि.त को Fकसी काय< को करने या काय< को करने से वरत रहने अथवा मुि.त-धन अदा करने क े -लए बाZय करने क े उgेhय से का7रत करता है, मृHयु दuड अथवा आजीवन कारावास से दिuडत Fकया जायेगा, और जुमा<ने से भी दuडनीय होगा।
12. हम यह नोट करते ह0 Fक भारतीय दंड सं:हता क धारा 363 [यपहरण क े कृ Hय को दं`डत करती है और इसक धारा 364 Fकसी [यि.त क हHया क े -लए उसक े [यपहरण या अपहरण क े अपराध को दं`डत करती है। धारा 364ए मुि.त धन (Fफरौती) क मांग करने क े -लए जबरद+ती:हंसा या उसक े पया<Cत खतरे को शा-मल करक े अपराध क गंभीरता को और बढ़ाती है। तदनुसार, तीन$ अपराध$ क े -लए अधकतम दंड cमशः सात वष< और दस वष< का कारावास और आजीवन कारावास या मृHयु दंड है। [यपहरण क े नंदनीय कृ Hय का अपराधीकरण करते समय संसद क े सूEम, Oेणीब[2] xि3टकोण क सावधानीपूव<क [याया क जानी चा:हए। अपराध क े व-भ न घटक$ और दंड क कठोरता का नव<चन करने और आ;ेपत नण<य$ का मूLयांकन करने से पहले, हम लोAहत कौशल बनाम हरयाणा रा*य, (2009) 17 एससीसी 106 म इस यायालय क:टCपjणय$ को दोहराना उचत समझते ह0, िजसम इस यायालय ने नsन-लjखत मत [य.त Fकयाः 15..... यह सच है Fक [यपहरण जैसा Fक भारतीय दंड सं:हता क धारा 364-ए क े तहत समझा जाता है, वा+तव म एक नंदनीय अपराध है और जब एक असहाय ब9चे का मुि.त धन (Fफरौती) क े -लए [यपहरण Fकया जाता है और वह भी करबी 7रhतेदार$ /वारा, तो घटना और भी अ+वीकाय< हो जाती है। हालांFक, अपराध क गंभीरता और इससे यायालय क े मन म जो घृणा पैदा होती है, वे ऐसे कारक ह0 जो ऐसे मामल$ म एक अ-भयु.त क े न3प; पर;ण क े jखलाफ भी जाते ह0। इस-लए, एक यायालय को साEय का मूLयांकन करते समय व+तु न3ठता और या यक वचार$ क े बजाय भावनाओं /वारा अपने नण<य$ म Aभावत होने क संभावना क े jखलाफ सावधान रहना चा:हए।
13. इस यायालय ने, वशेष eप से अ,नल बनाम दमन और दव +शासन, (2006) 13 एस. सी. सी. 36 (अ,नल), #वCवनाथ गुDता बनाम उ3तरांचल रा*य (2007) 11 एस. सी. सी. 633 (#वCवनाथ गुDता) और #वEम 8संह बनाम भारत संघ, (2015) 9 एस. सी. सी. 502 (#वEम 8संह) म भारतीय दंड सं:हता क धारा 364 ए क े अधीन अपराध क े Fकए जाने क े -लए दोष-स[2] का आदेश देने क े -लए आवhयक तHव$ को नsन-लjखत र त से +प3ट Fकया हैः (क) अ,नल म, उन मामल$ क े संबंध म Aासंगक:टCपjणयां क गई थीं जहां अ-भयु.त को उस अपराध क े -लए दोषी ठहराया गया है िजसक े संबंध म कोई आरोप तय नहं Fकया गया है। उ.त मामले म, सवाल यह था Fक.या उसम अपीलाथy को भारतीय दंड सं:हता क धारा 364 ए क े तहत दोषी ठहराया जा सकता था, जब वरचत आरोप भारतीय दंड सं:हता क धारा 364 क े साथ प:ठत धारा 34 क े तहत था। सवf9च यायालय क े उ.त नण<य से चुने जा सकने वाले Aासंगक अंश नsनानुसार ह0: "
54. उपयु<.त नण<य$ म से वध क े कथन/तक < वा.य, िज ह उपरो.त नण<य$ से नकाला जा सकता है, इस Aकार ह0: (i) अपीलकता< पर आरोप$ क े गलत संयोजन (-मसजोइंडर) क े कारण Fकसी पूवा<lह / कोई A तक ू ल Aभाव नहं पड़ना चा:हए। (ii) गौण अपराध क े -लए दोष-स[2] अनुzेय है। (iii) इसका प7रणाम याय क वफलता नहं होना चा:हए। (iv) य:द पया<Cत अनुपालन होता है, तो आरोप$ का गलत संयोजन (-मस जोइंडर) घातक नहं हो सकता है और इस तरह क े गलत संयोजन (-मस जोइंडर) क े वल आरोप तय करने क े -लए गलत संयोजन (-मस जोइंडर) से उHप न होने चा:हए।
55. धारा 364 और 364-ए क े तहत अपराध करने क े -लए अवयव -भ न- -भ न ह0। [यपहरण करने का आशय िजससे Fक उसक हHया क जा सक े या उसका इस Aकार नपटारा Fकया जा सक े Fक वह खतरे म पड़ जाए.य$Fक हHया दंड सं:हता क धारा 364 क अपे;ाओं को पूरा करती है, उसक धारा 364-ए क े अधीन अपराध करने क े -लए दोष-स[2] अ-भAाCत करने क े -लए यह साVबत करना आवhयक है Fक न क े वल ऐसा अपहरण या दु3Aेरण हुआ है बिLक उसक े पhचात् अ-भयु.त ने ऐसे [यि.त को मृHयु का7रत करने या उपह त का7रत करने क धमक द है या उसक े आचरण से यह युि.तयु.त आशंका पैदा होती है Fक ऐसे [यि.त को सरकार या Fकसी वदेशी राnय या अंतररा3]य अंतर- सरकार संगठन या Fकसी अ य [यि.त को कोई काय< करने या न करने क े -लए या Fफरौती देने क े -लए ववश करने क े -लए मृHयुदंड:दया जा सकता है या उपह त का7रत Fकया जा सकता है।
56. इस Aकार, दमन क े व/वान सB यायाधीश क े -लए यह अ नवाय< था Fक वह ऐसा आरोप वरचत करे जो दंड सं:हता क धारा 364-ए क े अधीन प7रकिLपत अपराध क े ववरण का उHतर दे। यह सच हो सकता है Fक [यपहरण मुि.त धन (Fफरौती) पाने क े उgेhय से Fकया गया था, लेFकन आरोप तय करते समय इसे अपीलकता< क े सामने रखा जाना चा:हए था। अपीलाथy क े A त पूवा<lह +प3ट है.य$Fक Fकसी भी आरोप क वरचना करते समय एक उ9च (अथा<त मुय/ Aधान) अपराध क े अवयव$ को उसक े सम; नहं रखा गया था। ” (ख) #वCवनाथ गुDता क े मामले म, यह नsन-लjखत eप म देखा गयाः "8. धारा 364-ए क े अनुसार, जो कोई भी Fकसी [यि.त का [यपहरण या अपहरण करता है और उसे क़ ै द म रखता है और ऐसे [यि.त को मृHयु या उपह त का7रत करने क धमक देता है और उसक े आचरण से एक युि.तयु.त आशंका पैदा होती है Fक ऐसे [यि.त को मारा जा सकता है या चोट पहुंचाई जा सकती है, और मुि.तधन (Fफरौती) मांगता है और य:द मृHयु हो जाती है, तो उस मामले म आरोपी को मौत या आजीवन कारावास क सजा द जा सकती है और जुमा<ना भी लगाया जा सकता है।
9. धारा 364-ए का महHवपूण< घटक [यपहरण या अपहरण है, जैसा भी मामला हो। तHपhचात् [यप{त/अप{त को यह धमक द जाती है Fक य:द मुि.तधन (Fफरौती) क मांग पूर नहं क गई तो पी`ड़त को मार:दया जायेगा और य:द मृHयु हो जाती है तो धारा 364-ए का अपराध पूण< हो जाता है। इस खंड म तीन चरण ह0, एक है [यपहरण या अपहरण, दूसरा धन क मांग क े साथ मौत क धमक और अंत म जब मांग पूर नहं होती है, तो मृHयु। य:द ये तीन$ तHव उपलKध ह0 तो यह दंड सं:हता क धारा 364-ए क े तहत अपराध का गठन करेगा। इन तीन$ तHव$ म से कोई भी एक +थान पर या अलग-अलग +थान$ पर हो सकता है। (ग) #वEम 8संह म, यह नsन-लjखत eप म देखा गयाः “ 25. … धारा 364 -ए भारतीय दंड सं:हता म तीन अलग-अलग घटक ह0 अथा<त (i) संबंधत [यि.त [यपहरण या अपहरण या [यपहरण या अपहरण क े बाद पी`ड़त को क़ ै द म रखता है; (ii) मार देने या चोट पहुँचाने क धमक देता है या मृHयु या चोट लगने क आशंका का कारण बनता है या वा+तव म चोट पहुँचाता है या मृHयु का कारण बनता है; और (iii) [यपहरण, अपहरण या क़ ै द और मौत या चोट क धमक, ऐसी मौत या चोट या वा+तवक मौत या चोट क आशंका संबंधत [यि.त या Fकसी और को क ु छ करने या क ु छ करने से रोकने क े -लए होती है या मुि.तधन (Fफरौती) का भुगतान करने क े -लए मजबूर करता है। ये तHव, हमार राय म, भारतीय दंड सं:हता क धारा 383 क े तहत जबरन वसूल क े अपराध से +प3ट eप से -भ न ह0। मौजूदा कानूनी ढांचे म कमी को वध आयोग /वारा देखा गया था और धारा 364-ए भारतीय दंड सं:हता क े eप म एक अलग Aावधान को शा-मल करने क े -लए A+ताव:दया गया था ताFक मुि.तधन (Fफरौती) क ि+थ त को कवर Fकया जा सक े, िजसम ऊपर उिLलjखत तHव शा-मल हो।" यह साVबत करना आवhयक है Fक न क े वल इस तरह का [यपहरण या दु3Aेरण हुआ है, बिLक इसक े बाद आरोपी ने ऐसे [यि.त को मार देने या चोट पहुंचाने क धमक द या उसक े आचरण से यह युि.तयु.त आशंका पैदा हुई Fक ऐसे [यि.त को सरकार या Fकसी वदेशी राnय या अंतररा3]य, अंतर-सरकार संगठन या Fकसी अ य [यि.त को कोई काय< करने या करने से वरत रहने या मुि.तधन (Fफरौती) देने क े -लए मारा जा सकता है या उपह त का7रत Fकया जा सकता है।
14. हाल ह म एस. क े. अहमद म इस यायालय ने इस बात पर बल:दया है Fक भारतीय दंड सं:हता क धारा 364 ए क े तीन Acम या घटक ह0, अथा<त् i. Fकसी [यि.त का [यपहरण या अपहरण और उ ह क़ ै द म रखना; ii. मृHयु या उपह त का7रत करने का खतरा, और मुि.तधन (Fफरौती) क मांग क े साथ [यपहरण, अपहरण या क़ ै द का उपयोग, और iii. जब मांग पूर नहं क जाती है, तो मार डालना। कथत फ ै सले क े Aासंगक भाग नीचे:दए गए ह0: " 12. अब हम यह पता लगाने क े -लए धारा 364-ए पर गौर कर सकते ह0 Fक अपराध क े -लए धारा +वयं Fकन तHव$ पर वचार करता है। जब हम धारा 364-ए क [याया करते ह0 तो नsन-लjखत +प3ट होता है: (i) जो कोई Fकसी [यि.त का अपहरण या अपहरण करता है या ऐसे अपहरण या अपहरण क े बाद Fकसी [यि.त को:हरासत म रखता है, (ii) और ऐसे [यि.त को मृHयु या उपह त का7रत करने क धमक देता है, या अपने आचरण से यह युि.तयु.त आशंका पैदा करता है Fक ऐसे [यि.त को मृHयुदंड:दया जा सकता है या उपह त क जा सकती है, (iii) या सरकार या Fकसी वदेशी राnय या अंतररा3]य अंतर-सरकार संगठन या Fकसी अ य [यि.त को कोई काय< करने या करने से परहेज करने या Fफरौती देने क े -लए ऐसे [यि.त को आहत या मृHयु का7रत करता है" (iv) "मृHयु या आजीवन कारावास से दंडनीय होगा और जुमा<ने का भी दायी होगा।" धारा 364-ए म शा-मल पहल आवhयक शत< यह है Fक "जो कोई भी Fकसी [यि.त का अपहरण या अपहरण करता है या Fकसी [यि.त को ऐसे अपहरण या अपहरण क े बाद:हरासत म रखता है।“ दूसर शत< 'और' संयोजन से शुe होती है। दूसर शत< क े दो भाग भी ह0 अथा<त (क) ऐसे [यि.त को मृHयु या आहत का7रत करने क धमक देता है या (ख) उसक े आचरण से यह युि.तयु.त आशंका पैदा होती है Fक ऐसे [यि.त को मृHयु या आहत का7रत क जा सकती है। उपरो.त शत< का कोई भी भाग, य:द पूरा Fकया जाता है, तो अपराध क े -लए दूसर शत< को पूरा करेगा। तीसर शत< "या" शKद से शुe होती है अथा<त सरकार या Fकसी वदेशी राnय या अंतररा3]य अंतर-सरकार संगठन या Fकसी अ य [यि.त को कोई काय< करने या करने से परहेज करने या Fफरौती देने क े -लए मजबूर करने क े -लए ऐसे [यि.त को आहत या मृHयु का7रत करता है। तीसर शत< इन शKद$ से शुe होती है "या ऐसे [यि.त को चोट पहुंचाता है या मृHयु का कारण बनता है ताFक सरकार या Fकसी वदेशी राnय को कोई काय< करने या करने से परहेज करने या Fफरौती का भुगतान करने क े -लए मजबूर Fकया जा सक े ।" धारा 364-ए म ‘Fफरौती क े -लए अपहरण’ आ:द शीष<क है। Fफरौती मांगने क े -लए Fकसी [यि.त /वारा Fकया गया अपहरण पूर तरह से धारा 364-ए क े अंतग<त आता है।
13. हमने देखा है Fक पहल शत< क े पhचात् दूसर शत< संयोजन /वारा जोड़ी जाती है और इस Aकार, जो कोई Fकसी [यि.त का अपहरण या अपहरण करता है, ऐसे अपहरण या अपहरण क े पhचात् Fकसी [यि.त को नरोध म रखता है और ऐसे [यि.त को मृHयु या आहत का7रत करने क धमक देता है।
14. संयोजन का उपयोग "और" उसका उHेCय और पदाथ।धारा 364- ऐ म ''या" नौ बार शJद का +योग =कया गया है और पूर धारा म क े वल एक ह संयोजन "और" है और जो पहल और दूसर शत म शा8मल होता है। इस Aकार, धारा 364-ए क े तहत Fकसी अपराध को कवर करने क े -लए, पहल शत< को पूरा करने क े अलावा, दूसर शत< अथा<त 'और ऐसे [यि.त को मृHयु या चोट पहुंचाने क धमक देता है' को भी साVबत करने क आवhयकता है, य:द मामला धारा 364-ए क े बाद क े खंड$ क े अंतग<त नहं आता है।
15. 'और' शKद का उपयोग संयोजन क े eप म Fकया जाता है। शKद 'या' का उपयोग +प3ट eप से व-श3ट है। दोन$ शKद$ का उपयोग अलग- अलग उgेhय और पदाथ< क े -लए Fकया गया है। आपराधक कानून क े संबंध म "असंगत" और "संयु.त" शKद$ पर वचार करते समय कानून क [याया पर cॉफोड< ने नsन-लjखत बयान:दयाः "........... यायालय को आपराधक कानून म संयोजी शKद$ क े +थान पर वघटनकार शKद$ को A त+थापत करने क े -लए अHयधक अ न9छ ु क होना चा:हए और इसक े वपरत, य:द ऐसी कार<वाई अ-भयु.त को A तक ू ल eप से Aभावत करती है।" xxx
33. उपयु<.त मामल$ म धारा 364-ए क े सांवधक Aावधान और इस यायालय /वारा अधकथत वध पर Zयान देने क े पhचात् हम इस न3कष< पर पहुंचे ह0 Fक धारा 364-ए क े अधीन Fकसी अ-भयु.त को -स2दोष ठहराने क े -लए आवhयक तHव िज ह अ-भयोजन /वारा साVबत Fकया जाना अपे;त है, नsनानुसार ह0:
(i) Fकसी [यि.त का [यपहरण या अपहरण या ऐसे [यपहरण या अपहरण क े पhचात् Fकसी [यि.त को क ै द म रखना; और (ii) ऐसे [यि.त को मृHयु या आहत का7रत करने क धमक देता है, या उसक े आचरण से यह युि.तयु.त आशंका उHप न होती है Fक ऐसे [यि.त को मृHयुदंड:दया जा सकता है या उपह त का7रत Fकया जा सकता है या। (iii) सरकार या Fकसी वदेशी राnय या Fकसी सरकार संगठन या Fकसी अ य [यि.त को कोई काय< करने या उससे दूर रहने या Fफरौती देने क े -लए ऐसे [यि.त को आहत या मृHयु का7रत करता है। इस Aकार, पहल शत< +थापत करने क े बाद, एक और शत< को पूरा करना होगा.य$Fक पहल शत< क े बाद, उपयोग Fकया गया शKद है और। इस Aकार, पहल शत< क े अलावा या तो शत< (ii) या (iii) को साVबत करना होगा, िजसम वफल रहने पर धारा 364-क क े तहत दोष-स[2] को बरकरार नहं रखा जा सकता है।" इस Aकार, एस. क े. अहमद म इस यायालय ने भारतीय दंड सं:हता क धारा 364क क े अधीन दोष-स[2] को अपा+त कर:दया और उसे धारा 363 क े अधीन दोष-स[2] म इस कारण से उपांत7रत कर:दया Fक अ त7र.त शतk को नsन-लjखत eप म मत [य.त करक े पूरा नहं Fकया गयाः "42. दूसर शत< साVबत नहं होने क े बाद, हम अपीलाथy क े व/वान अधव.ता क े A+तुतीकरण म सार पाते ह0 Fक अपीलाथy क दोष-स[2] भारतीय दंड सं:हता क धारा 364-ए क े तहत:टकाऊ नहं है।हम, इस Aकार, धारा 364-ए क े तहत अपीलाथy क दोष-स[2] को खा7रज़ करते ह0। हालांFक, अपहरण क े बारे म 7रकॉड< म मौजूद सबूत$ से, यह साVबत हो जाता है Fक आरोपी ने पी`ड़ता का अपहरण Fफरौती क े -लए Fकया था, Fफरौती क मांग भी साVबत हो गई थी।भले ह धारा 364-ए क े तहत अपराध उचत संदेह से परे साVबत नहं हुआ है, लेFकन अपहरण का अपराध पूर तरह से +थापत हो गया है, िजसक े Aभाव म व/वान सB यायाधीश ने पैरा 19 और 20 म एक +प3ट न3कष< दज< Fकया है। अपहरण का अपराध साVबत हो जाने पर, अपीलकता< को धारा 363 क े तहत दोषी ठहराया जाना चा:हए। धारा 363 दंड का Aावधान करती है जो Fकसी भी Aकार का कारावास है िजसे सात वष< तक बढ़ाया जा सकता है और जुमा<ना भी लगाया जा सकता है।"
15. अब, हम वत<मान मामले म उपरो.त अनुपात क Aयोnयता पर वचार करगे और पीडKलू-21 क े बयान$ म वरोधाभास$ क े बारे म अपीलकता<ओं क े तक < पर वचार करगे। हम उ9च यायालय से सहमत ह0 Fक बयान महHवपूण< ह0। हम यह भी नोट करते ह0 Fक नीचे क े यायालय$ ने, जैसा Fक अपहरण क े मामल$ म सामा य है, 'मृHयु या आघात पहुंचाने क े खतरे' क े तHव को साVबत करने क े -लए या यह नधा<7रत करने क े -लए Fक.या अपीलकता< क े आचरण से यह युि.तयु.त आशंका पैदा होती है Fक ऐसे [यि.त को मौत क सजा द जा सकती है या आघात पहुंचाई जा सकती है। हमने 18 फरवर, 2000 को पु-लस को:दए गए पीडKलू-21 क े बयान का अवलोकन Fकया है, अथा<त्, अपीलकता<ओं क क ै द से घर लौटने क े दो:दन बाद-यहां। बयान दज< करते ह0 Fक उ ह अपीलकता<ओं /वारा रात म एक '7रवॉLवर' क े साथ धमक द गई थी, जो उनक े पास होने का दावा Fकया गया था। यथाथ< कथन यह था Fक एक eमाल और एक काले कपड़े को आंख$ पर बांध:दया गया था और मुझसे कहा गया था Fक उनक े पास 7रवॉLवर है और अगर वह कोई आवाज उठाता है तो वे उसे मार डालगे।" हालांFक, शुTआती बयान क े लगभग दो साल बाद, 15 अAैल 2002 को नचल अदालत क े सम;:दए गए बयान म एक महHवपूण< ववरण शा-मल है िजसे पछले बयान म छोड़:दया गया था। इस बात का उLलेख करने क े बाद Fक पीडKLयू-21 को जबरन कार क े अंदर डाल:दया गया था और बंद कर:दया गया था, बयान म कहा गया है, “हमलावर$ ने मुझे चाक ू और प+तौल से धमक द और मुझे मारने क धमक द।" इस Aकार, तीन महHवपूण< प7रवत<न देखे जा सकते ह0: पहला, खतरे क े ठWक समय म प7रवत<न-दूसरा, खतरे क सुपुद<गी क व-श3टता-एंजे-लना को मारने का खतरा और तीसरा, खतरे क े पीछे क े इरादे क चूक-यानी पीडKLयू-21 को रोने से रोकने क े -लए। ये ववरण धारा 364-ए क े तहत आरोप क े दूसरे घटक को साVबत करने क े -लए महHवपूण< ह0 और इस धारा क े तहत अपराध को साVबत करने क े -लए आवhयक ह0, अथा<त्, धमक िजसक े प7रणाम+वeप यह युि.तयु.त आशंका पैदा होती है Fक ऐसे [यि.त को मौत क सजा द जा सकती है या चोट पहुंचाई जा सकती है। यह +प3ट है Fक यह घटक तक < संगत संदेह से परे साVबत नहं हुआ है। नचले यायालय$ ने अपीलाथ<य$ को दोषी ठहराने से पहले इस संदेह को पूर तरह से दूर नहं Fकया।धमक क े घटक को साVबत करने क े -लए, उसे चुप कराने क े उgेhय से बाल पी`ड़त को डराना पया<Cत नहं है।य:द अधकतम मृHयु दंडादेश और यूनतम आजीवन दंडादेश वाले दंडादेश क साEय संबंधी सीमा इतनी कम है तो 363, 364 और 364- ए क े अधीन अपहरण क े -लए दंड$ क े बीच का अंतर नरथ<क हो जाएगा।
16. वशेष eप से, हम यह नोट करते ह0 Fक उ9च यायालय ने मLलेशी बनाम कना<टक राnय, (2004) 8 एस. सी. सी. 95 (मLलेशी) म पूवfदाहरण को ठWक से लागू नहं Fकया। उ.त मामले क े तQय, एक बड़े लड़क े क े अपहरण क े संबंध म, उस पाट क े इद<-गद< घूमते थे िजससे धारा 364-ए क े तहत अपराध को घर लाने क े -लए Fफरौती क मांग क जानी चा:हए। एस. क े. अहमद म यह पाया गया Fक मLलेशी मामले म Fफरौती क मांग पर वचार Fकया गया और यह अ-भ नधा<7रत Fकया गया Fक मूल eप से अपहरण Fकए गए [यि.त से मांग क गई थी और क े वल यह तQय Fक यह मांग करने क े बाद Fकसी अ य [यि.त को सूचत नहं Fकया जा सकता था.य$Fक इस बीच गरaतार अ-भयु.त धारा 364 ए क शतk क े Aभाव को दूर नहं करता था। जैसा Fक एस. क े. अहमद म इस यायालय /वारा +प3ट Fकया गया है, मLलेशी क े वल Fफरौती से संबंधत था और इसका अनुपात उन मामल$ म कोई सहायता नहं करेगा जहां धारा 364ए क े तहत अपराध क े अ य घटक$ क पू त< पर सवाल उठाया जाता है।
17. वत<मान मामले क े तQय$ म, इस-लए हम अपीलाथ<य$ क े व/वान अधव.ता, Oी गौरव अlवाल क े A+तुतीकरण से सहमत ह0 Fक आईपीसी क धारा 364ए क े तहत अपीलाथ<य$ क दोष-स[2]:टकाऊ नहं है।
18. इस यायालय को दंड AFcया सं:हता क धारा 216 क े अधीन आरोप म प7रवत<न करने क [यापक शि.त है, जबFक अ-भयु.त पर A तक ू ल Aभाव न डाले, जैसा Fक जसवंदर सैनी बनाम राnय (रा3]य राजधानी;ेB:दLल सरकार) (2013) 7 एससीसी 256, पैरा 11; क Pय अ वेषण Kयूरो बनाम करमुLला ओसन खान (2014) 11 एससीसी 538, पैरा संया 17 और 18 म दोहराया गया है। डॉ. नMलारेNडी Oीधर रेNडी बनाम आंP +देश रा*य (2020) 12 एससीसी 467, पैरा सं"या 21 म इस यायालय क,नQन8लRखत AटDपRणयां भी 8शा+द है: "21. उपरो.त उदाहरण$ से यह +प3ट है Fक धारा 216 यायालय को Fकसी भी आरोप को बदलने या प7रवत<न क े -लए अन य और [यापक शि.त Aदान करती है।उपधारा (1) म " नण<य क े पूव< Fकसी भी समय" शKद$ का उपयोग यायालय को साEय, तक < और नण<य को सुर;त रखने क े बाद भी आरोप$ को बदलने या जोड़ने क अपनी शि.तय$ का उपयोग करने क े -लए सश.त करता है। आरोप म प7रवत<न या वृ2 तब क जा सकती है जब यायालय क राय म आरोप क वरचना म कोई चूक हुई हो या य:द अ-भलेख पर लाई गई सामlी क Aथमx3टया जांच क े बाद यायालय कथत अपराध ग:ठत करने वाले तQयाHमक अवयव$ क े अि+तHव क े बारे म एक अनुमान क राय बनाने क े -लए अlसर होता है।Fकसी आरोप क े प7रवध<न या वृ2 का व नhचय करते समय यायालय /वारा अपनाई जाने वाल कसौट यह है Fक अ-भलेख पर लाई गई सामlी का अ-भकथत अपराध क े अवयव$ क े साथ AHय; संबंध या कड़ी होने क आवhयकता है।आरोप को जोड़ने से क े वल अ त7र.त आरोप$ क े -लए मुकदमा शुe होता है, िजसक े बाद, साEय क े आधार पर, यह नधा<7रत Fकया जाता है Fक.या अ-भयु.त को अ त7र.त आरोप$ क े -लए दोषी ठहराया जा सकता है। यायालय को धारा 216 क े अधीन अपनी शि.तय$ का यायोचत eप से Aयोग करना चा:हए और यह सु निhचत करना चा:हए Fक अ-भयु.त पर कोई A तक ू ल Aभाव न पड़े और उसे न3प; वचारण क अनुम त द जाए। यायालय क शि.त पर एकमाB बाधा यह है Fक आरोप$ क े प7रवध<न या वृ2 /वारा अ-भयु.त पर A तक ू ल Aभाव पड़ने क संभावना है।उपधारा (4) तदनुसार उन यायालय$ /वारा अपनाए जाने वाले xि3टकोण को व:हत करती है जहां A तक ू ल Aभाव का7रत Fकया जा सकता है।" इस-लए, हम अपील$ को आं-शक eप से +वीकार करते ह0 और आईपीसी क धारा 364ए क े तहत दोष-स[2] को दरFकनार करते ह0। व/वान वचारण यायालय और उ9च यायालय क े नण<य उपरो.त सीमा तक संशोधत Fकए जाते ह0। अपीलाथ<य$ को अब भारतीय दंड सं:हता क धारा 363 क े तहत अपराध क े -लए दोषी ठहराया गया है यानी, अपहरण और सात साल क े कारावास और 2000/- Tपये क े जुमा<ने क सजा सुनाई गई है।य:द अपीलाथ<य$ ने सात साल से अधक क े कारावास को छ ू ट क े साथ पूरा कर -लया है और 2000/- Tपये क े जुमा<ने का भुगतान Fकया है, तो हम अपीलाथ<य$ को नद\श देते ह0 Fक य:द जमानत पर नहं है तो उ ह तुरंत 7रहा Fकया जाए। य:द नहं, तो अपीलकता< चार सCताह क अवध क े भीतर आHमसमप<ण करगे और शेष सजा काटगे।.......................................... जे. (संजय =कशन कौल) …...................................... जे. (बी. वी. नागार3ना) नई AदMल 1 माच, 2023. अ+वीकरणः +थानीय भाषा म अनुवा:दत नणय< वाद क े सी-मत उपयोग क े -लए है ताFक वह अपनी भाषा म इसे समझ सक े और Fकसी अ य उ/येhय क े -लए इसका उपयोग नहं Fकया जा सकता है। सभी [यवहा7रक और आधका7रक उ/येhय$ क े -लए नण<य का अंlेजी सं+करण Aामाjणक होगा और न3पादन और काया< वयन क े उ2ेhय क े -लए उपयु.त रहेगा । Translated by Mr Vishal, Revisor and Mr. Lekh Nath Gautam, Translator.