Full Text
भारत क
े सर्वोच्च न्यायालय में
आपराधिक अपीलीय अधिकार क्षेत्र
2019 की दाण्डिक अपीलीय संख्या 572-573
करण @फधतया ... अपीलकताा
धर्वरुद्ध
मध्य प्रदेश राज्य ..............प्रत्यर्थी
न्याय-धनणाय
न्यायमूधता धर्वक्रम नार्थ,
JUDGMENT
1. र्वतामान अपीलें 15 नर्वंबर, 2018 क े फ ै सले और आदेश को चुनौती देती है, धिसक े तहत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खि पीठ, इंदौर की युगलपीठ ने धर्वचारण न्यायालय द्वारा दी गयी मृत्युदंड की सिा की पुधि की और सार्थ ही अपीलकताा द्वारा धर्वचारण न्यायालय द्वारा दी गयीअपनी दोषधसण्डद्ध और सिा क े ण्डखलाफ दायर अपील को खाररि कर धदया।
2. र्वतामान अपीलकताा पर भारतीय दंड संधहता की िारा 363,376 (2) (i), पॉक्सो अधिधनयम की िारा 5 (एम)/6 और भारतीय दंड संधहता की िारा 302 और 201 क े अन्तगात अपरािों क े धलएआरोप लगाया गया र्था। धर्वचारण न्यायालय ने 17 मई, 2018 को अपने फ ै सले में सभी अपरािों क े धलए अपीलकताा को दोषी ठहराया और प्रत्येक अपराि क े धलए धनम्नधलण्डखत सिा सुनाई: िारा क े अन्तगात अपराि प्रदत्त दि अर्थादंड 363 भा.द.स. 5 र्वषा सश्रम कारार्वास 1, 000/- रुपये िारा 376 (2) (i) भा.द.स. आिीर्वन कारार्वास 5,000 रुपये पॉक्सो अधिधनयम की िारा 5 (एम)/6 आिीर्वन कारार्वास 5,000 रुपये 302 भा.द.स. मृत्युदंड 5,000 रुपये 201 भा.द.स. 5 र्वषा सश्रम कारार्वास 5,000 रुपये
3. अपीलकताा द्वारा की गई अपील, उच्च न्यायालय द्वारा खाररि कर दी गई र्थी और धर्वचारण न्यायालय द्वारा अग्रेधषत मृत्यु धनदेश की पुधि की गई र्थी, िैसा धक ऊपर पहले ही उल्लेख धकया िा चुका है। 4 इन अपीलों की धर्वचारािीनता क े दौरान, अपीलकताा ने धकशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिधनयम, 2015 क े प्रार्विानों क े अन्तगात उपलब्ध लाभों का दार्वा करते हुए आईए संख्या 43271/2019 क े रूप में एक आर्वेदन धदया। यह आर्वेदन स्पि रूप से 2015 अधिधनयम की िारा 9(2) क े तहत दायर धकया गया र्था। इस न्यायालय द्वारा धदनांक 28.09.2022 क े आदेश द्वारा, धर्वचारण न्यायालय को अपनी ररपोर्ा इस बाबद प्रस्तुत करने हेतू कहा धक क्या अपीलकताा उस तारीख को धकशोर र्था िब अपराि धकया गया र्था। धदनांक 28.09.2022 का आदेश नीचे धदया गया हैैः “धपछले अर्वसर पर िारी धनदेशों क े अनुसार क ु छ ररपोर्ा/दस्तार्वेि अधभलेख पर रखे गए हैं। प्रधतद्वंद्वी प्रस्तुधतयों क े गुण-दोषों पर धर्प्पणी धकए धबना, हम धनम्नधलण्डखत धनदेश देते हैैः (क) अधभलेख की प्रधतयां यर्थाशीघ्र संबंधित धर्वचारण न्यायालय को भौधतक रूप में और सार्थ ही सार्थ धडधिर्ाइज्ड रूप में भेिी िाएं । (ख) आरोपी को एक सप्ताह क े भीतर संबंधित धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष पेश िाए। (ग) धर्वचारण न्यायालय इस पर धर्वचार करने का प्रयास करेगा धक क्या अपीलकताा उस तारीख को धकशोर र्था िब अपराि धकया गया र्था। (घ) इस धनष्कषा पर पहुंचने क े धलए, धर्वचारण न्यायालय सभी सुसंगत दस्तार्वेिों को मंगाने और उन पर धर्वचार करने क े सार्थ-सार्थ अपीलकताा की कानून द्वारा ज्ञात तरीक े से धचधकत्सा िांच करर्वाने की सुधर्विा प्राप्त करने का हकदार होगा। (ङ) इस संबंि में ररपोर्ा चार सप्ताह क े भीतर इस न्यायालय की रधिस्ट्री में प्रस्तुत की िाएगी। 31 अक्टू बर 2022 से शुरू होने र्वाले सप्ताह में ररपोर्ा क े सार्थ आगे क े धर्वचार क े धलए इस मामले को सूचीबद्ध करें ।
5. उक्त आदेश क े अनुसरण में, प्रर्थम अधतररक्त सत्र न्यायािीश, मनार्वर, धिला िार, मध्य प्रदेश की न्यायालय से धदनांक प्रस्तुत 27.10.2022 को एक ररपोर्ा प्राप्त हुई है, िो 20 पृष्ों में सभी दस्तार्वेिी और मौण्डखक प्रमाण दोनों क े सार्थ है, धिसक े आिार पर ररपोर्ा प्रस्तुत की गई है।कधर्थत ररपोर्ा क े अनुसार, अपीलार्थी की िन्म धतधर्थ धनणाायक रूप से 25.07.2002 होना साधबत पायी गयी।घर्ना की तारीख 15.12.2017 होकर, अपीलकताा घर्ना की तारीख पर 15 साल 04 महीने और 20 धदन का र्था । इस ररपोर्ा का प्रभार्वशील धहस्सा नीचे धदया गया हैैः “यह धनणाायक रूप से धसद्ध पाया गया है धक आर्वेदक/अधभयुक्त करण की िन्म धतधर्थ 25.07.2002 है।यह भी साधबत धकया गया है धक 25.07.2002 को उसकी िन्मधतधर्थ को ध्यान में रखते हुए आर्वेदक की आयु 15.12.2017 को 15 र्वषा 04 माह और 20 धदन र्थी और 16 र्वषा से कम आयु क े होने क े कारण र्वह धकशोर न्याय अधिधनयम (बालकों की देखरेख एर्वं संरक्षण ), 2015 की िारा 2 (12) क े अनुसार बालक र्था।तदनुसार, िांच की कायार्वाही धनष्कधषात की िाती है।“
6. प्रारंभ में अपीलकताा क े धर्वद्वान र्वररष् अधिर्वक्ता ने स्पि धकया है धक र्वतामान में र्वह क े र्वल धकशोरार्वस्र्था क े अधभर्वाक पर िोर दे रहा है और यधद र्वे इसमें धर्वफल रहते है तो दोषधसण्डद्ध और दंडादेश क े मुद्दे पर अधभभाषण करेंगे। ररपोर्ा क े आिार पर आगे अपीलकताा क े धर्वद्वान र्वररष् अधिर्वक्ता ने सर्वाप्रर्थम प्रस्तुत धकया धक 2015 अधिधनयम की िारा 9 (2) क े अन्तगात धदया गया र्वाक्य प्रभार्वी नहीं धकया िा सकता है. दू सरा, यह प्रस्तुत धकया िाता है धक धदसंबर, 2017 में धगरफ़्तार करना की तारीख से, अपीलकताा पहले से ही 5 साल से अधिक का कारार्वास भुगत चुका है, िबधक 2015 क े अधिधनयम की िारा 18 क े अन्तगात, 16 से 6 साल से कम उम्र का एक धकशोर भले ही र्वह एक िघन्य अपराि क े धलए दोषी ठहराया गया हो, अधिकतम सिा िो दी िा सकती है र्वह 3 साल तक धर्वशेष आर्वास में रखने की है। उपयुाक्त को ध्यान में रखते धर्वद्वान र्वररष् अधिर्वक्ता क े अनुसार, अपीलकताा तुरंत ररहा धकये िाने योग्य है।
7. मध्य प्रदेश राज्य क े धर्वद्वान र्वकील ने दृढ़ता से आग्रह धकया है धक अपीलकताा को सही आयु धनिााररत करने क े धलए अण्डस्र्थ परीक्षण क े अिीन धकया िाना चाधहए, क्योंधक उसक े अनुसार, धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष िांच क े दौरान दायर दस्तार्वेि 2015 की िारा 94 क े तहत नहीं हैं। इसधलए, एकमात्र धर्वकल्प बचा र्था धक मेधडकल बोडा द्वारा एक ऑधसधफक े शन र्ेस्ट् आयोधित धकया िाए।राज्य की ओर से कोई अन्य प्रधतर्वेदन प्रस्तुत नहीं धकया गया है।
8. पक्षकारों क े धर्वद्वान अधिर्वक्ताओं द्वारा दी गई प्रस्तुधतयों पर धर्वचार करने से पहले, धर्वचारण न्यायालय द्वारा धदनांक 27.10.2022 को प्रस्तुत की गई िांच ररपोर्ा पर धर्वचार करना आर्वश्यक होगा।यधद उक्त ररपोर्ा को स्वीकार धकया िाता है और मंिूरी दी िाती है, तो अपीलकताा को एक धकशोर घोधषत धकया िाएगा िो 2015 क े अधिधनयम क े अनुसार आर्वश्यक पररणाम दे सकता है। यहां यह नोर् करना प्रासंधगक होगा धक र्रायल कोर्ा द्वारा प्रस्तुत ररपोर्ा पर प्रधतर्वादी-राज्य द्वारा कोई आपधत्त दिा नहीं की गई है।प्रधतर्वादी राज्य की ओर से क े र्वल अण्डस्र्थकरण परीक्षण कराने क े धलए ही अधभर्वाक प्रस्तुत धकया गया है।
9. हमने ररपोर्ा और धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष प्रस्तुत धकए गए ताण्डिक साक्ष्य का भी पररशीलन धकया है धिसक े अधभशीलन पश्चात धर्वचारण न्यायालय द्वारा धनष्कषा धनकाला गया है।यह ररपोर्ा दस्तार्वेिी साक्ष्य क े सार्थ-सार्थ र्वतामान प्रिान धशधक्षका (आईडब्ल्यू-01), सेर्वाधनर्वृत्त प्रिानाध्यापक (आईडब्ल्यू-08), प्रार्थधमक संस्र्थान क े पांच धशक्षकों (आईडब्ल्यू-02, आईडब्ल्यू-04, आईडब्ल्यू-07, आईडब्ल्यू-09 और आईडब्ल्यू-10) और अपीलकताा क े अधभभार्वक (आईडब्ल्यू-06) क े मौण्डखक साक्ष्य पर भी आिाररत है।संस्र्थान द्वारा िारी अंक-पत्रों क े अलार्वा, संस्र्थान द्वारा िारी िन्म धतधर्थ प्रमाण पत्र (आई-3) भी है।इस न्यायालय क े पास, इसधलए, अपीलकताा की िन्म धतधर्थ क े संबंि में, धर्वचारण न्यायालय द्वारा धनकाले गए धनष्कषा की सत्यता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।हम, इसधलए, धर्वचारण न्यायालय की ररपोर्ा को स्वीकार करते हैं और मानते हैं धक अपीलकताा घर्ना की तारीख पर 15 साल, 4 महीने और 20 धदन की उम्र का र्था ।
10. प्रधतर्वादी-राज्य क े धर्वद्वान र्वकील क े अधभकर्थनों का परीक्षण करने क े धलए, 2015 अधिधनयम की िारा 94 िो प्रासंधगक है, को यहां पुन: प्रस्तुत धकया गया है: “94 आयु की उपिारणा और अर्विारणैः (1) िहां सधमधत या बोडा क े समक्ष इस अधिधनयम क े धकसी उपबंि क े अिीन (साक्ष्य देने क े प्रयोिन से धभन्न) लाए गए व्यण्डक्त की उपण्डस्र्थधत क े आिार पर यह स्पि है धक उक्त व्यण्डक्त एक बालक है र्वहां सधमधत या बोडा ऐसे अर्वलोकन को अधभधलण्डखत करेगा धिसमें बालक की आयु यर्थासंभर्व धनकर्तम बताई िाएगी और िारा 9,14 या 36 क े अिीन िांच आगे बढ़ाएगा, आयु की आगे पुधि की प्रतीक्षा धकए धबना । (2) यधद सधमधत या बोडा क े सामने लाया गया व्यण्डक्त बच्चा है या नहीं, इस बारे में संदेह करने क े धलए उधचत आिार है, तो सधमधत या बोडा, िैसा भी मामला हो, आयु धनिाारण की प्रधक्रया को साक्ष्य इस प्रकार प्राप्त कर आगे बढ़ाएगा- (i) स्क ू ल से िन्म प्रमाण पत्र या संबंधित परीक्षा बोडा से मैधर्रक या समकक्ष प्रमाण पत्र, यधद उपलब्ध हो और उसकी अनुपण्डस्र्थधत में (ii) धकसी धनगम या नगरपाधलका प्राधिकारी या पंचायत द्वारा धदया गया िन्म प्रमाणपत्र (iii) और (i) और (ii) क े अभार्व की ण्डस्र्थधत में,आयु का अर्विारण सधमधत या बोडा क े आदेशों पर धकए गए अण्डस्र्थकरण परीक्षण या धकसी अन्य नर्वीनतम धचधकत्सा आयु अर्विारण परीक्षण द्वारा धकया िाएगा,िो धक सधमधत या बोडा क े आदेशानुसार संचाधलत धकये गए हो: परंतु सधमधत या बोडा क े आदेश पर धकया गया ऐसा आयु अर्विारण परीक्षण ऐसे आदेश की तारीख से पंद्रह धदन क े भीतर पूरा धकया िाएगा। (3) सधमधत या बोडा द्वारा अधभधलण्डखत आयु इस अधिधनयम क े प्रयोिन क े धलए इस प्रकार उसक े समक्ष लाए गए व्यण्डक्त की आयु मानी िाएगी।
11. उपरोक्त उण्डल्लण्डखत प्रार्विान और र्वतामान मामले क े तथ्ों पर सार्विानीपूर्वाक धर्वचार करने पर, राज्य क े धर्वद्वान अधिर्वक्ता क े उपरोक्त तक ा,धनम्नधलण्डखत कारणों से अस्वीकार धकये िाने योग्य हैैः (क) प्रर्थमतैः, धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष िांच क े दौरान, राज्य ने अपीलकताा की ओर से दाण्डखल दस्तार्वेिों और अपीलकताा की ओर से पेश धकए गए साक्ष्य क े संबंि में कोई आपधत्त नहीं की एर्वं िांच में धिन गर्वाहों से पूछताछ की गई र्थी, उनकी प्रधतपरीक्षा भी राज्य ने नहीं की।एक बार धर्वस्तृत िांच क े बाद धर्वचारण न्यायालय द्वारा धनणाायक धनष्कषा दिा धकए िाने क े पश्चात् अब राज्य को इस तरह की आपधत्त उठाने की अनुमधत देना अनुधचत र्व अनपेधक्षत होगा । राज्य क े पास िांच में धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष इस तरह का अधभर्वाक उठाने का पूरा अर्वसर र्था और धफर धर्वचारण न्यायालय को यह धनणाय लेना र्था धक क्या कोई अण्डस्र्थकरण परीक्षण आर्वश्यक र्था या नहीं। (ख) दू सरा, अण्डस्र्थकरण परीक्षण क े र्वल आयु का व्यापक मूल्ांकन देगा। यह सर्ीक उम्र नहीं बता सकता।इसमें प्लस या माइनस 1 से 2 साल का माधिान भी होता है।यधद हम उक्त परीक्षण की अनुमधत भी देते हैं, तो यह हमें कहीं नहीं ले िाता है।इसका िांच क े बाद धर्वचारण न्यायालय द्वारा धकए गए मूल्ांकन पर कोई प्रभार्व नहीं पडेगा । (ग) तीसरा, आयु क े धनिाारण क े धलए पहली र्वरीयता स्क ू ल द्वारा िारी िन्म प्रमाण पत्र या मैधर्रक प्रमाण पत्र है।यद्यधप यह प्रस्तुत धकया गया है धक स्क ू ल का कोई िन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं धकया गया र्था, अपीलकताा क े धर्वद्वान अधिर्वक्ता ने ररपोर्ा क े सार्थ संलग्न दस्तार्वेिों से इंधगत धकया है धक अंक पत्रों और स्क ू ल छोडने क े प्रमाणपत्र क े अलार्वा, िन्म प्रमाणपत्र भी दाण्डखल धकया गया र्था िो धक ररपोर्ा का संलग्नक I-3 है ।प्रर्थम श्रेणी क े प्रपत्र उपलब्ध न होनी की ण्डस्र्थधत में ही धनगम द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्र मान्य होगा । (घ) अंत में, यधद पहले और दू सरे कॉलम क े अन्तगात दस्तार्वेि उपलब्ध नहीं हैं, तो ही मेधडकल बोडा को संदधभात धकये िाने एर्वं अण्डस्र्थकरण परीक्षण धकये िाने की ण्डस्र्थधत उत्पन्न होती है।
12. र्वतामान मामले में, स्क ू ल से िन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध होने और र्वह भी एक सरकारी प्रार्थधमक स्क ू ल होने क े कारण, हमें इसकी शुद्धता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं धमलता है और इससे भी अधिक िब यह धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष िांच में धर्वधिर्वत साधबत हो गया है। इस प्रकार, राज्य क े धर्वद्वान अधिर्वक्ता द्वारा उठाई गई आपधत्तयां अस्वीकार धकये िाने योग्य हैं।
13. अगला प्रश्न यह है धक अपीलकताा को इस तथ् क े चलते क्या राहत दी िा सकती है धक अधिधनयम 2015 क े अन्तगात उसे एक बच्चा माना गया है और र्वह भी 16 र्वषा से कम आयु का।इस प्रसंग में अधिधनयम २०१५ की िारा ९ सुसंगत होगी। इसे यहां पुनैः प्रस्तुत धकया गया हैैः “9. धकसी मधिस्ट्रेर् द्वारा अनुसरण की िाने र्वाली प्रधक्रया धिसे इस अधिधनयम क े अन्तगात अधिक ृ त नहीं धकया गया है- (1) िब एक मधिस्ट्रेर्, धिसे इस अधिधनयम क े तहत बोडा की शण्डक्तयों का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है, की यह राय है धक 13 कधर्थत तौर पर अपराि करने र्वाला और उसक े सामने लाया गया व्यण्डक्त एक बच्चा है, तो र्वह धबना धकसी देरी क े, इस तरह की राय दिा करेगा और बच्चे को तुरंत ऐसी कायार्वाही क े ररकॉडा क े सार्थ क्षेत्राधिकार रखने र्वाले बोडा कोअग्रेधषत करेगा । (2) यधद कोई व्यण्डक्त, धिसका अपराि धकया िाना अधभकधर्थत है िो बोडा से धभन्न धकसी न्यायालय क े समक्ष, यह दार्वा करता है धक र्वह व्यण्डक्त एक बालक है या अपराि धकए िाने की तारीख को एक बालक र्था, या यधद न्यायालय की स्वयं यह राय है धक र्वह व्यण्डक्त अपराि धकए िाने की तारीख को एक बालक र्था, तो उक्त न्यायालय ऐसे व्यण्डक्त की आयु अर्विाररत करने क े धलए िांच करेगा, ऐसा साक्ष्य (धक ं तु शपर्थपत्र नहीं) लेगा और मामले पर धनष्कषा अधभधलण्डखत करेगा, धिसमें व्यण्डक्त की आयु यर्थासंभर्व धनकर्तम बतायी िाएगी: परन्तु ऐसा दार्वा धकसी न्यायालय क े समक्ष धकया िा सक े गा और मामले क े अंधतम धनपर्ान क े पश्चात् भी इसे धकसी भी स्तर पर मान्यता दी िाएगी और ऐसे दार्वे का अर्विारण इस अधिधनयम क े उपबंिों और इसक े अिीन बनाए गए धनयमों क े अनुसार धकया िाएगा चाहे र्वह व्यण्डक्त इस अधिधनयम क े प्रारंभ की तारीख को या उससे पूर्वा बालक न रह गया हो।
3. यधद न्यायालय यह पाता है धक धकसी व्यण्डक्त ने अपराि धकया है और ऐसे अपराि क े धकए िाने की तारीख को र्वह बालक र्था तो र्वह बालक को समुधचत आदेश पाररत करने क े धलए बोडा को अग्रेधषत करेगा और न्यायालय द्वारा पाररत दंडादेश, यधद कोई हो, का कोई प्रभार्व नहीं समझा िाएगा।
4. यधद इस िारा क े तहत धकसी व्यण्डक्त को सुरक्षात्मक धहरासत में रखा िाना आर्वश्यक है, िबधक व्यण्डक्त क े बालक होने क े दार्वे की िााँच की िा रही
14. उपयुाक्त िारा का पररशीलन सबसे पहले अपराि करने र्वाले अधभकधर्थत व्यण्डक्त को यह दार्वा करने का अधिकार देता है धक र्वह अपराि धकए िाने की तारीख को बालक है और यधद ऐसा दार्वा धकया िाता है तो संबंधित न्यायालय िांच करेगा और ऐसे व्यण्डक्त की आयु अर्विाररत करने क े धलए शपर्थ पत्र क े अधतररक्त ऐसा साक्ष्य लेगा िो आर्वश्यक हो।है, तो ऐसे व्यण्डक्त को बीच की अर्वधि में सुरक्षा क े स्र्थान पर रखा िा सकता है। "उपिारा (2) क े परंतुक में आगे यह स्पि धकया गया है धक ऐसा दार्वा धकसी भी न्यायालय क े समक्ष धकया िा सकता है और मामले क े अंधतम रूप से धर्वधनधश्चत धकए िाने क े बाद भी धकसी भी स्तर पर इसे मान्यता दी िा सकती है। उपिारा (2) क े परंतुक में आगे यह स्पि धकया गया है धक ऐसा दार्वा धकसी भी न्यायालय क े समक्ष धकया िा सकता है और मामले क े अंधतम रूप से धर्वधनधश्चत धकए िाने क े बाद भी धकसी भी स्तर पर इसे मान्यता दी िा सकती है।उपरोक्त सांधर्वधिक प्रार्विानों को ध्यान में रखते हुए और अधभधलण्डखत धकये गए धनष्कषों को ध्यान में रखते हुए, अपीलकताा को िहााँ अपराि धकए िाने की तारीख पर एक बालक माना गया हो, अधिरोधपत दंड को अप्रभार्वी बनाया िाना चाधहए ।
15. अपीलकताा को दी िाने र्वाली राहत की िांच एक अलग पररप्रेक्ष्य द्वारा भी की िा सकती है, अर्थाात्, क्या र्वह पहले से ही अधिकतम दंड भुगत चुका है िो धकसी िघन्य अपराि को करने क े धलए कानून का उल्लंघन करने र्वाले बालक क े ण्डखलाफ दी िा सकती है और िो 16 र्वषा से कम आयु का है। 2015 अधिधनयम की िारा 18 इस संबंि में सुसंगत होगी और इसे नीचे पुनैः प्रस्तुत धकया गया हैैः “18. कानून का उल्लंघन करने र्वाले बालक हेतू आदेश- (1) िहां बोडा का िांच करने पर यह समािान हो िाता है धक बालक ने, आयु को धर्वचार में लाए धबना कोई छोर्ा अपराि या कोई घोर अपराि धकया है; या सोलह र्वषा से कम आयु क े बालक ने कोई िघन्य अपराि धकया है [या सोलह र्वषा से अधिक आयु क े बालक ने कोई िघन्य अपराि धकया है और बोडा ने िारा 15 क े अिीन प्रारंधभक धनिाारण करने क े पश्चात् मामले का धनपर्ारा कर धदया है। तो तत्समय प्रर्वृत्त धकसी अन्य धर्वधि में अंतधर्वाि धकसी प्रधतक ू ल बात क े होते हुए भी और अपराि की प्रक ृ धत, पयार्वेक्षण या मध्यक्षेप की धर्वधशि आर्वश्यकता ऐसी पररण्डस्र्थधतयों, िो सामाधिक अन्वेषण ररपोर्ा में बताई गई हैं, और बालक क े पूर्वा आचरण क े आिार पर बोडा यधद ऐसा करना ठीक समझता है तो र्वह,- (क) बालक को, समुधचत िांच करने क े पश्चात् और ऐसे बालक, तर्था उनक े माता-धपता या संरक्षक को परामशा देने क े पश्चात् उपदेश या भत्साना क े पश्चात् मा िाने क े धलए अनुज्ञात कर सक े गा: (ख) बालक को सामूधहक परामशा और ऐसे ही धक्रयाकलापों में भाग लेने का धनदेश दे सक े गा; (ग) बालक को धकसी संगठन या संस्र्थान अर्थर्वा बोडा द्वारा पहचान धकए गए धर्वधनधदाि व्यण्डक्त, व्यण्डक्तयों या व्यण्डक्त समूह क े पयार्वेक्षणािीन सामुदाधयक सेर्वा करने का आदेश दे सक े गा; (घ) बालक या बालक क े माता-धपता या संरक्षक को िुमााने का संदाय करने का आदेश दे सक े गा: परंतु यधद बालक कायारत है तो र्वह यह सुधनधश्चत कर सक े गा धक तत्समय प्रर्वृत्त धकसी श्रम धर्वधि क े उपबंिों का उल्लंघन न हुआ हो; (ङ) बालक को सदाचरण की पररर्वीक्षा पर छोडने और माता-धपता, संरक्षक या योग्य व्यण्डक्त की देखरेख में रखने का धनदेश, ऐसे माता-धपता, संरक्षक या योग्य व्यण्डक्त द्वारा बालक क े सदाचरण और उसकी भलाई क े धलए बोडा की अपेक्षानुसार प्रधतभू सधहत या रधहत तीन र्वषा से अधिक की कालार्वधि क े धलए बंिपत्र धन्ाधदत धकए िाने पर, दे सक े गा; (च) बालक को सदाचरण की पररर्वीक्षा पर छोडने और बालक क े सदाचरण और भलाई को सुधनधश्चत करने क े धलए धकसी सुधर्विा उपयुक्त तंत्र की देखरेख और पयार्वेक्षण में रखने का धनदेश तीन र्वषा से अनधिक की कालार्वधि क े धलए दे सक े गा; (छ) बालक को तीन र्वषा से अनधिक की ऐसी अर्वधि क े धलए, िो र्वह ठीक समझे, सुिारात्मक सेर्वाएं, धिनक े अंतगात धशक्षा, कौशल धर्वकास, परामशा देने, आचरण उपांतरण धचधकत्सा क े धलए और धर्वशेष गृह में ठहरने की कालार्वधि क े दौरान मनधश्चधकत्सीय समर्थान देना भी है, धर्वशेष गृह में भेिने का धनदेश दे सक े गा: परंतु यधद बालक का आचरण और व्यर्वहार ऐसा हो गया है िो बालक क े धहत में या धर्वशेष गृह में रहने र्वाले अन्य बालकों क े धहत में नहीं होगा तो बोडा, ऐसे बालक को सुरधक्षत स्र्थान पर भेि सक े गा । (2) यधद उपिारा (1) क े खंड (क) से खंड (छ) क े अिीन कोई आदेश पाररत धकया िाता है तो बोडा (i) धर्वद्यालय में हाधिर होने; (ii) धकसी व्यर्वसाधयक प्रधशक्षण क े न्द्र में हाधिर होने; (iii) धकसी धचधकत्सा क ें द्र में हाधिर होने; (iv) धकसी धर्वधनधदाि स्र्थान पर बारंबार िाने या हाधिर होने से बालक को प्रधतधषद्ध करने; या का (v). व्यसनमुण्डक्त कायाक्रम में भाग लेने, अधतररक्त आदेश पाररत कर सक े गा । (3) िहां बोडा, िारा 15 क े अिीन प्रारंधभक धनिाारण करने क े पश्चात् यह आदेश पाररत करता है धक उक्त बालक का, र्वयस्क क े रूप में और धर्वचारण करने की आर्वश्यकता है र्वहां बोडा मामले क े धर्वचारण को ऐसे अपरािों क े धर्वचारण की अधिकाररता र्वाले बालक न्यायालय को अंतररत करने का आदेश दे सक े गा ।
16. 2015 अधिधनयम की उपरोक्त िारा 18 क े अर्वलोकन पर, यह ध्यान धदया िाना चाधहए धक िेिेबी धिसने बालक को एक धर्वधि का उल्लंघन करने र्वाला बालक पाया हो, धिसने एक छोर्ा या गंभीर अपराि धकया है और िहां िघन्य अपराि धकया गया है,बालक16 र्वषा से कम हो, उप-िारा (1) और उप-िारा (2) क े खंड (ए) से (िी) क े तहत धर्वधभन्न आदेश पाररत कर सकता है। हालांधक, शुद्ध पररणाम यह है धक िो भी सिा प्रदान की िानी है, र्वह तीन साल की अर्वधि से अधिक नहीं हो सकती है और िेिेबी को सुिारात्मक सेर्वाओ सधहत धशक्षा,कौशल धर्वकास, परामशा और मनोरोग सहायता प्रदान करने क े धलए बच्चे को प्रदान की िा सकने र्वाली सर्वोत्तम सुधर्विाओं को सुधनधश्चत करने का पूरा ध्यान रखना होगा।,
17. र्वतामान मामले में, अपीलकताा को 16 र्वषा से कम माना िाता है, और इसधलए, अधिकतम दंड िो धदया िा सकता है र्वह 3 र्वषा तक है। अपीलकताा पहले ही 5 साल से अधिक का समय गुिार चुका है। तीन र्वषा से अधिक का उनका कारार्वास अर्वैि होगा और इसधलए उन्हें इस आिार पर भी ररहा धकया िा सकता है।
18. मामले क े तथ्ों और ऊपर अधभधलण्डखत धनष्कषों पर धर्वचार करअन्तगात क े पश्चात्, इस मुद्दे पर धनणायि धर्वधि पर संक्षेप में धर्वचार करना भी उपयुक्त होगा धक क्या 2015 क े उपबंिों क े अिीन दोष धसण्डद्ध क े पश्चात्,अपील क े प्रक्रम पर अधभयुक्त को धकशोर/बालक अधभधनिााररत धकया िाता है तब धर्वचारण न्यायालय और अपीलीय न्यायालयों द्वारा अधभधलण्डखत धर्वचारण, दोषधसण्डद्ध और दंडादेश की ण्डस्र्थधत क्या होगी। क्या मुकदमा स्वयं धनयधमत सत्र न्यायालय द्वारा अधिकार क्षेत्र की कमी क े कारण दू धषत हो िाएगा और क े र्वल िेिेबी ही अधभयोिन पक्ष द्वारा धदए गए प्रमाण क े आिार पर धकये गए अपराि की िांच कर सकता है । यधद िेिेबी द्वारा िांच नहीं की गई है, तो क्या पूरी कायार्वाही को रद्द करने की आर्वश्यकता है या क े र्वल सिा क े पहलू पर 2015 क े अनुसार धर्वचार करने की आर्वश्यकता होगी।
19. हम यहां प्रारंभ में यह नोर् कर सकते हैं धक र्वतामान में अपीलकताा द्वारा दोषधसण्डद्ध को चुनौती नहीं दी है बण्डि क े र्वल धकशोरार्वस्र्था का दार्वा कर रहा है और पररणामस्वरूप 2015 क े अिीन उपबंधित दंडादेश क े लाभ का दार्वा कर रहा है, यधद र्वह धकशोरार्वस्र्था क े प्रारंधभक मुद्दे पर धर्वफल रहता है तो दोषधसण्डद्ध और दंडादेश पर अधभर्वचन करने का अधिकार सुरधक्षत रखता है।
20. उपयुाक्त मुद्दे पर अनेक धनणाय हैं।क ु छ ने दोषधसण्डद्ध, सिा को रद्द कर धदया है और कायार्वाही को समाप्त कर धदया है, अन्य ने दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा है, लेधकन धकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिधनयम, 2000 क े तहत पहले से ही अधिकतम अनुज्ञेय से अधिक भुगत ली गयी सिा क े आिार पर अधभयुक्तों की ररहाई क े धलए धनदेधशत धकया है और तीसरा, िहां दोषधसद्धी को बनाये रखने क े बाद इस अदालत ने दि पर उधचत आदेश पाररत करने क े धलए मामले को िेिेबी को भेि धदया है। र्वतामान मामला 2015 अधिधनयम क े अन्तगात आता है क्योंधक अपराि स्वयं र्वषा 2017 का है।
21. जितेंद्र ज ंह उपनाम बब्बू ज ंह और एक अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क े मामले में, इस न्यायालय की युगल पीठ ने दोषधसण्डद्ध की पुधि की, लेधकन चूंधक इसमें अपीलकताा को क े र्वल िुमााना लगाया िा सकता र्था, इसधलए 100/- रुपये का मौिूदा िुमााना धबि ु ल अपयााप्त लगाया गया और तदनुसार, अपीलकताा पर लगाए िाने र्वाले िुमााने की उधचत मात्रा और पीधडत क े पररर्वार को धदए िाने र्वाले मुआर्वजे का धनिाारण करने क े धलए मामला िेिेबी को भेि धदया गया र्था।
22. धनणाय क े प्रर्थम लेखक न्यायामूजति मदन बी. लोक ु र, ने इस इस मुद्दे पर धर्वचार धकया धक क्या दोषधसण्डद्ध इस न्यायालय द्वारा अधर्वचल रखी िा सकती है धिस में 2000 क े अनुसार कारार्वाई की िानी र्थी।लगभग सभी पूर्वा धनणायों को ररपोर्ा क े पैरा 24,24.[1] से 24.7,25,25.[1] से 25.2,26,26.[1] से 26.[2] और 27 में उन सभी चार श्रेधणयों क े मामलों क े संबंि में संदधभात धकया गया है धिनमें इस न्यायालय द्वारा अलग-अलग धर्वचार व्यक्त धकए गए हैं। पहली श्रेणी में दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा गया लेधकन सिा को रद्द कर धदया गया।दू सरी श्रेणी र्वह र्थी िहां दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा गया र्था लेधकन सिा को पहले से भुगती गयी अर्वधि में उपान्तररत कर धदया गया र्था ।तीसरी श्रेणी र्वह र्थी िहां दोषधसण्डद्ध और दंड दोनों को रद्द कर धदया गया र्था और चौर्थी श्रेणी र्वह र्थी िहां दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा गया र्था और मामले को उपयुक्त दंड देने क े धलए िेिेबी को भेिा गया र्था ।ररपोर्ा क े पैराग्राफ 28 में न्यायमूधता लोक ु र ने चार श्रेधणयों का सारांश धदया है। आगे पैराग्राफ 29 में 2000 अधिधनयम की िारा 20 का उल्लेख धकया गया है और अंततैः पैराग्राफ 30 में यह धनष्कषा धनकाला गया धक मामले मामले को गुणार्वगुण क े आिार पर िांच करने की आर्वश्यकता है और यधद धकशोर को अपरािी पाया िाता है, तो र्वह दण्डित धकए धबना नहीं छोडा िा सकता, परन्तु २००० अधिधनयम क े प्रार्विानों को ध्यान में रखकर,दिादेश का प्रश्न िे िे बी पर छोड धदया िाना चाधहए। न्यायमूधता लोक ु र की ररपोर्ा क े पैराग्राफ 28,29 और 30 को पुनैः प्रस्तुत करना उधचत होगा, िो इस प्रकार हैैः “28. उपयुाक्त चचाा का सारति यह है धक मामलों क े एक समूह में इस न्यायालय ने धकशोर को उसक े द्वारा धकए गए कधर्थत अपराि का दोषी पाया है, परन्तु उसे र्वस्तुतैः धबना दंड क े छोडा गया क्योंधक न्यायालय द्वारा दिादेश ख़ाररि कर धदया गया र्था। मामलों क े दू सरे समूह में, इस न्यायालय ने मामले क े तथ्ों पर धर्वचार कर कहा धक धनरोि में धबतायी गयी अर्वधि क े द्वारा धकशोर को उसक े द्वारा धकए गए अपराि क े धलए पयााप्त रूप से दंधडत धकया गया है । तीसरे समूह क े मामलों में, इस न्यायालय ने पूरे मामले को धकशोर की बेगुनाही या अपराि और धकशोर दोषी पाए िाने पर दी िाने र्वाली सिा दोनों पर धर्वचार करने क े धलए धकशोर न्याय बोडा को भेि धदया है। चौर्थे समूह क न्यायालय ने गुणार्वगुण क े आिार पर मामले में िांच की और धकशोर को अपराि का अपरािी पाए िाने क े बाद, दंड धदए िाने हेतू मामले को क्षेत्राधिकार र्वाले धकशोर न्यायालय को र्वापस भेिा है।
29. हमारी राय में, धकशोर न्यायालय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिधनयम, 2000 की िारा 20 में ग्रहणयोग्य प्रक्रम अधभकधर्थत है। यह इस प्रकार हैैः “20. लंजबत मामलों क े बारे में जिशेष उपबंध-इस अधिधनयम में धकसी बात क े होते हुए भी, धकसी क्षेत्र क े न्यायालय में, उस तारीख को िबधक यह अधिधनयम उस क्षेत्र में प्रर्वृत्त होता है, लंधबत धकशोर धर्वषयक सब कायार्वाधहयां उस न्यायालय में इस प्रकार चालू रखी िाएं गी, मानो यह अधिधनयम पाररत नहीं धकया गया है और यधद न्यायालय का यह धनष्कषा है धक धकशोर ने अपराि धकया है तो र्वह उस धनष्कषा को अधभधलण्डखत करेगा और उस धकशोर क े बारे में कोई दंडादेश करने क े बिाय उस धकशोर को बोडा को भेि देगा, िो उस धकशोर क े बारे में आदेश इस अधिधनयम क े उपबंिों क े अनुसार ऐसे करेगा मानो इस अधिधनयम क े अिीन िांच पर उसका समािान हो गया है धक धकशोर ने र्वह अपराि धकया है: [परंतु बोडा धकसी ऐसे उपयुक्त और धर्वशेष कारण से िो आदेश में र्वधणात धकया िाए, मामले का पुनधर्वालोकन कर सक े गा और ऐसे धकशोर क े धहत में उपयुक्त आदेश पाररत कर सक े गा । स्पष्टीकरण-धकसी न्यायालय में धर्वधि का उल्लंघन करने र्वाले धकशोर से संबंधित सभी लंधबत मामलों में धिनक े अंतगात धर्वचारण, पुनरीक्षण, अपील या कोई अन्य दांधडक कायार्वाधहयां भी हैं, ऐसे धकशोर की धकशोरार्वस्र्था का अर्विारण िारा 2 क े खंड (ठ) क े धनबन्धनानुसार धकया िाएगा भले ही धकशोर इस अधिधनयम क े प्रारंभ की तारीख को या उससे पहले धकशोर न रहा हो और इस अधिधनयम क े उपबंि ऐसे लागू होंगे मानो उक्त उपबंि सभी प्रयोिनों क े धलए और सभी ताण्डिक समयों पर प्रर्वतान में र्थे िब ऐसा अधभकधर्थत अपराि धकया गया र्था ।]”
30. यह स्पि है धक धकशोर क े मामले की िांच गुण-दोष क े आिार पर की िानी है। यधद यह पाया िाता है धक धकशोर कधर्थत अपराि का दोषी है तो उसे दंधडत धकए धबना नहीं छोडा िा सकता। हालांधक, कानून क े अनुसार, उसे दी िाने र्वाली सिा धकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिधनयम, 2000 क े अन्तगात गधठत धकशोर न्याय बोडा पर छोड दी िानी चाधहए। यह धकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिधनयम, 2000 की िारा 20 द्वारा स्पि रूप से अपेधक्षत है। दू सरे शब्ों में अधिनी क ु मार सक्सेना (2012) 9 एससीसी 750 का अनुसरण धकया िाना चाधहए।
23. न्यायमूधता र्ी.एस. ठाक ु र ने न्यायमूधता लोक ु र द्वारा धलए गए दृधिकोण से सहमधत िताते हुए, अपने पूरक राय में भी मामले क े इस पहलू पर धर्वचार धकया और ररपोर्ा क े पैरा 82 में यह धर्वचार र्था धक िहां तक सिा का संबंि है, इस न्यायालय द्वारा इसकी िांच की िा सकती है। हालांधक, सिा क े धहस्से पर, 2000 अधिधनयम क े तहत स्वीकाया लाभ बढ़ाया िाना चाधहए। “82. उपयुाक्त को सार्विानीपूर्वाक पढ़ने से यह पता चलता है धक यद्यधप कोई व्यण्डक्त धकसी भी स्तर पर और धकसी भी न्यायालय क े समक्ष धकशोर होने का दार्वा कर सकता है, ऐसे न्यायालय द्वारा अपराि धकए िाने की तारीख को व्यण्डक्त को धकशोर पाया िाने पर, उधचत आदेश पाररत करने क े धलए धकशोर को बोडा को भेिना होगा और यधद कोई दंड पाररत धकया िाता है तो उसे प्रभार्वी नहीं माना िाएगा। यह सुझार्व देने र्वाला कोई प्रार्विान नहीं है धक धिस न्यायालय क े समक्ष धकशोर होने का दार्वा धकया गया है, र्वह दोषधसण्डद्ध को इस आिार पर अपास्त करे धक अपराि धकए िाने की धतधर्थ को र्वह धकशोर र्था, और इसधलए सामान्य फौिदारी न्यायालय द्वारा धर्वचारणीय नहीं है।"एक बात की अधभव्यण्डक्त दुसरे का अपर्विान है " क े धसद्धांत को लागू करते हुए, यह अधभधनिााररत करना तक ा संगत होगा धक यह मानना उधचत होगा धक िहां तक कानून की मंशा बोडा को संदधभात करने की है, धनधहतार्था रूप से अिीनस्र्थ न्यायालय द्वारा उद् घोधषत दोषधसण्डद्ध को न्यायालय द्वारा अपास्त करने क े धकसी र्वैिाधनक आशय को बाररत करता है । ऐसा प्रतीत होता है धक संसद धकशोर को दी गई कारार्वास की सिा को धनरस्त करने और धर्वशेष रूप से कहे धबना या धनधहतार्था संबंधित न्यायालय से दोषधसण्डद्ध को बदलने या धनरस्त करने की अपेक्षा करते हुए बोडा को धनदेश करने में संतुि र्थी। शायद यही कारण है धक इस न्यायालय ने अनेक फ ै सलों में संबंधित न्यायालय में दिा दोषधसण्डद्ध में हस्तक्षेप धकए धबना धकशोर को धदए गए दि को रद्द धकया है और इस तरह अधिधनयम की िारा 7-ए (2) क े शासनादेश का पालन धकया है।“
24. महेश बनाम रािस्थान राज्य और अन्य 6 क े मामले में इस न्यायालय की युगल पीठ द्वारा भी समान मत व्यक्त धकया गया र्था, धिसमें इस न्यायालय ने दोषधसण्डद्ध की पुधि की र्थी।हालांधक, सिा को भुगती गयी सिा क े अनुरूप रूपांतररत कर धदया गया र्था। उपरोक्त धनणाय धितेंद्र (ऊपर) क े मामले में धनिााररत कानून पर धनभार करता है। इस धर्वषय को धर्वर्वाद धबंदु बनाने क े पश्चात् धक क्या धर्वचारण न्यायालय द्वारा अधभधलण्डखत दोषधसण्डद्ध की र्वैिता/शुद्धता को बनाए रखा िा सकता है, इस न्यायालय ने धनणाय क े पैरा ४, ५ और ६ में यर्थोधचत धर्वचार धकया ।धफर पीठ ने दोषधसण्डद्ध क े गुणार्वगुण पर धर्वचार धकया और ररपोर्ा क े पैराग्राफ संख्या 7 में इसे बरकरार रखा। ररपोर्ा क े पैराग्राफ संख्या 4 से 7 नीचे पुन: प्रस्तुत धकए गए हैं: “4. उपयुाक्त तथ्ों में, हमारे समक्ष र्वतामान अपीलों में अर्विारण क े धलए दो प्रश्न उठते हैं। पहला, धर्वचारण न्यायालय द्वारा अधभधलण्डखत और हाईकोर्ा द्वारा पुधि की गई दोषधसण्डद्ध की र्वैिता/शुद्धता क े संबंि में है और दू सरा, यधद दोषधसण्डद्ध को बनाए रखा िाना है तो दंड का उधचत उपाय क्या होना चाधहए और क्या इस न्यायालय या मामले द्वारा इसे 2000 अधिधनयम की िारा 20 क े अनुसार धकशोर न्यायािीश को प्रधतप्रेधषत धकया िाना चाधहए।
5. इस संबंि में धर्वधि की ण्डस्र्थधत क ु छ हद तक अण्डस्र्थर है िैसा धक इस न्यायालय द्वारा धितेंद्र धसंह उपनाम बब्बू धसंह और एक अन्य धर्वरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य में नोधर्स धकया गया है और धनपर्ाया गया है, धिसमें पैराग्राफ 24 से 27 तक चार श्रेधणयों क े मामलों को रखा गया है िहां इस न्यायालय द्वारा स्पि रूप से अलग-अलग दृधिकोण अपनाया गया र्था। शुद्ध पररणाम उपयुाक्त ररपोर्ा क े पैराग्राफ 28 में धनष्कधषात धकया गया है, धिसमें उक्त ररपोर्ा क े पूर्वागामी पैराग्राफ्स में धकए गए र्वगीकरण क े धर्वर्वरण समझा धदए गए हैं। इसधलए, उक्त ररपोर्ा क े पैराग्राफ 28 क े धलए एक धर्वधशि दृधिक्षेप की आर्वश्यकता होगी और इसे नीचे पुनैः प्रस्तुत धकया गया हैैः "28.उपयुाक्त चचाा का सारति यह है धक मामलों क े एक समूह में इस न्यायालय ने धकशोर को उसक े द्वारा धकए गए कधर्थत अपराि का दोषी पाया है, परन्तु उसे र्वस्तुतैः धबना दंड क े छोडा गया क्योंधक न्यायालय द्वारा दिादेश ख़ाररि कर धदया गया र्था।“ मामलों क े दू सरे समूह में, इस न्यायालय ने मामले क े तथ्ों पर धर्वचार कर कहा धक धनरोि में धबतायी गयी अर्वधि क े द्वारा धकशोर को उसक े द्वारा धकए गए अपराि क े धलए पयााप्त रूप से दंधडत धकया गया है । तीसरे समूह क े मामलों में, इस न्यायालय ने पूरे मामले को धकशोर की बेगुनाही या अपराि और धकशोर दोषी पाए िाने पर दी िाने र्वाली सिा दोनों पर धर्वचार करने क े धलए धकशोर न्याय बोडा को भेि धदया है।चौर्थे समूह क न्यायालय ने गुणार्वगुण क े आिार पर मामले में िांच की और धकशोर को अपराि का अपरािी पाए िाने क े बाद, दंड धदए िाने हेतू मामले को क्षेत्राधिकार र्वाले धकशोर न्यायालय को र्वापस भेिा है।
6. लगभग दो दशक पहले हुई घर्ना क े संबंि में दोषधसण्डद्ध की र्वैिता, हमारे सुधर्वचाररत धर्वचार से, इन अपीलों में धर्वधनधश्चत की िानी चाधहए और धदए गए दंड/दंडादेश सधहत पूरी कायार्वाही में क े र्वल इस आिार पर हस्तक्षेप नहीं धकया िाना चाधहए धक अधभयुक्त अपीलकताा कधर्थत अपराि धकए िाने की तारीख को धकशोर र्थे।न्याधयक दृधिकोण हमेशा यर्थार्थार्वादी होना चाधहए और िमीनी र्वास्तधर्वकताओं से क ु छ संबंि होना चाधहए।इसधलए, हम उन संभाधर्वत दृधिकोणों में से एक को अपनाते हैं िो इस न्यायालय द्वारा पूर्वा में उण्डल्लण्डखत चार श्रेधणयों क े मामलों में आईपीसी क े तहत आरोपी अपीलकतााओं की दोषधसण्डद्ध की शुद्धता की िांच करने क े धलए अपनाया गया है ।
7. इस संबंि में, अधभलेख पर उपलब्ध सामग्री का अर्वलोकन करने क े बाद, हमें कोई भी आिार उपलब्ध नहीं है धिसक े आिार पर धर्वचारण न्यायालय द्वारा अधभधलण्डखत और उच्च न्यायालय द्वारा पुधित दृधिकोण से धभन्न कोई मत प्रकर् धकया िा सक े । तद् नुसार िारा 323, 324, 325,427,455 सहपधठत िारा 149 भा.दं.सं. क े अन्तगात आरोपी अपीलाधर्थायों की दोषधसण्डद्ध की पुधि िाएगी.”
25. त्यदेि उपनाम भूरे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क े मामले में धितेंद्र धसंह (उपरोक्त ) में धनिााररत अनुपात और कानूनी ण्डस्र्थधत का पालन करते हुए, इस न्यायालय ने दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा और अपीलकताा को धदए गए आिीर्वन कारार्वास क े दि को रद्द कर, यह धनदेधशत गया धक िेल अधिकारी सात धदनों क े भीतर िेिेबी क े समक्ष अपीलकताा को पेश करेंगे, और धफर, िेिेबी उसमें अपीलकताा क े संबंि में धहरासत और अधभरक्षा क े संबंि में उधचत आदेश पाररत करेगा।
26. हम रािू बनाम हररयाणा राज्य में धदए गए इस न्यायालय क े धनणाय का उल्लेख करते है, धिसमें न्यायमूधता मोहन एम. शांतनागौदर ने अपनी ओर से, न्यायमूधता एन. र्वी. रमण (िो र्वह उस समय र्थे) और न्यायमूधता इंधदरा बनिी ने अपीलकताा की दोषधसण्डद्ध और दि को रद्द कर धदया और क्योंधक उसमें अपीलकताा पहले से ही लगभग छह साल का कारार्वास कार् चुका र्था, लेधकन िमानत पर ररहा कर धदया गया र्था, िमानत उन्मोधचत कर धदए गए र्थे और अपीलकताा क े ण्डखलाफ सभी कायार्वाधहयों को समाप्त घोधषत कर धदया गया र्था।
27. उपयुाक्त मामले में, अपीलकताा ने धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष धकशोर होने का अधभर्वाक नहीं धकया र्था, तर्थाधप, ऐसा अधभर्वाक उच्च न्यायालय क े समक्ष उठाया गया र्था धक ं तु उसे नामंिूर कर धदया गया र्था।हालांधक, इस न्यायालय ने इस न्यायालय क े रधिस्ट्रार (न्याधयक) द्वारा एक िांच कराई, धिसने उसे 18 र्वषा से कम आयु का पाया।इस मामले में धनणाय मुख्य रूप से इस बात पर अर्वलण्डित है धक क्या इस न्यायालय क े रधिस्ट्रार (न्याधयक) की ररपोर्ा को उच्च े धनष्कषा से बढ़कर स्वीकार धकया िा सकता है िो धभन्न मत का र्था । धनणाय इस मुद्दे क े धनराकरण हेतू अग्रसर होता है और अंत में इस धनष्कषा पर आता है धक,यह धकया िा सकता है बशते यह न्यायालय स्वयं रधिस्ट्रार (न्याधयक) की ररपोर्ा की यर्थार्थाता का परीक्षण करे। यह क े र्वल अंधतम पैराग्राफ संख्या 27 में है, िबधक अपील स्वीकार करते हुए उसने दोषधसण्डद्ध, दंड को रद्द करने की राहत प्रदान की और आगे पूरी कायार्वाही को समाप्त कर धदया । इस मुद्दे पर कोई पूर्वा चचाा नहीं की गई है धक क्या इस तकनीकी आिार पर दोषधसण्डद्ध को अपास्त करने की आर्वश्यकता र्थी या नहीं।दोषधसण्डद्ध क े गुणार्वगुणों पर धर्वचार नहीं धकया गया र्था ।इस मुद्दे पर उक्त मामले में कोई अनुपात धनिााररत नहीं धकया गया है।क े र्वल राहत देते समय दोषधसण्डद्ध को भी रद्द कर धदया गया है।
28. रािू (पूर्वोक्त) क े मामले में उपरोक्त धनणाय क े अनुसरण में, इस न्यायालय की युगलपीठ ने अशोक क ु मार मेहरा और अन्य बनाम पंिाब राज्य और अन्य क े मामले में अपीलकताा संख्या 2 की दोषधसण्डद्ध और दि क े फ ै सले को रद्द कर धदया, धिसने धकशोर होने का दार्वा धकया र्था।उक्त धनणाय का पैरा सं. 14, िो राहत प्रदान करता है, यहां पुनैः प्रस्तुत धकया गया हैैः "उपयुाक्त चचाा को ध्यान में रखते हुए, हमारी यह सुधर्वचाररत राय है धक चूाँधक अपीलकताा 2 अपराि क े धकए िाने की तारीख पर धकशोर र्था और िबधक र्वह आि धदनांक तक पहले से ही आंधशक रूप से एक धर्वचारािीन क ै दी और आंधशक रूप से एक दोषी क े रूप में पयााप्त िेल की सिा कार् चुका है, धफर भी अपीलकताा २ द्वारा दायर अपील को,मामले क े गुण-दोष में िाए धबना और इस संबंि में कोई अन्य पाररणाधमक आदेश पाररत धकए धबना स्वीकार धकया िाना चाधहए ।"
29. यह उल्लेख करना उधचत होगा धक इस धनणाय में भी इस मुद्दे क े संबंि में कोई चचाा नहीं की गई है धक क्या दोषधसण्डद्ध को अपास्त धकया िाना चाधहए। इस धनणाय में ऐसा कोई अनुपात भी धनिााररत नहीं धकया गया है धक यधद एक धकशोर क े संबंि में एक सत्र न्यायालय द्वारा,िहााँ आरोपी द्वारा नाबाधलग होने का दार्वा नहीं धकया गया है, मुकदमा चलाया गया है, तो दोषधसण्डद्ध को कानून में दू धषत होने क े कारण रद्द धकया िा सकता है,यधद बाद में यह माना िाता है धक आरोपी धकशोर र्था।
30. उपयुाक्त धनणाय धकशोर न्याय अधिधनयम, 1986 या 2000 क े अन्तगात आने र्वाले अपराि से संबंधित हैं।अब हम 2015 क े तहत प्रार्विानों पर संक्षेप में चचाा करने क े धलए आगे बढ़ते हैं। 2015 क े अधिधनयम की िारा 9 को इस फ ै सले में पहले ही पुन: प्रस्तुत धकया गया है । 2015 क े अधिधनयम की िारा 9 की उपिारा (3) क े अनुसार, र्वह न्यायालय, िो यह पाता है धक अपराि करने र्वाला व्यण्डक्त इस तरह का अपराि करने की तारीख पर एक बालक र्था, उस बालक को उधचत आदेश पाररत करने क े धलए िेिेबी क े पास भेिेगा और न्यायालय द्वारा पाररत दंड, यधद कोई हो, का कोई प्रभार्व नहीं समझा िाएगा। यह धर्वधनधदाि रूप से या यहां तक धक धर्वर्वधक्षत रूप से भी यह उपबंि नहीं करता है धक धकसी न्यायालय द्वारा धकसी ऐसे व्यण्डक्त क े संबंि में अधभधलण्डखत दोषधसण्डद्ध, िो मामले क े धनपर्ान क े पश्चात् धकशोर या बच्चा पाया गया है, भी अपना प्रभार्व खो देगी, बण्डि यह क े र्वल दंडादेश है,यधद न्यायालय द्वारा पाररत हो, धिसका कोई प्रभार्व नहीं समझा िाएगा।
31. एक और कारण है धक क्यों सेशन न्यायालय द्वारा धकए गए धर्वचारण और अधभधलण्डखत दोषधसण्डद्ध को धर्वधि में दू धषत नहीं माना िाएगा, यद्यधप पश्चािती प्रक्रम में, धर्वचारण धकए गए व्यण्डक्त को बालक अधभधनिााररत धकया गया है।
32. धर्विाधयका का आशय ऐसे व्यण्डक्त को लाभ देना र्था धिसे अपराि की तारीख को क े र्वल उसक े दंडादेश भाग क े संबंि में बालक घोधषत धकया गया है। यधद दोषधसण्डद्ध को भी अप्रभार्वी बनाया िाना र्था तो या तो धनयधमत सेशन न्यायालय की अधिकार क्षेत्र को न क े र्वल 2015 अधिधनयम की िारा 9 क े अन्तगात बण्डि 2015 अधिधनयम की िारा 25 क े अन्तगात भी पूरी तरह से अपर्वधिात कर धदया गया होता। इसक े बिाय, 2015 अधिधनयम की िारा 25 क े अन्तगात, यह स्पि रूप से प्रार्विान धकया गया है धक 2015 अधिधनयम क े लागू होने की तारीख को धकसी बोडा या न्यायालय क े समक्ष लंधबत कोई भी कायार्वाही उस बोडा या न्यायालय में िारी रखी िाएगी, मानो यह अधिधनयम अधिधनयधमत नहीं धकया गया र्था। िारा 25 को यहां पुनैः प्रस्तुत धकया गया हैैः
25. लंजबत मामलों क े बारे में जिशेष उपबंध— इस अधिधनयम में अंतधर्वाि धकसी बात क े होते हुए भी धर्वधि का उल्लंघन करने र्वाला अधभकधर्थत या धर्वधि का उल्लंघन करते हुए पाए गए धकसी बालक क े बारे में इस अधिधनयम क े प्रारंभ की तारीख को धकसी बोडा या े समक्ष लंधबत सभी कायार्वाधहयां उस बोडा या न्यायालय में र्वैसे ही िारी रहेंगी मानो यह अधिधनयम अधिधनयधमत नहीं धकया गया है।
33. 2015 अधिधनयम की िारा 9 में अधभकधर्थत कानूनी प्रार्विानों और 2000 अधिधनयम की िारा 7(ए), िो 2015 काया की िारा 9 क े सदृश है, को ध्यान में रखकर हमारा यह मत है धक दोषधसण्डद्ध क े गुणार्वगुण का परीक्षण धकया िा सकता है और िो दोषधसण्डद्ध अधभधलण्डखत की गई र्थी, उसे क े र्वल इस कारण धर्वधि में दू धषत नहीं धकया िा सकता धक िांच िेिेबी द्वारा नहीं की गई र्थी। यह क े र्वल दि का प्रश्न है धिसक े धलए 2015 अधिधनयम क े प्रार्विानों को आकधषात धकया िाएगा और 2015 अधिधनयम क े तहत िो क ु छ भी स्वीकाया है, उससे अधिक धकसी भी दि को 2015 अधिधनयम क े अनुसार संशोधित धकया िाना होगा। अन्यर्था धिस आरोपी ने एक िघन्य अपराि धकया है और धिसने धर्वचारण न्यायालय क े समक्ष नाबाधलग होने का दार्वा नहीं धकया है, उसे मुक्त होने की अनुमधत दी िाएगी । यह भी 2015 क े अंतगात धनधहत उद्देश्य र्व आशय नहीं है। २०१५ अधिधनयम का उद्देश्य,िो धक धकशोर क े अधिकार और स्वतंत्रता से संव्यर्वहृत है,धसफ ा यह है धक न्यूनतम दंडादेश देकर और २०१५ अधिधनयम में पररभाधषत धकसी संस्र्थान में ठहरने क े दौरान कानून का उल्लंघन करने र्वाले धकशोर क े क ु शल -क्षेमार्था अन्य सुधर्विाओं हेतू धनदेधशत कर उसे मुख्य िारा में लाना सुधनधश्चत धकया िा सक े ।
34. उपरोक्त चचाा और पूर्वोक्त धनणायों द्वारा अधभकधर्थत धर्वधि की ण्डस्र्थधत और उपयुाक्त धनणायों में उण्डल्लण्डखत कई अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए, हम इस न्यायालय द्वारा जितेंद्र ज ंह (उपरोक्त ), महेश (उपरोक्त ) और त्यदेि (उपरोक्त ) क े मामले में धलए गए दृधिकोण का अनुमोदन करते हैं।
35. उपरोक्त सभी कारणों से, यह धनम्नधलण्डखत रूप में आदेश धदया िाता है धक: अपीलकताा की दोषधसण्डद्ध को बरकरार रखा िाता है, हालांधक, सिा को रद्द धकया िाता है। आगे यह भी धक, चूंधक अपीलकताा र्वतामान में 20 साल से अधिक का होगा, इसधलए उसे िेिेबी या धकसी अन्य बाल देखभाल सुधर्विा या संस्र्थान में भेिने की कोई आर्वश्यकता नहीं होगी.अपीलकताा न्याधयक अधभरक्षा में है। उसे तत्काल ररहा धकया िाय।आक्षेधपत धनणाय पूर्वोक्त सीमा तक उपान्तररत माना िाएगा। 36 दोनों अपीलों को आंधशक रूप से स्वीकार धकया िाता है।
37. लंधबत आर्वेदन, यधद कोई हो, धनराक ृ त धकये िाते है। ……………………………… न्यायमूधता [बी. आर. गर्वई] न्यायमूधता [धर्वक्रम नार्थ] न्यायमूधता [संिय करोल] नई धदल्ली। 03 माचा, 2023. प्रत्याख्यान:- " स्र्थानीय भाषा में अनुर्वाधदत न्यायधनणाय मात्र पक्षकारों को उनकी भाषा में समझने पयान्त ही सीधमत है एर्वं धकसी अन्य उद्देश्य हेतु उपयोगार्था नहीं है। सभी व्यार्वहाररक एर्वं कायाालयीन उद्देश्यों हेतु, न्यायधनणाय क े आंग्लभाषा संस्करण को ही प्रामाधणक माना िार्वेगा तर्था धन्ादन एर्वं धक्रयान्वयन हेतु प्रभार्वी माना िार्वेगा। "