Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 5937 वर्ष% 2011
व्यापार कर आयुक्त .....अपीलार्थी/(गण)
बनाम
मैसस% क
ु मार पेंट्स और विमल स्टोर द्वारा प्रोपराइटर ..... प्रत्यर्थी/ (गण)
क
े सार्थी
दीवानी अपील संख्या 5938 वर्ष% 2011
दीवानी अपील संख्या 5939 वर्ष% 2011
विनण%य
न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट
JUDGMENT
1. इन सभी अपीलों में सिEस प्रश्न का विनवेदन विकया गया है, वह उच्च न्यायालय क े दृविKकोण की सत्य ा है विक व %मान मामले में उत्पाद सिEस प्रविMया से गुEरा - यानी, विवभिभन्न रंगों क े सार्थी बेस पेंट का विमश्रण-एक 'नया' उत्पाद नहीं र्थीा, और इसलिलए उत्तर प्रदेश व्यापार कर अति विनयम, 1948 ("अति विनयम") की ारा 2 (ई) (आई) क े ह परिरभाविर्ष 'विनमा%ण' की प्रविMया का परिरणाम नहीं र्थीा। अस्वीकरण: “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब^ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Eा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेEी संस्करण प्रामाभिणक माना Eाएगा र्थीा विनष्पादन और विMयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
2. अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी इन सभी मामलों में थ्य यह है विक विन ा%रिर ी पेंट क े व्यापारी हो े हैं। राEस्व ने क % विदया विक रंगों की विबMी Eो विमश्रण (डी. टी. एस. मशीन की सहाय ा से एक कम्प्यूटरीक ृ प्रविMया क े माध्यम से) से गुEरी र्थीी 'विनमा%ण' क े बराबर र्थीी, सिEसक े परिरणामस्वरूप एक नया उत्पाद हुआ, Eो करा ान की एक नई घटना र्थीी। दूसरी ओर विन ा%रिर ी ने क % विदया विक प्रति विमश्रण 'विनमा%ण' क े बराबर नहीं है, और स्र्थीाविप सिसद्धां ों क े अनुप्रयोग पर, इस प्रविMया से कोई नया पहचानने योग्य उत्पाद या वस् ु सामने नहीं आई है।यह अभिभलेख में है विक बेस पेंट और कलरेंट दोनों पर अलग-अलग कर लगाया Eा ा है।
3. उच्च न्यायालय ने विपछली बार विन ा%रिर ी की दलीलों को स्वीकार विकया र्थीा और कहा र्थीा विक यह प्रविMया 'विनमा%ण' क े बराबर नहीं है। क ु छ मामलों में राEस्व की अपील पर, इस न्यायालय ने विवशेर्षज्ञ की राय को ध्यान में रख े हुए मामले को नए सिसरे से विवचार क े लिलए भेE विदया र्थीा। प्रविMया का अवलोकन विकया गया और हरकोट% बटलर कनीकी विवश्वविवद्यालय, कानपुर द्वारा रिरपोट% 20.01.2004 विदनांविक Eारी की गई। उक्त रिरपोट% में यह कहा गया हैः- “इसलिलए, "पॉइंट ऑफ़ सेल" टिंटटिंटग सिसस्टम में उपयोग विकया Eाने वाला बेस पेंट, वांभिछ शेड या रंग प्राप्त करने क े लिलए विकसी भी रंग को Eोड़ने क े बावEूद एक पेंट है। यह पेंट क े रूप में है और इसमें बुविनयादी सामग्री और विवशेर्ष ाएँ हैं। टिंटटिंटग कोई नया या अलग उत्पाद नहीं बना ा है।बेस पेंट का उपयोग पेंट क े रूप में भी विकया Eा सक ा है।"
4. आक्षेविप आदेश में, उच्च न्यायालय ने महाराK्र राज्य बनाम महालक्ष्मी स्टोर (2003) 1 एस. सी. सी. 70 मामले में इस न्यायालय क े एक विनण%य को नोविटस अस्वीकरण: करने क े बाद अव ारिर विकया विक व %मान मामले में शाविमल प्रविMया 'विनमा%ण' क े बराबर नहीं है। उच्च न्यायालय ने सोनभद्र फ्यूल्स बनाम आयुक्त व्यापार कर, उत्तर प्रदेश, लखनऊ (2006) 7 एस. सी. सी. 322 मामले में भी विनण%य को स्पK विकया। इसलिलए, उच्च न्यायालय ने उसक े समक्ष दायर संशो नों की अनुमति दी।
5. राEस्व ने विनवेदन विकया विक आक्षेविप आदेश में विनष्कर्ष% गल हैं, और यह क % देने क े लिलए सोनभद्र फ्यूल्स (उपरोक्त) पर अवलम्ब लिलया विक उच्च न्यायालय इस न्यायालय क े विनण%य से बाध्य र्थीा क्योंविक यह सी े उसी अति विनयम में 'विनमा%ण' अभिभव्यविक्त की व्याख्या पर र्थीा। सोनभद्र फ्यूल्स मामले में, न्यायालय ने विवचार विकया र्थीा विक क्या कोयले की ई ं टें 'कोयले' क े सामान्य विववरण क े सार्थी आ ी हैं। इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक इस प्रविMया में विमक्स विकये हुए कोयले को वि„क े टिंटग प्रेस में अच्छी रह दबाकर और उपयुक्त रीक े से बाँ कर विमलाया Eा ा र्थीा, सिEससे विनयविम आकार क े वि„क े ट को उपयुक्त रूप से काब%नीक ृ विकया Eा ा र्थीा।इस प्रविMया को 'विनमा%ण' क े बराबर माना Eा ा र्थीा।
6. अति विनयम क े ह 'विनमा%ण' की परिरभार्षा इस प्रकार हैः- "2 (ई-1) 'विवविनमा%ण' का अर्थी% है विकसी भी वस् ु का उत्पादन, विनमा%ण, खनन, संग्रह, विनष्कर्ष%ण, परिरव %न, अलंकरण, परिरष्करण या अन्यर्थीा प्रसंस्करण, उपचार या अनुक ू लन करना; लेविकन इसमें ऐसी विवविनमा%ण या विवविनमा%ण प्रविMयाएं शाविमल नहीं हैं Eो विन ा%रिर की Eाएं।"
7. महालक्ष्मी स्टोर (उपरोक्त) मामले में इस न्यायालय द्वारा विदये गये विपछले विनण%य Eैसे विक विबMी कर आयुक्त बनाम विपयो फ ू ड पैकस% (1980) सप्लीमेंट्री अस्वीकरण: एससीसी 174, और चौगुले एंड क ं पनी (पी) लिलविमटेड बनाम यूविनयन ऑफ इंतिडया (1981) 1 एससीसी 653 पर अवलम्ब लिलया है विक विनमा%ण प्रविMया अलग-अलग हो सक ी है, और हर प्रकार की विवविव ा क े उत्पादन की प्रविMया, या माल की विफविनशिंशग, क़ानून में विनविह 'विनमा%ण' की श्रेणी में नहीं आएगी, Eब क विक इसक े परिरणामस्वरूप एक नई वाभिणज्यिज्यक वस् ु का उदय न हो।
8. सोनभद्र मामले में, इस न्यायालय ने अपने समक्ष मामले क े थ्यों का फ ै सला कर े हुए 'विनमा%ण' क े संदभ% में विदए गए बड़ी संख्या में विनण%यों का हवाला विदया। इस अदाल ने विवशेर्ष रूप से यूविनयन ऑफ इंतिडया वी विदल्ली क्लॉर्थी एंड Eनरल विमल्स (1963) सप्लीमेंट्री 1 एससीआर 586 में अव ारिर विकया विक 'विनमा%ण' का म लब एक 'नया' पदार्थी% बनाना है और इसका म लब क े वल पदार्थी% में कु छ बदलाव लाना नहीं है। महालक्ष्मी स्टोर मामले में, यह अव ारिर विकया गया र्थीा विक माल का प्रसंस्करण या परिरव %न/परिरष्करण स्वयं विनमा%ण क े बराबर नहीं होगा Eब क विक इसक े परिरणामस्वरूप एक नई वाभिणज्यिज्यक वस् ु सामने ना आये। एज्यिस्पनवॉल एंड क ं पनी लिलविमटेड बनाम आयकर आयुक्त, एना%क ु लम (2001) 7 एस. सी. सी. 525 में विनण%य इसी सिसद्धां का पालन कर ा है।न्यायालय ने अव ारिर विकया विक विनमा%ण को आम बोलचाल की भार्षा में समझा Eाना चाविहए और इसका म लब कच्चे या ैयार माल से उपयोग क े लिलए वस् ुओं को रूप, गुण या संयोEन देकर उत्पादन करना है। हालांविक, महत्वपूण% रूप से यह अव ारिर विकया गया र्थीा विक यविद वस् ु में विकए गए परिरव %न क े परिरणामस्वरूप 'नया' और 'अलग' वस् ु हो ा है, ो यह 'विनमा%ण' क े सम ुल्य होगा।इसलिलए विनणा%यक टिंबदु यह है विक प्रविMया का परिरणाम ('विनमा%ण' क े बराबर) एक व्यावसातियक रूप से पहचाने Eाने योग्य नई वस् ु का उद्भव होना चाविहए, न विक क े वल मौEूदा वस् ु क े परिरव %न से। अस्वीकरण:
9. व %मान मामले में, विवशेर्षज्ञ क े साक्ष्य क े आ ार पर विनष्कर्ष% यह है विक बेस पेंट को एक संयोEक क े रूप में रंग क े सार्थी विमलाया गया र्थीा। इन दोनों पर कर लग ा र्थीा। परिरणामी वस् ु यानी एक अलग प्रकार का रंग, एक नए वाभिणज्यिज्यक उत्पाद में परिरणाम नहीं दे ा है।आम बोलचाल में, नया उत्पाद 'पेंट' क े अलावा और क ु छ नहीं र्थीा, और एक अलग वस् ु नहीं र्थीा।
10. इस न्यायालय की राय में, इन परिरज्यिस्र्थीति यों में उच्च न्यायालय ने त्रुविट नहीं की।इसलिलए अपीलें विवफल हो ी हैं और खारिरE की Eा ी हैं।लंविब आवेदन, यविद कोई हों, का विनस् ारण कर विदया Eाएगा। लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा। ………………………………….. [न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट] ………………………………….. [न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता] नई विदल्ली 02 माच%, 2023 अस्वीकरण: