Satrichit Kumar Singh v. Jharkhand State

Supreme Court of India · 28 Apr 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Letters Patent Appeal Nos. 2793-98 of 2023
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court remanded the recruitment examination objections for fresh consideration with expert opinion, holding that delayed objections and uniform errors do not automatically bar relief but must be examined on merits.

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पत्रिकाओंमें छपने योग्य नहीं
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
त्रसत्रर्वल अपीलीय क्षेिात्रिकार
त्रसत्रर्वल अपील सं. 2793-98/2023
सत्रचत कु मार त्रसंह र्व अन्य… आत्रि आत्रि। ... अपीलकताागण
बनाम
झारखंड राज्य और अन्य… आत्रि आत्रि।
…प्रत्रतर्वािीगण
त्रनणाय
एम.आर. शाह, न्याया.
JUDGMENT

1. मूल ररट याचिकाकर्ाा- पुचलस उप-चिरीक्षक पद के चलए आवेदिकरिुके अभ्यचथायों िे संबंचिर्लेटर पेटेंटअपीलों (एलपीए) में झारखंड उच्ि न्यायालय, रांिी की खंडपीठ द्वारा पाररर् उस आक्षेचपर् सामान्य चिर्ाय और आदेश से व्यचथर् और असंर्ुष्ट होकर यह अपील दायर की है, चिसमें उच्ि न्यायालय की खंडपीठ िे चवद्वाि एकल न्यायािीश द्वारा पाररर् सामान्य चिर्ाय और आदेश में हस्र्क्षेप िहीं करर्े हुए उिकी अपीलों को खाररि कर चदया है।

2. उत्तरदार्ा - झारखंड कमािारी ियि आयोग (आयोग) के द्वारा चवज्ञापि संख्या 09/2017 िारी करके पात्र अभ्यचथायों से सीचमर् प्रचर्योचगर्ा परीक्षा के माध्यम से पुचलस उप चिरीक्षक के पद पर चियुचि के चलए आवेदि आमंचत्रर् चकए गए थे। मूल चवभाग से प्राप्त मांग-पत्र के आिार पर 1544 पद चवज्ञाचपर् चकए गए थे, चिसपर आयोग को 3350 आवेदि प्राप्त हुए। इि अपीलकर्ााओं सचहर् कुल 3219 अभ्यथी परीक्षा में शाचमल हुए। अभ्यचथायों को चलचखर् परीक्षा पास करिे के चलए दोिों पेपरों(पेपर-2और पेपर-3 मेंअलग-अलग)न्यूिर्म 45% अंक और कुल चमलाकर 50% अंक प्राप्त करिा अचिवाया था। अिुसूचिर् िाचर्/अिुसूचिर् िििाचर् के अभ्यचथायों को न्यूिर्म अंकों में पांि प्रचर्शर् की छूट दी गई थी। परीक्षा ओएमआर आिार पर हुई थी। परीक्षा में शाचमल कुल 3219 अभ्यचथायों में से केवल 663 अभ्यथी चलचखर् परीक्षा में न्यूिर्म अंक प्राप्त कर सके । मूल ररट याचिकाकर्ााओं (यहां अपीलकर्ाा) सचहर् शेष अभ्यथी न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त िहीं कर पािे के कारर् अपात्र घोचषर् चकए गए। 399 अभ्यथी सफल घोचषर् चकए गए। र्थाचप, उसके बाद आयोचिर् शारीररक एवं चिचकत्सीय िांि के आिार पर केवल 396 अभ्यथी ही अिुशंसा के पात्र पाये गये और चियुि चकए गए। 2.[1] मूल ररट याचिकाकर्ााओंिे, िो न्यूिर्म योग्यर्ा अंक प्राप्त करिे में एक या दो अंकों से चपछड़ गए थे, चदिांक 01.12.2017, 06.01.2018 और 08.01.2018 को अभ्यावेदि चकया और मूल उत्तरों के चखलाफ आपचत्तयां उठाई ं। उिके अिुसार, िौ प्रश्नों के मूल उत्तर गलर् थे। उसके बाद, इि मूल ररट याचिकाकर्ााओंिे उच्ि न्यायालय के समक्ष ररट याचिकाएँ दायर कीं चक उन्हें उचिर् राहर् दी िाए या उि प्रश्नों को रद्द करिे का चिदेश चदया िाए, िो पाठ्यक्रम से बाहर थे और/या चििके मूल उत्तर गलर् थे। उन्होंिे चवशेषज्ञ की राय प्राप्त करिे की भी प्राथािा की। ररट याचिकाओंका अन्य बार्ों के साथ-साथ इस आिार पर चवरोि चकया गया चक उन्होंिे आयोग द्वारा चििााररर् समय के भीर्र यािी 01.12.2017 से 08.12.2017 र्क कोई आपचत्त िहीं िर्ाई गई ं। यह भी कहा गया चक यचद यह स्वीकार कर भी लें चक उि प्रश्नों के सभी उत्तर गलर् छपे हैं, र्ो भी वे उत्तर सभी अभ्यचथायों के चलए समाि रूप से गलर् हैं, इसचलए, मूल ररट याचिकाकर्ााओं/ अपीलकर्ााओं के प्रचर् कोई भेदभाव िहीं चकया गया है। चवद्वाि एकल न्यायािीश िे ररट याचिकाओं को खाररि कर चदया। 2.[2] ररट याचिकाओं को खाररि करिे वाले चवद्वाि एकल न्यायािीश द्वारा पाररर् सामान्य चिर्ाय और आदेश से व्यचथर्औरअसंर्ुष्टअपीलकर्ााओंिेउच्िन्यायालयकी खंडपीठ के समक्ष वर्ामाि लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) दायर की। आक्षेचपर् सामान्य चिर्ाय और आदेश द्वारा, उच्ि न्यायालय की खंडपीठ िे मुख्य रूप से इस आिार पर अपीलों को खाररि कर चदया है चक 01.12.2017 से 08.12.2017 की अवचि के बीि कोई आपचत्त िहीं उठाई गई थी चिसके भीर्र अभ्यचथायों को आपचत्तयां, (यचद कोई हों) दिा करिा आवश्यक था। और इसचलए, चवशेषज्ञ की राय प्राप्त करिे और/या पुिमूालयांकि के चलए उिकी प्राथािा को स्वीकारकरिे की आवश्यकर्ा िहीं है।उच्ि न्यायालय की खंडपीठ िे यह भी कहा चक भले ही उत्तरों में कुछ चवसंगचर् हो, परंर्ु ऐसी चवसंगचर् सभी अभ्यचथायों के चलए है और इसचलए, मूल ररट याचिकाकर्ााओं के प्रचर् कोई भेदभाव िहीं मािा िाएगा। उच्ि न्यायालय की खंडपीठ िे यह भी कहा चक यचद ररट याचिकाकर्ााओं/ अपीलकर्ााओं के चलए ऐसे प्रश्नों के अंक िोड़े भी िार्े हैं, र्ो वही अंक अन्य अभ्यचथायों को भी चदए िाएंगे और इस प्रकार, आि र्क की उिकी चस्थचर् में कोई पररवर्ाि िहीं होगा। िूंचक वे सभी अंचर्म ियचिर् अभ्यथी से एक या दो अंक से चपछड़ गए थे और यचद एक या दो अंक उन्हें चदए िाएंगे र्ो वही सफल अभ्यचथायों को भी प्रदाि चकए िाएंगे। इस प्रकार, सफल अभ्यचथायों की र्ुलिा में अपीलकर्ााओंकी चस्थचर् वही रहेगी। 2.[3] उच्ि न्यायालय द्वारा लेटर पेटेंट अपीलों को खाररि करके पाररर् सामान्य चिर्ाय और आदेश से व्यचथर् और असंर्ुष्ट होकर मूल ररट याचिकाकर्ााओं िे वर्ामाि अपीलें दायर की हैं।

3. श्री गोपाल शंकरिारायर्ि, चवद्वाि वररष्ठ अचिविा अपीलकर्ााओं (मूल ररट याचिकाकर्ाा) की ओर से उपचस्थर्हुएहैंऔरश्री अचिल के.झा,चवद्वाि अचिवक्र्ा, झारखंड कमािारी ियि आयोग की ओर से उपचस्थर् हुए हैं और श्री ियंर् मोहि, चवद्वाि अचिविा, राज्य की ओर से उपचस्थर् हुए हैं।

4. श्री गोपाल शंकरिारायर्ि, चवद्वाि वररष्ठ अचिविा िे मूल ररट याचिकाकर्ााओं/अपीलकर्ााओंकी ओर से उपचस्थर् होकर चिवेदि चकया है चक िूंचक पहला अभ्यावेदि मूल ररट याचिकाकर्ााओंद्वारा 01.12.2017 को ही चकया गया था िो आपचत्तयां प्रस्र्ुर् करिे की समय सीमा के भीर्र ही था, इसचलए उच्ि न्यायालय िे इस आिार पर मूल ररट याचिकाकर्ााओं को शाचमल ि करके वास्र्चवक रूप में त्रुचट की है चक आपचत्तयां उठािे के चलए चििााररर् समय के भीर्र आपचत्तयां िहीं उठाई गई ं। 4.[1] यह भी चिवेदि चकया गया है चक उच्ि न्यायालय िे भी इस चबंदु पर भी वास्र्चवक िूक की है चक यचद ऐसे प्रश्नों के अंक िोड़े भी िाएं, र्ो ये अंक सभी अभ्यचथायों के चलए िोड़े िाएंगे और इसचलए, मूल ररट याचिकाकर्ााओं को कोई अंर्र िहीं पड़ेगा। वास्र्व में, मूल ररट याचिकाकर्ाा केवल इसी आिार पर पात्र िहीं पाए गए चक वे न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त िहीं कर सके। िूंचक संबंचिर् मूल ररट याचिकाकर्ाा न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त करिे में केवल एक या दो अंकों से चपछड़ गए थे, अर्ः यचद केवल उि प्रश्नों के अंक िोड़ चलए गए होर्े, चििके उत्तर गलर् पाए गए थे, र्ो मूल ररटयाचिकाकर्ाान्यूिर्म अहाकअंकप्राप्तकर लेर्े और र्ब, आगे की चियुचि प्रचक्रया में उिकी उम्मीदवारी पर चविार चकया गया होर्ा। उन्होंिे आगे चिवेदि चकया है चक इसचलए, उच्ि न्यायालय िे यह कहिे में भी वास्र्चवक रूप से त्रुचट की है चक अपीलकर्ााओंको ऐसे प्रश्नों के अंक िोड़े िािे से भी कोई फायदा िहीं होगा। 4.[2] अपीलकर्ााओं की ओर से उपचस्थर् चवद्वाि वररष्ठ अचिविा द्वारा यह भी प्रस्र्ुर् चकया गया है चक चवज्ञाचपर् 1544 पदों में से केवल 396 चियुचियां की गई थीं और शेष पद ररि रह गए थे।

5. वर्ामाि अपीलों का चवरोि करर्े हुए, आयोग एवं राज्य की ओर से पेश हुए चवद्वाि अचिविा िे िोरदार ढंग से र्का चदयाहैचक मूल ररटयाचिकाकर्ाा न्यूिर्म अहाकअंकप्राप्त करिे में चवफल रहेऔर इसचलए, वे अपात्र पाए गए। उन्होंिे कहा चक िूंचक मूल ररट याचिकाकर्ााओं िे आपचत्तयां उठािे के चलए चििााररर् अवचि के बाद आपचत्तयां प्रस्र्ुर् कीं और इसचलए, उच्ि न्यायालय िे मूल ररट याचिकाकर्ााओंको राहर् िहीं दी, यह उचिर् ही है। 5.[1] आगे चिवेदि चकया गया है चक उच्ि न्यायालय िे ठीक ही कहा है चक भले ही कुछ प्रश्नों के उत्तर में कुछ चवसंगचर्यां थीं, परंर्ु वे चवसंगचर्यां सभी अभ्यचथायों पर समाि रूप से लागू थीं और इसचलए, यचद ऐसे प्रश्नों के अंक िोड़े भी िार्े, र्ो भी मूल ररट याचिकाकर्ााओंको कोई लाभ िहीं होर्ा, क्योंचक अन्य ियचिर् अभ्यचथायों को भी उि िोड़े गए अंकों का लाभ चमलर्ा। 5.[2] उपरोि चिवेदि करर्े हुए, उन्होंिे वर्ामाि अपीलों को खाररि करिे की प्राथािा की है।

6. सबसे पहले इस बार् पर ध्याि चदया िािा आवश्यक है चक मूल ररट याचिकाकर्ााओं िे पुचलस उप-चिरीक्षक पद के चलए आवेदि चकया था। उिकी उम्मीदवारी पर आगे की चियुचि प्रचक्रया में केवल इसचलए चविार िहीं चकया गया चक वे न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त िहीं करिे के कारर् अपात्र हो गए थे। मूल ररट याचिकाकर्ााओंिे िौ प्रश्नों पर आपचत्त िर्ाई चक उि िौ प्रश्नों के उत्तर गलर् थे। उच्ि न्यायालय की खंडपीठ िे मुख्य रूप से गुर्-दोष के आिार पर आपचत्तयों पर चविार करिे से इिकार कर चदया है िूंचक आपचत्त प्रस्र्ुर् करिे की चििााररर् अवचि के बाद आपचत्तयां प्रस्र्ुर् की गई ंथीं। उच्ि न्यायालय िे कहा है चक आपचत्तयां 06.01.2018 और 08.01.2018 को दायर की गई थीं, िबचक मूल ररट याचिकाकर्ााओंका मामला यह है चक पहली आपचत्त 01.12.2017 को प्रस्र्ुर् की गई थी, चिसकी प्रचर् ररकॉडा (एसएलपी पेपर बुक के पृष्ठ 235) में रखी है। इसचलए, उच्ि न्यायालय को उि आपचत्तयों पर गुर्-दोष के आिार पर चविार करिा िाचहए था और चवशेषज्ञ की राय लेिे पर चविार करिा िाचहए था। उच्ि न्यायालय िे इस र्रह से बहुर् ज्यादा र्किीकी दृचष्टकोर् अपिाया हैऔर गुर्-दोष के आिार पर उि आपचत्तयों पर चविार करिे से इंकार कर चदया है। यहां ध्याि देिे की आवश्यकर्ा है चक भले ही आपचत्तयां 06.01.2018 और 08.01.2018 को उठाई गई ं, पर पररर्ाम की घोषर्ा की र्ारीख यािी 09.01.2018 से पहले ही उठाई गई ंथीं। इसचलए, उच्ि न्यायालय को गुर्/दोष के आिार पर आपचत्तयों पर चविार करिा िाचहए था और/या िौ प्रश्नों पर चवशेषज्ञ की राय लेिी िाचहए थी, चििके उत्तर मूल ररट याचिकाकर्ााओं के अिुसार गलर् थे। यचद सही उत्तरों और/या चिि िौ प्रश्नों के चलए आपचत्तयां उठाई गई थीं, उिके उत्तरों पर यचद चवशेषज्ञ की राय ली िार्ी र्ो सि सामिे आ िार्ा।

7. इर्िा ही िहीं, उच्ि न्यायालय िे यह कहिे में भी वास्र्चवक िूक की है चक मूल ररट याचिकाकर्ााओं को कोई लाभ िहीं होगा, भले ही ऐसे प्रश्नों के अंक िोड़ चदए िाएं, क्योंचक अन्य सफल अभ्यचथायों के भी अंक िोड़े िाएंगे। र्थाचप यहां ध्याि चदया िािा आवश्यक है चक िूंचक मूल ररट याचिकाकर्ाा केवल एक या दो अंकों से न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त करिे में चपछड़ गए। इसचलए, यचद कुछ अंक िोड़े गए होर्े र्ो वे न्यूिर्म अहाक अंक प्राप्त कर लेर्े और इस प्रकार वे आगे की चियुचि प्रचक्रया में चविार के पात्र रहे होर्े। अर्ः उच्ि न्यायालय का यह कहिा सही िहीं है चक मूल ररट याचिकाकर्ााओंपर कोई प्रचर्कूल प्रभाव िहीं पड़ेगा।

8. उच्ि न्यायालय िे गुर्-दोष के आिार पर आपचत्तयों पर चविार करिे से इंकार कर चदया है िूंचक आपचत्तयां प्रस्र्ुर् करिे के चलए चििााररर् अवचि के भीर्र आपचत्तयां िहीं उठाई गई ंऔर चवशेषज्ञ की राय लेिे से इिकार कर चदया है, इसचलए इस मामले को उच्ि न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष इि अपीलों पर गुर्-दोष के आिार पर िए चसरे से चविार करिे के चलए वापस भेिा िार्ा है। खंडपीठ उि प्रश्नों पर चवशेषज्ञ की राय ले सकेगी, चििके उत्तर गलर् होिे का आरोप लगाया गया था, और चििपर आपचत्तयां थीं। यचद अंर्र्ः यह पाया िार्ा है चक कुछ प्रश्नों के उत्तर गलर् थे र्ो अंक िोड़े िाएं र्ाचक वे चियुचि प्रचक्रया में चविार के पात्र हो सकें ।

9. उपरोि के मद्देििर और ऊपर बर्ाए गए कारर्ों से, वर्ामाि अपीलों में की गई प्राथािा आंचशक रूप से स्वीकार की िार्ी हैं। उच्ि न्यायालय द्वारा लेटसा पेटेंट अपीलों को खाररि करिे के आक्षेचपर् सामान्य चिर्ाय और आदेश को एर्दद्वारा चिरस्र् और अपास्र् चकया िार्ा है। कािूि के अिुसार, गुर्/दोषों के आिार पर और ऊपर की गई चटप्पचर्योंके आलोकमेंलेटसापेटेंटअपील परपुि: चिर्ाय चलए िािे के चलए मामलों को उच्ि न्यायालयकी खंडपीठ को वापस भेिा िार्ा है। वापस भेिे गए लेटसा पेटेंट अपीलों पर यथाशीघ्र चिर्ाय चलया िाए और प्राथचमक रूप से वर्ामाि आदेश की र्ारीख से र्ीि महीिे के भीर्र इस मामले चिपटाया िाए। िैसा चक ऊपर कहा गया है, उच्ि न्यायालय की खंडपीठ के पास यह चवकलप होगा चक उि प्रश्नों के संबंि में चवशेषज्ञ की राय मांगी िाए, चििके उत्तर गलर् होिे का आरोप लगाया गया था और आपचत्तयां उठाई गई थीं। र्थाचप इसे उच्ि न्यायालय के चववेक पर छोड़ा िार्ा है। र्दिुसार,वर्ामाि अपीलों में की गई प्राथािा वर्ामािआदेशके अिुसारस्वीकारकी िार्ी हैं। चबिा खिा के। …………………………………न्याया. [एम.आर. शाह] ………………………………… न्याया. [सी.टी. रचव कुमार] ियी चदलली; अप्रैल 28, 2023 अस्र्वीकरण: चहन्दी भाषा में अिूचदर् चिर्ाय का उपयोग इर्िा ही है चक वादी इसे अपिी भाषा में समझ सके। इसका उपयोग चकसी अन्य उद्देश्य के चलए िहीं चकया िा सकर्ा। सभी व्यावहाररक और आचिकाररक कायों में र्था चिष्पादि और कायाान्वयि के चलए उि चिर्ाय का अंग्रेिी संस्करर् ही मान्य होगा।