Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय अति कारिर ा
आपराति क अपील संख्या 1294/2023
(@ एसएलपी (आपराति क) संख्या 4394/2021)
बोहे ी देवी (मृ क) द्वारा विवति क प्रति वि.ति ... अपीलक ा0
ब.ाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। … प्रति वादी(गण)
सह
आपराति क अपील संख्या 1295/2023
(@एसएलपी (आपराति क) संख्या 7708/2021)
वि.ण0य
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. आपराति क प्रकीण0 रिरट यातिAका संख्या 7093/2019 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर उस आक्षेविप वि.ण0य और आदेश से व्यथिF और असं ुष्ट महसूस कर े हुए मूल रिरट यातिAकाक ा0.े व 0मा. अपील दायर की है, जिLसक े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा उच्च न्यायालय.े अपीलक ा0- मृ क सत्यवीर उर्फ 0 कल्लू की मां द्वारा दायर की गई उक्त रिरट यातिAका को खारिरL कर विदया Fा जिLसमें अपीलक ा0.े सतिAव (गृह), उत्तर प्रदेश राज्य, लख.ऊ द्वारा 13.02.2019 को पारिर आदेश को Aु.ौ ी दी Fा, जिLसक े ह उन्हों.े मुकदमा अपरा संख्या 1069/2014 में सीबीसीआईडी द्वारा आगे अन्वेषण कर.े का आदेश विदया Fा।
2. संक्षेप में व 0मा. अपील क े थ्य वि.म्.ा.ुसार हैंः- 2.[1] यह विक अपीलक ा0 क े पुत्र- सत्यवीर उर्फ 0 कल्लू की अज्ञा व्यविक्तयों द्वारा हत्या कर दी गई Fी। अपीलक ा0 क े दामाद संLीव.े श्रीम ी अंLू और दो अज्ञा व्यविक्तयों क े खिखलार्फ प्राFविमकी दL0 कराई Fी। पुखिलस वि.रीक्षक, बड़ौ, जिLला बागप द्वारा विववेA.ा की गई, जिLन्हों.े 01.03.2015 को दो व्यविक्तयों क े खिखलार्फ आरोप पत्र प्रस् ु विकया, जिLस पर 31.03.2015 को विवद्वा. मजिLस्ट्रेट द्वारा संज्ञा. खिलया गया Fा। उसक े बाद अपीलक ा0 क े परिरवाद/प्राF0.ा-पत्र पर, जिLला अपरा शाखा को विववेA.ा सौंप दी गई।अतिf.ी कु मार - यहां प्रति वादी संख्या 8 (इसमें प्रति वादी संख्या 9 का पुत्र) और श्रीम ी अंLू - यहां प्रति वादी संख्या 11 क े खिखलार्फ 02.12.2016 को एक पूरक आरोप पत्र दायर विकया गया Fा। विवद्वा. मजिLस्ट्रेट.े 21.12.2016 को इसका संज्ञा. खिलया। उसक े बाद, प्रति वादी संख्या 8 अFा0 ् अतिf.ी क ु मार.े मुकदमा अपरा संख्या 1069/2014 से उत्पन्न प्रकरण संख्या 7626/2016 की पूरी आपराति क काय0वाही को रद्द कर.े क े साF-साF 02.12.2006 विद.ांविक आरोप पत्र को रद्द कर.े क े खिलए उच्च न्यायालय क े समक्ष वि.रस् कर.े की यातिAका दायर की। उच्च न्यायालय.े 05.07.2017 को उक्त प्राF0.ा-पत्र को खारिरL कर विदया। 05.07.2017 क े आदेश से व्यथिF हो.े क े कारण, प्रति वादी संख्या 8- अतिf.ी क ु मार, विवशेष अ.ुमति यातिAका (आपराति क) संख्या 599/2017 क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA माध्यम से इस न्यायालय क े समक्ष आया, जिLसे इस न्यायालय.े 24.08.2018 को खारिरL कर विदया। इस न्यायालय.े विद.ांक 15.09.2017 क े आदेश द्वारा प्रति वादी संख्या 8 को दी गई अं रिरम सुरक्षा को भी समाप्त कर विदया। विवद्वा. मुख्य न्यातियक मजिLस्ट्रेट, बागप.े विद.ांक 08.09.2018 क े आदेश द्वारा प्रति वादी संख्या 8 क े खिखलार्फ गैर-Lमा. ी वारंट Lारी विकया। उसक े बाद और प्रति वादी संख्या 8 क े खिखलार्फ गैर Lमा. ीय वारंट Lारी विकए Lा.े क े बाद, आरोपी अतिf.ी क ु मार की मां.े सीबीसीआईडी को अन्वेषण(विववेA.ा) स्Fा.ां रिर कर.े क े खिलए उत्तर प्रदेश राज्य क े सतिAव (गृह) को विद.ांक 23.01.2019 को एक आवेद. विदया, अन्य बा ों क े साF- साF, इस आ ार पर विक प्रति वादी संख्या 8 को दो गवाहों क े बया.ों क े आ ार अथिभयुक्त ब.ाया गया है, Lो वास् व में Lेल में Fे और इसखिलए उ.क े बया.ों पर विवfास.हीं विकया Lा सक ा है। विद.ांक 13.02.2019 क े आदेश द्वारा, सतिAव (गृह) उ.प्र. राज्य, लख.ऊ.े सीबीसीआईडी द्वारा आगे क े अन्वेषण का आदेश विदया।सतिAव (गृह) द्वारा सीबीसीआईडी को अन्वेषण स्Fा.ां रिर कर.े क े आदेश को व 0मा. यातिAका क े माध्यम से उच्च न्यायालय क े समक्ष Aु.ौ ी दी गई Fी। आक्षेविप वि.ण0य और आदेश द्वारा उच्च न्यायालय.े रिरट यातिAका को यह कह े हुए खारिरL कर विदया है विक विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को सूतिA कर.े क े बाद आगे क े अन्वेषण(विववेA.ा) का आदेश विदया गया Fा और इसखिलए सतिAव (गृह) द्वारा आगे की विववेA.ा कर.े का वि.दmश दे.े वाले आदेश में कोई त्रुविट.हीं है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप वि.ण0य और आदेश व 0मा. अपील का विवषय है।
3. विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री विवभा दत्ता मखीLा, अपीलक ा0 की ओर से पेश हुई ं हैं और विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता श्री एस..ागामुFु और श्री रामेfर सिंसह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मखिलक, प्रति वादी संख्या 8 और 11 की ओर से पेश हुए हैं। हस् क्षेपक ा0 की ओर से विवद्वा. अति वक्ता श्री आ.ंद संLय एम..ूली पेश हुए हैं।
4. अपीलक ा0 की ओर से पेश विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री मखीLा.े बलपूव0क कहा है विक सतिAव (गृह) द्वारा सीबीसीआईडी को आगे की विववेA.ा हस् ां रिर कर.े का आदेश पूरी रह से अवै है और दंड प्रविqया संविह ा क े प्राव ा.ों क े विवपरी है। 4.[1] यह कहा गया है विक व 0मा. मामले में राज्य की विववेA.ा एLेंसी द्वारा गह. विववेA.ा क े बाद, प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ आरोप पत्र दायर विकया गया Fा। यह कहा गया है विक एक बार आरोप पत्र दायर विकए Lा.े क े बाद, एक आरोपी की मां क े कह.े पर, सतिAव (गृह) को आगे की विववेA.ा को हस् ां रिर.हीं कर सक े Fे। 4.[2] यह बलपूव0क कहा गया है विक सतिAव (गृह) द्वारा विववेA.ा क े स्Fा.ां रण का ऐसा आदेश और वह भी एक अथिभयुक्त की मां क े कह.े पर, विवति क े विवपरी है और यह विबल्क ु ल भी स्वीकाय0.हीं है। 4.[3] विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री मखीLा द्वारा आगे कहा गया है विक वास् व में जिL. आ ारों पर विववेA.ा को अं रिर कर.े की मांग की गई Fी, उन्हें अथिभयुक्त की ओर से बAाव कहा Lा सक ा है जिL. पर विवAारण क े समय विवAार विकया Lा.ा अपेतिक्ष है। यह कहा गया है विक इस प्रकार सीबीसीआईडी को विववेA.ा क े हस् ां रण का आदेश पारिर करक े और सीबीसीआईडी द्वारा बाद में की गई विववेA.ा वास् व में उ. अथिभयुक्तों को बरी कर दे ी है, जिL.क े खिखलार्फ पूरक आरोप पत्र में आरोप पत्र दायर विकया गया है और यह प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ आरोप पत्र को वि.रस् कर.े क े बराबर होगा, Lो इस रह से स्वीकाय0.हीं है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 4.[4] अपीलक ा0 की ओर से पेश विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री मखीLा द्वारा यह कहा गया है विक वास् व में यह आगे की विववेA.ा का मामला.हीं है, बल्किल्क यह पु.ःविववेA.ा का मामला है और इसखिलए पु.ःविववेA.ा क े खिलए मजिLस्ट्रेट की पूव0 स्वीक ृ ति आवश्यक है। यह कहा गया है विक व 0मा. मामले में, सतिAव (गृह).े पहले एक वि.ण0य खिलया और विववेA.ा को सीबीसीआईडी को स्Fा.ां रिर कर.े क े खिलए आदेश पारिर विकया और उसक े बाद, विववेAक.े क े वल विववेA.ा(अन्वेषण) क े हस् ां रण क े बारे में विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को सूतिA विकया, जिLसे का.ू. द्वारा विवशेष रूप से सीआरपीसी की ारा 173 (8) द्वारा अपेतिक्ष सम्यक प्रविqया का पाल. कर.ा.हीं कहा Lा सक ा है। 4.[5] आगे यह कहा गया है विक थ्यों पर भी, उच्च न्यायालय.े यह म व्यक्त कर े हुए वस् ु ः गल ी की है विक विववेA.ा का वि.देश दे.े वाला आदेश संबंति मजिLस्ट्रेट की सहमति से पारिर विकया गया Fा। यह कहा गया है विक प्रति वादी संख्या 8 क े विवद्वा. अति वक्ता भी उच्च न्यायालय क े समक्ष यह क 0 दे.े में गल Fे विक सतिAव (गृह) द्वारा पारिर विववेA.ा का आदेश, ऐसा कर.े क े खिलए सक्षम मजिLस्ट्रेट की अ.ुमति ले.े क े बाद पारिर विकया गया Fा। यह क 0 विदया गया है विक ऐसा क ु छ भी अथिभलेख पर.हीं है विक विवद्वा. मजिLस्ट्रेट द्वारा कोई अ.ुमति मांगी गई Fी और मंLूर की गई Fी। यह कहा गया है विक Lो कु छ भी अथिभलेख पर है वह क े वल विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को सूतिA कर.ा है और इससे अति क क ु छ.हीं है। 4.[6] यह भी कहा गया है विक उच्च न्यायालय.े इस थ्य को उतिA रूप से.हीं समझा और विवAार.हीं विकया है विक प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ 02.12.2016 विद.ांविक पूरक आरोप-पत्र क े अ.ुसार आरोप-पत्र दायर विकया गया Fा, जिLसका विवद्वा. मजिLस्ट्रेट.े 21.12.2016 को संज्ञा. खिलया Fा और उसक े बाद, प्रति वादी संख्या 8.े आरोपपत्र सविह पूरी आपराति क काय0वाही Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को रद्द कर.े की प्राF0.ा की और प्रति वादी संख्या 8 इस अदाल में विवर्फल रहा और उसक े बाद ही, Lब गैर-Lमा. ी वारंट Lारी विकया गया, ो उसकी ओर से विववेA.ा क े हस् ां रण क े खिलए एक आवेद. विदया गया। यह प्रस् ु विकया गया है विक एक बार आरोप पत्र दायर विकया गया और यहां क विक रद्द कर.े की यातिAका भी इस न्यायालय द्वारा खारिरL कर दी गई Fी, ो उसक े बाद अथिभयुक्त या उसकी ओर से आगे का अन्वेषण/पु.ःअन्वेषण का कोई आवेद. दे.े का कोई विवकल्प.हीं Fा। 4.[7] पूव क्त क 0 रख े हुए, व 0मा. अपील को अ.ुमति प्रदा. कर.े और सतिAव (गृह) द्वारा अन्वेषण को सीबीसीआईडी को स्Fा.ां रिर कर.े क े आदेश को अथिभखंड. कर.े और अपास् कर.े का अ.ुरो विकया गया है।
5. व 0मा. अपील का विवरो कर े हुए, राज्य की ओर से पेश हुए विवद्वा. एएLी श्री अ mन्दमौली क ु मार प्रसाद.े Lोरदार ढंग से कहा है विक इस बा से सं ुष्ट हो.े क े बाद विक आगे क े अन्वेषण का मामला ब. ा है और अथिभयुक्त सविह सभी पक्षों क े साF पूण0 न्याय कर.े क े खिलए आगे अन्वेषण की आवश्यक ा है, सतिAव (गृह) द्वारा सीबीसीआईडी द्वारा आगे अन्वेषण का आदेश दे.े में कोई त्रुविट.हीं की गई है। यह कहा गया है विक सतिAव (गृह) द्वारा विवभाग क े प्रमुख हो.े क े.ा े पारिर आदेश प्रशासवि.क आ ार पर Fा और उसक े बाद, संबंति विववेAक.े विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को अन्वेषण क े हस् ां रण/आगे क े अन्वेषण क े बारे में सूतिA विकया Lो का.ू. क े ह अपेतिक्ष है। 5.[1] व 0मा. अपील का विवरो कर े हुए, प्रति वादी संख्या 8 और 11 की ओर से पेश विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ताओं श्री एस..ागामुFु और श्री रामेfर सिंसह मखिलक.े Lोरदार रीक े से कहा है विक वि.ष्पक्ष अन्वेषण अथिभयुक्त और पीविड़ का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति कार है। यह कहा गया है विक दंड प्रविqया संविह ा की ारा 173(8) विववेAक को उस मामले का आगे अन्वेषण कर.े की अ.ुमति दे ी है जिLसक े खिलए विवद्वा. मजिLस्ट्रेट की अ.ुमति की आवश्यक ा.हीं है। यह कहा गया है विक दंड प्रविqया संविह ा ारा 173(8) क े ह, विववेAक को आगे अन्वेषण का अति कार है। आंध्र प्रदेश राज्य ब.ाम ए.एस. पीटर (2008) 2 एससीसी 383 (प्रस् र 9) क े मामले में इस न्यायालय क े र्फ ै सले पर अवलम्ब खिलया गया है। 5.[2] यह कहा गया है विक Lैसा विक राम लाल.ारंग ब.ाम राज्य (विदल्ली प्रशास.) (1979) 2 एससीसी 322 क े मामले में देखा और अथिभवि. ा0रिर विकया गया है, अथिभयोL. और बAाव पक्ष दो.ों क े विह में, पुखिलस को आगे अन्वेषण कर.े और एक पूरक रिरपोट0 प्रस् ु कर.े की शविक्त हो.ी Aाविहए। 5.[3] अथिभयुक्त की ओर से विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा आगे यह कहा गया है विक व 0मा. मामले में भी, जिLला अपरा शाखा (संबंति पुखिलस Fा.े क े विववेAक क े अलावा) द्वारा आगे अन्वेषण विकया गया Fा, Lो अपीलक ा0 क े प्राF0.ा- पत्र/परिरवाद पर विकया गया Fा और पूरक आरोप-पत्र क े अ.ुसार प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ आरोप-पत्र दायर विकया गया। यह कहा गया है विक उसक े बाद, Lब अथिभयुक्त की मां क े आवेद. पर सीबीसीआईडी द्वारा आगे अन्वेषण का आदेश विदया गया है, ो अपीलक ा0 क े खिलए यह थिशकाय कर.े की अ.ुमति.हीं है विक विकसी अन्य एLेंसी- सीबीसीआईडी द्वारा आगे अन्वेषण कर.े का आदेश.हीं विदया Lा सक ा है। 5.[4] अथिभयुक्त की ओर से पेश विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा आगे यह कहा गया है विक दंड प्रविqया संविह ा की ारा 158 सपवि| 173(3) क े अ.ुसार भी, विकसी अन्य एLेन्सी द्वारा अन्वेषण अ.ुज्ञेय है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 5.[5] प्रति वादी संख्या 8 की ओर से पेश विवद्वा. वरिरष्ठ अति वक्ता श्री.ागमुFु द्वारा आगे यह कहा गया है विक यFा आदेथिश सीबीसीआईडी द्वारा अन्वेषण क े बाद, एक और रिरपोट0 विवद्वा. मजिLस्ट्रेट क े समक्ष प्रस् ु की Lाएगी और उसक े बाद, विवद्वा. मजिLस्ट्रेट क े समक्ष ी. रिरपोट} होंगी, एक AाL0शीट क े आ ार पर, दूसरा पूरक AाL0शीट क े आ ार पर और ीसरा सीबीसीआईडी द्वारा आगे अन्वेषण क े आ ार पर और उसक े बाद, अं ः रिरपोट~ पर मजिLस्ट्रेट को विवAार कर.ा है। यह कहा गया है विक इसखिलए ीसरी रिरपोट0 पर भी विवद्वा. मजिLस्ट्रेट द्वारा विवAार विकया Lाए और इसखिलए इस न्यायालय द्वारा आक्षेविप आदेश में हस् क्षेप.हीं विकया Lा सक ा है।
6. हम.े संबंति पक्षों की ओर से पेश हो.े वाले विवद्वा. अति वक्ताओं को विवस् ार से सु.ा। हम.े हस् क्षेपक ा0 की ओर से पेश विवद्वा. अति वक्ता श्री आ.ंद एस..ूली को भी सु.ा है।
7. शुरुआ में, यह ध्या. विदया Lा.ा आवश्यक है विक प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ आईपीसी की ारा 302 और 120-ख क े ह अपरा क े खिलए आरोप-पत्र दायर विकया गया है, जिLसका संज्ञा. विद.ांक 21.12.2016 को विवद्वा. मजिLस्ट्रेट द्वारा खिलया गया है। त्पश्चा प्रति वादी संख्या 8.े आरोप- पत्र/पूरक आरोप-पत्र सविह पूरी आपराति क काय0वाही को रद्द कर.े क े खिलए उच्च न्यायालय क े समक्ष वि.रस् कर.े की यातिAका दायर की। उच्च न्यायालय.े वि.रस् कर.े की यातिAका खारिरL कर दी। इसखिलए अथिभयुक्त.े उ. सभी बAावों को खिलया होगा Lो यातिAका को रद्द कर.े पर विवAार कर े समय उसक े खिलए उपलब् हो सक े Fे, जिLसमें वह आ ार भी शाविमल है जिLस पर अब विकसी अन्य एLेंसी, अFा0 ् सीबीसीआईडी द्वारा आगे क े अन्वेषण/पु.ः अन्वेषण कर.े का आदेश विदया गया है। यह ध्या. विदया Lा.ा आवश्यक है विक इसक े बाद, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रत्यF‚ संख्या 8.े इस न्यायालय का दरवाLा खटखटाया और विवशेष अ.ुमति यातिAका को इस न्यायालय द्वारा खारिरL कर विदया गया और प्रति वादी संख्या 8 क े पक्ष में अं रिरम संरक्षण समाप्त हो गया। उसक े बाद, प्रत्यF‚ संख्या 8 क े खिखलार्फ गैर-Lमा. ी वारंट Lारी विकया गया और उसक े बाद ही, प्रत्यF‚ संख्या 8- अथिभयुक्त की मां.े आगे क े खिलए सतिAव (गृह) क े समक्ष एक प्राF0.ा-पत्र विदया और उन्हों.े अन्य बा ों क े साF-साF इस आ ार पर अन्वेषण को सीबीसीआईडी को स्Fा.ां रिर कर विदया विक हत्या क े FाकथिF Aश्मदीद गवाह, Aश्मदीद गवाह.हीं Fे। अथिभयुक्त की मां क े अ.ुरो को सतिAव (गृह) द्वारा स्वीकार कर खिलया गया है और इस थ्य क े बावLूद विक प्रFम आरोप-पत्र क े बाद, विववेA.ा को आगे विववेA.ा क े खिलए जिLला अपरा शाखा को सौंप विदया गया Fा, विववेA.ा को दूसरी एLेंसी, अFा0 ्, सीबीसीआईडी को स्Fा.ां रिर कर विदया गया है और उन्हों.े पूरक आरोप-पत्र दाखिखल विकया जिLसमें प्रति वादी संख्या 8 और 11 क े खिखलार्फ भी आरोप-पत्र दाखिखल विकया गया Fा। इस प्रकार यह आगे की विववेA.ा का मामला.हीं है, बल्किल्क विकसी अन्य एLेंसी द्वारा विर्फर से विववेA.ा का मामला है। सतिAव (गृह) द्वारा अथिभयुक्त की मां द्वारा प्रस् ु आवेद./परिरवाद क े आ ार पर अन्वेषण को हस् ां रिर कर.े/विकसी अन्य एLेंसी द्वारा आगे की विववेA.ा का आदेश दे.े वाला आदेश का.ू.. सही.हीं है। 7.[1] इस बा पर कोई विववाद.हीं हो सक ा है विक आरोप-पत्र दाखिखल विकए Lा.े क े बाद भी यह विववेAक का अति कार है विक वह दंड प्रविqया संविह ा ारा 173 की उप ारा (2) क े अ ी. मजिLस्ट्रेट को अग्रेविष रिरपोट0 क े बाद भी अपरा क े संबं में आगे अन्वेषण करे और Lैसा विक इस न्यायालय द्वारा म व्यक्त विकया गया और अथिभवि. ा0रिर विकया गया है विक मजिLस्ट्रेट क े पूव0 अ.ुमोद. की आवश्यक ा.हीं है। Fाविप, विवति की स्Fाविप ल्किस्Fति क े अ.ुसार, Lहां Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क पु.ः अन्वेषण का संबं है, मजिLस्ट्रेट की पूव0 अ.ुमति /अ.ुमोद. अपेतिक्ष है। व 0मा. मामले में, सतिAव (गृह).े सीबीसीआईडी द्वारा आगे क े खिलए एक आदेश पारिर विकया है और उसक े बाद, सीबीसीआईडी.े विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को सूA.ा भेL दी है। Lैसा विक उच्च न्यायालय द्वारा पाया गया है, विवद्वा. मजिLस्ट्रेट द्वारा कोई पूव0 अ.ुमोद. /अ.ुमति.हीं दी गई है। उच्च न्यायालय.े आक्षेविप वि.ण0य और आदेश में कहा है विक आगे अन्वेषण कर.े का आदेश मजिLस्ट्रेट की सहमति से विदया गया है, Lो थ्यात्मक रूप से गल है। अथिभलेख पर क े वल यह है विक विवद्वा. मजिLस्ट्रेट को एक सूA.ा दी गयी, जिLसे विकसी भी रह से विवद्वा. मजिLस्ट्रेट की सहमति.हीं कहा Lा सक ा है। 7.[2] विकसी भी मामले में, Lैसा विक यह पु.ःअन्वेषण का मामला है, इसकी अ.ुमति.हीं है और वह भी विकसी अन्य एLेंसी द्वारा विवद्वा. मजिLस्ट्रेट की पूव0 अ.ुमति क े विब.ा, सीआरपीसी की ारा 173(8) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए भी.हीं है। का.ू. क े विकस प्राति कार क े ह, सतिAव (गृह).े अन्वेषण को विकसी अन्य एLेंसी को स्Fा.ां रिर कर विदया है और/या विकसी अन्य एLेंसी द्वारा आगे क े अन्वेषण का आदेश विदया है, यह.हीं ब ाया गया है और वह भी अथिभयुक्त क े कह.े पर, इस आ ार पर विक जिLसे अथिभयुक्त का बAाव कहा Lा सक ा है, जिLस पर सु.वाई क े समय विवAार विकए Lा.े की अपेक्षा हो ी है। अथिभयुक्त की ओर से यह कह.ा विक सतिAव (गृह) विवभाग का प्रमुख है और विकसी अन्य एLेंसी द्वारा आगे क े अन्वेषण का आदेश प्रशासवि.क आ ार पर विदया गया Fा और इसखिलए, सतिAव (गृह) द्वारा आगे क े अन्वेषण का आदेश दे.ा उतिA है, इस थ्य को स्वीकार.हीं विकया Lा सक ा है। Lहां क दंड प्रविqया संविह ा क े ह अन्वेषण का संबं है, संबंति पुखिलस Fा.े का पुखिलस अति कारी, Lो विववेAक है, को पुखिलस अ ीक्षक की देखरेख में मामले का अन्वेषण/आगे का अन्वेषण कर.ा होगा। Lहां क सतिAव (गृह) का संबं है, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वह इस परिरदृश्य में विबल्क ु ल भी.हीं आ े हैं। यविद ऐसे शविक्तयाँ सतिAव (गृह) को दी Lा ी हैं, ो उस ल्किस्Fति में, कोई भी अथिभयुक्त, जिLसक े खिखलार्फ पहले से ही आरोप पत्र विदया गया है, वह सतिAव (गृह) की शरण में Lा सक ा है और विकसी अन्य एLेंसी द्वारा आगे का अन्वेषण या पु.ःअन्वेषण का आदेश प्राप्त कर सक ा है और पहले क े आरोप पत्र को रद्द करवा े हुए.ई रिरपोट0 प्राप्त कर सक ा है और खुद को आरोपमुक्त करा सक ा है। यविद अथिभयुक्त आरोप -पत्र से व्यथिF है, ो उस ल्किस्Fति में उसक े पास यह उपAार उपलब् है विक वह या ो दंड प्रविqया संविह ा की ारा 482 क े अ ी. वि.रस् कर.े की यातिAका दाखिखल करे और/या विवद्वा. मजिLस्ट्रेट क े समक्ष उन्मोA. क े खिलए समुतिA आवेद. प्रस् ु करे और उच्च न्यायालय और/या विवद्वा. मजिLस्ट्रेट, Lैसा भी मामला हो, क े पास अति कार है विक वह आपराति क काय0वाही को रद्द करे या अथिभयुक्त को उन्मोतिA करे। सतिAव (गृह) और/या विकसी अथिभयुक्त, जिLसक े खिखलार्फ पहले से ही आरोप-पत्र दाखिखल विकया गया है, को ऐसे प्राव ा. को दरविक.ार कर.े की अ.ुमति.हीं दी Lा सक ी। यह ध्या. दे.े योग्य है विक व 0मा. मामले में, प्रत्यF‚ संख्या 8- अथिभयुक्त.े पहले वि.रस् कर.े की यातिAका दायर की Fी, लेविक. वह विवर्फल हो गया। 7.[3] अब, Lहां क दंड प्रविqया संविह ा की ारा 173(3) का अवलंब ले े हुए अथिभयुक्त की ओर से क 0 विदए Lा.े का संबं है, ारा यह उपबं कर ी है विक मजिLस्ट्रेट को रिरपोट0 क ै से प्रस् ु /भेLी Lाए और कौ. मजिLस्ट्रेट को रिरपोट0 भेLेगा। इसमें प्राव ा. विकया गया है विक Lहां ारा 158 क े ह का एक वरिरष्ठ पुखिलस अति कारी वि.युक्त विकया गया है, वहां रिरपोट0 उस अति कारी द्वारा प्रस् ु की Lाएगी और वह मजिLस्ट्रेट क े आदेश क े लंविब रह.े क े दौरा. पुखिलस Fा.े क े प्रभारी अति कारी को आगे का अन्वेषण कर.े का वि.दmश दे सक ा है। इसखिलए ारा 173(3) सपवि| ारा 158 सतिAव (गृह) को संबंति पुखिलस Fा.े क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रभारी अति कारी और/या उसक े वरिरष्ठ अति कारी क े अलावा विकसी अन्य एLेंसी द्वारा आगे क े अन्वेषण/पु.ः अन्वेषण का आदेश दे.े की अ.ुमति.हीं दे ी है।
8. उपरोक्त को ध्या. में रख े हुए और ऊपर ब ाए गए कारणों से, व 0मा. अपील सर्फल हो ी है।उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप वि.ण0य और आदेश को वि.रस् और अपास् विकया Lा ा है। परिरणामस्वरूप उच्च न्यायालय क े समक्ष आक्षेविप, सतिAव (गृह) द्वारा पारिर 13.02.2019 क े उस आदेश को ए द्द्वारा रद्द और अपास् विकया Lा ा है, जिLसक े द्वारा सतिAव (गृह), उत्तर प्रदेश राज्य, लख.ऊ.े मुकदमा अपरा संख्या 1069/2014 अन् ग0 ारा 302 और 120-ख आईपीसी Fा.ा बरौ जिLला बागप क े वाद को सीबीसीआईडी द्वारा पु.ःअन्वेषण कर.े का आदेश विदया Fा। परिरणाम ः सीबीसीआईडी द्वारा विकए गए आगे क े अन्वेषण/पु.ः अन्वेषण को भी वि.रस् और अपास् विकया Lा ा है। हालांविक यह पाया गया है विक सभी बAाव Lो अथिभयुक्तों क े पास उपलब् हो सक े हैं, विवAारण क े समय विवद्वा. विवAारण न्यायालय द्वारा विवAार विकए Lा.े हैं। द.ुसार व 0मा. अपील को अ.ुमति प्रदा. की Lा ी है। Lैसा विक हम.े मृ क की मां (अब मृ, द्वारा विवति क प्रति वि.ति ) द्वारा दायर एसएलपी (आपराति क) संख्या 4394/2021 से उत्पन्न दाल्किˆडक अपील को स्वीकार कर खिलया है, इसखिलए मूल अथिभयुक्त संख्या 6 और 7 द्वारा उ.क े खिखलार्फ Lारी गैर-Lमा. ी वारंट क े विवरूद्ध दायर एसएलपी (आपराति क) संख्या 7708/2021 से उत्पन्न दाल्किˆडक अपील खारिरL हो Lाएगी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA.......................................… [न्यायमूर्ति एम. आर. शाह].......................................… [न्यायमूर्ति सी. टी. रविवक ु मार].ई विदल्ली; 28 अप्रैल 2023.. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA