Vivek Kumar v. Ranbir Chaudhary

High Court of Punjab and Haryana · 28 Apr 2023 · 2023 INSC 462
M. R. Shah; C. T. Rivkumar
Civil Appeal Nos. 2514-2516 of 2023
2023 INSC 462
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The court upheld the High Court's grant of specific performance despite a contractual clause for double the advance amount, emphasizing readiness and willingness to perform as key to equitable relief.

Full Text
Translation output
रपोट करने यो य
भारत के सव यायालय म
िसिवल अपीलीय े ािधकार
िसिवल अपील सं या 2023 क 2514-2516
टी
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टी.डी
डी
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डी. िववेक कु मार और अ य .......अपीलकतागण
अपीलकतागण
अपीलकतागण
अपीलकतागण
बनाम
रणबीर चौधरी … ितवादीगण
िनणय
एम. आर. शाह, जे.
JUDGMENT

1. आरएसए सं या 596/2012 म समी ा आवेदन सं या 149-सी/2016 और ए सओबीजेसी -10 सी/2010 म चंडीगढ़ म पंजाब और ह रयाणा उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत िनणय और आदेश से िथत और असंतु महसूस करते ए, मूल ितवा दय ने वतमान अपील को ाथिमकता दी है।

2. वतमान अपील क ओर ले जाने वाले त य िन ानुसार ह:- - 2.[1] यह क 17,61,700/- पये के ितफल/कंसी ेशन के िलए गत वाद भूखंड क िब के िलए अपीलकता नंबर 2 (मूल ितवादी) के ितिनिध/मु तार के प म अपीलकता नंबर 1 और ितवादी (मूल वादी) के बीच एक "िब समझौता" कया गया था।िब िवलेख के िन पादन और पंजीकरण क ितिथ 18.09.2004 िनधा रत क गई थी। ितवादी ारा बयाना रािश के प म कुल 2 लाख पये का भुगतान कया गया था।उसके बाद, ितवादी - मूल वादी ने िब समझौते के तकमील मुहायदा बै और िनषेधा ा क प रणामी राहत ( पेिस फक परफॉरमस ऑफ़ सेल ए ीमट एंड कंसीकवे शल रलीफ ऑफ़ इ जं शन) क मांग करते ए, अित र िसिवल जज (सीिनयर िडवीजन), फरीदाबाद क अदालत म दीवानी मुकदमा दायर कया। यहां अपीला थय ारा वाद का इस आधार सिहत सभी आधार पर िवरोध कया गया क िब के समझौते के अनुसार और िब िवलेख को िन पा दत करने म ितवा दय क िवफलता पर भी, वादी अि म/पेशगी के प म दी गई रािश को दोगुना करने का हकदार होगा और इसिलए, वादी तकमील मुहायदा बै (िड फॉर पेिस फक परफॉरमस) के िलए िड का हकदार नह है। 2.[2] िव ान िवचारण यायालय ने िनणय और िड दनांक 16.01.2010 के ारा िब समझौते के तकमील मुहायदा बै (िड फॉर पेिस फक परफॉरमस) के िलए एक िड पा रत करने से इनकार कर दया, हालां क, 4 लाख पये क वसूली के िलए कये गए मुकदमे के संदभ म िड पा रत करते ए आदेश दया यानी वादी ारा अनुबंध/संिवदा यानी िब समझौते/िव य करार के अनुसार भुगतान क गई बयाना रािश का दोगुना। 2023 INSC 462 2.[3] थम अपीलीय यायालय ने अपील को खा रज कर दया।तकमील मुहायदा बै के िलए राहत देने से इनकार करते ए ( रफयू संग टू ांट दी रलीफ ऑफ़ पेिस फक परफॉरमस ऑफ़ सेल अ ीमट) ायल कोट ारा पा रत िनणय और िड और उस आदेश क थम अपीलीय यायालय ारा पुि कए जाने से िथत और असंतु महसूस करते ए, ितवादी - मूल वादी ने उ यायालय के सम ि तीय अपील को ाथिमकता दी।अपीलकता( ) ने िव ान िवचारण यायालय और थम अपीलीय यायालय ारा दज कए गए िन कष पर दूसरी अपील म भी ित आपि दायर क क वादी अनुबंध के अपने िह से को पूरा करने के िलए तैयार और इ छुक था। दनांक 27.07.2016 के आ ेिपत िनणय और आदेश ारा उ यायालय ने थम अपीलीय यायालय ारा पुि क गई िव त िवचारण यायालय के समवत िनणय को पलटते ए ि तीय अपील को अनुमित दान क और प रणाम व प, यह कहते ए तकमील मुहायदा बै के िलए राहत दी ( ांटड दी रलीफ ऑफ़ पेिस फक परफॉरमस ऑफ़ सेल अ ीमट) क य क वादी अनुबंध/संिवदा के अपने िह से का िन पादन करने के िलए तैयार और इ छुक था और इसिलए, वह पेिस फक परफॉरमस (तकमील मुहायदा बै) के िलए िड का हकदार है।उ यायालय ने या ेप ( ॉस ऑ जे शन), िजसे अपीलकता - मूल ितवा दय ारा वरीयता दी गयी थी, को खा रज कर दया। 2.[4] उ यायालय ारा ि तीय अपील क अनुमित देने और या ेप ( ॉस ऑ जे शन) को खा रज करने के दनांक 27.07.2016 के िनणय और आदेश से िथत होकर, अपीलकता ने इस यायालय के सम िवशेष अनुमित यािचका (सी) सं या 32215-32216/2016 दायर क । अपीलकता को उ यायालय के सम एक समी ा यािचका दायर करने के िलए पदावनत कया गया ( रेलगेटेड टू फाइल अ र ु पे टशन िबफोर दी हाई कोट) य क अपीलकता के अनुसार उ यायालय ने िब समझौते के ासंिगक खंड पर िवचार नह कया था, िजस पर िवचारण यायालय और थम अपीलीय यायालय ने िवचार कया था। 2.[5] उसके बाद, अपीलकता ने उ यायालय के सम वतमान समी ा आवेदन सं या 149/2016 दायर कया। आ ेिपत िनणय और आदेश ारा उ यायालय ने समी ा आवेदन को यह कहते ए खा रज कर दया क रकॉड म कोई ु ट प नह है और समी ा के िलए कोई आधार नह बनता है।इसिलए, वतमान अपील।

3. ी गु कृ ण कुमार, िव ान व र अिधव ा, ने अपीलकता - मूल ितवा दय क ओर से उपि थत होकर, जोरदार ढंग से तुत कया है क मामले के त य और प रि थितय म उ यायालय ने समी ा आवेदन को खा रज करने म ब त गंभीर ु ट क है, जो इस यायालय ारा आरि त वतं ता के अनुसरण म दायर क गई थी। यह तुत कया गया है क ि तीय अपील क अनुमित देते समय िब समझौते के ासंिगक खंड पर उ यायालय ारा िवचार नह कया गया था और कुछ त या मक ु टयां थ और यहां तक क या ेप ( ॉस ऑ जे शन) को िबना िवचार कए खा रज कर दया गया था; उ यायालय को समी ा आवेदन क अनुमित देनी चािहए थी और गुण-दोष के आधार पर संपूण अपील पर िवचार करना चािहए था। यह आगे तुत कया गया है क अ यथा भी उ यायालय ने िब समझौते के पेिस फक परफॉरमस (तकमील मुहायदा बै) के िलए िड पा रत करने म भौितक प से ु ट क है, िजसे िव ान िवचारण यायालय के साथ-साथ थम अपीलीय यायालय ने अ वीकार कर दया था। 3.[1] यह तुत कया गया है क ि तीय अपील क अनुमित देते ए भी उ यायालय ने िवशेष प से कानून के कसी भी मह वपूण /सारवान को िवरिचत नह कया/तैयार नह कया, िजसे िसिवल या संिहता क धारा 100 के अनुसार िवरिचत कया जाना अपेि त था। 3.[2] आगे यह भी तुत कया गया है क उ यायालय ने इस त य क ठीक से/ उिचत प से सराहना नह क है और इस त य पर िवचार नह कया है क िब समझौते के अनुसार भी य द थम प - अपीलकता िनधा रत समय के भीतर िब समझौते को िन पा दत करने म िवफल रहता है या इनकार करता है, तो िव ेता अि म/ पेशगी के प म दी गई रािश का दोगुना भुगतान करने के िलए उ रदायी होगा। यह तुत कया जाता है क इसिलए, यह मानते ए क िनधा रत समय के भीतर वादी के प म िब िवलेख िन पा दत करने म ितवादी( ) क ओर से िवफलता ई थी, वादी केवल अि म/पेशगी के प म दी गई रािश को दोगुना करने का/लेने का ही हकदार होगा।यह तुत कया जाता है क इसिलए, दोन िनचली अदालत ने िब समझौते के पेिस फक परफॉरमस (तकमील मुहायदा बै) के िलए िड पा रत करने से इनकार कर दया। 3.[3] उपरो तुितयाँ तुत करते ए और पी पी पी पी. िडसूजा बनाम श ि लो नायडू (2004) 6 एससीसी 649, के मामले म इस यायालय के फै सले के पैरा 31 पर भरोसा करते ए, यह ाथना क जाती है क वतमान अपील को वीकार कया जाए।

4. वतमान अपील का िवरोध करते ए, ी दया कृ ण शमा, ितवादी - मूल वादी क ओर से पेश होने वाले िव ान वक ल ने जोरदार ढंग से तुत कया है क वतमान मामले म नीचे क सभी अदालत ारा वादी ारा अनुबंध/संिवदा के अपने िह से को पूरा करने के िलए उसक त परता और इ छा पर समवत िन कष दज कए गए ह और यह ितवादीगण ही थे िज ह ने अनुबंध के अपने िह से को पूरा नह कया और िब िवलेख िन पा दत नह कया, हालां क वादी तैयार था और िब रािश का भुगतान करने को तैयार था। यह तुत कया जाता है क इसिलए, सभी िनचली अदालत ारा दज कए गए समवत िन कष को देखते ए, उ यायालय ने तकमील मुहायदा बै (िड फॉर पेिस फक परफॉरमस ऑफ़ दी सेल ए ीमट) के िलए एक िड पा रत करने म कोई ु ट नह क है। 4.[1] यह तुत कया जाता है क इसिलए, िव य करार के िविश काय िन पादन के िलए राहत मंजूर करते ए उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत िनणय और आदेश म इस यायालय ारा ह त ेप नह कया जा सकता है। पी पी पी पी. िडसूजा (सुपरा सुपरा सुपरा सुपरा ) के मामले म इस यायालय के िनणय पर भी भरोसा रखा गया है।

5. हमने संबंिधत प क ओर से पेश होने वाले िव ान अिधव ा को िव तार से सुना है।

6. शु आत म, यह यान देने क आव यकता है क संिवदा के अपने िह से का िन पादन करने के िलए वादी क त परता और इ छा पर सभी यायालय ारा नीचे दज त य के समवत िन कष ह, िज ह भारत के संिवधान के अनु छेद 136 के तहत शि य के योग म इस यायालय ारा ह त ेप करने क आव यकता नह है। हालां क, साथ ही, इस पर िवचार करने क आव यकता है क या मामले के त य और प रि थितय म, उ यायालय िव ान परी ण यायालय के साथ-साथ पहले अपीलीय यायालय के िब समझौते के िविश दशन के िलए िड पा रत करने से इनकार करने वाले िनणय को पलटने म उिचत है ? 6.[1] ारंभ म, यह यान देने क आव यकता है क दूसरी अपील को अनु ात करते ए और िव ान िवचारण यायालय तथा थम अपील यायालय के ारा पा रत िनणय ( ) और आदेश ( ) को उलट देते ए, उ यायालय ने िविध का सारवान िवरिचत नह कया है, िजसे सी. पी. सी. क धारा 100 के अधीन िवरिचत कया जाना अपेि त है। 6.[2] गुण-दोष के आधार पर भी िव य करार म िविश काय िन पादन के िलए िड पा रत करने म उ यायालय ने गलती क है िजसे िव ान िवचारण यायालय के साथ-साथ थम अपीलीय यायालय ने अ वीकार कर दया था। िब समझौते का ासंिगक खंड इस कार हैः - "2. य द दूसरा प िनधा रत समय के भीतर शेष रािश का भुगतान करने म िवफल रहता है, तो अि म ज त कर िलया जाएगा और य द पहला प खरीदार के प म या उसके नािमत ि के नाम पर िब िवलेख और अ य आव यक द तावेज को िनधा रत समय म िन पा दत करने म िवफल रहता है या इनकार करता है, तो िव ेता अि म के प म दी गई रािश का दोगुना भुगतान करने के िलए िज मेदार होगा।" 6.[3] इस कार, िव य करार के खंड 2 के अनुसार, य द ि तीय प िनधा रत समय के भीतर शेष रािश का भुगतान करने म िवफल रहता है, तो अि म ज त कर िलया जाएगा और य द िव ेता ेता के प म या अपने नामिनदिशितय के नाम पर िव य िवलेख और अ य आव यक द तावेज को िनधा रत समय के भीतर िन पा दत करने म िवफल रहता है या करने से इंकार करता है, तो िव ेता अि म के प म दी गई रािश का दोगुना भुगतान करने के िलए उ रदायी होगा। इसिलए, य द िव ेता िनधा रत समय के भीतर िव य िवलेख िन पा दत करने म िवफल रहता है, तो ेता अि म के प म दी गई रािश के दोगुने का हकदार होगा।यह िववा दत नह हो सकता है क वादी बेचने के समझौते का एक प होने के नाते िब समझौते म िनधा रत िनयम और शत से बंधा आ है। इसिलए, िव य समझौते के खंड 2 क सही ा या पर, िव ान िवचारण यायालय के साथ-साथ थम अपीलीय यायालय ने िव य समझौते के िविश पालन के िलए िड पा रत करने से उिचत प से इनकार कर दया और. 4 लाख क वसूली के िलए िड एक अि म के प म दी गई रािश से दोगुनी होने के कारण सही प से पा रत क, जो िव य समझौते के खंड 2 के अनु प थी। 6.[4] पी पी पी सुपरा ) के मामले म इस यायालय ारा एक समान पर िवचार कया गया और एम एम. एल एल एल एल. देव संह बनाम सैयद खाजा (1973) 2 एस एस. सी सी सी सी. सी सी सी सी. 515 के मामले म इस यायालय के पूव िनणय पर िवचार करने के बाद, इस यायालय ने यह मत कया और अिभिनधा रत कया क जहां नािमत रािश एक रािश है िजसका भुगतान उस ि के चुनाव म िजसके ारा धन का भुगतान कया जाना है या कया गया है, काय के दशन के िलए ित थािपत कया जा सकता है, वहां यायालय िविश काय िन पादन के िलए िड पा रत करने से इनकार कर सकता है। वतमान मामले म, शत िवशेष प से यह है क य द िव ेता िनधा रत समय के भीतर िब िवलेख को िन पा दत करने म िवफल रहता है तो ेता अि म के प म दी गई रािश का दोगुना लेने का हकदार होगा। इसिलए, रािश का िवशेष प से नाम दया गया है यानी, भुगतान क गई अि म रािश का दोगुना।य िप, उ यायालय ने पी पी पी सुपरा सुपरा सुपरा ) के मामले म िविन य पर भरोसा कया है, उपरो पहलू पर उ यायालय ारा िवचार नह कया गया है, िवशेष प से, पैरा ाफ 31 म क गई ट पिणय पर उसके सही प र े य म।

7. उपरो को यान म रखते ए, उ यायालय ने िव ान िवचारण यायालय के साथ-साथ थम अपीलीय यायालय के समवत िनणय को िविश दशन के िलए िड पा रत करने से इनकार करने और 4 लाख पये क वसूली के िलए िड पा रत करने म गलती क है जो भुगतान क गई अि म रािश का दोगुना है। इन प रि थितय म, उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत िनणय और आदेश टकाऊ नह है।

8. उपरो को यान म रखते ए और उपरो कारण से, दूसरी अपील म उ यायालय ारा पा रत िनणय और आदेश और पुन वलोकन आवेदन के अ वीकार होने पर उ प होने वाली वतमान अपील को अनुमित दी जाती है। नतीजतन, पुन वचार आवेदन म पा रत आदेश और िब समझौते के िविश दशन के िलए राहत देने वाली दूसरी अपील म उ यायालय ारा पा रत िनणय और आदेश को खा रज और र कया जाना चािहए और तदनुसार खा रज और र कया जाता है। नतीजतन, पहले अपीलीय यायालय ारा पुि कए गए िव ान ायल कोट ारा पा रत िनणय और िड को बहाल कया जाता है। ॉस ऑ जे शन के खा रज होने से उ प अपील का िनपटारा कर दया गया है।................................ जे. [एम. आर. शाह].................………...जे. [सी. टी. रिवकुमार] नई द ली; 28 अ ैल, 2023 vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m| s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA