Sumlata Sharma v. Arvinder Singh

Delhi High Court · 25 Apr 2023
Dinesh Maher; Sanjay Kumar
Civil Appeal No 3111/2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal, restoring the Rent Controller's eviction orders by holding that the petitioner failed to establish actual necessity and the High Court exceeded its limited jurisdiction under the Delhi Rent Control Act, 1958.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं या 3111/2023
( व.अनु.या. (िस) सं या 31549/2018 से उ ुत)

ु सुम लता शमा .....अपीलकता(गण)
बनाम
अर वंद िसंह ....... यथ (गण)

े साथ
िस वल अपील सं या 3112/2023
( व.अनु.या. (िस) सं या 31550/2018 से उ ुत)
िनणय
या. दनेश माहे र , अनुमित दान क गई
JUDGMENT

2. ये अपील दनांक 17.04.2018 क े समान आदेश क े खलाफ िनदिशत क जाती ह। जो मश: आर.सी. पु. सं या 78/2015 और आर.सी. पु. सं या 80/2015, म पा रत है जसक े तहत नई द ली म द ली उ च यायालय क े एक व ान एकल यायाधीश ने संबंिधत करायेदार ारा दायर पुनर ण यािचकाओं को अनुमित दे द है और उ र जला, रो हणी, द ली क े एसीजे/सीसीजे/एआरसी क यायालय ारा सं या 02/2011 और 03/2011 वाली िन कासन यािचकाओं म पा रत 21.11.2014 क े समान आदेश को उलट दया है। समान और सामा य मु से जुड़ इन अपील पर एक साथ वचार कया गया है और इस सामा य िनणय ारा िनपटान क े िलए िलया गया है।3

3. व ान कराया िनयं क ने दनांक 21.11.2014 क े इसी तरह क े आदेश म वतमान अपीलकता ारा संबंिधत करायेदार क े खलाफ दायर िन कासन यािचकाओं को उसक वा त वक आव यकता क े आधार पर वीकार कर िलया था। हालां क, दनांक 17.04.2018 क े आ े पत आदेश म, उ च यायालय ने कराया िनयं क क े फ ै सले को अिनवाय प से इस आधार पर उलट दया है क अपीलकता-मकान मािलक ने संबंिधत संप क े ववरण म प प से नह ं कहा था और संप म अपने बहनोई क प ी क े अिधकार, शीषक और हत से संबंिधत त य क े बारे म ामक तर क े से दलील द थीं और इस त य क े बारे म क इमारत का िनमाण एक सामा य अिधरचना क े प म सटे हुए दो भूखंड पर कया गया था। ।

4. उपरो म जस पर यान दया गया है, उन अपील म िनधारण क े िलए उठने वाला सं मु ा यह है क या उ च यायालय ने िन कासन क े संबंिधत आदेश को उलट दया है। इन दोन मामल से संबंिधत त या मक पहलू साधन म िन हत ह और िन नानुसार देखा जा सकता है:

4.1. सं या 02/2011 यािचका म, अपीलकता ने मांग क यथ - करायेदार को इस कथन क े साथ िन कािसत करना क यथ को उसक े पूववत ारा वष 1995 म 1200 पये ित माह क े कराए पर संप धारक क पहली मं जल पर एक कमरे म करायेदार क े प सं या सी -586, गली सं या 12, मजिलस पाक, द ली – 110033 म शािमल कया गया था। अपीलकता ने यह भी कहा क मुकदमा प रसर का वतमान मािसक कराया 2100 पये था, ले कन करायेदार ने 01.06.2010 से कराए का भुगतान नह ं कया था।

4.2. िन कासन क मांग करने वाली अपनी यािचकाओं म अपीलकता ारा संप का ववरण उसक ओर से प वा दता क कमी क े बारे म उ च यायालय क े कोण का आधार बना है। इसिलए, उस संबंध म अपीलकता ारा द गई दलील क े ासंिगक ह स को पुन: तुत करना उिचत होगा, जो िन नानुसार ह: - “18. (क) जन आधार पर करायेदार को िन कािसत करने क मांग क गई है:i) यािचकाकता और उसका प रवार वतमान म उपरो संप क े भूतल पर रह रहे ह और यािचकाकता क े पास वतमान म उपल ध आवास उनक े और प रवार क े सद य क े िलए पूर तरह से अपया है, जो अपने िनवास क े िलए उन पर िनभर ह। यािचकाकता एक संयु प रवार म रहती है जसम उसक े पित का सगा भाई (= बहनोई), उसक प ी, 2 अ ववा हत बे टयां, 1 ववा हत बेट और 1 बेटा शािमल है और वह अपने बहनोई क े प रवार को अपना प रवार मानती है। यािचकाकता क े पूरे प रवार को कम से कम 5 बेड म, 2 ाइंग म, 2 कचन, 3 शौचालय, 3 बाथ म, 1 पूजा क, 1 गे ट म, 1 बरामदा और एक कमचार आवास क आव यकता है। यािचकाकता को अपने बहनोई सु ी चा शमा क तीसर बेट ारा ' ले-वे' खोलने क े िलए 1 शौचालय, रसोई और बरामदे क े साथ दो कमर क भी आव यकता है। हालां क, यािचकाकता क े पास वतमान म उपल ध आवास क े वल 2 बेड म, 1 ाइंग म, 2 रसोईघर, 2 शौचालय / बाथ म, 2 छोटे टोर म, 1 पूजा क और भूतल पर एक बरामदा और पहली और दूसर मं जल पर 1 कमरा है जो पूर तरह से अपया है। यािचकाकता क े बहनोई क ववा हत बहू और यािचकाकता क े अ य कर बी र तेदार यािचकाकता से िमलने आते रहते ह और उिचत अविध क े िलए यार और नेह से उसक े साथ रहना चाहते ह, हालां क आवास क कमी क े कारण, वे नह ं रह सकते। ऐसी और अ य प र थितय म, जैसा क नीचे बताया गया है, यािचकाकता वा त वक आव यकताओं क े िलए वतमान िन कासन यािचका दायर कर रहा है। इसक े अलावा, पूरे प रसर का िनमाण बहुत पुराना और जीण- शीण थित म है और त काल मर मत क आव यकता है और बा रश क े मौसम क े दौरान, यािचकाकता और उसक े प रवार को भार क ठनाई का सामना करना पड़ता है य क भूतल पर जल जमाव होता है और यािचकाकता और उसक े प रवार का जीवन अ त- य त हो जाता है। इसक े अलावा, बा रश क े मौसम म सभी फन चर और फ चर ित त हो जाते ह। यािचकाकता और उसक े प रवार क े सद य को बा रश क े मौसम म अपना सारा सामान कह ं और ले जाना पड़ता है। यहां तक क यािचकाकता और उसक े सद य को बा रश क े मौसम म अपना घर छोड़ना पड़ता है और अपने र तेदार क े यहां जाना पड़ता है। इसक े अलावा, यािचकाकता एक व र नाग रक और वधवा म हला है और यथ और उसका प रवार लगातार यािचकाकता क े साथ अभ और दु यवहार करता है। ii) जैसा क ऊपर कहा गया है, संप का अगला ह सा सं या सी-586/587, गली सं या 12, मजिलस पाक, द ली-110033 म क े वल भूतल शािमल है और इसम 2 बेड म, 1 ाइंग म, 2 कचन, 2 शौचालय / बाथ म, 2 छोटे टोर म, 1 पूजा क और एक कोट याड है और यािचकाकता क े पास वतमान म उपरो आवास है। उपरो क े अलावा, पहली मं जल पर 3 कमरे और दूसर मं जल पर 3 कमरे म से, पहली मं जल और दूसर मं जल पर 1-1 कमरा यािचकाकता क े क जे म है। iii) यािचकाकता का कहना है क उपरो आवास जो वतमान म उसक े पास उपल ध है, पूर तरह से अपया है। जैसा क ऊपर कहा गया है, यािचकाकता क े प रवार म उसक े पित का सगा भाई, उसक 2 अ ववा हत बे टयां, 1 ववा हत बेट और 1 बेटा शािमल है और यािचकाकता अपने पित क े भाई क े प रवार को अपना प रवार मानता है। उनक े पित क े भाई क सबसे बड़ बेट सु ी िनशा है जो ववा हत है और उसका एक बेटा है जसक उ लगभग 2 वष है और वह अलग रहती है, दूसर बेट सु ी रेणु शमा है जसक आयु लगभग 28 वष है और वह अ ववा हत है, तीसर बेट लगभग 25 वष क है और द ली व व ालय से तीसरे वष (प ाचार) बी. कॉम क पढ़ाई कर रह है और एक बेटा मा टर गो वंद शमा है जो लगभग 16 वष का है और ए.जी. ड एवी क ू ल, मॉडल टाउन, द ली म 10 वीं क ा म पढ़ रहा है। यािचकाकता और उसक े प रवार क े सद य क े आवासीय माण क े बारे म द तावेज अनुबंध "पी -1" (सामु हक) क े प म दायर कए गए ह।”

4.3. अपीलकता ने अपने कथन म आव यकता पर कई अ य बात कह ं, जसम खुद क े िलए और साथ ह अपने बहनोई क प ी और ब च क े िलए आवास क कमी शािमल है। िन कासन क मांग करने वाली यािचका क े साथ, अपीलकता ने िन निल खत श द म शीषक क े साथ संप क थल न शा भी संल न कया: - " ॉपट सं या सी -586, गली सं या 12, 13, मजिलस पाक, द ली - 110033 का थल न शा ।

4.4. यथ - करायेदार ने अपना िल खत बयान दायर कया, जसम अपीलकता क वा त वक आव यकता क े दाव से इनकार कया गया, जब क अ य बात क े साथ-साथ, कहा गया क अपीलकता लाभ कमाने क े िलए वाद त संप को बेचना चाहता था; उनक े पित क 8-10 साल पहले मृ यु हो गई थी और उनका अपना कोई ब चा नह ं था; इसिलए अित र आवास क कोई आव यकता नह ं थी। यह भी कहा गया क यािचका द ली कराया िनयं ण अिधिनयम, 1958 क धारा 14 (1) (ई) और धारा 25-बी क े तहत नह ं आती है। वशेष प से जब अपीलकता ने सं या 588, गली सं या 12, मजिलस पाक सं या सी -603, गली सं या 13, मजिलस पाक; और सं या ई -591, गली सं या 12, मजिलस पाक वाली अ य संप य क े क जे से संबंिधत सभी त य का खुलासा नह ं कया।

4.5. सा य म, अपीलकता ने अपनी यािचका म बताए गए त य पर जोर दया। उनसे, उनक े देवर (पित क े भाई) और उनक े देवर क प ी से संबंिधत संप य से संबंिधत सवाल क े साथ यापक प से ितपर ा क गई, वशेष प से सी -587 वाली संप क े बारे म और साथ ह वाद संप म उपल ध आवास से संबंिधत ितपर ा म उनक े ारा दए गए बयान क े ासंिगक ह स को उपयोगी प से िन नानुसार िनकाला जा सकता है: - " xxx xxx xxx जस इमारत म वाद संप थत है, वह भूतल, पहली और दूसर मं जल से िमलकर बना है। यह सह है क म भूतल पर रहता हूं। यह सह है क मेरे बहनोई ेम क ु मार शमा संप सं या सी - 588, गली सं या 12, मजिलस पाक, आजादपुर, द ली क े मािलक थे। यह भी सह है क मेरे बहनोई ेम क ु मार शमा ने 23.06.2010 को ीमती सुदेश रानी को 16 लाख पये म बेच दया। यह सह है क उ संप व य वलेख ए स. पीड लयू1/आर[1] क े मा यम से बेची गई थी। (यािचकाकता क े अिधव ा ारा आप जताते हुए कहा गया क यह फोटोकॉपी है। सुना। असहमित अंितम बहस क े चरण म तय क जाएगी) यह सह है क ीमती गीता शमा मेरे बहनोई ेम क ु मार शमा क प ी ह। यह सह है क ीमती गीता शमा सी-587, गली सं या 12, मजिलस पाक, आजादपुर, द ली क संप क माल कन ह। ीमती गीता शमा वयं सी-587, गली सं या 12, मजिलस पाक, आजादपुर, द ली क संप म रह रह ह। वो ट(sic) लॉट सं या 586 और 587 पर एक इमारत का िनमाण कया गया है और म और मेर भाभी गीता शमा उ एक इमारत म एक प रवार क े प म रह रहे ह। यह भी सह है क ीमती गीता शमा सी-600, गली सं या 12, मजिलस पाक, आजादपुर, द ली क संप क माल कन भी थीं। यह सह है क वष 2008 म उ संप सं या सी-600 म अशोक क ु मार नामक करायेदार था। यह कहना सह है क उ संप को गीता शमा ने िन कािसत करने क े बाद बेच दया था। वो ट(sic) उ लॉट सं या सी -600 पर िनिमत घर का आधा ह सा सड़क क े चौड़ करण क े कारण व त हो गया था और इसिलए हमने उसी को िन कािसत कर दया और उसे बेच दया। xxx xxx xxx इमारत, जसम वाद संप थत है, जसम तीन कमरे, दो टोर, दो रसोईघर, एक पूजा क और ड यूसी और नानघर क े साथ भूतल पर बरामदा है; पहली मं जल म पछले ह से पर िनिमत तीन कमरे भी पहली मं जल पर शािमल ह; और दूसर मं जल म पीछे क े ह से पर िनिमत तीन कमरे भी दूसर मं जल पर ह। यथ पहली मं जल पर एक कमरे म करायेदार है। करायेदार घनसर िसंह पहली मं जल पर एक कमरे म और दूसर मं जल पर एक कमरे म करायेदार है। यह सह है क दूसर मं जल पर एक कमरे म राम क े वल नाम का करायेदार था। यह भी सह है क मने राम क े वल क े खलाफ िन कासन यािचका दायर क थी और करायेदार क े खलाफ वतमान दो िन कासन यािचकाएं दायर क थीं। यह भी सह है क राम क े वल ने उ कमरा खाली कर दया है और इसका क जा मुझे दे दया है। xxx xxx xxx मेरे पास वाद संप क े अलावा कोई आवासीय आवास नह ं है। मेरे साथ, मेरे बहनोई और उनक प ी, दो बे टयां और एक बेटा वाद संप म रह रहे ह। म एक रसोई म प रवार क े अ य सद य क े साथ भोजन तैयार करता हूं। दूसर रसोई जो मने पहले क तरह बताई है, उसका उपयोग टोर क े प म कया जा रहा है य क म अपने सास-ससुर क े साथ भोजन साझा कर रहा हूं। 587 सं या क एक संप मेरे बहनोई क है, यह वाद संप से सट हुई है और जैसा क मने कहा है क आवास दोन संप क े तहत है जो संयु प से िनिमत ह... xxx xxx xxx "

4.6. अपीलकता ने अपने मामले क े समथन म और सबूत पेश कए और उसक े देवर, भाभी, भतीजी और भतीजे से भी मशः पीड यू -2 से पीड यू -5 क े प म जांच क गई, जनक यिथय ारा विधवत प रवी ा क गई।

4.7. यथ ने अपने सा य म अपीलकता क े पास आवास क कमी और वाद त संप क किथत आव यकता क े आरोप से इनकार कया।

5. दनांक 21.11.2014 क े आदेश म, अिभलेख साम ी क पूर तरह से जांच करने क े बाद, व ान कराया िनयं क ने पाया क अपीलकता एक संयु प रवार म रह रह थी जसम उसक े बहनोई और प ी, दो अ ववा हत बे टयां और उसक े बहनोई का बेटा शािमल था। ारका साद बनाम िनरंजन और अ य: (2003) 4 एससीसी 549, क े मामले म इस यायालय क े एक िनणय का उ लेख करते हुए कराया िनयं क ने यह भी कहा क वा त वक आव यकता का सवाल क े वल मकान मािलक तक ह सीिमत नह ं हो सकता है और इसम प रवार क े सद य क आव यकता शािमल होगी, जसम अपीलकता क े बहनोई, उसक प ी और ब चे भी शािमल ह गे। कराया िनयं क क े िन कष क े ासंिगक पहलुओं को उपयोगी प से िन नानुसार िनकाला जा सकता है: - "17. वतमान मामले क े त य पर वापस लौटते हुए, यािचकाकता एक संयु प रवार म रह रह है जसम उसका देवर, उसक प ी, दो अ ववा हत बे टयां और एक बेटा शािमल है। जैसा क ारका साद बनाम िनरंजन और अ य (पूव ) मामले म माननीय सव च यायालय क े िनणय म चचा क गई है। मकान मािलक क े "प रवार" श द म भाई, बहन और अ य िनकट र तेदार शािमल ह। मकान मािलक क वा त वक आव यकता को क े वल मकान मािलक तक ह सीिमत नह ं कया जा सकता है और इसम यािचकाकता क े सद य क आव यकता शािमल है, जसम उसका बहनोई, उसक प ी, बेटा और बहनोई क बेट भी शािमल है।

18. इस िन कष पर पहुंचने क े बाद क यािचकाकता क े प रवार म उसका बहनोई, उसक प ी और उनक े ब चे भी शािमल ह, यािचकाकता क े कहने पर वतमान िन कासन यािचका सुनवाई यो य है। अब, म यािचकाकता ारा कए गए दावे क े अनुसार वा त वक आव यकता पर चचा करने क े िलए आगे बढ़ूंगा।

19. प प से, यािचकाकता/मकान माल कन क े पास क े वल दो बेड म उपल ध ह। वह अपने छह सद य प रवार क े साथ रहती ह। छह सद य म से दो युवा अ ववा हत बे टयां ह और एक कशोर बेटा है। यह कहने क ज रत नह ं है क छोटे ब च को सोने और अ ययन करने क े िलए अलग कमरे क आव यकता होती है। यािचकाकता क े बहनोई क े तीन ब च को कम से कम दो बेड म क आव यकता होती है य द तीन म से दो एक बेड म साझा करते ह। इसी तरह, उ ह कम से कम एक अ ययन क क आव यकता होती है। यािचकाकता क े बहनोई और उसक प ी को एक बेड म क आव यकता है। यािचकाकता को एक अलग बेड म क भी आव यकता है। े बहनोई क ववा हत बेट क े अ थायी प से रहने क े िलए भी एक बेड म क आव यकता होती है य क वह े साथ-साथ अपने प रवार से िमलने और यार और नेह से यािचकाकता क े साथ रहने क े िलए वाद त संप म आती है। यािचकाकता एक बूढ़ म हला होने क े नाते आ या मक माग का पता लगाने क े िलए अपना खाली समय बताने क े िलए एक पूजा क क भी आव यकता होती है। एक बूढ़ औरत होने क े नाते उसे अपने दैिनक काम को करने क े िलए एक नौकर क सहायता क आव यकता होती है और इसिलए उसे अपने नौकर क े िलए एक कमरे क आव यकता होती है। इसिलए, यािचकाकता ारा कमर क आव यकता कम से कम आठ कमर तक सीिमत हो गई, जब क उसक े पास क े वल दो बेड म ह और यािचकाकता को मौजूदा ाइंग म, लॉबी, टोर म आ द से कमर क े िलए जगह बनाने क े िलए कहना यायालय का काम नह ं है।

20. एक अ य आधार यह है क उनक े देवर सु ी चा शमा क तीसर बेट खुद को और अपने प रवार को बनाए रखने क े िलए लेवे(िशशू ान) खोलना चाहती है और उसे खोलने िलए शौचालय, रसोई और बरामदे क े साथ कम से कम दो कमर क आव यकता होती है। इस त य का उ लेख िन कासन यािचका क े कॉलम सं या 18 (क) क े पैरा सं या 9 म दया गया है और यथ क े िल खत बयान म इसका खंडन नह ं कया गया है। इसक े अलावा, इस बंदु पर यािचकाकता या चा शमा क ओर से कोई ितपर ा नह ं क गई है, जो यािचकाकता क ओर से गवाह क े प म पेश हुई थीं। इस कार, ऐसा लगता है क यािचकाकता ने वा त वक आव यकता क े इस आधार को वीकार कर िलया है। इसिलए, यािचकाकता ने संभावनाओं क अिधकता से सा बत कर दया है क उसे अपनी वा त वक आव यकता क े िलए करायेदार प रसर क आव यकता है।

5.1. संप क े ववरण क े संबंध म, व ान कराया िनयं क ने इसे विधवत प से प कया और िन निल खत ट प णय और िन कष क े साथ अपीलकता क वा त वक आव यकता क े खलाफ काम नह ं कया: - "21. जहां तक संप क ब का सवाल है। सी-588 और सी-600, गली सं या 12, मजिलसपाक, आजादपुर, द ली े बहनोई और उसक प ी ारा यह देखा गया है क उ संप य को 23.06.2010 को 16, 00,000/- पये क े ववेचन पर बेचा गया था और संप को बेचने क े सैकड़ कारण हो सकते ह और वष 2010 म बेचने क आव यकता अिधक थी।

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22. करायेदार वचारण क े दौरान कसी भी द तावेज को अिभलेख पर लाने म वफल रहा है क यािचकाकता अ य संप य सं या सी-603 ई-591, मजिलस पाक, द ली का मािलक है करायेदार ने िल खत बयान क े (पृ 6) क े पैरा सं या 11 म यह कहते हुए खुद का खंडन कया है क यािचकाकता संप सं या 588 का मािलक है, जब क पैरा सं या 18 (क) (1) म, यािचकाकता क े देवर को संप सं या 588, मजिलस पाक का मािलक दखाया गया है।

23. यािचकाकता ने अपनी ितपर ा म कहा क- वाद संप का िनमाण सी-586 और सी-587 दो भूखंड पर कया गया है। इस पहलू पर भी, यथ कोई वपर त त य लाने म वफल रहा है। इस कार, संप सं या सी-587 क े वािम व को भी इस आशय क े िलए प कया जाता है क उनक प ी क संप सं या सी-587 वाद संप का एक ह सा है।

5.2. उपरो को यान म रखते हुए, कराया िनयं क ने यािचका को वीकार कर िलया और करायेदार को प रसर से िन कािसत करने का आदेश दया, जो इमारत क पहली मं जल क े पीछे क े ह से म एक कमरा है, जब क उसे खाली करने क े िलए छह मह ने का समय दया गया था।

6. इस अवसर पर यह कहा जा सकता है क सं या 03/2011 वाली दूसर िन कासन यािचका अपीलकता ारा अ य करायेदार क े संबंध म दायर क गई थी, जसक े पास एक ह संप क पहली और दूसर मं जल पर कराए पर दो कमरे थे। उ यािचका म लगभग समान कथन िलए गए थे और करायेदार ारा वरोध क े लगभग समान आधार बताए गए थे। उ मामला इसी तरह क े सा य पर आगे बढ़ा और कराया िनयं क ने अपीलकता क े मामले को वीकार करते हुए उस ितिथ पर यानी 21.11.2014 को इसी तरह का आदेश पा रत कया और इसी तरह उ करायेदार को प रसर से िन कािसत करने का आदेश दया, जब क खाली करने क े िलए छह मह ने का समय दया। दोन मामल से संबंिधत कारक क समानता को यान म रखते हुए, हम अ य यािचका क े संबंध म अिभवाक, सबूत और िन कष पर व तार से बताने क आव यकता नह ं है।

7. दनांक 21.11.2014 क े उपयु आदेश क े व उ च यायालय क े सम उपरो दो पुनर ण यािचकाएं समान आधार पर आगे बढ़ ं और उ च यायालय ारा लगभग समान आदेश क े साथ वीकार कर ली ग । उ च यायालय ने माना क अपीलकता-मकान मािलक िन कपट नह ं थे और उ ह ने अिभवाक को ामक तर क े से िलया था; और अ य संप क उपल धता का प प से खुलासा नह ं कया गया था। इसिलए, उ च यायालय ने यह वचार बनाया क अपीलकता वा त वक आव यकता का मामला बनाने म वफल रहा था। उ च यायालय क े वचार और िन कष क े ासंिगक भाग को उपयोगी प से िन नानुसार पुन: तुत कया जा सकता है: - "5. अित र कराया िनयं क क े सम तुत िन कासन यािचका क े अवलोकन से पता चलता है क यथ ने खुद को संप सं या सी - 586, गली सं या 12, मजिलस पाक, द ली -110033 क े भूतल का िनवासी बताया था, े क जे वाले करायेदार ह से को पहली मं जल पर संप क े पछले ह से क े बीच म एक कमरा बताया गया था। करायेदार प रसर सं या सी -586 वाली संप का ह सा बताया गया था, जसका संदभ लाल रंग म थल न शा (अनुल नक-'ए') म इसक े ा फकल िच ण क े िलए कया गया था। िन कासन यािचका क े साथ दायर थल न शे क ित, जसे संप सं या सी -586, गली सं या 12 और 13, मजिलस पाक, द ली -110 033 क थल न शे क े प म शीषक दया गया है, संप को तीन मं जला संरचना क े प म दखाया जाएगा, जसम दो बेड म, एक ाइंग म, कम से कम तीन कमरे क े अलावा रसोई, शौचालय, बरामदा और अ य े (आंगन, सीढ़, आ द) भूतल पर और पहली मं जल और दूसर मं जल पर कम से कम तीन कमरे (ए स.पीड लयू- 1/16) ह गे। एक अ य थल न शा (ए स.पीड लयू-15) को भी व ास क े तौर पर भी रखा गया था, जो मु य प से पहली और दूसर मं जल क े तर पर आवास को िच त करेगा, उ थल न शा शीषक को संप सं या सी -586, गली सं या 15, मजिलस पाक, आजादपुर, द ली। प ता क े िलए, यहां यह जोड़ा जा सकता है क थल न शे म संप सं या सी -587 का कोई संदभ नह ं था, जससे यह धारणा बनाई गई क इसम िच त पूर संरचना / आवास क े वल संप सं या सी -586 से संबंिधत है।

6. यथ अपने वयं क े गवाह (पीड यू -1) क े प म पेश हुई और अपनी ितपर ा क े दौरान, उसने बताया क उसक े पित का 1999 म िनधन हो गया था और आगे कहा क उसका अपना कोई ब चा नह ं है, उसने कोई ब चा भी गोद नह ं िलया है। हालां क, उसने उस संदभ म यह समझाने क कोिशश क क वह अपने देवर क े ब च को अपने ब च क े प म मानती है और वे शु से ह उसक े साथ रह रहे थे। यह प प से दखाता है क मूल प से था पत मामले म सुधार कया जा रहा है।

7. पीड यू-1 ने ितपर ा म कहा क उसे याद नह ं है क उसने द ली क े मजिलस पाक क गली सं या 13 म संप सं या सी-586 कब खर द थी। उसने वीकार कया क उसक े बहनोई ( ेम क ु मार शमा) क प ी गीता शमा, जनक ज रत क े िलए िन कासन क मांग क गई है, द ली क े आजादपुर क े मजिलस पाक म गली सं या 12 म सी -587 क संप क मािलक ह। उसने यह भी वीकार कया क गीता शमा उसक संप सं या सी-587 म रह रह थी। उस समय वह कहती थीं क लॉट सं या 586 और 587 को एक इमारत क े िनमाण क े िलए जोड़ा गया था और वह और उनक भाभी गीता शमा उस एक इमारत म एक प रवार क े प म रह रहे ह।

8. उपरो पृ भूिम क े खलाफ उठाया गया तक यह है क थल न शा (ए स.पीड लयू-1/5 और ए स.पीड लयू -1/6) दो िनकटवत भूखंड पर िनिमत एक सामा य इमारत को दशाते ह, जनम सं या सी - 586 और सी -587 ह। इस तक को वीकार नह ं कया जा सकता है य क यह इस आशय क े कसी भी अनुरोध पर आधा रत नह ं है। इसक े वपर त, यािचका म कह गई बात म यथ /मकान माल कन का यह प मामला था क करायेदार का ह सा संप सं या सी-586 का ह सा है, जसे उ थल न शे म दशाया गया है।

9. उपरो तक क े स मुख, यथ /मकान मािलक क े अिधव ा ने पैरा 18 (क) (ii) म अिभवाक पर भरोसा करने क मांग क, जहां अ य बात क े साथ-साथ यह उ लेख कया गया था क "जैसा क ऊपर कहा गया है... संप क े सामने क े ह से म सं या सी-586/587, गली सं या 12, मजिलस पाक, द ली-110003 म क े वल ाउंड लोर शािमल है और इसम दो बेड म, एक ाइंग म, दो कचन, दो शौचालय/बाथ म, दो छोटे टोर म, एक पूजा क और एक कोट याड है और यािचकाकता क े पास वतमान म उपरो आवास है।

10. यािचकाकता/ करायेदार क ओर से यह तक देना सह है क उपरो कृ ित क अिभवाक ामक ह। िन कासन यािचका क े पहले या बाद क े भाग म संप सं या सी-587 का कोई संदभ नह ं है। इसिलए, "जैसा क ऊपर बताया गया है" अिभ य से शु होने वाले अिभवाक त या मक प से गलत थे। गीता शमा (बहनोई क प ी) क े संप म अिधकार, शीषक या हत का कोई संदभ नह ं दया गया था या इसे एक सामा य सुपर- चर क े प म जमीन क े दो िनकटवत भूखंड पर बनाया गया था। यथ /मकान माल कन को अपने अिभवाक से परे एक नया मामला बनाने क अनुमित नह ं द जा सकती है।

11. पूवगामी कारण क े िलए, यह माना जाना चा हए क यथ मकान माल कन वा त वक आव यकता क े अपने मामले को सा बत करने म वफल रह है। नतीजतन, दनांक 21.11.2014 क े आ े पत आदेश को र कया जाता है। उनक िन कासन यािचका खा रज क जाती है।”

8. दोन पुनर ण यािचकाओं को उ च यायालय ारा उपयु वचार पर अनुमित द गई थी और िन कासन क मांग करने वाली संबंिधत यािचकाओं को तदनुसार खा रज कर दया गया था।

9. उ च यायालय ारा पा रत आदेश का वरोध करते हुए, अपीलकता क े अिधव ा ने कड़ा तक दया है क लागू कए गए आदेश कानून म अनुर ीय ह, जहां उ च यायालय ने 1958 क े अिधिनयम क धारा 25-बी (8) क े तहत अपने अिधकार े का उ लंघन कया है। व ान अिधव ा ने आ बद उल-इ लाम बनाम इंदर सैन दुआ: (2022) 6 एससीसी 30 क े मामले म िनणय का उ लेख कया है और उस पर भरोसा कया है यह तुत करने क े िलए क उ च यायालय संप क े तथाकिथत गलत ववरण क े आधार पर और कराया िनयं क क े सम प ीकरण और फर कराया िनयं क क े िन कष पर वचार कए बना वा त वक आव यकता क े संबंध म कराया िनयं क ारा दज कए गए त य क े िन कष को उलट नह ं सकता था। व ान अिधव ा तुत करगे क 1958 क े अिधिनयम क े उ े य क े िलए "प रवार" और "आि त" श द, और वशेष प से वा त वक आव यकता, को यापक प से और उदारता से समझा जाना चा हए ता क मकान मािलक क े र तेदार को शािमल कया जा सक े और क े वल पूर तरह से आि त य य को स ती से शािमल न कया जा सक े । व ान अिधव ा ने ारका साद िन निल खत क े मामले म उपरो िनणय का उ लेख कया है और उस पर भरोसा कया है।

10. यथ - करायेदार क े अिधव ा ने कहा क िन कासन क े िलए यािचका क े अवलोकन पर, यह प है क अपीलकता ने वाद प रसर क े थान का सह वणन नह ं कया है और फर, यह दखाने का यास कया था क प रसर सं या सी - 586 पर नह ं ब क सी -586 और सी -587 क े सामने क े ह से म थत था। व ान अिधव ा क े अनुसार, अपीलकता ने यायालय को गुमराह करने का यास कया था और वतमान मामले म त य को िछपाया था। यह भी तुत कया गया है क जब अपीलकता क े बहनोई ने अपीलकता को वाद प रसर बेच दया था, तो अपीलकता क े उ बहनोई क े सद य क वा त वक आव यकता प प से अ त वह न है और अपीलकता, अपने बहनोई से वाद प रसर खर दने क े बाद, ितवा दय को िन कािसत करने क े िलए आधार क े प म वा त वक आव यकता का दावा करने से रोक दया जाएगा। यह तक दया गया है क उ च यायालय क े िन कष अिभलेख पर उपल ध साम ी क े अनु प ह, जस पर कराया िनयं क ने वचार करने हेतु पूर तरह से छोड़ दया था।

11. ित ं तुितय पर वचारपूवक वचार करने और अिभलेख क जांच करने क े बाद, हमारा प प से वचार है क आ े पत आदेश को बनाए नह ं रखा जा सकता है और कराया िनयं क ारा पा रत िन कासन क े आदेश इन मामल म बहाल कए जाने क े यो य ह।

12. पूरे मामले को यान म रखते हुए, आव यक मु य वशेषताएं यह ह क वचाराधीन प रसर को आवासीय उ े य क े िलए संबंिधत करायेदार को छोड़ दया गया था। अपीलकता-मकान मािलक को एक वधवा म हला कहा जाता है, जसका अपना कोई ब चा नह ं है, ले कन वह अपने बहनोई और अपने बहनोई क प ी और ब च स हत प रवार क े साथ रहती है। कहा जाता है क अपीलकता-मकान मािलक ने अपने बहनोई ारा ह तांत रत कए जाने पर संप का वािम व हािसल कर िलया है; यािचका म संबंिधत करायेदार को इस आधार पर प रसर से िन कासन क मांग क गई है क प रसर को उनक े और उनक े संयु प रवार क े उपयोग और यवसाय क े िलए आव यक है। अपीलकता-मकान मािलक ारा दायर यािचकाएं 1958 क े अिधिनयम क धारा 14 (1) (ई) ारा शािसत होती ह जो िन नानुसार है: - "14. िन कासन क े खलाफ करायेदार का संर ण (1) कसी अ य विध या सं वदा म िन हत कसी बात क े वपर त होते हुए भी, कसी भी यायालय या िनयं क ारा करायेदार क े व मकान मािलक क े प म कसी प रसर क े क जे क वसूली क े िलए कोई आदेश या ड नह ं क जाएगी: पर तु िनयं क, िनधा रत र ित से उसे कए गए आवेदन पर, िन निल खत आधार म से क े वल एक या अिधक पर प रसर क े िलए आदेश दे सक े गा, अथात ्:- *** *** *** (ङ) आवासीय योजन क े िलए रखे गए प रसर को मकान मािलक ारा अपने िलए या उस पर आि त अपने प रवार क े कसी सद य क े िलए िनवास क े प म यवसाय करने क े िलए ामा णक होना आव यक है, य द वह उसका मािलक है, या कसी ऐसे य क े िलए जसक े लाभ क े िलए प रसर रखा गया है और मकान मािलक या ऐसे य क े पास कोई अ य यथोिचत उपयु िनवास थान नह ं है। प ीकरण- इस खंड क े योजन क े िलए, "आवासीय योजन क े िलए अनुमित दए गए प रसर" म कोई भी प रसर शािमल है जसे िनवास क े प म उपयोग करने क अनुमित द गई है, मकान मािलक क सहमित क े बना, संयोग से वा ण यक या अ य उ े य क े िलए उपयोग कया जाता है;”

13. जैसा क देखा गया, कराया िनयं क ने अपीलकता क े मामले को उसक े बारे म वीकार कर िलया और संबंिधत करायेदार को िन कािसत करने का आदेश दया। कराया िनयं क ारा पा रत आदेश पर करायेदार ारा उ च यायालय क े सम संबंिधत पुनर ण यािचकाओं म सवाल उठाए गए थे। उ च यायालय ने 1958 क े अिधिनयम क धारा 25-ख (8) क े संदभ म उ संशोधन यािचकाओं पर वचार कया। उ धारा 25-ख म े आधार पर िन कासन क े आवेदन क े िनपटान क े िलए वशेष या का ावधान है और ऐसे मामल म पुनर ण यािचका इसक उप- धारा (8) ारा शािसत होती है। संबंिधत ावधान उपयोगी प से िन नानुसार िनकाला जा सकता है: - "25-ख. वा त वक आव यकता क े आधार पर िन कासन क े िलए आवेदन क े िनपटान क े िलए वशेष या- *** *** *** (8) इस धारा म विन द या क े अनुसार िनयं क ारा कए गए कसी प रसर क े आदेश क े व कोई अपील या तीय अपील नह ं होगी: बशत क उ च यायालय, खुद को संतु करने क े उ े य से, क इस धारा क े तहत िनयं क ारा कया गया आदेश कानून क े अनुसार है, मामले क े अिभलेख क मांग कर सकता है और उसक े संबंध म ऐसा आदेश पा रत कर सकता है जो वह उिचत समझता है।”

14. उ धारा 25- ख (8) क े तहत सीिमत अिधकार े क परेखा को इस यायालय ारा आ बद-उल-इ लाम (पूव ) मामले म पछले कई फ ै सल क े संदभ म और िन निल खत श द म िच त और समझाया गया है:- "22. हम वा तव म, धारा 25-बी (8) क े परंतुक क े व तार और दायरे क े बारे म अिधक िचंितत ह। परंतुक उप-धारा (5) क े तहत दायर एक आवेदन पर व ान कराया िनयं क ारा पा रत आदेश क े खलाफ अपील दान नह ं करक े एक अलग और प ितबंध बनाता है। वधाियका का इरादा बहुत प है, जो अपीलीय उपाय को हटाना है और उसक े बाद, एक और दूसर अपील है। यह एक प तः एक भूल है जो वधाियका ारा अपील क े दो चरण क े अिधकार को हटाते हुए एक सं वदा क े मा यम से जानबूझकर क जाती है।

23. धारा 25-बी (8) का परंतुक उ च यायालय को व ान कराया िनयं क क े आदेश क े खलाफ संशोधन क वशेष श देता है, जो िनणय लेने क या पर एक अधीन थ यायालय पर अधी ण क कृ ित म है, जसम या मक अनुपालन भी शािमल है। इस कार, उ च यायालय से यह अपे ा नह ं क जाती है क वह अपीलीय े ािधकार का योग करक े अपने वचार को वचारण यायालय क े वचार क े साथ ित था पत करे। इसक भूिमका अपनाई गई या पर खुद को संतु करना है। उ च यायालय ारा ह त ेप क गुंजाइश बहुत ितबंधा मक है और उन मामल को छोड़कर जहां अिभलेख पर एक ु ट है, जसका अथ क े वल यह होगा क कसी भी िनणय क े अभाव म, उ च यायालय को इस तरह क े िनणय को परेशान करने का यास नह ं करना चा हए। ऐसे मामल म जांच कराने क कोई आव यकता नह ं है, जो अ यथा अधी ण क श को िनयिमत थम अपील, एक अिधिनयम म प रवितत करने क े समान होगा, जो वधाियका ारा पूर तरह से िन ष है।

15. यह कहने क े िलए अिधक व तार क आव यकता नह ं है क जहां तक े आधार पर बेदखली क े अनुरोध का संबंध है, वधाियका का इरादा वशेष प से एक विश और वशेष या दान करना रहा है और इस संबंध म, 1958 क े अिधिनयम क धारा 25-ख म िन द या क े अनुसार कराया िनयं क ारा कए गए आदेश क े खलाफ कोई अपील या दूसर अपील क प रक पना नह ं क गई है। क े वल धारा 25-बी(8) क े परंतुक क े संदभ म, एक सीिमत अविध क अनुमित है क उ च यायालय खुद को संतु करने क े उ े य से अिभलेख मांग सकता है क आदेश कानून क े अनुसार पा रत कया गया था। यह प है क उ ावधान क े तहत, त य का प िन कष ह त ेप करने क े िलए नह ं है जब तक क कानून क े गलत आधार पर ऐसा िन कष नह ं दया जाता है।

16. वतमान मामल क सम ता म जांच करने क े बाद, हम यह देखने क े िलए ववश ह क उ च यायालय 1958 क े अिधिनयम क धारा 25-बी (8) क े संदभ म संशोधन क े सीिमत दायरे से बहुत आगे िनकल गया है। लागू आदेश म उ च यायालय क े वचार पर एक नज़र डालने से यह प हो जाता है क वाद प रसर क े प ववरण क े साथ-साथ प रवार क े पास उपल ध संप क पहचान और सीमा क तथाकिथत कमी ने उ च यायालय का मुख ववेचन कया है। उ च यायालय ने िन कासन यािचका क े साथ दायर थल न शे क ित और इसक े वषय क जांच क है, जसम इसे संप सं या सी -586 क े प म व णत कया गया है, जसम संप सं या सी -587 का कोई संदभ नह ं है। उ च यायालय ने देखा है क जब अपने बहनोई क प ी क े साथ आवास क उपल धता क े संबंध म ितपर ा क गई, तो अपीलकता ने कहा क लॉट सं या 586 और 587 को एक इमारत क े िनमाण क े िलए एक साथ जोड़ा गया था। इस तरह क े सबूत और संबंिधत अिभवाक को उ च यायालय ारा अ वीकाय पाया गया य क वे अिभवाक पर आधा रत नह ं थे। स मान क े साथ, हम उ च यायालय क े कोण का समथन करने म असमथ ह।

17. यािचका क े साथ संल न थल-न शे क े साथ अपीलकता ारा क गई अिभवाक पर एक यापक नज़र डालने से यह प होता है क अपीलकता ने वाद संप म उपल ध आवास क सीमा क े साथ-साथ वतमान म उसक े यवसाय म आवास और उसक आव यकता क कृ ित और सीमा का व तृत ववरण दया। अिभवाक म, यह वा तव म िन द कया गया था क अपीलकता "सी - 586/587" वाली संप पर रह रहा था। अपीलकता ारा अपनी यािचका क े पैरा ाफ 18 (क) (ii) म ली गई अिभवाक, िन त प से, "जैसा क ऊपर कहा गया है" अिभ य से शु होती ह और "सी -586/587" वाली संप का कोई पूव उ लेख नह ं कया गया था, ले कन, पछले पैरा ाफ म व तृत ववरण दया गया था और थल न शे को भी यािचका क े साथ संल न कया गया था। अपीलकता ने अपनी ितपर ा म आगे थित प क क संबंिधत इमारत का िनमाण लॉट सं या 586 और 587 पर संयु प से कया गया था और वह और उसक भाभी एक ह इमारत म एक प रवार क े साथ रह रहे थे।

18. अिभवाक को सम प से लेते हुए और सा य क े साथ इसे पढ़ने पर, यह प है क संप का ऐसा कोई गलत ववरण नह ं दया गया था जो अपीलकता क े मामले म एक ठोस कमी क े बराबर होगा या जो यिथय - करायेदार क े िलए पूवा ह पैदा कर सकता था।

19. उ लेखनीय है क यथ गण का यह मामला नह ं था क वे वचाराधीन प रसर म करायेदार नह ं थे। यथ गण क ओर से एकमा यास यह सुझाव देने का था क प रवार क े पास अ य संप यां और आवास उपल ध थे। यथ गण क ओर से इस तरह क े सुझाव को कराया िनयं क ारा वीकार नह ं कया गया था य क यह अपीलकता क वा त वक आव यकता क े दावे क े खलाफ था। कराया िनयं क क े इस तरह क े िन कष अिनवाय प से अिभलेख पर सा य क े आधार पर त य क े िन कष थे। वचाराधीन संप क े ववरण क े बारे म प ता क कमी क े अ प आधार पर इस तरह क े िन कष को परेशान करने क कोई गुंजाइश नह ं थी।

20. यह भी उ लेखनीय है क अपीलकता ारा बताए गए और कराया िनयं क ारा वीकार कए गए वशाल और यापक आव यकताओं क े मामले को उ च यायालय ारा न तो नकारा गया है और न ह खा रज कया गया है।

21. मामले क े पूव कोण म, हम अ य पहलुओं पर व तार से बताने क आव यकता नह ं है क या अपीलकता क े बहनोई क े सद य को 1958 क े अिधिनयम क धारा 14 (1) (ई) क े संदभ म िन कासन क े उ े य से उसक े आि त क े प म िलया जा सकता है।

22. िन त प से, अिभलेख पर रखे गई सा य से यह तीत होता है क अपीलकता क े साथ-साथ उसक े बहनोई और प रवार क े अ य संदिभत सद य का भी क ु छ अ य संप य म मािलकाना हक या हत हो सकता है, ले कन, ऐसा पहलू अपीलकता क े खलाफ शायद ह काम करेगा, जब िन कासन क े िलए उसक ाथना को ठोस आधार पर और ठोस कारण क े साथ कराया िनयं क ारा वीकार कर िलया गया था।

23. चचा का नतीजा यह है क इन दोन मामल क े संबंध म अपीलकता क वा त वक आव यकता पर िन कष को उ च यायालय ारा वचाराधीन संप क पहचान क े बारे म प ता क कमी क े आधार पर परेशान नह ं कया जा सकता था। इस कार, लगाए गए आदेश को र कया जाना चा हए और िन कासन क े आदेश बहाल कए जाने चा हए।

24. उपरो को यान म रखते हुए ये अपील सफल होती ह और उ च यायालय क े व ान एकल यायाधीश ारा पा रत दनांक 17.04.2018 क े आ े पत आदेश को वीकार कया जाता है। आर.सी पु. क सं या 78/2015 और 80/2015 को अलग रखा गया है 02/2011 और 03/2011 क िन कासन यािचकाओं म कराया िनयं क ारा पा रत संबंिधत आदेश दनांक 21.11.2014 को बहाल कया जाता है।

24.1. हालां क, मामले क प र थितय को यान म रखते हुए और इस मुकदमे क समय और पुराने कायकाल को देखते हुए, संबंिधत यिथय को 31.12.2023 तक वाद प रसर खाली करने का समय दया जाता है, इस शत पर क वे आज से चार स ाह क े भीतर कराया िनयं क क े सम पूरा देय कराया जमा करगे और साथ ह कराया िनयं क क े सम सामा य वचन बंध तुत करगे क वे कराया/अतःकालीन लाभ इस यायालय ारा दए गए समय क े भीतर वाद प रसर को खाली कर और कसी भी तरह से प रसर क े संबंध म अपीलकता-मकान मािलक को पूवा ह न द।

25. प कार को अपनी लागत वहन करने क े िलए छोड़ दया जाता है।.................................. या. ( दनेश माहे र )................................ या. (संजय क ु मार) नई द ली; 25 अ ैल, 2023 (Translation has been done through AI Tool ( T r a n s l a t i o n h a s b e e n d o n e t h r o u g h A I T o o l: S U V A S ) D i sclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया ग या है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।