Harbhajan Singh v. Haryana State

Supreme Court of India · 25 Apr 2023 · 2023 INSC 424
Abhay S. Oka; Rajesh Bindal
Criminal Appeal No 1480 of 2011
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that mere ownership of a vehicle is insufficient for conviction under Section 25 of the NDPS Act without proof of the owner's knowledge and consent, and set aside the appellant's conviction accordingly.

Full Text
Translation output
2011 की आपरािधक अपील संा 1480
रपोट करने यो
भारत क
े सव ायालय म
आपरािधक अपीलीय े ािधकार
2011 की आपरािधक अपील संा 1480
(2010 की एस एल पी (सीआरएल ) संा 10543 से उ#$ )
हरभजन िसंह ... अपीलकता
बनाम
हरयाणा रा) ... उ*रदाता
िनणय
राजेश िबंदल, जे.
JUDGMENT

1. अपीलकता-हरभजन िसंह को 18.05.2005 को ट ायल कोट ारा नारकोिटक ड एं ड साइकोट ोिपक सटस ए, 1985 की धारा 25 (इसक े बाद "एनडीपीएस अिधिनयम"क े #प म संदिभत) क े तहत पा$रत फ ै सले क े तहत दोषी ठहराया गया था और दस साल की अविध क े िलए कारावास की सजा सुनाई गई थी। अपील म, उ[1] 2ायालय ारा िदनांक 14.05.2010 क े आदेश ारा अपीलकता की दोषिस56 और सजा को बरकरार रखा गया था।इन आदेशों को इस 2ायालय म चुनौती दी जा रही है।

2. सं:ेप म, मामले क े त; यह ह< िक अपीलकता उस ट क का =ामी था िजसका पंजीकरण सं?ा पीएटी/2029 था। यह हनुमान मंिदर, िहसार रोड, @ाम अ@ोहा क े पास िदनांक 15.05.2000 को रात 9:00 बजे पलट गई।गAी Bूटी पर तैनात पुिलस दल ारा दी गई जानकारी पर 16.05.2000 को अपराD 4:25 बजे Eथम सूचना $रपोट (एफआईआर) सं?ा 68 दज की गई। पुिलस पाटF को दो गवाहों राम स#प (पीडGू-6) और नरेश क ु मार (पीडGू-10) ारा दी गई जानकारी क े अनुसार 15.05.2000 को रात लगभग 9 बजे दुघटना Iई जब ट क िडवाइडर से टकरा गया।चालक और Jीनर ट क से बाहर आए और उK गवाहों ारा पूछताछ करने पर उMोंने अपना नाम जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह और गुरमेल िसंह पुN नछOर िसंह बताया।उMोंने ट क क े मािलक का नाम हरभजन िसंह बताया।इसक े बाद चालक व Jीनर 2023 INSC 424 मािलक को बुलाने क े बहाने से चले गए, लेिकन वापस नहीं लौटे।पुिलस को संदेह Iआ िक ट क म रखे बैग म क ु छ Eितबंिधत पदाथ थे, इसिलए पुिलस ने उM उतारा और उM िहरासत म ले िलया।स<पल लेकर जांच क े िलए भेजे गए।जॉच क े बाद, जोिगंदर िसंह, गुरमेल िसंह और अपीलकता क े 5खलाफ आरोप पN दायर िकया गया।ट ायल कोट/ िनचली अदालत ने जोिगंदर िसंह और गुरमेल िसंह को बरी कर िदया, Qोंिक दो गवाहों, िजMोंने अिभयोजन प: क े अनुसार ट क क े चालक और Jीनर/खलासी क े नामों क े बारे म पुिलस पाटF को सूिचत िकया था, को प:Rोही घोिषत कर िदया गया था। हालांिक, अपीलकता, जो ट क का पंजीक ृ त मािलक था, को एनडीपीएस की धारा 25 क े तहत दोषी ठहराया गया था और उ[1] 2ायालय ारा दोषिस56 को बरकरार रखा गया था।

3. अपीलकता क े िवान वकील ारा उठाया गया संि:T तक यह है िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 म Eावधान है िक वाहन क े मािलक को क े वल तभी दोषी ठहराया जा सकता है जब वह जानबूझकर िकसी अपराध क े िलए अपने वाहन का उपयोग करने की अनुमित देता है। अिभयोजन प: ारा ऐसा कोई मामला नहीं बनाया गया था।यहां तक िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 35 म उपबंिधत उपधारणा को भी नहीं उठाया जा सकता Qोंिक अिभयोजन प: मूलभूत त;ों को सािबत करने क े अपने Eारंिभक बोझ का िनवहन करने म िवफल रहा था।दंड EिWया संिहता, 1973 की धारा 313 क े तहत दज अपीलकता क े बयान म, यह EXुत िकया गया था िक उसने रेत ले जाने क े िलए ट क कYीर िसंह पुN होिशयार िसंह िनवासी दलेल िसंहवाला को िकराए पर िदया था।अपीलाथF को मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था।ट क क े चालक और Jीनर को पहले ही बरी कर िदया गया है और रा[ ने उनकी $रहाई को चुनौती देने क े िलए कोई अपील दायर नहीं की है।अपने तक\ क े समथन म, अपीलकता क े िवान वकील ने बलिवंदर िसंह बनाम सहायक आयु., सीमा शु/ और क 1ीय उ#ाद शु/ (1) {(2005) 4 एससीसी 146}, पुिलस िनरीक 2ारा रा), नारकोिटक इंटेिलजस 4ूरो, मदुरै, तिमलनाडु बनाम राजंगम (2) {(2010) 15 एससीसी 369}, भोला िसंह बनाम पंजाब रा) (3) {(2011) 11 एससीसी 653} और गंगाधर उफ गंगाराम बनाम म:;देश रा) (4) {(2020) 9 एससीसी 202} म इस 2ायालय क े िनणयों पर भरोसा िकया है।

4. दू सरी ओर, रा[ क े िवान अिधवKा ने EXुत िकया िक अपीलकता अपने मामले को सािबत करने म िवफल रहा है िक ट क का उपयोग िकसी भी अवैध गितिविधयों क े िलए नहीं िकया जा रहा था। ट क का मािलक परो:/अE^: #प से उOरदायी है।हालांिक उनक े ारा _<ड िलया गया था िक ट क रेत ले जाने क े िलए िदया गया था लेिकन उनक े ारा अपनी दलील को सािबत करने क े िलए ऐसा कोई सबूत नहीं िदया गया था।Eक`ना/धारणा उसक े 5खलाफ जाती है।

5. प:कारों क े िवान अिधवKा को सुना और संबंिधत संदिभत अिभलेख का अवलोकन िकया।

6. ऊपर देखे गए मामले क े मूल त; िववाद म नहीं ह<। अपीलकता, जो ट क का पंजीक ृ त मािलक है, को मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था। अिभयोजन प: ारा एक मामला bथािपत िकया गया था िक जोिगंदर िसंह और गुरमैल िसंह ट क क े चालक और Jीनर थे।यहां तक िक उM भी मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था।उनकी पहचान राम स#प (पीडcू-6) और नरेश क ु मार (पीडcू-10) ारा पुिलस पाटF को दी गई सूचना क े आधार पर bथािपत की गई थी।हालांिक कोट म पेश होने पर उM प:Rोही घोिषत कर िदया गया।जोिगंदर िसंह और गुरमेल िसंह को बरी कर िदया गया।अपीलकता ट क का मािलक है।उसे मौक े से िगरZार नहीं िकया गया।एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 म यह Eावधान है िक यिद िकसी वाहन का मािलक जानबूझकर उसे एनडीपीएस अिधिनयम क े तहत दंडनीय िकसी अपराध क े िलए उपयोग करने की अनुमित देता है, तो उसे तदनुसार दंिडत िकया जाएगा।

7. वतमान मामले म, अिभयोजन प: यह िदखाने क े िलए $रकॉड पर कोई साम@ी पेश करने म िवफल रहा है िक िवचाराधीन वाहन का उपयोग, यिद िकसी अवैध गितिविध क े िलए िकया गया था, तो अपीलाथF की जानकारी और सहमित से िकया गया था। यहां तक िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 35 क े तहत Eदान की गई धारणा/Eक`ना भी इस कारण से उपलd नहीं होगी िक अिभयोजन प: मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए उस पर Eारंिभक बोझ का िनवहन करने म िवफल रहा था।इसक े अभाव म िजeेदारी अिभयुK पर bथानाf$रत (िशg) नहीं होगी।

8. इस ायालय 2ारा भोला िसंह क े मामले (उपरो. ) म इस मु<े पर िवचार िकया गया था। यह राय hK की गई थी िक जब तक वाहन का उपयोग उसक े मािलक की जानकारी और सहमित से नहीं िकया जाता है, जो एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 की Eयो[ता क े िलए अिनवाय है, तब तक इसक े तहत दोषिस56 को कानूनी #प से बरकरार नहीं रखा जा सकता है।इसक े Eासंिगक पैरा@ाफ नीचे िदए गए ह<ः "8. हमने िवान अिधवKा ारा EXुत तक\ पर िवचार िकया है। हम देखते ह< िक अिधिनयम की धारा 25 वतमान मामले म लागू नहीं होगी Qोंिक यह इंिगत करने क े िलए कोई सबूत नहीं है िक भोला िसंह, अपीलकता ने या तो जानबूझकर िकसी अनुिचत उjेk क े िलए वाहन क े उपयोग की अनुमित दी थी।इस Eकार अिधिनयम की धारा 25 की Eयो[ता क े िलए अिनवाय शत सािबत नहीं होती है। 9.हालाँिक उ[1] 2ायालय ने अिधिनयम की धारा 35 क े तहत अपीलाथF क े 5खलाफ एक धारणा/Eक`ना तैयार की है। इस Eावधान को नीचे दोहराया गया हैः "35. आपरािधक मानिसक @Aथित की धारणा/;कBना. —(1) इस अिधिनयम क े अधीन िकसी ऐसे अपराध क े िकसी अिभयोजन म, िजसम अिभयुK की मानिसक दशा अपेि:त है, 2ायालय यह उपधारणा/Eक`ना करेगा िक अिभयुK की ऐसी मानिसक दशा है िकfु अिभयुK क े िलए यह त; सािबत करना एक Eितर:ा होगी िक उस अिभयोजन म अपराध क े #प म आरोिपत काय क े बारे म उसकी वैसी मानिसक दशा नहीं थी । mnीकरण इआ क े अfगत इरादा, उjेk, िकसी त; का oान और िकसी त; म िवpास या उस पर िवpास करने का कारण शािमल है । (2) इस धारा क े Eयोजन क े िलए कोई त; क े वल तभी सािबत िकया गया कहा जाता है जब 2ायालय यु5KयुK संदेह से परे यह िवpास करे िक वह त; िवqमान है और क े वल इस कारण नहीं िक उसकी िवqमानता अिधसंभाhता की Eबलता क े कारण िस[6] होती है । ”

10. अिधिनयम की धारा 54 और धारा 35 क े तहत उठाई गई उपधारणा/Eक`ना क े संदभ म कrे क े सवाल से िनपटते Iए, इस 2ायालय ने नूर आगा बनाम पंजाब रा) (2008) 16 एससीसी 417 म धारा 35 की संवैधािनक वैधता को कायम रखते Iए कहा िक चूंिक इस धारा ने एक अिभयुK पर भारी उsा बोझ डाला है (that as this section imposed a heavy reverse burden on an accused), इस और अ[2] संबंिधत धाराओं की Eयो[ता क े िलए शत\ को त;ों पर mn करना होगा और अिभयोजन प: ारा मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए Eारंिभक बोझ का िनवहन करने क े बाद ही धारा 35 लागू होगी।

11. उपरोK मामले म वतमान मामले क े त;ों को लागू करते Iए, यह mn है िक यह सािबत करने का Eारंिभक भार िक अपीलकता को यह oान था िक उसक े =ािमt वाले वाहन का उपयोग नशीले पदाथ\ क े प$रवहन क े िलए िकया जा रहा था, अभी भी अिभयोजन प: पर है, जैसा िक "जानबूझकर"शu से mn होगा, और यह सबूत क े उिचत संदेह से परे सािबत होने क े बाद ही था िक उसे oान था धारा 35 क े तहत अनुमान उvw होता है।धारा 35 म यह भी उपधारणा/ Eक`ना की गई है िक िकसी अिभयुK की आपरािधक मानिसक 5bथित को यु5KयुK संदेह से परे एक त; क े #प म सािबत िकया जाना चािहए न िक क े वल तब जब इसका अ5Xt संभाhताओं की Eचुरता ारा bथािपत िकया जाता है। हमारी राय है िक अपीलकता की मानिसक 5bथित क े संबंध म िकसी साx क े अभाव म धारा 35 क े तहत कोई उपधारणा/Eक`ना नहीं बनाई जा सकती है। एकमाN सबूत िजस पर अिभयोजन प: भरोसा करना चाहता है, वह राजbथान म अपना आवासीय पता देने म अपीलकता का आचरण है, हालांिक वह ह$रयाणा क े फतेहाबाद का िनवासी था और अपीलकता ट क को सुपरदारी पर िलया था। उyंघन करने वाले ट क का पंजीकरण िकसी भी तरह की क`ना से उसे चालक और अ[2] लोगों ारा इसक े दुzपयोग क े oान क े साथ बा{ नहीं कर सकता है। ” (जोर िदया गया)

9. मामले क े त;ों पर, यह mn है िक एफआईआर सं?ा 68 िदनांक 16.05.2000 को सब- इंmेर राम मेहर (पीडGू-8) की िशकायत पर दज िकया गया था, जो गA (पैट ॉल) Bूटी पर था जब यह पाया गया िक ट क सं?ा. पी. ए. टी./2029 उsा Iआ पड़ा था और पाउडर क े थैले िबखरे Iए थे। उM पास क े bथान क े दो दुकानदारों, अथात् राम स#प (पीडcू-6) और नरेश क ु मार (पीडcू-10) ारा सूिचत िकया गया िक दुघटना 15.05.2000 को रात 9 बजे Iई थी।दुघटना क े बाद, चालक और Jीनर/खलासी ट क क े क े िबन से बाहर आए और उK गवाहों ारा पूछताछ करने पर उMोंने अपना नाम जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह व गुरमैल िसंह पुN नछOर िसंह बताया।उMोंने खुद को ट क का चालक और Jीनर/खलासी बताया।वे उK दुघटना क े बारे म ट क क े मािलक को सूिचत करने गए थे, लेिकन वापस नहीं लौटे।ट क म Eितबंिधत पदाथ होने की आशंका होने पर ट क व Eितबंिधत सामान दोनों को कrे म ले िलया गया।

10. अिभयोजन प: क े ~ारह गवाह पेश िकए गए।अिभयोजन प: क े दो गवाह राम स#प (पीडGू-6) और नरेश क ु मार (पीडGू-10) को इस कारण से Eासंिगक कहा जा सकता है िक Eाथिमकी म उनक े नाम गवाहों क े #प म उ5y5खत िकए गए थे िजMोंने पुिलस पाटF को ट क क े चालक और Jीनर/खलासी क े नामों क े बारे म सूिचत िकया था। उMोंने इस बात से इनकार िकया िक कोई घटना उनकी उप5bथित म Iई थी या उMोंने पुिलस पाटF को क ु छ भी सूिचत िकया था। दोनों को प:Rोही घोिषत कर िदया गया।उMोंने ट क क े ड ाइवर और Jीनर/खलासी की भी पहचान नहीं की।पीडGू-7 एएसआई राम स#प पुिलस _ेशन अ@ोहा म सब-इंmेर राम मेहर (पीडGू-8) क े साथ तैनात थे, जो Eाथिमकी क े लेखक थे।अपने साx म Eाथिमकी म कही गई बातों को दोहराने क े अलावा, उMोंने कहा िक 19.05.2000 को नई अनाज मंडी, बरवाला िनवासी बलवान िसंह पुN चतर िसंह ने कहा िक जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह और गुरमेल िसंह पुN नछOर, किथत ट क क े ड ाइवर और Jीनर/खलासी ने उनक े सामने कहा िक वे हरभजन िसंह क े िनदश पर चूरापोX क े इ€ीस बैग/थैले पाउडर क े साथ राजbथान से लाए ह< और अ@ोहा म उनका ट क पलट गया। चूंिक पुिलस दल उनकी तलाश म था, उMोंने कहा िक उM पुिलस क े सामने पेश िकया जाए।त; यह है िक बलवान िसंह पुN चतर िसंह को साx म पेश नहीं िकया गया था।अिभयोजन प: ारा यह मामला bथािपत करने की चेnा की गई है िक ट क क े चालक और Jीनर/ खलासी ने बलवान िसंह पुN चतर िसंह क े सम: अित$रK 2ाियक =ीकारो5K (extra judicial confession) की।राम मेहर, जो Eाथिमकी का लेखक है, पीडGू-8 क े #प म पेश Iआ।उनक े बयान म भी अपीलकता क े 5खलाफ क ु छ भी नहीं कहा गया है। उMोंने जांच क े दौरान दज बलवान िसंह पुN चतर िसंह क े बयान का भी िजW िकया, िजसे साx क े तौर पर पेश नहीं िकया गया।

11. अपीलकता ने दंड EिWया संिहता की धारा 313 क े तहत दज अपने बयान म सभी सुझावों का खंडन िकया। अिभयोजन प: क े ारा EXुत िकये गए पूरे साx म, मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए यािन Eारंिभक बोझ का िनवहन करने क े िलए अपीलकता क े 5खलाफ कोई साम@ी पेश नहीं की गई थी िक अपराध अपीलकता की जानकारी और सहमित से िकया गया था।यह एक ऐसा मामला है िजसम वह वाहन क े साथ नहीं था और न ही उसे दुघटना क े समय घटनाbथल से िगरZार िकया गया था या जब ट क और Eितबंिधत सामान को िहरासत म िलया गया था।उसे क े वल इस आधार पर दोषी ठहराया गया है िक वह ट क का पंजीक ृ त मािलक था।ट ायल कोट/ िनचली अदालत ने वाहन क े पंजीक ृ त मािलक होने क े नाते अपीलकता पर बचाव का पूरा भार डाल िदया था।2ायालय ने अिभिनधा$रत िकया िक वाहन का चालक और Jीनर/खलासी गरीब होने क े कारण मािलक की िमलीभगत क े िबना इतनी बड़ी माNा म तरी का जो5खम नहीं उठाएं गे और अपीलकता को अपना प: mn करना था।ट ायल कोट/ िनचली अदालत क े फ ै सले को हाईकोट ने बरकरार रखा था।

12. इस मामले म, अपीलकता को दोषी ठहराते समय अधीनbथ 2ायालयों ारा की गई Eाथिमक Nुिट यह है िक अिभयोजन प: ारा मूलभूत त;ों को सािबत िकए िबना अपनी बेगुनाही सािबत करने क े िलए उस पर िजeेदारी bथानांत$रत करने की चेnा की गई है। इसिलए, अपीलकता की दोषिस56 को कानूनी #प से कायम नहीं रखा जा सकता है।

13. उपरोK कारणों से अपील =ीकार की जाती है। अधीनbथ 2ायालयों ारा पा$रत िनणयों को अपाX िकया जाता है।अपीलाथF क े जमानत बांड का उ‚ोचन हो जाता है। ______________, 2ायाधीश (अभय एस. ओका) ______________, 2ायाधीश (राजेश िबंदल) नई िदyी। 25 अEैल, 2023 // वी जे - एम बी // vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m|s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA