Full Text
रपोट करने यो
भारत क
े सव ायालय म
आपरािधक अपीलीय े ािधकार
2011 की आपरािधक अपील संा 1480
(2010 की एस एल पी (सीआरएल ) संा 10543 से उ#$ )
हरभजन िसंह ... अपीलकता
बनाम
हरयाणा रा) ... उ*रदाता
िनणय
राजेश िबंदल, जे.
JUDGMENT
1. अपीलकता-हरभजन िसंह को 18.05.2005 को ट ायल कोट ारा नारकोिटक ड एं ड साइकोट ोिपक सटस ए, 1985 की धारा 25 (इसक े बाद "एनडीपीएस अिधिनयम"क े #प म संदिभत) क े तहत पा$रत फ ै सले क े तहत दोषी ठहराया गया था और दस साल की अविध क े िलए कारावास की सजा सुनाई गई थी। अपील म, उ[1] 2ायालय ारा िदनांक 14.05.2010 क े आदेश ारा अपीलकता की दोषिस56 और सजा को बरकरार रखा गया था।इन आदेशों को इस 2ायालय म चुनौती दी जा रही है।
2. सं:ेप म, मामले क े त; यह ह< िक अपीलकता उस ट क का =ामी था िजसका पंजीकरण सं?ा पीएटी/2029 था। यह हनुमान मंिदर, िहसार रोड, @ाम अ@ोहा क े पास िदनांक 15.05.2000 को रात 9:00 बजे पलट गई।गAी Bूटी पर तैनात पुिलस दल ारा दी गई जानकारी पर 16.05.2000 को अपराD 4:25 बजे Eथम सूचना $रपोट (एफआईआर) सं?ा 68 दज की गई। पुिलस पाटF को दो गवाहों राम स#प (पीडGू-6) और नरेश क ु मार (पीडGू-10) ारा दी गई जानकारी क े अनुसार 15.05.2000 को रात लगभग 9 बजे दुघटना Iई जब ट क िडवाइडर से टकरा गया।चालक और Jीनर ट क से बाहर आए और उK गवाहों ारा पूछताछ करने पर उMोंने अपना नाम जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह और गुरमेल िसंह पुN नछOर िसंह बताया।उMोंने ट क क े मािलक का नाम हरभजन िसंह बताया।इसक े बाद चालक व Jीनर मािलक को बुलाने क े बहाने से चले गए, लेिकन वापस नहीं लौटे।पुिलस को संदेह Iआ िक ट क म रखे बैग म क ु छ Eितबंिधत पदाथ थे, इसिलए पुिलस ने उM उतारा और उM िहरासत म ले िलया।स<पल लेकर जांच क े िलए भेजे गए।जॉच क े बाद, जोिगंदर िसंह, गुरमेल िसंह और अपीलकता क े 5खलाफ आरोप पN दायर िकया गया।ट ायल कोट/ िनचली अदालत ने जोिगंदर िसंह और गुरमेल िसंह को बरी कर िदया, Qोंिक दो गवाहों, िजMोंने अिभयोजन प: क े अनुसार ट क क े चालक और Jीनर/खलासी क े नामों क े बारे म पुिलस पाटF को सूिचत िकया था, को प:Rोही घोिषत कर िदया गया था। हालांिक, अपीलकता, जो ट क का पंजीक ृ त मािलक था, को एनडीपीएस की धारा 25 क े तहत दोषी ठहराया गया था और उ[1] 2ायालय ारा दोषिस56 को बरकरार रखा गया था।
3. अपीलकता क े िवान वकील ारा उठाया गया संि:T तक यह है िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 म Eावधान है िक वाहन क े मािलक को क े वल तभी दोषी ठहराया जा सकता है जब वह जानबूझकर िकसी अपराध क े िलए अपने वाहन का उपयोग करने की अनुमित देता है। अिभयोजन प: ारा ऐसा कोई मामला नहीं बनाया गया था।यहां तक िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 35 म उपबंिधत उपधारणा को भी नहीं उठाया जा सकता Qोंिक अिभयोजन प: मूलभूत त;ों को सािबत करने क े अपने Eारंिभक बोझ का िनवहन करने म िवफल रहा था।दंड EिWया संिहता, 1973 की धारा 313 क े तहत दज अपीलकता क े बयान म, यह EXुत िकया गया था िक उसने रेत ले जाने क े िलए ट क कYीर िसंह पुN होिशयार िसंह िनवासी दलेल िसंहवाला को िकराए पर िदया था।अपीलाथF को मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था।ट क क े चालक और Jीनर को पहले ही बरी कर िदया गया है और रा[ ने उनकी $रहाई को चुनौती देने क े िलए कोई अपील दायर नहीं की है।अपने तक\ क े समथन म, अपीलकता क े िवान वकील ने बलिवंदर िसंह बनाम सहायक आयु., सीमा शु/ और क 1ीय उ#ाद शु/ (1) {(2005) 4 एससीसी 146}, पुिलस िनरीक 2ारा रा), नारकोिटक इंटेिलजस 4ूरो, मदुरै, तिमलनाडु बनाम राजंगम (2) {(2010) 15 एससीसी 369}, भोला िसंह बनाम पंजाब रा) (3) {(2011) 11 एससीसी 653} और गंगाधर उफ गंगाराम बनाम म:;देश रा) (4) {(2020) 9 एससीसी 202} म इस 2ायालय क े िनणयों पर भरोसा िकया है।
4. दू सरी ओर, रा[ क े िवान अिधवKा ने EXुत िकया िक अपीलकता अपने मामले को सािबत करने म िवफल रहा है िक ट क का उपयोग िकसी भी अवैध गितिविधयों क े िलए नहीं िकया जा रहा था। ट क का मािलक परो:/अE^: #प से उOरदायी है।हालांिक उनक े ारा _<ड िलया गया था िक ट क रेत ले जाने क े िलए िदया गया था लेिकन उनक े ारा अपनी दलील को सािबत करने क े िलए ऐसा कोई सबूत नहीं िदया गया था।Eक`ना/धारणा उसक े 5खलाफ जाती है।
5. प:कारों क े िवान अिधवKा को सुना और संबंिधत संदिभत अिभलेख का अवलोकन िकया।
6. ऊपर देखे गए मामले क े मूल त; िववाद म नहीं ह<। अपीलकता, जो ट क का पंजीक ृ त मािलक है, को मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था। अिभयोजन प: ारा एक मामला bथािपत िकया गया था िक जोिगंदर िसंह और गुरमैल िसंह ट क क े चालक और Jीनर थे।यहां तक िक उM भी मौक े से िगरZार नहीं िकया गया था।उनकी पहचान राम स#प (पीडcू-6) और नरेश क ु मार (पीडcू-10) ारा पुिलस पाटF को दी गई सूचना क े आधार पर bथािपत की गई थी।हालांिक कोट म पेश होने पर उM प:Rोही घोिषत कर िदया गया।जोिगंदर िसंह और गुरमेल िसंह को बरी कर िदया गया।अपीलकता ट क का मािलक है।उसे मौक े से िगरZार नहीं िकया गया।एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 म यह Eावधान है िक यिद िकसी वाहन का मािलक जानबूझकर उसे एनडीपीएस अिधिनयम क े तहत दंडनीय िकसी अपराध क े िलए उपयोग करने की अनुमित देता है, तो उसे तदनुसार दंिडत िकया जाएगा।
7. वतमान मामले म, अिभयोजन प: यह िदखाने क े िलए $रकॉड पर कोई साम@ी पेश करने म िवफल रहा है िक िवचाराधीन वाहन का उपयोग, यिद िकसी अवैध गितिविध क े िलए िकया गया था, तो अपीलाथF की जानकारी और सहमित से िकया गया था। यहां तक िक एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 35 क े तहत Eदान की गई धारणा/Eक`ना भी इस कारण से उपलd नहीं होगी िक अिभयोजन प: मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए उस पर Eारंिभक बोझ का िनवहन करने म िवफल रहा था।इसक े अभाव म िजeेदारी अिभयुK पर bथानाf$रत (िशg) नहीं होगी।
8. इस ायालय 2ारा भोला िसंह क े मामले (उपरो. ) म इस मु<े पर िवचार िकया गया था। यह राय hK की गई थी िक जब तक वाहन का उपयोग उसक े मािलक की जानकारी और सहमित से नहीं िकया जाता है, जो एनडीपीएस अिधिनयम की धारा 25 की Eयो[ता क े िलए अिनवाय है, तब तक इसक े तहत दोषिस56 को कानूनी #प से बरकरार नहीं रखा जा सकता है।इसक े Eासंिगक पैरा@ाफ नीचे िदए गए ह<ः "8. हमने िवान अिधवKा ारा EXुत तक\ पर िवचार िकया है। हम देखते ह< िक अिधिनयम की धारा 25 वतमान मामले म लागू नहीं होगी Qोंिक यह इंिगत करने क े िलए कोई सबूत नहीं है िक भोला िसंह, अपीलकता ने या तो जानबूझकर िकसी अनुिचत उjेk क े िलए वाहन क े उपयोग की अनुमित दी थी।इस Eकार अिधिनयम की धारा 25 की Eयो[ता क े िलए अिनवाय शत सािबत नहीं होती है। 9.हालाँिक उ[1] 2ायालय ने अिधिनयम की धारा 35 क े तहत अपीलाथF क े 5खलाफ एक धारणा/Eक`ना तैयार की है। इस Eावधान को नीचे दोहराया गया हैः "35. आपरािधक मानिसक @Aथित की धारणा/;कBना. —(1) इस अिधिनयम क े अधीन िकसी ऐसे अपराध क े िकसी अिभयोजन म, िजसम अिभयुK की मानिसक दशा अपेि:त है, 2ायालय यह उपधारणा/Eक`ना करेगा िक अिभयुK की ऐसी मानिसक दशा है िकfु अिभयुK क े िलए यह त; सािबत करना एक Eितर:ा होगी िक उस अिभयोजन म अपराध क े #प म आरोिपत काय क े बारे म उसकी वैसी मानिसक दशा नहीं थी । mnीकरण इआ क े अfगत इरादा, उjेk, िकसी त; का oान और िकसी त; म िवpास या उस पर िवpास करने का कारण शािमल है । (2) इस धारा क े Eयोजन क े िलए कोई त; क े वल तभी सािबत िकया गया कहा जाता है जब 2ायालय यु5KयुK संदेह से परे यह िवpास करे िक वह त; िवqमान है और क े वल इस कारण नहीं िक उसकी िवqमानता अिधसंभाhता की Eबलता क े कारण िस[6] होती है । ”
10. अिधिनयम की धारा 54 और धारा 35 क े तहत उठाई गई उपधारणा/Eक`ना क े संदभ म कrे क े सवाल से िनपटते Iए, इस 2ायालय ने नूर आगा बनाम पंजाब रा) (2008) 16 एससीसी 417 म धारा 35 की संवैधािनक वैधता को कायम रखते Iए कहा िक चूंिक इस धारा ने एक अिभयुK पर भारी उsा बोझ डाला है (that as this section imposed a heavy reverse burden on an accused), इस और अ[2] संबंिधत धाराओं की Eयो[ता क े िलए शत\ को त;ों पर mn करना होगा और अिभयोजन प: ारा मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए Eारंिभक बोझ का िनवहन करने क े बाद ही धारा 35 लागू होगी।
11. उपरोK मामले म वतमान मामले क े त;ों को लागू करते Iए, यह mn है िक यह सािबत करने का Eारंिभक भार िक अपीलकता को यह oान था िक उसक े =ािमt वाले वाहन का उपयोग नशीले पदाथ\ क े प$रवहन क े िलए िकया जा रहा था, अभी भी अिभयोजन प: पर है, जैसा िक "जानबूझकर"शu से mn होगा, और यह सबूत क े उिचत संदेह से परे सािबत होने क े बाद ही था िक उसे oान था धारा 35 क े तहत अनुमान उvw होता है।धारा 35 म यह भी उपधारणा/ Eक`ना की गई है िक िकसी अिभयुK की आपरािधक मानिसक 5bथित को यु5KयुK संदेह से परे एक त; क े #प म सािबत िकया जाना चािहए न िक क े वल तब जब इसका अ5Xt संभाhताओं की Eचुरता ारा bथािपत िकया जाता है। हमारी राय है िक अपीलकता की मानिसक 5bथित क े संबंध म िकसी साx क े अभाव म धारा 35 क े तहत कोई उपधारणा/Eक`ना नहीं बनाई जा सकती है। एकमाN सबूत िजस पर अिभयोजन प: भरोसा करना चाहता है, वह राजbथान म अपना आवासीय पता देने म अपीलकता का आचरण है, हालांिक वह ह$रयाणा क े फतेहाबाद का िनवासी था और अपीलकता ट क को सुपरदारी पर िलया था। उyंघन करने वाले ट क का पंजीकरण िकसी भी तरह की क`ना से उसे चालक और अ[2] लोगों ारा इसक े दुzपयोग क े oान क े साथ बा{ नहीं कर सकता है। ” (जोर िदया गया)
9. मामले क े त;ों पर, यह mn है िक एफआईआर सं?ा 68 िदनांक 16.05.2000 को सब- इंmेर राम मेहर (पीडGू-8) की िशकायत पर दज िकया गया था, जो गA (पैट ॉल) Bूटी पर था जब यह पाया गया िक ट क सं?ा. पी. ए. टी./2029 उsा Iआ पड़ा था और पाउडर क े थैले िबखरे Iए थे। उM पास क े bथान क े दो दुकानदारों, अथात् राम स#प (पीडcू-6) और नरेश क ु मार (पीडcू-10) ारा सूिचत िकया गया िक दुघटना 15.05.2000 को रात 9 बजे Iई थी।दुघटना क े बाद, चालक और Jीनर/खलासी ट क क े क े िबन से बाहर आए और उK गवाहों ारा पूछताछ करने पर उMोंने अपना नाम जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह व गुरमैल िसंह पुN नछOर िसंह बताया।उMोंने खुद को ट क का चालक और Jीनर/खलासी बताया।वे उK दुघटना क े बारे म ट क क े मािलक को सूिचत करने गए थे, लेिकन वापस नहीं लौटे।ट क म Eितबंिधत पदाथ होने की आशंका होने पर ट क व Eितबंिधत सामान दोनों को कrे म ले िलया गया।
10. अिभयोजन प: क े ~ारह गवाह पेश िकए गए।अिभयोजन प: क े दो गवाह राम स#प (पीडGू-6) और नरेश क ु मार (पीडGू-10) को इस कारण से Eासंिगक कहा जा सकता है िक Eाथिमकी म उनक े नाम गवाहों क े #प म उ5y5खत िकए गए थे िजMोंने पुिलस पाटF को ट क क े चालक और Jीनर/खलासी क े नामों क े बारे म सूिचत िकया था। उMोंने इस बात से इनकार िकया िक कोई घटना उनकी उप5bथित म Iई थी या उMोंने पुिलस पाटF को क ु छ भी सूिचत िकया था। दोनों को प:Rोही घोिषत कर िदया गया।उMोंने ट क क े ड ाइवर और Jीनर/खलासी की भी पहचान नहीं की।पीडGू-7 एएसआई राम स#प पुिलस _ेशन अ@ोहा म सब-इंmेर राम मेहर (पीडGू-8) क े साथ तैनात थे, जो Eाथिमकी क े लेखक थे।अपने साx म Eाथिमकी म कही गई बातों को दोहराने क े अलावा, उMोंने कहा िक 19.05.2000 को नई अनाज मंडी, बरवाला िनवासी बलवान िसंह पुN चतर िसंह ने कहा िक जोिगंदर िसंह पुN जंग िसंह और गुरमेल िसंह पुN नछOर, किथत ट क क े ड ाइवर और Jीनर/खलासी ने उनक े सामने कहा िक वे हरभजन िसंह क े िनदश पर चूरापोX क े इीस बैग/थैले पाउडर क े साथ राजbथान से लाए ह< और अ@ोहा म उनका ट क पलट गया। चूंिक पुिलस दल उनकी तलाश म था, उMोंने कहा िक उM पुिलस क े सामने पेश िकया जाए।त; यह है िक बलवान िसंह पुN चतर िसंह को साx म पेश नहीं िकया गया था।अिभयोजन प: ारा यह मामला bथािपत करने की चेnा की गई है िक ट क क े चालक और Jीनर/ खलासी ने बलवान िसंह पुN चतर िसंह क े सम: अित$रK 2ाियक =ीकारो5K (extra judicial confession) की।राम मेहर, जो Eाथिमकी का लेखक है, पीडGू-8 क े #प म पेश Iआ।उनक े बयान म भी अपीलकता क े 5खलाफ क ु छ भी नहीं कहा गया है। उMोंने जांच क े दौरान दज बलवान िसंह पुN चतर िसंह क े बयान का भी िजW िकया, िजसे साx क े तौर पर पेश नहीं िकया गया।
11. अपीलकता ने दंड EिWया संिहता की धारा 313 क े तहत दज अपने बयान म सभी सुझावों का खंडन िकया। अिभयोजन प: क े ारा EXुत िकये गए पूरे साx म, मूलभूत त;ों को सािबत करने क े िलए यािन Eारंिभक बोझ का िनवहन करने क े िलए अपीलकता क े 5खलाफ कोई साम@ी पेश नहीं की गई थी िक अपराध अपीलकता की जानकारी और सहमित से िकया गया था।यह एक ऐसा मामला है िजसम वह वाहन क े साथ नहीं था और न ही उसे दुघटना क े समय घटनाbथल से िगरZार िकया गया था या जब ट क और Eितबंिधत सामान को िहरासत म िलया गया था।उसे क े वल इस आधार पर दोषी ठहराया गया है िक वह ट क का पंजीक ृ त मािलक था।ट ायल कोट/ िनचली अदालत ने वाहन क े पंजीक ृ त मािलक होने क े नाते अपीलकता पर बचाव का पूरा भार डाल िदया था।2ायालय ने अिभिनधा$रत िकया िक वाहन का चालक और Jीनर/खलासी गरीब होने क े कारण मािलक की िमलीभगत क े िबना इतनी बड़ी माNा म तरी का जो5खम नहीं उठाएं गे और अपीलकता को अपना प: mn करना था।ट ायल कोट/ िनचली अदालत क े फ ै सले को हाईकोट ने बरकरार रखा था।
12. इस मामले म, अपीलकता को दोषी ठहराते समय अधीनbथ 2ायालयों ारा की गई Eाथिमक Nुिट यह है िक अिभयोजन प: ारा मूलभूत त;ों को सािबत िकए िबना अपनी बेगुनाही सािबत करने क े िलए उस पर िजeेदारी bथानांत$रत करने की चेnा की गई है। इसिलए, अपीलकता की दोषिस56 को कानूनी #प से कायम नहीं रखा जा सकता है।
13. उपरोK कारणों से अपील =ीकार की जाती है। अधीनbथ 2ायालयों ारा पा$रत िनणयों को अपाX िकया जाता है।अपीलाथF क े जमानत बांड का उोचन हो जाता है। ______________, 2ायाधीश (अभय एस. ओका) ______________, 2ायाधीश (राजेश िबंदल) नई िदyी। 25 अEैल, 2023 // वी जे - एम बी // vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m|s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA