A. A. Global Pvt. Ltd. v. Indian Chemical Pvt. Ltd.

High Court of Bombay · 11 Jan 2021 · 2023 INSC 423
K. M. Gossaf
Nidwaran Appeal No. 3802-3803/2020
2023 INSC 423
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the exclusive jurisdiction of stamp adjudicating authorities under the Madras Stamp Act and ruled that stamp duty disputes are non-arbitrable under the Arbitration Act, affirming penalties for insufficiently stamped documents.

Full Text
Translation output
(इंग्रजी मध्ये टंकलि खि त न्या यनि र्णय चा मरा ठी अ वा द)
भा रात च्या सवा$च्च न्या य य त
निदवा र्ण अपी अलि'क रिरात
निदवा र्ण अपी क्र. ३८०२-३८०३/२०२०
मसस ए . ए . ग्लो3ब मक
5 टं इं प्रा यव्हेटं लि लिमटंड ….. अपी र्थी;
निवारुद्ध
मसस इंड3 यनि क फ् म लि . आलिर्ण इंतरा ..… प्रानितवा द
न्या यनि र्णय
क. एम जी3सफ, न्या यमBत; .
अ क्रमलिर्णक
ए ) सदभा ३
ब ) ए . ए . ग्लो3ब प्राकरार्ण त घटं चा निवाहंगा वा 3क ५
स )
मद्रां क वा ल्या करा रा म्या त अतभाBत वा द करा रा म्या चा
वाJ'त ह्या मर्थीळ्या मद्दय शी सबलि'त ए . ए . ग्लो3ब
प्राकरार्ण त नि ष्कर्ष

ड ) पीक्षक रा चा यखिSवा द २०
ई ) निवाश्लेर्षर्ण ३७
एफ ) अलि'नि यम ३८
2023 INSC 423
जी ) क म १६(अ) चा अतभा वा कशी मळे झा ? ४१
एचा ) मद्रां क अलि'नि यम चा य3जी ६७
आय ) निहंदस्था स्टी मय निदत प्राकरार्ण त निवाश्लेर्षर्ण ७७
जी )
भा रात य सनिवाद अलि'नि यम, १८७२ - एक सवा^क्षर्ण; गारावा रा, निवाद्या डa3लि य , ए . ए . ग्लो3ब ह्या प्राकरार्ण चा सम क्ष
८३
क ) मद्रां क अलि'नि यम - हं एक प्रानिक्रय त्मक क यद आहं क ? ११४
ए ) अलि'नि यम चा क म ७ - त्या चा प्राभा वा १२४
एम ) पीय य दृनिeक3 १३३
ए ) न्या य य लिमत्रा कडB आश्चय चा 'क्का १४०
ओ )
मद्रां क अलि'नि यम त क म ३३ वा ३५ ; न्या य य
क रावा ई करा वा निकवा वा द ?
१५४
पी ) वा द करा रा, एक सस्पe करा रा आलिर्ण त्या चा प्राभा वा १६१
क्यु ) नि ष्कर्ष १६२
१. आम्ही आमचा आदरार्ण य ब'B अजीय रास्तो3गा , न्या यमBत; आलिर्ण ऋनिर्षकशी राoय, न्या यमBत; य तय रा क ल्या न्या यनि र्णय च्या मसद्या चा अवा 3क क आहं.
आमच्या निवाद्वा ब'Bबद्द म पी सB आदरा व्यS करात3 पीरात , आम्ही हं स्पe क
पी निहंजी कr त्या म ड क रार्णम म स आलिर्ण क ढ नि ष्कर्ष य च्या शी सहंमत
हं3ऊ शीकत हं . त्या मळे पीढ न्या यनि र्णय.
अ . सदभा
२. त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी , निद क ११. ०१. २०२१ च्या नि क द्वा रा
निदवा र्ण अपी क्रम क ३८०२-३८०३/२०२० नि क क ढ . ए . ए . ग्लो3ब
मक
5 टं इं प्रा यव्हेटं लि लिमटंड निवारुद्ध इंड3. यनि क फ् म लि लिमटंड आलिर्ण इंतरा 1
मध्ये हं
नि क 3दवा गा आहं. सदभा च्या उद्दशी स ठी क य ससबद्ध आहं त
प्राम र्ण आहं:
५६. आमचा अस स 'कब 'क मत आहं कr, एस. एम. एस. टं
इंस्टीट्स [एसएमएस टं इंस्टीट्स (पी ) लि लिमटंड निवा. चा दम रा टं कपी
(पी ) लि लिमटंड., (२०११) १४ एसस स ६६ : (२०१२) ४ एसस स
(निदवा र्ण ) ७७७] आलिर्ण गारावा रा [गारावा रा वाo रा3प्स लि लिमटंड निवारुद्ध
क3स्टी मरिरा क
} न्स्ट्रaक्शन्स आलिर्ण इंलिजीनि अरिरागा लि लिमटंड (२०१९)९
एस. स . स २०९ : (२०१९) ४ एसस स (निदवा र्ण ) ३२४ ] ह्या
प्राकरार्ण त नि ष्कर्ष जीस कr व्य वास नियक करा रा वारा मद्रां क शील्क
भाराल्या वा द करा रा द अवाJ' हं3ई आलिर्ण त्या मळे त3
क यदय स रा अखिस्तोत्वा त स आलिर्ण त्या चा अम बजी वार्ण
1 (२०२१) ४ ३७९
एस स स
करात यऊ शीकर्ण रा हं3ई , हं क यद्या च्या दृe क3 तB य3ग्य
खिस्थात हं .
५७. म . समन्वय पी ठी निवाद्या डa3लि य [ निवाद्या डa3लि य निवारुद्ध दगा
टंaनिडगा क पी$राशी ., (२०२१) २ एसस स १ : (२०२१) १ एसस स
(निदवा र्ण ) ५४९ ] ह्या प्राकरार्ण म' नि क च्या पीरिराच्छेद १४६ आलिर्ण
१४७ मध्ये निद नि ष्कर्ष क्ष त घत , ज्या द्वा रा गारावा रा [गारावा रा वाo
रा3प्स लि . निवा. क3स्टी मरिरा क
} न्स्ट्रaक्शन्स आलिर्ण इंलिजीनि अरिरागा
लि लिमटंड (२०१९)९ एसस स २०९ : (२०१९) ४ एसस स (निदवा र्ण )
३२४ ], वारा मद्द य य य च्या घटं पी ठी द्वा रा अलि'क̂तपीर्ण
नि लिर्णत करार्ण आवाश्यक आहं.
५८. य य य च्या पी चा य ' शी च्या घटं पी ठी द्वा रा अलि'क̂तपीर्ण
नि लिर्णत कराण्या स ठी मद्द त्या च्या सम3रा पी ठीनिवार्ण आम्ही य3ग्य
म त3:
“ मद्रां क अलि'नि यम, १८९९ च्या क म ३५ मध्ये तरातBद क
वाJ' नि क प्रानितब', जी3 अलि'नि यम च्या क म ३ स3बत त्या त
अ सBचा अतगात मद्रां क शील्क आक रार्ण य अस स य गाB
हं3त3, त्या मळे अशी स मध्ये अतभाBत वा द करा रा म, ज्या वारा
मद्रां क शील्क भारार्ण करार्ण आवाश्यक हं , त मBळे करा रा / स
य वारा मद्रां क शील्क भारार्ण कल्या मळे, अखिस्तोत्वा त स , अम
बजी वार्ण हं3ऊ शीकर्ण रा अर्थीवा अवाJ' ठीरू शीकत त क ?
ब ) ए . ए . ग्लो3ब म' तथ्यां चा निवाहंगा वा 3क
३. पीनिहंल्या उत्तरावा द , ज्या क म चा आदशी दण्या त आ हं3त, त्या
अपी कत्या स3बत उपी-करा रा क . क म च्या आदशी त क म १०, ज्या मध्ये उपी-
करा रा क राण्या सब' चा सम वाशी आहं, वा द ब बतचा तरातBद करात3. अपी कत्या
क म ९ स रा ब• क गा}राटं निद हं3त . सदरा हंम चा म गार्ण कल्या मळे अपी कत्या
ब• क हंम च्या रा3 करार्ण निवारुद्ध द वा द क . प्रार्थीम प्रानितवा द वा द आलिर्ण
समटं अलि'नि यम, १९९६ च्या क म ८ अन्व्य अजी करू प्राकरार्ण वा द कड
स3पीनिवाण्या चा निवा त क . (य पीढ र्थी3डक्यु त ‘ अलि'नि यम’ म्हीर्णB सदलिभात).
त्या तरा, पीनिहंल्या प्रानितवा द क म ८ अन्वयचा अजी मजीBरा करार्ण ऱ्या व्य वास नियक
य यच्या आदशी आव्हे दर्ण रा रिराटं य लिचाक द क हं3त . त्या त द
वा द पीJकr एक अस हं3त कr क म च्या आदशी वारा मद्रां क सल्या मळे वा द च्या
करा रा चा अम बजी वार्ण हं3ऊ शीकत हं . म त्रा, उच्च न्या य य प्रार्थीम प्रानितवा द
द क रिराटं य लिचाक मजीBरा क . भा रात य मद्रां क अलि'नि यम , १८९९ ( य पीढ
र्थी3डक्यु त ‘मद्रां क अलि'नि यम’ म्हीर्णB सदलिभात) म' तरातद स रा जीरा वाक
ऑडरावारा मद्रां क वा स आलिर्ण त्या चा अम बजी वार्ण हं3ऊ शीकत स
तरा हं , वा द करा रा अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य असत3 क आलिर्ण त्या वारा क रावा ई
क जी ई क , हं मद्द य डपी ठी सम3रा निवाचा रा र्थी हं3त .
स ) मद्रां क वा ल्या करा रा म्या त वा द करा रा म्या चा वाJ'त
ह्या शी र्षक मद्द्यां शी सबलि'त ए .ए . ग्लो3ब प्राकरार्ण त
नि ष्कर्ष :-
४. न्या य य अस आढळे कr वा द करा रा हं एक सस्पe आलिर्ण वागाळे करा रा
आहं, जी3 त3 अतभाBत अस ल्या ठी3स व्य वास नियक करा रा पी सB स्वतत्रा आहं.
कoम्पेटंन्झ - कoम्पेटंन्झच्या लिसद्ध त स रा, वा द न्या य लि'करार्ण वा द च्या
करा रा च्या अखिस्तोत्वा, वाJ'त आलिर्ण व्य प्ती सदभा त आक्षपी सहं, स्वतš च्या अलि'क रिरात
क्षत्रा वारा शी स कराण्या चा क्षमत हं3त . क यद्या च्या क म १६ (१) चा आ' रा घण्या त
आ . न्या य य कoम्पेटंन्झ - कoम्पेटंन्झच्या लिसद्ध त च्या समर्थी र्थी कस
क यद्या च्या निवापी सदभा निद . अलि'नि यम च्या क म ५ मध्ये कम त कम
न्या य य हंस्तोक्षपी चा निवाचा रा कराण्या त आ आहं. न्या य य महं रा ea मद्रां क
अलि'नि यम, १९५८. चा सदभा निद . य क यद्या त क म ३४ हं मB तš , मद्रां क
अलि'नि यम, १८९९ च्या ज्या य पीढ मद्रां क क यद म्हीर्णB सब3' जी ई , त्या त
क म ३५ सहं एक चा निवार्षय शी सबलि'त आहं. इंतराहं तरातद आहंत ज्या मB तš तरा
उल्ले क ल्या अलि'नि यम त सम निवाe अस ल्या तशी चा स्वरूपी चा अ सरार्ण करात त.
न्या य य , त्या तरा, महं रा ea मद्रां क अलि'नि यम, १९५८ च्या अ सBचा १ म' ब ब
क्र. ६३ चा सदभा निद , ज्या मध्ये ‘वार्क्स कoन्ट्रॅa}क्ट’ ब बत निवाचा रा कराण्या त आ आहं.
अस आढळेB आ कr मद्रां क क यद हं एक आलिर्थीक उपी य आहं. त्या तरा, न्या य य एसएमएस टं इंस्टीट्स प्रा यव्हेटं लि लिमटंड निवा . चा दम रा टं कपी प्रा यव्हेटं
लि लिमटंड2
मध्ये 3दनिवाल्याल्या य न्या य य च्या नि क वारा चाचा क . न्या य य
2 (२०११) १४ ६६
एस स स
एसएमएस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त ) म' नि क च्या पीढ भा गा चा सदभा
निद :
“१९. मद्रां क क यद्या च्या क म ३५ च्या सदभा त, जी3पीय5त स च्या
सब' त मद्रां क शील्क आलिर्ण दड भारा जी त हं , त3पीय5त न्या य य
सबलि'त स वारा आ' रू क रावा ई करू शीकत हं , य चा अर्थी अस
कr त3 वा द करा रा जी3 स चा एक भा गा आहं, त्या वारा द
आ' रू क रावा ई करू शीकत हं . 3दर्ण स ल्या दस्तोऐवाजी च्या
सदभा त मद्रां क अलि'नि यम चा क म ३५ हं 3दर्ण अलि'नि यम च्या क म
४९ पीक्ष सस्पस्टी आलिर्ण वागाळे आहं. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५
मध्ये, 3दर्ण अलि'नि यम च्या क म ४९ स रा पीरातक चा तरातBद क
हं ज्या मळे सपी लि¡क व्यवाहं रा स्था निपीत कराण्या स ठी स चा वा पीरा
क जी ऊ शीकत3. xxx xxx xxx
२१. म्हीर्णB , जी£व्हे वा द करा रा चा द वा कराण्या स ठी भा डपीट्टी करा रा
निकवा इंतरा क3र्णत्या हं स वारा अवा बB असत त त£व्हे न्या य य
सरुवा त चा त्या ब बत निवाचा रा क पी निहंजी, कr त्या ब जीB आक्षपी
घण्या त आ आहं कr हं , दस्तोऐवाजी वारा य3ग्य त मद्रां क वा आहंत
कr हं . जीरा त्या वारा य3ग्य त मद्रां क लिचाटंकवा हं त अस नि ष्कर्ष
आ , तरा त3 अवारुद्ध क जी वा आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम च्या क म
३८ मध्ये नि निदe क ल्या पीद्धत व्यवाहं रा क जी वा . न्या य य अशी
दस्तोऐवाजी वारा निकवा त्या त वा द च्या क म वारा आ' रू क रावा ई
करू शीकत हं . पीरात जीरा कम भारार्ण क शील्क आलिर्ण दड, मद्रां क
क यदय च्या , क म ३५ निकवा क म ४० मध्ये मBद क ल्या पीद्धत
भारा अस , तरा स मध्ये मBद क रावा ई क जी ऊ शीकत निकवा त3
पीरा वा म्हीर्णB स्व क रा जी ऊ शीकत3.
५. न्या य य च्या पीढ अस नि दशी स आ कr, ज्या वाळे¥ एसएमएस टं इंस्टीट्स
(उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण मध्ये नि र्णय दण्या त आ , त्या वाळे¥ अलि'नि यम च्या क म
११ अतगात वा द कड प्राकरार्ण चा निवाण्या स ठी सपीBद कराण्या सबलि'त क यद , घटं पी ठी इंतरा प्राकरार्ण पीJकr एक असर्ण ऱ्या एसब पी आलिर्ण कपी निवा. पीटं
अलिभाय नित्राकr लि . आलिर्ण इंतरा3
, ह्या प्राकरार्ण मध्ये प्रानितपी द क हं3त . पीढ अस
आढळेB आ कr क यद्या चा अशी म डर्ण कराण्या त आ हं3त कr क यदय च्या
क म ११ (६) अतगात अजी मध्ये, न्या य य ठीरा निवाक प्रानिक्रय त्मक निकवा क यद्या चा मद्द
नि ' रिरात करू शीकत, जीस कr, द वा क यद्द्यां स राच्या क मय द ब लि'त झा
हं3त कr हं , निकवा त3 क यद्या स रा प्रानितबलि'त झा हं3त क , अखिस्तोत्वा त
अस ल्या करा रा म्या म' अटं वा शीत;ऐवाजी वा अटं वा शीत; द कराण्या त
आल्या आहंत क , जीर्णकरू प्राकरार्ण चा निवाण्या स ठी वा द कड सपीBद कराण्या चा
गाराजी भा सर्ण रा हं . त्या तरा, न्या य य उपीक म (६अ ) क म ११ मध्ये
स म निवाe करू क म ११ मध्ये क ल्या दरुस्तो चा सदभा निद . न्या य य फS
वा द करा रा अखिस्तोत्वा त आहं कr हं हंचा ठीरानिवाण्या ब बतचा नि ष्कर्ष क ढण्या करिरात
डरा3 फल्गुएरा , एसए निवा . गागा वाराम पी3टं लि लिमटंड4
म' नि क चा सदभा निद
हं3त . न्या य य मBद क कr म य वात टंaनिडगा प्रा यव्हेटं निवारुद्ध प्राद्द©त दब बम 5
ह्या
प्राकरार्ण मध्ये त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी य भाBलिमकचा पीe क हं3त .
तरा हं पीढ, जी ऊ न्या य य गारावा रा वाo रा3प्स लि लिमटंड निवा . क3स्टी मरिरा
3 (२००५) ८ ६१८
एस स स
4 (२०१७) ९ ७२९
एस स स
5 (२०१९) ८ ७१४
एस स स

} न्स्ट्रaक्शन्स आलिर्ण इंलिजीनि अरिरागा लि लिमटंड6
म' द3 निवाद्वा न्या य ' शी च्या
डपी ठी निद नि र्णय क्ष त घत आलिर्ण य नि र्णय च्या पी}रा २२ चा सदभा निद
जीर्थी ह्या न्या य य भा रात य सनिवाद अलि'नि यम, १८७२ (सक्षपी त सनिवाद अलि'नि यम
म्हीर्णB सब3' आहं) म' क म २ (एचा) म' तरातद वारा लिभास्तो ठीवा आहं
आलिर्ण अस नि रा क्षर्ण 3दनिवा कr मद्रां क स करा रा गाB कराण्या य3ग्य हं .
६. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये, द3 निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी अस मत
म ड कr उपी-करा रा मध्ये सम निवाe अस वा द क म हं उपी-करा रा वारा रा तसरा
मद्रां क वा जी त हं त त3पीय5त क यद्या चा ब ब म्हीर्णB अखिस्तोत्वा त रा हंर्ण रा हं .
पीढ अस आढळेB आ कr क म ११ (६अ ) हं अलि'नि यम त क म ८ आलिर्ण क म
४५ च्या निवारुद्ध अखिस्तोत्वा शी सबलि'त आहं. [गारावा रा (ऊपीरा3ल्ले त ) पीरिराच्छेद २९ पीहं
]. त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये
निद ल्या नि क त, ज्या मध्ये प्राकरार्ण घटं पी ठी कड वागा कराण्या चा सदभा आहं, अस
आढळेB आ कr वा द करा रा चा मद्रां क शील्क आकराण्या य3ग्य स म्हीर्णB
अ सचा मध्ये सम निवाe क हं . न्या य य य सदभा त महं रा ea मद्रां क
अलि'नि यम, १९५८ च्या अ सBचा १ म' ब ब १२ चा सदभा निद . त्या तरा, 6 (२०१९) ९ २०९
एस स स
न्या य य अस नि ष्कर्ष क ढ कr ‘वाक ऑडरा’ मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी
आक रार्ण य3ग्य आहं. पीरात न्या य य अस नि ष्कर्ष क ढ कr, वाक ऑडरावारा
मद्रां क शील्क अद करार्ण निकवा शील्क कम भारा असर्ण य मळे मख्य करा रा अवाJ'
ठीरात हं . महं रा ea अलि'नि यम त क म ३४ जी मद्रां क अलि'नि यम त क म ३५
शी ससगात आहं, त्या मद्रां क वा स हं क यद्या मध्ये अवाJ', अखिस्तोत्वा त
स निकवा गाB कराण्या य3ग्य सल्या चा ठीरानिवा हं . वा द करा रा हं एक वागाळे
आलिर्ण स्वतत्रा करा रा असल्या चा नि ष्कर्ष न्या य य क ढ आहं. निवाभाSतच्या
लिसद्ध त स रा, जीरा मBळे करा रा ज्या मध्ये वा द करा रा सम निवाe आहं त3 पीरा व्य त
अग्र ह्या हं3त अस निकवा त्या वारा मद्रां क वाल्या च्या क रार्ण स्तोवा त्या वारा क रावा ई
क जी ऊ शीकत स तरा त3 अवाJ', गाB करात यर्ण रा निकवा अखिस्तोत्वा त
स अस प्रानितपी निदत क जी र्ण रा हं . ए . ए . ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) हं
प्राकरार्ण ज्या डपी ठी सम3रा चा त्या डपी ठी पीढ प्राम र्ण भाBलिमक म ड :
“२६. आमच्या मत, मBळे करा रा वारा मद्रां क शील्क भारार्ण ब कr
असल्या च्या क रार्ण स्तोवा वा द करा रा च्या अम बजी वार्ण मध्ये
क3र्णत हं क यदशी रा अडर्थीळे यत हं तर्थी निपी, वाक ऑडरा निकवा मBळे
व्य वास नियक करा रा च्या अतगात अलि'क रा आलिर्ण द नियत्वा चा
अलिभानि र्णय, मद्रां क अलि'नि यम च्या अनि वा य तरातद चा पी
कराण्या पीBवा; पी रिरात क जी र्ण रा हं त.
२७. मद्रां क अलि'नि यम हं , मद्रां क अलि'नि यम मध्ये निवानि निदe क ल्या
निवालिशीe प्राक राच्या स वारा रा ज्या मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी चा
एक निवात्त य अलि'नि यम आहं. मद्रां क अलि'नि यम, १८९९ च्या क म ४०
मध्ये जीप्ती कराण्या त आ ल्या स करिरात च्या क यपीद्धत चा तरातBद
क आहं आलिर्ण क म ४२ च्या उपी-क म (१) स रा सबलि'त
लिजील्हा लि'क ऱ्या निवालि'वात लिशीक्का म राल्या तरा स पीe दर्ण
आवाश्यक आहं. क म ४२ (२) अशी तरातBद करात कr, दस्तोऐवाजी वारा
रा तसरा लिशीक्का म राल्या तरा, त पीरा व्य त म न्या क जी त आलिर्ण
त्या आ' रा क यवा हं क जी ऊ शीकत.
२८. आमच्या मत ,एसएमएस टं इंस्टीट्स [एसएमएस टं इंस्टीट्स (पी )
लि लिमटंड निवा. चा दम रा टं कपी (पी ) लि लिमटंड.(२०११) १४ एसस स
६६: (२०१२)४ एसस स (निदवा र्ण ) ७७७] म' नि र्णय द3 मद्द्यां वारा
क यद्या त य3ग्य भाBलिमक म डत हं , म्हीर्णजी: (१) मद्रां क स ल्या
व्य वास नियक करा रा त वा द करा रा वारा क रावा ई क जी ऊ शीकत
हं निकवा त3 क यद्या त अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य हं ; आलिर्ण
(२) जीर्थी करा रा निकवा स एक पीक्षक रा च्या निवाकल्पा स रा शीBन्यावात
करात यई , तर्थी वा द करा रा अवाJ' अस जीस कr करा रा अलि'नि यम, १८७२ च्या क म १९ अतगात.
२९. आम्ही अस म त3 कr वा द करा रा हं पीक्षक रा म' एक स्वतत्रा
करा रा आहं, आलिर्ण मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी आक रार्ण य3ग्य हं , वा
त्या चा स्वतš चा स्वतत्रा अखिस्तोत्वा असल्या मळे व्य वास नियक करा रा वारा
मद्रां क शील्क भाराण्या च्या क रार्ण स्तोवा वा द ब बतचा क म अवाJ'
हं3र्ण रा हं निकवा त गाB क राण्या य3ग्य हं3र्ण रा हं . मBळे
करा रा च्या 3दर्ण तरा वा द ब बतचा क म वागाळे गाˆहं त
'राण्या ब बतच्या मद्द्यां वारा न्या य य घत दृe क3 , मद्रां क
क यद्या च्या सदभा तहं निवाचा रा त घत गा पी निहंजी. मBळे करा रा वारा
मद्रां क शील्क भाराल्या मख्य करा रा द अवाJ' हं3र्ण रा हं . हं
एक उर्ण वा आहं जी आवाश्यक मद्रां क शील्क भाराल्या वारा भारू क ढत
यत.
३०. एसएमएस टं इंस्टीटंस [एसएमएस टं इंस्टीटंस (पी ) लि लिमटंड
निवा. चा दम रा टं कपी (पी ) लि ., (२०११) १४ एसस स ६६:
(२०१२)४ एसस स (निदवा र्ण ) ७७७] म' दसरा मद्द जीस कr, शीBन्यावात करा रा ज्या मळे वा द करा रा च्या वाJ'तवारा पीरिरार्ण म हं3त3, त3
वा द कड स वार्ण करिरात पी ठीनिवात यर्ण रा हं हं आमच्या दृe
क यद्या त य3ग्य खिस्थात हं . बळेजीबरा , फसवार्णBक निकवा चाकrचा
म निहंत दऊ मBळे करा रा लिमळेवा गा आहं अस पीक्षक रा क
आरा3पी हं य मद्द्यां वारा अग्रगाण्या पीरा व्य द्वा रा लिसद्ध करा वा गात .
य मद्द्यां वारा वा द द्वा रा नि लिश्चतचा नि वा ड हं3ऊ शीकत3.
३१. वारा द3 मद्द क यद्या त य3ग्य पीरिराखिस्थात म डत हं त य
क रार्ण स्तोवा आम्ही एस एम एस टं इंस्टीटंस [एस एम एस टं इंस्टीटंस
(पी ) लि लिमटंड निवा . चा दम रा टं कपी (पी ) लि लिमटंड., (२०११)१४
एस स स ६६:(२०१२) ४ एस एस स (निदवा र्ण ) ७७७] म' नि र्णय
राद्द करात3.’’
७. आम्ही ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त पीरिराच्छेद -३२ कड द क्ष
दऊ शीकत3:
३२. गारावा रा [गारावा रा वाo रा3प्स लि .निवा . क3स्टी मरा कन्स्ट्रaक्शन्स
आलिर्ण इंजी नि यरिरागा लि लिमटंड (२०१९)९ एस स स २०९: (२०१९) ४
एस स स (निदवा र्ण ) ३२४] ह्या प्राकरार्ण त नि क एस एम एस टं
इंस्टीट्स [एस एम एस टं लि लिमटंड इंस्टीट्स (पी ) लि लिमटंड निवा. चा दम रा
टं कपी (पी ) लि लिमटंड (२०११) १४ एस स स ६६: (२०१२)-४
एसस स (निदवा र्ण ) ७७७] म' नि र्णय तरा पी रिरात क गा
आहं. अपी कत्या च्या वानिक जी3 पीय5त मद्रां क शील्क ब बतचा
नि र्णय निद जी त हं आलिर्ण मBळे करा रा वारा नितचा भारार्ण हं3त हं त3
पीय5त वा द ब बतचा क म क यदशी रापीर्ण अखिस्तोत्वा त यर्ण रा हं
आलिर्ण त्या स अ सरू क यवा हं हं3ऊ शीकर्ण रा हं हं म्हीर्णर्ण
म डण्या स ठी सदरा नि क म' पीरा च्छेदचा आ' रा घत आहं.
आम्ही म त3 कr हं नि ष्कर्ष चाकrचा आहं, आलिर्ण क यद्या स राचा
य3ग्य खिस्थात म डत हं . वा द करा रा हं मBळे व्य वास नियक
करा रा पीक्ष वागाळे आलिर्ण स्वतत्रा असत3 अस आम्ही आ' चा नि र्ण;त
क आहं. वा द करा रा चा स्वतत्रा अखिस्तोत्वा आहं अस एकद नि र्ण;त
कल्या तरा, व्य वास नियक करा रा च्या कलिर्थीत अवाJ'तचा पीवा करात
त्या आ' रा क रावा ई क जी ऊ शीकत.”
८. त्या तरा, ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) म' त निवाद्वा न्या य ' शी च्या
डपी ठी मBद क कr गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि क निवाद्या डa3लि य आलिर्ण
इंतरा निवारुद्ध दगा टंaनिडगा क पी$राशी 7
म' त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी
म न्यात उद्धˆत क हं3त . न्या य य निवाद्या डa3लि य (उपीरा3खिल्लेखि त) प्राकरार्ण च्या
नि क त पीरिराच्छेद १४६ आलिर्ण १४७ निवार्षद क आलिर्ण त्या मध्ये म ड ल्या मत च्या
अचाBकतब बत शीक व्यS क आलिर्ण गारावा रा (उपीरा3खिल्लेखि त) प्राकरार्ण च्या
नि क त पीरिराच्छेद २२ आलिर्ण २९ ज्या चा डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण च्या
7 (२०२१) २ १
एस स स
नि क त पीरिराच्छेद १४६ आलिर्ण १४७ मध्ये पीe क हं3त त नि ष्कर्ष
घटं पी ठी कड सदलिभात करा वात अस य3ग्य नि ष्कर्ष क ढ . ए ए ग्लो3ब
(उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण म' पीरिराच्छेद चा सदभा घर्ण आम्ही य3ग्य वा टंत:
"३५. ज्या प्राकरार्ण त मBळे करा रा मध्ये वा द चा करा रा अतभाBत असत3
त्या प्राकरार्ण त, महं रा ea मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ स3बत
क म ३४ अतगात स अवारुद्ध कराण्या चा अलि'क रा क3र्णत्या
प्रा लि'करार्ण अस , अस पीढचा मद्द उद्भवात3.
३६. वा द करा रा मध्ये, निवावा द, त पीद्धत द्वा रा वा द कड पी ठीवा
जी ऊ शीकत त.
३६.१. पीनिहंल्या प्राक रा मध्ये, वा द चा नि यS पीक्षक रा च्या
सहंमत वा द करा रा च्या अटं स रा निकवा नि यS वा द सस्थाद्वा रा
न्या य य च्या हंस्तोक्षपी लिशीवा य क जी त. अशी पीरिराखिस्थात त, वा द/न्या य ' करार्ण वारा मद्रां क अलि'नि यम, १८९९ (निकवा रा ज्या त
गाB असर्ण ऱ्या अलि'नि यम च्या क म ३३ म' तरातद स रा
स जीप्ती कराण्या चा आलिर्ण पीक्षक रा आवाश्यक मद्रां क शील्क
(आलिर्ण दड, असल्या स) भाराण्या चा नि द^शी दण्या चा आलिर्ण सबलि'त
लिजील्हा लि'क ऱ्या कडB पीe करू घण्या चा ब' असत. हं क म ३४
च्या तरातद म'B स्पe हं3त ज्या मध्ये अशी तरातBद आहं कr “क3र्ण हं
व्यS लिजी क यद्या द्वा रा निकवा पीक्ष क रा च्या समत पीरा वा 3द
कराण्या चा प्रा लि'क रा आहंत”, नित क यद्या स अवारुद्ध करार्ण
आलिर्ण पीक्षक रा आवाश्यक मद्रां क शील्क भाराण्या चा नि द^शी दर्ण
ब' क राक आहं.
३६.२. नि यS चा दसरा प्राक रा म्हीर्णजी, जीर्थी पीक्षक रा वा द च्या
करा रा स रा नि यS कराण्या त अयशीस्व ठीरात त, आलिर्ण नि यS
कराण्या स ठी क यद्या त बहं क अलि'क रा लिमळेनिवाण्या स ठी
न्या य य सम3रा क म ११ अतगात अजी द करात त. अशी
पीरिराखिस्थात त, उच्च न्या य य, निकवा सवा$च्च न्या य य, जीशी
पीरिराखिस्थात अस , त्या प्राम र्ण क म ११ अतगात अलि'क रा तचा वा पीरा
करात असत , एकतरा मद्रां क स निकवा अपीय प्तीपीर्ण मद्रां निकत
क मBळे करा रा अवारुद्ध करा आलिर्ण वा द/न्या य लि'करार्ण
य च्या कडB करा रा वारा नि र्णय दण्या पीBवा; पीक्षक रा सदरा ब बत त
उर्ण वा दBरा कराण्या चा नि द^शी दई .
३६.३. नितसरा प्राक रा अस आहं जीव्हे करा रा अतगातचा निवार्षय
वा द च्या करा रा मध्ये सम निवाe असत3 तव्हे क म ८ अतगात निवावा द
वा द कड स3पीनिवाण्या स ठी न्या नियक प्रा लि'करार्ण सम3रा अजी द
क जी त3. अशी पीरिराखिस्थात त, न्या नियक प्रा लि'करार्ण निवावा द
वा द कड सदलिभात करा . तर्थी निपी, य दराम्या , पीक्षक रा सबलि'त
मद्रां क अलि'नि यम च्या तरातद स रा मBळे करा रा वारा मद्रां क वाण्या चा
नि द^शी निद जी त , जीर्णकरू मBळे करा रा तB नि म र्ण हं3र्ण ऱ्या
अलि'क रा आलिर्ण द नियत्वा वारा नि र्णय दत यई ."
ड . पीक्षक रा कडB क यखिSवा द :
९. श्री गागा सघ , निवाद्वा वाकr , अपी कत्या 5च्या (ममस ए ए ग्लो3ब मक
5 टं इं
प्रा यव्हेटं लि लिमटंड) वात हंजीरा झा . सरुवा त , पीनिहंल्या उत्तरावा द कडB क3र्ण हं
उपीखिस्थात सल्या मळे, आम्ही , श्री गा´राब ब} जी;, निवाद्वा वारिराष्ठ वाकr , य चा
न्या य य लिमत्रा म्हीर्णB नि यS क . आम्ही सश्री . म निवाक नित्रावाद , निवाद्वा वारिराष्ठ
वाकr , जी हंराकत च्या अजी द्वा रा प्राकरार्ण त हंजीरा झा , य चा म्हीर्णर्ण ऐक . त्या तरा, श्री . क. राम क त राड्डी , निवाद्वा वारिराष्ठ वाकr , पीनिहंल्या उत्तरावा द स ठी हंजीरा झा
आलिर्ण त्या आपी म्हीर्णर्ण म ड .
१०. श्री गागा सघ य आमचा क्ष मद्रां क अलि'नि यम आलिर्ण क यद्या त
तरातद कड वा' आलिर्ण अस कर्थी क कr मद्रां क क यद्या च्या क म ३५
न्या य य त क3र्णत्या हं क रार्ण स ठी पीरा वा म्हीर्णB य3ग्य मद्रां क स ल्या स चा
स दरा करार्ण वारा प्रानितब' घ त आहंत. लिशीवा य, न्या य य अशी स च्या आ' रा
क रावा ई करू शीकत हं . अगाद सपी खि·वाक हंतB द हं , अस पीढ यखिSवा द
चा निवा . त्या वारा एक प्रानितब' आहं. वा द करा रा, जीरा ए द्या क्लॉoजीमध्ये, वाक
ऑडरामध्ये निकवा इंतरा व्य वास नियक करा रा मध्ये सम निवाe अस तरा हं , ए ए
ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये मBद कल्या प्राम र्ण त्या चा वागाळे अखिस्तोत्वा असB शीकत
हं . वा द करा रा चा लिसद्ध त वागाळे आलिर्ण वागाळे अखिस्तोत्वा असर्ण, हं मद्रां क
अलि'नि यम क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या सदभा त चाकrच्या पीद्धत क्ष त घण्या त आ
आहं. एस एम एस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि क राद्द करा य क3 हं3त .
स्टीअरा ड स स सच्या तत्त्वा कड द क्ष क जी ऊ शीकत हं . निवाद्वा वानिक य
वास्तोखिस्थात कड आमचा क्ष वा' कr अ क पीरादशी दशी मध्ये क यद आहंत, ज्या त
मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ प्राम र्णचा तरातद आहंत. निकबहु , मख्य
टं नि क नि घ असल्या त प्राकरार्ण सदलिभात कराण्या चा क3र्णत हं प्रासगा
हं त अस म्हीर्णत . त अस म्हीर्णत कr, क यद्या च्या क म ११ अन्वय अजी
करात हं , न्या य य स मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ म'
क यद्या च्या तरातद चा पी करार्ण ब' क राक हं3त, मद्रां क क यद एस एम एस टं
इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) आलिर्ण गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये क यद य3ग्यरा त्या म ड
गा आहं आलिर्ण निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये द त3 य3ग्यरा त्या क यम
ठीवाण्या त आ आहं. उपी-क म (६ अ ) सम निवाe करू क म ११ मध्ये क
दरुस्तो , न्या य य मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या तरातद त
आदशी कड द क्ष कराण्या स ठी प्रा लि'क̂त करू शीकत हं .
११. श्री मत . म निवाक नित्रावाद , निवाद्वा वारिराष्ठ वाकr , य ए ए ग्लो3ब
(उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये स्व क रा ल्या मत निवारुद्ध सम तक्र रा म ड . त्या रा तरा,
ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये स्व क रा ल्या मत चा क यद्या च्या क म ९
अतगात द हं3र्ण ऱ्या प्राकरार्ण म' क यवा हं च्या पीरिरार्ण म कड आमचा क्ष
वा' . त्या चा अस म्हीर्णर्ण आहं कr, मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ चा
पी कराण्या चा आवाश्यकत क यद्या च्या क म ९ अतगात अजी मध्ये द क यम
अस .
१२. श्री , गा´रावा ब} जी;, निवाद्वा न्या यलिमत्रा य अस द वा क कr प्रात्याक्ष त, गारावा रा
(उपीरा3ल्लेखि त), निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) आलिर्ण ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त)
चा क हं भा गा अस हं3त, ज्या म'B क यद य3ग्यरा त्या म ड हं3त . वा द करा रा वारा
मद्रां क वार्ण आवाश्यक हं य आ' रा वारा ए ए ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) हं
प्राकरार्ण चा निवार्ण ऱ्या डपी ठी क यवा हं करार्ण य3ग्य हं हं नि दशी स आर्णB
त्या सरुवा त क . त्या य सदभा त महं रा ea मद्रां क अलि'नि यम, १९५८ च्या
अ सBचा एकच्या अ च्छेद ५ कड आमचा क्ष वा' . वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा आलिर्ण
/ निकवा वाJ'त मद्रां क अलि'नि यम च्या तरातद मळे प्राभा निवात हं3त हं अस त्या चा
म्हीर्णर्ण आहं. मद्रां क शील्क भाराल्या स अवाJ' हं3र्ण रा हं . त3 दBरा करात
यण्या जी3गा द3र्ष आहं. क म ११ (६-अ ) चा स 3 वा चा हं लिसद्ध करा कr मद्रां क
स निकवा कम राकमचा मद्रां क अस स अवारुद्ध करार्ण, हं क रावा ई क म
११ अन्वय न्या य ' शी हं तरा क म ११ अतगात नि यS क ल्या वा द क
पी निहंजी. क म ११(६-अ), न्या य य वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या प्राश्ना पीरात
त्या चा तपी सर्ण मय निदत ठीवाण्या स भा गा पी डत. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) निकवा ए ए
ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) य द3न्ही प्राकरार्ण मध्ये क यद य3ग्य रा त म ड हं हं
क्ष त घऊ , तरा सलिचात कल्या प्राम र्ण घटं पी ठी कड सदलिभात कराण्या च्या क̂त मध्ये
स' रिरात कराण्या चा निवा त त्या क .
१३. निहंदस्तो स्टी लि . निवारुद्ध निद पी कन्स्ट्रaक्श कपी 8
म' य न्या य य च्या
नि क वारा निवासबB , अस द वा क जी त3 कr, शील्क आलिर्ण दड भाराल्या तरा, मद्रां क
स ल्या स वारा क रावा ई क जी ऊ शीकत. दBरा करात यण्या जी3गा द3र्ष
असल्या , क यद्या च्या जीरात मद्रां क स स अखिस्तोत्वा त सल्या चा नि ष्कर्ष
क ढत यत हं . त्या आमचा क्ष क्ष्मी रा यर्ण अग्रवा आलिर्ण इंतरा निवारुद्ध
ब्रजी म3हं लिसगा (मयत)9
म' निप्राव्हे क´खिन्स च्या नि क कड वा'B स निगात कr
8 (१९६९) १ ५९७
एस स स
9 ५१ ३३२
भा रती य अपी ले
मद्रां क स स हं त्या वारा दड भारू क̂त शी हं3त3 त्या च्या ह्या यखिSवा द चा
समर्थी कराण्या स ठी त्या पीढ प्राकरार्ण त न्या यनि र्णय चा आ' रा घत .
१. जीoयम बवा निवारुद्ध इंलिस सराक रा10
;
२. गा झा रा म रावा ड निवारुद्ध रा म गा3पी 11
.
३. पीBर्ण चाद्रां चाक्रवात; आलिर्ण इंतरा निवारुद्ध क लि पी द राoय आलिर्ण दसरा12
.
१४. उपीरा3S प्राकरार्ण मध्ये पी रिरात क यद , त्रा शी रापीर्ण अस नि ष्कर्ष क ढत3 कr
स वारा मद्रां क वाल्या मळे स च्या वाJ'तवारा पीरिरार्ण म झा हं . त्या मळे त
क गादपीत्रा कवाळे पीरा व्य त अग्र ह्या ठीरावा . य यटंड इंन्शुरान्स कपी ऑफ पी निकस्तो
लि लिमटंड निवारुद्ध हं फrजी महंम्मद लिसनिद्दकr13
ह्या प्राकरार्ण मध्ये पी निकस्तो च्या सवा$च्च
न्या य य च्या नि क म' न्या यमBत; द3रा ब पीटं , य चा पीढ शीब्द आमच्या सम3रा
पीटं वारा म डण्या त आ आहंत:
10 ए आय आर १९२६ कलेकत्ता ८७७
11 आय एले आर १९३७ १ २५७
कलेकत्ता
12 ए आय आर १९४२ कलेकत्ता ३८६
13 पी एले डी १९७८ २७९
एस स
"क म 35 म' शीब्द चा निवास्तोˆत अर्थी वार्ण हं त्या त सवास म न्या अर्थी च्या
निवारुद्ध अस जीर्णकरू जी स क म ब बतच्या गाJरासमजी तB द क
जी त . त अवाJ' ठीरात .”
१५. निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य हं नि दशी स आर्ण कr मद्रां क शील्क स च्या
सदभा त आक रा जी त, त्या त व्यवाहं रा च्या सदभा त हं . मद्रां क अलि'नि यम हं
एक भाक्काम क यद आहं. हं एक निवात्त य क यद आहं. महंसB लिमळेवार्ण हं त्या म गा
उद्दशी हं3त . त नित्राकतचा वा वा पीरू पीक्षक रा मदत कराण्या स ठी त्या चा वा पीरा क
जी ऊ शीकत हं . त्या आमचा क्ष न्या य य हंस्तोक्षपी स प्रानितब' करार्ण ऱ्या
अलि'नि यम च्या क म ५ कड वा' . त्या अलि'नि यम च्या क म ८ कड क्ष वा'
जी3, २०१५ मध्ये झा ल्या दरुस्तो तरा, जीरा न्या य य प्रार्थीमदशी आढळेB आ
कr क3र्णत हं वाJ' वा द करा रा अखिस्तोत्वा त हं , तरा प्राकरार्ण वा द कड सदलिभात
कराण्या स ठी पीरावा गा क राण्या स पीरावा गा दत3. त्या नि दशी स आर्णB निद , कr क म ८ ‘वाJ'त ’ चा सदभा दत. त्या एस. ब . पी . (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण मध्ये
घटं पी ठी घ B निद ल्या क यद्या च्या सदभा त एस. एम. एस. टं इंस्टीट्स
(उपीरा3ल्लेखि त) म' नि र्णय कड, भा रात य क यद आय3गा चा अहंवा य सदभा त
आमचा क्ष वा' आलिर्ण कम त कम हंस्तोक्षपी कराण्या चा आवाश्यकत आलिर्ण निकम
हंस्तोक्षपी सनि लिश्चत करू , क म ११ (६-अ) पीBर्ण अर्थी दण्या ब बत त भारा निद .
क म ११ मध्ये दरुस्तो कराण्या पीBवा; उच्चस्तोरा य सलिमत क ल्या चाचा^कड त्या
आमचा क्ष वा' . त्या न्या य य च्या स्व क̂त बद्द ड्युरा3 फ गाएरा 14
मध्ये य
न्या य य घत ल्या दृe क3 बद्द प्राशीस क , ज्या मध्ये, न्या यमBत; करिराय
जी3सफ य , क म ११(६अ) तराच्या पीरिराखिस्थात मध्ये, न्या य य स3बत इंतरा
गा3e बद्द ब3 त , प्राम र्ण नि र्णय निद :
“५९. १९९६ क यद्या च्या क म ११ (६-अ) अतगात अलि'क रा चा व्य प्ती
, एसब पी आलिर्ण कपी [एसब पी आलिर्ण कपी निवारुद्ध पीटं इंलिजीअरिरागा
लि लिमटंड, (२००५) ८ एस. स . स ६१८] आलिर्ण ब3घ रा पीo फब
[ } शी इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध ब3घ रा पीo फब (पी )
लि लिमटंड., (२००९) १ एस. स . स २६७ : (२००९) १ एस. स . स
(निदवा र्ण ). ११७] ह्या प्राकरार्ण मध्ये निद ल्या नि र्णय निवाचा रा त घत
बरा चाशी म3ठी हं3त . २०१५ मध्ये स' रार्ण हं3ईपीय5त हं खिस्थात क यम
रा निहं . दरुस्तो तरा, वा द चा करा रा अखिस्तोत्वा त आहं कr हं हं
14 (२०१७) ९ ७२९
एस स स
न्या य य पीहं र्ण आवाश्यक आहं, त्या पीक्ष अलि'क हं , वा
कम द हं . वा द चा नि यS कराण्या च्या टंप्प्या वारा
न्या य य चा हंस्तोक्षपी कम करार्ण हं क यद्या चा मB तš '3रार्ण आलिर्ण हंतB
आहं आलिर्ण क म ११ (६अ ) मध्ये सम निवाe क ल्या य हंतBचा आदरा
क पी निहंजी.
१६. निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य नि दशी स आर्ण कr मद्रां क वाल्या मळे करा रा
राद्दब त हं3त हं . क यद्या च्या दृe आलिर्ण रातरा, मद्रां क वा स मध्ये
जी वा असत3. म य वात टंaनिडगा (उपीरा3ल्लेखि त) हं प्राकरार्ण चा निवार्ण ऱ्या ३ निवाद्वा
न्या य ' शी च्या डपी ठी ड्युरा3 फ गाएरा (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त नि क
म न्यात निद हं3त हं त्या नि दशी स आर्ण . त्या गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त)
प्राकरार्ण म' मद्रां क स स चाकrचा असल्या मळे शीBन्यावात आहंत त्या
नि ष्कर्ष वारा हंल्ले चाढनिवा आहं. त्या अस म्हीर्णर्ण म ड कr उपीक म (६-अ) च्या
सम वाशी तरा क यद्या त क य आवाश्यक आहं हं सBयप्राक शी इंतक स्पe आहं.
वा द च्या करा रा चा अखिस्तोत्वा त असर्ण हं सवा क हं आहं जी क म ११ अतगात
अजी मध्ये न्या य ' शी रा3 B ठीवात. नि š सशीय, त्या नि दशी स आर्ण कr अशी
प्राकरार्ण असB शीकत त लिजीर्थी वा स्तोनिवाक पीरिराखिस्थात जी निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त)
म' नि क करिरात उद्भवा हं3त . य चा अर्थी अस आहं कr क यद्या चा क म ५
क हं निवावा द वा द कड सपीBद कराण्या य3ग्य ब वात, त्या मळे क म ११ स रा ज्या
न्या य ' शी कड सपीक स ' जी त3 त्या वा द कड सदलिभात कराण्या पी सB पीरा वाˆत्त
कराण्या स ठी त अटंक वा करू शीकत. अस प्रासगा उद्भवाB शीकत त, ज्या मळे
न्या य ' शी सदभा क राण्या लिशीवा य फ रास पीय य सत3. उद हंरार्ण र्थी अल्पावाय
निकवा अस्वस्था म च्या व्यS क करा रा. अशी अपीवा द त्मक
प्राकरार्ण व्यनितरिराS, निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य न्या य य निवा त क कr, वा द
हं क यद्या च्या क म १६ मध्ये अतभाBत अस ल्या कoम्पेटंन्झ - कoम्पेटंन्झच्या
लिसद्ध त स रा सवा प्राक राच्या समस्यां स म3रा जी ण्या स ठी पीBर्णपीर्ण समक्ष आहं य
निवाचा रा तB निद स दण्या त य वा . निवा' आय3गा चा अहंवा आलिर्ण क म ११ म'
स' रार्ण य वारू स्पe वाJ' नि क हंतB क्ष त घऊ क यद्या च्या क म ८ मध्ये
आर्ण ल्या बद मध्ये ज्या चा प्रानितध्व आढळेत3, त्या चा दरुस्तो द्वा रा, प्राकरार्ण
वा द कड सपीBद करा वा य म गार्ण च्या अजी स ठी निवा अडर्थीळे आलिर्ण स भा म गा
नि म र्ण कराण्या चा प्रायत्न करार्ण आवाश्यक आहं. एस. ब . पी . (उपीरा3ल्लेखि त) च्या
पीरिराच्छेद- १८ च्या सदभा त निवाद्वा न्या य य लिमत्रा अस स दरा करात त कr गारावा रा
(उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त, यर्थी न्या य य , न्या य य च्या हंस्तोक्षपी लिशीवा य, वा द चा नि यS क अस तराचा क म १६ स ठी पीBर्ण वा वा अस हं नि र्ण;त
कराण्या त चाBक क . २०१५ म' दरुस्तो तरा एस. ब . पी (उपीरा3ल्लेखि त) म'
नि क अखिस्तोत्वा त रा हंर्ण रा हं , अस नि दशी स आर्णB निद आहं. त्या हं द
नि दशी स आर्ण कr गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) यर्थी न्या यनि र्णय मध्ये न्या य य
पीरिराच्छेद- १९ मध्ये चाBक क आहं, जीव्हे त्या अस सचावा कr न्या य य कवाळे
स वाजीनि क महंस चा राक्षर्ण कराण्या स ठी अलिभाप्रात अस ल्या अनि वा य क यद्या
गाB करात. हं बरा3बरा अस तरा , हं नि दशी स आर्णB निद आहं कr क यद्या द्वा रा गाB
कराण्या य3ग्य करा रा हं एक करा रा आहं आलिर्ण सनिवाद अलि'नि यम म' क म २ (गा)
अस स गात कr क यद्या द्वा रा गाB करात यर्ण रा करा रा राद्दब त हं3त3 आलिर्ण मद्रां क
वा सर्ण अर्थीवा अपीरा वा असर्ण य मळे करा रा राद्दब त हं3त हं . हं
नि दशी स आर्णB निद आहं कr, मद्रां क स दस्तोऐवाजी करा रा हं3त हं , आलिर्ण
त3 क यद्या गाB करात यर्ण रा हं3त , हं सBचा चाकrचा हं3त . त्या गारावा रा
(उपीरा3ल्लेखि त) म' नि क त न्या य य चा द3र्षहं स पीड जीव्हे न्या य य
अस नि ष्कर्ष म ड कr मद्रां क स दस्तोऐवाजी क यद्या चा ब ब म्हीर्णB
'अखिस्तोत्वा त’ हं . निवाद्वा न्या य य लिमत्रा सचावा उपी य म्हीर्णजी वा द चा
नि यS क जी वा आलिर्ण वा द न्या य लि'करार्ण मद्रां क अलि'नि यम अतगात त्या चा
कतव्य पी रा पी डण्या चा पीरावा गा निद जी वा . दसऱ्या शीब्द त, क म ११(६-अ) च्या
उद्दशी अ सरू आलिर्ण क यद्या च्या क म ५ मध्ये निवाचा रा कल्या प्राम र्ण, निकम
हंस्तोक्षपी चा आवाश्यकत , य वारू हं नि दशी स आर्णB निद आहं कr वा द
करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या प्रार्थीमदशी तपी सर्ण वारा, प्राकरार्ण वा द कड स3पीनिवार्ण
आवाश्यक आहं. निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) म' न्या यमBत; सजी वा न्ना य च्या
नि क वारा पी निवाचा रा करार्ण आवाश्यक असB शीकत हं द त्या पीढ सलिचात क .
पीरिराच्छेद ३१ च्या सदभा त, ज्या मध्ये सजी वा न्ना , न्या यमBत; ज्या एस. ब . पी
(उपीरा3ल्लेखि त) म' घटं पी ठी च्या नि क ब' क राक वा टं , हं नि दशी स
आर्ण आहं कr निवाद्वा न्या य ' शी २०१५ म' दरुस्तो द्वा रा क म ८ आलिर्ण ११
मध्ये क ल्या स' रार्ण कड द क्ष क . त्या पीढ सलिचात क कr पीरिराच्छेद- ८१ त
१५४ मध्ये, निवावा द वा द कड स3पीनिवाण्या स रा आहं क हं क3र्ण ठीरावात य
मर्थीळ्या , त्या स्पeत आर्णण्या चा म गार्ण क आहं. पीरिराच्छेद- ९८ मध्ये, अस
नि दशी स आर्णB निद आहं कr क म ८ आलिर्ण ११ त्या च्या स्वरूपी मध्ये पीरिरापीBराक
आहंत आलिर्ण द3 तरातद च्या अतगात अलि'क रा वा पीराण्या त, अलि'क रा क्षत्रा पीरिरापीBराक
हं3त य नि ष्कर्ष पीय5त पी3हं3चाण्या त चाBक झा हं3त . न्या यमBत; सजी वा न्ना य चा मत
म य वात (उपीरा3ल्लेखि त) ह्या प्राकरार्ण त त न्या य ' शी च्या डपी ठी च्या मत शी
निवासगात असल्या चा नि दशी स आर्णB निद निद आहं. निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य
स दरा क आहं कr, पीरिराच्छेद - १४६, १४७.१, १४७.९ आलिर्ण पीरिराच्छेद - १४७.१०
म' न्या यमBत; सजी वा न्ना य चा नि रा क्षर्ण पीन्ही नि लिश्चत कराण्या चा आवाश्यकत
असB शीकत. निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य चा अस पीनिवात्रा आहं कr पीरिराच्छेद - १४६ त
१५४ म' नि ष्कर्ष कद लिचात टं निवार्षद करा वा गात . निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य
हं नि दशी स आर्ण कr पीरिराच्छेद - २३७ आलिर्ण २४४ म' न्या यमBत; ए . व्हे .
रामर्ण य चा नि ष्कर्ष न्या यमBत; सजी वा न्ना य च्या नि ष्कर्ष 5च्या निवासगाततच्या
मय दपीय5त म न्या क जी ऊ शीकत त. पीन्ही ए . ए . ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त)
प्राकरार्ण कड यत निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य वा द करा रा य वारा मद्रां क शील्क चा
आवाश्यकत हं हं ब ब नि दशी स आर्णण्या व्यनितरिराS निवारा3' भा स मत म ड
कr, त रा3 राचा भारार्ण गाराजीचा आहं. पीरिराच्छेद २२ आलिर्ण २६ म' क रार्ण पीe
द्या वा गा . निवाद्वा न्या य य लिमत्रा य चा म्हीर्णर्ण आहं कr, क यद्या च्या क म ८ आलिर्ण
११ य सम त यत हं . गाB क जी र्ण रा म क सम असB शीकत त, म्हीर्णजी, वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा असण्या ब बत प्रार्थीमदशी सम ' . क म ११
मध्ये, न्या य य नि यS प्रा लि'करार्ण चा पीय य म्हीर्णB क य करात. तर्थी फS एक
अरुद क̂त कक्ष आहं. त्या चा हं म्हीर्णर्ण आहं कr, क म ८ अतगात अजी मध्ये, वाJ'
वा द करा रा हं3त कr हं हं पी हंर्ण आवाश्यक असल्या त्या चा व्य प्ती अलि'क
निवास्तोˆत असB शीकत. जी3पीय5त स्पeपीर्ण राद्द हं3त हं त3पीय5त 'निवार्षय त वा द
य3ग्यत ' वा द वारा स3ड जी वा , अशी त्या चा म गार्ण आहं. क म ८ म'
अजी मध्ये, न्या य य मद्रां क शील्क शी सबलि'त मद्द्यां चा पीरा क्षर्ण कराण्या चा क̂त
करू य, जी3 अलि'क रातशी सबलि'त सB स्व क यतशी सबलि'त आहं. क म ११ (६-
अ) म' अखिस्तोत्वा य शीब्द चा अर्थी क यदशी रारिरात्या अम त आर्णण्या य3ग्य अखिस्तोत्वा
अस आहं आलिर्ण कवाळे करा रा त त्या चा उपीखिस्थात हं . मद्द्यां चा
प्रार्थीमदशी तपी सर्ण कम कराण्या स ठी न्या य य चा क̂त कक्ष मय निदत करार्ण
आवाश्यक आहं:
१. करा रा च्या नि लिमत च्या टंप्प्या वारा वा द करा रा चा औपीचा रिराक वाJ'त , त लि खि त
स्वरूपी त आहं कr हं य सहं;
२. मख्य करा रा त घटंक चा पीBतत झा कr हं ?;
३. क्वलिचात प्रासगा , वा द वा द कड स3पीनिवाण्या य3ग्य हं3त कr हं ;
१७. मद्रां क शील्क ब बत नि र्णय घर्ण हं वाळे ऊ ब ब आहं आलिर्ण त क यद्या चा उनिद्दe
जी वा द चा जी द नि यS आलिर्ण कम त कम न्या नियक हंस्तोक्षपी सहं क यवा हं चा
सम प्ती सनि लिश्चत करार्ण आहं, त्या च्या शी ससगात हं3र्ण रा हं , जीरा न्या य य मद्रां क
शील्क सबलि'त निवावा द च्या प्राकरार्ण मध्ये हंस्तोक्षपी कराण्या पी सB स्वतš पीरा वाˆत्त क
आलिर्ण वा द प्राकरार्ण हं त ळेण्या स पीरावा गा निद , जी क यद्या , त3 हं त ळेण्या स
पीBर्णपीर्ण सक्षम आहं, तरा त जी द निवावा द नि रा करार्ण च्या क रार्ण स प्रा3त्सा हं दई , जी
वा द सस्थाचा उनिद्दe आहं.
१८. स वार्ण च्या वाळे¥, श्री क. राम क त राड्डी निवाद्वा वारिराष्ठ वाकr प्रार्थीम
उत्तरावा द स ठी हंजीरा झा . क3टं मद्रां क अलि'नि यम आलिर्ण क यद य च्या त
स मजीस्यां पीBर्ण अन्वय र्थी चा अवा ब क पी निहंजी, अस त्या चा म्हीर्णर्ण आहं.
क यद्या च्या क म ५ चा पी कराण्या च्या महंत्त्वा वारा त भारा दत त. ग्रटं ऑफशी3अरा
लि लिमटंड निवारुद्ध इंरा र्ण इंजी नि अरिरागा आलिर्ण कन्स्ट्रaक्श कपी 15
म' य
न्या य य च्या नि क कड त्या आमचा क्ष वा' . सदरा न्या यनि र्णय त एक निवाद्वा
एक न्या य ' शी लि निहं आहं, त्या त य क यद्या च्या त्या त क म ११ अन्वय
य लिचाक हं त ळेत इंतरा ब ब बरा3बराचा अस नि र्णय निद आहं कr -
५५. दसरा, क म ७ चा स ' भा र्ष पीन्ही एकद म झ्या नि ष्कर्ष वारा
नि यत्रार्ण ठीवात. क म ७ स रा पीक्षक रा करा रा वारा मद्रां क वाण्या चा
आवाश्यकत हं . इंतक स्पeपीर्ण स निगात जी त असत आलिर्ण त
क3र्णत्या हं प्राक रा सनिवा' शी निवारा3' सत ससदच्या हंतB ब '
आर्णर्ण चाकrचा ठीरा .
६०. मद्रां क, लिशीक्का आलिर्ण अगाद स्व क्षरा य स रा त नित्राकत ह्या
निफत आहंत ज्या पीक्षक रा रा3 रा जी पी निहंजी त म्हीर्णजी त्या च्या
निवावा द चा क यक्षम, प्राभा वा आलिर्ण सभा व्य स्वस्तो नि रा करार्ण
लिमळेवाण्या पीBवा; क ढB टं कर्ण आवाश्यक आहं. य यटंड शीन्स कलिमशी
15 (२००८) १४ एस स स २४०
ऑ इंटंरा } शी टंaड o (UNCITRAL) मoड o ऑ इंटंरा } शी
कमलिशीय आरानिबटंaशी , १९८५ च्या '3रार्ण त्मक उनिद्दe मध्ये पीक्षक रा च्या
स्व यत्तवारा वा द आ' रिरात असत3 हं लिसद्ध त अतभाBत आहं, ज्या वारा
आमचा वा द क यद आ' रिरात आहं. (अलि'नि यम चा प्रास्तो वा पी हं .)
न्या य य निवा' यक हंतB अम त आर्ण पी निहंजी. क यद्या कल्पा
क ल्या अ क अनितरिराS औपीचा रिराक अलि'क गाB करार्ण न्या य य स ठी
अय3ग्य आलिर्ण अवा छ य अस . न्या य य चा नि द^शी निवा' यक हंतB स ध्ये
कराण्या स ठी अस पी निहंजीत.
१९. इंतरा गा3e बरा3बराचा, आयकरा आयS निवारुद्ध निहंदस्तो बल्क क
} रिरायस16
म' य
न्या य य च्या नि र्णय कड त्या आमचा क्ष वा' , आलिर्ण स निगात कr न्या य य
द3 अर्थी वा जी र्ण ऱ्या राचा टं ळेल्या पी निहंजी ज्या क यद्या चा नि रार्थीकत कम
करात त पीरात अलि'क ' डस राचा स्व क राल्या पी निहंजीत ज्या जी3 उद्दशी स ध्ये
करा यचा आहं त्या प्राम र्ण पीरिरार्ण मक राक पीरिरार्ण म दत .
16 (२००३) ३ ५७
एस स स
२०. २०२२ च्या आय. ए. क्र. १९९६६९ म' अजीद रा (हंस्तोक्षपी) स ठी उपीखिस्थात
अस निवाद्वा वाकr श्री दबशी पी ड , य स दरा क कr क यद एक सपीBर्ण सनिहंत
ब वात3. क यद्या च्या क म ५ मध्ये एक वाJ' नि क तरातBद आहं जी अस घ3निर्षत करात
कr ,अलि'नि यम च्या भा गा एक मध्ये तरातBद कल्या प्राम र्ण मद्रां क अलि'नि यम निकम
हंस्तोक्षपी च्या तत्त्वा वारा असB हं , "सध्ये गाB अस ल्या इंतरा क3र्णत्या हं क यद्या मध्ये
क हं हं अस तरा ", मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ अन्वय न्या य य स
अटंक वा करू य. त्या य चा हं पी रुच्च रा क कr क म ११ अतगात क य
आवाश्यक आहं तरा प्रार्थीमदशी सम ' . त्या असहं कर्थी क कr ससद
क म ११ (६-अ) गाB करात वाJद्यातचा निवाचा रा कराण्या चा आवाश्यकत व्हेत .
क म ८ आलिर्ण ११ मध्ये जी र्ण वापीBवाक फराक आहं. दसऱ्या शीब्द त, 'अखिस्तोत्वा' आलिर्ण
वाJ'त य अलिभाव्यS मध्ये फराक आहं. क म १६ अतगात अलि'क रा चा रुद अव्य हंत
आहं.
इं. निवाश्लेर्षर्ण
२१. वा द करा रा मद्रां क शील्क स पी त्रा हं3र्ण रा हं य आ' रा वारा ए . ए . ग्लो3ब
(उपीरा3ल्लेखि त) म' न्या य य क यवा हं करात चाBक क हं3त हं निवाद्वा
न्या यलिमत्रा य क कर्थी क्ष त घत , ऑडरा ऑफ राफरान्सचा आ' रानिवा'
क ढB टं क . स' रिरात प्राश्ना मध्ये 'मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी शील्क आक रा जी र्ण रा
हं ' अस शीब्द आलिर्ण अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य निकवा अवाJ'' अस शीब्द, म्हीर्णB , प्राम र्ण असत :
“मद्रां क अलि'नि यम च्या 35 मध्ये सम निवाe अस वाJ' नि क प्रानितब', जी3 क म ३ सहं अलि'नि यम चा अ सBचा अतगात मद्रां क शील्क
आक राण्या य3ग्य स गाB आहं, त3 अशी स मध्ये सम निवाe
अस वा द करा रा य स मBळे करा रा / स य वारा मद्रां क शील्क
भारार्ण करार्ण प्रा निबत असल्या च्या क रार्ण स्तोवा अखिस्तोत्वा त सल्या चा
ठीरावात3 क य?
एफ. अलि'नि यम :
२२ . अलि'नि यम चा क म २ (ब) वा द करा रा 'क म ७ मध्ये सदलिभात क
करा रा' म्हीर्णB पीरिराभा निर्षत करात.
२३ . क यद्या चा क म ५ प्राम र्ण घ3निर्षत करात: -
"५ . न्या य य हंस्तोक्षपी चा व्य प्ती - य भा गा द्वा रा शी लिसत अस ल्या
प्राकरार्ण मध्ये, सध्ये गाB अस ल्या इंतरा क3र्णत्या हं क यद्या मध्ये
क हं हं सम निवाe अस तरा हं , य भा गा मध्ये प्राद कल्या लिशीवा य
क3र्णत हं न्या नियक अलि'क रा हंस्तोक्षपी करार्ण रा हं ."
२४ . अलि'नि यम चा क म ७ प्राम र्ण आहं:
“७ - वा द करा रा. —
(१) य भा गा मध्ये, “ वा द करा रा” म्हीर्णजी पीक्षक रा क सवा निकवा
ठीरा निवाक निवावा द, वा द स दरा कराण्या चा करा रा आहं, जी त्या च्या मध्ये
ए द्या पीरिराभा निर्षत क यदशी रा सब' च्या सदभा त, करा रा स रा अस3त
निकवा स3त, उद्भवाB शीकत त.
(२) वा द करा रा हं करा रा मध्ये वा द च्या क म च्या स्वरूपी त निकवा
वागाळ्या करा रा च्या स्वरूपी त असB शीकत3.
(३) वा द चा करा रा लि खि त स्वरूपी त अस .
(४) वा द चा करा रा लि खि त स्वरूपी त आहं जीरा त3 पीढ ब ब मध्ये
सम निवाe अस तरा-
(अ) पीक्ष क रा स्व क्षरा क दस्तोऐवाजी;
(ब) पीत्रा, टं र्क्स, टंलि ग्र म निकवा दBरासचा रा च्या इंतरा म ध्येम चा
दवा र्णघवा र्ण ज्या मळे करा रा चा अलिभा नि म र्ण हं3त3; निकवा
(क) द वा आलिर्ण बचा वा च्या निवा' चा दवा र्णघवा र्ण, ज्या मध्ये एक
पीक्ष करा रा च्या अखिस्तोत्वा चा द वा क आहं आलिर्ण दसर्‍य त3
क रा हं .
(५) जीरा करा रा लि खि त स्वरूपी त अस आलिर्ण जीरा सदभा अस अस कr
वा द चा क म करा रा चा भा गा ब वाण्या स रा अस तरा करा रा त
वा द च्या क म चा सम वाशी अस ल्या दस्तोऐवाजी च्या सदभा हं
वा द चा करा रा ब त3.”
२५ . क म ११ वा द च्या नि यS शी सबलि'त आहं. निद क २३.१०.२०१५
पी सB २०१६ च्या अलि'नि यम ३ द्वा रा सम निवाe क ल्या क म ११(६-अ) च्या प्राभा वा शी
आम्‍हं सबलि'त असल्‍य मळे, आम्‍हं त्या चा सदभा घर्ण उलिचात समजीत3:
"६-अ. उपीक म (४) निकवा उपी-क म (५) अतगात क3र्णत्या हं अजी वारा
निवाचा रा करात सवा$च्च न्या य य निकवा , यर्थी खिस्थात , उच्च न्या य य, क3र्णत्या हं न्या य य चा क3र्णत हं नि र्णय, हुक
B म निकवा आदशी अस
तरा हं , वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या तपी सर्ण पीय5त मय निदत रा हं .
हं क्ष त घत पी निहंजी कr, वारा तरातBद २०१९ च्या अलि'नि यम ३३ द्वा रा
वागाळेण्या त आ आहं. पीरात, २०१९ चा अलि'नि यम ३३ अम त आर्ण गा हं .
जी . क म ११ (६-अ) कशी मळे सम निवाe झा ?
२६. भाBतक ळे चा शी3' घऊ क यद्या च्या क म ११ मध्ये उपी-क म (६-अ)
कशी मळे सम निवाe क गा य चा चा´कशी करार्ण महंत्त्वा चा आहं . हं अलि'नि यम १९९६
स मजीBरा कराण्या त आ . हं अलि'नि यम नि š सशीयपीर्ण य यटंड शीन्स कलिमशी
ऑ इंटंरा } शी टंaड o (UNCITRAL) मoड क यद्या वारा आ' रिरात आहं. भा रात य
क यद आय3गा च्या एकशी शीहंत्तरा व्य अहंवा क यद्या त स' रार्ण कराण्या स ठी
आपील्या लिशीफ राशी कल्या आहंत. त्या स अ सरू , न्या यमBत; ब .पी . सरा फ सलिमत
आपी अहंवा निद क २९.०१.२००५ रा3जी स दरा क आहं. अलि'नि यम च्या
क म ११ अतगात न्या य य वा पीरा ल्या अलि'क रा चा स्वरूपी हं बऱ्या चा नि र्णय-
निवा' मध्ये निवाचा रा कराण्या स ठी चा निवार्षय हं3त . हं क्ष त घर्ण पीरास आहं कr, एस.
ब . पी . (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण मध्ये, स त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी , एक कr मतलिभान्नातसहं, क म ११(६) अतगात वा पीरा शीS हं प्राशी सकrय शीS
सB न्या नियक शीS आहं, अस नि र्णय निद आहं. बहुसख्य नि क मध्ये,
न्या य य अलि'नि यम च्या क म १६ च्या प्राभा वा चा निवाचा रा क , ज्या मध्ये
क3म्पेटं£झा-क3म्पेटं£झा च्या तत्त्वा चा सम वाशी आहं. न्या य य , इंतरा गा3e बरा3बराचा, प्राम र्ण नि र्ण;त क :
“१२. …जीव्हे न्या य लि'करार्ण अलि'क रिरातचा प्राश्ना आलिर्ण
प्रा लि'क राच्या व्य प्ती चा उल्लेघ य द3 प्राश्ना वारा निकवा त्या पीJकr एक वारा
नि र्णय दत तव्हे त्या अनिपी मध्ये त त्का ळे आव्हे दण्या स त3 नि र्णय
असत3, जीव्हे हंराकत ग्र ह्या 'राण्या त यत आलिर्ण कवाळे अनितम
नि वाड्यु च्या निवारा3' त अपी मध्ये, जीव्हे हंराकत अम न्या कराण्या त
यत. उपी-क म (५) आदशी दत कr जीरा वा द न्या य लि'करार्ण उपी-
क म (२) निकवा (३) अतगात आक्षपी राद्द क , तरा त्या वा द चा
क यवा हं सरू ठीवा वा आलिर्ण वा द चा नि वा ड द्या वा . उपी-क म (६)
मध्ये तरातBद आहं कr, अलि'क रिरातचा अभा वा आलिर्ण अलि'क रा च्या
व्य प्ती च्या उल्लेघ बद्द चा कर्थी अम न्या करू निद ल्या अशी
वा द च्या नि वा ड्यु मळे रा जी झा पीक्ष, क यद्या च्या क म ३४
स रा नि वा ड ब जीB ठीवाण्या स ठी य क रार्ण स्तोवा अजी करू शीकत3.
क म ११ च्या पी3टंक म (७) च्या सदभा त प्राश्ना अस आहं कr, एकद
सरान्या य ' शी निकवा त्या नि यS क ल्या व्यS वा द चा नि यS
कराण्या च्या अलि'क रा च्या अटं य टंल्या त उपीखिस्थात आहंत य वारा
स्वतš चा सम ' कल्या तरा वा द चा नि यS कल्या वारा वा द
न्या य लि'करार्ण स्वतš च्या अलि'क रा तवारा शी स कराण्या चा अलि'क रा
आलिर्ण क म १६(१) द्वा रा पीरिराकखिल्पात क ल्या वा द च्या क म च्या
अखिस्तोत्वा चा व्य प्ती क य आहं? क यद्या च्या क म ११ च्या उपी-क म
(७) द्वा रा सरान्या य ' शी च्या अशी नि र्णय अनितम स्वरूपी निद
असB हं , प्रार्थीमदशी अस म्हीर्णर्ण कठी र्ण हं3ई कr वा द
न्या य लि'करार्ण अजीB हं त्या नि र्णय च्या पीढ जी ऊ स्वतš च्या
अलि'क रिरातवारा शी स करू शीकत निकवा वा द च्या क म च्या
अखिस्तोत्वा वारा नि र्णय दऊ शीकत. सरान्या य ' शी वा द
न्या य लि'करार्ण चा नि यS कल्या तरा, त नि म र्ण त्या च्या नि म त्या द्वा रा, सरान्या य ' शी द्वा रा शीS चा वा पीरा करू कल्या वारा, वा द
न्या य लि'करार्ण म गा निफरू न्या य लि'करार्ण चा नि यS कराण्या चा
अलि'क रा त निकवा अलि'क रा सरान्या य ' शी हं , अस म्हीर्णB शीकर्ण हं
आम्ही निवासगात वा टंत. निवाद्वा वारिराष्ठ वाकr श्री क क वार्णगा3पी
य चा यखिSवा द, जीस, जीव्हे क म ११(६) अतगात हंस्तोक्षपी लिशीवा य
वा द न्या य लि'करार्ण चा स्था पी क जी त तव्हे चा क म १६ चा क य
पीBर्ण हं3त, हं त्या तरातद चा क यद्या च्या क म ११ सहं मळे घ ण्या चा
एक म गा आहं, निवाशीर्षत: त्या च्या उपी-क म (७) च्या सदभा त. आमचा
क य मत कड आहं कr जीव्हे प्राकरार्ण वा द न्या य लि'करार्ण कड जी त
तव्हे अलि'क रा तच्या आलिर्ण वाJ' वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या मद्द्यां वारा
आलिर्ण क यवा हं च्या त्या तराच्या टंप्प्या वारा सवा$च्च न्या य य त अपी
क यवा हं वागाळेत उच्च न्या य य चा मख्य न्या य ' शी निकवा त्या
नि यS क ल्या उच्च न्या य य च्या न्या य ' शी नि र्णय घण्या च्या
ब बत त मख्य न्या यमBतßचा नि र्णय पीक्षक रा वारा ब' क राक अस .
(जी3रा निद )
२७. एस.एम.एस. टं इंस्टीटं (उपीरा3ल्लेखि त) म' द3 निवाद्वा
न्या य ' शी च्या डपी ठी निद नि र्णय आम्ही पीढ क्ष त घऊ शीकत3. त्या त
प्राश्ना हं त ळे . प्रा सनिगाकत क य आहं, हं दसरा प्राश्ना आहं, जी3 ' 3दर्ण क̂त स
स , ज्या वारा रा तसरा मद्रां क वा हं त, त्या त वा द करा रा वाJ' आलिर्ण
अम बजी वार्ण य3ग्य आहं क '. न्या य य , इंतरा गा3e सहं, प्राम र्ण नि र्णय
निद :
"२०. गावा हं टं उच्च न्या य य च्या मख्य न्या यमBतßद्वा रा वा द नि यS
य3जी , १९९६ स ठी अलि'नि यम च्या क म ११ अतगात अजी स3बत मBळे
वा द करा रा निकवा त्या चा प्राम लिर्णत प्रात असर्ण आवाश्यक आहं. रा तरा, अशी आवाश्यकत जीवाळेजीवाळे सवा उच्च न्या य य च्या
य3जी /नि यम मध्ये आढळेत. जी स दरा क आहं त जीरा वा द च्या
क म चा सम वाशी अस ल्या करा रा/करा रा/स चा प्राम लिर्णत प्रात अस , तरा त्या मBळे करा रा वारा भारा मद्रां क शील्क उघड क पी निहंजी. क म
३३ प्रात्याक न्या य य वारा, म्हीर्णजी, क यद्या पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा
अलि'क रा अस व्यS (जीस प्रात्याक वा द ज्या पीक्षक रा च्या
समत , पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा प्रा लि'क रा असत3) जी च्या सम3रा शील्क
आक राण्या य3ग्य एक 3दर्ण क̂त स स स दरा क जी त3, त्या वारा
य3ग्यरिरात्या मद्रां क वा आहं कr हं हं तपी सण्या स ठी जीब बद रा
स3पीनिवात. जीरा न्या य य अस नि ष्कर्ष क ढ कr स वारा मद्रां क
वा हं , तरा त्या दस्तोऐवाजी जीप्ती करा वा गा आलिर्ण मद्रां क
अलि'नि यम च्या क म ३८ स रा त्या ब बत त क रावा ई करा वा गा . xxx xxx xxx
२२. म्हीर्णB , जीर्थी वा द चा क म हं 3दर्ण क̂त स ल्या (पीरात
अनि वा यपीर्ण 3दर्ण कराण्या य3ग्य) दस्तोऐवाजी त सम निवाe आहं आलिर्ण
ज्या वारा मद्रां क वा हं अशी प्राकरार्ण अवा बल्या जी र्ण र्‍य
प्रानिक्रयचा स रा शी आम्ही दत आहं3त:
२२.१. न्या य य , क3र्णत्या हं दस्तोऐवाजी चा पीरा वा म्हीर्णB स्व क रा
कराण्या पीBवा; निकवा अशी दस्तोऐवाजी वारा क रावा ई कराण्या पीBवा;, स /क गादपीत्रा वारा रा तसरा मद्रां क वा आहं कr हं आलिर्ण त3
अनि वा यपीर्ण 3दर्ण कराण्या य3ग्य स आहं कr हं हं तपी स वा.
२२.२. दस्तोऐवाजी वारा रा तसरा मद्रां क वा सल्या चा आढळेल्या स, मद्रां क क यद्या चा क म ३५ सदरा दस्तोऐवाजी वारा क यवा हं कराण्या स
प्रानितब' करात. पीरिरार्ण म , त्या त वा द च्या क म वाराहं क यवा हं
करात यत हं . त्या तरा, न्या य य मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३
अन्वय दस्तोऐवाजी जीप्ती करा वा आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५
आलिर्ण ३८ अतगात प्रानिक्रयचा पी करा वा.
२२.३. दस्तोऐवाजी वारा रा तसरा मद्रां क वा असल्या चा निकवा
न्या य य सम3रा निकवा लिजील्हा लि'क -य सम3रा (मद्रां क क यद्या च्या क म
३५ निकवा ४० मध्ये निवाचा रा कल्या प्राम र्ण), कम मद्रां क शील्क आलिर्ण दड
भारा गा असल्या चा आलिर्ण त्या तरा कम मद्रां क शील्क सदभा त
द3र्ष दBरा झा असल्या चा आढळेल्या स, न्या य य दस्तोऐवाजी वारा य3ग्य
मद्रां क वा असल्या स रा म B शीकत.”
(जी3रा निद )
हं दृनिeक3 तरा गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये आलिर्ण 'मरात्न करा रा य
बहं दBरा अक$टं रा यर्णस्व म मदलि य रा चात्राम निवा. भा स्करा रा जीB आलिर्ण ब्रदस17
मध्ये
द पी ळे गा आहं. आम्ही पीरिराच्छेद-१९ आलिर्ण २१ चा पी रा वाˆत्त वागाळे
आहं, ज्या चा आ' सदभा निद गा आहं. .
२८. लिशी -एत्साB कलिमक कपी लि . निवा. अक्ष ऑनिáफ यबरा लि . आलिर्ण इंतरा 18
हं क यद्या च्या क म ४५ अतगात आतरारा ea य वा द चा प्राकरार्ण हं3त. त निवाद्वा
न्या य ' शी च्या डपी ठी ज्या मध्ये न्या यमBत; वा य.क. सभारावा य च्या सहं बहुमत
17 (२०२०) ४ एस स स ६१२
18 ( २००५ ) ७ ३२४
एस स स
असहंमत हं3त, अस नि र्णय निद कr क म ४५ अन्वय वा द कड सदभा दर्ण
आवाश्यक आहं कr हं य प्राश्ना वारा नि र्णय घत , प्रार्थीमदशी प्राकरार्ण नि म र्ण हं3त
आहं कr हं आलिर्ण वा द करा रा अखिस्तोत्त्वा त हं3त हं 'स्पeपीर्ण यखिSवा द
कराण्या य3ग्य' हं3त कr हं , हं शी3'र्ण आवाश्यक आहं. दसर्‍य शीब्द त, न्या य य
अस दृनिeक3 स्व क रा कr, प्रार्थीमदशी वा द करा रा असल्या चा, त3 शीBन्यावात आलिर्ण
नि रार्थीक, नि ष्क्रीrय निकवा पी रा पी डण्या स अक्षम हं य ब बत सम ' हं3र्ण आवाश्यक
आहं. हं क्ष त घत पी निहंजी, ज्या वाळे¥ टंल्या चा नि र्णय घण्या त आ , त्या वाळे¥
क म ४५ म' तरातBद प्राम र्ण हं3त :
"४५ . पीक्षक रा वा द कड पी ठीनिवाण्या चा न्या नियक अलि'क रा चा
अलि'क रा - भा गा १ मध्ये निकवा निदवा र्ण प्रानिक्रय सनिहंत , १९०८ (१९०८
चा अलि'नि यम ५) मध्ये क हं हं सम निवाe अस तरा , जीव्हे ए द
प्राकरार्ण, ज्या मध्ये पीक्षक रा क म ४४ मध्ये सदलिभात क करा रा
क आहं, न्या नियक प्रा लि'करार्ण कड क रावा ईस ठी यत तव्हे , जी3पीय5त
त3 करा रा शीBन्या आलिर्ण राद्दब त , नि खिष्क्रीय निकवा क य कराण्या स अक्षम
असल्या चा आढळेB यत हं , पीक्षक रा पीJकr एक च्या निवा त वारू निकवा
त्या च्या म फत निकवा त्या च्या अतगात द वा करार्ण ऱ्या क3र्णत्या हं
व्यS च्या निवा त वारू , पीक्षक रा वा द कड पी ठीवा ."
(जी3रा निद )
२९. उपीरा3S वाJ' नि क मजीकरा च्या आ' रा, न्या यमBत; ब .ए . श्री क̂ष्ण य
वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा चा नि ष्कर्ष हं प्रार्थीमदशी शी3' अस वा अस मत म ड .
न्या यमBत; ड .एम. 'म लि'क रा य क हं मद्या चा भारा घ B न्या यमBत; ब ए
श्री क̂ष्ण य च्या शी सहंमत दशीवा .
३०. } शी इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवा. ब3घ रा पीo फ
} ब प्रा यव्हेटं लि लिमटंड19
मध्ये , द3 निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी सम3रा अस प्राश्ना निवाचा रा ' हं3त कr, जीरा
करा रा मध्ये अशी निवावा द चा मद्द वा द कड स3पीनिवाण्या ब बत मBद क अस तरा
क3र्णत्या पीरिराखिस्थात त, न्या य य जीरूरा अस ल्या प्राम र्ण शी सबलि'त निवावा द चा प्राश्ना
वा द कड सदलिभात कराण्या स क रा दई . हं द निवाचा रा त घत गा कr
अलि'नि यम च्या क म ११ अजीद रा राक्काम लिमळे आलिर्ण त्या पीBर्ण आलिर्ण
अनितम निडस्चा जी व्हे उचारा जी रा क जी त्या च्या मत अवा जीवा दब वा, बळेजीबरा आलिर्ण
आलिर्थीक सS मळे जी रा क गा , य क रार्ण स्तोवा प्राकरार्ण वा द कड सदलिभात
कराण्या स निवारा3' झा कr हं आलिर्ण त्या मळे प्राकरार्ण वा द कड सदलिभात कराण्या स
न्या य्य आहं. न्या यमBत; आरा.व्हे . रावा द्रां , न्या य य च्या ब जीB ब3 त , इंतरा
गा3e बरा3बराचा, एस. ब . पी . (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि र्णय चा पी कराण्या चा
अलिभाप्रा य निद आलिर्ण प्राम र्ण नि र्णय निद :
"२२. क म ११ अन्वय वा द न्या य लि'करार्ण चा नि यS
19 (२००९) १ २६७
एस स स
कराण्या स ठी न्या य य चा हंस्तोक्षपी म निगात जी त3 तव्हे , मख्य
न्या य ' शी निकवा त्या च्या पीद म चा कतव्य एसब पी अ•ड कपी
[(२००५) ८ एस. स . स . ६१८] मध्ये पीरिराभा निर्षत क आहं. ह्या
न्या य य , अलि'नि यम च्या क म ११ अन्वय अजी वारा निवाचा रा र्थी यऊ
शीकर्ण रा प्रा रालिभाक मद्द नि लिश्चत करू त वागा 5मध्ये निवाभा गा त
म्हीर्णजीचा (१) ज्या मद्द्यां वारा सरान्या य ' शी निकवा त्या पीदनि यS
अलि'क रा नि र्णय घण्या स ब ' आहंत; (२) ज्या मद्द्यां वारा त3 सद्ध
नि र्णय घऊ शीकत3, म्हीर्णजीचा अस मद्द ज्या वारा स्वतš नि र्णय घण्या स ठी
त3 नि वाडB शीकत3; आलिर्ण (३) मद्द ज्या चा नि र्णय घण्या स ठी वा द
न्या य लि'करार्ण कड स3ड पी निहंजी.
२२.१. सरान्या य ' शी/त्या पीदनि यS अलि'क रा य ज्या
मद्द्यां वारा (प्रार्थीम श्रीर्ण ) नि र्णय घ्या वा गा त :
(ए) अजी करार्ण ऱ्या पीक्षक रा य3ग्य त्या उच्च न्या य य त ' वा
घत आहं क .
(ब ) वा द करा रा आहं कr हं आलिर्ण ज्या पीक्षक रा
अलि'नि यम च्या क म ११ अतगात अजी क आहं, त3 अशी
करा रा म' पीक्षक रा आहं कr हं .
२२.२. सरान्या य ' शी/त्या पीदनि यS अलि'क रा स्वतš नि र्णय
घण्या स ठी (निकवा वा द न्या य लि'करार्ण च्या नि र्णय वारा स3डB) नि वाडB
शीकत अस मद्द (दसरा श्रीर्ण ):
(ए) द वा मˆत (द घ-प्रानितबलि'त) द वा निकवा लिजीवात द वा आहं क .
(ब ) पीक्षक रा त्या च्या पीरास्परा हंक्का आलिर्ण द नियत्वा चा सम ' 3दवाB
करा रा/व्यवाहं रा पीBर्ण क आहं कr हं निकवा आक्षपी लिशीवा य अनितम
पीम£टं प्रा प्ती क आहं.
२२.३. सरान्या य ' शी /त्या पीदनि यS अलि'क रा य कवाळे
वा द न्या य लि'करार्ण कड स3ड मद्द (तˆत य श्रीर्ण ) आहंत:
(१) क द वा प्राकरार्ण वा द कड स3पीनिवाण्या च्या क म त यत3
कr हं (उद हंरार्ण र्थी, निवाभा गा य प्रा लि'करार्ण च्या अनितम नि र्णय स ठी
रा वा अस आलिर्ण वा द तB अपीवा द क निकवा वागाळे
ब ब).
(२) वा द मध्ये स म अस गार्णवात्त निकवा क3र्णत हं द वा .
२३. य न्या य य एस. ब . पी . आलिर्ण कपी [(२००५) ८
एस. स . स . ६१८] मध्ये स्पe कल्या प्राम र्ण क यद्या च्या य3जी वारू हं
स्पe हं3त कr, अलि'नि यम च्या ११ अतगात क3र्णत्या हं अजी त दसऱ्या
श्रीर्ण त मद्द उपीखिस्थात झा ल्या स, सरान्या य ' शी/त्या पीदनि यS
अलि'क रा , आवाश्यक असल्या स, पीरा वा घऊ त्या वारा नि र्णय घऊ
शीकत त. वाJकखिल्पाकरिरात्या , वा द न्या य लि'करार्ण कड नि र्णय घण्या च्या
नि द^शी सहं त3 त मद्द निवाचा रा स ठी ठीवाB शीकत3. जीरा सरान्या य ' शी
निकवा त्या पीदनि यS अलि'क रा य य मद्दय चा पीरा क्षर्ण कराण्या चा
नि वाड आलिर्ण त्या वारा नि र्णय निद , तरा वा द न्या य लि'करार्ण त्या चा
मद्द्यां चा पीन्ही पीरा क्षर्ण करू शीकत हं . सरान्या य ' शी/त्या पीदनि यS
अलि'क रा य , त्या अशी मद्द्यां वारा स्वतš नि र्णय घ्या वा कr वा द
न्या य लि'करार्ण कड स3पीवा यचा हं नि वाडत , क यद्या च्या उद्दशी चा
(कम त कम न्या नियक हंस्तोक्षपी सहं वा द प्रानिक्रय गात दर्ण) म गादशी
करा वा. पीBर्ण आलिर्ण अनितम सटं म£टंद्वा रा करा रा च्या निवासजी च्या
दस्तोऐवाजी च्या 3द सदभा त 3टं/ब वाटं चा आरा3पी क जी त त, तव्हे
सरान्या य ' शी/त्या पीदनि यS अलि'क रा य य समस्यांवारा नि र्णय
घतल्या स त य3ग्य हं3ई .
२४. तर्थी निपी क य स्पe आहं त म्हीर्णजी, जीव्हे उत्तराद य अस द वा
करात3 कr करा रा हं समझा3त करा रा निकवा निडस्चा जी व्हे उचारा निकवा 3-
क्लॉम सनिटंनिफकटं स रा निवासलिजीत कल्या मळे निवावा द वा द कड
स3पीनिवात यत हं आलिर्ण द वा करार्ण रा व्यS अस द वा करात कr त
फसवार्णBक, अवा जीवा दब वा, जीबरादस्तो निकवा बळेजीबरा करू लिमळेवा
गा आहंत, तव्हे मख्य न्या यमBत;/त्या पीदनि यS अलि'क रा य
अलि'नि यम च्या क म ११ क यवा हं मध्ये निकवा क म ११
आदशी स रा नि द^लिशीत क ल्या वा द न्या य लि'करार्ण द्वा रा य
समस्यांवारा नि र्णय घ्या वा गा . जीरा द वाद रा समझा3त करा रा निकवा
निडस्चा जी व्हे उचारा य च्या वाJ'तनिवार्षय निवावा द नि म र्ण क अस तरा
कवाळे निकवा सपीBर्णपीर्ण द वाद रा त जी रा क हं3त य चा आ' रा घऊ
प्राकरार्ण वा द कड स3पीनिवाण्या ब बतचा द वा क रा जी ऊ शीकत
हं .
३१. हं क्ष त घण्या स रा आहं कr, ज्या वाळे¥ न्या य य एस.ब .पी .
(उपीरा3ल्लेखि त) आलिर्ण एस. एम. एस. टं इंस्टीटं (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि क निद
हं3त, त्या वाळे¥ क म ११(६) मध्ये, मB त: पीक्षक रा मध्ये वा द चा नि यS निकवा
नि यS करार्ण य ब बत सहंमत हं3ण्या च्या क रार्ण स्तोवा वा द चा नि यS
कराण्या ब बत निवाचा रा क जी त हं3त . न्या य य व्यS क ल्या मत च्या
सदभा त, वारा म्हीटंल्या प्राम र्ण, भा रात य क यद आय3गा ऑगास्टी, २०१४ मध्ये द3 शी
चा ळे¥सवा अहंवा स दरा क . य अहंवा त, एस.ब .पी . (उपीरा3ल्लेखि त) म'
नि क चा आलिर्ण रा ea य निवाम (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये व्यS क मत य ब बतचा
सदभा निदल्या तरा, क यद आय3गा , इंतरा गा3e बरा3बराचा, लिशीफ रास स दरा
कल्या :
“३१. आय3गा चा अस मत आहं कr, य सदभा त, क म ११ च्या
सदभा त गाB अस ल्या न्या य य हंस्तोक्षपी चा व्य प्ती आलिर्ण
स्वरूपी ब बतचा त चा चा चार्ण क यद्या च्या क म ८ आलिर्ण ४५ द
गाB झा पी निहंजी - क रार्ण न्या नियक हंस्तोक्षपी चा व्य प्ती आलिर्ण स्वरूपी हं
ए द्या पीक्षक रा ( वा द करा रा पीरा भाBत कराण्या चा हंतB अस )
मध्येस्था करा रा च्या सदभा त वा द चा नि यS कराण्या स क रा निद
निकवा अस वा द करा रा असत हं न्या नियक प्रा लि'करार्ण सम3रा
क यवा हं सरू क कr हं य वारा बद B य.
३२. हंस्तोक्षपी च्या स्वरूपी च्या सब' त, क यद्या चा स्पe करार्ण
सवा$च्च न्या य य लिशी एत्सा कलिमकल्‍स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध अक्ष
ऑनिáफ यबरा , (२००५) ७ एस. स . स . २३४, ह्या प्राकरार्ण त
(अलि'नि यम च्या क म ४५ सदभा त), निद ल्या नि र्णय त स पीड लिजीर्थी
सवा$च्च न्या य य मद्द/वा द कवाळे प्रार्थीमदशी पी हंण्या च्या ब जीB
नि र्णय निद आहं.
३३. य सदभा त आय3गा वा द आलिर्ण स मजीस्यां अलि'नि यम, १९९६ च्या क म 8 आलिर्ण ११ मध्ये स' रार्ण कराण्या चा लिशीफ रास क
आहं. न्या नियक हंस्तोक्षपी चा व्य प्ती कवाळे अशी पीरिराखिस्थात पीरात मय निदत
आहं लिजीर्थी न्या य य/न्या नियक प्रा लि'करार्ण वा द करा रा अखिस्तोत्त्वा त
हं निकवा त3 राद्दब त असल्या चा आढळेB यत. जी3पीय5त हंस्तोक्षपी च्या
स्वरूपी चा सब' आहं, अशी लिशीफ रास क जी त कr वा द च्या
करा रा आव्हे दर्ण र्‍य यखिSवा द वारा न्या य य/न्या नियक प्रा लि'करार्ण
प्रार्थीमदशी सम ' असल्या स, जीशी पीरिराखिस्थात अस त्या प्राम र्ण, त
वा द चा नि यS करा आलिर्ण/निकवा पीक्षक रा वा द कड पी ठीवा .
वा द चा करा रा अखिस्तोत्वा त सल्या चा निकवा अस करा रा शीBन्या आलिर्ण
राद्दब त झा आहं अस आढळेB आल्या वाराचा न्या नियक प्रा लि'करार्ण
पीक्षक रा वा द कड पी ठीवाB य, अशी स' रार्ण य दरुस्तो मध्ये
कराण्या त आ आहं. जीरा न्या नियक प्रा लि'करार्ण चा अस मत अस कr
प्रार्थीम दशी वा द करा रा अखिस्तोत्त्वा त आहं, तरा त सदरा वा द वा द कड
पी ठीवा आलिर्ण वा द च्या करा रा चा अखिस्तोत्वा वा द न्या य लि'करार्ण
अनितमत: ठीरावाण्या स ठी स3ड . तर्थी निपी, जीरा न्या नियक प्रा लि'करार्ण अस
नि ष्कर्ष क ढ कr करा रा अखिस्तोत्वा त हं , तरा त3 नि ष्कर्ष अनितम अस
आलिर्ण प्रार्थीमदशी हं . वा द ब बतचा करा रा शीBन्यावात आलिर्ण
राद्दब त आहं कr हं य बद्द एक नि र्ण यक नि श्चय अस य
ब बत तहं य दरुस्तो मध्ये ठीरा वा आहं. अ क्रम क म ८ आलिर्ण ११
अतगात न्या नियक प्रा लि'करार्ण निवावा द वा द कड सदलिभात करात
आलिर्ण/निकवा वा द नि यS करात अशी पीरिराखिस्थात त, अस नि र्णय अनितम
आलिर्ण अपी कराण्या य3ग्य अस . म त्रा पीक्षक रा वा द कड
पी ठीवाण्या स क रा निदल्या स निकवा वा द चा नि यS कराण्या स क रा
निदल्या स क म ३७ अतगात अपी द करात यत .”
(जी3रा निद )
३२. त्या स रा, क म ११(६-अ) घ तल्या चा अहंवा स्व क रात आहं. क म
११(६-अ) सम निवाe करार्ण ऱ्या घटं चा म डर्ण कल्या तरा, आम्ही आमचा म्हीर्णर्ण पीढ
ऊ शीकत3. डBरा3 फल्गुएरा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये, आम्ही य नि क च्या आ' च्या
भा गा मध्ये पीरिराच्छेद ५९ मध्ये घत दृनिeक3 क्ष त घत आहं, र्थी3डक्यु त, वा द
करा रा अखिस्तोत्वा त आहं कr हं हं शी3'ण्या चा कतव्य. निवाद्वा न्या य ' शी पीरिराच्छेद
४८ मध्ये नि रा क्षर्ण द 3दवा ज्या मध्ये क म ११(६-अ) उद्धˆत कल्या तरा त्या
प्राम र्ण नि र्णय निद :
“... क म ११ (६-अ) च्या वा चा वारू , निवालि'मडळे चा हंतB अगाद
स्पe आहं, म्हीर्णजी न्या य य फS एक पीJ Bकड क्ष दर्ण आवाश्यक
आहं - वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा. वा द करा रा आहं कr हं हं
ठीरावाण्या स ठी क3र्णत घटंक आहंत हं पीढचा प्राश्ना आहं. त्या ब बतचा
ठीरा वा स3पी आहं - करा रा म' पीक्षक रा मध्ये नि म र्ण झा ल्या
निवावा द शी सबलि'त वा द चा तरातBद करार्ण रा क म आहं क त पी हंर्ण
आवाश्यक आहं.”
३३. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये द3 निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी क म
११(६-अ) टं हं त ळे आलिर्ण त3हं महं रा ea मद्रां क क यद , 1958 च्या
सदभा त. अपी कत्या उपीखिस्थात क यखिSवा द अस हं3त कr एस. एम. एस. टं
इंस्टीटंसç (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि क क म ११(६-अ) द झा ल्या तराहं
गाB हं3त त. दसऱ्या शीब्द त, क म ११(६-अ) सम निवाe कल्या तराहं , एस. एम.
एस. टं इंस्टीटंसç (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये निवाचा रा त घत ल्या क यपीद्धत चा पी करा वा
गा . न्या य य इंतरा गा3e बरा3बराचा, आम्ही क्ष त घतल्या प्राम र्ण आलिर्ण ए . ए .
ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये सदलिभात कल्या प्राम र्ण, नि ष्कर्ष क ढ :
२२. जीव्हे वा द चा क्लॉoजी "करा रा त" सम निवाe असत3, तव्हे हं
महंत्त्वा चा आहं कr करा रा क यद्या अम त आर्णण्या य3ग्य अस तराचा
त3 करा रा ब त3. आम्ही पी निहं आहं कr, भा रात य मद्रां क क यद्या तगात, करा रा हं करा रा कस ब त हं , म्हीर्णजी, त3 क यद्या स रा गाB हं3त
हं , जी3पीय5त त्या वारा मद्रां क वा जी त हं . म्हीर्णB , १९९६ च्या
अलि'नि यम च्या क म ७(२) आलिर्ण करा रा अलि'नि यम च्या क म २(हं)
सहं वा चात , क म ११(६-अ) चा स ' वा चा द हं स्पe करा
कr जीव्हे करा रा क यद्या द्वा रा गाB हं3र्ण रा स तव्हे करा रा मध्ये
वा द ब बतचा क म अखिस्तोत्वा त असर्ण रा हं . हं द एक सBचाक
आहं कr क म ११(६-अ) च्या दरुस्तो द्वा रा एस. एम. एस. टं इंस्टीटंसç
प्राकरार्ण क3र्णत्या हं प्राक रा स्पशी क गा हं .
XXX XXX XXX
२९. ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा प्राकरार्ण म' हं नि र्णय महंत्वा चा
आहं, य सदभा त कr यर्थी निवाशीर्षत: निवाचा रा ' अस एक वा द
क म आहं , जी क म निवाम कपी द नियत्वा म न्या क निकवा
स्व क रा तराचा सनिक्रय हं3ई . वास्तोखिस्थात वारू अस आढळेB आ
कr वा द चा क म "अखिस्तोत्वा त" अस तरा , स गा यचा तरा, पीoलि स मध्ये, निवाम कपी द वा क रा , पीर्ण जीस कr त्या नि र्णय त
म्हीटं आहं, जीव्हे एक महंत्त्वा चा वास्तोखिस्थात म ड जी त तव्हे , म्हीर्णजी, निवाम कत्या द नियत्वा म न्या क हं निकवा स्व क रा हं , तव्हे त क यद्या च्या जीरात अखिस्तोत्त्वा त व्हेत. त्या चाप्राम र्ण, जीस
आम्ही वारा नि र्ण;त क आहं त्या प्राम र्ण सध्ये च्या प्राकरार्ण त
तथ्यां मध्ये हं स्पe आहं कr उपी-करा रा मध्ये सम निवाe अस
वा द ब बतचा क म क यद्या च्या जीरात "अखिस्तोत्वा त" स , जी3पीय5त उपी-करा रा वारा रा तसरा मद्रां क वा जी त हं . क म ११(६-
अ) जी वा द करा रा चा "अखिस्तोत्वा" शी सबलि'त आहं त क म ८, क म
१६, आलिर्ण क म ४५ जी वा द करा रा चा "वाJ'त "शी सबलि'त आहं
त्या च्या निवारूद्ध आहं, य यखिSवा द , य न्या य य च्या "अखिस्तोत्वा" य
अलिभाव्यS च्या आक द्वा रा ह्या©द ई इंलिजीनि यरिरागा ह्या प्राकरार्ण त जी
समजी त्या स रा उत्तरा निद जी त, ज्या चा आम्ही अ सरार्ण क .
३४. आमच्या अस नि दशी स यत कr, अलि'नि यम च्या क म ४५ म' , 'जी3पीय5त त3 स पीडत हं त3पीय5त' य शीब्द स ठी , २०१९ च्या अलि'नि यम ३३ द्वा रा
'प्रार्थीम दृeय त3 स पीडत हं त3पीय5त'अस शीब्द बद ण्या त आ हं3त. हं म्हीर्णजी
न्या यमBत; ब . ए . श्री क̂ष्ण य एस.एम.एस. टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये
निद ल्या नि क द्वा रा य न्या य य स्व क रा ल्या अर्थी लिमळे वाJ' नि क
म न्यात आहं.
३५. म य वात टंaनिडगा (प्रा ) लि . निवा. प्राद्यात दब बम 20
मध्ये , य न्या य य च्या
त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी , इंतरा गा3e बरा3बराचा, प्राम र्ण नि ष्कर्ष
म ड :
१० . हं खिस्थात असल्या , हं स्पe आहं कr २०१५ च्या
दरुस्तो पीBवा;चा क यद जी3 य न्या य य घ B निद आहं, ज्या मध्ये
एक अलिभाव्यS ऐवाजी दसरा अलिभाव्यS स्व क रा आहं हं
सम निवाe क गा आहं, त3 आत निवा' सभात राद्द क गा आहं.
20 (२०१९) ८ ७१४
एस स स
हं खिस्थात असल्या , उपीरा3S नि क मध्ये सम निवाe अस ल्या
तक शी सहंमत हं3र्ण कठी र्ण आहं [ य यटंड इंनिडय इंन्शुरा£स कपी
लि लिमटंड निवारुद्ध ॲन्ट्रॅ क आटं एर्क्सपी3टंस (प्रा ) लि लिमटंड, (२०१९ ) ५
एस. स . स . ३६२ : (२०१९) २ एस. स . स . (निदवा र्ण ) ७८५], क रार्ण क म ११(६-अ) वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या पीरा क्षर्ण पीरात
मय निदत आहं आलिर्ण दरा3 फल्गुएरा , एस. ए. [दरा3 फल्गुएरा , एस. ए.
निवारुद्ध गागा वाराम पी3टं लि लिमटंड (२०१७) ९ एस. स . स . ७२९ :
(२०१७) ४ एस. स . स . (निदवा र्ण ) ७६४] म' नि क त मBद
कल्या प्राम र्ण सकलिचात अर्थी समजी पी निहंजी. — पीरिराच्छेद ४८ आलिर्ण
५९ पीहं [ईड : सदरा दरा3 फल्गुएरा , एस. ए. निवारुद्ध गागा वाराम पी3टं
लि लिमटंड (२०१७) ९ एस. स . स . ७२९ : (२०१७) ४ एस. स . स .
(निदवा र्ण ) ७६४] म' पीरिराच्छेद क्र. ४८ आलिर्ण ५९ तय रा सदभा स ठी , प्राम र्ण वा चा : “४८. २०१५ दरुस्तो द्वा रा द क क म
११(६-अ) प्राम र्ण आहं : “११(६-अ) सवा$च्च न्या य य निकवा
उच्च न्या य य, यर्थी खिस्थात , य उपी-क म (4) निकवा उपी-क म
JUDGMENT

(5) निकवा उपी-क म (6) अतगात क3र्णत्या हं अजी चा निवाचा रा करात, क3र्णत्या हं न्या य य चा क3र्णत हं नि र्णय, हुक B म निकवा आदशी अस तरा हं, स्वत: वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या पीरा क्षर्ण पीरात मय निदत ठीवा वा.” (जी3रा निद ) क म ११(६-अ) चा वा चा करात, क यदमडळे चा हंतB स्फनिटंकप्राम र्ण स्वच्छे आहं त[3] म्हीर्णजी न्या य य फS एक पीJ Bकड क्ष निद पी निहंजी - वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा. वा द करा रा आहं कr हं हं ठीरावाण्या स ठी क3र्णत घटंक आहंत हं पीढचा प्राश्ना आहं. त्या स ठी चा ठीरा वा स3पी आहं—करा रा त पीक्षक रा मध्ये नि म र्ण झा ल्या निवावा द शी सबलि'त वा द चा तरातBद करार्ण रा क म आहं क त पी हंर्ण आवाश्यक आहं. ***५९. १९९६ च्या अलि'नि यम च्या क म ११(६) अतगात अलि'क रा चा व्य प्ती एस. ब. पी. आलिर्ण कपी निवारुद्ध पीटं इंलिजीनि यरिरागा लि लिमटंड, (२००५) ८ एस. स. स. ६१८ आलिर्ण }शी इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध ब3घ रा पीo फ } ब (प्रा.) लि लिमटंड, (२००९) १ एस. स. स. २६७: (२००९) १ एस. स. स. (निदवा र्ण ) ११७ म' नि र्णय क्ष त घत बरा चा निवास्तोˆत हं3त. २०१५ मध्ये स' रार्ण हं3ईपीय5त हं खिस्थात क यम हं3त. सदरा दरुस्तो तरा, न्या य य जी सवा पीरा क्षर्ण करार्ण आवाश्यक आहं त म्हीर्णजी वा द करा रा अखिस्तोत्वा त आहं कr हं त पीहं र्ण - य पीक्ष क हं अलि'क हं, क हं कम हं. वा द चा नि यS कराण्या च्या टंप्प्या वारा न्या य य चा हंस्तोक्षपी कम करार्ण हं क यद्या चा मB त: '3रार्ण आलिर्ण हंतB आहं आलिर्ण क म ११(६-अ) मध्ये सम निवाe क ल्या य हंतBचा आदरा क पी निहंजी.”]. ३६. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) [पीरिराच्छेद-२२ आलिर्ण २९ (उपीरा3ल्लेखि त)] मध्ये घत दृनिeक[3], निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये 3दवा ल्या नि क त त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी निवाशीर्षतš मजीBरा क. त्या मध्ये न्या यमBत; सजी वा न्ना य न्या य य स ठी न्या यनि र्णय लि निहं आलिर्ण न्या यमBत; ए. व्हे. रामर्ण य त्या स पीBराक अस स्वत:चा नि क पीत्रा निद. हं नि क २८.०२.२००९ रा3जी च्या प्राकरार्ण वा द कड स3पीनिवाण्या च्या सदभा वारा निद गा आलिर्ण त्या त प्राश्ना अस हं3त कr, जीम म क-भा डकरूम' वा द, जी3 म मत्त हंस्तो तरार्ण क यद्या च्या तरातद द्वा रा नि यनित्रात क जी त[3] त[3] वा द कड स3पीनिवात यत[3] कr हं. य मद्द्यां व्यनितरिराS, दसरा प्राश्ना अस हं3त कr नि र्णय क3र्ण दई, उद., सदभा दण्या च्या टंप्प्या वाराचा न्या य य निकवा वा द च्या क यवा हं मध्ये वा द न्या य लि'करार्ण. सदभा टंप्प्या वारा अलि'क रा तचा व्य प्ती आलिर्ण कक्ष य प्राश्ना त जी र्णहं न्या य य य3ग्य वा टं. त्या च्या नि र्णय दराम्या त्या निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद-१४६ आलिर्ण १४७, १४७.१ मध्ये नि रा क्षर्ण म ड आहंत: “१४६. क म ११ म' "अखिस्तोत्वा" हं शीब्द कवाळे करा रा च्या नि लिमत चा ( वा द चा करा रा आहं कr हं ) सदभा दत[3] आलिर्ण अम बजी वार्ण चा (वाJ'त ) प्राश्ना वागाळेत[3] क आलिर्ण म्हीर्णB तराचा प्राश्ना न्या य य च्या प्राकरार्ण वा द कड सदलिभात कराण्या च्या टंप्प्या च्या अलि'क रा तच्या ब हंरा यत[3] क, य प्राश्ना चा पीरा क्षर्ण कराण्या स ठी आम्ही आत पीढ जी ऊ. न्या यशी स्त्र आलिर्ण मजीक B रावा द य वारा वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा आलिर्ण वा द करा रा चा वाJ'त य च्या त फराक करार्ण शीक्यु आहं. अशी अर्थीउक "अखिस्तोत्वा" य शीब्द च्या स ध्ये अर्थी कडB आ' रा प्रा प्ती करू शीकत. तर्थी निपी, जीरा करा रा अम त आर्णण्या जी3गा स आलिर्ण ब' क राक स तरा त्या चा अखिस्तोत्वा हं अस म र्ण, न्या यशी स्त्र च्या दृe आलिर्ण सदभावा द स रा निततकचा शीक्यु आहं. वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा एक पीBवाकल्पा करात कr तर्थी एक वाJ' करा रा आहं जी3 पीक्षक रा वा द कड सदलिभात करू न्या य य द्वा रा गाB क जी ई. क यदशी रा आलिर्ण स ' अर्थी अर्थीउक व्य ख्य ड सहं सदलिभात पी ¡भाBम च्या निवारुद्ध अस आलिर्ण पीरिरार्ण म, अनिप्राय पीरिरार्ण म हं3त. "अखिस्तोत्वा" ह्या शीब्द चा वा जीवा आलिर्ण न्या य्य अर्थीउक हं3ण्या स ठी सदभा, उद्दशी आलिर्ण ब' क राक आलिर्ण गाB कराण्या य3ग्य वा द करा रा स ठी गाB असर्ण रा सबलि'त क यदशी रा म दड समजीB घर्ण आवाश्यक आहं. जी3पीय5त पीक्षक रा अटं शी नि ष्ठ वा रा हंण्या स आलिर्ण त्या चा पी कराण्या स भा गा पी ड जी त हं त3पीय5त लि खि त स्वरुपी त पीरा व्य निद ल्या करा रा क हं अर्थी सत[3]. अम बजी वार्ण करू शीकर्ण ऱ्या दस्तोऐवाजी च्या आ' रा वारा पीक्षक रा द वा द करू शीकत हं आलिर्ण हंक्काहं म गाB शीकत हं. अशी प्राक रा, वा द चा करा रा हं वाJ' आलिर्ण क यदशी रा अस तव्हे चा अखिस्तोत्वा त असत[3] अस म ण्या चा चा गा क रार्ण आहंत. शीBन्यावात आलिर्ण गाB करात यर्ण रा समजी म्हीर्णजी क हं हं कराण्या चा करा रा हं. वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा य चा अर्थी अस एक वा द करा रा जी3 वा द अलि'नि यम आलिर्ण करा रा अलि'नि यम ह्या द3न्ही म' वाJ' नि क आवाश्यकत य चा पीBतत करात[3] आलिर्ण जीव्हे त[3] क यद्या त गाB हं3त[3]. १४७. आम्ही पीढ जी ऊ निवास्तो रा निवार्षद करू आलिर्ण पीढ क रार्ण दऊ: १४७.१. गारावा रा वाo रा3प्स लि लिमटंड [गारावा रा वाo रा3प्स लि लिमटंड निवारुद्ध कoस्टी मरा कन्स्ट्रaक्शन्स आलिर्ण इंजी नि अरिरागा लि लिमटंड, (२०१९) ९ एस. स. स. २०९: (२०१९) ४ एस. स. स. (निदवा र्ण ) ३२४] ह्या प्राकरार्ण मध्ये, य न्या य य वा द च्या क म सहं अतनि निहंत करा रा त मद्रां क शील्क च्या प्राश्ना चा तपी सर्ण क हं3त आलिर्ण त्या सदभा त वा द अलि'नि यम च्या क म ७(२) चा प्रार्थीम आलिर्ण दसरा भा गा य म' फराक क ढ हं3त. वा द करा रा चा "अखिस्तोत्वा" आलिर्ण "वाJ'त " सदभा त वारा मBद नि रा क्षर्ण क आलिर्ण उद्धˆत क अस तरा हं, त समलिचात आलिर्ण अनितशीय महंत्वा चा असल्या मळे, आम्ही पीरिराच्छेद २९ चा पी š उद्धˆत करू त्या चा पी रा वाˆत्त करू.: (एस. स. स. पी क्र. २३८) “२९. ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा कसम' हं नि क [य यटंड इंनिडय इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा आलिर्ण कन्स्ट्रaक्श कपी लि लिमटंड (२०१८) १७ एस. स. स. ६०७: (२०१९) २ एस. स. स. (निदवा र्ण ) ५३०] अस महंत्त्वा चा आहं कr त्या त निवाशीर्षत: निवाचा रा ' अस एक वा द क म हं3त जी निवाम कपी द नियत्वा म न्या क निकवा स्व क रा तराचा सनिक्रय हं3ई. वास्तोखिस्थात वारू अस आढळेB आ कr वा द चा क म "अखिस्तोत्वा त" अस तरा, स गा यचा तरा, पीoलि स मध्ये, निवाम कपी द वा क रा, पीर्ण जीस कr त्या नि र्णय त म्हीटं आहं, जीव्हे एक महंत्त्वा चा वास्तोखिस्थात म ड जी त तव्हे, म्हीर्णजी, निवाम कत्या द नियत्वा म न्या क हं निकवा स्व क रा हं, तव्हे त क यद्या च्या जीरात अखिस्तोत्त्वा त व्हेत. त्या चाप्राम र्ण, जीस आम्ही वारा नि र्ण;त क आहं त्या प्राम र्ण सध्ये च्या प्राकरार्ण त तथ्यां मध्ये हं स्पe आहं कr उपी- करा रा मध्ये सम निवाe अस वा द ब बतचा क म क यद्या च्या जीरात "अखिस्तोत्वा त" स, जी3पीय5त उपी-करा रा वारा रा तसरा मद्रां क वा जी त हं. क म ११(६-अ) जी वा द करा रा चा "अखिस्तोत्वा" शी सबलि'त आहं त क म ८, क म १६, आलिर्ण क म ४५ जी वा द करा रा चा "वाJ'त "शी सबलि'त आहं त्या च्या निवारूद्ध आहं, य यखिSवा द, य न्या य य च्या "अखिस्तोत्वा" य अलिभाव्यS च्या आक द्वा रा ह्या©द ई इंलिजीनि यरिरागा [य यटंड इंनिडय इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा आलिर्ण कन्स्ट्रaक्श कपी लि लिमटंड (२०१८) १७ एस. स. स. ६०७: (२०१९) २ एस. स. स. (निदवा र्ण ) ५३०] ह्या प्राकरार्ण त जी समजी त्या स रा उत्तरा निद जी त, ज्या चा आम्ही अ सरार्ण क.” अखिस्तोत्वा आलिर्ण वाJ'त एकमक शी जी3ड आहंत, आलिर्ण वा द करा रा जीरा बक यदशी रा अस निकवा अनि वा य क यदशी रा आवाश्यकत पीBर्ण करात स तरा त[3] अखिस्तोत्वा त सत[3]. अवाJ' करा रा हं करा रा हं.” ३७. त्या तरा ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये, न्या य य उपीरा3S पीरिराच्छेद मध्ये घत ल्या दृनिeक[3] च्या अचाBकतवारा शीक घत आलिर्ण निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण म' पीरिराच्छेद-१४६ आलिर्ण १४७ मध्ये पीe क ल्या गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) म' पीरिराच्छेद-२२ आलिर्ण २९ म' नि ष्कर्ष 5चा सदभा निद. आमच्या हं नि दशी स यत कr निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण च्या पीरिराच्छेद- १४७ मध्ये पीरिराच्छेद-१४६ मध्ये मBद क ल्या गा3e ब बत क रार्ण स निगात आहंत. पीरिराच्छेद-१४७ चा अ सरार्ण पीरिराच्छेद- १४७.१ त १४७.११ मध्ये क आहं. तर्थी निपी, वारावारा पी हंत, ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण चा निवार्ण ऱ्या न्या य य ज्या ब बत शीक व्यS क, त्या पीरिराच्छेद-१४६ आलिर्ण १४७ असल्या चा निदसत, ज्या य प्राकरार्ण च्या सदभा त आम्ही समजीत त, त्या पीरिराच्छेद-१४७.१ पीय5त मय निदत ठीवा वाय स पी निहंजीत. ३८. आम्ही अलि'नि यम चा सवा^क्षर्ण पीन्ही सरू करू शीकत[3] ज्या प्राम र्ण त त सबलि'त आहं. क म १६ मध्ये कoम्पेटं£झा-कoम्पेटं£झाचा तत्वा सम निवाe आहं. हं प्राम र्ण वा चात यत: “१६. वा द न्या य लि'करार्ण चा नितच्या अलि'क राक्षत्रा वारा शी स कराण्या चा क्षमत.— (१) वा द न्या य लि'करार्ण, वा द च्या करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या निकवा वाJ'तच्या सदभा त क3र्णत्या हं आक्षपी वारा नि र्णय घण्या सहं, स्वत:च्या अलि'क रिरातवारा शी स करू शीकत आलिर्ण त्या हंतBस ठी,— (अ) एक वा द ड जी3 करा रा चा भा गा ब त[3] त[3] करा रा च्या इंतरा अटं पीक्ष स्वतत्रा करा रा म जी ई; आलिर्ण (ब) वा द न्या य लि'करार्ण निद नि र्णय कr करा रा शीBन्यावात आलिर्ण राद्दब त आहं, वा द च्या ड चा अवाJ'त क यद्या द्वा राचा गाB हं3र्ण रा हं. (२) वा द च्या न्या य लि'करार्ण अलि'क रिरात सल्या चा य लिचाक बचा वा चा जीब ब स दरा कल्या तरा करात यर्ण रा हं; तर्थी निपी, पीक्षक रा वा द चा नि यS क आहं निकवा त्या च्या नि यS प्रानिक्रयत भा गा घत आहं य क रार्ण स्तोवा त्या अशी य लिचाक म डण्या पी सB पीरा वाˆत्त क जी ऊ शीकत हं. (३) वा द न्या य लि'करार्ण त्या च्या अलि'क रा चा व्य प्ती ओ डत असल्या चा य लिचाक त त्का ळे क जी ई जीव्हे ए द प्राकरार्ण जी वा द च्या अलि'क रा तच्या पी कडचा आहं आस आरा3पी अस त वा द क यवा हं दराम्या निवाचा रा त घत जी ई. (४ ) वा द न्या य लि'करार्ण, उपी-क म (२) निकवा उपी-क म (३) मध्ये सदलिभात क3र्णत्या हं प्राकरार्ण मध्ये, निवा ब न्या य्य म त असल्या स, तराचा य लिचाक म न्या करू शीकत. (५) वा द न्या य लि'करार्ण पी3टं-क म (२) निकवा उपी-क म (३) अन्वय सदलिभात य लिचाकवारा नि क दई आलिर्ण, जीर्थी वा द न्या य लि'करार्ण य लिचाक फटं ळेण्या चा नि र्णय घत, तर्थी वा द चा क यवा हं सरू रा हंत आलिर्ण वा द चा नि वा ड निद जी त[3].. (६) अशी वा द च्या नि वा ड्यु मळे रा जी झा पीक्षक रा क म ३४ स रा अस वा द नि वा ड राद्दब त कराण्या स ठी अजी करू शीकत[3]. एचा. मद्रां क अलि'नि यम चा य3जी ३९. क म २(६) प्राम र्ण 'आक रार्ण पी त्रा' शीब्द चा व्य ख्य प्राम र्ण करात: “२(६) “आक रार्ण पी त्रा”. - आक रार्ण पी त्रा म्हीर्णजी, य अलि'नि यम च्या प्रा राभा तरा नि ष्पा निदत क ल्या निकवा त्या तरा प्रार्थीम नि ष्पा निदत क ल्या स गाB करात त्या चा अर्थी य अलि'नि यम आक रार्ण पी त्रा, अस आहं आलिर्ण अन्या क3र्णत्या हं स गाB करात त्या चा अर्थी, अस स नि ष्पा निदत क गा त्या वाळे¥ अर्थीवा जीर्थी, अ क व्यS त[3] स वागावागाळ्या वाळे¥ नि ष्पा निदत क अस तर्थी त[3] प्रार्थीम जीव्हे नि ष्पा निदत क गा त्या वाळे¥ भा रात त अम त अस ल्या क यद्या आक रार्ण पी त्रा अस आहं.: ४०. क म २(११) प्राम र्ण 'य3ग्य मद्रां निकत' शीब्द चा व्य ख्य करात: “२(११) “रा तसरा मद्रां निकत”. - रा तसरा मद्रां निकत, हं शीब्द स गाB क असत, त्या चा अर्थी, ज्या स वारा लिचाकटं मद्रां क निकवा छ पी मद्रां क आहं जी3 य3ग्य त्या राकमपीक्ष कम राकमचा हं आलिर्ण अस मद्रां क भा रात त त्या त्या क ळे¥ अम त अस ल्या क यद्या स रा वाण्या त अर्थीवा वा पीराण्या त आ अस त[3] स आहं.: " ४१. क म २(१२) स च्या सदभा त 'नि ष्पा निदत' य शीब्द चा व्य ख्य 'स्व क्षरा क ' अस करात. ४२. क म २(१४) 'स ' य शीब्द चा व्य ख्य अशी करात कr "स " य मध्ये ज्या ज्या दस्तोऐवाजी द्वा रा क3र्णत हं अलि'क रा अर्थीवा द नियत्वा नि म र्ण कराण्या त, हंस्तो तरिरात कराण्या त, मय निदत कराण्या त, वा ढवाण्या त, e कराण्या त निकवा अलिभा त कराण्या त आ अस निकवा तस कल्या चा निदसत अस, अशी प्रात्याक दस्तोऐवाजी चा सम वाशी आहं. ४३. क म ३, अ सBचा १ मध्ये सBटं दण्या ब बत जी तरातBद सम निवाe क आहं त्या च्या अ' रा हू त्या मध्ये मBद क ल्या शील्क आक रार्ण पी त्रा स ब बत क यवा हं करात. ४४. क म ४ हं लिजीर्थी अ क स आहंत त्या पीरिराखिस्थात ब बत भा ष्य करात. ४५. तर्थी इंतराहं तरातद आहंत, ज्या इंतरा व्यवाहं रा शी सबलि'त आहंत. क म १७ हं स वारा मद्रां क वाण्या च्या वाळेब बत सबलि'त आहं. क म १७ मध्ये भा रात त नि ष्पा निदत क ल्या स ब बत तरातBद आहं. हं क म अस घ3निर्षत करात कr अस स, जी शील्क आक रार्ण पी त्रा आहंत, त्या वारा नि ष्पा द वाळेआ' निकवा नि ष्पा द च्या वाळे¥ मद्रां क वा जी ई. क म ३१ य3ग्य मद्रां क ब बत अलिभानि र्णय शी सबलि'त आहं. लिजील्हा लि'क र्‍य अलिभानि र्णय घ्या वाय चा आहं. क म ३३ प्राकरार्ण चा रा मध्ये आहं आलिर्ण प्राकरार्ण चा शी र्षक आहं 'रा तसरा मद्रां निकत क स '. मद्रां क अलि'नि यम मध्ये, क म ३३ प्राम र्ण आहं: "३३. स चा तपी सर्ण करार्ण आलिर्ण त अवारुद्ध करार्ण - (१) क यद्या निकवा पीक्षक रा च्या समत पीरा वा घण्या स प्रा लि'क̂त अस ल्या ज्या ज्या व्यS पीढ आलिर्ण पी3 स अलि'क रा रा जीकरू शी सकrय क य य चा प्राभा रा अस ल्या ज्या ज्या व्यS पीढ, नितच्या मत शील्क आक रार्ण चा पी त्रा अस स हंजीरा कराण्या त यत[3] निकवा त आपी कतव्य पी रा पी ड असत नितच्या सम3रा यत[3] अशी प्रात्याक व्यS, अस स रा तसरा मद्रां निकत झा सल्या चा नित निदसB आ, तरा त[3] स अवारुद्ध करू ठीवात यई. (२) त्या प्राय3जी स ठी अशी प्रात्याक व्यS, य प्राम र्ण आक रार्ण पी त्रा अस आलिर्ण य प्राम र्ण हंजीरा क निकवा नितच्या सम3रा यर्ण रा अस स नि ष्पा निदत कराण्या त आ निकवा प्रार्थीम नि ष्पा निदत कराण्या त आ तव्हे भा रात त अम त अस ल्या क यद्या स रा आवाश्यक अस ल्या मBल्या चा वा त्या वार्ण चा मद्रां क त्या वारा वाण्या त आ आहं निकवा कस य चा तराजीम कराण्या स ठी अशी प्रात्याक स चा तपी सर्ण करा, पीरात, (अ) क3र्णत्या हं दड लि'क ऱ्या निकवा फ´जीद रा न्या य य च्या क3र्णत्या हं न्या य ' शी फ´जीद रा प्रानिक्रय सनिहंत, १८९८ (१८९८ चा अलि'नि यम ५) निकवा प्राकरार्ण १२ निकवा प्राकरार्ण ३६ य क यवा हं रा जी अन्या क3र्णत्या हं क यवा हं च्या ओघ त त्या च्या पीढ यर्ण ऱ्या क3र्णत्या हं स चा तपी सर्ण करार्ण निकवा त[3] अवारुद्ध करू ठीवार्ण य3ग्य वा टंत स तरा, य त अतभाBत अस ल्या क3र्णत्या हं गा3e मळे त आवाश्यक आहं अस म जी र्ण रा हं.; (ब ) ए द्या उच्च न्या य य च्या न्या य ' शी च्या ब बत त, य क म क3र्णत्या हं स चा तपी सर्ण कराण्या चा वा त[3] अवारुद्ध करू ठीवाण्या चा क म त न्या य य य ब बत त नि यS करा अशी अलि'क ऱ्या कड प्रात्याय3लिजीत कराण्या त यई. (३) य क म च्या प्राय3जी र्थी, शीक स्पद ब बत त,, — (अ) क3र्णत क य य हं शी सकrय क य य म्हीर्ण वा त हं रा ज्या शी स ठीरानिवात यई; (ब) क3र्णत्या व्यS शी सकrय क य य च्या प्राभा रा व्यS म्हीर्ण व्य त हं रा ज्या शी स ठीरानिवात यई.” ४६. पीढ, आपीर्ण क म ३५ क्ष त घत पी निहंजी, जी प्राम र्ण आहं: "३५. रा तसरा मद्रां निकत स स हं पीरा व्य त अस्व क रा हं असर्ण, इंत्या द - शील्क आक रार्ण पी त्रा अस क3र्णत हं स रा तसरा मद्रां कrत क स तरा, क यद्या स रा निकवा पीक्षक रा च्या समत पीरा वा घण्या स प्रा लि'क̂त अस क3र्णत हं व्यS, क3र्णत्या हं प्राय3जी करिरात त[3] पीरा वा म्हीर्णB स्व क रार्ण रा हं,निकवा अशी क3र्णत हं व्यS निकवा क3र्णत हं शी सकrय अलि'क रा त्या च्या आ' रा वारा क3र्णत हं क यवा हं करार्ण रा हं निकवा त्या चा 3दर्ण करार्ण रा हं निकवा त[3] अलि'प्राम लिर्णत करार्ण रा हं: पीरात त - (अ) आक रार्ण स पी त्रा अस क3र्णत हं स, त्या वारा शील्क भारू निकवा, अपीऱ्या शील्क चा मद्रां क वा ल्या स च्या ब बत त अशी शील्क चा राक्काम पीरा कराण्या स आवाश्यक निततकr राक्काम वा स3बत रुपीय पी चा इंतक अर्थीवा य3ग्य शील्क राकमचा निकवा नितच्या त कम पीडर्ण ऱ्या भा गा च्या दहं पीटं इंतकr राक्काम पी चा रुपीय हू अलि'क अस तव्हे अशी शील्क च्या निकवा अशी दहं पीटं राकमइंतक दड भाराण्या त आल्या वारा पीरा व्य त स्व क̂त क जी ई.; (ब) ज्या व्यS कड मद्रां निकत पी वात चा म गार्ण करात आ असत त्या व्यS अमद्रां कrत पी वात निद अस आलिर्ण अशी पी वात जीरा मद्रां निकत कराण्या त आ तरा त त्या व्यS च्या निवारा3' पीरा व्य त स्व क हं झा असत अस अस तव्हे, अशी पी वात, त दण्या ऱ्या व्यS एक रुपीय दड भाराल्या वारा नितच्या निवारा3' पीरा व्य त स्व क̂त कराण्या त यई; (क ) जीव्हे क3र्णत्या हं प्राक राचा सनिवाद निकवा करा रा द[3] निकवा अलि'क पीत्रा चा सम वाशी अस ल्या पीत्राव्यवाहं रा द्वा रा कराण्या त आ अस, आलिर्ण त्या पी त्रा पीJकr क3र्णत्या हं एक पीत्रा वारा य3ग्य मद्रां क वा अस तव्हे, त सनिवाद निकवा त[3] करा रा रा तसरा मद्रां निकत असल्या चा म जी ई; (ड ) फ´जीद रा प्रानिक्रय सनिहंत, १८९८ (१८९८ चा अलि'नि यम ५) चा प्राकरार्ण १२ निकवा प्राकरार्ण ३६ य क यवा हं हू अन्या अशी फ´जीद रा न्या य य त क3र्णत्या हं क यवा हं त क3र्णत हं स पीरा व्य त स्व क राण्या स य त अतभाBत अस ल्या क3र्णत्या हं गा3e मळे प्रानितब' हं3र्ण रा हं; (इं) जीव्हे क3र्णत हं स शी स निकवा शी स च्या वात नि ष्पा निदत कराण्या त आ अस तव्हे निकवा अशी स य अलि'नि यम च्या क म ३२ निकवा अन्या उपीब' तरातBद कल्या प्राम र्ण लिजील्हा लि'क ऱ्या चा प्राम र्णपीत्रा वा अस तव्हे, अस स क3र्णत्या हं न्या य य त स्व क रा जी ण्या स य त अतभाBत अस ल्या क3र्णत्या हं न्या य य त स्व क रा जी ण्या स य त अतभाBत अस ल्या क3र्णत्या हं गा3e मळे प्रानितब' हं3र्ण रा हं.” ४७. त्या स3बतचा, आपीर्ण क म ३६ क्ष त घत पी निहंजी. त प्राम र्ण आहं.: "३६. स चा स्व क रा कव्हे प्राश्ना स्पद करा वाय चा हं - ए द स पीरा व्य त स्व क राण्या त आ अस तव्हे, क म ६१ मध्ये उपीबलि'त क अस तवाढ स3डB इंतरा ब बत त अशी स्व क̂त, त[3] स रा तसरा मद्रां निकत क हं य क रार्ण वारू त्या चा द व्य च्या निकवा क यवा हं च्या क3र्णत्या हं टंप्प्या वारा प्राश्ना स्पद क जी र्ण रा हं. " ४८. क म ३८ मध्ये अवारुद्ध करू ठीवा ल्या स च्या सब' त क य क यवा हं करा वा हं मBद क आहं. त क म पीढ प्राम र्ण आहं: “क म ३८ - अवारुद्ध करू ठीवा ल्या स च्या सब' त क य क यवा हं करा वा. — (१) जीव्हे क म ३३ स अवारुद्ध करू ठीवार्ण रा व्यS, क यद्या स रा निकवा पीक्षक रा च्या समत पीरा वा घण्या स प्रा लि'क̂त अस आलिर्ण त्या व्यS क म ३५ द्वा रा उपीबलि'त कल्या प्राम र्ण दड निकवा क म ३७ द्वा रा उपीबलि'त कल्या प्राम र्ण शील्क भाराण्या त आल्या वारा अस स पीरा व्य त स्व क रा अस तव्हे, त व्यS, अशी स चा अलि'प्राम लिर्णत प्रात वा त्या बरा3बरा त्या स ब बत बसवा ल्या शील्क चा वा दड चा राक्काम मBद करार्ण रा एक प्राम र्णपीत्रा लिजील्हा लि'क ऱ्या कड पी ठीवा आलिर्ण अशी राक्काम लिजील्हा लि'क ऱ्या कड निकवा त[3] य ब बत त नि यS करा अशी व्यS कड पी ठीवा." ४९. क म ४२ सबलि'त आहं आलिर्ण त प्राम र्ण आहं: - "४२. क म ३५, ४० निकवा ४१ ज्या वारा शील्क भारा अस अशी स वारा पीˆष्ठ क करार्ण—(१) ए द्या स च्या ब बत त, क हं शील्क वा दड बसत असल्या स क म ३५, क म ४० निकवा क म ४१ त भाराण्या त आल्या स त[3] स पीरा व्य त स्व क रार्ण रा व्यS, निकवा, प्राकरार्णपीरात्वा, लिजील्हा लि'क रा त्या स ब बत य3ग्य शील्क निकवा, प्राकरार्णपीरात्वा य3ग्य शील्क वा दड (प्रात्याक चा राक्काम मBद करू ) वासB झा आहंत अस, त भारार्ण ऱ्या व्यS चा वा वा रा हंण्या चा निठीक र्ण लि हू पीˆष्ठ क द्वा रा प्राम लिर्णत करा. (२) (२) य प्राम र्ण पीˆष्ठ निकत क प्रात्याक • पीरा व्य त स्व क हं अस आलिर्ण त[3] जीर्णB क हं रा तसरा मद्रां निकत कराण्या त आ अस वा त्या प्राम र्ण त्या चा 3द करात यई वा त्या च्या आ' रा क यवा हं करात यई, तसचा त[3] अलि'प्राम लिर्णत करात यई आलिर्ण त[3] अवारुद्ध करू ठीवार्ण ऱ्या अलि'क ऱ्या च्या हं त त[3] ज्या व्यS च्या त ब्या तB आ अस त्या व्यS त्या ब बत अजी कल्या वारा नितच्या कड निकवा त स गा त्या प्राम र्ण सपीBद कराण्या त यई. पीरात, - (अ) क म ३५ शील्क आलिर्ण दड भाराल्या वारा जी3 पीरा व्य त स्व क राण्या त आ आहं अस क3र्णत हं स, त[3] अशी प्राक रा अवारुद्ध कल्या च्या निद क पी सB एक म सपीण्या पीBवा; निकवा जीरा त[3] आर्ण क ळे अवारुद्ध करू ठीवार्ण आवाश्यक आहं अस लिजील्हा लि'क ऱ्या प्राम लिर्णत क असB त प्राम र्णपीत्रा त्या राद्द क स तरा, य प्राम र्ण सपीBद क जी र्ण रा हं; (ब) य क म त क3र्णत्या हं गा3e मळे ड ३ वारा पीरिरार्ण म हं3र्ण रा हं.” ५०. ए द्या व्यS शील्क आक रार्ण पी त्रा क3र्णत हं स स क्ष द रा व्यनितरिराS म्हीर्णB रा तसरा मद्रां क वात नि ष्पा निदत क अर्थीवा त्या वारा स्व क्षरा क तरा त क̂त्या क म ६२(१)(ब) स रा दड सहं लिशीक्षस पी त्रा ब वात, जी3 दड रु. ५००/- पीय5त वा ढB शीकत[3]. नि:सशीयपीर्ण, पीरातक अस स गात[3] कr जीरा क3र्णत हं दड क म ३५, ४० निकवा ६१ अतगात भाराण्या त आ अस तरा त[3] कम क जी ई. आय. निहंदस्तो स्टी लि लिमटंड प्राकरार्ण चा निवाश्लेर्षर्ण: ५१. निहंदस्तो स्टी लि लिमटंड निवारुद्ध निद पी कन्स्ट्रaक्श कपी 21 ह्या प्राकरार्ण मध्ये हं न्या य य मद्द हं त ळेत हं3त: भा रात य वा द क यद, १९४० अतगात पीचा नि वा ड निद हं3त, जी3 न्या य य त द कराण्या त आ हं3त. अपी कत्या नि वा ड राद्द 21 (१९६९) १ ५९७ एस स स कराण्या स ठी अजी क वा इंतरा गा3e बरा3बराचा, अस द वा क कr त्या वारा मद्रां क वा हं त आलिर्ण त्या क रार्ण स्तोवा त[3] अवाJ', बक यदशी रा आहं आलिर्ण म्हीर्णB राद्द हं3ण्या स जीब बद रा आहं, अस यखिSवा द क. त्या तरा उत्तरावा द नि वा ड अवारुद्ध कराण्या स ठी आलिर्ण मद्रां क शील्क आलिर्ण दड आक रार्ण द्वा रा प्राम लिर्णत कराण्या स ठी लिजील्हा न्या य य त अजी क. नि वा ड अवारुद्ध कराण्या त आ आलिर्ण शील्क आलिर्ण दड आक राण्या त आ, जी य3ग्यरिरात्या भारार्ण क गा आलिर्ण प्राम लिर्णत क गा. अपी कत्या चा यखिSवा द अस हं3त कr, मद्रां क स नि वा ड कवाळे पीरा व्य मध्ये स्व क रा जी ऊ शीकत हं अस हं तरा त्या आ' रा क रावा ई द क जी ऊ शीकत हं, क रार्ण त[3] स क यद्या च्या दृe अखिस्तोत्वा तचा हं. य तरा, न्या य य, इंतरा गा3e सहं प्राम र्ण नि र्णय निद: "५. पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा अलि'क रा अस ल्या क3र्णत्या हं व्यS कडB पीरा वा म्हीर्णB ज्या स ' वारा लिशीक्का म रा हं अशी स ' वारा प्रा प्ती हं3ऊ शीकत हं आलिर्ण त्या व्यS द्वा रा निकवा क3र्णत्या हं स वाजीनि क अलि'क ऱ्या द्वा रा त्या वारा क रावा ई क जी ऊ शीकत हं. क म ३५ अशी तरातBद करात कr एकद पीरा व्य त द क ल्या इंन्स्ट्रñम£टंच्या म न्यातवारा, क म ६१ मध्ये प्राद कल्या लिशीवा य, त्या चा टंल्या च्या क3र्णत्या हं टंप्प्या वारा निकवा इंन्स्ट्रñम£टंवारा रा तसरा लिशीक्का म रा गा सल्या च्या क रार्ण स्तोवा त्या वारा प्राश्नालिचान्ही उपीखिस्थात क जी र्ण रा हं. ६. क म ३५ आलिर्ण ३६ म' वा क्प्रब' त फराक वारा अवा बB रा हू अस आवा हं कराण्या त आ हं3त कr, ज्या स वारा य3ग्य मद्रां क वा हं अशी स वारा शील्क आलिर्ण दड भाराल्या वारा त पीरा व्य त द क जी ऊ शीकत, पीरात त्या आ' रा क यवा हं क जी ऊ शीकत हं क रार्ण क म ३५ रा तसरा मद्रां क वा ल्या स च्या पीरा व्य त द करू घण्या वारा त्या चा प्राम र्ण त्या च्या आ' रा क3र्णत हं क̂त कराण्या स एक प्रानितब' म्हीर्णB क य करात, आलिर्ण निवालि'मडळे, क म ३६ द्वा रा, त्या त मBद क ल्या अटं स रा, कवाळे स च्या पीरा व्य त द करू घण्या निवारूद्धचा प्रानितब' क ढB टं क आहं. यखिSवा द क म ३६ म' तरातBद च्या ऱ्या अर्थी कड द क्ष करात[3]. त्या क म स रा, एकद पीरा व्य त द करू घत ल्या ए द्या स ब बत त्या चा टंल्‍य च्‍य क3र्णत्या हं टंप्प्या वारा निकवा क3र्णत्या हं क यवा हं मध्ये त्या वारा रा तसरा मद्रां क वा असल्‍य च्‍य क रार्ण स्तोवा प्राश्नालिचान्ही वाण्या त यर्ण रा हं. क म ३६ ए द्या स च्या निवारा3' त त्या वारा मद्रां क वा हं म्हीर्णB त्या च्या आ' रा क यवा हं क जी र्ण रा हं अशी आव्हे दण्या स प्रानितब' करात हं, पीरात त्या क रार्ण स्तोवा मद्रां क शील्क आलिर्ण दड भाराल्या तरा रा तसरा मद्रां क क ल्या स ' वारा क रावा ई क जी र्ण रा हं अस क3र्णत हं प्रानितब' हं. य ब बत क3र्णत हं शीक अस तरा, अलि'नि यम च्या क म ४२(२) म' तरातद द्वा रा त नि निवावा दपीर्ण दBरा क जी त, जी अस स गात कr क म ४२(१) अन्वय लिजील्हा लि'क र्‍य पीe क प्रात्याक स पीरा व्य त म न्या अस आलिर्ण त्या वारा य3ग्य मद्रां क वाल्या वारा त्या च्या आ' रा क यवा हं क जी ऊ शीकत. आम्ही पीरिराच्छेद-८ चा द फ यदशी रापीर्ण सदभा घऊ शीकत[3]: “८. आमचा क्ष, एम.स. दस ई, न्या यमBत;, य एम.एस.टं. निबत्त ब ब निवारुद्ध कटंB [आय. ए. आरा. (१९५२) २ अ. ९८४] ह्या प्राकरार्ण मध्ये 3दनिवा ल्या क यद्या च्या निवा' कड वा' हं3त: “न्या य य ए द स पीरा व्य मध्ये द करू घण्या स म ई आहं आलिर्ण न्या य य आलिर्ण शी सकrय अलि'क रा अशी द3घ हं त्या आ' रा क यवा हं कराण्या स म ई आहं. अशी प्राक रा, न्या य य स पीरा व्य मध्ये द करू घर्ण आलिर्ण त्या आ' रा क यवा हं करार्ण य द3न्ही गा3e म ई आहं. य वारू हं समजीत कr क यवा हं करार्ण हं स द करू घण्या च्या क̂नितमध्ये सम निवाe क हं आलिर्ण क गादपीत्रा पीरा व्य त द क जी ऊ शीकत पीरात त्या वारा क रावा ई क जी ऊ शीकत हं. अर्थी त, स द करू घतल्या लिशीवा य त्या वारा क यवा हं करात यत हं, पीरात त द करू घत जी ऊ शीकत आलिर्ण तरा हं त्या वारा क यवा हं क जी ऊ शीकत हं. जीरा प्रात्याक दस्तोऐवाजी, द करू घतल्या वारा, आपी3आपी त्या आ' रा क यवा हं कराण्या स जीब बद रा अस तरा क म ३५ म' तरातद जीस कr ए द स शील्क आक रा जी ण्या स पी त्रा आहं पीरात त्या वारा रा तसरा मद्रां क वा सत तरा त्या वारा न्या य य द्वा रा क यवा हं क जी र्ण रा हं, ह्या तरातद द्वा रा नि रार्थीक हं3ई कr त[3] स क3र्णत्या हं क रार्ण स ठी पीरा व्य त स्व क रा जी र्ण रा हं. ए द्या स वारा आ' रू क̂त करार्ण म्हीर्णजी त्या अम दर्ण निकवा त्या चा अम बजी वार्ण करार्ण हं3य. “आमच्या नि क त, निवाद्वा न्या य ' शी क म ३६ चा अस अर्थी वा जी3 निवालि'मडळे चा हंतB व्हेत. अलि'नि यम च्या क म ४२(२) कड निवाद्वा न्या य ' शी चा क्ष वा' गा हं जी अस स्पe करात कr एक स, जीव्हे त्या च्या सदभा त य3ग्य शील्क आलिर्ण दड वासB क असल्या चा प्राम लिर्णत करू प्राम लिर्णत क जी त, तव्हे त्या वारा य3ग्य मद्रां क वा असल्या प्राम र्ण क यवा हं कराण्या स सक्षम हं3त ” ५२. निहंदस्था स्टी (उपीरा3ल्लेखि त) म' त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी क य म ड आहं य वारू आम्ही नि ष्कर्ष क ढत[3]: १) मद्रां क क यद हं महंसB वा ढवाण्या च्या उद्दशी एक निवात्त य उपी य आहं; २) क यद्या त कठी3रा तरातद महंस च्या निहंत चा राक्षर्ण कराण्या स ठी आहंत; ३) प्रानितस्पध्ये च्या क रार्ण चा पीरा भावा कराण्या स ठी एक पीक्षक रा त्या चा शीस्त्र म्हीर्णB वा पीराण्या चा हंतB हं; ४) मद्रां क अलि'नि यम क म ४२(२) अतगात कराण्या त यत अस ल्या पीˆष्ठ क तरा, दस्तोऐवाजी पीरा वा म्हीर्णB स्व क य अस आलिर्ण त्या आ' रा क रावा हं क जी ऊ शीकत. आम्ही फS अस नि रा क्षर्ण 3दवाB शीकत[3] कr न्या य य मद्रां क क यद्या चा क म १७ निवाचा रा त घत हं, जी स वारा लिशीक्का म राण्या स ठी मक्यु वाळेचा तरातBद करात. त्या चाप्राम र्ण, न्या य य हं क्ष त घत हं कr मद्रां क क यद्या चा क म ६२, क म १७ चा उल्लेघ कराण्या बद्द दड करात. तरा हं पीढ, न्या य य अवारुद्ध कराण्या त आ वा ज्या वारा राकमचा भारार्ण झा ल्या वारा क म ४२(२) अतगात प्राम लिर्णत क स हं त ळेत हं3त. हं रा आहं कr अतगात मद्रां क वा स मद्रां क क यद्या च्या क म ३३ अनि वा यपीर्ण जीप्ती कराण्या य3ग्य आहंत. त्या तरा क3र्णत्या क यपीद्धत चा अवा ब करा वाय चा य चा हं तरातBद य अलि'नि यम त कराण्या त आ आहं. प्रानिक्रयचा पी कल्या वारा आलिर्ण शील्क आलिर्ण दड भाराल्या तरा, क म ४२(२) अन्वय त्या ब बत प्राम र्णपीत्रा जी रा करू त्या चा पीˆष्ठ क क जी त. त्या तरा, त अम त आर्णण्या य3ग्य ब त आलिर्ण त्या आ' रा क यवा हं क जी ऊ शीकत, अस नि ष्कर्ष निहंदस्था स्टी (उपीरा3ल्लेखि त ) मध्ये निद गा आहं. जी. भा रात य करा रा क यद, १८७२ - एक सवा^क्षर्ण; गारावा रा, निवाद्या डa3लि य आलिर्ण ए ए ग्लो3ब चा ब बत सम क्ष: ५३. करा रा क यद्या च्या क म २(जी ) मध्ये तरातBद क आहं कr, क यद्या गाB करात यर्ण रा करा रा राद्दब त असल्या चा म्हीटं आहं, तरा क म २(हं) घ3निर्षत करात कr क यद्या द्वा रा गाB हं3र्ण रा करा रा हं एक सनिवाद आहं. त्या चा क यद्या च्या क म २(जी) मध्ये अशी तरातBद आहं कr, क यद्या अम त आर्णण्या य3ग्य स करा रा, जीव्हे त[3] अम त आर्णण्या य3ग्य सत[3] तव्हे त[3] राद्द हं3त[3]. करा रा आलिर्ण सनिवाद य च्या त फराक आम्ही एक चा वाळे¥ क्ष त घऊ इंखिच्छेत[3]. प्रात्याक करा रा हं सनिवाद सत. कवाळे तचा करा रा, जी अम त आर्णण्या य3ग्य आहंत, त्या सनिवाद म जी त. सनिवादचा पीरिरार्ण म, अम त आर्णण्या य3ग्य सर्ण, म्हीर्णजी, सनिवाद राद्दब त हं3त. पीढ, आम्ही क म 10 क्ष त घऊ इंखिच्छेत[3]. त प्राम र्ण आहं: क3र्णत करा रा सनिवाद असत त: - सवा करा रा, जीरा त सनिवाद कराण्या स सक्षम अस ल्या पीक्षक रा च्या मS समत, क यदशी रा प्रानितफ र्थी वा क यदशी रा उनिद्दe करिरात कराण्या त आ असत आलिर्ण त शीय यवात असल्या चा य द्वा रा व्यSपीर्ण घ3निर्षत कराण्या त आ स तरा, त सनिवाद असत त. य त अतभाBत अस क हं हं, क3र्णत हं सनिवाद, निकवा स क्ष द रा च्या समक्ष करार्ण ज्या द्वा रा आवाश्यक कराण्या त आ अस अशी भा रात मध्ये अम त अस ल्या वा य द्वा रा व्यSपीर्ण नि रास त क ल्या क3र्णत्या हं क यद्या वारा अर्थीवा क3र्णत्या हं दस्तोऐवाजी 3दर्ण निवार्षयक क यद्या वारा पीरिरार्ण म करार्ण रा हं. पीनिहंल्या भा गा त, क म १०, भा गा मध्ये निवाभा गाल्या वारा, गा3e चा सम वाशी हं3त[3]: 'करा रा पीक्ष च्या मS समत क पी निहंजी'. ५४. क म १४ 'मS समत ' चा व्य ख्य करात, त प्राम र्ण: “१४. 'मS समत चा व्य ख्य ':- समत जीव्हे - मS आहं अस म्हीटं जी त जीव्हे त क रार्ण भाBत सत- (१) क म १५ मध्ये व्य ख्य कराण्या त आल्या प्राम र्ण अस जीबरादस्तो,, निकवा (२) क म १६ मध्ये व्य ख्य कराण्या त आल्या प्राम र्ण अस गाJरावा जीवा प्राभा वा, निकवा (३) क म १७ मध्ये व्य ख्य कराण्या त आल्या प्राम र्ण अस ब ड, निकवा (४) क म १८ मध्ये व्य ख्य कराण्या त आल्या प्राम र्ण अस निवापीय स, निकवा (५) क म २०, २१ आलिर्ण २२ च्या तरातद च्या अ' अस चाBकभाB, य मळे उद्भवा सत तव्हे त मS असल्या चा म्हीटं जी त. अशी जीबरादस्तो, गाJरावा जीवा प्राभा वा, ब ड, निवापीय स निकवा चाBकभाB सत तरा समत निद गा सत अस असत तव्हे त य प्राम र्ण उद्भवा असल्या चा म्हीटं जी त. जीव्हे समत निद गा सत तरा अशी जीबरादस्तो, अवा जीवा प्राभा वा, फसवार्णBक, चाकrचा वार्ण निकवा चाBक अखिस्तोत्वा त असल्या बद्द अस म्हीटं जी त. ५५. क म १० चा पीढ भा गा 'करा रा कराण्या स सक्षम पीक्ष' हं अलिभाव्यS आहं. सनिवाद अलि'नि यम च्या क म ११ मध्ये अस घ3निर्षत क आहं कr प्रात्याक व्यS, त ज्या क यद्या अ' अस त्या स रा सज्ञा वाय चा आहं, आलिर्ण जी नि क3पी म चा आहं, आलिर्ण त ज्या अ' अस अशी क3र्णत्या हं क यद्या द्वा रा सनिवाद कराण्या स अपी त्रा झा हं अशी प्रात्याक व्यS सनिवाद कराण्या स सक्षम असत. ज्या प्राम र्ण क म ११ मध्ये व्यS करा रा कराण्या स सक्षम हं3ण्या स ठी म चा सदृढत आवाश्यक असत, क म १२, सनिवाद अलि'नि यम च्या उद्दशी सदृढ म क य आहं हं स्पe करात. क म १० म' पीढ भा गा अस आहं कr तर्थी 'क यदशी रा प्रानितफ आलिर्ण क यदशी रा उनिद्दe ' असर्ण आवाश्यक आहं. सदरा ब ब क म २३ मध्ये हं त ळे आहं. त प्राम र्ण: "२३. क3र्णत प्रानितफ आलिर्ण उनिद्दe क यदशी रा असत त आलिर्ण क3र्णत सत त:- करा रा चा प्रानितफ निकवा उनिद्दe, जीरा - त्या स क यद्या द्वा रा म ई क आहं; अर्थीवा त्या पीरावा गा निदल्या स त क3र्णत्या हं क यद्या च्या तरातद निवाफ करा अशी स्वरूपी चा आहं; अर्थीवा त ब ड चा आहं; अर्थीवा दसऱ्या व्यS निकवा नितच्या म मत्त हं3र्ण रा क्षत त्या त अ स्यांBत निकवा उपी लिक्षत आहं; अर्थीवा न्या य य त अ Jनितक निकवा 3कनिहंत '3रार्ण च्या निवारा3' म आहं, अस स तरा त क यदशी रा असत. य पीJकr प्रात्याक प्राकरार्ण, करा रा चा प्रानितफ निकवा उनिद्दe क यद्या निवारुद्ध असल्या चा म्हीटं जी त, ज्या त उनिद्दe निकवा प्रानितफ क यद्या निवारुद्ध आहं अस प्रात्याक करा रा शीBन्यावात असत[3]. ५६. क म १० च्या पीनिहंल्या भा गा त शीवाटंचा भा गा अस स्पe करात[3] कr सवा करा रा हं करा रा आहंत 'जी य द्वा रा राद्दब त घ3निर्षत क हं त'. क म २४ त ३० य प्राकरार्ण द[3] म' उरा ल्या तरातद आहंत, ज्या करा रा शी सबलि'त आहंत, ज्या क म १० च्या अर्थी मध्ये नि रार्थीक घ3निर्षत क आहं. हं क म २० व्यनितरिराS आहं क रार्ण त आपीर्ण तरा क्ष त घऊ. तसचा, क म १० चा दसरा भा गा अस स्पe करात[3] कr करा रा हं क यद ब वाण्या स ठी आवाश्यक गाराजी पीBर्ण करा व्य गात. ५७. पीढ, आमच्या क्ष त आ आहं कr क म १० अतगात करा रा, सनिवाद कराण्या स ठी मS समत अपीरिराहं य आहं. क म १४ मध्ये मS समत चा व्य ख्य क गा आहं आलिर्ण क म १५ त १८ स3बत त वा चा पी निहंजी क रार्ण क म १५ त १८ अ क्रम बळेजीबरा, अवा जीवा प्राभा वा, फसवार्णBक आलिर्ण निवापीय स य चा व्य ख्य करात त. आत, ए द्या पीक्ष चा समत लिमळेवाण्या स ठी जीबरादस्तो, फसवार्णBक निकवा निवापीय स कल्या चा पीरिरार्ण म सनिवाद अलि'नि यम च्या क म १९ मध्ये निद आहं. सदरा त घटंक च्या उपीखिस्थात मळे, ज्या पीक्षक रा चा समत अशी प्राक रा घण्या त आ हं3त त्या पीक्षक रा निद ल्या पीय य मळे क य पीरिरार्ण म हं3त[3] तरा करा रा राद्द हं3त[3]. गागा रिराटंa टं आलिर्ण टंoवास लि लिमटंड निवारुद्द रा जीस्था रा ज्या22 मध्ये य न्या य य निद ल्या नि क त निवापीय स य चा पीरिरार्ण म प्राम र्ण हं त ळे आहं: 22 (२००३) १२ ९१ एस स स "२८. सनिवाद अलि'नि यम च्या क म १९ स रा जीव्हे ए द्या करा रा चा समत निवापीय स य आ' रा निद जी त, तव्हे ज्या पीक्षक रा च्या समत मळे अस झा हं3त त्या पीक्षक रा च्या पीय य वारा करा रा राद्द करात यर्ण रा सनिवाद आहं. तराचा पीक्षक रा, जीरा त्या य3ग्य वा टंत अस तरा, करा रा पीBर्ण क जी वा अस आग्रहं 'रू शीकत[3] आलिर्ण जीरा स दरा करार्ण सत्या असत तरा त[3] ज्या खिस्थात त असत त्या खिस्थात त त्या ठीवा जी ई. क म २ ड (१) स रा, एक निकवा अलि'क पीक्षक रा निद ल्या पीय य स रा क यद्या अम त आर्ण जी र्ण रा करा रा, पीरात इंतरा निकवा इंतरा च्या पीय य स रा सर्ण रा, त[3] राद्द कराण्या य3ग्य करा रा आहं. उत्तराद त्या कडB चाकrचा म निहंत निद गा कr हं हं स्पeपीर्ण 3दवार्ण आम्ही आवाश्यक हं. राद्द करात यण्या जी3गा करा रा हं करा रा मळे नि म र्ण झा क यदशी रा सब' टं ळेण्या स ठी निकवा करा रा च्या ब जीB उभा रा हंण्या चा आलिर्ण त्या च्या क मनिगारा चा पीBतत हं3ण्या चा आग्रहं 'राण्या स ठी त्या चा पीय य वा पीराण्या स ठी प्राभा निवात पीक्षक रा नि वाडर्णकrचा अलि'क रा प्राद करात[3] हं पी हंर्ण पीरास आहं. तर्थी निपी, एकद वा पीराल्या तरा करा रा च्या ब जीB रा हंण्या च्या त्या च्या नि वाड मळे दसर्‍य पीक्षक रा निद ल्या चाकrच्या वार्ण च्या म निहंत सहं करा रा चा अ समर्थी कल्या चा पीरिरार्ण म हं3ई आलिर्ण त्या मळे त्या चा करा रा टं ळेण्या चा सपीe त यई. क यद्या चा अशी अपीक्ष आहं कr ब लि'त पीक्षक रा त्या निद ल्या अलि'क रा च्या त्या चा स्वरूपी मध्ये, त्या चा पीय य त्वारिरात वा पीरा वा आलिर्ण त[3] निवारुद्ध पीक्षक रा त[3] कळेवा वा; जी3पीय5त टं ळेण्या चा अलि'क रा वा पीरा जी त हं त3पीय5त, करा रा वाJ' आहं आलिर्ण त्या अतगात क क̂त त्या तरा e करात यर्ण रा हं. २९. निवापीय स य क रार्ण स्तोवा करा रा राद्द कराण्या चा अलि'क रा निवानिवा' म गा 5 गाम वा जी ऊ शीकत[3], क हं नि वाड अलि'क रा वारा अवा बB असत त. सत्या चा शी3' घत अस ल्या पीक्षक रा एकद राद्द कराण्या चा नि र्णय घतल्या स त[3] राद्द कराण्या चा त्या चा अलि'क रा गाम वात[3]. पीरात त[3] क3र्णत हं नि वाड कराण्या पीBवा;चा गाम वाB शीकत[3] जीर्थी त्या च्या आचारार्ण मळे निकवा इंतरा पीरिराखिस्थात मळे त[3] हंक्का रा B ठीवार्ण अन्या यक राक निकवा निवार्षमन्या य अस. उद हंरार्ण र्थी, जीर्थी तˆत य पीक्षक रा करा रा तगात अलि'क रा प्रा प्ती क आहंत; नितर्थी करा रा ब बत म निहंत दर्ण ऱ्या वारा अन्या य हं3ई क रार्ण त्या त्या च्या मBळे स्था वारा पीन्ही पीरात आर्णर्ण अशीक्यु आहं. मBळे पीद वारा प्रात्या स्था पी हं कवाळे राद्द कराण्या चा पीरिरार्ण म हं तरा त्या चा शीक्युत, राद्द कराण्या च्या अलि'क रा स ठी अपीरिराहं य आहं. पीन्ही, नि वाड त निवा ब मळे नि वाड चा अलि'क रा चा B रा हंर्ण अन्या यक राक ठीरू शीकत. य क रार्ण स्तोवा, सवास ' रार्णपीर्ण निवापीय स य क रार्ण स्तोवा राद्द कराण्या च्या अलि'क रा चा त्वारिरात वा पीरा करार्ण आवाश्यक आहं. (भा रात य सनिवाद आलिर्ण निवालिशीe निद स अलि'नि यम, पी3 oक आलिर्ण मल्ले, ११वा आवाˆत्त, ड १, पीˆष्ठ क्र. २६९-७० पीहं )" क म १९-अ गाJरावा जीवा प्राभा वा लिमळेनिवा ल्या पीक्षकरा च्या समत च्या क रार्ण स्तोवा क3र्णत हं मS समत सल्या बद्द सबलि'त आहं. सदरा वा ईटं घटंक चा पीरिरार्ण म म्हीर्णB करा रा राद्द हं3त हं तरा राद्द कराण्या य3ग्य हं3त[3]. क म १४, जी 'मS समत ' चा व्य ख्य करात, अशी तरातBद करात कr समत मS आहं अस म्हीटं जी त, जीव्हे त चाक B उद्भवा सत, जी क म २०, २१ आलिर्ण २२ च्या तरातद च्या अ' रा हू, इंतरा चा रा पीJ Bचा सदभा घतल्या तरा, मS समत पी सB वागाळे¥ हं3त. क म २० मध्ये क य तरातBद आहं त आम्ही क्ष त घत[3]. क म २० अस घ3निर्षत करात कr जीर्थी करा रा चा द3न्ही पीक्ष करा रा स ठी आवाश्यक तथ्यां च्या ब बत त चाBक करात त, तर्थी करा रा शीBन्यावात हं3त[3]. आम्ही अस नि रा क्षर्ण करू शीकत[3] कr हं पीन्ही करा रा चा प्राकरार्ण आहं, जी क म २४ त ३० व्यनितरिराS क म १० च्या अर्थी मध्ये राद्दब त घ3निर्षत क आहं. क म २१ मध्ये अशी तरातBद आहं कr भा रात त गाB अस ल्या क3र्णत्या हं क यद्या ब बतच्या चाकrमळे करा रा शीBन्या य हं3र्ण रा हं. अशी प्राक रा, क म १० हं करा रा हं सनिवाद हं3ण्या स ठी मख्य घटंक नि लिश्चत करात, करा रा हं3ण्या स ठी अ रुपीतचा प्राभा वा बद त[3]. त्या मळे सक्षमतचा अभा वा आलिर्ण सदृढ म चा अ पीखिस्थात य मळे 'करा रा' तय रा हं3ण्या पी सB पीBर्णपीर्ण निवाचालि त हं3त. बळेजीबरा, गाJरावा जीवा प्राभा वा, निवापीय स आलिर्ण अगाद फसवार्णकrमळे उद्भवा ल्या मS समत च्या अ पीखिस्थात मळे, तर्थी निपी, एक करा रा हं3ई जी3 शीBन्या य अस तरा 'सनिवाद ' अस (सनिवाद अलि'नि यम चा क म १९ आलिर्ण १९-अ पीहं ). चाकrचा पीरिरार्ण म, क म २२ मध्ये पीन्ही स्पe क आहं, ज्या मध्ये अस मBद क आहं कr कवाळे पीक्षक रा पीJकr एक तथ्यां ब बतच्या चाकrमळे करा रा स समत निद आहं, य क रार्ण स्तोवा सनिवाद शीBन्या य कराण्या य3ग्य हं. क म ३७ प्राकरार्ण चा रा अतगात यत जी सनिवाद च्या क यप्रादशी शी आलिर्ण ज्या सनिवाद चा अम बजी वार्ण करार्ण आवाश्यक आहं त्या च्या शी सबलि'त आहं. क म ३७ पीढ प्राम र्ण आहं: “३७. सनिवाद त पीक्षक रा चा आब':- सनिवादत पीक्षक रा आपी पील्या वाचा चा एकतरा पी क पी निहंजी निकवा पी कराण्या चा प्रास्तो वा निद पी निहंजी, म त्रा य अलि'नि यम च्या निकवा क3र्णत्या हं क यद्या च्या तरातद न्वय अस पी अ वाश्यक निकवा म फ क अस त वागाळेB - वाचा द त पी पीBवा; मरार्ण पी वा तरा, सनिवादवारू तदनिवारुद्ध उद्दशी निदसB यत सल्या स, अशी वाचा द त्या चा प्रानितनि ' वाचा ब ' जी त त. ५८. आमच्या क्ष त आ आहं कr फसवार्णBक, निवापीय स निकवा बळेजीबरा अशी प्राकरार्ण त, ज्या व्यS चा समत उS आ' रा वारा घत जी त, त व्यS करा रा पीBर्ण कराण्या चा आग्रहं 'रू शीकत आलिर्ण त, जीरा प्रानितनि लि'त्वा क सत तरा त ज्या खिस्थात मध्ये त असB शीकत त्या खिस्थात त ठीवाण्या चा आग्रहं 'रू शीकत. य सदभा त, आम्ही करा रा क यद्या चा क म ६४ क्ष त घऊ इंखिच्छेत[3]: "६४. शीBन्याकरार्ण य सनिवादच्या निवा ड चा पीरिरार्ण म:- लिजीच्या निवाकल्पा स रा सनिवाद शीBन्याकरार्ण य असत त व्यS जीव्हे निवा निडत करात तव्हे नितच्या त अन्या पीक्षक रा, नितच्या त अतभाBत अस ल्या ज्या वाचा चा त[3] वाचा द त आहं त्या चा पी कराण्या चा गाराजी सत. शीBन्याकरार्ण य सनिवाद निवा निडत करार्ण रा पीक्षक रा, जीरा त्या अशी सनिवादम' अन्या पीक्षक रा कडB क3र्णत हं भा लिमळे अस तरा, लिजीच्या कडB त[3] लिमळे हं3त त्या व्यS, हं3ई तर्थीवारा, अस भा पीरात करा. ५९. जीरा ए द करा रा शीBन्यावात आहं निकवा त[3] शीBन्यावात हं3त आहं अस आढळेB आ तरा क य हं3ई य चा म निहंत क म ६५ मध्ये निद आहं. सदरा क म हं घ3निर्षत करात कr जीव्हे अशी घटं घडत तव्हे, क3र्णत्या हं व्यS, ज्या, अशी करा रा निकवा सनिवाद अतगात, क3र्णत हं फ यद लिमळे अस, त[3] ज्या व्यS कडB त[3] प्रा प्ती झा आहं त्या त[3] पी स5चानियत कराण्या स निकवा त्या चा भारापी ई दण्या स ब ' आहं. क म ६५ च्‍य सदभा त, करा रा क यद्या च्‍य क म २(जी) शी सब' आहं अस आम्‍हं निदसत. आमच्या क्ष त आल्या प्राम र्ण, क म २(जी) अशी तरातBद करात कr, जीव्हे सनिवाद अम बजी वार्ण य3ग्य रा हंत हं, तव्हे त शीBन्यावात हं3त. अशी प्राक रा, एक करा रा क य असB शीकत[3] आलिर्ण जी3 त[3] गाB कराण्या य3ग्य आहं य चा आवाश्यकत पीBर्ण करात[3] आलिर्ण म्हीर्णB, त[3] एक सनिवाद ब त[3], आलिर्ण त[3] अम त आर्णण्या य3ग्य रा हंत सल्या मळे शीBन्यावात हं3ऊ शीकत[3]. तर्थी निपी, यर्थी महंत लिसगा निवारुद्ध य ब निय23 मध्ये अहंवा निद ल्या नि क त निप्राव्हे क´खिन्स व्यS क मत यर्थी आपीर्ण क्ष त घत पी निहंजी. त्या मध्ये न्या य य, इंतरा गा3e सहं, प्राम र्ण नि ष्कर्ष निद आहं: “ भा रात य सनिवाद अलि'नि यम च्या क म ६५ सहं क म २(जी) वा चाल्या स य राचा ब बत आर्ण 'क्का द यक पीरिरार्ण म निदसB यत[3], क रार्ण अशी पीरिराखिस्थात त प्रात्याक गाB हं3र्ण रा सनिवाद कवाळे शीBन्यावातचा हं3र्ण रा हं तरा प्रात्याक पीक्षक रा वारा त्या प्रा प्ती झा ल्या क3र्णत्या हं फ यद्या चा पी स5चानियत करार्ण निकवा भारापी ई दर्ण ब' क राक अस, मगा क3र्णत्या हं पीक्ष सनिवादच्या पीBर्णत्वा स ठी निकत हं क म क अस तरा हं. 23 ए आय आर १९३९ पी स ११० पीरात अस आश्चयक राक पीरिरार्ण म दर्ण रा राचा स्व क रार्ण आवाश्यक हं. आदरार्ण य न्या यमBतßच्या दृनिeक[3] तB, क म २(जी) च्या शीब्द तचा हं उपी य स पीडत[3]. प्रात्याक अम त आर्णण्या य3ग्य करा रा शीBन्यावात घ3निर्षत क जी त हं, तरा कवाळे क यद्या द्वा रा गाB करात यर्ण रा करा रा शीBन्यावात घ3निर्षत क जी त त, आलिर्ण त्या शीब्द चा अर्थी अस आहं कr क हं प्रानिक्रय त्मक नि यम च्या क रार्ण स्तोवा गाB करात यर्ण रा हं, पीरात मB भाBत क यद्या द्वा रा गाB कराण्या य3ग्य हं. उद हंरार्ण र्थी, ए द करा रा जी3 त्या च्या सरुवा त पी सB चा बक यदशी रा हं3त, जीस कr पीराकrय शीत्राBबरा3बराचा करा रा, त[3] क म २(जी ) द्वा रा टं ळे जी ई, आलिर्ण जी3 त्या च्या क मनिगारा दराम्या बक यदशी रा झा अस, जीस कr ए द्या शी क करा रा जी3 पीBवा; अन्यादशी य लिमत्रा हं3त पीर्ण तरा अन्यादशी य शीत्राB ब अस तरा त[3] क म २(जी) म' तरातद द्वा रा टं ळे जी ई. मय दच्या क यद्या नि निदe क ल्या वाळेत टं भाराण्या त कवाळे अयशीस्व हं3र्ण निकवा निदवा र्ण प्रानिक्रय सनिहंतच्या अतगात आदशी पीJकr एक च्या तरातद च्या क रार्ण स्तोवा द वा द कराण्या स असमर्थीत य मळे करा रा राद्द हं3र्ण रा हं.” ६०. अ हं ब द उच्च न्या य य च्या पीBर्ण डपी ठी, 3दर्ण क̂त गाहं र्ण त मध्ये हंस्तो तरिरात कराण्या य3ग्य अस ल्या आलिर्ण करा रा क यद्या च्या क म २३ चा सदभा घतल्या तरा, इंतरा म मत्त सहं अहंस्तो तरार्ण य भा3गावाटं अलि'क रा सम निवाe कराण्या च्या पीरिरार्ण म ब बत नि र्णय दत करात, द पी रा यर्ण लिसहं निवारुद्ध गाशीरा प्रास द आलिर्ण इंतरा24 मध्ये, इंतरा गा3e सहं, प्राम र्ण नि र्णय निद आहं: “क यद्या द्वा रा नि निर्षद्ध क करा रा आलिर्ण जी3 कवाळे राद्दब त घ3निर्षत क जी त[3] त्या त स्पe फराक आहं. पीBवा;च्या पीरिराखिस्थात त क यदमडळे त्या स दड करात अस निकवा प्रानितबलि'त करात अस. पीरात, तराच्या पीरिराखिस्थात त, क यदमडळे कवाळे त क̂त त आर्णण्या स क रा दत. जीरा एक शीBन्यावात सनिवाद स रा क य क गा अस आलिर्ण प्रानितफ निद गा अस तरा, वाचा कत्या स मन्या य पीर्ण त्या लिमळे भा पी स5चानियत कल्या लिशीवा य त्या वारा पीरात जी ण्या चा पीरावा गा निद जी ऊ शीकत हं. पीरात जीरा वाचा त्या चा अम बजी वार्ण कराण्या स ठी न्या य य त आ तरा त्या न्या य य कडB क3र्णत हं मदत लिमळेर्ण रा हं. वारा मBद कल्या प्राम र्ण, वानिहंवा टं च्या भा डदरा चा हंस्तो तरार्ण प्रात्याक्ष त क यद्या नि निर्षद्ध हं पीरात त नि रार्थीक असल्या चा घ3निर्षत क आहं.” (जी3रा निद ) 24 ए आय आर १९३० ए एले एले १ (एफ बी ) / १९२९ १ एस स स ऑनले इन ए एले एले ६१. मद्रां क अलि'नि यम हं एक निवात्त य क यद आहं आलिर्ण महंसB वा ढवार्ण हं त्या चा उद्दशी आहं य आ' रा वारा ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त ) प्राकरार्ण जीस पीढ जी त, आक्षपी घण्या स क3र्णत हं गाभा रा जी गा असB शीकत हं. जी3पीय5त ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद-२८ म' नि ष्कर्ष जीस कr एस. एम. एस. टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त ) म' नि र्णय, कr मद्रां क वा ल्या व्य वास नियक करा रा म' वा द करा रा च्या आ' रा क य क जी ऊ शीकत हं निकवा अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य सत[3] य ब बत य3ग्य क यद म डत हं, आमचा मत आहं कr ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि ष्कर्ष य3ग्य असल्या चा निदसत हं. पीरिराच्छेद-२९ चा अवा 3क कल्या स अस निदसB यई कr, ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) म' न्या य य वा द करा रा हं स्वतत्रा करा रा असल्या मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी आक रार्ण पी त्रा हं3त हं आलिर्ण त[3] वा द चा क म अवाJ' ठीरावात हं निकवा त[3] गाB कराण्या य3ग्य करात हं, क रार्ण त्या चा स्वतš चा स्वतत्रा अखिस्तोत्वा असल्या, वा द करा रा, हं स्वतš चा मद्रां क शील्क पी त्रा आहं हं आमच्या सम3राचा म न्या भाBलिमक क्ष त घत त य3ग्य ठीरू शीकत हं. ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये न्या य य चा सपीBर्ण आ' रा वा द करा रा असल्या मळे, त्या वारा शील्क आक रार्ण करात यर्ण रा सल्या आलिर्ण त्या चा स्वतत्रा अखिस्तोत्वा असल्या, व्य वास नियक करा रा ज्या मध्ये वा द करा रा सम निवाe आहं त्या वारा मद्रां क वाल्या मळे, वा द च्या करा रा वारा पीरिरार्ण म हं3र्ण रा हं, हं रा ठीरू शीकत हं. ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) म' त्या च्या पीरिराच्छेद-३२ म' क रार्णम म स जी त्या च्या पीरिराच्छेद-२२ म' गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि र्णय अम न्या कराण्या स ठी निद आहं त अशी आहं कr, जी3पीय5त मद्रां क शील्क अलिभानि लिर्णत हं3त हं आलिर्ण त मBळे सनिवादवारा भारा जी त हं त3पीय5त वा द ब बतचा क म क यद्या त अखिस्तोत्वा त यत हं आलिर्ण त्या चा अम बजी वार्ण हं3त हं, य चा पीन्ही एकद आ' रा अस आहं कr वा द करा रा हं मद्रां क अलि'नि यम तगात एक वागाळे करा रा आहं, ज्या वारा मद्रां क शील्क आक रार्ण हं3ऊ शीकत हं जी आम्ही आढळे आहं कr क यद्या त तस हं. य सदभा त, आम्ही मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ५ चा सदभा घऊ इंखिच्छेत[3]: स चा वार्ण य3ग्य मद्रां क शील्क (५) करा रा निकवा करा रा चा सक्षपी द[3] आर्ण अ) जीरा निवानि मय पीत्रा च्या निवाक्रr सबलि'त अस तरा जी स्तो त जी स्तो दहं रुपीय, एक आर्ण च्या अ' ब) जीरा सराक रा रा3ख्य च्या निकवा निवा' स्था निपीत कपी निकवा अशी इंतरा नि गाम नि क य त भा गा च्या निवाक्रr सब' अस तरा प्रात्याक रुपीय १०,००० करा त निकवा रा3ख्य च्या निकवा भा गा च्या निकमत च्या भा गा करिरात क) जीरा इंतरा क3र्णत हं तरातBद क स तरा आठी आर्ण सBटं करा रा निकवा करा रा चा सक्षपी अ) स म चा निवाक्रr अर्थीवा कवाळे व्य पी रा म य च्या करिरात निकवा य च्या शी सबलि'त, जी अ क्रम क ४३ आक रार्ण पी त्रा निटंपीण्णी निकवा ज्ञा पी हं; ब) क3र्णत्या हं कजी स ठी निकवा कजी शी सबलि'त नि निवादच्या स्वरूपी त क £ द्रां सराक रा दण्या स ठी ६२. मद्रां क अलि'नि यम हं महंसB वा ढवाण्या च्या उद्दशी क निवात्त य अलि'नि यम अस तरा त[3] एक क यद आहं, ज्या च्या कड शीS अलिभाप्रात आहं. त वाळे, जीव्हे मद्रां क शील्क भारा यचा आहं त मद्रां क अलि'नि यम च्या क म १७ मध्ये स्पeपीर्ण निद आहं. तर्थी निवारुद्ध स गाण्या स रा क हं हं जी य निवात्त य क यद म्हीर्ण वा, त पीBर्ण जी3म रा बनिवा जी वा अस हंतB आहं. न्या य य चा कतव्य हं अस य हंवा कr, क यद्या चा बछ B टं पीर्ण पी यमल्ले हं3ऊ दण्या पीक्ष क यद्या चा अम बजी वार्ण हं3ई अस अर्थी वार्ण. एकद हं तत्त्वा क्ष त घत कr न्या य य चा क म कम अवाघड हं3त. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ मध्ये सम निवाe अस क यद क म ३५ सहं वा चाल्या स, पीढ नि ष्कर्ष 5वारा नि घत: १) क यद्या निकवा पीक्षक रा च्या समत, पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा अलि'क रा अस ल्या प्रात्याक व्यS, त्या च्या सम3रा, ए द स स दरा कल्या स, त[3] त बडत3ब अवारुद्ध करार्ण ब' क राक आहं. स वारा य3ग्य मद्रां क वा हं अस त्या चा मत हं3ण्या वारा त अवा बB असत. ए द्या प्राकरार्ण त, जीर्थी स वारा क3र्णत हं मद्रां क वा सत[3], जीव्हे त[3] मद्रां क शील्क आक रार्ण स ठी य3ग्य असत[3], तव्हे व्यS अस मत म डण्या स र्थी3ड अडचार्ण यऊ शीकत कr त्या वारा रा तसरा मद्रां क वा हं. य त शीक हं कr, क म ३३(२) अतगात, सनिदग्धतच्या ब बत त, व्यS उत्तराद नियत्वा क य आहं हं म निहंत हं3ण्या स ठी स चा पीरा क्षर्ण क पी निहंजी. पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा अलि'क रा अस ल्या व्यS लिशीवा य, ज्या त एक न्या य य आलिर्ण एक वा द सम निवाe असत[3] य त शीक हं, प्रात्याक शी सकrय क य य चा प्राभा रा व्यS, ज्या च्या सम3रा अस स स दरा क जी त[3] निकवा त्या च्या क य चा एक भा गा म्हीर्णB त्या च्या सम3रा यत[3], तव्हे मद्रां क वा निकवा अपीरा मद्रां क अस दस्तोऐवाजी जीप्ती करार्ण हं त्या चा कतव्य आहं. स चा 'तपी सर्ण ' कल्या तरा आलिर्ण दस्तोऐवाजी नि ष्पा निदत कल्या वारा निकवा प्रार्थीम नि ष्पा निदत कल्या वारा आवाश्यकत स रा स वारा मद्रां क वा कr हं हं तपी सल्या तरा य त क हं शीक हं [ क म ३३(२) पीहं ]. क म ३३ म' एक अपीवा द म्हीर्णजी पी3 स अलि'क रा आहं. दसऱ्या शीब्द त, पी3लि स अलि'क ऱ्या त्या च्या सम3रा स दरा क मद्रां क स निकवा अपीरा मद्रां निकत दस्तोऐवाजी जीप्ती कराण्या चा अलि'क रा हं. य त क हं शीक हं कr, य पीरातक अतगात फ´जीद रा न्या य य सS च्या अ' हं. क म ३३, नि š सशीयपीर्ण, अलि'क रा प्राद कराण्या स प्रा लि'क̂त करात. २) क म ३५ अन्वय, क यद नि म र्ण करार्ण ऱ्या, ए द्या स वारा मद्रां क वा हं निकवा अपीरा मद्रां क वा आहंत, य क रार्ण स ठी क3र्णत हं स पीरा व्य त द करू घण्या स पीरावा गा निद हं. सपी लि¡क उद्दशी करिरात च्या स चा द सम वाशी आहं. हं अशी दस्तोऐवाजी च्या पीBर्णपीर्ण निवासगात आहं, जी अनि वा यपीर्ण 3दर्ण य3ग्य आहं पीरात त 3दर्ण क̂त हं. 3दर्ण क यद, १९०८ च्या क म ४९ अन्वय, सपी लि¡क व्यवाहं रा लिसद्ध कराण्या स ठी 3दर्ण स दस्तोऐवाजी वा पीरा जी ऊ शीकत. पीरात, दस्तोऐवाजी वारा मद्रां क वा स निकवा अपीरा मद्रां क वा अस तरा हं द अ ज्ञाय आहं. क म ३५ पीढ अस घ3निर्षत करात कr अशी मद्रां क स ल्या निकवा अपीरा मद्रां क वा ल्या दस्तोऐवाजी वारा क रावा ई क जी र्ण रा हं. करा रा क यद्या च्या क म २(हं) स रा उपीरा3S म्हीटंल्या प्राम र्ण मद्रां क स ल्या दस्तोऐवाजी वारा नि ब5' घ र्ण महंत्त्वा चा आहं. करा रा क यद्या च्या क म २(हं) मध्ये तरातBद क आहं कr, क यद्या त गाB हं3र्ण रा करा रा हं सनिवाद आहं तरा क म २(जी ) स रा, गाB करात यर्ण रा करा रा शीन्यावात आहं. 'क यद्या स रा गाB कराण्या य3ग्य' निकवा 'क यद्या स रा गाB कराण्या य3ग्य हं ' य चा अर्थी मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ मध्ये अस निद आहं कr, करा रा त पीक्ष पीJकr एक क यद्या त उपी ब्ध अस ल्या मजीBरा च्या आ' रा त्या चा अम बजी वार्ण करार्ण आवाश्यक आहं, अस प्रासगा आल्या वारा, त्या त क̂पी करू निद जी वा. स म न्यातš, करा रा निदवा र्ण न्या य य म' क यवा हं द्वा रा गाB क जी त त. उपी य स वाजीनि क प्रा लि'करार्ण सम3रा म निगात जी ऊ शीकत त. निदवा र्ण न्या य य आलिर्ण स वाजीनि क प्रा लि'करार्ण ह्या द3घ हं मद्रां क वा ल्या स प्राभा वा दर्ण वाज्या आहं. क म ३३ स रा, ज्या व्यS क यदय, निकवा समत, पीरा वा घण्या चा अलि'क रा आहं, त करा रा म जीप्ती कराण्या व्यनितरिराS इंतरा पीय य दत हं. मद्रां क क निकवा अपीरा मद्रां निकत दस्तोऐवाजी क3र्णत्या हं क रार्ण स ठी पीरा वा म्हीर्णB वा पीरा जी ऊ शीकत हं. हं अ क य आहं कr एक चा वाळे¥ हं कस शीक्यु आहं कr एक मद्रां क वा दस्तोऐवाजी अद्या पी क यद्या त गाB कराण्या य3ग्य आहं निकवा त[3] क यद्या त गाB कराण्या य3ग्य हं. पीक्षक रा त्या आ' रा क यवा हं करू शीकत त हं वागाळे¥ ब ब आहं. उद हंरार्ण र्थी, वास्तोB निकवा सवा ए द्या दस्तोऐवाजी हंस्तो तरा त हं3ऊ शीकत त, जी3 दस्तोऐवाजी अन्यार्थी मद्रां क शील्क स ठी पी त्रा असB शीकत[3]. तर्थी निपी, जी सबलि'त आहं त अस कr रा ज्या, य3ग्य मजीरा द्वा रा, अशी दस्तोऐवाजी सराक्षर्ण दर्ण रा हं. करा रा वारा मद्रां क वा गा असत, जी अलि'क रा अन्यार्थी उपी ब्ध झा असत, तरा त गा3ठी रा हंत निकवा त अखिस्तोत्वा त सत. म्हीर्णB, आम्ही आमच्या मत आर्ण बळेकटं दत[3], कr य न्या य य गारावा रा (उपीरा3ल्ले त) म' पीरिराच्छेद-२२ मध्ये म ड मत वा त्या तरा एस. एम, एस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्ले त) च्या अ र्षगा व्यS क निवाचा रा क यद्या त य3ग्य खिस्थात चा प्रानितनि लि'त्वा करात त. ३) पीढ, आपीर्ण गारावा रा (उपीरा3ल्ले त) च्या पीरिराच्छेद-२९ मध्ये व्यS क ल्या मत च्या अचाBकतकड वाळे पी निहंजी. न्या य य य यटंड इंनिडय इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड आलिर्ण अन्या निवा. ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा अ•ड कन्स्ट्रaक्श कपी लि लिमटंड आलिर्ण इंतरा25 म' नि क चा आ' रा घत. ६३. न्या यमBत; हृर्ष कशी राoय य, त्या च्या नि क च्या मसद्या च्या पीरिराच्छेद-८४ मध्ये अस आढळे कr गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) म' पीरिराच्छेद-२९ मध्ये, य न्या य य य यटंड इंनिडय इंन्शुरान्स कपी लि लिमटंड निवारुद्ध ह्या©द ई इंलिजीनि अरिरागा अ•ड कन्स्ट्रaक्श कपी लि लिमटंड26 म' नि र्णय चा आ' रा घत आहं. आमचा 25 (२०१८) १७ ६०७ एस स स 26 (२०१८) १७ ६०७ एस स स निवाद्वा ब'B पीरिराच्छेद-८४.१ मध्ये पीढ मBद करात त कr ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये मद्रां क वाण्या ब बतचा मद्द निवाचा रा त व्हेत आलिर्ण प्राश्ना हं हं3त कr, प्राकरार्ण अपीवा द त्मक ब ब मध्ये आ कr हं क रार्ण वा द ब बतचा क म निवाम कपी द नियत्वा स्व क रा कr हं य वारा अवा बB हं3त. न्या यमBत; हृनिर्षकशी राoय य पीढ अस आढळेB आ कr गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) नि र्णय वारा अवा बB रा हंण्या चा दृनिeक[3] चाकrचा हं3त. हं अस आहं कr ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) चा मद्रां क शी क हं हं सब' हं आलिर्ण त्या मध्ये भाद द वा गा पी निहंजी हं3त. आमच्या निवाद्वा ब'B निवाद्वा न्या य य लिमत्रा च्या यखिSवा द चा आ' रा घत कr ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) म' नि र्णय ओरिराएटं इंन्शुरान्स कपी निवारुद्ध राभारा म पीoवारा अ•ड स्टी प्रा यव्हेटं लि लिमटंड27 म' नि र्णय वारा वारा अवा बB आहं, ज्या प्राकरार्ण त, न्या य य अलि'नि यम च्या क म ११(६)(अ) चा अर्थी वाण्या चा स' लिमळे हं. ६४. हं रा आहं कr ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये, हं न्या य य मद्रां क अलि'नि यम च्या प्राभा वा शी सबलि'त व्हेत. न्या य य हं क म च्या पीरिरार्ण म चा मद्द हं त ळेत हं3त, ज्या मध्ये हं म न्या क हं3त कr जीरा निवाम कत्या निवाम पीत्रा च्या अतगात 27 (२०१८) ६ एस स स ५३४ निकवा त्या चा पीवा करात द नियत्वा ब बत निवावा द नि म र्ण क अस निकवा त स्व क रा हं तरा वा द हं3र्ण रा हं. उS क म च्या सदभा त, य न्या य य, ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये, इंतरा गा3e बरा3बराचा, अस नि र्णय निद कr, निवाम कपी नितच्या द नियत्वा निवार्षय चा द वा क राल्या, ' वा द चा क म अप्राभा वा आलिर्ण अखिस्तोत्वा त स तरा, त्या चा अम बजी वार्ण कराण्या स अक्षम' ठीरात. य त शीक हं कr, गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद-२९ मध्ये य न्या य य स अस आढळेB आ कr, 'तसचा सध्ये च्या टंल्या त तथ्यां मध्ये, हं स्पe आहं कr वा द क म, म्हीर्णजी, जी उपी-करा रा त सम निवाe आहं त जी3पीय5त उपी-करा रा वारा मद्रां क वा जी त हं त त3पीय5त क यद्या चा ब ब म्हीर्णB अखिस्तोत्वा त हं, जी3 नि ष्कर्ष आम्ही वारा क ढ आहं’. म्‍हंर्णB, मद्रां क स ल्या उपी-करा रामध्‍य वा द करा रा अखिúतत्‍वा असर्ण रा हं ह्या नि ष्कर्ष ब बतचा क रार्णम म स पीरिराच्छेद-२२ मध्‍य आ' चा निद आहं. हं न्या य य फS ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण म'B 'क यद्या त' स चा अखिस्तोत्वा सल्या बद्द च्या प्रास्तो वा आ' रा घत हं3त. ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) हं प्राकरार्ण मद्रां क अलि'नि यम शी सबलि'त सत, आलिर्ण अगाद, ह्या©द ई (उपीरा3ल्लेखि त) चा सदभा क ढB टं कत असत, मद्रां क स करा रा अखिस्तोत्वा त सल्या बद्द चा नि ष्कर्ष, क म ११ मध्ये जी गाˆहं त 'राण्या त आ आहं त कवाळे वारावाराचा अखिस्तोत्वा निकवा वास्तोखिस्थात त अखिस्तोत्वा हं तरा क यद्या त द अखिस्तोत्वा य तक वारा समर्थी य अस. ६५. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) ह्या प्राकरार्ण मध्ये य न्या य य अस दृनिeक[3] स्व क रा कr जी3पीय5त उपी करा रा वारा मद्रां क वा जी त हं त, त3पीय5त त्या त सम निवाe अस वा द क म क यद्या चा ब ब म्हीर्णB अखिस्तोत्वा त रा हंर्ण रा हं. क म ११(६-अ) मध्ये सम निवाe कराण्या त आ ल्या दरुस्तो च्या प्राभा वा च्या आ' रा वारा हं नि ष्कर्ष स्पeपीर्ण प्रास्तोत क गा आहंत. गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण म' न्या य य, प्रात्याक्ष त, भा रात य निवा' आय3गा च्या द[3] शी सहंचा ळे¥स व्य अहंवा च्या आ' रा दरुस्तो हं3ण्या पीBवा;, क यद म डल्या तरा पीरिराच्छेद-१९ मध्ये आढळेB आ कr क यद आय3गा च्या अहंवा त एस. एम. एस. टं ईस्टीटंस (उपीरा3ल्लेखि त) चा उल्ले हं. पीढ अस आढळेB आ कr, क म ११ अन्वय अजी वारा नि र्णय घत न्या य य क3र्णत्या हं प्रा र्थीलिमक मद्द्यां वारा य3ग्य क रार्ण स्तोवा नि र्णय घत हं. न्या य य पीढ अस आढळेB आ कr त अनि वा य क यद्या च्या तरातद गाB करात आहं, जी न्या य य, मद्रां क क यद्या च्या तरातद स रा, प्रार्थीम करा रा जीप्ती कराण्या चा आदशी दत, आलिर्ण त्या तरा फS दड आलिर्ण शील्क भारा असल्या सचा, त्या वारा क̂त कराण्या स स गात. वा द च्या क म चा निवाभा जी करार्ण शीक्यु सल्या चाहं न्या य य आढळेB आ हं3त. आम्‍हं अस आढळेB आ कr, आम्‍हं आढळेल्‍य प्राम र्ण, मद्रां क स निकवा अपीरा मद्रां क वा असल्‍य, जी3पीय5त करा रा 'प्राम लिर्णत' हं3त हं त3पीय5त करा रा चा अम बजी वार्ण करात यर्ण रा हं जी कवाळे मद्रां क अलि'नि यम त मBद क ल्या पीद्धत अ मत आहं आलिर्ण त3पीय5त त[3] करा रा 'क यद्या त' अखिस्तोत्वा त हं. ६६. मय द अलि'नि यम, १९६३ च्या क म १३६ च्या सदभा त, त निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी डo. लिचाराजी (मयत) क यदशी रा प्रानितनि ' द्वा रा निवारुद्द हंरा द स (मयत) क यदशी रा प्रानितनि ' द्वा रा28 ह्या प्राकरार्ण त, निद क ०७.०८.१९८१ रा3जी निवाभा जी स ठी पी रिरात झा अनितम हुक B म म कवाळे २५.०५.१९८२ रा3जी चा अम त आर्णण्या जी3गा ठीरा, ज्या निदवाशी हुक B म म स्टी}म्पे पीपीराच्या स हं य्य अनितम क गा ह्या यखिSवा द वारा निवाचा रा करा वा गा. क म १३६ अन्वय, ब रा वार्ष 5चा क वा' तव्हे सरू हं3त[3] जीव्हे इंतरा गा3e बरा3बरा, 'हुक B म म निकवा आदशी' 'अम बजी वार्ण य3ग्य' हं3त[3]. न्या य य, इंतरा गा3e सहं, प्राम र्ण निद: 28 (२००५) १० ७४६ एस स स "२३. भा रात य मद्रां क अलि'नि यम, १८९९ चा उनिद्दe आलिर्ण य3जी च्या सदभा त अशी अर्थीउक करार्ण अ ज्ञाय आहं. मद्रां क अलि'नि यम हं क हं निवालिशीe वागा त स वारा रा ज्या स ठी महंसB प्रा प्ती कराण्या स ठी एक उद्दशी सहं गाB क एक निवात्त य उपी य आहं. वा दकत्या त्या च्या निवारा3'क च्या कसचा स म कराण्या स ठी त नित्राकतच्या शीस्त्र सशीस्त्र करार्ण ह्या क रार्ण करिरात त[3] अलि'नि यलिमत क हं. य क यद्या त कठी3रा तरातद महंस च्या निहंत स ठी सकखिल्पात आहंत. एकद क त उनिद्दe क यद्या स रा प्रा प्ती झा कr, स वारा द वा करार्ण ऱ्या पीक्षक रा चा स म' प्रा रालिभाक द3र्ष च्या आ' रा वारा पीरा भावा क जी र्ण रा हं (निहंदस्तो स्टी लि लिमटंड निवारुद्ध निद पी कन्स्ट्रaक्श क. [(१९६९) १ एस. स. स. ५९७]). …” xxx xxx xxx २५. वा टंर्ण च्या द व्य त अनितम हुक B म म तय रा करार्ण हं ब ब हुक B म म्या च्या त रा शी सबलि'त अस. अस हुक B म म नि ष्पा निदत कराण्या स ठी च्या मय दच्या क वा' चा सरुवा त स्टी}म्पे पीपीरावारा अस हुक B म म तय रा कराण्या च्या त रा वारा अवा बB ठीवा जी ऊ शीकत हं. स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या चा त रा हं एक पीक्ष क रा चा क्षत्रा, क यक्षत्रा आलिर्ण नि यत्रार्ण त एक अनि लिश्चत क̂त आहं. स्टी}म्पे पीपीस दण्या स ठी क3र्णत हं त रा निकवा क वा' नि लिश्चत क हं. क3टं स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या स ठी ब[3] वा वा निकवा वाळे द्या वा अस क3र्णत हं नि यम आम्ही द वाण्या त आ हं. स्टी}म्पे पीपीरा दण्या च्या स्वतš च्या क̂त पीक्षक रा मय दचा क वा' पीढ चा B रा हंण्या चा र्थी बवाB शीकत हं. क3र्ण हं स्वतš च्या चाकrचा फ यद घऊ शीकत हं. स्टी}म्पे पीपीरा स दरा करापीय5त आलिर्ण त्या वारा हुक B म म तय रा करापीय5त मय दचा क वा' नि निबत रा हं आलिर्ण त्या तरा ब रा वार्ष 5चा क वा' सरु हं3ई अशी प्राक राचा प्रास्तो वा असमजीसपीर्ण कड घऊ जी ई. यशीवात दवारा वा दशीम निवारुद्ध वा चाद रा मचाद क3ठी रा [१९५० एस. स. स. ७६६: १९५० एस. स. आरा. ८५२: ए. आय. आरा १९५१एस. स. १६] मध्ये अस म्हीटं हं3त कr र्थीकrत अस ल्या राकमवारा क3टं फr भारार्ण पीBर्णपीर्ण हुक B म म ' राक च्या अलि'क रा त हं3त आलिर्ण त्या तव्हे आलिर्ण तर्थीचा पीJस दण्या पी सB प्रानितब' करार्ण रा अस क हं हं व्हेत; त[3] अस हुक B म म हं3त कr त[3] पी रिरात झा ल्या च्या त रा पी सB नि ष्पा निदत कराण्या स सक्षम हं3त. २६. मय दचा नि यम हं पी हंण्या स ठी आहंत कr पीक्षक रा वाळेक ढBपीर्ण चा ड वापीचा चा अवा ब करू य, पीरात त्वारिरात त्या चा उपी य शी3' वात. वारा मBद कल्या प्राम र्ण, हुक B म म तय रा कराण्या स ठी स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या स ठी निकवा हुक B म म स्टी}म्पे पीपीरावारा तय रा कराण्या स ठी वाळे-मय द निवानिहंत करार्ण रा क3र्णत हं वाJ' नि क तरातBद हं आलिर्ण हुक B म म पी रिरात करार्ण ऱ्या न्या य य वारा पीक्षक रा हुक B म म तय रा कराण्या स ठी स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या चा आदशी दण्या चा क3र्णतहं वाJ' नि क ब' हं. सध्ये च्या प्राकरार्ण त न्या य य पीक्षक रा हुक B म म तय रा कराण्या च्या उद्दशी स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या चा नि द^शी दर्ण रा आदशी पी रिरात क हं. कवाळे न्या य य हुक B म म तय रा कराण्या स ठी स्टी}म्पे पीपीरा स दरा कराण्या चा आदशी निद हं त निकवा त्या करिरात क यद्या मध्ये वाळे नि लिश्चत क हं य चा अर्थी अस हं3त हं निक पीक्षक रा त्या च्या मजी;प्राम र्ण स्टी}म्पे पीपीरा स दरा करात आलिर्ण जीव्हे हुक B म म तय रा हं3ई कवाळे त्या तराचा क यद्या चा क म १३६ मध्ये तरातBद क मय द वाळेचा सरूवा त हं3ई. निवाभा जी हुक B म म च्या नि ष्पा पी द स ठी मय द क वा' चा सरुवा त स्टी}म्पे पीपीरावारा हुक B म म तय रा कराण्या वारा अवा बB असB शीकत हं. …” (य वारा भारा निद ) ६७. तर्थी निपी, हं मत क म १३६ च्या अर्थी स रा, पीक्षक रा च्या आवाश्यक मद्रां क शील्क भाराण्या स ठी इंच्छेच्या क̂त वारा अवा बB अस ल्या हुक B म म निकवा आदशी च्या ' अम बजी वार्ण मळे' पीBर्णपीर्ण पीरा भाBत हं3ण्या च्या '3क्यु त अस ल्या मय दच्या क यद्या च्या सदभा त समजीB घर्ण आवाश्यक आहं. यर्थी, आमच्या सम3रा अस ल्या प्राकरार्ण मध्ये, आम्ही मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ अतगात न्या य य च्या कतव्य शी सबलि'त आहं3त आलिर्ण वा द क म अस ल्या पीरात त्या वारा मद्रां क वा ल्या निकवा अपीरा मद्रां क वा ल्या करा रा वारा हं3र्ण र्‍य प्राभा वा शी सबलि'त आहं3त. हं अलि'नि यम च्या क म ११(६-अ ) म' वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा' य शीब्द निदल्या जी र्ण ऱ्या अर्थी व्यनितरिराS आहं. आम्ही सनिवाद अलि'नि यम च्या सदभा त 'अम बजी वार्ण ' हं सकल्पा स्पe क आहं. वास्तोखिस्थात च्या अगाद जीवाळे जी आहं त म्हीर्णजी अम बजी वार्ण क्षमतचा सकल्पा निकवा त्या ऐवाजी अम बजी वार्ण क्षमतचा अभा वा ज्या मळे सनिवादचा शीBन्यात नि म र्ण हं3त ज्या प्राम र्ण आम्ही स्पe क आहं. क. मद्रां क अलि'नि यम - प्रानिक्रय त्मक क यद आहं क ? ६८. य सदभा त, स मड ऑ ज्यारिरास्प्रुडन्स, ब रा वा आवाˆत्त य पीस्तोक च्या आ' रा चाचा क्ष त घर्ण फ यदशी रा ठीरा. प्रानिक्रयच्या क यद्या शी व्यवाहं रा करात, प्राम र्ण म्हीटं आहं: “मगा, भाद चा रा स्वरूपी क य आहं? प्रानिक्रयच्या क यद्या चा व्य ख्य क यद्या चा त शी म्हीर्णB क जी ऊ शीकत जी टंल्या चा प्रानिक्रय नि यनित्रात करात. सवा क यदशी रा क यवा हं, निदवा र्ण निकवा फ´जीद रा सम निवाe कराण्या स ठी निक्रय य शीब्द चा व्य पीक अर्थी वा पीरा करू - क यवा हं सबलि'त हं निक्रय चा क यद आहं. सवा अवाशीर्ष हं वास्तोनि ष्ठ क यद आहं आलिर्ण त[3] टंल्या च्या प्रानिक्रयशी सबलि'त हं तरा त्या च्या उद्दशी आलिर्ण निवार्षय शी सबलि'त आहं. वास्तोनि ष्ठ क यद हं tPhe सम प्ती शी सबलि'त आहं जी3 न्या य च्या प्राशी स चा म गार्ण करा त आहं; प्रानिक्रय त्मक क यद स ' आलिर्ण निवा शी सबलि'त आहं ज्या द्वा रा त उनिद्दe स ध्ये करा यचा आहंत. तराचा गा3e वा द च्या सदभा तचा न्या य य आलिर्ण पीक्षक रा चा वात आलिर्ण सब' चा नि यम करात तरा आ' चा गा3e टंल्या त प्राकरार्ण च्या सदभा त त्या चा आचारार्ण आलिर्ण सब' य चा नि ' रार्ण करात.” ६९. मद्रां क अलि'नि यम हं जीरा एक निवात्त य उपी य अस तरा, त[3] प्रानिक्रय त्मक क यद्या च्या कक्षत यऊ शीकत हं. जीव्हे ए द व्यS न्या य य त जी त तव्हे, इंतरा गा3e बरा3बरा, क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या तरातद गाB हं3ऊ शीकत त, य चा अर्थी अस हं3त हं कr मद्रां क अलि'नि यम, क म १७ मध्ये घ3निर्षत कल्या प्राम र्ण, वाळेवारा स वारा मद्रां क वाण्या स ठी नि ष्पा दक वारा कतव्य प्राद करात[3], आलिर्ण य व्यनितरिराS, क म ६२ अतगात क̂त कराण्या स ठी निवाचा स दड करात[3], ह्या ब ब प्रानिक्रय त्मक क यद्या च्या कक्षत यत त. उलिचातपीर्ण, आम्ही पी3 oक आलिर्ण मल्ले य च्या भा रात य करा रा आलिर्ण निवालिशीe निद स अलि'नि यम च्या चा´द व्य आवाˆत्त त मBद प्राम र्ण, प्राम र्ण 3द करू इंखिच्छेत[3]: “ गाB करात यर्ण रा करा रा गाB यर्ण रा करा रा सवा ब बत त वाJ' आहंत, पीरात त्या आ' रा पीक्षक रा कडB टं भारा जी ऊ शीकत हं. हं असमर्थीत 3दर्ण च्या अभा वा मळे; निकवा टं द कराण्या स ठी नि ' रिरात क वाळे क ब ह्या झा ल्या मळे; निकवा वा द व्यवास य सस्था 3दर्ण क̂त सल्या मळे; निकवा दस्तोऐवाजी निकवा स वारा आवाश्यक मद्रां क शील्क वाल्या मळे; निकवा पीJस दर्ण ऱ्या कड स वाक रा क यद्या तगात पीरावा सल्या मळे उद्भवाB शीकत. ( य वारा भारा निद ) ७०. आम्ही अस आढळेB आ कr, सनिवाद अलि'नि यम चा क म २(हं) गाB करू, ए द करा रा, जी3 ठी3स क यद्या मळे, ज्या मध्ये मद्रां क अलि'नि यम चा हं3ई, गाB हं3र्ण रा आहं, त[3] सनिवाद स. करा रा चा अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य अस तराचा त[3] सनिवाद हं3ई. हं फS एक 'सनिवाद ' आहं, जी3 अलि'नि यम च्या क म ११(६-अ ) मध्ये निवाचा रा कल्या प्राम र्ण ' वा द करा रा' अस. कवाळे मद्रां क स ल्या वा द करा रा चा 'उपीचा रा कराण्या य3ग्य द3र्ष' म्हीर्णB वार्ण करार्ण य3ग्य ठीरार्ण रा हं. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ मध्ये निवाचा रा कल्या प्राम र्ण, जी3पीय5त त[3] मद्रां क वा स आहं, त3पीय5त त्या चा द क3र्णत्या हं हंतB घत जी ऊ शीकत हं. त[3] गाB कराण्या य3ग्य रा हंत[3]. क म १७ भा रात मध्ये नि ष्पा द क ल्या स वारा क3र्णत्या वाळे¥ मद्रां क वा जी र्ण आवाश्यक आहं हं घ3निर्षत करात. य तरातद त अस मBद कराण्या त आ आहं कr स नि ष्पा निदत हं3ण्या च्या अगा3दरा निकवा त्या च्या नि ष्पा द च्या वाळे¥ त्या वारा मद्रां क वा जी र्ण आवाश्यक आहं. क3र्णत हं स वाजीनि क अलि'क रा, निकवा न्या य य निकवा वा द, क3र्णत्या हं व्यS त्या आ' रा क यवा हं कराण्या स स गाण्या चा पीरावा गा दऊ शीकत हं निकवा पीरा वा म्हीर्णB स्व क रु शीकत हं. क यद्या स रा, त[3] स जी वा पी सB वालिचात आहं. त[3] 'क यद्या अम त आर्णण्या य3ग्य हं '. य अर्थी, त क यद्या त द अखिस्तोत्वा त असB शीकत हं. त शीBन्या हं3ई. य सदभा त आमचा मत कr शीBन्यात हं अम त आर्णण्या य3ग्यतशी जी3ड आहं जी सनिवाद अलि'नि यम च्या क म २(जी) म'B समर्थी प्रा प्ती करात जी एक सनिवाद शीBन्यावात अम त आर्णण्या य3ग्य हं3र्ण र्थी बवात. ७१. क म ११(६-अ) ज्या चा निवाचा रा करात त एक सनिवाद आहं आलिर्ण त[3] करा रा हं ज्या सनिवाद म्हीर्णB म जी ऊ शीकत हं. क म ११(६-अ) मध्‍य ' वा द करा रा' हं शीब्द वा पीरा असB हं हं खिस्थात आहं. दसऱ्या शीब्द त, सनिवाद अलि'नि यम च्या क म ७ चा पी करार्ण आवाश्यक आहं. तसचा, सनिवाद अलि'नि यम च्या आवाश्यकत पीBर्ण करार्ण आवाश्यक आहं, हं स गाण्या चा गाराजी हं. ७२. क म १९ आलिर्ण १९-अ च्या अर्थी म' एक शीBन्या य सनिवाद, नि š सशीयपीर्ण शीBन्यावात सनिवाद च्या अगाद निवारुद्ध आहं. तर्थी निपी, अगाद उद हंरार्ण र्थी, शीBन्यावात सनिवाद च्या श्रीर्ण मध्ये, सनिवाद अलि'नि यम च्या क म २० मध्ये अशी तरातBद आहं कr जीरा ए द्या महंत्त्वा च्या मद्द्यां वारा, पीक्षक रा चा चाBक झा अस, तरा सनिवाद शीन्यावात हं3ई. जीरा ए द्या निद ल्या प्राकरार्ण त, क म ११ अतगात क यवा हं त पीक्षक रा म ड हं वा द अस जीव्हे करा रा अन्यार्थी वा द करा रा म्हीर्णB अखिस्तोत्वा त आर्णण्या स ठी सनिवादचा आवाश्यकत पीBर्ण करात[3], तव्हे, न्या य य करा रा अखिस्तोत्वा त अस करा रा म ण्या त न्या य्य ठीरा आलिर्ण त्या प्राश्ना वारा वा द निवाचा रा कराण्या स ठी स3डB शीक, जी वा द सम3रा ब जीB म डल्या तरा आलिर्ण त्या च्या सम3रा पीरा वा स दरा कल्या तरा हं3ऊ शीकत. जीव्हे वा द करा रा हं शीन्या य असB त[3] टं ळे गा आहं ह्या आ' रा वारा कक्षमध्ये आर्णण्या चा प्रायत्न क जी त[3], तव्हे पीन्ही हं ब ब असB शीकत लिजीर्थी कoम्पेटंन्झ - कoम्पेटंन्झचा तत्त्वा गाB हं3ऊ शीकत आलिर्ण त्या तरा, पीन्ही क म ११ अतगात न्या य य वा द करा रा अखिस्तोत्वा त आहं य आ' रा वारा पीढ जी र्ण न्या य्य ठीरा. वा द च्या जी द प्रा राभा, प्रागात आलिर्ण नि ष्कर्ष च्या उद त्त क रार्ण पीढ ण्या च्या दृनिeक[3] तB प्राश्ना नि š सशीयपीर्ण निवाचा रा त घत पी निहंजी. जीव्हे ससद क यद्या त स' रार्ण करू हंस्तोक्षपी क, तव्हे क म ८ मध्ये, ‘प्रार्थीमदशी ’ हं शीब्द वा पीरा आहंत, वा क म ११(६-अ) मध्ये वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा चा त्रा कराण्या स ठी 'तपी सर्ण ' हं शीब्द वा पीरा आहं. त्या चाप्राम र्ण, क म ८ मध्ये क यद करार्ण ऱ्या 'वाJ'' हं शीब्द वा पीरा आहं जी3 क म ११(६-अ) मध्ये गाहं ळे आहं. क म ११(६-अ) च्या उद्दशी स ठी अवाJ' करा रा क यद्या त अखिस्तोत्वा त आहं अस म्हीर्णत यई क ? ७३. अवाJ' दस्तोऐवाजी निकवा करा रा म्हीर्णजी क य? हं एक अलिभाव्यS आहं जी शीBन्यावात य शीब्द शी सबलि'त आहं आलिर्ण बहुतक वाळे एकनित्रात वा पीरा जी त. आम्‍ हं आ' पी सB चा क म २० उद हंरार्ण म्हीर्णB क्ष त घत आहं जीर्थी ए द्या मख्य निवार्षय वारा पीक्षक रा चा एक स म न्या चाBक करा रा शीBन्यावात करात. आम्ही हं द क्ष त घत आहं कr शीBन्यातचा स्वरूपी क्ष त घत, क म ११ अतगात, न्या य य, उत्तरावा द सनिवाद अलि'नि यम च्या क म २० चा आ' रा घतल्या स क म ११ अतगात अजी स पीरावा गा दऊ शीकत. त्या तB वास्तोखिस्थात सम3रा यई. अवाJ'तच्या मद्द्यां वारा पीरात यत, ए द सनिवाद, उद हंरार्ण र्थी, जीरा अस्वस्था म च्या व्यS नि ष्पा निदत क अस तरा अवाJ' हं3ई. जीरा पीक्षक रा पीJकr एक अल्पावाय असल्या चा आढळेB आल्या वारा द असचा हं3ई. जी3पीय5त 'अवाJ'' शीब्द चा सब' आहं, त्या च्या अर्थी च्या वागावागाळ्या छटं आहंत. एक सनिवादच्या सदभा त, इंम मब निवारुद्ध जी हुस उफ जी स ब29 प्राकरार्ण मध्ये क टंक उच्च न्या य य 3दनिवा ल्या नि क म' निवा' आम्ही क्ष त घत[3]: "ज्या सदभा त शीब्द वा पीरा जी त त, त्या चा अर्थी जी3न्स निवारुद्ध ब• क ऑफ गालिमगा मध्ये मBद कराण्या त आ त[3] प्राम र्ण: - “करा रा गाB क ल्या “अवाJ'” शीब्द चा अर्थी हंम चा पीBर्ण अवाJ' अस हं3त हं, क रार्ण करा रा इंतक अपीBर्ण असB शीकत[3] कr त[3] अम त आर्णत यत हं, पीरात इंतक पीBर्ण शीBन्या सत[3] कr त[3] पीरिरापीBर्ण हं3ऊ शीकत हं. ” 29 ए आय आर १९८८ कन टक ५१ (शीब्द आलिर्ण वा क्यु शी पीहं - क यम आवाˆत्त - वास्टी पीखि लिशीगा कपी ड २२-ए )" ७४. उपीरा3S निवा' मद्रां क स ल्या निकवा अपीरा मद्रां क अस ल्या स च्या सदभा त य3ग्य निदसत. य चा क रार्ण अस कr एकrकड जी3पीय5त त्या वारा मद्रां क वा जी त हं निकवा अपीBरा मद्रां क वा असत त, त3पीय5त मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ अन्वय त[3] अवारुद्ध क जी र्ण आलिर्ण त्या चा पीरा वा म्हीर्णB वा पीरा करात यर्ण निकवा त्या चा 3दर्ण हं3र्ण अशी द3न्ही करिरात जीब बद रा हं3ऊ शीकत[3]. हं अशी स वारा 'क̂त कराण्या ” निवारुद्धच्या नि:सनिदग्ध प्रानितब' य व्यनितरिराS आहं. दसरा कड, जीरा अस स अवारुद्ध क गा आलिर्ण त्या वारा शील्क आलिर्ण दड य चा भारार्ण क गा आलिर्ण त्या वारा क म ४२(२) म' तरातद प्राम र्ण प्राम र्णपीत्रा मजीBरा क गा, तरा अस सBलिचात हं3त कr त्या स स पीन्ही जी वा लिमळेत, आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ म' प्रानितब' क यमचा क ढB टं क जी त[3]. त्या चाप्राम र्ण, क म ३६ अन्वय, ए द्या स च्या ब बत त (स चा दय्यम पीरा वा हं ) ज्या आक्षपी लिशीवा य पीरा व्य मध्ये द कराण्या चा पीरावा गा आहं, तरा त[3] हंक्का स्था निपीत करार्ण रा पीरा वा म्हीर्णB पी त्रा ठीरा. पीरात, त[3] मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ मध्ये आढळे ल्या नि यम हं अपीवा द आहं. अशी प्राक रा, मद्रां क वा निकवा अपीरा मद्रां क वा स ए द्या करा रा च्या प्राकरार्ण चा प्रानितनि लि'त्वा करात[3] जी3 अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य हं, य अर्थी निदवा र्ण क रावा ईद्वा रा क यद्या त मजीBरा अ ज्ञाय आहं, य सदरा अर्थी अवाJ' आहं. त[3] अद्या पी लिजीवात आहं य अर्थी त[3] अवाJ' निकवा शीBन्यावात हं निकवा त[3] शीBन्याब त आलिर्ण शीBन्या द हं य अर्थी निक त्या त जी वा ओत जी ऊ शीकत हं. आपीर्ण नि ष्कर्ष पीय5त पी3हं3चाB शीकत[3]. जी3पीय5त मद्रां क स निकवा अपीरा मद्रां क वा करा रा जी3पीय5त य खिस्थात त आहं त3पीय5त त[3] गाB कराण्या य3ग्य हं. अस स अम त आर्णण्या य3ग्य सल्या मळे नि रार्थीक अस [ सनिवाद अलि'नि यम चा क म २(जी ) पीहं ]. त्या अर्थी त[3] क यद्या त अखिस्तोत्वा त सत[3]. मद्रां क अलि'नि यम त क म ३३ आलिर्ण इंतरा तरातद मध्ये तरातBद प्रानिक्रयद्वा राचा त स "प्राम लिर्णत" क जी ऊ शीकत त. हंरिराओम अग्रवा निवारुद्ध प्राक शी चाद म वा य30 मध्ये य न्या य य च्या नि र्णय त 'वाJ' करार्ण' हं शीब्दप्राय3गा वा पीरा आहं, ज्या चा आपीर्ण तरा अलि'क तपीशी वा रा सदभा घऊ. य चा अपीरिराहं यपीर्ण अर्थी अस आहं कr न्या य य त्या कड त[3] अम बजी वार्ण कराण्या य3ग्य म्हीर्णB पी हंर्ण रा हं 30 (२००७) ८ ५१४ एस स स आलिर्ण म्हीर्णB चा, क यद्या त अखिस्तोत्वा त हं. स्पe क ल्या अर्थी, त 'शीBन्यावात हं ' अस आढळेर्ण रा हं आलिर्ण म्हीर्णB “अवाJ' हं ”. अशी प्राक रा, सदरा अलि'नि यम, मद्रां क अलि'नि यम आलिर्ण सनिवाद अलि'नि यम य च्या सदभा त, आम्ही अस वा टंत कr य न्या य य च्या एस. एम. एस. टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) म' मत चा, य सदभा त गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये क पी रुच्च रा आलिर्ण निवाद्या डa3लि य (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये म न्यात बरा3बरा आहं. ७५. क म ११(६-अ) हं शीब्दशीš अखिस्तोत्वा त अस ल्या वा द करा रा स ठी कवाळे निवा' करात[3] अस समजीB शीकत हं. य चा अर्थी अस आहं कr, य3ग्यरिरात्या नि ष्पा निदत क जी र्ण रा करा रा प्राक्षनिपीत कराण्या स ठी ब ह्या अलिभाप्रात अस ल्या सवा हंतB आलिर्ण उद्दशी स ठी वा द करा रा चा कवाळे अखिस्तोत्वा, क हं निवालिशीe पीरिराखिस्थात मध्ये, क म ११ अतगात अपीरा असB शीकत. जीरा स्पeपीर्ण मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक असत मद्रां क वा असर्ण य स राख्य क रार्ण स ठी, तरा त[3] करा रा आहं अस म्हीर्णत यर्ण रा हं क रार्ण त[3] क यद्या त अखिस्तोत्वा त हं. आम्ही सहंमत असत, न्या य य करा रा नि वाडत स वा'निगारा ब ळेगा पी निहंजी जीर्थी वा द चा करा रा जी3 स दरा क जी त[3] त्या वारा क यद्या त अखिस्तोत्वा त सल्या च्या क रार्ण स्तोवा त्या वारा क रावा ई क जी र्ण रा हं, आम्ही फS एवाढचा म त[3] कr वा द करा रा, ज्या वारा मद्रां क वा सत[3], त[3] अखिस्तोत्वा त हं आलिर्ण मद्रां क वा वा द चा करा रा अखिस्तोत्वा त हं क रार्ण क यद्या त त्या चा अखिस्तोत्वा हं. ए. अलि'नि यम चा क म ७ – त्या चा प्राभा वा ७६. आमचा निवाद्वा ब'B, न्या यमBत; हृनिर्षकशी राoय हं त्या अलि'नि यम च्या भा गा एक च्या हंतBस ठी वा द करा रा चा अर्थी क य आहं य ब बत क म ७ मध्ये जी तरातBद क आहं त्या चा य3ग्य 3द घत आहं. तर्थी निपी, आम्ही, म3ठ्या आदरा, क यद्या च्या क म ७ च्या एक स ध्ये वा चा वारू हं स्पe हं3ई कr वा द करा रा अगाद गाJरा-करा रा त्मक असB शीकत[3] हं म न्या कराण्या स आमचा असमर्थीत व्यS करात[3]. स्पeतच्या उद्दशी, आम्ही य वाळे¥ क यद्या चा क म ७(१) यर्थी उद्धˆत करात[3]: “७(१) वा द करा रा.(१) य भा गा त, “ वा द करा रा” म्हीर्णजी पीक्षक रा नि लिश्चत क ल्या क यदशी रा सब' च्या सदभा त उद्भवा निकवा त्या च्या मध्ये उद्भवाB शीकर्ण रा सवा निकवा क हं निवावा द वा द कड स दरा कराण्या चा करा रा, जी3 करा रा स रा अस[3] वा स[3]." ७७. क म ७(१) ज्या चा पीBवाकल्पा करात[3] त[3] वा द करा रा आहं, अस म ण्या चा आमचा क आहं. आमचा अस निवाचा रा कराण्या चा द क आहं कr क यद ब निवार्ण ऱ्या चा जी कळेनिवाण्या चा हंतB आहं त[3] अस कr वा द च्या करा रा अतगात, पीक्षक रा त्या च्या मध्ये जी उद्भवा आहंत निकवा जी उद्भवाB शीकत त अस निवावा द स दरा करार्ण आवाश्यक आहं. नि लिश्चत क यदशी रा सब' च्या सदभा त निवावा द उद्भवा असB शीकत त निकवा उद्भवाB शीकत त. नि लिश्चत क यदशी रा सब', एकतरा करा रा निकवा अन्यार्थी असB शीकत त. म्हीर्णB चा, निवावा द जीन्म दर्ण रा क यदशी रा सब' असB शीकत त, जी गाJरा-कत्रा टं आहं. क यदशी रा सब' क यद्या तB उद्भवाB शीकत त. त[3] कस च्या सब' त उद्भवाB शीकत[3] पीरात वा द करा रा चा अर्थी हंम चा करा रा अस वा. हं रा3 राचा एक करा रा आहं ज्या चा हंतB क यद्या द्वा रा गाB कराण्या य3ग्य करा रा आहं. वा द करा रा हं वा द स ठी प्राद क ल्या करा रा त एक ड असB शीकत[3]. त[3] एक वागाळे निकवा स्वतत्रा करा रा असB शीकत[3] [अलि'नि यम चा क म ७(२) ]. वा द चा करा रा लि खि त स्वरूपी त असर्ण आवाश्यक आहं [ अलि'नि यम चा क म ७(३) पीहं ]. वा द करा रा लि खि त स्वरूपी त असर्ण आवाश्यक आहं य आवाश्यकत स रा जी सवा क हं समजी आहं, त क म ७(४)(अ) त ७(४)(क) मध्ये मBद क आहं. त्या त पीक्षक रा स्व क्षरा क ल्या दस्तोऐवाजी चा सम वाशी आहं [ क म ७(४)(अ) पीहं ]. पीत्रा, टं र्क्स, टंलि ग्र म निकवा दBरासचा रा च्या इंतरा म ध्येम चा दवा र्णघवा र्ण झा ल्या स, करा रा चा अलिभा प्राद करार्ण र्‍य इं क्टaoनि क म ध्येम द्वा रा ससBचा असल्या स वा द करा रा स लि खि त स्वरूपी त म जी ई [क म ७(४)(ब) पीहं ]. पीढ, आमच्या क्ष त यई कr, जीरा द वा आलिर्ण बचा वा च्या निवा' चा दवा र्णघवा र्ण हं3त अस, तरा वा द चा करा रा लि खि त स्वरूपी त म जी ई, ज्या मध्ये,एक पीक्षक रा करा रा चा अखिस्तोत्वा असल्या चा आरा3पी क पी निहंजी आलिर्ण दसर्‍य क रा हं पी निहंजी. [पीहं क म ७(४)(क) ]. शीवाटं, क म ७(५) वा द च्या करा रा चा सम वाशी पीBवाकल्पा करात, उद. वा द चा क म अतभाBत अस ल्या दस्तोऐवाजी च्या करा रा त सदभा वा द करा रा घटं त करात[3], जीरा करा रा लि खि त स्वरूपी त अस आलिर्ण सदभा अस अस कr ज्या मळे वा दब बतचा क म करा रा चा भा गा तय रा हं3ई. अलि'नि यम च्या क म ७(५) च्या ऱ्या व्य प्ती चा एम. आरा इंलिजीनि यस अ•ड कoन्ट्रॅa}क्टस प्रा यव्हेटं लि लिमटंड निवा. स3म दत्त निबल्डस लि लिमटंड31 मध्ये सनिवास्तोरापीर्ण निवाचा रा कराण्या त आ आहं. 31 ( २००९) ७ ६९६ एस स स ७८. मद्रां क अलि'नि यम चा क म ३(अ), नि š सशीयपीर्ण, पीBवाकल्पा करात कr, अ सBचा मध्ये मBद क प्रात्याक स, जी, य पीBवा; क3र्णत्या हं व्यS अम त आर्ण हं, त जी J, १८९९ च्या पीनिहंल्या निदवाशी निकवा तरा भा रात त नि ष्पा निदत क जी त, त शील्क आक रा जी ण्या स पी त्रा ठीरात. क म ३ म' ड (स ) द भा रात ब हंरा दस्तोऐवाजी च्या 'नि ष्पा द चा ' पीBवाकल्पा करात, जी शील्क सहं आक रार्ण पी त्रा आहं. मद्रां क अ'नि यम च्या क म १७ मध्ये अस हं निवाचा रा कराण्या त आ आहं कr, भा रात त नि ष्पा निदत कराण्या त आ ल्या दस्तोऐवाजी च्या सदभा त, नि ष्पा निदत कराण्या पीBवा; निकवा त्या वाळे¥ त्या वारा मद्रां क वा जी ई. न्या यमBत; हृनिर्षकशी राoय य अस क रार्ण निद कr, अलि'नि यम च्या क म ७ मध्ये व्य ख्य कल्या प्राम र्ण, वा द करा रा हं मद्रां क शील्क स ठी शील्क आक रा जी र्ण रा स असण्या चा गाराजी हं क रार्ण मद्रां क अलि'नि यम स रा मद्रां क शील्क हं फS त्या चा स वारा दय आहं जी नि ष्पा निदत हं3त त. मद्रां क अलि'नि यम मध्ये 'नि ष्पा निदत' य शीब्द चा व्य ख्य 'स्व क्षरा क ' अशी क आहं. ७९. अलि'नि यम चा क म ७(३)(ब) अशी पीBवाकल्पा करात कr पीत्रा, टं र्क्स, टंलि ग्र म निकवा इंतरा दBरासचा रा म ध्येम चा दवा र्णघवा र्ण य सहं इं क्टaoनि क म ध्येम द्वा रा सदशीवाहं, जी करा रा चा करा रा चा अलिभा पीरानिवात त अलि'नि यम च्या क म ७(३) च्या अर्थी मध्ये लि खि त स्वरूपी त वा द करा रा घटं त करात. आमच्या क्ष त यत कr मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ पीरातक (स ) मध्ये प्राम र्ण तरातBद आहं: "(स ) जीर्थी द[3] निकवा अलि'क पीत्रा द्वा रा पीत्राव्यवाहं रा म फत क3र्णत्या हं प्राक राचा सनिवाद निकवा करा रा क जी त[3] आलिर्ण त्या पीJकr क3र्णत्या हं एक पीत्रा वारा य3ग्य मद्रां क वा असत[3], तव्हे सनिवाद निकवा करा रा वारा य3ग्य मद्रां क वा गा आहं अस म जी ई;" ८०. अशी प्राक रा, मद्रां क अलि'नि यम द[3] निकवा अलि'क पीत्रा द्वा रा पीत्राव्यवाहं रा म फत तय रा हं3त अस ल्या सनिवादचा निकवा करा रा चा पीBवाकल्पा करात[3]. त्या तरा क3र्णत्या हं एक पीत्रा वारा य3ग्य मद्रां क असर्ण पीरास आहं. वा द करा रा पीत्रा मध्ये सम निवाe आहं आलिर्ण त्या वारा स्व क्षरा क आहं आलिर्ण म्हीर्णB, मद्रां क अलि'नि यम च्या अर्थी स रा नि ष्पा निदत क आहं य आ' रा वाराचा क यवा हं अस, तरा, त मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या चा´कटं मध्ये यई. ८१. आमच्या क्ष त आ आहं कr द[3] निवाद्वा न्या य ' शी च्या डपी ठी, गा3निवाद राबरा लि लिमटंड निवारुद्ध ईड्स डaफस कम3निडटं जी एलिशीय प्रा यव्हेटं लि लिमटंड32 मध्ये निद ल्या नि क त, वा द करा रा वारा स्व क्षरा कराण्या च्या आवाश्यकतबद्द प्राम र्ण म्हीटं आहं: “१५. उपीरा3S तरातद चा अवा 3क कल्या स अस निदसB यई कr वा द करा रा घटं त हं3ण्या स ठी, त्या वारा सवा पीक्षक रा स्व क्षरा करार्ण आवाश्यक हं. अलि'नि यम च्या क म ७(३) मध्ये अशी तरातBद आहं कr वा द चा करा रा लि खि त स्वरूपी त अस, जी एक अनि वा य आवाश्यकत आहं. क म ७(४) स गात कr जीरा सवा पीक्षक रा स्व क्षरा क दस्तोऐवाजी अस, तरा वा द करा रा लि खि त स्वरूपी त अस. पीरात क म ७(४) च्या ड (ब ) आलिर्ण (क ) चा अवा 3क कल्या स अस निदसB यई कr एक दस्तोऐवाजी ज्या वारा पीक्षक रा स्व क्षरा क स तरा हं त[3] वा द करा रा असB शीकत[3]. क म ७(४)(ब) अशी तरातBद करात कr, करा रा चा अलिभा पीरानिवार्ण ऱ्या पीत्रा, टं र्क्स, टंलि ग्र म निकवा 32 ( २०१५) १३ ४७७ एस स स दBरासचा रा च्या इंतरा म ध्येम च्या दवा र्णघवा र्ण तB वा द करा रा नि वाडB क ढ जी ऊ शीकत[3]. १६. तरातद चा वा चा कल्या वारा सरालिक्षतपीर्ण अस नि ष्कर्ष क ढ जी ऊ शीकत[3] कr, जीरा पीत्रा, टं र्क्स, टंलि ग्र म निकवा इंतरा दBरासचा रा म ध्येम च्या दवा र्णघवा र्ण द्वा रा करा रा चा अलिभा पीरानिवाण्या त आ अस तरा वा द चा करा रा जीरा लि खि त स्वरूपी त अस तरा हं पीक्षक रा त्या वारा स्व क्षरा करार्ण आवाश्यक हं. क म ७(४) (क) मध्ये अशी तरातBद आहं कr, द वा आलिर्ण बचा वा च्या निवा' च्या दवा र्णघवा र्ण मध्ये एक वा द करा रा असB शीकत[3] जीर्थी एक पीक्षक रा करा रा चा अखिस्तोत्वा ब बत आरा3पी क आहंत आलिर्ण दसर्‍ य त क रा हं त. जीरा हं प्रार्थीमदशी द वा जी ऊ शीकत कr द3न्ही पीक्षक रा चा समत आहं, तरा कवाळे एक पीक्षक रा करा रा वारा स्व क्षरा कल्या त्या करा रा च्या अतगात द नियत्वा तB मS क जी ऊ शीकत हं. सध्ये च्या ई-कoमसच्या क ळे त, इंटंरा टंद्वा रा राद, टं राद, इंटंरा टंवारा नितकrटं बनिकगा अशी प्राकरार्ण मध्ये आलिर्ण करा रा च्या म क प्राक रा मध्ये, अटं वा शीत; म न्या कल्या जी त त. अशी करा रा मध्ये, जीरा पीक्षक रा चा ओळे प्रास्था निपीत क गा अस आलिर्ण करा रा चा 3द अस तरा त[3] वा द करा रा ब त[3] तर्थी पीक्षक रा म' समत दशीनिवार्ण रा वा द क म अस. म्हीर्णB, अलि'नि यम च्या क म ७(४)(ब) निकवा ७(४)(क) निकवा क म ७(५) अतगात स्व क्षरा हं औपीचा रिराक आवाश्यकत हं.” ८२. जीव्हे क म ७ (४) (स ) चा निवाचा रा क जी त[3], तव्हे वा द करा रा म्हीर्णB जी क गादपीत्रा तय रा क जी त त द वा आलिर्ण बचा वा च्या निवा' चा दवा र्णघवा र्ण आहं, ज्या मध्ये करा रा च्या अखिस्तोत्वा चा आरा3पी एक पीक्षक रा द्वा रा क जी त[3] आलिर्ण दसऱ्या पीक्षक रा द्वा रा क रा जी त हं. म त्रा, अस 'करा रा' झा चा पी निहंजी, ज्या च्या अखिस्तोत्वा ब बतचा आरा3पी अ ड य आहं. क म ७ (१) मध्ये वा द करा रा चा व्य ख्य अशी क आहं कr ज्या अतगात, पीक्षक रा 'सवा' निकवा 'क हं वा द' स दरा करात त, जी उद्भवा आहंत निकवा उद्भवात, अस करा रा अखिस्तोत्वा त असल्या चा आरा3पी क गा पी निहंजी आलिर्ण आरा3पी क यम रा निहं पी निहंजीत. अशी करा रा चा नि लिमत अपीरिराहं य आवाश्यकत च्या सदभा त तपी स जी र्ण आवाश्यक आहं, जीस कr, करा रा कराण्या चा क्षमत आलिर्ण य3ग्य त प्रासगा वा'. ८३. आम्ही फS एवाढचा म त आहं3त कr, वा द करा रा मध्ये क म ७ (१) म' अटं चा पीBतत करार्ण आवाश्यक आहं आलिर्ण म्हीर्णB चा, त[3] एक करा रा असर्ण आवाश्यक आहं. करा रा लिशीवा य वा द कड सदलिभात करात यत हं. करा रा क यद्या चा क म १० त3ड करा रा म न्यात दत आलिर्ण करा रा अखिस्तोत्वा त असल्या लिशीवा य वाJ' वा द करा रा हं3ऊ शीकत हं, अस न्या यमBत; हृर्ष कशी राoय य चा म्हीर्णर्ण बरा3बरा अस तरा हं क्ष त घत पी निहंजी कr करा रा क यद्या चा क म १० च्या दसऱ्या भा गा त अशी तरातBद आहं निक, पीनिहंल्या भा गा त अस ल्या क3र्णत्या हं गा3e चा ज्या त इंतरा गा3e बरा3बराचा क3र्णत हं करा रा स्वरूपी त कराण्या च्या आवाश्यकतचा, क3र्णत्या हं क यद्या वारा पीरिरार्ण म हं3र्ण रा हं. वा द चा करा रा स्वरूपी त अस वा, अस आग्रहं 'रार्ण रा क यद्या चा क म ७ (३) करा रा क यद्या च्या क म १० शी ससगात आहं. ८४. आम्ही अस वा टं कr क यद्या च्या क म ७ मध्ये पीरिराभा निर्षत कल्या स रा वा द करा रा त मद्रां क क यद्या तगात मद्रां क शील्क आक रा जी ई, तव्हे मद्रां क क यद्या च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ म' तरातद अम त यत. एसएमएस टं इंस्टीटंस प्रा यव्हेटं लि लिमटंड (उपीरा3खिल्लेखि त) मध्ये मBद कल्या प्राम र्ण, जीरा वा द क म स रा वा द करा रा ब त[3] आलिर्ण दस्तो म्हीर्णजीचा अस दस्तो निकवा करा रा, ज्या मध्ये वा द क म सम निवाe आहं, त्या दस्तो वारा मद्रां क शील्क भारा हं, तव्हे त मद्रां क शील्क वासB कराण्या स पी त्रा अस तरा, क म ३३ म' तरातद तसचा मद्रां क क यद्या चा क म ३५ त्या स गाB हं3त. क यद्या च्या क म (११) अन्वय क म करार्ण रा न्या य य स त्या च्या आदशी कड द क्ष कराण्या स मभा हं. ८५. वा द करा रा, ए द्या दस्तो म' क म असB शीकत, ज्या वारा मद्रां क शील्क आक रा जी त. अशी प्राकरार्ण त क म ११ अन्वय क म करात जीरा दस्तो वारा मद्रां क शील्क भारा स निकवा अपीरा मद्रां क शील्क भारा अस तरा न्या य य मद्रां क क यद्या च्या क म ३३ वा ३५ अन्वय क रावा ई कराण्या स ब ' आहं. जीरा वा द करा रा हं स्वतत्रा करा रा अस आलिर्ण ज्या वारा मद्रां क क यद्या स रा शील्क आक रा जी त, तरा द तशी चा पीरिराखिस्थात रा हंत. एम. पीय य दृe क[3] ८६. गारावा रा (उपीरा3खिल्लेखि त) य प्राकरार्ण त न्या य य ड्युरा3 फल्गुएरा (उपीरा3खिल्लेखि त) य प्राकरार्ण च्या पीरिराच्छेद -५९ चा उल्ले क ज्या मध्ये अस आढळे कr, य प्राकरार्ण त न्या य य क म ११(६ अ) सम निवाe करू ज्या गाJराप्राक रा वारा उपी य य3जी कराण्या चा प्रायत्न क हं3त, त[3] एसब पी (उपीरा3खिल्लेखि त) आलिर्ण }शी इंन्शुरान्स (उपीरा3खिल्लेखि त) मध्ये सम निवाe कल्या प्राम र्ण हं3त य आ' रा वारा क यवा हं क. तर्थी निपी, आपीर्ण हं क्ष त घत पी निहंजी कr गारावा रा (उपीरा3खिल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद १८ मध्ये, न्या य य एसब पी (उपीरा3खिल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद १२ चा उल्ले क आहं, जी3 आमच्या आ' चा क्ष त आ आहं आलिर्ण त्या तरा, न्या य य इंतरा गा3e सहं प्राम र्ण नि र्णय निद: १९. हंतB आलिर्ण क रार्ण च्या नि वाद त निकवा निवा' आय3गा च्या अहंवा त एसएमएस टं इंस्टीटंस [एस एम एस टं इंस्टीटंस (पी ) लि. निवारुद्ध चा दम रा टं कपी (पी ) लि., (२०११) १४ एसस स ६६: (२०१२) ४ एसस स (स आयव्हे ) ७७७] य प्राकरार्ण चा उल्ले हं हं पी निहं जी ई आलिर्ण हं अनितशीय चा गाल्या क रार्ण स ठी आहं कr सवा$च्च न्या य य निकवा उच्च न्या य य क म ११ च्या अजी वारा नि र्णय दत क3र्णत्या हं प्राक रा पीक्षक रा मध्ये उद्भवार्ण ऱ्या क3र्णत्या हं प्रा र्थीलिमक प्राश्ना वारा नि र्णय घत हं. सवा$च्च न्या य य निकवा उच्च न्या य य कवाळे महंस चा राक्षर्ण कराण्या स ठी अनि वा य क यद्या त तरातद अम त आर्णत आहं, य त शीक हं. एसएमएस टं इंस्टीटंस [एसएमएस टं इंस्टीटंस (प्रा यव्हेटं) लि. निवा. चा दम रा टं कपी (पी ) लि., (२०११) १४ एसस स ६६: (२०१२) ४ एसस स (स आयव्हे ) ७७७] य प्राकरार्ण त मद्रां क क यद्या त अनि वा य तरातद चा निवाचा रा करू त्या न्या य य अलि'क ऱ्या गाB कल्या आहंत, ज्या त क म ११ अन्वय क म करार्ण रा सवा$च्च न्या य य आलिर्ण उच्च न्या य य य चा सम वाशी अस. क म ११ (६-अ) वारा ब राक ई जीरा टं कल्या स अस निदसB यई कr जीव्हे सवा$च्च न्या य य निकवा उच्च न्या य य क म ११ (४) त ११ (६) अतगात अजी वारा निवाचा रा करात आलिर्ण त्या स करा रा निकवा अलिभाहंस्तो तरार्ण करा रा मध्ये मद्रां क शील्क भारा वा द चा क म आढळेत, तव्हे मद्रां क क यद्या त तरातद द्वा रा प्रार्थीम करा रा अलिभाहंस्तो तरार्ण क यदशी रापीर्ण र्थी बवार्ण आलिर्ण करा रा पीBवा; मद्रां क शील्क आलिर्ण दड (असल्या स) भारा गा आहं कr हं हं पी हंर्ण ब' क राक आहं, म्हीर्णजीचा क रावा ई क जी ऊ शीकत. हं क्ष त ठीवार्ण महंत्वा चा आहं कr मद्रां क क यद करा रा निकवा अलिभाहंस्तो तरार्ण स सपीBर्णपीर्ण गाB हं3त[3]. त्या मळे अशी करा रा त निकवा अलिभाहंस्तो तरार्ण मध्ये अस ल्या वा द च्या क म चा, त्या स्वतत्रा अखिस्तोत्वा लिमळे य हंतB निवाभा जी करार्ण शीक्यु हं, अस यखिSवा द उत्तरावा द य क आहं. जीव्हे अ 3दर्ण क̂त करा रा निकवा अलिभाहंस्तो तरार्ण चा प्राश्ना यत[3] तव्हे 3दर्ण क यद, १९०८ आलिर्ण १९९६ च्या क यद्या च्या ससवा द वा चा वारा निवालिशीe मय निदत क रार्ण स ठी निद जी ऊ शीकर्ण रा स्वतत्रा अखिस्तोत्वा न्या यमBत; रावा द्रां, य एसएमएस टं इंस्टीटंस [एसएमएस टं इंस्टीटंस (पी ) लि लिमटंड] निवा. चा दम रा टं कपी (पी ) लि., (२०११) १४ एसस स ६६: (२०१२) ४ एसस स (स आयव्हे ) ७७७] च्या न्या यनि र्णय मध्ये मBद क आहं. तर्थी निपी, सदरा न्या यनि र्णय द्वा रा अस नि र्णय निद आहं कr, 3दर्ण अलि'नि यम, १९०८ च्या क म ४९ मध्ये अस पीरातB मद्रां क क यद्या मध्ये क3र्णत हं अशी स तरातBद, सपीBर्णपीर्ण करा रा निकवा अलिभाहंस्तो तरार्ण गाB कराण्या चा नि र्णय घण्या त आ आहं ज्या त, त्या त अस ल्या वा द च्या क म चा सम वाशी अस. त्या मळे क म ११ (६-अ) गाB कल्या एसएमएस टं इंस्टीटंस [एसएमएस टं इंस्टीटंस (प्रा यव्हेटं) लि लिमटंड] निवा. चा दम रा टं कपी (पी ) लि., (२०११) १४ एसस स ६६: (२०१२) ४ एसस स (स आयव्हे ) ७७७] म' नि क चा क3र्णत्या हं प्राक रा निवाचा रा क जी त हं निकवा त्या चा आ' रा घत जी त हं, हं स्पe आहं, जी क म ११ (६-अ) म' दरुस्तो तराहं गाB आहं. ८७. य लिशीवा य न्या य य करा रा क यद्या च्या क म २ (जी ) आलिर्ण २ (एचा) चा सदभा निदल्या तरा पीरिराच्छेद-२२ आलिर्ण अनितमतš पीरिराच्छेद-२९ मध्ये नि रा क्षर्ण 3दवा आहंत, जी आमच्या क्ष त आ आहंत. वा स्तोनिवाक, पीरिराच्छेद-३० मध्ये सवा$च्च न्या य य उच्च न्या य य चा निवानिवा' नि र्णय फटं ळेB वा, ज्या त गा´तम • डस्कप्स प्रा यव्हेटं लि लिमटंड निवारुद्ध शीJ शी एस. शी हं33 य प्राकरार्ण त मबई उच्च न्या य य च्या पीBर्ण पी ठी च्या न्या यनि र्णय चा सम वाशी हं3त ज्या त उच्च न्या य य 33 (२०१९) एस स स ऑनले इन बी"म्बे ५६३ नि र्णय निद हं3त कr क यद्या च्या क म ११ (६ए ) च्या सम वाशी तरा, क म ११ (६ए) अतगात क य करार्ण ऱ्या न्या य य स दस्तोऐवाजी वारा मद्रां क शील्क भाराल्या च्या ब ब मळे, क य कराण्या पी सB र्थी बवाण्या चा आवाश्यकत हं. ८८. य क यद्या च्या क म ११ (६ अ) अतगात अस ब राक ई निवाचा रा क आहं कr रा ea य निवाम (उपीरा3खिल्लेखि त) मध्ये स्पe कल्या प्राम र्ण एसब पी (उपीरा3खिल्लेखि त) मध्ये मBद क ल्या पीBवा;च्या शी स पीद्धत त पीरावा गा अस ल्या क्षत्रा मध्ये न्या य य चा निदशी भाB कराण्या चा निवाचा रा कराण्या त आ हं3त, य त शीक हं. हं समजीB घत पी निहंजी कr जीव्हे क यद करार्ण रा क यद्या मध्ये बद करात[3] तव्हे निवालि'मडळे क3र्णत्या गाJराप्राक रा स म3रा जी त आहं हं शी3'ण्या स ठी त[3] रा3 राचा एक शीहं र्णपीर्ण चा आलिर्ण क यद्या स रा पीBर्णपीर्ण क´तक स्पद दृनिeक[3] अस. त्या चाप्राम र्ण क यद करार्ण ऱ्या जी3 गाJराप्राक रा क आहं, त्या निवारुद्ध क य निद स आहं, य चा हं न्या य य स हंलिजीकचा चा´कशी करा. आमच्या समजीत प्राम र्ण गाJराप्राक रा म्हीर्णजी क यद्या च्या क म ५ मध्ये मBद क ल्या तत्त्वा च्या अ र्षगा न्या य य कम त कम हंस्तोक्षपी चा मय द ओ डत हं3त, अस समजी हं3य. दसऱ्या शीब्द त स गा यचा तरा आपीर्ण रा ea य निवाम कपी (उपीरा3खिल्लेखि त) य प्राकरार्ण त पीरिराच्छेद २२.२ आलिर्ण २२.३ क्ष त घत तरा अस निदसB यई कr त्या वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा शी सबलि'त प्राश्ना शी फ राकत घत. मद्रां क क यद हं त्या चा क यद करार्ण ऱ्या पी रिरात क क यद आहं. हं एक अस क यद आहं ज्या त जी वा मBल्या अतभाBत आहंत आलिर्ण म्हीर्णB त्या चा अम बजी वार्ण क पी निहंजी. क म ११ (६ अ) सम निवाe करात निवालि'मडळे, न्या य य क यद्या च्या आदशी कड क ड3ळे करू त[3] पीरा भाBत हं3ऊ द्या वा, य चा शीक्युत[3] निवाचा रा क व्हेत. आमच्या मत य त क यद्या च्या स मजीस्यांपीBर्ण राचा च्या तत्त्वा कड द क्ष करार्ण रा व्य ख्य खिस्वक रार्ण सम निवाe आहं. ८९. ग्रटं ऑफशी3अरा लि. (उपीरा3ल्लेखि त) च्या पीरिराच्छेद ५५ म' नि ष्कर्ष चा जी3पीय5त सब' आहं कr, अलि'नि यम चा क म ७ मध्ये मद्रां क वाण्या चा तरातBद सल्या मळे, मद्रां क अलि'नि यम तगात मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक असB शीकत हं, जी क यद्या त अचाBक खिस्थात असल्या बद्द आम्ही य3ग्य वा टंत हं. त्या बरा3बरा मद्रां क शील्क, इंतरा गा3e बरा3बराचा, 'त नित्राकत ' म जी वा, य मत शी आम्ही निततकचा सहंमत हं3ऊ शीकत हं. आमचा असहं मत आहं कr, निवाद्वा एक न्या य ' शी अन्यार्थी सदरा पीरिराच्छेद त घत दृनिeक3र्ण य3ग्य खिस्थात चा प्रानितनि लि'त्वा करात हं. ९०. क म ५ मध्ये नि š सशीयपीर्ण अलि'भा वा ड चा तरातBद आहं. अलि'नि यम त तरातBद क आहं त्या स अपीवा द 'रू न्या य क हंस्तोक्षपी निवारुद्ध तरातBद प्राद करात. अलि'भा वा ड, अन्यार्थी हंस्तोक्षपी कराण्या करिरात क3र्णत हं क यद अखिस्तोत्वा त असत द, तस घ3निर्षत कराण्या चा हंतB आहं. तर्थी निपी, य चा अर्थी अस व्हे कr, मद्रां क अलि'नि यम, निवाशीर्षत: क म ३३ आलिर्ण ३५ चा प्राभा वा (क य ) चा र्ण रा हं. आमचा अस स्पe मत आहं कr, क म ५ चा उद्दशी मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ चा प्राभा वा (उद्दशी) क ढB टं कर्ण हं. न्या य य, क म ११ अतगात क म ३३ आलिर्ण क म ३५ अम दर्ण य चा अर्थी अलि'नि यम च्या क म ५ च्या निवासगात त त्या वारा न्या य क हंस्तोक्षपी चा आरा3पी करात यउ शीकत हं. ९१. अशी क3र्ण चा हं ब जीB हं कr, जीरा वा द चा ड अस करा रा हं मद्रां क अलि'नि यम च्या अर्थी त स असल्या स, अलि'नि यम च्या क म ११ अन्वय न्या य य सम3रा हंजीरा क गा आलिर्ण वारा वारा पी हंत त[3] मद्रां निकत क हं अस आढळेB आ तरा, मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३३ आलिर्ण ३५ आलिर्ण इंतरा सबलि'त तरातद चा क हं हं भाBलिमक स. रातरा, ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये, य न्या य य क य दशी ( वा द चा ड अतभाBत अस करा रा) अवारुद्ध कराण्या चा नि द^शी निद. अलि'नि यम चा क म ११ (६ अ) वा द करा रा अखिस्तोत्त्वा त आहं कr हं हं न्या य य तपी सण्या चा आवाश्यकत आहं, } शी इंन्शुरा£स (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये ठीळेकपीर्ण नि द^शी स आर्ण ल्या इंतरा क्षत्रा मध्ये न्या य य भाराकटंण्या पी सB रा3 ण्या स ठी ससद स्पe गाराजी कळे आलिर्ण व्यS क हं3त. दसर्‍य शीब्द त, 'अमद्रां निकत करा रा' अखिस्तोत्त्वा त आहं य आ' रा वारा क यवा हं, त मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ अतगात नि यम चा पी कराण्या च्या त्या च्या वाJ' नि क कतव्य पी सB निवाचालि त करार्ण रा हं. ए ) न्या यलिमत्रा य आश्चय चा 'क्का निद ९२. य न्या य य क म ११ (१०) अतगात अलि'क रा वा पीरू सवा$च्च न्या य य तय रा क ल्या य3जी चा अखिस्तोत्वा द वाB निद. य3जी चा पीरिराच्छेद २ (क ) इंतरा गा3e सहं, प्राम र्ण वा चात[3]: “२. निवा त चा स दरा नि वाद - क म ११ च्या पी3टंक म (४ ) निकवा पी3टं- क म (५) निकवा पी3टं-क म (६) अतगात सरान्या य ' शी क निवा त लि खि त स्वरूपी त क जी ई आलिर्ण स3बत अस - (अ) मBळे वा द करा रा निकवा त्या चा य3ग्य प्राम लिर्णत प्रात;” ९३. त्या तरा, जीव्हे स वार्ण वारा पीडद पीडर्ण रा हं3त, तव्हे निवाद्वा न्या यलिमत्रा दृनिeक3र्ण न्या य य च्या नि दशी स आर्णB निद. त्या नि दशी स आर्णB निद कr य3जी अतगात, अजीद रा वा द च्या करा रा चा प्राम लिर्णत प्रातचा स दरा करार्ण आवाश्यक आहं. क म ११ च्या टंप्प्या वारा न्या य य क म ३३ आलिर्ण ३५ गाB करू हं प्राम लिर्णत प्रात अवारुद्ध क जी ऊ शीकत हं, हं म्हीर्णर्ण म डण्या स ठी त्या जीपीBड कसवा रा वा निवारुद्ध पी वार्थी; वा£कटं सब्बा रा वा आलिर्ण इंतरा34 आलिर्ण हंरिराओम अग्रवा (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण म' य न्या य य च्या न्या यनि र्णय चा आ' रा घत. अशी प्राक रा, त्या बहुतक प्राकरार्ण मध्ये, कवाळे प्राम लिर्णत प्रात द 34 (१९७१ ) १ ५४५ एस स स कल्या जी त असल्या आलिर्ण त्या अवारुद्ध कल्या जी ऊ शीकत सल्या मळे, आलिर्ण तरा प्राम लिर्णत प्रात च्या आ' रा वारा वा द सदभा निदल्या प्राम र्ण, वा द, मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ अन्वय क यदय स रा आवाश्यक क म कराण्या स ठी सक्षम आहं, हं न्या य य हं पीJ B क्ष त ठीवाB शीकत. अस यखिSवा द म डB त्या अपी कत्या च्या यखिSवा द त जी3रा क ढB घण्या चा प्रायत्न क. त्या वारा, श्री गागा सघ हं नि दशी स आर्णत कr प्राम लिर्णत प्रात मध्येहं, मद्रां क शील्क भाराण्या चा तथ्यां प्रानिवाe करार्ण आवाश्यक आहं. सदरा दृनिeक3र्ण रा तरा य न्या य य चा क्ष एसएमएस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये वा'B घत. ९४. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या उद्दशी करा त ए द्या स चा प्रात मद्रां क अलि'नि यम तगात स म्हीर्णB म जी ऊ शीकत हं, अस यखिSवा द कराण्या स ठी जीपीBड कसवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त) य चा सदभा दण्या त आ आहं. क म ३३ अन्वय प्रात अवारुद्ध क जी ऊ शीकत हं, अस नि द^शी स आर्णB निद. म्हीर्णB, क म ३३, ज्या मध्ये अमद्रां निकत स स अवारुद्ध करार्ण अनि वा य आहं, त य य3जी अतगात स दरा कराण्या स पीरावा गा अस ल्या प्राम लिर्णत प्रात गाB निहंर्ण रा हं. जीपीBड कसवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त ) य प्राकरार्ण त पीरिराच्छेद-१३ आलिर्ण १४ वारा भारावास ठीवाण्या त आ आहं: “"१३. क म ३५ चा पीनिहं भा गा क3र्णत हं स जी3पीय5त त[3] यर्थी3लिचातरा त्या मद्रां निकत क जी त हं त[3] पीरा वा म्हीर्णB घण्या स स्पeपीर्ण र्थी बवात. त्या चा दसरा भा गा जी3 स वारा क यवा हं कराण्या शी सबलि'त आहं त[3] स हंलिजीकचा अशी स चा क3र्णत हं दय्यम पीरा वा स्व क रार्ण रा हं, क रार्ण मBळे स हं आक रार्ण य3ग्य असत मद्रां निकत क हं निकवा अपीरा मद्रां निकत क तव्हे अशी पीरा व्य पीरावा गा दर्ण म्हीर्णजी पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा क यद्या निकवा अलि'क रा अस ल्या व्यS क ल्या दस्तोऐवाजी वारा क यवा हं कराण्या स रा हं3ई. पीरातक (अ) तव्हे चा गाB हं3त जीव्हे मBळे स प्रात्याक्ष त न्या य य सम3रा असत[3] आलिर्ण दस्तोऐवाजी वारा अवा बB रा हू इंखिच्छेर्ण ऱ्या य पीक्षक रा कडB दड सहं मद्रां क त तBटं भारा जी त. स्पeपीर्ण दय्यम पीरा वा एकतरा अमद्रां निकत दस्तोऐवाजी च्या मजीकरा च्या त3ड पीरा व्य द्वा रा निकवा भा रात य पीरा वा अलि'नि यमच्या क म ६३ द्वा रा सम निवाe क ल्या त्या च्या प्रात द्वा रा पीरातक च्या अटं पीBर्ण करार्ण रा हं ज्या त प्रा लि'करार्ण स व्यनितरिराS पीरा व्य त क हं हं प्रा प्ती कराण्या चा आदशी दण्या त आ आहं. क म २५ ए द्या स च्या क3र्णत्या हं प्रात शी सबलि'त हं आलिर्ण पीक्षक रा कवाळे क म ३५ च्या हंतBस ठी अस ल्या दस्तोऐवाजी वारा अवा बB रा हंण्या चा पीरावा गा निद जी ऊ शीकत. क म २ (१४) मध्ये "स " चा व्य ख्य अशी क आहं कr,”स " य मध्ये, ज्या ज्या दस्तोऐवाजी द्वा रा क3र्णत हं अलि'क रा निकवा द नियत्वा नि म र्ण कराण्या त, हंस्तो तरिरात कराण्या त, मय निदत कराण्या त, वा ढवाण्या त, e कराण्या त निकवा अलिभालि खि त कराण्या त आ अस निकवा तस कल्या चा निदसत अस, अश्य प्रात्याक दस्तोऐवाजी चा सम वाशी आहं. मद्रां क अलि'नि यम च्या उद्दशी दस्तोऐवाजी चा प्रात स म्हीर्णB सम निवाe कराण्या स वा वा हं. १४. जीरा क म ३५ कवाळे मBळे स शी सबलि'त अस आलिर्ण प्रात शी सबलि'त स तरा क म ३६ चा अस अर्थी वात यर्ण रा हं कr ए द्या स चा दय्यम पीरा व्य त्या चा फ यद हं3ऊ शीक. क म ३६ म' "स " य शीब्द चा अर्थी क म ३५ म' शीब्द स रा चा अस वा. टंल्या च्या निकवा क रावा ईच्या सरुवा त च्या टंप्प्या त आक्षपी घत मBळे स पीरा व्य नि शी ग्र ह्या 'राण्या त आल्या च्या प्राकरार्ण मध्ये निवालि'मडळे क म ३५ च्या कडक तरातद पी सB कडकपी चा '3रार्ण स3डत. दसऱ्या शीब्द त, आक्षपी दस्तोऐवाजी वारा लिचाटंकवा ल्या मद्रां क च्या अपीरापीर्ण वारा आ' रिरात अस तरा, ज्या पीक्षक रा दस्तोऐवाजी च्या स्व क रा वारा आक्षपी घण्या चा अलि'क रा आहं त्या दस्तोऐवाजी प्रार्थीम स दरा करात तस करार्ण आवाश्यक आहं. क गाद3पीत्रा पीरा वा स्व क̂त कराण्या ब बत आक्षपी घण्या चा वाळे नि घB गाल्या तरा तराच्या टंप्प्या त त्या चा क रार्ण वारा आ' रा त आक्षपी घत यर्ण रा हं. पीरात य मळे क3र्णत्या हं प्राक रा द क ल्या दय्यम पीरा व्य क म ३६ गाB हं3त हं निकवा जी3 दस्तोऐवाजी अमद्रां निकत निकवा अपीरा मद्रां निकत क जी त[3] त्या दस्तोऐवाजी च्या मजीकरा च्या पीरा व्य त जी3डण्या चा प्रायत्न क जी त[3]." (जी3रा निद आहं) ९५. जीपीBड कसवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण त, अपी कत्या भा डपीट्ट्या चा दस्तो ऐवाजी, जी3 अपीरा मद्रां निकत क हं3त त[3] लिसद्ध कराण्या स ठी त्या त त3ड पीरा व्य वारा भारावास ठीवा. भा डकरा रा लिसद्ध कराण्या स ठी त3ड पीरा व्य वारा क̂त करात यर्ण रा हं, अस उच्च न्या य य नि र्णय निद. भा डपीट्टी दण्या च्या करा रा चा दय्यम पीरा वा मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ वा ३६ अन्वय प्रानितबलि'त आहं क ? हं मख्य प्राश्ना उपीखिस्थात झा. मद्रां क अलि'नि यम तगात मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक अस ल्या पीरा व्य म' क गादपीत्रा च्या ग्र ह्यातचा निवाचा रा क जी त हं, अस पीरा वा अलि'नि यम च्या अभ्या स तरा न्या य य नि ष्कर्ष क ढ त्या तरा न्या य य न्या यनि र्णय च्या पीरिराच्छेद-१३ आलिर्ण १४ मध्ये क य क आहं, य वारा मत व्यS क. य अलि'नि यम च्या क म ३५ हं त ळेत न्या य य इंतरा गा3e बरा3बरा अस मत व्यS क आहं कr, 'मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ चा दसरा भा गा जी3 स वारा क यवा हं कराण्या शी सबलि'त आहं, त[3] स हंलिजीकचा अशी स चा क3र्णत हं दय्यम पीरा वा स्व क रार्ण रा हं, क रार्ण मBळे स हं आक रार्ण य3ग्य असत मद्रां निकत क हं निकवा अपीरा मद्रां निकत क तव्हे अशी पीरा व्य पीरावा गा दर्ण म्हीर्णजी पीरा वा प्रा प्ती कराण्या चा क यद्या निकवा अलि'क रा अस ल्या व्यS क ल्या दस्तोऐवाजी वारा क यवा हं कराण्या स रा हं3ई. पीरातक (अ) तव्हे चा गाB हं3त जीव्हे मBळे स प्रात्याक्ष त न्या य य सम3रा असत[3] आलिर्ण दस्तोऐवाजी वारा अवा बB रा हू इंखिच्छेर्ण ऱ्या पीक्षक रा कडB दड सहं मद्रां क त तBटं भारा जी त. त्या तरा 'मद्रां क अलि'नि यम च्या उद्दशी दस्तोऐवाजी चा प्रात स म्हीर्णB सम निवाe कराण्या स वा वा हं ', अस नि रा क्षर्ण न्या य य 3दवा. मद्रां क क यद्या चा क म ३६ जी ए द्या पीक्षक रा अमद्रां निकत निकवा अपीऱ्या मद्रां निकत क ल्या दस्तोऐवाजी पीरा व्य नि शी स्व क राण्या स आक्षपी घत हं, त्या तरा आक्षपी घण्या स म ई करात, त दय्यम पीरा व्य गाB हं3त हं, असहं न्या य य पीरिराच्छेद-१४ मध्ये मBद क. ९६. हंरिराओम अग्रवा (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त त निवाद्वा न्या यमBतßचा डपी ठी उच्च न्या य य च्या आक्षनिपीत आदशी चा हं त ळेर्ण करा त हं3त, ज्या द्वा रा मBळे करा रा चा छ य प्रात अवारुद्ध क जी ऊ शीकत हं निकवा त दय्यम पीरा वा म्हीर्णB स्व क रा जी ऊ शीकत हं, अस नि र्णय निद हं3त. जीपीBड कसवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त) य चा अ सरार्ण कल्या तरा न्या य य प्राम र्ण नि क निद: "१०. य न्या य य च्या नि र्णय वारू आलिर्ण अलि'नि यम च्या क म ३३, ३५ वा २(१४) च्या स ध्ये वा चा वारू हं स्पe हं3त कr, जी3 स रिरातसरापीर्ण मद्रां निकत क स त[3] अवारुद्ध क जी ऊ शीकत[3] आलिर्ण अशी स स ठी आवाश्यक शील्क आलिर्ण दड भाराल्या तरा मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ अन्वय त[3] पीरा व्य मध्ये घत यत[3]. क म ३३ निकवा ३५ हं स च्या क3र्णत्या हं प्रात शी निकवा पीक्षक रा शी कवाळे क म २(१४) च्या अर्थी अतगात एक स अस ल्या दस्तोऐवाजी वारा अवा बB रा हंण्या चा पीरावा गा दत. मद्रां क अलि'नि यम च्या उद्दशी करिरात दस्तोऐवाजी चा प्रात सम निवाe कराण्या स वा वा हं. स चा प्रात अवारुद्ध करू निवालि'ग्र ह्या क जी ऊ शीकत हं आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम १८९९ अन्वय त[3] दय्यम पीरा वा म्हीर्णB द करू घत जी ऊ शीकत हं, य ब बतचा क यद प्रास्था निपीत आहं य त शीक हं. (य वारा भारा निद आहं ) ९७. यखिSवा द अस निदसत[3] कr य य3जी त वा द करा रा चा प्राम लिर्णत प्रात दण्या चा तरातBद आहं आलिर्ण जीरा वा द करा रा सनिवादचा एक भा गा अस, जी3 एकतरा मद्रां निकत क अस निकवा अपीरा मद्रां निकत क अस आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ अन्वय त[3] अवारुद्ध क जी ऊ शीकत हं, म्हीर्णB त[3] निवालि'ग्र हंय क जी ऊ शीकत हं. वा द चा करा रा अखिस्तोत्वा त आहं क, य कड न्या य य क्ष द्या वा गा. ९८. य य3जी अतगात अजीद रा मBळे निकवा प्राम लिर्णत प्रात स दरा करू शीकत[3], य त शीक हं. प्राम लिर्णत प्रात म्हीर्णजी क य? प्राम लिर्णत प्रात भा रात य पीरा वा क यद, १८७२ च्या क म ७६ च्या प्राक शी त समजीB घ्या वा गात (य पीढ र्थी3डक्यु त 'पीरा वा क यद ' म्हीर्णB सब3' आहं). त्या त प्राम र्ण वा चा वा: ७६ - स वाजीनि क दस्तोऐवाजी च्या प्राम लिर्णत प्रात - ज्या चा नि रा क्षर्ण कराण्या चा क3र्णत्या हं व्यS हंक्का आहं अस स वाजीनि क दस्तोऐवाजी ज्या च्या त ब्या त अस अस प्रात्याक 3क अलि'क रा, ए द्या व्यS म गार्ण क असत त्या व्यS, नित ज्या स ठी द्या वाय चा क यदशी रा फr निदल्या वारा अशी दस्तोऐवाजी चा एक प्रात दई वा तसचा त्या प्रात च्या तळे शी, अशी दस्तोऐवाजी चा निकवा, प्राकरार्णपीरात्वा, त्या च्या भा गा चा त रा प्रात आहं अस प्राम र्णपीत्रा लि हू दई वा अशी प्राम र्णपीत्रा वारा अस अलि'क रा निद क घ B आपील्या वा नि शी वा आपील्या पीद म नि शी स्व क्षरा करा आलिर्ण जीव्हे जीव्हे अस अलि'क रा म3हं3राचा वा पीरा कराण्या स निवालि'तš प्रा लि'क̂त अस तव्हे, त[3] दस्तोऐवाजी त[3] मद्रां निकत करा वा अशी प्राम लिर्णत क ल्या प्रात ‘प्राम लिर्णत प्रात ’ अस म्हीटं जी ई. स्पe करार्ण - आपील्या पीद य क म च्या सवास म न्या क्रम स रा ज्या क3र्णत्या हं अलि'क ऱ्या अशी प्रात दण्या चा अलि'क रा अस त्या च्या कड अशी दस्तोऐवाजी चा त ब असल्या चा य क म च्या अर्थी स रा म जी ई. ९९. हं आपील्या आवाश्यक रा त पीरा वा क यद्या च्या क म ७४ कड घऊ जी ई, जी 'स वाजीनि क दस्तोऐवाजी' म्हीर्णजी क य य चा व्य ख्य करात. क म ७४ प्राम र्ण वा चा वा: ७४ - स वाजीनि क दस्तोऐवाजी - पीढ दस्तोऐवाजी स वाजीनि क दस्तोऐवाजी आहंत: - (१) अलि'नि यम, निकवा अलि'नि यम चा अलिभा असर्ण रा दस्तोऐवाजी - (i) स वाभा´म अलि'सत्तच्या, (ii) शी सकrय नि क य च्या वा न्या य लि'करार्ण च्या वा १००. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ स रा ए द दस्तोऐवाजी वारा रा तसरा मद्रां क वाल्या लिशीवा य त्या चा 3दर्ण कराण्या स प्रानितब' आहं, हं ब ब आमच्या आ' चा क्ष त आ आहं. १०१. पीरा वा अलि'नि यम, मद्रां क अलि'नि यम आलिर्ण 3दर्ण अलि'नि यम क यद य चा पीरास्परासब' प्राम र्ण समजीB घ्या वा गा: भा रात त नि ष्पा निदत क ल्या आलिर्ण ज्या वारा मद्रां क वार्ण ब' क राक आहं, अशी दस्तोऐवाजी च्या ब बत त, त[3] दस्तोऐवाजी कराण्या पीBवा; निकवा करातवाळे¥ मद्रां क वार्ण आवाश्यक असत. दस्तोऐवाजी वारा मद्रां क वाल्या तरा त[3] 3दर्ण स ठी स दरा करात यऊ शीकत[3]. 3दर्ण अलि'नि यम च्या क म १७ मध्ये अनि वा यपीर्ण 3दर्ण य3ग्य अस ल्या क गादपीत्रा चा तरातBद आहं. क म १८ स रा सबलि'त व्यS च्या मजी; स रा इंतरा क गादपीत्रा चा 3दर्ण कराण्या चा पीरावा गा आहं. ज्या दस्तोऐवाजी चा 3दर्ण क जी त, त्या त अशी 3दर्ण कराण्या पीBवा; त्या वारा य3ग्य मद्रां क वार्ण आवाश्यक असत. मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३५ चा प्राभा वा क्ष त घत, हं पीरिरार्ण म अटंळे आहं. निकबहु ज्या दस्तोऐवाजी वारा य3ग्य मद्रां क वा हं आलिर्ण जी3 3दर्ण प्रा लि'करार्ण सम3रा स दरा क जी त[3], त[3] मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ अन्वय अवारुद्ध करू ठीवाण्या स पी त्रा अस. पीरा वा अलि'नि यम च्या क म ७६ सहं क म ७४ मध्ये प्राम लिर्णत प्रात दण्या चा तरातBद आहं. प्राम लिर्णत प्रात कवाळे स वाजीनि क क गादपीत्रा च्या सदभा त जी रा कल्या जी ऊ शीकत त. पीरा वा अलि'नि यम च्या क म ६२ मध्ये, इंतरा गा3e बरा3बराचा अव्व पीरा वा य चा अर्थी न्या य य च्या नि रा क्षर्ण र्थी हंजीरा कराण्या त आ द्द त[3] दस्तोऐवाजी अस आहं. पीरा वा अलि'नि यम च्या क म ६३ मध्ये 'दय्यम पीरा वा ' य मध्ये इंतरा गा3e बरा3बराचा 'य पीढ अतभाBत अस ल्या उपीब' निद ल्या प्राम लिर्णत प्रात ' अशी व्य ख्य कराण्या त आ आहं. क म ६३ मध्ये मBद क ल्या 'य पीढ अतभाBत अस ल्या ' तरातद, क म ७४ सहं क म ७६ म्हीर्णB समजीB घ्या य हंव्य त. 'क3र्णत्या हं रा ज्या त ठीवा ल्या जीगा दस्तोऐवाजी च्या स वाजीनि क अलिभा ' चा प्राम लिर्णत प्रात दत यऊ शीकत, य त क हं हं शीक हं. त्या मळे द[3] जीगा पीक्ष म' निवाक्रr करा रा चा जीरा 3दर्ण कराण्या त आ तरा, मBळे दस्तोऐवाजी स दरा कराण्या ऐवाजी, निवाक्रr करा रा चा प्राम लिर्णत प्रात दय्यम पीरा वा म्हीर्णB पी त्रा ठीरू शीकत आलिर्ण पीरा वा अलि'नि यम च्या क म ७६ अन्वय प्राम लिर्णत प्रात म गावाB जी रा करात यऊ शीकत. क म ७४ म' 'क3र्णत्या हं रा ज्या त ठीवा ल्या जीगा दस्तोऐवाजी चा स वाजीनि क अलिभा ' हं शीब्दप्राय3गा 3दर्ण अलि'नि यम तगात 3दर्ण कराण्या त यर्ण ऱ्या दस्तोऐवाजी पीरात मय निदत हं. ए द जीगा दस्तोऐवाजी, जी3 स वाजीनि क अलिभा म्हीर्णB ठीवाण्या त आ आहं, त[3] स वाजीनि क दस्तोऐवाजी म्हीर्णB पी त्रा ठीरू शीकत[3]. महंत्त्वा चा म्हीर्णजी, हं क्ष त ठीवार्ण आवाश्यक आहं कr, मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ स रा ज्या दस्तोऐवाजी वारा य3ग्य मद्रां क वा हं, त[3] क3र्णत्या हं स वाजीनि क क य य त स दरा कल्या स अवारुद्ध करू ठीवाण्या स आलिर्ण मद्रां क अलि'नि यम त तरातद स रा क रावा ई कराण्या स पी त्रा ठीरा. आपीर्ण अस प्राकरार्ण गाˆहं त 'रू, जीर्थी वा द चा क म सम निवाe अस करा रा 3दर्ण कराण्या त आ आहं. आमच्या क्ष त आल्या प्राम र्ण, ज्या करा रा मध्ये वा द चा क म सम निवाe आहं, त[3] जीरा मद्रां क शील्क आक रार्ण स पी त्रा अस तरा, त्या दस्तोऐवाजी वारा य3ग्य मद्रां क वाल्या लिशीवा य 3दर्ण करात यऊ शीकत हं. हं ब ब क्ष त घऊ एसएमएस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये य न्या य य अस नि र्णय निद कr, 'जी स दरा कराण्या त आ आहं, त जीरा वा द क म सम निवाe अस ल्या करा रा चा / सनिवादचा / स चा प्राम लिर्णत प्रात अस, तरा मBळे दस्तोऐवाजी वारा मद्रां क शील्क भाराण्या त आ आहं हं उघड करा वा'. हं पीन्ही य क रार्ण स्तोवा आहं कr, प्राम लिर्णत प्रात हं दस्तोऐवाजी चा सत्या प्रात आहं. जी3 अलि'क रा दस्तोऐवाजी प्राम लिर्णत करात[3], त[3] स वाजीनि क दस्तोऐवाजी चा त ब अस व्यS असर्ण आवाश्यक आहं. 3दर्ण क̂त दस्तोऐवाजी च्या ब बत त जीगा दस्तोऐवाजी च्या स वाजीनि क अलिभा च्या प्राकरार्ण त स वाजीनि क दस्तोऐवाजी मध्ये 3दर्ण पीBवा; मद्रां निकत क ल्या दस्तोऐवाजी चा सम वाशी असर्ण आवाश्यक आहं. सरान्या य ' शी तय रा क ल्या य3जी त मBळे प्रात स दरा कराण्या च्या भा रा तB पीक्षक रा मS कराण्या स ठी रा तसरा प्राम लिर्णत प्रात स दरा कराण्या चा पीरावा गा दण्या त आ आहं, पीरात ज्या त मद्रां क शील्क भाराण्या चा वास्तोखिस्थात य3ग्यरा त्या उघड हं3त, कवाळे त चा प्राम लिर्णत प्रात स दरा कराण्या चा त्या त य3जी आहं. य य3जी चा पीरिराच्छेद-५ द क्ष त घर्ण य3ग्य ठीरा. त[3] प्राम र्ण आहं: "५. अलि'क म निहंत म गावार्ण. - सरान्या य ' शी निकवा पीरिराच्छेद ३ अन्वय त्या म व्यS निकवा सस्था, य य3जी अतगात निवा त करार्ण ऱ्या पीक्षक रा कडB अलि'क म निहंत निकवा स्पe करार्ण म गाB शीकत.” १०२. म्हीर्णB, अलि'नि यम च्या क म ११ अन्वय अजी वारा नि र्णय दर्ण रा न्या य ' शी म निहंत निकवा स्पe करार्ण म गाण्या च्या अलि'क रा पी सB जीर्णB वालिचात आहंत अस हं, जीर्णकरू दय मद्रां क शील्क चा भारार्ण कराण्या त आ आहं, य एसएमएस टं इंस्टीटंसç (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये मBद क ल्या आवाश्यकत चा प्राम लिर्णत प्रात पीBतत करात, य बद्द त्रा करात यई. १०३. दय्यम पीरा वा स्व क राण्या शी सबलि'त पीरा वा अलि'नि यम चा य3जी आम्ही आ' चा सBलिचात क आहं. आम्ही असहं आढळे आहं कr, य य3जी मध्ये अलि'क क हं हं सB, दय्यम पीरा व्य चा एक प्राक रा, म्हीर्णजीचा वा द करा रा चा प्राम लिर्णत प्रात, स दरा कराण्या चा य3जी आहं. जीरा द3न्ही पीक्षक रा म' वा द करा रा हं पीरा वा अलि'नि यम च्या क म ७४ (क) अतगात, 3दर्ण क̂त दस्तोऐवाजी म्हीर्णB वागाळेत, स वाजीनि क अलिभा आहं य आ' रा स वाजीनि क दस्तोऐवाजी ब आलिर्ण त्या आ' रा त[3] क3र्णत्या हं स वाजीनि क क य य त स दरा कराण्या त आ आलिर्ण त[3] जीगा दस्तोऐवाजी चा स वाजीनि क अलिभा ब, तरा मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ म' तरातद वा इंतरा सबलि'त तरातद च्या अ र्षगा, अस दस्तोऐवाजी, जीरा त्या वारा क यदय स रा मB तš मद्रां निकत क स तरा, पी š अवारुद्ध करू ठीवाण्या त यई. दसऱ्या शीब्द त स गा यचा तरा, अलि'नि यम च्या क म ११ अन्वय क ल्या निवा त सहं जीरा प्राम लिर्णत प्रात हं दस्तोऐवाजी म्हीर्णB म ण्या स ठी स दरा क, ज्या वारा क म ११ अन्वय अजी निटंक B रा हू जी ऊ शीकत[3], तरा, त्या त मBळे दस्तोऐवाजी सदभा त भारा मद्रां क जी हं रा कराण्या चा अटं पी ळेर्ण आवाश्यक आहं. १०४. ए दय दस्तोऐवाजी चा प्रात स दरा कल्या स त प्रात अवारुद्ध करू ठीवा जी ऊ शीकत हं क रार्ण, अवारुद्ध करार्ण ब' क राक असर्ण रा क म ३३ कवाळे अशी मBळे दस्तोऐवाजी च्या सदभा त गाB हं3त, जी3 फS मद्रां क अलि'नि यम च्या क म २ (१४) अन्वय दस्तोऐवाजी म जी त. जीपीड कशीवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त) आलिर्ण हंरिराओम अग्रवा (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण त नि क चा सदभा आपीर्ण समजीB घत पी निहंजी कr, ए द पीक्षक रा, ए दय दस्तोऐवाजी चा प्रात स दरा करू आलिर्ण त अवारुद्ध करू घऊ आलिर्ण शील्क वा दड भारू त[3] दस्तोऐवाजी 'वाJ'' करू शीकत हं. निकबहु, जीपीड कशीवा रा वा (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण त पीरिराच्छेद - १३ मध्ये नि रा क्षर्ण 3दनिवाल्या प्राम र्ण, अपीBर्ण मद्रां क वा ल्या ए दय दस्तोऐवाजी च्या प्रात वारा क यवा हं कराण्या स ठी न्या य य ब[3] वा जी ऊ शीकत हं. त्या मळे अशी प्रात क म ३३ अन्वय अवारुद्ध करू ठीवात यऊ शीकत स, तरा त्या वारा क म ३५ अन्वयसद्ध क यवा हं करात यऊ शीकत हं. ओ. मद्रां क अलि'नि यम चा क म ३३ वा ३५; न्या य य कr वा द क यवा हं करा यचा ? १०५. मद्रां क शील्क भाराण्या सदभा त मद्द वा द कड स3पीनिवाण्या च्या चा तय ब बत ब रामध्ये बरा चा चाचा झा. एकrकड, उत्तरावा द च्या निवाद्वा वानिक च्या पी निठीब्या निवाद्वा न्या यलिमत्रा अस समर्थी करात कr, अलि'नि यम चा उद्दशी आलिर्ण निवाशीर्षत: अलि'नि यम च्या क म ५ चा निवाचा रा करू, न्या य य हंस्तोक्षपी स प्रानितब' कराण्या च्या तरातद चा अपीवा द वागाळेत, मद्रां क शील्क भारार्ण आलिर्ण भारा वाय चा राक्काम य सब' चा प्राश्ना हं त ळेण्या स वा द सक्षम आहं. महंस चा निहंत जीपी जी त, य न्या य य च्या दृe महंत्वा च्या अस ल्या ब ब चा, वा द च्या क यवा हं गात दण्या च्या सवा 5त म3ठ्या गाराजीशी उत्तम प्राक रा समत[3] स ' जी त[3] आलिर्ण म्हीर्णB वा द य प्राकरार्ण त क्ष घ आलिर्ण महंस चा निहंत '3क्यु त यर्ण रा हं य चा त्रा करा य चा सनि लिश्चत करू त्या त सवा$त्तम ससBत्रात यत. दसरा कड, अपी कत आलिर्ण हंस्तोक्षपीकत अस नि दशी स आर्णत कr, मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ म' क यद्या च्या आदशी कड न्या य य द क्ष करू शीकत हं आलिर्ण य न्या य य वारा 'त;वारा अवा ब ल्या दृनिeक[3] मळे कवाळे क यद टं ळेण्या स प्रा3त्सा हं लिमळे, य उ टं जीरा न्या य य मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या आदशी चा पी क आलिर्ण गारावा रा (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त मBद क ल्या गा3e चा पी क, क यद्या चा पी तरा हं3ई चा, पीर्ण जीव्हे प्राकरार्ण वा द पीय5त पी3हं3चा तव्हे हं मद्द सपीe त आ अस. अशी दृनिeक[3] मळे मद्रां क अलि'नि यम च्या कक्षत यर्ण ऱ्या व्यS हं प्रा3त्सा हं लिमळे. १०६. अपी कत्या च्या यखिSवा द त आम्ही तथ्यां आढळेत. क यद्या अ सरू क म कराण्या व्यनितरिराS, न्या य य जीव्हे मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ चा पी करात, जीर्थी त गाB हं3त, तव्हे आमच्या मत, न्या य य च्या दक्ष नि रा क्षर्ण, मगा त उच्च न्या य य अस[3] निकवा सवा$च्च न्या य य, जीर्थी मद्रां क शील्क भाराण्या त आ हं, त्या प्राकरार्ण मद्रां क शील्क शी सबलि'त मद्या चा सवा$त्तम नि रा करार्ण क जी त. १०७. प्राम र्ण प्राश्ना उद्भवा: i. वा द क म सम निवाe अस ल्या दस्तोऐवाजी वारा क3र्णतहं मद्रां क शील्क असB शीकत हं. आम्ही अस आ' चा आढळे आहं कr, निवाद्वा न्या यलिमत्रा स दरा कल्या प्राम र्ण प्रात्याक्ष वा द करा रा वारासद्ध मद्रां क वार्ण आवाश्यक असB शीक. पीर्ण त्या तरा वा द करा रा च्या वा द क म मध्ये सम निवाe अस ल्या मद्रां क शील्क चा राक्काम, हं अत्यात कम असल्या मळे, त आक रार्ण स पी त्रा अस य आ' रा न्या य य पीढ जी ऊ शीकत, क रार्ण अस करा रा मद्रां निकत क जी ण्या चा अनितशीय कम शीक्युत असत. त्या मळे जीर्थी वा द क म सम निवाe अस ल्या करा रा वारा रा तसरा मद्रां क वाण्या त आ हं, तर्थी मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ वा ३५ अन्वय क यवा हं करार्ण हं न्या य य चा कतव्य आहं, हं न्या य य निवाचा रा त घर्ण आवाश्यक आहं. ii. क म ११ अतगात घण्या त आ ल्या पी रा वा 3क च्या स्वरूपी निवार्षय, ज्या मळे क म ११ (६ अ) अतभाBत कराण्या त आ, य न्या य य व्यS क मत सम निवाe असर्ण रा पी ¡भाBम आम्ही आ' चा दशीनिवा आहं. अलि'नि यम च्या क म ११ (६) अन्वय लिमळे ल्या अलि'क रा चा वा पीरा करू अनितराकr पी रा वा 3क करार्ण ऱ्या न्या य य च्या वात ब बत ससदचा हंतB स्पe हं3त. अनितराकr न्या य य पी रा वा 3क कम कराण्या स ठी हं कराण्या त आ, जी य अलि'नि यम च्या क म ५ म' तत्त्वा अ सरू सद्ध हं3त कr, ससद हंस्तोक्षपी करू दरुस्तो क आलिर्ण क म ११ (६ अ) अतभाBत कराण्या त आ. एसएमएस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये य न्या य य व्यS क ल्या दृनिeक[3] चा ससद कल्पा हं3त, त[3] म्हीर्णजी, जीरा वा द करा रा वारा रा तसरा मद्रां क वाण्या त आ हं, तरा त[3] अवारुद्ध करू ठीवार्ण आलिर्ण त्या त तरातद स रा हं त ळेर्ण आवाश्यक हं3त. मद्रां क अलि'नि यम त आदशी हं, क म ११ (६अ) म' क यदनिवार्षयक आदशी शी, म्हीर्णजी वा द करा रा अखिस्तोत्वा त आहं कr हं हं तपी सB पी हंण्या च्या, निवारुद्ध व्हेत. निकबहु, वा द करा रा सम निवाe अस करा रा, जी3 रा तसरा मद्रां निकत कराण्या त आ हं, त[3] क यद्या अखिस्तोत्वा त असल्या चा म्हीर्णत यऊ शीक, य आ' रा क यवा हं क तरा हं, मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ वा ३५ म' आदशी चा पी कराण्या चा क म ११ अन्वय न्या य य वारा टं कण्या त आ कतव्य राद्द हं3र्ण रा हं. दसऱ्या शीब्द त स गा यचा तरा, वारा दृनिeक[3] स रा, क म ११ (६ अ) अन्वय निद ल्या आदशी चा पी करात, मद्रां क अलि'नि यम त निततक्यु चा ब' क राक आदशी चा त्या चावाळे¥ पी कराण्या चा न्या य य चा कतव्य कम हं3ऊ शीकत हं. iii. पीढ अस प्राश्ना उपीखिस्थात हं3त[3] कr, क म ११ अन्वय न्या य य अस अलि'क रा क्ष त घत, वा द करा रा चा अखिस्तोत्वा प्रार्थीमदशी चा शी3'ण्या मळे, न्या य य दस्तोऐवाजी अवारुद्ध करू ठीवाण्या चा मद्द वा द कड सदलिभात कराण्या स आलिर्ण वा द चा नि यS कराण्या स सक्षम हं3ई क ? iv. मद्रां क अलि'नि यम च्या अ उल्लेघ य वाJ' नि क आदशी शी ससगात अस ल्या क म ११ अन्वय क म कराण्या च्या वाJ' नि क कतव्य त न्या य य क3र्णत्या हं प्राक राचा टं ळे टं ळे करार्ण आम्ही स असमर्थी य वा टंत. आपील्या सराळे कतव्य चा अशी प्राक रा त्या गा कराण्या चा निवाचा रा क यद करार्ण ऱ्या क ल्या हं निकवा त समर्थी य सद्ध हं, क रार्ण त्या मळे क म ११ (६ अ) चा उल्लेघ हं3ई. v. अलि'नि यमच्या च्या क म ११ अतगात टं अलि'क वाळे घत आलिर्ण वा द च्या समय3लिचात प्रागात मध्ये अडर्थीळे आर्णत आलिर्ण वा द त्या स अलि'क य3ग्य पीद्धत हं त ळे वा म्हीर्णB प्राकरार्ण पीढ ढक वा गा हं दृनिeक[3] आमच्या म पीटंत हं. मद्रां क अलि'नि यम चा प्रा र्थीलिमक उद्दशी महंसB गा3ळे कराण्या चा असत, आलिर्ण त्या चा उद्दशी पीक्ष क रा चा 'त नित्राक मद्द ' म डण्या स ठी म्हीर्णB शीस्त्र दण्या चा स तरा, निवालि'मडळे चा असनिदग्ध शीब्द त व्यS क आवा जीकड न्या य य द क्ष कराण्या स ठी समर्थी करार्ण, दरुपी स्तो आहं. आम्ही आढळे आहं कr, एसएमएस टं इंस्टीटं (उपीरा3ल्लेखि त) प्राकरार्ण त मध्ये व्यS क ल्या निवाचा रा चा, क म ११ (६ अ) सम निवाe करू हं, पी रुच्च रा क जी त आहं, ज्या मळे मद्रां क अलि'नि यम च्या उद्दशी प्रा3त्सा हं लिमळे आलिर्ण तरा हं क म ११ (६ अ) च्या आदशी शी ससगात ठीरा. तर्थी निपी, आम्ही जी स वा'निगारा स निगात आहं त्या स ठी पी त्रा असB अस स गात आहं3त. अशी प्राकरार्ण असB शीकत त, ज्या त मद्रां क शील्क प्राद क निदसत हं. ज्या स रा मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ आलिर्ण ३५ अतगात (मद्रां क) असनिदग्धपीर्ण कतव्य पी रा पी डण्या स ठी म गा स भा करात.. तर्थी निपी, अशी प्राकरार्ण असB शीकत त, ज्या त मद्रां निकत क अस, पीरात त यर्थी3लिचातरिरात्या मद्रां निकत क सल्या चा हंराकत पीक्षक रा कडB घत जी त. अशी प्राकरार्ण मध्ये, बहु', क म ३३(२) अतगात कतव्य च्या सदभा त प्राकरार्ण चा चा´कशी हं स म न्यातš न्या य य चा कतव्य आहं. जीरा अपीरा मद्रां निकत असल्या चा द वा करात असल्या स, वारा वारा पी हंत चा त[3] द वा सपीBर्णपीर्ण आ' रानिहं असल्या चा आढल्या स, तरा न्या य य वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा च्या आ' रा वारा सदरा प्राकरार्ण सदलिभात करू शीकत आलिर्ण त्या तरा, अन्यार्थी, आवाश्यक ठीराल्या स वा द स क म ३३ अ' अलि'क रा चा उपीय3गा कराण्या स मभा दई. हं दृनिeक[3] अलि'नि यमच्या क म ११ (६ अ) च्या आदशी कड द क्ष करात मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३३ (२) म' 'तपी सर्ण ' य शीब्द न्या य दत आहं. अलि'नि यमच्या क म ११ (६ अ) अतगात ' वा द करा रा' अखिस्तोत्त्वा त आहं कr हं हं प्रार्थीमदशी तपी सण्या च्या कतव्य त गा3'ळेB जी ऊ य, पीरात त मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ (२) अतगात प्राकरार्ण 'तपी सर्ण कराण्या च्या कतव्य शी सबलि'त आहं.. vi. पीरा वा अलि' यम तगात, पीरा व्य द्वा रा कवाळे मBळे दस्तोऐवाजी स दरा कराण्या स पीरावा गा आहं ( क म ६२ पीहं ). तर्थी निपी, क म ६३ अन्वय दय्यम पीरा वा अ ज्ञाय आहं आलिर्ण प्राम लिर्णत प्रात दय्यम पीरा वा म ल्या जी त त. य3जी £तगात, क म ११ अतगात क यवा हं मध्ये, पीरा वा अलि'नि यमत प्रानिक्रयचा पी करात, प्राम लिर्णत प्रात च्या स्वरूपी त दय्यम पीरा वा स दरा कराण्या चा पीरावा गा आहं. हं रा असB शीकत कr प्राम लिर्णत प्रात क म ११ अतगात अजी ठीवाण्या चा पीरावा गा आहं आलिर्ण, क यद्या स रा, प्राम लिर्णत प्रात अवारुद्ध करू ठीवार्ण शीक्यु हं, क रार्ण त एक निवा हं, मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३३ च्या दृनिeक[3] तB प्राकरार्ण तपी सण्या चा न्या य य चा कतव्य, तस अखिस्तोत्वा त हं. तर्थी निपी, प्राम लिर्णत प्रात क य असत हं आम्ही स्पe क आहं, आलिर्ण एसएमएस टं इंस्टीट्स (उपीरा3ल्लेखि त) च्या दृe, भारा मद्रां क शील्क प्राम लिर्णत प्रात मध्ये सBलिचात क जी र्ण आवाश्यक आहं आलिर्ण य3ग्य प्राकरार्ण त, य3जी च्या पीरिराच्छेद-5 अतगात न्या य य म निहंत म गावाण्या चा अलि'क रा आहंत. प्राम लिर्णत प्रात स दरा कल्‍य च्‍य प्राकरार्ण मध्‍ य, प्राम लिर्णत प्रात स दरा कल्‍य क यद्या त आवाश्‍यकत पीBर्ण हं3त असल्‍ य चा सम ' असर्ण, हं न्या य य चा कतव्य ब त. आ' चा म्हीर्णB क्ष त आ कr, मद्रां क शील्क भाराल्या चा द वात स प्राम लिर्णत प्रात क म ३३ अन्वय अडकवाB ठीवा जी ऊ शीकत हं, पीरात त्या वारा मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३५ अन्वय क रावा ई करात यत हं.

P. वा द करा रा, एक वागाळे करा रा आलिर्ण त्या चा प्राभा वा? i. शीवाटंचा प्राश्ना, जी3 उरात[3] त[3] म्हीर्णजी, जीरा, जीरा करा रा, ज्या मध्ये, वा द चा क म खिस्थात अस, त[3] अमद्रां निकत अस, पीरात वा द चा ड मद्रां निकत अस, तरा न्या य य य वास्तोखिस्थात कड द क्ष करू शीकत कr करा रा मध्ये अस दस्तोऐवाजी हं अमद्रां निकत आहं. प्रार्थीमतš, अशी घटं उद्भवाB शीकत हं. य क रार्ण स्तोवा चाकrचा स दरा करार्ण निकवा फसवार्णBक झा ल्या लिशीवा य, करा रा स दरा कल्या वारा, इंतरा तरातद सहं मद्रां क अलि'नि यम च्या क म ३३ अन्वय त्या वारा कस क रावा ई क जी र्ण रा हं, हं अ क य आहं. ii. निवाद्वा न्या यलिमत्रा, रा तरा, वा द चा करा रा हंम म3ठ्या करा रा मध्ये एक ड म्हीर्णB सम निवाe असत[3] हं नि रापीवा दपीर्ण नि दशी स आर्णत. करा रा मध्ये वा द करा रा अस ल्या दस्तोऐवाजी चा सम वाशी अस. हं आम्ही य प्राश्ना वारा आर्णत कr वा द करा रा हं एक वागाळे करा रा म जी ऊ शीकत[3] क ?, आलिर्ण मख्य करा रा मद्रां निकत क स तरा हं, कवाळे वा द करा रा मद्रां निकत क अस तरा त पीरास आहं. iii. ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये मध्ये, रातरा, न्या य य मख्य करा रा अवारुद्ध कराण्या चा क यवा हं क जी3 क य दशी हं3त. वा द करा रा चा लिसद्ध त हं एक वागाळे आलिर्ण स्वतत्रा करा रा असल्या, त[3] सस्था निपीत आहं. क3पीटं जी - क3पीटं जी चा लिसद्ध त अलि'नि यमच्या क म १६ मध्ये सम निवाe क आहं. क म १६, नि š सशीयपीर्ण, वा द च्या करा रा आलिर्ण त्या च्या अखिस्तोत्वा च्या वाJ'तशी सबलि'त आक्षपी सहं वा द न्या य लि'करार्ण त्या च्या अलि'क राक्षत्रा वारा शी स करू शीकत, हं तत्त्वा स्पe करात आलिर्ण त्या उद्दशी, करा रा चा भा गा असर्ण रा वा द क म, करा रा च्या इंतरा अटं पी सB स्वतत्रा करा रा म्हीर्णB म जी वा. त्या चाप्राम र्ण, क म १६ (१ )( ) घ3निर्षत करात कr न्या य ' करार्ण करा रा राद्दब त असल्या चा आढळेB आ तरा हं, त वा द चा ड अग्र ह्या 'ठीरावार्ण रा हं. तत्त्वा चा उत्क्रां त वा द करा रा हं करा रा पीक्ष एक स्वतत्रा आलिर्ण लिभान्ना करा रा आहं, हं सBलिचात करा कr न्या य य च्या कतव्य च्या सदभा त, मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या अर्थी स रा, त्या च्या शी अ रूपीत क य कराण्या स ठी त्या त क3र्णत हं भाBलिमक हं. करा रा त वा द च्या ड चा स मथ्यां'पी जीत क जी त जीर्णकरू करा रा चा जीब बद रा सपीe त आर्णर्ण निकवा पी करार्ण निकवा कलिर्थीत क मनिगारा मळे, पीक्षकरा त्या चा अलि'क रा आलिर्ण निवावा द वारा अलिभानि र्णय कराण्या च्या वा द च्या अलि'क रा पी सB वालिचात ठीवाB य, जी, अन्यार्थी वा द ड च्या कक्षत यत त. वा द करा रा स्वतत्रा करा रा म ण्या म गा मB भाBत तत्त्वा म्हीर्णजी एक यत्रार्ण तय रा करार्ण, जी करा रा निटंकवाB ठीवात, जीर्णकरू वा द च्या करा रा मध्ये यर्ण रा निवावा द स3डवा जी त त. अशी प्राक रा, मख्य करा रा राद्द कल्या वा द च्या ड चा अत हं3र्ण रा हं. आम्ही सहंमत आहं3त कr वा द सज्ञा एक सपी लि¡क सज्ञा असB शीकत [पीहं हंम निवा. ड निवान्स लि लिमटंड35 ]. वा द करा रा, ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) य प्राकरार्ण मध्ये मध्ये अस आढळेB यत कr, 'अखिस्तोत्वा त आहं आलिर्ण त्या वारा क रावा ई क जी ऊ शीकत, मख्य स्वतत्रा करा रा वाJ' आहं कr हं य चा पीवा करात ' [ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) चा पीरिराच्छेद-४.१० पीहं ]. हं रा असB शीकत कr, स म न्यातš, मख्य करा रा चा अवाJ'त वा द च्या ड वारा पीरिरार्ण म करात हं [ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त)चा पीरिराच्छेद-४.१२ पीहं ]. तर्थी निपी, मख्य करा रा मध्ये एक ड म्हीर्णB सम निवाe अस वा द करा रा हं एक स्वतत्रा करा रा आहं आलिर्ण त[3] स्वतत्रापीर्ण अखिस्तोत्वा त असB शीकत[3] य आ' रा वारा पीढ जी र्ण, 35 (१९४२) ए स ३५६ ए एले मद्रां क अलि'नि यमच्या क म ३३ आलिर्ण ३५ च्या सदभा त अशी प्राक राच्या यखिSवा द म गा चाकrचा यखिSवा द प्राम र्ण लिसद्ध क जी ऊ शीकत: निवाद्वा न्या यलिमत्रा ए. ए. ग्लो3ब (उपीरा3ल्लेखि त) मध्ये अस उद्याS क कr न्या य य वा द करा रा मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक हं, हं शी3'ण्या त चाBक क. तस असल्या स, वा द च्या ड, वा द करा रा असल्या, त[3] मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक आहं. वा द ड अतभाBत अस करा रा, वा द करा रा च्या सदभा त फS द नियत्वा चा सम वाशी कराण्या स ठी मद्रां निकत क जी ई आलिर्ण आलिर्ण जीव्हे त मद्रां निकत करार्ण आवाश्यक अस तव्हे मख्य करा रा अमद्रां निकत स3ड जी ई, हं कल्पा कराण्या स रा आहं क ? अस दृनिeक[3] स्व क रार्ण रा हं, तरा न्या य य अस अर्थीउक स्व क रार्ण भा गा पी डत कr वा वा गा जी3 पीक्ष करा मद्रां क अलि'नि यमच्या आदशी चा उल्लेघ कराण्या स स्पeपीर्ण प्रा3त्सा निहंत करा. आम्‍हं म्हीर्णB भा त वा टंत कr, जीर्थी वा द ड आलिर्ण मख्य करा रा द3न्ही मद्रां क शील्क वासB कराण्या य3ग्य आहंत, त्या प्राकरार्ण त वा द करा रा हं एक वागाळे करा रा आहं य आ' रा वारा पीढ जी ण्‍य चा हं उपीय3गा हं3र्ण रा हं. १०८. एसएमएस टं इंस्टीट्स (सप्रा ) मध्ये आढळेल्या प्राम र्ण, ए द्या दस्तोऐवाजी जी3 मद्रां निकत क हं निकवा अपीरा मद्रां निकत क आहं त[3] क3र्णत्या हं उद्दशी स ठी वा पीरा ण्या स प्रानितब' आहं हं क्ष त घऊ, ज्या वारा क3र्णत्या हं क रार्ण स ठी लिशीक्का म रा हं निकवा अपीरा स्टी•पी क हं ( 3दर्ण क यद्या च्या क म 49 च्या निवापीरा त, जी पीरावा गा दत सपी लि¡क व्यवाहं रा लिसद्ध कराण्या स ठी वा पीरा जी र्ण रा एक 3दर्ण क दस्तोऐवाजी), एक निवा मद्रांर्ण स ', ज्या मध्ये वा द चा एक भा गा आहं, वा पीराण्या चा पीरावा गा निद जी ऊ शीकत हं, क रार्ण त सपी लि¡क व्यवाहं रा स्था निपीत कराण्या स ठी इंन्स्ट्रñम£टंचा वा पीरा कराण्या स अ मत दई. मध्येस्था करा रा हं एक सपी लि¡क सज्ञा आहं आलिर्ण मख्य करा रा पीक्ष वागाळे अखिस्तोत्वा असB शीकत य आ' रा वारा हं पीढ चा B आहं. क्यु. नि ष्कर्ष १०९. एसएमएस टं इंस्टीटं (सप्रा ) मध्ये गारावा रा (सप्रा ) आलिर्ण 'मरात्न करा रा य बहं दBरा अक$टं रा यर्णस्व म मदलि य रा चात्राम आलिर्ण इंतरा 'म द य सस्था निवारुद्ध भा स्करा रा जीB आलिर्ण ब्रदस आलिर्ण इंतरा36 य च्या डपी ठी अ स्टी•म्पे क ल्या करा रा चा पीरिरार्ण म म्हीर्णB घत दृश्य मध्येस्था करा रा आलिर्ण न्या य य द्वा रा उचा ल्या जी र्ण र्‍य पी वा अस, आम्ही आ' यर्थी स्पe कल्या प्राम र्ण क यद्या त य3ग्य खिस्थात चा प्रानितनि लि'त्वा करात[3]. NN ग्लो3ब (सप्रा ) चा चाकrचा नि र्णय घण्या त आ, जीव्हे त्या य च्या 36 (२०२०) ४ ६१२ एस स स निवारुद्ध भाBलिमक घत आलिर्ण एसएमएस टं इंस्टीट्स (सप्रा ) आलिर्ण गारावा रा (सप्रा ) राद्द क. ११०. स्टी}म्पे ड्युटं स ठी य3ग्य अस ल्या इंन्स्ट्रñम£टंमध्ये वा द चा क म असB शीकत आलिर्ण ज्या वारा लिशीक्का म रा हं, त[3] करा रा आहं अस म्हीर्णत यर्ण रा हं, जी क म २ (एचा) (२०२०) ४ एस स स च्या अर्थी स रा क यद्या स रा गाB आहं. करा रा क यद ६१२ आलिर्ण क म २ (जी ) अतगात गाB कराण्या य3ग्य हं करा रा क यद. स्टी}म्पे स स ', जीव्हे त्या वारा लिशीक्का म रार्ण आवाश्यक असत, त[3] करा रा सल्या मळे आलिर्ण क यद्या त गाB कराण्या य3ग्य सल्या मळे, क यद्या त अखिस्तोत्वा त असB शीकत हं. म्हीर्णB, आम्ही गारावा रा (सप्रा ) च्या पीरिराच्छेद-२२ आलिर्ण २९ म न्यात दत[3]. य मय दपीय5त, गारावा रा (सप्रा ) च्या पीरिराच्छेद-२२ आलिर्ण २९ म' तक मजीBरा कल्या प्राम र्ण आम्ही निवाद्या डa3लि य (सप्रा ) द म न्यात दत[3]. १११. क यद्या त क म ११ (६ ए) घ ण्या म गाचा रा हंतB, क म ११ अतगात क य करार्ण ऱ्या न्या य य वा द करा रा च्या अखिस्तोत्वा चा तपी सर्ण आलिर्ण त्रा कराण्या स ठी मय निदत करार्ण हं हं3त. ११२. हं य3जी न्या य य, क यद्या च्या क म ११ अतगात, मBळे करा रा च्या आ' रा वारा निकवा प्राम लिर्णत प्रात च्या आ' रा क य कराण्या स पीरावा गा दत. प्राम लिर्णत प्रात, तर्थी निपी, एसएमएस टं इंस्टीटं (सप्रा ) मध्ये भारा ल्या मद्रां क शील्क चा स्पeपीर्ण उल्ले करार्ण आवाश्यक आहं. तस कल्या स, न्या य य अशी प्राम लिर्णत प्रात वारा क रावा ई करू य. ११३. जीरा इंन्स्ट्रñम£टंचा मBळे तय रा क अस आलिर्ण त्या वारा मद्रां क वा अस, तरा क म ११ स रा क य करात अस न्या य य, आ' स्पe कल्या प्राम र्ण मद्रां क क यद्या च्या क म ३३ स रा क रावा ई कराण्या स ब ' आहं. अस कल्या वारा, इंतरा तरातद, ज्या, मद्रां क क यद्या च्या क म ४२ (२) अतगात प्राम र्णपीत्रा मध्ये शील्क आलिर्ण दड भाराण्या च्या ब बत त, गाB हं3त, हं स गाण्या चा गाराजी हं. अस टंप्पा नि म र्ण झा ल्या वारा न्या य य क यद्या स रा अजी वारा प्रानिक्रय कराण्या स म3कळे अस. ११४. क यद्या च्या क म ७ च्या अर्थी म' मध्येस्था करा रा, जी3 मद्रां क शील्क आकनिर्षत करात[3] आलिर्ण ज्या वारा लिशीक्का म रा हं निकवा अपीरा स्टी}म्पे क हं, त्या वारा मद्रां क क यद्या च्या क म ३५ स रा क रावा ई क जी ऊ शीकत हं, जी3पीय5त जीप्ती आलिर्ण दयक चा पी क जी त हं. आवाश्यक शील्क, आवाश्यक प्राम र्णपीत्रा मद्रां क क यद्या च्या क म ४२ अतगात प्राद क जी त. ११५. आम्ही पीढ अस म त[3] कr क म ३३ आलिर्ण मद्रां क क यद्या च्या क म ३५ म' ब राम' तरातद, मद्रां क क यद्या च्या अ सBचा सहं वा चा ल्या क म ३ अतगात मद्रां क शील्क आक राण्या य3ग्य स ' गाB, अशी स ' मध्ये सम निवाe अस ल्या वा द करा रा चा प्रानितपी द करात. स्टी}म्पे क यद्या तगात इंन्स्ट्रñम£टं प्राम लिर्णत कल्या लिशीवा य क यद्या त अखिस्तोत्वा त हं. ११६. निद ल्या प्राकरार्ण त, क3टं य3जी च्या पीरिराच्छेद-५ अतगात, मद्रां क शील्क ब बतहं पीक्ष कडB म निहंत घण्या चा अलि'क रा आहं. ११७. आम्ही स्पe करात[3] कr आम्ही क यद्या च्या क म ९ च्या सदभा त य प्राकरार्ण वारा उच्च रा हं. घटं पी ठी च्या सदभा स रा उत्तरा निद जी ई. ११८. श्री गा´राब ब} जी;, निवाद्वा ज्याष्ठ वाकr ज्या य न्या य य लिमत्रा म्हीर्णB समर्थीपीर्ण सहं य्य क आहं त्या क ल्या प्रायत्न बद्द आम्ही आमच्या म पी सB क´तक करात आहं3त. ……………………………………… जी. [क एम जी3सफ] ……………………………………… जी. [अनि रुद्ध ब3स] वा निदल्ले; निद क: २५ एनिप्रा २०२३ -x-x-x-x-x-x-x-x प्रकाशनयोग भारताचा सरर् ्ाया्याययात ददिराणी पीी्याय ्ायदधकारकेत ददिराणी पीी्याय ्रांक 2020 चा 3802-3803 एर/एस. एन. एन. ग्लोबल ्याय रचरल टाईार्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि..यादचकाकतार (यादचकाकतर) दररुद्ध रेससर इंडलिो युदनक फेर द्यायदरटाईेडलि आदण इतर...उत्तररादिी ्ायदनणरय ्ायरू्यता. रस्तोगी, पनु्रदणका पनु्रांक दरषय. ीृष ्.

III. भारतीय रुदांक कायदिा, 1899 पंतगरत आरशकता- भारतीय रुदांक कायदिा, 1899 चा तरतुदिींररी्याय चचार (पध्याय 4-क्यायर 33-48, पदधक दरशेषतःि क्यायर 33,35,36,38,40,42) 20-31

IV. भारताती्याय ्यायरादिाची ऐदतिादसक ीाररभू्यरी 31-37 v. ्यायरादि आदण सरेटाई कायदिा, 1996 चे क्यायर 11 (6 ए) सरादरि करणारागी्याय िेतू्य 37-41

1. िे प्रकरण ्यायरादिाचा कराराचा कायाररध्ये ीू्यरर-संदिभर टाईप्ारर ्ाया्याययांचा िस्तकेीाचा वायी आदण प्रभारकेतदकतीत पसारे यासंबल ंधीचा रोया प्रश्नाशी संबल ंदधत आिे.

2. रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध रेससर इंडलिो युदनक फेर द्यायदरटाईेडलि आदण इतर (1 (2021) 4 एससीसी 379) या प्रकरणाती्याय या ्ाया्याययाचा तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने दरद्या दोद्यायया आदण इतर दररुद्ध दिुगार टाई्ेदडलिंग कॉीररेशन (2(2021)2 एससीसी 1) या प्रकरणाती्याय या ्ाया्याययाचा सरान तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने ीररिे दि 146 आदण ीररिे दि 147.[1] रध्ये व् क े ्यायेला दिकोनाचा पचू्यकतेरर शंका घेत्यायी आिे आदण िे प्रकरण या ्ाया्याययाचा घटाईनाीीठानादारे पदधक ृ तीणे दनका्यायी काढणासाठानी संदिदभरत क े ्याये आिे..

3. घटाईनाीीठानाने पदधक ृ तीणे तोडलिगा काढणासाठानी क े ्याये्याया संदिभर ख्या्यायी्यायप्रराणे आिेःि "रुदांक कायदिा, 1899 चा क्यायर 35 रध्ये सरादरि पस्याये्याया रैधादनक रोध, कायदिाचा क्यायर 3 नुसार ीररदशिासदित राचता रुदांकशुल आकारणायोग सं्यायेख्याना ्यायागू्य पस्याये्याया रुदणशुल कायद्याचा क्यायर 35 रधी्याय रैधादनक रोध पशा सं्यायेख्यात ्यायरादि कराराची रुदांकशुल ्यायागू्य करारे तास परैध ठानरदर्याया जातो जेवा सतंत सं्यायेख्यारर रुदांक भरणे प्र्यायंदबल त पसे्याय?" (भर दिेणात आ्याया आिे )

4. आरचा दरचारासाठानी ददि्यायेला संदिभारचे पदधक चांग्याये रू्यलराीन करणासाठानी ीाररभू्यरी दरषयक तथे दिेणे आरशक आिे.

5. एस. एर. एस. टाईी एसेटाई्स प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध चांदिरारी टाईी क ं ीनी प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (3(2011)14 एस. सी. सी. 66) या प्रकरणात, या ्ाया्याययाचे दिोन ्ायाधीशांचे ख्यंडलिीीठान 2015 दिुरुस्ती ीू्यरर या रुदारर दरचार करत िोते की नोंदिणीक ृ त नस्यायेला आदण रुदांदकत नस्यायेला भाडलिेीटाती्याय ्यायरादि करार, ज्यासाठानी नोंदिणी कायदिा, 1908 पंतगरत पदनरायर नोंदिणी आरशक आिे (याीुढे या्याया "कायदिा 1908" म्हणू्यन संबल ोध्याये जात आिे), रैध आदण पंर्यायबल जारणीयोग िोता का. यारर ख्या्यायी्यायप्रराणे ्ायदनणरय घेणात आ्याया. "19. रुदांक कायद्याचा क्यायर 35 चा दरचार करता, जोीयरल त सं्यायेख्यचा संदिभारत दिेय पस्याये्याया रुदांकशुल दिंडलि भर्याया जात नािी, तोीयरल त ्ाया्यायय ता दिस्तऐरजारर क ृ ती करू शकत नािी, परारत ते ्यायरादिाचा करारारर दिेख्यी्याय क ृ ती करू शकत नािी जो दिस्तऐरजाचा भाग आिे. रुदांक कायद्याचे क्यायर 35 िे नोंदिणी नस्यायेला दिस्तऐरजाचा संदिभारत नोंदिणी कायद्याचा क्यायर 49 ीेका स्पि आदण रेगळे आिे. रुदांक कायद्याचा क्यायर 35 रध्ये नोंदिणी कायद्याचा क्यायर 49 सारख्यी तरतू्यदि नािी जी संीादररक वरिार सरादीत करणासाठानी सं्यायेख्य म्हणू्यन राीरणास सकर करते.

21. म्हणू्यन, जेवा ्यायरादिाचा करारा्याया दररोध करणासाठानी सरेटाई करार दक ं रा इतर कोणतािी दिस्तऐरजारर भर ददि्याया जातो, तेवा ता रतीने आकेी घेत्याया आिे की नािी, दिस्तऐरजारर योगररता रुदांदकत क े ्याये आिे की नािी याचा ्ाया्याययाने सुरुराती्याया दरचार क े ्याया ीादिजे. जर तारर योग प्रकारे रुदांदकत झा्याये नािी पसा दनष्कषर ्ाया्याययाने काढ्याया तर दनघा्याया तर ते जय क े ्याये ीादिजे आदण रुदांक कायद्याचा क्यायर 38 रध्ये दनददिरि क े ्यायेला ीद्धतीने िाताळ्याये ीादिजे. ्ाया्यायय पशा दिस्तऐरजारर दक ं रा ताती्याय ्यायरादि रधी्याय क्यायरारर काररार करू शकत नािी. ीरंतु जर तुटाईीची रिर आदण शास्ती रुदांक कायद्याचा क्यायर 35 दक ं रा क्यायर 40 रध्ये नरू्यदि क े ्यायेला ीद्धतीने भर्याया गे्याया पसे्याय तर दिस्तऐरजारर काररार क े ्यायी जाऊ शकते दक ं रा ीुरारा म्हणू्यन सीकार्याये जाऊ शकते."

6. नैना ठानिर दररुद्ध पनीू्यणार दबल िसर (4(2013)14 एससीसी 354) या प्रकरणात ररी्याय दनणरयाचे ीा्यायन करणात आ्याये, ज्यारध्ये तो ख्या्यायी्यायप्रराणे घेणात आ्यायाःि "7. रुदांक शुल पदधदनयर 1899 रध्ये पंतभू्यरत पनुषंदगक बल ाबल ी, ज्या सं्यायेख्यनारर ीुरेसे रुदांक शुल भर्याये्याये नािी रग पशा सं्यायेख्यनात ीककार पस्यायेला व्ींची रुदांक शुल भरणाची इिा पसो रा नसो,भर्यायाच ीादिजे, रात नोंदिणी पदनरायर पस्यायेला ीण नोंदिणी न झा्यायेला दिस्तऐरजा ्यायरादि ख्यंडलि सरादरि आिे जसे की या ्ाया्याययानेजी एस. एर. एस. टाईी एसेटाई्स (ीी) द्यायदरटाईेडलि प्रकरणात सारांदशत क े ्याये आिे ्यायरादि आदण रध्यसरी पदधदनयराचा क्यायर 8 पंतगरत ख्या्यायी्याय कायररािीत पजरदिार ज्या तुटाईीचा रुदांक आदण शास्ती भरणासाठानी इिु क नािीत र तयार नािी ्यायागू्य िोणार नािी ्यायरादि कराराशी संबल ंदधत तू्यटाई रुदांक शुलाशी संबल ंदधत दिोष दिू्य र िोरीयरल त ख्यटाई्याया पदनदशत काळासाठानी तिक ू्य बल करणे िे ्ाया्याययाचे कतरव नािी. तानुसार, आरचे पसे रत आिे की, कायद्याचा क्यायर 8 पन्वये क े ्याये्याया पजर फ े टाईाळणात संीरीका ्ाया्याययाचा आदिेशात कोणतािी दिोष आढळू्य शकत नािी कारण भर ददि्याये्याया दिस्ताऐरज पनोंदिणीक ृ त आदण करी रुदांक भर्याये्याया िोता."

7. ्यायरादि आदण सरेटाई कायदिा, 1996 रध्ये दिुरुस्ती करणात आ्यायी (तानंतर या्याया '1996 चा कायदिा, ' पसे संबल ोध्याये गे्याये) आदण 2016 रध्ये क्यायर 11 (6 ए) सरादरि करणात आ्याये.

8. गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध कोस्याय ररीन कन्क् पँडलि इंदजदनपररंग द्यायदरटाईेडलि, (5(2019)9 एससीसी 209) रधी्याय दिोन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने संबल ंदधत भारतीय रुदांक कायदिा, 1899 (याीुढे 'कायदिा, 1899' म्हणू्यन संदिदभरत) पंतगरत पदनरायरीणे रुदांदकत करणे आरशक पस्यायेला कराराती्याय ्यायरादि ख्यंडलि, ज्यारर योग प्रकारे रुदांकभर्याये्याया नािी, 1996 तो कायदिा, चा क्यायर 11 रध्ये ख्यंडलि (6 ए) सरादरि क े लानंतरिी पर्यायात आणता येर्याय का या रुदारर चचार क े ्यायी. ख्यंडलिीीठानाने एस. एर. एस. टाईी एसेटाई्स प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रधी्याय दनणरयाचा तकारचे आदण सरररना्याया उच्यायू्यन धरू न दनणरय क े ्याये पसे म्हणटाई्याये: "19. क्यायर 11 (6-प) कडलिे बल ारकारने ीादिलास पसे ददिसू्यन येर्याय की जेवा सरर् ्ाया्यायय दक ं रा उ् ्ाया्यायय क्यायर 11 (4) ते 11 (6) पंतगरत पजाररर दरचार करते आदण करार दक ं रा िस्तांतर ्यायरादि ख्यंडलि आढळतो ज्यारर रुदांक भर्याये्याया नािी, तेवा रुदांक कायद्याचा तरतुदिींनुसार प्ररर करार दक ं रा िस्तांतरण पररुद्ध करणाचा आदण कराराीू्यरा रुदांक शुल आदण दिंडलि (पसलास) भर्याया जारा िे ीािणाचा आदिेश ददि्याया जार्याय िे ीािारे. िे ्यायकात ठाने रणे रि्ाचे आिे की रुदांक कायदिा करारा्याया दक ं रा संीू्यणर िस्तांतरा्याया ्यायागू्य िोतो.तारुळे, पशा करारात दक ं रा िस्तांतरणात सरादरि पस्यायेला ्यायरादि ख्यंडलिा्याया रेगळे करणे शक नािी, जेणेकरू न ता्याया प्रदतरादिीने युस्रादि क े लाप्रराणे सतंत पसस्त् दरळू्य शक े ्याय.नोंदिणी कायदिा, 1908 आदण 1996 चा कायद्याचा सुसंरादिी राचनारर, कािी रयारददित िेतू्यंसाठानी ददि्याये जाऊ शकणारे सतंत पसस्त् एस. एर. एस. टाईी इसेटाईरध्ये, नोंदिणी नस्यायेला कराराचा दक ं रा िस्तांतराचा दरचार करता ्ायरू्यता ररींदन यांनी नरू्यदि क े ्याये आिे. तरादी, नोंदिणी कायदिा, 1908 चा क्यायर 49 रध्ये सरादरि पस्याये्यायी कोणतीिी तरतू्यदि नस्याये्याया रुदांक कायदिा, या दनणरयादारे करारा्याया दक ं रा संीू्यणर िस्तांतरास ्यायागू्य िोर्याय, ज्यारध्ये तात सरादरि पस्यायेला ्यायरादि ख्यंडलिाचा सरारेश पसे्याय.तारुळे िे स्पि आिे की, क्यायर 11 (6-प) ्यायागू्य करणे, कोणतािी प्रकारे, एस. एर. एस. टाईी इसेटाईरधी्याय दनणरयाचा पदधक चांग्याया नािी दक ं रा संबल ंदधत नािी आदण क्यायर 11 (6-प) चा दिुरुस्तीनंतरिी ्यायागू्य आिे.

22. जेवा रध्यसरी क्यायर "संदरदिेत" सरादरि पसते, तेवा करार कायद्याने पंर्यायात आणणायोग पसे्याय तरच ती संदरदिेरधी्याय िोतो िे रिताचे पसते. आीण ीादि्याये आिे की रुदांक कायद्यांतगरत एख्यादिा संदरदिा कसा िोत नािी, म्हणजे तारर योगररता रुदांदकत क े लादशराय तो कायद्याने पंर्यायबल जारणी करणायोग नसतो. 1996 चा कायद्याचा क्यायर 7 (2) आदण संदरदिा पदधदनयर क्यायर 2 (एच) सि राचलारर क्यायर 11 (6-ए) चे सरळ राचन दिेख्यी्याय, िे स्पि करते की कराराती्याय ्यायरादि ख्यंडलि तो कायद्यादारे पंर्यायबल जारणी करणायोग नसे्याय तर पसस्त्ात येणार नािी ".

9. दरद्या दोद्यायया आदण इतरांचा (उीरो् ) ख्यटाईलाती्याय तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि ( उीरो्) रधी्याय दनणरयाचा उलेख्य क े ्याया िोता, ज्यात पसे म्हटाई्याये िोतेःि "146. आता आीण या प्रश्नाचे ीरीकण करू न ीुढे जातो, की क्यायर 11 रधी्याय 'पसस्त्' िा शब क े रळ करार दनदररतीचा (्यायरादि करार आिे की नािी) संदिभर दिेतो आदण पंर्यायबल जारणीचा (रैधता) प्रश्न रगळतो आदण म्हणू्यन नंतरचा संदिभर टाईप्ारर ्ाया्याययाचा पदधकारकेताबल ािेर पसतो. ्ायशात आदण रजक ू्य ररादि यारर ्यायरादि कराराचे पसस्त् आदण ्यायरादि कराराची रैधता यात फरक करणे शक आिे.पशी वाख्या "पसस्त्" या शबाचा साध्या परारचे सरररन करू शकते. तरादी, जर करार पंर्यायात आणणाजोगा नसे्याय आदण बल ंधनकारक नसे्याय तर ताचे पसस्त् नािी पसे रानणे, ्ायशाताचा दिीने आदण संदिभररादिानुसार दततक े च शक आिे. ्यायरादि कराराचे पसस्त्ासाठानी एक रैध संदरदिा पसस्त्ात पसणे आरशक आिे ज्यादारे ीककारांना ्यायरादिाकडलिे सोीरू्यन ्ाया्याययादारे पंर्यायात आण्याया जार्याय. दरधी आदण साध्या परारचे दररेचन िे प्रासंदगक ीाररभू्यरीचा दररुद्ध पसे्याय आदण ीररणारी पदप्रय ीररणार िोती्याय. "पसस्त्" चा राजरी आदण ्ाय दररेचनासाठानी संदिभर, उदेश आदण बल ंधनकारक आदण पंर्यायबल जारणी करणायोग ्यायरादि करारासाठानी ्यायागू्य िोणारे संबल ंदधत कायदिेशीर संक े त सरजू्यन घेणे आरशक आिे. जोीयरल त ीकांना पटाईींचे ीा्यायन करणास आदण तांचे ीा्यायन करणास आदण तांना बल ांधी्याय रािणास भाग ीाडलि्याये जात नािी तोीयरल त ्यायेख्यी ीुरारा पस्यायेला करारा्याया कािी परर नािी. पंर्यायबल जारणी न करता येणाजोगा दिस्तऐरजाचा आधारे ीक ख्यटाई्याया दिाख्य्याय करू शकत नािी आदण पदधकारांचा दिारा करू शकत नािी. पशा प्रकारे, ्यायरादिाचा करार रैध आदण कायदिेशीर पसे्याय तेवाच पसस्त्ात पसतो पसे रानणाची चांग्यायी कारणे आिेत. शू्य् आदण पंर्यायात आणता न येणारी सिरती म्हणजे कािीिी न करणाचा करार िोय. ्यायरादि कराराचे पसस्त् म्हणजे ्यायरादि करार जो ्यायरादि कायदिा आदण संदरदिा पदधदनयर या दिोन्हींचा रैधादनक गरजा ीू्यणर करतो आदण जेवा तो कायद्याने पंर्यायात आणणाजोगा पसतो.

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147. दरस्तार आदण कारणरीरांसा ीुढी्यायप्रराणे: 147.[1] गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलिरध्ये, या ्ाया्याययाने ्यायरादि ख्यंडलिासि पंतदनरदित संदरदिेत रुदांक शुलाचा प्रश्नाचे ीरीकण क े ्याये िोते आदण या संदिभारत ्यायरादि कायद्याचा क्यायर 7 (2) चा ीदिला आदण दिुसयया भागात फरक क े ्याया िोता, जरी ्यायरादि कराराचे 'पसस्त्' आदण 'रैधता' या संदिभारत रर नरू्यदि क े ्याये्यायी दनरीकणे प्रसंगोचीत आदण पतंत रि्ाची पस्यायी तरी, आम्ही ीररिे दि 29 चा ीुन्हा उलेख्य करू न ताची ीुनरारृत्ती करू ःि "29. ि्य ुं दिार इंजीदनयररंग प्रकरणाती्याय िा दनणरय रिताचा आिे कारण दरशेषतःि दरचाराधीन पस्याये्याया एक ्यायरादि क्यायर िोता जो दररेकार क ं ीनीने दिादय् रा् क े ्याये दक ं रा सीकार्याये तरच सद्य िोणार िोता. तथांचा आधारे पसे आढळू्य न आ्याये की दररेकार क ं ीनीने दिारा परा् क े ्याया, जरी ्यायरादि क्यायर पसस्त्ात िोता तरी, दरशेषतःि, ीॉद्यायसीरध्ये, कायद्यात ते पसस्त्ात नसते, जसे की ता दनणरयात म्हटाई्याये गे्याये िोते, जेवा एक रिताची रस्तुससरती सादिर क े ्यायी जाते, म्हणजे, दररेकार क ं ीनीने दिादय् सीकार्याये नािी दक ं रा सीकार्याये नािी. ताचप्रराणे, सध्याचा ख्यटाईलाती्याय तथांरध्ये, िे स्पि आिे की उी-करारारध्ये सरादरि पस्याये्याया ्यायरादि ख्यंडलि जोीयरल त उी- करारारर योगररता रुदांदकत िोत नािी तोीयरल त कायद्याचा दरषय म्हणू्यन पसस्त्ात रािणार नािी, जसे की आम्ही रर म्हटाई्याये आिे. ्यायरादिाचा कराराचा रैधतेशी संबल ंदधत पस्यायेला क्यायर 8, क्यायर 16 आदण क्यायर 45 चा दररुद्ध, क्यायर 11 (6-ए) िे 'पसस्त्' शी संबल ंदधत आिे, या युस्रादिाचे उत्तर या ्ाया्याययाचा ि्य ुं दिार इंजीदनयररंग प्रकरणाती्याय 'पसस्त्' या पदभव्ीचा सरजुतीदारे ददि्याये जाते."; पसस्त् आदण रैधता एकरेकांशी जोडलि्याये्याये आिेत आदण जर तो बल ेकायदिेशीर पसे्याय दक ं रा पदनरायर कायदिेशीर आरशकता ीू्यणर करत नसे्याय तर ्यायरादि करार पसस्त्ात नािी.परैध करार म्हणजे कोणतािी करार नािी."

10. नंतर, रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो् ) रधी्याय तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने पसे म्हटाई्याये की ्यायरादि ्ायततशातात, "्यायरादि करार िा एक दरदशि आदण रेगळा करार आिे, जो रू्यळ वारसादयक कराराीासू्यन सतंत पसते ज्यारध्ये तो सरादरि आिे ". एस. एर. एस. टाईी एसेटाई्स प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्), गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) आदण दरद्या दोद्यायया आदण इतर (उीरो्) रध्ये व् क े ्यायेला रतांशी पसिरती व् करत या तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने घटाईनाीीठानाकडलिे संदिभर ददि्याया. तात पसे म्हटाई्याये िोतेःि "26. आरचा रते, रू्यळ करारारर रुदांक शुल भरणे प्र्यायंदबल त पसताना, ्यायरादि कराराचा पंर्यायबल जारणीसाठानी कोणतािी कायदिेशीर पडलिरळा नािी. तरादी, रुदांक कायद्याचा पदनरायर तरतुदिींचे ीा्यायन करणाीू्यरा कायर आदिेश दक ं रा रू्यळ वारसादयक करारांतगरत पदधकार आदण जबल ाबल दिाययांचा दनणरय घेत्याया जाणार नािी.

28. आरचा रते, एस. एर. एस. टाईी इसेटाईरधी्याय दनणरय दिोन रुदांरर कायद्याती्याय योग ससरती दिशररत नािी, म्हणजे (i) छाी नस्यायेला वारसादयक कराराती्याय ्यायरादि करारारर काररार क े ्यायी जाऊ शकत नािी दक ं रा कायद्याने ती पंर्यायबल जारणी पयोग पसते आदण (2) भारतीय संदरदिा पदधदनयर, 1872 चा क्यायर 19 पन्वये ीककाराचा ीयारयानुसार करार दक ं रा सं्यायेख्य रद करणायोग पसलास ्यायरादिाचा करार परैध ठानरे्याय.

29. आरचे पसे रत आिे की ्यायरादि करार िा ीकांरधी्याय एक सतंत करार पसलाने आदण रुदांक शुल भरणासाठानी शुल आकार्याये जात नसलारुळे, वारसादयक करारारर रुदांक शुल न भरलाने ्यायरादि ख्यंडलि परैध िोणार नािी दक ं रा ताची पंर्यायबल जारणी िोणार नािी, कारण ताचे सतःिचे सतंत पसस्त् आिे.रू्यळ कराराचा नोंदिणीररी्याय ्यायरादि ख्यंडलिाचा दर्यायगनकरतेचा रुदारर ्ाया्याययाने घेत्याये्याया ददिकोन रुदांक कायद्याचा संदिभारतिी ीाळ्याया गे्याया ीादिजे. रू्यळ करारारर रुदांक शुल न भरलास रुख्य करारिी परैध िोणार नािी. िी एक करतरता आिे जी आरशक रुदांक शुल भरणारर दिू्य र करता येते."

11. एस. एर. एस. टाईी इसेटाई प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रध्ये घेत्यायेला ददिकोनाचा पचू्यकतेदरषयी तांनी शंका व् क े ्याय, ज्या्याया गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि (उीरो् ) आदण दरद्या दोद्यायया आदण इतर (उीरो् ) रध्ये रा्ता दिेणात आ्यायी िोती, आदण पसा दनणरय दिेणात आ्याया: "56. आरचे पसे रत आिे की एस. एर. एस. टाईी इसेटाई आदण गररारेरधी्याय वारसादयक करारारर रुदांक शुल न भरलाने ्यायरादिाचा करारिी परैध ठानरे्याय आदण तो कायद्याने पसस्त्ात नसे्याय आदण पंर्यायात आणता येणार नािी, िा दनष्कषर कायद्याने योग नािी.

57. गररारेरधी्याय दनका्याया्याया दिुजोरा दिेणायया सरन्वय ख्यंडलिीीठानाने दरद्या दोद्यायया प्रकरणाती्याय दनका्यायाचा ीररिे दि 146 आदण 147 रधी्याय दनष्कषर ्यायकात घेता, उीरो् रुदा या ्ाया्याययाचा घटाईनाीीठानाने पदधक ृ तीणे दनका्यायी काढणे आरशक आिे."

12. रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) आदण दरद्या दोद्यायया आदण इतर (उीरो्) या दिोन्ही ख्यंडलिीीठानांचे संख्याबल ळ सरान पसलाने, या घटाईनाीीठाना्याया या रुदारर पदधक ृ तीणे: पदभदनणरय करणे घेणाचे आरािन करणात आ्याये आिे. या रुदाचा ्ायदनराडलिा करणासाठानी, या ख्यंडलिीीठानाने सुरुराती्याया कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ्यायरादिाचा दनयु्ीसाठानी ीू्यरर-संदिदभरत टाईप्ारर कायदिा, 1899 पंतगरत आरशकतांची तीासणी करणे आरशक आिे की नािी िे तीासणे आरशक आिे.

13. या ्ाया्यायया्याया रदित करणासाठानी ्ायदरत म्हणू्यन िजर िोणारे दरदान ज्येष रकी्याय शी. गौरर बल ॅनजा, सादिर करतात की कायदिा, 1996 आदण रेळोरेळी क े ्यायेला नंतरचा सुधारणांचा िेतू्य प्रसंभादरक प्रद्या सुवरससरत करणे आदण ्यायरादिाचा कायररािीत ्ादयक िस्तकेी करणे िा िोता, ज्यारुळे ्यायरादिाचा प्रद्येती्याय दर्यायंबल ात ्यायकणीय राढ िोते आदण यारुळे ्यायरादिाचा फायदिा नाकार्याया जातो. ्ाया्याययीन िस्तकेीासि ्यायरादिाशी संबल ंदधत प्रकरणांचा ज्यायदि दनीटाईारा करणारर भर दिेणासाठानी ्यायरादि आदण स्यायोख्या (दिुरुस्ती) कायदिा, 2015 (याीुढे 2015 ची दिुरुस्ती म्हणू्यन संदिदभरत) सादिर करणात आ्याया.

14. शी. बल ॅनजा यांनी पसे सादिर क े ्याये की जोीयरल त क्यायर 11 ची वायी आदण कका संबल ंदधत आिे, ती फ् ीोकळी भरू न काढणासाठानी आिे आदण ्ाया्यायय क े रळ दनयु्ी पदधकारी म्हणू्यन कार करत आिे जेरे ीक रध्यसर दनयु् करणात पीयशी ठानरतात.क्यायर 11 (6 ए) (2015 दिुरुस्ती) सरादरि क े लानंतर, दरदधरंडलिळ धोरण आदण उदेश रू्य्यायतःि ्यायरादिाचा दनयु्ीचा टाईप्ारर ्ाया्याययाचा िस्तकेी करी करणे िा आिे आदण या िेतू्यने क्यायर 11 (6 ए) सरादरि क े ्याये गे्याये आिे ज्याचा आदिर क े ्याया ीादिजे.

15. शी. बल ॅनजा ीुढे सादिर करतात की कराराचा दनदररतीचा टाईप्ारर ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाचा औीचाररक तीासणीीयरल त, प्रररदिशरनी, ्ाया्याययाची वायी रयारददित रादि्यायी ीादिजे, ज्यात करार ्यायेख्यी आिे की नािी आदण कराराचा दनदररतीसाठानीचे रुख्य संदरदिातक घटाईक ीू्यणर झा्याये आिेत. क्वदचत प्रसंगी, ीककारांकडलि ू्य न कािी प्रराणात प्रश्न उीससरत क े ्याया जात पसलास, ्ाया्यायय दररादिाचा दरषयाची रध्यसरी म्हणू्यन तीासणी करू शकते ीरंतु ते दिेख्यी्याय पीरादि म्हणू्यन. ताच रेळी, जोीयरल त कायदिा, 1899 चा संबल ंध आिे, तो क े रळ दरदशि प्रकारचा साधनांरध्ये राज्याचा रिसू्य्याय सुरदकत करणासाठानी पदधदनयदरत क े ्याये्याया एक दरत्तीय उीाय आिे, ीरंतु दफयारदिी्याया ताचा/दतचा प्रकरणाचा सारना करणासाठानी तांदतक शताने सुसजत करणासाठानी ताचा राीर क े ्याया जाऊ शकत नािी.एकदिा रिसु्यायाचा उदेश कायद्यानुसार सुरदकत झा्याया की, दिस्तऐरज नुसार आी्याया दिारा रांडलिणायया ीकाचा दिस्तऐरजाती्याय सुरुरातीचा सदिोषीणाचा आधारारर ीराभर िोणार नािी.

16. शी. बल ॅनजा ीुढे सादिर करतात की रुदांक शुल न भरणे ि एक दिुरुस्त िोणायोग उणीर आिे आदण ्यायरादिादारे ीुरारा म्हणू्यन दिाख्य्याय करणाीू्यरा िी उणीर कोणतािी टाईप्ारर दठानक क े ्यायी जाऊ शकते.क्यायर 11 पंतगरत ्ाया्याययादारे रुदांकाचा पीुरेीणाची दक ं रा पनारशक दशिक्काची तीासणी/दनणरय ीू्यरर-संदिभर टाईप्ारर क े ्याया जात पसलास, ्यायरादिाचा संदिभार्याया दररोध करणासाठानी बल ािेरी्याय आवाने आदण दरस्ताररत डलिारीेचांना प्रोतादित करणादशराय दिुसरे कािी िोणार नािी.्यायरादिाची दनयु्ी करणे आदण दररादि दनरारण कायररािी सुरू करणाची ीररानगी दिेणे आदण ्यायरादि ्ायादधकरणा्याया कायदिा, 1996 पंतगरत ताचे कतरव ीार ीाडलिणाची ीररानगी दिेणे िा नैसदगरक उीाय पीररिायर आिे. ्यायरादि ्ायादधकरण रुदांक शुलाची चोरी रोख्यू्य शकत नािी यासाठानी कोणतेिी कारण नािी.

17. िे दिेख्यी्याय आरचा दनदिशरनास आ्याये आिेत की ीू्यरर-संदिदभरत टाईप्ारर क्यायर 11 पंतगरत पजर सादिर करताना, ीकांना रू्यळ ्यायरादि करार दिाख्य्याय करणाचे बल ंधन नसते आदण ्यायरादि कराराची प्रत पजारसोबल त जोडलि्यायी जाणे पसलाने, ख्ययया परारने, िा कायदिा, 1899 चा क्यायर 2 (14) पंतगरत दरचार क े ्याया जात पसलाचे साधन नािी, दरशेषतःि ीू्यरर-संदिदभरत टाईप्ारर, कायदिा, 1899 चा क्यायर 33 दक ं रा 35 नुसार आरािन करणाचा प्रश्नच उदरत नािी. दनरेदिनाचा सरररनारर शी. बल ॅनजा यांनी जुीुडलिी क े शर रार दररुद्ध ीु्यायररा रेकटाई सुबारार आदण इतर (6(1971) 1 एससीसी 545) रध्ये नोंदिर्यायेला या ्ाया्याययाचा दनका्यायारर भर ददि्याया आिे, जो नंतर िररओर पगरा्याय दररुद्ध प्रकाश चंदि रा्यायरीय (7(2007) 8 एससीसी 514) रध्ये या ्ाया्याययाने नोंदिर्याया आिे.

18. ताची रदित घेत, शी. बल ॅनजा सादिर करतात की क्यायर 33 दक ं रा 35 िे दिस्तऐरजाचा कोणतािी प्रतीशी संबल ंदधत नािीत आदण कायदिा, 1899 चा उदेशाने दिस्तऐरजाची प्रत सरादरि करणास रार नािी.पदधदनयर, 1899 चा क्यायर 2(14) चा पराररधी्याय दिस्तऐरजाची प्रत जय करू न प्ररादणत क े ्यायी जाऊ शकत नािी आदण ती पदधदनयर, 1899 पंतगरत दिुयर ीुरारा म्हणू्यन सीकार्यायी जाऊ शकत नािी.

19. शी. बल ॅनजा ीुढे सादिर करतात की ्यायरादिाचा करार रैध आिे की कायद्याने पसस्त्ात आिे याबल द्याय या ्ाया्याययाचा दरचारारर उीससरत क े ्याये्याया प्रश्न ीू्यरर -संदिभर टाईप्ारर तीासणासाठानी ख्यु्याया नािी कारण रू्यळ दिस्तऐरज पदभ्यायेख्यीत नािी (्यायरादिाचा करार) आदण क्यायर 33 आदण 35 चे संयु् राचन िे दिस्तऐरजाचा कोणतािी प्रतीशी संबल ंदधत नािी आदण ीका्याया क े रळ ीुरावाचा दिस्तऐरजारर पर्यायंबल ू्यन रािणाची ीररानगी ददि्यायी जाऊ शकते जे क्यायर 2 (14) चा परर दिशरदरणारे साधन आिे आदण दिस्तऐरजाची रैधता नेिरीच पदधदनयराचा 1996 चे क्यायर 16 रध्ये दनदित पस्यायेला ताचा पदधकारकेताती्याय ्यायरादि/्यायरादि ्ायादधकरणादारे संदिभारनंतरचा टाईप्ारर तीासणासाठानी ख्यु्यायी आिे.

20. पीी्यायकतारचे दरदान रकी्याय शी. गगन संघी यांनी सादिर क े ्याये की कायदिा, 1899 चे क्यायर 35 कोणतािी िेतू्यसाठानी ीुरावारध्ये पनारशक रुदांदकत क े ्याये्याये 'दिस्तऐरज' रा् करणास आदण तारर काररार करणास प्रदतबल ंदधत करते आदण या ्ाया्याययाने आंध प्रदिेश सरकार आदण इतर दररुद्ध ीी. ्यायक्ष्मी दिेरी (शीरती) (8 (2008) 4 एस. सी. सी. 720) रध्ये पसे म्हटाई्याये िोते की कायदिा, 1899 चा क्यायर 33 रधी्याय ' रुदांदकत न क े ्याये्याये दिस्तऐरज' पदनरायर आिे आदण ते जय क े ्याये जाणे आरशक आिे. जरी कायदिा, 1899 पंतगरत ्यायरादि करारारर रुदांक शुल दिेय नािी पसे गृिीत धर्याये तरी, जेवा ्यायरादि करार िा रुदांक शुल दिेय पस्यायेला साधनाती्याय एक क्यायर म्हणू्यन सरादरि पसतो, तेवा एक साधन म्हणू्यन पसा ्यायरादि करार, कायदिा, 1899 चा क्यायर 35 चा पडलिरळा आकदषरत करतो.

21. शी. संघी ीुढे सादिर करतात की रू्यळ कराराीासू्यन करार रेगळे करणे िे दिुसरे कािी नसू्यन कायदिा, 1996 चा क्यायर 16 दारे तयार क े ्याये्याये दरदधकलना आिे आदण ते कायदिा, 1899 चा क्यायर 35 ्याया पीरादि पसू्य शकत नािी.

22. शी.संघी ीुढे सादिर करतात की जेवा ्यायरादि करार पस्यायेला दिस्तऐरजारर योग रुदांक शुल ददि्याये जात नािी तेवा ्यायरादि कराराचा पंर्यायबल जारणीचा रुदारर रेगळे ीणाचा दसद्धांत आदण कॉमेटाईेझ -कॉमेटाईेझचा कोणतािी संबल ंध नािी आदण एनका इंसात रे सनाय ए. एस. दररुद्ध ओ. ओ. ओ. दररा क ं ीनी चुबल (9 (2020) यू्यक े एस. सी. 38) रधी्याय यू्य. क े. चा सरर् ्ाया्याययाचा दनका्यायारर पर्यायंबल ू्यन आिे, ज्यारध्ये पसे म्हटाई्याये गे्याये िोते की ्यायरादि क्यायर तरीिी क ं ताटाईी दिस्तऐरजात नोंदिर्यायेला पदधकारांचा आदण जबल ाबल दिाययांचा एक भाग आिे आदण तांचा रते, रुदांकनाचा रुदा पगदिी उंबल रयारर ीादि्याया ीादिजे, जरी तो क्यायर 11 (6 ए) चा राीर करत पस्याया तरीिी, म्हणजे ्यायरादिीू्यरर टाईप्ारर तांचा रते, एख्यादिे साधन कायद्यात तेवाच पसस्त्ात पसे्याय जेवा ते पंर्यायबल जारणी करणायोग पसे्याय आदण ्यायरादि कराराचा संदिभारत कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) रध्ये ीररभादषत क े ्याये्याये 'पसस्त्' िे रैध पंर्यायबल जारणी करणायोग करार पस्याये ीादिजे आदण प्रारंदभक/ीू्यरर-संदिभर टाईप्ाररच रुदांकन न करणाचा दक ं रा पीुयया रुदांकनाचा सरसेचे ीरीकण करणासाठानी आदण एर/एस. एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रध्ये प्रदिान क े लाप्रराणे तीन ीद्धती पधोरेसख्यत करणासाठानी ते नेिरीच ख्यु्याये पसते, कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 पंतगरत दिाख्य्याय क े ्यायेला पजाररर म्हणजे पररोध, रुदांक शुल भरणे आदण ्यायरादिाची दनयु्ी, ्ाया्यायय दनदशतीणे या ्यायरादि ख्यणारर 'काररार' करत आिे, ज्या्याया स्पिीणे 1899 चा पदधदनयराचा क्यायर 35 पन्वये रोध पसू्यन एक करार जो कायद्यादारे पंर्यायात आणणाजोगा पसत नािी ता्याया 1996 चा पदधदनयराचा क्यायर 11 (6 ए) पन्वये पसस्त्ात पसलाचे म्हणता येणार नािी.

23. 2022 चा आय. ए. नंबल र.18516 रध्ये िस्तकेीकतारची बल ाजू्य रांडलिणायया दरदान ज्येष रकी्याय रा्यायदरका दतरेदिी यांनी सादिर क े ्याये की कायदिा, 1899 आदण कायदिा, 1908 चे शासन ीू्यणरीणे रेगळे आिे. रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलिने (उीरो्) दिस्तऐरज रुदांदकत करणाचा गरजेनुसार दिस्तऐरजाचा नोंदिणीची तते चुकीचा ीद्धतीने ्यायागू्य क े ्यायी. ीदि्याया एक सुधारणायोग दिोष आिे, तर दिुसरा दिस्तऐरज/साधनाचे पसस्त् आदण ीू्यणर् ठानररतो.नोंदिणीचा पनुीससरतीत, एक साधन पसस्त्ात रािी्याय ीरंतु रुदांकनादशराय, साधन पीू्यणर/पयोग पसे्याय.

24. शीरती दतरेदिी ीुढे दनरेदिन करतात की कायदिा, 1899 रध्ये रुदांक शुल भरणाची कलना आिे, जे पयशसी झालास, तांचा रते, कोणतािी िेतू्यसाठानी क ृ ती क े ्यायी जाऊ शकत नािी आदण कायद्याचा भाषेत कोणतीिी संददििता नािी आदण आीला्याया कायद्याचा वाख्येचा सुरणर ततांचे ीा्यायन करारे ्यायागे्याय.

25. शीरती दतरेदिी ीुढे दनरेदिन करतात की कायद्याचा दरदरध तरतुदिींख्या्यायी्याय ्ाया्याययाचे पदधकार तसेच कायदिा, 1899 रध्ये दनरारण क े ्याये्याये दनबल रल ध िे कायदिा, 1996 चा क्यायर 9 नुसार चा्यायरला जाणायया कायररािी्याया ्यायागू्य िोतात आदण पसे सादिर करतात की जरी ्यायरादि ख्यंडलि ख्यंदडलित क े ्याया पस्याया तरी, कायदिा, 1996 चा क्यायर 9 चा राीर करू न पंतररर उीाययोजना रंजू्यर करणाीू्यरा ्यायरादिाचा ख्यंडलि पस्याये्याया रू्यळ करार कायद्याने ्यायागू्य करणायोग आिे की नािी याबल द्याय ्ाया्यायया्याया प्रररदिशरनी दनष्कषारीयरल त ीोिोचारे ्यायागे्याय.

26. 2022 चा आय. ए. ्रांक 199969 रध्ये िस्तकेीकतारचे दरदान रकी्याय शी. दिेबल ेश ींडलिा यांनी सादिर क े ्याये की कायदिा, 1996 चा भाग 1 क्यायर 8,[9] आदण 11 शी संबल ंदधत आिे, तर क्यायर 45 भाग 2 रध्ये िाताळ्याये गे्याये आिे. क्यायर 45 ्याया भाग 2 पंतगरत तरतू्यदि म्हणू्यन रा्ता दिेणात आ्यायी आिे जी एक संीू्यणर संदिता आिे. क्यायर 45 रधी्याय 'ते आढळत नािी तोीयरल त' या पदभव्ीचा परर दशन-एटाईसू्य क े दरक्याय क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध पक ऑद्फायबल र द्यायदरटाईेडलि आदण इतर (10 (2005) 7 एससीसी 234) रध्ये बल हरताने ्यायार्याया गे्याया चा प्रररदिशरनी दरचार म्हणू्यन परर ्यायार्याया गे्याया. 2019 रध्ये, संसदिेने क्यायर 45 रध्ये सुधारणा करू न 'प्रररदिशरनी आढळत नािी तोीयरल त' िी पदभव्ी बल दि्यायू्यन घेत्यायी, जी कायद्या्याया दशन एतु (उीरो्) रध्ये ठानरर्यायेला ससरतीचा पनुषंगाने आणते. या ीाररभू्यरीरर, 1899 चा कायदिा दिंडलिासि दक ं रा दिंडलिादरना रुदांक शुल रसू्य्याय िोरीयरल त क े रळ तात ाुरता दिंडलि दनरारण करतो.दिुःिख्य िे क े रळ साधनाशी जोडलि्याये्याये पसते, वरिाराशी नािी.

27. शी. क े. रराकांत रेडी, प्रदतरादिी ्. 1 ने 1996 चा कायदिा ्यायागू्य िोणाीू्यरा ्यायोकसभेत झा्यायेला संबल ंदधत चचरचा आढारा घेत्याया आदण ताची रदित घेत, 1996 चा कायदिा, 1899 चा कायदिा आदण 1872 चा संदरदिा पदधदनयर (याीुढे 'कायदिा, 1872' म्हणू्यन संदिदभरत) यांचा तरतुदिींरध्ये सुसंरादि साधारा ्यायागे्याय, पसे सांदगत्याये. पदधदनयर 1899 चे क्यायर 17 िे पदधदनयर, 1899 चे क्यायर 31 सि राच्याये ीादिजे. कायदिा, 1996 चा क्यायर 7 चा साध्या भाषेत, करारारर दशिारोतरबल करणासाठानी ीकांरर बल ंधन पसणे आरशक नािी.कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ्यायरादिाचा दनयु्ीसाठानी ्यायरादिाचा आधीचा टाईप्ारर ्यायरादिाचा करारारर काररार करणाचा उदेशाने ्ाया्याययाने दशि े, दशि े आदण रू्यळ यासारख्या रुख्य नस्यायेला तांदतक आरशकतांरर जोर ददिलास दरदधरंडलिळाचा िेतू्यचा ीराभर िोर्याय.

28. प्रदतरादिींचे दरदान रकी्याय ीुढे सादिर करतात की ख्यटाईलाचा ताकााद्यायक तथांरध्ये, ्यायरादिाचा दररादिांचा संदिभारसाठानी क्यायर 8 पंतगरत पजर दिाख्य्याय करणात आ्याया िोता आदण रिाराि् रुदांक कायदिा, 1958 चा क्यायर 34 पंतगरत तो सरररनीय नवता, जो कायदिा, 1899 चा जरळजरळ सरान सारगी आिे. रक र ऑडलिरर एक रुदांदकत नस्याये्याया दिस्तऐरज पसलाने कोणतािी िेतू्यसाठानी ीुरारा म्हणू्यन प्राय क े ्याया जाऊ शकत नािी दक ं रा तारर काररार क े ्यायी जाऊ शकत नािी, जोीयरल त तारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये जात नािी.ीररणारी, ्यायागू्य पस्याये्याये रुदांक शुल 20 (आदण दिंडलि, पसलास) कायर आदिेशारर ददि्याये जात नािी आदण गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रधी्याय या ्ाया्याययाचा दनका्यायारर पर्यायंबल ू्यन ठाने र्याये जात नािी तोीयरल त, रुदांक नस्यायेला ्यायरादि ख्यंडलि क्यायराररिी काररार क े ्यायी जाऊ शकत नािी दक ं रा ताची पंर्यायबल जारणी क े ्यायी जाऊ शकत नािी, कारण ्यायरादि क्यायर कायद्यात पसस्त्ात रािणार नािी.

29. दरदान रकी्याय ीुढे सादिर करतात की उ् ्ाया्याययाने क्यायर 8 पंतगरत पजाररर पर्यायंबल ू्यन पसताना रिाराि् रुदांक कायदिा, 1958 चा क्यायर 34 चे उलंघन करणारा पसस्त्ात नस्याये्याया ्यायरादि ख्यंडलि ्यायागू्य क े ्याया िोता आदण ीुढे पसा युस्रादि क े ्याया की प्रदतरादिीने रुदांक शुल भरणाची आी्यायी तयारी दिशरदर्यायी नवती, जरी नंतरचा टाईप्ारर आकेी घेणात आ्याया िोता आदण तारुळे ्यायरादिाचा क्यायरांतगरत रुदांक शुल भरणाची आणख्यी कोणतीिी संधी दिेणास कोणतेिी सरररन उदरत नािी.

30. आम्ही ीककारांचा रदक्यायांचे म्हणणे ऐक्याये आिे आदण तांचा रदितीने पदभ्यायेख्यीत उी्यायब् पस्यायेला सादिताचा पभास क े ्याया आिे आदण संदिभाररध्ये ख्यो्यायरर जाणाीू्यरा, संदिभारल शी संबल ंदधत रैधादनक तरतुदिींरर चचार करणे आम्हा्याया योग राटाईते.

31. 1899 चा कायदिा िा एक दरत्तीय कायदिा आिे, जो वरिारांची पदभ्यायेख्यन करणायया सं्यायेख्यारर रुदांकाचा सरू ीात आकारला जाणायया कराशी संबल ंदधत कायदिा ठानररतो.भारतीय राज्यघटाईनेचा सातवा पनुसू्यची यादिी 1 (क े दीय यादिी) चा नोंदि 91 रध्ये दनददिरि क े ्यायेला साधनांररी्याय रुदांक शुल (उदिा. दरदनरय दिेयक े, धनादिेश, रचनीते, ्यायादिीची दिेयक े, ीतीते, दररा ीॉद्यायसी, सरभागांचे िस्तांतरण, कजररोख्ये, प्रॉक्सी आदण ीारता) क े द सरकारदारे आकारला जातात. ताचप्रराणे, ररी्याय क े द सू्यचीचा 91 वा नोंदिीत नरू्यदि क े ्यायेलांवदतरर् इतर साधनांररी्याय रुदांक शुल पनुसू्यची VII चा यादिी II (राज्य यादिी ) चा 63 वा नोंदिींनुसार राज्यांकडलि ू्य न आकार्याये जाते. शुलदिराशी संबल ंदधत तरतुदिी रगळता इतर तरतुदिी दतसयया यादिीती्याय (सररता यादिी) 44 वा ीररिे दिाचा आधारे क े द आदण राज्यांचा दरदधरंडलिळाचा पदधकारात येतात.तरादी, सरर उीकरणांररी्याय रुदांक शुल संबल ंदधत राज्ये गोळा करतात आदण ठाने रतात.

32. दिस्तऐरज िी संजा कायदिा, 1899 चा क्यायर 2 (14) पंतगरत ीररभादषत क े ्यायी गे्यायी आिे आदण 'शुल आकारणायोग दिस्तऐरज ' िी क्यायर 3 पंतगरत प्रदिान क े ्यायी गे्यायी आिे, तर क्यायर 17 रध्ये पशी तरतू्यदि आिे की भारताती्याय कोणतािी व्ीदारे शुल आकारणायोग आदण पंर्यायात आणणायोग सरर साधनांरर दशिारोतरबल करारे ्यायागे्याय.

33. कायदिा, 1899 चे क्यायर 2 (14), 3 आदण 17 ख्या्यायी काढ्याये आिेतःि१ - "2 (14)-सं्यायेख्य ".-सं्यायेख्यात प्रतेक सं्यायेख्य सरादरि आिे ज्यादारे कोणतािी पदधकार दक ं रा दिादय् तयार क े ्याये जाते, िस्तांतररत क े ्याये जाते, रयारददित क े ्याये जाते, दरस्ताररत क े ्याये जाते, शरर्याये जाते दक ं रा नोंदिर्याये जातेःि

3. शुल आकारणायोग सं्यायेख्य कायद्याचा तरतुदिींना आदण पनुसू्यची 1 रध्ये सरादरि पस्यायेला सर्यायतींना पधीन राहन, ख्या्यायी्याय सं्यायेख्यारर ता पनुसू्यचीत दिशरदर्यायेला रकरेरर पनु्रे योग शुल म्हणू्यन शुल आकार्याये जार्याय, म्हणजे - (प) ता पनुसू्यचीत नरू्यदि क े ्याये्याये प्रतेक सं्यायेख्य, जे ीू्यरा कोणतािी व्ीने पंर्यायात आण्याये नवते, ते जु्यायै 1899 चा ीदिला ददिरशी दक ं रा तानंतर भारतात पंर्यायात आण्याये जाते; (बल ) ता ददिरशी दक ं रा तानंतर भारतातू्यन काढ्याये्याये दक ं रा तयार क े ्याये्याये प्रतेक दरदनरय ीत (रागणीनुसार प्रा दिेय) दक ं रा रचनीत आदण सीकार्याये दक ं रा ददि्याये दक ं रा सीकार दक ं रा दिेयकासाठानी सादिर क े ्याये, दक ं रा रा्ता, िस्तांतरण दक ं रा प्रा राटाईाघाटाईीसाठानी भारतात सादिर क े ्याये जाते; आदण (क) ता पनुसू्यचीत नरू्यदि क े ्याये्याये प्रतेक सं्यायेख्य (दरदनरय ीत दक ं रा रचनीतावदतरर्), जे ीू्यरा कोणतािी व्ीने पंर्यायात आण्याये नवते, ते ता ददिरशी दक ं रा तानंतर भारतातू्यन पंर्यायात आण्याये जाते. ता पनुसू्यचीरध्ये नरू्यदि क प्रतेक इन्नररेटाई (एक्स्चेज दबल ्याय दक ं रा प्रॉदरसरी नोटाई वदतरर्), जे याीू्यरा कोणतािी व्ीने पंर्यायात आण्याये गे्याये आिे, कोणतािी रा्यायरत्तेशी संबल ंदधत आिे, दक ं रा [भारतात] आदण [भारत] रध्ये प्राय झा्यायेला कोणतािी बल ाबल ी दक ं रा गोिीसाठानी दक ं रा क े ला जाणायया: ीरंतु, या संदिभारत कोणतेिी शुल आकार्याये जाणार नािी (1) सरकारने दक ं रा तांचा रतीने दक ं रा तांचा बल ाजू्यने पंर्यायात आण्यायेला कोणतािी सं्यायेख्याचा संदिभारत कोणतेिी शुल आकार्याये जाणार नािी, ीरंतु ज्या प्रकरणांरध्ये या सर्यायतीसाठानी सरकार पशा दिस्तऐरजाचा संदिभारत आकार्याये जाणारे शुल भरणास जबल ाबल दिार पसे्याय. (2) वाीारी नौनयन कायदिा, 1894, कायदिा ्रांक 57 आदण 58 दरक. सी. पंतगरत नोंदिणीक ृ त कोणतािी जिाज दक ं रा जिाजाची दक ं रा जिाजाची दर्ी, िस्तांतरण दक ं रा इतर सरू ीाचे कोणतेिी सं्यायेख्य, एकतर ीू्यणरीणे दक ं रा गिाण ठाने रू्यन दक ं रा प्रा, दक ं रा कोणतािी भाग, वाज, गिाण दक ं रा रा्यायरत्ता. 60 दक ं रा 1838 चा XIX पदधदनयरांतगरत दक ं रा जिाजांची भारतीय नोंदिणी कायदिा, 1841 (1841 चा CX), तानंतरचा कायद्यांदारे सुधाररत.

17. भारतात दनिाददित क े ्याये्यायी सं्यायेख्य - कतरवाची जबल ाबल दिारी घेणारी आदण भारताती्याय कोणतािी व्ीने दनिाददित क े ्याये्यायी सरर सं्यायेख्य पंर्यायात आणणाीू्यरा दक ं रा पंर्यायबल जारणीचा रेळी रुदांदकत क े ्याये जाती्याय.

18. भारताबल ािेर दिेयक े आदण नोटाई्स या पंर्यायात आण्याये्याये सं्यायेख्य वदतर् इतर साधने - (1) शुल आकारणायोग आदण क े रळ भारताबल ािेरच पंर्यायात आणला जाणायया आदण दरदनरयीत दक ं रा रचनीत नस्यायेला प्रतेक दिस्तऐरज तो भारतात ीदिलांदिा प्राय झालानंतर तीन रदि्ांचा आत दशिारोतरबल क े ्याये जाऊ शकते. (2) तारुळे दरदित करणे क े ्यायेला रुदांकनाचा रणरनाचा संदिभारत, पसे कोणतेिी दिस्तऐरज एख्याद्या ख्याजगी व्ीकडलि ू्य न योगररता रुदांदकत क े ्याये जाऊ शकत नसे्याय, तर ते तीन रदि्ांचा उका का्यायारधीत दजिलादधकारी यांचाकडलिे ने्याये जाऊ शकते, जे तसे दिस्तऐरज घेणायया व्ी्याया आरशक पसे्याय आदण तासाठानी ीैसे द्यारे ्यायागती्याय पशा रू्यलाचा रुदांकासि, [राज्य सरकार] दनयरानुसार दरदित करणे करे्याय पशा ीद्धतीने रुदांदकत करती्याय."

34. पदधदनयर 1899 चा क्यायर 2 (14) पंतगरत ीररभादषत क े ्यायेला 'सं्यायेख्य' रध्ये प्रतेक सं्यायेख्य सरादरि आिे ज्यादारे कोणतािी पदधकार दक े ्याये गे्याये आिे, िस्तांतररत क े ्याये गे्याये आिे, रयारददित क े ्याये गे्याये आिे, दरस्ताररत क े ्याये गे्याये आिे, नि क े ्याये गे्याये आिे दक ं रा नोंदिर्याये गे्याये आिे. क्यायर 2 (14) पंतगरत ीररभादषत क े लानुसार सं्यायेख्य ' िा शब रू्यळ सं्यायेख्यचा संदिभर दिेतो आदण ताची प्रत दक ं रा योगररता प्ररादणत प्रत नािी. िे क े रळ रू्यळ सं्यायेख्य तयार क े लाररच, रुदांक शुल/दिंडलिाचा करतरतेस रा्ता दिेणासाठानी ीैसे ददि्याये जाऊ शकतात.

35. कायदिा, 1899 चा चौथा पध्यायात (क्यायर 33 ते क्यायर 48) 'योगररता रुदांदकत न क े ्याये्याये सं्यायेख्य' या शीषरकाख्या्यायी, ज्या सं्यायेख्यारर दशिारोतरबल वाय्याया िरे िोते ता सं्यायेख्यारर दशिारोतरबल क े ्याये जात नािी तेवा पनुसरण करणाचा प्रद्येची तरतू्यदि आिे.

36. पदधदनयर 1899 चा क्यायर 33 रध्ये 'कागदिीतांची तीासणी आदण जयी' करणाची तरतू्यदि आिे. क्यायर 33 चा उीक्यायर (1) पंतगरत, "कायद्यादारे ीुरारा प्राय करणाचा पदधकार पस्याये्यायी प्रतेक व्ी दक ं रा ीककारांची संरती पस्याये्यायी प्रतेक व्ी आदण साररजदनक ीदिाचा प्रभारी पस्याये्यायी प्रतेक व्ी, ीोद्यायस पदधकारी रगळता, ज्यांचाीुढे, तांचा रते, कतरव बल जार्याये्याये कोणतेिी सं्यायेख्यारर सादिर क े ्याये जाते दक ं रा तांचा कायारल चा ीू्यतरतेसाठानी येते, पशा सं्यायेख्यारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये्याये नािी पसे तांना ददिसलास ते जय क े ्याये जार्याय". पदधदनयर 1899 चा क्यायर 33 (2) रध्ये पशी तरतू्यदि करणात आ्यायी आिे की शुल आकारणायोग प्रतेक सं्यायेख्यारर उीक्यायर (1) रध्ये स्पि क े लाप्रराणे पशा व्ीदारे तीासणी क े ्यायी जार्याय, जेणेकरू न पसे सं्यायेख्य पंर्यायात आण्याये गे्याये दक ं रा प्ररर पंर्यायात आण्याये गे्याये तेवा भारतात पंर्यायात पस्याये्याया पस्यायेला कायद्याने आरशक पस्यायेला रू्यलाचा आदण रणरनाचा दशिक्काने तारर रुदांदकत क े ्याये आिे की नािी िे दनदशत क े ्याये जार्याय. क्यायर 2 (11) रध्ये सरादरि पस्यायेला 'योगररता रुदांदकत क े ्याये्याया ' वाख्येचा परर पसा आिे की ता उीकरणारर योग रकरेीेका करी नस्याये्याये दचकटाई दक ं रा छाी्याये्याये दशिा पसते आदण पसे दशिा भारतात सध्या पंर्यायात पस्याये्याया पस्यायेला कायद्यानुसार दचकटाईर्याये गे्याये आिे दक ं रा राीर्याये गे्याये आिे.

37. कायदिा, 1899 चा क्यायर 33 चे साधे राचन पशा प्रकारे स्पि करते की जेवा एख्यादिे साधन दक ं रा सं्यायेख्य प्रादधकरणासरोर सादिर क े ्याये जाते, तेवा ता उीकरणारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये आिे की नािी िे तीासणे िे पशा प्रादधकरणाचे कतरव आिे आदण जर क्यायर 33 (2) पंतगरत ता उीकरणारर योगररता रुदांदकत क े ्याये्याये नािी पसे आढळ्याये तर संबल ंदधत प्रादधकरण उ् सं्यायेख्य जय करे्याय.

38. पदधदनयर 1899 चे क्यायर 34 संबल ंदधत पदधकायया्याया दररेकबल ुद्धी प्रदिान करते की जर कोणतािी ्यायोक ्यायेख्या ्यायेख्याीरीकणादिरमान "दििा ीैसे" ीेका जास्त शुल आकारणायोग कोणतीिी ीारती तांना ददि्यायी गे्यायी दक ं रा तांचासरोर सादिर क े ्यायी गे्यायी, तर पशा पदधकायया्याया, तांचा दररेकारध्ये, दिस्तऐरज जय करणाऐरजी, योगररता रुदांदकत क े ्याये्यायी ीारती बल दि्यायणाची आरशकता पसू्य शकते."

39. पदधदनयर 1899 चा क्यायर 35 चे साधे राचन पसे सू्यदचत करते की संबल ंदधत रुदांक शुल आदण दिंडलि नंतर भरलास पसीकायर दिस्तऐरज रुदांक न क र पीुरे रुदांक पसे्याये्याये सुद्धा दिाख्य्याय करू न घेत्याये जाते. याररू न पसे ददिसू्यन येते की क्यायर 35 पंतगरत पस्याये्यायी आरशकता कठानोर नािी आदण नंतरचा टाईप्ाररिी तात सुधारणा क े ्यायी जाऊ शकते.रुदांदकत नस्याये्याये दक ं रा पीुरे रुदांदकत क े ्याये्याये सं्यायेख्य ीू्यणरीणे परैध नसते आदण क्यायर 35 चा तरतुदिीत नरू्यदि क े ्यायेला पटाईींची ीू्यतरता क े लानंतर ते ीुरावारध्ये रैध आदण सीकारािर क े ्याये जाऊ शकते.

40. पदधदनयर 1899 चे क्यायर 37 पयोगररता रुदांदकत क े ्यायेला दिस्तऐरजांचा प्ररेश संबल ंदधत आिे.तात पशी तरतू्यदि करणात आ्यायी आिे की, राज्य सरकार पसे दनयर बल नरू्य शकते की, जर एख्याद्या सं्यायेख्यारर ीुरेशा रकरेची ीरंतु पयोग रणरनाची रुदांदकत पसे्याय, तर ज्या शुलासि ते आकारणायोग आिे ते शुल भरलानंतर ते योगररता रुदांदकत झालाचे प्ररादणत क े ्याये जाऊ शकते आदण पशा प्रकारे प्ररादणत क े ्याये्याये कोणतेिी दिस्तऐरज ताचा पंर्यायबल जारणीचा तारख्येीासू्यन योगररता रुदांदकत क े ्याये्याये पसलाचे रान्याये जार्याय.

41. जय क े ्याये्यायी रुदांदकत सं्यायेख्य कशी िाताळ्यायी जारीत यासाठानी कायदिा, 1899 चा क्यायर 38 रध्ये कायरीद्धतीची तरतू्यदि आिे. क्यायर 38 चा उी-क्यायर (1) रध्ये पशी तरतू्यदि आिे की जेवा क्यायर 33 पंतगरत एख्यादिे दिस्तऐरज जय करणारी व्ी क्यायर 35 दारे प्रदिान क े ्यायेला दिंडलिाची दक ं रा क्यायर 37 दारे प्रदिान क े ्यायेला कतरवाची रिर भरलानंतर ीुरारा म्हणू्यन पसे दिस्तऐरज सीकारते, तेवा तो दजिलादधकारी यांना पशा दिस्तऐरजाची प्ररादणत प्रत, ्यायेख्यी प्रराणीतासि ीाठानरे्याय, ज्यात ता संदिभारत आकारला गे्यायेला शुलाची आदण दिंडलिाची रिर नरू्यदि पसे्याय आदण ती रिर दजिलादधकारी दक ं रा ता रतीने दनयु् क े ्यायेला व्ी्याया ीाठानरे्याय.

42. पदधदनयर 1899 चे क्यायर 39 आदण 40 एकतर पदगर ीरतारा दिेणासाठानी, दिस्तऐरजारर योगररता रुदांदकत क े लाचे प्ररादणत करणासाठानी दक ं रा रुदांक शुल गोळा करणासाठानी दजिलादधकारी यांचा दररेकादधकाराचा राीर करणाची प्रद्या प्रदिान करतात.

43. पदधदनयर 1899 चा क्यायर 33, 35 आदण 2 (14) चे साधे राचन स्पिीणे दिशरदरते की ज्या दिस्तऐरजारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये्याये नािी ते जय क े ्याये जाऊ शकते आदण जेवा आरशक शुल आदण दिंडलि भर्याया गे्याया पसे्याय, तेवा उ् दिस्तऐरज कायदिा, 1899 चा क्यायर 35 पंतगरत ीुरारा म्हणू्यन घेत्याया जाऊ शकतो. ीरंतु, ताच रेळी, क्यायर 33 आदण 35 िे दिस्तऐरजाचा कोणतािी प्रतीशी संबल ंदधत नािीत आदण ीका्याया सं्यायेख्यारर पर्यायंबल ू्यन रािणाची ीररानगी ददि्यायी जाऊ शकते जे कायदिा, 1899 चा क्यायर 2 (14) चा परारल तगरत एक सं्यायेख्य आिे. या ्ाया्यायया्याया जुीुडलिी क े शर रार (उीरो्) रधी्याय कायदिा, 1899 चा क्यायर 33,35 आदण 36 आदण ीुरारा कायदिा, 1872 चा क्यायर 63 ची वायी आदण वायी दरचारात घेणाची संधी िोती आदण पसे म्हटाई्याये गे्याये कीःि "13. क्यायर 35 चा ीदि्याये पंग, ज्यारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये जात नािी तोीयरल त, कतरवाची जबल ाबल दिारी सोीरणाजोगा कोणतािी साधना्याया ीुरावाीासू्यन स्पिीणे दिू्य र ठाने रतो. ताचा दिुसरा भाग जो उीकरणारर काररार करणाशी संबल ंदधत आिे, तो पशा उीकरणाचा कोणतािी दिुयर ीुरारा उघडलिीणे बल ंदि करे्याय, कारण जेवा शुलासि सीकारािरीणे चाजर करणायोग रू्यळ दिस्तऐरजारर दशिारोतरबल क े ्याये गे्याये नािी दक ं रा पीुरी दशिारोतरबल क े ्यायी गे्यायी नािी तेवा पशा ीुरावा्याया ीररानगी दिेणे, कायद्याने दक ं रा ीुरारा प्राय करणाचा पदधकार पस्यायेला व्ीने दिस्तऐरजारर काररार करणासारख्ये ठानरे्याय. जेवा रू्यळ दिस्तऐरज प्रतकात ्ाया्याययासरोर पसे्याय आदण दिस्तऐरजारर दरसंबल ू्यन रािणाचा प्रयत करणायया ीकाकडलि ू्य न दिंडलिासि रुदांकाती्याय करतरता भर्यायी जार्याय तेवाच तरतू्यदि (प) ्यायागू्य िोते. स्पिीणे दिुयर ीुरारा एकतर रुदांदकत नस्यायेला दिस्तऐरजाती्याय रजक ु राचा तोंडलिी ीुरावाचा राध्यरातू्यन दक ं रा भारतीय ीुरारा कायद्याचा क्यायर 63 रध्ये सरादरि पस्यायेला ताचा प्रतीदारे, दिस्तऐरजावदतरर् ीुरारा म्हणू्यन कािीिी प्राय करणाचे पदधकायारल ना आदिेश दिेणायया ीरंतुकांचा आरशकता ीू्यणर करणार नािी. क्यायर 25 िे दिस्तऐरजाचा कोणतािी प्रतीशी संबल ंदधत नािी आदण एख्याद्या ीका्याया क े रळ क्यायर 35 चा उदेशाने एक साधन पस्यायेला दिस्तऐरजारर पर्यायंबल ू्यन रािणाची ीररानगी ददि्यायी जाऊ शकते. क्यायर 2 (14) रध्ये 'सं्यायेख्य' ची वाख्या पशा प्रतेक दिस्तऐरजाचा सरारेश म्हणू्यन क े ्यायी आिे ज्यादारे कोणतािी पदधकार दक े ्याये जाते, िस्तांतररत क े ्याये जाते, रयारददित क े ्याये जाते, दरस्ताररत क े ्याये जाते, दरझर्याये जाते दक ं रा नोंदिर्याये जाते. रुदांक कायद्याचा उदेशाने दिस्तऐरजाची प्रत एक दिस्तऐरज म्हणू्यन सरादरि करणास रार नािी.

14. जर क्यायर 35 क े रळ रू्यळ दिस्तऐरजांशी संबल ंदधत पसे्याय आदण क्यायर 36 ची नि्याय करणार नसे्याय तर ताचा पसा परर ्यायार्याया जाऊ शकत नािी की एख्याद्या सं्यायेख्या्याया दिुयर ीुरावाचा फायदिा िोऊ शक े ्याय. क्यायर 36 रधी्याय 'एक दिस्तऐरज ' या शबांचा परर क्यायर 35 प्रराणेच पस्याया ीादिजे. ख्यटाई्याया दक ं रा कायररािीचा सुरुरातीचा टाईप्ात आकेी न घेता रू्यळ दिस्तऐरज ीुरावारध्ये दिाख्य्याय करणात आ्याया पसे्याय पशा प्रकरणांरध्ये दरदधरंडलिळाने क्यायर 35 चा कठानोर तरतुदिींीासू्यन क े रळ राघार घेत्यायी. दिुसयया शबांत, जरी आकेी दिस्तऐरजारर दचकटाई्यायेला रुदांकाचा पीुरेीणारर आधाररत पस्याया, तरी ज्या ीका्याया ते सीकारणास आकेी घेणाचा पदधकार आिे, ताने सं्यायेख्य ीदिलांदिा सादिर क े ्याया जातो तेवा तसे करणे आरशक आिे. एकदिा दिस्तऐरज ीुरावाचा प्ररेश आकेी घेणाची रेळ दनघू्यन गे्यायी की, ताच आधारारर नंतरचा टाईप्ारर कोणतािी आकेी उीससरत क े ्याया जाऊ शकत नािी. ीरंतु िे कोणतािी प्रकारे क्यायर 36 ची ्यायागू्यता एख्याद्या दिस्तऐरजाचा रजक ु राचा ीुरावारध्ये सादिर क े ्यायेला दक ं रा सादिर करणाचा प्रयत क े ्यायेला दिुयर ीुरावारर राढरत नािी ज्यारर रुदांक ्यायार्याये्याये नािीत दक ं रा पीुरी रुदांक ्यायार्याये्यायी आिेत. "

44. िररओर पगरा्याय (उीरो्) प्रकरणात या ्ाया्याययाचा तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने या रता्याया दिुजोरा ददि्याया आिे, ज्यारध्ये ते ख्या्यायी्यायप्रराणे म्हटाई्याये आिेःि "10. या ्ाया्याययाचा दनणरयांररू न आदण कायद्याचा क्यायर 33,35 आदण 2 (14) चा साध्या राचनाररू न िे स्पि िोते की ज्या दिस्तऐरजारर योगररता दशिारोतरबल क नािी ते जय क े ्याये जाऊ शकते आदण जेवा पशा दिस्तऐरजासाठानी आरशक शुल आदण दिंडलि भर्याया गे्याया पसे्याय तेवा ते रुदांक कायद्याचा क्यायर 35 पंतगरत ीुरारा म्हणू्यन घेत्याये जाऊ शकते. क्यायर 33 दक ं रा 35 िे दिस्तऐरजाचा कोणतािी प्रतीशी संबल ंदधत नािीत आदण ीका्याया क े रळ क्यायर 2 (14) चा परारल तगरत पस्यायेला दिस्तऐरजारर पर्यायंबल ू्यन रािणाची ीररानगी ददि्यायी जाऊ शकते. रुदांक कायद्याचा उदेशाने दिस्तऐरजाची प्रत सरादरि करणास रार नािी. दिस्तऐरजाची प्रत जय करू न प्ररादणत क े ्यायी जाऊ शकत नािी आदण रुदांक कायदिा, 1899 पंतगरत िा दिुयर ीुरारा म्हणू्यन सीकार्याया जाऊ शकत नािी, यात आता कायदिा दनःिसंशयीणे ठानार आिे. "

45. या दरषयाररी्याय कायदिा सुप्रदतदषत आिे की कदरत दिस्तऐरजाची योगररता प्ररादणत प्रत/छायाप्रती जय करू न प्ररादणत क े ्यायी जाऊ शकत नािी आदण िे कायदिा, 1899 पंतगरत ीुरावारध्ये सीकार्याये जाऊ शकत नािी.यारुळे पसा दनष्कषर दनघतो की एख्याद्या उीकरणाती्याय करतरता, रग ती पनारशकीणे दशिारोतरबल क े ्याये्यायी पसो दक ं रा पीुरी दशिारोतरबल क े ्याये्यायी पसो, ती कायदिा, 1899 पंतगरत दरदित क े ्यायेला प्रद्येदारे सुधार्यायी जाऊ शकते. िे स्पिीणे सू्यदचत करते की उीकरण पंर्यायात आलानंतरिी कायद्यांतगरत आरशकता ख्यरोख्यरच ीू्यणर क े ्यायी जाऊ शकते. कायद्यांतगरत आरशकता कठानोर दक ं रा कठानोर नािी, जेणेकरू न प्रररतःि साधन परैध िोर्याय.

46. िे पसेिी दिशरदरते की कायदिा, 1899 चा उदेश एख्याद्या साधना्याया ीू्यणरीणे परैध घोदषत करणे िा नािी, तर प्रतेक उीकरणारर रुदांक शुल रसू्य्याय करणे िा आिे. 1899 चा कायद्याचा उदेश राज्यासाठानी रिसू्य्याय सुरदकत करणे िा आिे.

47. या ्ाया्याययाने, दिंदिुस्तान सी्याय द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध रेससर ददि्यायीी कन्कन क ं ीनी, (11 (1969) 1 एस. सी. सी. 597) या प्रकरणात, कायदिा, 1899 चा उदेश िाताळ्याया आदण पसे म्हटाई्यायेःि "7. रुदांक कायदिा िा दरदशि प्रकारचा दिस्तऐरजारर राज्याचा रिसू्य्याय सुरदकत करणासाठानी पंर्यायात आण्याये्याया एक दरत्तीय उीाय आिेःि दफयारदिी्याया ताचा प्रदतस्पध्यारचा ख्यटाईलाची ीू्यतरता करणासाठानी तांदतक शताचा राीर करणासाठानी तो पंर्यायात आण्याया जात नािी. कायद्याचा कठानोर तरतुदिींची कलना रिसु्यायाचा दितासाठानी क े ्यायी जाते, एकदिा ती रस्तू्य कायद्यानुसार सुरदकत झा्यायी की, ता साधनारर दिारा करणारा ीक दिस्तऐरजारर प्रारंदभक दिोषारुळे ीराभू्यत िोणार नािी. ता दिीकोनातू्यन ीादिलास योजना स्पि आिे. रुदांक कायद्याचे क्यायर 35 िे प्रराणे एख्याद्या रुदांक न ्यायार्यायेला उीकरणा्याया ीुरावारध्ये दिाख्य्याय करणारर दक ं रा तारर काररार करणारर प्रदतबल ंध म्हणू्यन कार करते; क्यायर 40 रध्ये उीकरणे जय करणाची प्रद्या प्रदिान क े ्यायी आिे, क्यायर 42 चे उी-क्यायर (1) एख्याद्या दिस्तऐरजारर योगररता रुदांक ्यायार्याये्याये आिे िे प्ररादणत करणाची तरतू्यदि करते आदण क्यायर 42 चे उी-क्यायर (2) पशा प्रराणीकरणारुळे उदरणारे ीररणार ्यायागू्य करते."

48. 1899 चा कायद्याची वायी राज्यासाठानी रिसू्य्याय सुरदकत करणासाठानी आिे आदण दफयारदिी्याया तास दिेणाचे साधन म्हणू्यन ताचा राीर क े ्याया जाऊ नये, पसे स्पि क े लानंतर ख्यंडलिीीठानाने पसा दनष्कषर काढ्याया की शुल आदण दिंडलि भरलानंतर रुदांदकत नस्यायेला साधनांरर काररार क े ्यायी जाऊ शकते.सुरुरातीचे दिोष दिू्य र क े ्याये जाऊ शकतात आदण सुरुराती्याया दशिा न ्यायार्यायेला दिस्तऐरजारर कायद्यात गैर- कायदिा रानणाचा दरदधरंडलिळाचा िेतू्य कधीच नसतो.

49. पदधदनयर 1899 चा तरतुदिींनुसार ज्या दिस्तऐरजारर दशिारोतरबल करणे आरशक आिे, ीरंतु दिस्तऐरजात पंतभू्यरत पस्यायेला वरिाराचा रैधतेरर ीररणार िोत नािी पशा दिस्तऐरजारर दशिारोतरबल करणात पयशसी िोणाचा घटाईनांशी िा कायदिा संबल ंदधत आिे. कायदिा, 1899 चा तो भाग चौरा रुदांक शुल न भरणाचा आकसमक ीररससरतींशी संबल ंदधत आिे आदण एकदिा राज्याचा रिसु्यायाचे वाज सुरदकत करणाचा उदेश दनदशत झा्याया की, आरशक रुदांक शुल भरलानंतर साधनांरर आधाररत दिावारर नेिरीच काररार क े ्यायी जाऊ शकते.

50. म्हणू्यन, आम्ही पसे रानतो की कायदिा, 1899 पंतगरत करतरता ीू्यणर क े ला जाऊ शकतात आदण कोणतािी दिस्तऐरजा्याया कायरचे परैध ठानररत नािी. आता, ्ाया्यायय दक ं रा ्यायरादि ्ायादधकरण 1899 चा कायद्यांतगरत कािी तुटाईी पसलास ता सुधारणाचे आदिेश दिेऊ शकते का िे ीािायचे आिे.

51. ्यायरादि िी दररादि दनराकरण करणाची एक प्रद्या म्हणू्यन सरज्यायी जाऊ शकते ज्यारध्ये ीकांचा करारादारे, दनयु् ्यायरादिाकडलिे दक ं रा ्यायरादि ्ायादधकरणाकडलिे दररादि सादिर क े ्याया जातो, ज्यांचाकडलिे ीकांरधी्याय सिरतीनुसार ्यायागू्य पस्यायेला कायद्यानुसार दररादि सोडलिरणाचे पदधकारकेत आिे.रैकसलकररता, ्ाया्याययाबल ािेरी्याय ीकांरधी्याय दररादिांरर पधर-्ादयक ीद्धतीने पदभदनणरय करणारी एक यंतणा म्हणू्यन िे सरज्याये जाऊ शकते.

52. दररादि दनरारणासाठानी प्राधा्ाची ीद्धत म्हणू्यन ्यायरादिाची प्रद्या भारतात नरीन नािी. प्राचीन दिंदिू्य सादिताती्याय दरदानांनुसार, 'बल ृिदि् परणक उीदनषदि' िा सरारत जुना जात गंर आिे ज्यारध्ये सध्याचा ्यायरादिाशी जरळू्य न संबल ंदधत पस्यायेला प्रणा्यायीचा उलेख्य आिे कारण तात 'ीुगा' दक ं रा सरादनक ्ाया्यायये, 'शेणी ' दक ं रा सरान वरसाय करणारे ्यायोक आदण 'क ु ्याय' दक ं रा सराजाचा ताच भागाती्याय सारादजक बल ाबल ींशी संबल ंदधत सदिस यासारख्या दरदरध ्यायरादि संसरा सरादरि आिेत. ररी्याय सरर संसरांना ींच म्हटाई्याये गे्याये आदण एकदततीणे ींचायत सराीन करणात आ्यायी. दप्ररी कौस््यायने रैत्याया सीतना दररुद्ध रररराडलिा दररना [12 एआयआर 1934 ीी. सी. 105] या प्रकरणात या्याया दिुजोरा ददि्याया आिे, ज्यारध्ये पसे आढळू्य न आ्याये आिे की दनरडलि ू्य न आ्यायेला ींचायतीकडलिे ीक रादि ीाठानरत पसत आदण प्रचद्यायत कायदिेशीर तसेच नैदतक आधारांरर आधाररत दररादिाचा योग आदण सर्ायी तोडलिगा काढणाचा ततारर आधाररत िा दनणरय दिेणास या ्ायदनणारयक संसरा जबल ाबल दिार िोता.

53. 1772 सा्यायी इंगजांनी ीदि्याये बल ंगा्याय रेगु्यायेशन पंर्यायात आणलानंतर भारताती्याय ्यायरादिाची वरसरा आणख्यी दरकदसत झा्यायी.या पदधदनयरानंतर, सरर दररादि ्यायरादिाकडलिे सादिर करणात आ्याये आदण ताचा दनणरयाचे रू्यल ्ाया्याययाने ीाररत क े ्यायेला कोणतािी आदिेशासारख्येच िोते. ीुढे, 1781 चा बल ंगा्याय रेगु्यायेशन रध्ये येरे उदि् ध ृ त क े लाप्रराणे तरतू्यदिीचा दिेख्यी्याय सरारेश आिेःि "्ायाधीश दशफारस करतात आदण ीककारांनी ीरस्पर सिरतीने एका व्ीचा ्यायरादिासरोर िजर रािणासाठानी ीककारांरर स्ी न करता तांना शक पसे्याय दततका दिबल ार आणतात. कोणतािी ्यायरादिाचा कोणतािी दनणरय, तोीयरल त बल ाजू्य्याया ठाने र्याया जाऊ नये जोीयरल त सबल ळ ीुरावासि दिोन दररासािर साकीदिारांचा शीरेदारे सांदगत्याये जात नािी की ्यायरादि तांचा दनणरय दिेणाचा दिरमान घोर दक ं रा पंशतःि भिाचाराचे दिोषी िोते ". 13 सी. वी. नागाजुरन रेडी, सी. ीी. सी. (सुधारणा ) कायदिा, 1999 चा ीाररभू्यरीरर ्यायरादिाची भू्यदरका, भारतीय ्यायरादि ीररषदि,

54. रर नरू्यदि क े ्यायेला क्यायराररू न िे पगदिी स्पि िोते की बल ंगा्याय रेगु्यायेशनरध्ये ीककारांचा ीरस्पर करारानुसार ्यायरादिाचा प्रद्येदारे दररादि सोडलिरणास सकर करणाचा तरतुदिी आिेत, दरशेषतःि कराराचा जबल ाबल दिायया आदण भागीदिारी क ृ तींचा उलंघनाशी संबल ंदधत दररादिांसाठानी पशा तरतुदिी आिेत. राज्याने पंर्यायात आण्यायेला सरारत जु्ा कायद्यात म्हणजेच ददिराणी प्रद्या संदिता, 1859 रध्येिी ्यायरादिा्याया सरान दरळा्याये्याये िोते. दरशेषतःि, ददिराणी प्रद्या संदिता, 1908 चा ीररदशि II रधी्याय तरतुदिीत ्यायरादिाशी संबल ंदधत प्रद्या सरादरि िोती.या रैधादनक तरतुदिी प्रारुख्याने दिोन प्रकारचा ्यायरादिांशी संबल ंदधत आिेतःि i) कोणतािी प्र्यायंदबल त ददिराणी ख्यटाईलात ्ाया्याययांनी रध्यसरी सुरू क े ्यायी. ii) ज्या ्यायरादिारध्ये ्ाया्याययाचा कोणतािी सिभाग दक ं रा िस्तकेी नसे्याय.

55. या दिोन प्रकारचा ्यायरादिावदतरर्, "रैधादनक ्यायरादि" म्हणू्यन ओळख्य्याया जाणारा दतसरा प्रकारचा ्यायरादि दरकदसत झा्याया ज्यारध्ये ्यायरादिाची प्रद्या कायद्याती्याय तरतुदिींदारे दनयंदतत क े ्यायी जाते. https: //www. icaindia. co. in/icanet/quterli/apr-june2002/ica[5]. html (Last accessed on 22nd January, 2023 at 10: 50 pm).

56. ्यायरादि वरसरेती्याय रोठाना दरकास ्यायरादि कायदिा, 1899 चा पदधदनयरानंतर झा्याया, ज्याची इंगजी ्यायरादि कायदिा, 1899 शी पगदिी तु्यायना करता येऊ शकते.िा कायदिा भारताती्याय ्यायरादिाचा पंर्यायबल जारणीचा ददिशेने ीदि्याये ीाऊ्याय म्हणू्यन सरज्याया जाऊ शकतो.्यायरादि कायदिा, 1899 सुरुराती्याया सरर प्रेदसडलिे्ी शिरांना ्यायागू्य िोता आदण रादिाचा सुरुरातीचा संदिभारीासू्यन ्यायरादिाचा प्रद्या ्ादयक िस्तकेी पसस्त्ात िोता..

57. झीाट्याने बल दि्यायता काळाबल रोबल र, भारताती्याय ्यायरादि वरसरेचा उत्क्रांती्याया दिेख्यी्याय गती दरळा्यायी.ददिराणी प्रद्या संदिता, 1908 रध्ये क्यायर 89 पंतगरत सरादरि पस्याये्यायी तरतू्यदि सरादरि करणासाठानी सुधारणा करणात आ्यायी िोती, जी क े रळ ्यायरादिाची उीयु्ता आदण पंर्यायबल जारणीशी संबल ंदधत िोती.20 वा शतकाचा सुरुराती्याया, ्यायरादि िा दररादि दनरारणासाठानी एक सीकारािर रागर म्हणू्यन उदियास आ्याया आदण ताची राढती ्यायोकदप्रयता ीू्यणर करणासाठानी, दरदधरंडलिळाने, ्यायरादि कायदिा, 1940 (याीुढे 'कायदिा, 1940' म्हणू्यन संदिदभरत) ्यायागू्य क े ्याया.्यायरादिाचा सरू ीात दररादि दनरारणासाठानी ज्यायदि आदण करी ख्यदचरक ीद्धत उी्यायब् करू न दिेणाचा प्रारदरक उदेशाने िा कायदिा, 1940 ्यायागू्य करणात आ्याया. तरादी, 1940 चा कायद्याती्याय तरतुदिींचा वारिाररक राीरात पनेक पीयारयता पसस्त्ात िोता.

58. 1940 चा कायद्यात इंगजी ्यायरादि कायदिा, 1934 पंतगरत पस्यायेला तरतुदिींप्रराणेच पनेक तरतुदिी िोता ीरंतु तरीिी तात बल ाह दनराााचा पंर्यायबल जारणीसाठानी कोणतीिी तरतू्यदि नवती. तसेच, कायदिा, 1940 रधी्याय तरतुदिींरुळे ्यायरादि कायररािीचा दतन्ही टाईप्ांरर, म्हणजे, रादि ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणाीू्यरा, ्यायरादि कायररािी प्र्यायंदबल त पसताना आदण ्यायरादि दनणरय ीाररत क े लानंतर, ्ायवरसरेचा िस्तकेी सुकर झा्याया.

59. कायदिा, 1940 पंतगरत पस्यायेला तरतुदिींचा पकायरकर कायरीद्धतीरर ्ायवरसरेकडलि ू्य न दनयदरतीणे टाईीका क े ्यायी जात पसे. गुरू नानक फाऊ ं डलिेशन दररुद्ध रतन दसंग पँडलि स् [14 (1981) 4 एस. सी. सी 634] या प्रकरणात ्ायरू्यता डलिी. ए. दिेसार यांनी नोंदिर्याये्याये ख्या्यायी्याय दनरीकण येरे नरू्यदि करणे योग आिेःि "1. कायरसरू ीी, रेळख्याऊ, गुंतागुंतीचा आदण रिागाा ्ाया्याययीन कायरीद्धतींनी दरधीजांना प्रद्यातक दनरररक कलना टाईाळत, रादि दरटाईरणासाठानी करी औीचाररक, पदधक प्रभारी आदण रेगरान ीयारयी रंच शोधणास प्ररृत्त क े ्याये आदण यारुळे ते ्यायरादि कायदिा, 1940 कडलिे रळ्याये. तरादी, या कायद्यांतगरत ज्या ीद्धतीने कायररािी क े ्यायी जाते आदण ्ाया्याययांरध्ये दरना पीरादि आवान ददि्याये जाते, तारुळे रकी्यायांरध्ये िसे झा्याये आिे आदण कायदिेशीर ततजांरर दर्यायाी करणाची रेळ आ्यायी आिे".

60. या ्ाया्याययाने ीुढे भारतीय पन रिारंडलिळ दररुद्ध जोदगंदिरीा्याय रोदिंदिरीा्याय आदण इतर [15 (1989) 2 एससीसी 347] या प्रकरणात पसे दनरीकण नोंदिर्याये की ्यायरादिाचे दनयरन करणारा कायदिा करी तांदतक आदण संीू्यणर प्रद्या सरता आदण दनिकता दनदशत करू न वारिाररक सरसांसाठानी पदधक योग पसारा. या ्ाया्याययाने इतकी तीव्र टाईीका करू निी, दरदधरंडलिळाने दिीघर काळ 1940 चा कायद्यात कोणतीिी सुधारणा क े ्यायी नािी.

61. 20 वा शतकाचा उत्तराधारतच भारताती्याय ्यायरादिाचा दरकासात रोठाने बल दि्याय झा्याये.1991 रधी्याय आदररक उदिारीकरण आदण सरकारचा सरान धोरणांरुळे ीरदिेशी गुंतरणू्यक आकदषरत करणासाठानी पनुक ू्य ्याय राताररण दनरारण करणाची गरज भास्यायी.तारुळे, भारतीय दरधी आयोगाचा 76 वा पिरा्यायाचा तसेच Model UNCITRAL law चा आधारे दरदधरंडलिळाने कायदिा, 1996 ्यायागू्य क े ्याया.कायदिा, 1996 िा ्यायरादिाची प्रद्या दकफायतशीर, करी तांदतक आदण जगभराती्याय प्रचद्यायत आंतरराि् ीय ीद्धतींनुसार बल नरणाचा उदेशाने, 16 ऑगस 1996 ीासू्यन ्यायागू्य झा्याया.

62. भारताती्याय ्यायरादिाचा दरकासासाठानी एक रोठाना बल दि्याय िा कायदिा, 1996 चा पदधदनयरानंतर झा्याया.भारतीय दरधी आयोगाचा 76 रा पिरा्याय [16 भारतीय दरधी आयोग, ्यायरादि कायदिा, 1940 ररी्याय 76 रा पिरा्याय] तसेच Model UNCITRAL law चा आधारे, ्यायरादिाची प्रद्या दकफायतशीर, करी तांदतक आदण जगभराती्याय प्रचद्यायत आंतरराि् ीय ीद्धतींनुसार बल नरणाचा उदेशाने कायदिा,1996 ्यायागू्य करणात आ्याया.ीकांरधी्याय दररादि दनरारणासाठानी प्रभारी आदण ज्यायदि प्रद्या प्रदिान करणे तसेच ्यायरादिाचा प्रद्येत ्ाया्याययीन िस्तकेीाची वायी रयारददित करणे िा दरदधरंडलिळाचा िेतू्य िोता. [17 ीररिे दि ्रांक 4 (v), उदेश आदण कारणांचे दरधान, ्यायरादि आदण सरेटाई कायदिा, 1996.] भारत िळू्य िळू्य इतर वरसरेती्याय ्यायरादिाचा घडलिारोडलिींशी सुसंगत राहन दकरान ्ादयक िस्तकेीाचा ददिशेने राटाईचा्याय करत आिे.

63. या ्ाया्याययाचा घटाईनाीीठानाने एस. बल ी. ीी. पँडलि क ं ीनी दररुद्ध ीटाईे्याय इंदजदनपररंग द्यायदरटाईेडलि आदण इतर [18 (2005) 8 एससीसी 618] रधी्याय 2015 ीू्यराचा सुधारणा वरसरेचे ीरीकण करताना पसे म्हटाई्याये आिे की ्यायरादि/्यायरादि ्ायादधकरणाचा पदधकारकेताशी संबल ंदधत सरर प्रारदरक दक ं रा उंबल रयाररी्याय सरसांची ्ाया्याययादारे कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 पंतगरत तीासणी क े ्यायी जारी. दरधी आयोगाने आीला 246 वा पिरा्यायात कायद्याची िी ससरती बल दि्यायणाचा प्रयत क े ्याया िोता, ज्यारध्ये ख्या्यायी्यायप्रराणे नरू्यदि क े ्याये आिेःि "जोीयरल त िस्तकेीाचा सरू ीाचा संबल ंध आिे, तोीयरल त पशी दशफारस क े ्यायी जाते की ्यायरादि करारा्याया आवान दिेणायया युस्रादिाचा दररोधात ्ाया्यायय/्ादयक प्रादधकरणाचे सक ृ तदिशरनी सराधान झालास ते ्यायरादिाची दनयु्ी करती्याय आदण/दक ं रा ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरती्याय. या सुधारणेरध्ये पशी कलना करणात आ्यायी आिे की, ्यायरादिाचा करार पसस्त्ात नािी दक ं रा तो रदबल ात्याय आिे पसे आढळलासच ्ादयक प्रादधकरण ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणार नािी. जर ्ाया्याययीन प्रादधकरणाचे पसे रत पसे्याय की सक ृ तदिशरनी ्यायरादि करार पसस्त्ात आिे, तर ते दररादि ्यायरादिाकडलिे ीाठानरे्याय आदण ्यायरादि कराराचे पसस्त् शेरटाईी ्यायरादि ्ायादधकरणादारे दनधारररत क े ्याये जार्याय. तरादी, जर ्ाया्याययीन प्रादधकरणाने पसा दनष्कषर काढ्याया की करार पसस्त्ात नािी, तर दनष्कषर पंदतर पसे्याय आदण सक ृ तदिशरनी नािी. ्यायरादिाचा करार रदबल ात्याय आिे की नािी याबल ाबल त दनणारयक दनणरय घेत्याया जार्याय, पसेिी या सुधारणेरध्ये नरू्यदि करणात आ्याये आिे. " [19 भारतीय कायदिा आयोग पिरा्याय ्रांक 246 ्यायरादि आदण सरेटाई कायदिा 1996 रधी्याय सुधारणा, ीृष. 43]

64. या पिरा्यायात, भारतीय दरधी आयोगाने पसा दनष्कषर काढ्याया आिे की ्यायरादिाचा प्रद्येती्याय ्ादयक िस्तकेी ्यायरादिाचा प्रद्येती्याय दर्यायंबल ात ्यायकणीय राढ करतो आदण शेरटाईी ्यायरादिाचा ्यायाभ नाकारतो.ीररिे दि 24 रध्ये दरधी आयोगाने ख्या्यायी्यायप्रराणे नरू्यदि क े ्यायेःि "्यायरादि कायररािीचा पगदिी उंबल रयारर ्यायरादिांचा दनयु्ीसाठानी बल राच रेळ ख्यचर क े ्याया जातो पसे ददिसू्यन आ्याये आिे". [20 ीररिे दि ्रांक 24, पिरा्याय ्रांक 246, भारतीय दरधी आयोग.]

65. दरधी आयोगाने 1996 चा कायद्याती्याय क्यायर 11 रध्ये उी-क्यायर (6 ए) सरादरि करणाची सू्यचना क े ्यायी िोती, जी दरदधरंडलिळाने 1996 चा कायद्याती्याय 2015 चा सुधारणेदारे सीकार्यायी िोती. क्यायर 11 (6 ए) दनःिसंददििीणे ताचा िेतू्यने पसे दिशरदरते की, "सरर् ्ाया्यायय दक ं रा, यराससरती, उ् ्ाया्यायय, उीक्यायर (4) दक ं रा उीक्यायर (5) दक ं रा उीक्यायर (6) पन्वये क े ्यायेला पजारची तीासणी करताना, कोणतािी ्ाया्याययाचा कोणतािी दनणरय, हक ू्य र दक ं रा आदिेश पसू्यनिी, क े रळ ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाची तीासणी करणे रयारददित ठाने रे्याय".

66. क्यायर 11 (6 ए) सि 2015 ची सुधारणा आदण तानंतरचा सुधारणा ्यायरादि ्ायशाताचा या उत्क्रांतीशी सुसंगत आिेत.प्ररुख्य कायदिा, 1996 रधी्याय सुधारणांचा शंख्य्यायेसि, िे पगदिी स्पि आिे की दरदधरंडलिळ भारताती्याय रेगाने दरकदसत िोत पस्यायेला ्यायरादि वरसरेशी सतत सं्यायग आिे आदण ्यायरादि प्रद्येत ्ाया्याययांचा िस्तकेीाची वायी करी करणाचा उदेशाने दरदरध आवाने ता्याया जोडलित आिेत. भारतीय पन रिारंडलिळाचा (उीरो्) प्रकरणात ्ायरू्यता सवसाची रुख्यजा यांनी व् क े ्यायेला ख्या्यायी्याय रतांनुसार भारताती्याय ्यायरादि चा्यायर्याया जार्याय पशी पीेका क े ्यायी जाऊ शकतेःि "7. आीण ्यायरादिाचा कायदिा सोीा, करी तांदतक आदण ससरदतदरशेषचा रास्तदरकतेसाठानी पदधक जबल ाबल दिार बल नर्याया ीादिजे, ीरंतु ्ाय आदण दनिकतेचा दनयरांना प्रदतसादि ददि्याया ीादिजे आदण ्यायरादिा्याया पशा प्रद्या आदण दनकषांचे ीा्यायन करणास भाग ीाडलि्याये ीादिजे जे क े रळ ीकांरध्ये ्ाय करू नच नवे तर ्ाय झा्याया आिे पशी भारना दनरारण करू न आतदररास दनरारण करे्याय". दरदधरंडलिळाचा ररी्याय प्रराणे चचार क े ्याये्याया दिीकोन या ्ाया्याययाने रा् क े ्याया आिे.

67. ाू्यरो फ े ्यायगुएरा, एस. ए. दर. गंगाररर ीोटाईर द्यायदरटाईेडलि [21 (2017) 9 एससीसी 729] चा प्रकरणात, या ्ाया्याययाने 2015 चा सुधारणेदारे आण्यायेला बल दि्यायांची वायी आदण ीररणार ख्या्यायी्याय शबात स्पि क े ्याया: "48. क्यायर 11 (6-प) चा राचनातू्यन, दरदधरंडलिळाचा िेतू्य स्पि आिे तो म्हणजे ्ाया्याययाने ्यायरादि कराराचे पसस्त् या क े रळ एका ीै्यायू्यरर ्यायक ददि्याये ीादिजे आदण ताची आरशकता आिे. ्यायरादि करार आिे की नािी िे ठानररणासाठानी कोणते घटाईक आिेत िा ीुढचा प्रश्न आिे.ताररचा ठानरार/दनणरय सोीा आिे-कराराती्याय ीकांरध्ये उदर्यायेला दररादिांशी संबल ंदधत ्यायरादिाची तरतू्यदि करणारे ख्यंडलि करारारध्ये आिे का िे ीािणे आरशक आिे.

59. एस. बल ी. ीी. आदण क ं ीनी [एस. बल ी. ीी. आदण क ं ीनी दररुद्ध ीटाईे्याय इं. द्याय. (2005) 8 एस. सी. सी. 618 ] आदण बल ोघारा ीॉ्यायीफ ॅ बल [राि् ीय दररा क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध बल ोघारा ीॉ्यायीफ ॅ बल (ीी) द्यायदरटाईेडलि, (2009) 1 एस. सी. सी. 267 या प्रकरणांरधी्याय दनणरयांचा दिीने 1996 चा कायद्याचा क्यायर 11 (6) पंतगरत पदधकाराची वायी ्यायकणीयरीता दरस्तृत िोती. 2015 रध्ये करणात आ्यायेला सुधारणेीयरल त िी ससरती कायर रादि्यायी. सुधारणेनंतर, ्ाया्याययांना फ् िे ीािणाची गरज आिे की ्यायरादि करार पसस्त्ात आिे की नािी- ना जास्त, ना करी. ्यायरादिाचा दनयु्ीचा टाईप्ारर ्ाया्याययाचा िस्तकेी करी करणे िे दरदधरंडलिळाचे धोरण आदण उदेश आिे आदण क्यायर 11 (6-प) रध्ये सरादरि क े ्यायेला या िेतू्यचा आदिर क े ्याया ीादिजे."

68. रायारती टाई्ेदडलिंग प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध प्रदि् य ु त दिेर बल ररन [22 (2019) 8 एससीसी 714] या ख्यटाईलाती्याय तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने या ससरती्याया दिुजोरा ददि्यायाःि "10. िी ससरती पसलाने, िे स्पि आिे की या ्ाया्याययाने 2015 चा सुधारणेीू्यरा ददि्याये्याया कायदिा, ज्यारध्ये करार झा्याया आिे की नािी आदण सराधान झा्याये आिे की नािी िे तीासणे सरादरि िोते, तो आता कायदिेशीररीता रद करणात आ्याया आिे. िी ससरती पसलाने, [युनायटाईेडलि इंदडलिया इनशुर् क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध पँदटाईक आटाईर एक्सीोटाई्रस (ीी) द्यायदरटाईेडलि, (2019) 5 एस. सी. सी. 362] या उीरो् दनका्यायाती्याय तकारल शी सिरत िोणे कठानीण आिे, कारण क्यायर 11 (6-ए) ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाचा तीासणीीुरते रयारददित आिे आदण ाू्यरो फ े ्यायगुएरा, एस. ए. रधी्याय दनका्यायात नरू्यदि क े लाप्रराणे संक ु दचत परारने सरजू्यन घेत्याये ीादिजे".

69. पशा प्रकारे, 2015 चा सुधारणेचे उददि ्यायरादि कायररािीचा संदिभर- ीू्यरर टाईप्ारर ्यायरादि कराराची रैधता नवे तर पसस्त्ाचे दकरान ीरीकण करणाीयरल त ्ाया्याययांचा िस्तकेी रयारददित करणे िे आिे.

70. कायदिा, 1996 चे क्यायर 11 (6 ए) ख्या्यायी्यायप्रराणे आिेःि "सरर् ्ाया्यायय दक ं रा, ीररससरतीनुसार, उ् ्ाया्यायय, उीक्यायर (4) दक ं रा उीक्यायर (5) दक ं रा उीक्यायर (6) पंतगरत कोणतािी पजारचा दरचार करताना, कोणतािी ्ाया्याययाचा कोणतािी दनणरय, हक ू्य र दक ं रा आदिेश पसू्यनिी, ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाचा तीासणीीुरते रयारददित रािी्याय".

71. क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत चौकशीची वायी "्यायरादि कराराचे पसस्त्" तीासणाीुरती रयारददित आिे. '्यायरादि कराराचे पसस्त्' िा राकांश 2015 ची सुधारणा सादिर क े लानंतर दरदधरंडलिळाचा िेतू्य ्यायकात घेऊन शबशःि परारने सरजू्यन घेत्याया ीादिजे. 2015 चा सुधारणेचा सरारेशानंतर कायद्याची ससरती पशी आिे की ्ाया्याययांचा दकरान िस्तकेी पसारा. संदिभर -ीू्यरर टाईप्ारर ीरीकण करणासाठानी ्ाया्याययाची रयारददित वायी िी आिे की कायदिा, 1996 चा क्यायर 7 पंतगरत संदिदभरत रध्यसरी करार सक ृ तदिशरनी पसस्त्ात आिे की नािी ज्यारध्ये ख्या्यायी्याय घटाईकांचा दनधारररत सारारेश आिेःि (i) ्यायरादिाचा करार ्यायेख्यी आिे की नािी; (ii ) ्यायरादिाचा रुख्य कराराचे घटाईक ीू्यणर झा्याये आिेत का ? (iii) दिुदररळ प्रसंगी, गंभीर आकेी पसलास, दररादिाचा दरषय रध्यसरीयोग आिे की नािी िे ते तीासू्य शकते.

72. सक ृ तदिशरनी कोणतािी रैध ्यायरादि करार पसस्त्ात नािी पसा दनष्कषर येर ीयरल त ्ाया्याययीन प्रादधकरण क्यायर 8 (1), ज्याची जागा 2015 चा सुधारणेने घेत्यायी िोती तानुसार ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणाचे आदिेश दिेते. तरतुदिीत राीर्याये्यायी भाषा ख्या्यायी्यायप्रराणे आिेःि "8. ्यायरादि करार पसणायया ीररससरतीत ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणाचा पदधकार.- (1) ज्या ्ाया्याययीन प्रादधकरणासरोर ्यायरादि कराराचा दरषय पस्यायेला प्रकरणात काररार क े ्यायी जाते, ते ्ाया्यायय, जर ्यायरादि कराराचा ीककार दक ं रा ताचादारे दक ं रा ताचा पंतगरत दिारा करणारी कोणतीिी व्ी, दररादिाचा दरषयाबल ाबल त ताचे ीदि्याये दनरेदिन सादिर करणाचा तारख्येनंतर सरर् ्ाया्याययाचा दक ं रा कोणतािी ्ाया्याययाचा कोणतािी दनणरय, हक ू्य र दक ं रा आदिेश पसू्यनिी, सक ृ तदिशरनी कोणतािी रैध ्यायरादि करार पसस्त्ात नािी पसे पढळू्य न आलास, ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरे्याय. (2) जोीयरल त तो रू्यळ ्यायरादि करार दक ं रा ताची योगररता प्ररादणत प्रत सोबल त नसे्याय तोीयरल त उीक्यायर (1) रध्ये दनददिरि क े ्यायेला पजारची दिख्य्याय घेत्यायी जाणार नािी: [ीरंतु, जेरे रू्यळ ्यायरादि करार दक ं रा ताची प्ररादणत प्रत उीक्यायर (1) पंतगरत ्यायरादिाचा संदिभारसाठानी पजर करणायया ीकाकडलिे उी्यायब् नसे्याय आदण उ् करार दक ं रा प्ररादणत प्रत ता कराराचा दिुसयया ीकाकडलिे ठाने र्यायी पसे्याय, तेरे पशा प्रकारे पजर करणारा ीक ्यायरादि कराराचा प्रतीसि पसा पजर दिाख्य्याय करे्याय आदण ्ाया्यायया्याया रागणी करणारी यादचका दिाख्य्याय करे्याय की ताने दिुसयया ीका्याया रू्यळ ्यायरादि करार दक ं रा ताची योगररता प्ररादणत प्रत ता ्ाया्याययासरोर सादिर करणास सांगारे.] (3) उीक्यायर (1) पन्वये पजर करणात आ्याया पस्याया आदण िा रुदा ्ादयक प्रादधकरणासरोर प्र्यायंदबल त पस्याया तरी, ्यायरादि सुरू क े ्याया जाऊ शकतो दक ं रा चा्यायू्य ठाने र्याया जाऊ शकतो आदण ्यायरादिाचा दनणरय ददि्याया जाऊ शकतो.

73. या क्यायरात पशी तरतू्यदि आिे की सक ृ तदिशरनी ्यायरादि करार पसस्त्ात आिे की नािी िे ्ाया्यायय तीासू्य शकते.या क्यायराची वायी दरधी आयोगाचा 246 वा पिरा्याय [23 भारतीय कायदिा आयोग पिरा्याय ्रांक 246 ्यायरादि आदण सरेटाई कायदिा 1996 रधी्याय सुधारणा, ीृष. 43] या ररू न ीादि्यायी जाऊ शकते, ज्याने क्यायर 8 रध्ये सुधारणा सुचरताना ख्या्यायी्याय टाईीी क े ्यायी आिेःि " ्यायरादिाकडलिे प्र्यायंदबल त काररारचा संदिभर रागणायया पजारचा दरचार करताना ्ादयक प्रादधकरणाने सीकार्यायेला दिोन-चरणीय प्रद्येचा या सुधारणेरध्ये दरचार क े ्याया आिे. ्यायरादि करार पसस्त्ात नािी दक ं रा तो रदबल ात्याय आिे पसे आढळ्याये तरच ्ादयक प्रादधकरण ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणार नािी, पसे या सुधारणेरध्ये नरू्यदि क े ्याये आिे. जर ्ाया्याययीन प्रादधकरणाचे पसे रत पसे्याय की सक ृ तदिशरनी ्यायरादि करार पसस्त्ात आिे, तर ते दररादि ्यायरादिाकडलिे ीाठानरे्याय आदण ्यायरादि कराराचे पसस्त् शेरटाईी ्यायरादि ्ायादधकरणादारे दनधारररत क े ्याये जार्याय. तरादी, जर ्ाया्याययीन प्रादधकरणाने पसा दनष्कषर काढ्याया की करार पसस्त्ात नािी, तर दनष्कषर पंदतर पसे्याय आदण सक ृ तदिशरनी नािी. ्यायरादि करार रदबल ात्याय आिे की नािी याबल ाबल त दनणारयक दनणरय घेत्याया जार्याय, पसेिी या सुधारणेरध्ये नरू्यदि करणात आ्याये आिे."

74. क्यायर 8 चे साधे राचन पसे सू्यदचत करते की ते ्ाया्याययाचा िस्तकेीा्याया क े रळ एका ीै्यायू्यीुरते रयारददित करते, म्हणजे जेवा सक ृ तदिशरनी कोणतािी रैध ्यायरादि करार पसस्त्ात नािी दक ं रा तो रदबल ात्याय आिे पसे आढळते.

75. कायदिा, 1996 ची योजना स्पि करते की क्यायर 8 आदण 11 िे ीू्यरक सरू ीाचे आिेत आदण दिोन्ही ्यायरादिाचा संदिभारत संबल ंदधत आिेत आदण ्ादयक िस्तकेीाचा संदिभारत सरान वायी आदण कका आिे.क्यायर 8 आदण 11 पंतगरत ्ाया्यायया्याया िे प्रकरण ्यायरादिाकडलिे दक ं रा ्यायरादिाची दनयु्ी करणासाठानी ीाठानरारे ्यायागते, ीरंतु ीकाने ्यायरादि कराराचे सक ृ तदिशरनी पसस्त् सरादीत क े ्याये आिे, ना जास्त ना करी. ताच रेळी, जर ्यायरादि कराराची रैधता रर नरू्यदि क े लाप्रराणे सक ृ तदिशरनी आधारारर दनदशत क े ्यायी जाऊ शकत नसे्याय तर ्ाया्याययाने या प्रकरणाचा संदिभर ददि्याया ीादिजे, म्हणजे "जेवा शंका पसे्याय, तेवा संदिभर घा".

76. या टाईप्ारर, आम्ही िे दनरीकण करू इसितो की ्यायरादिाचा दनयु्ीसाठानी दरदरध उ् ्ाया्याययांनी रैधादनक योजना तयार क े ्यायी आिे आदण या ्ाया्याययाने दिेख्यी्याय-ज्या्याया Chief Justice of India Scheme, 1996, दारे ्यायरादिांची दनयु्ी म्हणतात, ताचा संबल ंदधत भाग ख्या्यायी ददि्याया आिेःि -

1. संदकय शीषरक.- या योजने्याया Chief Justice of India Scheme, 1996, दारे ्यायरादिांची दनयु्ी म्हटाई्याये जाऊ शकते.

2. दरनंती सादिर - क्यायर 11 चे उीक्यायर (4) दक ं रा उीक्यायर (6) पन्वये रुख्य ्ायाधीशांना दरनंती ्यायेख्यी क े ्यायी जार्याय आदण तासोबल त - (प) रू्यळ ्यायरादि करार दक ं रा ताची योगररता प्ररादणत प्रत; (बल ) ्यायरादि कराराचा ीककारांची नारे आदण ीत्ते; (क) आधीच दनयु् क े ्यायेला ्यायरादिांची नारे आदण ीत्ते, पसलास; (डलि) ज्या व्ीचे दक ं रा संसरेचे नार आदण ीत्ता, ज्यांचारर ीककारांनी रध्यसरी कराराचे कोणतेिी कार सोीर्याये आिे, तांनी रा् क े ्यायेला दनयु्ी प्रद्येनुसार; पसलास, (र) ीकांचा करारानुसार ्यायरादिांना आरशक पस्याये्यायी ीातता, जर पसे्याय तर,; (फ) रादिाचे सररसाधारण सरू ी आदण सरसेचे रुदे यांचे रणरन करणारे संदकय ्यायेख्यी दनरेदिन; (ग) रादगत्याये्याया ददि्यायासा दक ं रा उीाय; आदण (ि) रुख्य ्ायरू्यतरकडलिे दरनंती करणाीू्यरा, यराससरती, क्यायर 11 चे उीक्यायर (4) दक ं रा उीक्यायर (6) पन्वये ीू्यणर करणाची पटाई ीू्यणर झा्यायी आिे, पसे संबल ंदधत दिस्तऐरजाने सरदररत क े ्याये्याये प्रदतजाीत.

77. ज्या योजनेचा संदिभर दिेणात आ्याया आिे ताररू न िे स्पि िोते की पजरदिार ्यायरादिाचा दनयु्ीसाठानी ्ाया्याययात जात पसताना, ताने रू्यळ ्यायरादि करार दिाख्य्याय करणे पीेदकत नािी आदण कराराची प्ररादणत प्रत जी प्रतकात कायदिा, 1899 चा क्यायर 2 (14) पंतगरत संदिदभरत सं्यायेख्य नािी, ती संदिभर-ीू्यरर टाईप्ारर जोडलि्यायी जाऊ शकते.

78. ्यायरादि कराराची प्ररादणत प्रत सादिर करणाचा संदिभारत, पसे म्हणणे ीुरेसे आिे की वरसाय/वारसादयक वरिारांशी संबल ंदधत ीकांरध्ये पंर्यायात आण्याये्याया ्यायरादि करार िा कायदिा, 1908 पंतगरत पदनरायरीणे नोंदिणीक ृ त पसणे आरशक नािी. दिस्तऐरजाची नोंदिणी करणाचे बल ंधन रा्यायरत्ता िस्तांतरण कायदिा, 1882 या रू्यळ कायद्याचा तरतुदिींनुसार ्यायागू्य क े ्याये जाते, तर कायदिा, 1908 चे क्यायर 17 पसे आदिेश दिेते की सरारर संीदत्त Rs.100-दक ं रा ताहन पदधक रू्यलाचा कोणतािी पदधकार, िि दक ं रा वाज दनरारण करणारे रृतुीतीय नस्याये्याया सं्यायेख्य पदनरायरीणे नोंदिणीक ृ त पसणे आरशक आिे.दिस्तऐरज नोंदिणीक ृ त नसलास, िस्तांतरण रदबल ात्याय आिे, कोणतेिी रैध िस्तांतरण नािी आदण सं्यायेख्यारध्ये रणरन क े ्याये्यायी रा्यायरत्ता सं्ादरत िोत नािी, उदिािरणारर, 1908 चा कायद्यांतगरत नोंदिणी िोरीयरल त गिाण प्रद्या ीू्यणर आदण पंर्यायबल जारणी करणायोग िोत नािी.

79. दनःिसंददििीणे, ्यायरादि करार िा एक साररजदनक दिस्तऐरज नािी ज्यासाठानी कायदिा, 1908 चा क्यायर 17 पंतगरत संदिदभरत पदनरायर नोंदिणी आरशक आिे आदण ीुरारा कायदिा, 1872 चा क्यायर 74 दक ं रा 75 पंतगरत साररजदनक दिस्तऐरजाची प्ररादणत प्रत दरळू्य शकते. साररजदनक दिस्तऐरजाचा ताबल ा पस्याये्याया सरकारी पदधकारी ीुरारा कायदिा, 1872 चा क्यायर 76 पंतगरत संदिदभरत ताची प्ररादणत प्रत उी्यायब् करू न दिेऊ शकतो.्यायरादिाचा करार पदनरायरीणे नोंदिणीक ृ त करणे आरशक नसलास, कायदिा, 1908 चा क्यायर 17 चा वायी आदण ककेत, पसा ्यायरादिाचा करार/दिस्तऐरज ीसलक डलिोरेन रध्ये उी्यायब् नािी आदण तो साररजदनक दिस्तऐरज नािी ज्याची प्ररादणत प्रत ीुरारा कायदिा, 1872 चा क्यायर 74 पंतगरत संदिदभरत क े ्यायी जाऊ शकते, ज्यारध्ये पयशसी झालास ीुरारा कायदिा, 1872 चा क्यायर 79 पंतगरत संदिदभरत दिस्तऐरजाची प्ररादणत प्रत पसलाचे गृिीत धरणाचा प्रश्न उदरू्य शकत नािी.

80. दिुसयया शबांत, जेवा कायदिा, 1908 चा क्यायर 17 पंतगरत संदिदभरत ्यायरादि कराराची पदनरायर नोंदिणी करणे आरशक नसते, तेवा दनयर, 1996 चा योजनेपंतगरत प्ररादणत प्रतचा संदिभर ्यायरादि कराराची प्ररादणत प्रत पसलाचे ददिसते, जी कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ्यायरादिाचा दनयु्ीचा उदेशाने संदिभर-ीू्यरर टाईप्ारर कायदिा, 1996 चा क्यायर 7 ची आरशकता दसद्ध करते. तारुळे ्यायरादि करारारर दशिारोतरबल न करणाबल ाबल त दक ं रा संदिभर - ीू्यरर टाईप्ारर पधुरा दशिारोतरबल क े लाबल द्याय आकेी घेणाचा प्रश्न उदरू्य शकत नािी.

81. कायदिा, 1996 चे क्यायर 16 ख्या्यायी नरू्यदि क े ्याये आिेःि - "16. ्यायरादि ्ायादधकरणाची ताचा पदधकारकेतारर दनणरय घेणाची करता.- (1) ्यायरादि ्ायादधकरण ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाशी संबल ंदधत दक ं रा रैधतेशी संबल ंदधत कोणतािी आकेीांररी्याय दनणरयासि सतःिचा पदधकारकेतारर दनणरय दिेऊ शक े ्याय आदण ता उदेशासाठानी- (प) कराराचा भाग पस्याये्याया ्यायरादि ख्यंडलि िा कराराचा इतर पटाईींीासू्यन सतंत करार रान्याया जार्याय; आदण (बल ) करार रदबल ात्याय आिे या ्यायरादि ्ायादधकरणाने घेत्यायेला दनणरयारुळे ्यायरादि ख्यंडलि परैध ठानरतो. (2) ्यायरादि ्ायादधकरणा्याया पदधकारकेत नािी पशी यादचका बल चार दनरेदिन सादिर क े लानंतर करता येणार नािी; तरादी, एख्याद्या ीककारा्याया ताने ्यायरादिाची दनयु्ी क े ्यायी आिे दक ं रा ताचा दनयु्ीरध्ये भाग घेत्याया आिे या क े रळ कारणास्तर पशी यादचका दिाख्य्याय करणाीासू्यन रोख्य्याये जाणार नािी. (3) ्यायरादि ्ायादधकरण ताचा पदधकाराचा वायीचा ी्यायीकडलिे जात आिे, पशी यादचका ्यायरादिाचा कायररािीदिरमान ताचा पदधकाराचा वायीचा ी्यायीकडलिे पसलाचे आरोी क े ्याये्याये प्रकरण उीससरत िोताच उीससरत क े ्यायी जार्याय. (4) ्यायरादि ्ायादधकरण, उीक्यायर (2) दक ं रा उीक्यायर (3) रध्ये दनददिरि क े ्यायेला प्रकरणांीैकी कोणतािी एका प्रकरणात, दर्यायंबल ्ाय राटाईत पसलास, नंतरची यादचका सीकारू शक े ्याय. (5) ्यायरादि ्ायादधकरण उी-क्यायर (2) दक ं रा उी-क्यायर (3) रध्ये दनददिरि क े ्यायेला यादचक े रर दनणरय घेर्याय आदण जेरे ्यायरादि ्ायादधकरण यादचका फ े टाईाळणाचा दनणरय घेर्याय, तेरे ्यायरादि कायररािी सुरू ठाने रे्याय आदण ्यायरादि दनणरय दिेर्याय. (6) पशा ्यायरादिाचा दनणरयारुळे वदरत झा्याये्याया ीक क्यायर 34 नुसार पसा ्यायरादिाचा दनणरय बल ाजू्य्याया ठाने रणासाठानी पजर करू शकतो."

82. कायदिा, 1996 चा क्यायर 16 (1) रध्ये पशी कलना करणात आ्यायी आिे की ्यायरादि ्ायादधकरण सतःिचा पदधकारकेतारर दनणरय घेऊ शकते, ज्यारध्ये ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाचा दक ं रा रैधतेचा संदिभारत कोणतािी आकेीारर दनणरय दिेणे सरादरि आिे. िी तरतू्यदि कॉमेटाईेझ-कॉमेटाईेझचा दसद्धांतारर आदण दर्यायगनशी्यायतेचा दसद्धांतारर आधाररत आिे. कोमेटाईेझ-कॉमेटाईेझचा दसद्धांताचा परर पसा आिे की ्यायरादि ्ायादधकरण ताचा सतःिचा पदधकारकेतारर दनणरय घेणासाठानी ीुरेसे सकर आिे. ताच रेळी, दर्यायगनशी्यायतेचा दसद्धांत ्यायरादि ख्यंडलिास वारसादयक करारातू्यन रेगळे करतो.क्यायर 16 (1) (प) रध्ये ्यायरादिाचा क्यायराचे पसस्त् गृिीत धर्याये आिे आदण ते कराराचा इतर पटाईींीेका सतंत रान्याये जाणे पदनरायर क े ्याये आिे.क्यायर 16 पंतगरत, ्यायरादि कराराची रैधता दनदशत करणाचे पदधकारकेत ्यायरादि ्ायादधकरणाकडलिे पसे्याय.

83. उत्तराख्यंडलि ीू्यरर सैदनक कलाण दनगर द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध नॉदिरनर को्याय फीि द्यायदरटाईेडलि [24 (2020) 2 एससीसी 455] या ख्यटाईलाती्याय या ्ाया्याययाचा घटाईनाीीठानाने ाू्यरो फ े ्यायगुएरा (उीरो् ) या प्रकरणाती्याय दनणरयारर भर दिेताना पसे म्हटाई्याये आिे की रयारदिेशी संबल ंदधत रुदे ्यायरादिासरोर उीससरत क े ्याये ीादिजेत. ्ाया्याययाने ीुढी्याय दनरीकण नोंदिर्यायेःि "7.8. क्यायर 11 (6-प) रध्ये सरादरि क े ्यायेला पदधभारी ख्यंडलिाचा आधारारर, ीटाईे्याय इंदजदनपररंग [एस. बल ी. ीी. पँडलि क ं ीनी दररुद्ध ीटाईे्याय इंग. द्यायदरटाईेडलि, (2005) 8 एस. सी. सी. 618] आदण बल ोघारा ीॉ्यायीफ ॅ बल [राि् ीय दररा क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध बल ोघारा ीॉ्यायीफ ॅ बल (ीी) द्यायदरटाईेडलि, (2009) 1 एस. सी. सी. 267] या प्रकरणात ीू्यराचे दिेणात आ्याये्याये दनणरय कायदिेशीररीता रद करणात आ्याये. तीासणीची वायी आता क े रळ क्यायर 11 चा टाईप्ाती्याय ्यायरादि कराराचा पसस्त्ाीुरती रयारददित आिे आदण ताहन पदधक कािी नािी".

84. संदिभर-ीू्यरर टाईप्ारर ्ाया्यायये क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ज्याचे ीरीकण करू शकतात ते क े रळ ्यायरादि कराराचे 'पसस्त्' आिे, तर ्यायरादि ्ायादधकरणा्याया '्यायरादि कराराचा पसस्त्ाशी संबल ंदधत दक ं रा रैधतेशी संबल ंदधत कोणतािी उदेशांचे' ीरीकण करणाचे पदधकारकेत पसे्याय.

85. कायदिा, 1996 चा क्यायर 45 रध्ये पशी तरतू्यदि आिे कीःि "ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणाचा ्ादयक प्रादधकरणाचा पदधकार.- भाग 1 रध्ये दक ं रा ददिराणी प्रद्या संदिता, 1908 (5/1908) रध्ये कािीिी सरादरि पस्याये तरी, ्ाया्याययीन प्रादधकरण, जेवा क्यायर 44 रध्ये ज्या संदिभारत ीककारांनी करार क े ्याया आिे पशा प्रकरणाती्याय काररार जय करते, तेवा, ीकांीैकी एकाचा दक ं रा ताचा राध्यरातू्यन दक ं रा ताचा पंतगरत दिारा करणायया कोणतािी व्ीचा दरनंतीररू न, ीककारांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरे्याय, [जोीयरल त सक ृ तदिशरनी पसे आढळत नािी] की िा करार दनरररक, पकायरकर दक ं रा पंर्यायात आणणास पसररर आिे."

86. क्यायर 11 (6 ए) आदण क्यायर 45 रधी्याय साधी तु्यायना दिशररते की क्यायर 45 ख्यू्यी वाीक आिे.क्यायर 45 पंतगरत, करार 'परा्', 'दनसष्क्रिय' दक ं रा 'पंर्यायात आणणास पसररर' आिे की नािी िे ्ादयक प्रादधकरणा्याया तीासारे ्यायागते.

87. रिर स्पोटाईर गुी (रॉररशस) द्यायदरटाईेडलि दर. एर. एस. एर. सॅटाईे्यायारटाई (दसंगाीू्यर) ीीटाईीर द्यायदरटाईेडलि [25 (2014) 11 एस. सी. सी. 639] प्रकरणात या ्ाया्याययाने ीररिे दि 33 ते 35 रध्ये 'शू्य् आदण ीोकळ', 'दनसष्क्रिय' आदण 'पंर्यायात आणणात पकर' या संजांरधी्याय फरक ख्या्यायी स्पि क े ्याया आिेःि "33. तरादी, शी. गोीा्याय सुबरणर यांचा पसा युस्रादि आिे की ्यायरादिाचा करार दनसष्क्रिय िोता दक ं रा तो पंर्यायात आणणास पसररर िोता कारण फसरणुकीचा आरोीांची चौकशी ्यायरादिादारे नवे तर ्ाया्याययादारे क े ्यायी जाऊ शकते."पकायरकर दक ं रा पंर्यायात आणणास पसररर" या शबांचा परारररी्याय पदधकारी शी. सुबरणर यांचा या युस्रादिाचे सरररन करत नािीत. कायद्याचा क्यायर 45 रधी्याय "दनसष्क्रिय दक ं रा पंर्यायात आणणास पसररर" िे शब या दनणरयाचा ीररिे दि 27 रध्ये नरू्यदि क े लाप्रराणे ्ू्ययॉक र कनवेनशन चा क्यायर 2 (3) रधू्यन घेत्याये गे्याये आिेत. ऑक्सफडलिर युदनवदसरटाईी प्रेसने प्रकादशत क े ्यायेला रेडलिफनर पँडलि िंटाईर ऑन इंटाईरनॅशन्याय आदबल रटाई्ेशन (5 री आरृत्ती) ने ्ू्ययॉक र कनवेनशनरध्ये राीरला गे्यायेला या शबांचा परर ीररिे दि 148 रध्ये स्पि क े ्याया आिे., तो ीुढी्याय प्रकारेःि "ीदिला दिीकेीात 'दनसष्क्रिय' आदण 'पंर्यायात आणणात पसररर' या संजांरधी्याय फरक ीािणे कठानीण आिे.तरादी, ्यायरादि ख्यंडलि दनसष्क्रिय आिे जेरे ताचा ीररणार म्हणू्यन ीररणार िोणे बल ंदि झा्याये आिे, उदिािरणारर, ीकांदारे का्यायरयारदिेचे ीा्यायन करणात पयशसी िोणे दक ं रा ीकांनी तांचा ्यायरादि ख्यंडलि पप्रतकीणे रद क े ्याया आिे. याउ्यायटाई, 'पंर्यायात आणणास पसररर' िी पदभव्ी संभाव ्यायरादि कायररािीचा पदधक वारिाररक ीै्यायू्यंचा संदिभर दिेते पसे ददिसते. उदिािरणारर, जर कािी कारणास्तर ्यायरादि ्ायादधकरण सराीन करणे पशक पसे्याय तर ते ्यायागू्य िोते".

34. पल्बटाईर जा एन वॅन डलिेन बल गर यांनी आय. सी. सी. ए. चा संक े तसरळारर (www. arbitrationicca. org/media/0/12125884227980/new_yo rk_convention_of- 1958_overview. pdf) प्रकादशत झा्यायेला 'दि ्ू्ययॉक र कनवेनशन, 1958-एन ओवव्रय ू्य ' या शीषरकाचा ्यायेख्यात ्ू्ययॉक र कनवेनशनचा क्यायर II(3) चा संदिभर दिेत पसे म्हटाई्याये आिेःि "'शू्य् आदण ीोकळ ' या शबांचा परर ता प्रकरणांचा संदिभर म्हणू्यन ्यायार्याया जाऊ शकतो दजरे ्यायरादि करारारर सुरुरातीीासू्यनच कािी परैधतेचा ीररणार िोतो, जसे की चुकीचे सादिरीकरण, दिबल ार, फसरणू्यक दक ं रा पनुदचत प्रभारारुळे संरतीचा पभार. 'दनसष्क्रिय' िा शब पशा प्रकरणांचा सरारेश करतो दजरे ्यायरादि कराराचा प्रभार करी झा्याया आिे, जसे की ीकांकडलि ू्य न रद करणे. 'पंर्यायात आणणास पसररर' िे शब ता प्रकरणांना ्यायागू्य िोतात पसे ददिसते जेरे ्यायरादि प्रभारीीणे सुरू क े ्याया जाऊ शकत नािी. दजरे ्यायरादि ख्यंडलि ख्यू्यी पस्पिीणे द्यायदि्याये्याये पसे्याय दक ं रा कराराचा इतर पटाईी तराकदरत सि-सरान रंच ्यायरादि ख्यंडलि करणाचा ीकांचा िेतू्यशी दरसंगत पसती्याय दतरे िे घडलि ू्य शकते.या प्रकरणांरध्येिी, ्ाया्यायये ्यायरादिाचा बल ाजू्यने कराराचा तरतुदिींचा परर ्यायारतात."

35. 'ररकदगशन पँडलि कॉ्र् ऑफ फॉरेन आदबल रटाई््याय परॉडलि्रस' िे ीुस्तकःिए ग्लोबल ्याय कॉरेटाईरी ऑन दि ्ू्ययॉक र कनवेनशन बल ाय ्ोंक े, नॅदसदरएं टाईो, एटाई प्याय. (आरृत्ती.) (2010) ीी. 82 पसे सांगते की: "बल हतेक पदधकाययांचे पसे रत आिे की शू्य् आदण ीोकळ या संजेशी संबल ंदधत सरान दरचारधारा आदण दिीकोन दनसष्क्रिय आदण पंर्यायात आणणास पसररर या पटाईींना दिेख्यी्याय ्यायागू्य िोतात. ीररणारी, बल हसंख्य पदधकारी या संजांचा एकसरान परर ्यायारत नािीत, ीररणारी एकसरानतेचा दिुदिररी पभार दनरारण िोतो. ता सारधानीतासि, आम्ही दरदशि उदिािरणांचे दरिंगार्यायोकन दिेऊ दजरे ्यायरादि करार दनसष्क्रिय (दक ं रा नसारेत) दक ं रा पंर्यायात आणणास पसररर पसलाचे रान्याये गे्याये िोते. दनसष्क्रियतेचा पटाईींचा संदिभर पशा प्रकरणांशी आिे जेरे ्ाया्यायया्याया ीकांना ्यायरादिाकडलिे ीाठानरणास सांदगत्याये जाते तोीयरल त ्यायरादि कराराचा प्रभार संीुिात आ्याया आिे.उदिािरणारर, ्यायरादिाचा दनणरय दक ं रा ताच दरषयाशी आदण ीकांशी संबल ंदधत ्ायदनराााचा प्रभारासि ्ाया्याययाचा दनणरय आधीच झा्याया पसे्याय तर ्यायरादिाचा करार प्रभारी िोत नािी.तरादी, ्यायरादिाचा करार दनसष्क्रिय करणासाठानी क े रळ पनेक कायररािीचे पसस्त् ीुरेसे नािी. यावदतरर्, ्यायरादि सुरू करणासाठानी दक ं रा दनराडलिा सादिर करणाची रेळ-रयारदिा का्यायबल ाह झा्यायी पसलास, ्यायरादि करार संीुिात येऊ शकतो, ीरंतु या रेळे ची रुदित संीलारुळे याीुढे ्यायरादिाचा करारा्याया बल ांधी्याय रािणाचा ीकांचा िेतू्य िोता. शेरटाईी, पनेक पदधकाययांनी पसे रत रांडलि्याये आिे की जर ीक रध्यसरी राफ करतात तर ्यायरादि कराराचा ीररणार िोणार नािी.्यायरादिाचा पदधकार राफ करणाचे पनेक संभाव रागर आिेत.सारा्त:, एख्याद्या ीकाने, ्ाया्याययीन कायररािीरध्ये, ्यायरादि कराराचे योग प्रकारे आरािन न क े लास दक ं रा तो ्यायरादि करारादारे सरादरि पस्यायेला दिावांचा सद्यीणे ीाठानीुरारा करत पसलास, रध्यसरी करणाचा पदधकार सोडलि ू्य न दिेर्याय. "

88. ररी्याय स्पि क े ्याये्याये ीरीकण क्यायर 11 (6 ए) चा भाषेत उदरत नािी.म्हणजेच, दरदधरंडलिळाने क्यायर 11 (6 ए) रधी्याय क्यायर 45 ची भाषा घेत्यायी नािी, जी ्यायरादि कराराचा 'पसस्त्ाीुरती' रयारददित आिे.

89. कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) ची रयारददित वायी या राननीय ्ाया्याययाचा तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने प्ररीण इ्यायेसक्कस प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध गॅ्यायेक्सी इन्ा पँडलि इंदजदनपररंग प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि [26 (2021) 5 एससीसी 671] या प्रकरणात ीररिे दि 17 रध्ये दरद्या दोद्यायया आदण इतर (उीरो्) या प्रकरणात आी्याये पर्यायंदबल ् ठाने रू्यन स्पि क े ्यायी आिे, ज्यारध्ये पसे म्हटाई्याये गे्याये िोते की ्यायरादि कराराचे पसस्त् म्हणजे पसा करार आिे जो कायदिा, 1996 आदण संदरदिा पदधदनयर, 1872 या दिोन्हीचा आरशकता ीू्यणर करतो आदण जेवा तो कायद्याने ्यायागू्य करता येतो. युनायटाईेडलि इंदडलिया इनशुर् क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि आदण इतर दर. ि्य ुं दिार इंदजदनपररंग पँडलि कन्कन क ं ीनी द्यायदरटाईेडलि आदण इतर [27 (2018) 17 एससीसी 607 ] रधी्याय दनका्यायारर दिेख्यी्याय प्ररीण इ्यायेसक्कस प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) या प्रकरणारध्ये दररास ठाने र्याया गे्याया िोता की क्यायर 11 (6 ए) िे क्यायर 16 आदण क्यायर 45 चा बल रोबल रीने 'पसस्त्' शी संबल ंदधत आिे, जे ्यायरादि कराराचा 'रैधते' शी संबल ंदधत आिे. ्यायरादि कराराचे 'पसस्त्' आदण 'रैधता' यात ख्यरोख्यरच फरक आिे.

90. The UNCITRAL Model Law दिेख्यी्याय ्यायरादि कराराचे कदरत पसस्त् नसणे, परैधता दक ं रा बल ेकायदिेशीरीणा यारर आधाररत पदधकारकेताती्याय आकेी आदण रा् रैध ्यायरादि कराराचा वायीरर आधाररत पदधकारकेताती्याय आकेी यांचाती्याय फरकाचे सरररन करतो. [28 आंतरराि् ीय वारसादयक ्यायरादिाररी्याय UNCITRAL Model Law (1985), 2006 रध्ये सीकार्यायेला सुधारणांसि, येरे उी्यायब् आिेःिhttps: //uncitral. un. org/sites/ uncitral. un. org/files/media- documents/uncitral/en/19-09955_e_ebook. pdf ] ्यायरादि कराराचे पसस्त् दक ं रा रैधतेसि पदधकारकेताचे सरर रुदे ्यायरादि ्ायादधकरणादारे ठानरर्याये जाऊ शकतात, रग ते कायदिा, 1996 चा क्यायर 16 पंतगरत ्ाया्याययाचा िस्तकेीादारे दनयु् क े ्याये गे्याये पसोत दक ं रा नसोत.

91. क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत '्यायरादि कराराचे पसस्त्' दनदशत करणासाठानी, संदिभर- ीू्यरर टाईप्ारर, जर दिस्तऐरजारर योगररता दशिारोतरबल क े ्याये्याये नसे्याय दक ं रा तारर ीुरेशी दशिारोतरबल क े ्याये्यायी नसे्याय, ज्यारुळे ्यायरादि करार आधी चचार क े लाप्रराणे आदण दनदशत क े लाप्रराणे पसस्त्ात नािी, या कारणारुळे कायदिा, 1899 चा ीररणार िोऊ शकत नािी. संदिभर- ीू्यरर टाईप्ारर ्ाया्यायये/्ादयक प्रादधकरणाने ज्याचे ीा्यायन करणे आरशक आिे तो एकरेर दरचार म्हणजे कायदिा, 1996 चा क्यायर 7 पंतगरत संदिदभरत ्यायरादि कराराचे सक ृ तदिशरनी पसस्त् आिे ज्यारध्ये पशी तरतू्यदि आिे: "7. ्यायरादिाचा करार.- (1) या भागात, "्यायरादि करार" म्हणजे करारातक पसो रा नसो, दनधारररत कायदिेशीर संबल ंधांचा संदिभारत तांचात दनरारण झा्याये्याये दक ं रा तांचात उदरू्य शकणारे सरर दक ं रा कािी दररादि ्यायरादिाकडलिे सादिर करणासाठानी ीकांकडलि ू्य न क े ्याये्याया करार. (2) ्यायरादिाचा करार िा कराराती्याय ्यायरादि ख्यंडलि सरू ीात दक ं रा रेगळा कराराचा सरू ीात पसू्य शकतो. (3) ्यायरादिाचा करार ्यायेख्यी पसे्याय. (4) ्यायरादिाचा करार ्यायेख्यी पसे्याय, जर तो -- (प) ीककारांनी साकरी क े ्यायेला दिस्तऐरजात पसे्याय; (बल ) ीतांची दिेराणघेराण, दिू्य रधनी, तार दक ं रा दिू्य रसंचारचा इतर राध्यरांची दिेराणघेराण (इ्यायेक्ॉदनक राध्यरांदारे संरादिासि) की जी कराराचा पदभ्यायेख्य प्रदिान करते; दक ं रा (क) दिारा आदण बल चार दरधानांची दिेराणघेराण ज्यारध्ये कराराचा पसस्त्ारर एका ीकाकडलि ू्य न आरोी क े ्याये जातात आदण दिुसयया ीकाकडलि ू्य न नाकार्याये जात नािीत. (5) ्यायरादि ख्यंडलि पस्यायेला दिस्तऐरजाती्याय कराराती्याय संदिभर िा ्यायरादि करार पसतो, जर करार ्यायेख्यी पसे्याय आदण संदिभर पसा पसे्याय की तो ्यायरादि ख्यंडलि कराराचा भाग िोर्याय."

92. म्हणजेच, संदिभर- ीू्यरर टाईप्ारर क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ्ाया्याययाची रयारददित वायी म्हणजे कायदिा, 1996 चा क्यायर 7 पंतगरत संदिदभरत ्यायरादि करार सक ृ तदिशरनी पसस्त्ात आिे की नािी िे तीासणे, ज्यारध्ये क े रळ ख्या्यायी्याय घटाईक दनधारररत आिेत: (i) ्यायरादिाचा करार ्यायेख्यी आिे का? (ii) ्यायरादि कराराचे रुख्य कराराचे घटाईक ीू्यणर झा्याये आिेत का? (iii) दिुदररळ प्रसंगी, गंभीर आकेी पसलास, दररादिाचा दरषय रध्यसरीयोग आिे की नािी िे ते तीासू्य शकते.

93. संदिभर आदिेशात आदण दरशेषतःि ीररिे दि 20,24 आदण 58 रध्ये, पसा संदिभर दिेणात आ्याया आिे की रिाराि् रुदांक कायदिा, 1958 रुदांक शुल भरणासाठानी ्यायरादि कराराचा पधीन नािी. रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (ररी्याय) [29 (2021) 4 एससीसी 379] चे संबल ंदधत ीररिे दि ख्या्यायी्यायप्रराणे आिेतःि "20. आम्ही रिाराि् रुदांक कायदिा, 1958 आदण तात सं्यायग क े ्यायेला पनुसू्यची 1 चा तरतुदिींचा काळजीीू्यररक पभास क े ्याया आिे, ज्यात क्यायर 3 रध्ये दनददिरि क े ्यायेला सं्यायेख्यांची यादिी आिे, ज्यारर रुदांक शुल आकार्याये जाते. आम्हा्याया आढळ्याये आिे की ्यायरादिाचा करार रुदांक शुल आकारणायोग सं्यायेख्य म्हणू्यन पनुसू्यचीरध्ये सरादरि क े ्याये्याया नािी. रिाराि् रुदांक कायदिा, 1958 चा पनुसू्यची 1 चा रुदा ्. 12 रध्ये रुदांक शुल भरणासाठानी शुल आकारणासाठानी ्यायरादिाने ददि्याये्याया दनणरय सरादरि आिे. शीरार र. ीी. सी. द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध ररओग्लास सो्यायर एस. ए. [शीरार र. ीी. सी. द्यायदरटाईेडलि दररुद्ध ररओग्लास सो्यायर एस. ए., (2018) 18 एस. सी. सी. 313] या प्रकरणात, या ्ाया्याययाने पसे म्हटाई्याये आिे की रुदांक शुल भरणे भारतात क े ्यायेला आदिेशांना ्यायागू्य िोते, ीरंतु तात रुदांक कायदिा, 1899 चा पनुसू्यचीरध्ये सरादरि न क े ्यायेला "बल ाह दनराााचा " सरारेश नािी.

24. रिाराि् रुदांक कायद्याचा क्यायर 3 रध्ये रुदांक शुल भरणासाठानी ्यायरादिाचा करार क े ्याया जात नािी, जो कायद्याचा पनुसू्यचीरध्ये नरू्यदि क े ्यायेला इतर करारांप्रराणे नािी. िे स्पि कारण आिे की ्यायरादि करार िा वारसादयक करारातू्यन उदरणारे दररादि ्यायरादिाचा राध्यरातू्यन सोडलिरणाचा करार आिे. दर्यायगनशी्यायतेचा दसद्धांताचा आधारे, ्यायरादि करार िा पंतदनरदित वारसादयक कराराीेका रेगळा आदण दभन करार पसलाने, रू्यळ कराराीासू्यन सतंतीणे दटाईक ू्य न रािी्याय.जरी रू्यळ करार ीुरावारध्ये सीकारािर नस्याया, दक ं रा रुदांक शुल न भरलारुळे काररार क े ्यायी जाऊ शकत नस्यायी तरीिी ्यायरादिाचा करार परैध, पंर्यायात आणणायोग दक ं रा पसस्त्ात नस्याये्याया रान्याया जाणार नािी.

58. या ्ाया्याययाचा ीाच ्ायाधीशांचा घटाईनाीीठानाने पदधक ृ तीणे तोडलिगा काढणासाठानी ख्या्यायी्याय रुदा संदिदभरत करणे आम्हा्याया योग राटाईतेःि "रुदांक कायदिा, 1899 चा क्यायर 35 रध्ये सरादरि पस्याये्यायी रैधादनक बल ंदिी, कायद्याचा पनुसू्यचीसि राचन क े ्यायेला क्यायर 3 पंतगरत रुदांक शुल आकारणायोग सं्यायेख्यांना ्यायागू्य िोते का, पशा साधनांरध्ये सरादरि पस्याये्याया ्यायरादि करार, जो रुदांक शुल भरणासाठानी आकारणायोग नािी, तो पसस्त्ात नािी, पंर्यायात आणणायोग नािी दक ं रा परैध आिे, रू्यळ करार/सं्यायेख्यांरर रुदांक शुल भरणे प्र्यायंदबल त आिे"?

94. 3 ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने घेत्यायेला ददिकोनात तुटाईी पसलाचे ददिसते.कायदिा, 1899 चा पनुसू्यची 1 रध्ये ताचा क्यायर 5 रध्ये "करार दक ं रा करारनारा" या शीषरकाख्या्यायी एक परदशि (residuary) जाीन आिे ज्यारध्ये पसे म्हटाई्याये आिे की (क) प्रा प्रदिान क े ्याये नसलास-आठान आणे. क्यायर 5 रध्ये पसे दिशरदर्याये गे्याये आिेःि

5. कराराचा करार दक ं रा जाीन (प) जर दरदनरय ीताचा दर्ीशी संबल ंदधत पसे्याय तर; दिोन आणे (बल ) सरकारी रोख्ये दक ं रा दनगदरत क ं ीनीती्याय दक ं रा इतर दनगदरत संसरेती्याय सरभागांचा दर्ीशी संबल ंदधत पसलास जास्तीत जास्त दििा रुीयांचा पधीन राहन, प्रतेक रु. साठानी एक पन. 10, 000/- दक ं रा रोख्ये दक ं रा सरभागाचा रू्यलाचा कािी भाग (क) प्रा तरतू्यदि क े ्यायी नसलास आठान आणे सर्यायती करार दक ं रा करारनारा-(प) क े रळ रस्तू्य दक ं रा रस्तू्यंचा दर्ीसाठानी दक ं रा ताचाशी संबल ंदधत, जो ्रांक 43 पंतगरत आकारणायोग टाईीी दक ं रा जाीन नािी; (बल ) कोणतािी कजारसाठानी दक ं रा ताचाशी संबल ंदधत क े द सरकार्याया दनदरदिा सरू ीात क े ्याये्याये;

95. ्ाया्याययीन िस्तकेीासाठानी रागर रोकळा करू न तरतुदिींरागी्याय कायदिेशीर िेतू्यचे उलंघन िोणार नािी पशा प्रकारे क्यायर 11 (संदिभर- ीू्यरर टाईपा) चा टाईप्ारर ्यायरादि कराराची तीासणी सारधदगरीने क े ्यायी ीादिजे.

96. तरादी, आम्ही कायदिा, 1996 चा क्यायर 9 ची वायी आदण कका यासंबल ंधीचा प्रश्नाचे ीरीकण करणाीासू्यन सतःि्याया ीरारृत्त करतो, ज्याचा संदिभर रेससर एन. एन. ग्लोबल ्याय रक रल टाईाइ्याय प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रधी्याय तीन ्ायाधीशांचा ख्यंडलिीीठानाने ददि्याया आिे, कारण सध्याचा संदिभर कायदिा, 1996 चा क्यायर 9 चा वायीचे ीरीकण करणाशी संबल ंदधत नािी आदण तो योग कायररािीत तीासणासाठानी ख्यु्याया ठाने रतो.

97. शेरटाईी, आरचा रतेःि i) तानुसार आम्ही पसे रानतो की ्यायरादि कराराची प्रत/प्ररादणत प्रत, जरी संदिभर - ीू्यरर टाईप्ारर छाी्याये्यायी पसो दक ं रा ीुरेशी रुदांदकत क े ्याये्यायी पसो, ती कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (6 ए) पंतगरत ्यायरादिाचा दनयु्ीचा उदेशाने पंर्यायबल जारणी करणायोग दिस्तऐरज आिे, जेरे ्ाया्याययीन िस्तकेी दकरान 2015 चा सुधारणेचा उदेश ्यायकात घेऊन क े रळ '्यायरादि कराराचा पसस्त्ाचा' सक ृ तदिशरनी तीासणीीुरता रयारददित पसे्याय आदण ्ाया्याययांनी कायदिा, 1996 चा क्यायर 11 (13) पंतगरत दरदित क े ्यायेला ्यायरादिाचा दनयु्ीसाठानीचा पनुसू्यचीचे काटाईेकोरीणे ीा्यायन क े ्याये ीादिजे. ii) ्यायरादि कराराची पीुरी दशिारोतरबल /पनारशक दशिारोतरबल दक ं रा रैधता इतादिींसि सरर प्रारदरक /रादिगस्त रुदे कायदिा, 1996 चा क्यायर 16 पंतगरत ्यायरादि/्यायरादि ्ायादधकरणाकडलिे ीाठानरता येतात, ज्या्याया कॉमेटाईेझ-कॉमेटाईेझचा दसद्धांतानुसार पसे करणाचा पदधकार आिे. iii) एस. एर. एस. टाईी एसेटाई्स प्रायवेटाई द्यायदरटाईेडलि (उीरो्) रधी्याय दनणरय फ े टाईाळणात आ्याया आिे. गररारे रॉ्याय रोप द्यायदरटाईेडलि (उीरो् ) चे ीररिे दि 22 आदण 29, जे दरद्या दोद्यायया आदण इतर (उीरो् ) रधी्याय ीररिे दि 146 आदण 147 रध्ये रंजू्यर आिेत, ते ता रयारदिेीयरल त रद क े ्याये जातात.

98. संदिभार्याया पनुसरू न उत्तर ददि्याये आिे.

99. या ्ाया्यायया्याया ददि्यायेला संदिभार्याया उत्तर दिेताना ्ायदरत शी. गौरर बल ॅनजा यांनी ददि्यायेला योगदिानाची आम्ही प्रशंसा करतो. -------------------------्ायरू्यता (पजय रस्तोगी) नरी ददिली; 25 एदप्र्याय 2023. X-X-X-X [प्रकाशन योग्य ] भारताच्या सर्वोच्च न्यायालयात दिर्वाणी अपीलीय न्यायादिकार क्षेत्र दिर्वाणी अपील क्र. ३८०२-३८०३ /२०२० मेससस एन. एन. ग्लोबल मक ं टाइल पी. व्ही. टी. लललमटेड. यालिकाकर्ास लिरुद्ध मेससस इंडो युलनक फ्लेम लललमटेड आलि ईर्र उत्तरिादी न्यायदिणणय न्यायमूती, हृदिक े श रॉय. ए. प्रस्तािना बी. घटनापीठाकडे संदलभसर् होिे सी. एन. एन. ग्लोबल प्रकरिार्ील र्थ्ये डी. संदलभसर् प्रश्नार् बदलई. िलकलांिी लनिेदने एफ. मुद्ांक कायदा, १८९९ िी िैधालनक योजना जी. लिाद कायदा, १९६६ िी िैधालनक योजना i) लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११(६) अंर्र्सर् कायद्यािी उत्क्ांर्ी. ii) ii) २०१५ नंर्रिे कालखंड: कलम ११ (६ अ ) समालिष्ट करिे iii ) २०१९ नंर्रिी दुरुस्ती आलि भारर्ार्ील लिादाच्या संस्थात्मककरिािा आढािा घेण्यासाठी उच्चस्तरीय सलमर्ीिा अहिाल. एि. एस. एम. एस. टी. प्रकरिािर ििास आय. र्रिारे िर ििास जे. मुद्ांक कायदा, लिाद कायदा आलि संलिदा अलधलनयम यांच्यार्ील सहसंबंध १) लिाद कायदा हा एक लिशेष कायदा आहे. २) सुसंिादी रिना क े. र्ंत्रज्ञानािे आर्मन आलि व्यिहारांिे बदलर्े स्वरूप. एल. िेर्ळे पिािा लसद्धांर् एम. कॉम्पेटेंझ कॉम्पेटेंझ आलि भारर्ार्ील न्यायालयीन कोंडीिा मुद्दाएन. लिद्या द्ोललयािर ििास ओ. लनष्कषस ए. प्रस्तार्विा १. माझे लिद्वान बंधू, न्यायमूर्ी क े. एम. जोसेफ (स्वर्ःसाठी आलि न्यायमूर्ी अलनरुद्ध बोस यांच्यासाठी) यांिे लिद्वत्तापूिस मर् आलि लिद्वान बंधू न्यायमूर्ी सी. टी. रलिक ु मार यांिा िेर्ळा लनकाल िािण्यािा मला फायदा झाला.मात्र, बहुमर्ाच्या मर्ाशी आलि एकमर्ाने लदलेल्या लनिसयाशी सहमर् होण्यास मी असमथस ठरल्याबद्दल मला खेद आहे.िार्ल्स इव्हान्स ह्यूजेस १ [१ िार्ल्स इव्हान्स ह्यूजेस, द सुप्रीम कोटस ऑफ युनायटेड स्टेट्सिे इट्स फाऊ ं डेशन, मेथड्स अँड अलिव्हमेंट्स, (कोलंलबया युलनव्हलससटी प्रेस) ६८ (१९२८)] यांनी कोलंलबया लिद्यापीठार् लदलेल्या त्ांच्या एका व्याख्यानार्ील शब्ांिा पुनरुच्चार करर्ाना, आमिे अल्पसंख्याक मर् (मी स्वर्ः आलि लिद्वान बंधू न्यायमूर्ी अजय रस्तोर्ी, ज्ांनी िेर्ळे मर् लललहले आहे), भलिष्यार्ील लिंर्ाक्ांर् भािनेला र्सेि लिाद आलि समेट कायदा, १९९६ (थोडक्यार् 'लिाद कायदा,१९९६') आलि भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ (थोडक्यार् 'मुद्ांक कायदा,१८९९') यांच्यार्ील सहसंबंधािे परीक्षि करण्यासाठी आलि लिादाच्या क्षेत्रार्ील भार्धारकांच्या मनार् कोिर्ाही संभ्रम होऊ नये यासाठी र्ुंर्ार्ुंर्ीिे लनराकरि करण्यासाठी लिलधमंडळाच्या अलधकारांना आिाहन करूया. २. लिादाच्या कायसिाहीर् न्यायालयांच्या भूलमक े िर अनेक िषांपासून बरीि ििास होर् आहे.लििालदर् पक्षािी स्वायत्तर्ा हा लिाद प्रलक्येिा मुख्य र्ाभा आहे, परंर्ु जर पक्ष एकमर् होण्यार् अपयशी ठरले र्र न्यायालयांिी पयसिेक्षी भूलमका अत्ािश्यक बनर्े. आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिाद २ [२ अॅलन रेडफनस आलि मालटसन हंटर, रेडफनस आलि हंटर ऑन इंटरनॅशनल आलबसटरेशन (६ िी आिृत्ती, २०१५, ऑक्सफडस युलनव्हलससटी प्रेस), अध्याय ७, पररच्छे द ७. ०३] िरील रेडफनस आलि हंटर यांनी राष्टर ीय न्यायालये आलि लिाद न्यायालधकरिांमधील संबंधांिे ििसन खालीलप्रमािे क े ले आहेः "राष्टर ीय न्यायालये आलि लिाद न्यायालधकरिांमधील संबंध 'भार्ीदारी' असल्यािे म्हटले जार् असले र्री र्ी समानर्ेिी भार्ीदारी नाही.लिाद पक्षांच्या करारािर अिलंबून असू शकर्ो, परंर्ु र्ी कायद्यािर आधाररर् एक प्रिाली देखील आहे, जी राष्टर ीय आलि आंर्रराष्टर ीय स्तरािर प्रभािी होण्यासाठी त्ा कायद्यािर अिलंबून असर्े.लिादालशिाय राष्टर ीय न्यायालये अस्तस्तत्वार् असू शकर्ार्, परंर्ु न्यायालयांलशिाय लिाद अस्तस्तत्वार् राहू शकर् नाही.राष्टर ीय न्यायालयांिरील लिादािे हे अिलंलबत्व कोित्ा टप्प्यािर सुरू होर्े आलि कोित्ा टप्प्यािर संपर्े हे पररभालषर् करिे हा खरा मुद्दा आहे." [भर देण्यार् येर् आहे.] ३. लिाद कायदा, १९९६ अंर्र्सर् न्यायालयांिी पयसिेक्षी भूलमक े िे व्यापकपिे र्ीन भार्ांमध्ये िर्ीकरि क े ले जाऊ शकर्े, म्हिजे, लिाद कायसिाहीच्या प्रारंभापूिी, लिाद कायसिाही दरम्यान आलि लिादोत्तर टप्प्यािर. लिाद कायदा, १९९६ च्या भार् १ मधील कलम ८ आलि कलम ११ आलि लिाद कायदा, १९९६ च्या भार् २ मधील कलम ४५ लिशेषर्ः लिाद कायसिाही सुरू करण्यापूिी न्यायालयांच्या भूलमक े शी संबंलधर् आहेर्. जेथे लिादािा करार आहे र्ेथे कलम ८ "पक्षांना लिादाकडे पाठिण्याच्या अलधकाराशी" संबंलधर् आहे; कोित्ाही िैध लिादािा करार अस्तस्तत्वार् नाही असे प्रथमदशसनी न्यायालयािे समाधान होर् नाही र्ोपयंर् त्ार् लिादाच्या अलनिायस संदभाससाठी र्रर्ूद आहे. दुसरीकडे, कलम ११ (६), जेव्हा पक्ष लिादाच्या नािािर परस्पर सहमर्ी दशसिण्यार् लक ं िा लिाद कराराच्या संदभासर् लिादािी लनयुक्ती करण्यार् अयशस्वी ठरर्ार् र्ेव्हा 'लिादांिी लनयुक्ती' करण्यािी र्रर्ूद करर्े. लिाद कायदा, १९९६ च्या भार् २ मधील कलम ४५ हा "पक्षांना लिादाकडे पाठलिण्याच्या न्यालयक प्रालधकरिाच्या अलधकारािा" संदभस देर्ो. ४. येथे या संदभासर्, लिादािी कायसिाही सुरू होण्यापूिी न्यायालयीन हस्तक्षेपािी व्याप्ती र्पासली जार् आहे. मुद्ांक शुल्क भरण्याच्या अधीन राहून, लिाद करारांच्या अंमलबजाििीर्ील लिलंब आलि संबंलधर् मुद्ांक कायद्यानुसार, अंर्लनसलहर् दस्तऐिज मुद्ांलकर् क े लेले नसल्यास /पुरेसे मुद्ांलकर् क े लेले नसल्यास, लिाद करार अस्तस्तत्त्वार् नसलेला, लिलधबाह्य / रद्दबार्ल लक ं िा कायद्यानुसार अंमलार् आिण्यायोग्य असेल की नाही हे महत्त्वािे मुद्दे यार् उपस्तस्थर् क े ले जार्ार्. ५. लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११(६) अंर्र्सर् लिादािा करार सादर क े ला जार्ो र्ेव्हा मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ अंर्र्सर् 'रीर्सर मुद्ांलकर् नसलेले संलेख हे पुराव्यार् अस्वीकायस असिे ' या शीषसकाखालील िैधालनक प्रलर्बंध आकलषसर् होईल का, हा या संदभासर्ील लििाद्य प्रश्न (मुख्य प्रश्न) आहे. पररिामी, हा संदभस लिशेषर्ः लिाद कायदा, १९६६ च्या कलम ११ अंर्र्सर् लिादाच्या लनयुक्तीच्या टप्प्यािर न्यायालयाच्या हस्तक्षेपािी व्याप्ती आलि स्वरूप देखील र्पासर्ो. न्यालयक पुनरािलोकनाच्या व्याप्तीिरील र्ुंर्ार्ुंर् आलि अंर्लनसलहर् करारार् समालिष्ट असलेल्या अमुद्ांलकर् /अपुयास मुद्ांलकर् लिाद करारािी िैधर्ा/अंमलबजाििी क्षमर्ा या संदभासर् सोडिली जािे अपेलक्षर् आहे. बी. घटिापीठाकडे संिदभणत होणे ६. मेससस एन. एन. ग्लोबल मक ं टाइल प्रायव्हेट लललमटेड लिरुद्ध मेससस इंडो युलनक फ्लेम लललमटेड आलि इर्र ३ (थोडक्यार् 'एन. एन. ग्लोबल') [३ (२०२१) ४ एस एस सी ३७९] या प्रकरिार्ील र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने लिद्या द्ोललया आलि इर्र लिरुद्ध दुर्ास व्यापार कॉपोरेशन ४ (थोडक्यार् 'लिद्या द्ोललया') [ ४ (२०२१) २ एस एस सी १ ] या प्रकरिार्ील न्यायालयाच्या समन्वय खंडपीठाच्या पररच्छे द १४६ आलि १४७ मधील र्कासिर शंका घेर् या प्रकरिािी पाि न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने िौकशी करिे योग्य असल्यािे मानले. येथील न्यायालयासमोरील उपरोक्त लिद्या द्ोललया प्रकरि हे लिषयिस्तू लिादाशी संबंलधर् होर्े, परंर्ु या प्रश्नािा लनिसय घेर्ाना, त्ांनी र्रिारे िॉल टरॉप्स लललमटेड लिरुद्ध कोस्टल मरीन कन्स्ट्रक्शन्स अँड इंलजलनअररंर् लललमटेड ५ (थोडक्यार् "र्रिारे") [५ (२०१९) ९ एस एस सी २०९] मधील २- न्यायाधीशांच्या खंडपीठाच्या लनिसयाच्या पररच्छे द २२ आलि २९ िा मंजुरीसह उल्लेख क े ला. ७. एस. एम. एस. टी एस्टेट्स (पी) लललमटेड लिरुद्ध िांदमारी टी क ं पनी (पी) लललमटेड ६ (थोडक्यार् "एस. एम. एस. टी") [६ (२०११) १४ एस एस सी ६६] मधील लनिसयानंर्र, र्रिारे (उपरोक्त) मध्ये असे म्हटले र्ेले होर्े की व्यािसालयक करारािर मुद्ांक शुल्क न भरल्यास लिादािा करारही अिैध ठरेल आलि र्ो कायद्याने अस्तस्तत्वार् नसेल आलि अंमलार् आिर्ा येिार नाही. ८. एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त) प्रकरिार् या न्यायालयाने एस. एम. एस. टी. (उपरोक्त) मधील २ न्यायाधीशांच्या खंडपीठािा लनिसय रद्दबार्ल ठरिला, जो र्रिारे (उपरोक्त) मध्ये मान्यर्ेसह उद् धृर् करण्यार् आला होर्ा. ९. एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त) ने इर्र र्ोष्टींबरोबरि, कॉम्पेटेंझ कॉम्पेटेंझच्या च्या र्त्त्वािर आलि लिाद आलि समेट कायदा, १९९६ च्या कलम १६ अन्वये अंर्भूसर् क े लेल्या लिलर्नशीलर्ेच्या लसद्धांर्ािर (लिभक्तर्ेच्या लसद्धांर्ािर) लिद्या द्ोललया (उपरोक्त) आलि र्रिारे (उपरोक्त) मध्ये घेर्लेल्या मर्ाच्या योग्यर्ेिर शंका घेर्ली. या संदभासिी व्याप्ती पररभालषर् करिारे संबंलधर् पररच्छे द खाली नोंदिलेले आहेर्ः "३४. लिद्या द्ोललया [लिद्या द्ोललया लि. दुर्ास व्यापार कॉपोरेशन, (२०२१) २ एस. सी. सी. १ मधील र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाच्या पररच्छे द १४६ आलि १४७ मध्ये घेर्लेल्या दृलष्टकोनाच्या योग्यर्ेबद्दल आम्हाला शंका आहेः (२०२१) १ एस. सी. सी. (सी. आय. व्ही.) ५४९] र्ारिरे िॉल रोप्स लललमटेडच्या पररच्छे द २२ आलि २९ मधील लनष्कषांिा संदभस घेिे योग्य असल्यािे आम्ही मानर्ो.[ र्ारिरे िॉल रोप्स लललमटेड, व्ही कोस्टल मराईन क ं सटरकशनस.अँड एं जी. लललमटेड (२०१९) ९ एस. सी. सी. २०९: (२०१९) ४ एस. सी. सी. (सीव्ही. ) ३२४] ज्ािी लिद्या द्ोललया [लिद्या द्ोललया लिरुद्ध दुर्ास व्यापार कॉपोरेशन., (२०२१) २ एस. सी. सी १: (२०२१) १ एस. सी. सी (सीव्ही. ) ५४९ ] च्या पररच्छे द १४६ आलि १४७ मध्ये पाि न्यायाधीशांच्या घटनापीठािी पुष्टी करण्यार् आली आहे. ५६. एस. एम. एस. टी एस्टेट्स [एस. एम. एस. टी एस्टेट्स (पी) लललमटेड लिरुद्ध िांदमारी टी क ं पनी (पी) लललमटेड, (२०११) १४ एस. सी. सी. ६६: (२०१२) ४ एस. सी. सी. (सी. आय. व्ही.) ७७७] आलि र्रिारे [र्रिारे िॉल रोप्स लललमटेड लिरुद्ध कोस्टल मरीन कन्स्ट्रक्शन्स अँड एं जी. लललमटेड, (२०१९) ९ एस. सी. सी. २०९: (२०१९) ४ एस. सी. सी. (सी. आय. व्ही.) ३२४] व्यािसालयक करारािर मुद्ांक शुल्क न भरल्याने लिाद करारही अिैध ठरेल आलि र्ो कायद्याने अस्तस्तत्वार् नसेल आलि अंमलार् आिर्ा येिार नाही, ही कायद्यार्ील योग्य स्तस्थर्ी नाही. ५७. लिद्या द्ोललया [लिद्या द्ोललया लि. दुर्ास व्यापार कॉपोरेशन] मधील लनकालाच्या पररच्छे द १४६ आलि १४७ मधील लनष्कषस लक्षार् घेर्ा., (२०२१) २ एस. सी. सी. १: (२०२१) १ एस. सी. सी. (सी. आय. व्ही.) ५४९] एका समन्वय खंडपीठाने, ज्ाने र्रिारे [र्रिारे िॉल रोप्स लललमटेड लिरुद्ध कोस्टल मरीन कन्स्ट्रक्शन्स अँड इंलज. लललमटेड (२०१९) ४ एस. सी. सी. (सी. आय. व्ही.) ३२४], मधील लनकालाला दुजोरा लदला आहे. िरील मुद्दा या न्यायालयाच्या घटनापीठाद्वारे अलधक ृ र्पिे लनकाली काढिे आिश्यक आहे. ५८. या न्यायालयाच्या पाि न्यायाधीशांच्या घटनापीठाद्वारे अलधक ृ र्पिे लनकाली काढण्यासाठी खालील मुद्द्यािा संदभस घेिे आम्ही योग्य मानर्ो: "मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ मध्ये समालिष्ट असलेली िैधालनक रोध, कायद्याच्या अनुसूिीसह िािन क े लेल्या कलम ३ अंर्र्सर् मुद्ांक शुल्क आकारण्यायोग्य संलेखाना लार्ू होर्े का, त्ामुळे मुद्ांक शुल्क भरण्यासाठी आकारण्यायोग्य नसलेल्या, अस्तस्तत्वार् नसलेल्या, अंमलार् आिण्यायोग्य नसलेल्या लक ं िा अिैध असलेल्या, मूळ संलिदा / संलेखांिर मुद्ांक शुल्क भरण्यासाठी प्रलंलबर् असलेल्या अशा संलेखामध्ये असलेल्या लिाद कराराला देखील लार्ू होईल का?" १०. अशा प्रकारे, संदभासदरम्यान एस. एम. एस. टी. (उपरोक्त ), र्िासरे (उपरोक्त ) लिद्या द्ोललया (उपरोक्त ), र्सेि इर्र संबंलधर् लनिसयांमधील लनिसयांच्या योग्यर्ेिे मूल्यांकन क े ले पालहजे. हे या न्यायालयाच्या लनदशसनास आिून देण्यार् आले आहे की, परस्परलिरोधी लनिसयांमुळे लिादाच्या कायसिाहीसाठी त्रासदायक स्तस्थलर्लिशेष लनमासि झाली आहे आलि त्ामुळे या संदभासद्वारे हा मुद्दा लनकाली लनघिे अपेलक्षर् आहे. ११. एनएन ग्लोबल (सुप्रा) मधील पार्श्सभूमी र्थ्ये ज्ाने हा संदभस लदला आहे र्े सुरुिार्ीला लक्षार् घेर्ली पालहजेर्: सी. एि. ग्लोबल ७ मिील तथ्ये [७ (२०२१) ४ एस एस सी ३७९] १२. इंडो युलनक फ्लेम लललमटेडने (थोडक्यार् 'इंडो युलनक फ्लेम') कोळशाच्या िाहर्ुकीसाठी एन. एन. ग्लोबल मक ं टाइल प्रायव्हेट लललमटेड ('एन. एन. ग्लोबल') सोबर् लदनांक २८.०९.२०१५ रोजी उप-करार कायस आदेशार् प्रिेश क े ला.िक स ऑडसरच्या कलम ९ च्या संदभासर्, एन. एन. ग्लोबलने इंडो युलनकला बँक र्ॅरंटी लदली. कायस आदेशाच्या (िक स ऑडसरच्या) कलम १० मध्ये लिादाच्या कलमासाठी र्रर्ूद क े ली आहे.मुख्य करारार्ील काही लििादांमुळे, इंडो युलनकने एन. एन. ग्लोबलने सादर क े लेल्या बँक हमीिा िापर क े ला.त्ानंर्र एन. एन. ग्लोबलने नार्पूरच्या व्यािसालयक न्यायालयार् लदिािी खटला दाखल क े ला.लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८ अंर्र्सर् एक अजस देखील दाखल करण्यार् आला होर्ा ज्ामध्ये लििादांिा लिादाकडे संदभस मालर्र्ला र्ेला होर्ा. लदनांक १८.०१.२०१८ िरील व्यािसालयक न्यायालयाने लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८ अंर्र्सर् बँक हमी हा एक स्वर्ंत्र करार असल्यािे सांर्र् अजस फ े टाळला.त्ानंर्र, इंडो युलनकने व्यािसालयक न्यायालयाच्या आदेशालिरोधार् रीट यालिका दाखल क े ली.लदनांक ३०. ०९. २०२० रोजी मुंबई उच्च न्यायालयाने लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८ अंर्र्सर् अजस मंजूर क े ला. त्ार् असे म्हटले आहे की, लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ च्या टप्प्यािर लक ं िा योग्य टप्प्यािर लिाद न्यायालधकरिासमोर कायासदेश ( िक स ऑडसर) मुद्ांलकर् न करण्यािा मुद्दा उपस्तस्थर् क े ला जाऊ शकर्ो.त्ार् लदनांक १८. ०१. २०१८ रोजीिा व्यािसालयक न्यायालयािा आदेश बाजूला सारण्यार् आला. या न्यायालयार् एक यालिका दाखल करण्यार् आली होर्ी, ज्ार् एन. एन. ग्लोबलने असा युस्तक्तिाद क े ला होर्ा की महाराष्टर मुद्ांक कायदा, १९५८ अंर्र्सर् उप- करार मुद्ांलकर् क े ले नसल्यामूळे लिादािा करार 'अंमलबजाििी अयोग्य ' ठरेल. या संदभासर् न्यायालयाने र्िारे (िर नमूद क े लेल्या) मधील पूिीच्या लनिसयांच्या शुद्धर्ेिर शंका घेर्ली, ज्ािा लिद्या द्ोललया (िर नमूद क े लेल्या) मध्ये संमर्ीने उल्लेख करण्यार् आला होर्ा आलि अशा लिादािे करार कायद्यार् अस्तस्तत्वार् नसल्यािे घोलषर् करण्यार् आले होर्े आलि या घटनापीठाकडे या मुद्द्यािा पुनलिसिार करण्यािी मार्िी करण्यार् आली होर्ी. डी. संिभण प्रश्नात बिल १३. एन. एन. ग्लोबलच्या पररच्छे द ५८ मधील मूळ संदभस प्रश्न खालीलप्रमािे मांडण्यार् आला होर्ाः " मुद्ांक अलधलनयम १८९९ कलम ३५ अलधलनयमार्ील िैधालनक रोध याि अलधलनयमाच्या कलम ३ खालील पररलशष्ठासह िािन क े ल्यास जो मुद्ांक शुल्क आकारण्यायोग्य संलेखाना लार्ू होर्ो, अशा संलेखार्ील लिाद करारासहीर् जे मुद्ांक शुल्क आकारण्यायोग्य नसर्ार् अशा लिलशष्ठ संलिदा / संलेखािर मुद्ांक शुल्क भरिे प्रलंलबर् असर्ा उपरोक्त लिाद करारांना अस्तस्तत्वहीन कायद्याद्वारे अंमलबजाििी अयोग्य लक ं िा अिैध / शून्य ठरलिल काय ? " [ भर देण्यार् आला] न्यायलमत्र म्हिून या न्यायालयाला मदर् करिारे लिद्वान ज्ेष्ठ िकील श्री. र्ौरब बॅनजी यांनी मात्र संदभस प्रश्नािी पुढीलप्रमािे पुनरसिना करण्यािा प्रस्ताि मांडला. " मुद्ांक अलधलनयम १८९९ कलम ३५ अलधलनयमार्ील िैधालनक रोध याि अलधलनयमाच्या कलम ३ खालील पररलशष्ठासह िािन क े ल्यास जो मुद्ांक शुल्क आकारण्यायोग्य संलेखाना लार्ू होर्ो, अशा संलेखार्ील लिाद करारासहीर् जे मुद्ांक शुल्क आकारण्यायोग्य नसर्ार् अशा लिलशष्ठ संलिदा / संलेखािर मुद्ांक शुल्क भरिे प्रलंलबर् असर्ा उपरोक्त लिाद करारांना अस्तस्तत्वहीन कायद्याद्वारे अंमलबजाििी अयोग्य लक ं िा अिैध / शून्य ठरलिल काय ? " [मूळ मजक ु रािर लदलेला भर] १४. असे लदसून आले की महाराष्टर मुद्ांक कायदा, १९५८ शी संबंलधर् एक िुकीिे लनरीक्षि एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त ) मधील पररच्छे द २०,२४ आलि ५८ मध्ये मुद्ांक शुल्कासाठी लिाद कराराच्या अधीन क े ले र्ेले नाही. न्यायमूर्ी क े. एम. जोसेफ, न्यायमूर्ी सी. टी. रलिक ु मार, न्यायमूर्ी अजय रस्तोर्ी (आलि मी स्वर्ः) या आमच्या िारी मर्ांपैकी आम्हा प्रत्ेकाला असे आढळले की, महाराष्टर मुद्ांक कायदा, १९५८ च्या लार्ू होण्याबाबर्िी ही स्तस्थर्ी लनरीक्षि योग्य नाही. भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ हा एक लित्तीय कायदा आहे जो संलेखांच्या अंमलबजाििीिर शुल्क आकारर्ो. मुद्ांक कायदा १८९९ च्या कलम २ (१४) मध्ये "संलेख " िी व्याख्या अशी आहे की, ज्ा ज्ा दस्तऐिजांद्वारे कोिर्ाही अलधकार लक ं िा दालयत्व लनमासि करण्यार्, हस्तांर्ररर् करण्यार्, मयासलदर् करण्यार्, िाढिण्यार्, नष्ट करण्यार् लक ं िा अलभललस्तखर् करण्यार् आले असेल लक ं िा र्से क े ल्यािे लदसर् असेल, अशा प्रत्ेक दस्तऐिजािा समािेश आहे " शुल्क आकारण्यास पात्र असलेले संलेख " या शीषसकाच्या कलम ३ मध्ये इर्र र्ोष्टींबरोबरि र्रर्ूद आहे की संलेख अलधलनयमाच्या अनुसूिीमध्ये नमूद क े ली र्ेली असली पालहजेर्. हे लक्षार् घेिे आिश्यक आहे की, लिाद करारांिा लिशेषर्: मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या अनुसूिी I मध्ये ज्ांिा "संलेख " म्हिून उल्लेख क े लेला नाही त्ाला मुद्ांलकर् करिे आिश्यक आहे. र्थालप, मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या अनुसूिी १ च्या कलम ५ (सी) मधील " जर अन्यथा उपबंलधर् करण्यार् आले नसेल र्र " या शीषसकाच्या अिलशष्ट नोंदींनुसार (residuary entry ) मुद्ांक शुल्क देय होर्े. ही अिलशष्ट नोंद मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या अनुसूिी १ मधील सुधारिांमध्ये र्सेि लिलिध राज् मुद्ांक कायद्यांमध्ये समालिष्ट आहे.मी या आधारािर पुढे जाऊ इस्तच्छर्ो की, लिाद करार मुद्ांक कायदा, १८९९ अंर्र्सर् लनधासररर् क े लेल्या "संलेख " च्या व्याख्येर् येर्ो आलि मुद्ांक शुल्काच्या अधीन असेल. ई. र्वदकलाचे दिर्वेििः १५. न्यायलमत्र म्हिून या न्यायालयाला सहाय्य करिारे लिद्वान िररष्ठ िकील श्री. र्ौरि बॅनजी, श्री. र्र्न सांघी, अपीलकत्ासिे लिद्वान िकील; सुश्री माललिका लत्रिेदी, २०२२ च्या आय. ए. १८५१६ मध्ये मध्यस्तीसाठी लिद्वान िररष्ठ िकील, श्री रमाकांर् रेड्डी, प्रलर्िादी क्मांक १ िे लिद्वान िररष्ठ िकील आलि श्री देबेश पांडा, २०२२ च्या IA १९९९६९ मध्ये मध्यस्थीसाठी लिद्वान िकील यांच्याकड ू न आम्ही र्पशीलिार लनिेदने ऐकली आहेर्. लिस्तृर् लनिेदने ऐकल्या आहेर्. त्ांनी या न्यायालयािे र्सेि इर्र अलधकारक्षेत्रार्ील न्यायालयांिे लिलिध लनिसय उद् धृर् क े ले आहेर्.

16. लिद्वान न्यायलमत्र खालील लिलशष्ट लनिेदने सादर करर्ोः १६.१. लिाद करार योग्यररत्ा मुद्ांलकर् क े ले आहे की नाही हे ठरििे लिादािर सोडले पालहजे. लिाद कायदा, १९९६ िे कलम ११ (६ ए) लनयुक्ती प्रालधकरिािी व्याप्ती मयासलदर् करर्े. यािी सुरुिार् अलधभािी ( Non- obstante clause) खंडाने होर्े आलि लिशेषर्ः एस. बी. पी. अँड क ं पनी लिरुद्ध पटेल इंर् लललमटेड प्रकरिार्ील ७ न्यायाधीशांच्या खंडलपठाच्या न्यायलनिसयाला परास्त (over रूल ) करण्यासाठी होर्े. एस. बी. पी. अँड क ं पनी लिरुद्ध पटेल इंर्. लललमटेड. ८ [ ८ (२००५) ८ एस एस सी ६१८] (थोडक्यार् 'एस. बी. पी.') आलि राष्टर ीय लिमा क ं पनी लललमटेड लिरुद्ध बोघारा पॉलीफ ॅ ब (पी) लललमटेड ९ [९ (२००९) १ एस एस सी २६७ ] (थोडक्यार् 'बोघारा पॉलीफ ॅ ब'). लशिाय, लिाद न्यायालधकरिाच्या अलधकारक्षेत्रािर लनिसय घेण्याच्या क्षमर्ेशी संबंलधर् असलेल्या लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम १६ िी व्याप्ती, श्री. र्ौराब बॅनजी यांच्या मर्े, लिादाला संलेखाला मुद्ांलकर् करण्याच्या संदभासर् लनिसय घेिे शक्य करण्यासाठी पुरेशी लिस्तृर् आहे. १६.२. भारर्ीय लिधी आयोर्ाच्या २४६ व्या अहिालार् १० (थोडक्यार् '२४६ िा एल. सी. आय. अहिाल') [१० भारर्ीय लिधी आयोर्, 'लिाद आलि समेट कायदा १९९६ मधील सुधारिा' (२४६िा अहिाल, ऑर्स्ट २०१४) (https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3ca0daec69b5adc880fb464895726dbdf/uploads/ 2022/0 8/2022081615. पी. डी. एफ.) येथे उपलब्ध आहे] अशी लशफारस करण्यार् आली आहे की अलधकारािी व्याप्ती लिाद कराराच्या 'अस्तस्तत्व' आलि 'िैधर्े' पयंर् मयासलदर् असािी. लिलधमंडळाने एक पाऊल पुढे टाकर् आलि लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६ ए) अंर्र्सर् लनयुक्ती प्रालधकरिािी व्याप्ती क े िळ लिाद कराराच्या क े िळ "अस्तस्तत्वाच्या" आलि अर्दी "िैधर्ेच्या" र्पासिीपुरर्ी मयासलदर् ठे िली. असा दृष्टीकोन लिादाच्या लििादांिे जलद लनराकरि करण्याच्या उद्देशाशी सुसंर्र् आहे.लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६) अंर्र्सर् न्यायालय हे लिाद सुलभ करण्यासाठी आलि मदर् करण्यासाठी लनयुक्ती प्रालधकरिािे स्वरूप आहे. १६. ३ मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ मधील िैधालनक रोध क े िळ र्ेव्हाि लार्ू होईल जेव्हा दस्तऐिज रीर्सर मुद्ांलकर् क े लेले नाही असा लनष्कषस येईल. त्ासाठी मुद्ांकनािी िौकशी व्हायला हिी.मुद्ांक कायदा, १८९९ िे कलम ३३ (२), ज्ािे शीषसक 'संलेखािी र्पासिी करिे ि र्े अिरुद्ध करून ठे ििे असे आहे, ज्ाला िालना लदल्यािरि कलम ३५ लार्ू होईल मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३३ (२) अंर्र्सर् परीक्षि लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६ ए) अंर्र्सर् न्यायालयाद्वारे घेर्ली जाऊ नये, र्र लनयुक्त लिादाद्वारे घेर्ली जािी. १६.४. लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ अन्वये न्यायालयाला असे आढळले की कोिर्ाही करार नाही, र्र र्े अंलर्म दृलष्टकोन ठरिू शकर्े. र्थालप, जर न्यायालयाला असे िाटर् असेल की सखोल लििार होिे आिश्यक आहे, र्र र्े लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम १६ अंर्र्सर् त्ािर लनिसय घेण्यासाठी लिाद न्यायालधकरिाकडे सोपिले जाऊ शकर्े. लिद्वान िररष्ठ िकील श्री. र्ौराब बॅनजी यांच्या मर्े, लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम १६ सह कलम ११ (६ ए) सुसंर्र् करण्यािा हा योग्य मार्स आहे. १६. ५. मुद्ांकनािा अभाि लक ं िा अपुरे मुद्ांकन असलेल्या साधनािा अभाि हा स्वीकाराहसर्ेिा मुद्दा असेल, परंर्ु अलधकारक्षेत्रािा नाही.मुद्ांक कायदा, १८९९ हा लिलशष्ट प्रकारच्या संलेखांसाठी राज्ािा महसूल सुरलक्षर् करण्यासाठी लार्ू क े लेला एक लित्तीय उपाय आहे.त्ामुळे, पक्षकारला प्रलर्स्पध्यासच्या खटल्याला र्ोंड देण्यासाठी र्ांलत्रकर्ेच्या शस्त्राने सुसज्ज करण्यासाठी कायदा क े ला र्ेला नाही. १६.६ लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६ए) अंर्र्सर् अलधकारांिा िापर करिारे न्यायालय हे लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम २ (१) (ई) मध्ये पररभालषर् क े ल्यानुसार न्यायालय नाही, ज्ाला 'पुरािा प्राप्त करण्यािा' अलधकार आहे, असे लिद्वान न्यायलमत्रांनी लनदशसनास आिून लदले आहे. काही अथासने, कलम ११ (६ए) अंर्र्सर्, न्यायालयाला क े िळ प्रथमदशसनी मर् र्यार करायिे आहे. १६.७. महत्त्वािे म्हिजे, पक्षांना मूळ लिाद करार दाखल करण्यािे बंधन नाही आलि क े िळ र्ी प्रर् जोडली जाऊ शकर्े जी मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम २ (१४) मध्ये प्रदान क े ल्याप्रमािे "संलेख " नाही.मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३३ लक ं िा ३५ िे िािन स्पष्टपिे सूलिर् करर्े की या र्रर्ुदी संलेखाच्या प्रर्ीशी संबंलधर् नाहीर्. संदभीर् क े ल्या नंर्रच्या टप्प्यािर िैधर्ा नेहमी र्पासिीसाठी खुली असर्े.जुपुडी क े शि राि लिरुद्ध पुलिथी िेंकट सुब्बाराि आलि इर्र ११ [(११ (१९७१) १ एस एस सी ५४५)], हररओम अग्रिाल लिरुद्ध प्रकाश िंद मालिीय १२ (१२ (२००७) ८ एस एस सी ५१४) ] १७. लिरोधी दृलष्टकोन ठे िर्ाना, अपीलकत्ासिे लिद्वान िकील श्री. र्र्न सांघी खालील बाबी मांडर्ार्ः १७. १. भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ िे कलम ३५ "कोित्ाही प्रयोजनाकररर्ा " आलि "त्ािर क ृ र्ी करण्यासाठी" पुराव्यामध्ये अनािश्यक मुद्ांलकर् "संलेख " समािेश करण्यास मनाई करर्े. आंध्र प्रदेश सरकार लिरुद्ध पी. लक्ष्मी देिी १३[१३ (२००८)४ एस एस सी ७२०] या प्रकरिार् असे म्हटले र्ेले होर्े की मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३३ मधील "असेल" हे अलनिायस आहे आलि मुद्ांक नसलेले दस्तऐिज अिरुद्ध क े ले जािे आिश्यक आहे. १७. २. जरी मुद्ांक कायदा, १८९९ अंर्र्सर् लिाद करारािर मुद्ांक शुल्क देय नाही असे र्ृहीर् धरले र्री, जेव्हा लिाद करार हा मुद्ांक शुल्क देय असलेल्या संलेखार्ील कलम म्हिून समालिष्ट असर्ो, र्ेव्हा एक संलेख म्हिून असा लिाद करार मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ च्या रोधांना आकलषसर् करर्ो. १७. ३. लिद्वान िकील असा युस्तक्तिाद करर्ार् की मूळ संलिदेपासून करार िेर्ळे करिे ही लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम १६ द्वारे र्यार क े लेली लिधीक कल्पना आहे. लिाद कायदा, १९९६ िे कलम १६ हे भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ ला अपिाद असू शकर् नाही. [बंर्ाल इम्युलनटी क ं पनी लिरुद्ध लबहार राज् १४ (१४ (१९५५) २ एस सी आर ६०३), भारर् सरकार लिरुद्ध िेदांर् १५ (१५ (२०२०) १० एस एस सी १) िा पररच्छे द ६९,७०; अमेझॉन व्ही फ्युिर ररटेल १६ (१६ (२०२२) १ एस सी सी २०९)] १७.४. श्री. सांघी यांच्या म्हिण्यानुसार, लिाद करार असलेल्या साधनांिर योग्य मुद्ांक शुल्क लदले जार् नसल्यास लिाद कराराच्या अंमलबजाििीच्या मुद्द्यािर लिलर्नर्ेिा लसद्धांर् आलि कॉम्पेटेंझ कॉम्पेटेंझिा लसद्धांर् यांिा कोिर्ाही संबंध नाही. लिद्वान िलकलाने एन्का इन्साट लिरुद्ध ओ. ओ. ओ. लिमा क ं पनी १७[ (१७ (२०२०) यु क े एस सी ३८] मधील यू. क े. सिोच्च न्यायालयाच्या लनिसयािर भर लदला, ज्ामध्ये असे म्हटले र्ेले होर्े की " र्रीही लिाद कलम क ं त्राटी दस्तऐिजार् नोंदिलेल्या अलधकार आलि जबाबदाऱयांिा एक भार् आहे". १७. ५. जरी र्ो लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६ए) िा िापर करर् असला र्री मुद्ांकनाच्या मुद्द्याकडे अर्दी प्रारंभापासून पालहले पालहजे, म्हिजे त्ा िेळी लिादाच्या लनयुक्तीबाबर् लििार क े ला जार्ो. लिद्वान िलकलानुसार, एखादे संलेख कायद्यार् र्ेव्हाि अस्तस्तत्वार् असेल जेव्हा र्े अंमलबजाििी करण्यायोग्य असेल.त्ामुळे, जेव्हा लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६ए) अंर्र्सर् न्यायालय लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वािा लििार करर् असेल, र्ेव्हा र्े त्ा टप्प्यािरि मुद्ांकन न करण्याच्या लक ं िा अपुऱया मुद्ांकनाच्या समस्येिे परीक्षि करू शकर्े. १७. ६. एन. एन. ग्लोबल (िर नमूद क े ल्याप्रमािे ) मध्ये जप्ती, मुद्ांक शुल्क भरिे आलि नंर्र लिादािी लनयुक्ती या र्ीन पद्धर्ी प्रदान क े ल्या आहेर् हे अधोरेस्तखर् करून, असा युस्तक्तिाद क े ला जार्ो की जेव्हा कलम ११ च्या अजासमध्ये लिादािी लनयुक्ती क े ली जार्े, र्ेव्हा न्यायालय लनलिर्पिे लिाद खंडािर "क ृ र्ी" करर् असर्े, ज्ाला मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ च्या स्पष्ट शब्ांद्वारे प्रलर्बंलधर् क े ले आहे. "अंमलबजाििी करण्यायोग्य" असल्यालशिाय करार "अस्तस्तत्वार्" नसर्ो. १८. िररष्ठ िकील माललिका लत्रिेदी यांनी अपीलकत्ासच्या िर्ीने मध्यस्ती करर् पुढील बाबी मांडल्याः १८.१ मुद्ांक कायदा, १८९९ आलि नोंदिी कायदा, १९०८ हे पूिसपिे िेर्ळे आहेर्. एन. एन. ग्लोबलने (उपरोक्त ) दस्तऐिजािर मुद्ांलकर् करण्याच्या र्रजेनुसार दस्तऐिजाच्या नोंदिीिी र्त्त्वे िुकीच्या पद्धर्ीने लार्ू क े ली. पलहला दोष बरा करर्ा येण्याजोर्ा असला र्री, नंर्रिा दस्तऐिज/संलेखािे अस्तस्तत्व आलि पूिसत्व लनलिर् करर्ो. नोंदिीच्या अनुपस्तस्थर्ीर्, एक संलेख अजूनही अस्तस्तत्वार् आहे परंर्ु मुद्ांकनालशिाय, संलेख अपूिस/अप्रर्ल्भ आहे. १८.२. मुद्ांक कायदा, १८९९ मध्ये मुद्ांक शुल्क भरण्यािा लििार मांडण्यार् आला आहे, ज्ामध्ये अयशस्वी झाल्यास श्रीमर्ी लत्रिेदी यांच्या म्हिण्यानुसार संलेखािर कोित्ाही कारिासाठी कारिाई क े ली जाऊ शकर् नाही. कायद्याच्या भाषेर् कोिर्ीही संलदग्धर्ा नाही आलि सरळ िािनािी लनिड क े ली पालहजे. १८. ३. कायद्याच्या लिलिध र्रर्ुदींखालील न्यायालयािे अलधकार, र्सेि मुद्ांक कायदा, १८९९ मध्ये लनमासि क े लेले लनबंध लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ९ नुसार िालिल्या जािाऱया कायसिाहीला लार्ू होर्ार्. त्ामुळे, असा युस्तक्तिाद करण्यार् आला आहे की लिादािे कलम खंलडर् झाले असले र्री, अंर्ररम उपाय मंजूर करण्यापूिी मुख्य करार कायद्याने लार्ू करण्यायोग्य आहे की नाही यािर न्यायालयाला संक ृ र्दशसनी लनष्कषासपयंर् पोहोिािे लार्ेल. १९. उत्तरिादी क्मांक १ िे लिद्वान िकील रमाकांर् रेड्डी यांनी आम्हाला लिाद कायदा, १९९६ लार्ू होण्यापूिी संबंलधर् लोकसभेर्ील ििेकडे आमिे लक्ष िेधले आलि खालील बाबी सादर क े ल्याः १९. १ लिाद कायदा, १९९६; मुद्ांक कायदा, १८९९ आलि संलिदा अलधलनयम १८७२ च्या र्रर्ुदींमध्ये सुसंिाद साधर्ा येऊ शकर्ो. मुद्ांक कायदा, १८९९ िे कलम १७ हे मुद्ांक कायदा, १८९९ िे कलम ३१ सह िािािे लार्ेल. १९. २ लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ७ च्या साध्या भाषेर् पक्षांना करारािर मुद्ांलकर् करण्यािी आिश्यकर्ा नाही. न्यायालयाने मुद्ांक, लशक्क े आलि मूळ अशा लबर्र-मुख्य र्ांलत्रक आिश्यकर्ांिर जोर लदल्यास लिलधमंडळाच्या हेर्ूिा पराभि होईल. २०. त्ाच्या उत्तरादाखल, श्री. देबेश पांडा, मध्यस्थांिे लिद्वान िकील खालील र्ोष्टी सादर करर्ार्ः २०. १ लिाद कायदा, १९९६ िा भार् १ कलम ८,९ आलि ११ शी संबंलधर् आहे, र्र कलम ४५ हा भार् २ शी संबंलधर् आहे. कलम ४५ ला भार् २ अंर्र्सर् येिारी र्रर्ूद म्हिून मान्यर्ा देण्यार् आली आहे जी एक "संपूिस संलहर्ा" आहे. [क्लोरो क ं टरोर्ल् लिरुद्ध सेव्हनस टरेंट िॉटर युररलफक े शन इंक १८ पहा (१८ (२०१३) १ एस एस सी ६४१)] कलम ४५ मधील "जोपयंर् र्े सापडर् नाही" या अलभव्यक्तीिा अथस लशन-एटसू क े लमकल क ं पनी लललमटेड लिरुद्ध अक्ष ऑलिफायबर लललमटेड १९ (१९ (२००५)७ एस सी सी २३४ (थोडक्यार् "लशन-एटसू") मध्ये बहुमर्ानुसार क े िळ "प्रथमदशसनी आधारािर" लििार म्हिून लािला र्ेला होर्ा. २०१९ मध्ये संसदेने कलम ४५ मध्ये सुधारिा क े ली. त्ानुसार “जोपयंर् र्े सापडर् नाही. " ही अलभव्यक्ती 'जोपयंर् र्े प्रथमदशसनी सापडर् नाही र्ोपयंर्"अशी बदलली. अशा प्रकारे लशन एत्सु (उपरोक्त ) मध्ये स्थालयक झालेल्या स्तस्थर्ीनुसार हा कायदा येर्ो. या पार्श्सभूमीिर, मुद्ांक कायदा, १८९९ दंडासह लक ं िा दंडालिना (यथास्तस्थर्ी) मुद्ांक शुल्क िसूल होईपयंर् क े िळ र्ात्पुरर्ा दंड लनमासि करर्ो. व्याधी ही फक्त संलेखाशी संबंलधर् असर्े, व्यिहाराशी नाही. २०. २ लिाद कायदा, १९६६ हा संपूिस संलहर्ेच्या स्वरूपार् नेहमीि एक पररपूिस कायदा मानला र्ेला आहे. [फ्युएस्टस डे लॉसन लललमटेड लिरुद्ध लजंदाल एक्सपोट्सस लललमटेड २० (२० (२०११) ८ एस एस सी ३३३) मधील पररच्छे द ८३-८४,८९] श्री. पांडा यांच्या मर्े, लिाद करार समालिष्ट असलेल्या पालक संलेखाल पररपूिस संपूिस संलहर्ेच्या अंर्र्सर् शक्तीिा िापर करिाऱया मंिाने अिरोलधर् करिे मर् र्े एकर्र भार् १ मधील कलम ८,९ आलि ११ अंर्र्सर् लक ं िा भार् २ मधील कलम ४५ अंर्र्सर् असो, स्वर्ः पररपूिस संलहर्ा असलेल्या लिाद कायदा, १९९६ च्या स्वरूपाशी लिसंर्र् आहे. २१. लिद्वान न्यायलमत्र आलि इर्र सल्लार्ारांनी क े लेल्या संबंलधर् अंदाजाकडे पाहर्ाना, खालील प्रश्न आमच्या लििारार् आले: १) मूळ संलिदा /संलेखािे मुद्ांलकर् नसिे लिाद अलधलनयम १९९६ च्या कलम ११ च्या टप्पयािर प्रकरि लिादासाठी संदलभसर् करण्यासाठी कायद्याच्या दृष्टीने अस्तस्तत्वहीन, शून्य आलि अंमलबजाििी अयोग्य ठरिू शक े ल का ? २) मुद्ांकन आलि अिरोधािे परीक्षि प्रारंभीि कलम ११ अन्वये न्यायाधीशाने करािे की र्े लिादािर सोडािे ? एफ.) मुद्ांक कायिा, १८९९ ची र्वैिादिक चौकट २२. मुद्ांक कायदा, १८९९ लार्ू करण्यामार्ील उद्देशािे परीक्षि करून आपि सुरुिार् करूया. ६७ व्या लिधी आयोर्ाच्या २१ (२१ भारर्ीय लिधी आयोर्, 'भारर्ीय मुद्ांक कायदा' (६७ िा अहिाल, फ े ब्रुिारी, १९९७) https://lawcommissionofindia.nic.in/report_seventh/accessed on 11 March 2023 येथे उपलब्ध आहेः ) व्या अहिालार् असे सुििले आहे की राज्ासाठी महसूल र्ोळा करण्याच्या उद्देशाने लित्तीय अलधलनयमािी कल्पना प्रथम उर्म पािली. हॉलंड आलि त्ानंर्र, १७९७ िा ६ िा बंर्ाल रेर्ुलेशन भारर्ार् लार्ू करण्यार् आला. सुरुिार्ीला हे बंर्ाल, लबहार, ओररसा आलि बनारसपुरर्े मयासलदर् होर्े.त्ानंर्र, मुंबई आलि मद्ासमध्ये मुद्ांकलिषयक लिलिध लनयम लार्ू करण्यार् आले.मुद्ांक शुल्क लार्ू करण्यािा प्रारंलभक उद्देश हा पोलीस आस्थापनांच्या देखभालीसाठी 'भारर्ीय व्यापारी आलि लिक् े त्ांिर" आकारला जािारा कर रद्द क े ल्यामुळे सरकारी महसुलार्ील कमर्रर्ा भरून काढिे हा होर्ा. र्थालप, या लनयमनामुळे मुद्ांक शुल्काशी संबंलधर् नंर्रच्या कायद्यांसाठी मार्स मोकळा झाला.१८६० मध्ये मुद्ांक शुल्काशी संबंलधर् पलहला कायदा भारर्ार् लार्ू करण्यार् आला. हे १८६२,१८६९,१८७९ च्या कायद्याद्वारे रद्द करण्यार् आले आलि त्ानंर्र, १८९९ िा कायदा लार्ू करण्यार् आला जो सध्यािा कायदा आहे. २३. मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या उद्देशािर लििार करर्ाना, लहंदुस्तान स्टील लललमटेड लिरुद्ध लदलीप कन्स्ट्रक्शन क ं पनी २२ (२२ (१९६९) १ एस सी सी ५९७ )(थोडक्यार् "लहंदुस्तान स्टील") या खटल्यार्ील या न्यायालयाच्या ३ न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने जे. सी. शाह जे. यांच्यामाफ स र् बोलर्ाना खालील प्रासंलर्क लनरीक्षि क े लेः "७. मुद्ांक कायदा हा लिलशष्ट प्रकारच्या साधनांिर राज्ािा महसूल सुरलक्षर् करण्यासाठी लार्ू क े लेला एक लित्तीय उपाय आहेः पक्षकाराला त्ाच्या प्रलर्स्पध्यासच्या खटल्यािी पूर्सर्ा करण्यासाठी र्ांलत्रक शस्त्राने सुसज्ज करण्यासाठी कायदा क े ला जार् नाही. " २४. लिद्वान न्यायलमत्र, श्री. र्ौराब बॅनजी यांनी युलनयन इन्शुरन्स क ं पनी ऑफ पालकस्तान लललमटेड लिरुद्ध हाफीज मुहम्मद लसद्दीकी २३ (२३ १९७८ पी एल डी एस सी २७९) मधील पालकस्तानच्या सिोच्च न्यायालयाच्या लनिसयािा हिाला लदला, ज्ाने लहंदुस्थान स्टील (उपरोक्त ) मधील र्ुिोत्तरानुसार १९७८ च्या सुरुिार्ीलाि हा मुद्दा हार्ाळला होर्ा. लिाद करार रीर्सर मुद्ांलकर् न झाल्यास आलि त्ामुळे मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ अन्वये पुराव्यांमध्ये स्वीकाराहस नसल्यास कोिर्ीही िैध लिाद कायसिाही होईल का या प्रश्नािा सामना करर्ाना न्यायालयाने मुद्ांकनािा लनव्वळ आलथसक हेर्ू असल्यािे नमूद क े ले, आलि असे मर् व्यक्त क े ले की मुद्ांक हा व्यािसालयक जीिनार् हस्तक्षेप करण्यासाठी नाही. मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या र्रर्ुदींिर ििास करर्ाना, ज्ार् कलम ६१ समालिष्ट आहे, जे अपील न्यायालयांना मुद्ांकांच्या "पयासप्तर्ा " िरील लनिसयांमध्ये सुधारिा करण्यािे अलधकार देर्े, न्यायाधीश दोराब पटेल यांनी असा लनष्कषस काढला कीः “मुद्ांक कायदा लार्ू करण्यािा लिलधमंडळािा उद्देश सरकारी महसूल संरक्षि करिे हा होर्ा आलि व्यापार आलि लिक्ीच्या सुरळीर् प्रिाहासाठी महत्वािी संलेख अिैध करून व्यािसालयक जीिनार् हस्तक्षेप करिे हा नव्हर्ा. " [भर देण्यार् आला ] २५. अशा प्रकारे, राज्ािा महसूल जास्तीर् जास्त प्रमािार् िसूल व्हािा २४ [२४ जे. एम. ए. राजू लि. क ृ ष्णमूर्ी भट्ट, ए. आय. आर. १९७६ र्ुजरार् ७२; लिरंजीलाल (डॉ.) लि. हरर दास (२००५) १० एस. सी. सी. ७४६; जर्दीश नारायि लि. मुख्य लनयंत्रक महसूल प्रालधकरि, ए. आय. आर. १९९४ ऑल ३७१]. आलि दस्तऐिजाच्या िैधर्ेिर पररिाम होऊ नये, हे पाहिे हा उद्देश आहे. त्ाच्या र्रर्ुदींिा त्ा मयासदेपयंर् संक ु लिर् अथस लािला र्ेला पालहजे.त्ाि लनकालार्, पालकस्तानच्या सिोच्च न्यायालयाने र्े खालीलप्रमािे स्पष्ट क े लेः "उदाहरिाथस, एखादे संलेख जेव्हा त्ालिषयी िाद असेल र्ेव्हाि पुराव्याच्या स्वरूपार् सादर क े ले र्ेले असर्े, म्हिून जर लिलधमंडळािा हेर्ू योग्यररत्ा मुद्ांलकर् नसलेली सिस संलेख अिैध ठरिण्यािा असर्ा, र्र त्ांनी या संदभासर् स्पष्ट र्रर्ूद क े ली असर्ी आलि ज्ा प्रकरिांमध्ये पक्षांना कलमार् लनलदसष्ट क े लेल्या व्यक्तींसमोर रीर्सर मुलद्र् न क े लेली संलेख सादर करण्यािी संधी लमळाली नसर्ी अशा प्रकरिांमध्ये आपल्या आदेशािी अंमलबजाििी करण्यासाठी काही यंत्रिा देखील पुरिली र्ेली असर्ी. " २६. हे न्यायालय आर. आय. ओ. ग्लास सोलर एस. ए. लिरुद्ध श्रीराम ई. पी. सी. लललमटेड आलि अन्य २५ [ २५ (२०१८) १८ एस एस सी ३१३] प्रकरिांमध्ये लिदेशी लनिाडे मुद्ांलकर् करण्यािी र्रज नाही असे नमूद करर्ाना हे लक्षार् घेर्ले की मुद्ांक कायदा, १८९९ भारर्ीय कायद्यािे मूलभूर् धोरि प्रलर्लबंलबर् करर्ो. न्यायमूर्ी नरीमन यांच्यामाफ स र् बोलिाऱया 2 न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने खाली नमूद क े लेः "३४….. रेनुसार्र पॉिर क ं पनीमध्ये नमूद क े ल्याप्रमािे भारर्ीय कायद्यािे मूलभूर् धोरि. लललमटेड लिरुद्ध जनरल इलेस्तररक क ं पनी, १९९४ पररलशष्ट (१) एस. सी. सी. ६४४, आलि सहयोर्ी लबल्डर लिरुद्ध लदल्ली लिकास प्रालधकरि, (२०१५) ३ एस. सी. सी. ४९ मध्ये असे स्पष्ट क े ले आहे की जर परकीय िलन लनयमन कायदा, १९७३ सारख्या देशाच्या अथसव्यिस्थेशी संबंलधर् कायद्यािा संबंध असेल र्र र्ो लनलिर्पिे "भारर्ीय कायद्याच्या मूलभूर् धोरि" या अलभव्यक्तीमध्ये येईल. भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९, हा संलेखांिर मुद्ांक शुल्क आकारिारा लित्तीय कायदा असल्याने, र्ो देखील भारर्ीय अथसव्यिस्थेशी संबंलधर् एक कायदा आहे आलि र्क स बुद्धीच्या समानर्ेिर, भारर्ीय कायद्याच्या मूलभूर् धोरिाला प्रलर्लबंलबर् करिारा कायदा असेल." २७. मुद्ांक कायद्यािा उद्देश एस. क ृ ष्णमूर्ी अय्यर यांच्या मुद्ांक कायदा, १८९९ िरील भाष्य २६ [२६ एस. क ृ ष्णमूर्ी अय्यर, भारर्ीय मुद्ांक कायदा, राज् सुधारिांसह एक लिस्तृर् सारांश; ७ िी आिृत्ती, पी. २२] िरून अलधक समजू शकर्ो, ज्ामध्ये लहंदुस्तान स्टील (उपरोक्त ) आलि जे. एम. ए. राजू लिरुद्ध क ृ ष्णमूर्ी भट्ट २७ [२७ ए आई आर १९७६ र्ुजरार् ७२] मधील लनकालांिर ििास करर्ाना, खालील उद्देश नमूद क े ला आहेः "मुद्ांक कायद्यािा उद्देश लनव्वळ लित्तीय लनयमन हा आहे.महसूल िाढििे हा त्ािा एकमेि उद्देश आहे आलि त्ाच्या सिस र्रर्ुदी महसुलािे संरक्षि लक्षार् घेऊन क े ल्या पालहजेर्.पक्षकारला त्ाच्या प्रलर्स्पध्यासच्या खटल्यािी पूर्सर्ा करण्यासाठी र्ांलत्रकर्ेच्या शस्त्राने सुसज्ज करण्यासाठी कायदा क े ला जार् नाही.ह्यािा संपूिस उद्देश राज्ािा महसूल जास्तीर् जास्त प्रमािार् साध्य होईल हे पाहिे आहे " हे स्पष्ट आहे की,मुद्ांक कायदा, १८९९ यामार्ील कायदेशीर हेर्ू आलि उद्देश राज्ासाठी महसूल सुरलक्षर् करिे हा आहे आलि र्ो भारर्ीय कायद्याच्या मूलभूर् धोरिाला प्रलर्लबंलबर् करिारा कायदा आहे. अशा प्रकारे मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या र्रर्ुदींिा अथस लािर्ाना धोरिात्मक लििार आलि महसूल सुरलक्षर् करिे हे देखील लक्षार् ठे िले पालहजे. २७.१. आय. टी. िे आयुक्त लिरुद्ध िंदनबेन मर्नलाल २८ [२८ (२०००) २४५ आई टी आर १८२] या प्रकरिार् असे म्हटले र्ेले होर्े की कर कायद्याशी संबंलधर् कोित्ाही र्रर्ुदीिा अथस लािला जािे आिश्यक आहे जेिेकरून अशा र्रर्ुदीिा अथस कायद्यामार्ील लिलधमंडळाच्या हेर्ूशी सुसंर्र् असािा. आर्ा आपि मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ आलि ३६ िा लििार करूया, ज्ाशी आपि थेट संबंलधर् आहोर्. र्े खाली नमुद क े ले आहेर्ः “३५.रीर्सर मुद्ांलकर् नसलेले संलेख हे पुराव्यार् अस्वीकाराहस असिे इत्ादी - शुल्कआकारिीला पात्र असा कोिर्ाही संलेख रीर्सर मुद्ांलकर् क े लेला नसेल र्र, लिलधर्ः लक ं िा पक्षकारांच्या संमर्ीने पुरािा घेण्यास प्राधीक ृ र् असलेली कोिर्ीही व्यक्ती, कोित्ाही प्रयोजनाकररर्ा र्ो पुरािा म्हिून स्वीकारिार नाही, लक ं िा अशी कोिर्ीही व्यक्ती लक ं िा कोिर्ाही लोक कायसपदालधकारी त्ाच्या आधारािर कोिर्ीही कायसिाही करिार नाही लक ं िा त्ांिी नोंदिी करिार नाही लक ं िा र्ो अलधप्रमालिर् करिार नाही. परंर्ु – (क ) असे कोिर्ेही संलेख, ज्ा शुल्कासह र्े आकारण्यायोग्य आहे त्ा शुल्कािी परर्फ े ड क े ल्यािर लक ं िा, अपुऱया शुल्कािा मुद्ांक लािलेल्या संलेखाच्या बाबर्ीर्, अशा शुल्कािी रक्कम पुरी करण्यास आिश्यक लर्र्की रक्कम ि सोबर् पाि रुपये इर्का अथिा योग्य शुल्क रकमेच्या लक ं िा लर्च्यार् कमी पडिाऱया भार्ाच्या दहा पटीइर्की रक्क्म पाि रुपयांहून अलधक असेल र्ेव्हा अशा शुल्काच्या लक ं िा अशा दहा पट रकमेइर्का दंड भरण्यार् आल्यािर पुराव्यार् स्वीक ृ र् क े ले जार्ील; (ख ) ज्ा व्यक्तीकडे मुद्ांलकर् पािर्ीिी मार्िी करर्ा आली असर्ी त्ा व्यक्तीने अमुद्ांलकर् पािर्ी लदली असेल आलि अशी पािर्ी जर मुद्ांलकर् करण्यार् आली र्र र्ी त्ा व्यक्तीच्या लिरोधी पुराव्यार् स्वीकायस झाली असर्ी असे असेल र्ेंव्हा, अशी पािर्ी, र्ी देिाऱया व्यक्तीने एक रुपया दंड भरल्यािर लर्च्या लिरोधी पुराव्यार् स्वीक ृ र् करण्यार् येईल; (र् ) जेंव्हा कोण्यार्ही प्रकारिी संलिदा लक ं िा करार दोन लक ं िा अलधक पत्रांिा समािेश असलेल्या पत्रव्यिहाराद्वारे करण्यार् आला असेल, आलि त्ा पत्रांपैकी कोित्ाही एका पत्रािर योग्य मुद्ांक लािलेला असेल र्ेंव्हा, र्ी संलिदा लक ं िा र्ो करार रीर्सर मुद्ांलकर् असल्यािे मानले जाईल; (घ ) फौजदारी प्रलक्या संलहर्ा, १८९८ (१८९८ िा ५) िे प्रकरि १२ लक ं िा प्रकरि ३६ या खालील कायसिाहीहून अन्य अशा फौजदारी न्यायालयार्ील कोित्ाही कायसिाहीर् कोित्ाही संलेख पुराव्यार् स्वीकारण्यास यार् अंर्भूसर् असलेल्या कोित्ाही र्ोष्टीमुळे प्रलर्बंध होिार नाही. (ङ) जेव्हा कोिर्ाही संलेख [ शासनाने लक ं िा शासनाच्या ] िर्ीने लनष्पालदर् करण्यार् आला असेल र्ेव्हा लक ं िा अशा संलेखाला या अलधलनयमाच्या कलम ३२ खाली लक ं िा अन्य उपबंधाखाली र्रर्ूद क े ल्याप्रमािे लजल्हालधकाऱयािे प्रमािपत्र लािलेले असेल र्ेव्हा, असा संलेख कोित्ाही न्यायालयार् स्वीकारला जाण्यास यार् अंर्भूसर् असलेल्या कोित्ाही र्ोष्टीमुळे प्रलर्बंध होिार नाही. " "३६. संलेखािा स्वीकार क ें व्हा प्रश्नास्पद कराियािा नाही - एखादा संलेख पुराव्यार् स्वीकारण्यार् आला असेल र्ेंव्हा, कलम ६१ मध्ये उपबंलधर् क े ले र्ेिढे सोड ू न इर्र बाबर्ीर् अशी स्वीक ृ र्ी, र्ो संलेख रीर्सर मुद्ांलकर् क े लेला नाही या कारिािरून त्ाि दाव्याच्या लक ं िा कायसिाहीच्या कोित्ाही टप्प्यािर प्रश्नास्पद क े ली जािार नाही. " २८. कलम ३५ अलधकाऱयांना अमुद्ांलकर् कार्दपत्रांिा लििार करण्यास प्रलर्बंलधर् करर्े, परंर्ु कलम ३५ (क ), (ख ), (घ ) आलि (ङ) आलि कलम ३६ मध्ये प्रदान क े ल्यानुसार कलम ३५ अंर्र्सर् िैधालनक रोधािे अपिाद स्पष्टपिे सूलिर् करर्ील की मुद्ांक शुल्क न भरिे हा एक लनिारिीय दोष आहे आलि प्रथमर्ः आिश्यक मुद्ांक शुल्क न भरल्यास दस्तऐिज रद्द क े ला जािार नाही. अशा प्रकारे, कोिर्ाही लनरपेक्ष रोध नाही.हे देखील कायद्याने सुस्थालपर् आहे की, एखाद्या दस्तऐिज मुद्ांलकर् करण्यार् अयशस्वी झाल्यास दस्तऐिजार् अंर्भूसर् असलेल्या व्यिहाराच्या िैधर्ेिर पररिाम होर् नाही; र्े क े िळ पुराव्यामध्ये अस्वीकायस दस्तऐिज प्रस्तुर् करर्े. (२९. र्ुलजारी लाल मालिारी लिरुद्ध राम र्ोपाल ए. आय. आर. १९३७ क ॅ ल ७६५; मत्तेर्ुंर्ा धनलक्ष्मी लिरुद्ध कांर्म राजू सारदांबा, ए. आय. आर. १९७७ ए. पी. ३२८; हे देखील पहाः पुरनिंद् लिरुद्ध कल्लीपदा रॉय, ए. आय. आर. १९४२ क ॅ ल ३८६; बूटर्म लपलिया लिरुद्ध बोयापर्ी कोटेर्श्र राि ए. आय. आर. १९६४ ए. पी. ५१९) २८.१. क े. क ृ ष्णमूर्ी ३० (क े. क ृ ष्णमूर्ी, भारर्ीय मुद्ांक कायदा, राज् सुधारिांसह एक लिस्तृर् सारांश; १२ िी आिृत्ती पी. ३७२-३७३) यांनी भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ िरील लटप्पिीमध्ये मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ च्या र्रर्ुदीिर खालीलप्रमािे ििास क े ली आहेः “या र्रर्ुदीमुळे न्यायालये आलि लिादांना योग्य शुल्क आलि दंडािा भरिा क े ल्यािर अमुद्ांलकर् लक ं िा सदोष मुद्ांलकर् क े लेल्या दस्तऐिजांिा पुराव्याच्या कार्दपत्रांमध्ये दाखल करून घेण्यास सक्षम करर्े. रीर्सर मुद्ांलकर् न क े लेल्या संलेखाला शुल्क आलि दंड भरल्यानंर्र पुराव्यामध्ये दाखल क े ले जाईल. ज्ा संलेखाला रीर्सर मुद्ांलकर् क े ले र्ेले नाही, र्े ज्ा आकारण्यायोग्य शुल्कासह आहे त्ा शुल्काििा भरिा क े ल्यािर लक ं िा जो संलेख पुरेशा मुद्ांलकर् क े लेला नसेल, त्ा संलेखािी भरपाई करण्यासाठी आिश्यक असलेल्या रकमेिा दंडासह पुरािा म्हिून समािेश क े ला जाईल. (३१ ओमप्रकाश लिरुद्ध लक्ष्मीनारायि २०१४ (१) एस. सी. सी. ६१८)असा लनिाडा जो मुद्ांलकर् कार्दािर अंलकर् क े लेला नाही लक ं िा र्ो पुरेशा मुद्ांलकर् न क े लेल्या कार्दािर अंलकर् क े लेला असल्यास र्ो लनिडा पूिसलक्षी प्रभािाने शुल्क लक ं िा र्ूट शुल्क भरून प्रमालिर् क े ला जाऊ शकर्ो. (३२ पट्टूलाल शमास लिरुद्ध राजालधराज उमराि लसंर् ए. आय. आर. १९५५ एन. यू. सी. २६२१) जेथे लनिाड्याला मुद्ांलकर् क े ले जार् नाही, र्ेथे दस्तऐिज अिरुद्ध करून लनिाड्यार्ील दोष दू र क े ला जाऊ शकर्ो आलि दोष दू र क े ल्यानंर्र र्ो अलभलेखिून न्यायालयािा लनयम बनिला जाऊ शकर्ो.(३३ लिर्ल्न अँड क ं पनी. प्रा. लल. व्ही. क े. एस. लोकलिनायकम ए. आय. आर. १९९२ मॅड १००)"33 " २९. त्ािप्रमािे, मुद्ांक कायदा, १८९९ िे कलम ४२ (२) जे अमुद्ांकनाच्या पररिामाशी संबंलधर् आहे र्े खालीलप्रमािे: "४२. ज्ांिर कलम ३५, ४० लक ं िा ४१ खाली शुल्क भरलेले असेल अशा संलेखांिर पृष्ठांकन करिे - (१) एखाद्या संलेखाच्या बाबर्ीर्, काही शुल्क ि दंड बसर् असल्यास कलम ३५, कलम ४०, लक ं िा कलम ४१ खाली र्े भरण्यार् आल्यास र्ो संलेख पुराव्यार् स्वीकारिारी व्यक्ती, लक ं िा,प्रकरिपरत्वे, लजल्हालधकारी त्ा संलेखाबाबर् योग्य शुल्क लक ं िा प्रकरिपरत्वे, योग्य शुल्क ि दंड (प्रत्ेकािी रक्कम नमूद करून ) िसूल झाले आहेर् असे, र्े भरिाऱया व्यक्तीिे नाि ि राहण्यािे लठकाि ललहून पृष्ठांकनादिारे प्रमालिर् करील. (२) याप्रमािे पृष्ठांलकर् क े लेला प्रत्ेक संलेख पुराव्यार् स्वीकायस असेल आलि र्ो जिू काही रीर्सर मुद्ांलकर् करण्यार् आलेला असािा त्ाप्रमािे त्ािी नोंद करर्ा येईल ि त्ाच्या अधारे कायसिाही करर्ा येईल, र्सेि र्ो अलधप्रमालिर् करर्ा येईल आलि र्ो अिरुद्ध करून ठे ििाऱया अलधकाऱयाच्या हार्ी र्ो ज्ा व्यक्तीच्या र्ाब्यार्ून आला असेल त्ा व्यक्तीने त्ाबाबर् अजस क े ल्यािर लर्च्याकडे लक ं िा र्ी सांर्ेल त्ाप्रमािे सुपूदस करण्यार् येईल: परंर्ु – (क ) कलम ३५ खाली शुल्क आलि दंड भरल्यािर जो पुराियार् स्वीकारण्यार् आला आहे असा कोिर्ाही संलेख, र्ो अशा प्रकारे अिरुद्ध क े ल्याच्या लदनांकापासून एक मलहना संपण्यापूिी लक ं िा जर र्ो आिखी काळ अिरुद्ध करून ठे ििे आिश्यक आहे असे लजल्हालधकाऱयाने प्रमालिर् क े ले असून र्े प्रमािपत्र त्ाने रद्द क े ले नसेल र्र, याप्रमािे सुपूदस क े ला जािार नाही; (ख ) या कलमार्ील कोित्ाही र्ोष्टीमुळे " लदिािी प्रलक्या संलहर्ा " (१८८२ िा १४), कलम १४४, खंड ३ िर पररिाम होिार नाही. ३०. मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३६,३५ आलि ४२ च्या िाक्यांशशास्त्रािा लििार लहंदुस्तान स्टीलमध्ये (उपरोक्त) करण्यार् आला होर्ा. िास्तलिक पार्श्सभूमी अशी होर्ी की, लहंदुस्थान स्टीलने भारर्ीय लिाद कायदा, १९४० च्या कलम ३० आलि ३३ अन्वये हा लनिाडा रद्द करण्यासाठी अजस क े ला होर्ा, कारि त्ािर मुद्ांलकर् क े ले र्ेले नव्हर्े आलि त्ामुळे र्ो सुरुिार्ीपासूनि रद्द झाला होर्ा. र्थालप, या न्यायालयाने असे म्हटले आहे की कायद्यार् लिलहर् क े लेल्या प्रलक्येनुसार मुद्ांक शुल्क आलि दंड भरल्यानंर्र, रीर्सर मुद्ांलकर् न क े लेल्या संलेखािर "कारिाई" करण्यािर कोिर्ाही रोध नाही. हे खालीलप्रमािे योग्यररत्ा पाळले र्ेलेः "६. कलम ३५ आलि ३६ मधील िाक्प्रिारशास्त्रार्ील फरकािर अिलंबून राहून अशी र्ळ घालण्यार् आली होर्ी की, ज्ा संलेखाना रीर्सर मुद्ांलकर् क े लेले नाही अशा संलेखाना शुल्क आलि दंड भरल्यािर पुराव्यार् स्वीक ृ र् क े ले जाऊ शकर्े, परंर्ु त्ािर कारिाई क े ली जाऊ शकर् नाही कारि कलम ३५ हे संलेखािर रीर्सर मुद्ांलकर् न क े ल्याच्या र्सेि त्ािर कारिाई क े ल्याच्या पुराव्याच्या प्रिेशाला प्रलर्बंध म्हिून कायस करर्े. लिलधमंडळाने कलम ३६ द्वारे त्ार् नमूद क े लेल्या अटींनुसार क े िळ संलेखािा पुराव्यार् स्वीक ृ र्ीलिरूद्धिा रोध काढू न टाकला आहे. हा युस्तक्तिाद कलम ३६ च्या खऱया अथासकडे दुलसक्ष करर्ो. -- त्ा कलमान्वये, एकदा पुराव्यामध्ये स्वीक ृ र् क े लेल्या संलेखािर रीर्सर े ले र्ेले नाही या कारिािरून त्ाि दाव्याच्या लक ं िा कायसिाहीच्या कोित्ाही टप्प्यािर प्रश्न उपस्तस्थर् क े ला जािार नाही.कलम ३६ एखाद्या संलेखाला आव्हान देण्यास मनाई करर् नाही की त्ािर रीर्सर े ले जार् नसल्यामुळे त्ािर कारिाई क े ली जािार नाही, परंर्ु त्ा कारिास्ति कायद्याने लनधासररर् क े लेल्या प्रलक्येनुसार मुद्ांक शुल्क आलि दंड भरल्यानंर्र रीर्सर मुद्ांलकर् न क े लेल्या दस्तऐिजािर कारिाई करण्यास कोिर्ाही रोध नाही. कलम ४२ (२) च्या अटींनुसार, जर काही शंका असेल र्र र्ी दू र क े ली जार्े, ज्ामध्ये कलम ४२ (१) अंर्र्सर् लजल्हालधकारी यांनी मान्यर्ा लदलेले प्रत्ेक संलेख पुराव्याच्या स्वरूपार् स्वीकाराहस असेल आदण त्यार्वर रीतसर मुद्ांदकत क े ल्याप्रमाणे कारर्वाई क े ली जाऊ शकते, असे स्पष्ट क े ले आहे. (भर देण्यार् आला ) ३१. िरील र्ोष्टी सूलिर् करर्ील की, ज्ा संलेखािर 'कारिाई' क े ली जार् आहे त्ािर कोिर्ाही लनरपेक्ष रोध नाही कारि नंर्रच्या टप्प्यािर दोषािे लनिारि होऊ शकर्े. ३१.१. िरील मार्स (ओघ ) उपलब्ध नाही असा युस्तक्तिाद करर्ाना, मध्यस्थीसाठीच्या लिद्वान िररष्ठ िकील माललिका लत्रिेदी यांनी असा युस्तक्तिाद क े ला होर्ा की कलम ३५ मध्ये िैधालनक रोधािी र्रर्ूद आहे, ज्ामध्ये करार कोित्ाही हेर्ूसाठी पुराव्यार् स्वीकारला जािार नाही लक ं िा अशा कोित्ाही व्यक्तीद्वारे लक ं िा कोित्ाही सरकारी अलधकाऱयाद्वारे त्ािर कारिाई, नोंदिी लक ं िा प्रमािीकरि क े ले जािार नाही. म्हिूनि, असे सादर क े ले जार्े की जेव्हा न्यायालय लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ अंर्र्सर् लिादािी लनयुक्ती करर्े, र्ेव्हा र्े लनलिर्पिे लिाद खंड "क ृ र्ी" करर् असर्े, ज्ाला मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ अन्वये स्पष्ट भाषेर् प्रलर्बंलधर् क े ले आहे. आर्ा आपि िरील युस्तक्तिाद र्पासण्यासाठी पुढे जाऊ या. ३१.२ हमीद जोहारन लिरुद्ध अब्ुल सलाम [३४ (२००१) ७ एस. सी. सी. ५७३] या खटल्यार्, िाटिीच्या आदेशाच्या संदभासर्, या न्यायालयाच्या 2 न्यायाधीशांना मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ आलि मुदर् कायदा, १९६३ च्या कलम १३६ शी सहसंबंधािा अथस लािण्यािी संधी लमळाली. त्ा प्रकरिार् असा युस्तक्तिाद करण्यार् आला होर्ा की जे संलेख रीर्सर े ले र्ेले नाही, त्ािर 'कारिाई' क े ली जाऊ शकर् नाही. त्ार् मुद्दा हा होर्ा की, िाटिीच्या खटल्यार् संमर् क े लेल्या हुक ू मनाम्यािर मुद्ांक कार्द अंलकर्क े ल्यालशिाय कारिाई क े ली जाऊ शकर्े/त्ािी अंमलबजाििी क े ली जाऊ शकर्े का? असा युस्तक्तिादही करण्यार् आला की हुक ू मनामा लार्ू करण्यायोग्य होण्याच्या र्ारखेपासून म्हिजे जेव्हा हुक ू मनामा मुद्ांक कार्दािर अंलकर् क े लेला असर्ो त्ा र्ारखेपासून मुदर् मयासदेिा कालािधी सुरू होर्ो. या संदभासर्, न्यायालयाने असे मर् व्यक्त क े ले कीः "३८... लनःसंशयपिे, कलम २ (१५) मध्ये िाटिीिा हुक ू मनामा समालिष्ट आहे आलि १८९९ च्या कायद्याच्या कलम ३५ मध्ये आमुद्ांलकर् लक ं िा अपुरे े लेले पुराव्यामध्ये दाखल करण्याच्या लक ं िा त्ािर कारिाई करण्याच्या प्रकरिार् एक रोध ठे िला आहे-परंर्ु यािा अथस असा होर्ो का ? की, मुद्ांक कार्द सादर होईपयंर् आलि त्ािर िाटिीिा हुक ू मनामा काढला जाईपयंर् आलि त्ानंर्र न्यायाधीशांनी स्वाक्षरी करेपयंर् लिलहर् कालािधी लनलंलबर् राहील? र्थालप, पररिाम पूिसपिे मूखसपिािा असेल. खरे र्र, जर कोिी त्ार् लनलदसष्ट क े लेल्या िेळे च्या आर् मुद्ांक कार्द सादर करू इस्तच्छर् नसेल आलि िाटिी आदेश र्यार करण्यासाठी लदिािी न्यायालयाने आिश्यक क े ल्यानुसार लक ं िा जर कोिी मुद्ांक कार्द अलजबार् सादर क े ला नाही, र्र यािा अथस असा होर्ो का? की, अंमलबजाििीसाठी कोित्ाही मुदर्मयासदेिा कालािधी आकलषसर् क े ला जाऊ शकर् नाही लक ं िा मुदर्मयासदेिा अमयासद कालािधी उपलब्ध आहे.मुदर् कायदा र्यार करण्याच्या लिलधमंडळाच्या हेर्ूला त्ािे योग्य महत्त्व द्यािे लार्ेल. लनरथसकर्ा हा न्यायालयाच्या आदेशाद्वारे क े लेल्या व्याख्येिा पररिाम असू शकर् नाही आलि लजथे अशा लनरथसकपिािी शक्यर्ा असर्े लर्थे त्ाला प्रोत्साहन देण्याऐिजी त्ाला मार्े हटििे हा न्यायालयीन अलधकारािा सौम्य िापर असेल. भारर्ीय मुद्ांक कायद्यािा संपूिस उद्देश काही देयक े उपलब्ध करून देिे आलि महसूल र्ोळा करिे हा आहे, परंर्ु यािा अथस पूिसपिे लभन्न क्षेत्रार् कायसरर् असलेल्या दुसऱ‍ या कायद्यािर होिारा पररिाम अलधभालिर् करिे असा होर् नाही. " ३१.३. अशा प्रकारे, असा लनिसय घेण्यार् आला की, मुद्ांक कायदा, १८९९ पूिसपिे लभन्न क्षेत्रार् कायसरर् असलेल्या मुदर् कायदा, १९६३ सारख्या दुसऱ‍ या कायद्याच्या प्रभािाला अलधभालिर् करू शकर् नाही. पुढे, ' लनष्पादर्ा ' आलि 'अंमलबजाििी करण्यायोग्यर्ा' या अलभव्यक्तीिा अथस असा होर्ा की 'अंमलबजाििी करण्यायोग्यर्ा' ही मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कलम ३५ िा लिषय असू शकर् नाही. मुद्ांक कार्द सादर क े ल्यालशिाय अंमलबजाििीिी क्षमर्ा प्रलंलबर् क े ली जाऊ शकर् नाही, असा लनिासयक लनिसय घेण्यार् आला. जास्तीर् जास्त, दस्तऐिज लनष्पालदर् न करर्ा येण्याजोर्ा क े ला जाऊ शकर्ो. ३१.४. त्ानंर्र, या न्यायालयाच्या ३ न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने लिरंजी लाल (डॉ.) लिरुद्ध हरी दास ३५ [३५ (२००५) १० एस सी सी ७४६] मध्ये हमीद जोहरन (िर नमूद क े लेल्या) मध्ये मुद्ांक कार्दािर अंलकर् क े लेल्या हुक ू मनामाच्या र्ारखेपासून सुरू होिाऱया मुदर्मयासदा कालािधीच्या प्रश्नािर िरील लनकालािर ििास क े ल्यानंर्र, समपसकपिे खालील लनिसय लदला: "२३. भारर्ीय मुद्ांक कायदा, १८९९ िा उद्देश आलि योजना लक्षार् घेऊन असा अथस लािण्यास परिानर्ी नाही. मुद्ांक कायदा हा संलेखाच्या लिलशष्ट िर्ांच्या राज्ािा महसूल सुरलक्षर् करण्याच्या उद्देशाने लार्ू क े लेला एक लित्तीय उपाय आहे. पक्षकाराला त्ाच्या प्रलर्स्पध्यासच्या खटल्याला र्ोंड देर्ा यािे यासाठी र्ांलत्रकर्ेच्या शस्त्राने सुसज्ज करण्यासाठी कायदा क े ला जार् नाही. कायद्याच्या कठोर र्रर्ुदींिी लनलमसर्ी महसुलाच्या लहर्ासाठी करण्यार् आली आहे.एकदा का र्ी उलद्दष्टे कायद्यानुसार सुरलक्षर् झाली की, संलेखािर आपला दािा करिारा पक्ष संलेखार्ील प्रारंलभक सदोषपिाच्या आधारािर पराभूर् होिार नाही (लहंदुस्तान स्टील लललमटेड लिरुद्ध लदलीप कन्स्ट्रक्शन क ं पनी. [(१९६९) १ एस. सी. सी. ५९७] ". ३१.५. हे लिशेषर्ः असे म्हटले र्ेले होर्े की "िाटिी हुक ू मनामाच्या अंमलबजाििीसाठी मुदर् मयासदेच्या कालािधीिी सुरुिार् मुद्ांक कार्दािर अंलकर् हुक ू मनाम्यािर समालश्रर् क े ली जाऊ शकर् नाही". ३१.६. अशा प्रकारे, अमुद्ांलकर्/अपुरे मुद्ांलकर् क े लेले दस्तऐिज दस्तऐिजाच्या अंमलबजाििीिर पररिाम करर् नाही लक ं िा दस्तऐिज अिैध ठरिर् नाही. [३६ र्ुलजारी लाल मालिारी लिरुद्ध राम र्ोपाल ए. आय. आर. १९३७ क ॅ ल ७६५; मत्तेर्ुंर्ा धनलक्ष्मी लिरुद्ध कांर्म राजू सारदांबा, ए. आय. आर. १९७७ ए. पी. ३२८; पुरनिंद् लिरुद्ध कल्लीपदा रॉय, ए. आय. आर. १९४२ क ॅ ल ३८६; बूटर्म लपलिया लिरुद्ध बोयापर्ी कोटेर्श्र राि ए. आय. आर. १९६४ ए. पी. ५१९ हेही पहा.] र्रर्ुदींिे सरळ िािन क े ल्यास हे देखील स्पष्ट होईल की एखाद्या दस्तऐिजािर नंर्रच्या टप्प्यािर 'कारिाई' क े ली जाऊ शकर्े. त्ामुळे हा एक लनिारिीय दोष आहे. ३२. अपीलकत्ासिे लिद्वान िकील, श्री. र्र्न सांघी यांनी असा युस्तक्तिाद क े ला की कलम ३५ आलि ३३ ही अलनिायस र्रर्ुदी आहेर् कारि त्ार् ‘शॉल’‍(shall) हा शब् िापरला आहे आलि एक अमुद्ांलकर् दस्तऐिज सुरिार्ीलाि अिरूध करिे आिश्यक आहे. न्यायमूर्ी जी. पी. लसंर् [३७ न्यायमूर्ी जी. पी. लसंर्ः पी. ४५०-४५१ िर िैधालनक व्याख्येिी र्त्त्वे (लेस्तक्ससनेस्तक्सस, २०१६); बुजोर आलि भिानी प्रसाद लिरुद्ध भर्ाना आयएलआर १० क ॅ ल ५५७ सैलनक मोटसस लिरुद्ध राजस्थान राज् १९६२ (१) एस. सी. आर. ५१७; उत्तर प्रदेश राज् लिरुद्ध बाबू राम ए. आय. आर. १९६१ एस. सी. ७५१ ] यांनी क े लेल्या िैधालनक व्याख्येच्या र्त्त्वांमध्ये, ‘शॉल’‍(shall) या शब्ािा िापर आलि हा शब् अलनिायस आहे असे र्ृहीर् धरिे, असे म्हटले आहेः ".र्रर्ुदी अत्ािश्यक असल्‍ यािा हा प्रथमदशसनी अंदाज अशा सरंिनेर्ून येिाऱया इर्र लििारांद्वारे खंलडर् क े ला जाऊ शकर्ो. अशी अनेक प्रकरिे आहेर् लजथे "शॉल" या शब्ािा अथस क े िळ लनदेलशका असा लािला र्ेला आहे.न्यायमूर्ी लहदायर्उल्लाह यांनी लनरीक्षि क े ले की " शॉल" हा शब् सामान्यर्ः अलनिायस असर्ो परंर्ु संदभस लक ं िा हेर्ू अन्यथा आिश्यक असल्यास कधीकधी त्ािा अथस लािला जार् नाही. न्यायमूर्ी सुब्बाराि िे असे लनरीक्षि आहे की, "जेव्हा एखादा कायदा होईल ' (शॉल ) ' हा शब् िापरर्ो र्ेव्हा प्रथमदशसनी र्ो अलनिायस असर्ो., परंर्ु कायद्याच्या संपूिस व्याप्तीकडे काळजीपूिसक लक्ष देऊन न्यायालय कायदेमंडळािा खरा हेर्ू र्पासू शकर्े. " ३२.१. पी. बी. मॅक्सिेल यांनी 'कॉमेंटरी ऑन इंटरलप्रटेशन ऑफ स्टॅट्यूट्स ' [३८. पी. सेंट जे. लांर्न, मॅक्सिेल ऑन द इंटरलप्रटेशन ऑफ स्टॅट्यूट्स (एन. एम. लत्रपाठी प्रायव्हेट लललमटेड, १९७६)]; मध्ये नमूद क े ले आहे की एखाद्या कायद्यािा संपूिस लििार क े ला पालहजे आलि लनिसिनाच्या पुढील र्ीन पद्धर्ींिर ििास क े ली पालहजेः "कायद्याच्या बाह्य पैलूंपासून र्े त्ार्ील मजक ु रापयंर् जार् असर्ाना, हा एक प्राथलमक लनयम आहे की संरिनेिे सिस भार् एकत्र क े ले पालहजे, आलि क े िळ एका भार्ािे नाही" १) िैयस्तक्तक शब्ांिा िेर्ळा लििार क े ला जार् नाही, परंर्ु ज्ा लिभार्ार् र्े येर्ार् त्ा लिभार्ार्ील इर्र शब्ांद्वारे त्ांिा अथस लनधासररर् क े ला जाऊ शकर्ार्. २) एखाद्या कलमािा अथस त्ाि कायद्यार्ील इर्र स्वर्ंत्र कलमांद्वारे लनयंलत्रर् क े ला जाऊ शकर्ो. ३) शेिटी, एखाद्या कलमािा अथस लनधासररर् क े ला जाऊ शकर्ो, कायद्यार्ील इर्र िैयस्तक्तक र्रर्ुदींच्या संदभासर् नाही, जी सिससाधारिपिे कायद्यािी योजना मानली जार्े. ३२.२. न्यायमूर्ी जी. पी. लसंर् यांनी कायद्यांच्या स्पष्टीकरिार् पुढे नमूद क े ले आहे की ३९: न्यायमूर्ी जी. पी. लसंर्ः पी. ४६ िर िैधालनक व्याख्येिी र्त्त्वे (लेस्तक्ससनेस्तक्सस, २०१६); "हा कायदा संपूिसर्ः िािला पालहजे हे र्त्त्व एकाि कलमाच्या िेर्िेर्ळ्या भार्ांना लर्र्क े ि लार्ू होर्े. भार्ांपैकी एक भार् हा बिर् खंड आहे की परंर्ुक, यािा संपूिस अथस लािला र्ेला पालहजे.न्यायाधीश सुब्बाराि याला म्हिर्ार्, "एक प्राथलमक लनयम आहे की एका भार्ािे लििेिन सिस भार् लमळू न क े ले पालहजे" ३२.३ अशा प्रकारे, कलम ३५,३६ िे एकलत्रर् िािन आलि कलम ३५ आलि ४२ च्या र्रर्ुदीिर; मुद्ांक कायदा १८९९ च्या िस्तुलनष्ठ आलि कायदेशीर हेर्ूने िािलेल्या या सिस कलमांमध्ये लक ं िा अर्दी त्ाि कलमार् 'क ृ र्ी' या शब्ािा िापर क े ल्यािर, हे स्पष्ट होर्े की कलम ३५ अंर्र्सर् असलेली बंदी पररपूिस असण्यािा हेर्ू नाही; मुद्ांक शुल्क न भरिे हा एक लनिारिीय दोष आहे कारि त्ािा उद्देश महसुलािे संरक्षि करिे हा आहे.लशिाय, मुद्ांक कायदा, १८९९ च्या कोित्ाही र्रर्ुदींिा एखाद्या दस्तऐिजाला आरंभर्ः ि शून्य ठरिण्यािर पररिाम होर् नाही. जी. लर्वाि कायिा, १९६६ ची र्वैिादिक योजिा ३३. लिाद कायदा, १९९६ लार्ू करण्यामार्ील संसदीय हेर्ूिा संदभस देिे योग्य आहे, ज्ाने लिाद कायदा, १९४० िी जार्ा घेर्ली. लिाद कायदा, १८९९ हा या लिषयािरील पलहला कायदा होर्ा, ज्ािा कलकत्ता, मुंबई आलि मद्ास या प्रेलसडेन्सी शहरांमध्ये मयासलदर् िापर होर्ा. त्ानंर्र, लदिािी प्रलक्या संलहर्ा, १९०८ च्या र्रर्ुदींिी दुसरी अनुसूिी लिादाशी संबंलधर् होर्ी. लिाद कायदा, १९४० हा प्रमुख एकलत्रर् कायदा होर्ा, जो (इंग्रजी) लिाद कायदा, १९४० िर आधाररर् होर्ा. लिधी आयोर्ाने आपल्या २४६ व्या एल. सी. आय. अहिालार् (िर नमूद क े लेल्या) नमूद क े ले आहे की ही लिाद व्यिस्था लिाद प्रसंभालिक प्रलक्या अलिर्श्ासािर आधाररर् होर्ी आलि "१९९६ िा कायदा आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादािरील यु एन सी आई टी आर ए एल( UNCITRAL) मॉडेल कायदा, १९८५ आलि UNCITRAL र्डजोड लनयम, १९८० िर आधाररर् आहे. उद्देश आलि कारिांच्या लिधानािा संबंलधर् भार् खाली नमूद क े ला आहे: (i) आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिाद आलि र्डजोडी र्सेि देशांर्र्सर् लिाद आलि र्डजोडीिा सिससमािेशक समािेश करिे; \ (ii) न्याय्य, कायसक्षम आलि लिलशष्ट लिादाच्या र्रजा पूिस करण्यास सक्षम असलेल्या लिाद प्रलक्येिी र्रर्ूद करिे; iii ) लिाद न्यायालधकरि त्ाच्या लिादाच्या लनिसयािी कारिे देईल अशी र्रर्ूद करिे; iv ) लिाद न्यायालधकरि त्ाच्या अलधकारक्षेत्राच्या मयासदेर् राहील यािी खात्री करिे; (v) लिाद प्रलक्येर् न्यायालयांिी पयसिेक्षी भूलमका कमी करिे; (vi) लििादांिे लनराकरि करण्यास प्रोत्साहन देण्यासाठी लिादाच्या कायसिाहीदरम्यान लिाद न्यायालधकरिाला मध्यस्थी, र्डजोड लक ं िा इर्र कायसपद्धर्ी िापरण्यािी परिानर्ी देिे; (vii) प्रत्ेक अंलर्म लिादािा लनिसय न्यायालयािा हुक ू म असल्यासारखा त्ाि पद्धर्ीने अंमलार् आिला जाईल अशी र्रर्ूद करिे; (viii) र्डजोडीच्या कायसिाहीच्या पररिामी पक्षकारांनी क े लेल्या र्डजोडीच्या कराराला लिाद न्यायालधकरिाने लदलेल्या िादाच्या मुळाशी मान्य क े लेल्या अटींिर लिादाच्या लनिसयाएिढाि दजास आलि प्रभाि असेल अशी र्रर्ूद करिे; आलि (ix) अशी र्रर्ूद करिे की, परदेशी लनिसयांच्या अंमलबजाििीच्या उद्देशाने, ज्ा देशार् भारर् पक्षकार असलेल्या परदेशी लिादाच्या लनिसयांशी संबंलधर् दोन आंर्रराष्टर ीय करारांपैकी एक असलेल्या देशार् क े लेला प्रत्ेक लिादािा लनिसय परदेशी पुरस्कार मानला जाईल.[ भर देण्यार् आला] ३४. पुढे, आदशस कायद्यािे कलम ५ आलि लिाद कायदा, १९९६ िे कलम ५ िािल्यािर, ज्ामध्ये लिाद कायसिाहीमध्ये न्यालयक हस्तक्षेपाच्या र्रर्ुदींिा समािेश आहे, हे स्पष्ट होर्े की संसदेने UNCITRAL मॉडेल कायद्याच्या कलम ५ च्या पलीकडे जाऊन एक अबालधर् कलम जोडले. हा मुद्दा लसद्ध करण्यासाठी, र्रर्ुदींिा संपूिस उल्लेख करिे योग्य आहे. UNCITRAL मॉडेल कायदा, १९८५िे कलम ५ खालीलप्रमािे आहेः "कलम ५. न्यायालयीन हस्तक्षेपािी व्याप्ती-या कायद्याने शालसर् असलेल्या बाबींमध्ये, या कायद्यार् अशा प्रकारे र्रर्ूद क े ल्याखेरीज कोिर्ेही न्यायालय हस्तक्षेप करिार नाही. लिाद कायदा, १९९६ िे कलम ५ खालीलप्रमािे आहेः "५. न्यायालयीन हस्तक्षेपािी व्याप्ती-सध्या अंमलार् असलेला असलेल्या इर्र कोित्ाही कायद्यार् काहीही असले र्री, या भार्ाद्वारे शालसर् बाबींमध्ये, या भार्ार् अशा प्रकारे र्रर्ूद क े ल्याखेरीज कोिर्ाही न्यालयक प्रालधकरि हस्तक्षेप करिार नाही. " ३५. याव्यलर्ररक्त, कलम ५ िा उद्देश प्रलर्लबंलबर् करर्ाना, डॉ. पीटर बाइंडर यांनी आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादािरील UNCITRAL मॉडेल लॉ, १९८५ मध्ये नमूद क े ले आहेः [४० पी. बाइंडर, इंटरनॅशनल कमलशसयल आलबसटरेशन अँड कॉस्तन्सललएशन इन UNCITRAL मॉडेल लॉ ज्ुररस्तस्डक्शन २७४ (दुसरी आिृत्ती, स्वीट अँड मॅक्सिेल लंडन २००५) पी. ५०-५१] "१-१०७: आयोर्ाच्या अहिालानुसार, कलम 5५िा उद्देश" आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादार्ील सहाय्यासह, न्यायालयीन हस्तक्षेपािी सिस प्रकरिे आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादािरील (मॉडेल) कायद्यार् सूिीबद्ध करण्यासाठी मसुद्यकत्ांना भार् पाड ू न, जास्तीर् जास्त प्रमािार् न्यालयक हस्तक्षेपािी खात्री लमळििे हा होर्ा. लिश्लेषिात्मक भाष्याने कलम ५ च्या पररिामािे ििसन "आदशस कायद्यार् सूिीबद्ध नसलेल्या देशांर्र्सर् प्रिालीमध्ये न्यायालयांना लदलेले कोिर्ेही सामान्य लक ं िा अिलशष्ट अलधकार िर्ळिे" असे क े ले आहे. कायद्यािी स्पष्टर्ा प्रदान करण्याच्या मोठ्या फायद्याव्यलर्ररक्त, जे लिदेशी पक्षांसाठी लिशेषर्ः महत्वािे आहे (अिांलिर् कायदेशीर आियांपासून त्ांिे संरक्षि करिे,) कलम ५ हे जािूनबुजून आलि लिलंबकारी न्यायालयीन कायसिाहीमुळे होिाऱया उलशरािी शक्यर्ा कमी करण्यासाठी लिाद प्रलक्येला र्र्ी देण्यािे कायस करर्े. ३६. लिाद कायदा, १९९६ कलम ५ सह आलि मॉडेल कायद्याच्या कलम ५ च्या उद्देश आलि कारिांिे लनिेदन यांिे एकलत्रर् िािन क े ल्यास हे प्रािुयासने स्पष्ट होईल की, या कायद्यामार्ील कायदेशीर हेर्ू इर्र र्ोष्टींबरोबरि, न्यायालयांिा हस्तक्षेप कमी करिे आलि लििादांिे िेळे िर लनराकरि करिे हा होर्ा. सिोपरर खंड जोड ू न, संसदेने कलम ५ च्या माध्यमार्ून अनुच्छे द 5 पासून लक्षिीय लििलन क े ले आलि सध्या अंमलार् असलेल्या इर्र कोित्ाही कायद्याच्या र्रर्ुदींिर अलधभािी प्रभाि पाडला. लिशेषर्ः कोित्ाही कायद्यार्ील कोित्ाही र्रर्ुदीद्वारे त्ांना लमळू शकिाऱया कोित्ाही अिलशष्ट अलधकारािा िापर करिाऱया न्यायालयांच्या संदभासर्, त्ाने न्यालयक प्रालधकरिाच्या भूलमक े ला मयासदा घार्ल्या. ३७. आर्ा आपि लिाद कायदा, १९९६ च्या अप्रयुक्त (मूळ ) कलम ११(६) िा संदभस घेऊया जो UNCITRAL मॉडेल कायद्याच्या कलम ११ िर आधाररर् आहे: “११. लिादांिी लनयुक्ती. - असे. (६) जेथे, पक्षांनी प्रलक्येअंर्र्सर् मान्य क े लेल्या लनयुक्ती (अ) पक्ष त्ा प्रलक्येअंर्र्सर् आिश्यकर्ेनुसार कायस करण्यार् अयशस्वी ठरर्ो; लक ं िा (ख) पक्ष लक ं िा लनयुक्त क े लेले दोन लिाद, त्ा प्रलक्येअंर्र्सर् त्ांच्याकड ू न अपेलक्षर् असलेल्या करारािर पोहोिण्यार् अयशस्वी ठरर्ार्; लक ं िा (क) एखाद्या संस्थेसह एखादी व्यक्ती, त्ा प्रलक्येअंर्र्सर् त्ाला लक ं िा त्ाला सोपिलेले कोिर्ेही कायस पार पाडण्यार् अयशस्वी झाल्यास, एखादा पक्ष मुख्य न्यायाधीशांना लक ं िा त्ाने लनयुक्त क े लेल्या कोित्ाही व्यक्तीला लक ं िा संस्थेला आिश्यक र्ी पािले उिलण्यािी लिनंर्ी करू शकर्ो, जोपयंर् लनयुक्ती प्रलक्येिरील करारार् लनयुक्ती लमळलिण्यासाठी इर्र मार्स उपलब्ध होर् नाहीर्." ३८. जरी लिाद कायदा, १९९६ मधील प्रमुख र्रर्ुदी प्रामुख्याने UNCITRAL आदशस कायद्यािर आधाररर् असल्या, र्री लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ आलि कलम ८ मध्ये सुधारिा करर्ाना लिलधमंडळाने देखील महत्त्वपूिस बदल क े ले आहेर्. ३९. पुढे, या संदभाससाठी लिाद कायदा, १९९६च्या कलम ११(६) च्या न्यायशास्त्रीय इलर्हासािा थोडक्यार् मार्ोिा घेिे योग्य होईल. i) लर्वाि कायिा, १९९६ च्या कलम ११(६) अंतर्णत कायद्याची उत्क्ांती. ४०. आय. सी. आय. सी. आय. लललमटेड लिरुद्ध ईस्ट कोस्ट बोट लबल्डसस अँड इंलजलनअसस लललमटेड [४१ (१९९८) ९ एससीसी ७२८] या प्रकरिार्ील या न्यायालयाच्या दोन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने कलम ११ (६) अंर्र्सर् लिादांच्या लनयुक्तीर्ील लिलंब लििारार् घेऊन, कलम ११ न्यायाधीशांच्या अलधकारक्षेत्रािा प्रश्न लििादाच्या लिादीपिािा लििार करण्यासाठी र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाकडे पाठिला. हे नोंदिले र्ेले की, क े. आर. रिींद्नाथन लिरुद्ध क े रळ राज् [ ४२ (१९९६) १० एससीसी ३५] या प्रकरिार्, या न्यायालयाच्या आिखी दोन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने यापूिीि मोठ्या खंडपीठाकडे, असाि प्रश्न पाठिला होर्ा. ४१. त्ानंर्र, सुंदरम फायनान्स लललमटेड लिरुद्ध एन. ई. पी. सी. इंलडया लललमटेड [ ४३ (१९९९) 2 एससीसी ४७९] या प्रकरिार्, दोन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने असे मर् व्यक्त क े ले कीः १२....१९९६ च्या कायद्यानुसार, लिादािी लनयुक्ती कलम ११ च्या र्रर्ुदींनुसार क े ली जार्े, ज्ासाठी न्यायालयाला लिादािी लनयुक्ती करण्यासाठी न्यालयक आदेश पाररर् करण्यािी आिश्यकर्ा नसर्े. ४२. अदोर सालमया प्रायव्हेट लललमटेड लिरुद्ध पीक े होस्तल्डंग्स लललमटेड ४४ (१९९८) ८ एस एस सी ५७२ (थोडक्यार् "अदोर सालमया") या प्रकरिार्ील दोन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने िरील आदेशाला दुजोरा लदला.भारर्ीय राज्घटनेच्या कलम १३६ अंर्र्सर् लिादािी लनयुक्ती करिाऱया उच्च न्यायालयाच्या मुख्य न्यायाधीशांनी लदलेल्या आदेशािरून अपील करण्याच्या प्रश्नािर सुनाििी करर्ाना, या न्यायालयाने असे म्हटले की, लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ अंर्र्सर् लदलेला आदेश हा एक प्रशासकीय आदेश होर्ा. कोकि रेल्वे महामंडळ लिरुद्ध मेहूल कन्स्ट्रक्शन क ं पनी [४५(२००७) २एस सी सी ३८८] (थोडक्यार् 'कोकि रेल्वे (आय)') या प्रकरिार्ील र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने याला दुजोरा लदला, जेथे हे प्रकरि अदोर सालमया (सुप्रा) मधील र्ुिोत्तरािर पुनलिसिार करण्यासाठी आले होर्े. हे खालीलप्रमािे नोंदिले र्ेलेः "४. जेव्हा हे प्रकरि कायद्याच्या कलम ११ अंर्र्सर् मुख्य न्यायाधीश लक ं िा त्ांच्या नामलनदेलशर्ांसमोर ठे िले जार्े, र्ेव्हा मध्यस्थीिी प्रसंभालिक प्रलक्या कोित्ाही लिलंबालिना सुरू क े ली जािी आलि सिस िादग्रस्त मुद्दे लिाद न्यायालधकरिासमोरि उपस्तस्थर् क े ले जािेर्, हा लिलधमंडळािा हेर्ू लक्षार् ठे ििे उक्त मुख्य न्यायाधीश लक ं िा त्ांच्या नामलनदेलशर् व्यक्तीसाठी अत्ािश्यक आहे. त्ा टप्प्यािर मुख्य न्यायाधीश लक ं िा त्ांच्या नामलनदेलशर् व्यक्तीला पक्षांमधील कोित्ाही िादग्रस्त मुद्द्यािी दखल घेिे आलि त्ािर लनिसय घेिे योग्य ठरिार नाही.कायद्याच्या कलम १३ आलि १६ िे लनव्वळ िािन क े ल्यास हे स्पष्ट होर्े की लिादािी पात्रर्ा, स्वार्ंत्र्य आलि लनःपक्षपार्ीपिा आलि लिादाच्या अलधकारक्षेत्राशी संबंलधर् प्रश्न लिादासमोर उपस्तस्थर् क े ले जाऊ शकर्ार् जे त्ािा लनिसय घेर्ील. " "४३. त्ानंर्र कोकि रेल्वे महामंडळ लिरुद्ध मेहूल कन्स्ट्रक्शन क ं पनी ४६ (२००२) २ एस सी सी ३८८ (थोडक्यार् "कोकि रेल्वे (II)") या खटल्यार्ील पाि न्यायाधीशांनी र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाच्या लनिसयाला दुजोरा लदला. या न्यायालयाने त्ार् असे म्हटले आहे की मुख्य न्यायाधीशांनी लक ं िा त्ांनी कलम ११ अंर्र्सर् लनयुक्त क े लेल्या 'कोित्ाही व्यक्तीने लक ं िा संस्थेने' िापरलेले अलधकार न्यायलनिासयक नाहीर्. पूिसस्तस्थर्ीिा र्पशीलिार आढािा घेर्ल्यानंर्र, असे म्हटले र्ेले की कलम ११ अंर्र्सर् मुख्य न्यायाधीश लक ं िा त्ांिे लनयुक्त कायस क े िळ "उरलेली पोकळी भरून काढिे" आलि जलद रिना आलि लिाद कायसिाही सुरू करण्यासाठी लिादािी लनयुक्ती करिे हे आहे. ४४. एस. बी. पी. (िरील) मधील या न्यायालयाच्या सार् न्यायाधीशांनी कोकि रेल्वे (२) (िरील) मधील लनिसय उलटिला. त्ार् असे म्हटले र्ेले होर्े की लनयुक्तीसाठी अजस ठरििे हा 'प्रशासकीय' अलधकाराच्या लिरोधार् 'न्यालयक' अलधकारािा िापर आहे आलि न्यायालयाला पुरािे अलभलेखिण्यािा देखील अलधकार आहेः "३९. [एफ] लक ं िा या पैलूंिर लनिसय घेण्याच्या उद्देशाने, मुख्य न्यायाधीश एकर्र प्रलर्ज्ञापत्र आलि सादर क े लेल्या कार्दपत्रांच्या आधारे पुढे जाऊ शकर्ार् लक ं िा असा पुरािा घेऊ शकर्ार् लक ं िा असा पुरािा नोंदिू शकर्ार्" ४५. र्थालप, न्यायमूर्ी सी. क े. ठक्कर यांनी बहुमर्ाच्या मर्ाशी असहमर्ी दशसिली आलि पुढील पररच्छे दार् र्े प्रशासकीय अलधकार असल्यािा लनष्कषस काढलाः "८५…. माझ्या मनार् कोिर्ीही शंका नाही की त्ा टप्प्यािर, आिश्यक समाधान क े िळ प्रथमदशसनी स्वरूपािे असर्े आलि मुख्य न्यायाधीश पक्षांमधील लीस लक ं िा िादग्रस्त मुद्द्यांिा लनिसय घेर् नाहीर्. कलम 11 मध्ये र्पशीलिार िौकशी, संपरीक्षा लक ं िा िादग्रस्त लक ं िा िादग्रस्त बाबींिरील लनष्कषांिा लििार क े ला जार् नाही. " ४६. असहमर्ीमार्ील िार मुख्य कारिे खालीलप्रमािे सारांलशर् क े ली जाऊ शकर्ार्ः "१११.. सिसप्रथम, न्यायालयािे कायस र्रर्ुदीिा अथस लाििे हे आहे आलि त्ार् व्याख्यात्मक लनिसिलनय प्रलक्येद्वारे सुधारिा करिे, बदल करिे लक ं िा च्या ऐिजी बदलिे हे नाही. दुसरे म्हिजे, लिलधमंडळाने लििार क े लेल्या काही लिलशष्ट पररस्तस्थर्ींना लार्ू करिारा कायदा बनििे हे लिलधमंडळािे काम आहे आलि न्यायव्यिस्थेला 'लिलधमंडळ ज्ञान' मध्ये प्रिेश करण्यािा कोिर्ाही अलधकार नाही. लर्सरे म्हिजे, मी म्हटल्याप्रमािे, मुख्य न्यायमूर्ींिा 'लनिसय' हा क े िळ प्रथमदशसनी लनिसय आहे आलि कलम १६ िे उप-कलम (१) लिाद न्यायालधकरिाला त्ाच्या स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािर लनिसय देण्यािा अलधकार व्यक्त करर्े. िौथे, लिाद न्यायालधकरिाने लदलेल्या आदेशामुळे लनमासि झालेल्या पररस्तस्थर्ीला सामोरे जाण्यासाठी र्ो उपाय प्रदान करर्ो. कायद्यािा अथस लािण्याच्या नािाखाली न्यायालयीन कायदे करण्यास परिानर्ी नाही, हा त्ांच्या लिरोधािा मुख्य आधार आहे. " ४७. पररच्छे द ९५ आलि ९६ मधील असहमर्ीच्या मर्ामध्ये, न्यायमूर्ी ठक्कर यांनी पुढे असे म्हटलेः "९५…. आर्ा आपि कायद्याच्या कलम १६ िा लििार करूया. हे कलम निीन आहे आलि १९४० च्या जुन्या कायद्यार् त्ाला स्थान लमळाले नाही. त्ा कलमािे उपकलम (1) लिाद न्यायालधकरिाला स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािर लनिसय घेण्यास सक्षम करर्े.त्ार् पुढे अशी र्रर्ूद आहे की न्यायालधकरिाच्या अलधकारक्षेत्रार् लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वाशी संबंलधर् लक ं िा िैधर्ेशी संबंलधर् कोित्ाही आक्षेपांिरील लनिसयािा समािेश आहे.उपकलम (२), (३) आलि (४) मध्ये लिादाच्या अलधकारक्षेत्रासंदभासर् यालिका दाखल करण्यािी आलि अशा यालिक े िर सुनाििी करण्यािी प्रलक्या नमूद करण्यार् आली आहे. उपकलम (५) असे आदेश देर्े की लिाद न्यायालधकरि अशा यालिक े िर "लनिसय घेईल" आलि "जेथे लिाद न्यायालधकरि यालिका फ े टाळण्यािा लनिसय घेर्े, र्ेथे लिाद कायसिाही सुरू ठे िा आलि लिादािा लनिसय घ्या". उपकलम (६) लर्र्काि महत्त्वािा आहे आलि स्पष्टपिे अलधलनयलमर् करर्ो की लिादाच्या लनिसयामुळे व्यलथर् झालेला पक्ष असा लनिसय रद्द करण्यासाठी कायद्याच्या कलम ३४ िा िापर करू शकर्ो. लिलंबकारी डािपेि आलि न्यायालयार् जाण्याच्या र्ात्काळ अलधकारािा र्ैरिापर रोखण्यासाठी ही र्रर्ूद करण्यार् आल्यािे लदसर्े. जर एखाद्या व्यलथर् पक्षाला न्यायालयार् जाण्यािा अलधकार असेल, र्र न्यायालयाला स्थलर्र्ी लक ं िा अंर्ररम लदलासा देण्यापासून रोखिे शक्य झाले नसर्े, ज्ामुळे लिादािी कायसिाही थांबर्े. कलम ५ सह िािलेल्या कलम १६ (६) च्या र्रर्ुदी आर्ा कायदेशीर स्तस्थर्ी स्पष्ट, असंलदग्ध आलि संशयालिरलहर् बनिर्ार्. ९६. कलम १६ (१) मध्ये कॉम्पेटेंझ-कॉम्पेटेंझ लक ं िा काम्पलटन्स डे ला काम्पलटन्स ( कायसलनिासह क्षमर्ा ) या सुप्रलसद्ध लसद्धांर्ािा समािेश आहे. हे एक महत्त्वािे र्त्त्व मान्य करर्े आलि स्थालपर् करर्े की सुरुिार्ीला आलि प्रामुख्याने, लिाद न्यायालधकरि स्वर्ःि हे ठरिर्े की या प्रकरिार् त्ािे अलधकारक्षेत्र आहे की नाही, हे लनलिर्ि अंलर्म न्यायालयाच्या लनयंत्रिाखाली आहे. अशा प्रकारे हा कालक्मानुसार प्राधान्यािा लनयम आहे. कॉम्पेटेंझ- कॉम्पेटेंझ हे आधुलनक आंर्रराष्टर ीय लिादािे व्यापकपिे स्वीकारलेले िैलशष्ट्ट्य आहे आलि लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वाशी संबंलधर् लक ं िा िैधर्ेशी संबंलधर् कोित्ाही आक्षेपांिर लनिसय घेण्यासह लिाद न्यायालधकरिाला त्ाच्या स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािा लनिसय घेण्यास अनुमर्ी देर्े, जो कायद्याच्या सक्षम न्यायालयाद्वारे अंलर्म पुनरािलोकनाच्या अधीन आहे, म्हिजेि कायद्याच्या कलम ३४ च्या अधीन आहे. ४८. न्यायमूर्ी ठक्कर यांच्या असहमर्ीर्ील िरील युस्तक्तिाद कॉम्पेटेन्झ कॉम्प्िेन्झच्या आंर्रराष्टर ीय स्तरािर मान्यर्ाप्राप्त र्त्त्व आलि लिलर्नशीलर्ेच्या लसद्धांर्ाशी सुसंर्र् आहे. एस. बी. पी. (िर नमूद क े लेले) मधील बहुमर्ािे मर् असे सुििर्े की कलम ११ न्यायालय पूिस-संदभस टप्प्यािर लघु-खटला िालिू शकर्े. एस. बी. पी. (िर नमूद क े लेल्या) च्या न्यायशास्त्रीय शुद्धर्ेिर शंका घेर्ली र्ेली आहे आलि २४६ व्या एल. सी. आय. अहिालाद्वारे (िर नमूद क े लेल्या) र्ो अलर् न्यालयक हस्तक्षेप मानला र्ेला. लिाद कायदा, १९९६ मधील त्ानंर्रच्या सुधारिांद्वारे र्े कायदेशीररीत्ा रद्द करण्यार् आले आहे, ज्ािर या लनिसयार् नंर्र ििास क े ली जाईल. ४९. त्ानंर्र, एस. बी. पी. (िरील) िे अनुसरि करिाऱया बोघारा पॉलीफ ॅ ब (िरील) मधील दोन न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने न्यायालयाला, इर्र र्ोष्टींबरोबरि, खालील मुद्द्यांिी र्पासिी करण्यािी परिानर्ी लदलीः २२. २. (अ) दािा मृर् (दीघसकाळ प्रलर्बंलधर्) दािा आहे की लजिंर् दािा आहे. ब) पक्षांनी त्ांिे परस्पर अलधकार आलि दालयत्व यांिे समाधान अलभलेखिून लक ं िा आक्षेप न घेर्ा अंलर्म भरिा प्राप्त करून संलिदा /व्यिहार पूिस क े ला आहे की नाही. " " ५०. एस. बी. पी. (उपरोक्त ) आलि बोघारा (उपरोक्त ) या दोन्ींिर ििास करिाऱया २४६ व्या एल. सी. आय. अहिालार्(उपरोक्त ) लक्षिीयरीत्ा नमूद क े ले आहे की िास्तलिक मुद्दा हा न्यायालयीन हस्तक्षेपािी "व्याप्ती" आलि "स्वरूप" आहेः "२९. सिोच्च न्यायालयाला, लिशेषर्ः कायद्याच्या कलम ११ च्या संदभासर्, पूिस- लिाद न्यालयक हस्तक्षेपािी व्याप्ती आलि स्वरूप यािर लििार करण्यािी संधी लमळाली आहे. दुदैिाने, र्थालप, सिोच्च न्यायालयासमोरिा प्रश्न असा र्यार करण्यार् आला होर्ा की असा अलधकार 'न्यालयक' आहे की 'प्रशासकीय' अलधकार-जो अशा नामकरि/ििसनामध्ये अंर्भूसर् असलेल्या िास्तलिक समस्येला अस्पष्ट करर्ोः अशा अलधकारांिी व्याप्ती-म्हिजे लिादािी लनयुक्ती करायिी की नाही हे ठरिर्ाना न्यायालय (मुख्य न्यायाधीश) ज्ा युस्तक्तिादांिी व्याप्ती लििारार् घेईल-म्हिजे लिाद करार अस्तस्तत्वार् आहे की नाही, र्ो रद्दबार्ल आहे की नाही, र्ो रद्द करण्यायोग्य आहे की नाही इ. आलि यापैकी कोिर्े लिाद न्यायालधकरिाच्या लनिसयासाठी सोडले पालहजे. अशा हस्तक्षेपािे स्वरूप- म्हिजे न्यायालय (मुख्य न्यायाधीश) र्पशीलिार संपरीक्षा नंर्र मुद्द्यांिा लििार करेल आलि त्ािा शेिटी लनिसय घेर्ला जाईल लक ं िा लिाद न्यायालधकरिाच्या लनिसयासाठी सोडला जाईल. ५१. स्वरूपाच्या संदभासर्, २४६ व्या एल. सी. आय. अहिालार् (िर नमूद क े लेले) नमूद क े ले आहे की या मुद्द्यािर कायद्यािे स्पष्टीकरि लशन एत्सु (िर नमूद क े लेले) मध्ये आढळर्े, जेथे या न्यायालयाने लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ४५ िा अथस लािर्ाना असे म्हटले आहे की या समस्येकडे क े िळ "प्रथमदशसनी" आधारािर पालहले पालहजे. व्याप्तीनुसार, अशी लशफारस करण्यार् आली होर्ी की न्यायालयाने करार "अमान्य" आहे की नाही हे र्पासण्यापुरर्े मयासलदर् राहािे आलि जर न्यायालयाला करार अस्तस्तत्वार् नसल्यािे आढळले र्र र्ो लनिसय अंलर्म असेल. लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८ आलि ११ च्या संदभासर् त्ांनी खालील लशफारसी क े ल्याः ३३... न्यायालयीन हस्तक्षेपािी व्याप्ती क े िळ अशा पररस्तस्थर्ींपुरर्ी मयासलदर् आहे लजथे न्यायालय/न्यालयक प्रालधकरिाला लिादािा करार अस्तस्तत्वार् नाही लक ं िा र्ो रद्दबार्ल असल्यािे आढळर्े. जोपयंर् हस्तक्षेपाच्या स्वरूपािा संबंध आहे, र्ोपयंर् अशी लशफारस क े ली जार्े की लिाद कराराला आव्हान देिाऱया युस्तक्तिादाच्या लिरोधार् न्यायालय/न्यालयक प्रालधकरिािे प्रथमदशसनी समाधान झाल्यास र्े लिादािी लनयुक्ती करर्ील आलि/लक ं िा पक्षांना लिादाकडे पाठिर्ील. " ५२. २०१५ च्या दुरुस्तीने हस्तक्षेपािी व्याप्ती आिखी लक्षिीयरीत्ा मयासलदर् क े ली आहे, ज्ािी आपि खाली दखल घेिार आहोर्. ii ) २०१५ िंतरचे कालखंड: कलम ११ (६ अ ) समादर्वष्ट करणे ५३. लिाद कायदा, १९९६ मध्ये कलम ११ (६ ए) समालिष्ट करून २०१५ च्या दुरुस्तीनंर्र एक मोठा बदल झाला आहे. खाली नमूद क े लेल्या कलम ११ (६ ए) च्या सरळ िािनार् लिलधमंडळािा हेर्ू स्पष्ट आहेः सिोच्च न्यायालय लक ं िा, यथास्तस्थर्ी, उच्च न्यायालय, उपकलम (४) लक ं िा उपकलम (५) लक ं िा उपकलम (६) अंर्र्सर् कोित्ाही अजासिा लििार करर्ाना, कोित्ाही न्यायालयािा कोिर्ाही लनिसय, हुक ू म लक ं िा आदेश असूनही, लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वाच्या र्पासिीपुरर्े मयासलदर् राहील. " ५४. २४६ व्या एल. सी. आय. अहिालार् (िर नमूद क े ल्याप्रमािे) स्पष्ट क े ल्याप्रमािे या दुरुस्तीिा आधार एस. बी. पी. (िर नमूद क े लेले) आलि बोघारा (िर नमूद क े लेले) यांिा प्रभाि पूिसिर् करिे हा होर्ा, ज्ामुळे लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ११ (६) अंर्र्सर् न्यायालयाद्वारे िौकशी आलि हस्तक्षेपािी व्याप्ती िाढली. कलम ११ (६ ए) "कोित्ाही न्यायालयािा कोिर्ाही लनिसय, हुक ू म लक ं िा आदेश असूनही" या िाक्यांशािा िापर करर्े आलि िौकशीिी व्याप्ती िाढििाऱया लनिसयांना प्रभािीपिे रद्द करर्े. कलम ११ (६ए) मध्ये लिधी आयोर्ाने लशफारस क े ल्याप्रमािे 'शून्य आलि रद्दबार्ल ' हा शब् िापरला जार् नाही. अशा प्रकारे, लिलधमंडळाने एक पाऊल पुढे टाकले आलि लिाद कराराच्या "अस्तस्तत्वापुरर्े" परीक्षि मयासलदर् ठे िले. ५५. आर्ा आपि लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८,११ आलि ४५ मध्ये िापरलेल्या भाषेकडे लक्ष देऊया, जी सिस लिादपूिस टप्प्यािर न्यायालयांच्या अलधकारांशी संबंलधर् आहेर्. ५५.१. लिाद कायदा, १९९६ च्या कलम ८ मध्ये "लजथे लिादािा करार आहे लर्थे पक्षांना लिादाकडे पाठिण्यािा अलधकार" या शीषसकाखाली २०१५ मध्ये खालील भाषेर् सुधारिा करण्यार् आलीआहेः "जोपयंर् प्रथमदशसनी कोिर्ाही िैध लिाद करार अस्तस्तत्वार् नाही असे आढळर् नाही". ५५. २. "पक्षांना लिादाकडे पाठिण्यािा न्यालयक प्रालधकरिािा अलधकार" या शीषसकाखाली भार् २ मधील कलम ४५ मध्ये देखील २०१९ मध्ये सुधारिा करण्यार् आली आलि अलधसूलिर् करण्यार् आले. कलम ४५ मधील दुरुस्ती लशन एत्सु (उपरोक्त) मधील र्ीन न्यायाधीशांच्या लनकालानंर्र करण्यार् आली होर्ी, जेथे आंर्रराष्टर ीय लिादाच्या प्रकरिार्, या न्यायालयासमोर प्रश्न होर्ा की जेव्हा कलम ४५ अंर्र्सर् अजस दाखल क े ला जार्ो, र्ेव्हा न्यायालयाला प्रथमदशसनी लनष्कषस लक ं िा खटल्याच्या र्ुिित्तेच्या आधारे अंलर्म शोध घेिे आिश्यक आहे का, ज्ािा पररिाम पूिस सुनाििीमध्ये होईल? बहुमर्ाच्या मर्े, र्े खालीलप्रमािे होर्ेः

"१०५. लिाद सुरू झाल्यानंर्रही न्यायालयार् कायसिाही प्रलंलबर् रालहल्यास कायद्यािा उद्दे श अपयशी ठरे ल. र्ंर्ोर्ंर् याि कारिामुळे मी या दृलष्टकोनाकडे िळलो आहे की कलम ४५ द्वारे लििारार् घेर्लेल्या पूिस-संदभस टप्प्यािर, न्यायालयाने संदभस दे ण्यासाठी केिळ प्रथमदशसनी दृलष्टकोन घेिे आिश्यक आहे , पक्षां ना एकर्र लिाद न्यायालधकरिासमोर लकंिा लनिाड्यानंर्रच्या टप्प्यािर न्यायालयासमोर पूिस संपरीक्षा साठी सोडले पालहजे. “
“ ५५.३. लशन एटसू (उपरोक्त ) नुसार, कलम ४५ मधील २०१९ च्या दुरुस्तीमध्ये असे म्हटले आहेः ". जोपयंर् प्रथमदशसनी असे आढळर् नाही की हा करार लनरथसक, अकायसक्षम लक ं िा अंमलार् आिण्यास असमथस आहे". अशा प्रकारे, िरील ििेिरून हे स्पष्ट होर्े की कलम ८ मध्ये "िैधर्ा" हा शब् िापरला आहे आलि कलम ४५ मध्ये "शून्य आलि रद्दबार्ल, लनस्तिय लक ं िा अंमलार् आिण्यार् अक्षम" हा िाक्यांश िापरला आहे. त्ा अथासने, कलम ११ ( ६ ए) ही एक अनोखी र्रर्ूद आहे जी लिाद कराराच्या 'अस्तस्तत्वापुरर्ी' मयासलदर् आहे, त्ाच्या 'िैधर्े' पयंर् नाही. सुधाररर् र्रर्ुदीला UNCITRAL मॉडेल कायद्यार्ही स्थान नाही. लिद्वान न्यायलमत्रांनी पी. रामनाथ अय्यर यांच्या प्रर्र् कायदा शब्कोश ४७ [४७ पी. रामनाथ अय्यर, द एनसायक्लोपेलडक लॉ लडक्शनरी लिथ िड्सस अँड फ्र े जेस, लीर्ल मॅस्तक्सम्स अँड लॅलटन टम्सस (५िी आिृत्ती); पी. १०३७] मधील मयासदेच्या व्याख्येकडे लक्ष िेधले ज्ामध्ये असे म्हटले आहेः "र्ुरु ं र्ार् टाका; कोठडीर् ठे िा,पररक्मा करण्याच्या मयासदेर् ठे िा ”.‍ ५६. लिाद कायदा१९९६ च्या कलम ५ सह कलम ११ (६ ए) मधील भाषा िािल्यािर आलि कायदेशीर हेर्ूिर आधाररर् अथस लािल्यािर, हे स्पष्ट होर्े की कलम ११ (६ए) अंर्र्सर् व्याप्ती खूप संक ु लिर् आहे. iii) २०१९ िंतरची िुरुस्ती आदण भारतातील लर्वाि यंत्रणेच्या संस्थात्मककरणाचा आढार्वा घेण्यासाठी उच्चस्तरीय सदमतीचा अहर्वाल. ५७. न्यायमूर्ी श्रीक ृ ष्णा [४८ भारर् सरकार, 'भारर्ार्ील लिाद यंत्रिेच्या संस्थात्मककरिािा आढािा घेण्यासाठी उच्चस्तरीय सलमर्ीिा अहिाल (एि. एल. सी. अहिाल, जुलै 2017) येथे उपलब्ध आहेः //लेर्ालाफ े असस. जीओव्ही. इन/साइट्स/डीफॉल्ट/फायली/अहिाल-HLC.pdf <शेिटिे प्रिेश 19.3.2023] यांच्या नेर्ृत्वाखालील सलमर्ीने लिाद कायदा, १९९६ मध्ये आिखी बदल करण्यािी लशफारस क े ली होर्ी.लिादांच्या लनयुक्तीिा अलधकार पूिसपिे लिाद संस्थांिर सोपिून कलम ११ (६ ए) हटिण्यािी लशफारस करण्यार् आली होर्ी.लसंर्ापूर, हाँर्काँर्, युनायटेड लक ं र्डम इत्ादींकड ू न प्रेरिा घेर् सलमर्ीने लशफारस क े ली की यामुळे आिखी लिलंब रोखर्ा येईल आलि भारर्ार्ील संस्थात्मक लिादाला र्र्ी लमळे ल.सुधाररर् कलम ११ (६) अंर्र्सर्, लिादांिी लनयुक्ती लिाद संस्थेद्वारे क े ली जािार आहेः ". आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादाच्या बाबर्ीर्, सिोच्च न्यायालयाने लनयुक्त क े लेल्या लिाद संस्थेद्वारे, पक्षाच्या अजासिर लक ं िा आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक लिादाव्यलर्ररक्त इर्र लिादांच्या बाबर्ीर्, यथास्तस्थर्ी, उच्च न्यायालयाद्वारे लनयुक्ती क े ली जाईल."" ५८. २०१६ च्या कायदा ३ द्वारे कलम ६ (ब) समालिष्ट करिे, जे अद्याप अलधसूलिर् क े लेले नाही, र्े खालीलप्रमािे आहेः (६ ब) सिोच्च न्यायालयाने लक ं िा, यथास्तस्थर्ी, उच्च न्यायालयाने, या कलमाच्या उद्देशाने कोित्ाही व्यक्तीला लक ं िा संस्थेला लदलेले पदनाम हे सिोच्च न्यायालय लक ं िा उच्च न्यायालयाद्वारे न्यालयक अलधकारांिे प्रत्ायोजन मानले जािार नाही." जरी सुधारिा अद्याप अलधसूलिर् क े ल्या र्ेल्या नसल्या आलि प्रलक्येर् मयासलदर् स्पष्टर्ा असली र्री, लिादाच्या लनयुक्तीच्या पूिस-संदलभसर् टप्प्यािर लकमान न्यालयक हस्तक्षेप सुलनलिर् करण्याच्या लिलधमंडळाच्या हेर्ूबद्दल आम्ही सूिना घेऊ शकर्ो. ५९. आंर्रराष्टर ीय िालिज् मंडळ न्यायालय (आय. सी. सी. न्यायालय), लंडन आंर्रराष्टर ीय लिाद न्यायालय (एल. सी. आय. ए.), हाँर्काँर् आंर्रराष्टर ीय लिाद क ें द् (एि. क े. आय. ए. सी.), लसंर्ापूर आंर्रराष्टर ीय लिाद क ें द् (एस. आय. ए. सी.) आलि स्टॉकहोम िालिज् मंडळािी लिाद संस्था (एस. सी. सी.) या सिासर् पसंर्ीच्या लिाद संस्थांमधील प्रिललर् स्तस्थर्ीिा संदभस आर्ा देिे योग्य ठरेल, ज्ािा उल्लेख उच्चस्तरीय सलमर्ीच्या अहिालार् करण्यार् आला होर्ा आलि ज्ािी व्यापकपिे खाली नोंद करर्ा येईलः- १ - 1.ICC लिाद लनयम, 2021: "कलम 6. लिाद करारािा पररिाम.- (४) कलम ६ (३) अन्वये न्यायालयाकडे पाठिलेल्या सिस प्रकरिांमध्ये, लनयमांनुसार लिादािा करार अस्तस्तत्वार् असू शकर्ो असे प्रथमदशसनी न्यायालयािे समाधान झाल्यास आलि त्ा मयासदेपयंर् लिाद पुढे जाईल. (५) कलम ६ (४) अन्वये न्यायालयाने ठरिलेल्या सिस बाबींमध्ये, लिाद न्यायालधकरिाच्या अलधकारक्षेत्राशी संबंलधर् कोिर्ाही लनिसय, पक्ष लक ं िा दािे िर्ळर्ा, ज्ांच्या संदभासर् न्यायालय लनिसय देर्े की मध्यस्थी पुढे जाऊ शकर् नाही, र्े लिाद न्यायालधकरि स्वर्ःि घेईल. २. एि. क े. आय. ए. सी. लिाद लनयमः अनुच्छे द ११-एि. क े. आय. ए. सी. िा सक ृ र्दशसनी पुढे जाण्यािा अलधकार ११. १ जर आलि एि. क े. आय. ए. सी. ला सक ृ र्दशसनी, या प्रलक्येअंर्र्सर् लिाद करार अस्तस्तत्वार् असू शकर्ो असे समाधान झाले र्र लिाद पुढे जाईल. लिाद न्यायालधकरिाच्या अलधकारक्षेत्राबाबर्िा कोिर्ाही प्रश्न एकदा स्थापन झाल्यानंर्र र्ो लिाद न्यायालधकरिाद्वारे ठरिला जाईल. ११. २ कलम ११.१ च्या अनुषंर्ाने एि. क े. आय. ए. सी. िा लनिसय कोित्ाही पक्षाच्या यालिकांच्या स्वीकाराहसर्ेिर लक ं िा र्ुिित्तेिर पूिसग्रह न ठे िर्ा आहे. " ३. एल. सी. आय. ए. लिादािे लनयमः " अनुच्छे द 23. अलधकारक्षेत्र आलि प्रालधकरि २३. १ लिादाच्या प्रारंलभक लक ं िा लनरंर्र अस्तस्तत्व, िैधर्ा, पररिामकारकर्ा लक ं िा व्याप्ती यांिरील कोित्ाही आक्षेपासह लिाद न्यायालधकरिाला त्ाच्या स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािर आलि अलधकारािर लनिसय घेण्यािा अलधकार असेल. " ४. एस. आय. ए. सी. आंर्रराष्टर ीय लिाद क ें द् लनयम, २०१६: अनुच्छे द २८. न्यायालधकरिािे अलधकार क्षेत्र २८. १ जर कोिर्ाही पक्ष लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वािर लक ं िा िैधर्ेिर लक ं िा लिादािे प्रशासन करण्याच्या एस. आय. ए. सी. च्या क्षमर्ेिर आक्षेप घेर् असेल, र्र असा आक्षेप न्यायालयाकडे पाठिला जाईल की नाही हे क ु लसलिि ठरिर्ील. लनबंधक असे ठरिर् असल्यास, लिाद पुढे जाईल असे प्रथमदशसनी समाधान झाले आहे की नाही हे न्यायालय ठरिेल. न्यायालय इर्क े समाधानी नसल्यास लिाद संपुष्टार् आिला जाईल लिाद पुढे जाईल असा क ु लसलिि लक ं िा न्यायालयािा कोिर्ाही लनिसय न्यायालधकरिाच्या स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािर लनिसय देण्याच्या अलधकारािर पूिसग्रह न ठे िर्ा असर्ो. २८. २ लिादाला लिाद करारािे अस्तस्तत्व, िैधर्ा लक ं िा व्याप्ती यासंबंधीच्या कोित्ाही आक्षेपांसह स्वर्ःच्या अलधकारक्षेत्रािर लनिसय देण्यािा अलधकार असेल. संलिदेिा भार् असलेल्या लिाद कराराला संलिदेच्या इर्र अटींपासून स्वर्ंत्र करार मानले जाईल. " ५. लिाद संस्था एस. सी. सी. लनयमः अनुच्छे द 11. मंडळािे लनिसय मंडळ या लनयमांर्र्सर् लदलेल्या र्रर्ुदींनुसार लनिसय घेर्े, ज्ार् लनिसय घेिे समालिष्ट आहेः (i) अनुच्छे द 12 (i) नुसार झालेल्या िादािर एस. सी. सी. ला स्पष्टपिे अलधकारक्षेत्र नाही का; अनुच्छे द १२ (i). बडर्फी मंडळ संपूिस लक ं िा अंशर्ः खटला फ े टाळला, जरः (i) एस. सी. सी. ला िादािर स्पष्टपिे अलधकारक्षेत्र नाही; ६०. अशा प्रकारे, जर्भरार्ील नामांलकर् लिाद संस्थांिा दृष्टीकोन हे दशसिेल की कॉम्पेटेंझ-कॉम्पेटेंझच्या र्त्त्वाला स्पष्ट मान्यर्ा आहे आलि न्यायालयांिी भूलमका सक ृ र्दशसनी प्राथलमक र्पासिीपुरर्ी मयासलदर् आहे. िरील लनयमांच्या िािनाने हे देखील लदसून येईल की लिाद संस्थांनी लिाद करारािे अस्तस्तत्व लनधासररर् करण्यासाठी सक ृ र्दशसनी िाििीला मान्यर्ा लदली आहे. प्रमुख आंर्रराष्टर ीय लिाद संस्थांच्या लनयमांिर ििास करर्ाना, लिल्यम पाक स यांनी "आव्हानात्मक लिाद क्षेत्रालधकारः संस्थात्मक लनयमांिी भूलमका" [४९ पाक स, लिल्यम. "िॅलेंलजंर् आलबसटरल ज्ुररस्तस्डक्शनः द रोल ऑफ इस्तन्स्ट्ट्यूशनल रूर्ल्", बोस्टन युलनव्हलससटी स्क ू ल ऑफ लॉ, पस्तिक लॉ ररसिस पेपर (२०१५).] या शीषसकाच्या लेखार् लललहले आहेः र्थालप, काही प्रसंर्ी लिादाच्या प्रलक्या संमर्ीिे लकमान संक े र्ही न देर्ा लिाद दाखल क े ले र्ेले आहेर्. प्रलर्िादीने दािेदारासोबर् मध्यस्थी करण्यास प्रत्क्षार् सहमर्ी दशसिलेली असे कोिर्ेही दस्तऐिज अस्तस्तत्वार् असल्यािे लदसर् नाही. अशा पररस्तस्थर्ीर्, खटला पुढे जाऊ नये या प्रलर्िादीच्या युस्तक्तिादािा लिकर लििार करून कायसक्षमर्ा साधली जाईल. यासाठी, आय. सी. सी. लनयम आय. सी. सी. न्यायालयाला स्पष्ट अलधकारक्षेत्रार्ील दोषांिा लििार करण्यािी परिानर्ी देर्ार्, लिाद क े िळ त्ा मयासदेपयंर् पुढे जार्ो जोपयंर् आय. सी. सी. न्यायालयाला सक ृ र्दशसनी समाधान होर्े की लिाद करार अस्तस्तत्वार् असू शकर्ो."" ६१. अशा प्रकारे, लिादाकडे एखाद्या पक्षािा संदभस देर्ाना सक ृ र्दशसनी िाििी करण्यामार्ील उद्देश, संमर्ी न देिारा पक्ष लिादाच्या प्रलक्येला बांधील नाही यािी खात्री करिे आलि न्यायालयांच्या लकमान हस्तक्षेपासह पक्ष स्वायत्तर्ेिा लसद्धांर् कायम राखिे हे देखील आहे. ६२. ए. अय्यासामी लिरुद्ध ए. परमलशिम आलि इर्र [५० (२०१६) १० एस. सी. सी. ३८६] (थोडक्यार् 'अय्यासामी') या प्रकरिार्ील सहमर्ीच्या मर्ामध्ये, न्यायमूर्ी िंद्िूड (जसे र्े त्ािेळी होर्े) यांनी नमूद क े ले की, इर्र र्ोष्टींबरोबरि, भारर्ार्ील न्यायशास्त्राने न्यायालयांच्या लकमान हस्तक्षेपासह लिादािी संस्थात्मक पररिामकारकर्ा बळकट क े ली पालहजेः "५३. माझ्या मर्े लिाद आलि समेट कायदा, १९९६ िा अथस असा लािला र्ेला पालहजे की ज्ामुळे त्ाच्या व्याख्येमध्ये अंर्भूसर् असलेली र्त्त्वे सामान्य कायद्याच्या जर्र्ार्ील प्रिललर् दृलष्टकोनांशी सुसंर्र् असर्ील.लिादािी संस्थात्मक पररिामकारकर्ा बळकट करण्याच्या लदशेने भारर्ार्ील न्यायशास्त्रािा लिकास झाला पालहजे.पक्षांनी त्ांच्या सिस दाव्यांिे लनराकरि करण्यासाठी एक संपूिस उपाय म्हिून लनिडलेल्या मंिािा बिाि करिे हा त्ा उत्क्ांर्ीिा एक भार् आहे.न्यायालयांिा हस्तक्षेप कमी करिे ही पुन्ा त्ाि र्त्त्वािी मान्यर्ा आहे ". ६३. लफयोना टरस्ट अँड होस्तल्डंर् कॉपोरेशन लि. प्रीव्हलोव्ह [५१ (२००७) १ सिस ई. आर. (कॉम) ८९१ (पॅरा 17-18)] मध्ये हाऊस ऑफ लॉड्ससने मांडलेले एक थांबा लिादािे र्त्त्व त्ाने कायम ठे िले. "४६. लफयोना टरस्ट अँड होस्तल्डंर् कॉपोरेशन लि. प्रीव्हॅलोव्ह [लफयोना टरस्ट अँड होस्तल्डंर् कॉपोरेशन लि. प्रीव्हॅलोव्ह, (२००७) १ ऑल ईआर (कॉम) ८९१: २००७ बस एल. आर. ६८६ (सी. ए.)], अपील न्यायालयाने लिाद करारांना व्यािसालयक पररिामकारकर्ा प्रदान करण्यासाठी नव्याने सुरुिार् करण्याच्या र्रजेिर भर लदला. अपील न्यायालयाने असे म्हटले कीः (बस एल. आर. पृ. ६९५ एि-६९६ बी अँड एफ, पररच्छे द १७ आलि १९) "१७. आमच्या बाजूने आम्ही असे मानर्ो की आंर्रराष्टर ीय व्यािसालयक संदभासर् उद्भििाऱया प्रकरिांसाठी कोित्ाही प्रकारिी एक अंलर्म अंलर्म रेषा ओढण्यािी आलि नव्याने सुरुिार् करण्यािी िेळ आर्ा आली आहे. प्रकरिांमध्ये क े लेले सुयोग्य फरक आलि एखादे लिलशष्ट प्रकरि अमुक शब्ांच्या एका संिार् मोडर्े की अर्दी समान शब्ांच्या दुसऱया संिार् मोडर्े यािर िादलििाद करण्यासाठी लार्िारा िेळ पाहून सामान्य व्यािसालयक कदालिर् लिस्तिर् होर्ील. जर व्यापारी त्ांच्या लििादांिी सुनाििी एखाद्या लिलशष्ट देशाच्या न्यायालयांमध्ये लक ं िा त्ांच्या पसंर्ीच्या न्यायालधकरिाद्वारे क े ली जािी यासाठी सहमर् होण्याच्या संकटार् र्ेले र्र र्े (लकमान जेव्हा र्े प्रथमर्ः संलिदा करर् असर्ील र्ेव्हा) अशी अपेक्षा करर् नाहीर् की कारिाईच्या लिलशष्ट कारिांिे स्वरूप आलि कारिाईिे कोिर्ेही लिलशष्ट कारि त्ांनी त्ांच्या लिाद खंड लनिडलेल्या लिलशष्ट िाक्याच्या अथासने येर्े की नाही याबद्दल दीघस युस्तक्तिादार् िेळ आलि खिस घेर्ला जाईल.जर कोित्ाही व्यािसालयकाला संलिदेच्या िैधर्ेबद्दलिे िाद िर्ळायिे असर्ील, र्र र्से म्हििे र्ुलनेने सोपे ठरेल. *** १९. लिाद खंड र्यार करण्यासाठी प्रकरिांमध्ये लदलेले एक कारि म्हिजे एक थांबा लिादाच्या बाजूने क े लेले अनुमान. अशी अपेक्षा क े ली जाऊ शकर् नाही की, कोिर्ाही व्यािसालयक व्यक्ती जािूनबुजून अशी एक प्रिाली र्यार करेल ज्ासाठी प्रथम न्यायालयाने संलिदा सुधारािी लक ं िा टाळािी लक ं िा रद्द करािी (जसे प्रकरि असू शकर्े) ठरिािे आलि नंर्र, जर संलिदा िैध असल्यािे मानले र्ेले र्र, लिादाने उद्भिलेल्या समस्यांिे लनराकरि करिे आिश्यक आहे. उदारमर्िादी संरिनेिे हे खरोखरि एक शस्तक्तशाली कारि आहे. " लिादाने लििादांिे लनराकरि करण्यासाठी एक-थांबा मंि प्रदान करिे आिश्यक आहे. अपील न्यायालयाने असे नमूद क े ले की जर लिाद प्रारंलभक बेकायदेशीरर्ेसाठी संलिदा रद्दबार्ल ठरिू शकर्ील, जसे र्े ठरिू शकर्ार् की संलिदेिे उल्लंघन हे अपिेदनाने लक ं िा प्रकटीकरि न क े ल्यामुळे झाले आहे की नाही, र्र लािखोरीद्वारे संलिदा लमळिली र्ेली आहे की नाही हे त्ांनी ठरिू नये यासाठी कोिर्ेही कारि नाही.

64. अशा प्रकारे, एक-थांबा लिाद दृलष्टकोन हे सुलनलिर् करेल की प्रारंलभक बेकायदेशीरर्ेिरील सिस मुद्दे लक ं िा करार रद्द होर्ील की नाही हे लिाद संस्थांद्वारे, लनिसय न्यायालयांच्या अंलर्म पयसिेक्षी अलधकारक्षेत्राच्या अधीन राहून घेर्ले जाऊ शकर्ार्.लिाद कायदा, 1996 च्या कलम 34 मधील लिधायी आदेशानुसार न्यायालयांद्वारे लिाद लनिाडा बाजूला सारला जाऊ शकर्ो. त्ामुळे न्यायालये आलि न्यायालधकरिांमधील बहुसंख्य कायसिाही टाळर्ा येईल आलि लकमान न्यायालयीन हस्तक्षेप सुलनलिर् होईल. 51 (2007) 1 सिस ई. आर. (कॉम) 891 (पारस 17-18)

H. SMS TEA र्वर चचाण:

65. मुद्ांक कायदा, 1899 आलि लिाद कायदा, 1996 च्या िैधालनक योजनांिर लिस्तृर् ििास क े ल्यानंर्र, आर्ा आपि एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त) मध्ये संदलभसर् लनिसयांच्या अिूकर्ेिे परीक्षि करूया.

66. या न्यायालयाच्या 2011 च्या एस. एम. एस. टी. ए. SMS TEA (उपरोक्त) मधील लनिसयािरून लिादाच्या करारािी अंमलबजाििी करण्यायोग्यर्ेबाबर्िी न्यायालयीन स्तस्थर्ी कळू शकर्े, जी मुद्ांलकर् नसलेल्या लक ं िा अपुऱया मुद्ांलकर् करारामध्ये समालिष्ट आहे. या प्रकरिािी िस्तुस्तस्थर्ी अशी होर्ी की, अपीलकत्ासला 30 िषांच्या कालािधीसाठी दोन िहािे मळे भाडेर्त्वार देण्यार् आले होर्े.भाडेपट्टी करारामध्ये लिाद खंड समालिष्ट होर्े.िहाच्या मळ्यांमधून प्रलर्िादीने अिानक बेदखल क े ल्यािर, अपीलकत्ासने लिादाच्या लनयुक्तीकररर्ा लिाद कायदा, 1996 च्या कलम 11 अंर्र्सर् अजस दाखल क े ला.र्ुिाहाटी उच्च न्यायालयाच्या लिद्वान मुख्य न्यायाधीशांनी कलम 11 िा अजस फ े टाळला आलि असे म्हटले की नोंदिी कायदा, 1908 च्या कलम 17 आलि मालमत्ता हस्तांर्रि कायदा, 1882 च्या कलम 106 अंर्र्सर् भाडेपट्टा करारािी नोंदिी अलनिायस आहे; आलि सदर भाडेपट्टा करार नोंदिीक ृ र् नसल्यामुळे, लिाद खंड देखील अिैध ठरेल. हे प्रकरि या न्यायालयार् पोहोिले जेथे एक प्रश्न असा होर्ा की नोंदिीक ृ र् नसलेल्या दस्तऐिजार्ील लिाद करार ज्ािर योग्यररत्ा मुद्ांकन क े लेले नाही, र्ो िैध आलि अंमलबजाििी करण्यायोग्य आहे का?मुद्ांक न लािलेल्या लक ं िा पुरेशा मुद्ांक नसलेल्या दस्तऐिजार्ील लिादािा करार अिैध आहे, असे लनरीक्षि नोंदिले र्ेले आहे, कारि मुद्ांक कायदा, 1899 िे कलम 35 अशा दस्तऐिजांिर कारिाई करण्यासाठी अशा मुद्ांक न लािलेल्या लक ं िा अपुऱया मुद्ांक असलेल्या दस्तऐिजाला ज्ा प्रालधकरिासमोर सादर क े ले जार्े त्ाला स्पष्टपिे प्रलर्बंलधर् करर्े. या टप्प्यािर, हे लक्षार् ठे ििे महत्वािे आहे की एस. एम. एस.SMS (उपरोक्त) मधील लनिसय अशा िेळी आला जेव्हा एस. बी. पी.SBP (उपरोक्त) आलि बोघारा पॉलीफ ॅ ब (उपरोक्त) हे कायद्यार् कलम 11 (6A) समालिष्ट करण्यापूिी लनयंलत्रर् करिारे होर्े. अशा प्रकारे, कलम 11 च्या टप्प्यािरही, 2015 च्या दुरुस्तीपूिी अस्तस्तत्वार् असलेल्या कायद्यांर्र्सर्, न्यायालयाला व्यापक अलधकार होर्े आलि र्े र्पशीलिार लनिसयही घेऊ शकर् होर्े.जरी या न्यायालयाने एस. एम. एस. टी. ए. SMS Tea (उपरोक्त) मध्ये नोंदिी कायदा, 1908 च्या संदभासर् लिलर्नशीलर्ेच्या लसद्धांर्ाला संलक्षप्त स्पष्ट स्वरूपार् मान्यर्ा लदली असली र्री, मुद्ांक शुल्क न भरण्याबाबर् मुद्ांक कायदा, 1899 च्या कठोर आलि अलनिायस र्रर्ुदी लिाद कायदा, 1996 च्या संबंलधर् र्रर्ुदींशी सुसंर्र्पिे िािर्ा येिार नाहीर्, असे मर् नोंदिले. र्े खालील प्रमािे आहेर्: "22.1. न्यायालयाने, कोिर्ेही दस्तऐिज पुराव्यामध्ये दाखल करण्यापूिी लक ं िा अशा दस्तऐिजािर कारिाई करण्यापूिी, त्ा नोंदिीक ृ र् दस्तऐिजािर/दस्तऐिजािर योग्यररत्ा मुद्ांकन क े ले आहे की नाही आलि र्े अलनिायसपिे नोंदिी करण्यायोग्य साधन आहे की नाही हे र्पासले पालहजे.

22. 2. जर दस्तऐिजािर योग्यररत्ा मुद्ांकन क े लेले आढळले नाही, र्र मुद्ांक कायद्यािे कलम 35 हे उक्त दस्तऐिजािर कारिाई करण्यास मनाई करर्े. पररिामी, त्ार्ील लिाद खंडािरही कारिाई क े ली जाऊ शकर् नाही. त्ानंर्र न्यायालयाने मुद्ांक कायद्याच्या कलम 33 अंर्र्सर् दस्तऐिज जप्त करण्यािी पुढील कायसिाही करािी आलि मुद्ांक कायद्याच्या कलम 35 आलि 38 अंर्र्सर् प्रलक्येिे पालन करािे.

67. नैना ठक्कर (उपरोक्त) आलि िॅक पलस हॉटेर्ल् लिरुद्ध प्लॅनेट एम. ररटेल लललमटेड 52 (संलक्षप्त 'िॅक पलस हॉटेर्ल्') या प्रकरिांमध्ये एस. एम. एस. टी. SMS Tea (उपरोक्त) मधील लनकाल कायम ठे िण्यार् आला आहे. या न्यायालयाच्या 3 न्यायाधीशांनी धमसरत्नाकरा (उपरोक्त) मधील अलीकडील लनकालार् देखील हे मान्यर्ेसह उद् धृर् क े ले आहे.आधी नमूद क े ल्याप्रमािे, र्रिारे ( उपरोक्त) मध्ये न्यायालयाने एसएमएस टी SMS Tea (उपरोक्त) िे अनुसरि क े ले जे लिद्या डर ोललया (उपरोक्त) मध्ये मान्यर्ेसह उद् धृर् क े ले र्ेले आहे. या कायदेशीर प्रस्तािािर NN Global (उपरोक्त) प्रकरिामध्ये या न्यायालयाने शंका घेर्ल्याने सदर प्रकरि आमच्याकडे संदलभसर् क े ले आहे. [52 (2017) 4 एस. सी. सी. 498 ]

68. आम्ही िर नमूद क े ल्याप्रमािे कलम 11(6A) एका अलधभािी खंडाने सुरू होर्े उदा. "कोित्ाही न्यायालयािा कोिर्ाही लनिसय, हुक ू म लक ं िा आदेश" आलि ज्ा लनिसयांमुळे र्पासिीिी व्याप्ती िाढली त्ा सिस लनिसयांना प्रभािीपिे रद्द करर्े. 69. या पैलूिर अपीलकत्ासिे लिद्वान िकील श्री. र्र्न सांघी यांनी आमच्यासमोर क े लेले पलहले लनिेदन असे होर्े की, धमसरत्नाकरा (उपरोक्त) आलि िॅक पलस हॉटेर्ल् (उपरोक्त) या प्रकरिार् र्ीन न्यायाधीशांच्या खंडपीठार्ील दोन िेर्िेर्ळ्या लनरीक्षिांिा एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त) या प्रकरिार् लििार क े ला र्ेला नाही, जे इर्र र्ीन न्यायाधीशांिे खंडपीठ आहे आलि यामुळे एन. एन. ग्लोबल (उपरोक्त) च्या लनष्कषासिर र्ंभीर प्रश्नलिन् उपस्तस्थर् क े ले जार्े.

70. येथे हे लक्षार् घेिे महत्त्वािे आहे की िरील दोन न्यायलनिसयामध्ये अलीकडील 11(6A) दुरुस्तीिा लििार क े ला र्ेला नाही.िॅक पलस हॉटेर्ल् (उपरोक्त) मधील न्यायलनिसय हे 11 (6A) च्या दुरुस्ती पूिी देण्यार् आला होर्ा आलि त्ामुळे र्े कायदेशीररीत्ा रद्द करण्यार् आले आहे.धमसरत्नाकरा (उपरोक्त) प्रकरिामध्ये असे लदसून येर्े की, कलम 11 (6A) मधील दुरुस्ती न्यायालयाच्या लनदशसनास आिली र्ेली नाही आलि र्रिारे (उपरोक्त) प्रकरिामध्ये आधीच्या न्यायलनिसयािा लििार क े ला र्ेला नाही. यािे कारि असेही असू शकर्े की न्यायालयाने कलम 11 (6A) लार्ू करण्यापूिी पाररर् क े लेल्या आदेशािा लििार क े ला.धमसरत्नाकरा (उपरोक्त) मध्ये, न्यायालयासमोरिा मुद्दा हा होर्ा की पक्षांदरम्यान अंमलार् आिलेला दस्तऐिज हा भाडेपट्टा लिलेख होर्ा की "भाडेपट्टा करार" आलि उक्त दस्तऐिजाअंर्र्सर् लिाद लार्ू क े ला जाऊ शकर्ो की नाही.कनासटक उच्च न्यायालयािे प्रबंधक (न्यालयक) यांनी संबंलधर् दस्तऐिज हा भाडेपट्टा लिलेख असल्यािे लनलिर् क े ल्यानंर्रही, उिसररर् मुद्ांक शुल्क भरले र्ेले नाही.न्यायालयाने SMS Tea (उपरोक्त) प्रकरिामध्ये असे मर् नोंदलिले आहे की, मुद्ांक शुल्क भरल्यालशिाय लिादाच्या करारािर कारिाई क े ली जाऊ शकर् नाही.

71. िरील ििेिरून हे स्पष्ट होर्े की धमसरत्नाकर (उपरोक्त ) हे प्रकरि 2015 नंर्रच्या दुरुस्ती पद्धर्ीलिषयी योग्य भूलमका मांडर् नाही. दुरुस्ती कायद्याच्या माध्यमार्ून, एस. एम. एस. टी.[SMS Tea] (उपरोक्त) हे कायदेशीररीत्ा रद्द करण्यार् आले आहे.

72. कलम 11 (6A ) समालिष्ट क े ल्यानंर्र कायद्यािे योग्य स्पष्टीकरि ड्यूरो फ े लर्ुएरा, एस. ए. [Duro Felguera, S.A. लिरुद्ध र्ंर्ािरम पोटस लललमटेड (संलक्षप्त "Duro Felguera") मध्ये आढळर्े, लजथे असे म्हटले र्ेले होर्े की, " (2015) च्या दुरुस्तीनंर्र, लिादािा करार अस्तस्तत्वार् आहे की नाही हे न्यायालयांना पाहिे आिश्यक आहे- र्े ना जास्त असािे, ना कमी. लिादाच्या लनयुक्तीच्या टप्प्यािर न्यायालयािा हस्तक्षेप कमी करिे हे संिैधालनक धोरि आलि उद्देश आहे आलि कलम 11 (6-A) मध्ये समालिष्ट क े लेल्या या हेर्ूिे समथसन क े ले पालहजे.मायािर्ी टरेलडंर् प्रायव्हेट लललमटेड लिरुद्ध प्रद् युर् देब बमसन या प्रकरिामध्ये 3 न्यायाधीशांच्या खंडपीठाने याला पुन्ा पुष्टी लदली आहे, र्े खालीलप्रमािे स्पष्ट करण्यार् आले होर्े: "10. अशा पररस्थीमध्ये, हे स्पष्ट आहे की या न्यायालयाने 2015 च्या दुरुस्तीपूिी लदलेला कायदा, ज्ामध्ये करार झाला आहे की नाही आलि समाधान झाले आहे की नाही हे र्पासिे समालिष्ट होर्े, र्ो आर्ा कायदेशीररीत्ा रद्द करण्यार् आला आहे.अशा पररस्तस्थर्ीर्, उपरोक्त लनिसयार्ील र्कांशी सहमर् होिे कठीि आहे कारि कलम 11 (6A) हे लिाद कराराच्या अस्तस्तत्वाच्या 15 व्या र्पासिीपुरर्े मयासलदर् आहे आलि ड्युरो फ े लर्ुएरा, एस. ए. (उपरोक्त) या प्रकरिार्ील लनकालार् नमूद क े ल्याप्रमािे संलक्षप्त अथासने समजून घेर्ले पालहजे-पररच्छे द 48 आलि 59 पहा.

73. प्रिीि इलेस्तररकर्ल् (पी) लललमटेड लि. र्ॅलेक्सी इन्फ्रा आलि इंजी. (P) Ltd. मधील खालील उर्ारा हा लर्र्काि समपसक आहे जेथे न्यायालयाने कलम 11 (6A) िे स्पष्टीकरि लदले आहे की कलम 11 अन्वये न्यायाधीश त्ा टप्प्यािर लघु-संपरीक्षा घेऊ शकर् नाहीर्:

29. या प्रकरिार्ील र्थ्ये, उत्क ृ ष्ट अशा 'अॅललस इन िंडरलँड' िी आठिि करून देर्ार्. लुईस क ॅ रोलच्या या उत्क ृ ष्ट सालहत्क ृ र्ीच्या दुसऱया अध्यायार्, लहान एललस सशाच्या लिद्ार्ून खाली र्ेल्यानंर्र, र्ी "Curiouser and Curiouser !" असे म्हिर्े आलि लुईस क ॅ रोल असे म्हिर्ार् लक, "(लर्ला इर्क े आियस िाटले की, त्ा क्षिी र्ी िांर्ली इंग्रजी कशी बोलायिी हे पूिसपिे लिसरलेलीअसर्े)हे एक असे प्रकरि आहे जे दस्तऐिज पुरािा आलि उलटर्पासिीद्वारे दोन पक्षांमधील सत् बाहेर येण्यासाठी आक्ोश करर् आहे. या प्रकरिार्ील पक्षकारांमधील कार्दोपत्री पुरािे र्यार करिाऱया लजर्सॉ पझलिे मोठे र्ुकडे अपूिस रालहले. 22 जुलै, 2014 आलि 25 जुलै, 2014 रोजीिे ईमेल प्रथमि येथे सादर क े ले र्सेि एस. बी. पी. डी. सी. एल.[SBPDCL] आलि प्रलर्िादी यांच्यार्ील काही पत्रव्यिहार असे दशसिर्ार् की एस. बी. पी. डी. सी. एल. [SBPDCL] ने जारी क े लेल्या लनलिदेनुसार अपीलकर्ास आलि प्रलर्िादी यांच्यार् काही व्यिहार आहेर्, परंर्ु दोन्ी पक्षांमध्ये एक करार झाला आहे का?ि ज्ामध्ये लिाद खंड समालिष्ट आहे का? असा लनष्कषस काढण्यासाठी र्े पुरेसे नाही.ज्ा पक्षांिी नोंदिीक ृ र् कायासलये मुंबई आलि लबहार येथे आहेर् त्ांच्याकड ू न हररयािायेथे करारािर स्वाक्षरी करून CFSL द्वारे शोधािे अलनिासयक स्वरूप लक्षार् घेर्ा, लबहारमध्ये कायासस्तन्वर् क े ले जािार आहे; करारािर स्वाक्षरी करिाऱ‍ या नोटरीला र्से करण्यास अलधकार नाहीर् आलि या प्रकरिार्ील र्थ्यांिर उद्भििारे इर्र अनेक प्रश्न लक्षार् घेर्ा, पक्षांमध्ये मध्यस्थी करार अस्तस्तत्वार् असल्यािा लनष्कषस काढिे असुरलक्षर् आहे.लिद्या द्ोललया [VIDYA DROLIA] (उपरोक्त) मध्ये सांलर्र्लेल्या प्रथमदशसनी पुनरािलोकनामुळे या प्रकरिार्ील र्थ्यांिर क े िळ एकि लनष्कषस लनघू शकर्ो-की पक्षांमध्ये लिादािा करार अस्तस्तत्वार् आहे की नाही यािा सखोल लििार मध्यस्थािर सोडला पालहजे, ज्ाने साक्षीदारांिी उलटर्पासिी क े ल्यानंर्र त्ाच्यापुढे सादर क े लेल्या दस्तािेजी पुराव्यािी र्पशीलिार र्पासिी करािी.या सिस कारिांमुळे, लदल्ली उच्च न्यायालयािा आक्षेलपर् लनकाल आम्ही बाजूला ठे िर्ो, कारि त्ार्दोन्ी पक्षांमध्ये लिादािा करार असल्यािे लनिासयकपिे आढळर्े. " [भर देण्यार् आला आहे ] 53 (2017) 9 SSC 729

74. या टप्प्यािर, हे लक्षार् घेिे पुरेसे ठरेल की न्यायालयाने एस. एम. एस. टी. ए. [SMS Tea] (उपरोक्त) मध्ये असे म्हटले आहे की, जर अंर्लनसलहर् करारािर लशक्कामोर्सब क े ले नाही र्र लिादािा करार पुराव्यामध्ये अमान्य क े ला जाईल.र्थालप, नंर्रच्या न्यायलनिसयार् म्हिजेि र्रिारे (उपरोक्त) मध्ये उद् घोलषर् क े ल्याप्रमािे लशक्कामोर्सब न क े लेला लिाद करार रद्द क े ला जाईल असे नमूद क े ले नाही. एसएमएस टी [SMS Tea] (उपरोक्त) मध्ये नोंदिी कायदा, 1908 च्‍ या संदभासर् लिलर्नशीलर्ेच्या र्ृहीर्कािा लिस्तार क े ला आहे, र्र आम्प्‍ ही इथे असे नमूद करर्ो की, हे र्ृलहर्क, मुद्ांक कायदा 1899 च्‍ या संदभासर् सुसंिादी संरिनेद्वारे देखील िाढिले जाऊ शकर्े.

75. र्रिारे (उपरोक्त) मधील िस्तुस्तस्थर्ी अशी होर्ी की ओलडशार्ील पेंथा र्ािार्ील िोट्या घाटीच्या पायथ्याशी, बंधाऱयानजीक लजओ-टेक्सटाईल ट्युब (geo-textile tube ) बांधण्यासाठी उप-करार क े ला जे लनयोक्त्याने लकनारपट्टीिी धूप रोखण्यासाठी प्रदान क े ला होर्ा. पक्षांमधील िादांमुळे उप करार संपुष्टार् आला.प्रलर्िादीने कलम 11 अंर्र्सर् यालिका दाखल क े ली ज्ाला मुंबई उच्च न्यायालयाने परिानर्ी लदली आलि एकल लिाद लनयुक्त करण्यार् आला.अपील क े ल्यानंर्र, हे न्यायालय प्रामुख्याने एस. एम. एस. टी. ए. SMS Tea (उपरोक्त) िर अिलंबून होर्े की मुद्ांलकर् नसलेल्या दस्तऐिजार्ील लिाद करारािर कारिाई क े ली जाऊ शकर् नाही आलि म्हिूनि, संबंलधर् मुद्ांलकर् नसलेला करार जप्त क े ल्यालशिाय लिादािी लनयुक्ती क े ली जाऊ शकर् नाही.सुधाररर् कलम 11 (6A) आलि 246व्या एल. सी. आय.[LCI] अहिालािा (उपरोक्त ) लििार करून एस. बी. पी.[SBP] (उपरोक्त) आलि बोघारा (उपरोक्त) रद्दबार्ल ठरिण्यार् आले आहे, असे नमूद करूनही न्यायालयाने असे म्हटले की, कलम 11 (6-A) च्या दुरुस्तीने एस. एम. एस. टी. इस्टेट SMS Tea Estate ला कोित्ाही प्रकारे स्पशस क े ला र्ेला नाही, कारि र्ो 246व्या एल. सी. आय.[LCI] अहिालाद्वारे (उपरोक्त ) लक ं िा 2015च्या दुरुस्तीच्या उद्देश आलि कारिांच्या लिधानाद्वारे िर्ळण्यार् आलेला नाही. पुढे असे म्हटले र्ेले की भारर्ीय करार कायदा 1872 च्या कलम 2 (एि) नुसार, एखादा करार कायद्याने लार्ू करण्यायोग्य असेल र्रि र्ो करार होर्ो आलि त्ामुळे मुद्ांक कायदा, 1899 च्या कलम 35 अंर्र्सर् लनबंधामुळे मुद्ांक नसलेला दस्तऐिज अंमलार् आिर्ा येिार नाही. एन. एन. ग्लोबल [NN GLOBAL] (उपरोक्त) यांनी खालील पररच्छे दाबाबर् शंका व्यक्त क े ली आहेः "22. जेव्हा लिाद खंड "संलिदेमध्ये" समालिष्ट असर्ो, र्ेव्हा हा करार कायद्याने अंमलार् आिण्यायोग्य असेल र्रि र्ो संलिदा होर्ो हे महत्त्वािे असर्े.आपि पालहले आहे की, मुद्ांक कायद्यांर्र्सर्, एखाद्या संलिदेस करार म्हिर्ा येिार नाही, जोपयंर् त्ािर योग्यररत्ा लशक्कामोर्सब होर् नाही र्ोपयंर् र्ो कायद्याने अंमलार् आिर्ा येर् नाही.त्ामुळे, 1996 च्या कायद्याच्या कलम 7 (2) आलि संलिदा अलधलनयम कलम 2 (h) सह िािल्यास, कलम 11 (6-A) िे साधे िािन देखील हे स्पष्ट करेल की लिाद खंड हा अस्तस्तत्वार् नसेल जेव्हा र्ो कायद्याद्वारे लार्ू करण्यायोग्य नसेल.हे देखील एक सूिक आहे की कलम 11(6-A) च्या दुरुस्तीद्वारे एसएमएस टी इस्टेट्सला कोित्ाही प्रकारे स्पशस क े ला र्ेला नाही. "

76. र्रिारे (उ[परोक्त) मधील कायद्यािा िरील प्रस्ताि िुकीिा असल्यािे लदसर्े. आधी नमूद क े ल्याप्रमािे, SMS Tea (उपरोक्त) मधील लनकाल 2015 पूिीच्या दुरुस्तीच्या काळार् लदला र्ेला होर्ा म्हिून र्ो कायदेशीरररत्ा रद्द क े ला र्ेला आहे.246 व्या एल. सी. आय.[LCI] अहिाला (उपरोक्त) मध्ये कोिर्ाही स्पष्ट उल्लेख नसला र्री, अलहभािी खंड त्ास प्रभािीपिे रद्द करर्े.

77. आर्ा आपि भारर्ीय करार कायदा, 1872 च्या कलम 2 (जी) आलि 2 (एि) िा लििार करूया, जे खालीलप्रमािे आहेः (ि) कायद्याद्वारे बजाििी योग्य नसलेला करार शून्यिर् असल्यािे म्हटले जार्े; (ज) कायद्याद्वारे अंमलबजाििी योग्य करार म्हिज संलिदा होय; र्रिारे (उपरोक्त ) प्रकरिामध्ये हे र्त्त्व समालिष्ट करण्यािा अथस असा होईल की, संलिदा अलधलनयम, 1872 च्या कलम 2 (ि) आलि (ज) नुसार, करारािर मुद्ांकन न क े ल्यास र्ो आरंभर्ः शून्य समजला जाईल.र्थालप, हे मुद्ांक कायदा, 1899 च्या संिैधालनक योजनेच्या लिरुद्ध असेल, ज्ानुसार मुद्ांक न लाििे/अपुरा मुद्ांक लाििे हा आधी ििास क े ल्याप्रमािे दुरुस्ती करर्ा येण्याजोर्ा दोष आहे.लशिाय, मुद्ांक शुल्क हे व्यिहारािर नव्हे र्र संलेखांिर आकारले जार्े. 5677.[1] र्ुलझारी लाल मालिारी लिरुद्ध राम र्ोपाल लॉडस लिल्यम्स जे यांनी मुद्ांक कायदा, 1899 च्या कलम 35 िर ििास करर्ाना नमूद क े ले की मुद्ांक कायदा, 1899 मध्ये अशी कोिर्ीही र्रर्ूद नाही जी कार्दपत्र अिैध ठरिर्े: "कार्दपत्रांिी अिैधर्ा आलि स्वीकारहयसर्ा यार् स्पष्ट फरक क े ला पालहजे.काही कायदे आलि कलम दस्तऐिजांिर मुद्ांकन न क े ल्यास र्े अिैध ठरर्ार्.भारर्ीय मुद्ांक कायद्याच्या कोित्ाही कलमािा हा प्रभाि नाही परंर्ु मुद्ांक िर्ळल्याने कार्दपत्र अिैध ठरल्यािे उदाहरि इंग्रजी मुद्ांक कायद्यामधील कलम ९३ मध्ये समालिष्ट आहे. जे स्पष्ट करर्े की,: सार्री लिम्यािा करार (व्यापारी पररिहन अलधलनयम, दुरुस्ती कायदा, १८६२ च्या पंिािन्नव्या कलमार् संदलभसर् क े लेल्या अशा लिम्याव्यलर्ररक्त) समुद् लिम्याच्या धोरिामध्ये व्यक्त क े ल्यालशिाय िैध राहिार नाही”‍ [भर देण्यार् आला आहे]