Ritu Tomar v. Uttar Pradesh State and Others

Supreme Court of India · 21 Apr 2023
B. R. Gavai; Arvind Kumar
Criminal Appeal No 1210 of 2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court quashed criminal proceedings against the appellant based on a police report finding the allegations fabricated, emphasizing prevention of abuse of legal process in matrimonial disputes.

Full Text
Translation output
भारतीय सर्वो च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराधि क अपीलीय क्षेत्राधि कार
आपराधि क अपील संख्या - 1210/2023
( विर्वोशेष अनुमधित याधि&का (आपराधि क) संख्या 8742/2018 से उत्पन्न)
रिरतु तोमर ... अपीलकता1
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ... प्रत्यर्थी9 (गण)
विनण1य
माननीय न्यायमूर्तित अरविंर्वोद क
ु मार,
JUDGMENT

1. अनुमधित प्रदान की गई।

2. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आपराधि क प्रकीण[1] रिरट याधि&का संख्या 14422/2018 में विदनांक 30.05.2018 को पारिरत आदेश, जिJसक े तहत भारतीय दंड संविहता (संक्षेप में 'आईपीसी') की ारा 147,148,149,452,324,307,342 और 506 क े तहत दंडनीय vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपरा क े लिलए मामला अपरा संख्या - 97/2018 में विदनांक 20.05.2018 को दJ[1] प्रार्थीविमकी को रद्द करने क े लिलए आपराधि क प्रविRया संविहता (संक्षेप में 'दंड प्रविRया संविहता') की ारा 482 क े तहत दायर याधि&का को यहां तीसरे प्रत्यर्थी9 द्वारा &ुनौती दी गई है। इस अपील क े विनस्तारण क े उद्देश्य से अनार्वोश्यक विर्वोर्वोरणों और विनस्तारण क े उद्देश्य क े लिलए आर्वोश्यक तथ्यों को यहां स्पष्ट विकया गया हैः

3. अपीलार्थी9 की बहन सुश्री रेखा, Jो &ौर्थीे प्रत्यर्थी9 की बेटी का विर्वोर्वोाह तीसरे पत्य1र्थी9 क े सार्थी प्र&लिलत रीधित-रिरर्वोाJ और प्रर्थीा क े अनुसार 15 मई, 2011 को संपन्न हुआ जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप उसने एक बच्ची को Jन्म विदया जिJसका नाम तेJल है। 4 कथिर्थीत सुश्री रेखा ने यह आरोप लगाते हुए कहा विक उसे उसक े ससुराल से बाहर विनकाल विदया गया र्थीा, दंड प्रविRया संविहता की ारा 125 क े तहत एक याधि&का दायर करक े भरण-पोषण क े लिलए मांग की, Jो र्वोी. संख्या 230/2014 क े रूप में पंJीक ृ त हो गई और यह प्र ान परिरर्वोार न्याया ीश क े यहां लंविबत है जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप 22.07.2017 को तीसरे प्रत्यर्थी9 को 5,000 रुपये प्रधित माह की राथिश का भुगतान करने का विनदaश विदया गया। अपीलार्थी9 क े द्वारा भा.दं.सं. की ारा 498 ए, 406/34 क े सार्थी- सार्थी दहेJ विनषे अधि विनयम की ारा 3 और 4 क े तहत दंडनीय अपरा ों क े लिलए तीसरे प्रत्यर्थी9 और अन्य क े लिखलाफ उत्तर पूर्वो9 विदल्ली क े हष[1] विर्वोहार पुलिलस स्टेशन में विदनांक 15.03.2017 को अपरा संख्या 73/2017 में प्रार्थीविमकी दJ[1] कराई। कथिर्थीत प्रार्थीविमकी क े आ ार पर क्षेत्राधि कारी पुलिलस ने Jां& शुरू कर दी है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

5. Jब पूर्वो क्त तथ्यात्मक परिरदृश्य मौJूद र्थीा, तो तीसरे प्रत्यर्थी9 ने सीआरपीसी की ारा 156 (3) क े तहत एक आर्वोेदन संख्या 41/2018 दायर की, जिJसमें आरोप लगाया गया विक अपीलकता1 ने प्रत्यर्थी9 संख्या 4 से 7 क े सार्थी Jबरन उसक े घर में प्रर्वोेश विकया और Jब उन्होंने गांर्वो की Jमीन और घर को बे&ने क े बाद विदल्ली स्र्थीानांतरिरत होनें की उनकी मांगों पर ध्यान देने से इनकार कर विदया तो थिशकायतकता1 को मारने क े इरादे से उसक े विपता ने अपीलकता1 क े जिसर पर &ाक ू से हमला विकया। मुख्य न्याधियक मजिJस्ट्रेट-1, गौतम बुद्ध नगर क े समक्ष की गई कथिर्थीत थिशकायत क े आ ार पर, दूसरे प्रत्यर्थी9 से एक रिरपोट[1] मांगी गई र्थीी, जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप 11 मा&1, 2018 को एक रिरपोट[1] प्रस्तुत की Jा रही र्थीी, जिJसमें यह राय व्यक्त की गई र्थीी विक अपीलकता1 सविहत आरोपी व्यविक्त कभी भी थिशकायतकता1 क े घर नहीं गए र्थीे और कहा गया र्थीा विक थिशकायतकता1 द्वारा कथिर्थीत घटना नहीं हुई र्थीी। हालांविक, विर्वोद्वत मजिJस्ट्रेट ने विदनांक 03.05.2018 क े आदेश द्वारा प्रार्थीविमकी दJ[1] करने का आदेश विदया और इस प्रकार इसमें ऊपर उजिल्ललिखत अपरा ों क े लिलए मामला अपरा संख्या - 55/2018 में दूसरे प्रत्यर्थी9 द्वारा अपीलकता1 और अन्य क े लिखलाफ प्रार्थीविमकी दJ[1] की गई। इसलिलए, कथिर्थीत प्रार्थीविमकी को रद्द करने क े लिलए एक याधि&का दायर की गई और इसे र्वोत1मान अपील को खारिरJ कर विदया गया है।

6. हमने पक्षकारों की ओर से उपस्थिस्र्थीत विर्वोद्वत अधि र्वोक्ताओं की दलीलें सुनी हैं और अथिभलेखों का अर्वोलोकन विकया है। उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलकता1 द्वारा उठाए गए तक 1 पर सार्वो ानीपूर्वो1क और चिं&धितत होकर vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd विर्वो&ार करने पर और इस न्यायालय क े समक्ष दोहराने पर हमारा विर्वो&ार हैं विक विनर्विर्वोर्वोाद रूप से तीसरा प्रत्यर्थी9 Jो अपीलकता1 की बहन का पधित है और जिJसने आर्वोेदन संख्या.41/2018 में अधितरिरक्त मुख्य न्याधियक मजिJस्ट्रेट-1, गौतम बुद्ध नगर क े समक्ष ारा 156 (3) क े तहत आर्वोेदन दायर विकया र्थीा, Jो र्वोत1मान काय1र्वोाही की विर्वो&ारा ीनता क े दौरान समाप्त हो गया है। इसलिलए, 20 Jनर्वोरी, 2020 क े आदेश द्वारा उसका नाम हटा विदया गया। कोई भी प्रत्यर्थिर्थीयों संख्या- 1 और 2 क े लिलए उपस्थिस्र्थीत नहीं हुआ है।

7. ारा 156 (3) क े तहत दायर आर्वोेदन क े Jर्वोाब में क्षेत्राधि कार पुलिलस द्वारा 11.03.2018 को दायर रिरपोट[1] क े अनुसार, यह खुलासा विकया गया विक थिशकायतकता1 ने सुश्री रेखा, अर्थीा1त् अपीलकता1 की बहन से शादी की र्थीी और कहा र्थीा विक विर्वोर्वोाह टूट गया र्थीा जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप दोनों परिरर्वोारों क े बी& र्वोैमनस्य पैदा हो गया र्थीा।इस स्थिस्र्थीधित क े कारण सुश्री रेखा ने अपने पधित क े लिखलाफ दो र्वोाद दायर विकये जिJसमे से एक र्वोी. नंबर.230/2014 में भरण-पोषण क े लिलए जिJसमें प्रत्यर्थी9 अर्थीा1त् पधित (थिशकायतकता1) को उसकी पत्नी को भरण-पोषण क े रूप में प्रधित माह Rs.5,000/- की राथिश का भुगतान करने का आदेश विदया गया र्थीा और उसने उत्पीड़न, दहेJ की मांग आविद का आरोप लगाते हुए एक रिरपोट[1] अपरा सं. 773/2017 भी दJ[1] की र्थीी जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप उसक े पधित (थिशकायतकता1 अर्थीा1त तीसरा प्रत्यर्थी9 यहां ) और उसक े परिरर्वोार क े सदस्यों क े लिखलाफ दJ[1] विकया Jा रहा है। इस पृष्ठभूविम में Jब अपर मुख्य न्याधियक मजिJस्ट्रेट द्वारा पारिरत आक्षेविपत आदेश, जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd क्षेत्राधि कारी मजिJस्ट्रेट ने पुलिलस, अर्थीा1त् दूसरे प्रत्यर्थी9 को अपीलकता1 क े लिखलाफ प्रार्थीविमकी दJ[1] करने का विनदaश विदया है, जिJसक े अर्वोलोकन से स्पष्ट रूप से उस रिरपोट[1] क े बताता है जिJसको मांगी गई र्थीी। मजिJस्ट्रेट को 11.03.2018 को प्रस्तुत विकया गया र्थीा, जिJसक े तहत यह स्पष्ट रूप से देखा गया है विक Jां& क े बाद यह पाया गया विक अपीलकता1 (यहां तीसरे प्रधितर्वोादी) ने मनगढ़ंत और आ ारहीन तथ्यों क े आ ार पर अपनी पत्नी और उसक े सदस्यों पर दबार्वो बनाने क े लिलए आर्वोेदन दायर विकया र्थीा। और उस गांर्वो में Jहां थिशकायतकता1 रहता र्थीा, विकसी ने भी अपीलकता1 और उसक े सदस्यों की उपस्थिस्र्थीधित क े बारे में गर्वोाही नहीं दी है विक उन्होंने खटाना गांर्वो का दौरा विकया र्थीा और थिशकायतकता1 और उसक े विपता को 26.01.2018 को कथिर्थीत रूप से &ोट पहुं&ाई र्थीी। Jां& क े बाद क्षेत्राधि कारी पुलिलस ने भी यह राय व्यक्त की है विक प्रस्ताविर्वोत घटना गलत प्रतीत होती है।हालांविक, विर्वोद्वत मजिJस्ट्रेट क े आक्षेविपत आदेश से यह संक े त नहीं विमलता है विक विकस आ ार पर 11.03.2018 को कथिर्थीत रिरपोट[1] को खारिरJ कर विदया गया र्थीा या यह स्र्वोीकार विकए Jाने योग्य क्यों नहीं है।

8. पूर्वो1-र्वोर्थिणत तथ्यों क े आ ार पर और दो परिरर्वोारों क े बी& विर्वोर्वोाद होने की तथ्यात्मक पृष्ठभूविम में, जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप पहले ही पत्नी द्वारा दो मामले दJ[1] विकए Jा &ुक े र्थीे, जिJसक े परिरणामस्र्वोरूप थिशकायतकता1 (इसमें तीसरा प्रत्यर्थी9) और उसक े सदस्यों क े लिखलाफ प्रार्थीविमकी दJ[1] की गई र्थीी और यह तथ्य विक थिशकायतकता1 क े पड़ोजिसयों सविहत ग्रामीणों में से विकसी ने भी 26.01.2018 को थिशकायतकता1 द्वारा दार्वोा विकए गए विकसी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd भी घटना की घटना क े बारे में समर्थी1न या गर्वोाही नहीं दी र्थीी, इस न्यायालय द्वारा विनकाला Jाने र्वोाला अप्रधितरोध्य विनष्कष[1] क्षेत्राधि कार पुलिलस की रिरपोट[1] को प्रधितग्रहण करना है, Jहां र्वोे इस विनष्कष[1] पर पहुं&े हैं विक थिशकायतकता1 द्वारा प्रस्तुत घटना झूठी प्रतीत होती है, और इस तरह अपीलकता1 क े लिखलाफ काय1र्वोाही खारिरJ करने योग्य है। 9 इसलिलए, Jहां तक अपीलकता1 का संबं है, हम दूसरे प्रत्यर्थी9 द्वारा आईपीसी की ारा 147,148,149,452,324,307,342 और 506 क े तहत की अपरा संख्या 97/2018 क े रूप में पंJीक ृ त काय1र्वोाविहयों को रद्द करते हैं। तदनुसार अपील को अनुमधित दी Jाती है। …………………………... (न्यायमूर्तित बी. आर. गर्वोई) ………………………… (न्यायमूर्तित अरविर्वोन्द क ु मार) नई विदल्ली 21 अप्रैल, 2023 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd