Income Tax Commissioner v. Prakash Chand Luvinya

Supreme Court of India · 24 Apr 2023 · 2023 INSC 416
M. M. Sundesh
Civil Appeal Nos. 7689-90 of 2022
2023 INSC 416
tax appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that penal confiscation of seized goods cannot be treated as business income under section 69A of the Income Tax Act, upholding the addition and penalty against the assessee engaged in silver business.

Full Text
Translation output
रि पोर्टेबल
भा त का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि का
सिसविर्वोल अपील संख्या 7689-90/2022
आयक आयुक्त, जयपु अपीलकता, बनाम
श्री प्रकाश चंद लुविनया (डी)
र्टेी. आ . एलआ एस एंड अन्य प्रधितर्वोादी
विनर्ण,य
एम. आ . शाह, न्याया ीश
JUDGMENT

1. ाजस्थान उच्च न्यायालय, बेंच जयपु द्वा ा डीबीआईर्टेीए संख्या 96/2003 औ डीबीआईर्टेीआ संख्या 6/1996 में पारि त 22.11.2016 क े आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश, सिजसक े द्वा ा उच्च न्यायालय ने उक्त अपीलों को स्र्वोीका विकया है, से व्यथिथत औ असंतुष्ट महसूस क ते हुए ाजस्र्वो ने र्वोत,मान अपीलों को प्राथविमकता दी है।

2. संक्षेप में र्वोत,मान अपीलों क े तथ्य विनम्नानुसा हैंः 2.[1] ाजस्र्वो आसूचना विनदेशालय (डीआ आई) क े अधि कारि यों ने ए-11, 12, सेक्र्टे -7, नोएडा स्थिस्थत परि स ों की तलाशी ली, सिजसे विन ा,रि ती श्री प्रकाश चंद 2023 INSC 416 लुविनया ने विक ाए प ले खा था। 1397, चांदनी चौक, विदल्ली में विन ा,रि ती क े परि स से डीआ आई ने चांदी क े 144 स्लैब औ दो चांदी की सिससिल्लयां ब ामद कीं। कलक्र्टे, सीमा शुल्क ने अथिभविन ा,रि त विकया विक श्री प्रकाश चंद लुविनया चांदी/स ा,फा का स्र्वोामी है औ उसका लेन-देन लेखा बविहयों में दज, नहीं विकया गया। सीमा शुल्क कलेक्र्टे, नई विदल्ली में 3.06 क ोड़ रुपये मूल्य क े 4641.962 विकलोग्राम चांदी क े उक्त 146 स्लैबों को जब्त क ने का आदेश विदया गया है। कलेक्र्टे कस्र्टेम ने सीमा शुल्क अधि विनयम की ा ा 112 क े तहत श्री प्रकाश चंद लूविनया प 25 लाख रुपये का व्यविक्तगत जुमा,ना लगाया। 2.[2] विन ा, र्ण काय,र्वोाही क े दौ ान विन ा, र्ण अधि का ी ने पाया विक विन ा,रि ती, चांदी क े अधि ग्रहर्ण की प्रक ृ धित औ स्रोत की व्याख्या क ने में समथ, नहीं था, सिजसका विक र्वोह मालिलक बताया जाता है, इसलिलए आयक अधि विनयम, 1961 (सिजसे इसमें इसक े बाद 'अधि विनयम, 1961' क े रूप में संदर्भिभत विकया गया है) की ा ा 69 ए क े मान्य प्रार्वो ान लागू होंगे। इस संबं में कोई विनर्वोेश विन ा,रि ती की लेखा बविहयों में दज, नहीं पाया गया, जो तत्कालीन विन ा, र्ण अधि का ी क े समक्ष पेश विकया गया था। तदनुसा, आंकलन अधि का ी ने एक आंकलन आदेश पारि त विकया औ अधि विनयम, 1961 की ा ा 69 ए क े तहत 3,06,36,909 रुपये काे अधितरि क्त जोड़ा। अपीलों क े आंकलन आदेश क े लिखलाफ सीआईर्टेी (ए) ने विन ा,रि ती की अपील को खारि ज क विदया। आईर्टेीएर्टेी, जयपु ने ा ा 69 ए क े संबं में सीआईर्टेी (ए) क े आदेश को भी ब क ा खा, हालांविक, आंथिशक रूप से विन ा,रि ती की अपील को स्र्वोीका क लिलया। क ु छ अन्य छोर्टेे परि र्वो,न क े संबं में, आयक अपीलीय अधि क र्ण ने क ु छ अन्य परि र्वो,न को अलग खा औ नए सिस े से जांच क े लिलए मामले को एओ को भेज विदया। एओ ने मुद्दे की विफ से जांच की औ इसमें परि र्वो,न विकया गया। सीआईर्टेी (ए) ने भी एओ क े आदेश को ब क ा खा। क दाता ने सीआईर्टेी (ए) द्वा ा आईर्टेीएर्टेी क े समक्ष पारि त नर्वोीन आदेश क े लिखलाफ अपील दाय की। आयक अपीलीय अधि क र्ण ने कानून क े विनम्नलिललिखत प्रश्नों क े साथ उच्च न्यायालय को एक ेफ ेंस विदया थाः (i) क्या तथ्यों औ मामले की परि स्थिस्थधितयों क े आ ा प, आयक अधि विनयम, 1961 की ा ा 69 ए में विनविहत प्रार्वो ानों का अथ, लगाने औ व्याख्या क ने क े बाद, न्यायाधि क र्ण यह अथिभविन ा,रि त क ने क े लिलए कानून में सही था विक विन ा,रि ती परि स संख्या ए 11 औ 12, सेक्र्टे -7, नोएडा में पाई गई 144 चांदी की छड़ों का मालिलक था औ मैसस, लुविनया एंड क ं पनी, विदल्ली क े परि स ों में दो चांदी की छड़ें पाई गई ं औ इसक े अलार्वोा अधि विनयम की ा ा 69 ए क े तहत विन ा,रि ती क े हाथों में 3,06,36,909/- रुपये का अज्ञात विनर्वोेश विकया जा हा है? (ii) यविद उप ोक्त प्रश्न का उत्त सका ात्मक है, तो क्या तथ्यों औ मामले की परि स्थिस्थधितयों क े आ ा प, विर्टेpब्यूनल द्वा ा प्या ा सिंसह बनाम सीआईर्टेी, 124 आईर्टेीआ 41 क े मामले में उच्चतम न्यायालय क े न्याया ीश द्वा ा विन ा,रि त अनुपात को अलग क ने क े लिलए कानून में सही था औ उसे इस प्रका चांदी की छड़ों की जब्ती क े का र्ण नुकसान की अनुमधित नहीं दी गई थी? 2.[3] जबविक ेफ ेंस उच्च न्यायालय क े समक्ष लंविबत था, विन ा,रि ती क े विर्वोरुद्ध शास्थिस्त काय,र्वोाही भी शुरू क दी गई थी। अधि विनयम की ा ा 271 (i) (सी) क े तहत एक आदेश की सीआईर्टेी (ए) औ आईर्टेीएर्टेी दोनों द्वा ा पुविष्ट की गई। उच्च न्यायालय ने दोनों मामलों को एक साथ तय क ते हुए, पहले प्रश्न क े रूप में, विन ा,रि ती क े ाजस्र्वो औ विक ाये क े परि स क े पक्ष में फ ै सला विकया विक उसे स्र्वोाभाविर्वोक परि र्णाम क े रूप में उसकी आय में जोड़ा जाना है। हालांविक इस संबं में विद्वतीय प्रश्न, उच्च न्यायालय ने अथिभविन ा,रि त विकया विक सीमा शुल्क विर्वोभाग क े डीआ आई अधि का ी द्वा ा अधि ह र्ण से होने र्वोाली हाविन व्यापारि क हाविन है। उच्च न्यायालय ने विनर्ण,य देते समय सीआईर्टेी, पविर्टेयाला बनाम प्या ा सिंसह 124 आईर्टेीआ 41 प भ ोसा विकया है। उच्च न्यायालय द्वा ा पारि त विनर्ण,य औ आदेश र्वोत,मान अपील का विर्वोषय है।

3. श्री बलबी सिंसह, विर्वोद्वान एएसजी ाजस्र्वो की ओ से औ श्री अरि जीत प्रसाद, विर्वोद्वान र्वोरि ष्ठ अधि र्वोक्ता विन ा,रि ती की ओ से उपस्थिस्थत हुए हैं। 3.[1] ाजस्र्वो की ओ से उपस्थिस्थत विर्वोद्वत एएसजी श्री बलबी सिंसह ने जो दा रूप से यह प्रस्तुत विकया है विक मामले क े तथ्यों औ परि स्थिस्थधितयों में औ अधि विनयम, 1961 क े प्रासंविगक प्रार्वो ानों प विर्वोचा क ते समय, उच्च न्यायालय ने र्वोस्तुतः इस न्यायालय क े विनर्ण,य प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े मामले प भ ोसा क ने में गलती की है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक जैसा विक एओ, सीआईर्टेी (ए) औ आईर्टेीएर्टेी ने सही त ीक े से प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े मामले में विनर्ण,य को अलग विकया है क्योंविक र्वोह एक ऐसे विन ा,रि ती से संबंधि त था जो क ेंसी नोर्टेों की तस्क ी क े व्यर्वोसाय में लगा हुआ था औ सिजसक े लिलए क ेंसी नोर्टेों को जब्त क ना उसक े व्यर्वोसाय को आगे बढ़ाने में हुई हाविन थी, यानी, एक नुकसान जो उसक े व्यर्वोसाय को चलाने से सी े उत्पन्न हुआ था औ यह उसक े लिलए प्रासंविगक था। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक इसक े का र्ण, पूर्वो क्त मामले में विन ा,रि ती को आयक अधि विनयम, 1922 की ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती का हकदा ठह ाया गया था। यह प्रस्तुत विकया गया है विक हालांविक पूर्वो क्त विनर्ण,य क े पै ा 7 में जो तीन मामलों को संदर्भिभत विकया है, जहां न्यायालय द्वा ा पूर्वो क्त विनयम क े एक अपर्वोाद को नोर्टे विकया गया था। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक उक्त विनर्ण,य में इस न्यायालय ने इस न्यायालय क े साथ-साथ आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय औ बॉम्बे उच्च न्यायालय क े पूर्वो, विनर्ण,यों को भी नोर्टे विकया। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, बनाम सीआईर्टेी, एआईआ 1961 एस. सी. 663, क े मामले में विन ा,रि ती (असेसी) ने कस्र्टेम प्राधि का ी द्वा ा अधि गृविहत की गई उसकी सम्पलित्त को छ ु ड़र्वोाने क े लिलए स्र्वोयं द्वा ा जमा क ाये गए जुमा,ने की कर्टेौधित का दार्वोा विकया गया, जो विक इस आ ा प खारि ज विकया गया था विक विर्वोधि क े उल्लंघन प जुमा,ने क े रुप में जमा क ायी गई ाथिश सामान्य व्यर्वोहा क े तहत नहीं क ायी गई थी। अन्य दो मामलों में, सीमा शुल्क अधि कारि यों ने र्वोै व्यर्वोसायों में लगे विन ा,रि धितयों से सोना जब्त क लिलया था। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय औ बॉम्बे उच्च न्यायालय क े दो मामलों में क दाताओं ने व्यापा /व्यार्वोसाधियक नुकसान क े रूप में जब्त सोने क े मूल्य का दार्वोा विकया जो र्वोत,मान एसएलपी क े तथ्यों में प्रत्यथ~-क दाता क े दार्वोे क े समान है । यह प्रस्तुत विकया जाता है विक इसलिलए सोनी हिंहदूजी क ु शलजी एंड क ं पनी बनाम सीआईर्टेी, (1973) क े मामले में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय क े हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, बनाम सीआईर्टेी, एआईआ 1961 एससी 663 में इस े विनर्ण,य जेएस पा क बनाम र्वोीबी पालेक, (1974) 94 आईर्टेीआ 616 (बीओएम) क े मामले में 89 आईर्टेीआ 112 (एपी) औ बॉम्बे हाईकोर्टे, क े मामले क े तथ्यों क े लिलए पू ी ताकत क े साथ लागू होंगे। 3.[2] यह प्रस्तुत विकया गया है विक आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोनी हिंहदूजी क ु शालजी (उप ोक्त) क े मामले में फ ै सले क े पै ा 10 में देखा विक जब कर्टेौती का दार्वोा विकया जाता है, तो नुकसान र्वोह होना चाविहए जो प्रत्यक्ष आत्यस्थिन्तक रूप विन ा,रि ती द्वा ा चलाए जा हे व्यर्वोसाय से उत्पन्न होती है या आनुषंविगक है औ न विक विकसी भी प्रका की हाविन सिजसका उसक े व्यर्वोसाय से कोई संबं या संबं नहीं है। पै ा 11 औ 12 में, उच्च न्यायालय ने यह कहने क े लिलए विर्वोथिभन्न विनर्ण,यों प भ ोसा विकया विक र्वोर्जिजत सोने की जब्ती मामले में की गई एक का,र्वोाई है न विक व्यविक्तगत रूप से काय,र्वोाही औ इस प्रका, शब्द क े सख्त अथ• में मामले में की गई काय,र्वोाही सी े तौ प संपलित्त क े विर्वोरुद्ध की गई का,र्वोाई है (अथा,त्, तस्क ी विकया गया सोना) औ भले ही अप ा ी ज्ञात न हो, सीमा शुल्क अधि कारि यों क े पास र्वोर्जिजत सोने को जब्त क ने की शविक्त है। उपयु,क्त को ध्यान में खते हुए, न्यायालय ने कहा विक सीमा शुल्क अधि कारि यों द्वा ा र्वोर्जिजत सोने की जब्ती को विन ा,रि ती क े व्यर्वोसाय से संबंधि त या आकस्थिस्मक व्यापा या र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है। उच्च न्यायालय ने आगे हाजी अजीज (ऊप ) औ विर्वोथिभन्न अन्य विनर्ण,यों का उल्लेख विकया गया है विक तस्क ी/विनविषद्ध र्वोस्तुओं की इस त ह की जब्ती सिजसक े परि र्णामस्र्वोरूप कानून का उल्लंघन होता है औ विन ा,रि ती क े व्यर्वोसाय से कोई घर्टेना/संबं नहीं है, को व्यार्वोसाधियक नुकसान क े रूप में अनुमधित नहीं दी जा सकती है। इस प्रका, पूर्वो क्त मामला, सिजसे प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) में विनर्दिदष्ट औ विर्वोभेविदत विकया गया है, यहां र्वोत,मान मामले क े तथ्यों प पू ी त ह से लागू होता है। इसी त ह जेएस पा क (उपयु,क्त) का मामला भी र्वोत,मान मामले में लागू होगा, क्योंविक पहले क े मामले में, विन ा,रि ती ने न क े र्वोल व्यापा हाविन क े रूप में जब्त सोने क े मूल्य का दार्वोा विकया, बस्थिल्क अघोविषत स्रोतों से उसकी अनुमाविनत औ विन ा,रि त आय क े लिखलाफ कथिथत हाविन का मुज ा भी विकया। इसक े अलार्वोा, सोने क े मूल्य प ा ा 69 औ 69 ए क े अ ीन क लगाने की मांग की गई थी। हालाँविक, इस मामले में भी बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस तक, को खारि ज क विदया विक साक्ष्य अधि विनयम की ा ा 110 (जहां एक व्यविक्त को विकसी चीज क े कब्जे में पाया जाता है, यह साविबत क ने का दाधियत्र्वो विक र्वोह मालिलक नहीं था, उस व्यविक्त प है सिजसने पुविष्ट की विक र्वोह मालिलक नहीं था) क ा ान की काय,र्वोाही क े लिलए लागू नहीं था औ न्यायालय इस प सहमत था विक क अधि कारि यों ने परि स्थिस्थधितजन्य साक्ष्य क े आ ा प विन ा,रि ती को जब्त विकए गए सोने का मालिलक होने का सही अनुमान लगाया था औ विन ा,रि ती ऐसे सोने क े मूल्य को व्यापारि क नुकसान क े रूप में दार्वोा क ने का हकदा नहीं था। 3.[3] श्री बलबी सिंसह, विर्वोद्वान एएसजी ने विनम्नलिललिखत मामलों में इस न्यायालय क े विनर्ण,यों प भ ोसा विकया हैः चुह मल बनाम सीआईर्टेी, (1988) 3 एससीसी 588 औ सीआईर्टेी बनाम क े. धिचन्नाथंबन, (2007) 7 एससीसी 390, स्र्वोाविमत्र्वो साविबत क ने का अधि का उस व्यविक्त क े पास है जो स्र्वोाविमत्र्वो से इंका क ता है औ सिजसक े पास स्र्वोाविमत्र्वो है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्वोत,मान मामले में जब्त चांदी का स्र्वोाविमत्र्वो प्रत्यथ~-विन ा,रि ती प पड़ा, सिजसका र्वोह विनर्वो,हन क ने में विर्वोफल हा औ सिजसने तदनुसा उसक े स्र्वोाविमत्र्वो प क अधि कारि यों क े समर्वोत~ विनष्कष• को र्वोै माना। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक जब विन ा,रि ती कब्जे औ स्र्वोाविमत्र्वो से इंका क ने में असमथ, हा है औ र्वोास्तर्वो में समझौता आयोग क े साथ-साथ उच्च े समक्ष उसे स्र्वोीका विकया गया है, औ एओ, सीआईर्टेी (ए) औ आईर्टेीएर्टेी क े समक्ष एक व्यापारि क नुकसान क े रूप में जब्त चांदी क े मूल्य का दार्वोा विकया, जो र्वोैकस्थिल्पक रूप आदेश इसक े विर्वोप ीत तक, देता है औ स्र्वोाविमत्र्वो आदेश इनका क ता है ताविक यह कहा जा सक े विक उसक े मामले में ा ा 69 ए को लागू नहीं विकया जा सकता है। 3.[4] विर्वोद्वान एएसजी द्वा ा यह प्रस्तुत विकया गया है विक विन ा,रि ती को भी अधि विनयम की ा ा 37(1) क े स्पष्टीक र्ण 1 क े तहत स्पष्ट विनषे क े मद्देनज इस त ह क े नुकसान का दार्वोा क ने की अनुमधित नहीं दी जाएगी, सिजसे 01.04. 1962 से जोड़ा गया था। र्टेीए क ु ैशी (डॉ.) बनाम सीआईर्टेी, (2007) 2 एससीसी 759 क े साथ- साथ एपेक्स लेबो ेर्टे ीज (पी) लिलविमर्टेेड बनाम सीआईर्टेी, (2022) 7 एससीसी 98 क े मामले में इस न्यायालय क े फ ै सलों प भ ोसा विकया गया है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक अधि विनयम की ा ा 37 (1) का स्पष्टीक र्ण 1 विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विकए गए विकसी भी व्यय को स्पष्ट रूप से अनुमधित नहीं देता है, जो एक अप ा है या कानून द्वा ा विनविषद्ध है, जो विनम्नलिललिखत क े रूप में दार्वोा विकया जा सकता हैः 3.[5] यह प्रस्तुत विकया गया है विक र्टेीए क ु ैशी (उप ोक्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने स्पष्ट विकया विक कथिथत मामले क े तथ्य व्यापा हाविन से संबंधि त हैं न विक व्यर्वोसाय व्यय से। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक उक्त मामले में, आईर्टेीएर्टेी ने विन ा,रि ती को हे ोइन क े विनमा,र्ण औ विबक्री क े व्यर्वोसाय में संलग्न पाया औ इस प्रका, इस न्यायालय ने अथिभविन ा,रि त विकया विक विन ा,रि ती का व्यापा हाविन का दार्वोा स्र्वोीकाय, था क्योंविक र्वोह हे ोइन क े व्यर्वोसाय में था। यह प्रस्तुत विकया गया है विक एपेक्स लेबो ेर्टे ीज (सुप्रा) का मामला र्टेीए क ु ैशी (सुप्रा) में विदए गए विनर्ण,य को अलग क ता है औ बताता है विक विन ा,रि ती द्वा ा डॉक्र्टे ों को रि श्वत देने से संबंधि त मामला व्यर्वोसाय हाविन से संबंधि त नहीं था, लेविकन व्यर्वोसाय व्यय जो ा ा 37(1) क े तहत अस्र्वोीकाय, था। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक इस प्रका, विकसी भी त ह से, न तो प्रधितर्वोादी- विन ा,रि ती उसक े तस्क ी व्यर्वोसाय में नहीं होने क े का र्ण व्यापा हाविन का दार्वोा क सकता है औ न ही र्वोह व्यर्वोसाय व्यय का दार्वोा क सकता है क्योंविक यह ा ा 37(1) क े तहत विनविषद्ध है। 3.[6] उपयु,क्त प्रस्तुधितयां क ते हुए औ उपयु,क्त प्रस्तुधितयों प भ ोसा क ते हुए, यह प्राथ,ना की जाती है विक र्वोत,मान अपीलों को स्र्वोीका विकया जाए औ आईर्टेीएर्टेी क े आदेशों को बहाल विकया जाए।

4. श्री अरि जीत प्रसाद, विर्वोद्वान र्वोरि ष्ठ अधि र्वोक्ता ने विन ा,रि ती की ओ से जो दा रूप से यह प्रस्तुत विकया है विक र्वोत,मान मामले में प्रधितर्वोादी-विन ा,रि ती चांदी की ख ीद औ विबक्री क े व्यर्वोसाय में लगा हुआ है। प्रधितर्वोादी-विन ा,रि ती द्वा ा प्रश्नगत विन ा, र्ण र्वोष, क े लिलए 1,32,712 रुपये क े सकल लाभ क े साथ 1,46,07,314 रुपये की क ु ल विबक्री की घोषर्णा की गई थी। जब डीआ आई क े अधि कारि यों ने तलाशी ली तो चांदी क े बेविहसाब 146 स्लैब ब ामद विकए गए। सीमा शुल्क कलेक्र्टे ने 3,06,036,909/- रुपये मूल्य क े चांदी क े उक्त 146 स्लैब को पू ी त ह से जब्त क ने का आदेश विदया था, सिजसे अधि विनयम की ा ा 69 ए क े तहत डीम्ड आय क े रूप में जोड़ा जाना प्रस्ताविर्वोत था। प्रधितर्वोादी - विन ा,रि ती ने स्लैब क े मालिलक होने प विर्वोर्वोाद विकया। प्रधितर्वोादी ने यह भी अनु ो विकया विक सीमा शुल्क विर्वोभाग द्वा ा 146 चांदी स्लैब को आत्यस्थिन्तक रूप से जब्त क लिलए जाने क े बाद ऐसे व्यापा योग्य चांदी स्लैब क े मूल्य को नुकसान क े रूप में अनुमधित दी जानी चाविहए। हालांविक, विन ा, र्ण अधि का ी ने अधि विनयम की ा ा 69 ए क े तहत आय क े रूप में प्रधितर्वोादी क े कब्जे से जब्त 146 चांदी की छड़ों क े मूल्य क े रूप में 3,06,036,909 रुपये जोड़े। र्वोृधिद्ध क े कथिथत आदेश की पुविष्ट आईर्टेीएर्टेी तक हो गई, हालांविक उच्च न्यायालय ने आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश द्वा ा विन ा,रि ती क े पक्ष में संदभ, का यह कहते हुए जर्वोाब विदया है विक जब प्राक ृ धितक परि र्णाम क े रूप में प्रधितर्वोादी की आय में सामग्री का मूल्य जोड़ा जाता है, तो उक्त सामग्री की जब्ती से होने र्वोाली हाविन को व्यापा हाविन क े रूप में अनुमधित देने की आर्वोश्यकता होती है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक यह उच्च न्यायालय क े समक्ष है विक विन ा,रि ती ने चांदी क े स्लैब क े स्र्वोाविमत्र्वो क े संबं में तक, नहीं विदया औ इसलिलए, उच्च न्यायालय द्वा ा उक्त प्रश्न का उत्त नहीं विदया गया। 4.[1] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्वोत,मान मामला ऐसा है जहां आत्यस्थिन्तक अधि ह र्ण क े का र्ण हाविन क े रूप में 146 चांदी स्लैब क े मूल्य क े मुज ा का दार्वोा विकया जाता है न विक विकसी जुमा,ने औ /या कानून क े उल्लंघन क े लिलए अधि ोविपत जुमा,ने क े दार्वोे का। 4.[2] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्वोत,मान अपील में मुद्दा र्टेीए क ु ैशी (डॉ.) (उप ोक्त) क े विनर्ण,य क े मद्देनज विन ा,रि ती क े पक्ष में काफी हद तक कर्वो विकया गया है। उक्त विनर्ण,य में, यह माना जाता है विक माल की पूर्ण, जब्ती क े का र्ण व्यापा हाविन क े मामले में अधि विनयम की ा ा 37 को लागू क ने का उच्च न्यायालय का विनर्ण,य गलत था। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक उसमें विन ा,रि ती की प्रस्तुधित है विक अधि विनयम की ा ा 37 व्यर्वोसाय व्यय से संबंधि त है जबविक आत्यस्थिन्तक अधि ह र्ण का मामला व्यर्वोसाय हाविन का था, स्र्वोीका क लिलया गया है। 4.[3] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्वोत,मान मामले में, तलाशी लेने प, विन ा,रि ती क े कब्जे से चांदी क े 146 स्लैब पाए गए। कथिथत चांदी स्लैब का मूल्य 3,06,036,909 रुपये विन ा,रि त विकया गया था औ इसे अधि विनयम की ा ा 69 ए क े तहत अघोविषत मूल्यर्वोान र्वोस्तु क े रूप में विन ा,रि ती की आय की गर्णना में जोड़ा गया था, सिजसे विन ा,रि ती की लेखा बविहयों में दज, नहीं विकया गया था। 4.[4] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक हालांविक प्रधितर्वोादी क े रूप में - विन ा,रि ती चांदी क े व्यापा में लगा हुआ था औ उक्त चांदी क े स्लैब व्यापा क े उद्देश्य से विन ा,रि ती क े कब्जे में थे, उक्त चांदी क े स्लैब की पूर्ण, जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप स्र्टेॉक का नुकसान होगा व्यापा में औ उसका मूल्य व्यर्वोसाय/व्यापा हाविन क े रूप में कर्टेौती क े रूप में उपलब् होगा। 4.[5] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्टेी.ए. क ु ैशी (सुप्रा) इस न्यायालय ने व्यापा में बेविहसाब स्र्टेॉक र्वोाले माल की जब्ती क े का र्ण व्यापा हाविन क े विर्वोरुद्ध दंड/जुमा,ने क े व्यय क े रूप में कर्टेौती क े बीच अंत विकया है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक विकसी जुमा,ने औ /या जुमा,ने क े व्यय क े रूप में कर्टेौती क े मामले में, न्यायालयों ने माना है विक ऐसी कर्टेौती विन ा,रि ती क े लिलए उपलब् नहीं होगी क्योंविक यह ऐसी दंडात्मक का,र्वोाई क े पीछे क े उद्देश्य को विर्वोफल क देगा। जबविक, व्यापा हाविन क े रूप में सेर्टे ऑफ (समायोजन) क े मामले में, बेविहसाब माल हालांविक विन ा,रि ती की आय में जोड़ा जाता है लेविकन विन ा,रि ती को उसक े व्यापा क े लिलए उपलब् नहीं होता है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक इस त ह क े सेर्टे ऑफ क े लाभ का विर्वोस्ता क ते हुए, इस न्यायालय ने प्या ा सिंसह(सुप्रा) औ र्टेी.ए. क ु ैशी (सुप्रा) ने माना है विक विन ा,रि ती व्यर्वोसाय हाविन क े रूप में सेर्टे ऑफ का हकदा होगा। 4.[6] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक मोचन, जुमा,ना लगाने क े मामले क े विर्वोप ीत, जहां जब्त विकए गए माल को ऐसी ाथिश क े भुगतान प रि हा क विदया जाता है, माल की पूर्ण, जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप उक्त माल क ें द्र स का क े पास विनविहत हो जाता है। ऐसे मामलों में, हालांविक माल का मूल्य विन ा,रि ती की आय में जोड़ा जाता है, लेविकन विन ा,रि ती क े पास अपने आगे क े लिलए माल को भुनाने का कोई विर्वोकल्प नहीं होता है। इस प्रका, ऐसे मामले क े बीच एक स्पष्ट अंत है जहां स्र्वोीकाय, व्यय क े रूप में विकसी भी दंड औ /या जुमा,ना की कर्टेौती की मांग की जाती है औ ऐसे मामले में जहां माल की पूर्ण, जब्ती क े का र्ण व्यापा हाविन का दार्वोा विकया जाता है सिजसक े परि र्णामस्र्वोरूप व्यापा में स्र्टेॉक की हाविन होती है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक र्वोत,मान मामला एक ऐसा मामला है जहां चांदी की छड़ों की पूर्ण, जब्ती क े का र्ण व्यार्वोसाधियक नुकसान क े रूप में सेर्टे ऑफ का दार्वोा विकया जाता है न की विकसी त ह की शास्थिस्त औ जुमा,ने का। याधिचकाकता,कता, द्वा ा सुनर्वोाई क े दौ ान उद्धृत विनर्ण,य इसलिलए विर्वोथिशष्ट औ विर्वोभेद्य तथ्यों प विदए गए हैं औ र्वोत,मान मामले क े तथ्यों प लागू नहीं होंगे। 4.[7] यह प्रस्तुत विकया जाता है विक उक्त विर्वोभेद को भी कानूनी रूप से मान्यता दी गई है। जैसा विक अपीलकता, द्वा ा ेखांविकत विकया गया है, ा ा 37, जो व्यय क े भत्ते औ कर्टेौती से संबंधि त है, को विर्वोत्त अधि विनयम, 1998 द्वा ा 1.4.1962 से संशोधि त विकया गया था, सिजसक े द्वा ा स्पष्टीक र्ण 1 को यह स्पष्ट क ने क े लिलए जोड़ा गया था विक विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विकया गया कोई भी व्यय जो एक अप ा है या जो कानून द्वा ा विनविषद्ध है, व्यर्वोसाय या पेशे क े उद्देश्य क े लिलए उपगत नहीं समझा जाएगा औ ऐसे व्यय क े संबं में कोई कर्टेौती या मोक नहीं विदया जाएगा। इसक े विर्वोप ीत, सचेत रूप से व्यापा में बेविहसाब स्र्टेॉक क े मूल्य क े संबं में कानून में ऐसा कोई प्रधितबं नहीं लगाया गया है, सिजसे पू ी त ह से जब्त क लिलया गया है। 4.[8] उपयु,क्त प्रस्तुधितयां देते हुए यह प्राथ,ना की जाती है विक र्वोत,मान अपीलों को खारि ज क विदया जाए।

5. संबंधि त पक्षों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता को विर्वोस्ता से सुना।

6. संधिक्षप्त प्रश्न जो इस न्यायालय क े समक्ष विर्वोचा क े लिलए प्रस्तुत विकया गया है विक क्या उच्च न्यायालय ने इस न्यायालय क े विनर्ण,य सीआईर्टेी पविर्टेयाला बनाम विपया ा सिंसह, 1980 सप्लीमेंर्टे एससीसी 166 प भ ोसा क ते हुए प्रधितर्वोादी - विन ा,रि ती को डीआ आई अधि कारि यों द्वा ा चांदी की छड़ो की जब्ती क े नुकसान को व्यापा हाविन क े रूप में अनुमधित देने में कानूनन गलती की है? 6.[1] पूर्वो क्त प्रश्न प विर्वोचा क ते समय, प्रा ंभ में, यह नोर्टे क ना आर्वोश्यक है विक अधि विनयम क े अ ीन ा ा 37 (1) क े उपबं ों को विर्वोत्त (सं. 2) अधि विनयम, 1998 द्वा ा उसका स्पष्टीक र्ण 1 पु ःस्थाविपत क क े संशोधि त विकया गया है सिजसमें विकसी प्रयोजन क े लिलए विन ा,रि ती द्वा ा विकया गया कोई व्यय जो अप ा है या विर्वोधि द्वा ा प्रधितविषद्ध है, अनुज्ञेय का बा व्यय नहीं है। यह सच है विक र्वोत,मान मामले में प्रधितर्वोादी - विन ा,रि ती ने व्यापा व्यय क े रूप में चांदी की छड़ो की जब्ती क े मूल्य का दार्वोा नहीं विकया औ इस प्रका व्यापा हाविन क े रूप में दार्वोा विकया। हालाँविक, ा ा 37 में संशो न से शाविमल मुद्दे प क ु छ अस पड़ सकता है। 6.[2] उच्च न्यायालय द्वा ा पारि त आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश प विर्वोचा क ने प ऐसा प्रतीत होता है विक उच्च न्यायालय ने क े र्वोल प्या ा सिंसह(पूर्वो क्त) क े मामले में इस े विर्वोविनश्चय प भ ोसा विकया है। प्या ा सिंसह(उप ोक्त) क े विनर्ण,य को पढ़ने क े बाद, हमा ी ाय है विक उच्च न्यायालय ने प्या ा सिंसह(उप ोक्त) क े विनर्ण,य प भ ोसा क क े भौधितक रूप से त्रुविर्टे की है। 6.[3] प्या ा सिंसह (उप ोक्त) क े मामले में विन ा,रि ती क ेंसी नोर्टेों की तस्क ी क े व्यर्वोसाय में पाया गया था औ यह पाया गया था विक क ेंसी नोर्टेों की जब्ती उसक े व्यर्वोसाय को आगे बढ़ाने में हुई हाविन थी, यानी एक नुकसान जो सी े तौ प उत्पन्न हुआ था अपना व्यर्वोसाय चला हा था औ उसक े लिलए प्रासंविगक था। इइसक े का र्ण, उक्त मामले में विन ा,रि ती को आयक अधि विनयम, 1922 की ा ा 10(1) क े तहत कर्टेौती का हकदा माना गया। उपयु,क्त तथ्य की स्थिस्थधित को ध्यान में खते हुए, इस न्यायालय ने प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े विर्वोविनश्चयों को विनम्नलिललिखत में विर्वोभेविदत विकया हैः उप ोक्त तथ्य स्थिस्थधित बनाम ध्यान में खते हुए इस न्यायालय ने प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े मामले में एआईआ 1961 एससी 663 में रि पोर्टे, विकए गए हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, क े मामले में औ सोनी हिंहदूजी क ं पनी बनाम सीआईर्टेी, (1973) 89 आईर्टेीआ 112 (एपी) क े मामले में विनर्ण,य में इस न्यायालय क े विनर्ण,यों बनाम अलग विकया औ जे. एस. पा क बनाम र्वोी. बी. पालेक, (1974 94 आई. र्टेी. आ. 616 (बम)क े मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय क े विनर्ण,य से सहमत नहीं था। यह ध्यान देने योग्य है विक उप ोक्त सभी तीन मामलों में सिजन प प्या ा सिंसह(उपयु,क्त) क े मामले में ाजस्र्वो द्वा ा भ ोसा विकया गया था, र्वोे र्वोै व्यर्वोसायों में शाविमल पाए गए, न विक तस्क ी क े व्यर्वोसाय में, लेविकन हालांविक र्वोे कानून क े विर्वोप ीत र्वोस्तुओं की तस्क ी क ते पाए गए, सिजसक े परि र्णामस्र्वोरूप कानून का उल्लंघन हुआ औ परि र्णामस्र्वोरूप सीमा शुल्क अधि कारि यों द्वा ा जब्त क लिलया गया। 6.[4] हाजी अजीज (उप ोक्त) र्वोाले मामले में विन ा,रि ती (असेसी) ने कस्र्टेम प्राधि का ी द्वा ा अधि गृविहत की गई उसकी सम्पलित्त को छ ु ड़र्वोाने क े लिलए स्र्वोयं द्वा ा जमा क ाये गए जुमा,ने की कर्टेौधित का दार्वोा विकया गया, जो विक इस आ ा प खारि ज विकया गया था विक विर्वोधि क े उल्लंघन प जुमा,ने क े रुप में जमा क ायी गई ाथिश सामान्य व्यर्वोहा क े तहत नहीं क ायी गई थी। सोनी हिंहदुजी क ु शलजी (उप ोक्त) का मामला औ श्री जे. एस. पा क (उप ोक्त), सीमा शुल्क अधि कारि यों ने र्वोै व्यर्वोसायों में लगे क दाताओं से सोना जब्त विकया था। पूर्वो क्त दो मामलों में विन ा,रि ती ने व्यापा /व्यर्वोसाय हाविन क े रूप में जब्त विकए गए सोने क े मूल्य का दार्वोा विकया। यह अथिभविन ा,रि त विकया गया विक विन ा,रि ती व्यर्वोसाय हाविन क े रूप में दार्वोा विकए गए कर्टेौधितयों क े हकदा नहीं हैं। 6.[5] सोनी हिंहदुजी (पूर्वो क्त) क े मामले में, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा विक जब कर्टेौती का दार्वोा विकया जाता है, तो नुकसान र्वोह होना चाविहए जो आत्यस्थिन्तक रूप विन ा,रि ती द्वा ा चलाए गए व्यर्वोसाय से उत्पन्न होता है या उसक े लिलए प्रासंविगक है औ ह प्रका की हाविन नहीं होनी चाविहए सिजसका उसक े व्यर्वोसाय से कोई संबं नहीं है। यह पाया गया विक प्रधितबंधि त सोने की जब्ती एक सामान्य का,र्वोाई थी न की व्यविक्तगत औ इस प्रका, इस शब्द क े सख्त अथ, में एक काय,र्वोाही सी े संपलित्त (यानी तस्क ी विकए गए सोने) क े लिखलाफ की गई का,र्वोाई है औ भले ही अप ा ी को पता न हो, सीमा शुल्क अधि कारि यों को प्रधितबंधि त सोने को जब्त क ने की शविक्त है। 6.[6] जे एस पा क (उप ोक्त) क े मामले में, विन ा,रि ती ने न क े र्वोल एक व्यापारि क हाविन क े रूप में जब्त विकए गए सोने क े मूल्य का दार्वोा विकया, बस्थिल्क अघोविषत स्रोतों से उसकी अनुमाविनत औ विन ा,रि त आय क े विर्वोरुद्ध उक्त हाविन का समायोजन भी विकया। क अधि कारि यों द्वा ा अधि विनयम की ा ा 69/69 ए क े तहत सोने क े मूल्य प क लगाने की मांग की गई थी। हालांविक, बंबई उच्च न्यायालय ने विन ा,रि ती को तस्क ी विकए गए जब्त विकए गए सोने का मालिलक माना औ विन ा,रि ती व्यापारि क नुकसान क े रूप में ऐसे सोने क े मूल्य का दार्वोा क ने का हकदा नहीं था। 6.[7] र्वोत,मान मामले में विन ा,रि ती की जब्त की गई चांदी की छड़ों क े स्र्वोाविमत्र्वो प अब विर्वोर्वोाद नहीं विकया जा सकता है औ यहां तक विक विन ा,रि ती भी इस प विर्वोर्वोाद नहीं क हा है। उस प भी सीमा शुल्क अधि कारि यों सविहत नीचे क े सभी अधि कारि यों द्वा ा समर्वोत~ विनष्कष, हैं।इसलिलए, इस न्यायालय क े समक्ष विर्वोचा ाथ, अगला प्रश्न यह है विक क्या विन ा,रि ती जब्त की गई चांदी की छड़ क े मूल्य की व्यार्वोसाधियक हाविन का दार्वोा क सकता है औ क्या प्या ा सिंसह(उप ोक्त) क े मामले में इस न्यायालय का विनर्ण,य लागू होगा? 6.[8] पूर्वो क्त प्रश्न का उत्त देने क े लिलए, यह देखा जा सकता है विक र्वोत,मान मामले में विन ा,रि ती का मुख्य का बा चांदी का है। उसक े व्यर्वोसाय को चांदी की छड़ों की तस्क ी नहीं कहा जा सकता है जैसा विक प्या ा सिंसह (उप ोक्त) क े मामले में था। जैसा विक इसमें ऊप विन ा,रि ती क े मामले में देखा गया है, र्वोह अन्यथा र्वोै चांदी का व्यापा क हा था औ बड़े लाभ अर्जिजत क ने क े प्रयास में, र्वोह चांदी की तस्क ी में लिलप्त था, जो कानून का उल्लंघन था। मामले क े उस दृविष्टकोर्ण में प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े मामले में इस न्यायालय का विनर्ण,य, सिजस प उच्च न्यायालय द्वा ा आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश पारि त क ते समय भ ोसा विकया गया है औ विन ा,रि ती द्वा ा उस प भ ोसा विकया गया है, मामले क े तथ्यों प लागू नहीं होगा। दूस ी ओ हाजी अज़ीज़ (1961) 41 आईर्टेीआ 350 (एससी) क े मामले में इस न्यायालय का विनर्ण,य औ आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय औ बॉम्बे उच्च न्यायालय क े विनर्ण,य, सिजन्हें प्या ा सिंसह(सुप्रा) में ाजस्र्वो द्वा ा सेर्वोा में लगाया गया था, पू ी ताकत से लागू होंगे।

7. उप ोक्त औ ऊप बताए गए का र्ण को ध्यान में खते हुए औ विन ा,रि ती क े व्यर्वोसाय अथा,त् चांदी क े व्यर्वोसाय को देखते हुए औ चांदी की तस्क ी क े व्यर्वोसाय में नहीं था, प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) क े मामले में इस न्यायालय का विनर्ण,य लागू नहीं होगा औ इसलिलए उच्च न्यायालय द्वा ा पारि त आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश, सीआईर्टेी (ए) क े विन ा, र्ण अधि का ी औ आई. र्टेी. ए. र्टेी. द्वा ा जब्त की गई चांदी की छड़ों को सीमा शुल्क अधि कारि यों द्वा ा व्यार्वोसाधियक हाविन क े रूप में मानने क े े दार्वोे को खारि ज क ते हुए पारि त आदेश को ख़ारि ज औ द्द क विदया जाना चाविहए। 8.[1] उपयु,क्त को ध्यान में खते हुए औ उपयु,क्त का र्ण से र्वोत,मान अपीलें सफल होती हैं। उच्च न्यायालय द्वा ा पारि त आक्षेविपत विनर्ण,य औ आदेश को विन स्त विकया जाता है औ मूल्यांकन अधि का ी, सीआईर्टेी (ए) औ आईर्टेीएर्टेी द्वा ा पारि त आदेश को बहाल विकया जाता है। तदनुसा र्वोत,मान अपीलों को स्र्वोीका विकया जाता है। खच, क े संबं में कोई आदेश नहीं विकया जाता है। (एम आ शाह) (एम. एम. सुंद ेश) नई विदल्ली। 24 अप्रैल, 2023 रि पोर्टेबल भा त का सर्वो च्च न्यायालय सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि का सिसविर्वोल अपील संख्या 7689-90/2022 आयक आयुक्त जयपु अपीलकता, बनाम श्री प्रकाश चंद लुविनया (डी) र्टेीआ. एलआ एस एंड अन्य प्रधितर्वोादी विनर्ण,य एम. एम. सुन्द ेश, न्याया ीश

1. र्वोत,मान अपील ाजस्र्वो विर्वोभाग द्वा ा दाय की गई है, सिजसमें जयपु स्थिस्थत ाजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े उस विनर्ण,य को चुनौती दी गई है, सिजसमें विकसी अर्वोै का बा में हुई हाविन की कर्टेौती क े बीच विर्वोभेद विकया गया है। उपयु,क्त मुद्दे का प ीक्षर्ण एक ऐसे अप ा प विकया जाना है सिजसक े लिलए जुमा,ना या जब्ती हो सकती है।

2. श्री बलबी सिंसह, विर्वोद्वान अधितरि क्त सॉलिलसिसर्टे जन ल, श्री ए.क े. श्रीर्वोास्तर्वो, अपीलकता, क े विर्वोद्वान र्वोरि ष्ठ अधि र्वोक्ता औ प्रधितर्वोाविदयों क े विर्वोद्वान र्वोरि ष्ठ अधि र्वोक्ता श्री अरि जीत प्रसाद को सुना।

3. मे े विर्वोद्वान भ्राता, न्यायमूर्तित एम.आ. शाह द्वा ा विदए गए सुयोग्य विनर्ण,य का अध्ययन विकया है। उच्च न्यायालय क े फ ै सले को पलर्टेने क े अंधितम विनष्कष, से सहमत होते हुए, मैं उप ोक्त पहलू प अपना तक, देना चाहता हूं। मे े विर्वोद्वान भाई द्वा ा पू ी स्पष्टता क े साथ तथ्यों का र्वोर्ण,न विकया जा हा है, क े र्वोल र्वोे जो तक, क े समथ,न में आर्वोश्यक है, दज, विकया जा हा है।

4. ाजस्र्वो खुविफया विनदेशक ने प्रत्यथ~/विन ा,रि ती क े व्यार्वोसाधियक परि स ों की तलाशी ली। इस रि कर्वो ी से चांदी की छड़े प्राप्त हुई। विन ा,रि ती जेर्वो बनाने का व्यर्वोसाय क ता था।

5. प्रधितर्वोादी/विन ा,रि ती ने विन ा, र्ण र्वोष, 1989-1990 क े लिलए अपनी विर्वोर्वो र्णी आयक विनपर्टेान आयोग क े समक्ष एक याधिचका क े बाद दालिखल की। सीमा शुल्क कलेक्र्टे ने आदेश विदनांक 18.12.1990 द्वा ा माल को जब्त क ने औ जुमा,ना लगाने का आदेश विदया। यह इस आ ा प विकया गया था विक विन ा,रि ती द्वा ा माल की तस्क ी की गई थी। विन ा,रि ती द्वा ा यह दार्वोा विकया गया था विक जब्ती क े का र्ण होने र्वोाली हाविन को व्यापारि क हाविन क े रूप में स्र्वोीका विकया जाएगा। व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक होने क े का र्ण कर्टेौती योग्य है। इस तक, को विर्वोधि र्वोत खारि ज क विदया गया क्योंविक र्वोह न तो तस्क ी का का ोबा क हा था औ न ही उसक े पास चांदी थी।प्रधितर्वोादी/विन ा,रि ती द्वा ा उच्च न्यायालय क े समक्ष स्र्वोाविमत्र्वो की दलील दी गई थी, औ इसलिलए, आयक अधि विनयम, 1961 की ा ा 69 ए क े तहत हुई हाविन को लाने में विन ा, र्ण अधि का ी का विनर्ण,य अंधितम हो गया है (सिजसे इसमें इसक े बाद े रूप में संदर्भिभत विकया गया है)।

6. उच्च न्यायालय क े समक्ष, प्रत्यथ~/विन ा,रि ती ने इस न्यायालय क े विनर्ण,य प विनभ, ता खते हुए आयक आयुक्त बनाम प्या ा सिंसह(1980) सप्लीमेंर्टे एससीसी 166 अन्य बातों क े साथ साथ बातों क े साथ-साथ यह दलील दी विक कानून में तस्क ी प प्रधितबं होने क े का र्ण, इसक े तहत होने र्वोाली कोई भी हाविन कर्टेौती क े लिलए उत्त दायी है। पूर्वो क्त तक, को उच्च न्यायालय क े हाथों स्र्वोीक ृ धित विमली, सिजसे हमा े समक्ष ाजस्र्वो द्वा ा आक्षेविपत विकया जाना है। आयक अधि विनयम, 1961 क े प्रासंविगक प्रार्वो ान " 2. परि भाषाएं - इस अधि विनयम में, जब तक विक संदभ, से अन्यथा अपेधिक्षत न हो, x x x (13) ''का ोबा '' क े अंतग,त कोई व्यापा, र्वोाथिर्ण„य या विर्वोविनमा,र्ण या व्यापा, र्वोाथिर्ण„य या विर्वोविनमा,र्ण की प्रक ृ धित का कोई साहसिसक काय, या समुत्थान भी है.”

7. यह प्रार्वो ान एक परि भाषा ा ा होने क े का र्ण क े र्वोल विर्वोथिभन्न गधितविर्वोधि यों को परि भाविषत क ता है सिजन्हें व्यर्वोसाय कहा जा सकता है। अधि विनयम की ा ा 2 (13) 'का ोबा ' की व्यापक परि भाषा देती है। अधि विनयम की ा ा 28 'लाभ औ मुनाफा' शीष,क क े अंतग,त आती है। इसक े तहत विर्वोथिभन्न प्रका की आय को आयक क े दाय े में लाया जाता है। आय, जैसा विक अधि विनयम की ा ा 28 में संदर्भिभत है, की गर्णना अधि विनयम की ा ा 30 से 43 डी क े तहत विन ा,रि त त ीक े से की जानी है, जो तदनुसा अधि विनयम की ा ा 29 क े तहत प्रदान की जाती है। " ा ा 37 सामान्य- (1) कोई भी व्यय (जो ा ा 30 से 36 में र्वोर्भिर्णत प्रक ृ धित का व्यय नहीं है औ जो पूंजीगत व्यय या े व्यविक्तगत व्यय की प्रक ृ धित का नहीं है), जो का ोबा या र्वोृलित्त क े प्रयोजनों क े लिलए पूर्ण,तः या अनन्यतः विन ा,रि त या खच, विकया गया है, ''का ोबा या र्वोृलित्त क े लाभ औ अथिभलाभ'' शीष, क े अ ीन प्रभाय, आय की संगर्णना क ने में अनुज्ञात विकया जाएगा। [स्पष्टीक र्ण 1- शंकाओं को दू क ने क े लिलए यह घोविषत विकया जाता है विक विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकसी ऐसे प्रयोजन क े लिलए विकया गया कोई व्यय, जो अप ा है या जो विर्वोधि द्वा ा प्रधितविषद्ध है, का ोबा या र्वोृलित्त क े प्रयोजन क े लिलए विकया गया समझा नहीं जाएगा औ ऐसे व्यय क े संबं में कोई कर्टेौती या मोक नहीं विदया जाएगा।"

8. अधि विनयम की ा ा 37, व्यर्वोसाय या पेशे क े लाभ या लाभ से आय की गर्णना क ने क े लिलए प्रार्वो ानों में से एक है, जो पूंजीगत व्यय या विन ा,रि ती क े व्यविक्तगत व्यय की प्रक ृ धित क े सिसविर्वोल अपील की ा ा 30 से 36 क े तहत उसिल्ललिखत सभी व्यय को कर्वो क ने का इ ादा खता है। अतः, इस उपबं क े पीछे उद्देश्य बहुत स्पष्ट है क्योंविक इसमें कोई भी व्यय शाविमल है। इस प्रार्वो ान का दूस ा अधि देश यह है विक व्यय को व्यर्वोसाय या पेशे क े लाभ औ लाभ क े रूप में क से प्रभाय, आय क े दाय े में लाने क े लिलए व्यर्वोसाय या पेशे क े लिलए पू ी त ह से औ अनन्य रूप से विन ा,रि त या खच, क ना होगा।

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9. एक अस्पष्टता पैदा हुई विक क्या अधि विनयम की ा ा 2 (13) क े तहत परि भाविषत औ अधि विनयम की ा ा 37 क े तहत विनपर्टेाए गए विकसी भी व्यर्वोसाय में कर्टेौती तब शाविमल होगी जब उक्त व्यय विकसी ऐसे उद्देश्य क े लिलए विकया जाता है जो एक अप ा है या कानून द्वा ा विनविषद्ध है।

10. चूंविक आयक अधि विनयम, 1922 (इसक े बाद "पु ाने अधि विनयम" क े रूप में संदर्भिभत) क े तहत पै ा मर्टेेरि या प्रार्वो ान की व्याख्या द्वा ा एक विर्वोसंगधित बनाई गई है, अथा,त। ा ा 10(1) औ (2), इसलिलए, अधि विनयम की ा ा 37 की व्याख्या-I 01.04.1962 से विर्वोत्त (संख्या 2) अधि विनयम 1998, (1998 का अधि विनयम 21) क े माध्यम से पूर्वो,व्यापी प्रभार्वो क े साथ क़ानून की विकताब में आ गई।.

11. उपयु,क्त स्पष्टीक र्ण को अंतःस्थाविपत क ने क े प्रयोजन को क े न्द्रीय प्रत्यक्ष क बोड, क े विदनांक 23.12.1998 क े परि पत्र सं. 772 द्वा ा स्पष्ट विकया गया था। "अर्वोै खच• का विन ाक र्ण

20. 1 आयक अधि विनयम की ा ा 37 में यह प्रार्वो ान क ने क े लिलए संशो न विकया गया है विक विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकया गया कोई भी व्यय जो एक अप ा है या जो कानून द्वा ा विनविषद्ध है, उसे व्यर्वोसाय या पेशे क े लिलए उपगत नहीं माना जाएगा औ ऐसे व्यय क े संबं में कोई कर्टेौती या भत्ता नहीं विदया जाएगा।इस संशो न क े परि र्णामस्र्वोरूप सु क्षा न, जब न र्वोसूली, हफ्ता, रि श्वत आविद क े भुगतान क े संबं में क ु छ विन ा,रि धितयों द्वा ा विकए गए दार्वोों को व्यापा व्यय क े रूप में अस्र्वोीका क विदया जाएगा।यह अच्छी त ह से तय विकया गया है विक आय की गर्णना में गै कानूनी व्यय एक स्र्वोीकाय, कर्टेौती नहीं है। 20.[2] यह संशो न 1 अप्रैल, 1962 से भूतलक्षी प्रभार्वो से प्रभार्वोी होगा औ तदनुसा, विन ा, र्ण र्वोष, 1962-63 औ बाद क े र्वोष• क े संबं में लागू होगा।"

12. स्पष्टीक र्ण-I विकसी ऐसे प्रयोजन क े लिलए, जो अप ा है या जो विर्वोधि द्वा ा प्रधितविषद्ध है, व्यय क े रूप में हुई हाविन की गर्णना क ने क े लिलए विकसी भी संभाविर्वोत संदेह को दू क ने की घोषर्णा क ता है। यह मानने में कोई कविठनाई नहीं है विक यह स्पष्टीक र्ण स्पष्टर्वोादी प्रक ृ धित का है। शास्थिब्दक व्याख्या क े सिसद्धांत को बहुत स्पष्ट होने क े साथ लागू क ना, आगे संदेह क े लिलए कोई जगह नहीं देना, इस तथ्य क े साथ विक इसक े लिलए कोई चुनौती नहीं है, अथ, बहुत स्पष्ट प्रतीत होता है। यह विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विन ा,रि ती द्वा ा विकए गए विकसी भी व्यय की कर्टेौती को प्रधितबंधि त क ता है जो एक अप ा है या जो कानून द्वा ा विनविषद्ध है।'कोई भी खच,' औ 'कोई भी उद्देश्य' शब्दों प उधिचत ध्यान देना होगा। पुन ार्वोृलित्त मुख्य का विर्वो ायी स्पष्टीक र्ण होने क े का र्ण ध्यान देना आर्वोश्यक है, इस प्रका, स्पष्टीक र्ण प न्याधियक समीक्षा की शविक्त, जो मुख्य उपबं की शंकाओं को स्पष्ट क ने औ दू क ने क े लिलए पेश की गई है, बस्थिल्क सीविमत है।

13. यद्यविप इस उपबं में हाविन का विर्वोविनर्दिदष्ट उल्लेख नहीं क ते हुए व्यय का उल्लेख विकया गया है, तथाविप विकसी को स्र्वोीक ृ त र्वोाथिर्णस्थि„यक व्यर्वोहा औ व्यापा सिसद्धांतों को सेर्वोा में लाना होगा। यविद कोई व्यय को र्वोंश क े रूप में मानता है, तो हाविन एक प्रजाधित बन जाएगी। सभी नुकसान खच, बन जाएंगे, लेविकन इसक े विर्वोप ीत नहीं। बद्रीदास डागा बनाम सीआईर्टेी, (1959) एससीआ 690 में इस न्यायालय द्वा ा विन ा,रि त विकए गए अनुसा व्यापा में होने र्वोाली व्यार्वोसाधियक हाविन औ उसक े लिलए प्रासंविगक एक कर्टेौती योग्य हाविन होगी।इस न्यायालय द्वा ा विन ा,रि त हाविन औ अधि विनयम की ा ा 37 क े तहत व्यय क े प ीक्षर्ण में समानता है। शायद, जब दो अर्वो ा र्णाओं क े लेखांकन उपचा की बात आती है तो इसमें अंत होता है। इस प्रका, यह अथिभविन ा,रि त क ने में कोई कविठनाई नहीं है विक अधि विनयम की ा ा 37 में उसिल्ललिखत 'कोई भी व्यय' शब्द से का बा क े अनुक्रम में होने र्वोाली हाविन भी समाप्त हो जाती है। इसलिलए, मैं अपने विर्वोद्वत भाई क े इस विर्वोचा से सहमत हूं विक अधि विनयम की ा ा 37 औ स्पष्टीक र्ण 1 का र्वोत,मान मामले प प्रभार्वो पड़ेगा. " ा ा 115 बीबीई- ा ा 68 या ा ा 69 या ा ा 69 ए या ा ा 69 बी या ा ा 69 सी या ा ा 69 सी औ 69 डी में उसिल्ललिखत आय प क - (1) जहां विकसी विन ा,रि ती की क ु ल आय, – (क) ा ा 68, ा ा 69, ा ा 69 ए, ा ा 69 बी, ा ा 69 सी या ा ा 69 डी में उसिल्ललिखत आय शाविमल है औ यह ा ा 139 क े तहत दी गई आय की विर्वोर्वो र्णी में परि लधिक्षत होती है या (ख) विन ा, र्ण अधि का ी द्वा ा विन ा,रि त आय में ा ा 68, ा ा 69, ा ा 69 ए, ा ा 69 बी, ा ा 69 सी या ा ा 69 डी, यविद ऐसी आय ा ा (क) क े तहत कर्वो नहीं की गई है, (ख) संदेय आय-क विनम्नलिललिखत का योग होगाः (i) ा ा (क) औ ा ा (ख) में विनर्दिदष्ट आय प साठ प्रधितशत की द से परि कलिलत आय-क की कम, औ (ii)आय-क की र्वोह कम सिजससे विन ा,रि ती प्रभाय, होता यविद उसकी क ु ल आय में से ा ा (i) में विनर्दिदष्ट आय की कम घर्टेा दी गयी होती. (2) इस अधि विनयम में विकसी बात क े होते हुए भी, इस े विकसी उपबं क े अ ीन विन ा,रि ती को उप ा ा (1) क े ा ा (क) औ ा ा (ख) में विनर्दिदष्ट उसकी आय की संगर्णना क ने में विकसी व्यय या मोक या विकसी हाविन क े मुज ा की बाबत कोई कर्टेौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।"

14. अधि विनयम की ा ा 115 बीबीई अधि विनयम की ा ा 68,69 औ 69 ए से 69 डी में उसिल्ललिखत आय प क लगाने से संबंधि त है। यविद कोई मामला अधि विनयम की ा ा 115 बीबीई उप- ा ा (1) क े अंतग,त आता है, तो आयक की द 60% होगी।

15. इस सिसविर्वोल अपील का उद्देश्य खाविमयों को भ ना औ यह सुविनधिश्चत क ना है विक बेविहसाब न या तो उत्पन्न या उपयोग विकया गया है, विर्वोशेष रूप से काले न की प्रक ृ धित में दंधिडत विकया गया है।जब र्वोष, 2012 में यह प्रार्वो ान लागू विकया गया था तो क की द 30 प्रधितशत तय की गई थी। विर्वो ेयक में यह भी कहा गया है विक अधि विनयम की ा ा 68,69 ए से 69 डी क े तहत डीम्ड इनकम की गर्णना क ने में क दाता को विकसी त ह की कर्टेौती की अनुमधित नहीं देने क े पीछे का उद्देश्य क्या है। क की द को 60% तक बाद में संशो न द्वा ा बढ़ाया गया था।

16. ा ा 115 खबीई की उप ा ा (2) एक सर्वो परि ा ा क े साथ प्रा ंभ होती है। विकसी भी व्यय या भत्ते या विकसी भी नुकसान क े मुज ा क े संबं में कर्टेौती से विनपर्टेते समय अधि विनयम में शाविमल विकसी अन्य प्रार्वो ान की तुलना में इसे र्वो ीयता दी जाएगी। दूस े शब्दों में, उप- ा ा (1) क े तहत विकसी विन ा,रि ती की आय की गर्णना क ने में अधि विनयम क े विकसी भी प्रार्वो ान क े तहत इस त ह की कर्टेौती की अनुमधित नहीं दी जाएगी। विर्वोत्त अधि विनयम, 2016 द्वा ा एक संशो न पेश विकया गया है, सिजसमें विकसी भी नुकसान क े मुज ा को शाविमल क ने की अनुमधित नहीं है। उप- ा ा (2) एक बा विफ नुकसान क े बा े में बात नहीं क ती है, लेविकन यह तथ्य विक इसमें 'विकसी नुकसान क े मुज ा' का उल्लेख विकया गया है, अधि विनयम की ा ा 37 क े दाय े औ दाय े प विर्वोचा क ते हुए पहले लिलए गए दृविष्टकोर्ण को दोह ाएगा, विक इस त ह की हाविन को कम से कम कर्टेौती क े लिलए प ीक्षर्ण को लागू क ते समय व्यय क े रूप में पढ़ा जाना चाविहए।स्थिस्थधित को स्पष्ट क ने क े लिलए यह समझना होगा विक संशो न क े र्वोल नुकसान की भ पाई क ने क े विन ा,रि ती क े अधि का क े बा े में बताता है सिजसमें यह पूर्वोा,नुमान लगाया गया है विक हाविन को व्यय क े एक पहलू क े रूप में माना जाना चाविहए।

17. ा ा 115 बीबीई औ अधि विनयम की ा ा 37 (1) क े बीच थोड़ी सी प स्प विक्रया दोनों उपबं ों प अधि क प्रकाश डाल सकती है। यविद विकसी अप ा या प्रधितबंधि त व्यर्वोसाय क े अनुस र्ण में हुई हाविन को अधि विनयम की ा ा 115 बीबीई क े तहत अघोविषत आय, व्यय आविद से संबंधि त आय क े लिलए अधि विनयम की ा ा 68,69 ए से 69 डी क े तहत नहीं लाया जा सकता है, तो यह कभी नहीं कहा जा सकता विक इसे अधि विनयम की ा ा 37 (1) क े तहत लाया जाएगा, इस तथ्य क े बार्वोजूद विक दोनों प्रार्वो ानों क े पीछे का उद्देश्य क ु छ संबं क े साथ अधितव्यापी है। ा ा 115 बीबीई बाद का कानून है, ा ा 37 (1) का सही मायनों मे अथ, को उसी आ ा प समझा जा सकता है।

18. उपबं ों को समझने क े पश्चात्, मैं अब उन विर्वोविनश्चयों प विर्वोचा करू ं गा जो अधि र्वोक्ता परि षद् द्वा ा अधि विनयविमत उपबं ों क े विनर्वो,चन क े संबं में विकए जाते हैं।

19. बविद्रदास डागा बनाम सीआईर्टेी, (1959) एससीआ 690 19.[1] यह न्यायालय विन ा,रि ती क े विकसी कम,चा ी द्वा ा गबन क े का र्ण हुई हाविन प विर्वोचा क हा था। कर्टेौती क े लिलए विकए गए दार्वोे प पु ाने अधि विनयम की ा ा 10 (2) की व्याख्या क ते समय, सिजसक े लिलए कोई विर्वोथिशष्ट प्रार्वो ान नहीं था, स्र्वोीक ृ त र्वोाथिर्णस्थि„यक प्रथाओं औ व्यापा सिसद्धांतों प भ ोसा विकया गया था। परि र्णामतः, यह अथिभविन ा,रि त विकया गया विक कर्टेौती ऐसे मामले में अनुज्ञेय थी जहां या तो कोई विनषे व्यक्त या विर्वोर्वोधिक्षत नहीं है। इस प्रका, न्यायालय ने यह स्पष्ट विकया है विक विकसी भी विनषे की अनुपस्थिस्थधित में में, जैसा विक ऊप कहा गया है, हाविन की सिसविर्वोल अपील तब तक अनुज्ञेय है जब तक यह व्यर्वोसाय क े संचालन से सी े उद्भूत होता है, क्योंविक यह उसक े लिलए प्रासंविगक है। दूस े शब्दों में, इसमें विकसी भी प्रका की हाविन शाविमल नहीं है, भले ही इसका व्यर्वोसाय क े साथ क ु छ संबं हो, यविद इसे व्यर्वोसाय क े लिलए आकस्थिस्मक नहीं कहा जा सकता है। 19.[2] न्यायालय ने आगे कहा विक व्यर्वोसाय क े उद्देश्य से भुगतान विकए जा हे कम,चा ी को र्वोेतन का भुगतान सामान्य प्रार्वो ान क े तहत कर्टेौती योग्य है, इसलिलए तार्दिकक रूप से विकसी कम,चा ी की का,र्वोाई से होने र्वोाली कोई भी हाविन व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक होगी। 19.[3] पूर्वो क्त प विर्वोचा क ते हुए, यह कहा जा सकता है विक पु ाने अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xv) क े तहत सिसविर्वोल अपील में व्यय की कर्टेौती क े लिलए विन ा,रि त प ीक्षर्ण औ र्वोाथिर्णस्थि„यक प्रथाओं औ व्यापा सिसद्धांतों क े आ ा प नुकसान की कर्टेौती क े लिलए प ीक्षर्ण क े बीच समानता है। इसलिलए यह विनर्ण,य अधि विनयम की ा ा 37 की उप ोक्त व्याख्या का समथ,न क ता है। 19.[4] प्रासंविगक पै ाः "यह प्रश्न विक क्या विकसी अथिभकता, या कम,चा ी द्वा ा गबन विकए गए न को एस क े अ ीन विकसी का बा क े लाभ की संगर्णना क ने में कर्टेौती क े रूप में अनुज्ञेय है। अधि विनयम की ा ा 10 भा तीय न्यायालयों क े समक्ष बा -बा विर्वोचा क े लिलए आई है औ विनर्ण,य काफी समान नहीं हे हैं। उन प चचा, क ने से पहले, यह आर्वोश्यक है विक हम उन सिसद्धांतों की जांच क ें जो कानून में प्रश्न क े विन ा, र्ण क े लिलए लागू होते हैं। े समथ,न में तीन आ ा पेश विकए गए हैंः (1) यह विक गबन क े का र्ण होने र्वोाली हाविन ा ा 3 क े अ ीन अनुज्ञेय डूबंत ऋर्ण है। अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xi) क े अनुसा यह एक व्यार्वोसाधियक व्यय है जो ा ा 10 (2) क े अंतग,त आता है।अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xv) क े तहत लाभ की गर्णना क ते समय यह ध्यान में खा जाना चाविहए विक यह एक व्यापारि क हाविन है।अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े आ ा प, प्राधि कारि यों ने लगाता अथिभविन ा,रि त विकया है विक ा ा 4 क े अ ीन कर्टेौती स्र्वोीकाय, नहीं है। अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xi), औ हमा े विर्वोचा में यह सही है, एक ऋर्ण पार्दिर्टेयों क े बीच एक अनुबं से उत्पन्न होता है, व्यक्त या विनविहत, औ जब कोई एजेंर्टे अपने विनयोक्ता से ोखा ड़ी में औ उसक े प्रधित अपने दाधियत्र्वोों क े उल्लंघन में पैसे का गलत इस्तेमाल क ता है, तो यह नहीं कहा जा सकता है विक र्वोह विकसी भी समझौते क े तहत उस न का ऋर्णी है।विनःसंदेह र्वोह उस ाथिश की भ पाई क े लिलए कानूनन उत्त दायी है, लेविकन यह विकसी अनुबं, व्यक्त या विनविहत, से उत्पन्न होने र्वोाला दाधियत्र्वो नहीं है न ही इससे कोई फक, पड़ता है विक व्यर्वोसाय क े खातों में गबन की गई ाथिशयों को डेविबर्टे क े रूप में विदखाया जाता है, उनक े लिलए प्राप्त ाथिश, यविद कोई हो, क्र े धिडर्टे क े रूप में, औ शेष ाथिश को अंततः बट्टे खाते में डाल विदया जाता है। ये क े र्वोल खातों को समायोसिजत क ने र्वोाली जन,ल प्रविर्वोविष्टयां हैं औ संविर्वोदात्मक देयता का आयात नहीं क ती हैं न ही ा ा 10 (2) (xv) क े तहत कर्टेौती का दार्वोा स्र्वोीका विकया जा सकता है, क्योंविक जो न कम,चा ी द्वा ा विबना प्राधि का क े औ स्र्वोामी क े कपर्टे में का ोबा से विनकाला जाता है, उसे विकसी भी त ह से व्यर्वोसाय क े लिलए पू ी त ह से लगाया गया या खच, विकया गया व्यय नहीं कहा जा सकता। अतः यह विर्वोर्वोाद इस प्रश्न तक सीविमत हो जाता है विक क्या विकसी कम,चा ी द्वा ा गबन द्वा ा से गंर्वोाई गई ाथिश एक व्यापारि क हाविन है सिजसे एस 10 (1) क े अ ीन विकसी का बा क े लाभ की गर्णना क ने में कार्टेा जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है विक जहां ा ा 10 (1) विकसी व्यापा क े लाभ या लाभ प प्रभा लगाती है, र्वोहीं इसमें यह नहीं बताया गया है विक उन लाभों की गर्णना क ै से की जाए। ा ा 10 (2) में उन विर्वोथिभन्न मदों की गर्णना की गई है जो कर्टेौधितयों क े रूप में स्र्वोीकाय, हैं, लेविकन यह अच्छी त ह से तय विकया गया है विक र्वोे सभी भत्तों क े व्यापक नहीं हैं जो ा ा 10 क े तहत क योग्य लाभ का पता लगाने क े लिलए विकए जा सकते हैं। आयक आयुक्त बनाम धिचतनर्वोीस [(1932) एल. आ. 59. आइए 290,296,297] र्वोाले मामले में विनर्ण,य का विबन्दु यह था विक क्या अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े अ ीन डूबंत ऋर्ण की कर्टेौती की जा सकती है, अधि विनयम में, जैसा विक तब था, ऐसे ऋर्ण की कर्टेौती क े लिलए ा ा 10 (2) (xi) क े समरूप कोई उपबं नहीं था। इस प्रश्न का सका ात्मक उत्त देते हुए लाड, सेल ने कहाः "हालांविक यह अधि विनयम कहीं भी व्यर्वोसाय क े डूबे हुए ऋर्णों की कर्टेौती को अधि क ृ त नहीं क ता है, इस त ह की कर्टेौती अविनर्वोाय, रूप से स्र्वोीकाय, है।विकसी व्यर्वोसाय क े संबं में आयक में जो प्रभाय, हैं, र्वोे एक र्वोष, क े लाभ औ लाभ हैं औ एक र्वोष, क े लाभ औ लाभ की ाथिश का आकलन क ने में आर्वोश्यक रूप से सभी हाविनयों का आकलन विकया जाना चाविहए, अन्यथा आप र्वोास्तविर्वोक लाभ औ लाभ प नहीं पहुंच पाएंगे।" इसी प्रका यह भी विनधिश्चत है विक ऐसे लाभ औ अथिभलाभ सिजन प ा ा 10 (1) क े अ ीन क लगाया जाना है, र्वोे सा ा र्ण र्वोाथिर्णस्थि„यक सिसद्धांतों क े अनुसा समझे जाते हैं।ग्रेशम लाइफ एश्यो ेंस सोसाइर्टेी बनाम स्र्टेाइल्स [(1892) एसी 309,315:3 र्टेीसी 185,188] में लॉड, हाल्सब ी ने कहा, 'लाभ' शब्द को इस अथ, में समझा जाना चाविहए विक कोई भी व्यापा ी इसे गलत नहीं समझेगा। इन विर्टेप्पथिर्णयों का उल्लेख क ते हुए लॉड, मैकविमलन ने पांधिडचे ी ेलर्वोे क ं पनी बनाम आयक आयुक्त [(1931) एलआ 58 आइए 239,252] में कहाः "सुसंगत विर्वो ान में अंत क े का र्ण भा तीय आयक मामलों प विर्वोचा क ने में अंग्रेजी अधि कारि यों का उपयोग क े र्वोल सार्वो ानी क े साथ विकया जा सकता है, लेविकन ग्रेशम लाइफ एश्यो ेंस सोसाइर्टेी बनाम स्र्टेाइल्स [(1892) एसी 309,315:3 र्टेीसी 185,188] में लॉड, चांसल हाल्सब ी द्वा ा विन ा,रि त सिसद्धांत, अंग्रेजी क प्रर्णाली की विर्वोशेषताओं से अप्रभाविर्वोत सामान्य अनुप्रयोग है।" परि र्णाम यह होता है विक जब विकसी कर्टेौती क े लिलए कोई दार्वोा विकया जाता है सिजसक े लिलए ा ा 10(2) में कोई विर्वोथिशष्ट प्रार्वो ान नहीं है। यह इस बात प विनभ, क ता है विक क्या स्र्वोीक ृ त र्वोाथिर्णस्थि„यक व्यर्वोहा औ व्यापा सिसद्धांतों को ध्यान में खते हुए यह कहा जा सकता है विक यह व्यर्वोसाय क े संचालन से उत्पन्न हुआ है या नहीं। यविद यह स्थाविपत हो जाता है तो कर्टेौती की अनुमधित दी जानी चाविहए, बशत विक विनषे में इसक े लिखलाफ कोई स्पष्ट या विर्वोर्वोधिक्षत विनषे न हो। ये शासी सिसद्धांत हैं, यह विन ा,रि त क ने क े लिलए विक क्या विकसी व्यर्वोसाय में विकसी कम,चा ी द्वा ा गबन क े परि र्णामस्र्वोरूप होने र्वोाला नुकसान ा ा एस 10 (1) क े तहत कर्टेौती क े रूप में स्र्वोीकाय, है। इस प विर्वोचा विकया जाना चाविहए विक क्या यह व्यर्वोसाय क ने से उत्पन्न होता है औ इसक े लिलए प्रासंविगक है। प्रश्न को एक व्यर्वोसायी क े रूप में देखते हुए, यह बनाए खना मुस्थिश्कल लगता है विक ऐसा नहीं है। एक व्यर्वोसाय विर्वोशेष रूप से जैसे विक क योग्य लाभ अर्जिजत क ने क े लिलए गर्णना की जाती है, एजेंर्टेों, क ै थिशय, क्लक, औ चप ासी क े माध्यम से चलाया जाता है। उन्हें भुगतान विकया गया र्वोेतन औ पारि श्रविमक एस 10 (2) (xv) क े तहत स्र्वोीकाय, है का ोबा क े लिलए विकए गए खच, क े रूप में। यविद एजेंर्टेों की विनयुविक्त व्यर्वोसाय क े संचालन क े लिलए प्रासंविगक है, तो इसे तार्दिकक रूप से इस बात का पालन क ना चाविहए विक ऐसे ोजगा क े का र्ण होने र्वोाला नुकसान भी व्यर्वोसाय क े संचालन क े लिलए प्रासंविगक है। मानर्वो स्र्वोभार्वो क े का र्ण यह असंभर्वो है विक कोई कम,चा ी ऐसे कम,चा ी क े रूप में अपनी स्थिस्थधित का लाभ उठाता है औ अपने विनयोक्ता की विनधि यों का दुर्दिर्वोविनयोग क ता है औ ऐसे दुर्दिर्वोविनयोग से होने र्वोाली हाविन को व्यर्वोसाय क ने से उत्पन्न होने औ उसक े आनुषंविगक होने की संभार्वोना से इंका विकया जा सकता है। औ इस त ह व्यापा क े सामान्य र्वोाथिर्णस्थि„यक सिसद्धांतों क े अनुसा इसे विनपर्टेाया जाएगा। इसक े साथ-साथ इस बात प भी जो विदया जाना चाविहए विक र्वोह हाविन सिजसक े लिलए ा ा 10 (1) क े अंतग,त कर्टेौती की जा सकती है, ऐसा होना चाविहए जो सी े व्यर्वोसाय क े संचालन से उत्पन्न होता है औ उसक े लिलए प्रासंविगक है औ विन ा,रि ती को कोई नुकसान नहीं होता है, भले ही इसका उसक े व्यर्वोसाय से क ु छ संबं हो। उदाह र्ण क े लिलए, यविद एक चो ातों ात विकसी साहूका क े परि स में सें लगाता है औ उसमें सु धिक्षत न लेक भाग जाता है, तो इसका परि र्णाम उसक े पास उ ा देने क े लिलए उपलब् संसा नों की कमी क े रूप में होना चाविहए औ उस अथ, में हाविन को व्यार्वोसाधियक हाविन माना जाना चाविहए, लेविकन यह व्यर्वोसाय चलाने में होने र्वोाली हाविन नहीं है, बस्थिल्क संपलित्त क े सभी मालिलकों को उजाग होती है चाहे र्वोे व्यर्वोसाय क ते हों या नहीं। ऐसे मामले में हाविन विन ा,रि ती प का ोबा क ने र्वोाले व्यविक्त क े रूप में नहीं बस्थिल्क विनधि यों क े स्र्वोामी क े रूप में आती है। यह अंत, हालांविक ठीक है, बहुत महत्र्वोपूर्ण, है क्योंविक यह इस बात प विनभ, क ेगा विक क्या ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती की जा सकती है या नहीं।" (जो विदया गया)

20. हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, बनाम सीआईर्टेी, (1961) 2 एससीआ

20. 1 उपयु,क्त मामले में इस न्यायालय की तीन न्याया ीशों की न्यायपीठ दो प्रमुख मुद्दों से संबंधि त थी सिजनक े बा े में हम इस समय विर्वोचा क हे हैं। स्पष्ट शब्दों में यह माना गया है विक एक व्यय कर्टेौती योग्य नहीं है जब तक विक यह व्यापा में र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन न हो। कानून क े लिलए विकए गए जुमा,ने को असामान्य घर्टेना होने क े अलार्वोा व्यर्वोसाय चलाने में व्यार्वोसाधियक नुकसान क े रूप में कभी भी नहीं कहा जा सकता है, इसक े परि र्णामस्र्वोरूप, इसकी कर्टेौती नहीं की जा सकती है। यह एक व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प पड़ता है। हाविन औ े व्यर्वोसाय क े बीच मात्र संबं कभी भी एकमात्र का क नहीं हो सकता है। सी े शब्दों में कहें तो, इस न्यायालय ने स्थिस्थधित को पू ी त ह से स्पष्ट क विदया है विक एक दंड को कभी भी व्यर्वोसाय क े लिलए एक र्वोाथिर्णस्थि„यक व्यय/हाविन या लाभ अर्जिजत क ने क े लिलए विकए गए संविर्वोत र्ण क े रूप में कभी नहीं समझा जा सकता है.यह भी नोर्टे विकया गया विक जब्ती एक सामान्य प्रविक्रया है औ इसलिलए, र्वोस्तुओं प जुमा,ना लगाया जाता है। र्वोह स्थिस्थधित होने क े का र्ण, विकसी भी स्थिस्थधित में, एक विन ा,रि ती अधि ह र्ण/शास्थिस्त क े मामले में नुकसान की कर्टेौती का दार्वोा नहीं क सकता है, जैसा विक व्यर्वोसाय क ने या उसक े आनुषंविगक होने से उत्पन्न होता है।

20. 2 प्रासंविगक पै ाः "अपीलकता, फम, क े र्वोकील ने अपने तक, क े समथ,न में मकबूल हुसैन बनाम बॉम्बे ा„य आविद [(1953) एससीआ 730] औ पृ.742 जहां न्यायमूर्तित भगर्वोती ने कहाः "इसमें कोई संदेह नहीं है विक जब्ती उन शास्थिस्तयों में से एक है जो सीमा शुल्क अधि का ी लगा सकते हैं, लेविकन यह एक मुकदमे में काय,र्वोाही की तुलना में सामान्य काय,र्वोाही की प्रक ृ धित में अधि क है, इसका उद्देश्य उल्लंघन क ने र्वोाले सामानों को जब्त क ना है, सिजनसे कानून क े प्रार्वो ानों क े विर्वोप ीत विनपर्टेा गया है औ जब्ती क े संबं में भी माल क े मालिलक को ऐसे जुमा,ने क े बदले में भुगतान क ने का विर्वोकल्प विदया गया है जो अधि का ी उधिचत समझे।यह सब समुद्री सीमा शुल्क की र्वोसूली क े प्रर्वोत,न औ उसकी सु क्षा क े लिलए है।" इसी त ह क े अर्वोलोकन एस.क े. दास, जे. द्वा ा शेर्वोपूजन ाय इंद्रसं ाय लिलविमर्टेेड बनाम सीमा शुल्क कलेक्र्टे औ अन्य [(1959) एससीआ 821 पृ. 836] में विकया गया, जहां यह कहा गया था विक विनयम में का,र्वोाई औ एक मुकदमे में काय,र्वोाही क े बीच अंत विकया जाना चाविहए औ यह विक माल की जब्ती एक विनयम की काय,र्वोाही है औ दंड र्वोस्तुओं क े लिखलाफ लागू विकया जाता है चाहे अप ा ी ज्ञात हो या न हो। इस न्यायालय द्वा ा अन्य दो मामलों में लिलया गया दृविष्टकोर्ण अपीलकता, अथा,त लिलयो ॉय फ्र े बनाम अ ीक्षक, सिजला जेल, अमृतस [(1958) एससीआ 822] औ थॉमस डाना बनाम पंजाब ा„य [1959 सप्लीमेंर्टे (1) एससीआ 274, पृ.298) एक ही है। डाना क े मामले में [(1959) एस. सी. आ. 821 पृ. 836] सुब्बा ार्वो, न्यायमूर्तित, ने पृ 298 प कहा: "यविद संबंधि त प्राधि का ी जब्ती का आदेश देता है तो यह क े र्वोल एक सामान्य काय,र्वोाही है औ र्वोस्तुओं क े लिखलाफ जुमा,ना लगाया जाता है। दूस ी ओ, यविद यह संबंधि त व्यविक्त क े लिखलाफ जुमा,ना लगाता है, तो यह उस व्यविक्त क े लिखलाफ एक काय,र्वोाही है औ उसे अप ा क ने क े लिलए दंधिडत विकया जाता है। इससे पता चलता है विक जब्ती क े मामले में उस व्यविक्त क े लिखलाफ कोई अथिभयोजन या उस प कोई जुमा,ना नहीं लगाया जाता है।" मकबूल हुसैन क े मामले में [(1953) एस. सी. आ. 730] विनर्ण,य क े लिलए प्रश्न यह था विक क्या समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम क े तहत काय,र्वोाही विकए जाने क े बाद विकसी आ ोपी व्यविक्त प मुकदमा चलाया जा सकता है औ दोह े खत े की दलील प भ ोसा विकया जा सकता है या नहीं, यह अथिभविन ा,रि त विकया गया था विक र्वोह नहीं क सकता है। शेर्वोपुजान ाय क े मामले में [(1959) एस. सी. आ. 821, पृ.836] यह दलील दी गई विक विर्वोदेशी मुद्रा विर्वोविनयमन अधि विनयम क े तहत काय,र्वोाही विकए जाने क े बाद सीमा शुल्क अधि कारि यों को समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम क े तहत कोई का,र्वोाई क ने की अनुमधित नहीं है। अन्य दो मामले मकबूल हुसैन मामले [(1953) एससीआ 730] क े समान थे। अब हमा े सामने जो विर्वोर्वोाद उठ हा है, र्वोह विबल्क ु ल अलग है। र्वोत,मान मामले में जो विनर्ण,य लिलया जाना है र्वोह यह है विक क्या अपीलकता, फम, द्वा ा भुगतान विकया गया दंड आयक अधि विनयम की ा ा एस 10 (2) (xv) क े भीत एक स्र्वोीकाय, कर्टेौती थी, सिजसमें विनम्नलिललिखत प्रार्वो ान विकए गए हैंः ा ा 10.(2) (xv) '' कोई व्यय (जो पूंजीगत व्यय या े व्यविक्तगत व्यय की प्रक ृ धित का नहीं है) जो ऐसे का ोबा, र्वोृलित्त या व्यर्वोसाय क े लिलए पूर्ण,तः औ अनन्यतः लगाया गया है या खच, विकया गया है।" ऐसे का बा क े लिलए" "शब्दों का अथ, इनलैंड ेर्वोेन्यू बनाम एंग्लो ब्रेहिंर्वोग क ं पनी लिलविमर्टेेड [(1925) 12 र्टेीसी 803,813] में व्यापा को जा ी खने औ इसे भुगतान क ने क े उद्देश्य से लगाया गया है। भत्ते की आर्वोश्यक शत, यह है विक व्यय को ऐसे व्यर्वोसाय क े लिलए पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से खच, विकया जाना चाविहए। इस मामले को तय क ने में, क ु छ अंग्रेजी मामलों में विनर्ण,यों का संदभ, उपयोगी होगा। अंतदशीय ाजस्र्वो आयुक्त बनाम र्वोानस एंड क ं पनी [(1919) 2 क े बी 444] क े मामले में, तेल विनया,तकों का व्यापा क ने र्वोाले विन ा,रि ती प आदेशों औ उद्घोषर्णाओं क े भंग क े लिलए समुद्री सीमा शुल्क समेकन अधि विनयम क े तहत अर्टेॉन~ जन ल द्वा ा प्रदर्भिशत एक जानका ी प जुमा,ना लगाने क े लिलए मुकदमा विकया गया था। विन ा,रि ती द्वा ा £ 2000 क े कम विकए गए जुमा,ने का भुगतान क ने प सहमधित जताने प मामले का विनपर्टेा ा विकया गया।विन ा,रि तीयों की नैधितक जर्वोाबदेही प लगाए गए सभी आ ोपों को र्वोापस ले लिलया गया। सिजस अधि विनयम क े तहत यह जानका ी दज, की गई थी औ जुमा,ना अदा विकया गया था, उसक े प्रार्वो ान भा तीय समुद्र क े समान थे। इस ाथिश को उधिचत कर्टेौती नहीं माना गया क्योंविक भा तीय अधि विनयम की ा ा 10(2)(xv) क े समान प्रार्वो ान क े भीत होने क े लिलए नुकसान र्वोाथिर्णस्थि„यक सोच क े दाय े में औ र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान की प्रक ृ धित का होना चाविहए। ॉलेर्टे, न्यायमूर्तित ने स्र्टेpॉन्ग एंड क ं पनी बनाम र्वोूडीफील्ड [(1906) एसी 448] र्वोाले मामले में लाड, लो बन,, एल. सी. क े अर्वोलोकन प भ ोसा क ते हुए पृष्ठ 452 प कहाः "लेविकन मुझे ऐसा लगता है विक इस त ह क े दंडात्मक दाधियत्र्वो को व्यापा से जुड़ी या उससे उत्पन्न हाविन नहीं माना जा सकता है। मैं समझता हूं विक विकसी व्यापा से संबंधि त या उससे उत्पन्न होने र्वोाली हाविन विकसी भी त ह से ऐसी हाविन क े ब ाब होनी चाविहए जो अनुमेय हो औ जो र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन क े रूप में हो। मे ा इ ादा यह नहीं है विक यह एक विर्वोस्तृत परि भाषा हो, लेविकन मुझे नहीं लगता विक यह कहना संभर्वो है विक जब कोई जुमा,ना, जो र्वोत,मान मामले में दंड क े ब ाब है, एक व्यापारि क विनकाय प लगाया गया है, तो यह कहा जा सकता है विक इस विनयम क े अथ, में व्यापा से जुड़ा हुआ, या उससे उत्पन्न होने र्वोाला नुकसान है।" कानून क े इस बयान को इनलैंड ेर्वोेन्यू कविमश्न बनाम अलेक्जेंड र्वोॉन ग्लेन एंड क ं पनी लिलविमर्टेेड [(1920) 2 क े बी 553] में अनुमोविदत विकया गया था, जहां भी इसी त ह की परि स्थिस्थधितयों में विन ा,रि ती की सहमधित से 3,000 पाउंड की पेनल्र्टेी का भुगतान विकया गया था औ लाभ प पहुंचने में जुमा,ना औ लागत का कर्टेौती क े रूप में दार्वोा विकया गया था। विर्वोशेष आयुक्तों ने पाया था विक जुमा,ना औ लागत विन ा,रि ती द्वा ा अपने व्यापा को चलाने क े दौ ान खच, की गई थी औ इसलिलए प्रासंविगक कर्टेौती थी औ स्र्वोीकाय, कर्टेौती थी। न्यायमूर्तित, ॉलेर्टे ने एक संदभ, प इसे एक गै -कर्टेौती योग्य र्वोस्तु माना।अपील न्यायालय द्वा ा अपील विकए जाने प इस विनर्ण,य की पुविष्ट की गई। लॉड, स्र्टेन,डेल, एम. आ. का यह मत था विक काय,र्वोाविहयां तकनीकी रूप से आप ाधि क थीं या नहीं, यह महत्र्वोहीन है। जो पैसा विदया गया था, उसे जुमा,ने क े रूप में भुगतान विकया गया था औ इससे कोई फक, नहीं पड़ता विक सूचना में इसे जब्ती कहा गया था। उस मामले में विन ा,रि धितयों द्वा ा यह तक, विदया गया था विक उनक े लिलए कोई नैधितक दोष नहीं लगाया गया था औ इससे कोई फक, नहीं पड़ता विक कानून क े उल्लंघन क े परि र्णामस्र्वोरूप खच, विकया गया था या यह एक अर्वोै काय, क ने क े लिलए जुमा,ना था। पृष्ठ 565 प लाड, स्र्टेन,डेल ने कहाः "अब यहां क्या स्थिस्थधित है? यह व्यर्वोसाय विबना विकसी कानून क े पू ी त ह से अच्छी त ह से चलाया जा सकता था। यह जुमा,ना कानून क े का र्ण लगाया गया था औ मुझे नहीं लगता विक यह उस खच, से अधि क है सिजसका भुगतान स्र्टेpॉन्ग एंड क ं पनी बनाम र्वोूडीफील्ड [(1906) एसी 448] में विकया जाना था, जो इस त ह क े उद्देश्य क े लिलए विन ा,रि त विकया गया था या खच, विकया गया था।" र्वोॉरिं गर्टेन, एल. जे. ने पृष्ठ 569 प कहाः "यह एक ऐसी ाथिश है सिजसका भुगतान व्यापा क ने र्वोाले व्यविक्तयों को क ना पड़ा है क्योंविक इसक े संचालन में उन्होंने इस त ह से काम विकया है विक र्वोे खुद को इस जुमा,ने क े लिलए उत्त दायी ठह ाते हैं।यह एक र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं है, औ मुझे लगता है विक जब अधि विनयम से संबंधि त नुकसान की बात क ता है या यह एक र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन नहीं है, औ मुझे लगता है विक जब अधि विनयम इस त ह क े व्यापा से संबंधि त या उत्पन्न होने र्वोाली हाविन की बात क ता है तो इसका मतलब व्यापा से संबंधि त या उत्पन्न होने र्वोाली व्यार्वोसाधियक हाविन है।" स्र्टेpॉन्ग एंड क ं पनी बनाम र्वोुधिडफील्ड [(1906) एसी 448] में एक श ाब बनाने र्वोाली क ं पनी क े पास एक लाइसेंस प्राप्त घ था सिजसमें र्वोे इन-कीपस, का व्यर्वोसाय क ते थे। र्वोे एक धिचमनी क े विग ने से आगंतुक को हुई चोर्टेों क े का र्ण नुकसान का भुगतान क ने क े लिलए उत्त दायी थे।इस ाथिश को लाभ की गर्णना में कर्टेौती क े रूप में स्र्वोीकाय, नहीं माना गया था। लॉड, लो बन,, एल.सी. ने अपने भाषर्ण में कहा विक कोई भी ाथिश तब तक नहीं कार्टेी जा सकती जब तक विक यह पैसा पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से इस त ह क े लिलए विन ा,रि त या खच, नहीं विकया जाता है औ क े र्वोल इस अथ, में नुकसान की कर्टेौती की जा सकती है विक र्वोे र्वोास्तर्वो में व्यापा क े लिलए प्रासंविगक थे औ उन्हें घर्टेाया नहीं जा सकता है यविद र्वोे मुख्य रूप से विकसी अन्य व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक थे या व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में व्यापा ी प पड़ते थे। लाड, डेर्वोी ने कहाः "मुझे लगता है विक सिजन संविर्वोत र्णों की अनुमधित दी गई है र्वोे इस उद्देश्य क े लिलए विकए गए हैं। यह पया,प्त नहीं है विक संविर्वोत र्ण व्यापा क े दौ ान विकया जाता है, या उससे उत्पन्न होता है, या व्यापा से जुड़ा होता है या व्यापा क े लाभ से विकया जाता है। यह लाभ कमाने क े उद्देश्य से विकया जाना चाविहए।" र्वोॉन ग्लेन [(1920) 2 क े बी 553] र्वोाले मामले में पृष्ठ 566 प लाड, स्र्टेन,डेल क े विनर्ण,य का विनम्नलिललिखत अंश, सिजसमें से हम पहले ही उद्धृत क चुक े हैं, कानून क े उल्लंघन क े परि र्णामस्र्वोरूप जुमा,ना लगाने क े प्रभार्वो को दशा,ता है: "व्यापा क े दौ ान इस क ं पनी ने कानून का उल्लंघन विकया। जैसा विक मैं कहता हूं, इस बात प सहमधित हुई है विक र्वोे इस अथ, में क ु छ भी गलत क ने का इ ादा नहीं खते थे विक र्वोे स्र्वोेच्छा से औ जानबूझक इन सामानों को दुश्मन क े विठकाने प भेज हे थे; लेविकन उन्होंने कानून का उल्लंघन विकया, औ कानून क े उस उल्लंघन क े लिलए उन प जुमा,ना लगाया गया। जैसा विक मुझे लगता है, यह व्यर्वोसाय से जुड़ा नुकसान नहीं था, बस्थिल्क क ं पनी प व्यविक्तगत रूप से एक जुमा,ना लगाया गया था, जहां तक विक क ं पनी को एक व्यविक्त माना जा सकता है, कानून क े लिलए जो विक उसने विकया था।बहुत सर्टेीक भाषा में भेद क ना शायद थोड़ा मुस्थिश्कल है, लेविकन मुझे लगता है विक व्यापा में व्यार्वोसाधियक नुकसान औ विकसी व्यविक्त या क ं पनी प कानून क े लिलए लगाए गए दंड क े बीच अंत है जो उन्होंने उस व्यापा में विकया है। यही का र्ण है विक मैं सोचता हूं विक इस मामले में ोलेर्टे का विनर्ण,य औ इनलैंड ेर्वोेन्यू कविमश्न बनाम र्वोानस एंड क ं पनी [(1919) 2 क े बी 444] में उनका पूर्वो, विनर्ण,य दोनों ही सही थे औ इस अपील को खच, क े साथ खारि ज क विदया जाना चाविहए।" स्पोफोथ, औ हिंप्रस बनाम ग्लाइड [(1945) 26 र्टेीसी 310] में विन ा,रि ती चार्टे,ड, एकाउंर्टेेंट्स की एक फम, थी, सिजसने पुलिलस अदालत में भागीदा ों में से एक क े सफल बचार्वो क े संबं में भुगतान की गई क ु छ कानूनी लागतों क े लिलए कर्टेौती का दार्वोा विकया था। विन ा,रि ती फम, ने क ु छ काय,र्वोाविहयों से संबंधि त मामलों क े संबं में कानूनी सलाह भी मांगी। विन ा,रि ती फम, क े लिखलाफ सम्मन जा ी विकए गए थे लेविकन अंततः खारि ज क विदए गए थे। विन ा,रि ती ने तक, विदया विक काय,र्वोाही क े संबं में विकए गए सभी खच, "पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से" अपीलकता, क े लिलए विन ा,रि त या खच, विकए गए थे औ इसलिलए कर्टेौती क े लिलए स्र्वोीकाय, थे। विर्वोशेष आयुक्त ने विन ा,रि ती क े लिखलाफ अथिभविन ा,रि त विकया था सिजसे न्यायालय द्वा ा ब क ा खा गया था। लाड, डेर्वोी द्वा ा स्र्टेpॉन्ग एंड क ं पनी बनाम र्वोुडफील्ड [(1906) एसी 448] मामले में अधि कथिथत कसौर्टेी को लागू विकया गया औ उस कसौर्टेी को लागू क ते हुए यह अथिभविन ा,रि त विकया गया विक विर्वोधि क सलाह प्राप्त क ने क े व्यय क े सिसर्वोाय अन्य व्यय स्र्वोीकाय, नहीं थे। फ ै ी बनाम हॉल [(1947) 28 र्टेीसी 200] एफ में, एक चीनी दलाल प मानहाविन क े लिलए उच्च न्यायालय में मुकदमा चलाया गया था औ न्यायालय ने यह अथिभविन ा,रि त विकया था विक एफ ने दुभा,र्वोनापूर्ण, रूप से काय, विकया था औ विर्वोशेषाधि का का बचार्वो नहीं हो सकता था औ उसक े लिखलाफ हजा,ना विदया। एफ ने एक स्र्वोीकाय, कर्टेौती क े रूप में हजा,ने की ाथिश का दार्वोा क ने की मांग की, यह तक, देते हुए विक यह पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से उसक े उद्देश्यों क े लिलए विन ा,रि त व्यय था या व्यापा से संबंधि त या उत्पन्न होने र्वोाली हाविन थी।उप ोक्त मामलों प भ ोसा क ते हुए इस ाथिश को अस्र्वोीका क विदया गया था क्योंविक यह एक प्रधितद्वंद्वी चीनी दलाल क े विनन्दाकता, क े चरि त्र में विन ा,रि ती प पड़ता था औ यह क े र्वोल एक चीनी दलाल क े रूप में अपने व्यापा से दू से जुड़ा हुआ था।इसलिलए यह उनक े लिलए विर्वोशेष रूप से औ पू ी त ह से विन ा,रि त नहीं विकया गया था। न्यूसन बनाम ॉबर्टे,सन [(1952) 33 र्टेीसी 452, पृष्ठ 459] र्वोाले मामले में न्यायमूर्तित डांकर्वोर्टे, की विर्टेप्पथिर्णयों का भी उल्लेख विकया गया था, जहां यह कहा गया था विक यविद र्वोाथिर्णस्थि„यक प्रयोजनों सविहत एक से अधि क प्रयोजनों क े लिलए क दाता द्वा ा व्यय विकया जाता है, तो इस अथ, में विक यह व्यापा क े लाभ अर्जिजत क ने औ क ु छ बाह ी प्रयोजनों क े लिलए भी खच, विकया जाता है, तो व्यय का दार्वोा विबल्क ु ल भी नहीं विकया जा सकता है क्योंविक यह पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से व्यापा क े लिलए खच, नहीं विकया गया है। उस मामले में बैरि स्र्टे द्वा ा अपने घ औ अपने कक्षों क े बीच यात्रा क ने क े लिलए दार्वोा विकए गए खच• की अनुमधित नहीं दी गई थी क्योंविक यात्रा में उसका मक़सद औ उद्देश्य विमथिश्रत था औ पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से व्यर्वोसाय क े लिलए नहीं था। अब भा तीय मामलों में आते हैं; मास्क एंड क ं पनी बनाम आयक आयुक्त, मद्रास [(1943) 11 आईर्टेीआ 454] में विन ा,रि ती ने अपने अनुबं क े उल्लंघन में कम द प पर्टेाखे बेचे औ उसक े लिखलाफ अनुबं क े लिलए नुकसान क े लिलए एक धिडक्री पारि त की गई सिजसे उसने एक स्र्वोीकाय, कर्टेौती क विकया। यह अथिभविन ा,रि त विकया गया विक क्योंविक विन ा,रि ती ने विदए गए उपक्रम की अर्वोहेलना की थी औ उसका आच र्ण स्पष्ट रूप से बेईमान था, यह एक स्र्वोीकाय, व्यय नहीं था.मुख्य न्याया ीश स लिलयोनल लीच ने र्वोान, क े मामले [(1919) 2 क े बी 444] औ र्वोॉन ग्लेन क े मामले [(1920) 2 क े बी 553] को विनर्दिदष्ट क ने क े पश्चात् यह अथिभविन ा,रि त विकया विक यह कम ा ा 10 (2) (xii) क े अंतग,त आने र्वोाले व्यय का गठन नहीं क ती है।मद्रास उच्च न्यायालय ने सेंथिथक ु मा नाद एंड संस बनाम आयक आयुक्त (1957) 32 आईर्टेीआ 138] में यह माना विक कानून क े उल्लंघन क े लिलए दंड का भुगतान ा ा 10 (2) (xv) क े तहत अनुमेय कर्टेौधितयों क े दाय े से बाह है। उस मामले में विन ा,रि ती को विनर्ण~त नुकसान का भुगतान क ना था जो कॉफी बाजा विर्वोस्ता अधि विनयम, 1942 क े तहत सार्वो,जविनक नीधित क े विर्वो ो में एक अधि विनयम क े लिलए दंड क े समान था, औ सिजसे लागू क ने क े लिलए कॉफी बोड, प छोड़ विदया गया था। बहस क े दौ ान आयक आयुक्त बनाम विह जी (1953) एससीआ 714 क े मामले का भी उल्लेख विकया गया। उस मामले में विन ा,रि ती प जमाखो ी औ मुनाफाखो ी अध्यादेश क े तहत मुकदमा चलाया गया था, लेविकन अंततः उसे ब ी क विदया गया था औ अपने मूल्यांकन में ा ा 10 (2) (xv) क े तहत अपनी क्षा में खच, की गई ाथिश का दार्वोा विकया गया था। यह अथिभविन ा,रि त विकया गया विक सफल औ असफल प्रधित क्षा प विर्वोधि क व्ययों क े बीच अंत उधिचत नहीं था औ यह विक ा ा 10 (2) (xv) क े अ ीन ऐसे व्ययों की कर्टेौती उस का ोबा क े संबं में, सिजसक े लाभ संगर्णना में हैं औ काय,र्वोाविहयों क े अंधितम परि र्णाम से अप्रभाविर्वोत हैं, विर्वोधि क काय,र्वोाविहयों की प्रक ृ धित औ प्रयोजन प विनभ, होनी चाविहए। इन मामलों की समीक्षा से पता चलता है विक कर्टेौधितयों क े रूप में सिजन खच• की अनुमधित दी जाती है, र्वोे व्यर्वोसाय को चलाने क े उद्देश्य से विकए जाते हैं यानी विकसी व्यविक्त को उस व्यर्वोसाय में लाभ कमाने में सक्षम बनाने क े लिलए विकए जाते हैं। यह पया,प्त नहीं है विक संविर्वोत र्ण व्यर्वोसाय क े लाभ क े दौ ान विकए जाते हैं या उससे उत्पन्न होते हैं या उनसे संबंधि त होते हैं या विकए जाते हैं, लेविकन र्वोे व्यर्वोसाय क े लाभ अर्जिजत क ने क े उद्देश्य से भी होने चाविहए। जैसा विक र्वोॉन ग्लेन क े मामले [(1920) 2 क े बी 553] में इंविगत विकया गया था विक विकसी व्यय की कर्टेौती तब तक नहीं की जा सकती है जब तक विक यह व्यापा में र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन न हो औ व्यापा क े दौ ान कानून क े लिलए लगाया गया दंड इस प्रका र्वोर्भिर्णत नहीं विकया जा सकता है। यविद अपना व्यर्वोसाय क ने र्वोाले विकसी विन ा,रि ती द्वा ा ाथिश का भुगतान विकया जाता है, क्योंविक इसक े संचालन में उसने इस त ह से काम विकया है, सिजससे र्वोह जुमा,ना क े लिलए उत्त दायी हो गया है, तो इसे कर्टेौती योग्य व्यय क नहीं विकया जा सकता है।यह एक र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान होना चाविहए औ इसकी प्रक ृ धित ऐसी होनी चाविहए।इस त ह क े दंड जो विकसी विन ा,रि ती द्वा ा कानून क े उल्लंघन क े लिलए उसक े लिखलाफ शुरू की गई काय,र्वोाही में लगाए जाते हैं, उन्हें अपना व्यर्वोसाय चलाने में विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकए गए र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है। कानून का उल्लंघन व्यर्वोसाय की सामान्य घर्टेना नहीं है औ इसलिलए क े र्वोल ऐसे संविर्वोत र्णों में कर्टेौती की जा सकती है जो र्वोास्तर्वो में व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक हैं।यविद र्वोे व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प आते हैं तो उनकी कर्टेौती नहीं की जा सकती है।इसलिलए जहां विकसी विर्वोथिशष्ट र्वोै ाविनक प्रार्वो ान क े लिलए जुमा,ना लगाया जाता है, इसे एक व्यापा ी क े रूप में विन ा,रि ती प पड़ने र्वोाला र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है, इसका प ीक्षर्ण यह है विक जो खच, विकसी व्यविक्त को व्यर्वोसाय में लाभ अर्जिजत क ने क े लिलए व्यापा क ने में सक्षम बनाने क े उद्देश्य से विकए जाते हैं, उन्हें अनुमधित दी जाती है, लेविकन यविद र्वोे क े र्वोल व्यर्वोसाय से जुड़े हुए हैं तो नहीं। यह तक, विदया गया था विक जब तक जुमा,ना एक प्रक ृ धित का नहीं है जो विक े लिलए व्यविक्तगत है औ यविद यह क े र्वोल आयाधितत माल क े लिखलाफ आदेथिशत है तो यह एक स्र्वोीकाय, कर्टेौती है। हमा ी ाय में यह एक गलत अंत है क्योंविक संविर्वोत र्ण क े र्वोल तभी कर्टेौती योग्य है जब यह आयक अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xv) क े अंतग,त आता है औ इस त ह की कोई कर्टेौती तब तक नहीं की जा सकती है जब तक विक यह ऊप चचा, विकए गए मामलों में विन ा,रि त प ीक्षर्ण क े भीत न आता हो औ इसे पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से व्यर्वोसाय क े लिलए विकया गया व्यय कहा जा सकता है।क्या यह कहा जा सकता है विक कानून क े उल्लंघन क े लिलए भुगतान विकया गया दंड, भले ही इसमें विकए गए अप ा क े लिलए लगाए गए जुमा,ने क े अथ, में कोई व्यविक्तगत दाधियत्र्वो शाविमल न हो, पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से व्यर्वोसाय क े लिलए विन ा,रि त है क्योंविक उन शब्दों का उपयोग उन मामलों में विकया गया है सिजन प ऊप चचा, की गई है।हमा ी ाय में, कानून क े लिलए जुमा,ने क े रूप में भुगतान विकया गया कोई भी खच, पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से व्यर्वोसाय क े लिलए खी गई ाथिश नहीं कहा जा सकता है।व्यविक्तगत दाधियत्र्वो औ इस समय हमा े सामने मौजूद इस त ह क े दाधियत्र्वो क े बीच जो अंत क ने की कोथिशश की जा ही है, र्वोह विर्टेकाऊ नहीं है क्योंविक जो क ु छ भी विकया गया है, र्वोह कानून का उल्लंघन है औ सार्वो,जविनक नीधित क े आ ा प दंड क े साथ देखा गया है, उसे विकसी व्यर्वोसाय क े लिलए र्वोाथिर्णस्थि„यक खच, या ऐसे व्यर्वोसाय क े े उद्देश्य से विकए गए संविर्वोत र्ण नहीं कहा जा सकता है।"

21. सीआईर्टेी बनाम एससी कोठा ी, 1972 (4) एससीसी 402

21. 1 बविद्रदास डागा (पूर्वो क्त) में विदए गए विर्वोविनश्चय को अनुमोदन क े साथ उद्धृत विकया गया था। हालांविक, यह विर्वोचा व्यक्त विकया गया था विक यविद क योग्य आय क े लिलए लाभ लिलया जाना है, तो व्यर्वोसाय की प्रक ृ धित क े बार्वोजूद, परि र्णामी व्यय/हाविन से बचा नहीं जा सकता है। हमें यह ध्यान में खना चाविहए विक एस.सी. कोठा ी (उप ोक्त) में विदया गया विनर्ण,य बद्रीदास डागा (उप ोक्त) क े अनुरूप नहीं हो सकता है, सिजसमें इस न्यायालय ने कहा था विक 'उद्देश्य' क े प ीक्षर्ण को लागू क ते समय कर्टेौती की अनुमधित देना क़ानून औ र्वोाथिर्णस्थि„यक सिसद्धांतों प विनभ, क ता है। व्यर्वोसाय' औ 'व्यर्वोसाय क े लिलए आकस्थिस्मक' औ सामान्य सिसद्धांत क े रूप में नहीं। इसलिलए, एक उद्देश्य क े लिलए व्यय क े रूप में विकए विकसी व्यय क े आ ा प कर्टेौती की गै -अनुमधित जो एक अप ा है या कानून द्वा ा विनविषद्ध है, क़ानून क े माध्यम से अस्र्वोीका विकया जा सकता है। एससी कोठा ी (उप ोक्त) क े इस न्यायालय ने अन्य देशों में प्रचलिलत स्थिस्थधित को ध्यान में खते हुए क े र्वोल कानून क े सामान्य प्रस्तार्वो को विन ा,रि त विकया था, लेविकन विकसी भी मामले में, जुमा,ना या जब्ती क े मामले में इसे कोई आर्वोेदन नहीं विमला है। 21.[2] हाजी अज़ीज़ (उप ोक्त) में विन ा,रि त कानून का उल्लेख होने क े बार्वोजूद, दोनों हिंबदुओं अथा,त् अप ा क े रूप में हाविन की कर्टेौती औ विर्वोधि क े लिलए अधि ोविपत शास्थिस्त क े परि र्णाम प, पालन नहीं विकया गया। 21.[3] हमें यह भी जोड़ना चाविहए विक एस.सी. कोठा ी (उप ोक्त) में, यह न्यायालय पु ाने अधि विनयम की ा ा 10(2)(xv) से संबंधि त था, सिजसमें अधि विनयम की ा ा 37(1) क े लिलए प्रस्तुत कोई स्पष्टीक र्ण शाविमल नहीं था। कानून में बाद क े इस बदलार्वो का विनधिश्चत रूप से उक्त विनर्ण,य की समझ प अस पड़ेगा।

22. सोनी हिंहदुजी क ं पनी बनाम सीआईर्टेी, (1971) एससीसी ऑनलाइन एपी 223 22.[1] आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जब्ती औ जुमा,ने क े माध्यम से हुए नुकसान की कर्टेौती प विन ा,रि त कानून प विर्वोचा विकया। न्यायालय ने एस. सी. कोठा ी (पूर्वो क्त) र्वोाले मामले में इस न्यायालय क े विर्वोविनश्चय को ध्यान में खा। तद्नुसा यह माना गया था विक हाविन र्वोह होनी चाविहए जो व्यर्वोसाय या व्यापा से प्रत्यक्ष रूप से उत्पन्न हो ही हो, जैसा विक इस न्यायालय द्वा ा बद्रीदास डागा (उप ोक्त) में विन ा,रि त विकया गया है। न्यायालय ने मकबूल हुसैन बनाम बॉम्बे ा„य आविद, (1953) एससीआ 730 औ हाजी अज़ीज़ (उप ोक्त)) क े विनर्ण,य को ध्यान में खते हुए कहा विक र्वोर्जिजत र्वोस्तु की जब्ती ेम में एक का,र्वोाई होने क े का र्ण कर्टेौती क े लिलए उपलब् नहीं है, क्योंविक तक, संगत प्रविक्रया द्वा ा इसे विन ा,रि ती क े व्यर्वोसाय से संबंधि त या प्रासंविगक व्यापा या र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन नहीं कहा जा सकता है।

22. 2 प्रासंविगक पै ाः "4 विन ा,रि ती-फम, की ओ से उपस्थिस्थत श्री स्र्वोामी ने दृढ़ता से तक, विदया विक जब एक अर्वोै व्यर्वोसाय से अर्जिजत लाभ क से मुक्त नहीं है, तो ऐसे व्यर्वोसाय में हुए नुकसान को देय क की गर्णना क े लिलए लाभ या लाभ से कर्टेौती क ने की अनुमधित दी जानी चाविहए।

5. विन ा,रि ती द्वा ा चलाए जा हे व्यर्वोसाय क े संबं में जो क प्रभाय, हैं र्वोे विकसी विर्वोशेष विन ा, र्ण र्वोष, क े लाभ या अथिभलाभ हैं।लाभ का आकलन क ते समय र्वोष, क े दौ ान व्यर्वोसाय में हुए नुकसान को ध्यान में खना चाविहए, अन्यथा विन ा,रि ती द्वा ा अर्जिजत र्वोास्तविर्वोक लाभ प पहुंचना संभर्वो नहीं है। यह अच्छी त ह से स्थाविपत है विक लाभ या आय से जुड़ी अर्वोै ता का कलंक क ा ान क े लिलए सा हीन है। जैसा विक विर्वोत्त मंत्री बनाम स्थिस्मथ [1927] ए. सी. 193,198 में लाड, हाल्डेन द्वा ा मत व्यक्त विकया गया है, आय-क अधि विनयम आर्वोश्यक रूप से क े र्वोल विर्वोधि पूर्ण, का ोबा तक ही सीविमत नहीं हैं।जो एक कानून का उल्लंघन क ता है औ अपने द्वा ा विकए गए अप ा क े लिलए अथिभयोजन क े लिलए उत्त दायी होते हुए कानून द्वा ा विनविषद्ध व्यर्वोसाय में व्यापा क ता है, उसी समय र्वोह अर्वोै व्यापा या व्यर्वोसाय से अर्जिजत आय या लाभ से क का भुगतान क ने क े लिलए उत्त दायी होगा। अब हम सीमा शुल्क अधि विनयम क े लिलए सोने की जब्ती क े का र्ण सोने क े मूल्य क े नुकसान से चिंचधितत हैं।क्या उस नुकसान को व्यर्वोसाय से संबंधि त र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान या विन ा,रि ती द्वा ा चलाए जा हे व्यर्वोसाय क े आनुषंविगक क े रूप में माना जा सकता है, यह र्वोास्तविर्वोक सर्वोाल है। 6.श्री स्र्वोामी ने आयक आयुक्त बनाम एस. सी. कोठा ी [1968] 69 आई. र्टेी. आ. 1 (गुज ात)] र्वोाले मामले में गुज ात उच्च न्यायालय क े एक विनर्ण,य प दृढ़ता से भ ोसा क ने का प्रयास विकया औ यह तक, विदया विक विन ा,रि ती सीमा शुल्क अधि कारि यों द्वा ा जब्त विकए गए विनविषद्ध सोने क े मूल्य की कर्टेौती का दार्वोा क ने का हकदा है, क्योंविक यह उसक े द्वा ा विकए गए अर्वोै व्यापा में फम, द्वा ा उठाई गई हाविन का प्रधितविनधि त्र्वो क ता है।उस मामले में विर्वोद्वान न्याया ीशों का विर्वोचा था विक, जब अर्वोै व्यापा आयक अधि विनयम क े अथ, क े भीत व्यर्वोसाय है औ यविद अर्वोै व्यापा से लाभ क योग्य है, तो अर्वोै का ोबा से होने र्वोाले नुकसान को ध्यान में खते हूए सिसद्धांत रूप में या प्राधि का क े रूप में इनका क ने का कोई का र्ण नहीं है। इनक े अनुसा, व्यर्वोसाय क े र्वोास्तविर्वोक लाभ की गर्णना क ने क े लिलए इस प्रका हुए नुकसान को आर्वोश्यक रूप से ध्यान में खा जाना चाविहए औ ऐसे लाभ या तो इस अथ, में सका ात्मक हो सकते हैं विक र्वोे र्वोास्तविर्वोक लाभ हैं या र्वोे इस अथ, में नका ात्मक हो सकते हैं विक र्वोे नुकसान हैं औ सैद्धांधितक रूप से विकसी व्यर्वोसाय क े लाभ औ हाविनयों क े बीच कोई अंत नहीं है...

9. कोठा ी का मामला [[1968] 69 आई.र्टेी.आ. 1 (गुज ात).], जैसा विक उसमें बताए गए तथ्यों से देखा जा सकता है, ऐसा मामला नहीं था जहां विन ा,रि ती द्वा ा कर्टेौती का दार्वोा विकया गया था, क्योंविक उसने यह नहीं कहा था विक उसक े द्वा ा विकए गए विकसी विर्वोशेष व्यय को अनुमेय कर्टेौती क े रूप में अनुमधित दी जानी चाविहए। यह उस आ ा प है विक विर्वोद्वान न्याया ीशों ने आयक आयुक्त बनाम हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, [[1955] 28 आई.र्टेी.आ. 266 (बीओएम)। ] में विनर्ण,य, ाजस्र्वो द्वा ा भ ोसा विकया गया, जहां 1922 क े अधि विनयम की ा ा 10 (2) (xv) क े तहत कर्टेौती का दार्वोा अस्र्वोीक ृ त हो गया था, उनक े समक्ष मामले प लागू नहीं था।" इसलिलए, कोठा ी क े मामले [1968] 69 आई. र्टेी. आ. 1 (गुज ात) में विर्वोद्वान न्याया ीशों द्वा ा विदए गए उत्त ों से विन ा,रि ती क े तक, को कोई सहायता नहीं विमलती है।

10. यहां क ें द्र स का द्वा ा जब्त विकए गए सोने क े मूल्य में कर्टेौती क े लिलए विन ा,रि ती द्वा ा इस आ ा प एक विर्वोथिशष्ट दार्वोा विकया गया है विक यह व्यापा या र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान है, हालांविक व्यापा अर्वोै था।जब कर्टेौती क े लिलए दार्वोा विकया जाता है तो यह नज अंदाज नहीं विकया जाना चाविहए विक हाविन र्वोह होनी चाविहए जो विन ा,रि ती द्वा ा विकए जाने र्वोाले व्यर्वोसाय या व्यापा से सी े उत्पन्न हो या उस व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक हो सिजसे र्वोह क ता है न विक प्रत्येक प्रका का नुकसान, सिजसका उसक े व्यापा या व्यर्वोसाय से विबल्क ु ल कोई संबं या संबं नहीं है।

11. यह याद खना ठीक है विक र्वोर्जिजत सोने की जब्ती ेम में एक का,र्वोाई है न विक व्यविक्तगत काय,र्वोाही। न्यायमूर्तित भगर्वोती ने मकबूल हुसैन बनाम बम्बई ा„य [1953] एस. सी. आ. 730,742 (एस. सी.), ए. आई. आ. 1953 एस. सी. 325 में यह मत व्यक्त विकया है।इसमें कोई संदेह नहीं है विक सीमा शुल्क अधि का ी जो दंड लगा सकते हैं, उनमें से जब्ती एक है, लेविकन यह एक व्यविक्तगत काय,र्वोाही की तुलना में सामान्य रूप से काय,र्वोाही की प्रक ृ धित में अधि क है, इसका उद्देश्य उल्लंघन क ने र्वोाले सामान को जब्त क ना है, जो कानून क े विर्वोप ीत है।" इसी प्रभार्वो क े लिलए न्यायमूर्तित एस. क े. दास द्वा ा शेर्वोपुजान ाय इंद्रसन ाय लिलविमर्टेेड बनाम सीमा शुल्क कलक्र्टे [1959] एस. सी. आ. 821,836 (एस. सी.), ए. आई. आ. 1958 एस. सी. 845] र्वोाले मामले में यह मत व्यक्त विकया गया है विक जहां तक माल क े अधि ह र्ण का संबं है, यह ेम में एक काय,र्वोाही है औ अप ा ी ज्ञात है या नहीं, माल क े विर्वोरुद्ध शास्थिस्तयां लागू की जाती हैं औ समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम की ा ा 182 क े अ ीन अधि ह र्ण का आदेश संपलित्त की स्थिस्थधित प सी े काय, क ता है औ ा ा 184 क े अ ीन स का को आत्यस्थिन्तक हक अंतरि त क ता है।न्यायमूर्तित सुब्बा ार्वो (जैसा विक र्वोह तब थे) ने थॉमस डाना बनाम पंजाब ा„य [एआईआ 1959 एससी 375] में अपने असहमधित र्वोाले विनर्ण,य (अन्य हिंबदुओं प असहमधित होने क े का र्ण) में कहा विक यविद संबंधि त प्राधि का ी जब्ती का आदेश देता है तो यह क े र्वोल एक काय,र्वोाही है औ माल क े लिखलाफ जुमा,ना लगाया जाता है।

12. ेम में काय,र्वोाही, इसलिलए, शब्द क े सख्त अथ• में सी े संपलित्त (इस मामले में तस्क ी विकए गए सोने) क े लिखलाफ की गई का,र्वोाई है औ भले ही अप ा ी ज्ञात न हो, सीमा शुल्क अधि कारि यों क े पास प्रधितबंधि त सोने की संपलित्त को जब्त क ने की शविक्त है। ।इसलिलए सीमा शुल्क अधि कारि यों द्वा ा प्रधितबंधि त सोने की जब्ती को विकसी भी तक, संगत प्रविक्रया से क दाता क े का ोबा से जुड़ा या आकस्थिस्मक व्यापा या र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है।

13. इनलैंड ेर्वोेन्यू कविमश्न बनाम अलेक्जेंड र्वोॉन ग्लेन एंड क ं पनी लिलविमर्टेेड [1920] 2 क े. बी. 553,566 (सी. ए.)] र्वोाले मामले में लाड, स्र्टेन,डेल एम. आ. ने यह मत व्यक्त विकयाः "व्यापा क े दौ ान इस क ं पनी ने कानून का उल्लंघन विकया। जैसा विक मैं कहता हूं, इस बात प सहमधित बनी है विक र्वोे इस अथ, में क ु छ भी गलत क ने का इ ादा नहीं खते थे विक र्वोे स्र्वोेच्छा से औ जानबूझक इन सामानों को दुश्मन क े विठकाने प भेज हे थे, लेविकन उन्होंने कानून का उल्लंघन विकया, औ कानून क े उस उल्लंघन क े लिलए, उन प जुमा,ना लगाया गया। यह, जैसा विक मुझे लगता है, व्यापा से जुड़ा नुकसान नहीं था, बस्थिल्क क ं पनी प व्यविक्तगत रूप से लगाया गया जुमा,ना था, जहां तक क ं पनी को एक व्यविक्त माना जा सकता है, कानून क े लिलए जो उसने विकया था.बहुत सर्टेीक भाषा में भेद क ना शायद थोड़ा मुस्थिश्कल है, लेविकन मुझे लगता है विक व्यापा में व्यार्वोसाधियक नुकसान औ विकसी व्यविक्त या क ं पनी प कानून क े लिलए लगाए गए दंड क े बीच अंत है जो उन्होंने उस व्यापा में विकया है।"

14. लॉड, स्र्टेन,डेल एमआ द्वा ा बताया गया सिसद्धांत यहां भी लागू होता है, क्योंविक यह मानना असंभर्वो है विक र्वोर्जिजत सोने की जब्ती क े का र्ण हुआ नुकसान विन ा,रि ती- फम, क े व्यापा या व्यर्वोसाय क े संबं में विकया गया व्यय है या इसक े व्यर्वोसाय को चलाने क े लिलए प्रासंविगक व्यय है। X X X

16. हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, बनाम आयक आयुक्त [[1961] 41 आई.र्टेी.आ. 350 (एस.सी.), [1961] 2 एस.सी.आ. 651 (एससी)। ], कई भा तीय औ अंग्रेजी मामलों की समीक्षा क ने क े बाद, पृष्ठ 359 प देखा गया: "जैसा विक र्वोॉन ग्लेन क े मामले [1920] 2 क े बी 553 (सीए)] में बताया गया था, कोई भी व्यय कर्टेौती योग्य नहीं है जब तक विक यह व्यापा में एक र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान न हो औ व्यापा क े दौ ान कानून क े लिलए लगाया गया दंड इस त ह से र्वोर्भिर्णत नहीं विकया जा सकता है। यविद अपना व्यर्वोसाय क ने र्वोाले विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकसी ाथिश का भुगतान विकया जाता है, क्योंविक इसक े संचालन में उसने इस त ह से काय, विकया है सिजससे र्वोह जुमा,ना क े लिलए उत्त दायी हो गया है, तो इसे कर्टेौती योग्य व्यय क े रूप में दार्वोा नहीं विकया जा सकता है। यह एक र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान होना चाविहए औ इसकी प्रक ृ धित ऐसी होनी चाविहए। इस त ह क े दंड जो विकसी विन ा,रि ती द्वा ा कानून क े लिलए उसक े लिखलाफ शुरू की गई काय,र्वोाही में लगाए जाते हैं, उन्हें अपना व्यर्वोसाय चलाने में विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकए गए र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है।कानून का उल्लंघन व्यापा की एक सामान्य घर्टेना नहीं है औ इसलिलए क े र्वोल ऐसे संविर्वोत र्ण की ही कर्टेौती की जा सकती है जो र्वोास्तर्वो में े लिलए प्रासंविगक हैं। यविद र्वोे व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प आते हैं तो उन्हें कर्टेौती नहीं की जा सकती है। इसलिलए, जहां विकसी विर्वोथिशष्ट र्वोै ाविनक प्रार्वो ान क े लिलए जुमा,ना लगाया जाता है, इसे एक व्यापा ी क े रूप में विन ा,रि ती प पड़ने र्वोाला र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है, प ीक्षर्ण यह है विक उन खच• की अनुमधित दी जाती है जो विकसी व्यविक्त को व्यर्वोसाय में े लिलए व्यापा क ने में सक्षम बनाने क े उद्देश्य से विकए जाते हैं, लेविकन यविद र्वोे क े र्वोल व्यर्वोसाय से जुड़े नहीं होते हैं। कोई भी काय, जो कानून का उल्लंघन है औ सार्वो,जविनक नीधित क े आ ा प दंड क े साथ विकया जाता है, उसे व्यर्वोसाय क े लिलए र्वोाथिर्णस्थि„यक खच, या ऐसे े लाभ अर्जिजत क ने क े उद्देश्य से विकए गए संविर्वोत र्ण नहीं कहा जा सकता है।"

17. इसी प्रका क े विर्वोचा पंजाब औ इलाहाबाद उच्च न्यायालयों द्वा ा ाज र्वोूलन इंडस्र्टेpीज बनाम आयक आयुक्त [1961] 43 आई. र्टेी. आ. 36 (पुंज).], आयक आयुक्त बनाम मथु ा प्रसाद हरि द्वा प्रसाद देर्वोरि या [[1965] 55 आई. र्टेी. आ. 476 (सभी).] औ महाबी शुग विमल्स (पी.) लिलविमर्टेेड बनाम आयक आयुक्त [1969] 71 आई. र्टेी. आ. 87 (सभी) में व्यक्त विकए गए हैं।]"

18. उच्चतम न्यायालय ने बविद्रदास बनाम आयक आयुक्त [1958] 34 आई. र्टेी. आ. 10, [1959] एस. सी. आ. 690 (एस.सी)। ] में इस बात प विर्वोचा विकया गया है विक व्यापारि क हाविन विकतनी होगी। न्याधि पधित र्वोेंकर्टे ाम अय्य ने देखा विक: "जब विकसी कर्टेौती क े लिलए दार्वोा विकया जाता है, सिजसक े लिलए ा ा 10 (2) में कोई विर्वोथिशष्ट प्रार्वो ान नहीं है, तो क्या यह स्र्वोीकाय, है या नहीं, यह इस बात प विनभ, क ेगा विक क्या स्र्वोीक ृ त र्वोाथिर्णस्थि„यक प्रचलन औ व्यापा सिसद्धांतों को ध्यान में खते हुए, इसे व्यर्वोसाय क े संचालन से उत्पन्न औ इसक े आनुषंविगक कहा जा सकता है। यविद यह स्थाविपत है, तो कर्टेौती की अनुमधित दी जानी चाविहए, बशत विक अधि विनयम में व्यक्त या विनविहत इसक े विर्वोरुद्ध कोई विनषे न हो। सिजस हाविन क े लिलए ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती की जा सकती है, र्वोह हाविन ऐसी होनी चाविहए जो सी े व्यर्वोसाय क े संचालन से उत्पन्न होती है औ यह उसक े लिलए प्रासंविगक है, न विक विन ा,रि ती द्वा ा प्राप्त की गई कोई हाविन, भले ही इसका उसक े व्यर्वोसाय से क ु छ संबं हो।"

19. उनक े आधि पत्य द्वा ा विन ा,रि त प ीक्षर्ण से आंका गया, यह मानना असंभर्वो है विक र्वोर्जिजत सोने की जब्ती, जो ेम में काय,र्वोाही की प्रक ृ धित में है, एक नुकसान है जो सी े व्यापा या व्यापा से उत्पन्न होता है विन ा,रि ती-फम, औ उसक े लिलए प्रासंविगक है। पंजाब उच्च न्यायालय ने ाम गोपाल ाम सरूप बनाम आयक आयुक्त [1963] 47 आई. र्टेी. आ. 611 (पुंज)] र्वोाले मामले में यह अथिभविन ा,रि त विकया विक क े र्वोल यह तथ्य विक विकसी हाविन औ का ोबा क े बीच कोई दू स्थ संबं है, नुकसान को 'हाविन क े लिलए आनुषंविगक' अथिभव्यविक्त क े भीत नहीं लाएगा। X X X 22 जैसा विक लाड, लो बन, एल. सी. ने स्र्टेpॉन्ग एंड क ं पनी लिलविमर्टेेड बनाम र्वोुडी- फील्ड [1906] ए. सी. 448,452 (एच. एल.)] में इंविगत विकया है, “यविद र्वोे मुख्य रूप से विकसी अन्य व्यर्वोसाय से संबंधि त हैं या व्यापा ी प विकसी अन्य चरि त्र में आते हैं तो उनकी कर्टेौती नहीं की जा सकती। व्यापा की प्रक ृ धित प विर्वोचा विकया जाना चाविहए।"

23. इस न्यायालय ने आय-क आयुक्त बनाम चक्का ना ायर्ण [1961] 43 आई. र्टेी. आ. 249 (ए. पी.)] र्वोाले मामले में, विकसी ेलर्वोे स्र्टेेशन प चो ी क े का र्ण विकसी विन ा,रि ती को हुई हाविन क े मामले में यह अथिभविन ा,रि त विकया विक उसक े परि र्णामस्र्वोरूप हुई हाविन विन ा,रि ती क े लिलए आनुषंविगक नहीं थी औ र्वोह अनुज्ञेय कर्टेौती नहीं थी औ क े र्वोल यह तथ्य विक हाविन औ का बा क े बीच क ु छ दू स्थ संबं था, 'हाविन' अथिभव्यविक्त क े भीत हाविन नहीं लाएगा।तस्क ी विकए गए सोने की जब्ती से होने र्वोाला नुकसान विन ा,रि ती-फम, क े व्यर्वोसाय या व्यर्वोसाय क े लिलए विबल्क ु ल विर्वोदेशी है। यह एक व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में होने र्वोाली हाविन हैसोने की जब्ती, विनयमानुसा की गई का,र्वोाई का परि र्णाम है, जो पू ी त ह से उस व्यापा या व्यर्वोसाय से बाह है जो विन ा,रि ती क हा था। प्रधितबंधि त र्वोस्तुओं को जब्त क ना समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम क े तहत प्रदान विकए गए जुमा,ने में से एक है औ इस तथ्य प ध्यान विदए विबना विक अप ा ी का पता लगाया गया है या नहीं, उन र्वोस्तुओं क े लिखलाफ जुमा,ना लगाया जाता है। कानून का भंग या उल्लंघन विकसी व्यापा या व्यर्वोसाय की सामान्य घर्टेना नहीं है औ इसलिलए प्रधितबंधि त सोने की जब्ती क े माध्यम से जुमा,ना एक र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं है, ताविक एक अनुमत े रूप में अनुमधित दी जा सक े ।" 22.[3] आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का उक्त तक, इस न्यायालय द्वा ा इसक े समथ,न में विदए गए पहले क े विनर्ण,यों को ध्यान में खते हुए स्र्वोीक ृ त होने क े योग्य है।

23. जे.एस.पा क बनाम र्वोी.बी पालेक औ अन्य, (1973) एससीसी ऑनलाइन बॉम 161 23.[1] बम्बई उच्च न्यायालय का अधि कांश मत सोनी हिंहदुजी क ं पनी (उप ोक्त) क े अनुरूप था, हालांविक उक्त विनर्ण,य का उल्लेख नहीं विकया गया था। यह ध्यान विदया जाना चाविहए विक हालांविक न्यायमूर्तित मुखी ने न्यायमूर्तित देशपांडे क े दृविष्टकोर्ण से असहमधित जताई, तीस े न्याया ीश, न्यायमूर्तित तुलजापु क ने एक अलग फ ै सले से न्यायमूर्तित देशपांडे क े दृविष्टकोर्ण से सहमधित व्यक्त की। इसलिलए, बहुमत ने हाजी अजीज (उप ोक्त)) में इस न्यायालय क े दृविष्टकोर्ण की व्यापक व्याख्या क ते हुए कहा विक कानून क े लिलए विकए गए सामानों की जब्ती को व्यर्वोसाय की सामान्य घर्टेना नहीं कहा जा सकता है, औ यह नुकसान विकसी े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प पड़ता है। न्यायालय ने आगे कहा विक यह सिसद्धांत एक ऐसे मामले प भी समान रूप से लागू होगा जहां स्र्वोयं व्यर्वोसाय कानून द्वा ा विनविषद्ध है, जबविक प्या ा सिंसह(उप ोक्त) में पंजाब औ हरि यार्णा उच्च न्यायालय क े विर्वोचा से असहमत होते हुए, जो विनर्ण,य उस समय इस न्यायालय में नहीं पहुंचा था।न्यायालय ने अथिभविन ा,रि त विकया विक प्या ा सिंसह(उप ोक्त) में पंजाब औ हरि यार्णा हाईकोर्टे, का फ ै सला हाजी अजीज (उप ोक्त) में इस कोर्टे, क े फ ै सले क े अनुरूप नहीं था।

23. 2 प्रासंविगक पै ाग्राफः न्याया ीशमूर्तित देशपांडे: “23 इसक े बाद यह तक, विदया जाता है विक, बेशक, सीमा शुल्क विर्वोभाग द्वा ा पू े सोने को जब्त क लिलया गया है औ इस त ह, इसक े मूल्य को व्यापारि क नुकसान क े रूप में माना जाना चाविहए था औ विन ा,रि ती अघोविषत स्रोतों से अपनी अनुमाविनत औ विन ा,रि त आय क े लिलए इस हाविन क े समायोजन का हकदा था। मुख्य रूप से ा ा 71 प विर्वोश्वास विकया गया था, हालांविक ा ा 70 को भी संदर्भिभत विकया गया था। यह मुद्दा न्यायाधि क र्ण क े समक्ष उठाया गया था। हालांविक, न्यायाधि क र्ण ने इस याधिचका प विर्वोचा क ने से इनका क विदया, क्योंविक यह पहली बा उसक े समक्ष उठाया गया था औ उसने सोचा विक आगे क े तथ्यों की जांच क े विबना इसका विनर्ण,य नहीं विकया जा सकता है। दुभा,ग्य से, न्यायाधि क र्ण का आदेश स्पष्ट नहीं है विक विकस त ीक े से आगे क े तथ्यों की जांच आर्वोश्यक थी। इसलिलए, यह जानना संभर्वो नहीं है विक क्या न्यायाधि क र्ण पेर्टेेंर्टे की अर्वोै ता से हुई हाविन क े लिलए उस आय क े विर्वोरुद्ध समायोजन क ने की अनुमधित देने में अविनच्छ ु क था, सिजसका स्रोत अर्वोै नहीं विदखाया गया था या इसने जब्ती द्वा ा नुकसान को पूंजीगत नुकसान क े रूप में माना औ, इसलिलए, ा ा 71 क े तहत आर्वोश्यक पूंजीगत लाभ से आय से कर्टेौती क ने क े लिलए अविनच्छ ु क था। चाहे जो भी हो, मुझे यह कहने में कोई विहचविकचाहर्टे नहीं है विक यविद यह कानून का एक शुद्ध प्रश्न है जो अथिभलेख प सामग्री प विनर्ण,य देने में सक्षम है, तो न्यायाधि क र्ण उस प विर्वोचा क ने औ विनर्ण,य लेने क े र्वोै ाविनक दाधियत्र्वो क े तहत था.हालांविक, मुझे लगता है विक स्र्वोीक ृ त तथ्यों क े आ ा प, याधिचकाकता, विकसी भी मुआर्वोजे का दार्वोा क ने का हकदा नहीं है.कानून क े उल्लंघन क े लिलए सोने की जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप विन ा,रि ती को हुए नुकसान को अधि विनयम क े विकसी भी प्रार्वो ान क े तहत समायोजन क े लिलए उत्त दायी र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं कहा जा सकता है।हाजी अजीज औ अब्दुल शक ू ब्रदस, बनाम आयक आयुक्त क े फ ै सले का उल्लेख क ना पया,प्त होगा।उच्चतम न्यायालय ने इसी मामले में इस न्यायालय क े दृविष्टकोर्ण को ब क ा खा। समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम क े प्रार्वो ानों का उल्लंघन क ते हुए विन ा,रि ती द्वा ा विर्वोदेश से खजू का आयात विकया गया था। सीमा शुल्क अधि कारि यों ने समुद्री सीमा शुल्क अधि विनयम की ा ा 167-बी क े तहत माल जब्तविकया। हालांविक, इसने अधि विनयम की ा ा 183 क े तहत विन ा,रि ती को जब्त की गई र्वोस्तुओं क े बदले में जुमा,ना अदा क ने औ माल को मुक्त क ाने का विर्वोकल्प विदया। विन ा,रि ती ने विर्वोकल्प का प्रयोग विकया औ जुमा,ना अदा क ने प माल छ ु ड़ा लिलया। मूल्यांकन काय,र्वोाविहयों क े दौ ान विन ा,रि ती ने 1922 क े भा तीय आयक अधि विनयम की ा ा 10(2) (xv) क े तहत इस दंड ाथिश की कर्टेौती का दार्वोा विकया। बंबई उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए दार्वोे को खारि ज क विदया विक कानून क े लिलए जुमा,ना ऐसे व्यर्वोसाय, पेशे या का ोबा क े लिलए पू ी त ह से औ विर्वोशेष रूप से खच, विकए गए विकसी भी व्यय क े ब ाब नहीं है।उच्चतम न्यायालय ने थोड़े व्यापक आ ा प इस न्यायालय क े उक्त दृविष्टकोर्ण की पुविष्ट की औ कहा विकः "एक व्यय तब तक कर्टेौती योग्य नहीं है जब तक विक यह व्यापा में र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान न हो औ व्यापा क े दौ ान कानून क े लिलए लगाए गए दंड को इस त ह र्वोर्भिर्णत नहीं विकया जा सकता है। कानून का उल्लंघन व्यापा की एक सामान्य घर्टेना नहीं है औ इसलिलए, क े र्वोल ऐसे संविर्वोत र्ण की कर्टेौती की जा सकती है जो र्वोास्तर्वो में व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक हैं।यविद र्वोे व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प आते हैं तो उन्हें कर्टेौती नहीं की जा सकती है।" "29. न्यायमूर्तित ग्रोर्वो द्वा ा अधि कथिथत इस कसौर्टेी को हाजी अजीज औ अब्दुल शक े मामले में उच्चतम न्यायालय की ओ से बोलते हुए उच्चतम न्यायालय की ओ से न्यायमूर्तित कपू द्वा ा अधि कथिथत कसौर्टेी को लागू क ते हुए यह अथिभविन ा,रि त विकया जाना होगा विक विर्वोधि क े लिलए जब्त माल को का बा की सामान्य घर्टेना नहीं कहा जा सकता औ इससे होने र्वोाली हाविन व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य प्रक ृ धित में विन ा,रि ती प पड़ती है। यह देखना संभर्वो नहीं है विक यह सिसद्धांत कोई अंत क ै से ला सकता है जहां स्र्वोयं व्यर्वोसाय को कानून द्वा ा प्रधितबंधि त पाया गया है। यह र्वोाथिर्णस्थि„यक लाभ है जो क योग्य है औ यह व्यापा में र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान है सिजसक े संबं में कर्टेौती का दार्वोा विकया जा सकता है क्योंविक यह शुद्ध लाभ की मात्रा विन ा,रि त क ने से पहले लाभ की मात्रा को कम क ने क े लिलए जाता है या क्योंविक उक्त व्यर्वोसाय को चलाने क े लिलए खच, विकए जाने की आर्वोश्यकता होती है या क्योंविक नुकसान उसी मद क े तहत व्यापा क े विकसी अन्य स्रोत क े तहत विकया जाता है या र्वोे विकसी अन्य मद क े तहत व्यापा या व्यर्वोसाय क ते समय खच, विकए जाते हैं। प्रधितबंधि त व्यापा या व्यर्वोसाय क े दौ ान विकए गए या झेले गए सामान क े दंड औ अधि ह र्ण को अभी भी ऐसे अर्वोै व्यापा की सामान्य घर्टेना नहीं कहा जा सकता है औ इस त ह की हाविन को अभी भी व्यापा में र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन नहीं कहा जा सकता है क्योंविक चो ी, डक ै ती, हे ाफ े ी या ोखा ड़ी क े लाभ को विकसी भी व्यर्वोसाय या र्वोाथिर्ण„य से क योग्य आय नहीं माना जा सकता है।इसलिलए जब्त विकए गए सोने क े मूल्य की कर्टेौती क े लिलए श्री अल्बल क े दार्वोे प विर्वोचा नहीं विकया जा सकता।

30. यह सच है, जैसा विक प्या ा सिंसहक े मामले में पंजाब औ हरि यार्णा उच्च न्यायालय द्वा ा देखा गया है, माल की जब्ती औ जुमा,ना लगाने का जोलिखम विकसी भी गै कानूनी व्यापा या व्यर्वोसाय में विनविहत है।इसी त ह दोषसिसधिद्ध औ जुमा,ने का जोलिखम भी है।हालांविक, यह आर्वोश्यक नहीं है विक इस त ह क े व्यापा में होने र्वोाले ह प्रका क े नुकसान को र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान की श्रेर्णी में खा जाए।हाजी अजीज औ अब्दुल शक े प्राधि का प विकसी भी कीमत प यह अथिभविन ा,रि त विकया जाना चाविहए विक प्रधितबंधि त व्यापारि क गधितविर्वोधि यों में लिलप्त होने क े दौ ान संपलित्त या दंड को जब्त क ना र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन क े ब ाब नहीं है, हालांविक र्वोास्तर्वो में यह नुकसान शब्द क े सामान्य अथ, क े अनुसा होता है जैसा विक आम बोलचाल में समझा जाता है। उपयु,क्त उच्चतम न्यायालय क े फ ै सले में इस आ ा प अंत क ने का प्रयास विकया गया है विक न्यायालय आयक अधि विनयम, 1922 की ा ा 10 (1) क े तहत नहीं बस्थिल्क ा ा 10 (2) (xv) क े तहत दंड की कर्टेौती क े लिलए विन ा,रि ती क े दार्वोे प विर्वोचा क हा था। उपयु,क्त मामले में, न तो विन ा,रि ती ने अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत हाविन क े रूप में ऐसी शास्थिस्त की कर्टेौती का दार्वोा विकया, न ही उच्चतम न्यायालय ने उस उप ा ा क े अ ीन दार्वोे को अनुज्ञात क ना साथ,क समझा औ यविद र्वोह विनर्णा,यक नहीं है तो ऐसे विर्वोर्वोाद की असमथ,ता का भी संक े त है। हालांविक अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती का दार्वोा विकया गया था, लेविकन दार्वोे की अस्र्वोीक ृ धित व्यापक आ ा प आ ारि त है विक जुमा,ना औ जब्ती व्यापा की सामान्य घर्टेनाएं नहीं हैं औ इन्हें र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं माना जाता है। यविद कोई व्यविक्त 1922 क े अधि विनयम की ा ा 10 (2) औ ा ा 24 की स्कीम औ 1961 क े अधि विनयम की ा ा 28,29 से 44 क औ ा ा 70 औ 71 क े तत्संबं ी उपबं ों की जांच क ता है तो यह देखा जाएगा विक ये उपबं विर्वोथिभन्न आकस्थिस्मकता क े अ ीन अर्जिजत लाभों से कर्टेौती या संविर्वोत र्ण से संबंधि त हैं।यविद ा ा 14 क े तहत एक ही शीष, क े तहत एक ही व्यर्वोसाय (आय का स्रोत) में नुकसान होता है, तो अधि विनयम की ा ा 22 (पु ाने अधि विनयम की ा ा 10(1)) क े तहत कर्टेौती की जा सकती है। यविद एक ही शीष, क े अंतग,त आने र्वोाले विकसी थिभन्न स्रोत क े अंतग,त हाविनयां होती हैं, तो ा ा 70 क े अंतग,त उसी शीष, क े अंतग,त आने र्वोाले विकसी अन्य स्रोत की आय से हाविनयों की कर्टेौती की जा सकती है। हालांविक, जब आय क े विकसी एक शीष, क े तहत सभी स्रोतों का शुद्ध परि र्णाम हाविन होता है, तो र्वोह ा ा 71 क े तहत विकसी अन्य शीष, क े तहत आय से कर्टेौती क े लिलए उत्त दायी होता है। यविद सभी शीष• क े अंतग,त सभी स्रोतों का शुद्ध परि र्णाम हाविन है, तो उसे अधि विनयम की ा ा 72 क े तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। ा ा 10(2), ा ा (1) से (xvi) क े अनुरूप ा ा 29 से 44 ए, व्यय आविद क े रूप में कर्टेौधितयों या संविर्वोत र्णों से संबंधि त है।ये प्रार्वो ान क दाता क े शुद्ध क योग्य लाभ या आय क े विन ा, र्ण क े त ीक े से संबंधि त हैं। यविद सर्वो च्च न्यायालय क े फ ै सले का सही अनुपात यह है विक कानून क े उल्लंघन से होने र्वोाला जुमा,ना व्यार्वोसाधियक नुकसान नहीं है क्योंविक यह व्यापा या व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक नहीं है, तो यह बहुत कम मायने खता है विक कर्टेौती यासमायोजन का दार्वोा विकस गर्णना क े तहत विकया जाता है।उच्चतम न्यायालय क े विर्वोद्वान न्याया ीशों ने स्र्वोयं इस बात प ध्यान विदया है विक जो क ु छ है औ जो प्रासंविगक नहीं है, उसक े बीच का अंत बहुत कम है। इस विनर्ण,य का अनुपात उन सभी आकस्थिस्मकताओं प लागू होता है जहां विकसी भी गर्णना प इस त ह क े गै -र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान की कर्टेौती की जाती है। उस मामले में विन ा,रि ती ने ा ा 10(2)(xv) क े तहत जुमा,ने की कर्टेौती का दार्वोा विकया था, इससे मामले क े अनुपात में कोई अंत नहीं आ सकता। मुझे पंजाब उच्च े दृविष्टकोर्ण से सहमत होना संभर्वो नहीं लगता। मुझे नहीं लगता विक कोठा ी क े मामले में गुज ात उच्च न्यायालय का फ ै सला उसक े दृविष्टकोर्ण का समथ,न क ता है। इसक े विर्वोप ीत, उच्चतम न्यायालय क े दो फ ै सलों का अनुपात पंजाब मामले क े अनुपात क े विर्वोप ीत है।" न्याया ीशमूर्तित तुलजापु क ः "179. मैंने ऊप पहले ही संक े त विदया है विक हाजी अजीज क े मामले में र्वोस्तुओं क े े बदले में जुमा,ना या जुमा,ना लगाते समय उच्चतम न्यायालय ने यह मत व्यक्त विकया है विक कानून क े लिलए विकसी विन ा,रि ती द्वा ा भुगतने र्वोाली शास्थिस्त को व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक नहीं माना जा सकता औ र्वोास्तर्वो में यह विकसी व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में विन ा,रि ती प पड़ता है।मे े विर्वोचा में, पूर्वो क्त प्राधि का ी स्थिस्थधित को बहुत स्पष्ट क ते हैं विक अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती योग्य हाविन क े रूप में विकसी भी नुकसान का दार्वोा क ने से पहले, यह व्यर्वोसाय क ने से उत्पन्न होने र्वोाला एक व्यापारि क नुकसान या र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान होना चाविहए या यह व्यर्वोसाय क े लिलए आनुषंविगक होना चाविहए औ ऐसा नुकसान एक े रूप में विन ा,रि ती प भी पड़ना चाविहए। र्वोत,मान मामले में सर्वोाल यह है विक क्या कानून क े लिलए माल की जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप विन ा,रि ती को होने र्वोाले नुकसान को व्यार्वोसाधियक नुकसान माना जा सकता है या इसे व्यापा क े लिलए आकस्थिस्मक नुकसान कहा जा सकता है औ इसका क्या महत्र्वो है? क्या यह कहा जा सकता है विक एक व्यापा ी क े रूप में अपने चरि त्र में उन्हें नुकसान उठाना पड़ा? मे े विर्वोचा में, यह विनधिश्चत रूप से व्यापा क ने से उत्पन्न होने र्वोाला र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान नहीं है औ न ही इसे सोने क े डील क े रूप में विन ा,रि ती की गधितविर्वोधि क े लिलए प्रासंविगक माना जा सकता है, इसक े अलार्वोा, इसे एक व्यापा ी क े रूप में विन ा,रि ती को उसक े चरि त्र में होने र्वोाली हाविन नहीं माना जा सकता है। यह कानून का उल्लंघन क ने र्वोाले व्यविक्त क े रूप में उसे होने र्वोाली हाविन है।माल की जब्ती से होने र्वोाली हाविन विन ा,रि ती द्वा ा विकए गए एक अर्वोै काय, से सी े तौ प हुई, अथा,त्, अपेधिक्षत प विमर्टे या भा तीय रि ज़र्वो, बैंक की अनुमधित क े विबना औ भा त में उसक े आयात क े लिलए विकसी भी शुल्क का भुगतान विकए विबना सोना प्राप्त क ना।विनधिश्चत रूप से, एक व्यापा ी या व्यर्वोसायी क े रूप में विन ा,रि ती प नुकसान नहीं हुआ है, स्पष्ट रूप से, यहां तक विक एक आम व्यविक्त जो व्यर्वोसायी नहीं है, अग र्वोह अपने विनजी उपयोग क े लिलए सोने का आयात आर्वोश्यक अनुमधित क े विबना औ सीमा शुल्क क े विबना क ता है, उसक े पास से सोना जब्त विकए जाने क े दंड क े अ ीन होगा औ परि र्णामस्र्वोरूप उसे भा ी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस प्रका यह स्पष्ट है विक विन ा,रि ती द्वा ा कानून क े लिलए माल क े े परि र्णामस्र्वोरूप होने र्वोाले नुकसान को व्यापा ी क े अलार्वोा विकसी अन्य चरि त्र में उसे होने र्वोाली हाविन माना जाना चाविहए।मामले क े इस दृविष्टकोर्ण में, मे ा स्पष्ट विर्वोचा है विक याधिचकाकता, को अधि विनयम की ा ा 28 क े तहत अपनी व्यार्वोसाधियक आय की गर्णना क ते समय स्र्वोीकाय, कर्टेौती क े रूप में सोने की जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप हुई हाविन का दार्वोा क ने का अधि का नहीं है।

180. जहां तक एससी कोठा ी क े मामले में गुज ात उच्च न्यायालय क े विनर्ण,य का संबं है - सिजसकी उच्चतम न्यायालय द्वा ा पुविष्ट की गई है - यह अर्वोश्य ही माना जाना चाविहए विक यह विनर्ण,य क े र्वोल इस प्रस्तार्वो क े लिलए एक प्राधि का है विक आयक े तहत विकसी भी व्यर्वोसाय की गै -र्वोै ता उसकी शुद्ध आय की गर्णना क ने क े उद्देश्य से अप्रासंविगक है औ जबविक ाजस्र्वो अर्वोै व्यर्वोसाय से अर्जिजत विन ा,रि ती की आय प क लगाने का हकदा है, विन ा,रि ती भी इस त ह क े अर्वोै व्यर्वोसाय से उत्पन्न हाविन की कर्टेौती प जो देने का हकदा है। उच्चतम न्यायालय द्वा ा अनुमोविदत कानून क े इस कथन क े साथ कोई विर्वोर्वोाद नहीं हो सकता है। लेविकन र्वोहां भी, अर्वोै व्यापा क े लाभ की गर्णना क ते समय कर्टेौती का दार्वोा विकया जा सकता है, सिजसकी हाविन व्यापा हाविन या र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन या हाविन होनी चाविहए, लेविकन एक व्यापा ी क े रूप में विन ा,रि ती को अपने चरि त्र में नुकसान उठाना चाविहए औ कानून क े लिलए माल की जब्ती क े परि र्णामस्र्वोरूप नुकसान जो एक े अलार्वोा विकसी अन्य क्षमता में उसक े द्वा ा उठाया गया नुकसान होगा। इसक े अलार्वोा, एस. सी. कोठा ी क े मामले में न तो गुज ात उच्च न्यायालय औ न ही उच्चतम न्यायालय को इस सर्वोाल प विर्वोचा क ना पड़ा विक क्या जुमा,ना या सामान की जब्ती क े का र्ण नुकसान र्वोाथिर्णस्थि„यक नुकसान क े ब ाब है या नहीं। र्वोास्तर्वो में, मामले क े तथ्यों को पेश क ते हुए उच्चतम न्यायालय ने अपने विनर्ण,य क े पै ाग्राफ 1 में कहा है विक 3,40,000 रुपये औ विर्वोषम नुकसान, सिजसका दार्वोा विकया गया था, मूंगफली क े तेल की आपूर्तित क े लिलए विर्वोथिभन्न लोगों क े साथ विन ा,रि ती द्वा ा विकए गए क ु छ लेन-देन से उत्पन्न हुआ था औ विन ा,रि ती द्वा ा यह उम्मीद की गई थी विक र्वोे अनुबं विकए जाएंगे, लेविकन क ु छ अनुबं ों को क ु छ का र्णों से पू ा नहीं विकया जा सका औ अंत का भुगतान विकया जाना है। इससे यह स्पष्ट होता है विक 3,40,000 रुपये की हाविन, सिजसका कर्टेौती योग्य हाविन क े रूप में दार्वोा विकया गया था, स्पष्ट रूप से र्वोाथिर्णस्थि„यक या व्यापा हाविन की प्रक ृ धित में थी, सिजसक े लिलए अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती का दार्वोा विकया गया था। इन परि स्थिस्थधितयों में, यह स्पष्ट है विक एस. सी. कोठा ी क े मामले में प्रधितपाविदत कानून का विर्वोर्वो र्ण अपर्वोादात्मक नहीं है, लेविकन, मैं यह इंविगत क ना चाहता हूं विक यह विनर्ण,य इस प्रस्तार्वो क े लिलए कोई प्राधि का नहीं है विक जुमा,ने या सामान की जब्ती क े माध्यम से हुई हाविन र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन क े ब ाब है सिजसे अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत विकसी व्यर्वोसाय क े शुद्ध लाभ की गर्णना क ते समय कार्टेा जा सकता है। यह सच है विक प्या ा सिंसहक े मामले में, पंजाब औ हरि यार्णा उच्च न्यायालय ने यह विर्वोचा व्यक्त विकया है विक सोने की तस्क ी क े व्यर्वोसाय में लगे विन ा,रि ती से 65,500 रुपये की नकद ाथिश की जब्ती व्यापा हाविन क े ब ाब थी औ इसलिलए अधि विनयम की ा ा 10 (1) क े तहत कर्टेौती योग्य थी। हिंकतु इस विनष्कष, प पहुंचने क े लिलए पंजाब उच्च न्यायालय ने मुख्य रूप से एस. सी. कोठा ी क े मामले में गुज ात उच्च न्यायालय औ उच्चतम न्यायालय क े विर्वोविनश्चय प भ ोसा विकया है, सिजसमें, जैसा विक मैंने ऊप कहा है, न तो गुज ात उच्च न्यायालय औ न ही उच्चतम न्यायालय से इस प्रश्न प विर्वोचा क ने की अपेक्षा की गई थी विक क्या कानून क े लिलए माल क े दंड या अधि ह र्ण से होने र्वोाली हाविन व्यापा हाविन या र्वोाथिर्णस्थि„यक हाविन क े ब ाब है र्वोास्तर्वो में, र्वोास्तर्वो में विन ा,रि ती को हुई हाविन की प्रक ृ धित र्वोाथिर्णस्थि„यक थी क्योंविक यह मतभेदों क े का र्ण उत्पन्न हुई थी। मैं प्या ा सिंसह क े मामले में पंजाब उच्च न्यायालय क े विर्वोचा ों से सहमत होने क े लिलए खुद को ाजी क ने में असमथ, हूं, खासक तब जब यह हाजी अजीज क े मामले में उच्चतम न्यायालय द्वा ा विन ा,रि त कसौविर्टेयों क े विर्वोप ीत है औ अंग्रेजी मामलों में, सिजसका हर्वोाला उच्चतम न्यायालय ने हाजी अजीज क े मामले में विदया है।अन्य तक, विक इस नुकसान को ा ा 70 या ा ा 71 क े तहत अघोविषत स्रोत से होने र्वोाली आय क े लिखलाफ समायोसिजत क ने की अनुमधित दी जानी चाविहए, श्री अलबल द्वा ा जो नहीं विदया गया था। उपयु,क्त चचा, को ध्यान में खते हुए, उन दोनों विबन्दुओं प सिजन प दो विर्वोद्वान न्याया ीशा ीशों क े बीच मतभेद था, मैं श्री न्याया ीशमूर्तित देशपांडे द्वा ा व्यक्त विकए गए विर्वोचा ों से सहमत हूं।" 23.[3] बंबई उच्च न्यायालय का विनर्ण,य विनधिश्चत रूप से हाजी अज़ीज़ (उप ोक्त) में विदए गए विनर्ण,य क े अनुरूप है। पु ाने अधि विनयम की ा ा 10(1) क े दाय े से बाह दंड औ जब्ती को लेक विदए गए ठोस का र्ण सही प्रतीत होते हैं। 24.आयक आयुक्त बनाम प्या ा सिंसह, (1980) सप्लीमेंर्टे एससीसी 24.[1] यह न्यायालय हाजी अजीज (उप ोक्त) में एक समन्र्वोय पीठ द्वा ा व्यक्त विकए गए दृविष्टकोर्ण से थिभन्न नहीं था। र्वोास्तर्वो में, इसने उक्त विनर्ण,य को अपनी स्र्वोीक ृ धित दे दी। हालाँविक, एससी कोठा ी (उप ोक्त) प भ ोसा विकया गया था, जो विक एक र्वोै व्यर्वोसाय क ने क े लिलए विकए गए कानून क े उल्लंघन औ एक अंतर्दिनविहत गै कानूनी े बीच अंत क ते हुए विकया गया था। यह एक र्वोै प्रत्याशा प विकया गया था विक एक अर्वोै व्यर्वोसाय में कई नुकसान होंगे सिजसक े परि र्णामस्र्वोरूप अपेधिक्षत नुकसान होगा, सिजसे सामान्य व्यर्वोसाय में शाविमल नहीं विकया जा सकता है। 24.[2] दोनों मुद्दों प हाजी अजीज (उप ोक्त) में विन ा,रि त कानून प असार्वो ानी से ध्यान नहीं विदया गया है, विर्वोशेष रूप से जब्ती या जुमा,ना लगाने में शाविमल काय,र्वोाही की प्रक ृ धित, जो सामान्य रूप से काय,र्वोाविहयां हैं। पु ाने अधि विनयम की ा ा 10(2) की व्याख्या क ते समय इस न्यायालय को अधि विनयम की ा ा 37 क े तहत उपलब् स्पष्टीक र्ण का लाभ नहीं विमला, इसक े अलार्वोा बद्रीदास डागा (उप ोक्त) में उसिल्ललिखत चेतार्वोनी क े शब्द की अनदेखी की गई। 24.[3] हम क े र्वोल इस स्थिस्थधित को स्पष्ट क ेंगे विक विकसी भी मामले में, जैसा विक प्या ा सिंसह (पूर्वो क्त) में अधि कथिथत है, अधि विनयम की ा ा 37 (1) क े तहत आने र्वोाले दंड/अधि ह र्ण क े का र्ण हुए व्यय/हाविन की कर्टेौती क े मामले में, विर्वोशेष रूप से स्पष्टीक र्ण 1 क े प्रकाश में, कोई आर्वोेदन नहीं हो सकता है।

25. डॉ. र्टेी. ए. क ु ैशी बनाम आयक आयुक्त, भोपाल (2007) 2 एससीसी 759 25.[1] इस न्यायालय ने अधि विनयम की ा ा 37 क े स्पष्टीक र्ण 1 प एक आकस्थिस्मक विर्टेप्पर्णी क ते हुए क े र्वोल प्या ा सिंसह(उप ोक्त) का अनुस र्ण विकया। जैसा विक प्या ा सिंसह(उप ोक्त) में देखा जा सकता है, पहले क े विनर्ण,यों प विर्वोचा नहीं विकया गया, लेविकन विन ा,रि त सिसद्धांत प भी ध्यान नहीं विदया गया। इस संबं में, यह याद खना होगा विक एक विमसाल क े बाध्यका ी होने क े लिलए इसमें शाविमल मुद्दे प सचेत रूप से विर्वोचा क ना होगा। डॉ. र्टेी. ए. क ु ैशी (उपयु,क्त) मामले में फ ै सला दो न्याया ीशों की पीठ ने सुनाया था, जबविक तीन न्याया ीशों की पीठ प ध्यान नहीं विदया था।हाजी अजीज (उपयु,क्त) में पीठ का विनर्ण,य, सिजसे न तो अस्र्वोीक ृ त विकया गया है औ न ही विर्वोथिशष्ट माना गया है। इसलिलए, यह विनर्ण,य अविनधिश्चत है औ बाध्यका ी विमसाल नहीं है। एक बा विफ, जब्ती की काय,र्वोाही क े ेम में होने का प्रश्न न्यायालय क े ध्यान में नहीं लाया गया। 25.[2] इसलिलए ऐसी स्थिस्थधित नहीं हो सकती है विक कोई भी क दाता जो अर्वोै का ोबा क हा है, र्वोह उस का ोबा क े दौ ान हुए खच, या नुकसान की कर्टेौती का दार्वोा क सकता है, जबविक कोई अन्य क दाता जो र्वोै का ोबा क हा है, र्वोह जब्त या जुमा,ना दोनों में से विकसी एक क े का र्ण हुई हाविन क े लिलए कर्टेौती की मांग नहीं क सकता है। न्यायालय द्वा ा डॉ. र्टेी. ए. क ु ैशी (उप ोक्त) क े मामले में अधि विनयम की ा ा 37 की व्याख्या से ऐसी स्थिस्थधित पैदा होती है, जहां विकसी अर्वोै र्वोस्तु क े विनमा,र्ण में विकए गए व्यय को स्पष्टीक र्ण 1 क े मद्देनज कर्टेौती क े रूप में स्र्वोीकाय, नहीं माना जा सकता है, हालांविक, यविद जब्त विकए जाने प विर्वोविनर्दिमत र्वोस्तुओं को जब्त क लिलया जाता है, तो उस स्थिस्थधित में र्वोाथिर्णस्थि„यक सिसद्धांतों प कर्टेौती की अनुमधित होगी। यह र्वोग~क र्ण क ृ वित्रम होने क े का र्ण क़ानून द्वा ा पैदा नहीं हुआ है, सिजसे स्पष्टीक र्ण द्वा ा स्पष्ट क ने की मांग की गई है, इसका कोई कानूनी आ ा नहीं है। विनष्कष,

26. उपयु,क्त विर्वोश्लेषर्ण क े आ ा प विनम्नलिललिखत विनष्कष, विनकाले गए हैंः

I. अधि विनयम की ा ा 37 में र्वोर्भिर्णत 'कोई भी व्यय' शब्द से व्यापा क े दौ ान होने र्वोाली हाविन का पता चलता है, क्योंविक यह उसक े लिलए प्रासंविगक है।

II. परि र्णामस्र्वोरूप, विकसी विन ा,रि ती द्वा ा विकसी ऐसे प्रयोजन क े लिलए, जो अप ा है या जो विर्वोधि द्वा ा प्रधितविषद्ध है, व्यय क े रूप में उपगत कोई हाविन अधि विनयम की ा ा 37 क े अनुसा कर्टेौती योग्य नहीं है।

III. विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विकया गया ऐसा व्यय/हाविन जो एक अप ा है, उसे व्यर्वोसाय या पेशे क े लिलए या उसक े लिलए प्रासंविगक नहीं माना जाएगा औ इसलिलए, कोई कर्टेौती नहीं की जा सकती है।

IV. दंड या जब्ती एक सामान्य काय,र्वोाही है औ इसलिलए इसक े अनुस र्ण में होने र्वोाली हाविन कर्टेौती क े लिलए उपलब् नहीं है, चाहे र्वोह व्यर्वोसाय की प्रक ृ धित क ु छ भी क्यों न हो, क्योंविक दंड या जब्ती को विकसी भी व्यर्वोसाय क े लिलए प्रासंविगक नहीं कहा जा सकता है।

V. प्या ा सिंसह(उप ोक्त) औ डॉ. र्टेी.ए. क ु ैशी (उप ोक्त) हाजी अजीज (उप ोक्त) में इस न्यायालय क े विनर्ण,य क े आलोक में औ ा ा 37 में स्पष्टीक र्ण 1 की प्रविर्वोविष्ट क े आलोक में सही कानून नहीं खते हैं।

27. पूर्वो क्त चचा, को ध्यान में खते हुए, मैं यह मानने क े लिलए इच्छ ु क हूं विक ाजस्र्वो की अपील को स्र्वोीका विकया जाना चाविहए, हालांविक इस तथ्य से अर्वोगत है विक अधि विनयम की ा ा 115 बीबीई में भार्वोी प्रक ृ धित क े मामले में आर्वोेदन नहीं हो सकता है। तदनुसा, ाजस्थान उच्च न्यायालय, बेंच जयपु द्वा ा डीबीआईर्टेीए संख्या 96/2003 औ डीबीआईर्टेीआ संख्या 6/1996 में विदनांक 22.11.2016 को पारि त विनर्ण,य औ आदेश को द्द विकया जाता है। खच, क े संबं में कोई आदेश नहीं विकया जाता है। न्याया ीश, एम. एम. सुंद ेश नई विदल्ली। 24 अप्रैल, 2023 यह अनुर्वोाद आर्दिर्टेवि»श्यल इंर्टेेलिलजेंस र्टेूल "सुर्वोास" क े जरि ये अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है । अस्र्वोीक र्ण - इस विनर्ण,य का अनुर्वोाद स्थानीय भाषा में विकया जा हा है, एर्वों इसका प्रयोग क े र्वोल पक्षका इसको समझने क े लिलए उनकी भाषा में क सक ें गे एर्वों यह विकसी अन्य प्रयोजन में काम नहीं ली जायेगी। सभी आधि कारि क एर्वों व्यर्वोहारि क उद्देश्यों क े लिलए उक्त विनर्ण,य का अंग्रेजी संस्क र्ण ही विर्वोश्वसनीय माना जायेगा एर्वों विनष्पादन एर्वों विक्रयान्र्वोयन में भी उसी को उपयोग में लिलया जायेगा।