Anup Bartaria v. Deputy Director Enforcement Directorate

Supreme Court of India · 21 Apr 2023
Bela M. Trivedi
Special Leave Petition (Crl) Nos. 2397-2398 of 2019
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the dismissal of petitions seeking quashing of money laundering prosecution, holding that prima facie involvement suffices for trial under the PMLA and inherent powers to quash complaints must be sparingly exercised.

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रिपोर्टेबल
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
आपराधिक अपीलीय अधिकारिता
विशेष अवकाश याचिका (सीआरएल) संख्या 2397-2398/2019
अनूप बार्टारिया और अन्य ...याचिकाकर्ता (एस)
बनाम
उप निदेशक प्रवर्तन निदेशालय और अन्य ...प्रतिवादी (एस)
निर्णय
बेला एम. त्रिवेदी, न्यायाधीश
JUDGMENT

1. याचियों ने इन याचिकाओं क े माध्यम से राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर की पीठ द्वारा 21.02.2019 को एस. बी. आपराधिक रिट याचिका संख्या 704/2018 और एस. बी. आपराधिक रिट याचिका संख्या 757/2018 में पारित सामान्य फ ै सले और आदेश को चुनौती दी है, जिसक े तहत उच्च न्यायालय ने 50,000/- रुपये का खर्च लगाने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

2. एस. बी. आपराधिक रिट याचिका संख्या 704/2018 याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया, वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड क े निदेशक द्वारा दायर की गई थी। एस. बी. क्रिमिनल प्रतिवादी याचिका संख्या 757/2018, याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया, निदेशक, वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड और मेसर्स वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड, क ं पनी अधिनियम, 1956 क े तहत पंजीक ृ त क ं पनी द्वारा दायर की गई थी। इनमें ईसीआईआर संख्या जेपीजेडओ/01/2016 में अभियोजन की शिकायत को रद्द करने की प्रार्थना की गई थी।

3. याचियों क े मामले क े अनुसार, याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया एक अग्रणी और सम्मानित इंजीनियर/वास्तुकार हैं, जिन्हें संरचनात्मक, वास्तुशिल्प और डिजाइन परामर्श सेवाएं प्रदान करने में विशेषज्ञता प्राप्त है और वह क ं पनी अधिनियम, 1956 क े तहत पंजीक ृ त क ं पनी वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड (तत्कालीन मैसर्स आर. एफ. प्रॉपर्टीज एंड ट्रेडिंग लिमिटेड) क े अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भी हैं। वर्ल्ड ट्रेड पार्क, जेएलएन मार्ग, जयपुर में स्थित रियल एस्टेट वाणिज्यिक संपत्तियों में से एक है। वर्ल्ड ट्रेड पार्क क ं पनी विभिन्न इच्छ ु क खरीदारों/खरीदारों को वाणिज्यिक स्थानों को बेचने और पट्टे पर देने क े व्यवसाय में लगी हुई है।

4. एक श्री भारत बम और उसक े सहयोगियों ने कथित वर्ल्ड ट्रेड पार्क में वाणिज्यिक इकाइयों की खरीद क े लिए याचिकाकर्ताओं से संपर्क किया और क ु छ इकाइयों को बुक किया। शुरुआत में इन वाणिज्यिक इकाइयों की बुकिंग राजदरबार मैटेरियल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड क े नाम पर की गई थी। उक्त भारत बम द्वारा, याचिकाकर्ताओं को डिमांड ड्राफ्ट और/या आरटीजीएस क े माध्यम से क ु ल मिलाकर

74.02 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। आगे याचिकाकर्ता-अनूप बरतारिया द्वारा उदयपुर में मिस्टर बम द्वारा लाए जा रहे एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट क े लिए वास्तुशिल्प डिजाइनिंग और परामर्श सेवाओं क े लिए भारत बम से 1.[4] करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। हालांकि, बाद में श्री बम और उसक े सहयोगियों ने याचियों से नई संस्थाओं क े नाम पर इकाइयों को पंजीक ृ त करने क े लिए कहा और इसलिए याचियों ने मेसर्स राज दरबार मैटेरियल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जमा की गई राशि वापस लौटा दी। तत्पश्चात् वर्ष 2015 में याचिकाकर्ताओं द्वारा श्री भरत और उनक े सहयोगियों क े पक्ष में 34 पंजीक ृ त बिक्री विलेख निष्पादित करक े 34 वाणिज्यिक स्थान बेचे गए। याचिकाकर्ताओं क े अनुसार, राशि डिमांड ड्राफ्ट और/या आरटीजीएस द्वारा से प्राप्त की गई और पंजीकरण क े लिए आवश्यक सभी कानूनी औपचारिकताओं का भी उचित समय पर पालन किया गया। श्री बम क े निर्देश क े अनुसार इन इकाइयों का कब्जा भी संबंधित संस्थाओं/व्यक्तियों को सौंप दिया गया था।

5. याचिकाकर्ताओं ने आईडीबीआई बैंक और डीएचएफएल क े साथ-साथ यूको बैंक से भी उपर्युक्त बैंकों क े पास वर्ल्ड ट्रेड पार्क की इकाइयों/स्थानों को गिरवी रखते हुए ऋण/वित्तीय सहायता ली थी। 04.10.2014 को, याचिकाकर्ताओं ने यूको बैंक से 23837 वर्ग किलोमीटर की एक विशेष अचल संपत्ति को जारी करने क े लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था और दिनांक 23.12.2014 को आईडीबीआई बैंक, जयपुर से किसी विशेष इकाई क े हस्तांतरण क े लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था, बशर्ते कि उसमें उल्लिखित शर्तों का अनुपालन किया गया हो। इसी तरह डीएचएफएल, मुंबई द्वारा 24.03.2015 को 11538 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की इकाइयों क े हस्तांतरण क े लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया था।

6. याचियों क े एक और मामले क े अनुसार, याचिकाकर्ता अनूप बार्टारिया ने वर्ल्ड ट्रेड पार्क में अपनी व्यक्तिगत क्षमता में कार्यालय संख्या 407, 408 और 409 नामक तीन कार्यालयों को खरीदा था और अपने चालू खाते द्वारा से राशि का भुगतान किया था, जिसका श्री भारत बम या उसक े सहयोगियों से कोई संबंध नहीं था.

7. सीबीआई, बीएस एंड एफसी, नई दिल्ली द्वारा उक्त भारत बम, उसक े सहयोगियों और सिंडिक े ट बैंक की तीन शाखाओं क े अधिकारियों क े खिलाफ (1) बापू बाजार, उदयपुर, (2) मालवीय नगर, जयपुर और (3) एमआई रोड, जयपुर और भारतीय दंड भा.दं.सं. की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471, 472, 474 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) क े तहत अपराधों क े लिए 07.03.2016 को प्राथमिकी संख्या RCBD1/2016/E/0002 दर्ज की गई। उक्त प्राथमिकी अन्य बातों क े साथ साथ यह आरोप लगाया गया था कि 2011-15 क े दौरान बैंक को धोखा देने क े लिए अभियुक्त भारत बम और उसक े सहयोगियों ने सिंडिक े ट बैंक क े अधिकारियों की मिलीभगत से अपने ग्राहकों/कर्मचारियों/परिवार क े सदस्यों क े साथ-साथ सिंडिक े मौजूदा ग्राहकों क े क े वाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और लगभग 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का लेन-देन किया, जिसक े परिणामस्वरूप 1055.79 करोड़ रुपये की हेराफ े री हुई। दिनांक 14.06.2016 को सीबीआई, बीएस एंड एफसी ने उक्त अपराधों क े लिए श्री भारत बम और सिंडिक े क ु छ अधिकारियों क े खिलाफ जयपुर की नामित सीबीआई अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।

8. चूंकि उक्त प्राथमिकी में सीबीआई द्वारा दर्ज क ु छ अपराध धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पी और एमएलए) क े तहत अनुसूचित अपराध थे, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जयपुर ने 11.07.2016 को एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करक े मनी लॉन्ड्रिंग क े अपराध क े लिए जांच शुरू की।

9. जांच क े दौरान, यह पता चला कि याचिकाकर्ता अनूप बार्टारिया, उनकी क ं पनियों मैसर्स वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड और मैसर्स सिंसियर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने भारत बम द्वारा बनाई और संचालित मैसर्स बी. क े. बिल्डर्स, मैसर्स राज दरबार मैटेरियल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, जय हनुमान क ं स्ट्रक्शन एंड मैसर्स ओमनिया एंटरटेनमेंट एंड हॉस्पिटैलिटी आदि क े खातों से 160 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की थी।

10. याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया ने उच्च न्यायालय क े समक्ष एस. बी. आपराधिक रिट याचिका संख्या 704/2018 क े रूप में रिट याचिका दायर की, जिसमें 11.07.2016 को कथित ईसीआईआर को रद्द करने क े लिए अनुरोध किया गया। हालांकि, उक्त याचिका क े लंबित रहने तक, कथित ईसीआईआर क े आधार पर अभियोजन शिकायत 17 जुलाई, 2018 को वर्तमान याचिकाकर्ताओं सहित कई व्यक्तियों क े खिलाफ दायर की गई थी। इसलिए याचिकाकर्ताओं ने एस. बी. आपराधिक रिट याचिका संख्या 757/2018 दायर कर उक्त अभियोजन शिकायत को रद्द करने क े लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया। दोनों रिट याचिकाएं 50,000/- रुपए क े खर्च क े साथ उच्च न्यायालय द्वारा खारिज आदेश दी गई ं ।

11. याचियों क े लिए विद्वान अधिवक्ता श्री स्वादीप होरा द्वारा उठाए गए विवाद की जड़ यह है कि याचियों का नाम न तो सिंडिक े ट बैंक और श्री भारत बम क े अधिकारियों क े खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में था और न ही बाद में ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर में उनका नाम था, हालांकि, ईडी ने उक्त ईसीआईआर की जांच क े बाद अभियोजन शिकायत दायर की है जिसमें याचियों को झूठा शामिल किया गया है। उनक े अनुसार, पीएमएलए की धारा 4 क े साथ पठित धारा 3 में परिभाषित धन शोधन क े अपराध क े लिए अनिवार्य घटक यह है कि व्यक्ति को इस अधिनियम की धारा 2 (1) (यू) क े तहत परिभाषित अपराध की आय से संबंधित किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में जानबूझकर या वास्तव में शामिल होना चाहिए और इसलिए, जब तक ज्ञान क े कथित आवश्यक घटक को पूरा नहीं किया जाता है, तब तक कथित अधिनियम क े तहत कोई शिकायत या कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है। वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता क े लापता होने क े कारण यह शिकायत कानून की नजर में तर्क संगत नहीं थी और पीएमएलए क े तहत याचिकाकर्ताओं क े खिलाफ किसी भी कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

12. याचियों क े खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अपनी प्रस्तुतियों को विस्तार से बताते हुए श्री होरा ने कहा कि याचियों का श्री भारत बम और उसक े सहयोगियों क े साथ क े वल क्र े ता-विक्र े ता संबंध था और याचियों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उन्हें प्राप्त धन अपराध से प्राप्त धन था। इस संबंध में श्री होरा ने निक े श ताराचंद शाह बनाम भारत संघ और अन्य पर भरोसा किया है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि शुरू में श्री भरत बम ने याचिकाकर्ताओं से मैसर्स राज दरबार मैटेरियल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड क े नाम से क ु छ इकाइयों को बुक करने का अनुरोध किया था। बाद में उन्होंने विभिन्न संबद्ध संस्थाओं क े नाम पर बिक्री विलेख निष्पादित करने का अनुरोध किया था, और इसलिए याचिकाकर्ताओं द्वारा 34 अलग-अलग पंजीक ृ त बिक्री विलेखों को निष्पादित किया गया था, और बाद में डिमांड ड्राफ्ट या आरटीजीएस क े माध्यम से प्रत्येक इकाई से अलग-अलग राशि प्राप्त की गई थी। मैसर्स राज दरबार सामग्री ट्रेडिंग प्रा. लिमिटेड से उक्त लेन-देन में, याचिकाकर्ताओं ने 76.72 करोड़ का बिक्री प्रतिफल प्राप्त किया था, न कि कथित रूप से 150 करोड़ रुपये का।

13. श्री होरा ने आगे कहा कि याचियों ने यूको बैंक, आईडीबीआई और डीएचएफएल से वैध एनओसी प्राप्त करने क े बाद इकाइयों को बेच दिया था और किसी भी बैंक ने याचियों क े खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है, क्योंकि उक्त बैंकों से एनओसी प्राप्त करने से पहले याचियों द्वारा उल्लिखित इकाइयों क े संबंध में सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया था। उन्होंने आगे प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया ने एक प्रसिद्ध वास्तुकार होने क े नाते उदयपुर में अपने रॉयल राज विला परियोजना क े लिए श्री भारत बम को वास्तुशिल्प सेवाएं प्रदान की थीं और श्री बम से प्राप्त शुल्क की राशि भी याचिकाकर्ताओं क े आयकर और सेवा कर विवरणियों में दर्शाई गई थी।

14. श्री होरा क े अनुसार, पी विधायक क े अधीन संज्ञेय अपराध नहीं हैं और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई पूरी जांच विधि क े किसी प्राधिकार क े बिना थी। अंत में, उन्होंने कहा कि श्री भारत बम से आत्यन्तिक रूप से असंबद्ध याचिकाकर्ताओं को व्यापार नुकसान और विश्वसनीयता का सामना करना पड़ रहा है और इसलिए पेप्सी फ ू ड्स लिमिटेड और अन्य बनाम विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट और अन्य क े मामले में इस अदालत क े फ ै सले को ध्यान में रखते हुए शिकायत को खारिज किया जाना चाहिए।

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15. इसक े विपरीत, प्रतिवादी की ओर से उपस्थित विद्वत अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जोरदार रूप से तर्क प्रस्तुत किया कि याचियों ने उच्च न्यायालय क े समक्ष तुच्छ याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें उच्च न्यायालय द्वारा लागत क े साथ खारिज कर दिया गया था, जो आदेश न्यायसंगत और उचित होने क े कारण इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। हरियाणा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य वाले मामले पर निर्भर करते हुए उन्होंने प्रस्तुत किया कि शिकायत को अभिखंडित करने की शक्ति का प्रयोग क े वल विरल से विरलतम मामले में किया जा सकता है जहां आरोपों को प्रथमदृष्टया कोई अपराध नहीं माना जाता है। वर्तमान मामले में, याचियों क े खिलाफ धन शोधन क े विशिष्ट आरोप हैं जो पी विधायक क े तहत अधिक ृ त अधिकारी द्वारा की गई जांच क े दौरान सामने आए थे, जो प्रथमदृष्टया उक्त अधिनियम क े तहत याचियों क े खिलाफ अपराध का गठन करते हैं ।

16. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर अभियोजन शिकायत पर भरोसा करते हुए, विद्वान एएसजी ने बताया कि याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया ने वर्ल्ड ट्रेड पार्क में अपने नाम पर तीन कार्यालय खरीदने की आड़ में सिंडिक े ट बैंक से 4.80 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी वाला ऋण लिया था, जिसक े लिए सिंडिक े ट बैंक ने 23.03.2017 को सीबीआई क े पास प्राथमिकी दर्ज कराई थी। यह भी पता चला कि 1.50 करोड़ रुपये क े सावधि ऋण की किस्त का भुगतान श्री भारत बम और उसक े सहयोगियों द्वारा नियंत्रित फर्जी फर्मों से धन प्राप्त करक े किया जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया द्वारा सिंडिक े ट बैंक में 30.09.2014 को खोला गया उक्त चालू बैंक खाता विशेष रूप से श्री भारत बम से काला धन प्राप्त करने क े लिए संचालित किया गया था और उक्त खाते में कोई अन्य लेनदेन नहीं हुआ था। आकलन वर्ष 2015-16 क े लिए दाखिल अनूप बार्टारिया क े आईटीआर में भी उक्त खाते की घोषणा नहीं की गई थी।

17. उन्होंने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया और उनकी क ं पनी ने उक्त परियोजना की इकाइयों को कथित बैंकों को गिरवी रखकर, आईडीबीआई बैंक/डीएचएफएल और यूको बैंक से वर्ल्ड ट्रेड पार्क की परियोजना क े लिए ऋण लिया था। मंजूरी की शर्तों क े अनुरूप, वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड ने आईडीबीआई बैंक में एक एस्क्रो खाता खोला था, जिसमें बिक्री से प्राप्त राशि को क े वल उसी खाते में जमा किया जाना था। हालांकि, श्री बार्टारिया ने उक्त एस्क्रो खाते में कोई राशि जमा नहीं की और श्री भारत बम और उनक े सहयोगियों को सिंडिक े ट बैंक में खाता खोलकर दागी धन को पार्क करने में मदद की। कार्यालय संख्या 407, 408 और 409 क े संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने क े लिए आईडीबीआई को दिए गए अनुरोध पत्रों में, दिखाए गए ग्राहक का नाम मेसर्स राज दरबार मैटेरियल लिमिटेड था जो अनबिकी संपत्तियों की स्थिति दर्शाता है ।

18. विद्वत एएसजी ने अपने इस कथन को पुष्ट करने क े लिए कि याचिकाकर्ता-अनूप बार्टारिया, इस क ं पनी मैसर्स वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड, जिसका पहले नाम मैसर्स एआरसी, क े रूप में रखा गया था, प्रति-शपथ पत्र पर भी भरोसा किया है। एस.भारत बम और उसक े सहयोगियों द्वारा बनाई गई और संचालित फर्जी फर्मों/क ं पनियों क े खातों से धोखाधड़ी का पता लगाने क े लिए अक्टूबर 2013 से मेसर्स सिंचर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 160 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी निधि प्राप्त हुई थी।

19. विद्वान एएसजी ने ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत पर, विशेष रूप से पैरा संख्या 10.[5] और 10.[8] पर बहुत अधिक भरोसा किया है कि क ै से याचिकाकर्ता- अनूप बार्टारिया अपराध में संलिप्त था और अपराध क े परिणामों को भारत बम क े साथ साझा कर रहा था और क ै से वह अनुसूचित अपराध क े द्वारा अपराध की आय क े उत्पादन, अधिग्रहण और उपयोग सहित अपराध की आय से जुड़ी गतिविधियों में सीधे रूप से शामिल था।

20. वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2019 द्वारा अंतःस्थापित उक्त प्रावधान क े स्पष्टीकरण क े साथ पठित धारा 45 में निहित प्रावधानों को लागू करते हुए, उन्होंने प्रस्तुत किया कि पीएमएलए क े तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। एएसजी ने अंत में प्रस्तुत किया कि इस न्यायालय पारित 25 मार्च, 2019 को प्रतिवादी क े खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने क े आदेश का निर्देश देने क े कारण, सक्षम न्यायालय क े समक्ष कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है और जांच भी स्थिर हो गई है, जिससे पी विधायक क े तहत ईडी पारित दायर मामले पर बहुत प्रतिक ू ल प्रभाव पड़ा है।

21. अब, इस बारे में उठाए गए पहले और सर्वप्रथम तर्क को ध्यान में रखते हुए कि क्या पीएमएलए क े तहत धनशोधन क े अपराध संज्ञेय हैं या नहीं, यह नोट किया जा सकता है कि अपराधों से संबंधित धारा 45 की उपधारा (1) को 2005 क े अधिनियम 20 द्वारा संशोधित किया गया था। संशोधन क े पूर्व धारा 45(1) इस प्रकार हैः "धारा 45-अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे (1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात क े होते हुए भी, - (क) इस अधिनियम क े अधीन दंडनीय प्रत्येक अपराध संज्ञेय होगा (ख) अनुसूची क े भाग क क े अधीन तीन वर्ष से अधिक क े कारावास की अवधि क े लिए दंडनीय अपराध क े अभियुक्त किसी व्यक्ति को जमानत पर या अपने बंध-पत्र पर तब तक छोड़ा नहीं जाएगा जब तक कि......" 22 तत्पश्चात्, उपधारा (1) को 1.7.2005 से 2005 क े अधिनियम संख्या 20 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। "(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात क े होते हुए भी, [इस अधिनियम क े अधीन] किसी अपराध क े अभियुक्त किसी व्यक्ति को जमानत पर या अपने बंधपत्र पर तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक....."

23. यह ध्यान देने योग्य है कि शंकाओं को दूर करने क े लिए, वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.8.2019 से धारा 45 का स्पष्टीकरण जोड़ा गया था, जो इस प्रकार हैः "स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने क े लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि "अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होने क े लिए" पद का वही अर्थ होगा और हमेशा से यह समझा जाएगा कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में इसक े विपरीत किसी बात क े होते हुए भी इस अधिनियम क े तहत सभी अपराध संज्ञेय अपराध होंगे और गैर-जमानती अपराध होंगे और तदनुसार इस अधिनियम क े तहत प्राधिक ृ त अधिकारी धारा 19 क े तहत शर्तों को पूरा करने और इस धारा क े तहत निहित शर्तों क े अधीन रहते हुए, बिना वारंट क े किसी आरोपी को गिरफ्तार करने क े लिए सशक्त हैं।"

24. उपर्युक्त उपधारा (1) क े प्रतिस्थापन और धारा 45 में स्पष्टीकरण क े अंतःस्थापन और धारा 45 क े संक्षिप्त शीर्षक में गैर-संशोधन से, इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता है कि पी.एम.एल.ए. क े अधीन सभी दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 में किसी प्रतिक ू ल बात क े होते हुए भी संज्ञेय और अजमानतीय अपराध थे, हैं और होंगे। तदनुसार, पीएमएलए अधिनियम क े तहत अधिक ृ त अधिकारियों को धारा 19 क े तहत शर्तों को पूरा करने क े अधीन बिना वारंट क े किसी आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार है, जो धारा 45 क े तहत निहित शर्तों क े अधीन है।अभियोजन पक्ष की शिकायत नं.ईसीआईआर संख्या जे पीजेडओ/01/2016 में भारत सरकार क े वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 11.11.2014 क े आदेश क े साथ पठित अधिनियम की धारा 45 क े तहत शिकायत दर्ज करने क े लिए सक्षम अधिक ृ त अधिकारी द्वारा दायर की गई है, जैसा कि स्वयं शिकायत में कहा गया है, अदालत को श्री होरा द्वारा की गई प्रस्तुतियों में कोई सार नहीं मिला है कि अभियोजन शिकायत अधिक ृ त अधिकारी द्वारा दर्ज नहीं की गई थी।

25. श्री होरा, याचियों क े विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया कि याचियों का ज्ञान कि वे किसी अपराध की आय से डिल कर रहे थे, पीएमएलए की धारा ३ क े तहत परिभाषित धन शोधन क े अपराध क े लिए अनिवार्य और आवश्यक घटक था, और यह कि इस मामले में, यह दिखाने क े लिए किसी भी सामग्री की अनुपस्थिति में, कि याचियों को इस बात की जानकारी थी कि वे भारत बम और उसक े सहयोगियों द्वारा किए गए अपराध की आय से डिल रहे थे, याचिकाकर्ताओं क े खिलाफ पीएमएलए क े तहत कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, उनक े पास खड़े होने क े लिए कोई आधार नहीं है । यह नोट किया जा सकता है कि मनी लॉन्ड्रिंग क े अपराध को पीएमएलए की धारा 3 में परिभाषित किया गया है, जो इस प्रकार हैः "धनशोधन का अपराध, जो कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल होने का प्रयास करता है या जानबूझकर सहायता करता है या जानबूझकर एक पक्ष है या वास्तव में इससे संबंधित किसी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल है [अपराध क े आगमों को छिपाने, कब्जा करने, अधिग्रहण या उपयोग करने और इसे बेदाग संपत्ति क े रूप में पेश करने या दावा करने] वह धनशोधन क े अपराध का दोषी होगा। [स्पष्टीकरण- शंकाओं को दूर करने क े लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई व्यक्ति धनशोधन क े अपराध का दोषी होगा यदि ऐसा व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध क े आगम से संबंधित निम्नलिखित प्रक्रियाओं या क्रियाकलापों में से किसी एक या अधिक में लिप्त पाया जाता है, अर्थात्: (क) छ ु पाना या, (ख) सम्पत्ति पर कब्जा करना या, (ग) अर्जन करना या, (घ) अदल-बदल करना या, (च) अदूषित संपत्ति क े रूप में प्रस्तुत करना । अपराध क े आगम से संबंधित प्रक्रिया या क्रियाकलाप एक सतत क्रियाकलाप है और तब तक जारी रहता है जब तक कि कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध क े आगम को छिपाकर या कब्जे में लेकर या अर्जित करक े या उसका उपयोग करक े या उसे अदूषित संपत्ति क े रूप में पेश करक े या किसी भी तरीक े से अदूषित संपत्ति क े रूप में दावा करक े उसका लाभ नहीं उठा रहा है।]

26. धारा 2 (यू) परिभाषित करती है कि "अपराध की आय" क्या है और धारा 2 (वाई) परिभाषित करती है कि "अनुसूचित अपराध" क्या है। रिकॉर्ड से पता चलता है कि ईडी द्वारा पीएमएलए क े तहत याचिकाकर्ताओं और अन्य क े खिलाफ ईसीआईआर में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई थी, जो सीबीआई द्वारा प्राथमिकी संख्या आरसीबीडी 1/2016/ई/0002 दिनांक 07.03.2016 और भारत बम और अन्य क े खिलाफ भा.दं.सं. की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471, 472 और 474 क े तहत अपराधों क े लिए सीबीआई द्वारा दिनांक 14.06.2016 को आरोप-पत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) क े साथ पठित धारा 13 (2) क े तहत जयपुर में नामित सीबीआई अदालत में दायर की गई थी। उक्त सभी अपराध कथित अधिनियम की धारा 2(य) क े अर्थ में सूचीबद्ध अपराध हैं. याचिकाकर्ता नं.1-अनूप बार्टारिया (अभियुक्त संख्या 5) को एम/एस क े अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक क े रूप में वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड और याचिकाकर्ता नं.2-वर्ल्ड ट्रेड पार्क लिमिटेड (अभियुक्त संख्या 8) को अभियोजन शिकायत में क्रमशः पैरा 10.[5] और 10.[8] में विस्तार से बताया गया है। इस मोड़ पर न्यायालय को कथित आरोपों क े गुण-दोष में जाने की आवश्यकता नहीं है । यह कहना पर्याप्त है कि अभियोजन शिकायत में दोनों याचिकाकर्ताओं क े खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग क े गंभीर आरोप लगाए गए हैं और कथित आरोपों को साबित करने क े लिए उक्त शिकायत में पर्याप्त सामग्री विवरण दिए गए हैं, जो प्रथमदृष्टया धन शोधन क े कथित अपराधों में याचिकाकर्ताओं की प्रत्यक्ष भागीदारी को दर्शाता है, जैसा कि कथित पीएमएलए की धारा 3 में परिभाषित किया गया है ।

27. धारा 3 में अंतर्विष्ट परिभाषा को ध्यान में रखते हुए, यह अभिनिर्धारित करना मूर्खता होगी कि अभियुक्त का यह ज्ञान कि वह अपराध क े आगम से संबंधित है, उक्त अधिनियम क े अधीन शिकायत दर्ज कराने क े लिए अभियोजन द्वारा दिखाए जाने की पूर्व शर्त या अनिवार्य शर्त होगी। जैसा कि परिभाषा से ही पता चलता है कि जो भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लिप्त होने का प्रयास करता है या जानबूझकर सहायता करता है या जानबूझकर एक पार्टी है या वास्तव में किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल है, जो अपराध की आय से जुड़ी है, जिसमें इसक े छिपाव, कब्जे, अधिग्रहण या उपयोग और इसे पेश करना या दावा करना शामिल है। बेदाग संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग क े अपराध का दोषी होगा। इसलिए, जानकारी रखने क े अलावा, यदि कोई व्यक्ति जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध की आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल होने का प्रयास करता है या वास्तव में शामिल है, तो वह भी मनी लॉन्ड्रिंग क े अपराध का दोषी है। वर्तमान मामले में, शिकायत में वर्णित सामग्री क े साथ-साथ अपराध की आय से संबंधित गतिविधियों में याचियों की प्रत्यक्ष भागीदारी का आरोप लगाया गया है, जिसक े लिए सक्षम न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाने की आवश्यकता होगी।

28. यह स्वयंसिद्ध है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 क े अधीन शिकायत अभिखंडित करने की शक्ति का प्रयोग बहुत कम और सतर्क ता क े साथ किया जाना चाहिए और वह भी विरल से विरलतम मामलों में।हरियाणा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य (पूर्वोक्त) वाले मामले में, इस न्यायालय ने क ु छ दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं कि धारा 482 क े तहत शक्तियों का उपयोग या तो किसी भी न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने क े लिए या न्याय क े उद्देश्यों को प्राप्त करने क े लिए किया जा सकता है। "102... अध्याय 14 क े अधीन संहिता क े विभिन्न सुसंगत उपबंधों क े निर्वचन की पृष्ठभूमि में और अनुच्छेद 226 क े अधीन असाधारण शक्ति क े प्रयोग से संबंधित विनिश्चयों की एक श्रृंखला में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि क े सिद्धांतों की या संहिता की धारा 482 क े अधीन अंतर्निहित शक्तियों की, जिन्हें हमने ऊपर उद्धृत और पुनः प्रस्तुत किया है, हम दृष्टांत क े माध्यम से ऐसे मामलों की निम्नलिखित श्रेणियां देते हैं, जिनमें ऐसी शक्ति का प्रयोग या तो किसी न्यायालय की प्रक्रिया क े दुरुपयोग को रोकने क े लिए या अन्यथा न्याय क े उद्देश्यों को प्राप्त करने क े लिए किया जा सकता है। यद्यपि कोई भी सटीक, स्पष्ट रूप से परिभाषित और पर्याप्त रूप से सुव्यवस्थित और सुसंगत मार्गदर्शक सिद्धांत या कठोर सूत्र अधिकथित करना और असंख्य प्रकार क े मामलों की एक विस्तृत सूची देना, संभव नहीं हो सकता है किंतु जहां ऐसी शक्ति का प्रयोग किया जाना चाहिए, वो निम्न प्रकार से हो सकती है- (1) जहां प्रथम सूचना रिपोर्ट या परिवाद में किए गए अभिकथन, भले ही वे उनक े फ े स वैल्यू पर लिए गए हों और उनक े संपूर्णता में स्वीकार किए गए हों, फिर भी प्रथमदृष्टया किसी अपराध का गठन नहीं करते हैं या अभियुक्त क े विरुद्ध मामला नहीं बनाते हैं। 2) जहां प्रथम इत्तिला रिपोर्ट में अभिकथन और प्रथम इत्तिला रिपोर्ट क े साथ अन्य सामग्री, यदि कोई हो, किसी प्राथमिकी का प्रकटन नहीं करती है, वहां संहिता की धारा 155 (2) की परिधि क े भीतर मजिस्ट्रेट क े आदेश क े सिवाय संहिता की धारा 156 (1) क े अधीन पुलिस अधिकारियों द्वारा अन्वेषण को न्यायोचित ठहराया हो । 3) जहां प्राथमिकी या परिवाद में किए गए अविवादित आरोप और साक्ष्य उसी क े समर्थन में संगृहीत सामग्री किसी अपराध क े किए जाने का खुलासा नहीं करती है और अभियुक्त क े विरुद्ध मामला बनाती है। 4) जहां प्रथम इत्तिला रिपोर्ट में अभिकथन प्राथमिकी का गठन नहीं करते किंतु क े वल अप्राथमिकी गठित करते हैं, वहां संहिता की धारा 155 (2) क े अधीन यथाअनुध्यात मजिस्ट्रेट क े आदेश क े बिना पुलिस अधिकारी द्वारा अन्वेषण की अनुज्ञा नहीं दी जाती है। 5) जहां प्रथम इत्तिला रिपोर्ट या परिवाद में लगाए गए आरोप इतने हास्यास्पद तर्क और स्वाभाविक रूप से असंभव हैं कि उनक े प्राथमिकी पर कोई भी विवेकशील व्यक्ति कभी भी इस न्यायसंगत निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता कि अभियुक्त क े विरुद्ध कार्यवाही करने क े लिए पर्याप्त प्राथमिकी है। 6) जहां संहिता या संबंधित अधिनियम (जिसक े अधीन कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित की जाती है) क े किसी उपबंध में संस्था और/या जहां संहिता या संबंधित अधिनियम में कोई विनिर्दिष्ट उपबंध है, व्यथित पक्षकार की शिकायत क े प्रभावी निवारण का उपबंध करते हुए कार्यवाहियों को जारी रखने क े लिए कोई अभिव्यक्त विधिक वर्जन उत्कीर्ण है। (7) जहां कोई दांडिक कार्यवाही स्पष्ट रूप से दुर्भावना क े साथ की जाती है और/या जहां कार्यवाही अभियुक्त से प्रतिशोध लेने और निजी और व्यक्तिगत वैमनस्य क े कारण उसक े प्रति द्वेष रखने क े उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण रूप से संस्थित की जाती है।

29. याचिकाकर्ताओं का मामला उपरोक्त श्रेणियों में से किसी क े अंतर्गत नहीं आता है। याचिकाकर्ता भी प्रतिवादी प्राधिकारियों क े कहने पर अदालत की प्रक्रिया क े दुरुपयोग का कोई मामला बनाने में विफल रहे हैं। धन शोधन क े कथित अपराध में याचियों की प्रथमदृष्टया संलिप्तता दिखाने क े लिए पर्याप्त सामग्री होने क े कारण, जैसा कि पी विधायक क े तहत अनुध्यात है, उच्च न्यायालय ने याचियों द्वारा दायर याचिकाओं को उचित रूप से खारिज कर दिया था। जैसा कि अधिनियम क े उद्देश्यों और कारणों क े विवरण में कहा गया है, मनी लॉन्ड्रिंग न क े वल देशों की वित्तीय प्रणालियों क े लिए, बल्कि उनकी अधाराता और संप्रभुता क े लिए भी एक गंभीर खतरा है। इसलिए ऐसे अपराधों से निपटने में कोई भी उदार दृष्टिकोण न्याय का उपहास होगा।

30. समाप्त करने से पहले, यह उल्लेखनीय है कि एसएलपी में याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय द्वारा 21.02.2019 को पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश को रद्द करने की मुख्य राहत क े लिए प्रार्थना करते हुए, एसएलपी पेपर बुक क े साथ कथित शिकायत को प्रस्तुत किए बिना, विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए मामलों) जयपुर क े समक्ष लंबित ईसीआईआर संख्या जे पीजेडओ/01/2016 में अभियोजन शिकायत संख्या 12/2018 में पूरी कार्यवाही और अभियोजन शिकायत पर रोक लगाने की मांग करते हुए अंतरिम राहत मांगी थी। ऐसा प्रतीत होता है कि विशेष अनुमति याचिकाएं 8 मार्च, 2019 को दायर की गई थीं, जिसमें यह घोषणा की गई थी कि सभी खामियों को दूर कर दिया गया है और उसक े बाद 25 मार्च, 2019 को याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति मांगने वाले एक आवेदन क े माध्यम से उक्त अभियोजन शिकायत नं.12/2018 को रिकॉर्ड पर रखा गया है। इस तथ्य क े अलावा कि एसएलपी दाखिल करने क े बाद, न्यायालय की अनुमति क े बिना कोई भी दस्तावेज दायर नहीं किया जा सकता था, जो वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगा गया प्रतीत नहीं होता है और न ही अदालत द्वारा मंजूर किया गया है, विशेष रूप से, जिन दस्तावेजों क े संबंध में एसएलपी में राहत मांगी गई है, वे आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज दाखिल नहीं करने की प्रथा को दृढ़ता से खारिज कर दिया गया है । यह नोट किया जा सकता है कि एसएलपी क े साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों, विशेष रूप से जिन दस्तावेजों क े संबंध में राहत की मांग की गई है, का पेश न किया जाना शुरुआत में एसएलपी की अस्वीक ृ ति का एकमात्र आधार हो सकता है।

31. पंजीकरण को एसएलपी क े पंजीकरण क े समय यह सत्यापित करने का भी निर्देश दिया जाता है कि क्या सभी प्रासंगिक दस्तावेज, विशेष रूप से, जिन दस्तावेजों क े संबंध में राहत मांगी गई है, वे एसएलपी क े साथ याचिकाकर्ताओं द्वारा पहली बार प्रस्तुत किए गए हैं या नहीं।

32. इस मामले को ध्यान में रखते हुए याचिकाएं खारिज की जाती हैं।पूर्व में दी गई अंतरिम राहत को तत्काल समाप्त कर दिया गया है। यह कहना अनावश्यक है कि इस आदेश में याचिकाकर्ताओं क े खिलाफ की गई टिप्पणियां क े वल प्रथमदृष्टया हैं और निचली निचली अदालत उक्त टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना मामले का निर्णय करेगी।

33. प्रतिवादी क े विद्वत वकील, अनुदेशों पर, इस न्यायालय को सूचित करते हैं कि चूंकि अन्वेषण समाप्त हो गया है और याचिकाकर्ता दायर किया गया है, इसलिए याची से अभिरक्षान्तर्गत पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

34. ई. डी. को विधि क े अनुसार अभियोजन शिकायत क े साथ आगे बढ़ने की स्वतंत्रता होगी।

35. इस निर्णय की प्रति महासचिव और रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्य करने क े लिए भेजी जाए। अजय रस्तोगी, न्यायाधीश बेला एम. त्रिवेदी, न्यायाधीश नई दिल्ली 21.04.2023 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास' क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीमित उपयोग क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।