Haryana Bijli Vitran Nigam Limited v. Adani Power (Mumbai) Limited

Supreme Court of India · 20 Apr 2023 · 2023 INSC 401
B. R. Gavai; V. M. Kanth
Civil Appeal No. 4143 of 2020
2023 INSC 401
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld CERC and APTEL orders granting Adani Power relief for domestic coal shortage under Change in Law provisions, dismissing the appellants' claim to limit relief to 70% domestic coal.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 4143/2020
उ र ह रयाणा बजली वतरण
िनगम िलिमटेड व अ य ...अपीलाथ (गण)
बनाम
अडाणी पावर (मुं ा) िलिमटेड
व अ य ... यथ (गण)
िनणय
बी. आर. गवई, या.
JUDGMENT

1. अपीलाथ गण व ुत अपीलीय अिधकरण, नई द ली ( जसे अब इसक े बाद "एपीट ईएल" क े प म संदिभत) ारा पा रत िनणय व आदेश दनां कत 3 नवंबर 2020 को चुनौती देते ह, जससे उनक े ारा दायर अपील को खा रज कया जाता है तथा यािचका सं या 97/एमपी/2017 म क य व ुत िनयामक आयोग ("सीईआरसी") ारा पा रत िनणय व आदेश दनां कत 31 मई 2018 को बनाए रखा जाता है।

2. सं ेप म, वतमान अपील को ज म देने वाले त य इस कार ह:

3. उ र ह रयाणा बजली वतरण िनगम िलिमटेड तथा द ण ह रयाणा बजली वतरण िनगम िलिमटेड (इसक े बाद "ह रयाणा यू टिलट ज"/"अपीलाथ गण" क े प म संदिभत) ह रयाणा रा य म उपभो ाओं 2023 INSC 401 को बजली क े वतरण व खुदरा आपूित का काय करने वाले वतरण अनु ि धारक ह। ह रयाणा यू टिलट ज ने दनांक 7 अग त 2008 को अडाणी पावर मुं ा िलिमटेड (इसक े बाद "एपी(एम)एल" क े प म संदिभत) क े साथ गुजरात रा य क े मुं ा म एपी(एम)एल ारा था पत उ पादन इकाइय 7,[8] व 9 से 1424 मेगावाट क अनुबंिधत मता क खर द क े िलए दो बजली खर द समझौते (सं ेप म "पीपीए") कए थे।

4. क य सरकार ारा अिधसूिचत मानक बोली दशािनदश क े अनुसार, बजली अिधिनयम, 2003 क धारा 63 क े ावधान क े तहत ह रयाणा यू टिलट ज ारा शु क गई शु क आधा रत ित पध बोली या क े अनुसार पीपीए म वेश कया गया था।

5. एपी(एम)एल ने सीईआरसी क े सम अ य बात क े साथ विभ न आधार पर शु क वृ म राहत क मांग करते हुए दनांक 5 जुलाई 2012 को यािचका सं. 155/एमपी/2012 दायर क । इसका एक आधार यह था क इंडोनेिशया क सरकार ारा या पत इंडोनेिशयाई विनयम, इंडोनेिशया से कोयले क े िनयात क े िलए आधार मू य लागू करने क े ावधान क े प रणाम व प कोयले क क मत अिधक हो गई जसक े प रणाम व प बजली उ पादन क लागत भी अिधक हो गई।

6. एपी(एम)एल ने पीपीए क े अनु छेद 13 क े दायरे म अनु छेद 12 व विध म प रवतन क े दायरे म एक अप रहाय घटना का भी दावा कया था।

7. सीईआरसी ारा उ यािचका सं. 155/एमपी/2012 म पा रत दनांक 2 अ ैल 2013 व 21 फरवर 2014 क े आदेश को व ान एपीट ईएल क े सम अपील क े एक समूह क े मा यम से चुनौती द गई थी, अपील सं. 100/2013 जसम मुख थी। व ान एपीट ईएल ारा अपील सं या 100/2013 व अपील क े समूह म पा रत दनांक 7 अ ैल 2016 क े आदेश को एनज वाचडॉग बनाम क य व ुत िनयामक आयोग व अ य क े मामले म इस यायालय क े सम चुनौती द गई थी। इस यायालय ने िन निल खत िनदश क े संदभ म दनांक 11 अ ैल 2017 को उ अपील का िनपटान कया: "57. दनांक 31-7-2013 क े प तथा संशोिधत शु क नीित दोन ह अिधिनयम क धारा 3 क े तहत जार कए जा रहे सां विधक द तावेज ह और इनम विध का भाव िन हत है। ऐसा होने पर, यह प है क जहां तक भारतीय कोयले क खर द का संबंध है, जस हद तक कोल इं डया और अ य भारतीय ोत से आपूित म कटौती क जाती है, इन द तावेज क े साथ पढ़े गए पीपीए म खंड 13.[2] म ावधान है क विध म प रवतन क े प रणाम का िनधारण करते समय, प कार को इस िस ांत का उिचत यान रखना होगा क विध म इस तरह क े प रवतन से भा वत प कार को मुआवजा देने का उ े य है मािसक शु क भुगतान क े मा यम से, भा वत प क आिथक थित को बहाल करना जैसे क विध म ऐसा प रवतन हुआ ह नह ं हो। इसक े अलावा, पीपीए क प रचालन अविध क े िलए, व े ता को लागत म कसी भी वृ /कमी क े िलए मुआवजे का िनधारण कया जाएगा और यह क य व ुत विनयामक आयोग ारा तय क गई तार ख से भावी होगा। चूँ क मामला यह है, हमारा वचार है क हालां क इंडोनेिशयाई विध म प रवतन पीपीए क े साथ पढ़े गए दशािनदश क े तहत विध म प रवतन क े प म यो य नह ं होगा, भारतीय विध म बदलाव िन त प से होगा। 58........... क य व ुत िनयामक आयोग, इस िनणय क े प रणाम व प, इस मामले को नए िसरे से देखेगा और यह िनधा रत करेगा क उन बजली उ पादक को या राहत द जानी चा हए जो पीपीए क े खंड 13 क े भीतर आते ह जैसा क हमने इस िनणय म अिभिनधा रत कया है।”

8. यह उ लेख कया जा सकता है क इस यायालय ने एनज वॉचडॉग (ऊपर) क े मामले म वशेष प से इस दावे को खा रज कर दया क इंडोनेिशयाई विनयम म प रवतन क े कारण कोयले क क मत म वृ भी विध म प रवतन क े समान होगी। इस यायालय ने अिभिनधा रत कया क क े वल भारत म विध म प रवतन ह उ पादक को विध म इस तरह क े प रवतन क े कारण या थापन क े लाभ का हकदार बनाएगा।

9. एनज वॉचडॉग (ऊपर) क े मामले म इस यायालय ारा पा रत आदेश क े अनुसार, एपी(एम)एल ने सीईआरसी क े सम यािचका सं. 97/एमपी/2017 दायर क । सीईआरसी ने दनांक 31 मई, 2018 क े आदेश क े मा यम से यािचका को वीकृ ित द तथा दनांक 1 अ ैल 2013 से दनांक 31 माच 2017 तक क अविध क े िलए अपने िनणय क े पैरा 46 म दए गए सू ीकरण क े आधार पर राहत देने का िनदश दया। इसक े बाद, पुन वलोकन यािचका सं. 24/आरपी/2018 भी दायर क गई। इसे सीईआरसी ारा दनांक 3 दसंबर 2018 क े आदेश क े मा यम से अ वीकार कर दया गया था। इससे यिथत होकर, अपीलकताओं ने व ान एपीट ईएल क े सम अपील दायर क ।

10. व ान एपीट ईएल ने िन निल खत चार मु को वचार क े िलए तैयार कयाः “मु ा सं. 1:- या क य आयोग का यह अिभिनधा रत करना उिचत था क अडाणी पावर क बोली पूर तरह से घरेलू कोयले क उपल धता पर आधा रत थी तथा इसिलए घरेलू कोयले क कमी क े कारण विध म प रवतन से राहत पाने का हकदार था? मु ा सं. 2:- या घरेलू कोयले म कमी विध म प रवतन का कारण थी तथा मुआवजे को एनसीड पी 2013 म िन द एसी यू क े 100% और एसी यू क े 65%, 65%, 67% व 75% क े बीच क े अंतर तक सीिमत कया जाना चा हए? मु ा सं. 3:- या क य आयोग ारा अनुमित द गई विधक मुआवजे म प रवतन क शु आत क तार ख बजली मं ालय क े दनांक 31.07.2013 क े प क े पूव यापी सं या क े समान है? मु ा सं. 4:- या क य आयोग ने यािचका सं. 79/एमपी/2013 - जीएमआर कमलंगा एनज िलिमटेड व अ य बनाम ड एचबीवीएनएल व अ य ("जीएमआर मामला") म अपने पहले क े आदेश म अिधकिथत विध मुआवजे म प रवतन क गणना क े िलए काय णाली क अनदेखी कर ु ट क ?

11. प कार क े व ान अिधव ा को सुनने क े बाद, व ान एपीट ईएल ने सभी मु को यथ सं. 1 - उ पादक क े प म अिभिनधा रत कया तथा अपील को खा रज कर दया। इससे यिथत होकर, अपीलािथय ने वतमान अपील दायर क है।

12. हमने अपीलािथय क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी एम. जी. रामचं न तथा यथ सं. 1 - एपी(एम)एल क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा डॉ. ए. एम. िसंघवी को सुना है।

13. ी रामचं न तुत करते ह क सीईआरसी क े साथ-साथ व ान एपीट ईएल ने 100% कोयले क उपल धता म कमी क े िलए विध म प रवतन राहत देने म घोर भूल क है। वह तुत करते ह क एपी(एम)एल क बोली और पीपीए 70:30 क े अनुपात म घरेलू कोयले और आयाितत कोयले दोन पर आधा रत थे। इस कार, राहत क े वल 70% घरेलू कोयले म कमी क े संबंध म द जा सकती है। उ ह ने तुत कया क एपी(एम)एल ने इस आधार पर बोली तुत क है क कोयले का 30% आयात कया जाएगा, जब क कोयले का 70% वदेशी प से खर दा जाएगा। उ ह ने तुत कया क सीईआरसी तथा व ान एपीट ईएल ारा पा रत आदेश का भाव यह है क एपी(एम)एल को इस वचार पर लाभ दया गया है क इसक बोली 100% घरेलू कोयले पर आधा रत थी।

14. ी रामचं न आगे तुत करते ह क एपी(एम)एल क े विभ न अिभकथन क े अवलोकन से प प से पता चलता है क एपी(एम)एल क बोली 70:30 क े अनुपात म घरेलू और आयाितत कोयले पर आधा रत थी। हालाँ क, इन सभी द तावेज को एपीट ईएल ारा नजरअंदाज कर दया गया है। ी रामचं न तुत करते ह क अिभलेख पर रखे गए द तावेज से पता चलता है क एपी(एम)एल ने तुत कया था क वह बजली उ पादन क े िलए आयाितत कोयले का उपयोग करेगा। वे तुत करते ह क एपी(एम)एल ारा तुत बोली क े कायकार सारांश से पता चलता है क एपी(एम)एल ने इसम तुत कया था क बजली संयं का रणनीितक लाभ मुं ा बंदरगाह क िनकटता थी, जहां कोयले का आयात कया जाता है। व ान अिधव ा तुत करते ह क एपी(एम)एल क े अिभवचन को देखते हुए, यह प था क 30% आयाितत कोयले क खर द करना उसक ज मेदार थी। इसिलए, वह तुत करते ह क आयाितत कोयले क 30% कमी क े िलए राहत देना एक वकृ ित क े अलावा और क ु छ नह ं है।

15. ी रामचं न आगे तुत करते ह क विध म प रवतन क घटना क े कारण मुआवजे क गणना क प ित को भी सीईआरसी ारा ु टपूण तर क े से लागू कया गया है तथा व ान एपीट ईएल ारा इसक पु क गई है। उ ह ने तुत कया क जस प ित को लागू कया जाना चा हए था, वह एक तरफ वैक पक कोयले क े आयाितत माल क लागत तथा दूसर तरफ घरेलू कोयले या उ ृत ऊजा शु क, जो भी अिधक हो, क चिलत आयाितत माल क लागत क े बीच का अंतर था। वे तुत करते ह क य द विध म कोई प रवतन नह ं हुआ होता तथा एपी(एम)एल को घरेलू कोयले क पूर मा ा ा हो गई होती, तो उसे घरेलू कोयले क चिलत आयाितत माल क लागत को वयं वहन करना पड़ता, भले ह ऐसी लागत बोली म उ ृत ऊजा शु क से कम या अिधक हो। वे तुत करते ह क य द घरेलू कोयले क ऐसी आयाितत माल क लागत उ ृत ऊजा शु क से अिधक है, तो एपी(एम)एल घरेलू कोयले क आयाितत माल क लागत तथा उ ृत ऊजा शु क क े बीच क े अंतर का दावा करने का हकदार नह ं था।

23,842 characters total

16. ी रामचं न आगे तुत करते ह क व ान एपीट ईएल इस आधार पर कायवाह करने म गलत है क सीईआरसी क े सम अपीलकताओं ारा यािचका सं. 79/एमपी/2013 - जीएमआर कमलंगा एनज िलिमटेड व अ य बनाम ड एचबीवीएनएल व अ य (इसक े बाद "जीएमआर मामला" क े प म संदिभत) म अपने आदेश म अिधकिथत विध मुआवजे म प रवतन क गणना हेतु काय णाली पर कोई आप नह ं क थी।

17. ी रामचं न ने आगे तुत कया क अपीलकताओं को वदेशी प से खर दे जाने वाले कोयले क 70% म कमी क े िलए विध म प रवतन क े कारण लाभ देने पर कोई आप नह ं है।

18. इसक े वपर त डॉ. ए. एम. िसंघवी तुत करते ह क एपी(एम)एल ारा तुत बोली रा ीय कोयला वतरण नीित, 2007 (सं ेप म, "एनसीड पी 2007") क े आधार पर थी। वे तुत करते ह क 70% घरेलू कोयले और 30% आयाितत कोयले क े संबंध म बोली म कोई वभाजन नह ं था। व ान व र अिधव ा तुत करते ह क विध म प रवतन क े दावे क े िलए अंितम ितिथ दनांक 17 नवंबर 2007 होगी यानी बोली जमा करने क अंितम ितिथ अथात 24 नवंबर 2007 से 7 दन पहले होगी। यह तुत कया जाता है क दनांक 7 अग त 2008 को ह रयाणा यू टिलट ज क े साथ ह ता रत पीपीए म भी घरेलू तथा आयाितत कोयले का कोई वभाजन नह ं है। वह तुत करते ह क हालां क थायी सहब ता सिमित (द घकािलक) (इसक े बाद "एसएलसी (एलट )" क े प म संदिभत) ने अपनी क ु ल मता क े 100% कोयले क े िलए एपी(एम)एल क े आवेदन पर वचार करते हुए, इसने 1980 मेगावाट का क े वल 70% यानी क े वल 1386 मेगावाट हेतु सहब ता क अनुमित द है। उ ह ने तुत कया क शेष 30% रािश को भ व य हेतु आ थिगत कर दया गया था।

19. डॉ. िसंघवी ने आगे तुत कया क एसएलसी (एलट ) एक सां विधक िनकाय है तथा इसका िनणय विध म प रवतन क े समान होगा। इस संबंध म, वह अशोक मोकलेस कोल इं डया (पी) िलिमटेड व अ य बनाम भारत संघ व अ य क े मामले म इस यायालय क े िनणय पर भरोसा जताता है।

20. जब हमने व ुत अपील क े इस समूह को सुना, तो सभी प कार क े बीच यह सहमित हुई क इस यायालय को पहले िस वल अपील सं. 684/2021 (महारा रा य इले िसट ड यूशन क ं पनी िलिमटेड बनाम अडाणी पावर महारा िलिमटेड व अ य) [सं ेप म "एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य"] एवं िस वल अपील सं. 6927/2021 (महारा रा य इले िसट ड यूशन क ं पनी िलिमटेड बनाम जीएमआर वारोरा एनज िलिमटेड व अ य) को िनण त करना चा हए यूं क समूह क सभी अपील म शािमल तीन मु सामा य थे। यह तुत कया गया था क उन दोन अपील को तीन सामा य मु पर िनणय लेकर िनण त कया जा सकता है। हालां क, जहां तक अ य अपील का संबंध है, यह तुत कया गया क तीन सामा य मु क े अित र, कितपय अित र मु े भी शािमल थे और यह सहमित हुई क उन दो अपील पर िनणय लेने क े बाद, इन अित र मु पर वचार करने क े िलए अ य अपील पर सुनवाई क जानी चा हए।

21. उ तीन सामा य मु े इस कार ह: i ( ) या एनसीड पी 2013 क े कारण ‘ विध म प रवतन’ राहत ‘वा त वक आंकड़ ’ आधार पर होनी चा हए अथात एनसीड पी 2007 क े संदभ म सुिन त मानक य कोयले क आव यकता क े 100% क तुलना म या एनसीड पी 2013 म उ ेरक तर तक सीिमत होनी चा हए अथात सुिन त कोयला मा ा (एसी यू) का 65%, 65%, 67% व 75%? ii ( ) या ' विध म प रवतन' राहत क गणना क े िलए, संचालन मानक का 'वा त वक आंकड़ ' पर वचार कया जाना चा हए या बोली म तुत तकनीक जानकार क े अनुसार? iii ( ) या ' विध म प रवतन' राहत मुआवजा दनांक 1 अ ैल 2013 ( व ीय वष क े आर भ) या दनांक 31 जुलाई 2013 (एनसीड पी 2013 क ितिथ) से दया जाना है?

22. प कार क े िलए सभी व ान अिधव ाओं को व तार से सुनने क े बाद, एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य (ऊपर) क े मामले म िनणय व आदेश दनां कत 3 माच 2023 क े ारा, इस यायालय ने उपरो तीन मु पर वचार करने क े बाद उन दोन अपील को िनण त कया।

23. इस यायालय ारा पहले मु े का जवाब दया गया था, जसम अिभिनधा रत कया गया था क घरेलू कोयले क कमी क े िलए ' विध म प रवतन' राहत 'वा त वक आंकड़ ' पर होनी चा हए यानी एनसीड पी, 2007 क े संदभ म मानक य कोयले क आव यकता क े 70% क े व । जहां तक दूसरे मु े का संबंध है, यह अिभिनधा रत कया गया क टेशन ताप दर (सं ेप म "एसएचआर") और सहायक खपत पर विनयम या वा त वक आंकड़ क े िनयम क े अनुसार वचार कया जाना चा हए, जो भी कम हो। तीसरे मु े का जवाब यह अिभिनधा रत करते हुए दया गया क एनसीड पी, 2013 क े िलए ' विध म प रवतन' घटना क शु आत क ितिथ दनांक 1 अ ैल 2013 है।

24. इस कार, मु ा सं 2 व 3, जो व ान एपीट ईएल ारा दनांक 3 नवंबर 2020 क े आ े पत िनणय व आदेश म तैयार कए गए थे, पूण प से एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य (ऊपर) क े मामले म इस यायालय क े िनणय क े दायरे म आते ह। वतमान अपील म जन शेष दो मु पर वचार कया जाना आव यक है, वे इस कार ह: "मु ा सं. 1:- [जैसा क व ान एपीट इएल ारा तैयार कया गया है] या क य आयोग का यह अिभिनधा रत करना उिचत था क अडाणी पावर क बोली पूर तरह से घरेलू कोयले क उपल धता पर आधा रत थी तथा इसिलए घरेलू कोयले क कमी क े कारण विध म प रवतन से राहत पाने का हकदार था? मु ा सं. 4:- [जैसा क व ान एपीट इएल ारा तैयार कया गया है] या क य आयोग ने यािचका सं. 79/एमपी/2013 - जीएमआर कमलंगा एनज िलिमटेड व अ य बनाम ड एचबीवीएनएल व अ य ("जीएमआर मामला") म अपने पहले क े आदेश म अिधकिथत विध मुआवजे म प रवतन क गणना क े िलए काय णाली क अनदेखी कर ु ट क ?

25. इससे पहले क हम उपरो दो मु पर वचार करने क े िलए अ सर ह, हम यान देते है क वतमान अपील सीईआरसी तथा व ान एपीट ईएल ारा पा रत समवत आदेश से उ ूत होती है।

26. एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य (ऊपर) क े मामले म यह यायालय, सीईए, सीईआरसी व व ान एपीट ईएल जैसे विभ न वशेष िनकाय क े गठन क े संबंध म व ुत अिधिनयम, 2003 क े तहत ासंिगक ावधान पर वचार करने क े बाद, अिभिनधा रत करता है क ये िनकाय े क े वशेष से बने िनकाय ह। इस मु े पर विभ न िनणय पर वचार करने क े बाद, इस यायालय ने इस कार ट पणी क ः "123. हाल ह म, ववेक नारायण शमा बनाम भारत संघ क े मामले म इस यायालय क सं वधान पीठ ने अिभिनधा रत कया क यायालय को े क े वशेष ारा िलए गए िनणय म ह त ेप करने म सावधानी बरतनी चा हए तथा जब तक यह नह ं पाया जाता है क वशेष िनकाय अिनवाय वैधािनक ावधान पर वचार करने म वफल रहा है या िलए गए िनणय बाहर वचार पर आधा रत ह या वे य प से मनमाने तथा अवैध ह, इस यायालय क े िलए यह उिचत नह ं होगा क वह अपने वचार को वशेष िनकाय क े वचार से ित था पत कर।"

27. य प वतमान अपील सीईआरसी क े साथ-साथ एपीट ईएल ारा पा रत समवत आदेश से उ ूत होती है, क गई तुितय को देखते हुए, हम वरोधी तुितय पर वचार करने क े िलए आगे बढ़गे।

28. जहां तक घरेलू तथा आयाितत कोयले क े वभाजन क े संबंध म पहले मु े का संबंध है, हमने प कार ारा अिभलेख पर रखे गए द तावेज क जांच क है।

29. अिभलेख पर रखे गए कसी भी द तावेज से यह पता नह ं चलता क एपी(एम)एल ारा यह अिभवेदन दया गया था क इसक बोली 70% घरेलू तथा 30% आयाितत कोयले पर आधा रत है। जहाँ तक उस द तावेज का संबंध है जस पर ी रामचं न ने भरोसा कया है यानी बोली क े कायकार सारांश का संबंध है, वह इस कार हैः "एपीएल क े वतक अडाणी एंटर ाइजेज िलिमटेड, देश क सबसे बड़ कोयला आयातक क ं पनी है। बजली संयं का रणनीितक लाभ मु ा बंदरगाह से इसक िनकटता है, जहाँ कोयला आयात कया जाता है। मुं ा बंदरगाह म 17 मीटर गहरे ा ट क े साथ व तर य कोयला हडिलंग सु वधाएं ह, जो पलटे हुए जहाज को साथ म लंगर डालने क सहूिलयत देता है।"

30. इस कार यह देखा जा सकता है क एपी(एम)एल ारा कायकार सारांश म जो कहा गया है वह यह है क इसक े व ुत संयं का एक रणनीितक लाभ है य क यह मुं ा बंदरगाह क े िनकट है। इसम आगे कहा गया है क मुं ा बंदरगाह क े पास 17 मीटर गहरे ा ट क े साथ व तर य कोयला हडिलंग सु वधाएं ह, जो पलटे जहाज को बगल म लंगर डालने क सु वधा देता है। उ द तावेज क े अनुसार, इसने ह रयाणा बजली उ पादन िनगम िलिमटेड (एचपीजीसीएल) को मुं ा प रयोजना क े चौथे चरण क े 1980 मेगावाट ( x 660 मेगावाट) व तार से 1425 मेगावाट क आपूित करने का ताव दया है। दया गया अ यावेदन है क यह या तो आयाितत या वदेशी कोयले का उपयोग करेगा।

31. य द अपीलािथय क े इस तक को वीकार कया जाए क बोली क े समय घरेलू कोयले क आपूित का कोई आ ासन नह ं था, तो अपीलािथय का यह ित वरोध क एपी(एम)एल कोयले क 70% क कमी का हकदार है, अपने आप म ह वरोधाभासी है।

32. कसी भी मामले म, त य पर भी, यह यान दया जाना चा हए क ित वरोध सारह न है। एपी(एम)एल ने 1980 मेगावाट क मता वाली मुं ा प रयोजना क े अपने चौथे चरण क े व तार से 1425 मेगावाट बजली क आपूित करने क पेशकश क है। ह रयाणा यू टिलट ज एवं एपी(एम)एल क े म य 1424 मेगावाट क े िलए पीपीए कया गया है।

33. एसएलसी(एलट ) ने दनांक 12 नवंबर, 2008 को अपनी बैठक म क य व ुत ािधकरण (सं ेप म “सीईए”), व ुत मं ालय (सं ेप म “एमओपी”) क िसफा रश क े आधार पर मुं ा प रयोजना क े व तार क े 1980 मेगावाट था पत मता क े 70 ितशत अथात 1386 मेगावाट क े िलए एलओए जार करने क े िलए ािधकृ त कया था। यह एनसीड पी 2007 क े ावधान क े अनुसार कया गया था। जहां तक शेष मता का संबंध है, एमओपी क िसफा रश और अ य ासंिगक कारक क े आधार पर भ व य म एसएलसी (एलट ) ारा िनणय लेने क े िलए थिगत कर दया गया था।

34. इस कार यह देखा जा सकता है क एपी(एम)एल विध म प रवतन क े कारण लाभ का हकदार होगा य द घरेलू कोयले क कोई कमी थी जैसा क एसएलसी(एलट ) ारा दनांक 12 नवंबर 2008 क अपनी बैठक म आवं टत करने का िनणय िलया गया था, जसका समापन कोयला मं ालय (सं ेप म, "एमओसी") ारा दनांक 25 जून 2009 को एक एलओए जार करने और एपी(एम)एल ारा दनांक 9 जून 2012 को सीआईएल क े साथ धन आपूित समझौते (सं ेप म, "एफएसए") पर ह ता र करने म हुआ।

35. िन ववाद प से, एपी(एम)एल का दावा 70% क आ ािसत मा ा म कमी क े संबंध म है, न क उससे अिधक।

36. व ान एपीट ईएल ारा पा रत आदेश से, यह प है क अपीलकताओं का यह सुसंगत ख रहा है क एपी(एम)एल महानद कोल फ ड िलिमटेड (सं ेप म "एमसीएल") क े साथ दनांक 9 जून 2012 क े एफएसए से उ प न होने वाले धन सहब ता से 1424 मेगावाट क अनुबंिधत मता का उ पादन और आपूित करने क थित म था। यह उसका ख रहा है क एपी(एम)एल को पहले अपीलकताओं क अनुबंिधत मता क े िलए पूर घरेलू कोयले क उपल धता का उपयोग करना चा हए, और फर ल त पीएलएफ तक पहुंचने क े िलए हुई कमी क े िलए आयाितत कोयले का उपयोग करना चा हए। यह उसका आगे ख रहा है क उपल ध पूरे घरेलू कोयले का ह रयाणा यू टिलट ज को अनुबंिधत 1424 मेगावाट क े िलए होना चा हए।

37. दनांक 31 जुलाई 2017 क े अपने उ र म ह रयाणा यू टिलट ज ने प प से कहा हैः "इस कार एमसीएल से ा वा त वक कोयले को ह रयाणा पीपीए क े तहत आपूित क जाने वाली बजली क े प म माना जाना आव यक है ता क अप रहाय घटना क े तहत राहत िमल सक े ।"

38. यािचका सं. 97/एमपी/2017 म अपने अ.आ. सं. 12/2018 दनां कत 4 माच 2018 म ह रयाणा यू टिलट ज ने िन नानुसार दोहराया हैः “यह तुत कया गया है क एफएसए दनां कत 9.6.2012 क े तहत एमसीएल से उपल ध घरेलू कोयले क पूर मा ा का उपयोग क े वल पीपीए दनां कत 7.8.2008 क े तहत ह रयाणा यू टिलट ज को बजली क े उ पादन व आपूित क े िलए कया जाना था।”

39. यह भी यान देने यो य है क व ान एपीट ईएल ने सुनवाई क े दौरान ह रयाणा यू टिलट ज क ओर से उप थत व ान अिधव ा से एक ासंिगक कया था क या एमसीएल से ा पूरे वा त वक कोयले का उपयोग ह रयाणा पीपीए क े तहत आपूित क गई बजली क े िलए कया गया था। इस का उ र इस कार दया गयाः "सुनवाई क े दौरान ी रामचं न ने यह वीकार कया क अडाणी पावर एमसीएल से ा पूरे वा त वक कोयले का उपयोग ह रयाणा पीपीए क े तहत बजली आपूित क े िलए कर रह है।"

40. इस त या मक थित को यान म रखते हुए क पूरे घरेलू कोयला सहब ता का उपयोग ह रयाणा यू टिलट ज को बजली क आपूित क े िलए कया गया था, हमार राय म ह रयाणा यू टिलट ज क ओर से यह कहना अ यायपूण है क था पत मता क े 70% को और वभा जत कया जाना चा हए और विध म प रवतन लाभ क े वल था पत मता क े 70% क े 70% तक ह सीिमत होना चा हए जो एसएलसी (एलट ) ारा आवं टत कया गया था।

41. यहां तक क ह रयाणा यू टिलट ज क े अनुसार, एफएसए क े तहत आने वाले पूरे कोयले का उपयोग समझौता ापन (सं ेप म "एमओयू") क े अनुसार बजली उ पादन क े िलए कया जाना आव यक था। इसिलए, हमारे वचार म, एफएसए क े तहत आ ािसत कोयले क कमी क े लाभ से इनकार करना, या थापन िस ांत क े वपर त होगा जैसा क एनज वॉचडॉग (ऊपर) तथा जयपुर व ुत वतरण िनगम िलिमटेड व अ य बनाम अडाणी पावर राज थान िलिमटेड व अ य क े मामल म इस यायालय ारा अिभिनधा रत कया गया है।

42. कसी भी मामले म, व ान एपीट ईएल ने प कया है क व ान एपी(एम)एल न तो दावा कर रहा था और न ह सहब ता कोयले, यानी 1386 मेगावाट म कवर कए गए से अिधक अित र विध मुआवजे म कसी भी प रवतन का दावा करने का हकदार था।

43. इस संबंध म तक का दूसरा अंग यह है क एपी(एम)एल ने कोयले क े आयात क े िलए वदेशी क ं पिनय क े साथ एमओयू कए थे।

44. व ान एपीट ईएल क े एक विश क े उ र म, ह रयाणा यू टिलट ज क े व ान अिधव ा ारा यह वीकार कया गया क समझौता ापन कृ ित म सामा य थे तथा मुं ा पावर लांट क े िलए विश नह ं थे। इस कार, व ान एपीट ईएल का यह िन कष क बोली क े साथ संल न समझौता ापन क े वल बोली म भाग लेने क अपनी मता दखाने क े िलए थे, और यह नह ं कहा जा सकता है क बोलीदाता को प रयोजना क े िलए 30% क सीमा तक आयाितत कोयले क खर द करनी थी, को वकृ त नह ं कहा जा सकता है।

45. एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य (ऊपर) क े मामले म, इस यायालय ने इस यायालय क े पहले क े िनणय का व तार से उ लेख कया है और इस कार ट पणी क हैः "132. िन ववाद प से, एनज वॉचडॉग (ऊपर) क े मामले म और साथ ह अडाणी राज थान मामले (ऊपर) म इस यायालय ने यह अिभिनधा रत कया है क विध म प रवतन क े कारण, उ पादन करने वाली क ं पिनयां मुआवजे क हकदार थीं ता क प कार को उसी आिथक थित म वापस लाएं जैसे क विध म ऐसा प रवतन कभी हुआ ह नह ं हो। य द विध म प रवतन नह ं हुआ होता तो उ पादन करने वाली क ं पिनयां सीआईएल / एफएसए क े तहत कोयला क ं पिनय ारा आ ािसत आपूित क हकदार होती।"

46. इसिलए, हमारा सु वचा रत वचार है क समवत िन कष म कोई ु ट नह ं पाई जा सक क एपी(एम)एल अनुबंिधत मता क े 100% अथात 1386 मेगावाट क े िलए विध म प रवतन राहत का हकदार था, जो मुं ा प रयोजना क े व तार क 1980 मेगावाट क था पत मता का 70% है। दूसरे श द म, सीईआरसी और व ान एपीट ईएल का िन कष इस आशय का है क एपी(एम)एल था पत मता क े 70% यानी 1386 मेगावाट से अिधक विध म प रवतन क े कसी भी लाभ का हकदार नह ं होगा। उ िन कष को अिभलेख पर मौजूद साम ी या बा वचार पर आधा रत पर आधा रत न होना नह ं कहा जा सकता है।

47. अब हमारे पास काय णाली क े संबंध म दूसरा मु ा बचा है।

48. ह रयाणा यू टिलट ज क िशकायत है क सीईआरसी ारा अपनाए गए विध म प रवतन क े कारण लाभ देने क काय णाली और व ान एपीट ईएल ारा पु क गई काय णाली जीएमआर, ड बी पावर आ द क े पहले क े मामल म पहले िनधा रत क गई काय णाली क े वपर त है।

49. व ान एपीट ईएल ारा पा रत आदेश क े अवलोकन से पता चलेगा क एपी(एम)एल ने जीएमआर कमलंगा एनज िलिमटेड व अ य बनाम द ण ह रयाणा बजली वतरण िनगम िलिमटेड व अ य म पीपीए क े तहत उ ृत शु क को आधार मानते हुए सीईआरसी ारा अनुमो दत काय णाली क े आधार पर एक काय णाली का ताव दया था।

50. व ान एपीट ईएल ने दनांक 10 अग त, 2017 को सीईआरसी क कायवाह क े अिभलेख को संदिभत कया था, जो इस कार हैः "3. आयोग क े इस सवाल क े जवाब म क या जीएमआर मामले म द गई प ित क े आलोक म यािचकाकता ारा अपनाई गई प ित ह रयाणा यू टिलट ज को वीकाय है, व ान अिधव ा ने सकारा मक जवाब दया।"

51. व ान एपीट ईएल ने यािचका सं या 97/एमपी/2017 म अ.आ. सं. 57/2017 म सीईआरसी क े दनांक 28 िसतंबर 2017 क े आदेश का भी उ लेख कया था, जो िन नानुसार है: "7....... ह रयाणा यू टिलट ज, जो एकमा यथ है, ने आवेदक ारा क गई गणना पर आप नह ं क है।"

52. व ान एपीट ईएल ने सीईआरसी ारा पुन वलोकन यािचका सं. 24/आरपी/2018 म पा रत दनांक 3 दसंबर 2018 क े आदेश को भी संदिभत कया था, जो इस कार हैः "उपरो से यह प है क आयोग ने अडाणी पावर तथा यास क तुितय पर उिचत वचार करने क े बाद आ े पत आदेश क े पैरा 46 म दनांक 1.4.2013 से 31.3.2017 तक क अविध क े िलए विध म प रवतन क े तहत घरेलू कोयले क कमी क े कारण राहत क गणना हेतु काय णाली पर सचेत प से िनणय िलया था। पुन वलोकन यािचकाकताओं ने घरेलू कोयले क कमी क े कारण राहत क गणना क े िलए कसी प ित का सुझाव नह ं दया था। दूसर ओर, पुन वलोकन यािचकाकताओं ने यािचका सं या 97/एमपी/2017 म दनांक 28.7.2017 क े अपने उ र म कहा था क "जीएमआर क े िनणय पर िनभरता पूर तरह से उिचत है"। पुन वचार याचीगण अब विध म प रवतन क े तहत राहत क गणना हेतु एक वैक पक सू का सुझाव दे रहे ह। जैसा क आदेश क े पहले क े भाग म पहले ह दोहराया जा चुका है, पुन वलोकन का उपयोग पहले से ह नए कोण क े साथ िलए गए कोण क े ित थापन क े िलए नह ं कया जा सकता है। इसिलए, आधार पर पुन वलोकन पोषणीय नह ं है।”

53. हम पाते ह क ह रयाणा यू टिलट ज अनुमोदन व िनरनुमोदन म िल ह। उ ह एक ह समय म हाँ और न कहने क अनुमित नह ं द जा सकती है। सीईआरसी क े सम यह वीकार करने क े बाद क वे जीएमआर कमलंगा एनज िलिमटेड (ऊपर) क े मामले म द गई काय णाली को अपनाएंगे, हमारे वचार म, अपीलािथय क ओर से, जो आ खरकार रा य क े पर करण ह, सीईआरसी ारा अंितम आदेश पा रत कए जाने क े बाद अपने ख को बदलना उिचत नह ं है।

54. एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल व अ य (ऊपर) क े मामले म, इस यायालय ने इस कार ट पणी क ः "150 इस विधक थित तथा भारत संघ ारा िलए गए ख क े बावजूद, ड कॉम एक ऐसा ख अपना रहे ह जो भारत संघ क े ख क े वपर त है। एनज वॉचडॉग (ऊपर) म, ड कॉ स ारा यह भी आ ह करना चाहा गया क विध म प रवतन क े कारण भी समायोजन क अनुमित नह ं होगी, जस ित वरोध को पूण प से नकार दया गया था। हम कई बार ऐसे मु का सामना कर चुक े ह जहाँ मामल म िनयामक िनकाय व अपीलीय यायालय ारा पा रत कए गए समवत आदेश को चुनौती द गयी है। इस तरह क मुकदमेबाजी, वा तव म, व ुत अिधिनयम क े उ े य को समा कर देगी। जैसा क पहले ह ऊपर चचा क गई है, व ुत अिधिनयम क े अिधिनयमन क े कारण म से एक था रा य व ुत बोड क े दशन म िगरावट।"

55. वतमान मामले म भी, हम पाते ह क दोन वशेष िनकाय ारा दज कए गए त य क े समवत िन कष म क े वल तभी ह त ेप कया जा सकता था जब वे अिनवाय वैधािनक ावधान को यान म रखने म वफल रहे ह या य द िनणय उनक े ारा बा वचार पर िलया गया हो या क वे य तः मनमाने व अवैध थे। आ े पत िनणय व आदेश म इस तरह का क ु छ भी नह ं पाया जा सकता है जसम ह त ेप कया जाए।

56. इसिलए, अपील को सारह न पाया जाता है तथा तदनुसार इसे खा रज कया जाता है। कोई जुमाना नह ं।...................... या. [बी. आर. गवई]...................... या. [ व म नाथ] नई द ली; अ ैल 20, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी। Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.