Uttar Haryana Bijli Vitran Nigam Limited v. Adani Power (Mumbai) Limited

Supreme Court of India · 20 Apr 2023
B. R. Gavai; V. M. Kantha
Civil Appeal No 2908 of 2022
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that the coal inter-plant transfer arrangement dated 19 June 2013 is not a 'change in law' under the PPA, but directed the regulatory commission to assess and pass on related benefits to consumers.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव य यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं या 2908/2022
उ र ह रयाणा बजली वतरण
िनगम िलिमटेड और एक अ य ... अपीलकता(गण)
बनाम
अदानी पावर (मुं ा)
िलिमटेड और अ य ... यथ (गण)
िनणय
बी.आर. गवई, या.
JUDGMENT

1. वतमान अपील इ ह ं अपीलकताओं ारा दायर 2021 क अपील सं या 231 म बजली अपीलीय यायािधकरण (एतद प ात 'एपीट ईएल' क े प म संदिभत) क े 21 दसंबर 2021 क े िनणय और आदेश को चुनौती देती है जससे क यािचका सं या 269/एमपी/2018 म क य व ुत िनयामक आयोग (एतद प ात 'सीईआरसी' क े प म संदिभत) ारा दए गए 8 जुलाई 2019 क े आदेश को चुनौती द गई है। एपीट ईएल ने कोल इं डया िलिमटेड (सं म सीआईएल) ारा जार कए गए अपने 19 जून 2013 क े प यवहार को 'कानून म प रवतन' क े प म नह ं माना था।

2. वतमान अपील को ज म देने वाले त य, सं ेप म, िन नानुसार ह: यथ सं 1 – अडानी पावर (मुं ा) िलिमटेड (एतद प ात "एपी (एम)एल" क े प म संदिभत) ने मुं ा, गुजरात रा य म 4620 मेगावाट मता का एक उ पादन टेशन था पत कया था (फ े ज I और II – 4 x 330 मेगावाट, फ े ज III – 2 x 660 मेगावाट और फ े ज IV – 3 x 660 मेगावाट)। फ े ज IV से 1424 मेगावाट बजली क आपूित क े िलए एपी (एम) एल 7 अग त, 2008 को इस मु े म अपीलकता उ र ह रयाणा बजली वतरण िनगम िलिमटेड और द ण ह रयाणा बजली व ुत िनगम िलिमटेड (एतद प ात "ह रयाणा यू टिलट ज" क े प म संदिभत), क े साथ व ुत प रयोजना समझौते (एतद प ात "पीपीए" क े प म संदिभत) म वेश कया था।

3. अपने दनांक 6 फरवर 2017 क े आदेश क े अंतगत सीईआरसी ने यािचका सं या 156/एमपी/2014 म एपी (एम) एल ारा दावा क गई क ु छ 'कानून म बदलाव' क घटनाओं क े िलए मुआवजे क अनुमित द । एपी (एम) एल ने िनवेदन कया है क ह रयाणा यू टिलट ज पहले से ह एपी (एम) एल ारा उठाए गए पूरक चालान क े संदभ म भुगतान कर रह थीं। त प ात ्, ऊजा िनगरानी बनाम क य व ुत िनयामक आयोग और अ य मामले म इस यायालय क े िनणय क े कारण एपी (एम) एल ने नवीन कोयला वतरण नीित, 2007 (सं ेप म, "एनसीड पी 2007") क े अंतगत दावा करने क े िलए दूसर यािचका सं. 97/एमपी/2017 दायर क थी। त प ात्, सीईआरसी ारा क ु छ अंत रम िनदश जार कए गए थे। त प ात ्, ह रयाणा यू टिलट ज ने यािचका सं या 97/एमपी/2017 म 2018 क अं.आ सं या 21 दायर क, जसम कहा गया था क एपी (एम) एल ारा दावा कया गया मुआवजा गलत था य क एपी (एम) एल ने सीआईएल ारा जार कए गए 19 जून 2013 क े प यवहार क े तहत अनुमत इंटर संयं थानांतरण (सं ेप म, "आईपीट ") क े कारण उ ह होने वाले लाभ पर वचार नह ं कया था।

4. इसक े वपर त, एपी (एम) एल ारा यह दावा कया गया था क ह रयाणा यू टिलट ज ने आईपीट क े आधार पर मािसक बल से एक बड़ रािश को एकतरफा संशोिधत कया था। एपी (एम) एल ारा िनवेदन कया गया था क आईपीट क े संबंध म ह रयाणा यूट िलट स क दलील को सीईआरसी ारा 31 मई 2018 क े अपने आदेश म पहले ह खा रज कर दया गया है।

5. इस पृ भूिम म, एपी(एम)एल ने सीईआरसी क े सम िन निल खत राहत का दावा करते हुए, यािचका सं या 269/एमपी/2018 दायर क:- (क) प कर और घो षत कर क 2018 क यािचका सं या 97/एमपी/2017 और 2018 क अ.आ. सं. 21 म आयोग क े दनांक 31.05.2018 क े आदेश क े अनु छेद 61 म इस आयोग क े िन कष, यािचका सं या 156/एमपी/2014 म 06.02.2017 क े आदेश क े तहत अनुमो दत शु क से संबंिधत कानून मुआवजे म बदलाव पर भी लागू होते ह और; (ख) यिथय को 895.41 करोड़ पये (घरेलू कोयले क कमी से संबंिधत 566.83 करोड़ पये + कर और शु क से संबंिधत 328.58 करोड़ पये) का भुगतान करने क े िलए िनदिशत कर, जो लागू वलंब भुगतान अिधभार क े साथ मािसक बल /पूरक चालान से एकतरफा प से काटे गए ह।

6. सीईआरसी ने िन निल खत मु को िनधा रत कया है: मु ा सं या 1: या यािचका अिधिनयम क धारा 142 क े तहत सुनवाई यो य है? मु ा सं या 2: या यािचका सं या 97/एमपी/2017 म दनांक 31.5.2018 क े आदेश क े अनु छेद 61 म आईपीट कोयले क े संबंध म हमारा िन कष यािचका सं या 156/एमपी/2014 म दनांक 6.2.2017 क े आदेश म अनुमो दत कानून म बदलाव क े प विभ न कर और कत य क े िलए देय मुआवजे पर लागू है? मु ा सं या 3: य द इसे कानून म प रवतन क े प म माना जाता है, तो कोयले क े अंतरसंयं थानांतरण से क ै से िनपटना चा हए? मु ा सं या 4: घरेलू कोयले म कमी क गणना का या आधार या होना चा हए?

7. जहां तक मु ा सं या 1 का संबंध है, सीईआरसी ने ववाद को सुनवाई यो य माना है।

8. जहाँ तक मु ा सं या 2 का संबंध है, सीईआरसी ने कहा क उसक े दनांक 6 फरवर 2017 क े आदेश क े अंतगत यािचका सं या 156/एमपी/2014 म दनांक 9 जून, 2012 क े धन आपूित समझौता (सं ेप म, "एफएसए") म दूसरे बजली घर को कोयला आपूित क े िलए सभी वा ण यक योजन क े िलए मुं ा ट पीपी क यूिनट 7, 8 और 9 से ह रयाणा यू टिल टस को बजली क े उ पादन और आपूित शािमल ह। इसिलए यायालय ने ह रयाणा यू टिलट ज क इस दलील को खा रज कर दया है क वह क े वल उस कोयले क े िलए कर और शु क का भुगतान करने क े िलए उ रदायी है जो उसने वा तव म उपयोग क ह, न क आईपीट कोयले क े िलए।

9. जहाँ तक मु ा सं या 3 का संबंध है, सीईआरसी ने कहा क आईपीट नीित क े तहत एपी (एम) एल ारा कोयले का थानांतरण आईपीट कोयले का उपभोग करने वाले अ य उ पादन टेशन और अ य वतरण क ं पिनय को भी भा वत करता है जनसे आईपीट कोयले का उपयोग करने वाले उ पादन टेशन ारा बजली क आपूित भी क जाती है। य क अ य वतरण क ं पिनयां सीईआरसी क े सम कायवाह म प म नह ं थीं, इसिलए उ ह ने इस मु े से िनपटना उिचत नह ं समझा।

10. जहाँ तक मु ा सं या 4 का संबंध है, एनज वाचडॉग (उपरो ) म इस यायालय क े िनणय को यान म रखते हुए सीईआरसी ने कहा क कमी क मा ा क गणना सुिन त कोयला मा ा (सं ेप म, "एसी यू") और कोयला क ं पिनय ारा वा तव म आपूित क मा ा को यान म रखते हुए करनी चा हए।

11. इससे यिथत होकर, ह रयाणा यू टिलट ज ने एपीट ईएल क े सम अपील दायर क ।

12. जहाँ तक मु ा सं या 4 का संबंध है, एपीट ईएल ने एनज वाचडॉग (उपरो ) म इस यायालय क े िनणय और दनांक 21 दसंबर 2021 क े आदेश क े मा यम से इस मामले म इस यायालय क े फ ै सले पर भरोसा करते हुए माना है क 'कानून म प रवतन' मुआवजे क गणना एसी यू - वा त वक आपूित क े प म क जानी चा हए।

13. जहाँ तक दनांक 19 जून 2013 क े प यवहार क े मु े का संबंध है, एपीट ईएल ने इसे 'कानून म प रवतन' नह ं माना है। वतमान अपील इससे यिथत होने क े कारण क गई है।

14. हमने अपीलकताओं क ओर से पेश अिधव ा ी शुभम आय और यािथय क ओर से पेश व र अिधव ा डॉ. एएम िसंघवी को सुना।

15. ी आय ने पीपीए म द गई "कानून" क प रभाषा पर वचार करते हुए िनवेदन कया क दनांक 19 जून 2013 का प यवहार पूर तरह से "कानून" श द क े अंतगत आता है। उ ह ने कहा क कसी भी मामले म, सीईआरसी ने अ य वतरक क अनुप थित म उ मु े का जवाब देने से इनकार कर दया था। िनवेदन कया जाता है क एपीट ईएल ने इसे 'कानून म बदलाव' वाली घटना न मानकर एक बड़ ु ट क है।

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16. दूसर ओर, डॉ. िसंघवी ने िनवेदन कया है क दनांक 19 जून 2013 का प यवहार अंतर- वभागीय है और इसे 'कानून म प रवतन' नह ं कहा जा सकता है।

17. जब हमने बजली अपील क े इस बैच को सुना, तो सभी प क े बीच यह सहमित हुई क इस यायालय को पहले 2021 क िस वल अपील सं या 684 (महारा रा य व ुत वतरण क ं पनी िलिमटेड बनाम अडानी पावर महारा िलिमटेड और अ य[2] ) [सं ेप म "एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल और अ य"] और 2021 क िस वल अपील सं या 6927 (महारा रा य व ुत वतरण क ं पनी िलिमटेड बनाम जीएमआर वरोरा एनज िलिमटेड एवं अ य) पर फ ै सला करना चा हए य क इन सभी अपील म मौजूद मु े समान थे। िनवेदन कया गया क उन तीन मु पर िनणय लेक े दोन अपील पर िनणय िलया जा सकता है। हालाँ क, जहाँ तक बाक अपील का सबंध है, िनवदन कया गया क तीन समान मु क े अलावा, क ु छ और मु े भी मौजूद थे एवं यह माना गया क उन दोन अपील पर िनणय क े बाद, इन अित र मु पर वचार करने क े िलए बाक अपील पर सुनवाई होनी चा हए।

18. उ तीन सामा य मु े इस कार ह: (i) य द एनसीड पी, 2013 क े कारण ‘कानून म प रवतन’ राहत एनसीड पी 2007 म सुिन त मानक कोयले क आव यकता क े 100% ‘वा त वक’ आधार पर होनी चा हए अथवा एनसीड पी 2013 म सीिमत गर तर तक अथात सुिन त कोयला मा ा (एसी यू) क े 65%, 65%, 67% एवं 75% तक सीिमत होनी चा हए? (ii) या 'कानून म प रवतन' राहत क गणना क े िलए, प रचालन मापदंड को 'वा त वकता' क े आधार पर वचार कया जाना चा हए या बोली म तुत तकनीक जानकार क े अनुसार? (iii) या 'कानून म प रवतन' राहत मुआवजा 1 अ ैल 2013 ( व ीय वष क शु आत) या 31 जुलाई 2013 (एनसीड पी 2013 क तार ख) से दया जाना है?

19. प कार क े सभी व ान अिधव ाओं को यापक प से सुनने क े प ात एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल और अ य (उपरो ) मामले म दनांक 3 माच 2023 क े िनणय और आदेश ारा इस यायालय ने उपयु तीन मु पर वचार करने क े बाद उन दो अपील पर िनणय िलया।

20. पहले मु े का उ र इस यायालय ारा दया गया था, जसम कहा गया था क घरेलू कोयले क कमी क े िलए 'कानून म प रवतन' राहत 'वा त वकता' क े आधार पर होनी चा हए अथात एनसीड पी, 2007 क े संदभ म सुिन त मानक कोयले क आव यकता क े 100% क े मुकाबले। जहां तक दूसरे मु े का संबंध है, यह माना गया था क टेशन ह ट दर (सं ेप म "एसएचआर") और सहायक खपत को विनयम या वा त वकताओं, जो भी कम हो, क े अनुसार माना जाना चा हए। तीसरे मु े का उ र यह कहते हुए दया गया क एनसीड पी, 2013 काय म क े िलए 'कानून म प रवतन' क ार भक ितिथ, 1 अ ैल 2013 है ।

21. इस कार, मु ा सं या 4 एमएसईड सीएल बनाम एपीएमएल और अ य (उपरो ) मामले म इस यायालय क े 3 माच 2023 क े िनणय और एनज वाचडॉग (उपरो ) मामले म इस यायालय क े पूव िनणय से पूण प से कवर कया गया है।

22. जहाँ तक मु ा सं या 2 और 3 का संबंध है, हम पाते ह क उ मु े आपस म जुड़े हुए ह और यह इस िनणय पर िनभर करेगा क या आईपीट क े िलए दनांक 19 जून 2013 का प यवहार 'कानून म बदलाव' कहलायेगा या नह ं।

23. पीपीए क े तहत प रभा षत "कानून" क प रभाषा को संदिभत करना ासंिगक होगा, जो इस कार है: इस समझौते क े संबंध म कानून का अथ, सभी कानून है जसम भारत म लागू बजली कानून और कसी भी क़ानून, अ यादेश, विनयमन, अिधसूचना या सं हता; िनयम या कसी भारतीय सरकार एजसी ारा उनम से कसी क भी या या और जनम कानून का बल हो शािमल ह तथा इसम इनक े अित र उनम से कसी क े अनुसरण म या उसक े तहत भारतीय सरकार एजसी ारा सभी लागू िनयम, विनयम, आदेश, अिधसूचनाओं को शािमल कया जाएगा और इसम उपयु आयोग क े सभी िनयम, विनयम, िनणय और आदेश शािमल ह गे।

24. इस कार, यह प प से देखा जा सकता है क "कानून" क प रभाषा सरकार एजसी ारा सभी िनयम, विनयम, आदेश, अिधसूचनाओं को शािमल करने क े िलए पया प से यापक है।

25. 19 जून, दनां कत 2013 प यवहार का उ लेख करना ासंिगक होगा, जो इस कार है:- वषय: "कोयले क े अंतरसंयं थानांतरण" क े संबंध म नए बजली संयं क े िलए लागू मॉडल एफएसए म संशोधन नए व ुत संयं (पीएसयू/सरकार पीयू और िनजी पीयू दोन क े िलए) क े िलए लागू संशोिधत एफएसए क े तहत एक व ुत संयं से दूसरे व ुत संयं म कोयले क े अंतर- व ुत संयं थानांतरण क अनुमित देने का एक ताव 298व सीआईएल बोड क े सम 27-5-13 को आयो जत इसक बैठक म तुत कया गया था। सीआईएल बोड ने ताव को अनुमो दत करते समय िन निल खत शत क े अधीन ऐसी यव था क अनुमित द जो कानूनी पुनर ण क े बाद िन नानुसार है:- क) कोयले क े थानांतरण क अनुमित क े वल े ता या उसक पूण वािम व वाली सहायक क ं पनी क े पूण वािम व वाले बजली संयं क े बीच द जाएगी। े ता क संयु उ म क ं पनी क े िलए कोयले क े थानांतरण क अनुमित नह ं द जाएगी। एफएसए क े तहत सभी वा ण यक योजन क े िलए कोयले क आपूित अप रवितत रहेगी और मूल बजली संयं क े वा ते होगी। ख) दोन बजली संयं ारा नए बजली संयं क े िलए लागू संशोिधत एफएसए मॉडल म एफएसए िन पा दत कया जाना चा हए और कोयला लॉक से जुड़ कोई आपूित नह ं होनी चा हए। आईपीपी क े मामले म दोन संयं क े पास ड कॉम क े साथ वैध द घकािलक पीपीए होना चा हए। ग) कसी भी मामले म लागू एफएसए क े तहत आपूित क गई मा ा क े साथ संयं को थानांत रत मा ा एक विश वष क े िलए थानांत रती संयं क े एसी यू से अिधक नह ं होगी जो ड कॉम क े साथ द घकािलक पीपीए क े समानुपाती है। घ) उन संयं को कोयले क े थानांतरण क अनुमित नह ं द जाएगी ज ह इस यव था क े तहत कोयला लॉक आवं टत कए गए ह। ङ) वािम व म प रवतन और संयं क पयावरण संबंधी मंजूर नह ं होने क थित म यह सु वधा वापस ले ली जाएगी, और च) इस यव था क े अंतगत दंड/ ो साहन पर उपरो (क) क े अनुसार वचार कया जाएगा। नए बजली संयं (पीएसयू/सरकार पीयू और िनजी पीयू दोन क े िलए) क े िलए लागू एफएसए मॉडल म संशोधन को दशाने वाला एक प क संल न है।

26. इस कार यह देखा जा सकता है क उ प यवहार सीआईएल क 27 मई, 2013 को हुई बैठक म िलए गए िनणय को संदिभत करता है। इसक े अवलोकन से पता चलता है क कोयले क े थानांतरण क जो अनुमित अब तक नह ं थी, उसको क े वल े ता या उसक पूण वािम व वाली सहायक क ं पनी क े वािम व वाले बजली संयं क े बीच अनुमित द गई है। इसम यह भी ावधान है क े ता क संयु उ म क ं पनी क े िलए कोयले क े थानांतरण क अनुमित नह ं द जाएगी। इसम यह भी ावधान है क एफएसए क े अंतगत सभी वा ण यक योजन क े िलए कोयले क आपूित अप रवितत रहेगी और मूल व ुत संयं क े वा ते होगी। दोन बजली संयं ारा नए बजली संयं क े िलए लागू संशोिधत एफएसए मॉडल म एफएसए िन पा दत कया जाना चा हए और कोयला लॉक से जुड़ कोई आपूित नह ं होनी चा हए। इसम यह भी ावधान है क आईपीपी क े मामले म दोन संयं क े पास ड कॉम क े साथ वैध द घकािलक पीपीए होना चा हए। इसम यह भी ावधान कया गया है क कसी भी मामले म लागू एफएसए क े तहत आपूित क गई मा ा क े साथ संयं को थानांत रत मा ा एक विश वष क े िलए थानांत रती संयं क े एसी यू से अिधक नह ं होगी जो ड कॉम क े साथ द घकािलक पीपीए क े समानुपाती है। इसम यह भी ावधान कया गया है क उन संयं को कोयले क े थानांतरण क अनुमित नह ं द जाएगी ज ह इस यव था क े तहत कोयला लॉक आवं टत कए गए ह। इसम यह भी ावधान है क वािम व म प रवतन और संयं क पयावरण संबंधी मंजूर नह ं होने क थित म यह सु वधा वापस ले ली जाएगी।

27. इस कार यह देखा जा सकता है क उ प यवहार सीआईएल क े िनणय को दशाता है। सीआईएल भारत सरकार क एक एजसी है। इस कार, हम पाते ह क एपीट ईएल ने दनांक 19 जून, 2013 क े उ प यवहार को 'कानून म बदलाव' नह ं माना कर गलती क ।

28. एपीट ईएल ने माना है क उ प यवहार सभी सहायक क ं पिनय को संबोिधत एक शासिनक अनुदेश है। एपीट ईएल क े िन निल खत िन कष को संदिभत करना उिचत होगा:

109. इस त य से इनकार नह ं कया जा सकता है क सीआईएल ारा संबोिधत दनांक 19.06.2013 क े प म सभी सहायक क ं पिनय को इसक 298वीं बोड क बैठक (27.05.2013) म िलए गए िनणय क े बारे म सूिचत कया गया था, आईपीट क अनुमित देने क शत यह थी क (कोयले क े ) थानांतरण क अनुमित क े वल े ता या उसक पूण वािम व वाली सहायक क ं पनी क े पूण वािम व वाले व ुत संयं क े बीच द जाए और एफएसए क े तहत सभी वा ण यक योजन क े िलए कोयले क आपूित अप रवितत रहेगी और मूल व ुत संयं क े वा ते होगी। पहले यथ क े वशेष संदभ म, तकपूण िन कष इस कार है क य द मुं ा ट पीएस एमसीएल कोयला खदान, तालचेर से िलंक े ज कोयले क े अपने ह से को ितरोदा ट पीएस (दोन अडानी समूह क े वािम व वाले) को ऐसे कोयले क े ितरोदा ट पीएस म उपयोग क े िलए थानांत रत करता है और भले ह एमसीएल कोयला खदान, तालेचर से मुं ा ट पीएस (एफएसए क े संदभ म मूल बजली संयं ) क े िलंक े ज कोयले का उपयोग वा तव म ितरोदा ट पीएस ( थानांत रती संयं ) म कया गया था, इसका हसाब इस तरह से कया जाएगा जैसे क इसका उपभोग मुं ा ट पीएस म कया गया था। सीधे श द म कह तो कोयले क े आईपीट का भाव यह है क आईपीट कोयला लागत (िलंक े ज घरेलू कोयला) मुं ा ट पीएस (आईपीट योजना क े तहत एफएसए/ थानांतरणकता संयं क े संदभ म मूल बजली संयं ) क े खाते म दज क जाती रहेगी और वैक पक कोयला लागत (िलंक े ज कोयले क े अभाव म उपयोग कया जाने वाला आयाितत कोयला या बाजार-आधा रत ई-नीलामी कोयला) को ितरोदा ट पीएस (आईपीट योजना क े तहत थानांत रती संयं ) क े खात म 'कारण लागत' क े आधार पर दज कया जाता रहेगा।

29. हम पाते ह क एपीट ईएल इस बात पर वचार करने म वफल रहा है क सीईआरसी ने उ मु े पर िनणय नह ं िलया था, य क उ मु े पर िनणय अ य दो ड कॉम, अथात एमएसईड सीएल और राज थान ड कॉम को भा वत करता। यह भी यान रखना ासंिगक होगा क उसी अिधकरण ने, तीन मह ने क े तुरंत बाद, र न इं डया पावर िलिमटेड बनाम महारा व ुत िनयामक आयोग और अ य क े मामले म, पूर तरह से वपर त कोण अपनाया है। उ मामले म, एमएसईड सीएल क ओर से यह तक देने का यास कया गया था क सीआईएल ारा अपने दनांक 19 दसंबर, 2017 क े प रप क े मा यम से लगाया गया िनकासी सु वधा शु क (सं ेप म "ईएफसी"), 'कानून म बदलाव' नह ं था। िन निल खत ट प णय को संदिभत करना उपयु होगा:-

9. यह तक देना गलत है क इस तरह क े सं वदा मक खंड क े तहत कानून म बदलाव क े प म समा व कए जाने क े िलए, जस साधन क े तहत कानून म बदलाव का दावा कया जाता है, उसे कानून क े बल क े िलए आिधका रक राजप म कािशत कया जाना चा हए। उदाहरण क े िलए, ऐनज वॉचडॉग व अ य (पूव ) म, भारत सरकार म व ुत मं ालय क े एक प को भी "कानून क े बल" वाले साधन क े प म वीकार कया गया था। इसी तरह, क ु सुम इंगो स एंड अलॉयज बनाम भारत संघ (2004) 6 एससीसी 254 म कायकार अनुदेश को बना कसी वैधािनक समथन क े "कानून" क े प म भी माना गया था। यह तक क कोल इं डया सरकार एजसी है और इसक े ारा जार क गई अिधसूचनाओं, प रप आ द म भारत क े सं वधान क े विनयम 77 (3) क े तहत कानून का बल है, को जीएमआर कमलांगा एनज िलिमटेड (पूव ) म इस अिधकरण ारा वीकार कया गया था।

30. सम ितिथ क े िनणय क े तहत, िस वल अपील सं या 5005/2022 और 4089/2022 म, हमने महारा व ुत िनयामक आयोग (सं ेप म, "एमईआरसी") और एपीट ईएल क े उ ईएफसी को 'कानून म बदलाव' क े प म मानने क े समवत कोण को बरकरार रखा है।

31. इस मामले क े उस कोण म, हमार राय है क एपीट ईएल का यह िन कष क आईपीट को अनुमित देने वाला 19 जून, 2013 का प यवहार 'कानून म बदलाव' नह ं होगा, अर णीय है।

32. यह यान दया जाना चा हए क, बोली तुत करते समय, एपी(एम)एल ने एमसीएल कोयला खदान, तालेचर से मुं ा म अपने संयं तक िलंक े ज कोयले क े प रवहन क लागत को यान म रखा होगा। पीपीए म दए गए यौरे क े अनुसार, प रवहन का साधन रेलवे क े मा यम से है। इस कार, आईपीट क अनुमित दए जाने से पहले, एपी(एम)एल एमसीएल कोयला खान, तालेचर से िलंक े ज कोयले का उपयोग क े वल अपने मूल व ुत संयं अथात एपी(एम)एल क े योजन क े िलए करने क े िलए बा य था। क े वल आईपीट क े कारण ह यह एमसीएल कोयला खान, तालचेर से ा कोयले का उपयोग महारा या राज थान म अपने संयं क े िलए करने क थित म होगा। इसी तरह, यह अपने अ य बजली संयं म ऊजा क े उ पादन क े िलए महारा या राज थान म अपने संयं क े िलए कोयला िलंक े ज का उपयोग करने का हकदार होगा। इस कार, रेलवे ारा प रवहन क लागत म अंतर होना तय है। उदाहरण क े िलए, य द कोयले को एमसीएल कोयला खदान, तालचेर से एपी(एम)एल तक ले जाया जाना है, तो एमसीएल कोयला खदान, तालचेर से ितरोदा ट पीएस तक रेलवे प रवहन क लागत क तुलना म रेलवे प रवहन क लागत अिधक होगी। हम इस उदाहरण को क े वल एक िमसाल क े प म दे रहे ह। हम पाते ह क प रवहन क लागत म हुई बचत को, अथात ् एमसीएल कोयला खान, तालचेर से ए स संयं तक कोयले क े प रवहन क े िलए जो लागत खच क गई होती म से प रवहन क वा त वक लागत को घटा कर, ड कॉ स को दया जाना होता है, जसे बदले म अंितम उपभो ाओं तक पहुंचाना होता है। उदाहरण क े िलए, य द एमसीएल कोयला खदान, तालचेर से एपी(एम)एल तक ित टन प रवहन क लागत 100/- पये है और एमसीएल कोयला खदान, तालचेर से ितरोदा ट पीएस तक 50/- पए ित टन है, 50/- पए ित टन का लाभ आगे देना होगा।

33. हालां क, हम पाते ह क आईपीट क अनुमित क े कारण होने वाले प रवतन एपी(एम)एल क े साथ-साथ अपीलकताओं और दो अ य ड कॉम, यानी एमएसईड सीएल और राज थान ड कॉ स को भा वत करगे। सीईआरसी ने 8 जुलाई, 2019 क े अपने आदेश म भी यह बात कह थी। हमारे पास यह पता लगाने क े िलए कोई वशेष ता नह ं है क उ 'कानून म प रवतन' क े कारण कोई भी प कस लाभ का हकदार होगा। तथा प, हमारा सु वचा रत मत है क उपरो अनु छेद म हमार ट पणी क े आलोक म ‘कानून म प रवतन’ क े कारण रेल प रवहन म होने वाली बचत क लागत का आकलन कए जाने क आव यकता है और इसे उपयु ड कॉम को दया जा सकता है, जसे आगे उपभो ाओं को दया जा सकता है। सीईआरसी, जो वशेष का एक िनकाय है, ऐसा करने क े िलए सबसे उपयु है।

34. इसिलए, हम पाते ह क वतमान अपील आंिशक प से अनुमित क े यो य है। हालां क एसी यू- वा त वक आपूित क े आधार पर 'कानून म बदलाव' मुआवजे को अनुमित देने से संबंिधत मु े को बरकरार रखा जाना चा हए, आईपीट क े 'कानून म बदलाव' नह ं होने क े संबंध म मु े को दर कनार कया जाना चा हए।

35. प रणाम म, हम आंिशक प से अपील क अनुमित देते ह और िन निल खत आदेश पा रत करते ह:- (i) एपीट ईएल का इस आशय का िन कष क आईपीट क े वषय म ावधान करने वाला दनांक 19 जून, 2013 का प यवहार 'कानून म प रवतन' क े बराबर नह ं माना जाता है, को दर कनार कया जातै है; (ii) हम मानते ह क आईपीट 'कानून म प रवतन' क े समान है।

36. अनु छेद 32 और 33 म क गई हमार ट प णय क े आलोक म, एमएसईड सीएल क े साथ-साथ राज थान ड कॉ स को नो टस देने और अपीलकताओं और यिथय स हत सभी प को सुनने क े बाद उपरो 'कानून म बदलाव' क े भाव का पता लगाने क े िलए मामला सीईआरसी को भेजा जाता है।

37. हालां क, चूं क उ मु ा लंबे समय से लं बत है, इसिलए हम सीईआरसी को आज से छह मह ने क अविध क े भीतर उ मु े पर फ ै सला करने और कसी भी प को िमलने वाले लाभ क गणना करने का िनदश देते ह।

38. लं बत आवेदन, य द कोई ह, का िनपटान कया जाएगा। कोई जुमाना नह ं।............................... या. [बी.आर. गवई]............................... या. [ व म नाथ] नई द ली; 20 अ ैल, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया ग या है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।