Full Text
संशोति
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दाण्डि क अपील क्षेत्राति कार
दाण्डि क अपील संख्या 1168/2023
(विवशेष अनुमति याति.का (दाण्डि क) संख्या 8487/2021 से उत्पन्न)
अंसार अहमद ....अपीलार्थी8
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ....प्रत्यर्थी8
क
े सार्थी
दाण्डि क अपील संख्या 1169/2023
(विवशेष अनुमति याति.का (दाण्डि क) संख्या 8540/2021 से उत्पन्न)
विनर्ण@य
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की जा ी है।
2. अपीलार्थी8 इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर सम ति थिर्थी, अर्थीा@ ् 23.09.2021 क े दो आदेशों क े विवरो में, मुकदमा अपरा संख्या 17/2018 में भार ीय द संविह ा की ारा 147, 148, 149, 307, 302, 120-बी/34 और विवस्फोटक पदार्थी@ अति विनयम की ारा 3/4, पुलिलस स्टेशन जगदीशपुर, जिजला अमेठी क े ह प्रत्यर्थी8-सुभाष यादव द्वारा दायर जमान आवेदन संख्या 624/2019, और प्रत्यर्थी8-राजेश विवक्रम सिंसह द्वारा दायर अस्वीकरर्ण: “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनर्ण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनब\ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण@य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विक्रयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2023 INSC 725 जमान आवेदन संख्या 4309/2019 को अनुमति दी गई र्थीी और उपयु@क्त दोनों प्रत्यर्थी8गर्णों को विनयविम जमान दी गई है।
3. आरोप है विक अपीलार्थी8 अपने बेटे-अशफाक अहमद और उसक े साथिर्थीयों क े सार्थी विवजया बैंक की जगदीशपुर शाखा क े सामने मौजूद र्थीा, जब आरोपी वंशराज यादव ने अशफाक अहमद पर ग्रेने फ ें ककर हमला विकया, और उसक े बाद, सा ाई और अन्य आरोपी व्यविक्तयों ने अं ा ुं गोलीबारी शुरू कर दी, जिजससे अशफाक अहमद की मौक े पर ही मौ हो गई और राजी अहमद उफ @ मनु घायल हो गए। जन ा की मदद से दो अथिभयुक्तों को मौक े पर ही पकड़ लिलया गया।उनमें से एक ने अपना नाम अविम.ौबे पुत्र विंवध्या.ल.ौबे विनवासी विबहार जबविक दूसरे आरोपी ने अपने नाम नहीं ब ाया। उनक े कब्जे से दो देशी विपस्टल, दो मैगजीन और एक मोबाइल फोन बरामद विकया गया। पूछ ाछ क े दौरान, आरोपी-अविम.ौबे ने ब ाया विक प्रत्यर्थी8 (राजेश विवक्रम सिंसह) और उसक े भाई ने आरोपी व्यविक्तयों को अशफाक अहमद की हत्या करने क े लिलए भेजा र्थीा।अपीलार्थी8 क े बयान पर दज@ प्रार्थीविमकी में आगे यह उल्लेख विकया गया है विक रु. 2,47,700/- नकद अथिभयुक्त व्यविक्तयों, जिजन्हें पण्डिब्लक ने पकड़ा र्थीा, से बरामद विकया गया।इसे कान्ट्रेक्ट विकलिंलग का मामला ब ाया गया र्थीा।
4. जां. क े दौरान, यह पाया गया विक घटना क े समय प्रत्यर्थिर्थीयों में से एक (सुभाष यादव) कथिर्थी ौर पर मौक े पर मौजूद र्थीा, वह अन्य प्रत्यर्थी8 (राजेश विवक्रम सिंसह) अशफाक अहमद को जान से मारने क े लिलए र.ी गई साजिजश का विहस्सा र्थीा। अशफाक अहमद को मारने क े पीछे का उद्देश्य यह र्थीा विक उसक े ससुर भार ीय द संविह ा की ारा 302 क े ह राजेश विवक्रम सिंसह क े लिखलाफ दज@ एक अन्य आपराति क मामले में गवाह र्थीे, जिजसमें उपरोक्त प्रत्यर्थी8 को दोषी ठहराया गया र्थीा।
5. घटना में कथिर्थी रूप से शाविमल अथिभयुक्तों में से एक, स ीश क ु मार उफ @ स ई ने अपनी जमान क े लिलए आवेदन विकया और उच्च न्यायालय ने आदेश 03.09.2021 विदनांविक क े ह उसकी प्रार्थी@ना को इस यह कह े हुए खारिरज कर विदया: "पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता क े विवरो ी कw पर विव.ार कर े हुए और प्रार्थीविमकी की सामग्री, आवेदक की.ोट रिरपोट@, मृ क की मृत्युपूव@.ोट और घायल रज़ी की ति.विकत्सा कानूनी रिरपोट@ क े सार्थी-सार्थी आवेदक की पत्नी द्वारा दज@ प्रार्थीविमकी संख्या 168/2018 की सामग्री पर विव.ार कर े हुए और आवेदक की आपराति क पृष्ठभूविम पर भी विव.ार कर े हुए, मेरा मानना है विक आवेदक को जमान देने का कोई मामला नहीं बन ा है। दनुसार, जमान याति.का खारिरज की जा ी है।"
6. ऐसा प्र ी हो ा है विक उपरोक्त जमान आवेदन क े लंविब रहने क े दौरान, प्रत्यर्थिर्थीयों (सुभाष यादव और राजेश विवक्रम सिंसह) ने भी जमान क े लिलए उच्च न्यायालय में आवेदन विकया। सुभाष यादव क े मामले में, उच्च न्यायालय क े समक्ष यह स्पष्ट रूप से ब ाया गया र्थीा विक वह कम से कम 14 आपराति क मामलों में शाविमल र्थीा और पहले से ही आईपीसी की ारा 302 क े ह दोषी र्थीा। उस मामले में जमान पर रह े हुए, उसे अशफाक अहमद की हत्या में शाविमल पाया गया, प्रत्यर्थी8 - राजेश विवक्रम सिंसह की जमान याति.का में उच्च न्यायालय को इस थ्य से अवग कराया गया विक उसक े लिखलाफ 26 आपराति क मामले दज@ हैं और वास् व में जिजनमें से क ु छ में वह पहले ही बरी हो.ुका है और कु छ मामलों में वह जमान पर र्थीा। इनमें से एक मामले - अपरा संख्या 229/2004 में आईपीसी की ारा 302 आविद क े ह, उसे दोषी ठहराया गया र्थीा और आपराति क अपील संख्या 497/2008 में, उसकी दोषजिसति~ और सजा समाप्त कर दी गई र्थीी।
7. उच्च न्यायालय ने अथिभयोजन पक्ष क े मामले को संक्षेप में सुनाया और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान द्वारा रख े हुए विनष्कष@ विनकाला विक "पक्षों क े विवद्वान अति वक्ता क े विवरो ी कw पर विव.ार कर े हुए और जैसा विक ऊपर..ा@ की गई है, प्रार्थीविमकी की सामग्री, क े स ायरी क े प्रासंविगक विहस्से को देखने क े बाद, मेरी राय है विक आवेदक जमान पर रिरहा होने का हकदार है।"
8. थिशकाय क ा@, जो मृ क का विप ा है, विनजी उत्तरदा ाओं को जमान विदए जाने से व्यथिर्थी होकर इस न्यायालय क े समक्ष है।
9. हमने अपीलार्थी8 की ओर से उपण्डिस्र्थी वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता, विनजी उत्तरदा ाओं की ओर से उपण्डिस्र्थी वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता और सार्थी ही उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से उपण्डिस्र्थी विवद्वान अपर महाति वक्ता को सुना।
10. विनजी प्रत्यर्थी8गर्णों में से एक की ओर से उपण्डिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री आर बसं द्वारा दी गई दलील से कोई विववाद नहीं हो सक ा विक जमान दे े समय न्यायालय को अथिभयोजन मामले क े गुर्ण-दोषों से संबंति विवस् ृ कारर्ण देने की आवश्यक ा नहीं है क्योंविक जमान मामले में न्यायालय द्वारा की गई कोई भी विटप्पर्णी बाद क े.रर्ण में अनजाने में अथिभयोजन पक्ष या अथिभयुक्त पर प्रति क ू ल प्रभाव ाल सक ी है। हमारी सुविव.ारिर राय में, कानून का सुस्र्थीाविप प्रस् ाव यह है विक जमान देने क े आदेश में ज्ञा मापदं ों को ध्यान में रख े हुए विववेक क े न्यातियक अनुप्रयोग को प्रति विंबविब करना.ाविहए जो इस प्रकार हैं:- (i) अपरा की गंभीर ा को ध्यान में रख े हुए आरोप की प्रक ृ ति; (ii) सजा की गंभीर ा; (iii) अथिभयुक्त की ण्डिस्र्थीति अर्थीा@ क्या अथिभयुक्त पीविड़ और गवाहों पर प्रभाव ाल सक ा है या नहीं; (iv) अथिभयुक्त क े पीविड़ ों/गवाहों से संपक @ करने या उनसे संपक @ करने का प्रयास करने की संभावना; (v) अथिभयुक्त क े काय@वाही से भाग जाने की संभावना; (vi) आरोपी द्वारा सबू ों से छेड़छाड़ की संभावना; (vii) न्याय क े विनय माग@ में बा ा ालना या बा ा ालने का प्रयास करना; (viii) जमान पर छ ू ट जाने पर अपरा की पुनरावृलित्त की संभावना; (ix) आरोप की ुच्छ ा सविह आरोप क े समर्थी@न में अदाल की प्रर्थीम दृष्टया सं ुविष्ट; (x) प्रत्येक मामले क े अलग-अलग और विवथिशष्ट थ्य और मूल और पुविष्टकारक साक्ष्य की प्रक ृ ति । विकसी मामले क े विवथिशष्ट थ्यों और परिरण्डिस्र्थीति यों क े आ ार पर, हम यह जोड़ने में जल्दबाजी कर े हैं विक कई अन्य प्रासंविगक कारक भी हो सक े हैं जो विकसी आरोपी को जमान दे े या अस्वीकार कर े समय इसे ध्यान में रखना आवश्यक होगा।ऐसी सभी परिरण्डिस्र्थीति यों को स्पष्ट करना मुण्डिश्कल हो सक ा है, क्योंविक सीआरपीसी की ारा क्रमशः 438 और 439 क े ह विकसी न्यायालय में विनविह विववेका ीन क्षेत्राति कार का प्रयोग करने क े लिलए, जैसा भी मामला हो, कोई सी ा सूत्र नहीं हो सक ा है।
11. हमारा विव.ार है विक व @मान मामले में विनयविम जमान पर विवस् ार क े लिलए प्रत्यर्थिर्थीयों की प्रार्थी@ना पर विव.ार कर े समय विवद्वान उच्च न्यायालय को कई महत्वपूर्ण@ कारकों को ध्यान में रखना.ाविहए र्थीा। अशफाक अहमद की हत्या विदन क े उजाले में हुई र्थीी। इस घटना को अपीलार्थी8 और दो और.श्मदीद गवाहों ने देखा है। दो अथिभयुक्तों को मौक े पर ही विगरफ् ार कर लिलया गया। यह स्पष्ट रूप से कॉन्ट्रैक्ट विकलिंलग का मामला र्थीा। अशफाक अहमद की नृशंस हत्या क े पीछे क े आशय को ब ाने क े लिलए पया@प्त सामग्री है। दोनों प्रत्यर्थिर्थीयों का आपराति क रिरकॉ @ विमला-जुला है और उनक े व्यापक बयान को स्वीकार करना मुण्डिश्कल है विक उनक े लिखलाफ दज@ सभी मामले राजनीति से प्रेरिर हैं। इस स् र पर ध्यान देने क े लिलए पया@प्त है विक पहले क े दोनों प्रत्यर्थी8 को भा. दं. सं. की ारा 307 क े ह एक मामले में दोषी पाया गया है और जमान पर रह े हुए उन्हें प्रर्थीमदृष्टया त्काल मामले में शाविमल पाया गया है। यविद यह स. है, ो यह पहले क े मामले में उन्हें दी गई जमान क े दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है।हमें यह मुण्डिश्कल लग ा है विक उच्च न्यायालय ने अपने आदेश विदनांक 03.09.2021 से क ु छ विदन पहले स ीश क ु मार उफ @ स ई क े मामले में जो कारर्ण ब ाए र्थीे, वे विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों क े मामले में अलग-अलग क्यों पाए गए, जिसवाय इसक े विक स ीश क ु मार उफ @ स ई हत्या में शारीरिरक रूप से शाविमल र्थीा और कथिर्थी ौर पर मृ क पर गोली.लाने वाले आरोविपयों में से एक र्थीा।
12. दूसरा महत्वपूर्ण@ कारक यह है विक रज़ी अहमद उफ @ मनु.श्मदीद गवाहों में से एक है।उसने अभी क अथिभयोजन पक्ष क े गवाह क े रूप में गवाही नहीं दी है। हालांविक एक सामान्य विनयम क े रूप में नहीं, बण्डिल्क यह समी.ीन है और हमेशा आपराति क न्याय प्रर्णाली क े विह में है विक जमान की प्रार्थी@ना पर यह सुविनति• करने क े बाद विव.ार विकया जा ा है विक महत्वपूर्ण@ गवाहों क े बयान दज@ विकए गए हैं और उनक े साक्ष्य को प्रभाविव करने या छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है।
13. अपीलार्थी8 ने उच्च न्यायालय द्वारा विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को जमान पर रिरहा करने क े बाद विवथिभन्न ारीखों पर विव.ारर्ण न्यायालय द्वारा पारिर आदेशों की प्रति यां भी अथिभलेख पर रखी हैं। विदनांक 15.03.2022 क े आदेश से प ा.ल ा है विक प्रत्यर्थी8 - सुभाष यादव मुकदमे से अनुपण्डिस्र्थी र्थीे और उनक े लिखलाफ गैर- जमान ी वारंट जारी विकए गए र्थीे। बाद क े कई आदेशों से प ा.ल ा है विक दोनों प्रत्यर्थी8 व्यविक्तग पेशी से छ ू ट की मांग कर रहे हैं और इस प्रकार मुकदमा पूरी रह से रुका हुआ है। विवद्वान अपर महाति वक्ता ने ब ाया विक अब क क े वल एक गवाह से जाँ. की गई है। यह सुविनति• करना न्यायालय का परम क @व्य है विक संविव ान क े अनुच्छेद 21 क े अर्थी@ क े ह विकसी अथिभयुक्त को स्व ंत्र ा की सुरक्षा प्रदान की जाए, अथिभयोजन पक्ष क े विह ों की समान रूप से रक्षा की जा ी है और पीविड़ क े अथिभयोजन पक्ष पर प्रति क ू ल प्रभाव ालने क े लिलए जमान की सुविव ा का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जानी.ाविहए।
14. अथिभयुक्तों में से एक की ओर से उपण्डिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री बसं ने जोरदार रीक े से कहा विक जमान, रद्द करने क े लिलए बहु महत्वपूर्ण@ और अपरिरहाय@ परिरण्डिस्र्थीति याँ आवश्यक हैं।एक बार दी गई जमान को क े वल भी रद्द विकया जाना.ाविहए जब अदाल क े संज्ञान में आ ा है विक आरोपी ने अदाल द्वारा उसे दी गई स्व ंत्र ा का दुरुपयोग विकया है। श्री बसं क े अनुसार उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमान को रद्द करने क े लिलए कोई पय@वेक्षी परिरण्डिस्र्थीति याँ नहीं हैं।
15. हम श्री बसं क े उपरोक्त क @ से विबल्क ु ल भी प्रभाविव नहीं हैं क्योंविक यह सुस्र्थीाविप कानून है विक जमान रद्द करना विकसी भी पय@वेक्षी परिरण्डिस्र्थीति यों की घटना क सीविम नहीं है। एश मोहम्मद बनाम थिशवराज सिंसह उफ @ लल्ला बाबू और अन्य (2012) 9 एस. सी. सी. 446 मामले में इस अदाल ने अव ारिर विकया विक हर एक मामले में लागू होने वाला कोई परिरभाविष साव@भौविमक विनयम नहीं है। इसलिलए यह कानून नहीं है विक एक बार आरोपी को जमान विदए जाने क े बाद इसे क े वल जमान क े दुरुपयोग करने की संभावना क े आ ार पर रद्द विकया जा सक ा है। जिजस न्यायालय क े समक्ष जमान देने क े आदेश को.ुनौ ी दी गई है, उसे जमान आदेश की सुदृढ़ ा का आलो.नात्मक विवश्लेषर्ण करने का अति कार है। अदाल को जमान आदेश रद्द करने की याति.का बनाम जमान देने क े आदेश को.ुनौ ी देने वाली याति.का से साव ान रहना.ाविहए। हालाँविक इसक े बावजूद दोनों ण्डिस्र्थीति याँ अभी भी समान प्र ी हो ी हैं और दोनों क े लिलए विववाद क े आ ार पूरी रह से अलग हैं। आइए दोनों ण्डिस्र्थीति यों में अलग -अलग ण्डिस्र्थीति यों को समझें।
16. जमान रद्द करने क े लिलए विकसी आवेदन में न्यायालय आम ौर पर ऊपर..ा@ की गई परिरण्डिस्र्थीति यों की विनगरानी कर ी है। जबविक जमान देने क े आदेश को.ुनौ ी देने वाले आवेदन में, विववाद का आ ार न्यायालय क े आदेश क े सार्थी है। जमान दे े समय न्यायालय द्वारा विववेक क े अनुति. या मनमाने प्रयोग क े कारर्ण सम्यक प्रविक्रया की अवै ा पर सवाल उठाया जा ा है। इसलिलए, मामले का सार यह है विक एक बार जमान विदए जाने क े बाद, इस रह क े आदेश से पीविड़ व्यविक्त जमान देने क े फ ै सले को रद्द करने क े लिलए सक्षम न्यायालय से संपक @ कर सक ा है यविद आदेश में कोई अवै ा है, या जमान रद्द करने क े लिलए आवेदन कर सक ा है यविद आदेश में कोई अवै ा नहीं है, बण्डिल्क आरोपी द्वारा जमान क े दुरुपयोग का प्रश्न है।पूरन बनाम रामविबलास और एक अन्य 2001 (6) एस. सी. सी. 338 मामले में इस न्यायालय ने अव ारिर विकया है विक "अनुति., अवै या विवक ृ आदेश क े रूप में रद्द करने की अव ारर्णा जमान क े आदेश को इस आ ार पर रद्द करने से विबल्क ु ल अलग है विक आरोपी ने स्वयं को गल रीक े से पेश विकया र्थीा और क ु छ पय@वेक्षर्णीय परिरण्डिस्र्थीति यों क े कारर्ण इस रह क े रद्द करने की आवश्यक ा हो ी है।"
17. उपरोक्त जिस~ां को वेंकटेशन बालसुब्रम यन बनाम द इंटेलिलजेंस ऑविफसर, ीआरआई बैंगलोर (दाण्डि क अपील संख्या 801/2020) (2020) 13 स्क े ल 191 मामले में दोहराया गया है, जिजसमें इस न्यायालय ने पाया विक सीआरपीसी की ारा 167(2) क े ह अवै रूप से दी गई ति फ़ॉल्ट जमान को सीआरपीसी की ारा 439(2) क े ह रद्द विकया जा सक ा है।
18. इन सभी थ्यों और परिरण्डिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, लेविकन.ल रहे मुकदमे की योग्य ा पर कोई विव.ार व्यक्त विकए विबना, हम सं ुष्ट हैं विक उच्च न्यायालय ने विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को जमान दे े समय प्रासंविगक सामग्री पर विव.ार नहीं विकया। यह स. हो सक ा है विक विकसी अथिभयुक्त को अविनति• काल क े लिलए जेल में बंद करने की अनुमति नहीं दी जा सक ी, लेविकन अदाल ों को जमान याति.का पर विव.ार कर े समय उपयुक्त ण्डिस्र्थीति की प्र ीक्षा करने की आवश्यक ा है जहां अथिभयोजन मामले पर विकसी भी प्रति क ू ल प्रभाव क े विबना ऐसी राह दी जा सक ी है। व @मान विव.ारर्ण में वह ण्डिस्र्थीति अभी क नहीं पहुं.ा है क्योंविक क ु छ महत्वपूर्ण@.श्मदीद गवाहों ने अभी क गवाही नहीं दी है।
19. उपरोक्त कारर्णों से अपीलों की अनुमति दी जा ी है, जमान आवेदन संख्या 624/2019 और जमान आवेदन संख्या 4309/2019 में विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को विनयविम जमान दे े हुए उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर आदेश 23.09.2021 विदनांविक को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है और दोनों प्रत्यर्थिर्थीयों को ुरं विव.ारर्ण न्यायलय क े समक्ष आत्मसमप@र्ण करने का विनदšश विदया जा ा है, अन्यर्थीा उनक े लिखलाफ दं ात्मक कार@वाई की जाएगी।
20. हालाँविक, प्रत्यर्थी8 सभी.श्मदीद गवाहों या अन्य भौति क गवाहों की जाँ. क े बाद जमान क े लिलए आवेदन करने क े लिलए स्व ंत्र होंगे।ऐसे विकसी भी आवेदन पर ऊपर दी गई विटप्पथिर्णयों से प्रभाविव हुए विबना उसकी योग्य ा क े अनुसार विव.ार विकया जाएगा।
21. विव.ारर्ण न्यायालय को मामले का ेजी से विनर्ण@य करने और एक वष@ क े भी र विव.ारर्ण को समाप्त करने का प्रयास करने का विनदšश विदया जा ा है।
22. इसकी अगली कड़ी क े रूप में, लंविब अं व@ 8 आवेदनों का भी विनस् ारर्ण विकया जा ा है।.......................................… (न्यायमूर्ति सूय@ कान् ).......................................… (न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला) नई विदल्ली; 18 अप्रैल, 2023 संशोति मद संख्या 11 न्यायालय संख्या 9 ख II भार ीय सव च्च न्यायालय काय@वाही क े अथिभलेख अपील क े लिलए विवशेष अनुमति (दाण्डि क) याति.का संख्या 8487/2021 (इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर बीएन संख्या 624/2019 में आक्षेप अंति म विनर्ण@य और आदेश 23-09-2021 विदनांविक से उत्पन्न) अंसार अहमद याति.काक ा@ (गर्ण) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य प्रत्यर्थी8(गर्ण) आइ.ए. संख्या 134253/2022 - उपयुक्त आदेश/विनदšश आइ.ए. संख्या 57851/2022 - शपर्थी पत्र दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 134255/2022 - शपर्थी पत्र दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 143077/2021 - आक्षेविप विनर्ण@य का सी/सी दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 143079/2021 - ओ. टी. दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 57867/2022 ओ. टी. दालिखल करने से छ ू ट विवशेष अनुमति याति.का (दाण्डि क) संख्या 8540/2021 (II) (आइ.ए. संख्या 134240/2022 में उपयुक्त आदेश /विनदšश क े लिलए आइ.ए. संख्या 134242/2022 में शपर्थीपत्र दालिखल करने से छ ू ट क 134240/2022 में उपयुक्त आदेश/विनदšश क े लिलए आइ.ए. संख्या 134242/2022 में शपर्थीपत्र दालिखल करने से छ ू ट क े लिलए) ारीखः 18-04-2023 इन मामलों को आज सुनवाई क े लिलए बुलाया गया र्थीा। समक्ष: माननीय न्यायमूर्ति सूय@ कान् माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला याति.काक ा@(गर्ण) क े लिलए श्री जिस~ार्थी@ दवे, वरिरष्ठ अति वक्ता श्री ल्हा अब्दुल रहमान, एओआर सुश्री विवति ठाकर, अति वक्ता श्री एम शाज़ खान, अति वक्ता सुश्री गायत्री दविहया, अति वक्ता प्रत्यर्थी8(गर्ण) क े लिलए श्री शरर्ण ठाक ु र, ए. ए. जी. श्री रोविह क ु मार सिंसह, एओआर श्री जिस~ार्थी@ ठाक ु र, अति वक्ता श्री मुस् फा सज्जाद, अति वक्ता श्री बसं आर, वरिरष्ठ अति वक्ता श्री विदव्येश प्र ाप सिंसह, एओआर श्री विवक्रम प्र ाप सिंसह, अति वक्ता श्री कविवनेश आरएम, अति वक्ता सुश्री थिशवांगी सिंसह, अति वक्ता सुश्री इथिश ा बेदी, अति वक्ता सुश्री रंजना सिंसह, अति वक्ता श्री अजय प्रभु, अति वक्ता सुश्री थिशवानी सिंसह, अति वक्ता श्री एस.आर. सेति या, एओआर श्री क े.बी. उपाध्याय, अति वक्ता श्री सी पी पां े, अति वक्ता श्री एस एन वित्रपाठी, अति वक्ता सुश्री विंपकी ति वारी, अति वक्ता श्री शैलेश ति वारी, अति वक्ता को सुनने क े बाद न्यायालय ने विनम्नलिललिख आदेश विदया:
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. हस् ाक्षरिर आदेश में ब ाए गए कारर्णों क े लिलए अपीलों की अनुमति दी जा ी है, जमान आवेदन संख्या 624/2019 और जमान आवेदन संख्या 4309/2019 में विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को विनयविम जमान दे े हुए उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर आदेश 23.09.2021 विदनांविक को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है और दोनों प्रत्यर्थिर्थीयों को ुरं विव.ारर्ण न्यायलय क े समक्ष आत्मसमप@र्ण करने का विनदšश विदया जा ा है, अन्यर्थीा उनक
3. र्थीाविप, प्रत्यर्थी8 को सभी.श्मदीद गवाहों या अन्य भौति क गवाहों से पूछ ाछ क े बाद जमान क े लिलए आवेदन करने की स्व ंत्र ा होगी। ऐसे विकसी भी आवेदन पर उपरोक्त की गई विटप्पथिर्णयों से प्रभाविव हुए विबना उसक े गुर्ण-दोष क े अनुसार विव.ार विकया जाएगा।
4. विव.ारर्ण न्यायालय को विनदšश विदया जा ा है विक वह मामले का शीघ्र ा से विनर्ण@य करे और एक वष@ क े भी र मुकदमे को समाप्त करने का प्रयास करे।
5. इसकी अगली कड़ी क े रूप में, लंविब अं व@ 8 आवेदनों का भी विनस् ारर्ण विकया जा ा है। (स ीश क ु मार यादव) (प्रीति टी. सी.) उप विनबन् क कोट@ मास्टर (एन. एस. ए..) (हस् ाक्षरिर प्रति वेद्य आदेश फाइल पर रखा गया है) संशोति मद संख्या 11 न्यायालय संख्या 9 ख II भार ीय सव च्च न्यायालय काय@वाही क े अथिभलेख अपील क े लिलए विवशेष अनुमति (दाण्डि क) याति.का संख्या 8487/2021 (इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर बीएन संख्या 624/2019 में आक्षेप अंति म विनर्ण@य और आदेश 23-09-2021 विदनांविक से उत्पन्न) अंसार अहमद याति.काक ा@ (गर्ण) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य प्रत्यर्थी8(गर्ण) आइ.ए. संख्या 134253/2022 - उपयुक्त आदेश/विनदšश आइ.ए. संख्या 57851/2022 - शपर्थी पत्र दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 134255/2022 - शपर्थी पत्र दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 143077/2021 - आक्षेविप विनर्ण@य का सी/सी दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 143079/2021 - ओ. टी. दालिखल करने से छ ू ट आइ.ए. संख्या 57867/2022 ओ. टी. दालिखल करने से छ ू ट विवशेष अनुमति याति.का (दाण्डि क) संख्या 8540/2021 (II) (आइ.ए. संख्या 134240/2022 में उपयुक्त आदेश /विनदšश क 134242/2022 में शपर्थीपत्र दालिखल करने से छ ू ट क 134240/2022 में उपयुक्त आदेश/विनदšश क े लिलए आइ.ए. संख्या 134242/2022 में शपर्थीपत्र दालिखल करने से छ ू ट क े लिलए) ारीखः 18-04-2023 इन मामलों को आज सुनवाई क े लिलए बुलाया गया र्थीा। समक्ष: माननीय न्यायमूर्ति सूय@ कान् माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला याति.काक ा@(गर्ण) क े लिलए श्री जिस~ार्थी@ दवे, वरिरष्ठ अति वक्ता श्री ल्हा अब्दुल रहमान, एओआर सुश्री विवति ठाकर, अति वक्ता श्री एम शाज़ खान, अति वक्ता सुश्री गायत्री दविहया, अति वक्ता प्रत्यर्थी8(गर्ण) क े लिलए श्री शरर्ण ठाक ु र, ए. ए. जी. श्री रोविह क ु मार सिंसह, एओआर श्री जिस~ार्थी@ ठाक ु र, अति वक्ता श्री मुस् फा सज्जाद, अति वक्ता श्री बसं आर, वरिरष्ठ अति वक्ता श्री विदव्येश प्र ाप सिंसह, एओआर श्री विवक्रम प्र ाप सिंसह, अति वक्ता श्री कविवनेश आरएम, अति वक्ता सुश्री थिशवांगी सिंसह, अति वक्ता सुश्री इथिश ा बेदी, अति वक्ता सुश्री रंजना सिंसह, अति वक्ता श्री अजय प्रभु, अति वक्ता सुश्री थिशवानी सिंसह, अति वक्ता श्री एस.आर. सेति या, एओआर श्री क े.बी. उपाध्याय, अति वक्ता श्री सी पी पां े, अति वक्ता श्री एस एन वित्रपाठी, अति वक्ता सुश्री विंपकी ति वारी, अति वक्ता श्री शैलेश ति वारी, अति वक्ता को सुनने क े बाद न्यायालय ने विनम्नलिललिख आदेश विदया:
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. हस् ाक्षरिर आदेश में ब ाए गए कारर्णों क े लिलए अपीलों की अनुमति दी जा ी है, जमान आवेदन संख्या 624/2019 और जमान आवेदन संख्या 4309/2019 में विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को विनयविम जमान दे े हुए उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर आदेश 23.09.2021 विदनांविक को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है और दोनों प्रत्यर्थिर्थीयों को ुरं विव.ारर्ण न्यायलय क े समक्ष आत्मसमप@र्ण करने का विनदšश विदया जा ा है, अन्यर्थीा उनक
3. र्थीाविप, प्रत्यर्थी8 को सभी.श्मदीद गवाहों या अन्य भौति क गवाहों से पूछ ाछ क े बाद जमान क े लिलए आवेदन करने की स्व ंत्र ा होगी। ऐसे विकसी भी आवेदन पर उपरोक्त की गई विटप्पथिर्णयों से प्रभाविव हुए विबना उसक े गुर्ण-दोष क े अनुसार विव.ार विकया जाएगा।
4. विव.ारर्ण न्यायालय को विनदšश विदया जा ा है विक वह मामले का शीघ्र ा से विनर्ण@य करे और एक वष@ क े भी र मुकदमे को समाप्त करने का प्रयास करे।
5. इसकी अगली कड़ी क े रूप में, लंविब अं व@ 8 आवेदनों का भी विनस् ारर्ण विकया जा ा है। (स ीश क ु मार यादव) (प्रीति टी. सी.) उप विनबन् क कोट@ मास्टर (एन. एस. ए..) (हस् ाक्षरिर प्रति वेद्य आदेश फाइल पर रखा गया है)