Rao Shyam v. Rajasthan State

High Court of Rajasthan · 12 Apr 2023 · 2023 INSC 360
Abhay S. Oka; Rajesh Bimbdal
Criminal Appeal No 2203 of 2010
2023 INSC 360
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The court set aside murder convictions due to unreliable eyewitness testimony, emphasizing cautious evaluation of minor witnesses and proper identification procedures.

Full Text
Translation output
गैर- प्रति वेदय
भार का सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 2203/2010
रा े श्याम और अन्य … अपीलार्थी( (गण)
बनाम
राजस्र्थीान राज्य … प्रति वादी
निनण2य
अभय एस. ओका, न्याया ीश
थ्यात्मक पहलू
JUDGMENT

1. अपील क्रमशः अभिभयुक्त संख्या 9, 2 और 1 द्वारा की गई है, जिजन्हें भार ीय दंड संनिह ा (आईपीसी) की ारा 148 और ारा 302 सपनिJ ारा 149 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए दोषी Jहराया गया है। अभिभयोग पत्र में नामजद 29 आरोपी र्थीे, जिजनमें से आरोपी संख्या 1, 2, 5, 7, 9, 15, 17 और 20 को सत्र न्यायालय ने दोषी करार निदया र्थीा और बाकी 21 को बरी कर निदया र्थीा। आक्षेनिप निनण2य द्वारा, उच्च न्यायालय ने अपीलक ा2ओं की दोषजिसतिS को बरकरार रखा है।

2. मृ क रघुनार्थी सिंसह क े परिरवार और क ु छ अभिभयुक्त जो अहीर समुदाय क े र्थीे, क े बीच राजनीति क प्रति द्वंनिद्व ा र्थीी और जिजन्होंने आज़ाद पार्टी( क े नाम से एक पार्टी( बनाई र्थीी। घर्टीना 16 अप्रैल 1976 की है। अभिभयोजन साक्षी 6 भिशव राज सिंसह, जो मृ क रघुनार्थी सिंसह का भाई है, ने प्रर्थीम सूचना रिरपोर्टी2 (प्रार्थीनिमकी) दज[2] कराई। अहीरों क े एक समूह ने मृ क पर हमला निकया। 2023 INSC 360 अभिभयोजन पक्ष क े मामले क े अनुसार, अभिभयोजन साक्षी संख्या 2, 3 और 4 चश्मदीद गवाह र्थीे। निवचारण न्यायालय ने अभिभयोजन साक्षी 2 की गवाही को खारिरज कर निदया, लेनिकन अभिभयोजन साक्षी 3 क ृ ष्णा, नाबालिलग, जो मृ क की बेर्टीी र्थीी, और अभिभयोजन साक्षी 4 क ं वरबाई, जो मृ क की मां है, की गवाही पर निवश्वास निकया। पक्षकारों क े क

3. अपीलक ा2ओं की ओर से उपस्थिस्र्थी निवद्वान अति वक्ता ने कहा निक अभिभयोजन साक्षी-3 एक बाल साक्षी है जिजसक े साक्ष्य को बहु साव ानी से जाँच करने की आवश्यक ा है। अभिभयोजन साक्षी-3 क ृ ष्णा क े साक्ष्य और निवशेष रूप से उसकी जिजरह की ओर हमारा ध्यान आकर्षिष कर े हुए, उसने निनवेदन निकया निक उसकी गवाही को निवश्वसनीय नहीं Jहराया जा सक ा है, खासकर जब अदाल में गवाह द्वारा की गई अभिभयुक्त की भिशनाख़् अत्यति क संनिदग् हो। इसक े अलावा, अभिभयोजन साक्षी-4 अदाल में एक भी अभिभयुक्त की पहचान नहीं कर सकी और इसलिलए, उसकी गवाही पर भरोसा करना असुरतिक्ष र्थीा। उन्होंने यह भी ब ाया निक निवद्वान मजिजस्र्टी्रेर्टी को प्रार्थीनिमकी भेजने में 3 निदन की देरी हुई र्थीी। मृ क क े परिरवार और जिजस राजनीति क दल से अभिभयुक्त र्थीे, क े बीच राजनीति क प्रति द्वंनिद्व ा र्थीी और इसलिलए, इन ीन निदनों की अवति क े दौरान, अभिभयुक्तों को झूJा फ ं साया गया होगा।

4. राज्य का प्रति निनति त्व करने वाले निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने आग्रह निकया निक बाल साक्षी (अभिभयोजन साक्षी-3) से निकये गए प्रारंभिभक प्रश्नों क े उत्तरों क े अवलोकन से प ा चल ा है निक गवाह क े पास अच्छी बुतिS और समझ र्थीी। उसने क 2 निदया निक यद्यनिप उसने आरोपी संख्या 1 की रामचंदर क े बेर्टीे क े रूप में सही ढंग से भिशनाख़् की, गल ी से उसने मोडू (बरी निकए गए अभिभयुक्त) क े नाम का उल्लेख निकया, जो भी एक रामचंदर का पुत्र र्थीा। उन्होंने क 2 निदया निक यह एक मामूली निवसंगति है जो अभिभयोजन साक्षी-3 क े कर्थीन को नकारने क े लिलए पया2प्त नहीं है। उन्होंने कहा निक अभिभयोजन साक्षी-4 क ं वरबाई ने पांच लोगों को आरोपी बनाया है। उन्होंने कहा निक अभिभयोजन साक्षी-4 अभिभयुक्तों को उनक े नाम क े संदभ[2] में पहचानने में सक्षम नहीं र्थीी। उन्होंने कहा निक समय क े बी ने क े कारण यह आसानी से हो सक ा है। इसलिलए, वह कहेगा निक उच्च न्यायालय और सत्र न्यायालय द्वारा निनकाले गए निनष्कष[2], अपीलक ा2ओं क े अपरा क े संबं में, दोषपूण[2] नहीं हो सक े। कारण और निनष्कष[2]

5. हम पा े हैं निक अभिभयोजन का मामला क े वल अभिभयोजन साक्षी-3 क ृ ष्णा और अभिभयोजन साक्षी-4 क ं वरबाई की गवाही पर निनभ2र है। अभिभयोजन साक्षी-3 की उम्र उसक े साक्ष्य क े अभिभलेखन क े समय 12 वष[2] र्थीी। अभिभयोजन साक्षी-3 क े साक्ष्य को क े वल इस आ ार पर खारिरज नहीं निकया जा सक ा निक उसकी उम्र 12 वष[2] र्थीी। हालांनिक, एक बाल साक्षी होने क े ना े उसक े सबू को बहु साव ानीपूव2क मूल्यांकन की आवश्यक ा है, इस थ्य पर निवचार कर े हुए निक एक बाल गवाह को हमेशा आसानी से पढ़ाया जा सक ा है। इसलिलए, हमने उसक े वक्तव्य की साव ानीपूव2क जांच की है। मुख्य परीक्षण में, उसने कहा निक उसने देखा निक 30-35 व्यनिक्त उसक े निप ा (मृ क) क े सार्थी मारपीर्टी कर रहे र्थीे। उसने कहा निक उसने रघुनार्थी (आरोपी संख्या 1); श्यामा (आरोपी संख्या 8); भवाना (भवानी) आरोपी संख्या 20; मोडू और च ुभु2ज (आरोपी संख्या 15) की पहचान की। मोडू क े नाम से दो आरोपी हैं (आरोपी संख्या 2 और आरोपी संख्या 14)। हालांनिक, उसने श्यामा (आरोपी संख्या 8) का नाम लिलया, उसने उसे भवाना (भवानी क े ) भाई क े रूप में वर्णिण निकया। जैसा निक अभिभयुक्तों क े नाम से देखा जा सक ा है निक भवाना काना अहीर का पुत्र है और अभिभयुक्त संख्या 9 रा े श्याम भी काना अहीर का पुत्र है। कर्टीघरे में मौजूद आरोनिपयों की पहचान क े लिलए एक बेहद अजीबोगरीब प्रनिक्रया अपनाई गई। अभिभयुक्त, जिजनक े नाम अभिभयोजन साक्षी-3 द्वारा लिलए गए र्थीे, को कर्टीघरे क े बाहर खड़े रहने क े लिलए कहा गया र्थीा और अन्य को कर्टीघरे में रहने क े लिए कहा गया था। जब पांलए कहा गया र्थीा। जब पाचों अभिभयुक्तों को कर्टीघरे से बाहर लाया जा रहा र्थीा, गवाह को कोर्टी2 हॉल से बाहर रहने क े लिलए कहा गया। यह प्रनिक्रया अभिभयुक्तों क े लिलए अनुतिच र्थीी क्योंनिक इसका उद्देश्य नाबालिलग गवाह द्वारा पांच अभिभयुक्तों की आसानी से भिशनाख् करने की सुनिव ा प्रदान करना र्थीा। इस रह की प्रनिक्रया अभिभयुक्तों क े लिलए उतिच नहीं है। बयान में कहा गया है निक अभिभयोजन साक्षी-3 ने आरोपी रा े श्याम (आरोपी संख्या 9) को श्यामा कहकर काना क े रूप में पहचाना। उसने आरोपी भवाना पुत्र काना, मोडू पुत्र नार्थीू और च ुभु2ज को ओंकार क े पुत्र क े रूप में सही पहचाना। उसने आरोपी संख्या 1 रघुनार्थी की पहचान मोदू क े रूप में रामचंदर क े रूप में की। प्रति परीक्षा में, जब उससे एक अदाल ी सवाल निकया गया, जिजसमें उसे यह ब ाने क े लिलए कहा गया निक उसने मोडू की पहचान यह कहकर क्यों की है निक वह रघुनार्थी है, ो गवाह ने जवाब निदया निक वह समय बी ने क े कारण भूल गई र्थीी। एक सवाल क े जवाब में निक रा ेश्याम कौन र्थीा, उसने जवाब निदया निक वह एक ब्राह्मण र्थीा और आरोपी नहीं है। उसने स्वीकार निकया निक उसकी दादी ने उसे ब ाया र्थीा निक उनक े परिरवार का अहीरों से झगड़ा हुआ र्थीा, जिजन्होंने आज़ाद पार्टी( बनाई है। उसने यह भी स्वीकार निकया निक उसकी दादी ने उन्हें पार्टी( बनाने वाले व्यनिक्तयों क े रूप में मोडू, भवन, च ुभु2ज और रघुनार्थी क े नाम ब ाए र्थीे। उसने कहा निक उसने अपना बयान दज[2] करा े हुए पुलिलस को ब ाया र्थीा निक आज़ाद पार्टी( क े 30-35 लोग उसक े निप ा क े सार्थी मारपीर्टी कर रहे र्थीे। जिजस रह से नाबालिलग गवाह ने आरोपी की भिशनाख़् की, क े वल उसकी गवाही क े आ ार पर आरोपी को दोषी Jहराना असुरतिक्ष हो जा ा है।

6. अब हम अभिभयोजन साक्षी-4 क ं वरबाई क े बयान को देख े हैं, जो मृ क की मां है। उसक े कर्थीन क े अनुसार अभिभयोजन साक्षी-3 क ृ ष्णा रो े हुए उसक े पास आई और कहा निक 30-35 व्यनिक्त उसक े निप ा को पीर्टी रहे र्थीे। जब वह मौक े पर पहुंची ो देखा निक उसका बेर्टीा (रघुनार्थी) दद[2] से रो रहा है। उसने कहा निक उसकी उपस्थिस्र्थीति में, गोपाल (आरोपी संख्या 17) ने मृ क क े कान पर वार निकया। उसने कहा निक आरोपी नंबर 20 ने उसक े बेर्टीे की बांह और बाई ं बगल पर लाJी से वार निकया। उसने कहा निक आरोपी संख्या 1 रघुनार्थी, आरोपी संख्या 7 प्र ाप और आरोपी संख्या 5 ने भी उसक े बेर्टीे पर लाJी वार निकया। जब उससे पूछा गया निक क्या वह 30- 35 अभिभयुक्तों को उनक े नाम से पहचान सक ी है, ो उसका जवाब र्थीा निक वह उनक े नाम और उनक े निप ा क े नाम भी जान ी है और वह उन्हें पहचानने की स्थिस्र्थीति में र्थीी। इसक े बाद उन्होंने कई नाम ब ाए। जब उसे आरोनिपयों की भिशनाख़् करने क े लिलए बुलाया गया, ो वह निकसी भी आरोपी को उनक े नाम क े संदभ[2] में भिशनाख़् नहीं कर सकी। निवद्वान न्याया ीश ने बयान में उल्लेख निकया निक अभिभयोजन साक्षी-4 निकसी भी अभिभयुक्त की भिशनाख़् नहीं कर सकी। निवद्वान सत्र न्याया ीश द्वारा की गई निर्टीप्पणी इस प्रकार है: "निर्टीप्पणी: गवाह ने आरोपी क े पास जाकर, बार-बार चारों ओर घूमकर, सामने क े ल कर और पीछे वाले क े पास जाकर देखने की, पहचानने की कोभिशश की और कभी आरोपी क े पास क ु छ देर खड़े होकर आगे बढ़ी ानिक लौर्टीने पर निकसी को पहचान सक े, यह भी कहा निक क ु छ अं ेरा होने क े कारण दृनि‰ स्प‰ नहीं है। अदाल में दो ट्यूबलाइर्टी जल रही हैं जिजससे पया2प्त रोशनी है और एक ट्यूबलाइर्टी अभिभयुक्तों की रफ है। गवाह ने कहा हालांनिक रौशनी काफी है और चेहरे भी निदख रहे हैं लेनिकन यह आकलन नहीं निकया जा रहा है निक ये लोग कौन हैं.'' इसक े बाद अभिभयोजन साक्षी-4 से पूछा गया निक उपस्थिस्र्थी लोगों में से आरोपी कौन र्थीे। उसने कहा निक वे सभी वहां र्थीे लेनिकन भिशनाख् क े लिलए उनक े चेहरे स्प‰ नहीं र्थीे।

7. इस प्रकार, अभिभयोजन साक्षी-4, जो चश्मदीद गवाह होने का दावा कर ी है, अदाल में नाम से एक भी अभिभयुक्त की भिशनाख् नहीं कर सकी, हालांनिक उसने दावा निकया निक वह अभिभयुक्तों को उनक े नाम क े सार्थी-सार्थी उनक े निप ा क े नाम से पहचानने की स्थिस्र्थीति में र्थीी।

8. हम पहले ही नाबालिलग गवाह अभिभयोजन साक्षी-3 क े साक्ष्य पर चचा2 कर चुक े हैं। उसकी गवाही से प ा चल ा है निक वह कम से कम दो आरोनिपयों की भिशनाख् कर े समय भ्रनिम हो गई र्थीी, हालांनिक पांच आरोपी जिजनका उसने कभिर्थी ौर पर नाम लिलया र्थीा, उन्हें शेष आरोनिपयों से अलग खड़ा निकया गया र्थीा। अभिभयोजन साक्षी-3 क ृ ष्णा का कर्थीन, जब अभिभयुक्त की पहचान की बा आ ी है, निवश्वास नहीं निदखा ा। निकसी भी मामले में, इस रह की गवाही क े आ ार पर अभिभयुक्त को दोषी Jहराना बहु असुरतिक्ष है, खासकर, जब निवचारण न्यायालय द्वारा माना गया एकमात्र अन्य चश्मदीद गवाह (अभिभयोजन साक्षी-4) अदाल में एक भी अभिभयुक्त की भिशनाख् नहीं कर सका। निवद्वान निवचारण न्याया ीश ने पाया निक अदाल कक्ष में पया2प्त रोशनी र्थीी और अभिभयुक्तों क े चेहरे स्प‰ रूप से निदखाई दे रहे र्थीे।

9. इसलिलए, हमारी सुनिवचारिर राय है निक मृ क क े हमलावरों क े रूप में नानिम अभिभयुक्तों की पहचान न्यायालय में एक युनिक्तयुक्त संदेह से परे स्र्थीानिप नहीं की गई है। निफर जो बच ा है वह अभिभयुक्तों की निनशादेही पर हमले क े हभिर्थीयारों की कभिर्थी बरामदगी का सबू है। क े वल कभिर्थी बरामदगी क े आ ार पर दोषजिसतिS कायम नहीं रखी जा सक ी।

10. इसलिलए, आक्षेनिप निनण2यों और आदेशों क े ह अपीलक ा2ओं की दोषजिसतिS रद्द की जा ी है और अपास् की जा ी है और अपीलक ा2ओं को उनक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों से बरी निकया जा ा है। अपीलक ा2 जमान पर हैं। उनक े ज़मान -पत्र रद्द निकए जा े हैं। द्नुसार अपील स्वीकार की जा ी है। न्याया ीश [अभय एस ओका] न्याया ीश [राजेश बिंबदल] नई निदल्ली 12 अप्रैल 2023। अस्वीकरण: स्र्थीानीय भाषा में अनुवानिद निनण2य, वादी क े प्रति बंति उपयोग क े लिलए, उसकी भाषा में समझाने क े लिलए है और निकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं निकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और आति कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, निनण2य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक होगा और निनष्पादन और काया2न्वयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।