Bhoomi aur Nirmaan Vibhag v. Atro Devi and Others

Supreme Court of India · 11 Apr 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bindal
Civil Appeal No. 2749 of 2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that under Section 24(2) of the 2013 Land Acquisition Act, either possession or payment of compensation suffices to prevent lapse of acquisition, overruling earlier precedent and allowing the appeal.

Full Text
Translation output
प्र�तवेद्य
भारतीय सव�च्च न्यायालय
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं.2749/2023
(�व.अनु.या.(�स�वल) सं.7510/2023 से उत्पन्न)
(�व.अनु.या.(�स�वल) सं. 23608/2021 से उत्पन्न)
भू�म और �नमार्ण �वभाग
स�चव और अन्य द्वारा ....अपीलाथ�(गण)
बनाम
अत्रो देवी और अन्य ....प्रत्यथ�(गण)
�नणर्य
न्या., राजेश �बंदल
JUDGMENT

1. देर� को माफ कर �दया गया।

2. अनुम�त प्रदान क� गई।

3. अपीलकतार्ओं ने �दल्ल� उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत �दनां�कत 20.12.2017 आदेश को चुनौती द� है। उपरोक्त आदेश क े माध्यम से, प्र�तवाद� द्वारा दायर �रट या�चका को यह मानते हुए अनुम�त द� गई थी �क भू�म अ�धग्रहण, पुनवार्स और पुनवार्स अ�ध�नयम, 2013(सं�ेप म� “2013 अ�ध�नयम”) म� उ�चत मुआवजे और पारद�शर्ता क े अ�धकार क� धारा 24(2) को देखते हुए और �ववादग्रस्त भू�म क े संबंध म� अ�धग्रहण समाप्त हो गया है।

4. अ�भलेख म� उपलब्ध मामले क े तथ्य� से, यह स्पष्ट है �क भू�म अ�धग्रहण अ�ध�नयम, 1894 क� धारा4 क े तहत जार� अ�धसूचना क े माध्यम से या�चकाकतार् क� भू�म स�हत भू�म का बड़ा �हस्सा, िजसम� गांव घ�डा, चौहान खादर, नई �दल्ल� क� राजस्व संपदा म� िस्थत खसरा, चौहान खादर, नई �दल्ल� शा�मल है, �दल्ल� क े �नयोिजत �वकास क े �लए अ�धग्र�हत करने क� मांग क� गई थी।इसक े बाद धारा 6 �दनां�कत 20.06.1990 क े तहत अ�धसूचना जार� क� गई।पुरस्कार क� घोषणा 19.06.1992 को क� गई थी।

5. उच्च न्यायालय म� एक �रट या�चका दायर क� गई थी 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा24 (2) म� दावा �कया गया है �क �वचाराधीन अ�धग्रहण समाप्त हो गया है क्य��क न तो कब्जा �लया गया है और न ह� इसक े �लए मुआवजे का भुगतान �कया गया है। उच्च न्यायालय क े सम� अपीलाथ� का रुख था �क भू�म का कब्जा 06.12.2012 पर �लया गया था और मौक े पर ह� डीडीए को स�प �दया गया था। अ�भ�ल�खत भू�म मा�लक� को मुआवजे का भुगतान नह�ं �कया जा सका क्य��क वे कभी भी इसका दावा करने क े �लए आगे नह�ं आए।

6. उच्च न्यायालय ने इस फ ै सले पर भरोसा �कया पुणे नगर �नगम और अन्य बनाम �म�सर�मल सोलंक� और अन्य (2014) 3 एससीसी 183 ने �क चूं�क भू�म/भू मा�लक� को मुआवजे का भुगतान नह�ं �कया गया था, इसम� प्र�तवा�दय� ने कहा �क, �वचाराधीन अ�धग्रहण समाप्त हो गया है।

7. अपीला�थर्य� क े �लए उपिस्थत �वद्वान अ�धवक्ता द्वारा उठाए गए तक र् पर अपीलकतार्ओं का कहना है �क सं�वधान पीठ क� दृिष्ट म� इंदौर �वकास प्रा�धकरण बनाम मनोहरलाल और अन्य (2020) 8 एस. सी. सी. 129 म� इस न्यायालय का �नणर्य, िजसम� पहले पुणे नगर �नगम और अन्य मामले (उपरोक्त) म� इस न्यायालय का �नणर्य खा�रज कर �दया गया था, उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आदेश को दर�कनार �कया जा सकता है। सं�वधान पीठ द्वारा यह राय द� गई थी �क दोन� शत� म� से �कसी एक का अनुपालन जैसे भू�म का कब्जा लेना या मुआवजे का भुगतान करना, अ�धग्रहण को बनाए रखने क े �लए पयार्प्त है। अ�भलेख पर उपलब्ध �न�वर्वाद तथ्य� से यह स्पष्ट है �क वतर्मान मामले म�, अ�धग्रहण पूरा होने क े बाद �ववा�दत भू�म का कब्जा ले �लया गया था।

8. इसक े अ�त�रक्त, हमारे ध्यान म� लाया गया एक महत्वपूणर् तथ्य यह है �क भारतमाला प�रयोजना क े पहले चरण म� �दल्ल� राज्य म� अ�रधाम जंक्शन से �दल्ल� /उ�र प्रदेश सीमा तक �दल्ल� -सहारनपुर-देहरादून राजमागर् क े �नमार्ण क े �लए एनएचएआई को �वषय भू�म क� आवश्यकता है। यहां तक �क प�रयोजना को �नष्पा�दत करने क े �लए ठेक े दार� को भी �नयुक्त �कया गया है, जो वतर्मान अपील क े लं�बत होने क े कारण �वलं�बत हो सकता है। इस�लए �वषय भू�म प�रयोजना का एक �हस्सा है जो राष्ट्र�य महत्व का है।

9. दूसर� ओर, प्र�तवाद� क े �लए उठाए गए तक र् म� �वद्वान अ�धवक्ता का कहना है �क उच्च न्यायालय द्वारा �नणर्य क� तार�ख पर मौजूद कानून क े आधार पर तय क� गई �रट या�चका को इस न्यायालय क े बाद क े फ ै सले क े आधार पर दर�कनार नह�ं �कया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने अ�भ�नधार्�रत �कया था �क इस न्यायालय द्वारा 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क� व्याख्या क े अनुसार पुणे नगर �नगम क े मामले (उपरोक्त) म� मुआवजे का भुगतान नह�ं �कया गया है। यह तथ्य क� बात है जो उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आदेश म� देखी गई है �क भू�म का कब्जा पहले ह� संबं�धत प्रा�धकरण द्वारा ले �लया गया था।

10. प�� क� ओर से उपिस्थत �वद्वान अ�धवक्ता को सुना और अ�भलेख� का अवलोकन �कया।

11. इंदौर �वकास प्रा�धकरण क े मामले (उपरोक्त) म� इस न्यायालय क� सं�वधान पीठ ने राय द� थी �क अ�धग्र�हत भू�म का कब्जा लेना या भू�म मा�लक� को मुआवजे का भुगतान करना 2013 क े अ�ध�नयम क� खंड 24 (2) क े संदभर् म� अ�धग्रहण को समाप्त होने से बचाने क े �लए पयार्प्त होगा। इस न्यायालय क� सं�वधान पीठ क े सम� उठाए गए �व�भन्न प्रश्न� का भी उ�र �दया गया। प्रासं�गक पैराग्राफ संख्या 362 और 366 नीचे उध्दृत ह�: "362 प�रणामस्वरूप, पुणे नगर �नगम और अन्य म� �नणर्य �दया गया (ऊपरोक्त) को इसक े द्वारा खा�रज कर �दया जाता है और अन्य सभी �नणर्य िजनम� पुणे नगर �नगम (ऊपरोक्त) का पालन �कया गया है, उन्ह� भी खा�रज कर �दया जाता है।...........

366. उपरोक्त चचार् को देखते हुए, हम �नम्न�ल�खत प्रश्न� क े उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1) (ए) क े प्रावधान� क े तहत य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े प्रारंभ होने क� �त�थ1-1-2014 को मुआवज़ा नह�ं �दया जाता है, तो कायर्वाह� म� कोई चूक नह�ं होती है। 2013 क े तहत मुआवजे का �नधार्रण �कया जाना है। 366.[2] य�द न्यायालय क े अंत�रम आदेश द्वारा कवर क� गई अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर मुआवज़ा पा�रत �कया गया है, तो कायर्वाह� 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24 (1) (बी) क े तहत जार� रहेगी जैसे �क इसे �नरस्त नह�ं �कया गया है।

366.3. कब्जा और मुआवजे क े बीच धारा 24 (2) म� उपयोग �कए गए शब्द "या" को "न" या "और" क े रूप म� पढ़ा जाना चा�हए। 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) क े तहत भू�म अ�धग्रहण क� कायर्वाह� क� मा�नत समािप्त तब होती है जब उक्त अ�ध�नयम क े शुरू होने से पहले पांच साल या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्रयता क े कारण, भू�म का कब्जा नह�ं �लया गया है और न ह� मुआवजे का भुगतान �कया गया है। दूसरे शब्द� म�, य�द कब्जा ले �लया गया है, मुआवजे का भुगतान नह�ं �कया गया है तो कोई चूक नह�ं है। इसी तरह, अगर मुआवजे का भुगतान �कया गया है, कब्जा नह�ं �लया गया है तो कोई चूक नह�ं है। (जोर �दया गया)

366.4. 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) क े मुख्य भाग म� अ�भव्यिक्त "भुगतान" अदालत म� मुआवजे क� जमा रा�श म� समावे�शत नह�ं है। इसका प�रणाम खंड 24 (2) क े परंतुक म� गैर-जमा रा�श का प्रावधान �कया गया है, य�द इसे अ�धकांश भू�मस्वा�मत्व क े संबंध म� जमा नह�ं �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्रहण क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्रहण अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत दा�यत्व पूरा नह�ं �कया गया है, तो उक्त अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्याज �दया जा सकता है। ��तपू�तर् (अदालत म�) जमा न करने क े प�रणामस्वरूप भू�म अ�धग्रहण क� कायर्वाह� व्यपगत नह�ं होती है। पांच साल या उससे अ�धक समय तक अ�धकांश स्वा�मत्व जमा न करने से संबं�धत मामले म�, 2013 क े तहत मुआवजे का भुगतान 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्रहण क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख को "भू�म मा�लक�" को �कया जाना है।

366.5. य�द �कसी व्यिक्त को प्रदान �कया गया मुआवज़ा 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े तहत प्रस्तुत �कया गया है, तो उसक े सम� यह दावा करना खुला/करने का �वकल्प नह�ं है �क अदालत म� मुआवजे का भुगतान न करने या जमा न करने क े कारण धारा 24 (2) क े तहत अ�धग्रहण समाप्त हो गया है। भुगतान करने का दा�यत्व धारा 31 (1) क े तहत रा�श का भुगतान करक े पूरा �कया जाता है। िजन भू�म मा�लक� ने मुआवजे को प्र�तग्रहण करने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�ने अ�धक मुआवजे क े �लए संदभर् मांगा था, वे ऐसा नह�ं कर सकते। दावा है �क अ�धग्रहण क� कायर्वाह� 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) क े तहत समाप्त हो गई थी।

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366.6. 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) क े प्रावधान को खंड 24 (2) क े �हस्से क े रूप म� माना जाना चा�हए, न �क खंड 24 (1) (बी) क े �हस्से क े रूप म�।

366.7. 1894 क े तहत कब्जा लेने का तर�का और जैसा �क धारा 24 (2) क े द्वारा �वचार �कया गया है, जांच �रपोटर् तैयार करना है। एक बार जब 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्जा लेने पर अ�ध�नणर्य पा�रत हो जाता है, तो राज्य म� �न�हत भू�म को 2013 क े अ�ध�नयम क� खंड 24 (2) क े तहत �व�नवेश का प्रावधान नह�ं है, क्य��क एक बार कब्जा लेने क े बाद खंड 24 (2) क े तहत कोई चूक नह�ं होती है।

366.8. 2013 क े लागू होने से पहले पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्जा करने और मुआवजे का भुगतान करने म� अपनी �निष्क्रयता क े कारण प्रा�धकार� �वफल रहे ह�, तो 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धकार� क े पास लं�बत भू�म अ�धग्रहण क� कायर्वाह� म� धारा 24 (2) क े प्रावधान लागू होते ह�। अदालत द्वारा पा�रत अंत�रम आदेश� क े �नवार्ह क� अव�ध को पाँच साल क� गणना म� बाहर रखा जाना चा�हए। 366.[9] 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) भू�म अ�धग्रहण क� समाप्त कायर्वाह� क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए कारर्वाह� क े नए कारण को जन्म नह�ं देती है। अ�ध�नयम 2013 क� धारा 24 प्रवतर्न क� तार�ख 1-1- 2014 को लं�बत कायर्वाह� पर लागू होती है। यह पुराने और समयबद्ध दाव� को पुनज��वत नह�ं करता है और न ह� समाप्त कायर्वाह� को �फर से खोलता है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्रहण को अमान्य करने क े �लए अदालत क े बजाय राजकोष म� कायर्वाह� या मुआवजे क े जमा करने क े तर�क े को �फर से खोलने क े �लए कब्जा लेने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देता है।"

12. मुद्दा �क “अ�धग्रहण क े बाद राज्य द्वारा भू�म पर स्वा�मत्व का क्या अथर् है” इंदौर �वकास प्रा�धकरण क े मामले (उपरोक्त) म� माननीय सव�च्च न्यायालय क� सं�वधान पीठ द्वारा भी �वचार �कया गया है। इसम� यह मत व्यक्त �कया गया है �क भू�म अ�धग्रहण और पुरस्कार मुआवज़े क े पा�रत होने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत सभी बाधाओं से मुक्त हो जाती है। राज्य को भू�म स�पने का अ�धकार है। इसक े बाद कब्जा बनाए रखने वाले �कसी भी व्यिक्त क े साथ अ�तचारक व्यवहार �कया जाना चा�हए। जब भू�म क े बड़े �हस्से का अ�धग्रहण �कया जाता है, तो राज्य को �कसी व्यिक्त या पु�लस बल को कब्जा बनाए रखने और भू�म पर खेती शुरू करने क े �लए तब तक नह�ं रखना चा�हए जब तक �क इसका उपयोग नह�ं �कया जाता है। अ�धग्रहण क� प्र�क्रया पूर� होने क े बाद सरकार को उसी स्थान पर रहना या भौ�तक रूप से कब्जा करना शुरू नह�ं करना चा�हए। य�द अ�धग्रहण क� प्र�क्रया क े बाद राज्य म� कब्जा क े साथ सभी बाधाओं से मुक्त पूणर् और भू�म �न�हत, भू�म को बनाए रखने वाला कोई भी व्यिक्त या �कसी भी व्यिक्त द्वारा �कया गया कोई भी प्रवेश राज्य क� भू�म पर अ�तक्रमण क े अलावा और क ु छ नह�ं है। प्रासं�गक पैराग्राफ 244, 245 और 256 नीचे �दए गए ह�: "244. 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 म� प्रावधान �कया गया है �क भू�म का कब्जा राज्य सरकार द्वारा एक पुरस्कार पा�रत करने क े बाद �लया जा सकता है और उसक े बाद राज्य सरकार म� सभी बाधाओं से मुक्त भू�म �न�हत हो सकती है। धारा 17 (1) म� तात्का�लकता क े मामले म� भी इसी तरह क े प्रावधान �कए गए ह�। "कब्ज़ा" शब्द का उपयोग 1894 क े अ�ध�नयम म� �कया गया है, जब�क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24 (2) म� "भौ�तक कब्ज़ा" अ�भव्यिक्त का उपयोग �कया गया है। यह प्रस्तुत �कया जाता है �क कब्जा लेने क े �लए पंचनामा लेना पयार्प्त नह�ं है जब वास्त�वक भौ�तक कब्जा भू�म मा�लक क े पास रहता है और धारा 24 (2) क े तहत वास्त�वक भौ�तक कब्जा लेने क� आवश्यकता होती है, न �क �कसी अन्य रूप म� कब्जा। जब राज्य ने भू�म का अ�धग्रहण कर �लया है और मुआवज़ा पा�रत कर �दया गया है, तो भू�म राज्य सरकार को सभी बाधाओं से मुक्त करती है। राज्य म� भू�म �न�हत करने का कायर् अ�धकार क े साथ है, इसक े बाद कब्जा बनाए रखने वाले �कसी भी व्यिक्त को अ�तक्रमणकार� माना जाना चा�हए और राज्य म� �न�हत भू�म पर कब्जा करने का कोई अ�धकार नह�ं है जो सभी बाधाओं से मुक्त है। 245 प्रश्न जो उत्पन्न होता है �क क्या 1894 क े अ�ध�नयम क े तहत कब्जा लेने और धारा 24 (2) म� उपयोग क� गई "भौ�तक कब्जा" अ�भव्यिक्त क े बीच कोई अंतर है। वास्तव म�, 1894 क े तहत कब्जा लेने का मतलब क े वल भू�म पर भौ�तक कब्जा करना था। 2013 क े तहत कब्जा लेना हमेशा भू�म पर भौ�तक कब्जा करने क े बराबर होता है। जब राज्य सरकार भू�म का अ�धग्रहण करती है और कब्जा लेने का एक �ापन तैयार करती है, तो यह भू�म का भौ�तक कब्जा लेने क े बराबर होता है। संप�� क े बड़े �हस्से पर या अन्यथा जो अ�धग्र�हत क� जाती है, सरकार से इसे बनाए रखने क े �लए �कसी अन्य व्यिक्त या पु�लस बल को तब तक अधीन नह�ं रखना चा�हए और इसक� खेती शुरू करनी चा�हए जब तक उस भू�म का उपयोग उस उद्देश्य क े �लए नह�ं �कया जाता है िजसक े �लए इसे अ�धग्र�हत �कया गया है। एक बार कब्जा ले �लए जाने क े बाद सरकार को कब्जा प्राप्त करने क े �लए जांच कायर्वाह� शुरू करक े उस पर रहना या भौ�तक रूप से कब्जा करना शुरू नह�ं करना चा�हए। इसक े बाद, य�द भू�म का कोई और संर�ण या भू�म पर कोई पुनः प्रवेश �कया जाता है या कोई खुल� भू�म पर खेती करना शुरू कर देता है या आउटहाउस आ�द म� रहना शुरू कर देता है, तो राज्य क े कब्जे वाल� भू�म पर अ�तक्रमण करने वाला माना जाता है। अ�तक्रमणकार� का कब्जा हमेशा वास्त�वक मा�लक यानी मामले म� राज्य सरकार क े लाभ क े �लए होता है। XXXX

256. इस प्रकार, यह स्पष्ट है �क �न�हत करना अ�धकार क े साथ है और क़ानून ने 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 और 17 क े तहत प्रावधान �कया है �क एक बार कब्जा लेने क े बाद, पूणर् �न�हत होना। यह एक अ�म्य अ�धकार है और इसक े बाद अ�धकार �न�हत हो जाता है। धारा 16 क े तहत �न�दर्ष्ट �न�ह�तकरण �व�भन्न चरण� क े बाद होता है, जैसे �क धारा 4 क े तहत अ�धसूचना, धारा 6 क े तहत घोषणा, धारा 9 क े तहत नो�टस, धारा 11 क े तहत पुरस्कार और �फर कब्जा। संप�� को सभी बाधाओं से पूर� तरह से मुक्त करने क े वैधा�नक प्रावधान को पूणर् प्रभाव से लागू �कया जाना चा�हए। न क े वल राज्य म� कब्जे वाले बिल्क अन्य सभी बाधाओं को भी तुरंत हटा �दया जाता है। जमींदार का अ�धकार समाप्त हो जाता है और राज्य संप�� का पूणर् मा�लक और कब्जा बन जाता है। इसक े बाद संप�� पर भू�म मा�लक का कोई �नयंत्रण नह�ं होता है। उसे संप�� लेने और उसे �नयं�त्रत करने क े �लए कोई दुश्मनी नह�ं हो सकती। भले ह� उसने राज्य द्वारा कब्जा �कए जाने क े बाद उस पर कब्जा बनाए रखा हो या अन्यथा अ�तक्रमण �कया हो, वह एक अ�तक्रमणकार� है और अ�तक्रमण करने वाले का ऐसा कब्जा उसक े लाभ क े �लए और मा�लक क� ओर से है। (जोर �दया गया)

13. यह भी ध्यान देने योग्य तथ्य है �क भ�वष्य क� आवश्यकताओं का ध्यान रखने क े �लए �नयोिजत �वकास क े �लए भू�म क े बड़े �हस्से का अ�धग्रहण �कया जाता है। भू�म का ऐसा �हस्सा भी खाल� पड़ा हो सकता है। जैसा �क इस न्यायालय द्वारा इंदौर �वकास प्रा�धकरण क े मामले (ऊपरोक्त) म� देखा गया है, राज्य एज��सय� को अ�धग्रहण क� प्र�क्रया पूर� होने क े बाद ल� गई भू�म क े कब्जे क� र�ा क े �लए पु�लस बल नह�ं लगाना चा�हए। जहां तक मामले का संबंध है, भारतमाला प�रयोजना क े पहले चरण म� �दल्ल� राज्य म� अ�रधाम जंक्शन से �दल्ल�/उ�र प्रदेश सीमा तक शुरू होने वाले �दल्ल� -सहारनपुर-देहरादून राजमागर् क े �नमार्ण क े �लए राष्ट्र�य महत्व क� प�रयोजना क े �लए भू�म क� आवश्यकता है, भले ह� वह खाल� पड़ी हो।

14. यह अ�भलेख म� �न�वर्वाद तथ्य है, जैसा �क उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत �ववा�दत आदेश म� देखा गया है, भू�म का कब्जा भू�म अ�धग्रहण कलेक्टर द्वारा ले �लया गया था और �दल्ल� �वकास प्रा�धकरण को स�प �दया गया था। कब्ज़े क� कायर्वाह� क� तार�ख 06.12.2012 क� �रपोटर् भी �रकॉडर् म� रखी गई है। इस�लए, शत� म� से एक को पूरा करने क े �लए, हम� �कसी अन्य तक र् क� जांच करने क� आवश्यकता नह�ं है।

15. उपरोक्त तथ्य और इंदौर �वकास प्रा�धकरण क े मामले (उपरोक्त) म� इस न्यायालय क� सं�वधान पीठ द्वारा �नधार्�रत कानून को ध्यान म� रखते हुए, हमार� राय म� उच्च न्यायालय द्वारा पा�रत आदेश को कानूनी रूप से कायम नह�ं रखा जा सकता है और उसी क े अनुसार इसे दर�कनार कर �दया जाता है। हालां�क, प्र�तवाद� अपनी पात्रता क े अनुसार मुआवजा प्राप्त करने क े हकदार ह�गे। भू�म अ�धग्रहण अ�धकार� को भी सह� मा�लक को इसका भुगतान करने क े �लए कदम उठाने चा�हए।

16. तदनुसार अपील का �नपटान �कया जाता है।...............न्या. [अभय एस. ओका]...............न्या. [राजेश �बंदल] नई �दल्ल�; 11.04.2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अस्वीकरण: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ क े सी�मत प्रयोग हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया जाएगा| समस्त कायार्लयी एवं व्यावहा�रक प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरूप ह� अ�भप्र मा�णत माना जाएगा और कायार्न्वयन तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।