Duga Bhavani v. LRZ

High Court of Punjab and Haryana · 11 Apr 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bandal
2010 Civil Appeal No 6801
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal restoring the trial court's decree, holding that the appellant is the rightful owner of the disputed property and the defendants failed to prove any valid title or possession.

Full Text
Translation output
[ रपोट यो य]
भारत के उ तम यायालय म
िसिवल अपीलीय े ािधकार
2010 क िसिवल अपील सं या 6801
मू त ी दुगा भवानी (हेतुवाली) ट और अ य... अपीलकता
बनाम
एलआरज़ और अ य के मा यम से
ी दीवान चंद (मृत) ... उ रदाता
के साथ
2010 क िसिवल अपील सं या 6802
2010 क िसिवल अपील सं या 6803
2010 क िसिवल अपील सं या 6804
िनणय
राजेश बंदल, जे.
JUDGMENT

1. वादी इस यायालय के सम 1997 क िनयिमत ि तीय अपील सं या 2306 और 2307 म उ यायालय ारा पा रत आदेश को चुनौती दे रहे ह, िजसने िनचली अपीलीय अदालत के िनणय और िड य को बरकरार रखा, 1989 क वाद सं या 273 और 274 म ायल कोट के फैसले को उलटते ए।अपीला थय ारा दायर अपील को खा रज कर दया गया। उपयु अपील के िव 2010 के पुनरी ण / समी ा आवेदन सं या आरए-आरएस-25 सी और 26-सी म दनांक 5.4.2010 को पा रत आदेशको भी चुनौती दी जा रही है।

2. इस मामले का उतार-चढ़ाव वाला इितहास रहा है। हालां क, िसिवल अपील सं या 6801/2010 से वतमान अपील के त य देखे जा रहे ह। हालां क, जहां भी आव यक हो, उ संपि से संबंिधत िपछले मुकदमेबाजी को संद भत कया जाएगा।

3. अपीलकता एक पंजीकृत चै रटेबल ट है, जो खसरा नं. 4833 का िह सा बनाने वाली भूिम का मािलक है। अपीलाथ ारा क जे के िलए 26.5.1982 को एक वाद दायर कया गया था।यह आरोप लगाया गया था क भूिम पर ितवा दय / ितवा दय ारा अित मण कया गया था.वाद को ितवा दय / य थय ारा आपि जताते ए चुनौती दी गई थी क अपीलकता/वादी िववा दत संपि के मािलक नह ह; उनके पास मुकदमा दायर करने का कोई अिधकार नह है; ितवादी 34 से अिधक वष से संपि के क जे म ह और अपना वसाय चला रहे ह; और वाद संपि खसरा सं या 4833 का िह सा नह है।यह भी अिभवचन कया गया क वे ितकूल क जे के मा यम से वाद संपि के मािलक बन गए थे.

4. वाद क िड िनचली अदालत ारा दनांक 28.2.1991 के िनणय ारा क गई थी। य थय / ितवा दय को वाद संपि से बाहर िनकालने का आदेश दया गया था. यथ / ितवादी ारा दायर अपील को िव ान अित र िजला यायाधीश ने वीकार कर िलया। ायल कोट के फैसले और िड को मु य प से इस आधार पर खा रज कर दया गया था क वे संपि पर अपना हक सािबत करने म िवफल रहे थे।

5. िनचले अपीलीय यायालय के िनणय और िड को उ यायालय ारा अपील म दनांक 13.10.2009 के आदेश ारा बरकरार रखा गया था और पुनरी ण / समी ा आवेदन भी 5.4.2010 को खा रज कर दया गया था।

6. ी नीरज जैन, िव ान व र अिधव ा ने अपीलकता क ओर से पेश होकर कहा क ायल कोट ने सबूत क सराहना करते ए, वाद को सही प से िड कया था। हालां क, सबूत क गलत ा या पर, थम अपीलीय अदालत ने उन िन कष को उलट दया था।िनचली अपीलीय अदालत के फैसले को कायम रखने म उ यायालय ने भी गलती क ।उ ह ने आगे कहा क ायल कोट के सम बहस के दौरान, य थय / ितवा दय क ओर से उपि थत िव ान वक ल ने प प से वीकार कया था क िववा दत थल खसरा सं या 4833 का िह सा है। वा तव म, ितकूल क जे का तक केवल तभी उठाया जा सकता है जब संपि का वािम व िववाद म न हो।उ यायालय ने एक प िन कष भी दज कया क खसरा नंबर 4833 अपीलकता का है। हालां क, अपीलकता को केवल इस आधार पर राहत से इनकार कया गया था क संपि क पहचान िववाद म थी।उ यायालय क राय थी क यह खसरा सं या 4833 का िह सा नह है।उ यायालय के िन कष क खसरा नं. 4833 अपीलकता /वा दय के वािम व म है, को य थय ारा चुनौती नह दी गई है.

7. उ ह ने आगे कहा क रबी 1990 से खसरा िगरदावरी के सुधार के िलए ितवा दय ारा 2.8.1993 को तहसीलदार- सह-सहायक कले टर, ि तीय ेड, करनाल के सम एक आवेदन दायर कया गया था। इसम उ रदाता ारा एक प वीकारोि क गई थी क उ रदाता के क जे वाला े खसरा सं या 4833 का िह सा था और उनके क जे म है, जो वष 1994-95 क जमाबंदी से प है। थानीय आयु क रपोट, जो एक अलग मुकदमे अथात् 1981 क िसिवल वाद सं या 371 म तुत क गई थी, िजसका भरोसा िनचले अपीलीय यायालय (ए स डी-16) ारा कया गया था, कसी भी प े बंदु का पता लगाए िबना थी।उ ह ने आगे पेपर बुक के पृ 97 पर द तावेज़ का उ लेख कया, िजसम उ रदाता ने िववाद म संपि के िलए नगर सिमित को िवशेष प से उ लेख करते ए िनमाण योजना तुत क क यह खसरा सं या 4833 का िह सा है। रकॉड पर पूव साम ी के साथ, िनचली अपीलीय अदालत के साथ-साथ उ यायालय ारा दज कए गए िन कष क संपि क पहचान िववाद म थी, पूरी तरह से िवकृत है, य क यह वयं य थय ारा वीकार कया गया था क उनके क जे म संपि खसरा नं. 4833

8. यह भी तक दया गया क इससे पहले, य थय, अथात् सुंदर दास और गोपाल संह ने भागवत स प, आनंद स प और पंिडत हर स प को वाद संपि से बेदखल करने से रोकने के िलए थायी ादेश के िलए 29.05.1975 को 1981 का िसिवल सूट नं. 371 दायर कया था और ितकूल क जे का तक भी उठाया गया था। जहां तक ितकूल क जे क दलील का संबंध है, िन कष वतमान ितवा दय /वा दय के िखलाफ थे, जब क थायी िनषेधा ा क िड उ रदाता के लंबे क जे के कारण पा रत क गई थी, िजसम यह अिभिनधा रत कया गया था क उ ह कानून के उिचत अनु म के अलावा बेदखल नह कया जा सकता है।यह उसी वाद संपि के संदभ म था।वाद आंिशक प से 30.09.1981 को िड कया गया था।

9. दूसरी ओर, उ रदाता क ओर से पेश िव ान व र अिधव ा अिधव ा संजय पा रख ने कहा क अपीलकता के िलए इस यायालय के सम सभी त या मक मु को उठाने के िलए ब त देर हो चुक है। नीचे के दोन यायालय ारा ितवा दय के प म रकॉड कए गए त य का समवत िन कष है और उस िन कष को खा रज करने के िलए रकॉड पर कुछ भी नह है। ितवा दय को अनाव यक प से मुकदमेबाजी म घसीटा जा रहा है। थानीय आयु क दनांक 2.12.1978 क रपोट, जो पहले से ही अिभलेख पर है, प प से इंिगत करती है क उ रदाता के क जे म प रसर खसरा सं या 4833 का िह सा नह है, बि क यह उससे 434 फ ट आगे है। इस यायालय के सम नए मु को उठाने क कोिशश क जा रही है, िजसक अनुमित नह दी जा सकती। ितवादी िपछले 34 वष से अिधक समय से संपि के क जे म ह।वा तव म, उ यायालय के सम अपील म भी, कानून का कोई ठोस नह बनाया गया था और ऐसा कोई कानूनी मु ा नह है, िजसे इस यायालय ारा िनधा रत करने क आव यकता हो।

10. हमने प कार के िव ान अिधव ा को सुना है और अिभलेख पर संबंिधत साम ी का अवलोकन कया है।

11. रकॉड पर दए गए िनणय से यह प है क हरस प बनाम नगरपािलका सिमित मामले म उप यायाधीश, करनाल (1962 का वाद सं या 292) ारा अपीलकता के िहत म पूवव तय / पूवािधका रय के प म 30.7.1965 को एक िनणय और िड पा रत क गई थी।

12. अपीलाथ ने वष 1974 म 2 िववा दत स पि य के िलए नगर पािलका सिमित के िव उपरो आदेश के िन पादन हेतु यािचका दायर क । उ रदाता के िहत म पूववत / िहत- पूवािधकारी को भी िन पादन यािचका म उ रदाता के प म शािमल कया गया था य क वे िड के िन पादन म बाधा डाल रहे थे और उस पर िनमाण करने क कोिशश कर रहे थे।

13. उपरो िन पादन कायवाही म एक थानीय आयु िनयु कया गया, िजसने साइट का दौरा करने के बाद 19.1.1975 को अपनी रपोट यायालय के सम तुत क । रपोट म, उ ह ने कहा क उ रदाता ारा िन मत िवचाराधीन दुकान खसरा सं या 4833 पर बनी ह।उपयु िन पादन कायवािहय क ि थित के बारे म रकॉड से कुछ भी नह बताया गया था.

14. जैसा क िनचली अपीलीय अदालत ने दनांक 16.1.1997 के फैसले म देखा है क पूव िन पादन यािचका म कायवाही के दौरान, ितवा दय को उनके िहत-पूवािधकारी ारा दए गए एक वचन पर िनमाण करने क अनुमित दी गई थी क य द वे मामले म हार जाते ह, वे कसी मुआवजे का दावा नह करगे।

15. पूव िन पादन यािचका के लंिबत रहने के दौरान, ितवा दय के िहत-पूवािधकारी ने अपीलकता ट के टी भगवत स प के िखलाफ मुकदमा सं या 371/1981 दायर कया। किथत वाद म, दो मु य मु े तैयार कए गए थे, अथात्, या उनम वादी ितकूल क जे के मा यम से संपि के मािलक बन गए थे और दूसरा यह था क या वादी 1962 के वाद सं या 292, हरस प बनाम नगरपािलका सिमित, करनाल म िड से आब ह।केवल यह त य क ितवादीगण के पूववत ने ितकूल क जे के आधार पर संपि के वािम व का दावा करते ए वाद दायर कया था, पूव अनुमान लगाता है क वाद संपि पर अपीला थय का वािम व वीकार कर िलया गया था। कसी भी मामले म, ितकूल क जे के मा यम से िववाद म संपि का मािलक बनने वाले ितवादीगण के पूववत -िहत के मु े पर वादी के िखलाफ फै सला कया गया था।यह िवशेष प से अिभिनधा रत कया गया था क पूव वाद म वादी अपने ितकूल क जे को सािबत करने म िवफल रहे थे।अंत म, वादी आंिशक प से सफल ए य क उनके प म थायी ादेश क केवल एक िड पा रत क गई थी िजसम ितवा दय को उनके क जे म ह त ेप करने से रोका गया था, िसवाय 30.09.1981 को कानून के उिचत अनु म के।उपरो मुकदमे म सदर कानूनगो को थानीय आयु के प म िनयु कया गया था।उसने अपनी रपोट 02.12.1978 को दी थी िजसम कहा गया था क ितवादीगण के क जे वाली संपि नाला से 434 फ ट दूर थी। रपोट म खसरा सं या 4833 का भी उ लेख नह कया गया है।कोई प े बंदु का उ लेख नह कया था।यह यथासंभव अ प था।िड को अंितम प दया गया। वतमान मुकदमा

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16. ट ने क जे के िलए 1989 का िसिवल सूट सं. 273 दनांक 26.05.1982 को फाइल कया। ितवादीगण का मु य भरोसा थानीय आयु क रपोट पर था, जो ितवादीगण ारा पहले दायर वाद सं या 371/1981 म तुत क गई थी। थानीय आयु क दनांक 2.12.1978 क रपोट के अवलोकन से पता चलता है क माप करने से पहले प े बंदु का पता नह लगाया गया था। उपरो रपोट म, जहां कानूनगो थानीय आयु थे, िन कष दया गया था क िववा दत संपि नाला से 434 फ ट दूर ि थत थी। रपोट के साथ साइट लान भी संल कया गया था िजसम सड़क और नाला दखाने के अलावा संपि क सही पहचान करने के िलए कोई खसरा नंबर नह दया गया था।यह त य क पहले से ही उसी संपि के संबंध म थानीय आयु क एक रपोट दनांक 19.1.1975 थी, इसका उ लेख भी नह कया गया था। यह थानीय आयु ारा अपीलकता के पूववत -िहत ारा दायर िन पादन कायवािहय म िनयु क गई एक रपोट थी, िजसम पूववत भी ितवादीगण के िहत म प कार थे। यह रपोट िव ास को े रत करती है य क संपि के प े बंदु का सीमांकन करने से पहले िचि नत कया गया था और िविश खसरा नं. 4833 को मापा गया था।उपरो रपोट के साथ उिचत योजना भी संल है।

17. वतमान वाद म ितवा दय ारा यह दृि कोण अपनाया गया था क वे िपछले 34 वष से क जे म ह। वाद संपि खसरा नं.4833 का िह सा नह है और आगे यह क वे ितकूल क जे के मा यम से संपि के मािलक बन गए थे।वाद पर अंततः अपीला थय के प म फै सला सुनाया गया।फै सले के पैरा 13 म, िनचली अदालत ने ितवा दय के िलए उपि थत िव त वक ल ारा दए गए बयान को दज कया क वाद संपि खसरा नं. 4833 का िह सा है।इसका िववरण इस कार हैः - "13. बहस के दौरान, ी टी. पी. एस. बेदी, एडवोकेट ने इस त य को वीकार कया है क िववा दत थल खसरा सं या 4833 का िह सा है।इसम कोई संदेह नह है, उ ह ने एक समय तक दया था क संपि क पहचान थािपत नह क गई है, ले कन चूं क उ ह ने इस त य को वीकार कया है क िववा दत थल खसरा नं.4833 का िह सा है, इसिलए इस सा य पर गौर करने क कोई आव यकता नह है क यह खसरा नं.4833 के भीतर नह है।"

18. जहां तक ितवा दय ारा यह अिभवाक कया गया था क वे ितकूल क जे के मा यम से संपि के वामी बन गए ह, िन कष यह था क पहले क मुकदमेबाजी म ितवादी पहले से ही अकेले उस आधार पर हार गए थे (संदभ वाद सं या 371/1981) । उपरो दो त य ने संपि क पहचान को प प से थािपत कया।

19. एक अ य त य जो प प से थािपत करता है क यह ितवादीगण का वीकृत मामला था क िववाद म संपि खसरा नं. 4833 का िह सा है, यह तहसीलदार-सह-सहायक कले टर के सम 2.8.1993 को ितवादीगण के िहत म-पूववत ारा दायर एक आवेदन से प है, िजसम यह दावा कया गया था क आवेदक 1950 से दुकान के मािलक थे और यह खसरा नं. 4833 का िह सा था। सहायक कले टर, ि तीय ेणी, करनाल ने, दनांक 17.2.1994 के आदेश ारा, खसरा िगरदावरी के सुधार के िलए यह अिभिनधा रत करने का िनदश दया क उसम आवेदक/ ितवादीगण के पूववत -इन-िहत के पास खसरा नं. 4833 का िह सा था।

20. िवचारण यायालय के दनांक 28.2.1991 के िनणय और िड के िव िथत, ितवादीगण के पूववत ने अपील फाइल क । इसे िव ान एडीजे ारा दनांक 16.1.1997 के िनणय और िड ारा अनुमित दी गई थी। िनणय के पैरा 14 म, 1962 के वाद सं या 292 का उ लेख करते ए, थम अपीलीय यायालय ारा क गई राय थी क अपीलाथ खसरा सं या 4833 के सह-मािलक थे। हालां क, थानीय आयु क दनांक 2.12.1978 क रपोट पर भरोसा करते ए, यह राय क गई क वाद संपि अलग होने और वतमान अपीलकता के मािलक न होने के कारण, वे कसी भी राहत के हकदार नह ह।

21. अपीलकतागण ने पंजाब और ह रयाणा उ यायालय के सम आरएसए सं या 2306/1997 दािखल करके िनचली अपीलीय अदालत के फै सले और िड को चुनौती दी। यहां तक क अपील को खा रज करने वाले उ यायालय ारा पा रत आदेश म भी, यह िवशेष प से दज कया गया है क िन ववाद प से, अपीलकता खसरा नं. 4833 के मािलक ह। थानीय आयु क दनांक 2.12.1978 क रपोट का अभी भी उ लेख करते ए, अपीलाथ कसी भी राहत के हकदार नह माने गए थे।यहां तक क उपरो फै सले के िखलाफ दायर समी ा यािचका भी खा रज कर दी गई थी।

22. यह उन त य से प है, जो वतमान मुकदमे म रकॉड पर आए ह, क अपीला थय को खसरा नं. 4833 संपि का मािलक होने के िलए वीकार कया गया है। यह िन कष दूसरी अपील को खा रज करने वाले उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत आदेश म भी दज कया गया है।उ यायालय ारा दज उपरो िन कष को ितवादीगण ारा कोई चुनौती नह दी गई है।वा तव म, वे नह कर सके य क िनचली अदालत के सम भी इस आशय क ितवादीगण थी।

23. एकमा मु ा िजस पर अपीलाथ को गैर-सूट कया गया, वह यह है क ितवादीगण खसरा नं. 4833 के कसी भी िह से के क जे म नह ह य क उनके क जे म संपि अलग है। तथािप, उस मु े पर भी, िनचले अपीलीय यायालय और उ यायालय ारा अिभिलिखत िन कष िवकृत ह य द उन दो ताि वक द तावेज के आलोक म उन पर िवचार कया जाए जो उनके क जे म संपि क पहचान के संबंध म वयं ितवादीगण क वीकृित के प म ह। पहला, िनचली अदालत के सम ितवादीगण के अिधव ा के बयान है जैसा क ऊपर पैरा नं. 17 म देखा गया है और दूसरा, खसरा िगरदावरी के सुधार के िलए तहसीलदार-सह- सहायक कले टर के सम ितवादीगण ारा दायर कया गया आवेदन है, िजसम िवशेष प से वीकार कया गया है क उनके पास खसरा नं.4833 का िह सा है।इसके अलावा, नायब तहसीलदार ारा थानीय आयु दनांक 19.1.1975 क एक रपोट तुत क गई है। यह उप यायाधीश, करनाल ारा हरस प बनाम नगरपािलका सिमित म उसके प म पा रत िड के अपीला थय के पूववत ारा दायर िन पादन यािचका म था। इससे भी आगे, ितकूल क जे के बारे म ितवादीगण क दलील अपीलकतागण क िविश संपि का वािम व पहले से ही मान लेती है, जो ितवादीगण के क जे म होने का दावा कया जाता है।

24. उपरो कारण से, उ यायालय ारा अपीलकतागण ारा दायर पुन वचार आवेदन और अपील को खा रज करने और िनचले अपीलीय यायालय के िनणय और िड य को कानूनी प से कायम नह रखा जा सकता है और उ ह र कर दया जाता है और अपील क अनुमित दी जाती है। िनचली अदालत ारा 1989 के वाद सं या 273 और 274 म पा रत िनणय और िड य को बहाल कया जाता है।

25. िड शीट तैयार कया जाए। _ _ _ _ _ _ _, जज. (अभय एस ओका) _ _ _ _ _ _ _जज. (राजेश बंदल) नई द ली।

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