Delhi Development Authority v. Surinder Singh & Ors.

Supreme Court of India · 11 Apr 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bandal
Civil Appeal No. 1548 of 2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that under Section 24(2) of the 2013 Land Acquisition Act, acquisition is deemed complete only if possession is taken or compensation paid within five years, overruling earlier inconsistent decisions and allowing the appeals of the Delhi Development Authority.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय े ािधकार
िस वल अपील सं. 1548/2023
द ली वकास ािधकरण ...अपीलकता(गण)
बनाम
सुर िसंह और अ य ... यथ (गण)

े साथ
िस वल अपील सं. 1572/2023

े साथ
िस वल अपील सं. 1549/2023

े साथ
िस वल अपील सं. 1547/2023
िनणय
या., राजेश बंदल
JUDGMENT

1. यह आदेश अपील क े एक समूह का िनपटान करेगा य क कानून और त य क े सामान शािमल ह। मामल क े त य पर अलग से यान दया गया है। त य: िस वल अपील सं. 1548/2023 द ली वकास ािधकरण बनाम सुरदर िसंह व अ य

2. जैसा क अिभवाक् दया गया था, भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 4 (सं ेप म, “अिधिनयम”) क े अंतगत अिधसूचना दनांक 21.03.2003 को जार कया गया था जसम द ली म रो हणी आवासीय योजना क े िलए भूिम अिध हण करने क मांग क गई थी। दनांक 19.3.2004 को अिधिनयम क धारा 6 क े अंतगत अिधसूचना जार क गई थी। भूिम अजन कले टर ने दनांक 12.7.2005 को अिधगृह त भूिम क े िलए मुआवजे का आकलन करते हुए अिधिनयम क धारा 11 क े तहत अिधिनणय क घोषणा क है| भूिम क े अिध हण क े िलए मुआवजे क रािश 80,40,76,004/- पए रा य ारा भूिम अिध हण कले टर क े पास जमा कए गए थे।

3. भूिम अिध हण, पुनवास और पुन थापन अिधिनयम, 2013 (सं ेप म “201 3 अिधिनयम”) क धारा 24(2) म उिचत मुआवजा और पारदिशता क े अिधकार को लागू करते हुए माननीय उ च यायालय म एक रट यािचका दायर क गई थी जसम दावा कया गया था क वचाराधीन अिध हण समा हो गया है य क न तो क जा िलया गया है और न ह इसक े िलए मुआवजे का भुगतान कया गया है। माननीय उ च यायालय क े सम रा य का ठोस ख यह था क भूिम का क जा दनांक 31.08.2005 को ले िलया गया था और द ली क े िनयो जत वकास क े िलए द ली वकास ािधकरण को स प दया गया था। रट याचीगण का हक़ ववाद म था। इसिलए उ ह मुआवजा नह ं दया जा सका। इसे भूिम अिध हण कले टर क े पास जमा कराया गया था। उ च यायालय ने रा ीय राजधानी े द ली सरकार बनाम मानव धम ट और अ य (2017) 6 एससीसी 751 क े मामले म इस यायालय क े िनणय पर भरोसा करने क े बाद अिभिनधा रत कया क यािचकाकता को रट यािचका दायर करने का अिधकार था हालां क वह अिभले खत मािलक नह ं थे। यह आगे इस यायालय क े पुणे नगर िनगम और अ य बनाम हरकचंद िमिसर मल सोलंक और अ य (2014) 3 एससीसी 183 क े मामले क े िनणय पर भरोसा करते है और अिभिनधा रत कया क अिध हण समा हो गया है य क भूिम मािलक को मुआवजे का भुगतान नह ं कया गया था। हालां क, भूिम क े वािम व क े मु े को अिनण त छोड़ा गया है। िस वल अपील सं. 1572/2023 ( द ली वकास ािधकरण बनाम राम िसंह और अ य)

4. अिभलेख पर उपल ध त य से यह प है क अिधिनयम क धारा 4 क े तहत अिधसूचना दनांक 23.09.1989 को जार क गई थी जसम वकास क े उ े य से घ डा गुजरान खादर, शाहदरा, द ली क राज व संपदा म थत भूिम का अिध हण करने का ताव कया गया था। अिधिनयम क धारा 6 क े तहत अिधसूचना दनांक 20.06.1990 को जार क गई थी और भूिम अिध हण कले टर ारा दनांक 19.06.1992 को अिधिनणय सं. 8/92-93 क घोषणा क गई थी।

5. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) को लागू करते हुए उ च यायालय म एक रट यािचका दायर क गई थी जसम दावा कया गया था क गत अिध हण यपगत हो गया है य क न तो क जा िलया गया है और न ह इसक े िलए मुआवजे का भुगतान कया गया है। उ च यायालय क े सम अपीलाथ का ख यह था क भूिम का क जा दनांक 21.03.2007 को िलया गया था और द ली क े िलए द ली वकास ािधकरण को स प दया गया था। जमीन मािलक को मुआवजा नह ं दया जा सका य क उ ह ने कभी इसका दावा नह ं कया।

6. उ च यायालय ने पुणे नगर िनगम क े मामले (पूव ) म इस यायालय क े िनणय पर भरोसा करते हुए अिभिनधा रत कया क अिध हण यपगत हो गया है य क भूिम मािलक को मुआवजे का भुगतान नह ं कया गया था। िस वल अपील सं. 1549/2023 (रा ीय राजधानी े द ली व अ य बनाम ान चंद और अ य)

7. अिभलेख पर उपल ध त य से यह प है क अिधिनयम क धारा 4 क े तहत द ली क े तुगलकाबाद गांव क राज व संपदा म थत भूिम का अिध हण करने क े िलए अिधसूचना दनांक 25.01.1965 को जार क गई थी। इसक े बाद दनांक 13.02.1969 को अिधिनयम क धारा 6 क े तहत अिधसूचना जार क गई थी। इसक े िलए भूिम अिध हण कले टर ारा दनांक 04.11.1981 को अिधिनणय सं. 50-क/1969-70 क घोषणा क गई थी।

8. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) को लागू करते हुए उ च यायालय म एक रट यािचका दायर क गई थी जसम दावा कया गया था क अिध हण यपगत हो गया है य क न तो क जा िलया गया है और न ह इसक े िलए मुआवजे का भुगतान कया गया है। उ च यायालय क े सम अपीलाथ का ख यह था क भूिम का क जा दनांक 23.11.1981 को िलया गया था और द ली क े िलए द ली वकास ािधकरण को स प दया गया था। जमीन मािलक को मुआवजा नह ं दया जा सका य क उ ह ने कभी इसका दावा नह ं कया। आगे यह तुत कया गया था क मुआवजे से संबंिधत पूरे अिभलेख का पुराने होने क े कारण पता नह ं चल रहा था।

9. उ च यायालय इस यायालय ारा पुणे नगर िनगम (पूव ) म दए िनणय पर भरोसा करते हुए अिभिनधा रत कया क अिध हण यपगत हो गया है चूँ क भूिम मािलक को मुआवजे का भुगतान नह ं कया गया था। िस वल अपील सं. 1547/2023 ( द ली वकास ािधकरण बनाम वीणा जैन और अ य)

10. अिभलेख पर उपल ध मामले क े त य से यह प है क अिधिनयम क धारा 4 क े तहत जार अिधसूचना दनां कत 23.06.1989 क े मा यम से नई द ली क े मदनपुर खादर गांव क े राज व ए टेट म थत भूिम का एक बड़ा भाग जसम यािचकाकता क खसरा सं. 490 म थत 1 बीघा 1 ब वा नाप क भूिम भी शािमल थी को द ली क े िलए अिध हत करने क मांग क गई थी। इसक े बाद अिधिनयम क धारा 17 क े साथ धारा 6 क े तहत अिधसूचना जार क गई थी। भूिम अजन कले टर/सं हण (ड एस) ारा दनांक 19.06.1992 को अिधिनणय सं. 20/92-93 क घोषणा क गई थी।

11. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) को लागू करते हुए माननीय उ च यायालय म एक रट यािचका दायर क गई थी जसम दावा कया गया था क वचाराधीन अिध हण समा हो गया है य क न तो क जा िलया गया है और न ह इसक े िलए मुआवजे का भुगतान कया गया है। माननीय उ च यायालय क े सम अपीलाथ का ख यह था क भूिम का क जा दनांक 03.12.2012 को िलया गया था और द ली क े िलए द ली वकास ािधकरण को स प दया गया था। मुआवजे को विभ न मािलक क े बीच वभाजन क े ववाद क े कारण अिधिनयम क धारा 30-31 क े तहत संदिभत यायालय म भेजा गया था।

12. उ च यायालय इस यायालय क े मानव धम ट और अ य मामले (पूव ) क े िनणय पर भरोसा करते हुए अिभिनधा रत कया क यािचकाकता क े पास रट यािचका दायर करने का अिधकार है हालां क वह अिभलेख क े अनुसार मािलक नह ं ह। उ च यायालय ने आगे इस यायालय क े पुणे नगर िनगम मामला (पूव ) क े िनणय पर भरोसा कया और अिभिनधा रत कया क अिध हण यपगत हो गया है य क भूिम मािलक को मुआवजे का भुगतान नह ं कया गया था। वषयगत भूिम क े मािलकाना हक़ क े को उपयु यायालय ारा िन णत करने क े िलए अिनण त छोड़ा गया है| अिधव ागण ारा दए गए तक:

13. अपीलाथ गण क ओर से पेश हुए अिधव ागण ारा दए गए तक इस यायालय क े सं वधान पीठ क े इंदौर वकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य (2020) 8 एससीसी 129 क े िनणय क े म ेनजर ह जसक े तहत इस यायालय क े पुणे नगर िनगम और अ य क े मामले (पूव ) क े पूव िनणय को उलट दया गया था, उ च यायालय ारा उपरो िस वल अपील म पा रत आदेश र कए जाने यो य ह। सं वधान पीठ ारा यह राय य क गई थी क भूिम का क जा लेने या मुआवजे का भुगतान दोन ह शत म से कसी एक का अनुपालन अिध हण को बनाए रखने क े िलए पया है। अिभलेख पर उपल ध िन ववाद त य से यह प है क सभी मामल म, अिध हण पूरा होने और अिधिनणय क घोषणा क े बाद ववा दत भूिम का क जा िलया गया था।

14. िस वल अपील सं. 1547/2023, िस वल अपील सं. 1547 & 1548 म दए गए अित र तक यह ह क मानव धम ट और अ य क े मामले (पूव ) क े िनणय को इस यायालय ारा बाद क े िशव क ु मार बनाम भारत संघ (2019) 10 एससीसी 229 क े िनणय म उलट दया गया था और उपयु िस वल अपील चलाने यो य नह ं ह।

15. दूसर ओर, यथ गण क े व ान अिधव ा ारा दए गए तक यह ह क उ च यायालय ारा िनणय क तार ख पर मौजूदा कानून क े आधार पर तय क गई रट यािचकाओं को इस यायालय क े बाद क े िनणय क े आधार पर र नह ं कया जा सकता है। उ च यायालय ने अिभिनधा रत कया है क इस यायालय ारा 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क या या क े अनुसार पुणे नगर िनगम मामले (पूव ) म मुआवजे का भुगतान नह ं कया गया है इसिलए अिध हण क कायवाह यपगत हो गई थी। यह वा त वक त य है क माननीय उ च यायालय ारा पा रत आदेश म यह देखा गया है क संबंिधत ािधकार ारा भूिम का क जा पहले ह ले िलया गया था।

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16. प कार क ओर से पेश अिधव ागण को सुना गया और अिभलेख का अवलोकन कया गया| ट प णयाँ:

17. इस यायालय क सं वधान पीठ ने इंदौर वकास ािधकरण क े मामले (पूव ) म राय द थी क 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े संदभ म अिध हण को यपगत होने से बचाने क े िलए या तो अिध हत भूिम का क जा लेना या भू वािमय को मुआवजे का भुगतान करना दोन शत म से कसी एक क संतु पया होगी। इस यायालय क संवैधािनक पीठ क े सम तुत विभ न का उ र दया गया था| ासंिगक अनु छेद सं. 362 और 366 नीचे दए गए ह:- “362. प रणाम व प, पुणे नगर िनगम और अ य (पूव ) म दया गया िनणय और अ य सभी िनणय जनम पुणे नगर िनगम (पूव ) का पालन कया गया है को भी उलट दया जाता है।

366. उपयु चचा को यान म रखते हुए हम िन निल खत क े उ र देते ह:

366.1. धारा 24(1)(क) क े ावधान क े तहत य द 2013 अिधिनयम क े लागू होने क तार ख 1.1.2014 को अिधिनणय नह ं दया जाता है तो कायवा हयाँ यपगत नह ं होती है। मुआवजे का िनधारण 2013 क े अिधिनयम क े ावधान क े तहत कया जाना है।

366.2. य द यायालय क े अंत रम आदेश ारा कवर क गई अविध को छोड़कर पांच साल क द गई अविध क े भीतर िनणय पा रत कया गया है, तो 1894 अिधिनयम क े तहत 2013 अिधिनयम क धारा 24(1)(ख) क े तहत दान क गई कायवाह जार रहेगी ऐसे जैसे क इसे िनर त नह ं कया गया है।

366.3. धारा 24(2) म क जे और मुआवजे क े बीच उपयोग कए गए "या" श द को "न ह " क े प म अथवा "और" क े प म पढ़ा जाना चा हए। वष 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत भूिम अिध हण क कायवाह का यपगमन उस थित म समझा जाता है जब उ अिधिनयम क े लागू होने से पहले पांच वष या उससे अिधक समय तक अिधका रय क िन यता क े कारण भूिम का क जा नह ं िलया गया हो और न ह मुआवजा दया गया हो। दूसरे श द म, य द क जा ले िलया गया है, मुआवजा नह ं दया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा दया गया है, क जा नह ं िलया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। (जोर दया गया) 366.[4] 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े मु य भाग म “भुगतान” श द म यायालय म मुआवजे को जमा करना शािमल नह ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म जमा नह ं करने क े प रणाम का ावधान है, य द अिधकांश भूिम जोत क े संबंध म इसे जमा नह ं कया गया है तो 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक सभी लाभाथ (भूिम मािलक) 2013 अिधिनयम क े ावधान क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह गे। य द भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 31 क े तहत बा यता पूर नह ं क गई है तो उ अिधिनयम क धारा 34 क े तहत याज दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने ( यायालय म) क े प रणाम व प भूिम अिध हण क कायवाह का यपगमन नह ं होता है। पांच वष या उससे अिधक अविध क े िलए अिधकांश जोत क े संबंध म जमा न करने क थित म, 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक “भू वािमय ” को 2013 अिधिनयम क े तहत मुआवजे का भुगतान कया जाए।

366.5. य द कसी य को 1894 अिधिनयम क धारा 31(1) क े ावधान क े अनुसार मुआवजा दया गया है तो वह यह दावा करने क े िलए वतं नह ं है क मुआवजे का भुगतान न करने या यायालय म मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अिध हण का यपगमन हो गया है। भुगतान करने क बा यता धारा 31(1) क े तहत रािश को दान करक े पूर हो जाती है। जन भू- वािमय ने मुआवजा लेने से इनकार कर दया था या ज ह ने अिधक मुआवजे क े िलए िसफा रश कर मांग क थी, वे यह दावा नह ं कर सकते क 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत अिध हण क या का यपगमन हो गया था।

366.6. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े पर तुक को धारा 24(2) क े भाग क े प म माना जाना है और धारा 24(1)(ख) का भाग नह ं।

366.7. 1894 अिधिनयम क े तहत और जैसा क धारा 24(2) क े तहत ता वत है, क जा लेने का तर का पंचनामा/ ापन तुत करने क े ारा है। एक बार 1894 क े अिधिनयम क धारा 16 क े तहत क जा लेने पर अिधिनणय पा रत हो जाने क े बाद, भूिम रा य म िन हत हो जाती है, 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत कोई िनिन हतीकरण का ावधान नह ं है, य क एक बार क जा लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई यपगमन नह ं है।

366.8. कायवा हय क े समझे गए यपगमन को ता वत करने वाले धारा 24(2) क े ावधान उस थित म लागू होते ह जब दनांक 1-1-2014 तक संबंिधत ािधकार क े पास भूिम अिध हण हेतु लं बत एक कायवाह म ािधकार गण अपनी िन यता क े कारण 2013 क े अिधिनयम क े लागू होने से पूव पांच साल या उससे अिधक समय तक क जा लेने और मुआवजे का भुगतान करने म वफल रहे ह । यायालय ारा पा रत अंत रम आदेश क े अ त व क अविध को पांच वष क गणना म न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) भूिम अिध हण क पूण हो चुक कायवाह क वैधता पर सवाल उठाने क े िलए नए वाद हेतुक को ज म नह ं देती है। धारा 24, 2013 अिधिनयम क े लागू होने क ितिथ अथात 1.1.2014 को लं बत कसी कायवाह क े िलए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयब दाव को पुनज वत करती है और न ह पूण हो चुक कायवाह को फर से शु करती है और न ह भूिम मािलक को अिध हण को अवैध घो षत करने क े िलए यायालय क े बजाय ेजर म मुआवजे को जमा करने क े तर क े क वैधता पर सवाल उठाने क अनुमित देती है।”

18. यह अिभलेख पर िन ववाद त य है, जैसा क उपरो िस वल अपील म उ च यायालय ारा पा रत आ े पत आदेश म देखा गया है, भूिम का क जा भूिम अिध हण कले टर ारा िलया गया था और द ली वकास ािधकरण को स प दया गया था। इसिलए, शत म से एक संतु होने क े कारण, हम कसी अ य तक क जांच करने क आव यकता नह ं है।

19. उपरो त य और इस यायालय क सं वधान पीठ ारा िनधा रत कानून को इंदौर वकास ािधकरण (पूव ) क े मामले म यान रखते हुए, हमार राय म उ च यायालय ारा पा रत आदेश को कानूनी प से बनाए नह ं रखा जा सकता है और तदनुसार इसे अपा त कर दया जाता है। अपील को अनुमित द जाती है। उ च यायालय क े सम यिथय ारा दायर रट यािचकाओं को खा रज करने का आदेश दया जाता है।.............. या. [अभय एस. ओका].................. या. [राजेश बंदल] नई द ली 11.04.2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया ग या है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।