Saraf Exports v. Income Tax Commissioner, Jaipur-III

Supreme Court of India · 10 Apr 2023
M. R. Shah; B. V. Nagarathna
Civil Appeal No 4822 of 2022 @ Special Leave Petition (Civil) No 17539 of 2016
tax appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that benefits under DEPB and Duty Drawback schemes do not constitute business profits and are not eligible for deductions under Section 80-IB of the Income Tax Act, 1961.

Full Text
Translation output
प्रति वेदय
भार का सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 4822/2022
(@विवशेष अनुमति याति'का (दीवानी) संख्या 17539/2016)
मेसस/ सराफ एक्सपोर्ट्सस/ ---- अपीलार्थी7 (गण)
बनाम
आयकर आयुक्त, जयपुर-III ----- प्रति वादी (गण)
विनण/य
एम. आर. शाह, न्याया ीश
JUDGMENT

1. राजस्र्थीान उच्च न्यायालय, जयपुर द्वारा विदनांक 04.02.2016 को 2014 की खंड पीठ आयकर अपील संख्या 7 में पारिर आक्षेविप विनण/य और आदेश जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने राजस्व द्वारा दायर की गई उक्त अपील को स्वीकार विकया है और यह अभिभविन ा/रिर विकया है विक विन ा/रिर ी ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम (जिजसे इसक े बाद 'ड्यूटी ड्रॉबैक' कहा गया है) क े ह प्राविWयों क े संबं में आयकर अति विनयम, 1961 (जिजसे इसक े बाद "अति विनयम, 1961" कहा गया है) की ारा 80-IB क े ह कटौ ी का हकदार नहीं है से व्यभिर्थी और असं ुष्ट होकर और ड्यूटी एन्टाइटलमेंट पास बुक स्कीम (जिजसे इसमें इसक े बाद '' डीईपीबी '' कहा गया है) क े हस् ां रण पर, विन ा/रिर ी ने व /मान अपील प्रस् ु की है।

2. संक्षेप में व /मान अपील क े लिलए थ्य इस प्रकार हैं:- 2023 INSC 331 2.[1] विन ा/रिर ी, एक साझेदारी फम/, लकड़ी की हस् भिशल्प वस् ुओं क े विनमा/ण और विनया/ क े व्यवसाय में लगा हुआ र्थीा। विन ा/रण वष/ 2008-09 क े लिलए, विन ा/रिर ी ने 30.09.2008 को अपनी आय शून्य घोविष कर े हुए अपनी विववरणी दालिखल की, जिजसमें डीईपीबी क े खा े में 70,197/- रुपये और ड्यूटी ड्रॉबैक क े अं ग/ प्राविWयों क े खा े में 76,27,636/- रुपये की कटौ ी का दावा विकया गया। 2.[2] विन ा/रिर ी ने उपरोक्त राभिशयों की प्राविWयों को लाभ और हाविन खा े में जमा विकया और अति विनयम, 1961 की ारा 28 (iiic) और 28 (iiib) क े ह व्यवसाय या पेशे क े लाभ/अभिभलाभ क े रूप में इसका दावा विकया। विन ा/रिर ी को अति विनयम, 1961 की ारा 143 (2) क े ह एक नोविटस जारी विकया गया र्थीा। 2.[3] विदनांक 24.11.2010 क े आदेश द्वारा, उपायुक्त ने कटौति यों को नामंजूर कर विदया जैसा विक दावा विकया गया र्थीा। जैसा विक दावा विकया गया है, छ ू ट को अस्वीकार करने वाले उपायुक्त क े आदेश को आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा बरकरार रखा गया। हालांविक, आयकर अपीलीय अति करण (आईटीएटी) ने विदनांक 17.12.2013 क े आदेश द्वारा विन ा/रिर ी द्वारा दायर की गई अपील स्वीकार की और यह पाया विक लिलबट[7] इंतिडया बनाम आयकर आयुक्त, (2009) 9 एससीसी 328: (2009) 317 आईटीआर 218 (एससी) क े मामले में इस न्यायालय का फ ै सला Per Incuriam (कानून या थ्यों की उपेक्षा वाला) कहा जा सक ा है और डीईपीबी योजना और ड्यूटी ड्रॉबैक योजना क े ह राभिश की प्राविW पर दावे क े अनुसार कटौ ी की अनुमति दी। 2.[4] आक्षेविप विनण/य और आदेश द्वारा र्थीा लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय क े विनण/य और आयकर आयुक्त, कना/टक बनाम स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (1999) 4 एस. सी. सी. 98 क े मामले में इस न्यायालय क े विनण/य पर भरोसा कर े हुए उच्च न्यायालय ने राजस्व द्वारा की गई अपील को स्वीकार कर लिलया है और अति विनयम, 1961 की ारा 80-IB क े अ ीन दावा की गई कटौति यों को नामंजूर कर े हुए उपायुक्त द्वारा पारिर आदेश को बहाल कर विदया है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण/य और आदेश व /मान अपील का विवषय है। 3 विन ा/रिर ी की ओर से पेश हुए विवद्वान वकील ने आयकर आयुक्त बनाम मेघालय स्टील्स लिलविमटेड, (2016) 6 एससीसी 747: (2016) 383 आईटीआर 217 (एससी), क े मामले मे इस न्यायालय क े विनण/य पर भरोसा विकया है। 3.[1] यह कहा गया है की ारा 80-IB क े ह "से व्युत्पन्न" का अर्थी/ जैसा विक लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) में विन ा/रिर विकया गया, को मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क माननीय न्यायालय द्वारा विवस् ृ कर विदया है। 3.[2] आगे यह कहा गया है विक लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) का विनष्कष/ इस विनष्कष/ पर आ ारिर है विक ारा 80-IB क े ह 'से व्युत्पन्न' औद्योविगक उपक्रम क े व्यवसाय क े सार्थी एक 'प्रर्थीम तिडग्री' संबं की आवश्यक ा है, जबविक डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक का स्रो शुल्क छ ू ट योजना/सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 75 क े ह विदए गए प्रोत्साहन हैं।''प्रर्थीम तिडग्री' की कसौटी को लागू कर े हुए, इस न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में यह अभिभविन ा/रिर विकया विक डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक से प्राविWयों की ारा 80-IB क े ह कटौ ी नहीं की जा सक ी है। 3.[3] आगे यह कहा गया है विक बाद में, मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में, इस े समक्ष मुद्दा यह र्थीा विक क्या सरकार द्वारा अनुदत्त परिरवहन, ब्याज और विबजली सब्सिब्सडी ारा 80-IB क े ह कटौ ी विकए जाने की हकदार र्थीी और इस माननीय न्यायालय ने अभिभविन ा/रिर विकया है विक उपरोक्त सब्सिब्सडी पर राभिश की प्राविWयां ारा 80-IB क े ह कटौ ी विकए जाने की हकदार र्थीी। यह कहा गया है विक उपरोक्त मामले में, इस न्यायालय क े समक्ष, राजस्व ने यह क / देने क े लिलए लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) पर भरोसा विकया विक सब्सिब्सडीज का स्रो सरकार र्थीी और इसलिलए, इसे विन ा/रिर ी क े सार्थी प्रत्यक्ष संबं /करीबी संबं क े रूप में नहीं माना जा सक ा है। यह विनवेदन विकया गया विक, हालांविक, इस न्यायालय ने उक्त क / को खारिरज कर विदया है और अभिभविन ा/रिर विकया है विक यह थ्य विक सरकार सब्सिब्सडी का “ ात्कालिलक स्रो ” है, ब क प्रासंविगक नहीं है जब क विक सब्सिब्सडी पूरी रह या आंभिशक रूप से प्रति पूर्ति की जा ी है, उत्पादों क े विनमा/ण या विबक्री में विन ा/रिर ी द्वारा वास् व में वहन की गई लाग, क्योंविक, ारा 80-IB में संदर्भिभ लाभ या अभिभलाभ का अर्थी/ शुद्ध लाभ है, अर्थीा/, विवविनमा/ण लाग और विबक्री लाग की कटौ ी क े बाद प्राW लाभ। 3.[4] यह विनवेदन विकया गया है विक इस न्यायालय ने विवविनर्दिदष्ट रूप से ारा 28 (iii) (b) का अवलंब लिलया और दोहराया विक विकसी स्कीम क े अ ीन विनया/ क े विवरुद्ध सरकार से प्राW कोई नकद सहाय ा 'व्यवसाय या पेशे क े लाभ या अभिभलाभ' शीष/ क े अ ीन आयकर से प्रभाय/ है। विक इस न्यायालय ने आयकर आयुक्त बनाम रम पाल प्रेम'ंद लिलविमटेड, (2009) 317 आईटीआर 353 (विदल्ली) क े मामले में विदल्ली उच्च न्यायालय क े विनण/य को यह अभिभविन ा/रिर कर े हुए अनुमोविद विकया विक ारा 80-IB क े ह कटौ ी का दावा करने क े उद्देश्य से व्यवसाय से व्युत्पन्न लाभ पर पहुं'ने में उत्पाद शुल्क क े रिरफ ं ड (वापसी) को अपवर्जिज नहीं विकया जाना 'ाविहए। 3.[5] आगे यह क / विदया गया है विक विक इसलिलए, मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अति कभिर्थी विवति को लागू कर े हुए, ारा 80-IB क े अ ीन अभिभव्यविक्त "विकसी व्यवसाय से व्युत्पन्न लाभ या अभिभलाभ" मे लाग की कोई प्रति पूर्ति शाविमल होगी, भले ही ऐसे स्रो की त्काल प्रति पूर्ति सरकार या उसकी नीति हो। 3.[6] विन ा/रिर ी की ओर से उपब्सिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता द्वारा यह विनवेदन विकया गया है विक टॉपमैन एक्सपोर्ट्सस/ बनाम आयकर आयुक्त, मुंबई, (2012) 3 एस. सी. सी. 593 क े मामले में, यह अभिभविन ा/रिर विकया गया है विक डीईपीबी/ड्यूटी ड्राबैक विनमा/ण की लाग से संबंति हैं और आया की लाग क े सार्थी इसका सी ा संबं है। विक उक्त दृविष्टकोण बी. देसराज बनाम आयकर आयुक्त, सलेम, (2010) 14 एससीसी 510 क े मामले में पहले लिलए गए दृविष्टकोण क े अनुरूप है, जिजसमें यह अभिभविन ा/रिर विकया गया र्थीा विक ड्यूटी ड्रॉबैक ारा 28 (iii) (b) क े ह नकद सहाय ा की प्रक ृ ति में र्थीा। 3.[7] आगे यह विनवेदन विकया गया है विक टॉपमैन एक्सपोर्ट्सस/ (पूव क्त) क े मामले में, यह अभिभविन ा/रिर विकया गया है विक डीईपीबी विकसी विनया/ क को उसक े आया ों पर सीमा शुल्क का भुग ान करने क े लिलए सरकार द्वारा दी जाने वाली सहाय ा है और यह विनया/ विकए जाने और डीईपीबी स्कीम क े अ ीन आवेदन विकए जाने क े पश्चा ् प्राप्य है। इस न्यायालय ने यह भी अभिभविन ा/रिर विकया है विक डीईपीबी में भी लाग का त्व है क्योंविक इसे प्राW करने की लाग शून्य नहीं है क्योंविक इसे विनया/ उत्पाद की आया सामग्री पर सीमा शुल्क का भुग ान करक े प्राW विकया जा ा है। यह क / विदया गया है विक टॉपमैन एक्सपोर्ट्सस/ (पूव क्त) क े विनण/य का बाद में एसीजी एसोजिसएटेड क ै प्सूल्स प्राइवेट लिलविमटेड बनाम आयकर आयुक्त, सेंट्रल-IV, मुंबई (2012) 3 एससीसी 321 विवकास कालरा बनाम आयकर आयुक्त- VII, नई विदल्ली, (2012) 3 एससीसी 611 और विनसान एक्सपोट/ बनाम आयकर आयुक्त, (2014) 14 एससीसी 152 क े मामलों में अनुसरण विकया गया है। 3.[8] यह क / विदया गया है विक, इसलिलए, मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) और टॉपमैन एक्सपोर्ट्सस/ (पूव क्त) में विवति क े विवकास को ध्यान में रख े हुए डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक ारा 80-IB की सीमा क े भी र "विकसी व्यवसाय से प्राW लाभ और अभिभलाभ" हैं। 3.[9] विन ा/रिर ी की ओर से उपब्सिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता द्वारा यह प्रकर्थीन विकया गया है विक विवभिभन्न उच्च न्यायालयों ने यह दृविष्टकोण अपनाया है विक आय का '' त्काल स्रो '' विन ा/रक नहीं है।

4. श्री बलबीर सिंसह, विवद्वान एएसजी ने व /मान अपील का विवरो कर े हुए क / विदया है विक लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) और स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (पूव क्त) क े फ ै सले क े दृविष्टकोण मे, व /मान अपील में शाविमल मुद्दा, विन ा/रिर ी क े लिखलाफ पूरी रह से कवर विकया गया है। यह विनवेदन विकया गया है विक इसलिलए, पूव क्त दो विनण/यों में, इस माननीय े विनण/यों पर भरोसा कर े हुए और उनका अनुसरण कर े हुए, उच्च न्यायालय ने यह अभिभविन ा/रिर करने में कोई त्रुविट नहीं की है विक विन ा/रिर ी डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं क े माध्यम से प्राW राभिश पर ारा 80-IB क े ह कटौति यों का हकदार नहीं है। 4.[1] जहां क मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े विनण/य पर विन ा/रिर ी द्वारा विकए गए भरोसे का संबं है, यह विनवेदन विकया गया है विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) या स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (पूव क्त) क े मामले में विनण/य से असहमति या अस्वीक ृ ति नहीं ज ाई है। यह विनवेदन विकया गया है विक अन्यर्थीा भी, उक्त विनण/य डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं क े ह राभिश की प्राविW क े मामले में लागू नहीं होंगे क्योंविक इसे "व्यवसाय या पेशे क े लाभ और अभिभलाभ" शीष/ क े ह आने वाली आय नहीं कहा जा सक ा है। 4.[2] श्री बलबीर सिंसह, विवद्वान एएसजी ने हमें अति विनयम, 1961 की ारा 28 और ारा 80- IB की योजना से अवग कराया। यह विनवेदन विकया गया है विक जहां क ारा 28 का संबं है, यह "व्यवसाय या पेशे क े लाभ और अभिभलाभ" क े शीष/ क े अं ग/ आने वाली आय क े बारे में बा कर ी है। इससे पहले नकद सहाय ा, ड्यूटी ड्रॉबैक, डीईपीबी योजना क े हस् ां रण पर लाभ क े रूप में सरकार से प्रोत्साहन क े माध्यम से प्राविW क े संबं में विववाद हुआ कर ा र्थीा, विक क्या ये प्राविWयां पूंजीग प्राविWयां र्थीीं या राजस्व प्राविWयां र्थीीं और क्या ये कर योग्य होंगी। यह विक अविनतिश्च ा को विवराम देने क े लिलए, विव ातियका ने ारा 28 में खंड (iiia), (iiib), (iiic), (iiid) और (iiie) अं ःस्र्थीाविप करक े उक्त प्रोत्साहनों को व्यवसाय या पेशे क े लाभ और अभिभलाभ शीष/ क े अ ीन कर योग्य बना विदया है। 4.[3] आगे यह विनवेदन विकया गया है विक ारा 80-IB, अवसंर'नात्मक विवकास उपक्रमों से भिभन्न कति पय 'औद्योविगक उपक्रमों' से लाभ और अभिभलाभ की बाब कटौति यों क े लिलए उपबं कर ी है। यह ारा विनम्नलिललिख औद्योविगक उपक्रमों पर लागू हो ी है जो उक्त ारा क े ह कटौ ी क े लिलए योग्य हैं:- क) विवविनमा/ण और उत्पादन में लघु उद्योग ख) औद्योविगक रूप से विपछड़े राज्य और पूव त्तर क्षेत्र में उपक्रम ग) जहाज घ) होटल ड़) कोल्ड स्टोरेज प्लांट और कोल्ड 'ेन ') खविनज ेल और प्राक ृ ति क गैस छ) आवास परिरयोजनाएं ज) वैज्ञाविनक अनुसं ान और विवकास झ) खाद्य पदार्थीœ का प्रसंस्करण, संरक्षण और पैक े सिंजग ञ) मल्टीप्लेक्स भिर्थीएटर ट) कन्वेंशन सेंटर ठ) ग्रामीण और विवभिशष्ट क्षेत्रों में अस्प ाल 4.[4] आगे यह विनवेदन विकया गया है विक कटौ ी की गणना क े संबं में ारा 80-IB में उपयोग की गई भाषा क े अनुसार, कटौ ी विन ा/रिर ी की क ु ल सकल आय में शाविमल 'उजिल्ललिख विकसी भी व्यवसाय से प्राW विकसी भी लाभ और अभिभलाभ' पर लागू होगी। उक्त ारा' की व्याख्या कर े समय सबसे महत्वपूण/ बा यह है विक उपयोग विकए गए शब्द हैं “से व्युत्पन्न” न विक “क े कारण (क े लिलए जिजम्मेदार)”। विदए गए खंड में" "क े लिलए जिजम्मेदार" "शब्दों को" "से व्युत्पन्न" "शब्दों क े विवपरी एक व्यापक अर्थी/ विदया गया है, जिजनकी व्याख्या" "प्रर्थीम तिडग्री स्रो ों" " क सीविम होने क े रूप में की गई है। यह विनवेदन विकया गया है विक 'से व्युत्पन्न' शब्दों की एक सीविम व्याख्या की गई है। 4.[5] यह क / विदया गया है विक ारा 80-IB में प्रयुक्त '' से व्युत्पन्न '' अर्थी/ को इकाई विवविनर्दिदष्ट पढ़ा जाना 'ाविहए और इसे ''स्व ंत्र' रूप से" नहीं पढ़ा जा सक ा क्योंविक ारा 80-IB क े खंड में प्रयुक्त शब्द '' औद्योविगक उपक्रम '' हैं। इसलिलए, मुख्य मुद्दा अति विनयम की ारा 80-IB में 'से व्युत्पन्न' शब्दों की व्याख्या से संबंति है। यह विनवेदन विकया गया है विक ारा 80-IB सपविठ ारा 28 क े उति' अध्ययन पर और ारा 80-IB की सही व्याख्या पर, डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं को व्यवसाय उपक्रम से आय प्राW करने वाला नहीं कहा जा सक ा है और इसलिलए, ड्यूटी ड्रॉबैक की ऐसी प्राविW पर ारा 80-IB क े ह कटौ ी स्वीकाय/ नहीं होगी। 4.[6] यह विनवेदन विकया गया है विक स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मैंगलोर (पूव क्त) क े मामले में, इस मुद्दे पर विनण/य दे े हुए विक क्या क ें द्र सरकार की विनया/ संव /न योजना क े ह आया पात्र ा की कमाई पर, ारा 80 ए'ए' क े ह कटौ ी की अनुमति होगी या नहीं, इस न्यायालय ने ारा 80 ए'ए' में उपयोग विकए गए शब्दों "से व्युत्पन्न" को एक सीविम व्याख्या दी और यह पाया गया विक 'ूंविक 'से व्युत्पन्न' शब्दों का उपयोग विकया गया है, इसलिलए यह ऐसे लाभ और अभिभलाभ क े स्रो पर जाने का सुझाव देगा। 4.[7] यह विनवेदन विकया गया है विक लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने "से व्युत्पन्न" लाभों और अभिभलाभों की बाब कटौ ी पर विवस् ार से विव'ार विकया है। उक्त विनण/य में, इस न्यायालय ने डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक पर ''ा/ की है और उसक े बाद यह अभिभविन ा/रिर विकया है विक, ड्यूटी ड्रॉबैक और डीईपीबी लाभों को, ारा 80-IB क े उद्देश्य क े लिलए, डेविबट की गई वस् ुओं क े विनमा/ण की लाग क े लिखलाफ, लाभ और हाविन खा े में क्र े तिडट नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक इस रह की छ ू ट, लाभ और औद्योविगक उपक्रम क े बी' प्रर्थीम तिडग्री संबं से परे आय क े स्व ंत्र स्रो का गठन करेगा। 4.[8] जहां क मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क विन ा/रिर ी द्वारा विकए गए भरोसे का संबं है, यह विनवेदन विकया गया है विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) में प्रश्न ीन सब्सिब्सतिडयों से संबंति र्थीा, अर्थीा/ ् क) परिरवहन सब्सिब्सडी, ख) ब्याज सब्सिब्सडी और ग) विवद्यु सब्सिब्सडी।इस न्यायालय ने अभिभविन ा/रिर विकया विक 'ूंविक ये सब्सिब्सडी सी े विवविनमा/ण की लाग को प्रभाविव कर ी हैं, इसलिलए उनका उपक्रम क े लाभ और अभिभलाभ क े बी' सी ा संबं है। 'ूंविक इन सब्सिब्सडी का सी ा संबं है, इसलिलए उन्हें औद्योविगक उपक्रम से प्राW विकया जा सक ा है। यह विनवेदन विकया गया है विक यद्यविप उक्त विनण/य में, इस न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में विनण/य को कानून की दृविष्ट से खराब नहीं ठहराया है, पैरा 20 में, इस न्यायालय ने यह भी कहा है विक 'ूंविक कोई विनया/ नहीं है, इसलिलए डीईपीबी की कोई पात्र ा नहीं है। इसलिलए, भार क े भी र विकसी उत्पाद क े विनमा/ण और/या विबक्री से इसका संबं विनकट म या प्रत्यक्ष नहीं है, बब्सिल्क एक कदम दूर है। यह पाया गया है विक डीईपीबी पात्र ा क े पीछे का उद्देश्य, जैसा विक इस न्यायालय द्वारा अभिभविन ा/रिर विकया गया है, विनया/ उत्पाद की आया सामग्री पर सीमा शुल्क भुग ान की घटनाओं को टस्र्थी करना है। ऐसे परिरदृश्य में, यह नहीं कहा जा सक ा है विक इस रह की शुल्क छ ू ट योजना औद्योविगक उपक्रम या व्यवसाय द्वारा विकए गए लाभ और अभिभलाभ से प्राW की गई है। यह विनवेदन विकया गया है विक, इसलिलए, उपरोक्त क े आलोक में, मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में लिलया गया विनण/य व /मान मामले में लागू नहीं होगा क्योंविक यह क े वल उपरोक्त सब्सिब्सडी से संबंति है। आगे यह विनवेदन विकया गया है विक यद्यविप बाध्यकारी होने क े बावजूद, आईटीएटी ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) और स्टर्लिंलग फ े मामले में इस न्यायालय क े विनण/यों का अनुसरण नहीं विकया और इसलिलए उच्च न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) और स्टर्लिंलग फ े विनण/यों क े अनुसरण में आईटीएटी द्वारा पारिर आदेश को न्यायोति' रूप से रद्द कर विदया है। यह विनवेदन विकया गया है विक इसलिलए, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण/य और आदेश में हस् क्षेप करने की आवश्यक ा नहीं है। 4.[9] उपयु/क्त क / दे े हुए, यह प्रार्थी/ना की जा ी है विक व /मान अपील को खारिरज कर विदया जाए।

5. संबंति पक्षों क े विवद्वान अति वक्ताओं को विवस् ार से सुना।

6. संतिक्षW प्रश्न, जो इस न्यायालय क े विव'ारार्थी/ रखा गया है, यह हैः - क्या डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं से प्राW आय/लाभ पर, विन ा/रिर ी, आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 80-IB क े ह कटौ ी का हकदार है और क्या ऐसी आय को औद्योविगक उपक्रम से प्राW आय कहा जा सक ा है?

7. उपयु/क्त मुद्दे/प्रश्न पर विव'ार कर े समय, ारा 28 और ारा 80-IB क े प्रासंविगक भाग को संदर्भिभ विकए जाने की आवश्यक ा है, जो विनम्नलिललिख हैं: - "28. व्यवसाय या पेशे से लाभ र्थीा अभिभलाभ:- विनम्नलिललिख आय" "व्यवसाय या पेशे से लाभ र्थीा अभिभलाभ" "शीष/ क े ह आयकर क े लिलए प्रभाय/ होगी-" XXXXXXXX (iii क) आया और विनया/ (विनयंत्रण) अति विनयम, 1947 (18/1947) क े अ ीन विकए गए आया (विनयंत्रण) आदेश, 1955 क े अ ीन स्वीक ृ विकए गए लाइसेंस की विबक्री पर लाभ। (iii ख) भार सरकार की विकसी योजना क े अं ग/ विनया/ क े विवरूद्ध विकसी व्यविक्त द्वारा प्राW या प्राप्य नकद सहाय ा ('ाहे जिजस नाम से हो)। (iii ग) सीमा शुल्क और क ें द्रीय उत्पाद शुल्क वापसी विनयम, 1971 क े ह विनया/ क े लिखलाफ विकसी भी व्यविक्त को वापसी क े रूप में 'ुकाया गया या देय सीमा शुल्क या उत्पाद शुल्क। (iii घ) विवदेश व्यापार (विवकास और विवविनयमन) अति विनयम, 1992 (22/1992) की ारा 5 क े अ ीन ैयार और घोविष विनया/ और आया नीति क े अ ीन ड्यूटी एन्टाइटलमेंट पास बुक स्कीम, जो ड्यूटी रिरविमशन स्कीम है, क े अं रण पर कोई लाभ। (iii-ड) विवदेश व्यापार (विवकास और विवविनयमन) अति विनयम, 1992 (22/1992) की ारा 5 क े अ ीन ैयार और घोविष विनया/ और आया नीति क े अ ीन शुल्क मुक्त पुनःपूर्ति प्रमाणपत्र, जो ड्यूटी रिरविमशन स्कीम है, क े अं रण पर कोई लाभ। XXXXXXXX 80 -IB. अवसंर'ना विवकास उपक्रमों से भिभन्न कति पय औद्योविगक उपक्रमों से लाभ और अभिभलाभ की बाब कटौ ी: - 1) जहां विकसी विन ा/रिर ी की क ु ल सकल आय मे, उपखंड (3) से उपखंड (11), (11-A) और (11B) में विनर्दिदष्ट विकसी व्यवसाय से व्युत्पन्न कोई लाभ और अभिभलाभ (ऐसे कारोबार को इसमें इसक े पश्चा ् पात्र व्यवसाय कहा गया है) सब्सिम्मलिल है, वहां, विन ा/रिर ी की क ु ल आय की संगणना करने में, इस खंड क े उपबं ों क े अनुसार और उनक े अ ीन रह े हुए, ऐसे लाभ और अभिभलाभ की रकम में से ऐसे प्रति श क े बराबर और इस खंड में विवविनर्दिदष्ट विन ा/रण वषœ की ऐसी संख्या क े लिलए कटौ ी अनुज्ञा की जाएगी। 2) यह ारा विकसी ऐसे औद्योविगक उपक्रम को लागू हो ी है जो विनम्नलिललिख सभी श œ को पूरा कर ा है, अर्थीा/ ्ः - (I) इसका गठन पहले से विवद्यमान विकसी व्यवसाय क े विवभाजन या पुनर्दिनमा/ण द्वारा नहीं विकया गया हैः बश ¤, यह श / विकसी ऐसे औद्योविगक उपक्रम क े संबं में लागू नहीं होगी जो विकसी ऐसे औद्योविगक उपक्रम क े विन ा/रिर ी द्वारा पुनस्र्थीा/पन, पुनर्दिनमा/ण या पुनरुद्धार क े परिरणामस्वरूप बनाया गया है जैसा विक ारा 33- बी में संदर्भिभ है, उन परिरब्सिस्र्थीति यों में और उस ारा में विनर्दिदष्ट अवति क े भी र; (ii) इसका गठन पहले विकसी प्रयोजन क े लिलए प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र क े नए व्यवसाय क े अं रण द्वारा नहीं विकया गया है। (iii) यह विकसी वस् ु या 'ीज का विवविनमा/ण या उत्पादन कर ा है, जो ग्यारहवीं अनुसू'ी की सू'ी में विवविनर्दिदष्ट वस् ु या 'ीज नहीं है, या भार क े विकसी भाग में एक या अति क शी भंडारण संयंत्र या संयंत्रों का प्र'ालन कर ा हैः बश ¤, इस खंड की श /, उप ारा (4) में विनर्दिदष्ट विकसी लघु औद्योविगक उपक्रम या विकसी औद्योविगक उपक्रम क े संबं में इस प्रकार लागू होगी मानो 'ग्यारहवीं अनुसू'ी की सू'ी में विनर्दिदष्ट कोई वस् ु या वस् ु नहीं होने' शब्दों को छोड़ विदया गया हो। स्पष्टीकरण 1. –खंड (ii) क े प्रयोजनों क े लिलए, विन ा/रिर ी क े अलावा विकसी अन्य व्यविक्त द्वारा भार क े बाहर उपयोग की गई कोई भी मशीनरी या संयंत्र को विकसी भी उद्देश्य क े लिलए पहले इस् ेमाल की गई मशीनरी या संयंत्र क े रूप में नहीं माना जाएगा, यविद विनम्नलिललिख श § पूरी हो जा ी हैं, अर्थीा/ ्ः– (क) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का विन ा/रिर ी द्वारा अति ष्ठापन की ारीख से पूव/ विकसी भी समय भार में उपयोग नहीं विकया गया र्थीा। (ख) ऐसी मशीनरी या संयंत्र को भार से बाहर विकसी देश से भार में आया विकया जा ा है और (ग) विन ा/रिर ी द्वारा मशीनरी या संयंत्र क े अति ष्ठापन की ारीख से पूव/ विकसी अवति क े लिलए विकसी व्यविक्त की क ु ल आय की संगणना करने में इस अति विनयम क े उपबं ों क े अ ीन ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाब अवक्षय क े कारण कोई कटौ ी अनुज्ञा नहीं की गई है या अनुज्ञेय नहीं है। स्पष्टीकरण 2. –जहां विकसी औद्योविगक उपक्रम की दशा में, विकसी प्रयोजन क े लिलए पूव/ में प्रयुक्त कोई मशीनरी या संयंत्र या उसका कोई भाग विकसी नए व्यवसाय को अं रिर विकया जा ा है और इस प्रकार अं रिर मशीनरी या संयंत्र या उसक े भाग का क ु ल मूल्य उस व्यवसाय में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र क े क ु ल मूल्य क े बीस प्रति श से अति क नहीं हो ा है, वहां इस उप- ारा क े खंड (ii) क े लिलए उसमें विवविनर्दिदष्ट श / का अनुपालन विकया गया समझा जाएगा। (iv) ऐसे मामले में जहां औद्योविगक उपक्रम वस् ुओं या 'ीजों का विवविनमा/ण या उत्पादन कर ा है, उपक्रम विबजली की सहाय ा से की जाने वाली विवविनमा/ण प्रविक्रया में दस या अति क कामगारों को रोजगार दे ा है या विबजली की सहाय ा क े विबना की जाने वाली विवविनमा/ण प्रविक्रया में बीस या अति क कामगारों को रोजगार दे ा है। (3) विकसी औद्योविगक उपक्रम की दशा में कटौ ी की राभिश विनम्नलिललिख श œ की पूर्ति क े अ ीन रह े हुए, प्रारंभिभक विन ा/रण वष/ से प्रारंभ होने वाले दस क्रमव 7 विन ा/रण वषœ (या बारह क्रमव 7 विन ा/रण वषœ में जहां विन ा/रिर ी सहकारी सोसाइटी है) की अवति क े लिलए ऐसे औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभों और अभिभलाभों का पच्चीस प्रति श (या ीस प्रति श जहाँ विन ा/रिर ी एक क ं पनी है) होगी, अर्थीा/ ्:– (i) यह विकसी भी समय, 1 अप्रैल, 1991 से आरंभ होने वाली और 31 मा'/, 1995 को समाW होने वाली अवति क े दौरान या ऐसी अति रिरक्त अवति क े दौरान, जो क े न्द्रीय सरकार, सरकारी राजपत्र में अति सू'ना द्वारा, विकसी विवभिशष्ट उपक्रम क े संदभ/ में विवविनर्दिदष्ट करे, विवविनमा/ण या उत्पादन, वस् ुओं या 'ीजों का या ऐसे संयंत्र या संयंत्रों का प्र'ालन आरंभ कर ी है। (ii) जहां वह लघु औद्योविगक उपक्रम वाला औद्योविगक उपक्रम है, वहां वह 1 अप्रैल, 1995 को प्रारंभ होने वाली और 31 मा'/, 2002 को समाW होने वाली अवति क े दौरान विकसी भी समय वस् ुओं या 'ीजों का विवविनमा/ण या उत्पादन या अपने शी ागार संयंत्र का प्र'ालन प्रारंभ कर ा है, जो उप- ारा (4) या उप- ारा (5) में विवविनर्दिदष्ट नहीं है। (4) आठवीं अनुसू'ी में विवविनर्दिदष्ट औद्योविगक रूप से विपछड़े राज्य में विकसी औद्योविगक उपक्रम की दशा में कटौ ी की रकम आरंभिभक विन ा/रण वष/ से आरंभ होने वाले पां' विन ा/रण वषœ क े लिलए ऐसे औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभों और अभिभलाभों का सौ प्रति श और त्पश्चा ् ऐसे औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभों और अभिभलाभों का पच्चीस प्रति श (या जहां विन ा/रिर ी क ं पनी है वहां ीस प्रति श ) होगी: बश ¤ विक कटौ ी की क ु ल अवति दस क्रमव 7 विन ा/रण वषœ (या लगा ार बारह विन ा/रण वषœ जहां विन ा/रिर ी एक सहकारी सविमति है) से अति क न हो, इस श / को पूरा करने क े अ ीन रह े हुए विक वह 1 अप्रैल, 1993 को आरंभ होने वाली और 31 मा'/, 2004 को समाW होने वाली अवति क े दौरान वस् ुओं या 'ीजों का विवविनमा/ण या उत्पादन या अपने शी ागार संयंत्र या संयंत्रों का प्र'ालन आरंभ कर ी हैः बश ¤ विक पूव त्तर क्षेत्र में ऐसे उद्योगों की दशा में, जिजन्हें क े न्द्रीय सरकार द्वारा अति सूति' विकया जाए, कटौ ी की राभिश दस विन ा/रण वषœ की अवति क े लिलए लाभ और अभिभलाभ का श -प्रति श होगी और ऐसे मामले में कटौ ी की क ु ल अवति दस विन ा/रण वषœ से अति क नहीं होगीः बश ¤ विक ारा 80 IC की उप ारा (2) में विनर्दिदष्ट विकसी उपक्रम या उद्यम को इस उप ारा क े अ ीन 1 अप्रैल, 2004 को आरंभ होने वाले विन ा/रण वष/ या विकसी पश्चात्व 7 वष/ क े लिलए कोई कटौ ी अनुज्ञा नहीं की जाएगी। बश ¤ विक जम्मू-कश्मीर राज्य में विकसी औद्योविगक उपक्रम की दशा में, पहले परं ुक क े उपबं इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो '' 31 मा'/, 2004 '' अंकों, अक्षरों और शब्दों क े स्र्थीान पर ''31 मा'/, 2012'' अंकों, अक्षरों और शब्दों को रख विदया गया हो; बश ¤ विक इस उप ारा क े अ ीन जम्मू-कश्मीर राज्य क े विकसी ऐसे औद्योविगक उपक्रम को, जो ेरहवीं अनुसू'ी क े भाग C में विवविनर्दिदष्ट विकसी वस् ु या 'ीज क े विवविनमा/ण या उत्पादन में लगा हुआ है, कोई कटौ ी अनुज्ञा नहीं की जाएगी। (5) ऐसे औद्योविगक रूप से विपछड़े जिजलों जो क े न्द्रीय सरकार, सरकारी राजपत्र में अति सू'ना द्वारा, विवविनर्दिदष्ट विवविह विदशा विनद¤शों को ध्यान में रख े हुए, 'क' श्रेणी क े औद्योविगक रूप से विपछड़े जिजले या 'ख' श्रेणी क े औद्योविगक रूप से विपछड़े जिजले क े रूप में इस विनविमत्त विवविनर्दिदष्ट करे, में अवब्सिस्र्थी विकसी औद्योविगक उपक्रम की दशा में कटौ ी की रकम विनम्नलिललिख होगी - (i) आरंभिभक विन ा/रण वष/ से आरंभ होने वाले पां' विन ा/रण वषœ क े लिलए 'क' श्रेणी क े विपछड़े जिजले में अवब्सिस्र्थी विकसी औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभों और अभिभलाभों का श -प्रति श और त्पश्चा ् विकसी औद्योविगक उपक्रम क े लाभों और अभिभलाभों का पच्चीस प्रति श (या जहां विन ा/रिर ी क ं पनी है वहां ीस प्रति श ): ु ल अवति दस क्रमव 7 विन ा/रण वषœ से या जहां विन ा/रिर ी सहकारी सोसाइटी है वहां बारह क्रमव 7 विन ा/रण वषœ से अति क नहीं होगीः बश ¤ विक औद्योविगक उपक्रम 1 अक्टूबर, 1994 को आरंभ होने वाली और 31 मा'/, 2004 को समाW होने वाली अवति क े दौरान विकसी भी समय वस् ुओं या 'ीजों का विवविनमा/ण या उत्पादन या अपने शी ागार संयंत्र या संयंत्रों का प्र'ालन आरंभ कर ा है। (ii) आरंभिभक विन ा/रण वष/ से आरंभ होने वाले ीन विन ा/रण वषœ क े लिलए 'ख' श्रेणी क े विपछड़े जिजले में अवब्सिस्र्थी विकसी औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभों और अभिभलाभों का श -प्रति श और त्पश्चा ् विकसी औद्योविगक उपक्रम क े लाभों और अभिभलाभों का पच्चीस प्रति श (या जहां विन ा/रिर ी क ं पनी है वहां ीस प्रति श ): ु ल अवति आठ क्रमव 7 मूल्यांकन वषœ से अति क न हो (या जहां विन ा/रिर ी एक सहकारी सविमति है, बारह क्रमव 7 मूल्यांकन वष/): बश ¤ विक औद्योविगक उपक्रम 1 अक्टूबर, 1994 को आरंभ होने वाली और 31 मा'/, 2004 को समाW होने वाली अवति क े दौरान विकसी भी समय वस् ुओं या 'ीजों का विवविनमा/ण या उत्पादन या अपने शी ागार संयंत्र या संयंत्रों का प्र'ालन आरंभ कर ा है। XXXXXXXX

7. 1 इस प्रकार, ारा 28(iiid) और (iiie) क े अनुसार, ड्यूटी ड्रॉबैक क े हस् ां रण और डीईपीबी योजनाओं आविद क े हस् ां रण पर कोई भी लाभ 'व्यवसाय या पेशे क े लाभ और अभिभलाभ' शीष/ क े ह आयकर क े लिलए प्रभाय/ होगा। ऐसा प्र ी हो ा है विक पहले नकद सहाय ा, ड्यूटी ड्रॉबैक, डीईपीबी योजना क े हस् ां रण पर लाभ आविद क े रूप में सरकार से प्रोत्साहन क े रूप में प्राविW क े बारे में विववाद हुआ कर ा र्थीा, यानी विक क्या ये प्राविWयां पूंजीग प्राविW या राजस्व प्राविW र्थीीं और इस प्रकार, कर योग्य होंगी। हालांविक, इसक े बाद, विववाद को विवराम देने क े लिलए, विव ातियका ने खंड 28 (iiia), (iiib), (iiiic), (iiid) और (iiie)) को शाविमल करक े उक्त प्रोत्साहनों को 'व्यवसाय और पेशे क े लाभ और अभिभलाभ' शीष/ क े ह कर योग्य बनाया है। 7.[2] ारा 80-IB कति पय औद्योविगक उपक्रमों से लाभ और अभिभलाभ की बाब कटौति यों का उपबं कर ी है। इसलिलए, ारा 80- IB क े ह कटौ ी का दावा करने क े लिलए, यह ारा 80-IB में उजिल्ललिख औद्योविगक उपक्रमों से प्राW "लाभ और अभिभलाभ" पर होना 'ाविहए। इस न्यायालय द्वारा लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में, एक समान प्रश्न पर विव'ार विकया गया और विवशेष रूप से डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं से लाभ क े संबं में। 7.[3] डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं पर विव'ार करने क े बाद लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में अं ः यह पाया गया और अभिभविन ा/रिर विकया गया विक डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक योजनायें ऐसे प्रोत्साहन हैं जो क ें द्र सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं से या सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 75 से आ े हैं और इसलिलए, प्रोत्साहन लाभ ारा 80-IB क े ह पात्र व्यवसाय से प्राW लाभ नहीं हैं। यह देखा गया है विक वे ऐसे उपक्रमों क े सहायक लाभों की श्रेणी में आ े हैं। 7.[4] इसी प्रकार का विव'ार ड्यूटी ड्रॉबैक क े संबं में भी व्यक्त विकया गया र्थीा।इसक े बाद उपयु/क्त विनण/य क े पैराग्राफ 43 में यह अभिभविन ा/रिर विकया गया है विक ारा 80-IA/80-IB क े उद्देश्यों क े लिलए लाभ और हाविन खा े में डेविबट की गई वस् ुओं क े लिखलाफ ड्यूटी ड्रॉबैक, डीईपीबी लाभ, छ ू ट आविद को जमा नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक इस रह की छ ू ट (क्र े तिडट) लाभ और औद्योविगक उपक्रम क े बी' प्रर्थीम तिडग्री संबं से परे आय क े एक स्व ंत्र स्रो का गठन करेगा। इस प्रकार, यह अभिभविन ा/रिर विकया गया है विक ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविWयां/डीईपीबी लाभ, अति विनयम, 1961 की ारा 80-IB क े प्रयोजन क े लिलए पात्र औद्योविगक उपक्रमों क े शुद्ध लाभ का विहस्सा नहीं हैं। प्रासंविगक ''ा/एं पैराग्राफ 24,28 से 36, 38, 39, 41, 43 और 45 में हैं, जो विनम्नलिललिख हैं:- “24. ारा 80-IB का विवश्लेषण करने से पहले, एक प्रस् ावनात्मक विटप्पणी क े रूप में, यह उल्लेख करना आवश्यक है विक 1961 क े अति विनयम में मोटे ौर पर दो प्रकार क े कर प्रोत्साहनों का प्राव ान है, अर्थीा/ ् विनवेश से जुड़े प्रोत्साहन और लाभ से जुड़े प्रोत्साहन। अध्याय VI-A जो कर कटौति यों क े रूप में प्रोत्साहनों का प्राव ान कर ा है, अविनवाय/ रूप से लाभ से जुड़े प्रोत्साहनों की श्रेणी में आ ा है।इसलिलए, जब ारा 80-IA/80-IB पात्र व्यवसाय से व्युत्पन्न लाभ का उल्लेख कर ी है, ो यह उस व्यवसाय का स्वाविमत्व नहीं है जो प्रोत्साहनों को आकर्दिष कर ा है। ारा 80-आईए/80-IB क े ह जो बा प्रोत्साहन को आकर्दिष कर ी है वह लाभ (प्र'ालन लाभ) का उत्पादन है। XXXXXXXX

28. मामलों क े व /मान समूह में, विन ा/रण क े लिलए जो विववाद उठ ा है वह यह हैः क्या डीईपीबी क्र े तिडट/ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविW प्रर्थीम तिडग्री स्रो ों क े भी र आ ी है ?

29. विन ा/रिर ी(ओं) क े अनुसार, डीईपीबी क्र े तिडट/ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविW, खरीद (लाग टस्र्थी ा) क े मूल्य को कम कर दे ी है, इसलिलए यह प्रर्थीम तिडग्री स्रो क े भी र आ ी है क्योंविक यह शुद्ध लाभ को आनुपाति क रूप से बढ़ा ी है।

30. दूसरी ओर, विवभाग क े अनुसार, डीईपीबी क्र े तिडट/ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविW प्रर्थीम तिडग्री स्रो क े भी र नहीं आ ी है क्योंविक उक्त प्रोत्साहन भार सरकार द्वारा अति विनयविम प्रोत्साहन योजनाओं या सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 75 से आ ी है। इसलिलए, विवभाग क े अनुसार, व /मान मामलों में, प्रर्थीम तिडग्री स्रो सीमा शुल्क अति विनयम की प्रोत्साहन योजना/प्राव ान है। इस संबं में विवभाग, स्टर्लिंलग फ ू ड्स [(1999) 4 एससीसी 98:(1999) 237 आईटीआर 579] मामले में इस न्यायालय क े विनण/य पर अत्यति क भरोसा कर ा है।

31. इसलिलए, व /मान मामलों में, जिजसमें हमें एक औद्योविगक उपक्रम क े पात्र व्यवसाय की जां' करने की आवश्यक ा है, हमें विवविनमा/ण क े लाभ क े स्रो का प ा लगाने की आवश्यक ा है।(देखें सीआईटी बनाम विकल स्कर ऑयल इंजिजन लिलविमटेड [(1986) 157 आईटीआर 762 (बॉम)]

32. ारा 80-IA/80-IB क े अपने विवश्लेषण को जारी रख े हुए यह उल्लेख विकया जा सक ा है विक ारा 80-IB की उप- ारा (13) ारा, 80 IA की उप- ारा (5) और उप- ारा (7) से (12) क े प्राव ानों की प्रयोज्य ा प्रदान कर ी है, जहाँ क हो सक ा है, ारा 80-IB क े ह पात्र व्यवसाय क े लिलए लागू। इसलिलए, आरंभ में, हमने कहा विक एक सामान्य योजना क े रूप में ारा 80-I, 80-IA और 80-IB को पढ़ने की आवश्यक ा है।

33. ारा 80-IA की उप- ारा (5) क े अवलोकन पर यह देखा गया है विक इसमें विकसी पात्र व्यवसाय क े लाभ की संगणना करने की रीति का उपबं विकया गया है। दनुसार, ऐसे लाभों की गणना इस प्रकार की जानी 'ाविहए मानो ऐसा पात्र व्यवसाय ही विन ा/रिर ी की आय का एकमात्र स्रो हो। अ ः, पात्र व्यवसाय क े लाभों को कम करने या बढ़ाने क े लिलए अपनाई गई युविक्तयों को नामंजूर विकया जाना 'ाविहए, ारा 80-IA की उप- ारा (5) क े सबसे महत्वपूण/ उपबं ों को ध्यान में रख े हुए जिजन्हें ारा 80-IB में भी पढ़ा जाना आवश्यक है [ ारा 80-IB(13) देखें]। हम दोहरा सक े हैं विक ारा 80-I, 80-IA और 80-IB में एक सामान्य योजना है और यविद ऐसा है ो यह स्पष्ट है विक उक्त ाराओं में कटौति यों क े रूप में प्रोत्साहनों का प्राव ान है जो लाभ से जुड़े हैं न विक विनवेश से।

34. ारा 80-IA और 80-IB क े विवश्लेषण पर यह स्पष्ट हो जा ा है विक कोई भी औद्योविगक उपक्रम, जो उप- ारा (2) को पूरी करने पर पात्र हो जा ा है, विनर्दिदष्ट ति भिर्थी ( ारीखों) क े बाद ऐसे औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभ की सीमा क ही उप- ारा (1) क े ह कटौ ी क े हकदार होंगे। इसलिलए, पात्र ा क े अलावा, उप ारा (1) लाभ क े एक विनर्दिदष्ट प्रति श क कटौ ी की मात्रा को सीविम करने का अभिभप्राय रख ी है। यह ""औद्योविगक उपक्रम क े कारण लाभ"" क े विवपरी "औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न" शब्दों का महत्व है।

35. डीईपीबी एक प्रोत्साहन है। यह शुल्क छ ू ट योजना क े ह विदया जा ा है। मूल रूप से, यह एक विनया/ प्रोत्साहन है। इसमें कोई संदेह नहीं है विक डीईपीबी का उद्देश्य विनया/ उत्पाद की आया सामग्री पर सीमा शुल्क भुग ान की घटनाओं को टस्र्थी करना है। यह टस्र्थी ा विनया/ उत्पाद क े लिखलाफ सीमा शुल्क को क्र े तिडट द्वारा प्रदान की जा ी है। डीईपीबी क े ह, कोई विनया/ क मुक्त रूप से परिरव /नीय मुद्रा में विकए गए विनया/ क े एफओबी मूल्य क े प्रति श क े रूप में साख क े लिलए आवेदन कर सक ा है। साख क े वल विनया/ उत्पाद क े लिलए और कच्चे माल, घटकों आविद क े आया क े लिलए डीजीएफटी द्वारा विनर्दिदष्ट दरों पर उपलब् है। इस योजना क े ह डीईपीबी क्र े तिडट की गणना, बुविनयादी सीमा शुल्क और इस रह क े डीम्ड आया पर देय विवशेष अति रिरक्त शुल्क क े अनुसार विनया/ उत्पाद की डीम्ड आया सामग्री को ध्यान में रखकर की जानी है।

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36. इसलिलए, हमारे विव'ार में, डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक वे प्रोत्साहन हैं जो क ें द्र सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं से या सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 75 से आ े हैं। इसलिलए, प्रोत्साहन लाभ ारा 80-IB क े ह पात्र व्यवसाय से प्राW लाभ नहीं हैं। वे ऐसे उपक्रमों क े सहायक लाभों की श्रेणी में आ े हैं। XXXXXXXX

38. सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 75 और क े न्द्रीय उत्पाद शुल्क अति विनयम, 1944 की ारा 37, भार सरकार को विकसी विन ा/रिर ी द्वारा अदा विकए गए सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क क े पुनभु/ग ान का प्राव ान करने क े लिलए सशक्त कर ी है। रिरफ ं ड (वापसी), विकसी विवशेष वग/ की सामग्री या विनर्दिदष्ट वग/ क े विनया/ वस् ुओं क े विनमा/ण में उपयोग की जाने वाली वस् ुओं क े विववरण पर शुल्क की औस राभिश का भुग ान है। विनयमों में, विकसी आया क-सह- विनमा/ ा द्वारा वास् व में अदा की गई सीमा शुल्क या क ें द्रीय उत्पाद शुल्क क े अंकगभिण ीय रूप क े बराबर राभिश क े रिरफ ं ड (वापसी) की परिरकल्पना नहीं की गई है। सीमा शुल्क अति विनयम की ारा 75 की उप- ारा (2) में विकसी विवशेष व्यापार में प्र'लिल सभी परिरब्सिस्र्थीति यों पर विव'ार करने और आयाति माल क े विवभिभन्न वगœ में से प्रत्येक क े संबं में प्रासंविगक थ्यों की ब्सिस्र्थीति क े आ ार पर, ड्रॉबैक की राभिश विन ा/रिर करने की आवश्यक ा है। मूल रूप से, ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविW का स्रो सीमा शुल्क अति विनयम की ारा 75 और क ें द्रीय उत्पाद शुल्क अति विनयम की ारा 37 मे विनविह है।

39. ड्यूटी ड्रॉबैक और डीईपीबी की छ ू ट की अव ारणा का विवश्लेषण कर े हुए, हम सं ुष्ट हैं विक शुल्क की छ ू ट, भार सरकार द्वारा बनाए गए सीमा शुल्क अति विनयम/योजनाओं में वै ाविनक/नीति ग प्राव ानों क े कारण है। इन परिरब्सिस्र्थीति यों में, हम मान े हैं विक इस रह क े प्रोत्साहनों क े माध्यम से प्राW लाभ, ारा 80-IB में 'औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ' की अभिभव्यविक्त क े भी र नहीं आ े हैं। XXXXXXXX

41. खरीद की लाग में शुल्क और कर (कर अति कारिरयों से उद्यम द्वारा बाद में वसूल विकए जाने वाले करों को छोड़कर), आं रिरक भाड़ा और अन्य व्यय शाविमल हैं, अति ग्रहण क े लिलए सी े ौर पर जिजम्मेदार है। इसलिलए खरीद की लाग विन ा/रिर करने में व्यापार छ ू ट, छ ू ट, ड्यूटी ड्रॉबैक और इसी रह की वस् ुओं की कटौ ी की जा ी है। इसलिलए ड्यूटी ड्रॉबैक, छ ू ट आविद को वस् ुओं की खरीद या विवविनमा/ण की लाग क े समायोजन (जमा) क े रूप में नहीं माना जाना 'ाविहए। उन्हें राजस्व या आय की अलग-अलग मदों क े रूप में माना जाना 'ाविहए और दनुसार उनका लेखा-जोखा रखा जाना 'ाविहए। (डॉल्फी तिडसूजा द्वारा भार ीय लेखांकन मानक और जीएएपी का पृष्ठ 44 देखें)। XXXXXXXX 43 इसलिलए, हमारा विव'ार है विक ारा 80-IA/80-IB क े उद्देश्यों क े लिलए लाभ और हाविन खा े में डेविबट विकए गए माल क े लिखलाफ ड्यूटी ड्रॉबैक, डीईपीबी लाभ, छ ू ट आविद को जमा नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक इस रह की छ ू ट (क्र े तिडट) लाभ और औद्योविगक उपक्रम क े बी' प्रर्थीम तिडग्री संबं से परे आय क े स्व ंत्र स्रो का गठन करेगा। XXXXXXXX

45. इन परिरब्सिस्र्थीति यों में, हम यह अभिभविन ा/रिर कर े हैं विक 1961 क े अति विनयम की ारा 80I/80IA/80IB क े लिलए पात्र औद्योविगक उपक्रम क े शुद्ध लाभ में ड्यूटी ड्रॉबैक प्राविW/डीईपीबी लाभ शाविमल नहीं हैं। दनुसार, अपीलों को लाग क े बारे में विबना विकसी आदेश क े खारिरज कर विदया जा ा है। 7.[5] इसक े पूव/, कर दातियत्व क े विन ा/रण क े प्रयोजन क े लिलए "औद्योविगक उपक्रमों से व्युत्पन्न लाभ और अभिभलाभ" का व्यवहार स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय क े समक्ष विव'ार क े लिलए आया र्थीा, जिजसका लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अनुसरण विकया गया र्थीा। स्टर्लिंलग फ े मामले में, पैराग्राफ 7 और 13 में यह पाया गया है और इस प्रकार अभिभविन ा/रिर विकया गया - " 7. इसलिलए, सवाल यह र्थीा विक क्या आया पात्र ाओं की विबक्री से विन ा/रिर ी द्वारा प्राW आय, समुद्री खाद्य क े प्रसंस्करण क े अपने औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभ और अभिभलाभ र्थीी। उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ इस विनष्कष/ पर पहुं'ी विक आया पात्र ा को बे'कर विन ा/रिर ी ने जो आय अर्जिज की र्थीी, वह लाभ और अभिभलाभ नहीं र्थीी जो उसे अपने औद्योविगक उपक्रम से प्राW हुई र्थीी।इस प्रयोजन क े लिलए, उसने क ै म्बे इलेब्सिक्ट्रक सप्लाई इंडब्सिस्ट्रयल को-ऑपरेविटव लिलविमटेड बनाम सीआईटी [(1978) 2 एससीसी 644:1978 एससीसी (कर) 119:(1978) 113 आईटीआर 84] क भरोसा विकया, वहाँ यह अभिभविन ा/रिर विकया गया र्थीा विक अभिभव्यविक्त "क े कारण (क े लिलए जिजम्मेदार)" आया में अभिभव्यविक्त " से व्युत्पन्न" से व्यापक र्थीी। व्यापक आया की अभिभव्यविक्त, अर्थीा/ ् "क े कारण (क े लिलए जिजम्मेदार)" का उपयोग उस समय विकया गया र्थीा जब विव ातियका का उद्देश्य व्यवसाय क े वास् विवक सं'ालन क े अलावा अन्य स्रो ों से प्राविWयों को कवर करना र्थीा। उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने पाया विक ारा 80-HH का लाभ प्राW करने क े लिलए विन ा/रिर ी को यह स्र्थीाविप करना र्थीा विक लाभ और अभिभलाभ उसक े औद्योविगक उपक्रम से प्राW विकए गए र्थीे और यह पया/W नहीं र्थीा विक अर्जिज लाभ और औद्योविगक उपक्रम क े बी' एक वाभिणब्सिज्यक संबं स्र्थीाविप विकया गया र्थीा। औद्योविगक उपक्रम को ही लाभ का स्रो होना र्थीा। औद्योविगक उपक्रम क े व्यवसाय को प्रत्यक्ष रूप से वह लाभ प्राW करना र्थीा। औद्योविगक उपक्रम को उस लाभ का प्रत्यक्ष स्रो होना 'ाविहए न विक विकसी अन्य लाभ को अर्जिज करने का सा न। "स्रो " शब्द क े अर्थी/ का भी संदभ/ विदया गया र्थीा और यह अभिभविन ा/रिर विकया गया र्थीा विक विनया/ को प्रोत्साविह करने की योजना क े ह विन ा/रिर ी द्वारा अर्जिज की गई आया पात्र ा क ें द्र सरकार द्वारा प्रदान की गई र्थीी। इसलिलए, आया पात्र ा की विबक्री, से उत्पन्न होने वाले लाभ और अभिभलाभ क े संदभ/ में स्रो क ें द्र सरकार की योजना र्थीी, न विक विन ा/रिर ी का औद्योविगक उपक्रम। XXXXXXXX

13. हमें नहीं लग ा विक आया पात्र ा का स्रो विन ा/रिर ी का औद्योविगक उपक्रम है। इन परिरब्सिस्र्थीति यों में, आया पात्र ा का स्रो क े वल क ें द्र सरकार की विनया/ संव /न योजना ही कहा जा सक ा है जिजसक े ह विनया/ पात्र ा उपलब् हो जा ी है। 'से व्युत्पन्न' शब्दों क े प्रयोग क े लिलए लाभ और अभिभलाभ र्थीा औद्योविगक उपक्रम क े बी' सी ा संबं होना 'ाविहए। व /मान मामले में, संबं प्रत्यक्ष नहीं है, बब्सिल्क क े वल आनुषंविगक है। औद्योविगक उपक्रम प्रसंस्क ृ समुद्री भोजन का विनया/ कर ा है। ऐसे विनया/ क े कारण, विनया/ संव /न योजना लागू हो ी है। इसक े ह विन ा/रिर ी आया पात्र ा का हकदार है, जिजसे वह बे' सक ा है। हमारे विव'ार में, उसक े विवक्रय प्रति फल को विन ा/रिर ी क े औद्योविगक उपक्रम से प्राW लाभ और अभिभलाभ क े रूप में नहीं माना जा सक ा है। 7.[6] इसलिलए, स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (पूव क्त) और लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क न्यायालय द्वारा अति कभिर्थी विवति का अनुसरण कर े हुए, उच्च न्यायालय द्वारा यह अभिभविन ा/रिर करने में कोई त्रुविट नहीं की गई है विक डीईपीबी और ड्यूटी ड्रॉबैक दावों से लाभ होने पर, विन ा/रिर ी ारा 80-IB क े अ ीन कटौति यों का हकदार नहीं होगा क्योंविक ऐसी आय को ारा 28 (iiid) और (iiie) क े अनुसार औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न आय और अन्यर्थीा नहीं कहा जा सक ा है, ऐसी आय कर क े लिलए प्रभाय/ है। 7.[7] जहां क मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े अनुव 7 विनण/य पर विन ा/रिर ी क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा विकए गए भरोसे का संबं है, शुरुआ में, यह उल्लेख विकया जाना आवश्यक है विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में, यह ीन सब्सिब्सडी का मामला र्थीा, अर्थीा/ ् क) परिरवहन सब्सिब्सडी, (ख) ब्याज सब्सिब्सडी, और (ग) विवद्यु सब्सिब्सडी और इस संदभ/ में इस न्यायालय ने यह म व्यक्त विकया और अभिभविन ा/रिर विकया विक 'ूंविक ये सब्सिब्सडी सी े विवविनमा/ण की लाग को प्रभाविव कर ी है, उनका उपक्रम क े लाभ और अभिभलाभ से सी ा संबं है और 'ूंविक इन सब्सिब्सडी का सी ा संबं है, इसलिलए कहा जा सक ा है विक औद्योविगक उपक्रम से व्युत्पन्न की गई हैं। यह उल्लेख विकया जाना है विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में विनण/य पर ध्यान विदया र्थीा, हालांविक, इस न्यायालय ने विवशेष रूप से कहा विक लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) का मामला एक विनया/ प्रोत्साहन से संबंति र्थीा, जो लाग क े एक त्व की प्रति पूर्ति से बहु दूर है। लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में विनण/य पर विव'ार कर े समय, इस न्यायालय ने ड्यूटी एंटाइटेलमेंट पास बुक और ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं में अं र विकया और विवशेष रूप से कहा विक डीपीईबी/ड्यूटी ड्राबैक स्कीम अपने उत्पादों क े विनमा/ण या विबक्री क े लिलए विकसी औद्योविगक उपक्रम क े व्यवसाय से संबंति नहीं है और डीईपीबी की पात्र ा क े वल भी उत्पन्न हो ी है जब उपक्रम उक्त उत्पाद का विनया/ कर ा है, अर्थीा/, इसक े विनमा/ण या उत्पादन क े बाद। पैराग्राफ 20 में, मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में, डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक से प्राW लाभ को अलग कर े हुए, विनम्नलिललिख रूप से अभिभविन ा/रिर विकया गया हैः "20. लिलबट[7] इंतिडया [लिलबट[7] इंतिडया बनाम सीआईटी, (2009) 9 एससीसी 328] इस क्रम में 'ौर्थीा विनण/य होने से भी राजस्व को मदद नहीं विमल ी। यह न्यायालय जिजसक े लिलए चिं' ाशील र्थीा वो विनया/ प्रोत्साहन से संबंति र्थीा, जो लाग क े एक त्व की प्रति पूर्ति से बहु दूर है। डीईपीबी ड्रॉबैक योजना विकसी औद्योविगक उपक्रम क े उत्पादों क े विनमा/ण या विबक्री क े व्यवसाय से संबंति नहीं है। डीईपीबी की पात्र ा भी उत्पन्न हो ी है जब उपक्रम उक्त उत्पाद का विनया/ करने क े लिलए आगे बढ़ ा है, अर्थीा/, इसका विनमा/ण या उत्पादन करने क े बाद। सारगर्भिभ रीक े से, यविद कोई विनया/ नहीं हो ा है ो डीईपीबी की कोई पात्र ा नहीं है और इसलिलए भार क े भी र विकसी उत्पाद क े विनमा/ण और/या विबक्री क े सार्थी इसका संबं विनकट म या प्रत्यक्ष नहीं है, बब्सिल्क यह एक कदम दूर है। इसक े अलावा, डीईपीबी पात्र ा क े पीछे का उद्देश्य, जैसा विक इस न्यायालय द्वारा अभिभविन ा/रिर विकया गया है, विनया/ उत्पाद की आया सामग्री पर सीमा शुल्क भुग ान की घटनाओं को टस्र्थी करना है, जो विनया/ उत्पाद क े लिखलाफ सीमा शुल्क को क्र े तिडट द्वारा प्रदान विकया जा ा है। ऐसे परिरदृश्य में, यह नहीं कहा जा सक ा है विक इस रह की शुल्क छ ू ट योजना, औद्योविगक उपक्रम या व्यवसाय द्वारा विकए गए लाभ और अभिभलाभ से व्युत्पन्न है। इस प्रकार, कभिर्थी विनण/य क े पैराग्राफ 20 से, यह देखा जा सक ा है विक इस न्यायालय ने लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े विनण/य को अस्वीकार नहीं विकया। यहां क विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में भी, इस न्यायालय ने स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मंगलोर (पूव क्त) क े मामले में पहले क े विनण/य पर विव'ार नहीं विकया। इस प्रकार, लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) और स्टर्लिंलग फ े मामलों में इस न्यायालय का विनण/य, जो इस प्रकार डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं पर हैं, हस् ग मुद्दे का समा ान कर ा है। यह नहीं कहा जा सक ा विक मेघालय स्टील्स लिलविमटेड (पूव क्त) क े मामले में लिलया गया विनण/य स्टर्लिंलग फ ू ड्स, मैंगलोर (पूव क्त) और लिलबट[7] इंतिडया (पूव क्त) क े मामले में लिलए गए विनण/यों क े विवपरी है। इसक े विवपरी, पैराग्राफ 20 में की गई विटप्पभिणयों को राजस्व क े पक्ष में और विन ा/रिर ी क े लिखलाफ कहा जा सक ा है।

8. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और उपयु/क्त कारणों से, उच्च न्यायालय ने न्यायोति' रूप से अभिभविन ा/रिर विकया है विक प्रत्यर्थी7-विन ा/रिर ी, डीईपीबी की राभिश क े सार्थी-सार्थी ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं पर ारा 80-IB क े ह कटौति यों का हकदार नहीं है। हम अभिभविन ा/रिर कर े है विक डीईपीबी/ड्यूटी ड्रॉबैक योजनाओं से अर्जिज लाभ पर विन ा/रिर ी अति विनयम, 1961 की ारा 80-IB क े ह कटौ ी का हकदार नहीं है। विकसी भी उच्च न्यायालय क े विकसी भी विवपरी विनण/य को अच्छा कानून नहीं माना जा ा है. व /मान अपील को खारिरज विकया जाना 'ाविहए और दनुसार खारिरज विकया जा ा है। हालांविक, मामले क े थ्यों और परिरब्सिस्र्थीति यों में, लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा। न्याया ीश (एम. आर. शाह) न्याया ीश (बी. वी. नागरत्ना) नई विदल्ली, 10 अप्रैल, 2023 अस्वीकरण: स्र्थीानीय भाषा में अनुवाविद विनण/य, वादी क े प्रति बंति उपयोग क े लिलए, उसकी भाषा में समझाने क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और आति कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनण/य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक होगा और विनष्पादन और काया/न्वयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।