Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या....../2023
[एसएलपी (सीआरएल) संख्या -1249/2023 से उत्पन्न]
रमेश चंद्र वैश्य ... अपीलक ा2
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और एक अन्य …प्रत्यर्थी;
निनर्ण2य
माननीय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता
अनुमति अनुदत्त की गई।
JUDGMENT
2. निवशेष अनुमति क े द्वारा प्रस् ु व 2मान अपील में अपीलक ा2 क े द्वारा दाखिJल निकए गये दण्ड प्रनिMया संनिN ा(ए स्मिस्मन पश्चा सी.आर.पी.सी.) की ारा 4821 क े द्वारा आरोप-पत्र क े सार्थी -सार्थी लंनिब आपराति क काय2वाNी2 को रद्द करने की मांग कर े Nुए दायर आवेदन को इलाNाबाद उच्च न्यायालय(ए स्मिस्मन पश्चा उच्च न्यायालय) क े निवद्व न्याया ीश द्वारा 23 मई, 2022 क े आदेश एवं निनर्ण2य क े द्वारा Jारिरज कर निदया गया र्थीा को व 2मान अपील में प्रश्नग निकया गया Nै। 1 धारा 482 क े तहत आवेदन संख्या तहत आवे तहत आवेदन संख्या दन संख्या संख्या - 38374/2018 2 मामला अपराध संख्या - 23/2016; आपराधिधक वाद संख्या - 376/2016 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. संक्षेप में, अभिभयोजन का मामला यN Nै निक 14 जनवरी, 2016 को, प्रा ः 7 बजे, अपीलक ा2 का दूसरे प्रत्यर्थी; (भिशकाय क ा2, इसक े बाद) क े सार्थी जल निनकासी क े मुद्दे पर निववाद चल रNा र्थीा।यN आरोप लगाया गया Nै निक इस बNस क े दौरान, अपीलक ा2 ने भिशकाय क ा2 और उसक े परिरवार क े सदस्यों क े खिलए जाति से संबंति गाखिलयां दीं, और बाद में भिशकाय क ा2 पर शारीरिरक Nमला निकया, जिजससे उसे कई चोटें आई ं। न ीज न, 20 जनवरी, 2016 को, अपीलक ा2 क े खिJलाफ भार ीय दंड संनिN ा, 1860 (आईपीसी, इसक े बाद) की ारा 323 और 504, अनुसूतिच जाति और अनुसूतिच जनजाति (अत्याचार निनवारर्ण) अति निनयम, 1989 (एससी/एसटी अति निनयम, इसक े बाद) क े N एक प्रर्थीम सूचना रिरपोट[2] (ए स्मिस्मनपश्चा,पNली एफआईआर, ) दज[2] की गई।
4. संबंति सक 2 ल अति कारी (ए स्मिस्मनपश्चा आई. ओ.) द्वारा जांच की गई।जांच क े बाद, जो एक निदन क े भी र पूरी Nो गई र्थीी, जांच अति कारी इस निनष्कष[2] पर पNुंचे निक अपीलक ा2 क े खिJलाफ मुकदमे क े खिलए भेजने क े खिलए सामग्री र्थीी और परिरर्णामस्वरूप, उसक े खिJलाफ भा.दं.सं. की ारा 323,504 और 3 (1) (x), ), एससी/एसटी अति निनयम क े N 21 जनवरी, 2016 को एक आरोप-पत्र संबंति न्यायालय में दायर निकया गया र्थीा। न्यायालय ने 3 मई, 2016 को अपरा का संज्ञान खिलया। 5 इस समय इस बा पर जोर देना मNत्वपूर्ण[2] Nै निक अपीलक ा2 उसी घटना से उत्पन्न एफ. आई. आर. दज[2] करना चाN ा र्थीा।उसक े अनुसार, 14 जनवरी, 2016 को भिशकाय क ा2 और उसक े बेटे ने उसे बें और लानिkयों से बुरी रN पीटा, जिजसक े परिरर्णामस्वरूप वN भी घायल Nो गया। उसी ारीJ को, जब अपीलक ा2 ने एफ. आई. आर. दज[2] करने क े खिलए पुखिलस र्थीाने पNुचा, उसकी एफ. आई. आर. को पंजीक ृ नNीं निकया गया र्थीा, इसक े बजाय, अपीलक ा2 का चालान कर दंड प्रनिMया संनिN ा की ारा 151,107 और 116 क े N संबंति प्रभारी निनरीक्षक द्वारा निनरो में रJा गया। उसक े द्वारा जमान ब बन् पत्र प्रस् ु करने पर छोड़ा गया। प्रार्थीनिमकी दज[2] करने में पुखिलस की निवफल ा क े कारर्ण, अपीलक ा2 ने ारा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 156(3), सी.आर. पी.सी क े N एक आवेदन प्रस् ु निकया जिजसक े N मजिजस्ट्रेट द्वारा पारिर आदेश क े अनुसार, एक एफ.आई.आर. निदनांक 18 फरवरी, 2016 (ए स्मिस्मनपश्चा "दूसरी प्रार्थीनिमकी",) को भिशकाय क ा2 (दूसरे प्रत्यर्थी;) क े खिJलाफ आईपीसी की ारा 323, 325, 392, 452, 504, 506 क े N अपरा ों क े खिलए दज[2] की गई र्थीी।
6. यN भी अंनिक निकया गया Nै निक अपीलक ा2 ने जिसनिवल न्यायालय क े समक्ष एक मुकदमा3 संस्मिस्र्थी निकया Nै जिजसमें अपीलक ा2 की भूनिम पर भिशकाय क ा2 क े निनरं र अति Mमर्ण क े निवरुद्ध स्र्थीायी व्यादेश की मांग की गई Nै।यN सक्षम न्यायालय क े समक्ष निवचारा ीन Nै।
7. उक्त आरोप -पत्र से व्यभिर्थी Nोकर, अपीलक ा2 ने ारा 482, सीआरपीसी क े N आवेदन करक े 5 अक्टूबर, 2018 को उच्च न्यायालय क े अति कार क्षेत्र का आह्वान निकया। पीसी। उन्Nोंने इसक े सार्थी-सार्थी उनक े खिJलाफ आपराति क काय2वाNी को इस आ ार पर रद्द करने की मांग की निक उक्त चाज2शीट में कोई अपरा नNीं Nै और व 2मान अभिभयोजन उत्पीड़न क े उद्देश्यों क े खिलए दुभा2वनापूर्ण[2] इरादे से स्र्थीानिप निकया गया Nै। 3 2017 का सीएस नंबर 07 4
8. यN अभिभनिन ा2रिर कर े Nुए निक अं रिरम राN प्रदान करने क े खिलए प्रर्थीमदृष्टया मामला स्र्थीानिप निकया गया र्थीा, उच्च न्यायालय ने 15 नवंबर, 2018 क े अं रिरम आदेश द्वारा निनदyश निदया निक ारा 482, दंड प्रनिMया संनिN ा क े N आवेदन पर निवचार निकए जाने क अपीलक ा2 क े खिJलाफ कोई दंडात्मक कार2वाई नNीं की जाए। 9 र्थीानिप, एक चुनौ ीपूर्ण[2] सुनवाई पर, उच्च न्यायालय ने आरोप-पत्र या संज्ञान लेने में निनचले न्यायालय द्वारा अपनाई गई प्रनिMया में कोई ास्मित्वक अनिनयनिम ा नNीं पाई और आक्षेनिप निनर्ण2य और आदेश द्वारा दंड प्रनिMया संनिN ा की ारा 482 क े अ ीन अपीलार्थी; क े आवेदन को Jारिरज कर 3 सी.एस. संख्या 07/2017 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd निदया।उच्च न्यायालय ने अभिभनिन ा2रिर निकया निक इस स् र पर, यN निनष्कष[2] नNीं निनकाला जा सक ा Nै निक एक संज्ञेय अपरा क े बारे में नNीं ब ाया गया Nै क्योंनिक उक्त आरोप थ्यात्मक प्रक ृ ति क े Nैं और उन्Nें जिसद्घ करने क े खिलए पक्षकारों द्वारा साक्ष्य की आवश्यक ा Nोगी। मोNम्मद अलाउद्दीन Jान अन्य बनाम निबNार राज्य और अन्य[4] वाले मामले में इस न्यायालय क े निनर्ण2य पर अवलंब ले े Nुए उच्च न्यायालय ने इस बा पर जोर निदया निक दंड प्रनिMया संनिN ा की ारा 482 क े अ ीन शनिक्तयों का प्रयोग कर े समय और/या उन्मोचन क े चरर्ण में न्यायालय क े पास सीनिम अति कार क्षेत्र Nै और वN यN अव ारिर करने क े खिलए साक्ष्य का मूल्यांकन नNी कर सक ा क्योंनिक प्रर्थीमदृष्टया अभिभयुक्त क े निवरुद्ध कोई मामला बनाया गया Nै ।उच्च न्यायालय ने यN अंनिक निकया निक साक्ष्य क े निबना, इस स् र पर आरोपों की सत्य ा का प ा लगाना संभव नNीं Nै, इसखिलए दंड प्रनिMया संनिN ा की ारा 482 क े N आरोप-पत्र या आपराति क काय2वाNी को रद्द करने क े खिलए आवेदन को बनाए रJा जा सक ा Nै।
10. अपीलक ा2 की ओर से सुश्री शुक्ला, निवद्वान अति वक्ता ने निनम्नखिलखिJ प्रस् ुति यां दीं: a. पNला एफ. आई. आर., जो छN निदन की देरी क े बाद पंजीक ृ निकया गया र्थीा, निवचार क े बाद और भिशकाय क ा2 क े आरोपों पर गंभीर संदेN पैदा कर ा Nै। b. प्रर्थीम एफ. आई. आर. क े पंजीकरर्ण क े अगले Nी निदन उतिच अन्वेषर्ण निकए निबना आरोप-पत्र दाखिJल निकया गया र्थीा। अपीलक ा2 द्वारा दायर दूसरे एफ. आई. आर. एवं तिचनिकत्सीय रिरपोट[2] को आरोप पत्र में नजर अंदाज कर निदया गया र्थीा। c. भिशकाय क ा2, गांव का एक प्रभावशाली व्यनिक्त Nोने क े कारर्ण, पक्षकारों क े बीच जिसनिवल न्यायालय में पNले से लंनिब जिसनिवल निववाद का निनस् ारर्ण करने क े खिलए एक गुप्त उद्देश्य क े सार्थी अपीलक ा2 क े खिJलाफ आपराति क काय2वाNी शुरू की। d. पुखिलस ने अपीलार्थी; की भिशकाय पर कार2वाई नNीं की। दूसरा एफ. आई. आर. निदनांक 18 फरवरी, 2016 को मजिजस्ट्रेट द्वारा दंड प्रनिMया संनिN ा की vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ारा 156 (3) क े N अपीलार्थी; क े आवेदन पर एक आदेश पारिर करने क े बाद Nी पंजीक ृ निकया गया र्थीा। e. Nरिरयार्णा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य[5] को इस क 2 क े समर्थी2न में रJा गया र्थीा निक यनिद एफ. आई. आर. की अं व2स् ु, उसक े बाNरी आवरर्ण क े आ ार पर ली गई Nै, ो अपीलक ा2 क े खिJलाफ कोई मामला नNीं बन ा Nै, ो ऐसे निवरो ी उद्देश्य वाले एफ. आई. आर. को Jारिरज निकया जाना चानिNए। f. निN ेश वमा2 बनाम उत्तराJंड राज्य और एक अन्य[6] वाले मामले को भी इस क 2 का समर्थी2न करने क े खिलए रJा गया र्थीा निक उच्च न्यायालय ने भिशकाय क ा2 द्वारा अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम क े प्राव ानों क े दुरुपयोग करने को नजरअंदाज कर निदया और न Nी पNले एफ. आई. आर. की सामग्री और न Nी आरोप-पत्र में अपीलक ा2 द्वारा इस् ेमाल की गई गाली - गलौज की भाषा की सटीक सामग्री का Jुलासा निकया ानिक एससी/एसटी अति निनयम की ारा 3 (1) (x), ) क े प्राव ानों को आकर्षिष निकया जा सक े ।
11. दनुसार, यN प्रार्थी2ना की गई निक अपीलक ा2 द्वारा की गई प्रार्थी2ना को स्वीक ृ निकया जाए। 12 इस अपील को Jारिरज करने की मांग कर े Nुए प्रर्थीम प्रत्यर्थी; (राज्य) की ओर से उपस्मिस्र्थी निवद्व अपर मNाति वक्ता श्री प्रसाद ने निनम्नखिलखिJ रूप में प्रति वाद निकयाः a. अपीलक ा2 ने एक गंभीर अपरा निकया र्थीा जिजसक े परिरर्णामस्वरूप भिशकाय क ा2 को परिरर्णामी निववाद में कई चोटें आई र्थीीं। b. पुखिलस ने भिशकाय क ा2 द्वारा निदए गए बयान और उसक े बाद की जांच क े आ ार पर उतिच प्रनिMया का पालन करने क े बाद निनचली निवचारर्ण न्यायालय क े समक्ष 21 जनवरी, 2016 को आरोप-पत्र दाखिJल निकया। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd c. उच्च न्यायालय ने, आक्षेनिप निनर्ण2य और आदेश द्वारा, अपीलक ा2 द्वारा प्रस् ु आवेदन को रद्द आदेशने क े खिलए उतिच रूप से Jारिरज आदेश निदया Nै। d. यN स्र्थीानिप निवति Nै निक दंड प्रनिMया संनिN ा की ारा 482 क े अ ीन अति कार क्षेत्र का प्रयोग पूर्ण[2] स क 2 ा क े सार्थी निकया जाना चानिNए और उच्च न्यायालय ने अति कार क्षेत्र का प्रयोग करने से इंकार करने में गल ी नNीं की र्थीी।
13. श्री शुक्ला, भिशकाय क ा2 (दूसरे प्रति वादी) की ओर से उपस्मिस्र्थी Nोने वाले निवद्वान अति वक्ता ने उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप निनर्ण2य और आदेश का समर्थी2न निकया। उनक े अनुसार, जांच अति कारी द्वारा एक निदन क े भी र जांच का पूरा Nोना असामान्य लग सक ा Nै लेनिकन यN असंभव नNीं Nै। उन्Nोंने यN भी क 2 निदया निक आरोप-पत्र दायर निकए जाने क े बाद कानून को अपना काम करने की अनुमति दी जानी चानिNए और यनिद अपीलक ा2 आरोपों की निवरचना से व्यभिर्थी Nै ो वN कानून क े अनुसार अपना उपचार मांग सक ा Nै। अपीलक ा2 द्वारा Nस् क्षेप का कोई मामला स्र्थीानिप नNीं निकया गया र्थीा, श्री शुक्ला ने अपील को Jारिरज करने क े खिलए प्रार्थी2ना की।
14. Nमने पक्षकारों को सुना Nै और रिरकॉड[2] पर उपस्मिस्र्थी सामग्री क े सार्थी उच्च न्यायालय क े निनर्ण2य और आदेश का अवलोकन निकया Nै।
15. अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम की ारा 3 (1) (x), ), एस. ओ. 152 (ई) निदनांक 18 जनवरी, 2016 द्वारा इसक े संशो न को अति सूतिच करने से पNले, इस प्रकार Nैः “ 3.अत्याचार क े अपरा ों क े खिलए दंड -(1) जो कोई अनुसूतिच जाति या अनुसूतिच जनजाति का सदस्य नNीं Nै, * (x), ) अनुसूतिच जाति या अनुसूतिच जनजाति क े निकसी सदस्य को साव2जनिनक रूप से निकसी भी स्र्थीान पर अपमानिन करने क े इरादे से जानबूझकर अपमानिन कर ा या डरा ा Nै; *** vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
16. भिशकाय क ा2 क े अनुरो पर पंजीक ृ प्रर्थीम एफ. आई. आर. घटना क े स्र्थीान क े बारे में क ु छ नNी बा ा ी Nै और जो, जन ा में से एक क े Nोने क े ना े, उस समय उपस्मिस्र्थी र्थीा जब अपीलक ा2 पर जाति संबं ी दुव्य2वNार करने का आरोप लगाया गया Nै। Nालांनिक, अपीलक ा2 क े आदेश पर पंजीक ृ दूसरे एफ. आई. आर. क े पढ़ने पर, ऐसा प्र ी Nो ा Nै निक यN घटना अपीलक ा2 क े घर पर Nुई र्थीी।
17. पNला प्रश्न जो उत्तर की मांग कर ा Nै वN यN Nै निक क्या यN साव2जनिनक दृनिष्ट में र्थीा निक अपीलक ा2 ने भिशकाय क ा2 का अपमान करने या उसे अपमानिन करने क े इरादे से जाति संबं ी गाखिलयां दीं। जांच अति कारी द्वारा 21 जनवरी, 2016 को दायर आरोप-पत्र से ऐसा प्र ी Nो ा Nै निक अभिभयोजन पक्ष भार ीय दंड भा.दं.सं. की ारा 323 और 504 र्थीा अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम की ारा 3 (1) (x), ) क े N अपीलक ा2 क े खिJलाफ आरोप य करने क े खिलए ीन गवाNों क े साक्ष्य पर भरोसा करना Nोगा।न ो प्रर्थीम एफ. आई. आर. और न Nी आरोप-पत्र घटना क े स्र्थीान पर (अपीलक ा2, उसकी पत्नी और उसक े बेटे क े अलावा) पांचवें व्यनिक्त (जन ा क े एक सदस्य) की उपस्मिस्र्थीति का उल्लेJ कर ा Nै।क्योंनिक अपीलक ा2 द्वारा निदया गया कर्थीन, यनिद कोई Nो, साव2जनिनक दृनिष्ट क े भी र निकसी भी स्र्थीान पर नNीं र्थीा, एससी/एसटी अति निनयम की ारा 3 (1) (x), ) को आकर्षिष करने क े खिलए मूल घटक गायब/अनुपस्मिस्र्थी र्थीा।इसखिलए, Nम मान े Nैं निक घटना क े समय (अपीलक ा2 द्वारा भिशकाय क ा2 को जाति से संबंति गाखिलयां देने की ) प्रासंनिगक बिंबदु पर, जन ा का कोई भी सदस्य मौजूद नNीं र्थीा.
18. इसक े अलावा, यN मान े Nुए निक अपीलक ा2 ने भिशकाय क ा2 को अपमान या अपमानिन करने क े उद्देश्य से जाति संबं ी गाखिलयां दी र्थीीं, यN े मामले को एससी/एसटी अति निनयम क े ) ारा 3(1) (x), ) क े दायरे में लाने क े खिलए आगे नNीं बढ़ा ा Nै। Nमने पNली F.I.R से नोट निकया Nै। सार्थी Nी आरोप-पत्र निक इसमें अपीलक ा2 क े 9 वें पाठ्यMम क े मौखिJक निववाद क े दौरान या भिशकाय क ा2 की जाति का कोई संदभ[2] नNीं vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd Nै, जिसवाय इस आरोप/निटप्पर्णी क े निक जाति -संबं ी गाखिलयां दी गई ं । निव ायी आशय से स्पष्ट प्र ी Nो ा Nै निक निकसी व्यनिक्त को अपमानिन करने क े खिलए निकया गया प्रत्येक अपमान या डराना- मकाना अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम की ारा 3 (1) (x), ) क े N ब क अपरा नNीं माना जाएगा, जब क निक निकसी निवशेष अनुसूतिच जाति या जनजाति का सदस्य Nोने क े कारर्ण इस रN क े अपमान या मकी को लतिक्ष नNीं निकया जा ा Nै।यनिद कोई निकसी अन्य को साव2जनिनक रूप से निकसी भी स्र्थीान पर बेवक ू फ (बेवक ू फ) या मूJ[2] (मुJ[2]) या चोर (चोर) कN ा Nै, ो यN स्पष्ट रूप से अपमानजनक या आMामक भाषा क े उपयोगक ा2 द्वारा अपमान करने या अपमानिन करने का इरादा रJ ा Nै। यNां क निक यनिद यN सामान्य रूप से निकसी ऐसे व्यनिक्त क े खिलए निनदyभिश निकया जा ा Nै, जो अनुसूतिच जाति या जनजाति Nै, ो भी ारा 3 (1) (x), ) को आकर्षिष करना पया2प्त नNीं Nो सक ा Nै जब क निक ऐसे शब्दों को जाति वादी निटप्पभिर्णयों क े सार्थी जोड़ा न जाए।चूंनिक अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम की ारा 18 ारा 438, Cr.PC क े N अदाल क े अति कार क्षेत्र क े आह्वान पर रोक लगा ी Nै और अन्य कानूनों पर अनुसूतिच जाति /अनुसूतिच जनजाति अति निनयम क े अति भावी प्रभाव को ध्यान में रJ े Nुए, यN वांछनीय Nै निक एक अभिभयुक्त क े अ ीन Nै ारा 3(1)(x), ) क े N अपरा क े कभिर्थी क ृ त्य क े खिलए उसका निवचारर्ण चलाया जा ा Nै ो उसक े द्वारा साव2जनिनक दृश्य क े निकसी भी स्र्थीान पर निकए गए बयानों को रेJांनिक निकया गया Nै, यनिद एफ.आई.आर. में नNीं Nै। (जो सभी थ्यों और घटनाओं का एक निवश्वकोश Nोना आवश्यक नNीं Nै), लेनिकन कम से कम चाज2शीट में (जो या ो जांच क े दौरान या अन्यर्थीा रिरकॉड[2] निकए गए गवाNों क े बयानों क े आ ार पर ैयार निकया गया Nै) ानिक अदाल को यN प ा लगाने में सक्षम बनाया जा सक े क्या चाज2शीट अपरा का संज्ञान लेने से पNले, एससी/एसटी अति निनयम क े N एक अपरा का मामला बन ा Nै, जो उसक े समक्ष स्मिस्र्थीति क े परिरप्रेक्ष्य में एक उतिच राय बनाने क े खिलए प्रति बद्ध Nै। व 2मान प्रकृ ति क े मामले में लागू निकए जाने वाले सीनिम परीक्षर्ण क े खिलए भी, 21 जनवरी, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 2016 का आरोप-पत्र ारा 3 (1) (x), ) क े N अपीलक ा2 द्वारा निकए गए निकसी अपरा का कोई मामला नNीं बना ा Nै, जिजससे उसे मुकदमा चलाने की आवश्यक ा Nो।
19. श्री शुक्ला द्वारा उद्धृ निN ेश वमा2 उपरोक्त में निवनिनश्चय क े पैरा 15 और 16 को उस दृनिष्टकोर्ण क े समर्थी2न में मदद क े खिलए जोर निदया जा सक ा Nै जिजसको उपर उद्धृ निकया जा चुका Nै।
20. दूसरा प्रश्न जो Nमारा ध्यान आकर्षिष करेगा, वN यN Nै निक क्या अपीलक ा2 क े निवरुद्ध दांतिडक काय2वानिNयों को भार ीय दंड भा.दं.सं. की ारा 323 और 504 क े अ ीन दंडनीय अपरा ों क े आरोप का सामना कर रNे अपीलक ा2 को ध्यान में रJ े Nुए आगे बढ़ाने की अनुमति दी जानी चानिNए।
21. भार ीय दंड संनिN ा की ारा 323 स्वेच्छा से उपNति कारिर करने क े खिलए दंड निवनिN कर ी Nै। भार ीय दंड भा.दं.सं. की ारा 319 में उपNति को निकसी व्यनिक्त को शारीरिरक दद[2], बीमारी या दुब2ल ा क े रूप में परिरभानिष निकया गया Nै।प्रर्थीम एफ. आई. आर. में आरोप Nै निक अपीलक ा2 ने भिशकाय क ा2 को पीटा र्थीा जिजसक े कारर्ण से उसे कई चोटें आई र्थीीं। Nालांनिक भिशकाय क ा2 ने आरोप लगाया निक इस रN की घटना कई लोगों ने देJी और उसक े Nार्थी पर चोट लगी, लेनिकन आरोप-पत्र में भिशकाय क ा2 की पत्नी और बेटे क े अलावा निकसी अन्य चश्मदीद गवाN का जिजM नNीं Nै और न Nी निकसी मेतिडकल रिरपोट[2] का।प्रनिMया में भिशकाय आरोप-पत्र द्वारा लगी चोट की प्रक ृ ति न ो प्रर्थीम एफ. आई. आर. और न Nी आरोप-पत्र से परिरलतिक्ष Nो ी Nै।इसक े निवपरी, अपीलक ा2 ने घटना क े ुरं बाद घायलों का इलाज करवाया र्थीा। व 2मान काय2वाNी में पNले प्रत्यर्थी; (राज्य) द्वारा दायर प्रत्यूत्तर शपर्थीपत्र में, इस संबं में निवचार करने योग्य कोई सामग्री नNीं Nै, जिसवाय एक स्पष्ट बयान क े निक भिशकाय क ा2 क े Nार्थी और शरीर क े अन्य निNस्सों में कई चोटें vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आई Nैं।यनिद वास् व में भिशकाय क ा2 क े कर्थीन पर निवश्वास निकया जाए ो जांच अति कारी को उसका समर्थी2न करने क े खिलए एक तिचनिकत्सा रिरपोट[2] मांगनी चानिNए र्थीी।निकसी निदए गए मामले में एक निदन क े भी र जांच को पूरा करने की सराNना की जा सक ी Nै, लेनिकन व 2मान मामले में यN न्याय क े निN क े कारर्ण यN सेवा में अति क नुकसान पNुंचा ा Nै।स्मिस्र्थीति ब और भी स्पष्ट Nो जा ी Nै जब इस काय2वाNी क े दौरान प्रर्थीम प्रत्यर्थी; सनिN पक्ष Nमें दूसरी एफ.आई.आर. क े परिरर्णाम से अवग कराने में असमर्थी2 Nो े Nैं। निकसी भी स्मिस्र्थीति में, Nम अभिभयोजन पक्ष क े मामले में ऐसी कोई सच्चाई नNीं पा े Nैं जिजससे ारा 323, आईपीसी की काय2वाNी को जारी रJने की अनुमति निमल सक े ।
22. निफयोना श्रीJण्डे अन्य बनाम मNाराष्ट्र राज्य 7 वाले ारा में इस न्यायालय को यN अभिभनिन ा2रिर करने का अवसर निमला निकः “13. भार ीय दंड संनिN ा की ारा 504 में निनम्नखिलखिJ त्व शानिमल Nैं (क) जानबूझकर निकया गया अपमान, (J) अपमान ऐसा Nोना चानिNए जो निकसी व्यनिक्त को उकसाए और (ग) अभिभयुक्त का इरादा Nोना चानिNए या उसे यN प ा Nोना चानिNए निक इस रN क े उकसावे से दूसरा व्यनिक्त साव2जनिनक शांति भंग करेगा या कोई अन्य अपरा करेगा।जानबूझकर निकया गया अपमान इस Nद क Nोना चानिNए निक वN निकसी व्यनिक्त को साव2जनिनक शांति भंग करने या कोई अन्य अपरा करने क े खिलए उकसाए।जो व्यनिक्त जानबूझकर निकसी अन्य व्यनिक्त का अपमान कर ा Nै या यN जान ा Nै निक यN निकसी अन्य व्यनिक्त को उकसाएगा और इस रN क े उकसावे से साव2जनिनक शांति भंग Nोगी या कोई अन्य अपरा Nोगा, ऐसी स्मिस्र्थीति में ारा 504 क े त्व सं ुष्ट Nो े Nैं।अपरा का गkन करने वाले आवश्यक त्वों में से एक यN Nै निक ऐसा कोई काय[2] या आचरर्ण निकया जाना चानिNए जो जानबूझकर अपमान क े बराबर Nो और यN थ्य निक आरोपी ने े सार्थी दुव्य2वNार निकया Nै, आईपीसी की ारा 504 क े N दोषजिसतिद्ध का वारंट देने क े खिलए अपने आप में पया2प्त नNीं Nै।
23. मामले क े थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति यों क े आ ार पर, Nमें यN मानने में र्थीोड़ी निNचनिकचाNट Nै निक भले Nी अपीलक ा2 ने भिशकाय क ा2 का दुरुपयोग, दुरुपयोग करना निकया Nो, लेनिकन ऐसा दुरुपयोग, दुरुपयोग vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd करना अपने आप में और निकसी और चीज क े निबना अपीलक ा2 को मुकदमे का सामना करने क े खिलए मजबूर की अनुपस्मिस्र्थीति में कर ा Nै, निवशेष रूप से इस रN क े जानबूझकर अपमान क े घटक क े स्पष्ट अभाव में निक यN एक व्यनिक्त को साव2जनिनक शांति को ोड़ने या कोई अन्य अपरा करने क े खिलए उकसा सक ा Nै।
24. Nम अभिभखिलखिJ कर े Nैं निक उच्च न्यायालय ने उतिच परिरप्रेक्ष्य में आरोप-पत्र सनिN दांतिडक काय2वानिNयों की चुनौ ी की सराNना करने में निवफल रNने में स्वयं को गल निनदyभिश निकया और इस रN की चुनौ ी को अस्वीकार करने में न्याया ीश की गंभीर निवफल ा को जन्म निदया।
25. उपयु2क्त कारर्णों से, Nम बेनिNचक यN अभिभनिन ा2रिर कर े Nैं निक यN आपराति क मामला संख्या 376/2016 को जारी रJने की अनुमति देने क े खिलए निवति की प्रनिMया का दुरुपयोग करना Nोगा।उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप निनर्ण2य और आदेश को अपास् कर े Nुए, Nम आपराति क मामला संख्या 376/2016 को भी रद्द कर े Nैं। 26 परिरर्णाम ः, यN अपील सफल Nो ी Nै। र्थीानिप, पक्षकारों को अपनी लाग स्वयं वNन करनी Nोगी। ……………………………. न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट्ट ……………………………. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता नई निदल्ली 19 मई, 2023. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd