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भारत का सर्वोच्च न्यायालय
सिविल अपीलीय क्षेत्राधिकार
सिविल अपील संख्या............./2023
(विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 16428/2022 से उत्पन्न)
साक्षी आढ़ा .......अपीलार्थी (गण)
बनाम
राजस्थान उच्च न्यायालय व अन्य ........ प्रतिवादी (गण)
क
े साथ
सिविल अपील संख्या.........../2023
(विशेष अनुमति याचिका संख्या (सिविल)18296-18299/2022 से उत्पन्न)
सिविल अपील संख्या.........../ 2023
(विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 21644/2022 से उत्पन्न)
सिविल याचिका संख्या................./ 2023
(विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 19179/2022 से उत्पन्न)
सिविल याचिका संख्या ................../2023
(विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 9544/2023 से उत्पन्न)
सिविल याचिका संख्या............../2023
रस्तोगी, न्यायाधीश
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. हमारे समक्ष अपीलकर्ताओं का वर्तमान बैच अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन क्रीमी लेयर अर्थात् एनसीएल), अधिक पिछड़ा वर्ग (एनसीएल) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) क े सदस्य हैं, जो प्रतिवादी द्वारा 22 जुलाई, 2021 को जारी किए गए एक विज्ञापन क े अनुसरण में सिविल न्यायाधीश क े पद क े लिए आयोजित चयन प्रक्रिया में अंतिम रूप से अर्हता प्राप्त कर चुक े हैं, लेकिन उन्हें उस श्रेणी में नहीं माना गया है, जिससे कि वे संबन्धित है। यह इस कारण से कि श्रेणी का प्रमाण-पत्र, जो प्रत्येक अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया था, विज्ञापन में बताई गई अंतिम तिथि, अर्थात् 31 अगस्त, 2021 क े बाद का है और उनमें से प्रत्येक दुर्भाग्यवश अनारक्षित श्रेणी में अर्हता प्राप्त नहीं कर सका, संविधान क े अनुच्छेद 226 क े अंतर्गत एक रिट याचिका दायर की गई जिसे उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने खारिज कर दिया, जो इस न्यायालय क े समक्ष चुनौती का विषय है।
3. मामले क े संक्षिप्त तथ्य अभिलेख से उद्भूत होते हैं कि सिविल न्यायाधीश का पद, जिससे हमारा संबंध है, राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 (एतद्पश्चात् "नियम, 2010"क े रूप में संदर्भित) से संलग्न अनुसूची में सम्मिलित है और इसे नियम, 2010 क े भाग 4 क े अधीन यथा उपबंधित भर्ती प्राधिकारी द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा क े परिणाम क े आधार पर सीधी भर्ती द्वारा ही भरा जाना है।
4. भर्ती की पद्धति क े अलावा, यह देखा जा सकता है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/अधिक पिछड़ा वर्ग/विकलांग व्यक्तियों और महिला उम्मीदवारों को नियम, 2010 क े नियम 10 क े तहत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। नियम 10(2) एवं (5) क े तहत निर्धारित शर्तों क े साथ कि भर्ती क े किसी विशेष वर्ष में ओबीसी/एमबीसी क े बीच उपयुक्त उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में, उनक े लिए आरक्षित रिक्तियां सामान्य प्रक्रिया क े अनुसार भरी जाएंगी और इस तरह न भरी गई रिक्तियों को बाद क े भर्ती वर्ष क े लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
5. नियम, 2010 क े नियम 20 क े तहत निर्दिष्ट परीक्षा की योजना क े अनुसार, सिविल न्यायाधीश क े पद पर भर्ती क े लिए भर्ती प्राधिकारी द्वारा प्रतियोगी परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाएगी अर्थात् प्रारंभिक परीक्षा क े बाद मुख्य परीक्षा होगी, जो कि नियम, 2010 क े भाग 4 में निर्दिष्ट योजना क े अनुसार होगी। इस शर्त क े साथ कि मुख्य परीक्षा में प्रवेश क े लिए योग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों द्वारा प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त अंकों को उनकी योग्यता का निर्धारण करने क े लिए नहीं गिना जाएगा और मुख्य परीक्षा में योग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों को साक्षात्कार क े लिए बुलाया जाएगा और मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंक योग्यता का निर्धारण करने में शासी कारक होंगे और जिन उम्मीदवारों को अंतिम रूप से योग्यता सूची में रखा जाएगा, उनक े नामों की अनुशंसा भर्ती प्राधिकारी द्वारा नियम 24 क े तहत नियुक्ति क े लिए की जाएगी और नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा न्यायालय क े परामर्श से नियमावली 2010 क े नियम 26 अनुसार नियुक्ति की जाएगी।
6. सिविल न्यायाधीश की वर्ष 2020-21 की लगभग 120 रिक्तियों का विज्ञापन दिनांक 22 जुलाई, 2021 प्रतिवादी द्वारा विज्ञापित किया गया था और विज्ञापन क े खंड 4 क े अंतर्गत संदर्भित तालिका चार्ट में श्रेणीवार आरक्षण इंगित किया गया था, जो निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत किया गया है: क ु ल रिक्तियों की संख्या वर्ष सामान्य आरक्षित बेंचमार्क विकलांग व्यक्ति एससी एसटी ओबीसी ईडबल्यूएस एमबीसी 89 2020 से दिसम्बर 2020 तक 35 पदों में से 10 पद महिलाओं क े लिए, 10 पदों में से 2 पद विधवाओं क े लिए आरक्षित 14 पदों मे से 04 पद महिलाओं क े लिए, 4 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए 10 पदों मे से 3 पद महिलाओं क े लिए 18 पदों मे 5 पद महिलाओं क े लिए, 5 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए 8 पदों मे से 02 पद महिलाओं क े लिए 04 पदों मे से 01 पद महिला क े लिए 89 रिक्तियों मे से 04 पद बेंचमार्क अक्षमता वाले व्यक्तियों क े लिए 31 2021 से दिसम्बर 2021 तक से 4 पद महिलाओं क े लिए, 4 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए आरक्षित 4 पदों मे से 1 पद महिला क े लिए 03 06 पदों मे से 1 पद महिला क े लिए 03 01 31 रिक्तियों मे से 01 पद बेंचमार्क े लिए * बेंचमार्क विकलांग व्यक्तियों क े लिए आरक्षित 05 पदों में से, 01 (एक) दृष्टिहीन व्यक्ति और कम दृष्टि रखने वाले व्यक्ति क े लिए आरक्षित है, 01 (एक) बधिर और कम सुनने क े वाले व्यक्ति क े लिए, 01 (एक) सेरेब्रल पाल्सी क े साथ चलने-फिरने में असमर्थ व्यक्ति क े लिए, क ु ष्ठ रोग ठीक हुए व्यक्ति क े लिए, बौनापन, एसिड अटैक पीड़ितों और माँसपेशियों क े कम विकसित व्यक्ति क े लिए और 02 (दो) स्वलीनता, बौद्धिक अक्षमता, विशिष्ट सीखने की अक्षमता और मानसिक बीमारी और एकाधिक विकलांगता क े लिए खंड (ए) से (डी) क े अंतर्गत प्रत्येक विकलांग क े लिए चिन्हित पदों में बधिर और दृष्टिहीनता सहित।
7. विज्ञापन क े खंड 5 क े अंतर्गत यह इंगित किया गया है कि यदि विभिन्न श्रेणियों क े लिए आरक्षित रिक्तियां खाली रह जाती है तो उन अपूर्ण रिक्तियों को भरने में एक संलग्न नोट क े साथ यह तरीका अपनाना होगा कि वे आवेदक, जो राजस्थान राज्य क े हैं व अन्य पिछड़ा वर्ग (क्रीमी लेयर)/अधिक पिछड़ा वर्ग (क्रीमी लेयर) क े सदस्य है और वे आवेदक, जो राजस्थान राज्य क े अलावा अन्य राज्यों क े हैं और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग (क्रीमी लेयर / नॉन क्रीमी लेयर) और अधिक पिछड़ा वर्ग (क्रीमी लेयर/नॉन क्रीमी लेयर) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) क े सदस्य है, उन्हें सामान्य श्रेणी में माना जाएगा और उन्हें आरक्षण की मांग क े लिए विज्ञापन क े खंड 6(i) और (iii) क े तहत संदर्भित, सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में नियमानुसार जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र और खंड 22(3) (अन्य महत्वपूर्ण निर्देश) क े तहत प्रस्तुत किया जाना होगा। यह इंगित किया गया था कि आवेदक को राजस्थान उच्च न्यायालय या संबंधित भर्ती प्राधिकरण द्वारा आवश्यक आरक्षण क े लाभ का दावा करते समय भर्ती प्राधिकरण की मांग पर ऐसे सभी दस्तावेजों/प्रमाणपत्रों को प्रस्तुत करना होगा। विज्ञापन क े खंड 22(3) क े साथ सपठित खंड 6(i) और (iii) का उद्धरण यहां पुन: प्रस्तुत किए जाते है। "6. विभिन्न श्रेणियों क े प्रमाणपत्र क े संदर्भ में (i) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग में आरक्षण हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में नियमानुसार जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। (ii)....... (iii) आवेदक क े आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित होने की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में नियमानुसार जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। "22. अन्य महत्वपूर्ण निर्देश:- (1)-(2).................. (3) आवेदकों क े लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सभी संबंधित मूल दस्तावेज/प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें, जिसक े आधार पर वे राजस्थान उच्च न्यायालय या संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर कोई दावा करते हैं। (4)....”
8. निर्देश इंगित करते हैं कि खंड 6 (i) और (iii) क े साथ सपठित खंड 22 (3) क े संदर्भ में, जो आवेदक आरक्षण क े लाभ का दावा करते हैं, उन्हें उच्च न्यायालय या संबंधित नियुक्त प्राधिकारी की मांग पर ऐसा प्रमाणपत्र/दस्तावेज पेश करना होगा। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि आरक्षण क े लाभ का दावा करने वाली श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र या तो आवेदन पत्र भरने क े चरण में या किसी भी बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि, इसे भर्ती प्राधिकारी द्वारा मांगे जाने पर प्रस्तुत किया जाना है। यह देखा जा सकता है कि एमबीसी (एनसीएल) और ईडब्ल्यूसी क े लिए आरक्षण को 22 जुलाई, 2021 क े एक विज्ञापन क े अनुसरण में आयोजित वर्तमान चयन प्रक्रिया में पहली बार पेश किया गया है।
9. आरक्षित रिक्तियों ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल या ईडब्ल्यूएस श्रेणी, जैसा भी मामला हो, क े खिलाफ आरक्षण का दावा करने वाले आवेदक द्वारा प्रस्तुत करने क े लिए प्रतिवादी द्वारा प्रासंगिक आवश्यकता को इस शर्त क े साथ अधिसूचित किया गया था कि प्रमाण पत्र आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31 अगस्त, 2021 से एक वर्ष से पहले की अवधि का नहीं होना चाहिए। इसकी सूचना पहली बार दिनांक 04 अगस्त, 2022 सूचित किया गया, जिसका कि संदर्भ दिया गया है। श्रेणी से संबंधित प्रमाणपत्र क े संदर्भ में प्रत्यर्थी द्वारा मांगे गए दस्तावेजों क े उद्धरण को निम्नानुसार पुनः प्रस्तुत किया गया हैः "(iii) श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र (क.)ओबीसी / एमबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 से एक वर्ष से पहले जारी किया गया नहीं हो। (ख.)यदि 31.08.2018 से 30.08.2020 क े मध्य ओबीसी/एमबीसी (गैर क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र जारी किया जाता है तो जाति प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। (ग.)ईडब्ल्यूएस श्रेणी क े मामले में- ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आरक्षण की मांग करने क े लिए आवश्यक आय और परिसंपत्ति प्रमाण पत्र 01.04.2021 से पहले जारी नहीं किया जाना चाहिए। यदि आय और परिसंपत्ति प्रमाण पत्र 01.04.2020 और 31.03.2021 क े बीच जारी किया गया है, तो प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। (घ.)एससी/एसटी/ओबीसी/एमबीसी/ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, जैसा भी मामला हो, आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 क े बाद का जारी नहीं किया गया नहीं हो।” (जोर दिया गया)
10. प्रतिवादी का यह मामला नहीं है, अपीलकर्ता में से कोई भी आरक्षित श्रेणी अर्थात् ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल या ईडब्ल्यूएस से संबंधित नहीं है, लेकिन श्रेणी से संबंधित उनका प्रमाण पत्र कटऑफ तिथि अर्थात् 31 अगस्त, 2021 क े बाद की दिनांक का है। हालांकि प्रत्येक आवेदक को उच्च न्यायालय क े अंतरिम आदेश क े तहत साक्षात्कार में उपस्थित होने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्हें श्रेणी से संबंधित उनक े प्रमाण पत्र क े लाभ का दावा करने की अनुमति नहीं थी, जो कि प्रस्तुत किया गया था फलतः उन्हें अनारक्षित श्रेणी में माना गया था।
11. जब अंतिम रूप से परिणाम प्रकाशित किया गया, तो निर्विवाद रूप से, प्रत्येक आवेदक ने अपनी संबंधित श्रेणी अर्थात ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल या ईडब्ल्यूएस, जैसा भी मामला हो, में उच्च अंक प्राप्त किए, और वरीयता में उनसे निम्न उम्मीदवारों को प्रतिवादी द्वारा चुना गया लेकिन चूंकि श्रेणी से संबंधित उनका प्रमाण पत्र कटऑफ तिथि अर्थात् 31 अगस्त, 2021 (आवेदन की अंतिम तिथि) क े बाद का है, आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है और चूंकि प्रत्येक आवेदक अनारक्षित श्रेणी में अर्हता प्राप्त करने में विफल रहा है, अतः उन्हें सिविल न्यायाधीश क े पद पर नियुक्ति क े लिए विचार किए जाने से अंतत: इनकार कर दिया गया। इस तथ्य को प्रतिवादी द्वारा दिनांक 30 अगस्त, 2022 क े नोटिस द्वारा प्रकाशित सिविल जज क ै डर 2021 की भर्ती क े परिणाम से और समर्थित किया जा सकता है, जो इंगित करता है कि वर्तमान अपीलकर्ताओं ने अपनी संबंधित श्रेणी योग्यता में उच्च अंक प्राप्त किए हैं जिन्हें नियुक्ति क े लिए अंतिम रूप से अनुशंसित किया गया है। ओबीसी-एनसीएल की श्रेणी में, एमबीसी-एनसीएल या ईडब्ल्यूएस श्रेणी जिससे वर्तमान अपीलकर्तागण संबंधित हैं सुविधा क े लिए, प्रतिवादी द्वारा तैयार किए गए तुलनात्मक विवरण को तालिका क े रूप में निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत किया गया है। ओबीसी-एनसीएल श्रेणी-विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 5654/2023, विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 16428/2022, विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 18296-18299/2022 क्र.सं. नाम अंक सामान्य श्रेणी की कट ऑफ कट ऑफ अंक ओबीसी- एनसीएल- याचिका कर्ता क े ओबीसी- एनसीएल प्रमाण पत्र उत्तरदाताओं क े अनुसार आवश्यक ओबीसी- एनसीएल प्रमाण पत्र की तिथि
1. ज्योति बेनीवाल 176 179.[5] 163.[5] 22.06.2016 और 25.07.2022 31.08.2018 से 31.08.2021
2. साक्षी आरहा 166.[5] 179.[5] 163.[5] 22.07.2016,17.06.2022 और 12.08.2022 उपरोक्त
3. प्रियंका 170 179.[5] 163.[5] 23.04.2018 और 20.06.2022 उपरोक्त
4. भव्य क ू ल्हर 165.[5] 179.[5] 163.[5] 19.09.2016 और 16.06.2022 उपरोक्त
5. नेहा बतार 165 179.[5] 163.[5] 28.06.2018 और 21.06.2022 उपरोक्त
6. निखिल कटारिया 171.[5] 179.[5] 163.[5] 16.07.2018 और 09.06.2022 उपरोक्त एमबीसी-एनसीएल श्रेणी- सुनील गुर्जर विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या- 19179/22 और क ु लदीप भाटिया विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या- 21644/22 क्र.सं. याचिका कर्ता का नाम प्राप्तांक कट ऑफ सामान्य श्रेणी कट ऑफ अंक एमबीसी- एनसीएल एमबीसी- एनसीएल क े प्रमाण पत्रों की दिनांक उत्तरदाताओं क े अनुसार एमबीसी- एनसीएल प्रमाण पत्र की तारीख
1. सुनील सिंह गुर्जर 172 179.[5] 141 18.06.2018 और 31.08.2018 से
2. क ु लदीप भाटिया 141.[5] 179.[5] 141 03.08.2012 और 09.03.2022 उपरोक्त “ईडबल्यूएस श्रेणी- पारुल जैन विशेष अनुमति याचिका (सिविल) डायरी संख्या 1581/2023 नाम सामान्य श्रेणी कट ऑफ अंक ईडबल्यूएस ईडबल्यूएस क े दिनांक े अनुसार ईडबल्यूएस तारीख
1. पारुल जैन 174.[5] 179.[5] 167.[5] 07.09.2021 31.08.2021 (1.4.2021- 31.03.2022 वैध एवाई 2021-22)
12. प्रतिवादी द्वारा यह विवादित नहीं है कि प्रत्येक आवेदक क े पास उसकी संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र है और यह प्रतिवादी द्वारा दिनांक 04 अगस्त, 2022 क े नोटिस क े तहत मांगे जाने की पूर्व तिथि का है।
13. यह अभिलेख पर आया है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जयपुर द्वारा दिनांक 09.09.2015 को जारी रोजगार की मांग क े संदर्भ में श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करने क े उद्देश्य से राजस्थान राज्य द्वारा परिपत्र जारी किए जाते है। इसक े बाद 08 अक्टूबर, 2019 को ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल या ईबीसी क े प्रमाण पत्र की वैधता का संक े त दिया गया और चूंकि बहुत भ्रम था और परिपत्र बड़े पैमाने पर लोगों क े लिए सुलभ नहीं थे और मुकदमेबाजी अदालतों क े समक्ष लंबित थी, इसलिए राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया और इसक े आगे, अपना निर्देश दिनांक 17 अक्टूबर, 2022 जारी किया और स्पष्टीकरण क े साथ आया कि यदि किसी कारण से, उम्मीदवार ने आवेदन पत्र की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया है और आवेदन भरने की अंतिम तिथि क े बाद एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करता है तो उस मामले में उम्मीदवार को एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना चाहिए कि वह संबंधित श्रेणी की पात्रता रखता है और यदि जानकारी गलत पाई जाती है, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है। सरकार द्वारा 17 अक्टूबर, 2022 क े निर्देश क े तहत मांग की गई अत्यावश्यकता को पूरा करने और चल रही मुकदमेबाजी को सुव्यवस्थित करने क े लिए किए गए स्पष्टीकरण का उद्धरण निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत किया जाता है: "यदि किसी कारण से किसी उम्मीदवार ने आवेदन पत्र की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया है और एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करता है जो आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि क े बाद जारी किया गया है, तो उस स्थिति में उम्मीदवार को इस पहलू पर एक शपथ पत्र लिखना चाहिए कि वह संबंधित वर्ग की योग्यता रखता हैं और यदि जानकारी गलत पाई जाती है तो नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।”
14. पुनरावृत्ति क े लिए, यह देखा जा सकता है कि यह प्रतिवादी का मामला यह नहीं है कि 22 जुलाई, 2021 क े विज्ञापन क े संदर्भ में या तो अपीलकर्ता उस संबंधित श्रेणी की पात्रता नहीं रखता है, जिससे वह संबंधित है और उनका एकमात्र दोष यह है कि श्रेणी से संबंधित उनका प्रमाण पत्र आवेदन की अंतिम तिथि (अर्थात 31 अगस्त,
2021) क े बाद की तारीख का है, जिसकी मांग नोटिस दिनांक 04 अक्टूबर, 2022 क े संदर्भ में श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने क े लिए की गई है तथा उन्हें अनंतिम रूप से साक्षात्कार क े लिए बुलाया गया था।
15. अपीलकर्ताओं द्वारा प्रतिवादी की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कि उन्हें उस आरक्षण क े लाभ का दावा करने की अनुमति नहीं दी गई है जिस श्रेणी से वे संबंधित हैं और उनमें से प्रत्येक ने संबंधित श्रेणी क े कटऑफ से अधिक अंक हासिल करने क े बाद अर्हता प्राप्त की है, एक रिट याचिका दायर की गई। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस आधार पर उनक े दावे को खारिज कर दिया है कि उनमें से प्रत्येक आवेदन की अंतिम तिथि अर्थात 31 अगस्त, 2021 तक अपनी श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहा था। उच्च न्यायालय ने अशोक क ु मार सोनकर बनाम भारत संघ व अन्य (2007) 4 एससीसी 54 पर भरोसा करते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि आवेदन की अंतिम तिथि पात्रता निर्धारित करने क े लिए एक मापदंड है और चूंकि उनमें से प्रत्येक को 31 अगस्त, 2021 या उससे पहले अपनी श्रेणी संबंधित प्रमाण पत्र को प्रस्तुत करना था, जिसमें वे विफल रहे हैं, इसलिए उन्हें संबंधित श्रेणी में माने जाने से अयोग्य माना जाता है और चूंकि उनमें से प्रत्येक दिनांक 18 अगस्त, 2022 क े आक्षेपित निर्णय ज्योति बेनीवाल बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की ओर से रजिस्ट्रार जनरल और अन्य(डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 11784/2022) क े अंतर्गत सिविल जज क े पद पर नियुक्ति क े लिए अनुपयुक्त मानी जाने वाली सामान्य श्रेणी में अर्हता प्राप्त करने में सक्षम नहीं था, जिसका कि बाद में दायर रिट याचिकाओं में इसका उल्लेख किया गया और सभी को ज्योति बेनीवाल (पूर्वोक्त )क े निर्णय पर भरोसा करते हुए दिनांक 06 सितंबर, 2022 क े आक्षेपित फ ै सले से निस्तारित कर दिया गया। अपीलकर्ता पारुल जैन क े मामले में, ज्योति बेनीवाल (पूर्वोक्त)में उच्च न्यायालय क े उसी निर्णय पर भरोसा करते हुए 18 नवंबर, 2022 को अलग निर्णय पारित किया गया और यह हमारे समक्ष अपील में चुनौती का विषय बन गया।
16. अपीलार्थियों क े विद्वान अधिवक्ता संयुक्त रूप से तर्क प्रस्तुत करते हैं कि किसी भी स्तर पर यह कहीं भी इंगित नहीं किया गया था कि आरक्षण का दावा करते समय आवेदकों/उम्मीदवारों द्वारा किस तिथि तक किस श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना है और प्रत्येक अपीलकर्ता क े पास उनकी संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र है और तदनुसार, उनमें से प्रत्येक ने अपने आवेदन पत्र में उस श्रेणी क े संबंध में उल्लेख किया है, जिसमें वे चयन प्रक्रिया में भाग लेने का इरादा रखते हैं और हालांकि प्रारंभिक परीक्षा में उपस्थित होने की अनुमति अनंतिम थी लेकिन किसी ने भी किसी भी स्तर पर जांच नहीं की कि आवश्यकता क्या है और चूंकि नियम, 2010 की व्यवस्था में या 22 जुलाई, 2021 क े विज्ञापन में भी, उस श्रेणी क े लिए कोई संदर्भ नहीं दिया गया है, जिसक े लिए अपीलार्थी ने दावा किया है कि उसे किस वर्ष या तारीख को प्रस्तुत किया जाना है। उनमें से प्रत्येक ने सदाशयतापूर्वक निवेदन किया था कि जिस श्रेणी का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा रहा है, वह सक्षम प्राधिकारी द्वारा सभी व्यावहारिक उद्देश्यों क े अनुपालन क े बाद जारी किया जाता है और दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों में उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा आक्षेपित निर्णय में श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने क े लिए 31 अगस्त, 2021 को एक अलंघ्य तिथि क े रूप में लेते हुए कठोरता रखी गई है। वह न 2010 क े नियमों क े तहत या न ही उस विज्ञापन में जिससे हम संबंधित हैं, कहीं भी निर्धारित नहीं किया गया है, इसलिए जिस आधार पर उच्च न्यायालय ने कार्यवाही की है वह पूरी तरह से गलत है।
17. विद्वान अधिवक्ता आगे तर्क देते हैं कि जिस निर्णय पर भरोसा किया गया है वह वर्तमान मामले क े तथ्यों पर बिल्क ु ल भी लागू नहीं होता है क्योंकि जिन निर्णयों पर भरोसा किया गया है वे न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता से संबंधित हैं और उन मामलों में जहां नियम मौन हैं या चयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले सक्षम प्राधिकारी/भर्ती प्राधिकारी द्वारा कोई प्रशासनिक निर्देश जारी नहीं किया गया है, इस न्यायालय ने कदम उठाया है और एक सिद्धांत निर्धारित किया है कि शैक्षणिक योग्यता रखने की आवश्यकता को इंगित करने वाले नियमों की अनुपस्थिति में, आवेदन भरने की अंतिम तिथि को आवेदक क े लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने क े लिए एक मानक माना जाता है।
18. लेकिन हम इस मामले में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता या जन्म तिथि क े संबंध में काम नहीं कर रहे हैं जो कि नियमावली, 2010 की योजना क े तहत परिभाषित है। दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों में, जिस आधार पर वर्तमान अपीलकर्ताओं का दावा उच्च न्यायालय द्वारा अनुपयुक्त किया गया है कि वे 31 अगस्त, 2021 को या उससे पहले श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहे, पूरी तरह से बुनियाद/आधार क े बिना है, जिसका कोई संबंध नहीं है और उन सभी को आश्चर्य में डाल दिया गया है जब उन्हें 31 अगस्त, 2021 को या उससे पहले श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की मांग करते हुए अधिसूचित किया गया था, जो कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि थी, लेकिन यह पहली बार अधिसूचित किया गया था जब साक्षात्कार क े लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की अनंतिम सूची 04 अगस्त, 2022 को प्रकाशित की गई थी।
19. विद्वत अधिवक्ता आगे तर्क प्रस्तुत करते हैं कि वे सभी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आ रहे हैं और समाज क े गरीब वर्ग से संबंधित हैं, उनक े पास उन्नत प्रौद्योगिकी को जानने का कोई साधन नहीं है, जो शहरों में उपलब्ध है और उनक े पास न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी वे प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने में समर्थ हैं और जब यह प्रतिवादी का मामला नहीं है कि अपीलकर्ताओं में से कोई भी उस श्रेणी का सदस्य नहीं है, जिसे उसक े द्वारा आवेदन पत्र में इंगित किया गया था, जो मूल रूप से उस चरण में उन्हें अनुपयुक्त करने क े लिए दायर किया गया था जब उन्होंने अंततः प्रतिस्पर्धी परीक्षा उत्तीर्ण की थी और जैसा कि सूचित किया जाता है कि उम्मीदवारों द्वारा शामिल नहीं होने क े कारण रिक्तियां उपलब्ध हैं, उन्हें इस प्राधिकरण द्वारा सफल घोषित किए जाने वाले व्यक्तियों/उम्मीदवारों क े अधिकारों को विक्षुब्द किए बिना या उनक े अधिकारों को छीने बिना आसानी से भरी हुई विज्ञापित रिक्तियों क े विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है।
20. इसक े विपरीत, उच्च न्यायालय द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्ष का समर्थन करते हुए, प्रतिवादी क े विद्वान वकील ने तर्क प्रस्तुत किया कि यह इस न्यायालय द्वारा निर्णयों की कतार में तय किया जा रहा है कि पात्रता को आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि या प्रासंगिक नियमों में निर्दिष्ट कटऑफ तिथि पर देखा जाना है। इस वर्तमान प्रकरण में, जब ऐसी परिस्थितियों में नियम मौन हैं, तो इस न्यायालय द्वारा इस विषय पर कानून क्या निर्धारित किया जा रहा है और आवेदक की पात्रता को आवेदन की अंतिम तिथि पर देखा जाना है, जो कि तत्काल मामले में 31 अगस्त, 2021 है। वास्तव में, प्रत्येक आवेदक क े पास 31 अगस्त, 2021 से पहले की अवधि की मांग क े अनुसार श्रेणी से संबंधित अपना प्रमाण पत्र नहीं था और तदनुसार, प्रतिवादी द्वारा कोई त्रुटि नहीं की गई थी और उन्हें खुली श्रेणी में सही माना गया था और यह अपीलकर्ता का मामला नहीं है कि कोई भी उम्मीदवार, जिसकी सिफारिश की गई है और ओपन क ै टेगरी में नियुक्त किया गया है, वह विज्ञापन दिनांक 21 जुलाई, 2021 क े अनुसार और उसक े समर्थन में प्रतिवादी द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया में योग्यता क े क्रम में नीचे है। प्रस्तुत करते हुए, विद्वान अधिवक्ता ने अशोक क ु मार सोनकर (पूर्वोक्त )क े बाद राक े श क ु मार शर्मा बनाम राज्य (दिल्ली एनसीटी ) और अन्य (2013) 11 एससीसी 58 बनाम क े साथ रिपोर्ट किए गए इस न्यायालय क े फ ै सले पर भरोसा किया है। वे तर्क देते है कि यह इस न्यायालय द्वारा आयोजित एक स्थापित कानून है और उच्च न्यायालय द्वारा भरोसा किया गया है, उच्च न्यायालय द्वारा कोई त्रुटि नहीं की गई है, जिसक े लिए इस न्यायालय क े हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
21. हमने पक्षकारों क े विद्वान अधिवक्ताओं को सुना है और उनकी सहायता से अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया है।
22. इसमें कोई विवाद नहीं है कि सिविल न्यायाधीश का पद नियम, 2010 से संलग्न अनुसूची में शामिल है और इसे भाग 4 क े संदर्भ में सीधी भर्ती द्वारा भरा जाना है और विज्ञापन को 22 जुलाई, 2021 को प्रतिवादी द्वारा अधिसूचित किया गया था जिसमें वर्ष 2020 क े लिए सिविल न्यायाधीश की 120 रिक्तियों क े लिए चयन किया गया था।
23. यह विवादित नहीं है कि 2010 क े नियम एक पूर्ण संहिता है और उस तिथि क े संदर्भ में मौन है, जब श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना है और जहां तक विज्ञापन का संबंध है, यह कहीं भी यह संक े त नहीं देता है कि चयन प्रक्रिया में भाग लेने क े इच्छ ु क आवेदकों द्वारा जाति संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने क े उद्देश्य क े लिए निर्णायक तिथि क्या होनी चाहिए और निश्चित रूप से प्रत्येक अपीलकर्ता श्रेणी का प्रमाण पत्र रखता है और नि:सन्देह यह प्रतिवादी द्वारा अधिसूचित तिथि से पहले का हो, जबकि साक्षात्कार क े लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की उनकी अनंतिम सूची 4 अगस्त, 2022 को प्रकाशित की गई है।
24. यह ध्यान दिया जा सकता है कि एमबीसी (एनसीएल) और ईडब्ल्यूएस श्रेणी क े लिए आरक्षण पहली बार शुरू किया गया है और उम्मीदवार पूरी तरह से उस प्रक्रिया और प्रारूप से अनभिज्ञ हैं, जिसमें उनकी श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना है और जहां तक ईडब्ल्यूएस कोटे में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों का संबंध है, यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि अपीलकर्ता पारुल जैन क े पिता ने पिछले वर्षों क े आयकर रिटर्न जमा किए थे और 16 अगस्त, 2021 को ई-मित्र कियोस्क पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र क े लिए आवेदन किया था और अपीलकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि वह ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र 6-7 दिनों क े भीतर प्राप्त करेगी लेकिन अपीलकर्ता द्वारा उसक े प्रमाण पत्र की मांग क े बावजूद, यह 07 सितंबर, 2021 को ई-मित्र कियोस्क द्वारा जारी किया गया था। लेकिन प्रतिवादी द्वारा यह विवादित नहीं है कि अपीलकर्ता ईडब्ल्यूएस श्रेणी से संबंधित है।
25. यह भी विवादित नहीं है कि या तो उस विज्ञापन में जिसे प्रारंभ में 22 जुलाई, 2021 को अधिसूचित किया गया था या 11 जनवरी, 2022 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा क े चरण में और उसक े बाद 30 अप्रैल, 2022 को आयोजित मुख्य परीक्षा से 01 अप्रैल तक मई, 2022, यह कहीं भी अधिसूचित नहीं किया गया था कि श्रेणी का प्रमाण पत्र 31 अगस्त, 2021 से पहले की अवधि का प्रस्तुत किया जाना है और क े वल तभी जब 04 अगस्त, 2022 को साक्षात्कार क े लिए अनंतिम रूप से योग्य उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित हुई हो। प्रतिवादी ने बचाव में कहा कि जाति संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की कटऑफ तिथि अंतिम तिथि से एक वर्ष पहले अर्थात 31 अगस्त, 2021 से पहले होनी चाहिए और चूँकि 04 अगस्त, 2022 को प्रकाशित अनंतिम सूची द्वारा उनक े ध्यान में लाए जाने क े बाद ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल या े प्रत्येक आवेदक ने श्रेणी क े अपने संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए हैं और जहाँ तक ईडब्ल्यूएस श्रेणी से संबंधित उम्मीदवार का संबंध है, अपीलकर्ता ने सात दिन की देरी से अपना जाति प्रमाण पत्र दिनांक 07 सितंबर, 2021 प्रस्तुत किया।
26. नियमों की व्यवस्था में, आवेदन प्राप्त करने क े लिए निर्धारित अंतिम तारीख क े बाद जनवरी की पहली तारीख को आयु पर विचार किया जाना चाहिए, यदि कोई व्यक्ति नियम 17 क े संदर्भ में आयु धारण नहीं कर रहा है, तो आवेदक को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है यदि नियुक्ति प्राधिकारी छ ू ट नहीं दी गई हो और नियम 18 शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करता है और यह कहीं भी इंगित नहीं किया गया है कि आवेदक की शैक्षणिक योग्यता को कब देखा जाना है और यहाँ इस न्यायालय ने कदम बढ़ाया और रेखा चतुर्वेदी (श्रीमती ) बनाम राजस्थान विश्वविद्यालय व अन्य 1993 Supp (3) एससीसी 168 से इस विषय पर कानून की व्याख्या की है जो सुसंगत है और यह अब तक परीक्षित नहीं है कि यदि नियम मौन हैं और कोई तारीख अधिसूचित नहीं की जा रही है, जिस पर आवेदक की योग्यता / पात्रता को देखा जाना है, सबसे अच्छा तरीका यह है कि आवेदन की अंतिम तिथि का ध्यान रखा जाए। न्यायिक टिप्पणी क े लिए, रेखा चतुर्वेदी (पूर्वोक्त )का संदर्भ लिया जा सकता है जिसे आगे भूपिंदरपाल सिंह व अन्य बनाम पंजाब राज्य व अन्य (2000) 5 एससीसी 262, जसबीर रानी व अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य (2002) 1 एससीसी 124, शंकर क े. मंडल व अन्य बनाम बिहार राज्य व अन्य (2003) 9 एससीसी 519 क े साथ अशोक क ु मार सोनकर (पूर्वोक्त) और राक े श क ु मार शर्मा (पूर्वोक्त ) का अनुसरण किया है।
27. इस न्यायालय ने रेखा चतुर्वेदी (पूर्वोक्त)मामले में इस प्रकार अभिनिर्धारित किया हैः "10. यह तर्क कि उम्मीदवारों की अपेक्षित योग्यता का परीक्षण चयन की तिथि क े संदर्भ में किया जाना चाहिए, न कि आवेदन करने की अंतिम तिथि क े संदर्भ में, खारिज किया जाता है। चयन की तिथि निश्चित रूप से अनिश्चित है। ऐसी तारीख की जानकारी क े अभाव में पदों क े लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार यह बताने में असमर्थ होंगे कि वे प्रश्नगत पदों क े लिए योग्य हैं या नहीं, यदि उन्होंने अभी तक योग्यता हासिल नहीं की है। जब तक विज्ञापन में एक निश्चित तिथि का उल्लेख नहीं किया जाता है, जिसक े संदर्भ में योग्यता का निर्णय किया जाना है, चाहे वह तिथि चयन की हो या अन्यथा हो, यह उन उम्मीदवारों क े लिए संभव नहीं होगा जिनक े पास वर्तमान में पदों क े आवेदन क े लिए भी अपेक्षित योग्यता नहीं है तिथि की अनिश्चितता क े विपरीत परिणाम भी हो सकते हैं, अर्थात यहां तक कि वे उम्मीदवार भी जिनक े पास वर्तमान में योग्यता नहीं है और अनिश्चित भविष्य की तारीख पर उन्हें प्राप्त करने की संभावना है, वे भी इन पदों क े लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे आवेदनों की संख्या बढ़ जाती है। लेकिन इससे भी बुरा परिणाम हो सकता है, जिसमें यह कदाचार क े लिए एक गुंजाइश छोड़ सकता है। चयन की तारीख इस तरह से तय की जा सकती है या हेरफ े र किया जा सकता है कि क ु छ आवेदकों को ध्यान में रखा जाए और दूसरों को मनमाने ढंग से अस्वीकार किया जाए। इसलिए, आवेदन आमंत्रित करने वाले विज्ञापन/अधिसूचना में निर्दिष्ट तिथि की अनुपस्थिति में, जिसक े संदर्भ में अपेक्षित योग्यता तय की जानी चाहिए, योग्यता की छानबीन क े लिए एकमात्र निश्चित तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि होगी। इसलिए, हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि जब वर्तमान मामले में चयन समिति ने, जैसा कि श्री मनोज स्वरूप ने तर्क दिया था, आवेदन प्रस्तुत करने कीकी अंतिम तिथि क े बजाय चयन की तिथि क े अनुसार अपेक्षित योग्यताओं पर विचार किया, तो इसने स्पष्ट अवैधता क े साथ कार्य किया, और इस आधार पर ही विचाराधीन चयन रद्द किए जाने योग्य हैं। इस संबंध में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग, हैदराबाद बनाम बी. शरतचंद्र [(1990) 2 एससीसी 669: 1990 एससीसी (एल एंड एस) 377: (1990) 4 एसएलआर 235: (1990) 13 एटीसी 708] और जिला कलेक्टर व अध्यक्ष, विजयनगरम सोशल वेलफ े यर रेजीडेंशियल स्क ू ल सोसाइटी, विजयनगरम बनाम एम. त्रिपुरा सुंदरी देवी [(1990) 3 एससीसी 655: 1990 एससीसी (एल एंड एस) 520:(1990) 4 एसएलआर 237:(1990) 14 एटीसी 766] में इस न्यायालय क े हाल क े दो निर्णयों का भी उल्लेख किया जा सकता है।"(जोर दिया गया)
28. बाद में इसका अनुसरण अशोक क ु मार सोनकर (पूर्वोक्त ) क े मामले में किया गया, जिसमें इस न्यायालय ने इस प्रकार अभिनिर्धारित किया:- "17. भूपिंदरपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य [(2000) 5 एससीसी 262: 2000 एससीसी (एल और एस) 639] मामले में इस अदालत ने पंजाब राज्य में साक्षात्कार की तारीख क े संदर्भ में पात्रता निर्धारित करने क े लिए प्रचलित प्रथा को भी अस्वीकार कर दिया। परस्पर, बताते हुए: (एससीसी पीपी। 26768, पैरा 13) 13........अशोक क ु मार शर्मा बनाम चंदर शेखर [(1997) 4 एससीसी 18: 1997 एससीसी (एल एंड एस) 913], ए.पी. लोक सेवा आयोग बनाम बी. शरत चंद्र [(1990) 2 एससीसी 669: 1990 एससीसी (एल एंड एस) 377: (1990) 13 एटीसी 708], जिला कलेक्टर और अध्यक्ष, विजयनगरम सोशल वेलफ े यर रेजिडेंशियल स्क ू ल सोसाइटी बनाम एम. त्रिपुरा सुंदरी देवी [(1990) 3 एससीसी 655: 1990 एससीसी (एलएंडएस) 520: (1990) 14 एटीसी 766], रेखा चतुर्वेदी बनाम राजस्थान विश्वविद्यालय [1993 supp (3) एससीसी 168: 1993 एससीसी (एल एंड एस) 951: (1993) 25 एटीसी 234], एम.वी. नायर (डॉ.) बनाम भारत संघ [(1993) 2 एससीसी 429: 1993 एससीसी (एल एंड एस) 512: (1993) 24 एटीसी 236] और यू.पी. लोक सेवा आयोग बनाम अल्पना [(1994) 2 एससीसी 723: 1994 SCC (L&S) 742: (1994) 27 AT C 101] पर इस न्यायालय ने भरोसा करते हुए, उच्च न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया (i) कि कटऑफ तिथि जिसक े संदर्भ में सार्वजनिक रोजगार की मांग करने वाले उम्मीदवार द्वारा पात्रता की आवश्यकता को पूरा किया जाना चाहिए, प्रासंगिक सेवा नियमों द्वारा निर्धारित तिथि है और यदि नियमों द्वारा नियुक्त कोई कटऑफ तिथि नहीं है तो आवेदन आमंत्रित करने वाले विज्ञापन में इस प्रयोजन क े लिए नियत की गई तारीख है। (ii) कि यदि ऐसी कोई तिथि नियत नहीं की जाती है तो पात्रता मानदंड उस नियत अंतिम तिथि क े संदर्भ में लागू किया जाएगा जिसक े द्वारा सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्त किए जाने हैं। उच्च न्यायालय द्वारा लिया गया विचार इस न्यायालय क े कई निर्णयों द्वारा समर्थित है और इसलिए अच्छी तरह से स्थापित है और इसलिए इसमें गलती नहीं की जा सकती है।हालाँकि, इस मामले की क ु छ विशेष विशेषताएं हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है और इस न्यायालय में निहित संविधान क े अनुच्छेद 142 क े तहत अधिकार क्षेत्र को लागू करक े न्याय किया जाना चाहिए ताकि न्याय क े उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सक े ।”
29. उपरोक्त निर्णय से यह प्रकट हुआ है और चुना गया है कि:. (i) कट ऑफ तिथि जिसक े संदर्भ में सार्वजनिक रोजगार की मांग करने वाले आवेदक द्वारा अपेक्षित पात्रता की पूर्ति की जानी चाहिए, वह संबंधित सेवा नियमों में अधिसूचित तिथि है। (ii) यदि नियमों क े तहत कोई कटऑफ नियत तिथि निर्दिष्ट नहीं है तो ऐसी तिथि वही होगी जो आवेदन आमंत्रित करने वाले विज्ञापन में इस उद्देश्य क े लिए नियत की गई हो। (iii) यदि ऐसी कोई तिथि निर्धारित नहीं है तो पात्रता मानदंड अंतिम तिथि क े संदर्भ में लागू किया जाएगा जिसक े द्वारा भर्ती प्राधिकरण द्वारा आवेदन प्राप्त किए जाने थे।
30. इन सिद्धांतों को इस न्यायालय द्वारा निर्धारित किया गया है और आगे की चर्चा क े लिए यह अनिर्णीत नहीं है कि जब नियम मौन हैं और विज्ञापन क े तहत पात्रता की आवश्यकता को पूरा करने क े लिए कोई तारीख अधिसूचित नहीं की गई है, तो पात्रता मानदंड आवेदन की अंतिम तारीख क े संदर्भ में लागू किया जाएगा जिसक े द्वारा भर्ती प्राधिकरण द्वारा आवेदन प्राप्त किया जाना है।
31. आइए हम नियमों की योजना, 2010 की अन्य तरीक े से और विशेष रूप से भाग IV की जांच करें, जो सिविल न्यायाधीश क े संवर्ग में भर्ती की पद्धति प्रदान करता है, नियम 19 प्रस्तावित करता है कि उम्मीदवार को सीधी भर्ती में भाग लेने क े दौरान एक चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जो उसे सेवा में रोजगार क े लिए अर्हता प्राप्त कर सकता है, आवेदन की तिथि से छह महीने से पूर्व नहीं होना चाहिए, जिसे उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया में भाग लेने क े लिए आवेदन पत्र भरते समय संलग्न करना होगा और यदि हम पूर्वोक्त सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हैं प्रश्न उठता है कि यदि अभ्यर्थी जिसने नियम 19 क े अनुसार आवेदन पत्र क े साथ चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने क े बाद चयन प्रक्रिया में भाग लिया है, यदि चयन की प्रक्रिया में बाद क े चरण में वास्तव में नियुक्त होने से पहले नैतिक अधमता क े किसी भी कार्य में शामिल होता है, तो क्या नियुक्ति प्राधिकारी उसे नियुक्ति देने क े लिए बाध्य है, यदि उसका नाम योग्यता क े क्रम में अंतिम रूप से रखा गया है, तो उत्तर वास्तव में है नकारात्मक है और कारण यह है कि नियम 19 क े अनुसार आवेदन पत्र भरते समय आवेदक द्वारा संलग्न चरित्र प्रमाण पत्र क े वल आवेदक/उम्मीदवार क े चरित्र क े सन्दर्भ में संतुष्टि क े उद्देश्य से है जो भाग लेने का इरादा रखता है। भर्ती की प्रक्रिया जो उसे सेवा में रोजगार क े लिए अर्हता प्राप्त कर सकती है, लेकिन अगर वह बाद में खुद को नैतिक अधमता क े किसी भी कार्य में शामिल करता है, हालांकि कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन प्राधिकरण हमेशा बाद क े घटनाक्रमों पर विचार करने क े लिए सक्षम है और नियुक्ति की तिथि तक यदि अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवार नियुक्ति क े लिए अनुपयुक्त पाया जाता है, जो वास्तव में उसने आवेदन पत्र भरने क े समय नहीं किया था और वह भी आवेदन की अंतिम तिथि पर, लेकिन उसे हमेशा महत्वपूर्ण माना जा सकता है नियुक्ति क े लिए विचार किए जाने क े लिए उम्मीदवार की उपयुक्तता का न्याय करने क े लिए और दी गई स्थिति में आवेदन की अंतिम तिथि का सिद्धांत पूरी तरह से निष्प्रभावी हो जाता है।
32. यह सत्य है कि सामान्य नियम यह है कि भर्ती प्रक्रिया में भाग लेते समय, व्यक्ति क े पास ऐसे प्रयोजन क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि को पात्रता योग्यता होनी चाहिए जब तक कि इसक े विपरीत कोई स्पष्ट प्रावधान न हो और निर्धारित तिथि तक अपेक्षित पात्रता योग्यता रखने क े मामले में कोई छ ू ट नहीं दी जा सकती है और जैसा भी मामला हो, आवश्यक प्रमाण पत्र या उपाधि प्रस्तुत कर स्थापित किया जा सकता है। लेकिन, साथ ही, आरक्षण या भारांक का लाभ उठाने क े लिए, आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे, लेकिन वे आरक्षण क े लाभ का दावा करने क े लिए पात्रता प्राप्त करने क े उद्देश्य से प्रमाण क े रूप में हैं, लेकिन इसका आवेदन की अंतिम तिथि से कोई संबंध नहीं है और इसक े विपरीत किसी नियम क े अभाव में कोई कठोर सिद्धांत लागू करना उचित नहीं होगा। सावधानी क े तौर पर, आरक्षण का लाभ लेने क े लिए प्रमाण प्रस्तुत करने से संबंधित नियम क े हर उल्लंघन क े परिणामस्वरूप उम्मीदवारी को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
33. इसी तरह की परिस्थितियों में, विभिन्न श्रेणियों अर्थात अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अति पिछड़ा वर्ग / विकलांग व्यक्तियों और महिला उम्मीदवारों क े लिए नियम, 2010 की योजना क े तहत रिक्तियां आरक्षित हैं और जिन्हें विज्ञापन दिनांक 22 क े भाग 4 क े तहत श्रेणीवार अधिसूचित किया गया है। दूसरा जुलाई, 2021 जिससे हमारा संबंध है, और यह बिना कहे चला जाता है कि उम्मीदवार को उस समय आरक्षित श्रेणी का सदस्य होना चाहिए जब आवेदन पत्र प्रश्न में विज्ञापन क े अनुसार भरा जाता है, लेकिन उसी समय तक जब तक परीक्षा की योजना और पाठ्यक्रम, जैसा कि नियम, 2010 क े नियम 20 में प्रदान किया गया है, भर्ती प्राधिकरण द्वारा आयोजित सिविल जज क े पद क े लिए प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करने क े लिए सभी क े लिए सामान्य है और प्रत्येक उम्मीदवार चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो उसे प्रारंभिक परीक्षा क े बाद मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार उत्तीर्ण करने की प्रक्रिया गुजरना होगा, सिवाय इसक े कि उम्मीदवारों को श्रेणीवार रिक्तियों की क ु ल संख्या क े संदर्भ में मुख्य परीक्षा क े बाद साक्षात्कार में प्रवेश दिया जाता है।
34. नियम 10 में निर्दिष्ट विभिन्न श्रेणियों की रिक्तियों का आरक्षण चयन प्रक्रिया में भाग लेने क े लिए उम्मीदवार की पात्रता की शर्त नहीं है क्योंकि आरक्षण का दावा करने क े उद्देश्य से श्रेणी का प्रमाण पत्र उस चरण में उत्पन्न नहीं होगा जब आवेदन चयन प्रक्रिया में भाग लेने क े लिए व्यक्तिगत उम्मीदवार द्वारा स्व-घोषणा करते हुए आवेदन पत्र भरा जाता है, लेकिन यह उस चरण में लागू होगा जब चयन प्रक्रिया में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की चयन सूची तैयार की जाती है, क्योंकि अंतिम चयन सूची को श्रेणीवार उम्मीदवारों आरक्षण का लाभ देते हुए प्रकाशित किया जाना है जिन्होंने चयन की प्रक्रिया में भाग लिया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए नहीं और जब प्रतिवादी ने आवेदक से उस श्रेणी क े अपने संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की मांग की जिसमें किसी ने इसक े नोटिस दिनांकित 04 अगस्त, 2022 क े तहत चयन प्रक्रिया में भाग लिया था निर्विवाद रूप से प्रत्येक आवेदक ने अपनी श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था जिसमें वह विज्ञापन क े समय संबंधित था, जब विज्ञापन दिनांक 22 जुलाई, 2021 क े खंड 22(3) क े साथ पठित खंड 6(i) और (iii) क े संदर्भ में भर्ती प्राधिकरण द्वारा इसकी मांग की गई थी।
35. इस न्यायालय ने डॉली छंडा बनाम अध्यक्ष, जी व अन्य (2005) 9 एस. सी. सी. 779 क े मामले में उस स्थिति पर विचार किया है जहां पद-ग्राही आरक्षण का लाभ चाहने वाला प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में विफल रहा है और योजना का परीक्षण करने क े पश्चात्, इस न्यायालय ने दी गई परिस्थितियों में इस प्रकार अभिनिर्धारित किया:- “7. सामान्य नियम यह है कि अध्ययन किसी भी पाठ्यक्रम या पद क े लिए आवेदन करते समय, जैसा भी मामला हो, जब तक कि इसक े विपरीत कोई स्पष्ट प्रावधान न हो, किसी व्यक्ति क े पास इस उद्देश्य क े लिए या तो प्रवेश विवरणिका में या आवेदन पत्र में निर्धारित अंतिम तिथि पर पात्रता योग्यता होनी चाहिए। इस संबंध में कोई छ ू ट नहीं दी जा सकती अर्थात निर्धारित तिथि तक अपेक्षित पात्रता निर्धारित करने क े मामले में कोई छ ू ट नहीं दी जा सकती। इसे आवश्यक प्रमाण पत्र, डिग्री या मार्क शीट प्रस्तुत करक े स्थापित किया जाना है। इसी प्रकार आरक्षण या भारांक आदि का लाभ लेने क े लिए आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होते हैं। ये दस्तावेज किसी विशेष योग्यता या प्राप्त अंकों का प्रतिशत या आरक्षण क े लाभ क े हकदार होने क े प्रमाण की प्रक ृ ति क े हैं। किसी मामले क े तथ्यों क े आधार पर, सबूत प्रस्तुत करने क े मामले में क ु छ छ ू ट दी जा सकती है और किसी कठोर सिद्धांत को लागू करना उचित नहीं होगा क्योंकि यह प्रक्रिया क े क्षेत्र से संबंधित है।प्रमाण प्रस्तुत करने से संबंधित नियम क े प्रत्येक उल्लंघन क े परिणामस्वरूप उम्मीदवारी को अस्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है।"
36. बाद में, राम क ु मार गिजरॉय बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड व अन्य (2016) 4 एससीसी 754, इस न्यायालय ने इस प्रश्न की जांच की है कि क्या कोई उम्मीदवार जो ओबीसी श्रेणी क े तहत एक परीक्षा में उपस्थित होता है और विज्ञापन में उल्लिखित अंतिम तिथि क े बाद प्रमाण पत्र प्रस्तुत करता है ओबीसी श्रेणी क े तहत पद क े लिए चयन क े लिए पात्र है और उसने इसका सकारात्मक उत्तर निम्नानुसार दिया: "18. हमारे सुविचारित विचार में, पुष्पा बनाम सरकार (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली), 2009 एस. सी. सी. ऑनलाइन डेल 281 में दिया गया विनिश्चय इस न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित विधि की स्थिति क े अनुरूप है, जिसे ऊपर निर्दिष्ट किया गया है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इंद्रा साहनी [इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ 1992 पूरक (3) एससीसी 217: 1992 एससीसी (एल एंड एस) पूरक 1: (1992) 22 एटीसी 385] और वलसम्मा पॉल [वलसम्मा पॉल बनाम कोचीन विश्वविद्यालय, (1996) 3 एससीसी 545: 1996 एससीसी (एल एंड एस) 772: (1996) 33 एटीसी 713] में इस न्यायालय की संविधान पीठों द्वारा निर्धारित प्रश्न पर बाध्यकारी नजीर पर ध्यान दिए बिना, विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए फ ै सले और आदेश को पलटने में गलती की थी जिसमें इस न्यायालय ने अनुच्छेद 14, 15, 16 और 39 क राज्य नीति क े निर्देशक सिद्धांतों क े निर्वचन क े बाद यह अभिनिर्धारित किया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और समाज क े शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने का उद्देश्य सार्वजनिक रोजगार में असमानता को दूर करना है क्योंकि सदियों क े उत्पीड़न और अवसर क े अभाव का सामना करने क े परिणामस्वरूप इन श्रेणियों क े उम्मीदवार सामान्य वर्ग क े उम्मीदवारों क े साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं। संविधान की प्रस्तावना क े साथ-साथ अनुच्छेद 14, 15, 16 और 39 क राज्य नीति क े निर्देशक सिद्धांतों में परिकल्पित आरक्षण की संवैधानिक अवधारणा समाज क े सभी वर्गों को समान अवसर देने की अवधारणा को प्राप्त करना है। इस प्रकार, खंडपीठ ने विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा पारित निर्णय और आदेश को पलट कर गलती की है। इसलिए, 2011 क े लेटर्स पेटेंट अपील संख्या 562 में खंडपीठ द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश न क े वल त्रुटिपूर्ण है, बल्कि कानून की त्रुटि से भी ग्रस्त है क्योंकि यह इंद्रा साहनी [इंद्र साहनी बनाम भारत संघ, 1992 पूरक (3) एससीसी 217: 1992 एससीसी (एल एंड एस) पूरक 1: (1992) 22 एटीसी 385] और वलसम्मा पॉल [वलसम्मा पॉल बनाम कोचीन विश्वविद्यालय, (1996) 3 एससीसी 545: 1996 एससीसी (एल एंड एस) 772: (1996) 33 एटीसी 713] क े मामले में इस न्यायालय क े निर्णयों की बाध्यकारी नजीर का पालन करने में विफल रहा है। इसलिए, उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश [दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड बनाम राम क ु मार गिजरोया, 2012 एससीसी ऑनलाइन डेल 472: (2012) 128 डीआरजे 124] अपास्त किए जाने योग्य है और तद्नुसार अपास्त किया जाता है। विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 24.11.2010 राम क ु मार गिजरोया बनाम सरकार (दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) [ राम क ु मार गिजरोया बनाम सरकार (एनसीटी ऑफ दिल्ली), डब्ल्यूपी (सी) सं।"ख्या 382 ऑफ 2009, आदेश दिनांक 24.11.2010 (डीईएल)] एतदद्वारा बहाल किया जाता है।"
37. यह निर्णय बाद में कर्ण सिंह यादव बनाम दिल्ली सरकार व अन्य (एसएलपी (सी) संख्या 14948/2016)में इस न्यायालय की दो मुख्य न्यायाधीशों की पीठ क े समक्ष विचार क े लिए आया और न्यायालय को क ु छ आपत्तियां हैं और उसने 24 जनवरी, 2020 क े आदेश द्वारा मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ क े समक्ष पेश करने क े लिए निर्दिष्ट किया और इस न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने राम क ु मार गिजरोया (पूर्वोक्त )पर भरोसा करते हुए 28 सितंबर, 2022 क े अपने आदेश क े तहत अपील का निस्तारण कर दिया, ऐसा प्रतीत होता है कि इस न्यायालय क े दो न्यायाधीशों द्वारा किए गए संदर्भ पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जैसा भी हो, आज की स्थिति यह है कि इस न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अपने आदेश दिनांक 28 सितंबर, 2022 क े तहत इस न्यायालय की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ द्वारा राम क ु मार गिजरोया (पूर्वोक्त )में व्यक्त किए गए दृष्टिकोण की पुष्टि की है।
38. इसक े अलावा, नियमावली, 2010 क े प्रावधान को ध्यान में रखते हुए, जो निर्विवाद रूप से इस विषय पर मौन है और 22 जुलाई, 2021 क े विज्ञापन में कहीं भी यह संक े त नहीं मिलता है कि वर्तमान मामले में आवेदन की अंतिम तारीख (31 अगस्त,
2021) से पहले की अवधि का जाति प्रमाण पत्र/श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना है। इसक े विपरीत, विज्ञापन क े खंड 6(i) और (iii) सपठित खंड 22(3), श्रेणी का ऐसा प्रमाणपत्र जो किसी ने आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया हो, भर्ती प्राधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
39. दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों में, जब नियम मौन हैं और ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि श्रेणी का प्रमाण पत्र विज्ञापन क े तहत आवेदन की अंतिम तिथि को या उससे पहले प्रस्तुत किया जाना है और प्रत्येक आवेदक ने उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित होने पर भर्ती प्राधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है, जिन्हें 4 अगस्त, 2022 को अनंतिम रूप से साक्षात्कार क े लिए बुलाया गया था, प्रत्येक आवेदक ने निर्विवाद रूप से उस श्रेणी का अपना प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है, जिसक े वे विज्ञापन क े समय से संबंधित थे और जिन्होंने चयन की प्रक्रिया में भाग लिया था। इस स्तर पर, हमारे विचार में, उच्च न्यायालय गलत दिशा में चला गया और आवेदन की अंतिम तिथि पर देखी जाने वाली पात्रता की शर्त से प्रभावित था, उस श्रेणी क े उत्पत्ति की जांच करते समय जिसमें उम्मीदवार संबंधित था और चयन प्रक्रिया में भाग लिया है, किसी भी तरह से पात्रता की शर्तों से सहसंबद्ध नहीं है और अपीलकर्ताओं क े दावे पर भरोसा न करने वाले निर्णयों का मौजूदा मामले क े तथ्यों में कोई उपयोग नहीं है।
40. गतिशीलता को समझने क े लिए, सरकार पहले 9 सितंबर, 2015 क े परिपत्र क े साथ 08 अक्टूबर, 2019 क े साथ सामने आई है, जिसका संदर्भ दिया गया है, लेकिन यह हमेशा चयन की प्रक्रिया क े अनुरूप होना चाहिए जब विज्ञापन भर्ती अधिकारियों द्वारा खुले चयन क े लिए प्रकाशित किया गया है और भर्ती प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित प्रत्येक विज्ञापन में, आवेदन की अंतिम तिथि भिन्न होने क े लिए बाध्य है और यह उस प्रमाण पत्र की पूरी गतिशीलता को बदल सकती है जो आवेदक क े पास है और वह नहीं माना जाता है प्रत्येक विज्ञापन क े अनुरूप श्रेणी का प्रमाण पत्र प्राप्त करना और यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो रहा है और ऐसा प्रतीत होता है क्योंकि ऐसी कोई योजना या निर्देश नहीं था जो आवेदक को किस प्रक्रिया का पालन करना है, उसे विनियमित और सुव्यवस्थित कर सक े । विभिन्न श्रेणियों क े लिए आरक्षण का लाभ उठाने क े इच्छ ु क चयन प्रक्रिया में भाग लेने और चल रही मुकदमेबाजी को दूर करने क े लिए, राज्य सरकार ने 17 अक्टूबर, 2022 क े अपने निर्देशों क े तहत कदम उठाया और स्पष्ट किया कि यदि आवेदक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहा है आवेदन की अंतिम तिथि पर या आवेदन की अंतिम तिथि क े बाद की तारीख को प्रस्तुत करने पर, उसे एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा कि यदि यह गलत पाया जाता है, तो ऐसी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी। हमारे विचार से, यह सरकार द्वारा वर्तमान अत्यावश्यकता को पूरा करने क े लिए देखी गई एक तदर्थ स्थिति हो सकती है, लेकिन भर्ती प्राधिकरण या सरकार, जैसा भी मामला हो, को इस मुद्दे की समग्रता से जांच करनी होगी और उन शिकायतों पर विचार करना होगा जो न्यायालय द्वारा विभिन्न चरणों में उठाई जा रही हैं और विचार किया जा रहा है और व्यापक प्रसार क े साथ स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने होंगे, जिनका उम्मीदवारों को पालन करना होगा जो मुकदमेबाजी से बचने/दूर करने क े लिए आरक्षण का लाभ उठाना चाहते हैं।
41. आगे मूल्यांकन करने क े लिए, जैसा कि इस न्यायालय द्वारा देखा गया, 120 चयनित उम्मीदवारों की अंतिम योग्यता सूची उत्तरदाताओं द्वारा अधिसूचित की गई थी जैसा कि 30 अगस्त, 2022 क े नोटिस में दर्शाया गया है और नियमावली, 2010 योजना क े अंतर्गत कोई प्रतीक्षा सूची/आरक्षित सूची होने का कोई प्रावधान नहीं है। इस प्रकार, 120 उम्मीदवारों की अंतिम चयन सूची समाप्त होने क े बाद या उम्मीदवारों क े शामिल न होने या किसी अन्य कारण से आगे कोई नियुक्ति नहीं की जा सकी।
42. इस न्यायालय को सूचित किया जाता है कि नियुक्ति क े लिए अनुशंसित 120 उम्मीदवारों में से 119 उम्मीदवारों को 09 मार्च, 2023 को नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे और पांच उम्मीदवारों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है और एमबीसी (एनसीएल) श्रेणी क े अलावा, पांच रिक्तियां आरक्षित थी और क े वल दो उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया है और तीन रिक्तियों को खुली श्रेणी से भरा गया है। तथ्य की स्थिति क े समग्र विस्तार को देखते हुए कि उम्मीदवार जो योग्यता क े क्रम में वर्तमान अपीलकर्ताओं की तुलना में कम हो सकते हैं, शामिल हो गए हैं और प्रशिक्षण क े लिए भेजे गए हैं, लेकिन उनकी कभी गलती नहीं थी, साथ ही, वर्तमान अपीलकर्ताओं को भी शामिल होने की आवश्यकता है अंतिम रूप से चयनित होने क े बाद नियुक्ति क े लिए विचार किया जा रहा है और निर्विवाद रूप से उनकी संबंधित श्रेणी में कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और इस तथ्य को उत्तरदाताओं द्वारा भी विवादित नहीं किया गया है, क ु छ आवेदकों को उपलब्ध विज्ञापित रिक्तियों क े विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है और संविधान क े अनुच्छेद 142 क े तहत हमारी शक्ति का प्रयोग करते हुए, विशेष तथ्यों और परिस्थितियों में, भर्ती प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किए गए उम्मीदवारों क े अधिकारों को परेशान या छीने बिना समायोजित किया जा सकता है। पक्षकारों क े साथ पूर्ण न्याय करने क े लिए, नियमावली, 2010 की योजना क े तहत उनकी उपयुक्तता क े अधीन भविष्य की रिक्तियों क े खिलाफ सिविल जज की विज्ञापित रिक्तियों क े खिलाफ समायोजित नहीं किए जा सकने वाले प्रत्येक अपीलकर्ता पर नियुक्ति क े लिए विचार करने क े लिए प्रतिवादियों को निर्देश देना उचित हो सकता है।
43. अपीलें सफल होती है और तदनुसार स्वीकार की जाती है। उच्च न्यायालय क े आक्षेपित निर्णय को इसक े एतदद्वारा रद्द और निरस्त किया जाता है और प्रतिवादी को 22 जुलाई, 2021 क े विज्ञापन क े अनुसरण में आयोजित चयन प्रक्रिया में उनकी भागीदारी पर सिविल न्यायाधीश क े पद पर वरिष्ठता सहित पारिणामिक लाभों क े साथ नियुक्ति क े लिए प्रत्येक अपीलकर्ता की उम्मीदवारी पर विचार करने का निर्देश दिया जाता है। आदेश दो महीने क े भीतर उनकी उपयुक्तता क े अध्यधीन पारित किया जा सकता है। कोई हर्जा खर्चा नहीं ।
44. लंबित आवेदन, यदि कोई हो, निस्तारित समझे जाएंगे। न्यायाधीश (अजय रस्तोगी ) नई दिल्ली 18 मई, 2023 रिपोर्टेबल सिविल याचिका संख्या.............../2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 16428/2022) बनाम क े साथ सिविल याचिका संख्या............./2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 18296-18299/2022) प्रियंका वगैरह...अपीलार्थी (गण) बनाम रजिस्ट्रार परीक्षा वगैरह....प्रतिवादी (गण) क े साथ सिविल याचिका संख्या............/2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 21644/2022) क ु लदीप भाटिया....अपीलार्थी (गण) बनाम रजिस्ट्रार परीक्षा, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर...प्रतिवादी (गण) क े साथ सिविल याचिका संख्या................/2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 19179/2022) सुनील सिंह गुर्जर....अपीलार्थी (गण) बनाम रजिस्ट्रार परीक्षा, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर... प्रतिवादी (गण) क े साथ (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 9544/2023) पारुल जैन... अपीलार्थी (गण) बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय व अन्य....प्रतिवादी (गण) क े साथ सिविल याचिका संख्या................./2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) संख्या 5654/2023) ज्योति बेनीवाल...अपीलार्थी (गण) बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय व अन्य....प्रतिवादी (गण) निर्णय बेला एम. त्रिवेदी, न्यायाधीश
1. मुझे अपने आदरणीय भाई न्यायाधीश अजय रस्तोगी द्वारा व्यक्त की गई राय को पढ़ने का अवसर मिला है, हालांकि मैं उक्त राय में व्यक्त किए गए विचारों से सहमत होने में अपनी असमर्थता व्यक्त करती हूं और अपनी राय निम्नानुसार व्यक्त करती हूंः-
2. अनुमति दी गई।
3. इन सभी अपीलों में शामिल तथ्यों और कानूनी मुद्दों की प्रासंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए समान न्यायनिर्णयन किया जा रहा है।सभी अपीलों में अपीलकर्ताओं ने राजस्थान क े उच्च न्यायालय द्वारा पारित आक्षेपित आदेशों को चुनौती दी है, जिसमें उच्च न्यायालय ने उनक े द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय क े समक्ष रिट याचिकाओं में, प्रत्यर्थी-उच्च न्यायालय द्वारा 04.08.2022 को अधिसूचना जारी करने की कार्यवाही को प्राथमिक चुनौती दी गई थी, जिसमें उम्मीदवारों से, जिन्होंने सिविल न्यायाधीशों क े पद क े लिए मुख्य परीक्षा में सफलतापूर्वक अर्हता प्राप्त कर ली थी, आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 से एक वर्ष पूर्व की अवधि क े भीतर जारी अन्य पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग-नॉन क्रीमी लेयर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आदि श्रेणियों से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई थी उक्त तिथि क े पश्चात नहीं। अपीलकर्ताओं ने संबंधित आरक्षित श्रेणी में अपनी स्थिति दिखाने वाले प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, जो कि उक्त दिनांक 31.08.2021 क े बाद जारी किए गए थे, उन्हे प्रतिवादी उच्च न्यायालय द्वारा उक्त पद क े लिए योग्य नहीं पाया गया था। तथ्यात्मक स्थिति
4. अपील क े वर्तमान बैच क े अभिलेख से उत्पन्न वाले संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि प्रतिवादी-उच्च न्यायालय ने 22.07.2021 को एक विज्ञापन जारी किया जिसमें राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 (इसक े बाद नियम, 2010 क े रूप में संदर्भित) क े अनुसार वर्ष 2021 में रिक्तियों क े लिए सिविल न्यायाधीशों की भर्ती क े लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। संबंधित मुद्दों की बेहतर समझ क े लिए उक्त विज्ञापन क े प्रासंगिक भाग को यहां प्रस्तुत किया गया हैः राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर विज्ञापन संख्याः- राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर / परीक्षा प्रकोष्ठ / आर.जे.एस / सिविल जज क ै डर / 2021 / 780 दिनांक 22.07.2021 सिविल जज संवर्ग में सीधी भर्ती हेतु प्रतियोगी परीक्षा, 2021
1. राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 (यथा संशोधित) क े अंतर्गत ग्रेड पे 27700-770-33090-920-40450-1080- 44770 में सिविल न्यायाधीश संवर्ग में परिवीक्षा पर सिविल न्यायाधीश और न्यायिक मजिस्ट्रेट क े क ु ल 120 रिक्त पदों (वर्ष 2020 क े 89 पद और वर्ष 2021 क े 31 पद) पर सीधी भर्ती क े लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। 2 से 3...
4. रिक्त पदों की संख्या और आरक्षण क ु ल रिक्तियों की संख्या वर्ष सामान्य आरक्षित बेंचमार्क विकलांग व्यक्ति एससी एसटी ओबीसी ईडबल्यूएस एमबीसी 89 2020 से दिसम्बर 2020 तक 35 पदों में से 10 पद महिलाओं क े लिए, 10 पदों में से 2 पद विधवाओं क े लिए आरक्षित से 04 पद महिलाओं क े लिए, 4 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए 10 पदों मे से 3 पद महिलाओं क े लिए 18 पदों मे 5 पद महिलाओं क े लिए, 5 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए 8 पदों मे से 02 पद महिलाओं क े लिए 04 पदों मे से 01 पद महिला क े लिए 89 रिक्तियों मे से 04 पद बेंचमार्क े लिए 31 2021 से दिसम्बर 2021 तक से 4 पद महिलाओं क े लिए, 4 पदों मे से 1 पद विधवा क े लिए आरक्षित 4 पदों मे से 1 पद महिला क े लिए 03 06 पदों मे से 1 पद महिला क े लिए 03 01 31 रिक्तियों मे से 01 पद बेंचमार्क े लिए * बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों क े लिए आरक्षित 05 पदों में से 01 (एक) पद दृष्टिहीनता और कम दृष्टि क े लिए आरक्षित है, 01 (एक) पद बहरे और सुनने में कठिनाई क े लिए, 01 (एक) मस्तिष्क पक्षाघात, क ु ष्ठ रोग उपचारित, बौनापन, तेजाब से हमले क े शिकार और मांसपेशी अपविकास सहित लोकोमोटर विकलांगता क े लिए और 02 (दो) स्वलीनता, बौद्धिक अक्षमता, विशिष्ट सीखने की अक्षमता और मानसिक बीमारी और बहु अक्षमताओं क े लिए व्यक्तियों क े बीच खंड (ए) से (डी) क े तहत प्रत्येक विकलांगता क े लिए पहचाने गए पदों में बधिर अंधापन शामिल है। नोट -उपरोक्त रिक्त पदों की संख्या को नियमों क े अनुसार कमी या बढ़ोतरी की जा सकती है, जिसक े लिए कोई पुनः विज्ञापन या शुद्धिपत्र प्रकाशित नहीं किया जाएगा।
5. विभिन्न वर्गों क े आरक्षण क े संदर्भ में - (i.)महिलाओं (विधवा एवं विच्छिन्न-विवाह महिला सहित) हेतु आरक्षित पदों का आरक्षण प्रवर्गवार रिक्त पदों क े विरूद्ध क्षैतिज रूप से होगा अर्थात् जिस प्रवर्ग (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग/आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग/सामान्य वर्ग) की महिला आवेदक चयनित होगी उसे सम्बन्धित प्रवर्ग, जिसकी वह आवेदक है, में समायोजित किया जायेगा । (ii.)दिव्यागजन हेतु आरक्षित पदों का आरक्षण क ु ल रिक्त पदों क े विरुद्ध क्षैतिज रूप से होगा अर्थात् जिस प्रवर्ग (अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछडा वर्ग / अति पिछडा वर्ग / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग / सामान्य वर्ग) का दिव्यांग आवेदक चयनित होगा, उसे संबंधित प्रवर्ग जिसका वह आवेदक है, में समायोजित किया जायेगा। (iii.)राजस्थान की अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अति पिछड़ा वर्ग / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग / महिलाओं (विधवा एवं विच्छिन्न विवाह महिला सहित) / दिव्यांगजन क े लिए आरक्षित पदों हेतु पात्र एवं उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर इन पदों को राजस्थान न्यायिक सेवा नियम 2010 (यथासंशोधित) में विह्नित प्रक्रिया एवं रीति से भरा जायेगा। (iv.) सामान्य वर्ग क े पदों क े विरूद्ध चयन हेतु आरक्षित वर्ग क े अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग क े अभ्यर्थी क े रूप में पात्र होना आवश्यक होगा । नोट: - राजस्थान राज्य क े अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग की क्रीमीलेयर श्रेणी क े आवेदक तथा राजस्थान राज्य से भिन्न राज्यों की अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्गो ( क्रीमीलेयर एवं नॉन क्रीमीलेयर)/अति पिछड़ा वर्गों (क्रीमीलेयर एवं नॉन क्रीमीलेयर) / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग क े आवेदक सामान्य वर्ग क े अन्तर्गत आते हैं
6. विभिन्न श्रेणियों क े प्रमाण - पत्रों क े सन्दर्भ में - (i.)विभिन्न वर्गो क े प्रमाण-पत्र क े सन्दर्भ में - अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछडा वर्ग में आरक्षण हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित प्रारूप में नियमानुसार जारी किया गया जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा । (ii.)दिव्यांगजन की श्रेणी में आने वाले आवेदकों को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा मांगे जाने पर अपनी निःशक्तता क े संबंध में समुचित सरकार द्वारा प्राधिक ृ त प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा विहित प्रारूप में जारी निःशक्तता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा । इस संबंध में प्रवृत्त सुसंगत नियमों क े अनुसार निःशक्तता प्रमाण-पत्र धारक आवेदक ही दिव्यांगजन हेतु आरक्षित पदों क े विरुद्ध चयन एवं नियुक्ति क े लिए पात्र माना जायेगा । (iii.) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग क े अभ्यर्थी की दशा में सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित प्रारूप में नियमानुसार जारी किया गया प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। (iv.)अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की विवाहित महिला अभ्यर्थी को आरक्षित प्रवर्ग का लाभ प्राप्त करने हेतु अपने पिता क े नाम व निवास स्थान क े आधार पर विहित प्रारूप में नियमानुसार जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा । पति क े नाम व निवास स्थान क े आधार पर जारी जाति प्रमाण-पत्र मान्य नहीं होगा । (v.)अन्य पिछडा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग की विवाहित महिला अभ्यर्थी को आरक्षित प्रवर्ग का लाभ प्राप्त करने हेतु अपने पिता क े नाम निवास स्थान एवं आय क े आधार पर विहित प्रारूप में नियमानुसार जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा । पति क े नाम निवास स्थान एवं आय क े आधार पर जारी जाति प्रमाण-पत्र मान्य नहीं होगा। (vi.)विधवा महिला अभ्यर्थी क े मामले में उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी अपने पति की मृत्यु का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा तथा विच्छिन्न विवाह महिला अभ्यर्थी क े मामले में उसे विवाह विच्छेद का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। 7 से 9.…
10. आयु:- आवेदक 1 जनवरी, 2022 को 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो किन्तु 40 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर चुका होना चाहिए, लेकिन (1). राजस्थान क े अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अति पिछड़ा वर्ग / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं महिला आवेदकों क े मामले में ऊपरी आयु सीमा को 5 वर्ष तक शिथिल किया जायेगा । 11 से 16....
17. आवेदन करने की समय सीमाः - क्र.स. विवरण दिनांक
1. ऑनलाइन आवेदन करने की समय सीमा 30.07.2021 (शुक्रवार) 1.00 पीएम से 31.08.2021 (मंगलवार) 5.00 पीएम तक
18. आवेदन करने क े लिए महत्वपूर्ण निर्देश:-
1. कोई भी आवेदक जिस श्रेणी क े अन्तर्गत आवेदन करने का पात्र है, यह उसी श्रेणी में ही आवेदन करे। आवेदन पत्र में भरी गयी श्रेणी आवेदक की प्रार्थना पर किसी भी परिस्थिति में परिवर्तित नहीं की जायेगी।
2. आवेदक ऑनलाईन आवेदन करने क े पूर्व यह सुनिश्चित कर ले कि वह विज्ञापन में अंकित शर्तों व सुसंगत नियमों क े अन्तर्गत पात्रता की समस्त शर्तें पूरी करता है तथा ऑनलाईन आवेदन-पत्र में आवश्यक समस्त सूचनाएं सम्बन्धित कॉलम में सही एवं पूर्ण रूप से भरी गई है। ऑनलाईन आवेदन-पत्र में भरी गई सूचना को सही मानते हुए परीक्षा में अनन्तिम रूप से प्रवेश दिया जायेगा। अतः ऑनलाईन आवेदन-पत्र में भरी गयी सूचनाओं क े लिए आवेदक स्वय उत्तरदायी होगा।
3. ऑनलाईन आवेदन की अन्तिम दिनांक तक भरे जाने वाले आवेदन ही स्वीकार किये जाएंगे । समस्त प्रविष्टिया पूर्ण एवं सही नहीं होने की स्थिति में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा आवेदन अस्वीक ृ त कर दिया जाएगा ।
4. एक बार अन्तिम रूप से ऑनलाईन आवेदन में प्रविष्ट की गयी प्रविष्टियों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सक े गा और ना ही इस सम्बन्ध में कोई प्रार्थना पत्र विचारार्थ ग्रहण किया जाएगा । 19 से 21...........…
22. अन्य महत्वपूर्ण निर्देश:- 1.... 2...
3. अभ्यर्थियों को सभी संबंधित मूल दस्तावेज/प्रमाण-पत्र, जिनक े आधार पर वे किसी भी प्रकार का दावा करते हैं, राजस्थान उच्च न्यायालय अथवा संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा मांगे जाने पर प्रस्तुत करने अनिवार्य होंगे। 4 से 8..…
9. ऐसे आवेदक, जिनक े द्वारा अन्तिम दिनांक तक ऑनलाईन आवेदन कर सफलतापूर्वक परीक्षा शुल्क जमा करा दिया गया है, उनको ही राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा अनन्तिम रूप से परीक्षा में बैठने दिया जायेगा। किसी आवेदक को परीक्षा में बैठने क े लिए क े वल मात्र प्रवेश-पत्र जारी कर दिये जाने का यह अभिप्राय नहीं होगा कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा उसकी अभ्यर्थिता अन्तिम रूप से सही मान ली गई है अथवा आच्च न्यायालय द्वारा आवेदक की मूल प्रलेखों से व नियमानुसार पात्रता की जांच करते समवेदक द्वारा आवेदन-पत्र में की गयी प्रविष्टियां सही और सत्य मान ली गई है। राजस्थान उय यदि आयु, शैक्षणिक योग्यता तथा अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अति पिछड़ा वर्ग / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग / दिव्यांगजन / महिला / विधवा / परित्यक्ता (तलाकशुदा) आदि क े रूप में पात्रता की अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करने क े आधार पर उसकी अपात्रता का पता चलता है तो इस परीक्षा हेतु उसकी अभ्यर्थिता किसी भी स्तर पर रद्द की जा सकती है, जिसका उत्तरदायित्व स्वयं आवेदक का होगा ।”
5. सभी अपीलकर्ता जो ओबीसी/एमबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस क े सदस्य होने का दावा करते हैं, प्रतिवादी द्वारा आयोजित मुख्य परीक्षाओं में उपस्थित हुए और सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। दिनांक 04.08.2022 का नोटिस क े माध्यम से, उन्हें साक्षात्कार क े लिए अस्थायी रूप से योग्य होने क े कारण प्रतिवादी द्वारा 20.08.2022 से 27.08.2022 क े बीच साक्षात्कार क े लिए आमंत्रित किया गया था। उक्त नोटिस में यह निर्देशित किया गया था कि उम्मीदवारों को साक्षात्कार क े समय सभी मूल दस्तावेजों की सत्यापित/प्रमाणित फोटोकॉपी क े साथ लाना होगा। उक्त नोटिस में निहित सटीक निर्देशों को निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत किया गया है: "उम्मीदवारों क े लिए आवश्यक है कि वे साक्षात्कार क े लिए उपर्युक्त तिथि और नियत समय पर अपने मूल दस्तावेजों/प्रमाणपत्रों क े साथ राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी जोधपुर, झालामंड सर्किल, ओल्ड पाल रोड, जोधपुर (राजस्थान) में रजिस्ट्रार (परीक्षा) क े अस्थायी कार्यालय में उपस्थितहो। उम्मीदवारों को प्रत्येक दस्तावेज की दो सत्यापित/प्रमाणित फोटो प्रतियों क े साथ निम्नलिखित सभी मूल दस्तावेज लाने का निर्देश दिया जाता हैःi.. ii. iii. श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्र:- (क) ओबीसी/एमबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र जो आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 से एक वर्ष से पूर्व का जारी नहीं किया गया हो। (ख) यदि ओबीसी/एमबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र 31.08.2018 और 30.08.2020 क े बीच जारी किया गया है, तो जाति प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। (ग) ईडब्ल्यूएस श्रेणी क े मामले में-ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आरक्षण की मांग करने क े लिए आवश्यक आय और संपत्ति प्रमाण पत्र 01.04.2021 से पहले जारी नहीं किया गया हो। यदि 01.04.2019 और 31.03.2021 क े बीच आय और परिसंपत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, तो प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। (घ) एससी/एसटी/ओबीसी/एमबीसी/ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, जैसा भी मामला हो, आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 क े बाद जारी नहीं किया गया नहीं हो।”
6. अपीलकर्ता ज्योति बेनीवाल (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या- 5654/2023), जिन्होंने सिविल जज क े उक्त पद क े लिए ओबीसी-एनसीएल श्रेणी क े तहत आवेदन किया था, ने अन्य बातों क े साथ साथ साथ-साथ दिनांक 04.08.2022 क े कथित नोटिस में अधिरोपित की गई शर्तों को चुनौती देते हुए रिट याचिका संख्या 11784/2022 दायर की थी, जिसमें उम्मीदवारों से 31.08.2018 से 31.08.2021 क े बीच जारी ओबीसी-एनसीएल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की मांग की गई थी और घोषणा की गई थी कि 31.08.2021 क े बाद जारी किए गए प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने दिनांक 18.08.2022 क े निर्णय और आदेश क े माध्यम से उक्त याचिका को खारिज कर दिया, जो इस न्यायालय क े समक्ष आक्षेपित है।
7. अपीलकर्ता क ु लदीप भाटिया (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 21644/ 2022) ने भी उच्च न्यायालय क े समक्ष रिट याचिका संख्या 12022/2022 दिनांक 04.08.2022 क े उक्त नोटिस को चुनौती देते हुए दायर की थी, जिसमें आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि से एक वर्ष पहले की अवधि का ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता निर्धारित की गई है।उक्त याचिका भी उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 06.09.2022 क े आदेश द्वारा खारिज कर दी गई थी, जो अपीलों क े इस वर्ग में हमारे समक्ष भी आक्षेपित है। अन्य अपीलकर्ताओं-रिट याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर इसी तरह की रिट याचिकाओं को उच्च न्यायालय ने ज्योति बेनीवाल और क ु लदीप भाटिया क े मामले में फ ै सलों पर भरोसा करते हुए अलग-अलग आदेश पारित करक े खारिज कर दिया।
8. बेहतर समझ और सुविधा क े लिए, प्रत्येक अपीलकर्ता क े मामले में तथ्यों को दर्शाने वाला एक तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है: (I)ओबीसी-एनसीएल श्रेणी-विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 5654/2023, विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 16428/2022, विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 18296-18299/2022 क्र.सं. नाम अंक सामान्य श्रेणी की कट ऑफ कट ऑफ अंक ओबीसी- एनसीएल- याचिका कर्ता क े ओबीसी- एनसीएल प्रमाण पत्र उत्तरदाताओं क े अनुसार आवश्यक ओबीसी- एनसीएल तिथि
1. ज्योति बेनीवाल 176 179.[5] 163.[5] 22.06.2016 और 25.07.2022 31.08.2018 से
2. साक्षी आरहा 166.[5] 179.[5] 163.[5] 22.07.2016,17.06.2022 और 12.08.2022 उपरोक्त
3. प्रियंका 170 179.[5] 163.[5] 23.04.2018 और 20.06.2022 उपरोक्त
4. भव्य क ू ल्हर 165.[5] 179.[5] 163.[5] 19.09.2016 और उपरोक्त
5. नेहा बतार 165 179.[5] 163.[5] 28.06.2018 और 21.06.2022 उपरोक्त
6. निखिल कटारिया 171.[5] 179.[5] 163.[5] 16.07.2018 और 09.06.2022 उपरोक्त (ii) एमबीसी-एनसीएल श्रेणी- सुनील गुर्जर विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या-19179/22 और क ु लदीप भाटिया विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या- 21644/22 नाम सामान्य श्रेणी कट ऑफ अंक एमबीसी- एनसीएल एमबीसी- एनसीएल क े दिनांक े अनुसार एमबीसी- एनसीएल प्रमाण पत्र की तारीख
1. सुनील सिंह गुर्जर 172 179.[5] 141 18.06.2018 और 31.08.2018 से
2. क ु लदीप भाटिया 141.[5] 179.[5] 141 03.08.2012 और 09.03.2022 उपरोक्त (iii) ईडबल्यूएस श्रेणी- पारुल जैन विशेष अनुमति याचिका (सिविल) डायरी संख्या 1581/2023 नाम सामान्य श्रेणी कट ऑफ अंक ईडबल्यूएस े दिनांक े अनुसार ईडबल्यूएस तारीख
1. पारुल जैन 174.[5] 179.[5] 167.[5] 07.09.2021 31.08.2021 (1.4.2021- 31.03.2022 वैध एवाई 2021-22)
9. यह उल्लेख करना उचित है कि दिनांक 22.07.2021 क े विज्ञापन में उल्लिखित महत्वपूर्ण निर्देशों क े साथ पठित खंड-6 क े अनुसार, विभिन्न आरक्षित श्रेणियों क े उम्मीदवारों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कानूनी रूप से वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना था। उल्लेखनीय है कि सामाजिक न्यायाधीश और अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने क े लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश और निर्देश जारी करता रहता है। संबंधित समय में प्रचलित परिपत्र दिनांक 09.09.2015 और 08.08.2019 क े परिपत्र थे। जाति प्रमाण पत्र जारी करने क े संबंध में दिनांक 09.09.2015 क े परिपत्र का प्रासंगिक पैराग्राफ 4 इस प्रकार हैः "4. जाति प्रमाण पत्र की वैधता अवधिः -
1. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति क े लिए जारी जाति प्रमाण पत्रों की वैधता आजीवन होगी जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग क े लिए प्रमाण पत्र क े वल एक बार जारी किया जाएगा, लेकिन यह तथ्य कि वह व्यक्ति जो क्रीमी लेयर में नहीं है, को तीन वर्ष तक क े वैध शपथ पत्र क े आधार पर मान्यता दी जाएगी।
2. नॉन -क्रीमी लेयर का प्रमाण पत्र एक वर्ष क े लिए वैध होगा। एक बार नॉन क्रीमी लेयर का प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाने पर यदि आवेदक अगले वर्ष भी क्रीमी लेयर में नहीं रहता है तो ऐसी स्थिति में उससे एक शपथ पत्र (परिशिष्ट-डी) प्राप्त किया जायेगा, जिसमें पूर्व में जारी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र को वैध माना जाएगा, यह अधिकतम तीन साल की अवधि क े लिए किया जा सकता है। ”
10. दिनांक 09.09.2015 क े परिपत्र में निहित उक्त निर्देश को स्पष्ट करने वाले दिनांक 08.08.2019 क े परिपत्र का संबंधित भाग निम्नानुसार है: "राजस्थान सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग संख्या एफ-11/एस.सी.एस.टी.ओबीसी/एस.बी.सी दिनांक: 08.08.2019 इसलिए, इस संबंध में एक बार फिर स्पष्ट किया जाता है कि अन्य पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र एक वर्ष क े लिए मान्य होगा, हालांकि, ऐसी स्थिति में जहां आवेदक को क्रीमी लेयर श्रेणी में नहीं आने क े लिए एक प्रमाण पत्र जारी किया गया है और यदि ऐसा आवेदक बाद क े वर्ष में भी क्रीमी लेयर क े भीतर नहीं आता है, तो उस स्थिति में, पहले से जारी गैर-क्रीमी लेयर क े भीतर आने का प्रमाण पत्र आवेदक से एक सत्यापित शपथ पत्र प्राप्त करने क े बाद मान्य माना जाएगा, जो अधिकतम तीन वर्ष की अवधि क े लिए किया जा सकता है।”
11. उपरोक्त परिपत्रों का सार यह था कि किसी व्यक्ति को जारी किया गया ओबीसी- एनसीएल का प्रमाण पत्र एक वर्ष क े लिए वैध होगा, हालांकि बाद क े वर्ष में भी यदि वह "नॉन-क्रीमी लेयर"श्रेणी में बना रहता है, तो पहले जारी किए गए प्रमाण पत्र को ऐसे व्यक्ति से प्रमाणित शपथ पत्र प्राप्त करने क े बाद वैध माना जाएगा, और ऐसी प्रक्रिया अधिकतम तीन वर्षों क े लिए अपनाई जा सकती है। तर्क:-
12. अपीलार्थियों की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं ने निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए है:- (i) अपीलकर्ताओं ने फॉर्म क े साथ-साथ सार रूप में सभी आवश्यकताओं का अनुपालन किया है, गलत तरीक े से सिविल न्यायाधीश क े पद क े लिए विचार नहीं किया गया है और उक्त पद क े लिए संबंधित श्रेणियों में कम मेधावी उम्मीदवारों का चयन किया गया है। (ii) दिनांक 22.07.2021 क े भर्ती विज्ञापन में या 2010 क े उक्त नियमों में आरक्षित श्रेणियों क े तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाणपत्रों की तिथि क े संबंध में किसी विनिर्देश क े अभाव में, दिनांक 14 04.08.2022 क े नोटिस में निहित अनुदेश क े तहत उम्मीदवारों को इसक े खंड 3 क े अनुसार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है जो भर्ती प्रक्रिया क े बीच में खेल क े नियमों को बदलने क े समान है, जो कानून की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है। (iii) प्रतिवादियों द्वारा दिनांक 04.08.2022 क े नोटिस में अपीलकर्ताओं क े चयन की संभावना को सीमित करने वाली शर्तें पूरी तरह से अनुचित और मनमानी थीं। (iv) आरक्षण का लाभ उठाने क े लिए, अपीलकर्ताओं को प्रासंगिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता थी, हालांकि आरक्षण क े लाभ का दावा करने क े उद्देश्य क े लिए प्रमाण पत्र की तारीख क े संबंध में किसी भी कठोर सिद्धांत का आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि क े साथ कोई संबंध नहीं था। (v) डॉली छंडा बनाम अध्यक्ष, जेईई व अन्य(2005)9 एससीसी 779 क े मामले में इस न्यायालय क े निर्णय भरोसा करते हुए, यह तर्क प्रस्तुत किया कि प्रमाणपत्रों/दस्तावेजों क े सबूत प्रस्तुत करने क े मामले में क ु छ छ ू ट दी जा सकती है और किसी कठोर सिद्धांत को लागू करना उचित नहीं होगा। प्रमाण प्रस्तुत करने से संबंधित नियम क े प्रत्येक उल्लंघन का परिणाम उम्मीदवारी की अस्वीक ृ ति क े रूप में हो आवश्यक नहीं है। (vi) राम क ु मार गिजरॉय बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड व अन्य(2016) 4 एससीसी 754 क े मामले मे भरोसा किया गया है यह तर्क देने क े लिए कि विज्ञापन में उल्लिखित अंतिम तिथि क े बाद प्रमाण पत्र जमा करना आरक्षित श्रेणी क े तहत उम्मीदवार क े चयन क े लिए मान्य था। अपीलार्थियों क े अनुसार, कर्ण सिंह यादव बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और अन्य (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) 14948/2016) 2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 1341 क े मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा उक्त विचार की पुष्टि की गई थी। (vii) अशोक क ु मार सोनकर बनाम भारत संघ व अन्य(2007) 4 एससीसी 54 क े निर्णय को अलग करते हुए, जिस पर प्रत्यर्थी द्वारा भरोसा किया गया, यह प्रस्तुत किया गया कि कथित निर्णय में अधिकथित अनुपात की वर्तमान अपीलों क े तथ्यों से कोई प्रासंगिकता नहीं है क्योंकि कथित मामला चयन क े समय उम्मीदवारों की योग्यता से संबंधित था, जबकि इस अपील में मुद्दा प्रमाण पत्र जारी करने की तारीख से संबंधित है जो क े वल प्रक्रियात्मक मामला है।
13. प्रतिवादी क े लिए विद्वान अधिवक्ता ने निम्नलिखित तर्क दिये:- (i) अपीलकर्ता दिनांक 22.07.2021 क े विज्ञापन और दिनांक 04.08.2022 क े नोटिस में उल्लिखित वैध प्रमाणपत्रों को पुन: प्रस्तुत करने में विफल रहे थे। (ii) राज्य सरकार ने दिनांक 09.09.2015 एवं 08.08.2019 क े परिपत्र जारी किये थे जिसमें स्पष्ट किया गया था कि अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र एक बार ही जारी किया जायेगा तथा नॉन क्रीमी लेयर का प्रमाण पत्र भी एक वर्ष क े लिये ही मान्य होगा। हालांकि, यदि आवेदक बाद क े वर्ष में "नॉन क्रीमी लेयर"की स्थिति को जारी रखता है, तो पिछले वर्ष में जारी किए गए प्रमाण पत्र को उम्मीदवार क े एक शपथ पत्र क े साथ वैध माना जाएगा। वर्तमान अपीलों में ओबीसी-एनसीएल से संबंधित होने का दावा करने वाले अपीलकर्ताओं ने ना तो अपेक्षित वैध प्रमाण पत्र और ना ही इस संबंध में शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। (iii) जैसा कि अशोक क ु मार सोनकर(पूर्वोक्त) में अभिनिर्धारित किया गया है, इस संबंध में विज्ञापन या नियमों में निर्दिष्ट किसी तारीख की अनुपस्थिति में में आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि कट-ऑफ तिथि मानी जानी चाहिए। (iv) राक े श क ु मार शर्मा बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) व अन्य (2013
11) एससीसी 58 पर भरोसा करते हुए यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तारीख को पात्रता मानदंड/शर्तों की जांच की जानी चाहिए। अपीलार्थियों ने आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि की कट ऑफ तिथि क े बाद अपेक्षित प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिए थे, प्रश्नगत पद पर उनक े चयन क े लिए उचित रूप से विचार नहीं किया गया था। (v) ओबीसी-एनसीएल और ईडब्ल्यूएस की श्रेणी क े तहत आरक्षण उम्मीदवारों की वर्तमान आर्थिक स्थिति क े आधार पर है, जबकि व्यक्ति की जाति स्थिति अर्थात, एससी, एसटी या ओबीसी क े उम्मीदवार की जाति की स्थिति उस व्यक्ति क े जन्म पर निर्भर करेगी जो कारक स्थिर रहता है। अत: अन्य पिछड़ा वर्ग-एनसीएल एवं ईडब्ल्यूएस श्रेणी की गतिशील स्थिति को देखते हुए सरकार ने दिनांक 08.08.2009 एवं 09.09.2015 को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित प्रमाण पत्र जारी करने हेतु परिपत्र जारी किया था, जिसक े अनुसार अपीलकर्ताओं को ऐसे सक्षम प्राधिकारियों द्वारा उक्त परिपत्रों क े अनुसार जारी किया गए वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने थे जिन्हें अपीलकर्ता वर्तमान मामलों में प्रस्तुत करने में विफल रहे थे। विश्लेषण और तर्क:-
14. शुरुआत में, यह ध्यान देने योग्य है कि एससी/एसटी/ओबीसी- एनसीएल/एमबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस जैसे आरक्षित श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को प्रमाण पत्र भारत क े संविधान में निहित प्रावधानों और इस न्यायालय द्वारा समय- समय पर निर्धारित दिशानिर्देशों/सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य सरकारों क े सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी किए जा रहे हैं। किसी व्यक्ति की स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति श्रेणी से संबंधित है या नहीं, और इस तरह की स्थिति अपरिवर्तित रहेगी और स्थिर रहेगी, हालांकि, किसी व्यक्ति की स्थिति चाहे वह ओबीसी-एनसीएल/एमबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस से संबंधित हो, यह उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा और इस तरह की स्थिति उसकी आय क े आधार पर बदलती रहेगी और इसलिए गतिशील होगी। कानून की यह बहुत अच्छी तरह से स्थापित स्थिति है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क े व्यक्तियों को एक अलग श्रेणी क े रूप में माना जाता था और माना जाता है, और "क्रीमी लेयर"का सिद्धांत उक्त श्रेणियों पर लागू नहीं होता है। यह क े वल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित व्यक्तियों पर लागू होता है। फलस्वरूप, ओबीसी-एनसीएल/एमबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि यह सुनिश्चित करने क े उद्देश्य से महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या किसी विशेष आरक्षित श्रेणी से संबंधित होने का दावा करने वाला उम्मीदवार वास्तव में इस श्रेणी क े तहत पद क े लिए आवेदन करने की तिथि को या विज्ञापन में निर्धारित तिथि को इस श्रेणी से संबंधित था ।
15. इस संबंध में, पक्षकारों क े लिए विद्वान अधिवक्ताओं द्वारा किए गए तर्कों पर ध्यान देने से पहले, हम आरक्षण क े संक्षिप्त इतिहास में झांकते हैं, विशेष रूप से "अन्य पिछड़े वर्गों"और "आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों"की श्रेणी क े लिए, जिसक े मैं संबन्धित हूँ।"अन्य पिछड़ा वर्ग"श्रेणी क े लिए आरक्षण क े मुद्दे पर सबसे ऐतिहासिक निर्णय इंदिरा साहनी व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य 1992 एसयूपीपी (3) 217 क े मामले में नौ- न्यायाधीशों की खंडपीठ का निर्णय है। जिसमें यह देखा गया कि पिछड़े वर्ग में पिछड़े वर्ग का एक तबका है जो समाज क े संपन्न तबक े से ताल्लुक रखता है और जीवन में आगे बढ़ने क े लिए किसी तरह क े आरक्षण क े योग्य नहीं है। बहुमत क े फ ै सले में न्यायाधीश बी.पी. जीवन रेड्डी द्वारा, "जीविका साधन की जांच"और "क्रीमी लेयर"शीर्षक क े तहत इस मुद्दे पर विचार किया गया कि "जीविका साधन की जांच'पिछड़े वर्ग क े व्यक्तियों को बाहर करने क े उद्देश्य से एक आय सीमा लागू करने का प्रतीक है, जिनकी आय उक्त सीमा से ऊपर है, (क्रीमी लेयर से संबंधित व्यक्तियों क े रूप में भी संदर्भित)। आगे यह राय व्यक्त की गई कि क्रीमी लेयर का अपवर्जन सामाजिक उन्नति क े आधार पर होना चाहिए न कि क े वल आर्थिक मानदंडों क े आधार पर।इसक े साथ ही व्यक्ति द्वारा धारित संपत्ति की सीमा तक आय को सामाजिक प्रगति क े एक उपाय क े रूप में लिया जा सकता है और उस आधार पर सभी दी गई जाति/समुदाय/व्यावसायिक समूह की क्रीमी लेयर को एक वास्तविक पिछड़े वर्ग में पहुंचने क े लिए बाहर रखा जा सकता है।यह आगे भी राय व्यक्त की गई कि राज्य क े लिए पिछड़े वर्गों को उनक े सापेक्ष सामाजिक पिछड़ेपन क े आधार पर पिछड़े और अधिक पिछड़े वर्गों में वर्गीक ृ त करना अस्वीकार्य नहीं है।बहुमत द्वारा निपटाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि अन्य बातों क े साथ-साथ (i) 'क्रीमी लेयर'को अपवर्जित किया जा सकता है और किया जाना चाहिए; (ii) वर्ग को पिछड़े वर्ग क े रूप में नामित करने क े लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति क े समान स्थित हो; (iii) नागरिकों क े पिछड़े वर्ग की पहचान क े वल और विशेष रूप से आर्थिक मानदंडों क े संदर्भ में नहीं की जा सकती है।निश्चित रूप से सरकार या अन्य प्राधिकरण क े लिए जाति क े संदर्भ क े बिना व्यवसाय-सह-आय क े आधार पर नागरिकों क े पिछड़े वर्ग की पहचान करने की अनुमति है, यदि ऐसा सलाह दी जाती है; (iv) नागरिकों क े पिछड़े वर्गों को पिछड़े या अधिक पिछड़े वर्गों में वर्गीक ृ त करने क े लिए कोई संवैधानिक रोक नहीं है; (v) भारत सरकार और राज्य सरकारों क े पास आयोग आदि की प्रक ृ ति में एक स्थायी तंत्र बनाने की शक्ति है और उन्हें ऐसा करना चाहिए।
16. एम. नागराज व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य (2006) 8 एससीसी 212 क े मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, संविधान पीठ ने "औपचारिक समानता"और "आनुपातिक समानता"की अवधारणाओं को लाभ और भारों क े वितरण क े आधार क े रूप में प्रतिपादित करते हुए, इंद्र साहनी (सुप्रा) क े मामले में विकसित "क्रीमी लेयर"की अवधारणा को संदर्भित किया, और निम्नलिखित रूप में राय दीः- "120. इस स्तर पर, एक पहलू का उल्लेख करने की आवश्यकता है।सामाजिक न्याय लाभ और भारों क े वितरण से संबंधित है। वितरण का आधार अधिकारों, आवश्यकताओं और साधनों क े बीच संघर्ष का क्षेत्र है। इन तीन मानदंडों को समानता की दो अवधारणाओं अर्थात औपचारिक समानता और आनुपातिक समानता क े अंतर्गत रखा जा सकता है।औपचारिक समानता का अर्थ है कि कानून सभी क े साथ समान व्यवहार करता है। समतावादी समानता की अवधारणा आनुपातिक समानता की अवधारणा है और यह उम्मीद करती है कि राज्य लोकतांत्रिक राजनीति क े ढांचे क े भीतर समाज क े वंचित वर्गों क े पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई करेंगे। इंदिरा साहनी [1992 सप. (3) एससीसी 217: 1992 एससीसी (एल एंड एस) सप. 1: (1992) 22 एटीसी 385] में पांडियन को छोड़कर सभी न्यायाधीशों ने कहा कि क्रीमी लेयर को आरक्षण क े लिए निर्धारित संरक्षित समूह से बाहर करने क े लिए "जीविका साधन परीक्षण"को अपनाया जाना चाहिए। इंदिरा साहनी [1992 सप (3) एससीसी 217:1992 एससीसी (एल एंड एस) सप 1: (1992) 22 एटीसी 385] में इस न्यायालय ने इसलिए, जाति को पिछड़ेपन क े निर्धारक क े रूप में स्वीकार किया और फिर भी इसने धर्मनिरपेक्षता क े सिद्धांत क े साथ एक संतुलन बनाया है जो कि क्रीमी लेयर की अवधारणा को लाकर संविधान की मूल विशेषता है..."
17. अशोक क ु मार ठाक ु र बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य (2008) 6 एससीसी 1 क े मामले में संविधान पीठ क े एक अन्य महत्वपूर्ण फ ै सले में,इंद्रा साहनी (उपरोक्त) में पेश किए गए "क्रीमी लेयर"क े सिद्धांत का जिक्र करते हुए, फिर से यह राय दी गई कि: "168. जैसा कि पहले देखा गया है, पिछड़े वर्ग का निर्धारण विशेष रूप से जाति पर आधारित नहीं हो सकता है। गरीबी, सामाजिक पिछड़ापन, आर्थिक पिछड़ापन, ये सभी पिछड़ेपन क े निर्धारण क े मापदंड हैं। इंद्रा साहनी [1992 सप (3) एससीसी 217: 1992 एससीसी (एल एंड एस) सप 1: (1992) 22 एटीसी 385] क े मामलें मे यह ध्यान दिया गया है कि पिछड़े वर्ग क े बीच, पिछड़े वर्ग का एक वर्ग समाज क े समृद्ध वर्ग का सदस्य है। वे जीवन में आगे की प्रगति क े लिए किसी प्रकार क े आरक्षण क े पात्र नहीं हैं। वे अन्य उम्मीदवारों क े साथ सामान्य सीटों क े लिए प्रतिस्पर्धा करने क े लिए सामाजिक और शैक्षिक रूप से काफी उन्नत हैं। 169.…
170. यह समझना है कि क्रीमी लेयर सिद्धान्त क े वल इस आधार पर किसी विशिष्ट जाति क े एक खंड को अपवर्जित करने क े लिए लागू किया गया है कि वे आर्थिक रूप से उन्नत या शैक्षिक रूप से आगे हैं। उन्हें बाहर रखा गया है क्योंकि जब तक जाति क े इस खंड को उस जाति समूह से बाहर नहीं किया जाता है, तब तक पिछड़े वर्ग की उचित पहचान नहीं हो सकती है। यदि क्रीमी लेयर क े सिद्धांत को लागू नहीं किया जाता है, तो यह आसानी से कहा जा सकता है कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में शामिल सभी जातियों को विशेष रूप से जाति क े आधार पर शामिल किया गया है। क े वल जाति क े आधार पर अनुच्छेद 15 (4), 15 (5) या 16 (4) क े प्रयोजन क े लिए एसईबीसी की पहचान इस न्यायालय क े विभिन्न निर्णयों द्वारा स्पष्ट रूप से निषिद्ध है और यह संविधान क े अनुच्छेद 15 (1) और अनुच्छेद 16 (1) क े खिलाफ भी है।इन शर्तों को पूरा करने और सही मायने में यह पता लगाने क े लिए कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग क्या है, "क्रीमी लेयर"का अपवर्जन आवश्यक है। 171-185..… यह आगे अभिनिर्धारित किया गया था:
186. इसक े अलावा, शुरू से ही, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को एक अलग श्रेणी क े रूप में माना जाता था और किसी ने कभी भी ऐसे वर्गों की पहचान पर विवाद नहीं किया। जबतक "क्रीमी लेयर"को समानता क े सिद्धांतों में से एक क े रूप में लागू नहीं किया जाता है, तब तक इसे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं किया जा सकता है।अब तक, यह क े वल सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने क े लिए लागू किया जाता है।हम यह स्पष्ट करते हैं कि आरक्षण क े उद्देश्य से क्रीमी लेयर क े सिद्धांत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होते हैं।”
18. जहां तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी का संबंध है, संसद ने 103 वें संशोधन द्वारा भारत क े संविधान क े अनुच्छेद 15 में खंड (6) और अनुच्छेद 16 में खंड (6) अंतःस्थापित किया गया था।उक्त संशोधन क े उद्देश्यों और कारणों क े विवरण में, यह कहा गया था कि नागरिकों क े आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण क े लाभ क े पात्र नहीं हैं और अनुच्छेद 46 क े अधिदेश को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने क े लिए कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और राज्य की सेवाओं में रोजगार में भागीदारी का उचित अवसर प्राप्त हो, भारत क े संविधान में संशोधन करने का निर्णय लिया गया था। उक्त 103 वें संशोधन की संवैधानिक वैधता को जनहित अभियान बनाम भारत संघ डबल्यू.पी.(सी) 55/2019 क े मामले में इस न्यायालय क े समक्ष चुनौती दी गई थी और दिनांक 07.11.2022 क े निर्णय द्वारा 3:2 द्वारा उक्त संशोधन की वैधता को बरकरार रखा गया था।
19. उपरोक्त निर्णयों को उद्धृत करने का कारण क े वल यह प्रदर्शित करना है कि श्रेणी एससी और एसटी क े तहत आरक्षण का दावा करने वाले उम्मीदवारों की स्थिति स्थिर होगी, जबकि ओबीसी-एनसीएल, एमबीसी-एनसीएल और ईडब्ल्यूएस श्रेणी क े तहत आरक्षण का दावा करने वाले उम्मीदवारों की स्थिति प्रवाही, गतिशील और स्थिर नहीं होगी। इन परिस्थितियों में, राज्य सरकारें किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और ओबीसी-एनसीएल/ईडब्ल्यूएस श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को प्रमाण पत्र जारी करने क े लिए अपनाई जाने वाली पद्धति या प्रक्रिया तय करने क े लिए पात्रता मानदंड निर्धारित करते हुए समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर रही हैं।
20. वर्तमान मामले में, राजस्थान राज्य ने जाति प्रमाण पत्र की वैधता अवधि क े संबंध में दिनांक 09.09.2015 का परिपत्र जारी किया था, जिसमें अन्य बातों क े साथ साथ साथ-साथ यह कहा गया था कि एससी/एसटी क े लिए जारी किए गए जाति प्रमाण पत्रों की वैधता आजीवन होगी, जबकि ओबीसी क े लिए क े वल एक बार ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, और नॉन-क्रीमी लेयर का प्रमाण पत्र एक वर्ष क े लिए मान्य होगा। हालांकि, एक बार नॉन-क्रीमी लेयर का प्रमाण पत्र जारी होने क े बाद और यदि आवेदक बाद क े वर्ष में भी गैर-क्रीमी लेयर की श्रेणी में बना रहता है, तो ऐसी स्थिति में उसक े द्वारा निर्धारित प्रपत्र में एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाएगा, जिसक े मामले में पहले जारी किया गया गैर-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र वैध माना जाएगा और ऐसी प्रक्रिया का अधिकतम तीन साल की अवधि क े लिए पालन किया जा सकता है। उक्त परिपत्र 09.09.2015 को आगे परिपत्र दिनांक 08.08.2019 द्वारा स्पष्ट किया गया था जिसमें यह कहा गया था कि अन्य पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र एक वर्ष क े लिए वैध होगा, हालांकि ऐसी स्थिति में जहां आवेदक को "क्रीमी लेयर में नहीं आने"का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, और यदि ऐसा आवेदक बाद क े वर्ष में भी "क्रीमी लेयर"क े अंतर्गत नहीं आता है, तो उस स्थिति में, पहले जारी किया गया प्रमाण पत्र "नॉन-क्रीमी लेयर"क े अंतर्गत आने वाले को उनक े द्वारा सत्यापित शपथ पत्र प्रस्तुत करने पर वैध माना जाएगा, जिसका पालन अधिकतम तीन वर्ष की अवधि क े लिए किया जा सकता
21. जहां तक वर्तमान मामले क े तथ्यों का संबंध है, जैसा कि दिनांक 22.07.2021 क े विज्ञापन खंड 6 में कहा गया है, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग-एनसीएल / एमबीसी-एनसीएल / ईडब्ल्यूएस की श्रेणियों क े तहत आरक्षण का दावा करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित प्रारूप में नियमों क े अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत जारी वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। विज्ञापन क े महत्वपूर्ण निर्देशों में यह भी कहा गया था कि आवेदन में भरी गई श्रेणी किसी भी परिस्थिति में नहीं बदली जाएगी, और उम्मीदवारों को राजस्थान उच्च न्यायालय या संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा आवश्यक होने पर सभी मूल दस्तावेजों/प्रमाणपत्रों का उत्पादन करने की आवश्यकता होगी, जिसक े आधार पर उन्होंने आरक्षण का दावा किया था।
22. दिनांक 22.07.2021 क े उक्त विज्ञापन में निहित उक्त निर्देशों क े संबंध में, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि किसी उम्मीदवार ने आरक्षित श्रेणियों में से किसी क े तहत आवेदन किया था, तो उसक े पास इस श्रेणी क े तहत आवेदन करने क े लिए अपनी पात्रता दिखाने क े लिए निर्धारित प्रारूप में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण पत्र होने की अपेक्षा थी। उक्त विज्ञापन क े खंड 17 में वर्णित इस तरह क े आवेदन करने की समय सीमा 31.08.2021 को शाम 5 बजे तक थी। इन परिस्थितियों में, उम्मीदवार क े पास आवेदन करने की तिथि या आवेदन जमा करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 को यह दिखाने क े लिए अपेक्षित प्रमाण पत्र होना चाहिए कि वह संबंधित आरक्षित श्रेणी से संबंधित है। संबंधित उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले इस तरह क े प्रमाण पत्र को राज्य सरकार द्वारा दिनांक 09.09.2015 को जारी परिपत्रों क े अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी एक वैध प्रमाण पत्र होना चाहिए और जैसा कि परिपत्र दिनांक 08.08.2019 में स्पष्ट किया गया है। जो इस तरह क े प्रमाणपत्रों की वैधता क े संबंध में मुद्दे को नियंत्रित करता है।
23. नि:सन्देह, सभी अपीलकर्ताओं क े पास उनक े आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 क े बाद जारी किए गए प्रमाण पत्र थे। जहां तक ओबीसी- एनसीएल श्रेणी का संबंध था, अपीलकर्ता ज्योति बेनीवाल ने दिनांक 25.07.2022 को ओबीसी-एनसीएल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, अपीलकर्ता साक्षी अरहा क े पास दिनांक 12.08.2022 का प्रमाणपत्र था, अपीलकर्ता प्रियंका क े पास दिनांक 20.06.2022 का प्रमाणपत्र था, अपीलकर्ता भव्य क ु ल्हड़ क े पास दिनांक 16.06.2022 का प्रमाणपत्र था, अपीलकर्ता नेहा बतार क े पास दिनांक 21.06.2022 का प्रमाणपत्र था और अपीलकर्ता निखिल कटारिया क े पास दिनांक 09.06.2022 का प्रमाणपत्र था। जहां तक एमबीसी-एनसीएल का संबंध है, अपीलकर्ता सुनील सिंह गुर्जर क े पास 16.06.2022 का प्रमाण पत्र था और अपीलकर्ता क ु लदीप भाटिया क े पास 09.03.2022 का प्रमाण पत्र था.जहां तक ईडब्ल्यूएस श्रेणी का संबंध है, अपीलकर्ता पारुल जैन क े पास 07.09.2021 को प्रमाण पत्र था।इस प्रकार, सभी अपीलार्थियों ने अपने संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, जो उनक े द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 क े बाद प्राप्त किए गए थे और उन्होंने 09.09.2015 और 08.08.2019 क े परिपत्रों क े अनुपालन में इसक े समर्थन में दस्तावेज/शपथ पत्र भी प्रस्तुत नहीं किए थे। इसलिए, साक्षात्कार क े समय अपीलार्थियों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र को वैध प्रमाण पत्र नहीं कहा जा सकता था, जैसा कि प्रतिवादीगण द्वारा दिनांक 22.07.2021 क े विज्ञापन में अनिवार्य किया गया था।
24. अपीलार्थियों क े विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया था कि अपीलार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाणपत्रों की वैधता अवधि क े बारे में दिनांक 22.07.2021 क े विज्ञापन में कोई विशिष्ट तिथि का उल्लेख नहीं किया गया था, और बाद में दिनांक 04.08.2022 क े नोटिस जिसमें अपीलार्थियों को प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था, अत्यधिक अनुचित था, और चयन की प्रक्रिया शुरू होने क े बाद खेल क े नियमों को बदलने क े समान था। न्यायालय को उक्त तर्क में कोई सार नहीं मिला। जैसा कि पहले बताया गया है, विज्ञापन में विशिष्ट निर्देश दिए गए थे कि आरक्षित श्रेणियों क े तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे, और इसलिए ऐसे प्रमाण पत्र राज्य सरकार क े दिनांक 09.09.2015 और 08.08.2019 क े परिपत्रों क े अनुरूप होने चाहिए, जो ऐसे प्रमाणपत्रों की वैधता अवधि को नियंत्रित करते थे। इसक े बाद प्रतिवादी-उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 04.08.2022 को दिया गया नोटिस जिसमें ओबीसी/एमबीसी (एनसीएल) से संबंधित उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की गई थी कि वे आवेदन पत्र जमा करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 से एक वर्ष से पहले जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करें, जो राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उक्त े पूर्णतया अनुरूप था।दिनांक 04.08.2022 क े उक्त नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि ओबीसी/एमबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र 31.08.2018 और 30.08.2020 क े बीच जारी किया गया था, तो जाति प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना था। ईडब्ल्यूएस श्रेणी क े लिए, यह कहा गया था कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आरक्षण की मांग क े लिए आवश्यक आय और संपत्ति प्रमाण पत्र 01.04.2021 से पहले जारी नहीं किया गया होना चाहिए था और यदि आय और संपत्ति प्रमाण पत्र 01.04.2019 और 31.03.2021 क े बीच जारी किया गया था, तो प्रमाण पत्र क े साथ निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना था। इसमें विशेष रूप से उल्लेख किया गया था कि एससी/एसटी/ओबीसी/एमबीसी/ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, जैसा भी मामला हो, आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अर्थात 31.08.2021 क े बाद जारी नहीं किया गया होना चाहिए।आरक्षित श्रेणी क े उम्मीदवारों से अपेक्षित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा करने वाले ऐसे अनुदेशों को न तो अनुचित कहा जा सकता है और न ही चयन प्रक्रिया शुरू होने क े बाद खेल क े नियमों को बदलने क े रूप में समझा जा सकता है, वे 22.07.2021 क े विज्ञापन में दिए गए अपेक्षित अनुदेशों क े अनुरूप हैं और जाति प्रमाण पत्रों की वैधता अवधि क े संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी े अनुरूप हैं।
25. यह कहना अनावश्यक है कि जब कोई उम्मीदवार किसी विशेष आरक्षित श्रेणी क े तहत आवेदन करता है, तो उसक े पास उस विशेष श्रेणी का प्रमाण पत्र होना आवश्यक है, जिस तारीख को वह उक्त श्रेणी क े तहत आवेदन करने क े लिए अपनी पात्रता को दिखाने क े लिए आवेदन करता है।यदि ऐसे प्रमाण पत्र उनक े आवेदन की तिथि क े बाद या विज्ञापन में उल्लिखित आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि क े बाद प्राप्त किए जाते हैं, तो ऐसे प्रमाणपत्रों को वैध प्रमाण पत्र नहीं कहा जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां उम्मीदवार ओबीसी-एनसीएल क े तहत आवेदन करता है। या ईडब्ल्यूएस, कौन सी श्रेणी अत्यधिक गतिशील है और स्थिर नहीं है, क्योंकि उम्मीदवार की आय क े आधार पर उम्मीदवार की आर्थिक स्थिति बदलती रहती है
26. अपीलार्थियों क े विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया तर्क कि विज्ञापन में निर्दिष्ट एक निश्चित तिथि क े अभाव में और नियमों में किसी प्रावधान की अभाव में, साक्षात्कार की तारीख पर प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को वैध माना जाना चाहिए, स्वीकार नहीं किया जा सकता है।यद्यपि, अपीलार्थियों क े विद्वान अधिवक्ता द्वारा डॉली छंदा बनाम अध्यक्ष, जेईई व अन्य (उपरोक्त), राम क ु मार गिजरोया बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड व अन्य (उपरोक्त) और कर्ण सिंह यादव बनाम सरकार दिल्ली (एनसीटी) व अन्य (एसएलपी (सी) संख्या 14948/2016)पर भरोसा करने की मांग की गई थी वे अपीलकर्ताओं की शायद ही कोई मदद कर रहे हैं। डॉली छंदा (उपरोक्त) में, इस न्यायालय ने यह मत व्यक्त करते हुए कि सबूत प्रस्तुत करने से संबंधित नियम क े प्रत्येक उल्लंघन का परिणाम आवश्यक रूप से उम्मीदवारी की अस्वीक ृ ति नहीं है, इस बात पर जोर दिया थाः “7. सामान्य नियम यह है कि किसी भी पाठ्यक्रम या पद क े लिए आवेदन करते समय, किसी व्यक्ति क े पास इस उद्देश्य क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि को पात्रता होनी चाहिए, या तो प्रवेश विवरणिका में या आवेदन पत्र में, जैसा भी मामला हो, जब तक कि इसक े विपरीत कोई व्यक्त प्रावधान न हो। इस संबंध में अर्थात निर्धारित तिथि तक पात्रता योग्यता रखने क े मामले में कोई छ ू ट नहीं दी जा सकती है।इसे आवश्यक प्रमाण पत्रों, उपाधियों या अंकतालिकाओं को प्रस्तुत करक े स्थापित किया जाना है।इसी प्रकार आरक्षण या भारांक आदि का लाभ लेने क े लिए आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होते हैं। ये वे दस्तावेज हैं जो किसी विशेष योग्यता या प्राप्त अंकों क े प्रतिशत या आरक्षण क े लाभ क े हकदार होने क े प्रमाण क े रूप में हैं।"
27. राम क ु मार गिजरोया (पूर्वोक्त) मामले में, इस न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने उम्मीदवार को ओबीसी श्रेणी क े तहत संबंधित पद पर चयन क े लिए पात्र पाया था, हालांकि इस संबंध में प्रमाण पत्र विज्ञापन में उल्लिखित अंतिम तिथि क े बाद प्रस्तुत किया गया था, हालांकि, इस न्यायालय क े दो अन्य न्यायाधीशों की पीठ ने कर्ण सिंह यादव (पूर्वोक्त) में इस संबंध में आपत्ति व्यक्त की थी और मामले को दिनांक 24.01.2020 क े आदेश द्वारा तीन न्यायाधीशों की पीठ क े पास भेज दिया था। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कर्ण सिंह यादव (उपर्युक्त) क े कथित मामले में, हालांकि राम क ु मार गिजरोया (उपर्युक्त) पर भरोसा करते हुए, उक्त मामले में दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किए गए संदर्भ पर ध्यान दिए बिना, दिनांक 28.09.2022 क े आदेश द्वारा अपील का निस्तारण कर दिया। फिर भी, इन दोनों मामलों में से किसी में भी कोई मुद्दा नहीं था कि क्या उम्मीदवार विज्ञापन में उल्लिखित आवेदनों को जमा करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि क े बाद जारी अपनी आरक्षित श्रेणी को दर्शाने वाला अपेक्षित प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकता था, जैसा कि वर्तमान अपीलों में किया गया है।
28. इसक े अलावा, किसी भी अपीलकर्ता ने अपनी रिट याचिकाओं में ऐसा कोई तर्क नहीं दिया था कि उन्होंने समय पर आवेदन किया था और प्रमाण पत्र जारी करने में देरी सक्षम अधिकारियों की ओर से हुई थी। माना जाता है कि दिनांक 09.09.2015 और 08.08.2019 क े परिपत्रों में अनुध्यात ऐसा कोई शपथ पत्र या तो प्रमाण पत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी क े समक्ष या साक्षात्कार क े समय संबंधित उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर नहीं किया गया था, हालांकि, 04 अगस्त, 2022 क े नोटिस में इंगित कर दिया गया था। निष्कर्ष:-
29. यह अब पूर्ण नहीं है कि विज्ञापन में निर्धारित तिथि क े अभाव में आवेदन आमंत्रित करना, जिसक े संदर्भ में अपेक्षित पात्रता का निर्णय किया जाना है, और जब नियम मौन हैं, तो क े वल जांच की निश्चित तिथि उम्मीदवार की पात्रता आवेदन करने की अंतिम तिथि होगी। यह नहीं कहा जा सकता है कि साक्षात्कार या चयन की तिथि हमेशा अनिश्चित होगी और तिथि की अनिश्चितता क े कारण विषम स्थिति पैदा हो सकती है, यहां तक कि उन उम्मीदवारों क े लिए भी जो नियुक्ति की तिथि पर आरक्षित वर्ग क े तहत आवेदन करने क े पात्र नहीं थे। आवेदन, आरक्षित श्रेणी क े तहत आवेदन कर सकते हैं और बाद में साक्षात्कार आयोजित होने तक प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में, रिष्टि करने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। वर्तमान मामले में, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31.08.2021 थी और साक्षात्कार अगस्त 2022 में निर्धारित की गई थी। इसलिए, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि और साक्षात्कार की तिथि क े बीच एक साल का अंतर था, जिस अवधि क े दौरान उम्मीदवारों की क्रीमी लेयर/नॉन-क्रीमी लेयर/ईडब्ल्यूएस की आर्थिक एवं परिणामी स्थिति भी बदल सकती है। इसलिए, इस न्यायालय द्वारा तय कानून की व्याख्या यह है कि विज्ञापन में निर्दिष्ट एक निश्चित तिथि की अनुपस्थिति में, और जब नियम भी मौन हैं, तो आवेदन प्रस्तुत करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि उम्मीदवारों की पात्रता की जांच की तिथि होगी।
30. इस न्यायालय क े तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने डॉ. एम.वी. नायर बनाम भारत संघ व अन्य, (1939) सी 429 2 एससी ने अन्य बातों क े साथ-साथ यह अभिनिर्धारित किया कि आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि क े संदर्भ में अर्हता और पात्रता पर विचार किया जाना चाहिए, जब तक कि आवेदन आमंत्रित करने वाली अधिसूचना में ही कोई तिथि विनिर्दिष्ट न हो।
31. रेखा चतुर्वेदी बनाम राजस्थान विश्वविद्यालय व अन्य 1993 सप्लीमेंट (3) एससीसी 168 में, इस न्यायालय ने निम्नानुसार अभिनिर्धारित किया: "10. यह तर्क कि उम्मीदवारों की आवश्यक योग्यताओं की जांच चयन की तारीख क े संदर्भ में की जानी चाहिए, न कि आवेदन करने की अंतिम तिथि क े संदर्भ में, क े वल अस्वीकार किए जाने क े लिए कहा गया है। चयन की तारीख हमेशा अनिश्चित होती है। ऐसी तिथि की जानकारी क े अभाव में पदों क े लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार यह बताने में असमर्थ होंगे कि वे प्रश्नगत पदों क े लिए योग्य हैं या नहीं, यदि उन्होंने अभी तक अर्हता प्राप्त नहीं की है।जब तक विज्ञापन में योग्यता का निर्णय करने क े लिए एक निश्चित तिथि का उल्लेख नहीं किया जाता है, चाहे वह तिथि चयन की हो या अन्यथा, तब तक उन उम्मीदवारों क े लिए पदों क े लिए आवेदन करना भी संभव नहीं होगा जिनक े पास अपेक्षित योग्यता नहीं है। तिथि की अनिश्चितता भी एक विपरीत परिणाम का कारण बन सकती है, अर्थात यहां तक कि वे उम्मीदवार जिनक े पास वर्तमान में योग्यता नहीं है और भविष्य की अनिश्चित तिथि पर उन्हें प्राप्त करने की संभावना है, वे पदों क े लिए आवेदन कर सकते हैं, इस प्रकार आवेदनों की संख्या बढ़ सकती है।लेकिन इससे भी बुरा परिणाम हो सकता है, जिसमें यह कदाचार क े लिए एक गुंजाइश उत्पन्न कर सकता है। चयन की तारीख इस तरह से तय की जा सकती है या हेरफ े र किया जा सकता है कि क ु छ आवेदकों को ध्यान में रखा जाए और दूसरों को मनमाने ढंग से अस्वीकार किया जाए। इसलिए, विज्ञापन/अधिसूचना में निर्दिष्ट एक निश्चित तिथि क े अभाव में आवेदन आमंत्रित करने क े लिए जिसक े संदर्भ में अपेक्षित योग्यता का आकलन किया जाना, योग्यता की जांच क े लिए एकमात्र निश्चित तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि होगी। इसलिए, हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि जब वर्तमान मामले में चयन समिति ने, जैसा कि श्री मनोज स्वरूप ने तर्क दिया था, आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि क े बजाय चयन की तिथि क े अनुसार अपेक्षित योग्यताओं पर विचार किया, तो इसने की स्पष्ट अवैधता क े साथ कार्य किया, और इस आधार पर ही विचाराधीन चयन रद्द किए जाने योग्य हैं।इस संबंध में यह न्यायालय क े हाल ही क े दो निर्णय ए. पी. लोक सेवा आयोग, हैदराबाद बनाम बी. शरत चंद्र [(1990) 2 एससीसी 669:1990 एससीसी (एल एंड एस) 377: (1990) 4 एसएलआर 235: (1990) 13 एटीसी 708] और जिला कलेक्टर व अध्यक्ष, विजयनगरम समाज कल्याण आवासीय विद्यालय सोसायटी, विजयनगरम बनाम एम. त्रिपुरा सुंदरी देवी [(1990) 3 एससीसी 655:1990 एससीसी (एल एंड एस) 520: (1990) 4 एसएलआर 237:(1990) एटीसी 766]। का भी संदर्भ ले सकता है।"
32. अशोक क ु मार शर्मा व अन्य बनाम चंदर शेखर व अन्य (1997) 4 एससीसी 18 में इस न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने इस प्रकार अभिनिर्धारित किया:- "6. यह प्रस्ताव कि जहां आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि क े रूप में किसी विशेष तिथि को निर्धारित करने क े लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, उम्मीदवारों की पात्रता को उस तिथि क े संदर्भ में आंका जाना चाहिए और क े वल वह तिथि ही एक सुस्थापित तिथि है। एक व्यक्ति जो ऐसी निर्धारित तिथि क े बाद निर्धारित योग्यता प्राप्त करता है, उस पर बिल्क ु ल भी विचार नहीं किया जा सकता है।आवेदन आमंत्रित करने क े लिए जारी किया गया विज्ञापन या प्रकाशित अधिसूचना जनता का प्रतिनिधित्व करती है और इसे जारी करने वाला प्राधिकारी इस तरह क े प्रतिनिधित्व से बाध्य है। वह इसक े विपरीत काम नहीं कर सकता।इस प्रस्ताव क े पीछे एक कारण यह है कि यदि यह ज्ञात होता कि जिन व्यक्तियों ने निर्धारित तिथि क े बाद योग्यता प्राप्त की है, लेकिन साक्षात्कार की तिथि से पहले उन्हें साक्षात्कार क े लिए उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी, तो अन्य समान रूप से रखे गए व्यक्ति भी आवेदन कर सकते थे।क े वल इसलिए कि क ु छ व्यक्तियों ने इस बात क े बावजूद आवेदन किया था कि उन्होंने निर्धारित तिथि तक निर्धारित योग्यताएं प्राप्त नहीं की थीं, उन्हें प्राथमिकता क े आधार पर नहीं माना जा सकता था।”
33. यह भी ध्यान देना प्रासंगिक है कि यदि अपीलकर्ताओं को विज्ञापन में उल्लिखित आवेदनों को जमा करने क े लिए निर्धारित अंतिम तिथि यानी 31.08.2021 क े बाद जारी किए गए प्रमाणपत्रों को पेश करने की अनुमति दे दी गई होती, तो अन्य उम्मीदवार समान रूप से प्रभावित होते क्योंकि अपीलकर्ता उन्हें ऐसा अवसर नहीं देने क े लिए शिकायत कर सकते हैं। अपीलकर्ता जो चूककर्ता हैं, उन्हें उनक े द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को वैध क े रूप में स्वीकार करक े प्राथमिकता नहीं दी जा सकती थी, हालांकि उन्हें विज्ञापन में निर्धारित आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि क े बाद प्राप्त किया गया था। सरकारी परिपत्रों दिनांक 09.09.2015 और 08.08.2019 क े अनुसार उक्त प्रमाणपत्रों क े साथ अपेक्षित शपथ-पत्र भी नहीं थे।
34. मामले क े पूर्वोक्त तथ्यात्मक और कानूनी पहलुओं क े मद्देनजर, मुझे नहीं लगता कि उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेपित निर्णय और आदेश पारित करते समय कोई त्रुटि की गई है। इस मामले को ध्यान में रखते हुए, अपीलें गुणहीन होने क े कारण खारिज की जाती है। न्यायाधीश [बेला एम. त्रिवेदी ] नई दिल्ली;
18. 05. 2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 16428/2022 से उत्पन्न) बनाम क े साथ सिविल याचिका संख्या............./ 2023 (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 18296-18299/2022 से उत्पन्न) (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 21644/2022 से उत्पन्न) (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 19179/2022 से उत्पन्न) (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 9544/2023 से उत्पन्न) (विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 5654/2023 से उत्पन्न) आदेश वर्तमान अपीलों में हमारे द्वारा व्यक्त किए गए विभाजित दृष्टिकोण को देखते हुए, इस मामले को भारत क े माननीय मुख्य न्यायाधीश क े समक्ष रखा जाए ताकि मामले को एक उपयुक्त पीठ क े समक्ष रखा जा सक े । हम आशा करते हैं कि मामले की अविलंबिता को देखते हुए अपीलों की सुनवाई में तेजी लाई जायेगी। न्यायाधीश [अजय रस्तोगी] न्यायाधीश [बेला एम. त्रिवेदी ] नई दिल्ली; 18 मई, 2023 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास'क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े लिए सीमित उपयोग क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण प्रमाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा ।