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Delhi High Court · 12 May 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No 2023 (V.Anu.Ya. (Sis) No. 18339-42/2021)
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court held that under Section 11(6) of the Arbitration and Conciliation (Amendment) Act, 2015, the referral court must conclusively determine the existence of a mediation agreement before referring the dispute to mediation, reading interconnected agreements together where applicable.

Full Text
Translation output
पृ सं. 1
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं या 2023
( व.अनु.या. (िस) सं. 18339-42/2021)
मै जक आई डेवलपस ाइवेट िलिमटेड ...अपीलकता(गण)
बनाम
मैसस ीन एज इ ा चर ... यथ (गण)
ाइवेट िलिमटेड एवं अ य आ द
िनणय
या.एम.आर.शाह
JUDGMENT

1. द ली उ च यायालय नई द ली ारा संबंिधत म य थता यािचकाओं म पा रत कए गए ववा दत सामा य िनणय और आदेश से यिथत और असंतु महसूस करते हुए, जसे, उ च यायालय ने ववाद को पृ सं. 2 म य थता क े िलए भेजा है और एकमा म य थ िनयु कया है, मूल वरोधकता मै जक आई डेवलपस ाइवेट िलिमटेड ने वतमान अपील दायर क है।

2. वतमान अपील म शािमल मु ा एक बहुत ह संक ण दशा म है, अथात ् म य थता एवं सुलह संशोधन अिधिनयम, 2015 क धारा 11(6) क े तहत यायालय क े पूव-संदिभत अिधकार े म है। 2.[1] ार भ म, यह यान दया जाना आव यक है क उ च यायालय क े सम अपीलकता ने वशेष प से म य थता समझौते/खंड क े अ त व क े संबंध म आप जताई। अपीलकता क ओर से यह मामला था क ववाद पूर तरह से समझौता ापन-2 क े इद-िगद घूमता है जसम म य थता खंड शािमल नह ं है। हालां क, दूसर ओर, यहां मूल यथ क ओर से यह मामला था क अ य समझौते अथात ् एसएचए-1, एसएचए-2 और समझौता ापन-1, समझौता ापन-2 क े साथ जुड़े हुए ह, जसम म य थता खंड/समझौता शािमल है और इसिलए, उपरो सभी समझौत को समझौता ापन-2 क े साथ पढ़ने क आव यकता है। 2.[2] ववा दत सामा य िनणय और आदेश ारा व ा ोिलया और अ य बनाम दुगा यापार िनगम, (2021) 2 एससीसी 1 क े मामले म इस यायालय क े िनणय पर भरोसा करक े और यह देखते हुए क उठाए गए ववाद क म य थता, अथात एसएचए-1 का म य थता खंड 27.3, एक शािमल मु ा है और उ मु े को व त म य थ यायािधकरण ारा पृ सं. 3 संबोिधत कया जा सकता है, इसम शािमल लेनदेन क ज टलता को देखते हुए, उ च यायालय ने ववाद को म य थता क े िलए भेजा है और म य थ िनयु कया है।

3. अपीलकता क ओर से व ान व र अिधव ा ी ीतेश कपूर और यथ – मूल आवेदक क ओर से व ान व र अिधव ा ी नीरज कशन कौल उप थत हुए ह। 3.[1] अपीलकता क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी ीतेश कपूर ने हम म य थता अिधिनयम क धारा 11(6क) क े बारे म बताया और यह तुत कया क म य थता और सुलह संशोधन अिधिनयम, 2015 जसक े ारा उपधारा (6क) जोड़ गई है। म य थता अिधिनयम क धारा 11 क े अनुसार, अिधिनयम क धारा 11(6) क े तहत आवेदन पर िनणय लेते समय और ी-रेफरल े ािधकार का योग करते समय, यायालय को म य थता समझौते क े अ त व पर वचार और जांच करनी होती है और इसे म य थ यायािधकरण इस पर नह ं छोड़ा जाना चा हए। 3.[2] यह बल प से तुत कया जाता है क म य थता खंड क े अ त व और वैधता और ववाद क गैर-म य थता क े बीच भेद एवं अंतर है। यह तुत कया जाता है क जहां तक अिधिनयम क खंड 11(6) क े तहत ी-रेफरल े ािधकार क े तर पर म य थता समझौते क े अ त व और वैधता क े संबंध म मु ा है, यायालय को अंततः इस तरह क े मु े पर एक विश िन कष देना होगा और ऐसा मु ा म य थ यायािधकरण पर पृ सं. 4 नह ं छोड़ा जाना चा हए। यह तुत कया जाता है क इसिलए, उ च यायालय ने व ा ोिलया (पूव ) मामले म इस यायालय क े फ ै सले को गलत तर क े से लागू कया है और/या गलत पढ़ा है। 3.[3] अपीलकता क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी कपूर ारा यह बल प से तुत कया गया है क जब मामला प प से गैर- म य थता का है तो प कार को म य थता करने क े िलए मजबूर होने से बचाना रेफरल यायालय का कत य है। यह तुत कया गया है क म य थता समझौते/खंड क े अ त व और वैधता क े संबंध म ववाद मामले क तह तक जाता है और पहले रेफरल यायालय ारा िनणय िलया जाना चा हए। यह तुत कया गया है क य द अंततः यह माना जाता है क म य थता समझौते का कोई अ त व नह ं है और/या कोई वैध म य थता समझौता नह ं है और उ मु े को म य थ यायािधकरण ारा तय करने क े िलए छोड़ दया गया है, तो उस थित म पूर या म य थ यायािधकरण ारा िनरथक होगी। यह तुत कया गया है क इसिलए सावजिनक और िनजी संसाधन क बबाद को रोकने क े िलए और अिधिनयम क धारा 11(6क) को यान म रखते हुए, रेफरल यायालय को म य थता समझौते क े संबंध म मु े को अंततः समा करना होगा। एन.एन. लोबल मकटाइल ाइवेट िलिमटेड बनाम इंडो यूिनक लेम िलिमटेड और अ य, 2023 एससीसी ऑनलाइन एससी 495 क े मामले म इस यायालय क सं वधान पृ सं. 5 पीठ क े हािलया फ ै सले पर भरोसा कया गया है। यह तुत कया गया है क उ िनणय म इस यायालय ारा यह देखा और माना गया है क समझौते क े बना, म य थता का संदभ नह ं दया जा सकता है। और आगे यह माना गया है क एक म य थता समझौते को धारा 7(1) क आव यकताओं को पूरा करना चा हए यह तुत कया जाता है क यह आगे देखा जाता है और अिभिनधा रत कया जाता है क अिधिनयम म धारा 11(6क) को शािमल करने क े पीछे वा त वक इरादा यायालय को, धारा 11 क े तहत काय करते हुए, एक म य थता समझौते क े अ त व क जांच और पता लगाने क े िलए सीिमत करना था। 3.[4] अपीलकता क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी कपूर ने भी एनट पीसी िलिमटेड बनाम एसपीएमएल इ ा िलिमटेड, 2023 एससीसी ऑनलाइन एस. सी. 389 (पैरा ाफ 19, 25 और 28) क यायालय क े हाल क े फ ै सले पर भरोसा कया है।

4. वतमान अपील का वरोध करते हुए, मूल आवेदक क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी नीरज कशन कौल ने बल ढंग से कहा है क मामले क े त य और प र थितय म, उ च यायालय ने इस िनणय का सह तर क े से पालन कया है व ा ोिलया (पूव ) क े मामले म यायालय ने प कार क े बीच ववाद को उिचत प से म य थता क े िलए संदिभत कया है। पृ सं. 6 4.[1] मूल आवेदक क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी कौल ारा यह बल ढंग से तुत कया जाता है क वतमान मामले म सभी समझौत, अथात ् एसएचए-1, एसएचए-2 और समझौता ापन-1 को समझौता ापन-2 क े साथ पढ़ा जाना आव यक है। यह तुत कया जाता है क समझौता ापन-2 क े अलावा अ य समझौत म म य थता खंड शािमल है, वशेष प से एसएचए-1 क े खंड 27.3. म यह तुत कया जाता है क उ च यायालय ने पैरा ाफ 22 म वशेष प से अवलोकन कया है और राय द है क चार समझौते िन ववाद प से आपस म जुड़े हुए ह। यह तुत कया जाता है क एक बार एक विश िन कष यह देखते हुए क सभी समझौते ह आपस म जुड़ा हुआ समझौता जसम एक म य थता खंड को समझौता ापन-2 क े साथ पढ़ा जाना चा हए और इसिलए, उ च यायालय ने उिचत प से ववाद को म य थता क े िलए भेजा है। 4.[2] मूल आवेदक क ओर से उप थत व ान व र अिधव ा ी कौल ने लोरो क ं ो स इं डया ाइवेट िलिमटेड बनाम सेवन ट वाटर यूर फक े शन इंक. और अ य, (2013) 1 एससीसी 641 क यायालय क े िनणय क े साथ-साथ ओलंपस सुपर चस (पी) िलिमटेड बनाम मीना वजय खेतान, (1999) 5 एससीसी 651 क यायालय क े िनणय पर बहुत अिधक भरोसा कया है। उनक े इस कथन पृ सं. 7 क े समथन म क सभी चार समझौते आपस म जुड़े हुए ह और इसिलए, उ ह पूर तरह से पढ़ने क आव यकता है।

5. सुना गया। इस यायालय क े वचार हेतु जो लघु उठाया गया है, वह है, ी-रेफरल चरण म रेफरल यायालय का अिधकार े जब म य थता समझौते क े संबंध म मु ा उठाया जाता है। 5.[1] उपरो मु े पर वचार करते हुए म य थता अिधिनयम क धारा 11(6क), जसे म य थता और सुलह संशोधन अिधिनयम, 2015 ारा जोड़ा गया है, पर वचार करना आव यक है। जो इस कार हैः "(6-क) सव च यायालय या, यथा थित, उ च यायालय, उप-धारा (4) या उप-धारा (5) या उप-धारा (6) क े तहत कसी भी आवेदन पर वचार करते समय, कसी भी यायालय क े कसी भी िनणय, ड या आदेश क े बावजूद, म य थता समझौते क े अ त व क जांच तक ह सीिमत रहेगा।" 5.[2] इस कार, म य थता और सुलह संशोधन अिधिनयम, 2015 क े बाद, अिधिनयम क धारा 11(6) क े तहत यायालय का अिधकार े इस बात क जांच करने तक सीिमत है क या प कार क े बीच म य थता समझौता मौजूद है "न अिधक, न कम"। इस कार, अिधिनयम क धारा 11(6क) क े अनुसार, म य थता समझौते क े अ त व क े संबंध म ववाद/मु े पर वचार करना रेफरल यायालय का कत य है। पृ सं. 8 5.[3] इस तर पर, यह यान देने क आव यकता है क कानून क तय थित क े अनुसार, म य थता अिधिनयम क धारा 11(6) क े तहत यायालय का ी-रेफरल अिधकार े बहुत संक ण है और इसम दो पूछताछ होती ह। ाथिमक जांच एक म य थता समझौते क े अ त व और वैधता क े बारे म है, जसम समझौते क े प कार और उ समझौते क े िलए आवेदक क गोपनीयता क े बारे म भी जांच शािमल है। उ मामले म रेफरल यायालय ारा पूर तरह से जांच क आव यकता है। [एनट पीसी िलिमटेड (पूव ) क े मामले म िनणय का अनु छेद 25]। तीयक जांच जो संदभ तर पर ह उ प न हो सकती है, वह ववाद क गैर-म य थता क े संबंध म है। दोन विश और अलग ह। जहाँ तक े संबंध म पहले मु े का संबंध है, यह मामले क तह तक जाता है, उसी पर िनणायक प से रेफरल तर पर रेफरल यायालय ारा िनणय िलया जाना चा हए। अब, जहाँ तक ववाद क गैर-म य थता का संबंध है, यहां तक क व ा ोिलया (उपरो ) क े मामले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून क े अनुसार, यायालय ी रेफरल चरण म और अिधिनयम क धारा 11(6) क े तहत अिधकार े क जांच करते समय थम या दाव क म य थता क जांच करने पर भी वचार कर सकता है। जैसा क पाया गया है, संदभ तर पर थम या समी ा को अ भावी बनाना और सीधे मामल म िन य करना है जहां बखा तगी एकदम प है त य और पृ सं. 9 कानून पर मुकदमेबाजी को पहले चरण म रोकना चा हए। तथा प, जहाँ तक म य थता समझौते क े संबंध म ववाद का संबंध है और जब इसे ी-रेफरल तर पर उठाया जाता है, तो रेफरल यायालय को उ मु े पर िनणायक प से और अंत म िनणय लेना होता है और उ मु े को म य थ यायािधकरण ारा िनधा रत करने क े िलए नह ं छोड़ना चा हए। इसका कारण यह है क म य थता समझौते क े अ त व और वैधता क े संबंध म मु ा मामले क तह तक जाता है। जैसा क एन.एन. लोबल मकटाइल ाइवेट िलिमटेड (पूव ) क े मामले म सं वधान पीठ ने कहा क समझौते क े बना म य थता का कोई संदभ नह ं हो सकता है। उ िनणय म इस यायालय ने वशेष प से यह भी अवलोकन और अिभिनधा रत कया है क अिधिनयम म धारा 11(6क) को शािमल करने क े पीछे का इरादा धारा 11 क े तहत काय करते हुए यायालय को म य थता समझौते क े अ त व क जांच और पता लगाने क े िलए सीिमत करना था। हमार राय है क य द कसी म य थता समझौते क े संबंध म ववाद/मु ा िनणायक प से और अंत म रेफरल यायालय ारा धारा 11(6) क े तहत ी-रेफरल अिधकार े का योग करते हुए तय नह ं कया जाता है और इसे म य थ यायािधकरण पर छोड़ दया जाता है, तो यह म य थता अिधिनयम क धारा 11 (6क) क े वपर त होगा। यह रेफरल यायालय का कत य है क वह पहले उ मु े पर िनणायक प से िनणय ले पृ सं. 10 ता क प कार को ववाद से बचाया जा सक े । यह नह ं होने पर म य थता करने क े िलए मजबूर कया जाता है।

6. कोई भी म य थता समझौता और/या जब कोई वैध म य थता समझौता नह ं है। रेफरल यायालय ारा पा रत ववा दत सामा य आदेश से, पैरा ाफ 11 से 13 म क गई ट प णय से यह तीत होता है क रेफरल यायालय ने उ मु े पर िनणायक प से िनणय नह ं िलया है और अंत म रेफरल यायालय ने इसे म य थ यायािधकरण ारा तय करने क े िलए छोड़ दया है। ववा दत आदेश क े पैरा ाफ 22 म क गई क ु छ ट प णय पर भरोसा करते हुए क रेफरल यायालय ने वा तव म यह राय द है क चार समझौते िन ववाद प से आपस म जुड़े हुए ह, यह यान दया जाना आव यक है क पैरा ाफ 22 म क गई ट प णय को अलग-अलग म य थ(ओं) िनयु करने क े िलए अपीलकता क ाथना क े साथ पढ़ा जाना चा हए। हालां क, पैरा ाफ 13 म, यह वशेष प से रेफरल यायालय ारा देखा गया है क "यह यायालय अंततः इस पहलू पर एक या दूसरे तर क े से फ ै सला नह ं दे सकता है।" पैरा ाफ 14 म भी, यह वशेष प से पाया गया है क एसएचए-1 क े म य थता खंड 27.[3] क े प म उठाए गए ववाद क म य थता एक संबंिधत मु ा है, जसे व ान म य थ यायािधकरण ारा संबोिधत कया जा सकता है। इस कार, रेफरल यायालय ने अंततः म य थता समझौते क े पृ सं. 11 अ त व और वैधता पर क ु छ भी नह ं कहा है जो रेफरल यायालय ारा कया जाना चा हए था।

7. अब, जहाँ तक व ान व र अिधव ा ी कौल ारा तुत कए जाने क बात है, ने जाना क सभी समझौते आपस म पर पर प से जुड़े हुए ह लोरो क ं ो स इं डया ाइवेट िलिमटेड (उपरो ) और ओलंपस सुपर चस (पी) िलिमटेड (उपरो ),क े मामल म इस यायालय क े िनणय पर िनभर ह हम गुणागुण म जाने का ताव नह ं करते ह य क रेफरल यायालय ारा इस पर वचार कया जाता है। हमने अपीलकता क ओर से उप थत व ान अिधव ा को यो यता क े आधार पर तुत करने क अनुमित भी नह ं द है।

8. उपरो को यान म रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण से, उ च यायालय ारा पा रत सामा य िनणय और आदेश पर आप जताई गई संबंिधत म य थता यािचकाएं, ववाद को म य थता क े िलए संदिभत करते हुए र और समा क जाती ह। संबंिधत म य थता यािचकाओं पर नए िसरे से और यहां ऊपर क गई ट प णय क े आलोक म िनणय लेने क े िलए और म य थता समझौते क े संबंध म मु े को िनणायक और अंितम प से तय करने क े िलए मामले को उ च यायालय/रेफरल यायालय म वापस भेज दया जाता है। उपरो काय वतमान आदेश क ाि क तार ख से तीन मह ने क अविध क े भीतर पूरा कया जाना है। हालाँ क, यह देखा गया है क हमने पृ सं. 12 े अ त व और वैधता और चार समझौत क े आपस म जुड़े होने पर गुणागुण क े आधार पर क ु छ भी य नह ं कया है। यह अंततः उ च यायालय/रेफ़रल यायालय पर िनभर करता है क वह कानून क े अनुसार और अपनी यो यता क े आधार पर उिचत िनणय ले। वतमान अपील तदनुसार उपरो सीमा तक वीकार क जाती ह। मामले क े त य और प र थितय म, लागत क े संबंध म कोई आदेश नह ं दया जाएगा।.................................. या. [एम. आर. शाह]................................... या. [सी. ट. र वक ु मार] नई द ली; 12 मई, 2023 पृ सं. 13 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।