Full Text
रपोट करने यो य
भारत के सव यायालय म
िसिवल अपीलीय े ािधकार
2011 क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या. 4709
ह रयाणा शहरी िवकास ािधकरण और अ य ... अपीलकतागण
बनाम
जगदीप संह .......... ितवादीगण
िनणय
राजेश बंदल , जे
जे.
JUDGMENT
1. 2009 क आर.एस.ए. सं या 1449 म पंजाब और ह रयाणा उ यायालय ारा पा रत आदेश दनांक 28.10.2009 को वतमान अपील म चुनौती दी गई है। उपरो आदेश से, अपीलकता ारा दायर अपील को खा रज कर दया गया था और िवचारण यायालय के साथ-साथ थम अपीलीय यायालय ारा दज त य के समवत िन कष को बरकरार रखा गया था।
2. िववाद ितवादी को भूखंड के आवंटन के िलए अित र क मत क मांग से संबंिधत है।
3. ितवादी को आवंटन प दनांक 21.08.1986, @ ₹ 224.90 ित वग गज क दर से, ारा से टर-14, (भाग), िहसार म लॉट नं. 1084 आवं टत कया गया था।
4. अपीलकता ारा 15.01.1993 को ितवादी को नो टस जारी कया गया था, िजसम अित र क मत क मांग क गई थी और साथ ही उसे कारण बताने के िलए भी कहा गया था क आवंटन के दो साल क अविध के भीतर िनमाण न होने के कारण लॉट को फर से रज़यूम य नह कया जाना चािहए (टू शो कॉज एज़ टू हाई दी लाट शुड नॉट बी रज़यूमड ऑन अकाउंट ऑफ़ नॉन - कं शन िव दन अ पी रयड ऑफ़ टू ईयरस ऑफ़ अलोटमट)। उपरो नो टस के बाद बाद के नो टस जारी कए गए और अंितम नो टस 28.01.2002 का था। 2023 INSC 503
5. ितवादी ारा 01.10.2003 को वतमान अपीलकता ारा उठाई गई मांग को चुनौती देते ए एक दीवानी मुकदमा दायर कया गया था। उसे िड कर दया गया था ।इससे ु ध होकर, वतमान अपीलकता ने अपील दायर क िजसे िनचली अपीलीय अदालत ने खा रज कर दया। अपीलाथ उ यायालय के सम भी सफल नह ए।
6. िव ान िवचारण यायालय ने ितवादी ारा उठाई गई दलील को इस आधार पर वीकार कर िलया क आवंटन प म िनिहत शत के अनुसार, भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा भूिम क लागत म वृि के मामले म ही अित र मू य क मांग क जा सकती है। जैसा क वतमान मामले म है, कसी यायालय या ािधकरण ारा अिधिनण त भूिम क क मत म कोई वृि नह क गई है, इसिलए कोई अित र मांग नह क जा सकती है।
7. अपीलकता के िव ान वक ल ारा उठाया गया तक यह है क िवचाराधीन भूिम पशुपालन िवभाग, ह रयाणा ारा अपीलकता को ₹ 1,21,000/- ित एकड़ क दर से ह तांत रत क गई थी। हालां क बाद म इसे संशोिधत कर 3,00,000 पये ित एकड़ कर दया गया।िवफल होने पर, अपीलकता को भूिम का क जा नह दया जाना था।अपीलकता ारा 21.08.1986 को ₹ 224.90 क दर से आवंटन कया गया था। ारंभ म जब ितवादी को भूखंड आवं टत कया गया था, तो भूिम क क मत ₹ 1,21,000/- ित एकड़ लेते ए क मत क गणना क गई थी।हालां क, बाद म लागत को बढ़ाकर ₹ 3,00,000/- ित एकड़ कर दया गया, अित र क मत क मांग क गई। लॉट क क मत ₹ 301.70 वग गज आंक गई थी और ितवादी से ₹ 76.80 ित वग गज क दर से अित र मांग क गई थी।नो टस म यह भी कहा गया था क िपछले 5 से 6 वष म िवकास शु क क लागत म वृि ई है, फर भी अपीलकता इसे वहन करगे।चूं क अपीलकता को भूिम क लागत बढ़ गई, इसिलए इसे आवं टय ारा वहन कया जाना था।अपीलकता गैर-लाभकारी संगठन ह।
8. नो टस म आगे कहा गया है क य द ितवादी अित र क मत के भुगतान पर लॉट के आवंटन को वीकार करने के िलए तैयार नह है, तो वह 10% ित वष क दर से याज सिहत अपनी जमा रािश वापस ा कर सकता है।
9. दूसरी ओर, ितवादी के िव ान वक ल ने तक दया क मौजूदा मामले म, आवंटन प म एक शत यह थी क भूखंड क क मत अ थायी थी; भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा अिधिनण त भूिम क लागत म वृि के कारण ही अित र क मत क मांग क जा सकती है।अपीलकता का यह वीकार कया गया मामला है क िजस भूिम पर गत भूखंड बनाया गया था/ काटा गया था, उसका अिध हण नह कया गया था, बि क इसे रा य के पशुपालन िवभाग ारा अपीलकता को ह तांत रत कर दया गया था। उसका मू य ह तांतरण के समय िनधा रत कया गया था, हालां क, य द बाद म अलग/ अित र मू य िनधा रत कया जाता है, तो आवं टय को बढ़ी ई लागत वहन करने के िलए नह कहा जा सकता है।
10. प कार के िव ान अिधव ा को सुना तथा अिभलेख एवं संबंिधत द तावेज का अवलोकन कया।
11. त य यह है क ितवादी को आवंटन प दनांक 21.08.1986 के तहत ₹ 224.90 ित वग गज क दर से भूखंड आवं टत कया गया था, यह िववाद म नह है। अपीलकता का यह भी वीकार कया गया मामला है क िजस जमीन पर लॉट बनाया / काटा गया था, वह शु म रा य के पशुपालन िवभाग के वािम व म थी, िजसे अपी लकता को ह तांत रत कर दया गया था। ारंिभक मू य ₹ 1,12,000/- ित एकड़ िनधा रत कया गया था। भूखंड क लागत क गणना िवकास क लागत सिहत क गई और आवंटन कए गए।अिभलेख से पता चलता है क बाद म, िजस दर पर पशुपालन िवभाग क 275.[5] एकड़ भूिम अपीलकता को ह तांत रत क गई थी, उसे संशोिधत कर ₹ 3,00,000/- ित एकड़ कर दया गया था। या जमीन क अित र क मत/लागत का बोझ लॉट धारक पर डाला जा सकता है, यह मु ा िनचली यायालय के सम था।अित र मू य क मांग के संबंध म आवंटन प म िनिहत ासंिगक खंड नीचे उ रत है: "खंड 9:उपरो मू य इस सीमा तक अनंितम है क भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा अिधिन णत भूिम क लागत म कोई वृि भी ािधकरण ारा िनधा रत अनुपात के अनुसार देय होगी / अनुपाितक प से देय होगी और िनधा रत अित र मू य का भुगतान इसक मांग के 30 दन के भीतर करना होगा। ”
12. पूव खंड क ा या नीचे के सभी यायालय ारा क गई थी, िजसका अथ था क भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा दी गई भूिम क लागत म वृि होने क ि थित म अित र क मत क मांग क जा सकती है। अपीलकता का यह वीकार कया गया मामला है क भूखंड के आवंटन के िलए भूिम का अिध हण कभी नह कया गया था। इसिलए, भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत कसी भी ािधकरण या अदालत ारा भूिम क लागत म कोई वृि नह क जा सकती थी।
13. अिभलेख पर मौजूद इन िन ववाद त य और आवंटन प म िनिहत िनयम और शत से, ितवादी को आवं टत लॉट क अित र क मत क मांग को दर कनार करने म नीचे के िव ान यायालय ारा कोई अवैधता नह क गई है। वतमान अपील म कोई यो यता नह है।यह खा रज कए जाने के यो य है।तदनुसार आदेश दया जाता है।
14. वतमान ु /तु छ अपील दायर करने के िलए, हमारी राय म, अपीलकता भारी लागत के बोझ के पा ह। इस यायालय ने इस यायालय म ु /तु छ मुकदम क भरमार म वा दय के आचरण क नंदा क थी, जो डॉके स को अवरोिधत कर रहे ह िजसके प रणाम व प िजन मामल पर िवचार करने क आव यकता है, उनम देरी हो रही है।दयानदेव सबाजी नाइक और अ य बनाम ा काश खाडेकर और अ य दयानदेव सबाजी नाइक और अ य बनाम ा काश खाडेकर और अ य दयानदेव सबाजी नाइक और अ य बनाम ा काश खाडेकर और अ य दयानदेव सबाजी नाइक और अ य बनाम ा काश खाडेकर और अ य [1 (2017) 5 एससीसी 496] म कए गए अवलोकन, नीचे उ धृत कये गए ह: "13. इस यायालय को वादी ारा या का दु पयोग करने के कसी भी यास को अ वीकार क दृि से देखना चािहए। य द इस तरह के यास से स ती से िनपटा नह गया तो याियक या क पिव ता गंभीर प से ख म हो जाएगी।य द कोई वादी यायालय म झूठ बोलता है या यायालय क या के साथ िखलवाड़ करता है तो उसे आने वाले प रणाम के बारे म कोई संदेह नह होना चािहए।दूसर को इस उ मीद म या याियक उदारता क गलत उ मीद पर उसी रा ते पर चलने का साहस नह करना चािहए।कानूनी मामल म, मह वपूण िव ीय दंड लगाना मह वपूण है, िजसे अनुकरणीय लागत कहा जाता है, यह सुिनि त करने के िलए क हमारे देश क कानूनी णाली क तरह, स य अ यिधक मू यवान है और अ य कारक से भािवत नह है।
14. कानूनी णाली के यायालय - यह यायालय अपवाद नह है - मुकदमेबाजी से भरा/दबा आ है। ु /तु छ और िनराधार फाइ लंग याय के शासन के िलए एक गंभीर खतरा है।वे समय क खपत करते ह और बुिनयादी ढांचे को बािधत करते ह।उ पादक संसाधन िज ह वा तिवक कारण से िनपटने म लगाया जाना चािहए, केवल देरी से लाभ पाने के िलए, मृत मु आगे बढ़ाने और बेकार के कारण को आगे बढ़ाने म उपयोग कए जाने वाले उ पादक संसाधन को न कर दया जाता है। कसी भी वादी का देरी म िनिहत वाथ नह हो सकता है।दुभा य से, जैसा क वतमान मामला उदाहरण देता है, याय देने क या का अनैितक लोग ारा वैध लोग को नुकसान प ँचाने के िलए दु पयोग कया जाता है।वतमान मामला इस बात का एक उदाहरण है क कैसे एक साधारण मु े ने अदालत के समय पर क जा कर िलया है और अप रहाय को बढ़ाने के िलए लगातार आवेदन कैसे दायर कए गए ह।िजस ि के प म याय का संतुलन है, वह इस या म एक बासी/ पुराने मु े को पुनज िवत करने के बार-बार के यास से मझधार म छोड़ दया गया है।इस वृि पर तभी अंकुश लगाया जा सकता है जब पूरे िस टम म अदालत एक सं थागत दृि कोण अपनाए जो इस तरह के वहार को दंिडत करता है। याय तक उदार प ंच का मतलब अराजकता और अनुशासनहीनता तक प ंच नह है।एक मजबूत संदेश दया जाना चािहए क याय क अदालत को कानून क देरी से लाभ के िलए बनाई गई मुकदमेबाजी क रणनीितय से बािधत होने क अनुमित नह दी जाएगी।जब तक यहां और अभी सभी अदालत ारा उपचारा मक कारवाई नह क जाती है, तब तक हमारा समाज पालन करने के बजाय टालमटोल/ अ प कथन पर आधा रत एक कानूनी सं कृित पैदा करेगा।ऐसी ि थितय से दृढ़ता से िनपटना येक यायालय का कत है।अनुकरणीय लागत का अिधरोपण एक आव यक साधन है िजसे ु /तु छ मामल को फाइल करने से रोकने के साथ ही साथ ऐसे मामल क छंटाई करने के िलए योग कया जाना है।केवल तभी अदालत वा तिवक कारण को हल करने के िलए समय िनधा रत कर सकती ह और उन लोग क चंता का जवाब दे सकती ह िज ह याय क आव यकता है। यह सुिनि त करने के िलए क वैध िशकायत वाले नाग रक क अदालत तक प ंच है, वा तिवक लागत लगाना मह वपूण है जो कानूनी कायवाही म शािमल वा तिवक खच को दशाती ह।अ यथा, केवल अयो य मामल के भार के कारण वैध कारण के िलए दरवाजे बंद हो जाएंगे जो णाली म भर जाते ह।ऐसी ि थित को आने ही नह दया जा सकता।इसिलए, यह केवल एक िवक प नह है, बि क याय के शासन को कमजोर करने या ल बा करने के िलए कानूनी या को लागू करने वाले ि य ारा कानूनी णाली के दु पयोग को रोकने के िलए सभी अदालत पर एक िज मेदारी और कत है।हम सभी अदालत को समान तरीके से ु /तु छ तुितय /फाइ लंगस से इसी कार से िनपटने के िलए दृढ़ता से ो सािहत करते ह। ” (जोर दया गया)
15. उपयु िनणय को इस यायालय के बाद के िनणय आई सी ओ एम एम टेली िलिमटेड बनाम पंजाब रा य जल आपू त और सीवरेज बोड और अ य [ 2 (2019) 4 एससीसी 401 ] म अनुमोदन के साथ उ धृत कया गया था।
16. अब वतमान मामले के त य पर आते ह जो प प से अपीलकता ारा दायर एक ु /तु छ मुकदमेबाजी के प म मामला थािपत करते ह, जहां अिधकारी िज मेदारी लेने से कतराते ह।
17. गुण-दोष के आधार पर भी संजय गेरा बनाम ह रयाणा शहरी िवकास ािधकरण और अ य [3 (2005) 3 एससीसी 207] म इस यायालय के सम इसी तरह का एक मु ा िवचार के िलए आया था।
18. य िप उ यायालय ने आबं टती को कोई राहत नह दी थी, तथािप इस यायालय ने यािचका को वीकार कर िलया और आवंटन प म उसी ि थित क ा या करते ए आवंटी से अित र मू य क मांग को र कर दया, जैसा क वतमान मामले म है। इसके पैरा ाफ 2, 5 और 6 को यहां पुन: तुत कया गया है: “2. इस अपील के िन तारण के िलए आव यक संि त य यह ह क वादी-अपीलाथ को आवंटन प सं या 21548 दनांक 20 अग त, 1986 ारा भूख ड सं या 940 आबं टत कया गया था तथा उसने शत के अनुपालन म 18,600 क रािश जमा करायी और आव यक द तावेज भेजे। ितवादी- य थय ने उ लेिखत भूखंड के िलए वा षक भुगतान का अनुरोध कया, और वादी-अपीलकता ने 21 अग त, 1987 को रसीद के मा यम से इसे जमा कर दया। ितवादी- य थय ारा मांगी गई कुल रािश जमा करने के बाद, 15 जनवरी, 1993 को प सं या 1300 दनांक 15 जनवरी, 1993 को वादी-अपीलाथ को भेजकर 38,400 / - पये क रािश क मांग क गई, िजसे उपरो भूखंड के संबंध म प जारी करने क ितिथ से तीस दन क अविध के भीतर भुगतान करने क मांग क गई थी। वादी-अपीलकता ने 15 जनवरी, 1993 के प क वैधता और िविधमा यता का िवरोध कया, यह आरोप लगाते ए क यह ाकृितक याय के िस ांत का उ लंघन है और कई अ य आपि यां उठा ।वादी-अपीलकता क िशकायत यह थी क ितवादी- य थय ारा उठाई गई मांग वैध नह है य क उ मांग भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा दए गए कसी भी िनणय/अवाड के कारण नह है और ितवादी- यथ उनके प म कया गया आवंटन को र नह कर सकते ।वादी-अपीलकता ने ितवादी- य थय से 15 जनवरी, 1993 के प को र करने का अनुरोध कया, ले कन ितवादी- य थय ने ऐसा करने से इनकार कर दया।इसिलए, वादी-अपीलकता को इस आशय क घोषणा के िलए ाथना के साथ वतमान मुकदमा दायर करने के िलए मजबूर कया गया था क ितवादी नंबर 2 ारा जारी भूखंड सं या 940, से टर 14, भाग, िहसार के संबंध म 15 जनवरी, 1993 का दनां कत प अवैध, अमा य है और र करने के यो य था और उ ह ने 20 अग त, 1986 के मेमो नंबर 21548 के मा यम से ितवा दय ारा जारी कए गए आवंटन प को र करने, समी ा करने या र करने से ितवा दय को रोकने के िलए थायी िनषेधा ा के िलए प रणामी राहत एवं उ प के आधार पर कोई भी कायवाही करने से उ ह रोकने क भी ाथना क । वादी-अपीलकता ने ितवादी- य थय को भूखंड का क जा देने का िनदश देते ए अ थायी िनषेधा ा क भी मांग क ।
5. हमने प कार के िव ान वक ल को सुना है और अिभलेख का अ ययन कया है।इसम कोई दो राय नह है क आवंटन आदेश क शत सं या 9 के अनुसार गत मू य केवल अ थायी था।पर तु शत यह है क भू-अजन अिधकारी ारा कोई अिधिनणय दए जाने क ि थित म मू य बढ़ाया जा सकता है।शत सं या 9 िन ानुसार हैः "उपरो मू य इस हद तक अ थायी है क भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा अिधिन णत भूिम क लागत म कोई भी वृि ािधकरण ारा िनधा रत आनुपाितक प से देय होगी।िनधा रत अित र मू य का भुगतान उसक मांग के तीस दन के भीतर कया जाएगा। ” इस शत के अनुसार भूिम अिध हण अिधिनयम के तहत स म ािधकारी ारा अवाड/ अिधिनणय के अनुसार भूिम क क मत म वृि क जा सकती है। ले कन भूिम अिध हण ािधकरण ारा ऐसा कोई अवाड/ अिधिनणय नह दया गया था। एक वाद म ितवा दय पर यह कत डाला जाता है क वे सा य तुत कर क पशुपालन िवभाग को मुआवजे क उ तर दर का भुगतान बढ़ाने के कारण भूिम क लागत म वृि आव यक है।ले कन इस तरह का कोई सबूत मुकदमे म पेश नह कया गया।डी.ड यू.[1] ने कह नह कहा क यह वृि आव यक थी य क पशुपालन िवभाग को इस भूिम के अिध हण के िलए उ दर पर मुआवजा देना था।हो सकता है क पंजाब एवं ह रयाणा उ यायालय के फै सले के कारण ितवादी आवं टत भूखंड के िलए अिधक क मत का दावा कर सके।एक दीवानी मुकदमे म सभी त य क पैरवी करनी होती है और उ ह सािबत करना होता है।ले कन मौजूदा मामले म, आरोप को सािबत करने के िलए कोई सबूत नह है।ह रयाणा शहरी िवकास ािधकरण क यह िज मेदारी थी क वह उिचत सा य देकर इसे मािणत करे क भूिम अिध हण क क मत म वृि के कारण वृि ई थी।ले कन डीड यू-1 का बयान, एकमा सबूत जो ितवादी/ यथ ने तुत कया है, इस मु े पर मह वपूण प से मौन है।दीवानी मामल म, प कार के अिधकार का िनधारण केवल त य के पर कसी अ य िनणय के आधार पर नह कया जा सकता है।कायवाही म उिचत सा य दान करके अपने मामले को प प से तुत करने और मािणत करने क िज मेदारी ितवा दय क है। ितवादी/ यथ ारा दए गए सा य के अनुसार अथात द तावेजी सा य के साथ-साथ मौिखक सा य, ितवा दय ारा लगाए गए आरोप क पुि नह होती है।जहां तक आवंटन प क शत सं या 09 का संबंध है, इस बात पर कोई िववाद नह है क ितवादी अित र क मत क मांग कर सकते ह य क आवंटन के समय क मत अ थायी थी।ले कन आवंटन प क शत सं या 9 के अनुसार क मत म वृि को सही ठहराने के िलए, ितवा दय को आरोप को सािबत करने के िलए उिचत सबूत पेश करने ह गे। ितवा दय ारा ऐसा कोई सा य तुत नह कया गया है।इसिलए, ायल कोट ने मामले म सही दृि कोण रखा है और यह िव ान अित र 'िजला यायाधीश के साथ-साथ उ यायालय के िव ान एकल यायाधीश ारा सबूत क पूरी तरह से गलत ा या का मामला है।
6. हमारी उपरो चचा के प रणाम म, हमारी राय है क िवचारण यायालय ारा पा रत आदेश यायसंगत है और इस मामले के त य और प रि थितय म अित र िजला यायाधीश के साथ-साथ उ यायालय के िव ान एकल यायाधीश ारा िलया गया दृि कोण उिचत नह लगता है।इसिलए, हम इस अपील को वीकार करते ह और उ यायालय के िव ान एकल यायाधीश ारा पा रत आदेश के साथ-साथ अित र िजला यायाधीश, िहसार ारा पा रत आदेश को र करते ह और िवचारण यायालय ारा पा रत 27 माच, 1996 के आदेश क पुि करते ह। लागत के संदभ म कोई आदेश नह । ”
19. इस यायालय के सम उठाया जाने वाला मु ा दनांक 01/12/1992 के प का संदभ दे रहा था, जो अपीलकता के अनुसार से टर -14, (भाग), िहसार को ह तांत रत भूिम के िलए अपीलकता ारा पशुपालन िवभाग को भुगतान क जाने वाली आव यक रािश को दशाता है। प को दखाने का िवचार यह था क वा तव म भूिम के ह तांतरण के िलए भुगतान क जाने वाली रािश 1,21,000/- ित एकड़ के बजाय 3,00,000 पये थी।त य यह है क उपरो द तावेज को इस यायालय ारा संजय गेरा के मामले (उपरो उपरो उपरो उपरो ) म संद भत और िवचार कया गया है और उठाए गए तक म कोई यो यता नह पाई गई है।
20. मौजूदा मामले म ितवादी ने अित र क मत क मांग को चुनौती देते ए 1.10.2003 को दीवानी मुकदमा दायर कया था।संजय गेरा के मामले म इस यायालय का िनणय 22.02.2005 को दया गया था।यह त य अपीला थय क जानकारी म होने के बावजूद, मुकदमे का िवरोध कया गया था और 19.08.2008 को इसका फै सला सुनाया गया था।मामला यह समा नह आ, अपीलकता ारा थम अपीलीय यायालय के सम अपील क गई और िवफल होने पर उ यायालय के सम और उसके बाद इस यायालय के सम भी। उपरो कारण और िविभ तर पर यायालय का समय बबाद करने के िलए, हम अपीला थय पर सव यायालय म य थता क म जमा कए जाने वाले 1,00,000/- पये क लागत का बोझ डालना उिचत समझते ह। 21 इसके अलावा, यह देखते ए क ितवादी अनाव यक प से इस यायालय तक मुकदमेबाजी म घसीटा गया था, उ ह ₹ 50,000/- क लागत (कॉ ट) दया जाना उिचत है।
22. उपयु रािश अपीलकता ारा उन दोषी अिधका रय /कमचा रय से वसूल क जाएगी, िज ह ने इस यायालय के िनणय ारा कवर कए जाने के बावजूद िविभ तर पर अपील दायर करने के िलए उपयु होने क राय दी थी।
23. ितवादी से वसूल क जाने वाली अित र रािश ₹ 26,880/- थी िजसका नो टस जारी करने के तर पर भी कोई औिच य नह था। मुकदमा 19 अग त, 2008 को िड कर दया गया था।मुकदमेबाजी पर खच क जाने वाली रािश ब त अिधक होगी।यह अिधका रय के अवैयि क और गैर-िज मेदाराना रवैये के कारण है, जो सब कुछ कोट म डाल देना चाहते ह और िनणय लेने से कतराते ह।हालां क, अभी भी अपीलकता ने न केवल अपील दायर क थी, िजसके प रणाम व प मामल क लंिबतता/िवचाराधीनता के अलावा वक ल और संब खच के प म मुकदमेबाजी पर बड़ी रािश खच क होगी। इसके अलावा, जब मामला उ यायालय म उठाया गया था और उसके बाद जब इस यायालय के सम आदेश को चुनौती दी गई थी, तो कई अिधकारी या कमचारी चंडीगढ़ म िनयु वक ल से िमलने गए ह गे।यहां तक क उस रािश क भी गणना क जानी चािहए और दोषी अिधका रय से वसूली क जानी चािहए, िज ह ने इस यायालय के िनणय के बावजूद, उसी मु े से िनपटने के िलए मामले को अपील दायर करने के िलए फट होने क राय दी।
24. उपरो कारण से, अपील खा रज कर दी जाती है। लागत (कॉ ट) क रािश सु ीम कोट म य थता क म जमा क जानी चािहए और ितवादी को आज से दो महीने के भीतर भुगतान कया जाना चािहए और मुकदमेबाजी क लागत के संबंध म, छह महीने के भीतर आव यक काय कया जाए।इस यायालय म अनुपालन का हलफनामा तुत कया जाना है। ………………. यायाधीश (अभय एस. ओका) ………………. यायाधीश (राजेश बंदल) नई द ली 08 मई, 2023. //जेके-पीएम// vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m|s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA