Rahul Gupta v. Rajasthan State and Others

Supreme Court of India · 04 May 2023
M. R. Shah; Ahsanuddin Amanullah
Criminal Appeal Nos 1343-1344 of 2023 @ SLP (Crl) Nos 012669-012670 of 2022
2023 INSC 497
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the High Court's bail order in a murder case for lack of proper evidence scrutiny and remanded the matter for fresh consideration.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वो च्च न्यायालय
आपराधि क अपीलीय क्षेत्राधि कार
आपराधि क अपील संख्या 1343-1344/2023
(एसएलपी (सीआरएल) संख्या 012669-012670/2022)
राहुल गुप्ता …..अपीलार्थी- (गण)
बनाम
राजस्र्थीान राज्य और अन्य ……..प्रत्यर्थी- (गण)
निनण9य
एम. आर. शाह, न्याया ीश
JUDGMENT

1. एकल पीठ आपराधि क निर्वोनिर्वो जमानत आर्वोेदन संख्या 2363/2022 और एकल पीठ आपराधि क निर्वोनिर्वो नि>तीय जमानत आर्वोेदन संख्या 10068/2022 में राजस्र्थीान उच्च न्यायालय पीठ जयपुर >ारा पारिरत आदेश निदनांक 18.07.2022, जिजसक े >ारा उच्च न्यायालय ने भा.दं.सं. की ारा 302, 307, 201, 120 बी क े तहत अपरा ों क े लिलए पुलिलस स्टेशन कोतर्वोाली, जिजला ौलपुर में दज[9] प्रार्थीनिमकी संख्या 474/2021 से संबन्धिन् त मूल अभिभयुक्तों/निनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को जमानत पर रिरहा करने का निनदOश निदया र्थीा, से व्यभिर्थीत और असंतुष्ट महसूस करते हुए मूल भिशकायतकता9/मुखनिबर ने र्वोत9मान अपीलें पेश की हैं।

2. प्रारंभ में, यह ध्यान निदया जाना आर्वोश्यक है निक निनजी प्रत्यर्थी-गण/ अभिभयुक्तों क े निर्वोरुद्ध भा.दं.सं. की ारा 302, 307, 201, 120 बी क े तहत अपरा ों क े लिलए जांच क े बाद आरोप पत्र पेश निकया गया है। उपरोक्त क े बार्वोजूद और चाज9शीट का 2023 INSC 497 निहस्सा बनने र्वोाले साक्ष्यों को ध्यान में रखे निबना और यहां तक निक कभिर्थीत अपरा ों की गंभीरता और जांच क े दौरान एकत्र निकए गए साक्ष्यों पर निर्वोचार निकए निबना, उच्च न्यायालय ने यह देखते हुए निक इस बात की संभार्वोना है निक मुकदमे को समाप्त होने में लंबा समय लग सकता है, एक नॉन स्पीकिंकग आदेश >ारा अभिभयुक्तों/निनजी प्रत्यर्थिर्थीयों को जमानत पर रिरहा करने का निनदOश निदया है। भा.दं.सं. की ारा 302 क े तहत अपरा क े मामले में जिजसमें एक व्यनिक्त दोषी र्थीा, उच्च न्यायालय को जांच क े दौरान एकत्र निकए गए साक्ष्यों पर निर्वोचार करना चानिहए र्थीा। उच्च न्यायालय >ारा पारिरत आक्षेनिपत आदेश से ऐसा प्रतीत होता है निक उच्च न्यायालय >ारा की गई एकमात्र निटप्पणी पैराग्राफ 4 में हैं जो निनम्नानुसार हैं: "4. पक्षकारों क े अधि र्वोक्ताओं >ारा दी गई दलीलों पर निर्वोचार करते हुए और इस संभार्वोना को देखते हुए निक मुकदमे क े निनष्कष[9] आने में लंबा समय लग सकता है, यह न्यायालय याधिचकाकता9ओं को जमानत पर रिरहा करना न्यायोधिचत मानता है।” जब जांच क े बाद अभिभयुक्तों क े निर्वोरुद्ध आरोप पत्र दायर निकया जाता है, तो उच्च न्यायालय को जांच क े दौरान एकत्र निकए गए साक्ष्यों पर यह पता लगाने क े लिलए ध्यान देना चानिहए और/या उस पर निर्वोचार करना चानिहए निक क्या जांच क े दौरान ऐसा कोई साक्ष्य निमला है, जिजससे अभिभयुक्त को भारतीय दंड संनिहता की ारा 302 क े तहत गंभीर अपरा का दोषी पाया गया हो और इसलिलए, क्या आरोपी को जमानत पर रिरहा करना मुनाजिसब है या नहीं। इन परिरन्धिस्र्थीधितयों में, उच्च न्यायालय >ारा पारिरत आक्षेनिपत आदेश असं ारणीय है और इसे रद्द निकया जाना चानिहए और जमानत आर्वोेदनों पर नए जिसरे से निनण9य लेने क े लिलए मामले को उच्च न्यायालय को प्रधितप्रेनिषत निकए जाने की आर्वोश्यकता है।

3. अभिभयुक्त की ओर से उपन्धिस्र्थीत निर्वो>ान अधि र्वोक्ता ने निनर्वोेदन निकया है निक अभिभयुक्त सुनील गुप्ता की पत्नी मन्धिस्तष्क रक्तस्रार्वो से पीनिpत है।अभिभयुक्त उस आ ार पर अंतरिरम जमानत क े लिलए निनर्वोेदन कर सकता है और/या जमानत मांग सकता है, जिजस पर उच्च न्यायालय निर्वोधि क े अनुसार और अपनी योग्यता क े आ ार पर निर्वोचार कर सकता है।

4. उपयु9क्त को ध्यान में रखते हुए और ऊपर बताए गए कारणों से, र्वोत9मान अपील सफल होती है। उच्च न्यायालय >ारा निनजी प्रत्यर्थिर्थीयों- यहाँ मूल अभिभयुक्तों को जमानत पर रिरहा करते हुए पारिरत निकया गया आक्षेनिपत आदेश रद्द निकया जाता है। मूल अभिभयुक्तों को निनदOश निदया जाता है निक र्वोे आज से 10 निदन की अर्वोधि क े भीतर संबंधि त न्यायालय/जेल प्राधि करण क े समक्ष आत्मसमप9ण करें और उसक े बाद, उच्च न्यायालय निर्वोधि क े अनुसार और मामले क े गुण दोषों क े आ ार पर और जांच क े दौरान एकत्र की गई सामग्री/साक्ष्यों, जो अब चाज9-शीट का निहस्सा है, को ध्यान में रखते हुए और/या उन पर निर्वोचार करने क े बाद और उन प्रासंनिगक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जिजन्हें ज़मानत क े लिलए की गई प्रार्थी9ना पर निर्वोचार करते समय ध्यान में रखना आर्वोश्यक है, नए जिसरे से ज़मानत आर्वोेदनों का निनण9य और निनस्तारण करेगा। आत्मसमप9ण क े बाद, उच्च न्यायालय, जिजसे यह मामला लौटाया गया है, जल्द से जल्द जमानत अज- (आर्वोेदनों) का निनण9य और उसका निनस्तारण करेगा, जैसा निक इसमें पहले कहा गया है। इसक े सार्थी र्वोत9मान अपीलों को अनुमधित प्रदान की जाती है। न्याया ीश एम.आर. शाह न्याया ीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह नई निदल्ली 04 मई, 2023 यह अनुर्वोाद आर्टिटनिफभिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास' क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से निकया गया है। अस्र्वोीकरण: यह निनण9य र्वोादी क े प्रधितबंधि त उपयोग क े लिलए उसकी भाषा में समझाने क े लिलए स्र्थीानीय भाषा में अनुर्वोानिदत निकया गया है और निकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं निकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, निनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक होगा और निनष्पादन और काया9न्र्वोयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।