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गैर समाचार- यो य (नॉन
नॉन
नॉन
नॉन
– रपोटबल )
भारत के सव यायालय म
िसिवल अपीलीय े ािधकार
2023 क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या________
(@ िवशेष अनुमित यािचका (सी
सी
सी
सी) सं या 2022 क 20857)
ह रयाणा रा य और अ य ...... अपीलकतागण
बनाम
हीरा संह … ितवादीगण
के साथ
िसिवल अपील सं
िसिवल अपील सं.2023 का
का
का
का_
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी (सी
सी
सी
सी) सं या 28803/2018)
िसिवल अपील सं. 2023 का
का
का
का______
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 30435/2018)
का
का
का________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 418-419/2019)
क िसिवल अपील सं या_______
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 21301/2022)
का
का
का_________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 20856/2022)
का
का
का__________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 20859/2022)
का
का
का___________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी(सी
सी
सी
सी) सं या 20864-20865/2022)
क िसिवल अपील सं या________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 21305/2022)
िनणय
एम. आर. शाह, जे.
JUDGMENT
1. सीड यूपी सं या 26213/2014 और अ य संब रट यािचका म चंडीगढ़ म पंजाब और ह रयाणा उ यायालय ारा पा रत आम/कॉमन िनणय और आदेश दनांक 27.10.2016 से िथत और असंतु महसूस करते ए, िजसके ारा, उ यायालय क खंडपीठ ने उ रट यािचका को वीकार कर िलया है और घोिषत कया है क भूिम अिध हण, पुनवास और पुन थापन अिधिनयम, 2013 म उिचत मुआवजा और पारद शता के अिधकार क धारा 24 (2) के तहत िवचाराधीन भूिम के संबंध म अिध हण समा / पगत हो गया माना जाता है, ह रयाणा रा य और अ य ने वतमान अपील को ाथिमकता/वरीयता दी है।
2. उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य (कॉमन) िनणय और आदेश से, ऐसा तीत होता है क उ यायालय क खंडपीठ ने पैरा ाफ 21 म िन ानुसार अवलोकन करके यह घोिषत कया है क उ रदाता - मूल रट यािचकाकता क भूिम के संबंध म अिध हण को अिधिनयम, 2013 क धारा 24(2) के तहत पगत माना जाएगा (शैल बी डी ड टू हैव लै सड):- "(21) यह िन ववाद है क 1894 के अिधिनयम क धारा 31 (2) के अनुसार मुआवजे क रािश का भुगतान या उसे िसिवल या संदभ यायालय म जमा नह कया गया है।आगे येक मामले म अिधिनणय/पंचाट क ितिथ से यह देखा जा सकता है क इ हे 01.01.2014 को नए अिधिनयम के लागू होने से पांच वष या उससे अिधक पहले पा रत कया गया था।इस कार यह थािपत हो जाता है क ऐसे मामल म धारा 24(2) म िनिहत वैधािनक शत म से एक मुआवजे के भुगतान के गैर-भुगतान या इसके जमा होने क तारीख से पांच साल या उससे अिधक क अविध के िलए नए अिधिनयम के लागू होने तक िन ववाद प से थािपत है। समान प से यह मानना सही होगा क यािचकाकता ने येक मामले म यह थािपत कया है क अिध हीत भूिम/स पि य का भौितक क जा उनके पास बना आ है। ” 2.[1] रा य क ओर से यह मामला है क इन सभी मामल म भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 के तहत अिध हण क कायवाही भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 4/6 के तहत जारी अिधसूचना को चुनौती देने वाले भूिम मािलक ारा चुनौती दी गई थी और संबंिधत मूल भू- वािमय को कोई राहत नह िमली थी। ह रयाणा रा य क ओर से यह भी मामला है क वा तव म अिध हीत क गई भूिम का क जा अिधकांश मामल म रपट/रोज़नामचा बनाकर पहले ही ले िलया गया था और इसिलए, क जा लेने पर, भूिम रा य सरकार के पास िनिहत है। यह तुत कया जाता है क इसिलए, इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य, (2020) 8 एससीसी 129 म रपोट कया गया, के मामले म इस यायालय क संिवधान पीठ के िनणय के म ेनजर अिध िहत भूिम के संबंध म अिध हण क मािनत गतता नह मानी जाएगी, (देयर शैल नॉट बी एनी डी ड लै स ऑफ़ ए जीशन िवथ र पे ट टू दी लडस अ ायड) जैसा क उ यायालय ारा देखा और आयोिजत कया गया है।
3. ी के.टी.एस. तुलसी और ी गोपाल शंकरनारायणन, एसएलपी सं या 20857/2022 और 28803/2018 म मूल रट यािचकाकता क ओर से पेश होने वाले िव ान व र अिधव ा मशः हीरा संह और ीतम कुमार गोयल के मामले म, ने िनवेदन कया है क वा तव म संबंिधत भू- वािमय के पास िवचाराधीन भूिम का वा तिवक और भौितक क जा है। यह तुत कया जाता है क इसिलए और जब भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 31 के अनुसार मुआवजे का भुगतान अदा नह कया गया है, जैसा क उ यायालय ारा सही ढंग से देखा और अिभिनधा रत कया गया है, तो अिध हण क पगतता मानी जाएगी (देयर शैल बी डी ड लै स ऑफ़ ए जीशन) य क अिधिनयम, 2013 क धारा 24 (2) म उि लिखत शत पूरी हो जाती ह। 3.[1] ी के.टी.एस.तुलसी एसएलपी सं या 20857/2022 म मूल भूिम मािलक - हीरा संह क ओर से उपि थत िव ान व र अिधव ा ने आवेदन के साथ तुत कए गए कुछ द तावेज पर भरोसा कया है क वा तव म सड़क के संरेखण (रीअलाइनमे ट) का ताव चल रहा है और इसिलए िजस योजन के िलए भूिम का अिध हण कया गया है, भूिम क आव यकता नह है। 3.[2] एसएलपी सं या 28803/2018 म मूल भूिम मािलक - ीतम कुमार गोयल क ओर से उपि थत व र अिधव ा ी गोपाल शंकरनारायणन ने यह भी िनवेदन कया है क वतमान मामले म िवचाराधीन भूिम के डी- ए ज़ीशन का ताव लंिबत है और स य प से िवचाराधीन है, िजसके िलए उ ह ने आरटीआई अिधिनयम के तहत उ र पर ब त भरोसा कया है। 3.[3] अ य िवशेष अनुमित यािचका म ितवा दय क ओर से उपि थत िव ान अिधव ा ने अनुरोध/ ाथना क है क य द यह यायालय मामले को उ यायालय को वापस भेजने ( रमांड) का ताव करता/रखता है उस मामले म भूिम मािलक के प म अिधिनयम, 2013 क धारा 101 ए के तहत रा य सरकार से संपक करने क वतं ता आरि त क जानी चािहए, जैसा क ह रयाणा रा य के िलए अिध हीत भूिम के अिध हण के िलए लागू है।
4. संबंिधत प क ओर से उपि थत िव ान अिधव ा को सुनकर और उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य / कॉमन िनणय और आदेश को पढ़ने के बाद, अिधक िवशेष प से, िववा दत आदेश का पैरा 21 और जैसा क ह रयाणा रा य क ओर से मामला यह है क रपट/रोजनामचा तैयार करके िवचाराधीन भूिम का क जा ले िलया गया था और एक मामले म थगन आदेश/लंिबत मुकदमेबाजी के कारण क जा नह िलया जा सका, इंदौर िवकास ािधकरण (उपरो उपरो उपरो उपरो ) के मामले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून को यान म रखते ए कानून के अनुसार और अपने गुण के आधार पर नए िसरे से रट यािचका पर िनणय लेने के िलए मामल को उ यायालय म वापस भेजने क आव यकता है (दी मैटस आर र ायड टू बी रमा डेड टू दी हाई कोट)।
5. उपरो के म ेनजर और ऊपर बताए गए कारण के कारण, मामल के गुण-दोष के बारे म और गहन िवचार कए िबना और कसी भी प कार के प म गुण-दोष पर कुछ भी कए िबना, हम उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य िनणय और आदेश को अपा त करते ह और इंदौर िवकास ािधकरण (उपरो उपरो उपरो उपरो ) के मामले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून को यान म रखते ए और कानून के अनुसार और मामल क अपनी यो यता के आधार पर नए िसरे से िनणय लेने के िलए मामल को उ यायालय म वापस भेजते है (रेिमट दी मैटस बैक टू दी हाई कोट)।सभी दलील जो संबंिधत प के िलए उपल ध हो सकते ह, उ ह कानून के अनुसार और अपने वयं के गुण के आधार पर उ यायालय ारा िवचार कए जाने के िलए खुला रखा गया है और जैसा क इसम ऊपर देखा/कहा गया है।
6. हम उ यायालय से अनुरोध करते ह क वह ज द से ज द और अिधमानतः वतमान आदेश क ाि क तारीख से नौ महीने क अविध के भीतर रमांड पर रट यािचका का िनणय और िनपटान करे।हालां क, यह देखा गया है क रमांड का आदेश रा य सरकार को भूिम के डी-ए ज़ीशन पर कोई उिचत िनणय लेने से नह रोकता है, जैसा क मूल भूिम मािलक - ीतम कुमार गोयल क ओर से दावा कया गया है (एसएलपी सं या 28803/2018 म) और उस पर कानून के अनुसार और अपनी यो यता के आधार पर और य द कानून के तहत अनुमित हो तो िवचार कया जा सकता है।
7. इसी कार, एसएलपी (सी) सं या 2966-2967/2021 और अ य संब िवशेष अनुमित यािचका म पा रत आदेश दनांक 29.09.2021 को यान म रखते ए, मूल रट यािचकाकता के प म यह वतं ता आरि त है क वे अिधिनयम, 2013 क धारा 101 ए के संदभ म रा य सरकार को एक अ यावेदन दे सकते ह, जैसा क ह रयाणा रा य पर लागू है, य द वे चाह तो आज से एक महीने के भीतर ऐसा कया जा सकता है, िजसपर उसके बाद चार महीने क अविध के भीतर कानून के अनुसार और उसके गुण के आधार पर िनणय िलया जा सकता है, िजसके िलए हमने कसी भी प कार के प म कुछ भी नह कया है। उपरो के अनुसार वतमान अपील का िन तारण कया जाता है।कोई लागत/खच नह । [एम.आर. शाह, यायाधीश] [सी. टी. रिवकुमार, यायाधीश] नई द ली; 02 मई, 2023 vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m|s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA