Haryana State v. Heera Singh

Supreme Court of India · 02 May 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No 2023 @ SLP (Crl) Nos 20857/2022, 28803/2018, 30435/2018, 418-419/2019, 21301/2022, 20856/2022, 20859/2022, 20864-20865/2022, 21305/2022
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the High Court's order deeming land acquisition complete under the 2013 Act and remanded the matter for fresh consideration in light of possession, title, and statutory conditions.

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गैर समाचार
गैर समाचार- यो य (नॉन
नॉन
नॉन
नॉन
– रपोटबल )
भारत के सव यायालय म
िसिवल अपीलीय े ािधकार
2023 क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या
क िसिवल अपील सं या________
(@ िवशेष अनुमित यािचका (सी
सी
सी
सी) सं या 2022 क 20857)
ह रयाणा रा य और अ य ...... अपीलकतागण
बनाम
हीरा संह … ितवादीगण
के साथ
िसिवल अपील सं
िसिवल अपील सं.2023 का
का
का
का_
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी (सी
सी
सी
सी) सं या 28803/2018)
िसिवल अपील सं. 2023 का
का
का
का______
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 30435/2018)
का
का
का________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 418-419/2019)
क िसिवल अपील सं या_______
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 21301/2022)
का
का
का_________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 20856/2022)
का
का
का__________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 20859/2022)
का
का
का___________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी(सी
सी
सी
सी) सं या 20864-20865/2022)
क िसिवल अपील सं या________
(@एसएलपी
एसएलपी
एसएलपी
सी
सी
सी) सं या 21305/2022)
िनणय
एम. आर. शाह, जे.
JUDGMENT

1. सीड यूपी सं या 26213/2014 और अ य संब रट यािचका म चंडीगढ़ म पंजाब और ह रयाणा उ यायालय ारा पा रत आम/कॉमन िनणय और आदेश दनांक 27.10.2016 से िथत और असंतु महसूस करते ए, िजसके ारा, उ यायालय क खंडपीठ ने उ रट यािचका को वीकार कर िलया है और घोिषत कया है क भूिम अिध हण, पुनवास और पुन थापन अिधिनयम, 2013 म उिचत मुआवजा और पारद शता के अिधकार क धारा 24 (2) के तहत िवचाराधीन भूिम के संबंध म अिध हण समा / पगत हो गया माना जाता है, ह रयाणा रा य और अ य ने वतमान अपील को ाथिमकता/वरीयता दी है।

2. उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य (कॉमन) िनणय और आदेश से, ऐसा तीत होता है क उ यायालय क खंडपीठ ने पैरा ाफ 21 म िन ानुसार अवलोकन करके यह घोिषत कया है क उ रदाता - मूल रट यािचकाकता क भूिम के संबंध म अिध हण को अिधिनयम, 2013 क धारा 24(2) के तहत पगत माना जाएगा (शैल बी डी ड टू हैव लै सड):- "(21) यह िन ववाद है क 1894 के अिधिनयम क धारा 31 (2) के अनुसार मुआवजे क रािश का भुगतान या उसे िसिवल या संदभ यायालय म जमा नह कया गया है।आगे येक मामले म अिधिनणय/पंचाट क ितिथ से यह देखा जा सकता है क इ हे 01.01.2014 को नए अिधिनयम के लागू होने से पांच वष या उससे अिधक पहले पा रत कया गया था।इस कार यह थािपत हो जाता है क ऐसे मामल म धारा 24(2) म िनिहत वैधािनक शत म से एक मुआवजे के भुगतान के गैर-भुगतान या इसके जमा होने क तारीख से पांच साल या उससे अिधक क अविध के िलए नए अिधिनयम के लागू होने तक िन ववाद प से थािपत है। समान प से यह मानना सही होगा क यािचकाकता ने येक मामले म यह थािपत कया है क अिध हीत भूिम/स पि य का भौितक क जा उनके पास बना आ है। ” 2.[1] रा य क ओर से यह मामला है क इन सभी मामल म भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 के तहत अिध हण क कायवाही भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 4/6 के तहत जारी अिधसूचना को चुनौती देने वाले भूिम मािलक ारा चुनौती दी गई थी और संबंिधत मूल भू- वािमय को कोई राहत नह िमली थी। ह रयाणा रा य क ओर से यह भी मामला है क वा तव म अिध हीत क गई भूिम का क जा अिधकांश मामल म रपट/रोज़नामचा बनाकर पहले ही ले िलया गया था और इसिलए, क जा लेने पर, भूिम रा य सरकार के पास िनिहत है। यह तुत कया जाता है क इसिलए, इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य इंदौर िवकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य, (2020) 8 एससीसी 129 म रपोट कया गया, के मामले म इस यायालय क संिवधान पीठ के िनणय के म ेनजर अिध िहत भूिम के संबंध म अिध हण क मािनत गतता नह मानी जाएगी, (देयर शैल नॉट बी एनी डी ड लै स ऑफ़ ए जीशन िवथ र पे ट टू दी लडस अ ायड) जैसा क उ यायालय ारा देखा और आयोिजत कया गया है।

3. ी के.टी.एस. तुलसी और ी गोपाल शंकरनारायणन, एसएलपी सं या 20857/2022 और 28803/2018 म मूल रट यािचकाकता क ओर से पेश होने वाले िव ान व र अिधव ा मशः हीरा संह और ीतम कुमार गोयल के मामले म, ने िनवेदन कया है क वा तव म संबंिधत भू- वािमय के पास िवचाराधीन भूिम का वा तिवक और भौितक क जा है। यह तुत कया जाता है क इसिलए और जब भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 31 के अनुसार मुआवजे का भुगतान अदा नह कया गया है, जैसा क उ यायालय ारा सही ढंग से देखा और अिभिनधा रत कया गया है, तो अिध हण क पगतता मानी जाएगी (देयर शैल बी डी ड लै स ऑफ़ ए जीशन) य क अिधिनयम, 2013 क धारा 24 (2) म उि लिखत शत पूरी हो जाती ह। 3.[1] ी के.टी.एस.तुलसी एसएलपी सं या 20857/2022 म मूल भूिम मािलक - हीरा संह क ओर से उपि थत िव ान व र अिधव ा ने आवेदन के साथ तुत कए गए कुछ द तावेज पर भरोसा कया है क वा तव म सड़क के संरेखण (रीअलाइनमे ट) का ताव चल रहा है और इसिलए िजस योजन के िलए भूिम का अिध हण कया गया है, भूिम क आव यकता नह है। 3.[2] एसएलपी सं या 28803/2018 म मूल भूिम मािलक - ीतम कुमार गोयल क ओर से उपि थत व र अिधव ा ी गोपाल शंकरनारायणन ने यह भी िनवेदन कया है क वतमान मामले म िवचाराधीन भूिम के डी- ए ज़ीशन का ताव लंिबत है और स य प से िवचाराधीन है, िजसके िलए उ ह ने आरटीआई अिधिनयम के तहत उ र पर ब त भरोसा कया है। 3.[3] अ य िवशेष अनुमित यािचका म ितवा दय क ओर से उपि थत िव ान अिधव ा ने अनुरोध/ ाथना क है क य द यह यायालय मामले को उ यायालय को वापस भेजने ( रमांड) का ताव करता/रखता है उस मामले म भूिम मािलक के प म अिधिनयम, 2013 क धारा 101 ए के तहत रा य सरकार से संपक करने क वतं ता आरि त क जानी चािहए, जैसा क ह रयाणा रा य के िलए अिध हीत भूिम के अिध हण के िलए लागू है।

4. संबंिधत प क ओर से उपि थत िव ान अिधव ा को सुनकर और उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य / कॉमन िनणय और आदेश को पढ़ने के बाद, अिधक िवशेष प से, िववा दत आदेश का पैरा 21 और जैसा क ह रयाणा रा य क ओर से मामला यह है क रपट/रोजनामचा तैयार करके िवचाराधीन भूिम का क जा ले िलया गया था और एक मामले म थगन आदेश/लंिबत मुकदमेबाजी के कारण क जा नह िलया जा सका, इंदौर िवकास ािधकरण (उपरो उपरो उपरो उपरो ) के मामले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून को यान म रखते ए कानून के अनुसार और अपने गुण के आधार पर नए िसरे से रट यािचका पर िनणय लेने के िलए मामल को उ यायालय म वापस भेजने क आव यकता है (दी मैटस आर र ायड टू बी रमा डेड टू दी हाई कोट)।

5. उपरो के म ेनजर और ऊपर बताए गए कारण के कारण, मामल के गुण-दोष के बारे म और गहन िवचार कए िबना और कसी भी प कार के प म गुण-दोष पर कुछ भी कए िबना, हम उ यायालय ारा पा रत आ ेिपत सामा य िनणय और आदेश को अपा त करते ह और इंदौर िवकास ािधकरण (उपरो उपरो उपरो उपरो ) के मामले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून को यान म रखते ए और कानून के अनुसार और मामल क अपनी यो यता के आधार पर नए िसरे से िनणय लेने के िलए मामल को उ यायालय म वापस भेजते है (रेिमट दी मैटस बैक टू दी हाई कोट)।सभी दलील जो संबंिधत प के िलए उपल ध हो सकते ह, उ ह कानून के अनुसार और अपने वयं के गुण के आधार पर उ यायालय ारा िवचार कए जाने के िलए खुला रखा गया है और जैसा क इसम ऊपर देखा/कहा गया है।

6. हम उ यायालय से अनुरोध करते ह क वह ज द से ज द और अिधमानतः वतमान आदेश क ाि क तारीख से नौ महीने क अविध के भीतर रमांड पर रट यािचका का िनणय और िनपटान करे।हालां क, यह देखा गया है क रमांड का आदेश रा य सरकार को भूिम के डी-ए ज़ीशन पर कोई उिचत िनणय लेने से नह रोकता है, जैसा क मूल भूिम मािलक - ीतम कुमार गोयल क ओर से दावा कया गया है (एसएलपी सं या 28803/2018 म) और उस पर कानून के अनुसार और अपनी यो यता के आधार पर और य द कानून के तहत अनुमित हो तो िवचार कया जा सकता है।

7. इसी कार, एसएलपी (सी) सं या 2966-2967/2021 और अ य संब िवशेष अनुमित यािचका म पा रत आदेश दनांक 29.09.2021 को यान म रखते ए, मूल रट यािचकाकता के प म यह वतं ता आरि त है क वे अिधिनयम, 2013 क धारा 101 ए के संदभ म रा य सरकार को एक अ यावेदन दे सकते ह, जैसा क ह रयाणा रा य पर लागू है, य द वे चाह तो आज से एक महीने के भीतर ऐसा कया जा सकता है, िजसपर उसके बाद चार महीने क अविध के भीतर कानून के अनुसार और उसके गुण के आधार पर िनणय िलया जा सकता है, िजसके िलए हमने कसी भी प कार के प म कुछ भी नह कया है। उपरो के अनुसार वतमान अपील का िन तारण कया जाता है।कोई लागत/खच नह । [एम.आर. शाह, यायाधीश] [सी. टी. रिवकुमार, यायाधीश] नई द ली; 02 मई, 2023 vLohdj.k%& LFkkuh; Hkk’kk esa vuqokfnr fu.k;Z oknh ds lhfer mi;ksx ds fy, gS rkfd og viuh Hkk’kk esa bls le> lds vkSj fdlh vU; m|s”; ds fy, bldk mi;ksx ugha fd;k tk ldrk gSA lHkh O;ogkfjd vkSj vkf/kdkfjd m|s”;ks ds fy, fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd gksxk vkSj fu’iknu vkSj dk;kZUo;u ds m)s”; ds fy, mi;qDr jgsxkA