Yath No. 1 v. Indore Vikas Adhikaran

Delhi High Court · 01 May 2023
Abhay S. Oka; Rajesh Bandal
Writ Petition No. 2994/2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that under Section 24(2) of the 2013 Act, land acquisition does not lapse if either possession is taken or compensation is paid/deposited, and allowed the appeal setting aside the High Court order dismissing the writ petition.

Full Text
Translation output
िस वल यािचका सं 2994/2023
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
द ली वकास ािधकरण ...अपीलकता
बनाम
अनीता िसंह एवं अ य ... यथ गण
िनणय
या. राजेश बंदल
JUDGMENT

1. रट यािचका (िस) सं या 5339/2016 म द ली उ च यायालय ारा पा रत दनांक 22.08.2017 क े आदेश को इस यायालय क े सम लागू कया गया है। उपरो आदेश क े तहत, यथ सं. 1 ारा भूिम अिध हण, पुन ार, पुनवासन म उिचत ितकार तथा पारदिशता का अिधकार अिधिनयम, 2013 (इसक े बाद इसे "2013 अिधिनयम" क े प म संदिभत कया गया है) क धारा 24(2) को लागू करते हुए दायर रट यािचका को अनुमित द गई थी और यह राय द गई थी क वचाराधीन अिध हण समा हो गया है।

2. मामले क े त य जो अिभलेख पर उपल ध ह, वे यह ह क यथ सं. 1 ने एक रट यािचका दायर क थी जसम कहा गया था क उसने दनांक 04.03.2005 को व य वलेख क े आधार पर द ली क े दचाऊ ं कलां गांव क े राज व भूसंप म थत खसरा सं या 140/9/1 क े साथ 100 वग गज खर दा था। उ भूिम अिध हण का वषय थी। भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 (इसक े बाद इसे "1894 अिधिनयम" क े प म संदिभत कया गया है) क धारा 4 क े तहत एक अिधसूचना 07.04.2006 पर जार क गई थी, जसक े बाद 04.04.2007 पर 1894 क धारा 6 क े तहत एक अिधसूचना जार क गई थी। पुर कार क घोषणा भूिम अिध हण कले टर ारा 1894 क े अिधिनयम क धारा 11 क े तहत 30.12.2008 पर क गई थी।

3. रट यािचका वष 2016 म 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) को लागू करते हुए दायर क गई थी, जसम दावा कया गया था क यथ सं. 1 को न तो मुआवजे का भुगतान कया गया है और न ह अिध हण ािधकरण ारा भूिम का क जा दया गया था, इसिलए, अिध हण समा हो गया।

4. उ च यायालय क े सम दायर ित शपथप म भूिम अिध हण कले टर ारा अपनाया गया ख यह था क अिध हत भूिम का क जा 10.02.2012 को 3 ब वा भूिम को छोड़कर िलया गया था, जस पर क ु छ संरचना का िनमाण कया गया था। यथ सं. 1 भूिम वामी न होने क े कारण, भूिम क े िलए मुआवजा, उन मामल स हत जहां वािम व क े संबंध म ववाद था, 27.12.2013 को िनदश यायालय म जमा कया गया था।

5. उ च यायालय ने पाया क िनधा रत शत म से एक 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) म यथ सं. 1 को मुआवजे क े भुगतान क े संबंध म वीकार नह ं कया गया है। अिध हण समा हो गया।

6. अपीलकता क े व ान अिधव ा ने तुत कया क इस यायालय क े सं वधान पीठ क े फ ै सले को यान म रखते हुए इंदौर वकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल और अ य, जसक े ारा पुणे नगर िनगम और अ य बनाम िमिसर मल सोलंक और अ य िनणय को उलट दया गया था। उ च यायालय ारा पा रत आदेश को कानूनी प से कायम नह ं रखा जा सकता है। सं वधान पीठ ारा यह राय द गई थी क दोन शत म से कसी एक का अनुपालन अथात ् अिध हण को बनाए रखने क े िलए भूिम का क जा लेना या मुआवजे का भुगतान करना पया है। इस मामले म, यह यथ सं. 1 क वह भूिम क अिभिल खत मािलक नह ं थी, हालाँ क उसने दावा कया क वचाराधीन भूिम उसक े दनांक 04.03.2005 व य वलेख ारा खर दा गया था। इस भूिम का उपयोग सरकार ारा द ली क े िनयो जत वकास क े तहत 100 मीटर चौड़ सड़क क े िनमाण क े िलए कया जा रहा है। शहर व तार सड़क-II क े िलए भूिम क आव यकता है, जो रा.रा.-1, रा.रा..-10 और रा.रा..-8 को रा.रा..-2 से जोड़ रहा है। उ प रयोजना जनता क े िलए बहुत उपयोगी है और इसे अमृत महो सव ( वतं ता क े 75 वष) क े आलोक म 15 अग त 2023 से पहले पूरा कया जाना है। इससे द ली म भीड़भाड़ कम करने और जनता को बेहतर कने ट वट दान करने म मदद िमलेगी। चूं क वािम व क े संबंध म ववाद था, इसिलए मुआवजे क रािश 27.12.2013 पर िनदश यायालय म जमा क गई थी। यह ितपूित देने क े बराबर होगा य क वािम व क े ववाद क े मामले म इसका भुगतान कसी को नह ं कया जा सकता था। अपीलकता क े व ान अिधव ा ने आगे कहा क यथ सं. 1 ने वयं मुआवजे को जार करने क े िलए भूिम अिध हण कले टर क े सम 06.05.2009 को आवेदन दायर कया था। उसने उसम प प से कहा क हालां क वह भूिम क अिभिल खत मािलक नह ं है, य क उसने मु तारनामा ारा से इसे खर दा था, मुआवजे का भुगतान भूखंड क े अिभिल खत मािलक को नह ं कया जाना चा हए। यह यथ सं. 1 क ओर से वीकार कया गया था क उसे भूिम क े अिध हण क े बारे म जानकार थी। यायालय ारा पा रत आदेश उ च यायालय िनर त कए जाने यो य है।

7. प कार क े िलए व ान अिधव ा को सुना और पेपर बु स का अवलोकन कया।

8. इंदौर वकास ािधकरण क े मामले (उपरो ) म इस यायालय क सं वधान पीठ ने राय द है क अिध हत भूिम का क जा लेना या भूिम मािलक को मुआवजे का भुगतान करना 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े संदभ म अिध हण को समा होने से बचाने क े िलए पया होगा। इस यायालय क सं वधान पीठ क े सम उठाए गए विभ न का भी उ र दया गया। ासंिगक पैरा-सं. 362 और 366 नीचे दये गए ह: "362. प रणाम व प, पुणे नगर िनगम और अ य (पूव ) म िनणय दया जाता है। इसक े ारा इस िनणय को उलटा जाता है और अ य सभी िनणय जनम पुणे नगर िनगम (पूव ) का पालन कया गया है, उ ह भी खा रज कर दया जाता है।...

366. उपयु चचा को यान म रखते हुए, हम का िन निल खत उ र देते ह:-

366.1. धारा 24(1)(क) क े ावधान क े अंतगत य द 2013 क े अिधिनयम क े लागू होने क तार ख 1-1-2014 को अिधिनणय नह ं कया जाता है तो कायवाह म कोई यपगमन नह ं होगा। मुआवजे का िनधारण 2013 क े अिधिनयम क े ावधान क े तहत कया होगा।

366.2. य द अिधिनणय यायालय क े अंत रम आदेश क े दायरे म आने वाली अविध को छोड़कर पांच साल क अविध क े भीतर पा रत कया गया है, तो 1894 अिधिनयम क े तहत 2013 अिधिनयम क धारा 24(1)(ख) क े तहत कायवाह जार रहेगी ऐसा मानते हुए क इसे िनर त नह ं कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म क जे और मुआवजे क े बीच उपयोग कए गए "या" श द को "न ह " क े प म अथवा "और" क े प म पढ़ा जाना चा हए। वष 2013 क धारा 24(2) क े तहत भूिम अिध हण क कारवाई का यपगमन उस थित म समझा जाता है, जब उ अिधिनयम क े लागू होने से पहले पांच वष या उससे अिधक समय तक अिधका रय क िन यता क े कारण भूिम का क जा नह ं िलया गया हो और न ह मुआवजा दया गया हो। दूसरे श द म, य द क जा ले िलया गया है, मुआवजा नह ं दया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा दया गया है, क जा नह ं िलया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। 366.[4] 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े मु य भाग म "भुगतान" श द म यायालय म मुआवजे को जमा करना शािमल नह ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म जमा नह ं करने क े प रणाम का ावधान है, य द अिधकांश भूिम जोत क े संबंध म इसे जमा नह ं कया गया है तो 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक सभी लाभाथ (भूिम मािलक) 2013 अिधिनयम क े ावधान क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह गे। य द भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 31 क े तहत बा यता पूर नह ं क गई है, तो उ अिधिनयम क धारा 34 क े तहत याज दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने ( यायालय म) क े प रणाम व प भूिम अिध हण क कायवाह का यपगमन नह ं होता है। पांच वष या उससे अिधक अविध क े िलए अिधकांश जोत क े संबंध म जमा न करने क थित म, 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक "भू वािमय " को 2013 अिधिनयम क े तहत मुआवजे का भुगतान कया जाए।

366.5. य द कसी य को 1894 अिधिनयम क धारा 31(1) क े ावधान क े अनुसार मुआवजा दया गया है, तो वह यह दावा करने क े िलए वतं नह ं है क मुआवजे का भुगतान न करने या यायालय म मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अिध हण का यपगमन हो गया है। भुगतान करने क बा यता धारा 31(1) क े तहत रािश को दान करक े पूर हो जाती है। जन भू- वािमय ने मुआवजा लेने से इनकार कर दया था या ज ह ने अिधक मुआवजे क े िलए िसफा रश कए क मांग क थी, वे यह दावा नह ं कर सकते क 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत अिध हण क या का यपगमन हो गया था।

366.6. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े पर तुक को े भाग क े प म माना जाना है, न क धारा 24(1)(ख) क े भाग प म।

366.7. 1894 अिधिनयम क े तहत और जैसा क धारा 24(2) क े तहत ता वत है, क जा लेने का तर का पंचनामा/ ापन तुत करने क े ारा है। एक बार 1894 क े अिधिनयम क धारा 16 क े तहत क जा लेने पर अिधिनणय पा रत हो जाने क े बाद, भूिम रा य म िन हत हो जाती है, 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत कोई िनिन हतीकरण का ावधान नह ं है, य क एक बार क जा लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई यपगमन नह ं है।

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366.8. कायवा हय क े समझे गए यपगमन को ता वत करने वाले धारा 24(2) क े ावधान उस थित म लागू होते ह जब दनांक 1-1-2014 तक संबंिधत ािधकार क े पास भूिम अिध हण हेतु लं बत एक कायवाह म ािधकार गण अपनी िन यता क े कारण 2013 क े अिधिनयम क े लागू होने से पूव पांच साल या उससे अिधक समय तक क जा लेने और मुआवजे का भुगतान करने म वफल रहे ह । यायालय ारा पा रत अंत रम आदेश क े अ त व क अविध को पांच वष क गणना म न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) भूिम अिध हण क पूण हो चुक कायवाह क वैधता पर सवाल उठाने क े िलए नए वाद हेतुक को ज म नह ं देती है। धारा 24, 2013 अिधिनयम क े लागू होने क ितिथ अथात 1-1-2014 को लं बत कसी कायवाह क े िलए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयब दाव को पुनज वत करती है और न ह पूण हो चुक कायवाह को फर से शु करती है और न ह भूिम मािलक को अिध हण को अवैध घो षत करने क े िलए अदालत क े बजाय ेजर म मुआवजे को जमा करने क े तर क े क वैधता पर सवाल उठाने क अनुमित देती है।”

9. यथ सं. 1 का यह वीकार कया गया मामला है क वह 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत अिधसूचना जार करते समय या यहां तक क अिधिनणय पा रत करने क े समय वह अिभिल खत मािलक नह ं थी। ितपूित जार करने क े िलए भूिम अिध हण कले टर को उनक े ारा दायर दनांक 06.05.2009 आवेदन म भी इसका उ लेख कया गया है। यह अिधिनणय क े अिध हण और पा रत होने क े जानकार को था पत करता है। इस त य क े कारण क वािम व का ववाद था, मुआवजे क रािश 1894 अिधिनयम क धारा 30/31 क े तहत िनदश यायालय म भूिम अिध हण कले टर ारा जमा क गई थी। िनदश यायालय म ितपूित जमा करने क े मु े पर कानून क थित तय कर ली गई है। इंदौर वकास ािधकरण (पूव ) मामले क े पैरा ाफ 117,118 और 119, िन निल खत ह: "117. मुआवजे का भुगतान 1894 अिधिनयम क े िलए अिधिनयम क धारा 31 ारा ावधान कया गया है, जो धारा 11 क े तहत अिधिनणय पा रत करने क े बाद होना है। अपवाद, धारा 17 क े तहत ता कािलकता क े मामले म है, जहां इसे क जा करने से पहले िन वदा देनी होती है। एक बार अिधिनणय पा रत हो जाने क े बाद, कले टर इसक े हकदार य य को मुआवजे का भुगतान करने क े िलए बा य है, जैसा क अिधिनणय म पाया जाता है और उ ह इसका भुगतान तब तक करेगा जब तक क धारा 31 क उप-धारा (2) म उ ल खत आक मकताओं ारा "रोका" न जाए। धारा 31(3) म एक अबािधत खंड है जो कले टर को उपयु सरकार क मंजूर क े साथ, बहुमत क े हत म, अ य भूिम क े अनुदान क े बदले म अ य भूिम पर भूिम राज व क माफ या ऐसे अ य तर क े से अिधकृ त करता है जो यायसंगत हो।

118. धारा 31(1) अिधिनयिमत करती है क कले टर अिधिनणय क े अनुसार उसक े हकदार य य को उसक े ारा दए गए मुआवजे का भुगतान करना होगा और भूिम म िच रखने वाले य को ऐसी रािश का भुगतान करना होगा, जब तक क उसे (कले टर) ऐसा करने से रोका न जाए। ऐसा करना, उप-धारा (2) ारा दान क गई तीन आक मकताओं म से कसी क े िलए धारा 31(2) यायालय म मुआवजे क े जमा करने का ावधान करती है य द रा य को िन निल खत क थित म भुगतान करने से रोका जाता हैः (i) इसे ा करने से इनकार करना; (ii) य द कोई य भूिम को अलग करने क े िलए स म नह ं है; (iii) य द शीषक को लेकर कोई ववाद है ितपूित ा करना; या (iv) य द वभाजन क े बारे म ववाद है। ऐसी अिनवायताओं म, कले टर मुआवजे क रािश उस यायालय म जमा करेगा जस पर धारा 18 क े तहत एक संदभ तुत कया जाएगा।

119. धारा 34 एक ऐसी थित से संबंिधत है जहां धारा 31 क े तहत कसी भी दािय व को पूरा नह ं कया जाता है अथात् जब मुआवजे क रािश का भुगतान नह ं कया जाता है या भूिम का क जा लेने से पहले जमा नह ं कया जाता है, तो कले टर उस पर 9% ित वष याज क दर क े साथ द गई रािश का भुगतान करेगा इस कार क जा लेने क े समय से लेकर भुगतान या जमा कए जाने तक और क जा लेने क ितिथ से एक वष क े बाद, देय याज 15% ित वष हो जाएगा। 1894 क े अिधिनयम क योजना म यह प प से कहा गया है क जब धारा 11 क े तहत िनणय पा रत कया जाता है, तो धारा 16 क े तहत दान कए गए ावधान क े अनुसार क जा िलया जाता है, भूिम रा य सरकार ारा अिधकृ त होती है। धारा 12(2) क े तहत कले टर ारा अिधिनणय क सूचना जार क जाती है। क जा लेना भुगतान पर िनभर नह करता है। धारा 31 क े तहत भुगतान को तब तक अदा कया जाना चा हए जब तक क कले टर को धारा 31(2) क े तहत "भुगतान करने से रोका" न जाए। धारा 31(1) या 31(3) क े तहत वफलता क े मामले म, कले टर को भी भुगतान करने से नह ं रोका जाता है, ले कन यह धारा 34 क े तहत पहले वष क े िलए 9% याज दर वहन करता है और उसक े बाद 15% जस तार ख से इसे भुगतान या जमा कया जाना चा हए। इस कार, धारा 16 क े तहत एक बार रा य म भूिम अिधकृ त हो जाने क े बाद, धारा 31(1) क े तहत मुआवजे का भुगतान करने या धारा 31(2) क े तहत जमा करने म वफलता क े मामले म, याज क े साथ मुआवजे का भुगतान करना होगा, और धारा 31 का पालन न करने क े कारण, अिध हण का कोई यपगमन नह ं है। इसी भावना को 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) म ावधान करक े आगे बताया गया है। य द एक बार क जा ले िलया गया है और भुगतान नह ं कया गया है, तो मुआवजे का भुगतान धारा 34 क े तहत उ ल खत याज क े साथ कया जाना चा हए, और कसी मामले म, भुगतान कया गया है और क जा नह ं िलया गया है तो धारा 24 (2) क े तहत कोई यपगमन नह है। ऐसे मामले म जहां 1894 अिधिनयम क धारा 16 या 17 (1) क े तहत क जा िलया गया है तब भूिम पूर तरह से रा य म अिधकृ त है, सभी दािय व से मु है, य द मुआवजे का भुगतान नह ं कया जाता है, तो कोई विनवेश नह ं है कोई यपगन नह ं होगा य क 1894 अिधिनयम क धारा 34 क े तहत मुआवजे पर उ ल खत याज 9% या 15% लगता है। े परंतुक म क ु छ हतकार उपबंध तैयार कए गए ह य द अिधकांश भूिम क े संबंध म रािश जमा नह ं क गई है, तो ऐसी थित म, न क े वल वे य ब क सभी लाभाथ, यहां तक क अ पसं यक भी 2013 अिधिनयम क े ावधान क े अनुसार उ च मुआवजे क े हकदार ह गे। यु अिभ य " सभी लाभािथय उ भूिम अिध हण क धारा 4 क े तहत अिध हण क े िलए अिधसूचना म िन द है”, अथात् 1894 अिधिनय म जसका अथ है क जन य य को अिधक मुआवजे का भुगतान कया जाना है, वे ह ज ह धारा 4 क े तहत अिधसूचना क तार ख तक लाभािथय क े प म दज कया गया है। परंतुक इस िस ांत को भावी बनाता है, और आगे बढ़ाता है क 1894 क े तहत, धारा 4 क े तहत अिधसूचना जार होने क े बाद क गई खर द अमा य है। इस कार, धारा 24(2) क े परंतुक क े तहत उ च मुआवजे का लाभ 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत अिधसूचना म उ ल खत लाभािथय को दया जाना है।” (जोर दया गया)

10. इसक े अलावा, अिधिनयम 2013 क े 24 (2) क े संदभ म, थित का मामला सारांश इंदौर वकास ािधकरण (पूव ) क े पैरा 208 म दया गया है।, जो िन निल खत हैः "208..................... हमार राय म। जब रािश अदा क गयी है, तो कले टर ारा दािय व पूरा कर दया गया है। भू वािमय को इसे ा करने क े िलए बा य नह ं कया जा सकता है य द कसी य ने रािश वीकार नह ं क है तो वह भुगतान न करने का लाभ उठा सकता है, भले ह रािश वयं उसक े काय क े कारण अवैतिनक रह गई हो। उसक े िलए यह तक देना संभव नह ं है क उसे रािश का भुगतान नह ं कया गया है, इसिलए कायवाह म यपगमन होना चा हए। यहां तक क ऐसे मामले म जब भुगतान क े िलए ताव दया गया है ले कन जमा नह ं कया गया है, तो याज क े साथ रािश का भुगतान करने का दािय व बना रहता है और य द अिधकांश जोत क े िलए जमा नह ं कया गया है, तो इसक े िलए धारा 24(2) क े ावधान म भी पया ावधान दए गए ह। धारा 77 और 80 म 2013 अिधिनयम क योजना भी वह है जो 1894 अिधिनयम क धारा 31 और 34 म दान क गई है।

11. इंदौर वकास ािधकरण क े मामले (पूव ) म इस मु े पर भी वचार कया गया है क "अिध हण क े बाद रा य ारा भूिम क े क जे" का या अथ है। इसम यह राय द गई है क भूिम क े अिध हण और अिधिनणय पा रत होने क े बाद, भूिम रा य म सभी दािय व से मु हो जाती है। भूिम का अिधकार रा य क े पास है। इसक े बाद क जा बनाए रखने वाले कसी भी य को अितचार माना जाना चा हए। जब भूिम का बड़ा ह सा अिध हत कया जाता है, तो रा य को क जा बनाए रखने क े िलए कसी य या पुिलस बल को नह ं रखना चा हए और भूिम पर खेती शु नह ं करनी चा हए जब तक क इसका उपयोग नह ं कया जाता है। अिध हण क या पूर हो जाने क े बाद सरकार को उस पर िनवास करना या भौितक प से क जा करना शु नह ं करना चा हए। य द अिध हण क या पूर हो जाने क े बाद और रा य म भूिम िन हत हो जाती है, तो कोई भी य भूिम को बनाए रखता है या कसी य ारा कया गया कोई भी पुन: वेश रा य भूिम पर अित मण क े अलावा और क ु छ नह ं है। ासंिगक पैरा ाफ 244, 245 और 256 नीचे दए गए ह। "244.1894 क े अिधिनयम क धारा 16 म ावधान कया गया है क भूिम का क जा रा य सरकार ारा एक अिधिनणय पा रत करने क े बाद िलया जा सकता है और उसक े बाद रा य सरकार म सभी बाधाओं से मु भूिम िन हत हो सकती है। धारा 17 (1) म ता कािलकता क े मामले म भी इसी तरह क े ावधान कए गए ह। "क जा" श द का उपयोग 1894 क े अिधिनयम म कया गया है, जब क 2013 क धारा 24 (2) म " य अिधकार" श द का योग कया गया है। यह तुत कया जाता है क क जा लेने क े िलए पंचनामा लेना पया नह ं है जब वा त वक य क जा भूिम मािलक क े पास रहता है और धारा 24 (2) क े तहत वा त वक य क जा लेने क आव यकता होती है, न क कसी अ य प म क जा लेने क । जब रा य ने भूिम का अिध हण कर िलया है और अिधिनणय पा रत कर दया गया है, तो भूिम रा य सरकार को सभी बाधाओं से मु करती है। रा य म भूिम िन हत करने का काय अिधकार क े साथ है, इसक े बाद क जा बनाए रखने वाले कसी भी य को अित मणकार माना जाना चा हए और उसे उस भूिम पर क जा करने का कोई अिधकार नह ं है जो रा य म सभी बाधाओं से मु है।

245. सवाल यह है क या 1894 क े तहत क जा लेने और धारा 24 (2) म उपयोग क गई " य क जा" अिभ य क े बीच कोई अंतर है। वा तव म, 1894 क े अिधिनयम क े तहत क जा लेने का मतलब क े वल भूिम पर य क जा करना था। 2013 क े तहत क जा लेना हमेशा भूिम पर य क जा करने क े बराबर होता है। जब रा य सरकार भूिम का अिध हण करती है और क जा करने का ापन तैयार करती है, तो वह यह भूिम का य क जा लेने क े बराबर है। संप क े बड़े ह से पर या अ यथा जो अिध हत कया जाता है, सरकार से इसे बनाए रखने क े िलए कसी अ य य या पुिलस बल को क जे म नह ं रखना चा हए और जब तक उस भूिम का उपयोग उस उ े य क े िलए नह ं कया जाता है जसक े िलए इसे अिध हत कया गया है, तब तक इसपर खेती शु करनी चा हए। एक बार क जा ले िलए जाने क े बाद सरकार को क जा ा करने क े िलए जाँच कायवाह शु करक े उस पर रहना या य प से क जा करना शु नह ं करना चा हए। इसक े बाद, य द भूिम का कोई और संर ण या भूिम पर कोई पुनः वेश कया जाता है या कोई खुली भूिम पर खेती करना शु कर देता है या आउटहाउस आ द म रहना शु कर देता है, तो उस भूिम पर अित मण करने वाला माना जाता है जो रा य क े क जे म है। अितचार का क जा हमेशा वा त वक मािलक यानी मामले म रा य सरकार क े लाभ क े िलए होता है। XXXX

256. इस कार यह प है क यह क ज़े म है और क़ानून ने 1894 क े अिधिनयम क धारा 16 और 17 क े तहत ावधान कया है क एक बार क ज़ा लेने क े बाद, पूण अिधकार होता है। यह एक अप रहाय अिधकार है और इसक े बाद अिधकार पूण हो जाता है। धारा 16 क े तहत िन द अिधकार विभ न चरण क े बाद होता है, जैसे क अिधसूचना क धारा 4, क े तहत घोषणा क धारा 6 क े तहत, नो टस क धारा 9 क े तहत, अिधिनणय क धारा 11 क े तहत और फर क जा। संप को सभी बाधाओं से पूर तरह से मु करने क े वैधािनक ावधान को पूण प से भाव से लागू कया जाना चा हए। न क े वल क जा रा य म िन हत है ब क अ य सभी बाधाओं को भी तुरंत हटा दया गया है। जमींदार का अिधकार समा हो जाता है और रा य, संप का पूण मािलक और क जा ा हो जाता है। इसक े बाद संप पर भूिम मािलक का कोई िनयं ण नह ं रह जाता है। उसे संप लेने और उसे िनयं त करने क े िलए कोई उ े य नह ं हो सकता है भले ह उसने रा य ारा क जा लेने क े बाद क जा बरकरार रखा हो या अ यथा उस पर अित मण कया हो वह एक अितचार है और अितचार का ऐसा क जा मािलक क ओर से अपने लाभ क े िलए करता है

12. अपीलकता ारा अपनाए गए ख क े अनुसार, वचाराधीन भूिम का उपयोग श. व.स.-2 क े िलए कया जा रहा है, जो रा.रा-1, रा.रा.-10 और रा.रा.-8 को जोड़ रहा है और इसे रा.रा.-2 से जोड़ रहा है। उ प रयोजना का बहुत सावजिनक मह व है और इसे अमृत महो सव ( वतं ता 75 वष) क े आलोक म 15.08.2023 से पहले पूरा कया जाना है। इससे द ली क भीड़-भाड़ कम करने म मदद िमलेगी।

13. अिभलेख पर उपल ध त य से यह प है क यथ सं.[1] भूिम अिध हण कले टर ारा भूिम क े अिध हण या अिधिनणय क घोषणा क े समय भूिम का अिभिल खत मािलक नह ं था। मुआवजे क रािश 1894 क धारा 30/31 क े तहत िनदश यायालय म जमा क गई थी ले कन इसका भुगतान यथ सं.[1] को नह ं कया गया था इसिलए, शत म से एक को पूरा कया जा रहा है, हमारे वचार म उ च यायालय ारा पा रत आदेश को कानूनी प से कायम नह ं रखा जा सकता है जसक े तहत अिध हण को 2013 अिधिनयम क धारा 24 (2) क े संदभ म यपगत माना गया है।

14. तदनुसार अपील क अनुमित द जाती है और आ े पत उ च यायालय ारा पा रत आदेश को र कर दया जाता है। यथ सं. 1 ारा दायर रट यािचका को उ च यायालय ारा खा रज कया जाता है। …………………….. या., (अभय एस. ओका) …………………….. या., (राजेश बंदल) नई द ली 1 मई, 2023 //वीक े -एसएस// Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।