Mohammad Mundilam v. Uttar Pradesh State

High Court of Uttarakhand · 16 Aug 2021
V. Ramsubramanian; Pankaj Nimmatal
Criminal Appeal No 1089 of 2011
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The court acquitted the appellant in a murder case due to backdated FIR, lack of credible eyewitnesses, and procedural irregularities, granting benefit of doubt.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
दाण्डि क अपील संख्या 1089/2011
मो. मुण्डि)लम ...अपीलार्थी+
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य (अब उत्तराखं ) ...प्रत्यर्थी+
निनर्ण8य
न्यायमूर्ति पंकज निमत्तल
JUDGMENT

1. अपीलार्थी+ की ओर से उपण्डि)र्थी निवद्वान अति वक्ता श्री प्रफ ु ल्ल क ु मार बेहरा और प्रत्यर्थी+ की ओर से उपण्डि)र्थी निवद्वान अति वक्ता श्री जतिं दर कु मार भानिFया को सुना।

2. दो अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों, निप ा और पुत्र ने भार ीय दं संनिह ा, 1860 (संक्षेप में "आई. पी. सी".) की ारा 302 क े ह अपरा क े लिलए अपनी दोषसिसतिU क े लिखलाफ इस दाण्डि क अपीलीय को प्रार्थीनिमक ा दी है, सिजसक े ह उन्हें आजीवन कारावास और प्रत्येक को 1,000/- क े जुमा8ने की सजा सुनाई गई है।जुमा8ने का भुग ान न करने पर उन्हें अति रिरक्त छह महीने क े कठोर कारावास की सजा का आदेश निदया गया है।

3. यह घFना निदनांक 4 अग), 1995 की है जो कभिर्थी ौर पर मैंगलोर पुलिलस )Fेशन क्षेत्राति कार में सुबह 9 बजे हुई र्थीी।यह कहा जा ा है निक सूचनादा ा उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवानिद निनर्ण8य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु निनबfति प्रयोग क े लिलए है और निकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं निकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, निनर्ण8य का अंग्रेजी सं)करर्ण प्रामाभिर्णक माना जाएगा र्थीा निनष्पादन और निmयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" सलीम अहमद (पी ब्लू-1) क े निप ा मृ क अल् ाफ हुसैन का अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों क े सार्थी क ु छ भूनिम निववाद र्थीा। उनक े मन में मृ क अल् ाफ हुसैन क े प्रति दुभा8वना र्थीी।उक्त भूनिम निववाद क े संबं में, चकबंदी अति कारी क े समक्ष काय8वाही लंनिब र्थीी।उस दुभा8ग्यपूर्ण[8] निदन मृ क अल् ाफ हुसैन उक्त काय8वाही में भाग लेने क े लिलए रुड़की जा रहा र्थीा, वह अपनी साइनिकल पर र्थीा और उसका बेFा-सूचनादा ा (पी ब्लू-1) और उसका भ ीजा-इरशाद (पी ब्लू-2) अपनी साइनिकलों पर र्थीोड़ा पीछे र्थीे।जब मृ क अल् ाफ हुसैन जीFी रो पर बजरी प्लांF क े पास पहुंचा, जहां से रूड़की क े वल 5 निकलोमीFर की दूरी पर र्थीी, ब " बल" और "क ु ल्हाड़ी" से लैस आरोपी व्यनिक्तयों ने उस पर हमला निकया।शोर मचाने पर, ानिहर पुत्र मोहम्मद सानिदक और मो. अफजल (पी ब्लू-3) पुत्र निनयाज़ अहमद पीछे से आया और आरोपी व्यनिक्तयों को पकड़ने की कोभिशश की, लेनिकन वे घFना )र्थील पर अपनी 'लोई' (क ं बल) और साइनिकल छोड़कर जंगल की ओर भाग गए।

4. सूचनादा ा (पी ब्लू-1) द्वारा लिललिख भिशकाय क े आ ार पर निदनांक 04.08.1995 सुबह लगभग 09.50 बजे ही (प्रदश[8] क-1) और तिचक प्रार्थीनिमकी (प्रदश[8] क-8) पंजीक ृ र्थीा।निववेचक (पी ब्लू-7) - अनिनल क ु मार ने जांच रिरपोF[8] (प्रदश[8] क -4), नक्शा नजरी (प्रदश[8] क -13) ैयार निकया और एक जोड़ी रबर क े जू े, एक जोड़ी चप्पल, एक 'लोई' (क ं बल) और साइनिकल अपने कब्जे में ले लिलया।'लोइ' और साइनिकल को आरोपी व्यनिक्तयों का ब ाया गया र्थीा और उन्हें mमशः प्रदश[8] क-10 और प्रदश[8] क-11 क े रूप में तिचनि| निकया गया र्थीा।

5. उप-निनरीक्षक (पी ब्लू-5)-ओम वीर सिंसह ने पो)FमॉF8म करने क े लिलए मुख्य तिचनिकत्सा अति कारी को संबोति कर े हुए एक पत्र (प्रदश[8] क-5) ैयार निकया।अगले निदन निदनांक 05.08.1995 ॉ. सु ीर क ु मार ढौंनिढयाल द्वारा पो)FमॉF8म निकया गया।पो)FमॉF8म रिरपोF[8] (प्रदश[8] क-3) को ॉ. ओ. पी. शमा8 (पी ब्लू-4) द्वारा प्रमाभिर्ण निकया गया र्थीा क्योंनिक पो)FमाF8म करने वाले ॉ. सु ीर क ु मार ढौंनिढयाल की इसी बीच मृत्यु हो गई र्थीी।

6. दोनों अभिभयुक्त व्यनिक्तयों को निववेचक द्वारा निदनांक 07.08.1995 को निगरफ् ार निकया गया र्थीा और उनक े द्वारा अपरा क े हभिर्थीयारों कु ल्हाड़ी और " बल" को बरामद निकया गया और कब्जे में ले लिलया गया, सिजसे बरामदगी मेमो (प्रदश[8] क-14) पर रखा गया।

7. पुलिलस ने आरोपी व्यनिक्तयों मोहम्मद मुण्डि)लम और शमशाद क े लिखलाफ भा.दं.सं. की ारा 307 क े ह न्यातियक मसिज)F्रेF रुड़की क े न्यायालय में आरोप पत्र प्र) ु निकया।यह मामला निवचारर्ण क े लिलए निदनांक 26.10.1995 को सत्र न्यायालय को सौंपा गया र्थीा।

8. अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों से दं प्रनिmया संनिह ा, 1973 (संक्षेप में "दं प्रनिmया संनिह ा") की ारा 313 क े ह सिजरह की गई और उन्होंने अपरा में अपनी संलिलप्त ा से इनकार निकया, बण्डिल्क आरोप लगाया निक ऐसी कोई घFना नहीं हुई र्थीी और उन्हें अनावश्यक रूप से फ ं साया गया है क्योंनिक वे गाँव में नए हैं।

9. सत्र निवचारर्ण निनर्ण8य और आदेश निदनांक 25.04.1998 क े माध्यम से अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों की दोषसिसतिU/द देने में समाप्त हुआ।उच्च न्यायालय ने अपील पर इसे बरकरार रखा और इसकी पुनि‡ की।इस प्रकार, व 8मान अपील की गई है।

10. यह ध्यान देने योग्य होना चानिहए निक इस न्यायालय क े निदनांक 16.08.2021 क े आदेश द्वारा अभिभयुक्त अपीलार्थी+ संख्या 2 क े लिखलाफ अपील समानिप्त का आदेश निदया गया र्थीा।अभिभयुक्त अपीलक ा8 की आयु अब लगभग 79 वष[8] है और वह छह वष[8] की कारावास की सजा काF चुका है।वह वष[8] 2013 से जमान पर है।11. अभिभयुक्त अपीलार्थी+ की ओर से क 8 का मुख्य मुद्दा यह है निक प्रार्थीनिमकी में समयान् र है और यह पूव[8] -समय पर निकया गया है।दरअसल, भिशकाय /एफआईआर निदनांक 04.08.1995 को दोपहर 1:50 बजे दज[8] की गई र्थीी और इसे ओवरराइF करक े सुबह 9:00 बजे कर निदया गया है। मृ क क े सार्थी उसका बेFा और उसका भ ीजा भी र्थीा, जो अपनी-अपनी साइनिकल से उसक े पीछे-पीछे चल रहे र्थीे और उससे र्थीोड़ा पीछे र्थीे।इन दोनों व्यनिक्तयों में से निकसी ने भी मृ क को आरोपी अपीलार्थिर्थीयों क े हमले से बचाने की कोभिशश नहीं की और न ही उसे कोई तिचनिकत्सा सहाय ा प्रदान करने क े लिलए कोई कदम उठाया, इसक े बजाय वे भिशकाय दज[8] करने क े लिलए दौड़े जो अत्यति क अप्राक ृ ति क है।घFना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और )व ंत्र गवाहों में से एक ानिहर से सिजरह नहीं की गई र्थीी।एक अन्य )व ंत्र गवाह का साक्षी मो. अफजल (पी ब्लू-3) निवरो ाभासी है और अभिभयोजन पक्ष क े मामले का समर्थी8न नहीं कर ा है।

12. एफआईआर (प्रदश[8] क-8) निदनांक 04.08.1995 को सुबह 9:00 बजे दज[8] की गई ब ाई गई है। आरोपी अपीलार्थी+ की दलील यह है निक, वा) व में प्रार्थीनिमकी दोपहर 1:50 बजे दज[8] की गई र्थीी और इसे पूव8-समय पर दज[8] निकया गया है।हमने निवचारर्ण न्यायालय क े अभिभलेख से 04.08.1995 निदनांनिक वा) निवक प्रार्थीनिमकी का परिरशीलन निकया।उपरोक्त एफआईआर का परिरशीलन करने से )प‡ रूप से प ा चल ा है निक इसमें उसिल्ललिख रिरपोF[8] दज[8] कराने क े समय में क ु छ अं र है।यह )प‡ निदख ा है निक '1' को '9' में बदल निदया गया है और '5' को '0' बनाने क े लिलए गोल निकया गया है जबनिक 'पीएम' को 'एएम' में बदल निदया गया है।दूसरे शब्दों में, दोपहर 1.50 बजे को बदलकर सुबह 9 बजे कर निदया गया है। प्रार्थीनिमकी से यह )प‡ है और इस पर दो राय नहीं हो सक ी हैं।निवचारर्ण न्यायालय का यह कहना सही नहीं है निक कोई समयान् राल नहीं है और चूंनिक 'एएम' का उपयोग निकया गया है, इसका म लब है निक सुबह प्रार्थीनिमकी दज[8] की गई है। निवचारर्ण न्यायालय ने इस थ्य को पूरी रह से नजरअंदाज कर निदया निक न क े वल समय बदल निदया गया है, बण्डिल्क 'पीएम' शब्द को भी अं ः)र्थीानिप निकया गया है और 'एएम' में बदल निदया गया है।इस प्रकार, हमारी राय में, प्रार्थीनिमकी को दोपहर 1.50 बजे से सुबह 9.00 बजे क पूव8-समय निदया गया है।

13. तिचक एफआईआर रिरपोF[8] लगभग 4 निदन की देरी से निदनांक 08.08.1995 को न्यायालय को भेजी गई र्थीी।यह उल्लेखनीय है निक निकसी आपराति क मामले में और निवशेष रूप से हत्या क े मामले में प्रार्थीनिमकी एक महत्वपूर्ण[8] और मूल्यवान साक्ष्य है, निवशेष रूप से निवचारर्ण में पेश निकए गए सबू ों को प्र) ु करने क े उद्देश्य से।यही कारर्ण है निक प्रार्थीनिमकी में कोई कमी, यनिद कोई हो, ो इसकी प्रामाभिर्णक ा पर संदेह पैदा कर ी है। ऐसे मामलों में प्रार्थीनिमकी भी अपने साक्ष्य मूल्य को खो सक ी है। मेहराज सिंसह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य[1] मामले में यह राय दी गई है निक कनिमयों क े कारर्ण प्रार्थीनिमकी क े इस रह क े पूव8-समय ने अपना साक्ष्य मूल्य खो निदया है। इस प्रकार, यह अभिभयुक्त को संदेह का लाभ देने का अति कार दे ा है।

14. प्रार्थीनिमकी को पूव8-समय पर दज[8] करने का कारर्ण समझना मुण्डिश्कल नहीं है। अभिभयोजन पक्ष का मामला यह है निक मृ क अल् ाफ हुसैन भूनिम निववाद क े सम्बन् में चकबन्दी न्यायालय जा रहा र्थीा।)प‡ रूप से, यनिद वह अदाल जा रहा हो ा, ो अदाल शुरू होने से पहले सुबह हो ी, न निक दोपहर, वह भी दोपहर क े भोजन क े बाद क े सत्र में।इस बा को सही ठहराने क े लिलए निक मृ क अल् ाफ हुसैन सुबह न्यायालय जा रहा र्थीा, प्रार्थीनिमकी का समय बदलकर सुबह 9:00 बजे कर निदया गया है। अगर घFना सुबह 9:00 बजे से पहले हुई हो ी और पुलिलस 10:00 बजे मौक े पर पहुंची हो ी ो उसक े ुरं बाद दोपहर क शव को शवगृह भेज निदया गया हो ा लेनिकन ऐसा नहीं हुआ और मृ क अल् ाफ हुसैन का शव देर शाम शवगृह भेजा गया, ब क बहु देर हो चुकी र्थीी और पो)FमाF8म अगले निदन क े लिलए Fालना पड़ा।

15. देर शाम शवगृह में शव पहुंचने क े कारर्ण पो)FमाF8म अगले निदन कराया गया। देर शाम शव प्राप्त होने का कारर्ण ही इंनिग कर ा है निक घFना दोपहर में हुई होगी न निक सुबह में।

16. अभिभलेख पर यह आया है निक आरोपी अपीलार्थी+ पीछा निकए जाने पर अपनी 'लोई' (क ं बल) और साइनिकल छोड़कर जंगल की ओर भाग गए र्थीे।इन दोनों व) ुओं को निववेचक द्वारा बरामद निकया गया र्थीा और mमशः प्रदश[8] क-10 और प्रदश[8] क-11 क े रूप में अंनिक निकया गया र्थीा।इन दोनों व) ुओं में से निकसी को भी अदाल क े समक्ष पेश नहीं निकया गया र्थीा और अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों द्वारा उनकी पहचान नहीं की गई र्थीी।अभिभलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह )र्थीानिप कर सक े निक वा) व में उक्त कोई और साइनिकल अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों क े र्थीे।इससे अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों क े बचाव को बल निमल ा है निक उन्हें अनावश्यक रूप से अपरा में शानिमल निकया गया है और वे घFना)र्थील पर मौजूद भी नहीं र्थीे।अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों की उपण्डि)र्थीति को अभिभयोजन पक्ष द्वारा आसानी से सानिब निकया जा सक ा र्थीा, यनिद घFना)र्थील से बरामद उपरोक्त दो व) ुओं को पेश निकया जा ा और यह सानिब निकया जा ा निक वे अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों की हैं।उपरोक्त व) ुओं को अदाल में पेश नहीं करने या उन्हें रोकने का कोई कारर्ण या )प‡ीकरर्ण नहीं है।

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17. सलीम अहमद (पी ब्लू-1) क े बयान से प ा चल ा है निक वह अपने निप ा से 20 कदम की दूरी पर र्थीा, लेनिकन निफर भी वह अपने निप ा को हमले से बचाने क े लिलए पहुंच नहीं सका और यहां क निकसी भी आरोपी अपीलार्थी+ को पकड़ भी नहीं सका, जो आसानी से जंगल से भाग गए र्थीे। यह एक )वीक ृ थ्य है निक घFना क े ुरं बाद, बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और ब भी अभिभयोजन पक्ष एक उतिच चश्मदीद गवाह या निकसी अन्य )व ंत्र व्यनिक्त को खोजने में सफल नहीं हुआ जो पूरी घFना का वर्ण8न कर सक ा र्थीा।मृ क अल् ाफ हुसैन क े बेFे सलीम अहमद (पी ब्लू-1) ने ब ाया निक घFना सुबह 9 बजे हुई र्थीी और वह सुबह 9.50 बजे पुलिलस )Fेशन पहुंचा और पुलिलस आई और सुबह 10 बजे शव को ले गई। अगर वह सुबह 9.50 बजे पुलिलस )Fेशन पहुंचा हो ा, ो लिललिख प्रार्थीनिमकी सुबह 9 बजे देने और दज[8] होने की कोई संभावना नहीं है।18. मृ क अल् ाफ हुसैन क े भ ीजे इरशाद (पी ब्लू-2) क े बयान का उल्लेख करना महत्वपूर्ण[8] है।उन्होंने कहा र्थीा निक पुलिलस सुबह 9.30 बजे घFना )र्थील पर पहुंची र्थीी जो सलीम अहमद (पी ब्लू-1) क े बयान क े निवपरी है, सिजन्होंने कहा है निक पुलिलस सुबह 10 बजे पहुंची र्थीी।उन्होंने आगे कहा निक दरोगा जी ने उनसे क ु छ भी पूछ ाछ नहीं की और न ही उनका बयान दज[8] निकया, जबनिक निववेचना अति कारी (आईओ) अनिनल क ु मार (पी ब्लू-7) ने दज[8] निकया है निक जब वह घFना )र्थील पर पहुंचे, ो उनकी मुलाका परिरवादी यानी सलीम अहमद (पी ब्लू-1) और दो चश्मदीद गवाहों यानी मोहम्मद अफ़ज़ल (पी ब्लू-3) और ानिहर से हुई। । उन्होंने )प‡ रूप से कहा निक वह इरशाद (पी ब्लू-2) से नहीं निमले र्थीे, जो प्रार्थीनिमकी में गवाहों में से एक र्थीे। उसका बयान निववेचक द्वारा एक सप्ताह क े बाद 11.08.1995 को दज[8] निकया गया र्थीा। ।

19. मृ क अल् ाफ अहमद का बेFा और भ ीजा अपनी साइनिकल पर उसका पीछा कर रहे र्थीे, लेनिकन बचाव पक्ष को उनकी उपण्डि)र्थीति पर संदेह है।उन दोनों का आचरर्ण और व्यवहार अ)वाभानिवक प्र ी हो ा है क्योंनिक यनिद उनक े निप ा पर कभिर्थी रीक े से हमला निकया गया हो ा, ो वे उन्हें बचाने क े लिलए ह) क्षेप करने वाले पहले व्यनिक्त हो े, लेनिकन यह इंनिग करने क े लिलए कोई सबू नहीं है निक आरोपी अपीलक ा8ओं को मृ क अल् ाफ हुसैन पर हमला कर े हुए देखकर वे मौक े पर पहुंचे र्थीे जो उनसे शायद ही क ु छ दूरी पर र्थीा, बण्डिल्क दो अन्य व्यनिक्त मौक े पर आए और उनक े द्वारा मचाए गए शोर को सुनकर मृ क अल् ाफ हुसैन को बचाने की कोभिशश की।मृ क अल् ाफ हुसैन क े बेFे और भ ीजे ने उन्हें अ)प ाल ले जाने की भी जरूर नहीं समझी, बण्डिल्क उनमें से एक प्रार्थीनिमकी दज[8] कराने गया, दूसरे को मृ क क े सार्थी रहने की जरूर भी महसूस नहीं हुई और वह गांव चला गया।इसलिलए इन दोनों व्यनिक्तयों का आचरर्ण बचाव पक्ष क े इस कर्थीानक का समर्थी8न कर ा है निक वे घFना क े )र्थीान पर मौजूद नहीं हो सक े हैं।

20. मो. अफजल (पी ब्लू-3) ने बस इ ना कहा निक वह और ानिहर एक )क ू Fर पर र्थीे और उन्होंने दो लोगों को एक व्यनिक्त पर हमला कर े देखा।सलीम अहमद (पी ब्लू-1) द्वारा शोर मचाने पर इरशाद (पी ब्लू-2) ने उसे बचाने और दोनिषयों को पकड़ने की कोभिशश की।उसी समय वह कह ा है निक आरोपी अपीलार्थी+ भाग गए और जब वे मौक े पर पहुंचे ो उन्होंने मृ क अल् ाफ हुसैन को सड़क पर पड़ा देखा और वह सांस नहीं ले रहे र्थीे।उन्होंने उन्हें छ ू ने और यह प ा लगाने क े लिलए कोई प्रयास नहीं निकया निक वह मर चुका है या जीनिव है या उन्हें पलFने का भी प्रयास नहीं निकया। उपरोक्त कर्थीन, यनिद )व-निवरो ाभासी नहीं है, ो उक्त गवाह क े कर्थीन पर संदेह पैदा कर ा है क्योंनिक एक )र्थीान पर वह कह ा है निक शोर सुनकर उन्होंने मृ क अल् ाफ हुसैन को बचाने और आरोपी अपीलार्थिर्थीयों को पकड़ने की कोभिशश की, लेनिकन निफर कह ा है निक जब वे मौक े पर पहुंचे ो मृ क अल् ाफ हुसैन पहले से ही सड़क पर मृ पड़े हुए र्थीे।

21. उपरोक्त दो व्यनिक्तयों क े अलावा, घFना का कोई )व ंत्र गवाह नहीं है।घFना का दूसरा चश्मदीद ानिहर र्थीा, जो मौक े पर आया और मृ क अल् ाफ हुसैन को बचाने की कोभिशश की, लेनिकन उसे कFघरे में आने और घFना क े बारे में गवाही देने क े लिलए नहीं बुलाया गया।मो. ानिहर क े सार्थी गए अफजल (पी ब्लू-3) का हालांनिक चश्मदीद गवाह क े रूप में परीक्षर्ण निकया गया, लेनिकन वह कभिर्थी हमले क े बारे में क ु छ भी ब ाने में निवफल रहा या यह ब ाने में निक आरोपी अपीलक ा8 ही वे व्यनिक्त र्थीे सिजन्होंने मृ क अल् ाफ हुसैन पर हमला निकया र्थीा।

22. ऊपर कही गई सभी बा ों को ध्यान में रख े हुए, हमारा निवचार है निक अभिभयोजन पक्ष यह सानिब करने में निवफल रहा निक आरोपी अपीलार्थी+ मृ क अल् ाफ हुसैन पर हमले और मौ में शानिमल व्यनिक्त र्थीे।

23. थ्यों और परिरण्डि)र्थीति यों की समग्र ा, निवशेष रूप से मृ क अल् ाफ हुसैन क े बेFे और भ ीजे क े अ)वाभानिवक व्यवहार और आचरर्ण, प्रार्थीनिमकी का समय-पूव[8] होना और लोई (क ं बल) व साईनिकल (प्रदश[8] क-10 और प्रदश[8] क- 11) जो अभिभयुक्त अपीलक ा8ओं का होना ब ाया गया है, जो घFना )र्थील पर छ ू F गए र्थीे, को अदाल क े समक्ष पेश नहीं निकया गया र्थीा, जो हमें घFना)र्थील पर मृ क अल् ाफ हुसैन क े बेFे और भ ीजे की उपण्डि)र्थीति पर संदेह करने क े लिलए मजबूर कर ा है। इस प्रकार, घFना क े निकसी भी निवश्वसनीय चश्मदीद गवाह की अनुपण्डि)र्थीति में और यह थ्य निक घFना )र्थील पर अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों की उपण्डि)र्थीति भी ठीक रह से )र्थीानिप नहीं है, हम दोनों अभिभयुक्त अपीलार्थिर्थीयों को संदेह का लाभ देने क े लिलए निववश हैं।

24. भले ही हम मौलिखक साक्ष्य में क ु छ अन्य छोFी निवसंगति यों को नजरअंदाज कर दें, जैसे पो)FमॉF8म करने में देरी, अपरा क े हभिर्थीयारों क े नाम में अं र, अर्थीा8 ् " बल" या "पलकFी" जो फसल काFने क े लिलए उपकरर्णों क े कमोबेश समान प्रकार हैं, आनिद, यह एक ऐसा मामला है जहां अभिभयोजन पक्ष यह सानिब करने में बुरी रह निवफल रहा है निक आरोपी अपीलक ा8ओं ने युनिक्तयुक्त संदेह से परे अपरा निकया है।

25. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, अ ीन)र्थी न्यायालयों अर्थीा8 ् अपर सत्र न्याया ीश का 25.04.1998 निदनांनिक और उत्तराख ड़ उच्च न्यायालय का 10.09.2010 निदनांनिक निनर्ण8य और आदेशों को दनुसार रद्द निकया जा ा है और अभिभयुक्त अपीलक ा8 संख्या 1 को संदेह का लाभ देकर बरी निकया जा ा है।

26. अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है।.................................... (न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रम यन).................................... (न्यायमूर्ति पंकज निमत्तल) नई निदल्ली;