Ghanshyam v. Yogendra Rathi

Delhi High Court · 02 Jun 2023
Pankaj Samatra; Deepankar Datta
Civil Appeal Nos. 7527-7528 of 2012
property appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court upheld the respondent's ownership and possession rights based on sale agreement and possession, dismissed the appellant's forgery claims, and ordered eviction with mesne profits.

Full Text
Translation output
अप्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायाऱय
ससववऱ अपीऱीय अधिकाररिा
ससववऱ अपीऱ सं.7527-7528/ 2012
घनश्याम ....अपीऱार्थी
बनाम
योगेंद्र राठी ....प्रत्यर्थी
तनर्णय
पंकज समत्तऱ, न्या.
JUDGMENT

1. प्रतिवादी-अपीऱार्थी क े ववद्वान अधिवक्िा श्री राजुऱ श्रीवास्िव को सुना। सेवा क े बावजूद वादी-प्रतिवादी की ओर से कोई भी पेश नहीीं हुआ।

2. िीनों तनचऱी अदाऱिों से हारने क े बाद, मुकदमे क े प्रतिवादी ने इस मुकदमे को प्रार्थममकिा दी है।

3. वादी-प्रत्यर्थी ने प्रतिवादी-अपीऱकिाा को वाद पररसर से बेदखऱ करने क े मऱए एक मुकदमा दायर ककया जो एच-768, जे. जे. कॉऱोनी, शकरपुर ददल्ऱी का दहस्सा है और इस अमभकर्थन पर ऱाभ कमाने क े मऱए कक वह 10.04.2002 को बेचने क े मऱए एक समझौिे, पावर ऑफ अटॉनी, कब्जे का एक ऻापन और बबक्री ववचार क े भुगिान की रसीद क े सार्थ -सार्थ प्रतिवादी अपीऱकिाा की "वसीयि" क े आिार पर उक्ि सींपवि का मामऱक है; वाद पररसर का कब्जा वादी -प्रतिवादी को बाद में बेचने क े मऱए समझौिे क े अनुसार सौंप ददया गया र्था, बाद में प्रतिवादी -अपीऱकिाा क े अनुरोि पर वादी -प्रतिवादी ने प्रतिवादी-अपीऱकिाा को ऱाइसेंसिारी क े रूप में 3 महीने की अवधि क े मऱए भूिऱ और इसकी पहऱी मींजजऱ पर एक कमरे पर कब्जा करने की अनुमति दी; प्रतिवादी अपीऱकिाा ऱाइसेंस अवधि समाप्ि होने और ददनाींक 18-02-2003 क े नोदटस क े िहि ऱाइसेंस की समाजप्ि क े बावजूद मुकदमा पररसर को खाऱी करने में ववफऱ रहा।

4. प्रतिवादी-अपीऱार्थी ने इस आिार पर मुकदमे का ववरोि ककया कक उपरोक्ि दस्िावेजों को खाऱी कागजाि क े सार्थ हेरफ े र ककया गया है, ऱेककन उनमें से ककसी क े तनष्पादन पर वववाद ककए बबना या कक कब्जा ऻापन तनष्पाददि नहीीं ककया गया र्था या समझौिे क े अनुसार बबक्री ववचार का भुगिान नहीीं ककया गया र्था।

5. तनचऱी अदाऱि ने िीन मुद्दे िैयार करने क े बाद; पहऱा हेरफ े र और कधर्थि दस्िावेजों को िोखािडी से प्राप्ि करने क े सींबींि में, दूसरा वादी-प्रतिवादी क े प्रतिवादी-अपीऱार्थी को बेदखऱ करने क े अधिकार क े सींबींि में और िीसरा अींि:काऱीन ऱाभ की पात्रिा क े सींबींि में, प्रतिवादी-अपीऱार्थी क े खखऱाफ सभी मुद्दों का फ ै सऱा ककया। िथ्य का एक स्पष्ट तनष्कषा दजा ककया गया कक यह साबबि करने क े मऱए कोई सबूि नहीीं है कक उपरोक्ि दस्िावेजों में से कोई भी गऱि बयानी, हेरफ े र या प्रतिवादी-अपीऱार्थी क े सार्थ िोखािडी करक े प्राप्ि ककया गया र्था। वादी-प्रत्यर्थी ने सींपवि पर अपना अधिकार साबबि कर ददया है और चूींकक प्रतिवादी-अपीऱार्थी का ऱाइसेंस तनिााररि है, इसमऱए वह वादी द्वारा दावा की गई दर पर नहीीं, जजसक े मऱए सबूि है, ऱेककन वववाद में पररसर क े उपयोग और कब्जे क े मऱए 1000 रुपये प्रति माह की दर से बेदखऱी और भुगिान का हकदार है।

6. अनुमति दी गई र्थी और अपीऱ को सींभवि् इस सवाऱ पर स्वीकार ककया गया र्था कक क्या उपरोक्ि दस्िावेज अर्थााि् मुख्िारनामा, वसीयि, कब्जे क े ऻापन क े सार्थ बेचने का समझौिा और बबक्री क े भुगिान की प्राजप्ि वादी- प्रतिवादी को कोई अधिकार प्रदान करेगी िाकक वह बेदखऱी और अपने ऱाभ की डडक्री का हकदार बन सक े ।

7. उपरोक्ि मुद्दा प्रतिवादी-अपीऱकिाा द्वारा तनचऱी अदाऱि या पहऱी अपीऱ न्यायाऱय में अपनी दऱीऱों द्वारा से नहीीं उठाया गया र्था और इसमऱए, दूसरी अपीऱ में उच्च न्यायाऱय ने कहा कक उसे इस िरह क े मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीीं दी जा सकिी है और इस िरह कीअपीऱ में कानून का कोई महत्वपूर्ा प्रश्न शाममऱ नहीीं है।

8. दऱीऱों क े अनुसार मुकदमा बेदखऱी और इस आिार पर ऱाभ कमाने का है कक वादी-प्रतिवादी सींपवि का मामऱक है। उन्होंने उपरोक्ि दस्िावेजों ववशेष रूप से बेचने क े मऱए समझौिे और कब्जे क े ऻापन क े सार्थ -सार्थ बबक्री ववचार क े भुगिान की प्राजप्ि क े बऱ पर स्वाममत्व का दावा ककया है।

9. इसमें कोई सींदेह नहीीं है कक ववक्रय समझौिा बबक्री द्वारा सींपवि क े हस्िाींिरर् क े स्वाममत्व या ववऱेख का दस्िावेज नहीीं है और इस प्रकार, सींपवि हस्िाींिरर् अधितनयम, 1882 की िारा 54 को ध्यान में रखिे हुए वाद सींपवि पर वादी-प्रतिवादी को पूर्ा स्वाममत्व प्रदान नहीीं कर सकिा है, कफर भी, बेचने का समझौिा, समझौिे में उजल्ऱखखि सींपूर्ा बबक्री ववचार का भुगिान और इसक े भुगिान की प्राजप्ि और इस िथ्य से पुजष्ट की जािी है कक वादी-प्रतिवादी का कब्जा र्था। कानून क े अनुसार मुकदमा सींपवि, जैसा कक ररकॉडा पर कब्जा ऻापन द्वारा भी स्र्थावपि ककया गया है, यह साबबि करिा है कक वादी-प्रतिवादी क े पास बेचने क े भाधगक पाऱन में मुकदमा सींपवि पर वास्िववक अधिकार हैं। वादी -प्रतिवादी का यह अधिकार हस्िाींिरर्किाा, यानी, प्रतिवादी-अपीऱकिाा द्वारा परेशान ककए जाने क े मऱए उिरदायी नहीीं है। मुकदमे की सींपवि क े दहस्से पर प्रतिवादी -अपीऱकिाा का प्रवेश बाद में वादी क े ऱाइसेंसिारी क े रूप में होिा है। वह मामऱक की ऺमिा में इस पर कब्जा करना जारी नहीीं रखिा है।

10. इस तनष्कषा क े मद्देनजर कक उपयुाक्ि दस्िावेजों को िोखािडी से प्राप्ि नहीीं ककया गया है या उनमें हेरफ े र नहीीं ककया गया है, उक्ि दस्िावेजों को ववधिवि तनष्पाददि और वास्िववक मानिे हुए, एक बाि स्पष्ट है कक वादी- प्रतिवादी कम से कम समझौिे क े भाधगक पाऱन में सींपवि क े स्र्थावपि कब्जे में है जजसे हस्िाींिरर्किाा, यानी प्रतिवादी-अपीऱकिाा द्वारा परेशान या वववाददि नहीीं ककया जा सकिा है।

11. पुनरावृवि की कीमि पर, मुकदमा प्रतिवादी-अपीऱकिाा को वाद पररसर से बेदखऱ करने और इस आिार पर ऱाभ की वसूऱी क े मऱए मुकदमा है कक प्रतिवादी-अपीऱकिाा द्वारा समझौिे क े भाधगक पाऱन में वादी-प्रतिवादी क े पऺ में सींपवि क े कब्जे से अऱग होने क े बाद, उसे अपने कब्जे को बाधिि करने का कोई अधिकार नहीीं है। वह क े वऱ एक ऱाइसेंसिारी है और ऱाइसेंस समाप्ि हो जाने क े बाद, उसे कब्जे में रहने का कोई अधिकार नहीीं है, ऱेककन उस व्यजक्ि को कब्जा बहाऱ करने का अधिकार है जजसक े पास उस पर सही अधिकार है।

12. यह कहने की कोई आवश्किा नहीीं है कक प्रतिवादी-अपीऱार्थी द्वारा तनष्पाददि मुख्िारनामा का कोई महत्व नहीीं है क्योंकक उक्ि मुख्िारनामा क े बऱ पर, न िो बबक्री ववऱेख तनष्पाददि ककया गया है और न ही उसक े अनुसार कोई कारावाई मुख्िारनामा िारक द्वारा इसक े अनुसरर् में कोई कायावाही की गई है जो वादी-प्रतिवादी को अधिकार प्रदान कर सकिा है। सामान्य मुख्िारनामा िारक द्वारा ककसी भी दस्िावेज का तनष्पादन न ककए जाने से उक्ि सामान्य मुख्िारनामा बेकार हो जािा है।

13. इसी िरह, वादी-प्रत्यर्थी क े पऺ में प्रतिवादी-अपीऱार्थी द्वारा तनष्पाददि ददनाींक 10.04.2002 की वसीयि तनरर्थाक है क्योंकक वसीयि, यदद कोई हो, क े वऱ तनष्पादक की मृत्यु क े बाद ही प्रभावी होिी है, न कक उससे सामने। यह िब िक प्रभावशाऱी नहीीं है जब िक वसीयिकिाा या इसे बनाने वाऱे व्यजक्ि की मृत्यु नहीीं हो जािी। विामान मामऱे में उक्ि चरर् नहीीं आया है और इसमऱए, उपरोक्ि इच्छा भी ककसी भी िरह से वादी-प्रतिवादी को कोई अधिकार प्रदान नहीीं करिी है।

14. सामान्य मुख्िारनामा और इस िरह तनष्पाददि वसीयि क े सींबींि में, ककसी भी राज्य या उच्च न्यायाऱय में प्रचमऱि प्रर्था, यदद कोई हो, इन दस्िावेजों को ककसी अचऱ सींपवि में अधिकार प्रदान करने वाऱे शीषाक या दस्िावेजों क े दस्िावेज क े रूप में मान्यिा देना वैिातनक कानून का उल्ऱींघन है। प्रचमऱि ऐसी कोई भी प्रर्था या परींपरा कानून क े उन ववमशष्ट प्राविानों को दरककनार नहीीं करेगी जजनक े मऱए 100/- रुपये से अधिक मूल्य की अचऱ सींपवि में अधिकार और शीषाक प्रदान करने क े मऱए शीषाक या हस्िाींिरर् क े दस्िावेज क े तनष्पादन और इसक े पींजीकरर् की आवश्यकिा होिी है। वीर बाऱा गुऱाटी बनाम दिल्ऱी नगर तनगम और अन्य क े मामऱे में ददल्ऱी उच्च न्यायाऱय क े फ ै सऱे क े बाद ददल्ऱी उच्च न्यायाऱय क े फ ै सऱे में आशा एम. जैन बनाम क े नरा बैंक और अन्य क े मामऱे में ददल्ऱी उच्च न्यायाऱय क े फ ै सऱे में कहा गया र्था कक पूर्ा ववचार और कब्जे क े भुगिान क े सार्थ बेचने का समझौिा अपररविानीय पावर ऑफ अटॉनी और अन्य सहायक दस्िावेजों क े सार्थ ववक्रय हेिु एक ऱेनदेन है, भऱे ही बबक्री ववऱेख न हो। वादी -प्रतिवादी क े मऱए कोई मदद नहीीं है क्योंकक ददल्ऱी उच्च न्यायाऱय द्वारा मऱया गया दृजष्टकोर् कानूनी जस्र्थति क े अनुरूप नहीीं है जो सींपवि हस्िाींिरर् अधितनयम, 1882 की िारा 54 क े सादे पठन से उत्पन्न होिा है। इस सींबींि में, इम्तियाज अऱी बनाम नसीम अहमि और जी. राम बनाम दिल्ऱी ववकास प्राधिकरर् में ददल्ऱी उच्च न्यायाऱय क े दो अन्य तनर्ायों का सींदभा ददया जा सकिा है, जो अन्य बािों क े सार्थ -सार्थ यह कहिे हैं कक बेचने या पावर ऑफ अटॉनी का समझौिा हस्िाींिरर् क े दस्िावेज नहीीं हैं और इस प्रकार अचऱ सींपवि का सही शीषाक और दहि क े वऱ उसक े तनष्पादन से हस्िाींिररि नहीीं होिा है जब िक कक हस्िाींिरर् की िारा 54 क े िहि ववचार ककए गए ककसी भी दस्िावेज पर ववचार नहीीं ककया जािा है। सींपवि अधितनयम, 1882 को भारिीय पींजीकरर् अधितनयम, 1908 की िारा 17 क े िहि तनष्पाददि ककया जािा है। सूरज ऱैंप एंड इंडस्ट्रीज प्राइवेट सऱसमटेड बनाम हररयार्ा राज्य और अन्य मामऱे में सुप्रीम कोटा क े फ ै सऱे में पींजीकृ ि वाहन ववऱेख क े बजाय बबक्री समझौिे, जनरऱ पावर ऑफ अटॉनी और वसीयि क े माध्यम से अचऱ सींपवि क े हस्िाींिरर् की भी तनींदा करिा हैकानूनी रूप से बबक्री क े मऱए एक समझौिे को बबक्री क े ऱेनदेन या अचऱ सींपवि में मामऱकाना अधिकारों को स्र्थानाींिररि करने वाऱे दस्िावेज क े रूप में नहीीं माना जा सकिा है, ऱेककन सींभाववि खरीदार ने अनुबींि क े अपने दहस्से का पाऱन ककया है और कानूनी रूप से कब्जे में है, जो सींपवि हस्िाींिरर् अधितनयम 1882 की िारा 53क क े मद्देनजर सींरक्षऺि है। सींभाववि क्र े िा क े उक्ि स्वाममत्व अधिकारों पर हस्िाींिरर्किाा या उसक े अिीन दावा करने वाऱे ककसी व्यजक्ि द्वारा आक्रमर् नहीीं ककया जा सकिा है।

15. उपरोक्ि क े बावजूद, जैसा कक वादी -प्रतिवादी ने 10.04.2002 को बेचने क े भाधगक पाऱन में स्वाममत्व स्वाममत्व क े सार्थ समझौिा ककया र्था और प्रतिवादी -अपीऱकिाा ने इस पर अपना कब्जा खो ददया है और ऱाइसेंस क े िहि कब्जे का अधिकार हामसऱ कर मऱया है, ऱाइसेंस तनिााररि होने क े बाद कब्जे में बने रहने का उसका अधिकार समाप्ि हो गया है। इस प्रकार, प्रतिवादी अपीऱकिाा ने वाद सींपवि क े कब्जे क े सार्थ वादी -प्रतिवादी को बेचने क े मऱए एक समझौिे क े िहि इसे कब्जे में डाऱ ददया। इस िरह वादी - प्रतिवादी ने उसी पर स्वाममत्व स्वाममत्व प्राप्ि कर मऱया। प्रतिवादी अपीऱकिाा, इस प्रकार, एक तनजश्चि अवधि क े मऱए ऱाइसेंसिारक क े रूप में कब्जा करने क े बजाय एक मामऱक क े रूप में इस पर कब्जा कर मऱया, जो वैि नोदटस द्वारा तनिााररि ककया गया र्था, जजससे प्रतिवादी -अपीऱकिाा को मुकदमा पररसर क े कब्जे में रहने का कोई अधिकार नहीीं र्था।

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16. उपरोक्ि िथ्यों और पररजस्र्थतियों को ध्यान में रखिे हुए, वादी-प्रत्यर्थी को उधचि ऱाभ क े सार्थ बेदखऱी की डडक्री का हकदार माना गया है, हम इस िरह की डडक्री पाररि करने में कोई त्रुदट या अवैििा नहीीं पािे हैं। िदनुसार, अपीऱों में योग्यिा की कमी होिी है और ऱागि क े बारे में कोई आदेश ददए बबना खाररज कर ददए जािे हैं।............................. न्या. (िीपांकर ित्ता)............................. न्या. (पंकज समत्तऱ) नई दिल्ऱी; 02 जून, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अस्ट्वीकरर्: देशी भाषा में तनर्ाय का अनुवाद मुकद्द्मेबाज क े सीममि प्रयोग हेिु ककया गया है िाकक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवीं यह ककसी अ न्य प्रयोजन हेिु प्रयोग नहीीं ककया जाएगा| समस्ि कायााऱयी एवीं व्यावहाररक प्रयोजनों हेिु तनर्ाय का अींग्रेजी स्वरूप ही अमभप्रमाखर्ि माना जाएगा और का याान्वयन िर्था ऱागू ककए जाने हेिु उसे ही वरीयिा दी जाएगी।