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भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 4758/2023
व.अनु.या. (िस वल) सं. 25256/2018 से उ ूत
अशोक क
ु मार ...अपीलाथ (गण)
बनाम
यू इं डया ए योरस क
ं पनी िलिमटेड .... यथ (गण)
िनणय
क
े . वी. व नाथन या.
JUDGMENT
1. अनुमित दािनत
2. वतमान अपील रा ीय उपभो ा ववाद िन तारण आयोग (सं ेप म "रा ीय आयोग"), नई द ली ारा पुनर ण यािचका सं या 3415/2016 म पा रत अंितम िनणय और आदेश दनांक 24.01.2018 से उ ूत होती है। उ िनणय ारा, रा ीय आयोग ने जला उपभो ा ववाद िन तारण फोरम (सं ेप म ‘’ जला फोरम’’) तथा रा य उपभो ा ववाद िन तारण आयोग (सं ेप म "रा य आयोग") क े समवत िनणय को पलट दया। नीचे दए गए फोरम ने मूल िशकायत को वीकार करते हुए यू इं डया ए योरस क ं पनी िलिमटेड (सं ेप म "बीमा क ं पनी") को बीिमत रािश क े 75 ितशत क सीमा तक गैर-मानक आधार पर दावेदार को ितपूित करने का िनदश दया था, जो क. 8,40,000/- था l त य
3. इस अपील क े िनणय क े िलए आव यक सं त य इस कार ह:- (क) अपीलकता क (डंपर) ( जसे इसक े बाद "वाहन" क े प म संदिभत कया गया है) का मािलक था, जसक पंजीकरण सं. एचआर-55सी-5385 और 20.02.2008 से 19.02.2009 क अविध क े िलए 8,40,000 पये क े बीिमत घो षत मू य क े िलए एक वैध बीमा पॉिलसी (पॉिलसी सं या 354101/31/07 01/00013342) थी। (ख) 26.06.2008 पर, अपीलाथ क े चालक-मम चंद को शंकर क ढाणी म िम ल क े फ़ाम म टोन ड ट को उतारना पड़ा । उसने पता जानने क े िलए गाड़ खड़ क । वीकृ त मामला यह है क जब वह पता खोजने क े िलए वाहन से बाहर िनकला तो उसने चाबी वाहन म ह लगी छोड़ द । (ग) िनराकरण प म, जसम चालक मम चंद क े बयान का हवाला दया गया था, यह उ लेख कया गया था क मम चंद वाहन से उतरा और उ वाहन क चाबी को वाहन म ह लगे छोड़ने क े बाद िम ल क े फाम क े बारे म पूछताछ करने गया । जब वह क ु छ दूर चला गया तो उसने वाहन क े टाट होने क आवाज सुनी और वह वापस आया और देखा क वाहन क चालक क सीट पर दो लोग बैठे थे और उ वाहन क े पीछे एक कार थी जसम तीन लोग थे। उसने आगे कहा था क वे चोर कर वाहन ले गए। (घ) 27.06.2008 पर ह, अपीलकता ने एक ाथिमक सं. 77 भा.दं.सं. क धारा 379 क े तहत बलासपुर पुिलस टेशन, गुड़गांव म पंजीकृ त क l 02.07.2008 पर, अपीलकता ने यथ -बीमा क ं पनी को चोर क े बारे म सूिचत कया। 11.06.2009 पर, अपीलकता ने जला फोरम, गुड़गांव क े सम िशकायत सी. पी. ए. सं. 515/2009 दज क, जसम आरोप लगाया गया क यथ दावे क े िनपटारे म देर कर रहा था और इस तरह सेवा म कमी कर रहा था। उ िशकायत का पैरा 4 और क गई ाथनाएँ मह वपूण ह, जो िन न प से है: "4. क िशकायतकता को पहले ह वरोधी प क े पास सभी ासंिगक कागजात/ प जमा कर दए गए थे, ले कन अवैध प से, दुभावनापूण तर क े से और बना कसी अिधकार, शीषक और याज क े, मामले को एक बहाने से दूसरे पर लटकाते हुए, जब क िशकायतकता ने पये क बीिमत रािश 8,40,000 पए क े िलए ीिमयम का भुगतान करक े वरोधी प क सेवाओं को काम पर रखा है-और इसिलए, वरोधी प िशकायतकता को पया सेवाएं दान करने म पूर तरह से वफल रहा है।"
XXX XXX XXX "क) वरोधी प को चोर क े वाहन क बीिमत रािश अथात 8,40,000 पए चोर क तार ख से वसूली तक @18 % ित वष याज क े साथ भुगतान करने का िनदश दे l ख) िशकायतकता ारा झेली गई मानिसक पीड़ा, देर, उ पीड़न आ द क े कारण वरोधी प को Rs.20,000/- क रािश का भुगतान करने का िनदश द।‘’ (ङ) मह वपूण बात यह है क िशकायत क तार ख को बीमा क ं पनी ने दावे को िनराकृ त नह ं कया था। रकॉड से ऐसा तीत होता है क बीमा क ं पनी ने मामले क जांच क े िलए "डे टा डटे ट स" नामक एक एजसी िनयु क थी और उ एजसी ने 27.10.2008 पर दावे का िनराकरण करने क िसफा रश क थी। (च) िशकायत सी. पी. ए. सं. 515/2009 को 11.06.2009 पर दज कए जाने क े बाद, यह क े वल 15.10.2009 पर था क यथ - बीमा क ं पनी ने दावे को िनराकृ त करते हुए एक प जार कया। िनराकृ त प का ासंिगक ह सा इस कार हैः- "2. आपको, एक सूचना प दनाक ं 02.07.2008, क े मा यम से ने पहली बार सूिचत कया क आपका उपरो ड पर सं एचआर-55सी-5385 26.06.2008 पर चोर हो गया था। "5. इस कार, उपरो त य से जैसा क आपने और आपक े चालक ने खुलासा कया है, यह ब क ु ल प है क आपक े ड पर सं. एचआर-55सी-5385 पूर तरह से आपक े और आपक े चालक मम चंद क उ वाहन को ठ क से सुर त नह ं रखने म पूण लापरवाह का प रणाम था।यह ब क ु ल प है क य द उ ड पर को बना देखे नह ं छोड़ा जाता और आगे उ ड पर क चाबी को उ ड पर क े अंदर नह ं छोड़ा जाता, तो उसे कोई भी य नह ं ले जा सकता था। उपरो उ लंघन और वषय बीमा पॉिलसी क े िनयम और शत क े उ लंघन को देखते हुए, क ं पनी उ ड पर क े संबंध म कसी भी दावे का भुगतान करने क े िलए उ रदायी नह ं है। इसिलए, क ं पनी क े स म ािधकार ने आपक े दावे को खा रज कर दया है। यह कृ पया नोट कया जा सकता है।" (छ) जब मामला इस कार था, िशकायत सी. पी. ए. सं या 515/2009 जला मंच क े सम 22.11.2020 पर आई, जब िन निल खत बयान सी. पी. ए. सं. 515/2009 म अपीलकता क े अिधव ा का दज कया गया तीत होता है: "म, सुर क ु मार गुिलया, अिधव ा, बयान देता हूँ क म अपने मामले को आगे नह ं बढ़ाना चाहता।इसे खा रज कया जा सकता है। एसड /- एसड /- सुर क ु मार गुिलया, अिधव ा सद य आरओ एंड एसी ड सीड आरएफ, जीजीएन " बयान को अलग से दज करते हुए, जला फोरम ने 22.11.2010 पर उ िशकायत का िन निल खत श द म िनपटारा कयाः- "िशकायत वापस लेने क े िलए िशकायतकता क े व ान अिधव ा का बयान, अलग से दज कया गया। बयान को यान म रखते हुए, िशकायतकता क िशकायत को वापस िलए जाने क े प म खा रज कर दया जाता है। उिचत अनुपालन क े बाद फाइल को रकॉड क म भेजा जाए।" (ज) िनराकरण का सामना करते हुए, जो 15.10.2009 दनां कत है, दावेदार ने खुद को ितपूित करने और अपनी बीमा पॉिलसी का फल ा करने क े िलए वकृ त होकर, सी. सी. सं या 134/2012 क े प म एक नई िशकायत दज क । उ िशकायत म, अपीलकता ने कहा क, पहले क िशकायत दज करने क े बाद, य क वरोधी प क े अिधव ा अथात ् बीमा क ं पनी ने कसी न कसी बहाने बहस क े िलए कई तार ख ली, उनक े अिधव ा उ अिधव ा क े रवैये से नाराज हो गए और गलती से 22.11.2020 पर मामला वापस ले िलया। यह प प से अिभवाक कया गया था क उ िशकायत को वापस लेना दुभा यपूण था, और अपीलकता को अिधव ा क े अनुिचत काय क े िलए पी ड़त नह ं कया जाना चा हए। िशकायत म, अपीलकता ने बीमा क ं पनी को बीमाधारक को @ 18 % ित वष क े साथ 8,40,000. क रािश का भुगतान करने का िनदश देने का अनुरोध कया और आगे मानिसक पीड़ा, देर और उ पीड़न क े कारण 20,000/-. क रािश क े िलए अनुरोध कया । (झ) बीमा क ं पनी ने अपने जवाब म, सी. पी. ए. सं या 515/2009 म पछली कायवाह को देखते हुए वतमान िशकायत क थरता पर आप जताई। इसने यह भी तक दया क बीमा पॉिलसी क े िनयम और शत का उ लंघन कया गया था। इसक े अित र, प रसीमा क े अिभवाक को भी वीकारा गया था। (ञ) आप य को जला फोरम ारा खा रज कर दया गया था। िशकायत का अिभकथन, जसे प रसीमा ारा व जत कया गया था, को एक िन कष दज करक े संबोिधत कया गया था क उपभो ा संर ण अिधिनयम क धारा 24क क े तहत फोरम ारा दनांक 06.03.2012 क े आदेश ारा देर, य द कोई हो, को पहले ह माफ कर दया गया था। पॉिलसी क शत क े उ लंघन क े बारे म अिभकथन को खा रज कर दया गया था और गैर-मानक आधार पर, बीिमत रािश क े 75 ितशत क सीमा तक रािश दान क गई थी। सी. पी. ए. सं. 515/2009 को वापस िलए जाने क े प म खा रज करने क े दनां कत 22.11.2010 आदेश क े बाद वतमान िशकायत दज करने म बार क े पहलू पर कोई िन कष दज नह ं कया गया था। बीमा क ं पनी ने रा य आयोग म अपील म मामले को उठाया। (ट) रा य आयोग क े सम क े वल दो ववाद का आ ह कया गया था। पहले क िशकायत को वापस लेने क े मु े पर कोई ववाद नह ं उठाया गया था। यह तक दया गया क चोर क सूचना बीमा क ं पनी को क े वल 02.07.2008 अथात चोर क े छह दन बाद द गई थी, इसिलए यह तक दया गया क बीमा पॉिलसी क शत सं या 1 का उ लंघन कया गया था। इसक े अित र पॉिलसी क शत सं या 5 क े उ लंघन का भी तक दया गया। सूचना म छह दन क देर क े बारे म उनक बात को बीमा विनयामक वकास ािधकरण (सं ेप म "आईआरड ए’’) ारा 20 िसतंबर, 2011 प रप संदभ आईआरड ए/एचएलट एच/एमआईएससी/सीआईआर/216/09/2011 का उ लेख करक े दर कनार कर दया गया, जसमे कहा गया है क सूचना म देर क े संबंध म पॉिलसी म कोई शत होने पर भी बीमाकता दावे को िनराकृ त करने क े िलए इसका आ य नह ं ले सकता है, जो अ यथा वा त वक सा बत होता है। (ठ) नीित क शत क े उ लंघन क े संबंध म रा य आयोग क े िन कष क सराहना करने क े िलए, नीित क शत सं या 1 और 5 को उदधृत करना आव यक है, जो िन नानुसार हैः "1. कसी भी आक मक नुकसान अथवा ित क घटना क े तुरंत बाद और कसी भी दावे क थित म क ं पनी को िल खत सूचना द जाएगी और उसक े बाद बीमाधारक ऐसी सभी जानकार और सहायता देगा जसक क ं पनी को आव यकता होगी। येक प दावा रट स मन देना और/या या या उसक ित बीमाधारक ारा ा होने पर तुरंत क ं पनी को अ े षत क जाएगी। क ं पनी को तुरंत िल खत सूचना भी द जाएगी, बीमाधारक को कसी भी आस न अिभयोजन जांच या कसी भी घटना क े संबंध म घातक जांच क जानकार होगी, जो इस पॉिलसी क े तहत दावे को ज म दे सकती है, चोर या आपरािधक काय क े मामले म जो इस पॉिलसी क े तहत दावे का वषय हो सकता है, बीमाधारक पुिलस को त काल सूचना देगा और अपराधी को दोषी ठहराने म क ं पनी क े साथ सहयोग करेगा। 5.बीमाधारक बीिमत वाहन को नुकसान या ित से बचाने और उसे क ु शल थित म बनाए रखने क े िलए सभी उिचत कदम उठाएगा और क ं पनी क े पास बीिमत वाहन या उसक े कसी भी ह से या बीमाधारक क े कसी भी चालक या कमचार क जांच करने क े िलए हर समय वतं और पूण पहुंच होगी। कसी भी दुघटना या टूटने क थित म, बीिमत वाहन को आगे क ित या नुकसान को रोकने क े िलए उिचत सावधानी बरतने क े बना छोड़ नह ं दया जाएगा और य द बीिमत वाहन को आव यक मर मत से पहले चलाया जाता है, तो नुकसान का कोई भी व तार या वाहन को कोई भी नुकसान पूर तरह से बीमाधारक क े अपने जो खम पर होगा।" (ड) रा य आयोग ने प प से दज कया क 26.06.2008 पर वाहन क चोर क े तुरंत बाद, 27.06.2008 पर पुिलस क े पास ाथिमक दज़ क गई और बीमा क ं पनी को जानकार द गई ।यह भी दज कया गया क बीमा क ं पनी ारा यह सा बत करने क े िलए कोई ठोस सा य पेश नह ं कया गया था क सूचना देने म छह दन क देर हुई थी। आगे बढ़ते हुए, रा य आयोग ने दज कया क बीमा पॉिलसी क शत सं या 1 क े वल दुघटना क घटना पर लागू होती है न क चोर क े मामल पर। जहां तक शत सं या 5 का संबंध है, नेशनल इं योरस क ं पनी िलिमटेड बनाम िनितन खंडेलवाल, [(2008) 11 एससीसी 259] और अमलदु साहू बनाम ओ रएंटल इं योरस क ं पनी िलिमटेड, [(2010) 4 एससीसी 536] म इस यायालय क े िनणय क े आधार पर अिभिनधा रत कया गया था क भले ह उस खंड का भंग कया गया हो, दावे को पूर तरह से िनराकृ त नह ं कया जा सकता था और अमलदु साहू (उपयु ) म मापदंड लागू करते हुए, गैर-मानक आधार पर वीकाय रािश क े प म दावे का 75 ितशत दया गया था। इस कार, रा य आयोग ने बीमा क ं पनी क अपील को खा रज कर दया। (ढ) बना कसी आशंका क े बीमा क ं पनी ने इस मामले को रा ीय आयोग तक पहुचायां। यहाँ, यह मु य प से तक दया गया था िशकायत सं या 515/2009 को वापस लेने से िशकायतकता को नई िशकायत दज करने से रोक दया गया था। यह अिभवाक िस वल या सं हता. (सीपीसी) क े आदेश XXIII िनयम (1)(4) क े तहत प रसीमा पर भरोसा करते हुए वीकार कया गया था । इसक े अलावा, शत सं या 5 क े भंग क े गुणागुण पर वचार करते हुए, रा ीय आयोग ने पाया क शत सं या 5 का भंग कया गया था य क वाहन सड़क क े कनारे चाबी क े साथ उपे त था । तथा प, भंग क े प रणाम क े संबंध म लागू कानून पर आगे कोई चचा नह ं हुई और नीचे दए गए फोरम क े आदेश म चचा क गई पूव िनणय क े बारे म रा ीय आयोग क े आदेश म कोई कानाफ ू सी नह ं है। समान प से, शत सं या 1, क े भंग पर तक क े संबंध म, यह दज कया गया था क वाहन क चोर क िल खत सूचना देने का दावेदार का दािय व था। इस कार, रा ीय आयोग ने पुनर ण यािचका को अनुमित द ।
4) हमने अपीलकता क व ान अिधव ा सु ी क ु िनका, ज ह ने हमारे सामने मामले को बहुत क ु शलता से तुत कया और ी. जे. पी. योक ं द, यथ -बीमा क ं पनी क े व ान अिधव ा, ज ह ने अपनी तुितकरण देते समय कोई कसर नह ं छोड़ को सुना । पहले क िशकायत को वापस लेना 5) शु आत म, हम यह दज करना चाहगे क रा य आयोग क े सम तक नह ं देने क े बाद, पछली िशकायत को वापस लेने क े म ेनजर वतमान िशकायत क े वचार पर रोक लगाए जाने क े कारण, रा ीय आयोग को वतमान मामले क े त य पर, यथ -बीमा क ं पनी को उस वचार से आ ह करने क अनुमित देना उिचत नह ं था। रा य आयोग क े आदेश से यह बहुत प है क बीमा क ं पनी ारा क े वल दो बंदुओं पर तक दया गया था। 6) रा य आयोग क े आदेश का पैरा 6 िन न प म उदधृत हैः- "अपीलकता-बीमा क ं पनी क े व ान अिधव ा ने दोहरे तक देकर जला फोरम क े आदेश पर अ याकरण कया है। पहला यह क बीमा क ं पनी को सूचना देने म 6 दन क देर हुई और दूसरा यह क इ नशन चाबी चालक ारा क म छोड़ द गई थी और क को सड़क पर उपे त छोड़ दया गया था।"
7) कसी भी थित म, हम आ त ह क यायाधीश क े हत क े िलए यह आव यक है क अपीलकता को, इस मामले क े विश त य और प र थितय म, इस आधार पर गैर- उपयु नह ं होना चा हए क उसक पछली िशकायत वापस ले ली गई थी।हम िन निल खत कारण से ऐसा कहते ह:i. सबसे पहले, मूल िशकायत सं या 515 11.06.2009 पर दायर क गई थी जब बीमा क ं पनी ने दावे पर कोई िनणय नह ं िलया था। वा तव म, िशकायतकता ने आरोप लगाया था क बीमा क ं पनी इस मु े पर सु त थी और उसने "पया सेवा" दान नह ं करने क िशकायत क थी; ii. दूसरा, उस िशकायत को लं बत रखते हुए, यह 15.10.2009 पर था क िनराकरण प पॉिलसी क शत सं या 1 और 5 क े किथत भंग पर जार कया गया था; iii. तीसरा, हम पाते ह क क े वल िशकायतकता क े अिधव ा का बयान दज करते हुए एक अलग कायवाह तैयार क गई है। अिधव ा क े बयान म कहा गया है क "म, सुर क ु मार गुिलया, अिधव ा, बयान देता हूँ क म अपने मामले को आगे नह ं बढ़ाना चाहता। इसे खा रज कया जा सकता है "। iv. चौथा, 06.03.2012 पर दायर िशकायत म, अपीलकता ने कहा क चूं क वरोधी प - बीमा क ं पनी क े अिधव ा बहस क े िलए कई तार ख ले रहे थे, इसिलए उनक े अिधव ा ने वरोधी प क े अिधव ा क े रवैये से नाराज होकर गलती से उपरो मामले को वापस ले िलया। v. पाँचवाँ, अपीलकता आगे कहता है क वापस लेना दुभा यपूण था और उसे अपने अिधव ा क े काय क े िलए पूवा ह नह ं रखना चा हए था। vi. छठा, रा ीय आयोग का िन कष भी इस मामले म त या मक प से गलत है।अपीलकता क े व ान अिधव ा ने रा ीय आयोग क े आदेश क े पैरा 9 क ओर हमारा यान आक षत कया जसम िन निल खत ु टपूण िन कष दज कया गया था। "9. यह ववा दत नह ं है क इससे पहले भी, िशकायतकता ने उपभो ा िशकायत सं.515/2009 वाद हेतुक समान कारण पर वरोधी प /बीमा क ं पनी क े खलाफ उपभो ा िशकायत सं. 515/2009 दायर क l अिभलेख क े अवलोकन से पता चलेगा क उसी चोर क े संबंध म बीमा दावे को िनराकृ त करने क े संबंध म िशकायतकता ारा दायर क गई उपरो िशकायत को िशकायतकता ारा 22.11.2010 पर बना शत वापस ले िलया गया था। सी.सी.सं. 515/2009 म ासंिगक आदेश क ित रकॉड म है।आदेश को िन नानुसार पुनः तुत कया गया हैः "िशकायत वापस लेने क े िलए िशकायतकता क े व ान अिधव ा का बयान अलग से दज कया गया। बयान को देखते हुए, िशकायतकता क िशकायत को वापस िलया गया मानते हुए खा रज कया जाता ह l उिचत अनुपालन क े बाद फाइल को अिभलेख क म भेज दया जाए। यह यान दया जाएगा क रा ीय आयोग इस गलत धारणा म था क मूल िशकायत सं या 515/2009 बीमा दावे को िनराकृ त करने क े संबंध म दायर क गई थी और यह इस गलत आधार पर आगे बढ़ा क िशकायत सं या 515 म िनराकरण को चुनौती देने क े बाद, 22.11.2010 पर बना शत िशकायत को वापस लेना अपीलकता क े िलए घातक था। मूल िशकायत सं या 515/2009 11.06.2009 पर दायर क गई थी और यथ -बीमा क ं पनी ने क े वल 15.10.2009 पर दावे को िनराकृ त कर दया था। 8) पूवगामी को यान म रखते हुए, यह दोहराया जाना चा हए क िशकायत सं या 515 बीमा क ं पनी ारा दावे का िनपटान न होने क े कारण चोर क े बाद दज क गई थी। दावे का खंडन उ िशकायत क े ल बत रहने क े दौरान किथत तौर पर शत सं. 1 तथा 5 क े उ लघंन क े कारण कया गया थाl उ िशकायत को िशकायतकता क े अिधव ा ारा, िशकायत को वा पस लेने क े प िनदश क े बना, इस कारण से वापस ले िलया गया था क बीमा क पनी क े अिधव ा मामले को ल बा खींच रहे थे l तथा प, अिधव ा क गलती क े िलए, िशकायतकता को पी ड़त नह ं कया जा सकता है। अंत म, रा ीय आयोग ारा िशकायत को इस गलत बहाने से खा रज कर दया गया क पहले क िशकायत म िनराकरण क े आदेश को चुनौती द गई थी। इस कार, हमारे वचार म, िशकायत को आदेश XXIII िनयम (1) (4) िस..सं. क सीमा पर नह ं रखा जा सकता है और विश त य म, इसक े गुणागुण पर वचार करने क आव यकता है। वतमान मामले क े त य म, वचार क े िलए मु य यह हैः या चोर क े बारे म बीमा क ं पनी को सूिचत करने म 6 दन क देर शत सं या 1 क े उ लघंन क े दायरे म आती है और या त य क े आधार पर दावे क े अ वीकृ ित को उिचत ठहराने क े िलए बीमा पॉिलसी क शत सं या 5 शत का उ लंघन हुआ है ?
9) शत सं या 1 क े सावधानीपूवक अवलोकन से पता चलता है क कसी भी आक मक नुकसान अथवा ित क घटना क े तुरंत बाद बीमा क ं पनी को िल खत प म सूचना द जानी चा हए। खंड का उ र भाग कहता है क चोर अथवा आपरािधक कृ य क े मामले म, जो पॉिलसी क े तहत दावे क े अधीन हो सकता है, बीमाधारक को पुिलस को त काल सूचना देनी होगी और अपराधी क सजा सुिन त करने म बीमा क ं पनी क े साथ सहयोग करना होगा l शत सं या 1 क इस या या क े समथन म और उसक े अिभवाक को मजबूत करने क े िलए क अपीलकता-दावेदार ने शत सं या 1 का भंग नह ं कया, अपीलकता क े व ान अिधव ा ने जैना क ं शन क ं पनी बनाम ओ रएंटल इं योरस क ं पनी िलिमटेड व अ य, [(2022) 4 एससीसी 527] म इस यायालय क े हाल क े फ ै सले पर भरोसा कया, जसम गुरिशंदर िसंह बनाम ीराम जनरल इं योरस क ं पनी िलिमटेड [(2020) 11 एस. सी. सी. 612] मामले म तीन यायाधीश क पीठ क े फ ै सले पर भरोसा करते और उसे दोहराते हुए इस यायालय ने िन निल खत प से अिभिनधा रत कया:- "10. शु आत म, यह यान दया जा सकता है क ओम काश बनाम रलायंस जनरल इं योरस, [(2017) 9 एससीसी 724] और ओ रएंटल इं योरस क ं पनी िलिमटेड बनाम परवेश चंदर च ढा, [(2018) 9 एससीसी 798] म इस यायालय क े दो यायाधीश क पीठ क े फ ै सल म वरोधाभास था, इस सवाल पर क या वाहन क चोर क घटना क े बारे म बीमा क ं पनी को सूिचत करने म देर हुई, तथा प ाथिमक तुरंत दज क गई थी, दावेदार बीमा दावे से वंिचत हो जाएगा, मामले को तीन- यायाधीश क पीठ को भेजा गया था। “11. गुरिशंदर िसंह बनाम ीराम जनरल इं योरस क ं पनी िलिमटेड, [(2020) 11 एससीसी 612] मामले म तीन- यायाधीश क पीठ ने समान मामले म बीमा अनुबंध क शत 1 क या या क और िन नानुसार ट पणी क ः (एससीसी पीपी. 618-21, पैरा 9-15,17 और 20) 12.हमारे वचार म, उपरो िस ांत को लागू करते हुए, वा ण यक वाहन पैक े ज पॉिलसी क े िलए मानक फॉम क शत 1 को दो भाग म वभा जत करना होगा। शत 1 क े पहले भाग क े अवलोकन से पता चलता है क यह ावधान है क " कसी भी आक मक नुकसान अथवा ित क घटना क े तुरंत बाद क ं पनी को िल खत प म एक सूचना द जाएगी"। इसम आगे यह ावधान कया गया है क कसी भी दावे क थित म और उसक े बाद, बीमाधारक ऐसी सभी जानकार और सहायता देगा जसक क ं पनी को आव यकता होगी। इसम ावधान है क येक प, दावा, रट, स मन देना और/अथवा या अथवा उसक ित बीमाधारक ारा ा होने पर तुरंत बीमा क ं पनी को भेज द जाएगी। इसम यह भी ावधान है क बीमाधारक ारा क ं पनी को तुरंत िल खत सूचना द जाएगी य द उसे कसी भी घटना क े संबंध म कसी आस न अिभयोजन जांच अथवा घातक जांच क जानकार होगी, जो इस नीित क े तहत दावे को ज म दे सकती है।
13. ***
14. हम पाते ह क शत 1 का दूसरा भाग 'दुघटना क े अलावा चोर अथवा आपरािधक कृ य' से संबंिधत है। इसम ावधान है क चोर अथवा आपरािधक कृ य क े मामले म, जो पॉिलसी क े तहत दावे का वषय हो सकता है, बीमाधारक पुिलस को त काल नो टस देगा और अपराधी क सजा सुिन त करने म क ं पनी क े साथ सहयोग करेगा।पुिलस को त काल नो टस देने क े पीछे का उ े य यह तीत होता है क य द पुिलस को तुरंत चोर अथवा कसी आपरािधक कृ य क े बारे म सूिचत कया जाता है, तो पुिलस तं को स य कया जा सकता है और वाहन क बरामदगी क े िलए कदम उठाए जा सकते ह। चोर क े मामले म बीमा क ं पनी अथवा सव क क भूिमका सीिमत होगी। यह पुिलस है, जो बीमाधारक क ाथिमक पर कारवाई करते हुए, उसे वाहन का पता लगाने और उसे बरामद करने क े िलए त काल कदम उठाने क आव यकता होगी। इसक े वपर त, बीमा क ं पनी का सव क, अिधक से अिधक, वाहन क चोर क े बारे म त य का पता लगा सकता है। 15.यह भी यान दया जाना चा हए क, य द ाथिमक दज होने क े बाद, पुिलस सफलतापूवक वाहन क बरामदगी करती है और उसे बीमा धारक को वापस कर देती है, तो पॉिलसी क े कारण मुआवजे का दावा करने का कोई अवसर नह ं होगा। यह तभी होता है जब पुिलस वाहन का पता लगाने और उसे बरामद करने क थित म नह ं होती है और वाहन का पता नह ं चलने क े बाद पुिलस ारा अंितम रपोट दज क जाती है, बीमाधारक मुआवजे क े िलए अपना दावा दज करने क थित म होगा।
16. * *
17. क अनुबंध क े तहत उपयोग कए जाने वाले "सहयोग" श द का मू यांकन त य और प र थितय म कया जाना चा हए।बीमा धारक क े िलए "सहयोग करने क े कत य" का आकलन करते समय, अ य बात क े साथ-साथ, यायालय को बीमाधारक ारा कए गए उन उ लंघन को यान म रखना चा हए जो बीमा क ं पनी क े िलए ितक ू ल ह। आमतौर पर, बीमाकता को चोर क सूचना देने म क े वल देर, जब कानून वतन अिधका रय को पहले ह सूिचत कर दया गया था, बीमाधारक क े "सहयोग करने क े कत य" का भंग नह ं हो सकता है। 18.-19***
20. इसिलए, हमारा मानना है क जब कसी बीमा धारक ने वाहन क चोर होने क े तुरंत बाद ाथिमक दज क है और जब पुिलस जांच क े बाद वाहन का पता नह ं चलने क े बाद अंितम रपोट दज करती है और जब बीमा क ं पनी ारा िनयु सव णकताओं/जांचकताओं ने चोर क े दावे को वा त वक पाया है, तो चोर क घटना क े बारे म बीमा क ं पनी को सूिचत करने म क े वल देर बीमाधारक क े दावे को अ वीकार करने का आधार नह ं हो सकती है।"
12. यायालय क राय म िनणय का पूव अनुपात मामले म शािमल मु े को पकड़ लेता है। वतमान मामले म भी, िशकायतकता ारा वाहन क चोर क घटना क े अगले दन त काल ाथिमक दज क गई थी। अिभयु को भी िगर तार कर िलया गया और आरोप प दायर कर दया गया, तथा प, वाहन का पता नह ं चल सका। वभावतः, यह सच है क िशकायतकता क ओर से बीमा क ं पनी क े सम अपने दावे को सूिचत करने और दज करने म लगभग पांच मह ने क देर हुई थी, फर भी, यह यान देना उिचत है क बीमा क ं पनी ने दावे को इस आधार पर िनराकृ त नह ं कया है क यह वा त वक नह ं था। इसने क े वल देर क े आधार पर िनराकृ त कया है। जब िशकायतकता ने वाहन क चोर क े तुरंत बाद ाथिमक दज क थी, और जब पुिलस ने जांच क े बाद आरोपी को िगर तार कया था और संबंिधत यायालय क े सम चालान भी दायर कया था, और जब बीमाधारक का दावा वा त वक नह ं पाया गया था, तो बीमा क ं पनी क े वल इस आधार पर दावे को अ वीकार नह ं कर सकती थी क चोर क घटना क े बारे म बीमा क ं पनी को सूिचत करने म देर हुई थी।"
10) उपरो िनणय ने मामले और ववाद को शांत कर दया। वतमान मामले म शत सं या 1 का कोई भंग नह ं हुआ था। वतमान मामले म, 26.06.2008 पर चोर क घटना क े बाद, 27.06.2008 पर ाथिमक दज क गई थी। बीमा क ं पनी को 02.07.2008 पर भी सूिचत कया गया था। पुिलस ने रकॉड से पता चलता है क वाहन का पता नह ं चला है।
11) जहां तक शत सं या 5 क े किथत भंग का संबंध है, रकॉड से यह देखा जाता है क दावेदार क े चालक ने चाबी को वाहन म ह छोड़ दया था जब वह "िम ल फाम" क े थान क खोज करने क े िलए नीचे उतरा, जहां उसे टोनड ट उतारना था । जांचकता ने दावे क े िनराकरण क िसफा रश क य क, उनक े अनुसार, बीिमत वाहन क सुर ा क े िलए चालक ारा कदम नह ं उठाए गए थे। अपीलकता ारा यह तक दया जाता है क शत सं या 5 का उ लंघन य द कोई हो, तो दावे का पूण िनराकरण नह ं हो सकता है। यह तक दया जाता है क दावे का िनपटारा गैर-मानक आधार पर कया जाना चा हए, जैसा क जला फोरम और रा य आयोग ारा आदेश दया गया था। िनितन खंडेलवाल (उपयु ) और अमलदु साहू (उपयु ) पर िनभरता रखी गई है। 12) बीमा-क ं पनी क े व ान अिधव ा ने इन तुितय का बल वरोध कया और अपील को खा रज करने का अनुरोध कया। उनक े ारा यह तक दया गया है क िनितन खंडेलवाल (उपयु ) और अमलदु साहू (उपयु ) म िनराकरण का कारण चोर से स ब धत नह ं था, वतमान मामले म, कारण चोर से स ब धत था। व ान अिधव ा ने आ े पत आदेश म दज िन कष का समथन कया। 13) िनितन खंडेलवाल (उपयु ) म मामले क े त य को पढ़ने से पता चलता है क िनराकरण इस आधार पर था क वाहन का उपयोग टै सी क े प म कया जा रहा था और अमलदु साहू (उपयु ) म, यह इस आधार पर था क वाहन का उपयोग कराए पर कया जा रहा था।हमारे वचार म, इससे उस अनुपात म कोई फक नह ं पड़ेगा जो उन िनणय से िनकाला जा सकता है। 14 ) इस यायालय क े िनणय क एक लंबी पं म यह अ छ तरह से तय कया गया है क शत का कोई भी भंग मौिलक भंग क कृ ित का होना चा हए ता क दावेदार को कसी भी रािश से वंिचत कया जा सक े । [देख मंजीत िसंह बनाम नेशनल इं योरस क ं पनी िलिमटेड तथा अ य, [(2018) 2 एससीसी 108]; बी. वी. नागराजू बनाम ओ रएंटल इं योरस क ं पनी िलिमटेड, संभागीय अिधकार, हसन, [(1996) 4 एससीसी 647], नेशनल इं योरस क ं पनी िलिमटेड बनाम वण िसंह तथा अ य, [(2004) 3 एससीसी 297] और ल मी चंद बनाम रलायंस जनरल इं योरस, [(2016) 3 एससीसी 100]
15) यह िनराकरण प और सव ण रपोट म एक वीकृ त थित है क चोर हुई थी। आरोप यह है क दावेदार ने इ नशन म चाबी क े साथ वाहन को बना देखे छोड़ने म लापरवाह क थी। भा.दं.सं. क धारा 378 म चोर को िन नानुसार प रभा षत कया गया हैः- "378. चोर - जो कोई कसी य क सहमित क े बना कसी य क े क जे से कसी भी चल संप को बेईमानी से लेने का इरादा रखता है, वह उस संप को इस तरह लेने क े िलए थानांत रत करता है, उसे चोर आदेश वाला कहा जाता है।" जैसा क प रभाषा से देखा जाएगा, चोर तब होती है जब कोई य कसी य क े क जे से कसी भी चल संप को उस य क सहमित क े बना बेईमानी से लेने का इरादा रखता है, उस स पित को ऐसे लेने क े िलए हटाता है l यह बीमा क ं पनी का मामला नह ं है क दावेदार ने कानून क म वाहन को हटाने म सहमित द थी अथवा िमलीभगत क, ऐसी थित म यह क़ानून क म चोर नह ं होगी। या यह कहा जा सकता है, जैसा क िनराकरण प म कहा गया है, क वाहन क चोर पूर तरह से थी चालक मम चंद ारा इ नशन म चाबी क े साथ वाहन को बना देखे छोड़ने का प रणाम थी ? इस मामले क े त य पर, जवाब नकारा मक होना चा हए। िनराकरण प म यह देखा गया है क चालक मम चंद वाहन से उतरने क े बाद िम ल क े फाम क े थान क े बारे म पूछताछ करने गया था और क ु छ दूर जाने क े बाद उसने वाहन क े टाट होने और चोर होने क आवाज सुनी। वाहन से उतरने वाले चालक और चोर पर यान देने क े बीच का समय अंतराल बहुत कम है, जैसा क मामले क े त य से प है।ऐसी प र थितय म, यह नह ं कहा जा सकता है क वाहन क चाबी को इ नशन म छोड़ना वाहन को चुराने क े िलए एक खुला िनमं ण था। 16) इं लड म अपील यायालय, डे वड टॉप बनाम लंदन क ं बस (साउथ वे ट) िलिमटेड, [1993] ईड यूसीए सीआईवी 15 क े मामले य प एक घातक दुघटना क े िलए वाहन क े मािलक क े दािय व क े संदभ म इस मु े पर वचार करने का अवसर था ।फ ै सले म दए गए त य इस कार ह:- "सामा य अ यास क े अनुसार, चालक, ी ीन, 24 अ ैल 1988 को दोपहर लगभग 2.35 बजे बस टॉप पर उस ले-बाय म बस से िनकले।उसने इसे इ नशन चाबी क े साथ खुला छोड़ दया । एक अलग बस चलाते हुए अपना काम फर से शु करने से पहले उनक े पास 40 िमनट का आराम था।एक यव था थी जसक े तहत चालक अपनी आराम क अविध अ पताल म बता सकते थे। उ मीद थी क िम टर ीन क े ले-बाय म बस छोड़ने क े लगभग आठ िमनट बाद एक और ाइवर बस उठाएगा और उसी रा ते से चलाएगा। ले कन दूसरे चालक, जसे दोपहर लगभग 2.43 बजे बस उठानी चा हए थी, ने ऐसा नह ं कया य क वह अ व थ महसूस कर रहा था। उनक िश ट गैर-अिनवाय ओवरटाइम होती, और वे अपने ओवरटाइम क े िलए रपोट नह ं करते थे। इसिलए बस ले-बाय म ह रह । ी ीन ने बाद म इसे वहाँ देखा और बताया क यह अभी भी वह ं खड़ थी । इसिलए, इसम कोई संदेह नह ं है क डपो को पता था क बस वहाँ थी।ले कन, संभवतः चालक या उपल ध कमचा रय क कमी क े कारण, उस शाम बस लेने क े िलए क ु छ नह ं कया गया। यह कसी ऐसे य ारा ले जाया गया था जसका कभी पता नह चला, रात म 11.15 से ठ क पहले, इसे अपे ाकृ त कम दूर क े िलए चलाया गया था जब तक क ीमती टॉप को नीचे नह ं िगराया गया और मार दया गया, और इसे वहाँ से कोने क े आसपास छोड़ दया गया ।" पी.पल (ए सपोटस) िलिमटेड बनाम क ै मडेन लंदन बरो काउंिसल [1984] यूबी 342 माननीय यायाधीश रॉबट गॉफ क े फ ै सले का उ लेख करते हुए, अपील यायालय ने िन नानुसार अिभिनधा रत कयाः- "जहाँ तक मामला इस आधार पर रखा गया है क बस को खुला छोड़ना और कसी सावजिनक घर क े पास राजमाग पर इ नशन क क ुं जी क े साथ एक वशेष ेणी म एक वशेष जो खम पैदा करना है, पी. पल (ए सपोटस) िलिमटेड. बनाम क ै डेन लंदन बरो काउंिसल [1984] यूबी 342 म लॉड यायाधीश रॉबट गॉफ (जैसा क वे तब थे) क े फ ै सले म पृ 359ई-एफ पर एक अंश का उ लेख करना उिचत है, जहाँ उ ह ने कहा था: " वशेष प से, मेरे दमाग म क ु छ ऐसे मामले ह जहां ितवाद गलत करने वाले को गलत करने क े साधन क े साथ तुत करता है, उन प र थितय म जहां यह प है अथवा बहुत संभावना है क वह ऐसा करेगा-उदाहरण क े िलए, जहां वह एक कार को एक ऐसे य ारा चलाने क े िलए स पता है जो नशे म है, या प प से अ म है, जो वाद को गाड से क ु चल देता है…. ।’’ ले कन जस तरह क े मामल का लॉड यायाधीश रॉबट गॉफ वहां उ लेख कर रहे थे, वे वतमान मामले से बहुत अलग ह। यह जोड़ा जा सकता है क इस बात का कोई सा य नह ं है क अपराधी त वीर म दखाए गए सावजिनक घर म बार-बार आ रहा था; हम नह ं जानते क वह कौन था, और न ह कोई सा य अथवा अनुमान है क जो य उस वशेष सावजिनक घर म बार-बार जाते ह, वे वशेष प से वाहन को चुराने और आनंद-सवार म संल न होने क संभावना रखते ह।" (हमने रेखां कत कया) उपरो तक हम यह िन कष िनकालने क अपील करता है क वतमान मामला एक उ कृ प से उपयु मामला था, जहां 75% पर दावा गैर-मानक आधार पर दया जाना चा हए था। भले ह क ु छ लापरवाह थी, इस मामले क े विश त य पर, यह पूण िनराकरण क शत सं या 5 का मौिलक भंग नह ं था। जला फोरम ारा इसका आदेश दया गया था और रा य आयोग ारा इसक पु क गई थी। 17) बीमा क ं पनी क े व ान अिधव ा ने अपनी िल खत तुितकरण म हमारे सामने शत सं या 5 क े भंग पर अपने मामले का समथन करने क े िलए व.अनु.या (सी) सं या 6518/2018 म इस अदालत ारा पा रत एक गैर-सूिचत आदेश दनां कत 29.03.2022 रखा है जसका शीषक क ं वरजीत िसंह कांग बनाम मेसस आईसीआईसीआई लो बाड जनरल इं योरस क ं पनी िलिमटेड व अ य है । हमने आदेश का सावधानीपूवक अ ययन कया है। उ आदेश म, यह दज कया गया है क साथ-साथ दावेदार नीचे दए गए फोरम क े सम हार गया और यह भी दज कया गया है क रा य आयोग ने वाहन म इ नशन चा बय को छोड़ने का आधार दावे को िनराकरण करने का एक वैध कारण नह ं पाया। तथा प, ाथिमक दज करने म अ प और अ यिधक देर क े आधार पर, िनराकरण को बरकरार रखा गया था । उस मामले म, जब नुकसान 25.03.2010 पर था, पुिलस को सूचना क े वल 02.04.2010 पर थी, इसिलए प प से यह शत सं या 1 का भंग था। इसम कोई संदेह नह ं है क आदेश क े अंत से पहले पैरा म यह दज कया गया है क उस मामले म यािचकाकता क ओर से उिचत देखभाल क कमी ने यािचकाकता क े खलाफ भार पड़ यह िन कष िनकाला गया क िनराकरण को गलत नह ं ठहराया जा सकता है। तथा प, िनराकरण का ाथिमक कारण शत सं या 1 का उ लंघन अथात पुिलस को सूिचत करने म देर था । इसक े अलावा चूं क शत सं या 1 का मौिलक भंग कया गया था, इसिलए गैर-मानक आधार पर दावे क े िनपटारे क े िलए मु े उठाने का कोई अवसर नह ं था।शत सं या 5 क े भंग क े मौिलक भंग नह ं होने क े बारे म कोई कानाफ ू सी नह ं है।हम वतमान मामले को त य क े आधार पर पूर तरह से अलग पाते ह य क शत सं या 1 का कोई भंग नह ं हुआ है य क पुिलस को सूचना त काल द गई थी। जला मंच और रा य आयोग ारा िनितन खंडेलवाल (उपयु ) और अमलदु साहू (उपयु ) को लागू करक े गैर-मानक आधार पर समवत अिधिनणय दए गए ह। इसिलए, आदेश कसी भी तरह से यथ -क ं पनी क सहायता नह ं करेगा। 18) अमलदु साहू (उपयु ) मामले म, इस यायालय ने गैर-मानक आधार पर दाव क े िनपटारे म यू इं डया ए योरस क ं पनी िलिमटेड ारा जार दशा-िनदश पर यान दया। दशा-िनदश इस कार ह:- मांक सं. ववरण िनपटान का ितशत (i) लाइसस ा वहन मता क घोषणा क े तहत। दावे क रािश से ीिमयम म 3 साल क े अंतर क कटौती कर अथवा दावे क रािश का 25 ितशत, जो भी अिधक हो, काट ल। (ii) अनु ि ा वहन मता से अिधक वाहन क वीकाय दावे क े 75 ितशत से अिधक दावे का भुगतान न कर। ओवरलो डंग। (iii) उपयोग क सीमा स हत वारंट /पॉिलसी क शत का कोई अ य भंग। वीकाय दावे का 75 ितशत तक भुगतान कर।" उपरो दशािनदश का पालन इस यायालय ारा अमलदु साहू (उपयु ) म कया गया था जैसा क उ िनणय क े पैरा 14 से प है। जला मंच और रा य आयोग ने वतमान मामले क े त य पर अमलदु साहू (उपयु ) को सह ढंग से लागू कया है और गैर-मानक आधार पर 75 ितशत का फ ै सला सुनाया है।
19) िनितन खंडेलवाल (उपयु ) और अमलदु साहू (उपयु ) सह सू िनधा रत करते है क जहाँ क ु छ अंशदायी कारक है, वहां बीमा रािश से एक आनुपाितक कटौती वह सब होगी जो बीमा क ं पनी कटौती करने क इ छा रख सकती है। हम अपीलकता क इस अिभवाक को वीकार करने क े िलए इ छ ु क ह क वतमान मामले म, प र य को िनयं त करने वाले त य क े आधार पर, अमलदु साहू (उपयु ) क े पैरा 14 म िनधा रत तािलका का खंड (iii) लागू कया गया है और जला फोरम और रा य आयोग को वीकाय दावे का पूरा 75% देने म उिचत ठहराया गया है। 20) उपरो कारण से, अपील क अनुमित द जाती है। हम रा ीय आयोग क े फ ै सले को दर कनार करते ह और रा य आयोग ारा पु कए गए जला फोरम क े फ ै सले को बहाल करते ह। जुमाने का कोई आदेश नह ं। …..……………....... या. (जे. क े. माहे र ) …..……………....... या. (क े. वी. व नाथन) नई द ली; 31 जुलाई, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी। Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.