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समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 246 वर्ष! 2017
पूव! सिसपाही मदन प्रसाद .… अपीलक ा!
बनाम
भार संघ एवं अन्य .… प्रति वादी
विनर्ण!य
न्यायमूर्ति विहमा कोहली
JUDGMENT
1. व !मान अपील सशस्त्र बल न्यायाति करर्ण[1], क्षेत्रीय पीठ, लखनऊ द्वारा पारिर 16 फरवरी, 2015 विदनांविक विनर्ण!य और आदेश क े विवरुद्ध है, सि?सक े ह अपीलक ा! द्वारा मूल रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय[3] क े समक्ष दायर की 1 “ ” संक्षेप में “एएफटी” में “एएफटी” एएफटी” 3 रि ट यारि का सं. 3439 वर्ष 2003 उद्घोर्षर्णा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनर्ण!य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबJति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया ?ा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण!य का अंग्रे?ी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना ?ाएगा था विनष्पादन और विXयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" गई अपील[2] सि?से दनन् र एएफटी में स्थानां रिर विकया गया था, सि?से प्रति वादी सं. 5 और 2 द्वारा पारिर, Xमशः 24 अगस्, 1999 और 4 अक्टूबर, 2001 विदनांविक आदेशों द्वारा खारिर? कर विदया गया था, सि?समें उन्हें अनुदत्त अवकाश से अति क समय क पया!प्त कारर्ण क े विबना छ ु ट्टी पर रहने क े लिलए,सेना अति विनयम, 1950[4] की ारा 39 (ख) क े ह उनक े लिखलाफ लगाए गए आरोप को बरकरार रख े हुए, उन्हें सेवा से बखा!स् करने क े आदेश का अनुमोदन विकया गया था।
2. संक्षेप में, वाद क े थ्य यह हैं विक अपीलक ा! को 4 ?नवरी, 1983 को सेना सेवा कोर[5] में एक यांवित्रक परिरवहन चालक क े रूप में भ i विकया गया था। वर्ष! 1998 में, उसे आरंभ में, 8 नवंबर, 1998 से 16 विदसंबर, 1998 क 39 विदनों क े लिलए अवकाश विदया गया। अनुक ं पा क े आ ार पर अवकाश बढ़ाने क े उसक े अनुरो को प्रति वादीगर्ण द्वारा अनुमति दी गई थी और उसे वर्ष! 1999 में 17 विदसंबर, 1998 से 15 ?नवरी, 1999 क 30 विदनों क े लिलए अविग्रम वार्षिर्षक अवकाश विदया गया। हालाँविक, अपीलक ा! पुनः सेवा ग्रहर्ण करने में विवफल रहा। यह दावा कर े हुए विक उसकी पत्नी बीमार हो गई थी और वह उसक े तिचविकत्सा उपचार की व्यवस्था कर रहा था और उसकी देखभाल कर रहा था, वह अनुदत्त अवकाश से अति क समय क छ ु ट्टी पर रहा। अवकाश बढ़ाने क े लिलए यातिचकाक ा! क े टेलीफोविनक अनुरो को अस्वीकार कर विदया गया6 । लेविकन, वह ुरं वापस नहीं लौटा। विदनांक 15 फरवरी 1999 को सेना अति विनयम की ारा 106 क े ह उन परिरस्थिस्थति यों की ?ांच क े लिलए एक कोट! ऑफ इन्क्वायरी गविठ की गई 2 ट् ांसफ अप्ली”क े शन सं सं. 1227 वर्ष 2010 4 “ ” संक्षेप में “एएफटी” में “एएफटी” अरि रिन संयम 5 “ ” संक्षेप में “एएफटी” में “एएफटी” एएससी” 6 द्वारा टेलीग्राम रि न संांरिकत 18.01.1999 सि?नक े ह अपीलक ा! अवकाश से अति क समय क छ ु ट्टी पर रहा। न्यायालय ने राय दी विक अपीलक ा! को विदनांक 16 ?नवरी, 1999 से भगोड़ा घोविर्ष विकया ?ाए।
3. अपीलक ा! ने अं ः 108 विदनों क े बाद 3 मई, 1999 को मुख्यालय शाखा, एएससी क ें द्र (दतिक्षर्ण), बैंगलोर में आत्मसमप!र्ण कर विदया। उसक े लिखलाफ विवरतिच आरोप की सुनवाई 8 ?ुलाई, 1999 को सेना विनयमावली क े विनयम 22 क े ह कमांडिंuग ऑविफसर द्वारा की गई थी। अपीलक ा! ने विकसी भी गवाह से सि?रह करने से इनकार कर विदया। साक्ष्य का सारांश द?! करने क े बाद, कमांडिंuग ऑविफसर, मुख्यालय विंवग तिuपो कॉय (एमटी),एएससी क ें द्र (दतिक्षर्ण), बैंगलोर, ?हां अपीलक ा! ?ुड़ा हुआ था, द्वारा समरी कोट! माश!ल[7] विकया गया। प्रत्यथi नं. 5 ने एससीएम[8] क े संचालन क े लिलए न्यायालय का गठन विकया गया सि?सने अपीलक ा! को दोर्षी ठहराया और सेवा से बखा!स् गी की स?ा सुनाई।
4. बखा!स् गी आदेश से व्यणिथ अपीलक ा! ने सेना अति विनयम की ारा 164 क े अन् ग! प्रत्यथi सं. 2 क े समक्ष अपील विकया सि?से 4 अक्टूबर, 2001 विदनांविक आदेश द्वारा खारिर? कर विदया गया। उक्त आदेशों को अपीलक ा! द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष एक रिरट यातिचका दायर करक े चुनौ ी दी गई थी सि?से विनर्ण!य क े लिलए एएफटी को स्थानां रिर कर विदया गया और अं ः आक्षेविप आदेश द्वारा खारिर? कर विदया गया।
5. अपीलक ा! क े विवद्वान अति वक्ता श्री णिशव कां पांuे ने इस आ ार पर आक्षेविप आदेश को चुनौ ी विदया है विक प्रति वादीगर्ण ने अति विनयम की ारा 39 (ख) और ारा 120 क े प्राव ानों का उल्लंघन विकया है; विक एससीएम द्वारा सेवा से 7 “ ” संक्षेप में “एएफटी” में “एएफटी” एससी”एम 8 24 अगस्त 1999 को बखा!स् गी की स?ा नहीं दी ?ानी चाविहए थी और अति क म स?ा एक वर्ष! की अवति क े लिलए कारावास की थी ?ो दी ?ा सक ी थी; विक ारा 72 ?ो कोट! माश!ल द्वारा दी ?ाने वाली वैकस्थि}पक स?ा से संबंति है और ारा 73 ?ो ारा 71 में यथा वर्णिर्ण, कोट! माश!ल की स?ा क े रूप में दंu क े संयो?न पर विवचार कर ी है, एससीएम पर लागू नहीं हो ी है, बस्थि}क क े वल एक सामान्य कोट! माश!ल या सि?ला कोट! माश!ल पर लागू हो ी है और अं में, रक्षा सेवा विवविनयम, 1987[9] का विवविनयमन 448 एससीएम द्वारा दी ?ाने वाली स?ा की मात्रा विवविह कर ा है और अनुसूची में वर्णिर्ण दण्u ालिलका में विबना अवकाश क े अनुपस्थिस्थति या अवकाश से अति क छ ु ट्टी पर रहना Xमांक सं. 4 पर है सि?समें ीन महीने या उससे कम क े सश्रम कारावास का प्राव ान है ?बविक अपीलक ा! को गल रीक े से सेवा से बखा!स् गी की इ नी कठोर स?ा दी गई है। इस प्रकार यह क ! विदया गया विक अपीलक ा! पर अति रोविप सेवा से बखा!स् गी की स?ा विकए गए अपरा क े अनुपा में नहीं थी।
6. इसक े विवपरी, प्रति वादीगर्ण की ओर से प्रस् ु विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री आर. बालासुब्रमण्यम ने दूसरे पक्ष की दलीलों का खंuन विकया और कहा विक अपीलक ा! एक आद न तिuफॉ}टर बना रहा ?ो उस पर अति रोविप दंuों की संख्या से स्पष्ट है, ?ैसा विक आक्षेविप आदेश क े पैरा 4 में विदया गया है। यह क ! विदया गया विक अपीलक ा! क े इस दावे क े विवपरी विक उसने 18 फरवरी, 1999 को अपनी इकाई में उपस्थिस्थ हुआ, लेविकन उसे प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, अणिभलेखों क े अनुसार, वह विवस् ारिर अवकाश की समाविप्त पर सेवा ग्रहर्ण करने क े लिलए उपस्थिस्थ नहीं हुआ; और न ही उसने अपने इस दावे का समथ!न करने क े लिलए कोई दस् ावे? प्रस् ु विकया विक उसकी पत्नी इ नी अस्वस्थ थी और वह उसका इला? करा रहा था। अपीलक ा! क े इस आरोप -विक कोट! ऑफ 9 “ ” संक्षेप में “एएफटी” में “एएफटी” डी”एसआ इन्क्वायरी या एससीएम क े दौरान अपनाई गई प्रविXया विनयमों क े विवपरी थी- का विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा दृढ़ ा से खंuन विकया गया, सि?न्होंने कहा विक कोट! ऑफ इन्क्वायरी प्रति वादी सं. 4 क े आदेश क े ह की गई थी और प्रति वादी सं. 4 द्वारा मामले की सूचना सी े प्रति वादी सं. 3 को देने की कोई प्रविXया विवविह नहीं थी, ?ैसा विक प्रति वाद विकया गया है। विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने यह कर े हुए अपनी बा खत्म की विक अपीलक ा! ने एससीएम क े दौरान आरोप को स्वीकार विकया है और उसे बाद में उससे मुकरने और पूरी प्रविXया पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दी ?ा सक ी है।
7. हमने पक्षों क े विवद्वान अति वक्तागर्ण द्वारा दी गई दलीलों को सुना और अणिभलेखों का परिरशीलन विकया। अपीलक ा! का क ! विक उसे 8 नवंबर, 1998 और 15 ?नवरी, 1999 क े बीच की अवति क े लिलए अवकाश विदया गया था और अवकाश बढ़ाने क े लिलए उसक े अनुरो को प्रति वादीगर्ण द्वारा अनुतिच रूप से अस्वीकार कर विदया गया था, सि?सक े बाद वह 8 फरवरी, 1999 को इकाई में लौट आया, इस प्रकार, क े वल 34 विदनों क अति क अवकाश पर रहने की पुविष्ट रिरकॉu! से नहीं हो ी है। अपीलक ा! को 8 नवंबर, 1998 से 16 विदसंबर, 1998 क 39 विदनों क े लिलए छ ु ट्टी दी गई थी और विवस् ार क े लिलए उनक े अनुरो को 15 ?नवरी, 1999 क क े लिलए स्वीकार कर लिलया गया था। ?ब प्रति वादीगर्ण द्वारा अवकाश क े और विवस् ार क े उनक े अनुरो को अस्वीकार कर विदया गया, ो अपीलक ा! को विवस् ारिर छ ु ट्टी की समाविप्त पर ुरं सेवा ग्रहर्ण करना चाविहए था, लेविकन वह ऐसा करने में विवफल रहा। अपीलक ा! द्वारा यह प्रदर्णिश करने क े लिलए कोई दस् ावेज़ प्रस् ु नहीं विकया गया विक उसने 18 फरवरी, 1999 को इकाई में उपस्थिस्थ हुआ था। वास् व में, साक्ष्य क े सारांश क े दौरान विदए गए अपने बयान में भी, अपीलक ा! यह उल्लेख करने में विवफल रहा विक वह 18 फरवरी, 1999 को इकाई में उपस्थिस्थ हुआ था। प्रत्यक्ष ौर पर, यह एक बाद का विवचार था। वास् व में, अपने बयान में, अपीलक ा! ने स्पष्ट रूप से स्वीकार विकया था विक वह अपने घर से बैंगलोर आया, ?हाँ उसने 108 विदनों क अनति क ृ रूप से अनुपस्थिस्थ रहने क े बाद 3 मई, 1999 को आत्मसमप!र्ण विकया।
8. अपीलक ा! ने अपनी पत्नी क े उपचार सारांश या तिचविकत्सा प्रमार्ण पत्र क े रूप में यह प्रदर्णिश करने क े लिलए कोई दस् ावे? रिरकॉu! पर नहीं रखा विक वह गंभीर रूप से बीमार थी और विनरं र उपचार क े लिलए उसकी उपस्थिस्थति की आवश्यक ा थी। इसक े ब?ाय, साक्ष्य क े सारांश क े दौरान उसने इस आशय का एक सामान्य बयान विदया विक वह अपनी पत्नी क े खराब स्वास्थ्य क े कारर्ण अनुमति क े विबना अनुपस्थिस्थ रहा। इसक े अलावा, अपीलक ा! 12 ?ुलाई, 1999 को साक्ष्य क े सारांश क े दौरान प्रति वादीगर्ण द्वारा पेश विकए गए अणिभयो?न पक्ष क े विकसी भी गवाह से सि?रह करने में विवफल रहा। यह उल्लेखनीय है विक 24 अगस्, 1999 को एससीएम क े दौरान, अपीलक ा! को आरोप पत्र सुनाने क े बाद ?ब उससे पूछा गया विक क्या उसने उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोप को स्वीकार विकया है या नहीं, ो उसने स्पष्ट रूप से "दोर्षी" कहकर हां में ?वाब विदया था। दूसरे शब्दों में, अपीलक ा! ने 8 नवंबर, 1998 से 15 ?नवरी, 1999 क क े अनुदत्त अवकाश की अवति समाप्त होने पर सेवाभार विफर से ग्रहर्ण करने में विवफल रहने क े आरोप को स्वीकार विकया।
9. यह भी ध्यान देने योग्य है विक यह पहला अवसर नहीं था ?ब अपीलक ा! विबना अनुमति क े अनुपस्थिस्थ रहा; पहले भी अवकाश क े विबना अनुपस्थिस्थ रहना उसकी आद थी। आक्षेविप विनर्ण!य में विदया गया, सैन्य अति विनयम की ारा 39 (ख) और 63 क े ह अपीलक ा! पर लगाए गए अवकाश से अति क समय क छ े आरोप क े दंu का सारांश,विनम्नानुसार हैः Xम सं. सेना अति विनयम/ ारा दंu विदया गया विदया गया दण्u दण्u की ति णिथ अनुपस्थिस्थति की अवति क) 63 03 विदन ?ुमा!ना भुग ान करें 13.07.87 ख) 39 (ए) 28 विदन RI in 12.5.90 20 विदन (ग) 39 (बी) 28 विदन RI और 14 विदन सैन्य विहरास में 10.12.90 11 विदन (घ) 39 (बी) 07 विदन RI सैन्य विहरास में 17.11.95 07 विदन ङ) 39 (बी) गंभीर दंu और 14 विदन ?ुमा!ना का भुग ान 28.8.98 150 विदन च) 39 (बी) सेवा से बखा!स् विकया ?ाना। 24.8.99 108 विदन
10. उपरोक्त ालिलका से यह स्पष्ट है विक अपीलक ा! आद न तिuफॉ}टर था। ऊपर Xम संख्या (च) में उद्धृ व !मान घटना से पहले उसक े लिखलाफ चार लाल और एक काली स्याही प्रविवविष्ट थी। अपीलक ा!,?ो सशस्त्र बल का सदस्य था, की ओर से इस रह क े घोर अनुशासनहीन ा को स्वीकार नहीं विकया ?ा सक ा था। वह इस बार 108 विदनों की लंबी अवति क े लिलए बगैर छ ु ट्टी क े अनुपस्थिस्थ रहा सि?सकी माफी नहीं हो सक ी, सि?से यविद स्वीकार विकया ?ा ा, ो सेवा में अन्य लोगों को गल संदेश ?ाएगा। इस थ्य का ध्यान रखना चाविहए विक अनुशासन सशस्त्र बलों की अं र्षिनविह पहचान है और सेवा की ऐसी श ! है सि?ससे समझौ ा नहीं विकया ?ा सक ा।
11. ?हां क अपीलक ा! की ओर से दी गई इस दलील का संबं है विक ारा 39 (ख) क े ह आरोप पोर्षर्णीय नहीं है या ारा 120 क े प्राव ानों में अति क म एक वर्ष! क े कारावास की स?ा का प्राव ान है, यह गल ारर्णा पर आ ारिर है। अति विनयम क े अध्याय VI क े ह आने वाली ारा 39 संदभ! क े लिलए नीचे दी गई हैः "39. विबना अवकाश क े अनुपस्थिस्थ रहना. इस अति विनयम क े अ ीन कोई भी व्यविक्त ?ो विनम्नलिललिख अपरा ों में से कोई भी कर ा है, अथा! - (ए) विबना अवकाश क े अनुपस्थिस्थ रह ा है; या (ख) विबना पया!प्त कारर्ण क े अनुदत्त अवति से अति क समय क अवकाश पर रह ा है; या (ग) अवकाश पर रहने क े कारर्ण अनुपस्थिस्थ है और सम्यक प्राति कारी से सूचना प्राप्त होने क े बाद विक विकसी भी बल, या विकसी बल क े विहस्से, या कोई विवभाग, सि?ससे वह संबंति है, को सविXय सेवा का आदेश विदया गया है, विबना पया!प्त कारर्ण क े, अविवलम्ब सेवा ग्रहर्ण करने में विवफल रह ा है; या (घ) अभ्यास या क !व्य क े लिलए विनयुक्त परेu या स्थान पर विन ा!रिर समय पर पया!प्त कारर्ण क े विबना उपस्थिस्थ होने में विवफल रह ा है; या (ङ) परेu पर, या माच! की पंविक्त पर, पया!प्त कारर्ण क े विबना या अपने वरिरष्ठ अति कारी की अनुमति क े विबना, परेu या माच! की पंविक्त छोड़ दे ा है; या (च) णिशविवर या छावनी में या कहीं और, विकसी विन ा!रिर सीमा से परे, या विकसी सामान्य, स्थानीय या अन्य आदेश द्वारा विनविर्षद्ध विकसी स्थान पर, अपने वरिरष्ठ अति कारी से पास या लिललिख अनुमति क े विबना पाया ?ा ा है; या (छ) अपने वरिरष्ठ अति कारी की अनुमति क े विबना या उतिच कारर्ण क े विबना, विकसी स्क ू ल में उपस्थिस्थ रहने क े विवति व आदेश पर अनुपस्थिस्थ रख ा है; कोट! माश!ल द्वारा दोर्षी ठहराए ?ाने पर, ऐसी अवति क े लिलए कारावास भुग ने क े लिलए उत्तरदायी होगा ?ो ीन साल की हो सक ी है या उससे कम स?ा ?ो इस अति विनयम में उसिल्ललिख है।
12. विबना अवकाश अनुपस्थिस्थति से संबंति अपरा ों क े विवर्षय में उपरोक्त प्राव ान क े वाचन से यह स्पष्ट है विक पया!प्त कारर्ण क े विबना अनुदत्त अवकाश से अति क समय क छ े अपरा से संबंति वाद में, कोट! माश!ल द्वारा दोर्षी ठहराए ?ाने पर, अपचारी व्यविक्त पर ीन साल क की अवति क े लिलए कारावास या अति विनयम में अनुध्या कम स?ा अति रोविप की ?ा सक ी है। अति विनयम क े अध्याय VII क े ह ारा 71 उन दण्uों से संबंति है ?ो कोट! माश!ल द्वारा दोर्षी ठहराए ?ाने पर अपरा ों क े लिलए विदए ?ा सक े हैं, सि?न्हें स्लाइडिंuग स्क े ल में सूचीबद्ध विकया गया है। कारावास की स?ा का उल्लेख उपखंu (ग) में विमल ा है ?बविक सेवा से बखा!स् गी का उल्लेख नीचे उपखंu (ङ) में विकया गया है। दूसरे शब्दों में, कोट! माश!ल द्वारा दोर्षी ठहराए ?ाने पर सेवा से बखा!स् गी की स?ा को 14 साल से कम की विकसी भी अवति क े लिलए कारावास की स?ा की ुलना में कम स?ा माना गया है। यह स्थिस्थति होने क े कारर्ण, अपीलक ा! को इस आ ार पर नहीं सुना ?ा सक ा है विक उसे दी गई स?ा अति विनयम क े ह परिरकस्थि}प स?ा से अति क गंभीर है।
13. अनति क ृ अनुपस्थिस्थति क े लिलए अति रोपति दंu की आनुपाति क ा की स्थिस्थति में इस न्यायालय ने भार संघ एवं अन्य बनाम Ex. No. 6492086 सिस म्बर/अश क ु लबीर सिंसह10, क े मामले में प्रति वादी की ओर से विदए गए इस क ! को अस्वीकार कर विदया विक ारा 39 क े ह कारावास की स?ा देने क े ब?ाय, उसे सेवा से बखा!स् कर विदया गया था, ?ो अपरा की ुलना में अनानुपाति क था, मामले में इस प्रकार ारिर विकया गया:
6. हम पहली दलील में कोई मेरिरट नहीं पा े हैं। सेना अति विनयम, 1950 की ारा 39 अध्याय VI में है ?ो "अपरा ों" से संबंति है। ारा 39 में यह प्राव ान है विक अवकाश क े विबना अनुपस्थिस्थति से ?ुड़े अपरा क े लिलए कोट! माश!ल द्वारा दोर्षसिसतिद्ध पर, ीन वर्ष! क क े कारावास की स?ा अति रोविप की ?ा सक ी है। "दंu" से संबंति अध्याय VII में ारा 71 है। ारा 71 का खंu (ङ) विवशेर्ष रूप से कोट! माश!ल द्वारा दोर्षी ठहराए ?ाने पर सेवा से बखा!स् गी की स?ा पर विवचार कर ा है। इसलिलए, हम पहली दलील में कोई मेरिरट नहीं पा े हैं।
14. अपीलक ा! क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा अवलंविब अति विनयम की ारा 120 का प्राव ान भी व !मान मामले क े थ्यों क े आलोक में अप्रोज्य है। ारा 120 समरी कोट! माश!ल की शविक्त से संबंति है। ारा 120 की उप- ाराएँ (1), (2) और (4) इस प्रकार हैंः "120. समरी कोट! माश!ल की शविक्तयाँ 10 (2019) 13 एससीसी 20 (1) उप- ारा (2) क े प्राव ानों क े अ ीन, कोई समरी कोट! माश!ल इस अति विनयम क े ह दंuनीय विकसी भी अपरा का विवचारर्ण कर सक ा है। (2) ?ब त्काल कार!वाई क े लिलए कोई गंभीर कारर्ण न हो और अनुशासन की हाविन क े विबना सि?ला कोट!-माश!ल या सविXय सेवा पर कणिथ अपरा ी क े विवचारर्ण क े लिलए एक समरी ?नरल कोट!-माश!ल को संदर्णिभ विकया ?ा सक ा है, ो समरी कोट!-माश!ल करने वाला अति कारी ऐसे संदभ! क े विबना ऐसे अति कारी क े विवरुद्ध ारा 34, 37 और 69 में से विकसी क े ह दंuनीय विकसी भी अपरा का विवचारर्ण नहीं करेगा। XXXX XXXX XXXX (4) समरी कोट!-माश!ल कोई भी स?ा पारिर कर सक ा है ?ो इस े ह पारिर की ?ा सक ी है, सिसवाय मृत्यु या परिरवहविन विकए ?ाने की स?ा या उप- ारा (5) में विनर्षिदष्ट सीमा से अति क अवति क े कारावास की स?ा क े ।
15. उपरोक्त प्राव ान से यह स्पष्ट है विक उक्त ारा, ारा 34 अथा! दुश्मन से संबंति अपरा और मृत्यु से दंuनीय अपरा से संबंति है, ारा 37, अथा! सैन्य विवद्रोह और ारा 69 अथा! नागरिरक अपरा । ारा 120 की उप- ारा (2) एससीएम करने वाले अति कारी पर ारा 34,37 और 69 में उसिल्ललिख विकसी भी अपरा क े विवचारर्ण पर प्रति बं लगा ी है, ?ब क विक अपरा ी क े विवचारर्ण क े लिलए सि?ला कोट! माश!ल या समरी ?नरल कोट! माश!ल का कोई संदभ! न हो। उपरोक्त संदभ! में पढ़े ?ाने पर, ारा 120 की उप- ारा (4) में स्पष्ट रूप से कहा गया है विक एससीएम मृत्युदण्u या परिरवहविन विकए ?ाने या लेस्थि•टनेंट कन!ल और उससे ऊपर क े रैंक क े अति कारी क े लिलए एक वर्ष! से अनति क और उस रैंक से नीचे क े अति कारी क े लिलए ीन माह से अनति क, ?ैसा विक उप- ारा (5) में विनर्षिदष्ट है,को छोड़कर, अति विनयम में यथा परिरकस्थि}प कोई भी स?ा पारिर कर सक ा है। स्पष्ट ः उपरोक्त प्राव ान यहां लागू नहीं हो ा है और इस बा पर ?ोर देने क े लिलए अपीलक ा! क े लिलए मददगार नहीं है विक उसक े मामले में सि?ला कोट! माश!ल या समरी कोट! माश!ल विकया ?ाना चाविहए था, ?बविक े ह दंuनीय विकसी भी अपरा का विवचारर्ण एससीएम कर सक ा है।
16. विवद्वान अति वक्ता द्वारा उद्धृ uीएसआर का विवविनयम 448 एससीएम द्वारा विदए ?ाने वाले दंu क े पैमाने पर विवचार कर ा है। उक्त विवविनयम में विवस् ार से कहा गया है विक ये स?ा देने क े लिलए एससीएम अति कारिरयों क े माग!दश!न क े लिलए ?ारी विकए गए सामान्य विनदžश हैं और उक्त विवविनयम में विनविह कु छ भी विकसी भी कानूनी स?ा को पारिर करने क े लिलए न्यायालय क े विववेकाति कार को सीविम करने वाला नहीं माना ?ाएगा, भले ही ऐसा करने का अच्छा कारर्ण हो। इसलिलए, विवविनयमन 448 में संलग्न अनुसूची क े ह सूचीबद्ध दंu ालिलका का हवाला इस दलील क े लिलए देना विक अवकाश क े विबना अनुपस्थिस्थति या अवकाश से अति क समय क छ े लिलए, सामान्य दण्u सैन्य विहरास में ीन साल या उससे कम अवति क े लिलए कठोर कारावास है, अ एव एससीएम द्वारा अपीलक ा! को सेवा से बखा!स् करने की स?ा नहीं दी ?ानी चाविहए थी, अस्वीकाय! है। विकसी वाद क े थ्यों और परिरस्थिस्थति यों क े मद्देन?र एससीएम में अति क स?ा देने क े लिलए पया!प्त विववेकाति कार विनविह हो ा है। अति विनयम की ारा 72 और 73 क े ह भी यही स्थिस्थति है। दोनों ाराएं अपरा की प्रक ृ ति और मात्रा क े आ ार पर एक विवशेर्ष स?ा देना कोट! माश!ल क े विववेकाति कार छोड़ दे ी हैं। अपीलक ा! क े लिलए विवद्वान अति वक्ता द्वारा दी गई इस दलील में कोई मेरिरट नहीं है विक उक्त प्राव ान एससीएम पर लागू नहीं हो े हैं।
17. उपरोक्त कारर्णों से, हम एएफटी द्वारा पारिर आक्षेविप विनर्ण!य में कोई त्रुविट नहीं पा े हैं। अपीलाथi सेवाकाल में लापरवाही बर रहा था और ?ुमा!ने से लेकर कठोर कारावास क की कई स?ाएं विदए ?ाने क े बाव?ूद, उसक े रवैये में बदलाव नहीं हुआ। इसी रह क े अपरा का यह उसक े द्वारा छठा उल्लंघन था।इसलिलए, वह उसे दी गई स?ा से कम स?ा का हकदार नहीं था।
18. दनुसार, आक्षेविप आदेश को बरकरार रख े हुए, व !मान अपील को मेरिरट रविह होने क े कारर्ण खारिर? विकया ?ा ा है। पक्षकार अपना खच! स्वयं वहन करें।..........................… [न्यायमूर्ति विहमा कोहली ]..........................… [न्यायमूर्ति रा?ेश विंबदल] नई विदल्ली;