Full Text
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय े ािधकार
आपरािधक अपील सं. 2390/2010
अर वंद क
ु मार ...अपीलाथ
बनाम
रा.रा. े. रा य, द ली ... यथ
िनणय
या., अभय एस. ओका
त या मक पहलू
JUDGMENT
1. इस अपील क े ारा, अपीलाथ -अिभयु ने भारतीय दंड सं हता क धारा 302 (सं ेप म, "भा. दं. सं.") क े तहत दंडनीय अपराध क े िलए स यायालय ारा पा रत अपनी दोषिस क े आदेश पर आप जताई है। स यायाधीश ने कहा क अपीलाथ अिभयु का मामला भा. दं. सं. क धारा 300 म "तीसरे" ारा कवर कया गया था। स यायाधीश ने माना आपरािधक अपील सं 2390/2010 2 क अपीलाथ -अिभयु मामले को भा. दं. सं. क धारा 300 क े 4 अपवाद क सुर ा मक आधार पर लाने म वफल रहा है। उ च यायालय क े ववा दत िनणय से अपीलाथ क दोषिस क पु कर द है। वचारण यायालय ने अपीलाथ को आजीवन कारावास क सजा सुनाई। जब तक अपीलाथ को इस यायालय ारा दनांक 27 नवंबर 2017 क े आदेश ारा जमानत पर रहा कया गया था, अपीलाथ ने लगभग 8 साल और 11 मह ने क अविध कारावास म बता द थी।
2. अिभयोजन प का मामला यह है क शिश बाला (पीड यू 12) जो पुिलस उपिनर क थीं, दनांक 28 दसंबर 1994 को आईपी ए टेट पुिलस टेशन, द ली म यूट अिधकार क े प म तैनात थीं। एक िसपाह मो. रािशद (मृतक) 'मुंशी रोजनामाचा' क े प म यूट पर तैनात था। शाम कर ब 5.45 बजे मृतक रपो टग म म आया और थाने क े आिधका रक टेलीफोन पर बात करने लगा। यह देखने क े बाद क मृतक लगभग 5 से 7 िमनट तक फोन पर बात कर रहा था, शिश बाला (पीड यू 12) ने उसे सलाह द क वह आिधका रक टेलीफोन का इ तेमाल न करे य क पुिलस टेशन को क ु छ ज र कॉल िमल सकते ह। अिभयोजन प का मामला यह है क मृतक ने पीड यू 12 क सलाह पर यान नह ं दया। अपीलाथ पुिलस टेशन म गाड क े प म तैनात था। अपीलाथ क े पास सेमीऑटोमै टक फायर (एसएएफ)- काबाइन थी। पीड यू 12 शिश बाला ने आपरािधक अपील सं 2390/2010 3 शाम कर ब 5: 55 िमनट पर अपीलाथ से अनुरोध कया क वह मृतक को टेलीफोन पर बातचीत जार रखने को ख़ म करने क े िलए कहे। इसिलए, अपीलाथ ने यूट म म वेश कया जहां मृतक बैठा था और फोन पर बात कर रहा था। अपीलाथ ने मृतक क े क ं धे पर हाथ रखा और उसे कॉल ख म करने क सलाह द । अिभयोजन प का ारंिभक मामला यह था क मृतक ने अपीलाथ क एसएएफ काबाइन को पकड़े हुए अपीलाथ को ध का दया। अपीलाथ ने अपने एसएएफ को बाहर िनकालने क कोिशश क । हाथापाई क े दौरान, एसएएफ अपीलाथ क बे ट से जुड़ चेन म उलझ गया, जसक े कारण उ वचािलत हिथयार से दुघटनावश पांच राउंड फाय रंग हुई। मृतक क गदन म पांच राउंड गोिलयां लगीं। मौक े पर उप थत पुिलसकिमय ने मृतक को अ पताल पहुंचाया, जहां उसे मृत घो षत कर दया गया।
3. ारंभ म, शिश बाला (पीड यू 12) क े एक बयान क े आधार पर, अपीलाथ क े खलाफ धारा 304 क क े तहत अपराध दज कया गया था। घटना क े अगले दन मृतक क े पता ने पुिलस उपायु और द ली क े पुिलस आयु को िशकायत स पी। उ िशकायत क े आधार पर जांच अपराध शाखा को थानांत रत कर द गई थी। अिभयोजन प क े अनुसार, वशेष क राय ने एसएएफ काबाइन से दुघटनावश गोली लगने क कसी भी संभावना से इनकार कया। मृतक क े पता ारा यह भी आपरािधक अपील सं 2390/2010 4 खुलासा कया गया था क घटना से पहले मृतक ने अिभयु और शिश बाला को आप जनक हालत म पकड़ा था। इसिलए, शिश बाला और अपीलाथ नाराज हो गए और उ ह ने मृतक को मारने क धमक द । अपराध शाखा ारा क गई जांच क े आधार पर आरोप प दा खल करते समय भा. दं. सं. क धारा 302 लागू क गई थी।
4. हम यहां यह दज करना होगा क उ च यायालय ने उ े य क े अ त व क े बारे म अिभयोजन प क े मामले पर अ व ास कया है। अिभयोजन प का मामला यह था क मृतक ने अपीलाथ और पीड यू 12 को आप जनक थित म देखा था और इसिलए, वे मृतक क े खलाफ दुभावना रखते थे। अपराध क े किथत उ े य पर पीड यू 3, पीड यू 18 और पीड यू 22 क े सबूत पर वचार करने क े बाद, उ च यायालय इस िन कष पर पहुंचा क उ े य था पत नह ं कया गया था। उ च यायालय ने पीड यू 13 कर म ब श क गवाह पर भरोसा कया, ज ह ने कहा क उ ह ने मृतक क े रोने क आवाज "मुझे बचाओ" और एसएएफ क गोलीबार क आवाज सुनी। गवाह ने कहा क जब उसने मृतक को गोली लगने क े साथ क ु स पर पड़ा देखा, तो अपीलाथ पीड यू 12 शिश बाला को हंद म कह रहा था "मैडम आपने ये या करवा दया, मेरे तो बचे बरबाद हो जाएंगे"। गवाह क े अनुसार, शिश बाला ने अिभयु से यह कहते हुए जवाब दया क: "तुम फकर मत करो म भी तु हारे साथ हूं, आपरािधक अपील सं 2390/2010 5 यायालय तक तु हारा साथ दूंगी"। यायालय ने भारतीय सा य अिधिनयम 1872 (सं ेप म, "सा य अिधिनयम") क धारा 6 रेस गे टे का िस ांत क े ारा कवर कया गया है। पर पर वरोधी तुितयाँ
5. अपीलाथ क ओर से पेश हुए व ान व र अिधव ा ने हम संबंिधत गवाह क े सा य क े नो स क े मा यम से िलया है। उ ह ने तुत कया क अिभयोजन प क े मामले को सह मानते हुए, मृतक और अपीलाथ क े बीच हाथापाई म, एसएएफ अपीलाथ क बे ट क जंजीर म उलझ गई, जसक े प रणाम व प एसएएफ से दुघटनावश गोिलयां चलीं। उ ह ने कहा क एक बार उ े य को खा रज कर दया जाता है, तो प र थितज य सबूत पर आधा रत अिभयोजन प का मामला वफल हो जाना चा हए। उ ह ने आ ह कया क भा. दं. सं. क धारा 80 क े म ेनजर अपीलाथ ारा कोई अपराध नह ं कया गया था य क मौत वशु प से एक दुघटना क े प रणाम व प हुई थी।
6. वक प म, उ ह ने तुत कया क उ चतम, भा. दं. सं. क धारा 304 का दूसरा भाग लागू होता है। उ ह ने तुत कया क नीचे दए गए यायालय ने धारा 302 को लागू करक े एक ु ट क है। आपरािधक अपील सं 2390/2010 6
7. रा य क े व ान अिधव ा ने आ े पत िनणय का समथन कया। व ान अिधव ा ने बताया क बैिल टक वशेष क रपोट और ने संबंधी सा य प प से दखाते ह क अपीलाथ को िन त प से पता था क एसएएफ काबाइन क े उपयोग से मौत हो सकती है। तुितय पर वचार
8. इस बात पर कोई ववाद नह ं है क मृतक अपीलाथ ारा पकड़े गए एसएएफ काबाइन से चलाई गई पाँच गोिलय का िशकार हुआ था और गोिलय क चोट क े कारण उसक मृ यु हुई थी। वचारण यायालय और उ च यायालय ने कहा क दुघटनावश गोलीबार क े बचाव को वीकार नह ं कया जा सकता है और अपीलाथ ारा गोली चलाने का काय जानबूझकर कया गया था। यायालय ने भा.दं.सं. सी. क धारा 80 का सहारा लेकर अपीलाथ ारा अनुरोध कए गए दुघटना क े बचाव को खा रज कर दया।
9. अिभयोजन प ारा आरोप लगाया गया था क मृतक ने पीड लू-12 शिश बाला (उपिनर क) और अपीलाथ को आप जनक थित म देखा था। आरोप यह है क चूं क मृतक ने दोन को आप जनक थित म देखा था, इसिलए पीड लू-12 और अपीलाथ उससे नाराज थे और इस कार, उसे जान से मारने क धमक द । उ े य क े अ त व क े मु े म आपरािधक अपील सं 2390/2010 7 जाना हमारे िलए आव यक नह ं है य क उ च यायालय ने आ े पत फ ै सले क े पैरा ाफ 34 म पीड लू-3 नजीर अहमद, पीड लू-18 उपिनर क राम िसंह और मृतक क े पता पीड लू-22 शौकत अली क गवाह पर वचार करने क े बाद एक िन कष दज कया है क उ े य क े अ त व क े बारे म अिभयोजन प का मामला व ास को े रत नह ं करता है। इसिलए हम इस आधार पर आगे बढ़ना होगा क उ े य सा बत नह ं हुआ। इसिलए, उ े य क े अ त व को सा बत करने म वफलता उन प र थितय म से एक है जो अपीलाथ ारा जानबूझकर गोली चलाने क े संबंध म अिभयोजन प क े मामले को वीकृ ित क े यो य नह ं बनाती है।
10. दो गवाह ह जो दावा करते ह क वे घटना क े च मद द गवाह थे। पीड लू-12 शिश बाला एक ऐसी गवाह ह ज ह ने अपनी जाँच म कहा था कः। " दनांक 28.12.94 पर मुझे 12.00 दोपहर से शाम 6 बजे तक यूट क े घंट क े साथ पुिलस थाना आई. पी. ए टेट म ड. ओ. क े प म तैनात कया गया था। उस दन मृतक िसप. मो. रशीद भी रोजनामचा मुंशी क े प म रात 8 बजे तक काम कर रहा था। शाम लगभग 5:45 बजे मृतक मेरे कायालय यानी रपो टग म म आया और मेरे सामने क ु स पर बैठे हुए फोन करने लगा, दो मेज क े बीच म रखी एक मेज को छोड़कर। उ ह ने लगभग 5/7 िमनट तक फोन करना जार रखा। मने आपरािधक अपील सं 2390/2010 8 मृतक को बातचीत जार नह ं रखने और टेलीफोन को य त न रखने क े िलए कहा य क कोई त काल कॉल वापस पुिलस थाना म आ सकती है, ले कन मृतक ने इसे गंभीरता से नह ं िलया ले कन उसने फोन करना जार रखा। लगभग 5.55 पर शाम, मने आज यायालय म उप थत संतर यानी अिभयु से मृतक को इतने लंबे समय तक फोन पर बात करने से रोकने क े िलए कहा। अिभयु मृतक क े क ं धे पर हाथ रखकर टेलीफोन छोड़ने क े िलए कहा। इसे एक मजाक क े प म लेते हुए मृतक ने अिभयु क एसएएफ को पकड़ता है। अिभयु ने अपनी एसएएफ वापस लेने क कोिशश क । इस हाथापाई क े दौरान अिभयु क एसएएफ अिभयु क बे ट से बंधी जंजीर म उलझ गई और इस दौरान अिभयु से गोली चल जाती है जो मृतक क गदन और छाती पर लग जाती है और उसक जखम से खून िनकलने लगता है। मने मृतक को जे.पी.एस. भेजा गया जसे संबंिधत डॉ टर ने मृत घो षत कर दया।" (जोर दया गया) जाँच म मु य-पर क ने कहा क घटना क े एक मह ने बाद मृतक क े पता ने उसे जान से मारने क धमक द य क वह अपना बयान बदलने को तैयार नह ं थी। यह यान द यो य है क पीड लू-12 शिश बाला को प ोह गवाह घो षत नह ं कया गया था। आपरािधक अपील सं 2390/2010 9
11. पीड लू-12 क े अलावा एकमा अ य गवाह जो य दश होने का दावा करता है, वह पीड लू-25 सतबीर िसंह शेरावत है। वह पुिलस बल का सद य नह ं था, ले कन वह सीआईएसएफ का ह सा था और पुिलस टेशन म आंत रक सुर ा यूट पर तैनात था। उनका सं करण भी यान देने यो य है जो इस कार हैः “उ ह ने कहा, "म शाम कर ब 6 बजे पुिलस थाना आईपी ए टेट म उप थत था। मने देखा क एक िसपाह पुिलस थाना आईपी ए टेट म तैनात था और क ु स पर बैठा था। यूट ऑ फसर क े सामने क ं ोल म म और वह क ं ोल म म रखे गए टेलीफोन से कॉल कर रहा था और म अपनी ओ. क े. रपोट देने क े िलए उ फोन से कॉल करने क ती ा कर रहा था। म क ं ोल म क े दरवाजे पर गैलर म इंतजार करता रहा और इस बीच यूट अिधकार ने उ िसपाह को इतने लंबे समय तक य त नह ं रहने क े िलए कहा, य क यह एक आिधका रक फोन था। उ ह ने उ यूट अिधकार क े अनुरोध पर कोई यान नह ं दया। यूट अिधकार ने संतर से अनुरोध कया क वह उ िसपाह को फोन दूसरे य क े िलए छोड़ने क े िलए कहे। संतर भी वहाँ गया और उ िसपाह से उ फोन छोड़ने का अनुरोध कया, ले कन उसने उसक े अनुरोध पर भी कोई यान नह ं दया। संतर ने उसे दा हने हाथ से पकड़ िलया य क वह अपने बाएं हाथ से फोन का रसीवर पकड़ रहा था और उसने लापरवाह से संतर को ध का दे दया। संतर ने फर से उससे फोन छोड़ने का अनुरोध कया और आपरािधक अपील सं 2390/2010 10 जवाब म कॉल करने वाले उ िसपाह ने संतर क े एसएएफ को पकड़ िलया और एक-दूसरे का मजाक उड़ाते हुए उसे ध का दे दया और उस समय उ एसएएफ से दुघटनावश गोली चल गई और उ एसएएफ से फोन करने वाले य को पांच राउंड गोिलयां लगीं। म हला उपिनर क शिश बाला भी वहाँ उप थत थीं और उ ह ने घटना से पहले फोन करने वाले िसपाह से एसएएफ को न छ ू ने का अनुरोध कया था य क यह खतरनाक था। उस समय संतर यायालय म उप थत अिभयु था जसका नाम अर वंद (आज यायालय म उप थत को गवाह ारा सह पहचान क गई) क े नाम से जाना जाता था। वहाँ एक सावजिनक य भी उप थत था ले कन मुझे उसका नाम नह ं पता है। मुझे उस िसपाह का नाम नह ं पता था जो फोन कर रहा था और उसे गोली उसक े सीने म लगी और वह घटना म बुर तरह से घायल हो गया था और गोली का शोर सुनकर पुिलस थाना क े सभी कमचार वहां जमा हो गए। घटना क े बाद एसएएफ को मेज पर रखी गई थी और मुझे इस बात क जानकार नह ं थी क उस क मैगजीन म कतने राउं ड थे और वे मेरे उप थित म नह ं िनकले गए थे। मेर उप थित म अिभयु और म हला उप िनर क शिश बाला क े बीच कोई बातचीत नह ं हुई।" हम यहाँ यान द सकते ह क इस गवाह को भी प ोह घो षत नह ं कया गया था। आपरािधक अपील सं 2390/2010 11
12. इस कार, पीड यू-12 और पीड यू-25 का सं करण, जो य दश होने का दावा कर रहे थे, पूर तरह से आक मक गोलीबार क े अपीलाथ क े बचाव का समथन करता है और कसी भी मामले म, उ ह ने यह बयान नह ं दया है क अपीलाथ ने जानबूझकर मृतक पर गोिलयां चलाई थीं। मृतक क े पता पीड लू-22, जो य दश नह ं थे, ने इस मामले क े समथन म गवाह द क अपीलाथ ने जानबूझकर गोली चलाई थी। ले कन उ े य पर उनक गवाह पर उ च यायालय ने अ व ास कया है। इसक े अलावा, उनका दूसरा बयान जसम उपरो आरोप लगाया गया था, घटना क े तीन से चार मह ने बाद दज कया गया था। घटना क े बाद पुिलस ारा दज कए गए उनक े पहले क े बयान म, यह सं करण नह ं िमला था जैसा क उनक े ितपर ा से देखा जा सकता है।
13. बैिल टक वशेष क चार रपोट/राय अिभलेख पर ह। दो रपोट म उ लेख कया गया है क गोिलय को बहुत पास से मार गई थी, जस पर कोई ववाद नह ं है। जाँच अिधकार ारा कए गए क े अनुसार, बैिल टक वशेष, ीमती आशा धीर ारा दनांक 18 अग त 1995 को एक दूसर रपोट तुत क गई थी। उ रपोट क े खंड 4 और 5 इस कार ह: "4. 9 िममी काबाइन िच त ए योगशाला म ा हुई संदभ क े िलए जो चज लीवर ए (अथात वतः) क तिथ आपरािधक अपील सं 2390/2010 12 म थी, यह गोली चला सकती थी य द ब दूक को िनचे क ओर दबाया होता और गर को दबाया गया होता और जब तक गर दबाया रहता तब तक गोलीबार जार रह सकती थी।
5. संदभ क े तहत ब दूक को चेन क े साथ उलझाकर दबाया जा सकता है, बशत, य द चज लीवर 'एस' (सुर ा) थित म न हो। य द गर को िनचे मारने क थित म दबाया जाता है, तो यह गोली चला सकती।" उसी वशेष क दनांक 22 दसंबर 1995 क भी यह राय है जो दज करती है क जंजीर क े साथ उलझने क े बाद एसएएफ क े गर को एक साथ दबाने ("कॉ क ं ग") और िनचे दबाने क संभावना को खा रज कर दया गया है। य द इस राय को दनांक 18 अग त 1995 क राय क े साथ पढ़ा जाता है, तो यह प है क य द चज लीवर सुर ा थित म नह ं है, तो ब दूक को जंजीर से उलझाकर दबाया जा सकता है।
14. अिभयोजन प क े गवाह क े सा य को देखते हुए, यह अिभिनधा रत करना होगा क एसएएफ अपीलाथ क बे ट से जुड़ जंजीर से उलझ गई थी। वशेष क राय को यान म रखते हुए, यह प है क जब घटना हुई थी, तो अपीलाथ ारा चज लीवर को सुर ा थित म नह ं रखा गया था और इसिलए, एसएएफ को दब गया, जसक े आपरािधक अपील सं 2390/2010 13 प रणाम व प पांच गोिलयां चल ग । अपीलाथ को चज लीवर को सुर ा थित म रखने क ारंिभक सावधानी नह ं बरतने क े िलए दोष लेना चा हए।
15. दंड या सं हता क धारा 313 क े तहत दज अपीलाथ क े बयान को यान से पढ़ने क े बाद, अिभयोजन प का मामला क उसने जानबूझकर मृतक को िनशाना बनाकर गोली चलाई थी, अपीलाथ क े सामने नह ं रखा गया था।
16. जो बचा है वह अपीलाथ का कथन है और अपीलाथ क े कथन पर पीड लू-12 क ित या है। इन बयान को सा य अिधिनयम क धारा 6 को यान म रखते हुए पढ़ा गया था। अिभयोजन प क े गवाह पीड लू-13 कर म ब श क े अनुसार, गोलीबार क सुनाई देने क े बाद, अपीलाथ को पीड लू-12 से यह कहते हुए सुना गया क "मैडम आपने ये या करवा दया, मेरे तो बचे बारबाद हो जाएंगे"। शिश बाला का जवाब था "तुम फ़ मत करो म भी तु हारे साथ हूँ, कोट तक तु हारे साथ दूंगी"। इस तरह क े बयान क े बारे म गवाह देने वाला एकमा अ य गवाह पीड लू-5 ज़ह र अहमद है। उनक े अनुसार, उसने अपीलाथ को पीड लू-12 को "मैडम, अपने इ को मारवा दया अब मेरा या होगा" कहते हुए सुना। दोन गवाह ने कहा है क उ ह ने "मुझे बचाओ" िच लाते हुए सुना है। आपरािधक अपील सं 2390/2010 14 आ य क बात है क पीड लू-25, जो घटना को देखने का दावा करता है, ने अपीलाथ, पीड लू-12 और मृतक ारा दए गए ऐसे कसी भी बयान क े बारे म गवाह नह ं द है। पीड लू-5 मृतक क े अंितम सं कार म शािमल होने का दावा करता है। उसने वीकार कया क मृतक क े पता क े िनदश क े अनुसार, वह घटना क े दो मह ने बाद अपराध शाखा क े एक िनर क से िमला जब उसका बयान दज कया गया। उस समय तक उसने जो क ु छ सुना उसक े बारे म पुिलस को क ु छ नह ं बताया। पीड लू-13 ने कहा क पीड लू-6, पीड लू-17 और क ु छ अ य य उस समय उप थत थे जब उ ह ने अिभयु को उपरो बयान देते हुए सुना। पीड लू-6 और पीड लू- 17 दोन ने अिभयोजन का समथन नह ं कया। पीड लू-13 क े अनुसार उप थत अ य लोग से अिभयोजन प ारा पूछताछ नह ं क गई थी। इसिलए, अपीलाथ और पीड यू-12 ारा इस तरह क े बयान देने क े बारे म अिभयोजन प का बयान व ास को े रत नह ं करता है।
17. हम यह मानते हुए ऐसे बयान क े भाव क भी जांच करगे क या वे वा तव म दए गए थे। ये बयान किथत तौर पर घटना क े तुरंत बाद दए गए थे। बयान का घटना से संबंध है। बयान किथत तौर पर अनायास दए गए थे। इसिलए, यायालय ने भारतीय सा य अिधिनयम क धारा 6 म शािमल रेस गे टे क े िस ांत का आ ान करक े बयान को ासंिगक माना है। हमने अिभिनधा रत कया है क अिभयोजन प का आपरािधक अपील सं 2390/2010 15 यह िस ांत क अपीलाथ ने जानबूझकर गोली चलाई है, था पत नह ं कया गया है। अपीलाथ को पीड लू-12 ारा मृतक क े पास जाने और उसे टेलीफोन का उपयोग जार रखने से रोकने का िनदश दया गया था। इसिलए, वह मृतक क े पास गया। यह मृतक क ित या या या जसक े प रणाम व प एसएएफ अपीलाथ क बे ट से जुड़ जंजीर से उलझ गई; जसक े कारण एसएएफ से आक मक गोली चल गई। इसिलए, अिभयु ने वतः ह ित या य करते हुए पीड लू-12 को बताया क उसने उससे या करा दया है। पीड लू-12 ारा जार िनदश को लागू करते समय, आक मक गोली चल गई और इस तरह अपीलाथ मौत क े िलए ज मेदार बन गया। इसी संदभ म अपीलाथ क ित या को समझना होगा। इन श द से उ ह ने पीड लू-12 को दोषी ठहराया है। पीड लू-12 ारा दए गए बयान का अथ है क वह सच बोलकर यायालय क े सम अपीलाथ का समथन करेगी। य द आक मक गोलीबार क े िस ांत को वीकार कर िलया जाता है, तो हमारे ारा दए गए उपरो बयान क या या एक संभा वत या या बन जाती है जो सामा य मानव आचरण क े अनु प है।
18. सा य अिधिनयम क धारा 6 और धारा 6 क े नीचे (क) इस कार पढ़े हैः आपरािधक अपील सं 2390/2010 16 "6. इस मामले का ह सा बनने वाले त य क ासंिगकता- त य जो, हालां क मु े म नह ं ह, मु े म एक त य क े साथ इतने जुड़े हुए ह क एक ह मामले का ह सा ह, ासंिगक ह, चाहे वे एक ह समय और थान पर या अलग-अलग समय और थान पर हुए ह । उदहारण (क) क पर ख को पीटकर उसक ह या करने का आरोप है। जो क ु छ भी क या ख या पटाई क े समय दशक ारा कहा या कया गया था या उससे क ु छ समय पहले या बाद म इसक े इस मामले क े ह से क े प म एक ासंिगक त य है। (ख)...................... । (ग)...................... । (घ)......................"। पीड लू-5 और पीड लू-13 ने उपरो पैरा ाफ 16 म उ ल खत उपरो बयान का ेय अपीलाथ और पीड लू-12 शिश बाला को दया है जो गोलीबार क घटना क े तुरंत बाद दए गए थे। किथत बयान िन त प से मु े क े त य से जुड़े ह, अथात ्, मृतक क ह या क े अपीलाथ क े किथत काय। इसिलए, यह मानते हुए क अपीलाथ और पीड लू-12 से स बंिधत बयान वा तव म दए गए थे, उ बयान देने का अपीलाथ का आचरण धारा 6 को देखते हुए ासंिगक हो जाता है। सा य अिधिनयम क धारा 5 आपरािधक अपील सं 2390/2010 17 म यह ावधान है क सा य अिधिनयम, 1872 क े अ याय 2 क े ावधान क े तहत ासंिगक घो षत कए गए मु े म येक त य क े अ त व या अनुप थित और ऐसे अ य त य को कायवाह म सा य दया जा सकता है। धारा 6 उन त य पर लागू होती है जो मु े म नह ं ह। ऐसे त य तभी ासंिगक होते ह जब वे धारा 6 म िनधा रत पर ण को संतु करते ह। इसिलए, कसी अिभयु क े बयान, जस पर धारा 6 लागू होती है, को अपराध वीकारो क े प म नह ं माना जा सकता है। बयान ासंिगक हो जाता है जसे सा य म पढ़ा जा सकता है य क यह घटना क े तुरंत बाद अपीलाथ क े आचरण को दशाता है। कसी भी मामले म, मामले क े त य म, हमने माना है क अपीलकता ारा इस तरह का बयान देने क े बारे म गवाह देने वाले दो गवाह का बयान व ास को े रत नह ं करता है।
19. अिभयोजन प यह सा बत करने म वफल रहा है क अपीलाथ का या तो मृतक क मृ यु करने का कोई इरादा था या मृतक को ऐसी शार रक चोट पहुँचाने का इरादा था जससे उसक मृ यु होने क संभावना थी। यह मानते हुए क जब अपीलाथ मृतक को टेलीफोन का उपयोग करने से रोकने क े िलए संपक कया, तो उसे पता था क चज लीवर सुर ा थित म नह ं था, उसे यह जानकार क े िलए ज मेदार ठहराना संभव नह ं है क एसएएफ को सुर ा थित म रखने म वफलता क े आपरािधक अपील सं 2390/2010 18 कारण, वह मृतक क मृ यु का कारण बन सकता था। मृतक, जो वयं एसएएफ काबाइन खींचने वाला पुिलसकम था, को संभावना क े बारे म जानकार क ज मेदार अपीलाथ को नह ं दया जा सकता है। वा तव म, अपीलाथ यह क पना भी नह ं कर सकता था क मृतक ऐसा क ु छ करेगा। इस कार, क पना क े कसी भी व तार से, यह भा.दं.सं. क धारा 299 क े तहत प रभा षत आपरािधक मानव ह या का मामला है य क इसम शािमल तीन त व म से कसी का भी अ त व अिभयोजन प ारा सा बत नह ं कया गया था।
20. हालाँ क, अपीलाथ क ओर से एक वफलता है जो यह सुिन त करने क े िलए एक प र कृ त वचािलत हिथयार पकड़े हुए था क प रवतन लीवर को हमेशा एक सुर ा थित म रखा गया था। यह यूनतम देखभाल थी जो उनसे मृतक क े पास जाने क े दौरान करने क उ मीद क जाती थी। इस कार, अपीलाथ क ओर से घोर लापरवाह है जसक े कारण मानव जीवन का नुकसान हुआ है। उसक ज दबाजी और लापरवाह क े कारण, मृतक ने अपनी जान गंवा द । इसिलए, अपीलाथ भा.दं.सं. क धारा 304 क क े तहत कम दंडनीय अपराध का दोषी है, जसक े िलए अिधकतम सजा दो साल क े िलए कारावास है। अपीलाथ को आठ साल से अिधक क सजा काट चुका है। आपरािधक अपील सं 2390/2010 19
21. अत: अपील आंिशक प से वीकार क जाती है। भ.द.स. क धारा 302 क े तहत अपीलाथ क दोषिस को र कर दया गया है और उसे भ.द.स. क धारा 304 क क े तहत दंडनीय अपराध करने का दोषी ठहराया गया है। अपीलाथ उ अपराध क े िलए िनधा रत अिधकतम सजा काट चुका है। इसिलए, अब उ ह जेल म रखने क आव यकता नह ं है। अत: उनक े जमानत मुचलक े र कये जाते ह। ….………………......... या. (अभय एस. ओका) …………………………….. या. (राजेश बंदल) नई द ली; 17 जुलाई, 2023 आपरािधक अपील सं 2390/2010 20 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी। Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.