Uttar Pradesh State v. Sonu Kushwaha

Supreme Court of India
Abhay S. Oka; Rajesh Bindal
Criminal Appeal No 1633 of 2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the mandatory minimum 10-year sentence under Section 6 of the POCSO Act for aggravated penetrative sexual assault on a child below 12 years, reversing the High Court's reduction of conviction.

Full Text
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प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
दाण्डि क अपील संख्या 1633/2023
उत्तर प्रदेश राज्य ... अपीलार्थी-
बनाम
सोनू क
ु शवाहा ... प्रत्यर्थी-
निनर्ण7य
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका
थ्यात्मक पहलू
JUDGMENT

1. इस अपील क े सम्बन् में एकमात्र प्रश्न यह है निक क्या प्रत्यर्थी- लैंनिBक अपरा ों से बच्चों का संरक्षर्ण अति निनयम, 2012 (संक्षेप में, 'पॉक्सो अति निनयम') की ारा 6 क े ह दं नीय Bंभीर प्रवेशन लैंनिBक हमले क े अपरा का दोषी है?

2. प्रत्यर्थी--अभिभयुक्त पर भार ीय दं संनिह ा, 1860 (संक्षेप में, आई. पी. सी.) की ारा 377 और 506 और पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 सपनिT ारा 5 क े ह दं नीय अपरा ों क े लिलए मुकदमा चलाया Bया र्थीा। निवद्वान 8 वें अपर सत्र न्याया ीश, झाँसी, जो पॉक्सो अति निनयम क े ह निवशेष न्याया ीश र्थीे, ने प्रत्यर्थी- को ीनों अपरा ों क े लिलए दोषी Tहराया। उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवानिद निनर्ण7य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु निनब_ति प्रयोB क े लिलए है और निकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोB नहीं निकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, निनर्ण7य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाभिर्णक माना जाएBा र्थीा निनष्पादन और निhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होBा।" प्रत्यर्थी- को पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 क े ह दं नीय अपरा क े लिलए दस साल क े कTोर कारावास की सजा सुनाई Bई र्थीी और उसे रू. 5,000/- का जुमा7ना देने का निनदkश निदया Bया र्थीा।प्रति वादी को आईपीसी की ारा 377 क े ह दं नीय अपरा क े लिलए सा साल क े कTोर कारावास की सजा सुनाई Bई र्थीी। आईपीसी की ारा 506 क े लिलए उसे एक वष[7] क े कTोर कारावास की सजा सुनाई Bई।अंति म दो अपरा ों क े लिलए जुमा7ना भी अति रोनिप निकया Bया र्थीा।

3. प्रत्यर्थी- ने इलाहाबाद में उच्च न्यायालय क े समक्ष दाण्डि क अपीलीय संख्या 5415/2018 दायर की।आक्षेनिप निनर्ण7य द्वारा, उच्च न्यायालय ने अव ारिर निकया निक प्रत्यर्थी- पॉक्सो अति निनयम की ारा 4 क े ह दं नीय प्रवेशन यौन हमले क े अपरा का दोषी र्थीा, न निक पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 क े ह दं नीय Bंभीर प्रवेशन यौन हमले क े अपरा का। इसलिलए, पॉक्सो अति निनयम क े ह दं नीय अपरा क े लिलए उसकी मूल सजा को घटाकर 5,000 रुपये क े जुमा7ने क े सार्थी सा साल क े कारावास में बदल निदया Bया।क े वल इस हद क, अपील की अनुमति दी Bई र्थीी।

4. यह निववानिद नहीं है निक अपरा क े समय पीनिp की आयु बारह वष[7] से कम र्थीी।उच्च न्यायालय द्वारा निववानिद निनर्ण7य क े प्रस् र 3 में मामले क े थ्यों का सारांश निदया Bया है, जो इस प्रकार हैः “3. संक्षेप में कहें ो, अभिभयोजन पक्ष का मामला यह है निक भिशकाय क ा7 XYZ ने अपीलार्थी- सोनू क ु शवाहा क े निवरूद्ध निदनांक 26.03.2016 को तिचरBांव, जिजला झाँसी में प्रार्थीनिमकी दज[7] कराई र्थीी, जिजसमें कहा Bया र्थीा निक निदनांक 22.03.2016 को शाम लBभB 05:00 बजे अपीलार्थी- सोनू क ु शवाहा भिशकाय क ा7 क े घर आया और उसक े लBभB 10 वष[7] क े बेटे को हरदौल ण्डिस्र्थी मंनिदर में ले Bया।वहाँ अपीलक ा7 ने भिशकाय क ा7 क े बेटे अर्थीा7 पीनिp को 20 रूपये निदया और उसका लिंलB चूसने क े लिलए कहा। अपीलार्थी- सोनू क ु शवाहा ने अपना लिंलB पीनिp क े मुँह में ाल निदया।इसक े बाद, पीनिp उस 20 रू. क े सार्थी घर आया।इस पर, भिशकाय क ा7 क े भ ीजे सं ोष ने पीनिp से पूछा निक उसे 20 रू. कहाँ से निमला, निzर पीनिp ने पूरी घटना ब ाई जो उसक े सार्थी हुई र्थीी। अपीलार्थी- ने पीनिp को घटना क े बारे में निकसी को न ब ाने की मकी भी दी।" प्रस् र 16 में, उच्च न्यायालय ने अभिभयोजन पक्ष द्वारा प्रस् ु साक्ष्य क े आ ार पर निनष्कष[7] दज[7] निकए हैं। प्रस् र 16 का प्रासंनिBक भाB इस प्रकार हैः "16. मामले क े जिसद्ध थ्य यह हैं निक अपीलार्थी- ने लBभB 10 वष[7] की आयु क े पीनिp क े मुंह में अपना लिंलB ाल निदया और उसमें वीय[7] छोp निदया........." प्रत्यर्थी- द्वारा इस निनष्कष[7] पर निवरो नहीं निकया Bया है क्योंनिक उसने उच्च न्यायालय क े आदेश को चुनौ ी नहीं दी र्थीी। उक्त निनष्कष[7] को दज[7] करने क े बाद, उच्च न्यायालय ने निनष्कष[7] निनकाला निक प्रत्यर्थी- द्वारा निकया Bया क ृ त्य प्रवेशक लैंनिBक हमले का र्थीा जो पॉक्सो अति निनयम की ारा 4 क े ह दं नीय र्थीा। क

5. अपीलार्थी--उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता ने पॉक्सो अति निनयम की ारा 3 क े खं (a) ) क े ह 'प्रवेशन लैंनिBक हमले' की परिरभाषा की ओर हमारा ध्यान आकर्षिष निकया है। निवद्वान अति वक्ता ने यह भी ब ाया निक ारा 5 क े खं (m) ) क े ह, जो कोई भी बारह साल से कम उम्र क े बच्चे पर प्रवेशन लैंनिBक हमला कर ा है, वह Bंभीर प्रवेशन लैंनिBक हमले का दोषी है। इसलिलए, वह कहेंBे निक उच्च न्यायालय ने यह अभिभनिन ा7रिर करक े एक त्रुनिट की है निक ारा 6, जो Bंभीर प्रवेशन लैंनिBक हमले पर लाBू हो ी है, लाBू नहीं र्थीी।

6. प्रत्यर्थी--अभिभयुक्त की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता ने कहा निकया निक प्रत्यर्थी- पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा संशोति सा साल की सजा काट चुका है।उन्होंने कहा निकया निक अब प्रत्यर्थी- पूरी रह से सु र Bया है।उन्होंने यह भी कहा निक प्रत्यर्थी- जीवन में आBे बढ़ Bया है और वास् व में, हाल ही में उसने शादी की है। इसलिलए, वह कहेंBे निक इस स् र पर पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 को लाBू करना और प्रत्यर्थी- को आBे की सजा भुB ने क े लिलए जेल भेजना अन्यायपूर्ण[7] होBा। हमारा दृनि…कोर्ण

7. उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप निनर्ण7य क े प्रस् र 16 में दज[7] निनष्कष[7] की सत्य ा क े बारे में कोई निववाद नहीं है, जिजसे हमने ऊपर उद्धृ निकया है। इस संदभ[7] में, पॉक्सो अति निनयम की ारा 3 में शानिमल 'प्रवेशन लैंनिBक हमले' की परिरभाषा पर ध्यान देना आवश्यक है। ारा 3 का खं (a) ) इस प्रकार हैः "3. प्रवेशन लैंनिBक हमला।कोई व्यनिक्त, “प्रवेशन लैंनिBक हमला” कर ा है, यह कहा जा ा है, यनिद वह – (क) अपना लिंलB, निकसी भी सीमा क निकसी बालक की योनिन, मुंह, मूत्रमाB[7] या Bुदा में प्रवेश कर ा है या बालक से उसक े सार्थी या निकसी अन्य व्यनिक्त क े सार्थी ऐसा करवा ा है; या (ख)........................................ (B)........................................ (घ)........................................ "

8. पॉक्सो अति निनयम की ारा 2 (क) में प्राव ान है निक 'Bुरू र प्रवेशन लैंनिBक हमले' का वही अर्थी7 है जो ारा 5 में निदया Bया है।इसलिलए, हम ारा 5 पर आ े हैं, जो 'Bुरू र प्रवेशन लैंनिBक हमले' को परिरभानिष कर ी है। ारा 5 का खं ( ) इस प्रकार हैः "5. Bुरू र प्रवेशन लैंनिBक हमला- (क).......................................... (ख).......................................... (B).......................................... (घ).......................................... (ङ).......................................... (च).......................................... (छ).......................................... (ज).......................................... (झ).......................................... (ञ).......................................... (ट).......................................... (T).......................................... ( ) जो कोई, बारह वष[7] से कम आयु क े निकसी बालक पर प्रवेशन लैंनिBक हमला कर ा है; या (ढ).......................................... (र्ण).......................................... ( ).......................................... (र्थी).......................................... (द).......................................... ( ).......................................... (न).......................................... (प).......................................…, वह Bुरु र प्रवेशन लैंनिBक हमला कर ा है, यह कहा जा ा है।”

9. आक्षेनिप निनर्ण7य क े प्रस् र 16 में दज[7] निनष्कष[7] को ध्यान में रख े हुए, इस मामले में स्प… रूप से प्रत्यर्थी- ने Bंभीर प्रवेशन लैंनिBक हमले का अपरा निकया है क्योंनिक उसने बारह वष[7] से कम उम्र क े बच्चे पर प्रवेशन लैंनिBक हमला निकया है। इस मामले में ारा 5 का खं ( ) प्रस् ु निकया Bया है।

10. जैसा निक 16 अBस् 2019 को इसक े प्रति स्र्थीापन से पहले लाBू र्थीा, ारा 6 इस प्रकार है- "6. प्रवेशन लैंनिBक हमले क े लिलए सजा।- जो कोई भी प्रवेशन लैंनिBक हमले का क ृ त्य कर ा है, उसे एक ऐसी अवति क े लिलए कTोर कारावास से दंति निकया जाएBा जो दस साल से कम नहीं होBी, लेनिकन जो आजीवन कारावास क बढ़ सक ी है और जुमा7ने क े लिलए भी उत्तरदायी होBी। " अपरा क े घनिट होने की ति भिर्थी पर, प्रवेशन लैंनिBक हमले क े अपरा क े लिलए दस साल का कTोर कारावास निन ा7रिर न्यून म सजा र्थीी। निदनांक 16 अBस् 2019 से न्यून म सजा को बढ़ाकर बीस साल कर निदया Bया है।हालाँनिक, संशोति प्राव ान इस मामले पर लाBू नहीं होBा क्योंनिक यह घटना 16 अBस् 2019 से पहले हुई है।

11. आश्चय7जनक रूप से, उच्च न्यायालय ने कहा है निक ारा 5 लाBू नहीं र्थीी, और प्रत्यर्थी- द्वारा निकया Bया अपरा प्रवेशक लैंनिBक हमले क े कम अपरा की श्रेर्णी में आ ा है, जो पॉक्सो अति निनयम की ारा 4 क े ह दं नीय है। इस प्रकार, उच्च न्यायालय ने यह अभिभनिन ा7रिर करक े एक स्प… त्रुनिट की निक प्रत्यर्थी- द्वारा निकया Bया क ृ त्य प्रवेशक लैंनिBक हमला नहीं र्थीा।वास् व में, निवशेष न्यायालय ने प्रत्यर्थी- को ारा 6 क े ह दंति करने और उसे दस साल क े लिलए कTोर कारावास और 1,000/- रू. क े जुमा7ने की सजा देने में सही र्थीा।

12. पॉक्सो अति निनयम निवभिभन्न प्रकार क े बाल दुव्य7वहार क े अपरा ों क े लिलए अति क कTोर दं देने से दंति करने क े लिलए बनाया Bया र्थीा और यही कारर्ण है निक बच्चों पर लैंनिBक हमलों की निवभिभन्न श्रेभिर्णयों क े लिलए पॉक्सो अति निनयम की ारा 4, 6, 8 और 10 में न्यून म दं निन ा7रिर निकए Bए हैं।इसलिलए सरल भाषा में, ारा 6 निनचली अदाल क े लिलए कोई निववेकाति कार नहीं छोp ी है और निनचली अदाल द्वारा दी Bई न्यून म सजा को लाBू करने क े अलावा कोई निवकल्प नहीं है।जब कोई दं ात्मक प्राव ान का वाक्यांश "इससे कम नहीं होBा..." का उपयोB कर ा है, ो अदाल ें इस ारा का उल्लंघन नहीं कर सक ीं और कम सजा नहीं दे सक ीं।अदाल ें ऐसा करने में ब क असमर्थी7 हैं जब क निक अदाल को कम सजा देने में सक्षम करने वाला कोई निवभिश… वै ानिनक प्राव ान न हो। हालाँनिक, हमें पॉक्सो अति निनयम में ऐसा कोई प्राव ान नहीं निमल ा है। इसलिलए, इस थ्य क े बावजूद निक हो सक ा है निक प्रत्यर्थी- उच्च न्यायालय द्वारा संशोति सजा भुB ने क े बाद जीवन में आBे बढ़ Bया हो, उसक े प्रति कोई उदार ा निदखाने का कोई सवाल ही नहीं है।इस थ्य क े अलावा निक कानून न्यून म सजा का प्राव ान कर ा है, प्रत्यर्थी- द्वारा निकया Bया अपरा बहु ही वीभत्स है जिजसमें बहु कTोर सजा की आवश्यक ा हो ी है। पीनिp बच्चे क े निदमाB पर अनिप्रय क ृ त्य का प्रभाव जीवन भर रहेBा।इसका असर पीनिp क े स्वस्र्थी निवकास पर प्रति क ू ल प्रभाव पpना य है।इस बा पर कोई निववाद नहीं है निक घटना क े समय पीनिp की उम्र बारह वष[7] से कम र्थीी।इसलिलए, हमारे पास उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप निनर्ण7य को रद्द करने और निवचारर्ण न्यायालय क े निनर्ण7य को बहाल करने क े अलावा कोई निवकल्प नहीं है।

13. दनुसार, अपील की अनुमति दी जा ी है। आपराति क अपील संख्या 5415/2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप निनर्ण7य और आदेश 18 नवंबर 2021 निदनांनिक को अपास् कर निदया Bया है और निवशेष सत्र निवचारर्ण संख्या 134/2016 में निवद्वान 8 वें अपर सत्र न्याया ीश, निवशेष न्याया ीश पॉक्सो अति निनयम, झाँसी द्वारा पारिर निनर्ण7य एवं आदेश निदनांक 24 अBस् 2018 को बहाल निकया जा ा है। दनुसार, उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर दाण्डि क अपीलीय संख्या 5415/2018 खारिरज की जा ी है।प्रत्यर्थी- को पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 क े लिलए दस साल क े कTोर कारावास भुB ना होBा और 5,000/- रू. का जुमा7ना देना होBा।हम प्रति वादी को अति क म एक महीने की अवति क े भी र पॉक्सो अति निनयम, झाँसी क े ह निवद्वान निवशेष न्याया ीश क े समक्ष आत्मसमप7र्ण करने का निनदkश दे े हैं। उसक े आत्मसमप7र्ण पर, निवशेष अदाल प्रति वादी को पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 क े लिलए शेष सजा भुB ने क े लिलए जेल भेज देBी। प्रत्यर्थी- क े आज से एक महीने क े भी र आत्मसमप7र्ण न करने पर, निवशेष अदाल ुरं प्रत्यर्थी- क े लिखलाz Bैर-जमान ी वारंट जारी करेBी और यह सुनिनतिश्च करेBी निक प्रत्यर्थी- पॉक्सो अति निनयम की ारा 6 क े ह दं नीय अपरा क े लिलए शेष सजा भुB ने क े लिलए जेल में है। इस निनर्ण7य की एक प्रति ुरं निवशेष न्यायालय को भेज दी जाएBी। …………………………….. (न्यायमूर्ति अभय एस. ओका) …………………………….. (न्यायमूर्ति राजेश बिंबदल) नई निदल्ली;